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‘ये आपकी धरोहर’: जब फिजिक्स के प्रोफेसर राजनाथ सिंह को INMAS डायरेक्टर ने 2-DG का दिया श्रेय

कोविड संक्रमण से जंग जीतने की दिशा में DRDO की लैब इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूक्लियर मेडिसिन एण्ड एलाइड साइंस (INMAS) ने 17 मई को 2 -deoxy-D-glucose (2-DG) नाम से तैयार दवाई की पहली खेप लॉन्च की। इस दवाई का पहला बैच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और केंद्र स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन की मौजूदगी में एक कार्यक्रम में लॉन्च हुआ।

इस दौरान इनमास के निदेशक डॉ. एके मिश्रा ने कार्यक्रम में केंद्रीय रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह का अलग ढंग से आभार व्यक्त किया। उन्होंने संत कबीरदास का दोहा पढ़ते हुए कहा, “गुरु गोविन्द दोऊ खड़े, काके लागूं पांय। बलिहारी गुरु आपने गोविन्द दियो बताय।” 

इस दोहे का अर्थ है- गुरु और गोबिंद (भगवान) एक साथ खड़े हों तो किसे पहले प्रणाम करना चाहिए– गुरु को अथवा गोबिन्द को? ऐसी स्थिति में गुरु के श्रीचरणों में शीश झुकाना उत्तम है क्योंकि उनके कृपा रूपी प्रसाद से गोविन्द का दर्शन करने का सौभाग्य मिलता है।

डॉ. मिश्रा ने कार्यक्रम में उन दिनों को याद किया जब साल 1988 में मिर्जापुर के केबी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में राजनाथ सिंह उनके भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर हुआ करते थे। उन्होंने राजनाथ सिंह को सम्मान देते हुए कहा, “ये आपकी ही धरोहर है जो आपके सामने प्रस्तुत है।”

डॉ. मिश्रा ने इस दवाई को उनके संस्थान का एक मूल्यवान वैज्ञानिक काम बताया। उन्होंने कहा कि ये बताते हुए वे सम्मानित महसूस कर रहे हैं कि संस्थान अब दवा के रूप में एक मूल्यवान वैज्ञानिक कार्य प्रस्तुत कर रहा है, वो भी उसी शिक्षक के हाथों से, जिसने कभी उनकी (डॉ. एके मिश्रा की) वैज्ञानिक शिक्षा की नींव रखी।

बता दें कि वर्तमान में देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गोरखपुर यूनिवर्सिटी से प्रथम श्रेणी में फिजिक्स की स्नातकोत्तर की डिग्री ली हुई है। इसके बाद वह केबी पोस्ट ग्रेजुएट कॉलेज में भौतिक विज्ञान के प्रोफेसर लगे। बाद में उत्तर प्रदेश में पहली बार आई भाजपा सरकार में उन्होंने शिक्षा मंत्री का पद सँभाला। इतिहास की पाठ्यपुस्तकों के पुर्नलेखन का उन्होंने आदेश दिया था। साथ ही वैदिक गणित को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया था।

2-DG दवाई का उद्घाटन, राजनाथ सिंह ने कहा- आशा की नई किरण

सोमवार को कोविड-19 की दवा 2-डीजी की पहली खेप जारी करने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कहा था कि यह दवा कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में ‘आशा की नई किरण’ लेकर आई है। वह बोले, “डीआरडीओ और डीआरएल द्वारा विकसित, 2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) कोविड -19 के खिलाफ प्रभावी साबित होगा। यह हमारे देश के वैज्ञानिक कौशल का एक बेहतरीन उदाहरण है। मैं अपनी ओर से डीआरडीओ और इस दवा के अनुसंधान एवं विकास में शामिल सभी संस्थानों को बधाई देता हूँ।”

क्या है 2-डीजी?

2-डीऑक्सी-डी-ग्लूकोज (2-डीजी) कोविड संक्रमितों की ऑक्सीजन पर निर्भरता कम करता है। DRDO के अधिकारियों के अनुसार ये दवाई ग्लूकोज की तरह बॉडी में जाती है और संक्रमित सेल तक पहुँचकर प्रोटीन के ऊर्जा उत्पादन को नष्ट कर वायरस को फैलने से रोकती है। ये दवाई फेफड़ों में फैले संक्रमण पर भी काम करती है, जिससे मरीज की ऑक्सीजन पर निर्भरता कम हो सके। जानकारी के मुताबिक इस दवाई की पहली और दूसरी खेब सीमित तौर पर इस्तेमाल होगी। इसे पहले एम्स, सैन्य अस्पतालों और डीआरडीओ के हॉस्पिटल में प्रयोग में लाया जाएगा। जून के बाद ये हर जगह उपलब्ध होगी।

यूनिफॉर्म सिविल कोड और जनसंख्या नियंत्रण कानून वक्त की जरूरत, क्योंकि उनका कोई विशेषाधिकार नहीं

बीते सप्ताह दो-तीन घटनाएँ बहुत महत्वपूर्ण हुईं। लेकिन दुर्भाग्य से भारत की तथाकथित मेनस्ट्रीम मीडिया में उसका कोई जिक्र या संज्ञान तक नहीं लिया गया। पहले तो मद्रास हाई कोर्ट के एक फैसले की बात। यह मुकदमा भी बहुत खौफनाक है, अगर हम इसके परिणामों पर विचार करें। तमिलनाडु के पेरुंबलूर में एक गाँव है कलाथुर। भारत के कई अन्य हिस्सों की तरह ही पहले यह गाँव भी हिंदू बहुल था और अब वहाँ मुहम्मदवादियों की संख्या अधिक हो गई है, वे बहुमत में हैं।

कश्मीर हो या बंगाल या फिर देश के किसी भी हिस्से का गाँव या शहर, एक बार बहुमत में आते ही मुहम्मदवादी वहाँ शरिया लागू करना चाहते हैं। उनकी मजहबी किताब में मूर्तिपूजा सबसे बड़ा शिर्क है, गुनाहे-अज़ीम है, तो उन्होंने कलाथुर के हिंदुओं के तीन मौजूदा मंदिरों और वहाँ के त्योहारों पर रोक लगानी चाही। वजह वही, जो तैमूर से बाबर और अकबर से औरंगजेब तक चली आ रही है- हिंदुओं का कन्वर्जन और निजाम-ए-मुस्तफा की शुरुआत।

उस गाँव के बहुसंख्यक मुहम्मदवादियों ने हिंदुओं के तीन दिनों तक चलनेवाले त्योहार पर इस आधार पर पाबंदी लगानी चाही कि उससे उनके ‘जज्बात’ घायल होते हैं। हमेशा की तरह हमारे प्रशासन ने (जो भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल की करामात से पर्याप्त हिंदू-विरोधी है) ने कुछ छोटी-मोटी पाबंदियाँ उत्सव पर लगा दीं। इससे मुहम्मदवादियों को और बल मिला और ‘ये दिल माँगे मोर’ की तर्ज पर उन्हें इस पर पूरी तरह से रोक चाहिए था।

मामला मद्रास हाईकोर्ट पहुँचा। माननीय मद्रास उच्च न्यायालय का बहुत-बहुत धन्यवाद कि उन्होंने लानत-मलामत करते हुए इस माँग को सिरे से खारिज कर दिया। उच्च न्यायालय ने कहा, “प्रत्येक समुदाय को दूसरों की भावनाओं का अपमान किए बिना धार्मिक जुलूस निकालने का मौलिक अधिकार है। क्षेत्र विशेष का बहुसंख्यक समूह दूसरे धर्म के लोगों को धार्मिक जुलूस निकालने या त्योहार मनाने से नहीं रोक सकता।”

अब दूसरी घटना पर चलते हैं। इजरायल ने हमास के आतंकी ठिकानों पर हमला किया है। ये घटना हजारों मील दूर हो रही है, लेकिन सबसे अधिक दर्द भारत के मुहम्मदवादियों को हो रहा है। देश भर में, सोशल मीडिया पर तो जो अरण्य-रोदन ये कर रहे हैं, सो तो ठीक ही है, बाकी जो लोग इजरायल के पक्ष में कुछ लिख रहे हैं, उनकी पिटाई भी कर रहे हैं। यूएई से एक ऐसा ही वीडियो वायरल भी हुआ था। अपने देश में भी जहाँ कहीं मुहम्मदवादी बहुसंख्या में हैं, वहाँ किसी को हिम्मत नहीं कि इजरायल के पक्ष में कुछ कह सकें। हमास के आतंकी भले ही कितने भी निर्दोषों की जान ले लें, बच्चों और महिलाओं के बीच छिप कर रॉकेट दागते रहें, वे इनके लिए गाजी थे और रहेंगे।

तीसरी और अंतिम घटना के तौर पर बंगाल में हिंदुओं के कत्ल, उत्पीड़न की घटनाओं को ले सकते हैं। राजनीति अपना काम करेगी, यह वर्ण्य विषय भी नहीं है। लेकिन इन तीन घटनाओं के सूत्र लेकर आगे के सबक, आगे की शिक्षा पर बात की जानी जरूरी है।

आतंकी हमास के पक्ष में खड़ा होना, बंगाल के हिंदुओं के विस्थापन-पलायन और मद्रास हाईकोर्ट में दाखिल याचिका को जोड़ने वाला सूत्र कौन सा है? वह कौन सी एक लड़ी है, एक धागा है, जो इन तीनों घटनाओं को पिरोता है? जाहिर तौर पर, वह मुहम्मदवाद है। इस देश का दुर्भाग्य रहा है कि जिस मजहब की वजह से इस देश के दो टुकड़े हो चुके हैं, बाकायदा मजहब के नाम पर एक टुकड़ा काटकर मुहम्मदवादियों ने पहले ही अलग ले लिया है, उसके बावजूद अब भी इस देश में मुहम्मदवाद पर, उसके तरीकों पर चर्चा नहीं होती, सब कुछ कालीन के नीचे बुहारा जाता है।

मुहम्मदवाद का सीधा सा लक्ष्य है- निजाम-ए-मुस्तफा यानी पूरी दुनिया में मुहम्मदवाद की स्थापना। इसके लिए वह उम्माह की सोचता है, ध्यान करता है, वह इसके लिए जरूरी टूल्स भी अपनाता है। जहाँ वह कम संख्या में हैं, विक्टिम हैं। बहुसंख्या में आते ही वे शरिया-शरिया चिल्लाते हैं। तलवार के जोर से, लालच और भय- सब मुहम्मदवाद के टूल हैं। यही वजह है कि तुर्की के लिए इस देश में आंदोलन हुआ, जबकि खुद तुर्की ने खिलाफत को खत्म किया। यहाँ अगर बाबरी ढाँचा ढहाया गया तो पाकिस्तान और बांग्लादेश में सैकड़ों मंदिर तबाह हुए। हिंदुओं की जान और संपत्ति गई। भारत में जो दंगे हुए, वह छोड़ ही दीजिए।

बीते साल सीएए को बहाना बनाकर (और एक ऐसे काल्पनिक एनआरसी को, जिसका कहीं अस्तित्व ही नहीं) दिल्ली में जिस तरह हिंदू-विरोधी दंगे हुए, वह हम सभी ने देखा है। उसी तरह, हमास के आतंकियों के खुले समर्थन में आने वाले यह नहीं बताते कि हमास ने जितने रॉकेट दागे हैं, वे इजरायल के नागरिकों पर और मुहम्मदवादियों के माहे-मुकद्दस में दागे गए।

भारत बहुत वर्षों से इस नासूर से ग्रस्त है। इससे निबटने का एक ही उपाय है कि मुहम्मदवादियों को यह समझा दिया जाए कि उनका कोई विशेषाधिकार नहीं है। यूनिफॉर्म सिविल कोड को जल्द से जल्द लागू किया जाए, साथ ही जनसंख्या नियंत्रण कानून भी। इसके अलावा हरेक स्तर पर मुहम्मदवादियों को यह बताने की जरूरत है कि इस देश का शासन संविधान से चलता है और चलता रहेगा, किसी शरिया से नहीं।

‘ईद खुशियों का त्यौहार, कुंभ कोरोना का सुपर स्प्रेडर’: कॉन्ग्रेस का टूलकिट, मोदी और हिंदुओं को बदनाम करने का खाका

सोशल मीडिया पर एक टूलकिट धड़ल्ले से वायरल हो रहा है, जिसके बारे में भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि ये कॉन्ग्रेस पार्टी का है। उक्त दस्तावेज पर कॉन्ग्रेस का चुनाव चिह्न हाथ छाप भी अंकित है और बताया जा रहा है कि पार्टी ने अपने नेताओं को दी गई निर्देशावली को दस्तावेज का शक्ल दिया था, जो अचानक से लीक हो गया। भाजपा प्रवक्ता संबित पात्रा ने इसे ट्विटर पर शेयर करते हुए तंज कसा कि कॉन्ग्रेस इस तरीके से आपदा में लोगों की मदद कर रही है।

इस ‘टूलकिट’ में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार को कोरोना के प्रबंधन में असफल रहने का दावा करते हुए इसके पीछे कुम्भ मेला, चुनावी रैलियों और सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को जिम्मेदार ठहराया है। नेताओं को बताया गया है कि कैसे देश के विभिन्न कोने में मोदी सरकार को घेरना है। साथ ही हरिद्वार में लगे कुम्भ को कोरोना का ‘सुपर स्प्रेडर’ करार देते हुए लिखा गया है कि भाजपा अपने फायदे के लिए हिन्दू धर्म का राजनीतिकरण करती है।

इस ‘टूलकिट’ की मानें तो कॉन्ग्रेस ने अपने नेताओं को निर्देश दिया है कि वो कुम्भ को बार-बार ‘सुपर स्प्रेडर कुम्भ’ कह कर सम्बोधित करें। लिखा है कि इससे लोगों को एहसास होगा कि भाजपा की ‘हिन्दू नीतियाँ’ ही सभी समस्याओं के लिए जिम्मेदार हैं। साथ ही लिखा है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया पहले से ही ऐसा कर रहा है। इस नैरेटिव को आगे बढ़ाने के लिए अंतरराष्ट्रीय मीडिया और ‘दोस्त पत्रकारों’ के साथ साँठगाँठ की बात भी की गई है।

‘कॉन्ग्रेस के टूलकिट’ के अनुसार, भाजपा कुम्भ पर लगे आरोपों का जवाब देने के लिए ईद का नाम ले सकती है लेकिन हमें दोनों त्योहारों की तुलना वाले ‘जाल’ में फँसने से बचना है। स्पष्ट निर्देश दिया गया है कि ईद को लेकर एकदम से चुप्पी साध ली जाए और जहाँ भी ईद को लेकर बात हो उस पोस्ट या ट्वीट से खुद को अलग किया जाए। साथ ही समाचार एजेंसी ‘रायटर्स’ और BBC जैसे मीडिया संस्थानों के लेख भी शेयर किए गए हैं।

संबित पात्रा ने जिसे कॉन्ग्रेस का ‘टूलकिट’ बताया, उसमें लिखा है, “हमारे कार्यकर्ताओं और समर्थकों को इसके लिए प्रोत्साहित किया जाए कि वो सावधानी से लगातार तस्वीरें वगैरह शेयर कर के सोशल मीडिया के माध्यम से ये बताएँ कि जहाँ कुम्भ एक राजनीतिक शक्ति प्रदर्शन है, वहीं ईद में जुटने वाली भीड़ विभिन्न परिवारों और समुदायों का एक सुखद मिलान समारोह है।” साथ ही ऐसा प्रदर्शित करने को भी कहा गया है जैसे कॉन्ग्रेस के लोग इस आपदा में पीड़ितों की लगातार मदद कर रहे हों।

इसके लिए चरणबद्ध तरीके से बताया गया है कि लोगों की ‘मदद’ कैसे करनी है। पहले चरण में एक सोशल मीडिया टीम बना कर मदद की गुहार लगा रहे लोगों को मैसेज करना है। दूसरे चरण में उनसे कहना है कि वो फिर से वैसा ही पोस्ट करें लेकिन अबकी यूथ कॉन्ग्रेस और इसके नेताओं को टैग कर के। तीसरे चरण में ‘दोस्त पत्रकारों’ की मदद से उस पोस्ट को आगे बढ़ाना है। अगले चरण में जो बात कही गई है, वो चौंकाने वाली है।

इस ‘टूलकिट’ में लोगों की ‘मदद’ के लिए कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेताओं को निर्देश दिया गया है कि वो आसपास के अस्पतालों में कुछ बेड्स व अन्य सुविधाएँ पहले से ही ब्लॉक कर के रखें, जिन्हें अपने नेताओं के निवेदन पर ही मुक्त किया जाए। पाँचवें पॉइंट में निर्देश दिया गया है कि IYC के हैंडल को टैग न करने वाले पीड़ितों को कोई प्रतिक्रिया न दी जाए। पत्रकारों, प्रभावशाली लोगों और मीडिया के लोगों की ‘मदद’ को प्राथमिकता देने को कहा गया है।

इस ‘टूलकिट’ में माना गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अप्र्रूवल रेटिंग उच्चस्तर की है और आपदा व ‘कुप्रबंधन’ के बावजूद इसे कोई नुकसान नहीं पहुँचा है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने कहा है कि यही वो मौका है, जब उनके व्यक्तित्व व छवि को धूमिल किया जाए। ऐसे हैंडल्स बनाने को खा गया है, जो देखने में मोदी समर्थक लगे। फिर उन हैंडलों से सरकार की आलोचना करनी है। विदेशी मीडिया में पीएम मोदी के खिलाफ लेखों को जम कर शेयर करने को कहा गया है।

‘टूलकिट’ में बताया गया है कि जिस तरह विदेशी मीडिया और उनके पत्रकार लगातार जलती चिताओं और लाशों की तस्वीरें शेयर कर रहे हैं, कुछ वैसा ही जोर-शोर से करना है। साथ ही ऐसे ‘नाटकीय’ तस्वीरें स्थानीय पत्रकारों को उपलब्ध कराने को निर्देशित किया गया है। साथ ही भारत को बदनाम करने के लिए कोरोना के ‘इंडियन स्ट्रेन’ शब्दावली का बार-बार प्रयोग करने का निर्देश दिया गया है।

इस ‘टूलकिट’ में ‘बुद्धिजीवियों और विचारकों’ के माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए अपशब्दों और आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग कराने को खा गया है, क्योंकि जनता में उनकी ‘स्वीकार्यता’ है। भाजपा नेताओं को बदनाम करने हेतु अमित शाह के लिए ‘मिसिंग’, एस जयशंकर के लिए ‘क्वारनटाइण्ड’, राजनाथ सिंह के लिए ‘साइडलाइंड’ और निर्मला सीतारमण के लिए ‘संवेदनहीन’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल करने को कहा गया है।

साथ ही ऐसी पत्रिकाओं की कवर स्टोरीज को जम कर शेयर करने की सलाह दी गई है, जिसमें भाजपा नेताओं या सरकार को ‘मिसिंग’ लिखा गया हो। साथ ही पीएम मोदी को लगातार पत्र भी लिखने को बोला गया है। ‘पीएम केयर्स फंड’ पर सवाल खड़े करने के लिए सिविल सर्वेंट्स से आवाज़ उठवाने की बात की गई है। इसमें ये भी स्वीकार किया गया है कि छत्तीसगढ़, पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में ‘पीएम केयर्स फंड’ से भेजे गए वेंटिलेटर्स बिना प्रयोग किए पड़े हुए हैं।

इस खबर को काटने के लिए झूठ बोलने की सलाह दी गई है। कॉन्ग्रेस नेताओं को कहना है कि ये सारे वेंटिलेटर्स खराब थे। ‘पीएम केयर्स’ को बदनाम करने के लिए RTI एक्टिविस्ट्स को जुटा कर लगातार सवाल पूछने को उकसाने के लिए भी निर्देश दिया गया है। झूठा नैरेटिव बनाने की बात कही गई है कि गुजरात को मोदी सरकार ‘स्पेशल ट्रीटमेंट’ दे रही है। अन्य राज्यों के नागरिकों में क्रोध उत्पन्न करने के लिए बार-बार ये दिखाने को कहा गया है कि गुजरात के अलावा बाकी राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है।

साथ ही ‘सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट’ को कैसे बदनाम करना है, ये भी बताया गया है। सरकार पहले ही कह चुकी है कि इसका बजट देश के स्वास्थ्य बजट से कई गुना कम है और ये कई साल का है। ‘टूलकिट’ में सलाह दी गई है कि लोगों में ये फैलाना है कि इस रकम से 2 करोड़ परिवारों को ‘न्याय योजना’ के तहत 6000 रुपए मिल जाते। दुष्प्रचार करने की सलाह दी गई है कि ये जनता के लिए नहीं, मोदी के लिए उनका व्यव्तिगत ‘वैनिटी प्रोजेक्ट’ है। दिल्ली हाईकोर्ट में केस करने की बात भी की गई है।

हालाँकि, कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस टूलकिट को फेक बताया है और इससे कोई सम्बन्ध होने से इनकार किया है। AICC रिसर्च डिपार्टमेंट के अध्यक्ष राजीव गौड़ा ने कहा कि भाजपा जिस टूलकिट को फैला रही है और उसका कॉन्ग्रेस से सम्बन्ध बता रही है, इस ‘ठगी’ के खिलाफ कॉन्ग्रेस पार्टी केस दर्ज करेगी। उन्होंने कहा कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा और प्रवक्ता संबित स्वराज के खिलाफ केस दर्ज कराया जाएगा।

नोट: ऑपइंडिया फ़िलहाल ये दावा नहीं करता है कि ये टूलकिट कॉन्ग्रेस पार्टी ने तैयार किया है। भाजपा नेताओं और सोशल मीडिया पर ये इसी दावे के साथ शेयर किए जा रहे हैं।

उत्तर प्रदेश: महिलाओं-बच्चों के लिए हर जिले में एंबुलेंस रिजर्व, तीसरी लहर से निपटने के लिए योगी सरकार ने कसी कमर

कोरोना संक्रमण की दूसरी लहर का असर कम होने के साथ ही उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने तीसरी लहर से निपटने की तैयारियाँ शुरू कर दी है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि तीसरी लहर में बच्चे और महिलाएँ ज्यादा संक्रमित हो सकते हैं। लिहाजा राज्य सरकार ने पहले ही हर जिले में महिलाओं और बच्चों के लिए एंबुलेंस के पुख्ता इंतजाम कर दिए हैं।

लाइव हिंदुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर प्रदेश सरकार ने ऐसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए 2200 एंबुलेंस तैयार किए हैं। ये एंबुलेंस महिलाओं और बच्चों के लिए रिजर्व होंगी। सरकार की प्राथमिकता ग्रामीण क्षेत्र और राज्य में टेस्टिंग बढ़ाना है। इसके अलावा दूसरी लहर की रोकथाम के लिए योगी सरकार ने 24 मई तक लॉकडाउन बढ़ाने का ऐलान भी किया है।

सुधार की दिशा में उठाए कदम

शुरुआत में कोरोना की दूसरी लहर के प्रकोप से उत्तर प्रदेश भी अछूता नहीं था। आए दिन 30 हजार के लगभग केस आ रहे थे। लेकिन योगी सरकार ने राज्य की स्थिति को सुधारने में कोई कसर नहीं छोड़ी। नतीजन 1 मई को संक्रमण दर 11% तक आ गई, जबकि 30 अप्रैल तक ये 25 % के आसपास थी। इसी तारीख को राज्य में सबसे ज्यादा कोरोना केस (3,10,783) सामने आए थे।

राज्य में संक्रमितों को लेकर ऐसा प्रत्यक्ष बदलाव योगी सरकार की प्रतिबद्धता के कारण देखने को मिला। उन्होंने स्थिति सुधार के लिए Team-09 का गठन किया। इस टीम ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देशों पर गाँव-गाँव जाकर संक्रमण को रोकने के लिए सक्रियता से काम किया।

ग्रामीण इलाकों में टेस्टिंग बढ़ाई गई। लक्षण वाले लोगों को चेक करके मेडिकल किट दी गई। वैक्सीनेशन का काम तेजी से हुआ। इसके अतिरिक्त हर ग्राम पंचायत में निगरानी समिति बनाई गई, जिन्होंने स्वच्छता को बढ़ावा दिया। सफाई कर्मचारी नियुक्त किए गए ताकि गाँवों में लगातार सफाई, फॉगिंग आदि हो सके। 

इन प्रयासों के लिए WHO ने भी योगी सरकार को सराहा। अब योगी सरकार राज्य की स्थिति पहले से सुधरने पर तीसरी लहर से लड़ने के लिए पहले से खुद को तैयार कर रही है। इस दौरान सबसे ज्यादा ध्यान वैक्सीनेशन पर दिया जा रहा है। राज्य प्रशासन का कहना है कि 18 से 44 साल के लोगों के लिए टीकाकरण अभियान पहले 8 सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में चलाया गया। बाद में ये 11 डिविजनल हेडक्वार्टर में हुआ। अब 17 मई से इसकी शुरुआत 23 डिस्ट्रिक्ट हेडक्वार्टर में हुई है।

बता दें कि इस समय राज्य में 1,63,003 एक्टिव केस हैं। 16 मई तक 24 हजार से ज्यादा संक्रमित रिकवर हुए और 308 ने इस संक्रमण के कारण अपनी जान गँवाई। धीरे-धीरे पॉजिटिव अनुपात गिर रहा है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बताया था कि राज्य तीसरी लहर से लड़ने के लिए खुद को तैयार कर रहा है। पिछले 15 दिनों के अंदर 1.45 लाख एक्टिव केस कम हुए हैं। इसके अलावा अब राज्य में ढाई से तीन लाख टेस्ट हो सकते हैं।

मेरठ के जुड़वा: 24 साल पहले 3 मिनट के अंतर पर पैदा हुए, कोरोना से कुछ घंटों के अंतर पर हुई मौत

जोफ्रेड वर्गीज ग्रेगरी और राल्फ्रेड जॉर्ज ग्रेगरी भाई थे। वो भी जुड़वा। 23 अप्रैल 1997 को एक साथ पैदा हुए थे। जन्म में केवल तीन मिनट का अंतर था। पूरी जिंदगी साथ बिताई। मौत कुछ घंटों के अंतराल पर हुई। मेरठ के इन जुड़वा भाइयों की जान कोरोना संक्रमण के कारण गई है।

24 अप्रैल को दोनों भाई बीमार पड़े थे। 10 मई को कोरोना संक्रमण की रिपोर्ट नेगेटिव आई। अचानक फिर तबीयत बिगड़ी और 13 तथा 14 मई को एक-एक कर मौत हो गई।

इनके पिता ग्रेगरी रेमंड राफेल के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है बीमार होने से पहले दोनों ने 23 अप्रैल को अपना 24वाँ जन्मदिन मनाया था। जन्म लेने के बाद दोनों ने हर काम साथ किया। सोना, खाना, खेलना और यहाँ तक कि पढ़ाई पूरी कर कंप्यूटर इंजीनियर बनना। हैदराबाद में नौकरी भी साथ-साथ की।

राफेल के अनुसार पहले जोफ्रेड की मौत हुई थी। इसकी सूचना जब उनकी माँ को मिली तो उनके मुँह से बरबस ही निकल गया कि अब राल्फ्रेड भी नहीं बचेगा। ऐसा ही हुआ अगले दिन उसकी भी मौत हो गई। राफेल के अनुसार, “दोनों कोरिया और फिर जर्मनी जाने की योजना बना रहे थे। पता नहीं भगवान ने हमें इस तरह सजा क्यों दी।” उन्होंने कहा, “डॉक्टर उन्हें कोविड वार्ड से सामान्य आईसीयू में शिफ्ट करने की सोच रहे थे। हालॉंकि मैनें अस्पताल से आग्रह किया था कि दो दिन और कोविड वार्ड में ही उनके स्वास्थ्य की निगरानी करें। अचानक 13 मई की शाम मेरी पत्नी के पास फोन आया था और हमारी दुनिया उजड़ गई।”

रिपोर्ट के अनुसार जोफ्रेड की मौत के बाद राल्फ्रेड ने अपनी माँ को फोन किया था। उसने बताया कि उसकी तबीयत ठीक हो रही। इसके बाद उसने जोफ्रेड के बारे में पूछा। घरवालों ने मौत की बात छिपाते हुए कहा कि उसे दिल्ली के अस्पताल में शिफ्ट किया जा रहा है। ग्रेगरी और उनकी पत्नी मेरठ के सेंट थॉमस स्कूल में शिक्षक हैं। मूल रूप से केरल का रहने वाला यह दंपती 90 के दशक में मेरठ आकर बस गया था।

DGP सरकार को बताए बिना छुट्टी पर, SC में मुंबई के पूर्व CP: इधर कोरोना और तूफान से महाराष्ट्र बेहाल

महाराष्ट्र की सत्ताधारी पार्टी शिवसेना राज्य के पुलिस महानिदेशक (DGP) संजय पांडे से खफा है। एक तरफ जहाँ राज्य कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर से बेहाल है, वहीं दूसरी तरफ तौकते तूफ़ान ने उसकी परेशानी बढ़ा दी है। इन सबके बीच DGP पांडे अपने गृह नगर चंडीगढ़ में छुटियाँ मना रहे हैं। यहाँ तक कि ये भी साफ़ नहीं है कि उन्होंने अपनी छुट्टियों के बारे में महाराष्ट्र सरकार को सूचित भी किया है या नहीं।

1986 बैच के पुलिस अधिकारी संजय पांडे पहले ही खुद को परमबीर सिंह के खिलाफ जाँच से अलग कर चुके हैं। ‘Times Now’ ने अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि शिवसेना उनसे खासी नाराज़ है। DGP पांडे ने इस खबर के सामने आने के बाद सफाई देते हुए कहा कि वो स्थिति पर नज़र रखे हुए हैं और जल्द ही मुंबई लौटेंगे। उन्होंने कहा कि वो अपने मातहत पुलिस अधिकारियों के साथ संपर्क में हैं।

राज्य में ये शायद पहली बार हो रहा है जब पक्ष और विपक्ष दोनों ही पुलिस के मुखिया की अनुपस्थिति पर सवाल उठा रहे हैं। राज्य में अब भी कोरोना के साढ़े 4 लाख सक्रिय मामले हैं और पिछले 1 दिन में 1000 लोगों की मौत हो चुकी है। ऊपर से तौकते तूफ़ान की वजह से मुंबई में तबाही मची है और 6 लोगों की मौत हो गई। भयंकर हवाओं और भारी बारिश के कारण हुई क्षति का खुद सीएम उद्धव ठाकरे ने आकलन किया और आवश्यक निर्देश दिए।

उधर मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने अपने खिलाफ चल रही विभागीय जाँच को रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है और आरोप लगाया है कि उन्हें झूठे मामलों में फँसाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि मामले की जाँच कर रहा अधिकारी उन्हें धमका रहा है कि अगर उन्होंने राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख के खिलाफ दर्ज शिकायत वापस नहीं लिया तो उन्हें झूठे मामलों में फँसाया जाएगा।

NCP नेता अनिल देशमुख पर विवादित पुलिस अधिकारी सचिन वाजे के जरिए राज्य के विभिन्न प्रतिष्ठानों से 100 करोड़ रुपए की वसूली के आरोप लगे थे, जिसके बाद उन्हें इस्तीफा देना पड़ा था। बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद इस मामले की जाँच अब CBI के हाथों में है। परमबीर सिंह ने CBI को जाँच मुंबई पुलिस के जाँच अधिकारी के साथ हुई फोन पर बातचीत के ट्रांसक्रिप्ट सौंपे हैं। उन्होंने इन्क्वायरी ऑफिसर पर धमकी देने का आरोप लगाया।

उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में दायर की गई याचिका में कहा है कि उन्हें महाराष्ट्र सरकार पर भरोसा नहीं है, इसीलिए उनके खिलाफ चल रहे सभी मामलों को राज्य से बाहर स्थानांतरित किया जाए और किसी स्वतंत्र एजेंसी को दी जाए। परमबीर सिंह फ़िलहाल महाराष्ट्र के DG (होमगार्ड) हैं। महाराष्ट्र पुलिस ने उनके खिलाफ भ्रष्टाचार का मामला दर्ज कर रखा है। मई 20 तक उनकी गिरफ़्तारी पर रोक लगी हुई है। उन्होंने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपने खिलाफ विभागीय जाँच और FIR, दोनों को चुनौती दी है।

ओलंपियन सुशील कुमार पर ₹1 लाख का इनाम, पहलवान की हत्या में तलाश रही दिल्ली पुलिस

दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में 23 साल के पहलवान सागर राणा की हत्या के मामले में ओलंपिक पदक विजेता सुशील कुमार की तलाश जारी है। दिल्ली पुलिस ने उन पर 1 लाख रुपए का इनाम घोषित किया है। पुलिस ने उनके पीए अजय कुमार की जानकारी देने वाले को भी 50 हजार रुपए देने का ऐलान किया है।

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक सागर की हत्या के बाद से फरार चल रहे पहलवान सुशील कुमार ने दिल्ली की अदालत में अग्रिम जमानत की याचिका दायर की। मामले पर सुनवाई आज (मई 18, 2021) होगी। दिल्ली की रोहिणी कोर्ट इस केस में सुशील कुमार और उनके साथियों के ख़िलाफ़ गैर जमानती वारंट जारी कर चुकी है।

कुछ रिपोर्ट्स ये भी बता रही हैं कि सुशील कुमार जल्द दिल्ली एनसीआर की किसी कोर्ट में आत्मसमर्पण करेंगे। उनकी तरफ से मॉडल टाउन थाने के पुलिसकर्मियों को व्हाट्सएप कॉल के जरिए यह सूचना दी गई है।

स्टेडियम में मारपीट के बाद हुई जूनियर चैंपियन की मौत

उल्लेखनीय है कि छत्रसाल स्टेडियम में 4 मई 2021 को जूनियर चैंपियनशिप विजेता सागर कुमार और उनके दो दोस्तों के साथ दूसरे पहलवानों ने मारपीट की थी। बाद में सागर की मौत हो गई। उनके साथियों ने बताया कि घटना के समय सुशील कुमार वहीं मौजूद थे।

इसके बाद मॉडल टाउन में इस बाबत एफआईआर की गई। रोहिणी के विशेषज्ञों ने सबूत भी जुटाए। लेकिन, जब दिल्ली पुलिस सुशील कुमार के घर पहुँची तो वे वहाँ से गायब थे। उसके बाद से ही उनकी तलाश जारी है। उनके ख़िलाफ़ पिछले हफ्ते लुकआउट नोटिस भी जारी हुआ था।

इससे पहले इस मामले में 24 साल के प्रिंस दलाल को गिरफ्तार किया गया था। वह हरियाणा के झज्जर का रहने वाला है। छत्रसाल स्टेडियम में हुई झड़प के दौरान फायरिंग भी हुई थी। दलाल को डबल बैरेल लोडेड बंदूक के साथ दबोचा गया था।

163 फुटबॉल मैदान के बराबर था हमास का सुरंग, इजरायल ने ध्वस्त किया: 820 आतंकी ठिकाने भी तबाह

इजरायल की सेना ने हमास के आतंकियों द्वारा किए जा रहे हमले के प्रत्युत्तर में और आक्रामक तरीके से पलटवार करना शुरू कर दिया है। इजरायली सेना ने एक 9.3 मील (14.96 किलोमीटर) लंबी सुरंग को ध्वस्त कर दिया, जिसका इस्तेमाल आतंकी गतिविधियों के लिए किया जा रहा था। इसके लिए फाइटर जेट्स का इस्तेमाल किया गया। इजरायल ने इसे ‘हमास का आतंकी मेट्रो टनल’ नाम दिया है।

‘इजरायल डिफेंस फोर्सेज (IDF)’ ने ट्विटर के माध्यम से जानकारी दी है कि इस सुरंग के क्षेत्रफल में 163 फुटबॉल के मैदान आ सकते हैं। या फिर यूँ कहें कि ये इसमें 46 एफिल टॉवर्स आ सकते हैं। इसमें 34 एम्पायर स्टेट बिल्डिंग्स समा सकते हैं। इस सुरंग की लम्बाई में दुनिया की सबसे ऊँची ईमारत बुर्ज खलीफा भी 18 की संख्या में आ सकते हैं। इजरायल ने कहा है कि अब इस 9.3 मील के क्षेत्र का इस्तेमाल आतंकवाद के लिए नहीं किया जा सकेगा। इसे रातोंरात ध्वस्त कर दिया गया।

इजरायल की सेना ने मंगलवार (मई 18, 2021) बताया कि लेबनान की तरफ से उसके उत्तरी क्षेत्र की तरफ 6 रॉकेट्स फायर किए गए। हैरानी की बात तो ये है कि इनमें से एक भी रॉकेट इजरायल में नहीं पहुँच पाया और लेबनान में ही गिर गया। लेकिन, इजरायल ने भी जवाबी कार्रवाई की और उन रॉकेट्स के स्रोत की तरफ जबरदस्त हमला बोला। IDF ने उत्तरी गाज़ा में हमास के मुख्य ऑपरेशन सेंटर पर भी धावा बोला।

इसी सेंटर से हमास के आंतरिक सुरक्षा बलों को संचालित किया जाता रहा है। इजरायल का कहना है कि ये फिलिस्तीन का ‘आतंकी केंद्र’ है। यहूदी मुल्क ने कहा कि उसने इसे ध्वस्त करने से पहले वहाँ से लोगों को बाहर निकलने के लिए पर्याप्त समय दिया। अब तक 820 से भी अधिक आतंकी केंद्रों पर इजरायल ने हमला किया है। साथ ही 21 बड़े आतंकी सरगनाओं को मार गिराया गया है। इन सबके पीछे हुस्सम अबू हर्बीद का हाथ बताया गया है।

उसने ही इजरायल पर एक हफ्ते पहले पहली बार रॉकेट से हमला किया, जिसके बाद हिंसा शुरू हुई। वो पिछले 15 वर्षों से इजरायल पर हमला करता आ रहा था। वो ‘नॉर्दर्न डिवीजन’ में इस्लामी जिहादी कमांडर के रूप में कार्यरत था। इजरायल ने उसे मार गिराया है। इजरायल का कहना है कि उसने अब तक ‘Operation Guardian of the Walls’ के तहत 130 आतंकियों को मार गिराया है। हमास के 460 रॉकेट्स मिसफायर हो गए। इजरायल की तरफ 3150 रॉकेट्स दागे गए, जिनमें 10 नागरिकों की मौत हो गई।

हरियाणा की सोनिया भोपाल में कॉन्ग्रेस MLA के बंगले में लटकी मिली: दावा- गर्लफ्रेंड थी, जल्द शादी करने वाले थे

मध्य प्रदेश के पूर्व मंत्री और कॉन्ग्रेस विधायक उमंग सिंघार के खिलाफ आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला दर्ज किया गया है। मामला सोनिया भरद्वाज की आत्महत्या से जुड़ा है। हरियाणा के अंबाला की रहने वाली 39 वर्षीय सोनिया भारद्वाज का शव रविवार (मई 16, 2021) को भोपाल स्थित विधायक के निजी बंगले से बरामद किया गया था। कथित तौर पर उसने बंगले में फंदे से लटक कर आत्महत्या कर ली थी।

उसके पास से एक सुसाइड नोट भी बरामद किया गया था। बताया जाता है कि सोनिया कॉन्ग्रेस विधायक की महिला मित्र थी। दोनों जल्द शादी करने वाले थे। धारा 306 के तहत मामला भोपाल के शाहपुरा थाने में दर्ज किया गया है।

उमंग सिंघार वर्तमान में गंधवानी से विधायक हैं। ये मामला प्रकाश में आने के बाद उन्होंने भोपाल रेंज के आइजी को आवेदन लिखकर अपील की थी कि वह एक जनप्रतिनिधि हैं, इसलिए FIR से पहले मजिस्ट्रेट से जाँच कराई जाए। सिंघार ने दावा किया था, “सोनिया के सुसाइड नोट में ऐसा कुछ नहीं लिखा है, जिससे मेरे ऊपर खुदकुशी के लिए उकसाने का केस बने।” उन्होंने अपने आवेदन में टीवी पत्रकार अर्नब गोस्वामी को लेकर हाल ही में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश का भी हवाला दिया था। 

हालाँकि, सोमवार शाम को भोपाल के एसीपी राजेश सिंह भदौरिया ने बताया कि विधायक के बंगले में रहने वाले नौकरों, उनकी (कॉन्ग्रेस नेता) पत्नी, सोनिया के बेटे से पूछताछ के बाद कहा, “आत्महत्या के लिए उकसाने के आरोप में कॉन्ग्रेस विधायक उमंग सिंघार के विरुद्ध आईपीसी की धारा 306 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।”

पुलिस की पूछताछ में सोनिया के बेटे आर्यन और नौकरों ने यह स्वीकारा कि सोनिया और उमंग के बीच नोकझोंक होती थी। पुलिस का कहना है कि सुसाइड नोट और पूछताछ में दर्ज किए गए बयानों पर कार्रवाई हुई है। 

एसीपी भदौरिया ने बताया कि पूछताछ से पता चला है कि सिंघार जल्द ही सोनिया से शादी करने वाले थे। दोनों की मुलाकात एक मेट्रिमोनियल वेबसाइट के जरिए हुई थी। सोनिया का एक 18 साल का बेटा भी है। दूसरी शादी टूटने के बाद वह माँ के साथ अंबाला में रहता था। सोनिया पिछले 25-30 दिनों से सिंघार के बंगले में रह रही थीं, जबकि कॉन्ग्रेस नेता 2 दिन से विधानसभा दौरे के लिए घर से बाहर थे।

कुछ रिपोर्ट बताती हैं कि महिला नहीं चाहती थी कि सिंघार अपने विधानसभा क्षेत्र के दौरे पर जाएँ। लेकिन 2-3 दिन पहले जब वो चले गए तो महिला ने यह कदम उठाया। बताया जाता है कि सुसाइड नोट में किसी का सीधा-सीधा नाम नहीं है (कुछ रिपोर्ट्स के मुताबिक सिंघार का नाम नोट में है), लेकिन इसमें लिखा है, “उनका गुस्सा बहुत तेज है।” इससे कयास लगाए जा रहे हैं कि महिला कॉन्ग्रेस नेता से डरी हुईं थीं। पुलिस ने कुछ वीडियोज और फोटोग्राफ भी जब्त किए हैं।

पुलिस का कहना है कि दोनों एक-दूसरे को 2 साल से जानते थे और सोनिया दो बार भोपाल आ चुकी थी। वहीं सोनिया के अंतिम संस्कार के लिए अंबाला से भोपाल आए बेटे आर्यन और उसकी माँ ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि सोनिया की पहचान सिंघार से सितंबर में हुई थी। इसी के बाद वह भोपाल आने-जाने लगी थी। मगर कुछ समय बाद दोनों में झगड़े होने लगे। इस बारे में सोनिया ने अपने घरवालों को भी वीडियो कॉल पर बताया था।

गौरतलब है कि उमंग सिंघार कमलनाथ सरकार में वन मंत्री थे। इसके अलावा वे पार्टी के राष्ट्रीय सचिव भी हैं। कुछ समय पहले वे पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह पर गंभीर आरोप लगाने के कारण चर्चा में आए थे। उन्होंने कमलनाथ के मुख्यमंत्री रहते दिग्विजय को दूसरा पावर सेंटर बताया था।

‘ये असाधारण परिस्थिति, भीड़तंत्र का राज़ नहीं चलेगा’: कलकत्ता HC ने चारों TMC नेताओं की जमानत रोकी, भेजे गए जेल

कलकत्ता हाईकोर्ट ने पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस के चारों नेताओं को मिली जमानत पर रोक लगा दी, जिसके बाद उन्हें प्रेसिडेंसी जेल में डाल दिया गया। गिरफ्तार किए गए नेताओं में फिरहाद हाकिम और सुब्रता मुखर्जी राज्य में मंत्री हैं तो मदन मित्रा विधायक हैं। सोवन चटर्जी कोलकाता के मेयर थे। मित्रा और सोवन भी कभी ममता बनर्जी मंत्रिमंडल का हिस्सा थे। इस कार्रवाई का विरोध करते हुए TMC सांसद कल्याण बनर्जी ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ के लिए आपत्तिजनक शब्दों का भी इस्तेमाल किया था।

इस कार्रवाई के बाद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता के निजाम पैलेस स्थित CBI दफ्तर के सामने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ धरना दिया, जिस पर कलकत्ता हाईकोर्ट ने सख्त टिप्पणी की है। उच्च-न्यायालय ने कहा कि अगर नेताओं को गिरफ्तार किए जाने के बाद इस तरह की घटनाएँ होती हैं तो लोगों का न्यायपालिका में विश्वास खो जाएगा। स्पेशल CBI कोर्ट ने चारों को जमानत दे दी थी, जिस पर हाईकोर्ट ने रोक लगा दी।

सोमवार (मई 17, 2021) की रात हाईकोर्ट की पीठ की अर्जेन्ट सिटिंग हुई। ये मामला नारदा स्कैम से जुड़ा है, जिसके स्टिंग टेप के आधार पर आरोप लगे हैं कि फर्जी कंपनियों को फायदा पहुँचाने के लिए TMC के मंत्रियों ने रुपए लिए। अब कलकत्ता हाईकोर्ट के कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश राजेश बिंदल और जस्टिस अर्जित बनर्जी ने कहा है कि अगले आदेश तक इन चारों आरोपित नेताओं को जुडिशल कस्टडी में रखा जाए।

कोर्ट ने कहा, “न्यायिक व्यवस्था में नागरिकों का विश्वास होना सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है क्योंकि ये उनके लिए अंतिम विकल्प है। लोगों को ऐसा लग सकता है कि कानून-व्यवस्था की जगह भीड़तंत्र हावी है। खासकर ऐसे मामले में, जहाँ राज्य की मुख्यमंत्री CBI दफ्तर में भीड़ का नेतृत्व कर रही हों और कानून मंत्री अदालत के परिसर में। अगर आप कानून के राज़ में विश्वास रखते हैं तो ऐसी घटनाएँ नहीं होनी चाहिए।”

बता दें कि बंगाल के कानून मंत्री मोलोय घटक अपने समर्थकों के साथ कोर्ट परिसर में पहुँच गए थे। हाईकोर्ट ने नोट किया कि CBI ने इस मामले की जाँच करने के बाद चार्जशीट पेश की है, ऐसे में राज्य की सत्ताधारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के आरोपित होने और उनके खिलाफ कार्रवाई पर मुख्यमंत्री द्वारा धरना देना एक ‘असामान्य परिस्थिति’ है। कोर्ट ने कहा कि कानून मंत्री खुद 2000-3000 समर्थकों के साथ मौजूद थे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कोर्ट को जानकारी दी कि कैसे नेताओं ने अपने समर्थकों के साथ CBI दफ्तर का घेराव किया। कानून मंत्री भीड़ के साथ दिन भर न्यायालय के परिसर में डटे रहे। उन्होंने कहा कि कोर्ट अगर सुनवाई नहीं करता है तो लोगों को लगेगा कि यहाँ ‘मोबोक्रेसी’ का राज़ है। बंगाल सरकार के वकील ने दावा किया कि CBI अधिकारियों को पूर्ण सुरक्षा दी गई और उनकी तरफ से कोई शिकायत नहीं आई है।