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कोरोना से जंग: फंड इकट्ठा करेंगे विराट और अनुष्का, खुद दिए ₹2 करोड़; सनी लियोनी मजदूरों को देंगी खाना

कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामलों के बीच कई सेलिब्रिटी मदद के लिए आगे आए हैं। ऐसी ही एक पहल भारतीय क्रिकेट टीम के कप्तान विराट कोहली (Virat Kohli) और उनकी पत्नी अनुष्का शर्मा (Anushka Sharma) की ओर से की गई है। दोनों राहत कार्यों के लिए फंड इकट्ठा करेंगे। वहीं, अभिनेत्री (Sunny Leone) ने दिल्ली में प्रवासी श्रमिकों को भोजन मुहैया कराने के लिए पीपुल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) के साथ हाथ मिलाया है।

विराट और अनुष्का ने इंस्टाग्राम के माध्यम से एक वीडियो शेयर किया है। दोनों ने मिल कर भारत में कोविड-19 संक्रमण महामारी के दौर में राहत-कार्य के लिए रुपए इकट्ठा करने का ऐलान किया है। वीडियो शेयर करते हुए अनुष्का शर्मा ने लिखा कि हमारा देश कोरोना महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है और हमारा स्वास्थ्य सिस्टम एक बड़ी चुनौती का सामना कर रहा है।

अनुष्का ने लिखा, “अपने लोगों को इस तरह पीड़ित देख कर हमें काफी दुःख हो रहा है। इसीलिए, मैंने और विराट ने मिल कर ‘In This Together’ नामक एक अभियान शुरू किया है, जिसमें हम Ketto के माध्यम से कोरोना राहत कार्य के लिए फंड्स जुटाएँगे। हम सब साथ मिल कर इस महामारी से बाहर निकलेंगे। कृपया भारत और भारतीयों को बचाने के लिए इस संदेश को आगे बढ़ाएँ। इस संवेदनशील समय में आपकी मदद लोगों की जान बचाने में काम आएगी।”

अनुष्का शर्मा ने अपने इंस्टाग्राम बायो में इस फंडरेजर का लिंक लगाया है, जिस पर क्लिक कर मदद के लिए दान कर सकते हैं। उन्होंने लोगों से घर में रहने और सुरक्षित रहने की अपील भी की। विराट और अनुष्का ने Ketto प्लेटफॉर्म के जरिए 7 करोड़ रुपए जुटाने का लक्ष्य रखा है। इन दोनों ने अपनी तरफ से भी 2 करोड़ रुपए दिए हैं।

अनुष्का शर्मा और विराट कोहली की अपील

विराट और अनुष्का इस तरह का फंडरेजर शुरू करने वाले पहले सेलेब्रिटीज नहीं हैं। इससे पहले अभिनेत्री प्रियंका चोपड़ा और उनके पति गायक निक जोनास ने मिल कर इसी तरह का फंडरेजर शुरू किया था, जिसके तहत वे अब तक 6.6 करोड़ रुपए जुटा चुके हैं। अनुष्का शर्मा का 1 मई को जन्मदिन भी था, लेकिन उन्होंने इसे न मनाने का निर्णय लिया था। उन्होंने कहा था कि दर्द और पीड़ा के इस समय में उन्हें अपना जन्मदिन मनाना ठीक नहीं लगता। उन्होंने लोगों से देश का समर्थन करने की अपील की थी।

दूसरी ओर, पेटा के साथ मिलकर सनी लियोनी ने दिल्ली में 10 हजार प्रवासी श्रमिकों को खाना खिलाने का कैंपेन शुरू किया है। पेटा ने अपने आधिकारिक इंस्टाग्राम पेज से इसके बारे में जानकारी साझा की है। इसके मुताबिक मजदूरों के बीच प्रोटीन पैक खाना मुहैया कराया जाएगा।

ब्राजीली राष्ट्रपति ने कहा, ‘लैब में बना कोरोना वायरस’, मीडिया में आया चीन का नाम तो मारी पलटी

क्या कोरोना वायरस संक्रमण चीन की नई युद्धनीति का हिस्सा है? दुनिया भर में ये चर्चा आम है कि अब विश्व बायो वॉर और साइबर वॉर की दिशा में बढ़ रहा है, जहाँ लड़ाई अत्याधुनिक मिसाइलों और तोपों से नहीं, बल्कि ऐसे वायरस और कम्प्यूटर हैकिंग से होगी। ब्राजील के राष्ट्रपति जेयर बोल्सनारो ने बुधवार (मई 5, 2021) को एक कार्यक्रम के दौरान कोरोना महामारी को अप्रत्यक्ष रूप से चीन की नई साजिश करार दिया। हालाँकि, बाद में वो पलट गए।

बोल्सनारो ने बिना नाम लिए आशंका जताई कि चीन ने कोरोना वायरस को अपने लैब में बनाया होगा और ये आर्थिक लाभ के लिए चीन द्वारा अपनाई गई बायलॉजिकल युद्धनीति का एक हिस्सा हो सकता है। उन्होंने कहा कि ये एक नया वायरस है और किसी को नहीं पता कि ये किसी लैब में बनाया गया है या फिर किसी व्यक्ति द्वारा किसी संक्रमित जानवर को खा लेने से मनुष्य तक पहुँच गया। उन्होंने कहा कि ये एक वास्तविकता है।

बकौल ब्राजीली राष्ट्रपति, उनकी सेना को पता है कि ये एक केमिकल, बैक्टेरिओलॉजिकल या रेडियोलॉजिकल युद्धनीति का एक हिस्सा है। उन्होंने पूछा कि क्या हम नए युद्ध का सामना नहीं कर रहे हैं? साथ ही उन्होंने ये भी सवाल दागा कि इन सबके बीच कौन सा ऐसा देश है, जिसकी GDP सबसे ज्यादा बढ़ी है? बता दें कि पिछले साल जब पूरी दुनिया में आर्थिक मंदी थी, चीन की GDP 2.3% बढ़ गई। व्यापार के मामले में ब्राजील का चीन सबसे बड़ा आर्थिक पार्टनर है।

चीन का नाम लेने पर मीडिया पर बिफरे ब्राजील के राष्ट्रपति

जब मीडिया में ये खबर आई तो जेयर बोल्सनारो ने इसके लिए मीडिया को दोष देते हुए कहा कि उन्होंने अपने किसी एशियाई देश (चीन) का नाम नहीं लिया था। उन्होंने कहा कि मीडिया ब्राजील और चीन के बीच विवाद पैदा करना चाहता है।

वहाँ की GDP इसके साथ ही 14.7 ट्रिलियन डॉलर (10.83 लाख अरब रुपए) पर पहुँच गई। अनुमान लगाया जा रहा है कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो 2026 में चीन दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था होगा और इस मामले में वो अमेरिका को पीछे छोड़ देगा। कोरोना वायरस 2019 के अंत में सबसे पहले वुहान में ही सामने आया था। पिछले साल चीन ने भी सख्त लॉकडाउन और आइसोलेशन के कड़े नियम लगाए थे।

ब्राजील के वित्त मंत्री पाउलो गेडेस भी कह चुके हैं कि कोरोना वायरस को चीन ने ही बनाया है। उन्होंने यह दावा 7 अप्रैल को एक पूरक स्वास्थ्य बोर्ड की बैठक के दौरान किया था। उन्होंने यह भी कहा था कि चीनी टीके अमेरिका द्वारा बनाए गए टीकों से कम प्रभावी थे। 7 अप्रैल तक, ब्राजील में कोरोना वायरस के 10 लाख ऐक्टिव मामले और कुल 4.17 लाख मौतें दर्ज की गईं।

कोरोना टीकों की आलोचना कर चुके हैं ब्राजीली राष्ट्रपति

पिछले साल ब्राजीली राष्ट्रपति बोल्सनारो ने कोरोनावायरस के टीकों पर हमला किया था और Pfizer-BioNTech द्वारा विकसित कोरोनावायरस वैक्सीन की प्रभावशीलता को खारिज करते हुए दावा किया था कि यह रोगियों को मगरमच्छ या दाढ़ी वाली महिलाओं में बदल सकता है। महामारी के उभरने के बाद से ही जेयर बोल्सोनारो को इसके बारे में संदेह है।

उन्होंने इसे “हल्का फ्लू” कहा था। उन्होंने यह कहते हुए लॉकडाउन भी हटा दिया था कि उनका देश वायरस से सुरक्षित है क्योंकि उसकी जनसंख्या कम है और वहाँ का मौसम गर्म है। ब्राजील के राष्ट्रपति ने साथ ही लॉकडाउन को “पागलपन” भी करार दिया था।

‘आतंकियों के लिए आधी रात को खुलता है सुप्रीम कोर्ट’: बंगाल हिंसा पर दायर याचिका की नहीं हुई त्वरित सुनवाई

‘इंडिक कलेक्टिव’ नामक ट्रस्ट ने पश्चिम बंगाल में हो रही राजनीतिक हिंसा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। इसे सुनवाई के लिए तुरंत लिस्ट करने की माँग की गई थी। लेकिन, सुप्रीम कोर्ट में इसकी अर्जेन्ट लिस्टिंग नहीं हो पाई। ‘इंडिक कलेक्टिव’ ने बताया है कि उसने इस याचिका में पश्चिम बंगाल में चुनावी नतीजे आने के बाद हो रही राजनीतिक हिंसा में सुप्रीम कोर्ट द्वारा हस्तक्षेप की माँग की है।

3 मई 2021 की दोपहर को ये याचिका डाली गई थी। ट्रस्ट ने दावा किया है कि इसके अगले दिन दोपहर तक सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा पूछे गए सारे सवालों के जवाब दे दिए गए थे। जो भी संशय थे, उनका निदान कर दिया गया था। बंगाल में मौजूदा स्थिति को देखते हुए इसकी त्वरित सुनवाई की माँग की गई थी, लेकिन बुधवार (मई 5, 2021) को इस पर सुनवाई नहीं हो सकी। इस पर ट्रस्ट ने नाराजगी जताई है।

उसने कहा कि उसकी तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता पिंकी आनंद और जे साईं दीपक ने वकील सुविदत्त सुंदरम के साथ मिल कर जस्टिस यूयू ललित के समक्ष इस मामले को 6 मई 2021 को उठाने के लिए मौखिक रूप से आग्रह किया, जिसे सुप्रीम कोर्ट रजिस्ट्री द्वारा अस्वीकार कर दिया गया। ‘इंडिक कलेक्टिव’ का कहना है कि वस्तुस्थिति की गंभीरता को देखते हुए इसकी त्वरित सुनवाई ज़रूरी थी, लेकिन वो नहीं हो पाया।

‘इंडिक कलेक्टिव’ ट्रस्ट ने ट्विटर के माध्यम से रखी अपनी बात

उसने बताया है कि 6 मई को अर्जेंसी को लेकर दूसरा पत्र भेजा गया, लेकिन उसे भी अस्वीकार कर दिया गया। ‘इंडिक कलेक्टिव’ ने ट्विटर के माध्यम से कहा, “ये काफी दुर्भाग्यपूर्ण है कि सजायाफ्ता आतंकियों के लिए सुप्रीम कोर्ट आधी रात को खुल सकता है लेकिन पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा के खिलाफ याचिका लिस्ट तक नहीं की जा रही। अभी भी जानें जा रही हैं। स्पष्ट है कि कुछ लोग बाकियों से ज्यादा ‘बराबर’ हैं।”

आज गर्मी की छुट्टियों से पहले सुप्रीम कोर्ट के कामकाज का अंतिम दिन है। इसके बाद वेकेशन बेंच ही सुनवाई करेगी। सुप्रीम कोर्ट में 28 जून 2021 तक गर्मी की छुट्टियाँ रहेंगी। ‘इंडिक कलेक्टिव’ ने एक बार फिर से वेकेशन बेंच के सामने याचिका की अर्जेन्ट लिस्टिंग के लिए आग्रह करने का निर्णय लिया है। हिंसा की कई तस्वीरें और वीडियो ट्रस्ट को मिली हैं। इस मामले में वो अन्य विकल्पों पर भी विचार कर रहा है।

बता दें कि पश्चिम बंगाल में हिंसा रुकने का नाम नहीं ले रही है। पिछले 2 दिनों में 3 और भाजपा कार्यकर्ताओं की हत्या की खबर सामने आई है। बीजेपी के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि झाड़ग्राम (Jhargram) के बिनपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा किसान मोर्चा के मंडल सचिव किशोर मंडी की हत्या कर दी गई। पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के शक्ति केंद्र के प्रमुख विश्वजीत महेश की हत्या हुई। पूर्वी बर्धमान के RSS कार्यकर्ता बलराम माँझी की हत्या कर दी गई।

फरीदाबाद: ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी में कॉन्ग्रेस नेता गिरफ्तार, 50 सिलेंडर मिले

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में कोरोना वायरस का कहर लगातार जारी है। इस बीच फरीदाबाद पुलिस ने ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी के मामले में कॉन्ग्रेस नेता बिजेन्द्र मावी को गिरफ्तार किया है। फरीदाबाद के इंदिरा कॉम्प्लेक्स कॉलोनी स्थित उसके घर से 50 सिलेंडर बरामद किए गए हैं। आपदा प्रबंधन अधिनियम सहित विभिन्न धाराओं में उसके खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।

पुलिस को सूचना मिली थी कि मावी ने अपनी गाड़ी में ऑक्सीजन सिलेंडर छिपा रखे हैं। खबरों के मुताबिक, खेड़ीपुल पुलिस फरीदाबाद के तिगांव रोड पर गश्त कर रही थी। इसी दौरान उन्हें मुखबिर से ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी में कॉन्ग्रेस नेता के शामिल होने की जानकारी मिली। इसके बाद पुलिस ने छापेमारी की। इस दौरान ड्रग कंट्रोल ऑफिसर संदीप गहलान भी मौजूद थे।

कॉन्ग्रेस नेता के वाहन की जाँच के दौरान पुलिस ने 42 खाली और 8 भरे सिलेंडर बरामद किए। पुलिस ने मावी से लाइसेंस माँगा, लेकिन आरोपित वैध दस्तावेज नहीं दिखा पाया। इसके बाद पुलिस ने आरोपित को हिरासत में ले 50 ऑक्सीजन सिलेंडर जब्त कर लिए।

पूछताछ के दौरान कॉन्ग्रेस नेता ने अपना अपराध कबूल कर लिया है। आरोपित ने बताया कि वह इससे पहले एक ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी में काम करता था। कोरोना के कारण जब विभिन्न राज्यों में ऑक्सीजन सप्लाई में कमी आई तो उसने खुद से ही निजी अस्पताल को सिलेंडर की आपूर्ति शुरू कर दी। आरोपित ने फरीदाबाद के विभिन्न डीलरों से इन सिलेंडरों की खरीद की और उन्हें निजी अस्पतालों में सप्लाई किया।

आरोपित ने कबूल किया कि जब वह अस्पतालों में ऑक्सीजन सिलेंडर की आपूर्ति करता था तो वह हर सिलेंडर से कुछ गैस निकाल लेता था और खाली सिलेंडरों को भरकर बेच देता था। मामले की जाँच कर रही फरीदाबाद पुलिस ने जानकारी दी है कि आरोपित कॉन्ग्रेस नेता को कोर्ट में पेश किया जाएगा और उसके रिमांड की माँग की जाएगी।

गौरतलब है कि रेमडेसिविर के बाद मौजूदा COVID संकट का लाभ लेने के लिए लोग मेडिकल ऑक्सीजन सिलेंडर, कॉन्सेन्ट्रेटर और फ्लोमीटर की कालाबाजारी कर रहे हैं। हाल में ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर और मेडिकल उपकरणों की कालाबाजारी के कई मामले सामने आए हैं। इस गोरखधंधे को रोकने के लिए कई राज्यों ने कड़े कदम भी उठाए हैं।

पुलिस, जज और परिजनों के लिए इस्तेमाल होंगे जब्त ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर: दिल्ली की अदालत का आदेश

कोरोना संकट के बीच दिल्ली की एक अदालत ने पुलिस को जब्त किए गए 12 ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर रिलीज करने का आदेश किया है। इनका इस्तेमाल, पुलिस, न्यायिक अधिकारियों और उनके परिजनों के लिए हो सकेगा। दिल्ली पुलिस ने कालाबाजारी रोकने की कार्रवाई के तहत इन कॉन्सेन्ट्रेटर को जब्त किया था।

मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट अनुज बहल ने इन कॉन्सेन्ट्रेटर को रिलीज करने का आदेश दिया। इन कॉन्सेन्ट्रेटर को 4 मई को जब्त करते हुए पुलिस ने विनय अग्रवाल और आकाश वशिष्ठ को गिरफ्तार किया था। कॉन्सेन्ट्रेटर को द्वारका पुलिस स्टेशन में जमा कर दिया गया था।

जाँच अधिकारी ने इस मामले में अदालत को जानकारी दी थी कि कई पुलिस अधिकारी कोरोना वायरस से पीड़ित थे और उन्हें अपनी जान बचाने के लिए इसकी आवश्यकता थी। इस पर अदालत ने कहा कि इन ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर पुलिस मालखाने में रखने से इसका कोई उपयोग नहीं हो पाएगा।

कोर्ट ने कहा, “यह उल्लेख करना सही होगा कि अपने कार्य के कारण कई न्यायिक अधिकारी इस जानलेवा वायरस की चपेट में आ रहे हैं। दिल्ली में बड़ी संख्या में न्यायिक अधिकारी और उनके परिवार कोविड-19 वायरस से संक्रमित हैं और दुर्भाग्य से दिल्ली न्यायपालिका के दो सदस्य न्यायधीश कोवई वेणुगोपाल और मेट्रोपोलिटन मजिस्ट्रेट, द्वारका कामरान खान कोविड संक्रमण के कारण अपनी जान गँवा चुके हैं।”

अदालत ने कहा, “पुलिस अधिकारियों, न्यायिक अधिकारियों और उनके परिवार के सदस्यों के सर्वोत्तम स्वास्थ्य हित में यह अदालत इलाज के लिए 12 ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर के इस्तेमाल की इजाजत देती है।”

कोर्ट द्वारा जारी आदेश की कॉपी

आदेश के मुताबिक 2 ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर डीसीपी द्वारका को रिलीज किया जाएगा, ताकि कोरोना पॉजिटिव पुलिसकर्मी उनका इस्तेमाल कर सकें। साथ ही 3 ऑक्सीजन कॉन्सेन्ट्रेटर प्रिंसिपल डिस्ट्रिक और सेशन जज (हेडक्वार्टर) को, 2 कॉन्सेन्ट्रेटर प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज द्वारका को, 3 कॉन्संट्रेटर प्रिंसिपल डिस्ट्रिक्ट और सेशन जज साकेत और 2 कॉन्संट्रेटर कोविड हेल्थ सेंटर एयर दिल्ली ज्यूडिशियल एकेडमी को रिलीज करने का आदेश दिया गया है।

नकली ऑक्सीजन सिलेंडर के जरिए लोगों को ठगने वाले गिरफ्तार

कोरोना के कहर के बीच ऑक्सीजन के नाम पर गोरखधंधे भी दिल्ली में चल रहे हैं। दिल्ली पुलिस ने आग बुझाने के उपकरण को नकली ऑक्सीजन सिलेंडर बनाकर बेचने के मामले तीन लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपित रवि शर्मा (40), मोहम्मद अब्दुल (38) और शंभू शाह (30) दिल्ली के अलीपुर निवासी हैं।

छापेमारी के दौरान पुलिस ने 530 आग बुझाने वाले लोहे के गैस सिलेंडर और 25 से अधिक ऑक्सीजन गैस सिलेंडर नोजल जब्त किए। पुलिस ने सिलेंडर की पेंट, स्प्रे-पेंट के डिब्बे समेत 49,500 रुपए नकद बरामद किए हैं।

राहुल गाँधी के लिए सेन्ट्रल विस्टा ‘बर्बादी’: महाराष्ट्र में विधायकों के लिए ₹900 करोड़ में बन रही आलीशान इमारत

केंद्र सरकार की प्रत्येक योजनाओं के खिलाफ अनाप-शनाप बयानबाजी करने वाले राहुल गाँधी ने अब सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट को निशाना बनाया है। वो प्रोजेक्ट, जिसे लेकर कोरोना के शुरू होने के कई वर्ष पहले से ही बात चल रही थी और जिसे अचानक से हरी झंडी नहीं दिखाई गई। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष ने सेन्ट्रल विस्टा को रुपयों की ‘आपराधिक बर्बादी’ करार दिया है। उन्होंने ऐसा दिखाने का प्रयास किया जैसे ये प्रोजेक्ट पीएम मोदी का कोई निजी प्रोजेक्ट हो।

उन्होंने ट्विटर पर लिखा, “लोगों की जान बचाने को केंद्र में रखा जाना चाहिए, नए घर के लिए अपने इस अंधे दंभ को नहीं।” पहले सवाल तो यही उठता है कि क्या प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने या अपने परिवार के लिए कोई ‘घर’ बनवा रहे हैं? दिल्ली की तस्वीर बदलने वाली सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट जब तैयार होगी तब ये राष्ट्र की संपत्ति ही होगी, किसी खास व्यक्ति या पार्टी की नहीं। नए संसद भवन में कॉन्ग्रेस के भी सांसद बैठेंगे।

यहाँ राहुल गाँधी का दोहरा रवैया दखिए। अगर उनकी सरकार किसी राज्य में सैकड़ों करोड़ खर्च कर रही है तो वो इस पर बात नहीं करते, लेकिन जब केंद्र सरकार देश के लिए कुछ बनवा रही है तो वो ऐसा दिखा रहे हैं जैसे स्वास्थ्य बजट में से रुपए निकाल कर ही वो सब किया जा रहा हो। क्या आपको पता है कि महाराष्ट्र के नरीमन प्वाइंट में उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाली महाविकास अघाड़ी सरकार (MVA) 900 करोड़ रुपयों की लागत से विधायकों के लिए हॉस्टल बनवा रही है?

अगर राहुल गाँधी को इसी सोच के हिसाब से काम करनी है तो सबसे पहले तो उन्हें जहाँ अपनी सरकार है, वहाँ से शुरू करनी चाहिए। वो महाराष्ट्र में अपनी सहयोगी पार्टी शिवसेना को क्यों नहीं कहते कि वह विधायकों के भोग-विलास की बजाए जनता की जान बचाने की फ़िक्र करे, क्योंकि कोरोना के सबसे ज्यादा मामले तो महाराष्ट्र में ही हैं और दूसरे राज्यों से कई गुना ज्यादा लोगों की मौत यहाँ हुई है।

पहले तो इस MLA हॉस्टल को ‘नेशनल बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन कॉर्पोरेशन’ बनाने वाला था, लेकिन उद्धव ठाकरे की सरकार ने इसकी समीक्षा कर इसका जिम्मा राज्य के PWD विभाग को सौंप दिया। एक केंद्रीय संस्था से इसका जिम्मा लेकर राज्य सरकार ने खुद के विभाग पर भरोसा जताया। इसमें पहले 400 करोड़ रुपए का खर्च आना था, लेकिन अब 900 करोड़ रुपए की लागत से इस आलीशान MLA हॉस्टल का निर्माण कराया जा रहा है।

सेन्ट्रल विस्टा प्रोजेक्ट तो समय की ज़रूरत है। इसके लिए आज नहीं बल्कि 90 के दशक में ही सिफारिश की गई थी। भारत सरकार के अधिकतर सरकारी निवास और दफ्तर उसी क्षेत्र में हैं, जहाँ की इमारतें ब्रिटिश राज की ही हैं। सरकार का कामकाज बढ़ने के साथ ही अधिकारियों-नेताओं की संख्या भी बढ़ी है और 90 के दशक में कराए गए एक अध्ययन में पाया गया था कि सेन्ट्रल विस्टा देश की ज़रूरतों के साथ समन्वय बनाने में नाकाम रहा है और इसके पुनर्विकास की ज़रूरत है।

उस समय नरेंद्र मोदी प्रधामंत्री तो क्या, गुजरात के मुख्यमंत्री भी नहीं बने थे। कोरोना काल में इससे मजदूरों को रोजगार भी मिला है और मेडिकल दिशा-निर्देशों का प्लान कराते हुए कार्य किया जा रहा है। इससे जनता को फायदा होगा क्योंकि लोगों के आवागमन और पर्यटकों के लिए सुगमता होगी। ज्यादा पेड़ भी लगाए जाने हैं, जिससे इस क्षेत्र के ‘ग्रीन कवर’ में वृद्धि होगी। लेकिन, राहुल गाँधी ऐसा भ्रम फैलाना चाहते हैं जैसे ये भाजपा का दफ्तर बन रहा हो।

महाराष्ट्र में विधायकों को 1 लाख रुपए प्रति महीने या फिर सरकारी कमरे के साथ-साथ 50 हजार रुपए प्रति महीने का खर्च राज्य सरकार देती है, अगर उन्हें उचित फ्लैट न मिला हो तो। नए ‘मनोरमा एमएलए हॉस्टल’ में सारी आधुनिक सुविधाएँ होंगी और इसे बनाने का औसत खर्च 17,500 रुपए प्रति स्क्वायर फ़ीट होगा। अभिजीत अय्यर मित्रा ने इस पर निशाना साधते हुए कहा कि अल्ट्रा लक्जरी होटल भी 5000 रुपए प्रति स्क्वायर फ़ीट में बन जाते हैं।

बता दें कि दिसंबर 10, 2020 को प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नए संसद भवन का भूमि पूजन किया था, जिसे लगभग 971 करोड़ रुपए की लागत से बनाया जाना है। मोदी सरकार की महत्वाकांक्षी योजनाओं में से एक, सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के तहत राष्ट्रपति भवन और इंडिया गेट के बीच की जगह का पुनर्विकास शामिल है। इसका भूमि पूजन हो चुका है। 

एक तरह से आप देखिए तो जितना धन पूरे सेन्ट्रल विस्टा पुनर्विकास प्रोजेक्ट में लग रहा है, उतने में महाराष्ट्र में विधायकों के लिए आलीशान भोग-विलास वाला निवास बनकर खड़ा होगा। फिर किस मुँह से राहुल गाँधी महाराष्ट्र की अपनी सरकार की आलोचना न कर केंद्र सरकार को घेर रहे हैं? एक पूरे क्षेत्र का विकास करना अगर ‘गुनाह’ है तो फिर उतने ही सरकारी पैसे से नेताओं का आवास बनवाना उचित है क्या?

यूपी पर स्विच ऑन, बंगाल हिंसा पर स्विच ऑफ: मेनस्ट्रीम मीडिया का ये संतुलन क्या कहलाता है

कहते हैं कि अगर धृतराष्ट्र ने विदुर की सलाह पर ध्यान दिया होता तो महाभारत को टाला जा सकता था। लेकिन धृतराष्ट्र पुत्र मोह में इतने लीन थे कि उन्होंने विदुर की बातों को सुनकर भी अनसुना कर दिया। धृतराष्ट्र ने महात्मा विदुर की बात नहीं सुनी, इससे उन बातों का महत्व कम नहीं हो जाता है। महाभारत में तो राजा को सही और गलत बताने वाले विदुर थे। लोकतंत्र में प्रजा ही राजा होती है। उसे सही तस्वीर दिखाने की जिम्मेदारी मीडिया की है। लेकिन अगर मीडिया भय, लालच, स्वार्थ या मोह के कारण सच न दिखाए तो लोकतंत्र कैसे ज़िंदा रहेगा? क्या बंगाल को लेकर ऐसा ही नहीं हो रहा?

बंगाल में ममता बनर्जी की जीत के बाद हिंसा का खतरनाक दौर चल रहा है। 16 हत्याओं की बात तो खुद मुख्यमंत्री ममता बनर्जी कर चुकी हैं। लेकिन, अलग-अलग दावे बताते हैं कि यह संख्या इससे कहीं ज्यादा है। मारे गए लोगों में अधिकतर विपक्षी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के कार्यकर्ता बताए जा रहे हैं। केंद्रीय मंत्रियों के काफिलों तक पर हमले हो रहे हैं। पर मुख्यधारा का देशी और विदेशी मीडिया ऐसा लगता है कि चद्दर तान कर सो रहा है। कल्पना कीजिए कि यदि ऐसा योगी के राज में उत्तर प्रदेश में हुआ होता तो अब तक सारे अख़बारों के पहले पन्ने और टीवी चैनलों के बुलेटिन इन्हीं खबरों से भरे होते। वहाँ लोकतंत्र की मौत के मर्सिये पढ़े जा रहे होते। पर बंगाल को लेकर ऐसा क्यों नहीं हो रहा? ये चिंतित करने और चिंतन करने की बात है। 

प्रचंड बहुमत से चुनाव जीतने के बाद अगर जीतने वाली पार्टी विपक्ष के खिलाफ हिंसा करें, तो यह भारतीय प्रजातंत्र के लिए बेहद अफसोसजनक और शर्मनाक है। ममता बनर्जी की तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के ऊपर पहले वामपंथी कार्यकर्ताओं के खिलाफ भी हिंसा के आरोप लगते रहे हैं। लेकिन इस बार हिंसा कहीं अधिक क्रूर और कहीं अधिक व्यापक है। बंगाल से जो खबरें और वीडियो आ रहे हैं वे बेहद परेशान कर देने वाले हैं। 

हो सकता है तृणमूल कॉन्ग्रेस के नेतृत्व ने धृतराष्ट्र की तरह अपनी आँखों के साथ कान भी बंद कर लिए हो, पर देश-विदेश का मीडिया और कथित बुद्धिजीवी तो बंगाल में विदुर की भूमिका निभा ही सकते हैं। उनकी कलम और कैमरे को किसने रोका है?

देश के अंदर एक पूरी जमात है जो हिंसा की छोटी सी घटना को बड़ा रंग देती है। मानव अधिकार, मानवता,  सुप्रीम कोर्ट और संविधान- न जाने किस-किस की दुहाई दी जाती है। जब घोषित आतंकवादियों को छुड़ाने के लिए आधी रात में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा तक खटखटाया जा सकता है तो बंगाल की हिंसा को लेकर ऐसा क्यों नहीं हो रहा?

प्रश्न है कि बंगाल में पिछले दो-तीन दिन के अंदर जो हिंसा हुई है। महिलाओं के साथ कथित बलात्कार और अत्याचार के जो चित्र आ रहे हैं, उन पर इन कथित मानव अधिकार एक्टिविस्ट का दिल अभी तक क्यों नहीं डोला है? क्या भारतीय नागरिकों के मानव अधिकार की व्याख्या या जिंदा रहने का अधिकार उनकी राजनीतिक निष्ठा को देखकर किया जाएगा? इन बुद्धिजीवियों और देश-विदेश के मुख्यधारा के मीडिया की भूमिका पर इसे लेकर भी कई सवाल बनते हैं।

दिल्ली के दंगे हो, अखलाक की हत्या या फिर अन्य ऐसे कई उदाहरण हैं जिनकी खबरों को मीडिया मुख्यधारा का मीडिया सुर्खियाँ बनाता है। इससे देश की अदालतों, जनमानस और दुनिया का ध्यान इस तरफ जाता है। क्या बंगाल की हिंसा को देश और विदेश के अखबारों में वही स्थान मिल रहा है? क्या मुख्यधारा के अखबार/चैनल उसको उसी गंभीरता के साथ उठा रहे हैं जैसा कि अन्य मामलों में करते हैं?

कुछ अखबारों ने इन मामलों को उठाया है तो उसमें इतना किंतु-परंतु लगाया है कि मालूम ही नहीं पड़ता कि वहाँ हो क्या रहा है। बंगाल में चुनाव बाद की राजनीतिक हिंसा की रिपोर्टिंग इतने किंतु/परंतु के साथ कुछ लोग कर रहे हैं जिससे ये हिंसा ही जायज लगती है। आप पूछेंगे तो बताया जाएगा कि ख़बरों में संतुलन लाने के लिए ऐसा किया गया है। तो भाई, आप बाकी घटनाओं के समय ये ‘संतुलन’ क्यों नहीं बिठाते? तब आपकी हेडलाइन और रिपोर्टिंग तक निर्णयात्मक क्यों होती हैं?

देश-विदेश की मीडिया का यह दायित्व बनता है कि वह बिना किसी राजनीतिक और मज़हबी भेदभाव के बंगाल की हिंसा की तस्वीर लोगों के सामने लाए। दंगा करने वालों का पर्दाफाश करे। उनको बेनकाब करे जो इस हिंसा के पीछे हैं और इसके लिए लोगों को उकसा रहे हैं। राजनीतिक दलों की तरह मीडिया राजनीतिक चश्मे से भारतीय नागरिकों के अधिकारों को नहीं देख सकता।

महाभारत में कम से कम कहने के लिए धृतराष्ट्र की तरफ कई लोग थे जो उन्हें समझाने की कोशिश करते थे। परंतु यहां बुद्धिजीवी और मीडिया रूपी विदुर ने भी धृतराष्ट्र की तरह आंखों पर पट्टी बांध ली है और कानों में रुई डाल ली है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने एक नाटक लिखा था।  इस नाटक का शीर्षक था ‘वैदिकी हिंसा हिंसा न भवति’। इस नाटक  में धूर्त पुरोहित, पाखंडी पंडित और लालची मंत्री में राजा से कहते हैं कि जीव हिंसा शास्त्र-सम्मत हैं। परंतु अंत में सिद्ध होता है की हिंसा सही नहीं है । वे सब नरक के भागी बनते हैं।

बंगाल का चुनाव जीतने वाली तृणमूल कांग्रेस राजमद में आंखों में पट्टी बांध सकती है। मगर मीडिया ऐसा नहीं कर सकता। उसे सोचना चाहिए कि बंगाल की हिंसा देश के लोकतंत्र और सौहाद्र के लिए बेहद घातक है।

बंगाल में अब BJP के किसान नेता की हत्या, मुस्लिम नेता को घर में घुस पीटा: मिथुन चक्रवर्ती के खिलाफ पुलिस से शिकायत

केंद्रीय गृह मंत्रालय (MHA) की चार सदस्यीय टीम पश्चिम बंगाल में है। 2 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद भड़की राजनीतिक हिंसा की जाँच कर रही है। इस बीच राज्य में हिंसा अब भी जारी है। भाजपा के बंगाल प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने जानकारी दी है कि 26 साल के किशोर मंडी की TMC के गुंडों ने हत्या कर दी है। वे झाड़ग्राम (Jhargram) के बिनपुर विधानसभा क्षेत्र में भाजपा किसान मोर्चा के मंडल सचिव थे।

भाजपा का समर्थन करने वाले मुस्लिमों को भी नहीं बख्शा जा रहा है। ‘ABP न्यूज़’ के पत्रकार विकास भदौरिया ने जानकारी दी है कि मेटियाब्रुज मंडल 2 में भाजपा के मंडल उपाध्यक्ष शेर मोहम्मद खान को मारा-पीटा गया। वहाँ के वॉर्ड संख्या 139 के रहने वाले खान के घर में घुस कर भीड़ ने उनके साथ गाली-गलौज किया। सार्वजनिक रूप से उन्हें थप्पड़ मारे गए और प्रताड़ित किया। उनके परिवार के साथ भी मारपीट हुई।

विकास भदौरिया ने लिखा, “उनका अपराध क्या था? उन्होंने एक अल्पसंख्यक बहुल इलाके में भाजपा का समर्थन किया।” उन्होंने इस घटना का वीडियो भी शेयर किया। भाजपा ने कहा है कि राज्य में कई इलाकों में उसके कार्यकर्ताओं और उनके घरों पर अब भी हमले जारी हैं। 1 दिन पहले पूर्वी बर्धमान के RSS कार्यकर्ता बलराम माँझी की हत्या की खबर आई थी।

पश्चिम मेदिनीपुर जिले के घाटाल विधानसभा क्षेत्र से भी हिंसा की घटना सामने आई है। वहाँ भाजपा के शक्ति केंद्र के प्रमुख विश्वजीत महेश की हत्या का आरोप तृणमूल के गुंडों पर लगा है। प्रदेश भाजपा ने दोनों मृत कार्यकर्ताओं की तस्वीरें भी जारी की है, जिसमें देखा जा सकता है कि दोनों को काफी बेरहमी से मारा गया है। कोलकाता के जाधवपुर में भाजपा कार्यकर्ता रिंकू नस्कर के घर पर भी हमला हुआ था। उनके घर में जम कर लूटपाट मचाई गई। यहाँ तक कि बदमाश घर के पंखे भी खोल कर साथ ले गए।

प्रदेश भाजपा की मानें तो उत्तर 24 परगना के मिनाखां व बामनपुकुर क्षेत्र में उसके 500 कार्यकर्ताओं पर हमले किए गए हैं। यहाँ के कई गाँवों के भाजपा कार्यकर्ता जान बचाने के लिए पलायन कर गए हैं। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दावा किया था कि 1 लाख लोग TMC के गुंडों की हिंसा के कारण अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। उधर एक TMC कार्यकर्ता ने दिलीप घोष और मिथुन चक्रवर्ती के खिलाफ पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।

अभिनेता मिथुन चक्रवर्ती चुनाव के दौरान भाजपा में शामिल हुए थे। अपनी शिकायत में मृत्युंजय पॉल नाम के तृणमूल कार्यकर्ता ने आरोप लगाया है कि मिथुन और घोष भाजपा कार्यकर्ताओं को पूरे पश्चिम बंगाल में हिंसा और क्रूरता फैलाने के लिए भड़का रहे हैं, उत्तेजित कर रहे हैं। प्रदेश भाजपा ने इसे राज्य की सत्ताधारी पार्टी का दाँव बताते हुए कहा कि हिंसा की घटनाओं से ध्यान भटकाने के लिए ऐसा किया जा रहा है।

उधर बंगाल पहुँची MHA की 4 सदस्यीय समिति ने भी नॉर्थ 24 परगना के भाटपारा का दौरा किया। वहाँ उन्होंने हिंसा के बाद की स्थिति की समीक्षा की। पश्चिम मिदनापुर के पंचकुरी गाँव में केंद्रीय विदेश राज्यमंत्री वी मुरलीधरन की कार पर हमले के मामले में 8 लोगों को गिरफ्तार किया गया है। गृह मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव गोविंद मोहन आज राजभवन में राज्यपाल जगदीप धनखड़ से मिलेंगे। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने केंद्रीय नेताओं पर हिंसा भड़काने के आरोप लगाए हैं।

‘बेहतर होता काम की बात करते’: झारखंड में कोरोना का हाल जानने PM मोदी ने किया कॉल, CM हेमंत सोरेन ने की राजनीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार (मई 6, 2021) को कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों को फोन कॉल कर उनके राज्यों में कोरोना वायरस संक्रमण की स्थिति और उससे निपटने के लिए हो रही प्रयासों पर बात की। प्रधानमंत्री ने गुरुवार (6 मई 2021) को झारखंड, आंध्र प्रदेश, ओडिशा और तेलंगाना के मुख्यमंत्रियों से टेलीफोन पर चर्चा की। लेकिन, झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने पीएम के कॉल पर भी राजनीति की।

हेमंत सोरेन ने ट्विटर पर लिखा, “आज आदरणीय प्रधानमंत्री जी ने फोन किया। उन्होंने सिर्फ अपने मन की बात की। बेहतर होता यदि वे काम की बात करते और काम की बात सुनते।” लोगों ने सोरेन के इस ट्वीट पर नाराजगी भी जताई, क्योंकि प्रधानमंत्री का फोन कॉल राज्य में कोरोना से जुड़ी समस्याओं को जानने-समझने के लिए ही था।

लेकिन, झामुमो के हेमंत सोरेन ने इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ से जोड़ते हुए मजाक उड़ाया। इससे पहले भी प्रवासी मजदूरों के पलायन से लेकर कई मुद्दों पर हेमंत सोरेन केंद्र सरकार पर निशाना साध चुके हैं। गोड्डा के भाजपा सांसद निशिकांत दुबे ने हेमंत सोरेन को जवाब देते हुए कहा, “प्रधानमंत्री जी, मेरे मुख्यमंत्री जी को केवल अपना भ्रष्टाचार, बालू, कोयला, बलात्कार का आरोप, अपने प्रतिनिधि पर हत्या का आरोप ही काम का लगता है।”

दुबे ने तंज कसते हुए दावा किया कि वैसे भी हेमंत सोरेन को शाम के बाद कुछ याद ही नहीं रहता है। उन्होंने लिखा, “अपने पूरे जीवन कल में मैंने इतना घटिया मानसिकता का मुख्यमंत्री नहीं देखा, जिसको प्रधानमंत्री जी पर भी इतनी हल्की बात बोलने पर शर्म नहीं आती। प्रधानमंत्री जी ने लोगों का हाल पूछा, आप हाल पूछने के लिए प्रधानमंत्री जी पर नीच कमेंट करते हो। तो अपनी नहीं पद की मर्यादा का सम्मान सीखिए।”

हेमंत सोरेन को भाजपा नेताओं ने सलाह दी कि वे झारखंड के सरकारी अस्पतालों में हो रहे भ्रष्टाचार को रोकें। झारखंड में फ़िलहाल कोरोना के 60,633 सक्रिय मामले हैं और अब तक 2,70,089 लोग कोविड-19 से संक्रमित हो चुके हैं। पिछले 1 दिन में यहाँ 6974 नए मामले सामने आए हैं और 133 लोगों की मौत हुई है, जिससे कुल मृतकों का आँकड़ा 3479 पहुँच गया है। झारखंड में असम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर से भी कम टेस्टिंग हुई है।

कुछ दिन पहले दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भी प्रोटोकॉल का उल्लंघन करते हुए प्रधानमंत्री के साथ हो रही मुख्यमंत्रियों की ‘इन हाउस बैठक’ का लाइव प्रसारण चालू कर दिया था, जिसके लिए उन्हें पीएम मोदी ने बीच बैठक में टोका भी था। वहीं अब हेमंत सोरेन ने उस फोन कॉल पर पीएम मोदी का मजाक बनाया, जो राज्य की जनता के लिए किया गया था। बाद में यही विपक्षी नेता केंद्र पर राज्यों के साथ समन्वय बना कर न चलने का आरोप मढ़ते हैं।

गायों के लिए ऑक्सीमीटर, PM CARES वाले वेंटीलेटर्स फाँक रहे धूल: सरकार को ऐसे बदनाम कर रहे मीडिया गिरोह

इस समय भारत दो मोर्चों पर लड़ाई लड़ रहा है – एक कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते संक्रमण से और दूसरा मीडिया समूहों द्वारा फैलाई जा रही फेक न्यूज और नैरेटिव से। हाल ही में फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर्स ऑफ कॉमर्स एण्ड इंडस्ट्री (FICCI) ने 06 मई को बयान जारी करके यह स्पष्टीकरण दिया कि मीडिया का एक बड़ा वर्ग उसके द्वारा नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDMA) को 19 अप्रैल 2021 को लिखे गए पत्र को गलत तरीके से प्रस्तुत कर रहा है।

इस पत्र का जो हिस्सा विवादास्पद बताया जा रहा है, उसमें कहा गया है कि पीएम केयर्स फंड से निर्मित 40,000 वेन्टिलेटर सरकारी संस्थानों में बिना उपयोग के पड़े हुए हैं। इसका कारण है विशेषज्ञ पेशेवरों और ऑक्सीजन आपूर्ति की अनुपलब्धता।

इस पर FICCI ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि जब यह पत्र लिखा गया था, तब से आज तक परिस्थितियाँ काफी बदल गई हैं। वर्तमान में राज्यों की सरकारें इन वेन्टीलेटर्स का उपयोग कर रही हैं।  

FICCI ने बताया कि उन्होंने कभी यह नहीं कहा कि सरकार इस मामले पर ध्यान नहीं दे रही है अपितु उनका उद्देश्य था कि उपलब्ध संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल की ओर ध्यान आकर्षित किया जाए। FICCI द्वारा यह भी कहा गया है कि पिछले तीन हफ्तों में सरकारों ने कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान बहुत काम किया है।

FICCI के द्वारा जारी किए गए बयान में कहा गया है कि उनके द्वारा सरकार की आलोचना किए जाने की खबर भ्रामक है और उनका उद्देश्य मात्र यह है कि राज्य अथवा केंद्र की सरकार के साथ मिलकर Covid-19 संक्रमण से लड़ने में देश की सहायता की जाए। FICCI ने यह भी कहा है कि सभी को मिल कर लोगों की जान बचाने और उनकी आजीविका को सुरक्षित रखने के लिए सहयोग करना चाहिए।

FICCI के पत्र पर टाइम्स ऑफ इंडिया की भ्रामक रिपोर्ट

FICCI द्वारा NDMA को लिखे गए पत्र पर रिपोर्ट करते हुए टाइम्स ऑफ इंडिया ने जमीनी स्तर पर कुप्रबंधन का आरोप लगाया और कहा कि आपसी सामंजस्य और लापरवाही के कारण पीएम केयर्स फंड की सहायता से निर्मित 40,000 वेंटीलेटर्स बिना उपयोग के पड़े हुए हैं।

रूपाली मुखर्जी के ट्वीट का स्क्रीनशॉट
टाइम्स ऑफ इंडिया में प्रकाशित रूपाली की रिपोर्ट

टाइम्स ऑफ इंडिया में रूपाली मुखर्जी द्वारा लिखी गई रिपोर्ट के आधार पर ही वामपंथी न्यूज संस्थान द वायर के संस्थापक और संपादक एम के वेणु ने भी इस भ्रामक प्रचार-प्रसार में अपनी उपस्थिति दर्ज कराई और टाइम्स ऑफ इंडिया की बात दोहराई।

टाइम्स ऑफ इंडिया की खबर पर आधारित एमके वेणु के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

इसके अलावा टाइम्स ऑफ इंडिया और द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार को लेकर फेक न्यूज फैलाई। इन दोनों मीडिया समूहों में यह दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने गौशालाओं में गायों के लिए ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की व्यवस्था करने का आदेश दिया है। इसके अलावा इन रिपोर्ट्स में गायों के लिए हेल्प डेस्क भी बनाने की बात कही गई।

हालाँकि बाद में यह सामने आया कि कोरोना वायरस के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए ऑक्सीमीटर और थर्मल स्कैनर की व्यवस्था करने का आदेश गौशालाओं के स्टाफ के लिए था न कि गायों के लिए। लेकिन उत्तर प्रदेश सरकार के इस निर्णय को भ्रामक तरीके से प्रचारित किया गया।