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वीडियो: केदारनाथ मंदिर के कपाट खुले, पीएम मोदी ने किया पहला रुद्राभिषेक; 11 क्विंटल फूलों से की गई भव्य सजावट

केदारनाथ मंदिर के कपाट छह महीने के बाद सोमवार (17 मई 2021) को खुल गए हैं। वहीं, बदरीनाथ धाम के कपाट मंगलवार (18 मई 2021) को खोले जाएँगे। कपाट खुलने की प्रक्रिया सुबह 3 बजे शुरू हुई थी। मुख्य द्वार पर पूजा अर्चना व मंत्रोचार के बाद ठीक 5 बजे भगवान केदारनाथ मंदिर के कपाट खोल दिए गए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने केदारनाथ धाम में प्रथम रूद्राभिषेक पूजा की और जनकल्याण की कामना की। समारोह के समय रावल भीमाशंकर, मुख्य पुजारी बागेश लिंग, प्रशासन के कुछ अधिकारी और देवस्थानम बोर्ड मौजूद थे।

कोरोना के कारण चार धाम यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित किया ​

उत्तराखंड के मुख्यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने मंदिर के कपाट खुलने पर प्रसन्नता व्यक्त की साथ ही जनकल्याण और सबके अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना की। सीएम रावत ने कहा कि कोविड-19 महामारी के कारण यात्रा को अस्थायी रूप से स्थगित कर दिया गया था। हालाँकि, लोग बाबा केदारनाथ की पूजा अपने घरों से कर सकते हैं। उत्तराखंड के पर्यटन मंत्री सतपाल महाराज के मुताबिक, कोरोना वायरस महामारी खत्म होते ही चार धामों की यात्रा फिर से शुरू की जाएगी।

शुभ मुहुर्त में खुले केदारनाथ के कपाट, 11 क्विंटल फूलों से सजाया गया मंदिर

इस अवसर पर मंदिर को 11 क्विंटल फूलों से सजाया गया। इससे केदारनाथ मंदिर की सुंदरता और बढ़ गई। वहीं, समारोह में उपस्थित सभी लोग कोरोना प्रोटोकॉल का पालन करते नजर आए।

मालूम हो कि चारों धामों के कपाट शीतकालीन अवकाश में बंद कर दिए जाते हैं और इसके बाद अप्रैल-मई में भक्तों के लिए खोल दिए जाते हैं। यह लगातार दूसरा वर्ष है जब कोरोना महामारी के कारण मंदिर में यात्रियों के आने पर रोक लगाई गई ​है।

बता दें कि मंगलवार (18 मई 2021) को चमोली स्थित भगवान बदरीनाथ के कपाट भी सुबह सवा चार बजे ब्रह्ममुहूर्त में खोले जाएँगे। कोविड के कारण यहाँ भी श्रद्धालुओं को आने की अनुमति नहीं होगी।

उत्तराखंड सरकार द्वारा जारी एसओपी के मुताबिक, विधि विधान और पूजा अर्चना के साथ केदारनाथ और बदरीनाथ के कपाट खोले जाने के दौरान वहाँ तीर्थ पुरोहितों, देवस्थानम प्रबंधन बोर्ड के पदाधिकारियों और प्रशासनिक अधिकारियों समेत केवल 25 लोग ही उपस्थित रहेंगे।

IDF हवाई हमले में जिहादी कमांडर अबू हरबीद का सफाया, अमेरिका ने इजरायल को दी $735 मिलियन के हथियार

इजरायली रक्षा बलों ने सोमवार (मई 17, 2021) को इस्लामिक जिहाद के एक आतंकवादी का सफाया कर दिया है। टाइम्स ऑफ इजरायल ने इसकी सूचना दी। प्रारंभिक रिपोर्टों से पता चलता है कि हुसाम अबू हरबीद उत्तरी गाजा में अपने घर में इजरायली हवाई हमले में मारा गया। उसे उत्तरी गाजा में आतंकवादी संगठन के ऑपरेशन का कमांडर बताया गया था।

आईडीएफ के अनुसार, हुसाम अबू हरबीद ने 15 वर्षों तक इजरायली सैनिकों और नागरिकों के खिलाफ हमलों का नेतृत्व किया है। यह भी माना जाता है कि वह टैंक रोधी मिसाइल आग के लिए सीधे तौर पर जिम्मेदार था जिसने हाल ही में एक इजरायली नागरिक को घायल कर दिया था। इस्लामिक जिहाद की ओर से अभी तक कोई पुष्टि नहीं हुई है। एक अरब संदिग्ध को भी कथित तौर पर तटीय शहर जाफ़ा में आग लगने की घटना में गिरफ्तार किया गया है। घटना में एक 12 वर्षीय अरब बच्चे के घायल होने की खबर भी है।

वहीं इजरायली सेना का कहना है कि भारी हवाई हमलों में गाजा की सुरंगें नष्ट हो गईं। इजरायल ने कहा कि एयर स्ट्राइक में हमास द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भूमिगत सुरंगों को नष्ट कर दिया गया है। फिलिस्तीनी आतंकवादियों ने इजरायल के शहरों में रॉकेट बैराज दागे थे।  

सोमवार को दूसरे सप्ताह में लड़ाई लड़ी गई और युद्धविराम के लिए अंतरराष्ट्रीय आह्वान किया गया। इस्लामिक हमास द्वारा संचालित एन्क्लेव के क्षेत्रों पर भारी इजरायली हवाई हमलों की एक रात के बाद, इजरायल की सेना ने कहा कि गाजा के आतंकवादियों ने रात भर इजरायली शहरों की ओर लगभग 60 रॉकेट दागे थे। गाजा से बेर्शेबा और अशकलोन के इजरायली शहरों में रॉकेट दागे जाने के बाद, इजरायली जेट ने हमास द्वारा इस्तेमाल की जाने वाली भूमिगत सुरंगों के 15 किमी (नौ मील) को निशाना बनाया। इजरायल ने हमास के शीर्ष कमांडरों के नौ आवासों को भी निशाना बनाया।

वहीं अमेरिका ने एक हफ्ते में तीसरी बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद को इजरायल-फिलिस्तीन संघर्ष पर साझा बयान जारी करने से रोक दिया है। इसके अलावा बाइडेन प्रशासन ने इजरायल को सटीक-निर्देशित हथियारों में $735 मिलियन की बिक्री की मंजूरी दे दी है। हमास से लगभग एक सप्ताह पहले, गाजा पट्टी को नियंत्रित करने वाले आतंकवाद-नियुक्त संगठन ने इजरायल के खिलाफ तीव्र रॉकेट हमले शुरू किए, जिसमें कथित तौर पर कम से कम 10 इजरायली मारे गए थे। रॉकेटों का जवाब इजरायल के हवाई हमलों के साथ दिया गया है, जिसमें लगभग 200 फिलिस्तीनी मारे गए हैं। यह संकट 2014 के हमास-इजरायल युद्ध के बाद से सबसे खराब है जो लगभग दो महीने तक चला था।

इजरायल और फिलिस्तीन के बीच संघर्ष पिछले एक हफ्ते से जारी है और गाजा से रॉकेट दागे जा रहे हैं और आईडीएफ ने हमास और वहाँ सक्रिय अन्य आतंकवादी समूहों के खिलाफ जवाबी कार्रवाई की है। भारत ने दोनों ओर से हिंसा की घटनाओं की निंदा की है और तत्काल डी-एस्केलेशन का आह्वान किया है।

केजरीवाल सरकार ने वैक्सीन मैत्री पर PM मोदी को घेरने के लिए जारी की केवल मुस्लिम देशों की सूची, जमकर हुए ट्रोल

दिल्ली में कोरोना मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएँ मुहैया कराने में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नाकाम रहे हैं। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी अपनी नाकामियों के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहराने से बाज नहीं आ रही है। सोमवार (17 मई 2021) को ‘आप’ ने वैक्सीन को लेकर केंद्र सरकार पर हमला बोला।

आम आदमी पार्टी ने अपने आधिकारिक ट्विटर अकाउंट पर एक ट्वीट किया। इसमें उन देशों की सूची का उल्लेख किया, जिसमें आरोप लगाया गया था कि पीएम मोदी ने भारतीयों से वोट माँगे, लेकिन वैक्सीन विदेशों में भेज रहे हैं। ‘आप’ द्वारा जारी की गई इन देशों की सूची में मुस्लिम-बहुल राष्ट्र हैं और सबसे ऊपर भारत के कट्टर विरोधी पाकिस्तान का नाम है।

‘आप’ ने बेबुनियाद आरोप लगाते हुए कहा कि पीएम मोदी भारतीयों से वोट माँगते हैं और मदद इस्लामिक देशों की करते हैं। नफरत और भ्रामक सूचनाएँ फैलाने को लेकर केजरीवाल सरकार ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई है। सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें सच से रूबरू करवाया।

भारत ने 95 देशों को की वैक्सीन सप्लाई

कई सोशल मीडिया यूजर्स ने इस बात पर प्रकाश डाला कि कोरोना म​हामारी के इस दौर में भारत ने वैश्विक समुदाय के समक्ष मदद का हाथ बढ़ाया है। न केवल इस्लामिक देशों को बल्कि संयुक्त राष्ट्र शांति सेना सहित कुल 95 देशों को वैक्सीन उपलब्ध कराई है।

हालाँकि, पाकिस्तान को COVAX के माध्यम से एस्ट्राजेनेका-ऑक्सफोर्ड की वैक्सीन प्राप्त हुई है। यह एक विश्वव्यापी पहल है, जिसका उद्देश्य Gavi, वैक्सीन एलायंस, द कोएलिशन फॉर एपिडेमिक प्रिपेयर्डनेस इनोवेशन और विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा निर्देशित COVID-19 वैक्सीन तक समान पहुँच है।

सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया COVAX को अपनी स्वदेशी वैक्सीन देने के लिए अनुबंधित है। ऐसे में भारत यह तय नहीं कर सकता कि Gavi वैक्सीन के साथ क्या करता है और किसे दान करता है। भारत भी Gavi के लाभार्थियों में से एक है। इसलिए, ‘आप’ द्वारा भारत सरकार पर पाकिस्तान को वैक्सीन दान करने का आरोप लगाना पूरी तरह से गलत है।

हालाँकि, AAP के ट्वीट में भारत द्वारा दी गई वैक्सीन प्राप्त करने वाले देशों की सूची में पाकिस्तान का जिक्र सबसे पहले देश के रूप में किया गया है। स्पष्ट रूप से ‘आप’ ने इसके जरिए लोगों के बीच केंद्र सरकार के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश की है। ‘आप’ के अनुसार, भारत ने अपने कट्टर विरोधी पाकिस्तान को टीके उपलब्ध कराए हैं, जबकि ऐसा नहीं है।

सोशल मीडिया यूजर्स ने उन देशों की लिस्ट भी जारी की है, जिन्हें आम आदमी पार्टी ने छोड़ दिया था। यूजर्स के अनुसार केजरीवाल सरकार ने केंद्र सरकार की छवि बिगाड़ने के लिए इस तरह की भ्रामक सूचनाओं का सहारा लिया है, जिसे उन्होंने पोस्ट करने से पहले जाँचना भी उचित नहीं समझा।

केवल मुस्लिम राष्ट्रों को उजागर करने में AAP की क्षुद्र राजनीति को कई लोगों ने ट्विटर पर जगजाहिर कर दिया।

बता दें कि केजरीवाल सरकार दिल्ली में कोरोना मरीजों को सभी स्वास्थ्य सुविधाएँ देने में पूरी तरह से विफल रही है। इसको लेकर “आप” आए दिन अपने बचाव के लिए क्षुद्र राजनीति का सहारा लेती रहती है।

गुरुवार (13 मई 2021) को उसने सरप्लस (अतिरिक्त) ऑक्सीजन का ऐलान करते हुए कहा कि जरूरतमंद राज्यों को यह दिया जा सकता है। दिलचस्प बात यह है कि यह घोषणा सुप्रीम कोर्ट द्वारा राष्ट्रीय राजधानी में ऑक्सीजन की आपूर्ति, वितरण और उपयोग का ऑडिट करने के लिए एक पैनल की स्थापना के बाद की गई है।

बंगाल की उबड़-खाबड़ डगर: नारदा में TMC पर कसा फंदा तो CBI से ममता ने दिखाई पुरानी रार

सीबीआई ने आज (17 मई 2021) नारदा स्कैम में चार नेताओं को गिरफ्तार किया है। इनमें शामिल फिरहाद हाकिम और सुब्रत चटर्जी मौजूदा ममता बनर्जी सरकार के मंत्री हैं। मदन मित्रा सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के विधायक हैं, जबकि सोवन चटर्जी कोलकाता के मेयर रह चुके हैं।

विधानसभा चुनाव परिणामों के बाद राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने सीबीआई को इनके खिलाफ नारदा स्टिंग ऑपरेशन मामले में अभियुक्त बनाने की अनुमति दी थी। यह गिरफ़्तारी तब हुई है जब चुनावों के बाद राज्य में हो रही भीषण हिंसा के बीच यह अनुमान लगाया जा रहा था कि राज्यपाल द्वारा दी गई अनुमति का क्या होगा।

इन गिरफ्तारियों के साथ ही केंद्र और राज्य सरकार के बीच सम्बंधों में एक नए अध्याय की शुरुआत हो गई है। दलों के रूप में भाजपा और तृणमूल कान्ग्रेस के बीच सम्बंध चाहे जैसे रहे हों पर पिछले पाँच वर्षों में ममता सरकार और केंद्र सरकार के बीच सम्बंध अच्छे नहीं रहे हैं। यदि हाल के इतिहास को खँगाला जाए तो दोनों सरकारों के सम्बंध पिछले विधानसभा चुनावों तक इस तरह नहीं बिगड़े थे।

2016 के विधानसभा चुनाव में कुछ तैयारी पूरी न होने की वजह से और कुछ राज्य में संगटन की कमी की वजह से भाजपा ने तृणमूल का पूरी तरह से विरोध न करने का फैसला किया और यही कारण था कि तब राजनीतिक परिस्थिति दोनों दलों के बीच सीधे तनाव तक नहीं पहुँची थी। ममता बनर्जी का विरोध बीच-बीच में केंद्र और उसके नेतृत्व के बारे में भद्दी टिप्पणियों तक सीमित रहा था।

दोनों सरकारों के बीच सम्बंध बिगड़ने की शुरुआत नोटबंदी के बाद हुई जब ममता बनर्जी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विरोध को अपनी ओर से एक नया आयाम दिया। नोटबंदी और प्रधानमंत्री मोदी के विरुद्ध अपनी प्रतिक्रियाओं में ममता बनर्जी ने विरोध को एक अलग ही स्तर पर पहुँचा दिया। कोलकाता के साथ ही पश्चिम बंगाल के सभी शहरों में मोदी विरोधी नारों वाले बड़े-बड़े पोस्टर लगाए गए। इसके साथ ही मुख्यमंत्री बनर्जी ने यह माँग भी रखी कि भाजपा से किसी और को प्रधानमंत्री बना दिया जाए पर मोदी को किसी भी हालत में हटाया जाए।

अपनी इस इच्छा और माँग से लैस होकर वे दिल्ली पहुँची और अरविंद केजरीवाल के साथ मिलकर मोर्चा खोल दिया। कारण चाहे जो हो, केजरीवाल भी नरेंद्र मोदी से लगभग उतने ही नाराज़ थे जितनी ममता बनर्जी। विरोध के शुरुआती दिनों में ममता को शायद नीतीश कुमार से भी समर्थन की उम्मीद थी पर नीतीश कुमार नोटबंदी के मुद्दे पर प्रधानमंत्री मोदी के समर्थन में उतर गए और ममता बनर्जी का नीतीश कुमार के साथ मिलकर क्षेत्रीय विरोध की योजना केवल योजना धरी ही रह गई।

इसके साथ ही राज्य-केंद्र सम्बंधों में दरार बढ़ती गई। शारदा चिट फंड स्कैम में कोलकाता के पूर्व पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार की भूमिका को लेकर सीबीआई जाँच का विरोध कर रही ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया और राजनीतिक आचरण ने इन सम्बंधों को और खराब किया। इसी मामले में तृणमूल कान्ग्रेस के कई सांसदों के विरुद्ध सीबीआई ने चार्जशीट दाखिल किया और उनमें से कुछ की गिरफ़्तारी भी हुई। उसके बाद लगभग हर मुद्दे पर दोनों सरकारों के बीच तनाव रहा। नारदा केस में सीबीआई द्वारा अपने नेताओं की गिरफ्तारी के बाद टीएमसी एक बार फिर उसे रस्ते चलती दिख रही है।

इससे पहले हाल ही में संपन्न हुए विधानसभा चुनावों के दौरान दोनों दलों के नेताओं के बयानों की वजह से और प्रचार के दौरान भाजपा नेताओं पर तृणमूल कॉन्ग्रेस की ओर से हुए हमलों ने राज्य में राजनीतिक माहौल बिगाड़ने में प्रमुख भूमिका निभाई। पश्चिम बंगाल में राजनीतिक हिंसा का इतिहास पुराना होने के बावजूद चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हुई हिंसा का जो रूप दिखाई दिया वह पश्चिम बंगाल की राजनीति में पहले दिखाई नहीं दिया था। यही कारण था कि राज्यपाल और राज्य सरकार के बीच पहले से बिगड़े सम्बंध और बिगड़ गए।

अब जबकि सीबीआई ने ममता बनर्जी के मंत्रियों को गिरफ्तार कर लिया है, पहले से ही बिगड़े इन सम्बंधों के और बिगड़ने की आशंका है। ममता बनर्जी और तृणमूल के समर्थकों की ओर से इन गिरफ्तारियों का विरोध शुरू हो चुका है। देखने वाली बात यह रहेगी यह मामला आगे किस दिशा में जाता है। इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता कि पहले राज्य के सत्ताधारी दल और फिर राज्य सरकार की भूमिका इस हिंसा में संविधान सम्मत नहीं रही है।

हिंसा पर कोलकाता उच्च न्यायालय द्वारा उठाए गए प्रश्नों पर ममता बनर्जी की सीधी प्रतिक्रिया कि ‘कोई हिंसा नहीं हुई’, लोकतांत्रिक मूल्यों में उनके और उनकी सरकार के विश्वास को उजागर करते हैं। इन गिरफ्तारियों के बाद शुरुआती प्रतिक्रियाएँ आगे जाकर कैसा रूप लेती हैं और सत्ताधारी दल की ओर से भविष्य में आने वाली प्रतिक्रिया राज्य में राजनीतिक माहौल को आकार प्रदान करेंगी।

राज्य सरकार और केंद्र के बीच लगातार बिगड़ रहे सम्बंधों के निकट भविष्य में सुधरने की आशा बहुत कम दिखाई दे रही है। इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है भविष्य में होनेवाले म्यूनिसिपल चुनाव। राज्य में म्यूनिसिपल चुनाव काफ़ी समय से नहीं हुए हैं। ऐसे में एक बार कोरोना पर काबू पा लिए जाने के बाद राजनीतिक दल इन चुनावों को कराने की माँग के साथ सड़कों या न्यायालयों में उतरेंगे। यह वह समय होगा जब राज्य में राजनीतिक तापमान फिर से चढ़ेगा और यह स्थिति तृणमूल कॉन्ग्रेस के लिए उपयुक्त नहीं रहेगी।

विधानसभा चुनावों में मिली हार को कुछ हद तक भुलाने के लिए लेफ़्ट और कॉन्ग्रेस फिर से चुनावी राजनीति में पूरी ताक़त के साथ उतरना चाहेंगे। ऐसा करना इन दलों के लिए इसलिए भी आवश्यक होगा क्योंकि राज्य में अस्तित्व बचाए रखने की लड़ाई लड़ने के अलावा इन दलों के पास कोई और चारा न होगा। ये परिस्थितियाँ भाजपा को एक मौका देंगी कि वह ताजा बने अपने संगठन को मज़बूती प्रदान करे और राज्य में अगली राजनीतिक लड़ाई के तैयार हो।

आने वाले समय में ममता बनर्जी और उनकी सरकार के लिए सबसे बड़ी चुनौती होगी राज्य की अर्थव्यवस्था। राज्य ने पिछले कई वर्षों में अर्थव्यवस्था या उद्योग में निवेश नहीं देखा है। कृषि के क्षेत्र में भी सुधार या नए इंफ्रास्ट्रक्चर बनाने को लेकर पिछले दस वर्षों में कोई नई पहल नहीं हुई है। रोजगार की समस्या बढ़ती गई है। इन सब के बीच ममता बनर्जी ने तीसरी बार सत्ता सँभाली है। इन बातों का उनके और उनकी सरकार के ऊपर जो दबाव रहेगा उसके बीच वे केंद्र से अपने टकराव को कहाँ तक जारी रख सकेंगी, यह बात उनके सरकार का राजनीतिक भविष्य तय करेगी।

ऐसे में यह समय ही बताएगा कि राज्य की राजनीति किस ओर जाती है पर आज अवश्य कहा जा सकता है कि फिलहाल ममता बनर्जी और उनकी सरकार के लिए रास्ते सीधे नहीं हैं।

ईसाई धर्मांतरण की पोल खोलने वाले MP राजू का आर्मी हॉस्पिटल में होगा मेडिकल टेस्ट, AP सीआईडी ने किया था टॉर्चर: SC का आदेश

आंध्र प्रदेश में वाईएसआर कॉन्ग्रेस पार्टी के बागी सांसद कनुमुरी रघुराम कृष्णम राजू सीआईडी द्वारा टॉर्चर किए जाने के खिलाफ याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (17 मई 2021) को सिकंदराबाद स्थित सेना अस्पताल में उनकी मेडिकल जाँच कराने का आदेश दिया है।

सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस विनीत सरन और बीआर गवई की खंठपीठ ने राजू की याचिका पर यह आदेश दिया। इससे पहले आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने देश द्रोह के आरोप में गिरफ्तारी पर जमानत देने से इंकार कर दिया था।

वाईएसआर सांसद को सीआईडी ने शुक्रवार (14 मई 2021) को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया था। उन्हें जब मजिस्ट्रेट के पास पेश किया गया तो उनके वकील ने दावा किया कि उन पर पुलिस ने थर्ड डिग्री का इस्तेमाल किया। इसकी वजह से अब वे चलने में भी सक्षम नहीं हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि राजू की मेडिकल जाँच तक यह न्यायिक हिरासत मानी जाएगी। शीर्ष कोर्ट ने तेलंगाना उच्च न्यायालय को एक न्यायिक अधिकारी को नामित करने का निर्देश दिया गया है, जो कि मेडिकल एक्जामिनेशन के दौरान राजू के साथ रहेगा। राजू की मेडिकल टेस्ट की वीडियोग्राफी की जाएगी और सीलबंद लिफाफे में बंद रिपोर्ट कोर्ट को देनी होगी।

खंडपीठ ने कहा, “हम निर्देश देते हैं कि याचिकाकर्ता-कनुमुरी रघुराम कृष्णम राजू को सेना के अस्पताल में भर्ती किया जाएगा और अगले आदेश तक मेडिकल देखभाल के लिए रखा जाएगा, उनकी न्यायिक हिरासत ही मानी जाएगी। कोर्ट के आदेश के मुताबिक सेना के अस्पताल में भर्ती किए जाने का सारा खर्च राजू को उठाना होगा।”

शीर्ष अदालत के मुताबिक, “दिल्ली उच्च न्यायालय के आदेशों के तहत कनुमुरी रघुराम कृष्णम राजू को दी गई वाई श्रेणी की सिक्युरिटी उन्हें केवल सेना के अस्पताल तक ही ले जाएगी और चिकित्सा परीक्षण के समय उसे वहाँ रहने की आवश्यकता नहीं है।”

आदेश में कहा गया है कि याचिकाकर्ता (राजू) की मेडिकल जाँच सिकंदराबाद स्थित सैन्य अस्पताल के प्रमुख द्वारा गठित तीन सदस्यीय डॉक्टरों का बोर्ड करेगा। सुप्रीम कोर्ट में राजू पक्ष वरिष्ठ वकील मुकुल रोहतगी ने रखा। उन्होंने राजू को अंतरिम जमानत और उनकी किसी निजी अस्पताल से जाँच कराने का अनुरोध कोर्ट से किया है। रोहतगी ने कहा कि राजू की पिछले साल ओपन हार्ट सर्जरी हुई थी, इसलिए मजिस्ट्रेट ने एक सरकारी और एक निजी अस्पताल से मेडिकल चेकअप का आदेश दिया है।

उन्होंने यह भी तर्क दिया कि राजू ने कभी भी हथियार नहीं रखे और न ही कभी हिंसा भड़काने की कोशिश की। बावजूद इसके उनपर देशद्रोह के प्रावधान को लागू किया गया है।

वहीं आंध्र प्रदेश सरकार का पक्ष रखते हुए वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने कोर्ट से मामले की सुनवाई को तक के लिए बढ़ाने की अपील करते हुए कहा कि राज्य को अपील की एक प्रति नहीं मिली थी।

गौरतलब है कि आंध्र प्रदेश में ईसाई धर्मांतरण के मुद्दे पर राजू ने एक चौंकाने वाला खुलासा करते हुए कहा था कि प्रदेश में सरकारी आँकड़ों में भले ईसाइयों की संख्या 2.5% बताई जाती है, लेकिन वास्तविकता में यह 25% से कम नहीं है।

‘ऐसे दिखाओ जैसे कुछ हुआ ही न हो’: बीवी के रहते कर्मचारियों से फ्लर्ट, बिल गेट्स की रंगीनमिजाजी के कुछ और किस्से बाहर

हाल ही में दिग्गज आईटी कंपनी मॉइक्रोसॉफ़्ट के संस्थापक बिल गेट्स और मिलिंडा गेट्स के तलाक के साथ ही उनके 27 वर्षों के रिश्ते का अंत हो गया। अब कंपनी के कामकाज के दौरान भी उनके एक अफेयर की बात सामने आई है। माइक्रोसॉफ्ट की ही एक महिला कर्मचारी के साथ बिल गेट्स का अफेयर था और वो उसे डेट पर चलने के लिए भी कहते थे। NYT की रिपोर्ट में ये दावा किया गया है।

खबर के अनुसार, मिलिंडा फ्रेंच गेट्स के साथ शादीशुदा रहने के बावजूद बिल गेट्स ने 2 महिलाओं के बारे में पूछताछ की थी। इनमें से एक उनकी कंपनी में कार्यरत थीं, जबकि एक फाउंडेशन में थी। 2006 में एक महिला कर्मचारी ने उन्हें प्रेजेंटेशन दिया था, जिसके बाद बिल गेट्स उस पर फिदा हो गए थे और डेट पर चलने को कहा था। फिर गेट्स ने उसे भेजे ईमेल में लिखा था, “अगर इससे तुम्हें कोई असुविधा है तो ऐसे दिखाओ जैसे कुछ हुआ ही न हो।”

उस महिला ने कभी इस बारे में आगे बात नहीं की। इसी तरह अपने फाउंडेशन की एक महिला कर्मचारी पर भी बिल गेट्स का दिल आ गया था। एक वर्क ट्रिप के दौरान गेट्स ने उक्त महिला से कहा था कि वो उसे देखना चाहते हैं और क्या वो उनके साथ डिनर डेट पर चलेगी? महिला ने NYT से कहा कि उसे ये काफी अजीब लगा लेकिन वो हँस कर रह गई थी। ये स्पष्ट नहीं है कि मिलिंडा गेट्स को ये चीजें पूरी तरह पता थी या नहीं।

बता दें कि 130 बिलियन डॉलर (9.53 लाख करोर रुपए) की संपत्ति के साथ गेट्स दंपति दुनिया के सबसे अमीर दंपति हुआ करते थे। गेट्स के मैनेजर माइकल लर्सन के खिलाफ भी यौन शोषण के आरोप लगे थे। वो गेट्स की संपत्ति और निवेश का प्रबंधन करते थे। उनके खिलाफ आरोपों को हल्के में लिया गया, जिससे मिलिंडा नाराज थीं। लर्सन को छुट्टी पर भेज दिया गया था और महिला के साथ सेटलमेंट होने के बाद उन्हें वापस बहाल कर दिया गया।

बिल गेट्स के घर में होती थी ‘वाइल्ड पार्टी’

हाल ही में ये भी खुलासा हुआ कि बिल गेट्स के घर में ‘वाइल्ड पार्टीज’ हुआ करती थी, जिसमें बड़ी संख्या में महिलाएँ शामिल होती थीं। पत्रकार जेम्स वॉलेस ने खुलासा किया कि गेट्स ऐसे नाइट क्लब में जाया करते थे जहाँ न्यूड डांस होता है और वो कई बार क्लब में डांस करने वालीं स्ट्रिपर्स को हायर करके अपने घर भी ले आते थे। उन्होंने बताया कि जवानी के दिनों में वो न्यूड बालाओं के साथ स्विमिंग पूल का आनंद उठाते थे।

उक्त पत्रकार ने ये भी खुलासा किया था कि मिलिंडा के साथ रिश्ते में रहने के बावजूद बिल गेट्स माइक्रोसॉफ्ट की कर्मचारियों के साथ फ़्लर्ट किया करते थे और कई महिला पत्रकारों के साथ भी अंतरंग रिश्ते रखते थे, लेकिन कोई उनकी कंपनी के खिलाफ नकारात्मक खबरें छापने से बचता था। वाशिंगटन के सिएटल स्थित उनके घर में न्यूड पार्टियाँ होती थीं। हाल ही में एक चीनी महिला के साथ भी गेट्स का नाम जुड़ा था।

बिल और मिलिंडा ने अपने तलाक के संयुक्त बयान में कहा था, “हम अब भी उस अभियान में विश्वास करते हैं, जो हमने शुरू किया था। हम इस संगठन के लिए काम करना जारी रखेंगे। लेकिन, अपने जीवन के अगले चरणों में हम एक पति-पत्नी के रूप में और विकसित नहीं हो सकते। अब हम जब नई ज़िंदगी शुरू करने जा रहे हैं, आप सबसे आग्रह है कि हमें इसके लिए प्राइवेसी और जगह दें।” बिल गेट्स 65 साल के हैं। मिलिंडा उनसे 9 वर्ष छोटी है।

‘राज्यपाल धनखड़ सनकी, रक्तपिपासु’: नारदा स्कैम में मंत्री-विधायक की CBI गिरफ्तारी से बौखलाई TMC

नारदा स्टिंग टेप मामले में अपने चार नेताओं को सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए जाने के बाद पश्चिम बंगाल की सत्ताधारी पार्टी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) बौखला गई है। पार्टी के सांसद कल्याण बनर्जी ने राज्यपाल जगदीप धनखड़ के लिए असभ्य भाषा का प्रयोग किया है। उन्होंने कहा कि पार्टी अब CBI की कार्रवाई के खिलाफ कोर्ट जाएगी। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्यपाल ने राज्य सरकार से सलाह लिए बिना ही बदले की भावना से कार्रवाई की अनुमति दी।

कल्याण बनर्जी ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार कोविड-19 आपदा काल में पुलिस बिना किसी जरूरत के किसी को भी गिरफ्तार नहीं कर सकती या हिरासत में नहीं ले सकती। उन्होंने कहा कि इस आदेश के बावजूद 4 ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें दो मंत्री और दो पूर्व मंत्री हैं। उन्होंने राज्यपाल जगदीप धनखड़ को ‘रक्तपिपासु’ करार देते हुए कहा कि वो 2024 लोकसभा चुनाव में बीजेपी से टिकट के लिए जुगाड़ लगा रहे हैं।

राज्यपाल ‘सनकी’ की तरह यहाँ-वहाँ घूम रहे: कल्याण बनर्जी

बकौल कल्याण बनर्जी, लोकसभा टिकट के लिए जगदीप धनखड़ TMC के खिलाफ ये सब कर रहे हैं, ताकि भाजपा को खुश किया जा सके। बनर्जी ने राज्यपाल के लिए ‘सनकी’ शब्द का इस्तेमाल भी किया। उन्होंने कहा, “उस सनकी राज्यपाल को अब एक मिनट भी यहाँ नहीं रुकना चाहिए। वो एक पागल कुत्ते की तरह घूम रहा है।” बता दें कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को कानून-व्यवस्था का पालन कराने की सलाह दी थी।

बता दें कि कल्याण बनर्जी खुद कलकत्ता हाईकोर्ट में वरिष्ठ अधिवक्ता हैं। 64 वर्षीय बनर्जी ने 2019 में पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर लोकसभा क्षेत्र से लगातार तीसरी बार चुनाव जीता। 2001 में वो आसनसोल उत्तर से विधायक भी बने थे। कॉमर्स से स्नातक के बाद LLB की डिग्री प्राप्त करने वाले बनर्जी ने TMC के लिए कोर्ट में कई केस लड़े हैं। वो 1981 से ही कलकत्ता हाईकोर्ट में प्रैक्टिस करते रहे हैं। अक्टूबर 2009 में वो एक संसदीय प्रतिनिधिमंडल में UK और USA भी गए थे।

इससे पहले अपने नेताओं की गिरफ्तारी की सूचना पर खुद सीएम ममता बनर्जी CBI के दफ्तर पहुँच कर खुद को गिरफ्तार करने की माँग करने लगीं। तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के कार्यकर्ताओं ने जाँच एजेंसी के दफ्तर पर पत्थरबाजी की और बैरिकेड तोड़कर भीतर दाखिल होने की कोशिश की।

मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर शोभन चटर्जी CBI के शिकंजे में हैं।  सीबीआई ने इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश पर 16 अप्रैल 2017 को मामला दर्ज किया था।

गाजा पर 1180 हमले, इजरायल पर दागे 3150 रॉकेट: युद्धविराम को नेतन्याहू की ना, बोले- जंग जारी रहेगी

इजरायल और फलस्तीन के बीच जारी संघर्ष थमता नहीं दिख रहा है। युद्धविराम के अमेरिकी दबाव को खारिज करते हुए इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा है कि जंग जारी रहेगी। उन्होंने कहा कि हर देश को अपनी रक्षा का अधिकार है। फलस्तीनी आतंकी संगठन हमास का युद्धविराम प्रस्ताव वे पहले ही ठुकरा चुके हैं।

इजरायली डिफेंस फोर्स (IDF) ने बताया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से उसने गाजा में 1180 से ज्यादा हमले किए हैं। वहीं इजरायल पर अब तक करीब 3150 रॉकेट दागे जा चुके हैं। इनमें से 90% रॉकेट को ‘आयरन डोम’ ने आसमान में ही नष्ट कर चुकी है। इजरायल और हमास के बीच बीते सोमवार (10 मई 2021) से संघर्ष ने जोर पकड़ ​रखा है।

इजराइल ने अघोषित युद्ध के आठवें दिन सोमवार (17 मई 2021) को गाजा पट्टी पर फिर हमला किया। संघर्ष में अब तक 207 लोग मारे जा चुके हैं। इनमें 197 फलस्तीनी हैं। डेली मेल के मुताबिक रविवार देर रात से सोमवार (17 मई 2021) सुबह तक 54 इजरायली जेट विमानों ने गाजा शहर और उसके आसपास के 35 ठिकानों पर बमबारी की। आईडीएफ ने कहा कि उसने हमास कमांडरों के 9 शीर्ष कमांडरों के घरों को निशाना बनाया। इनमें से कुछ घर का इस्तेमाल हथियारों को स्टोर करने के लिए भी होता था।

इस बीच, हमास ने इजरायल पर 70 रॉकेट दागे। आईडीएफ के अनुसार इनमें कम से कम 10 गाजा में गिर गए। एक रॉकेट की चपेट में अश्कलोन में यहूदियों का एक मंदिर आ गया। रविवार (16 मई 2021) को भी गाजा पट्टी में हमास प्रमुख के घर पर बम बरसाए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक, रविवार शाम गाजा शहर में की गई इजरायली एयर स्ट्राइक में तीन इमारतें तबाह हो गईं और 42 लोग मारे गए।

इस्लामी मुल्कों के संगठन OIC ने इजरायल की निंदा की है। 57 देशों के इस संगठन ने इजरायल के हमलों को ‘व्यवस्थित अपराध’ करार देते हुए कहा है कि UN जनरल असेम्ब्ली की बैठक बुलाई जानी चाहिए। इन देशों ने एक प्रस्ताव पारित कर कहा है कि इजरायल ने आक्रामक तरीके से फलस्तीन की जमीन कब्जाई है और इस्लामी उम्माह की फलस्तीन के प्रति नैतिक, ऐतिहासिक व कानूनी जिम्मेदारी बनती है।

दूसरी ओर इस्लामी देश संयुक्त अरब अमीरात (UAE) ने हमास को चेताया है। उसने कहा है कि यदि शांति नहीं हुई तो गाजा के लोगों का जीवन नर्क हो जाएगा। साथ ही उसने गाजा में इंफ्रास्ट्रक्चर परियोजनाओं में निवेश नहीं करने की भी चेतावनी दी है। वहीं, भारत ने सधी हुई प्रतिक्रिया देते हुए दोनों पक्षों से शांति से काम लेने की अपील की है।

हिन्दू राजाओं ने बसाया, इस्लामी व पुर्तगाली ताकतों ने किया अत्याचार: 3000 वर्ष पुराना है भारत में यहूदियों का इतिहास

फिलिस्तीन में बैठे हमास के आतंकियों ने इजरायल पर रॉकेट दागे, जिसके जवाब में इजरायल ने भी करारा हमला किया। 57 इस्लामी मुल्कों वाले संगठन OIC ने एक सुर में उम्माह का हवाला देते हुए फिलिस्तीन का समर्थन किया और इजरायल की निंदा की। भारत ने भले ही दोनों पक्षों को शांति के लिए समझाया, लेकिन भारतीयों ने जिस तरह से इजरायल के समर्थन में आवाज़ बुलंद किया, उसे दिल्ली में वहाँ के राजदूत ने भी सलाम किया।

ये सब कुछ अचानक नहीं हुआ। समुद्र और इस्लामी मुल्कों से घिरे इजरायल में यहूदियों ने किस तरह से अपना अस्तित्व बचा कर रखा है, ये एक बहुत ही बहादुरी भरा कार्य है। अपनी तकनीकी क्षमता और निर्णय लेने की निडरता के कारण इजरायल से उलझने वाले आतंकियों को इसके भयंकर दुष्परिणाम भुगतने पड़ते हैं। हमास तो दशकों से उसका दुश्मन बना हुआ है और पूरे इजरायल पर कब्ज़ा इन इस्लामी कट्टरपंथियों का लक्ष्य है।

भारत का यहूदियों से काफी प्राचीन सम्बन्ध रहा है। भारत के मालाबार इलाके में यहूदी प्राचीन काल से ही बसे हुए थे, जिन्हें ‘कोचीन यहूदी’ कहा गया। वो वहाँ कैसे आए, इसे लेकर अलग-अलग दस्तावेज अलग-अलग दावे करते हैं। माना जाता है कि राजा सोलोमन (970-931 BC राज्यकाल) के समय व्यापारी के रूप में ये यहूदी केरल आए थे। इससे इजरायल और दक्षिण भारत के बीच होने वाले प्राचीन व्यापार के बारे में भी पता चलता है।

जब यहूदियों के खिलाफ दुनिया भर में अत्याचार हो रहे थे, तब भी भारत में वो सुरक्षित थे और आज तक उन्हें अपने मजहब को लेकर घृणा का सामना नहीं करना पड़ा। अब यहाँ के यहूदियों ने अपनी संस्कृति को भारतीय संस्कृति के साथ जोड़ कर अपनी पहचान को नया रूप दिया है। 1940 के दशक में भारत में 20,000 से भी अधिक यहूदी रहते थे लेकिन इजरायल के गठन के बाद उनमें से कई ने वहाँ घर बसाया।

यहूदियों में भी कई प्रकार के समुदाय हैं। भारत में भी लगभग 7 प्रजाति के यहूदी रहते हैं। कोचीन के अलावा ‘चेन्नई यहूदी’ भी हैं, जो 17वीं शताब्दी में हीरे के कारोबारी के रूप में भारत आए थे। वहीं ‘नगरकोइल यहूदी’ अरब से 52 AD के आसपास आए थे। इसके बाद आते हैं वो यहूदी, जिन्हें गोवा पर पुर्तगाल के आक्रमण के बाद अत्याचार का सामना करना पड़ा। ‘बेने इजरायल’ समुदाय के यहूदी कराची में रहते थे, लेकिन विभाजन के बाद उन्हें भागना पड़ा।

लगभग 250 वर्ष पहले सूरत में आकर कुछ ‘बगदादी यहूदी’ बसे थे। इजरायल के ‘खोए हुए समुदायों’ में से एक समूह तेलुगु राज्यों में भी बसा हुआ है। कोचीन आए यहूदियों के बाद इजरायल में एक ‘सेकेण्ड टेम्पल’ को ध्वस्त किए जाने के बाद वहाँ से कई यहूदियों को भागना पड़ा, जिनमें से एक खेप भारत भी आया। जेरुसलम में स्थित ‘सेकेण्ड टेम्पल’ रोमन साम्राज्य ने अपने खिलाफ विद्रोह को दबाने के लिए इस मंदिर को ध्वस्त कर दिया।

रोमन के खिलाफ यहूदियों ने तीन बड़े विद्रोह किए। उन्हें इसकी कीमत भी चुकानी पड़ी। यहूदियों का नरसंहार हुआ, उन्हें भगाया गया और अपने ही देश को छोड़ने के लिए मजबूर किया गया। कोचीन यहूदियों के भारतीय राजाओं के साथ इतने अच्छे सम्बन्ध थे कि उन्हें ताँबे की प्लेट देकर समाज में एक अलग दर्जा दिया गया था। उस समय के दस्तावेजों से पता चलता है कि यहूदियों को कुछ गाँवों में ‘दुनिया ख़त्म होने तक’ रहने के अधिकार दिए गए थे।

ईसाई धर्म की पवित्र पुस्तक बाइबिल में लिखा है कि किस तरह राजा सोलोमन ‘ओफिर’ नामक स्थान से समुद्र के रास्ते सोने-चाँदी का व्यापार करता था। सर विलियम स्मिथ ने ‘अ डिक्शनरी ऑफ द बाइबिल’ में केरल के पूवर को ही ‘ओफिर’ बताया है। कुछ इतिहासकारों ने इसे केरल के कोझिकोड में स्थित प्राचीन नगर बेपुर के रूप में चिह्नित किया। वहीं मैक्स मुलर ने ब्रिटिश काल में गुजरात में स्थित अभिरा को ‘ओफिर’ बताया।

इस जगह को प्राचीन दस्तावेजों में चन्दन, मोर और हाथीदाँत के लिए भी प्रसिद्ध बताया गया है। केरल में 70 AD में रोमन अत्याचार के बाद बड़ी संख्या में यहूदी शरणार्थी पहुँचे। कोडुंगल्लार के हिन्दू महाराजा ने न सिर्फ उनका स्वागत किया, बल्कि रहने के लिए जमीन भी दी। उन्हें अपने धर्म के पालन की आज़ादी दी गई। उस समय केरल में चेरा/पेरुमल राजाओं का शासन था। अंजुवन्नम में भारत के पहले यहूदी गाँव के बसने के सबूत मिलते हैं।

राजा भास्कर रवि वर्मा ने इस गाँव को यहूदियों को उपहार के रूप में दिया था। 1000 CE में यहूदियों के पूर्वज जोसेफ रब्बन को उन्होंने ये उपहार दिया था। रब्बन के नेतृत्व में वहाँ यहूदी लगातार फले-फूले। अंजुवन्नम को ‘पूर्व का जेरुसलम’ कहा जाने लगा। इसके बाद ही यहूदी कोचीन में बसे। हालाँकि, यहूदियों के स्थान बदलने के लिए उनके भीतर की लड़ाई भी जिम्मेदार थी। इस्लामी और पुर्तगाली अत्याचार ने रही-सही कसर पूरी की।

कोडुंगल्लार को तब क्रैंगनोर के रूप में जाना जाता था। पेरियार नदी के किनारे बसा ये शहर एक अमीर और समृद्ध इलाकों में से एक था। पेरियार नदी में 1341 में आई भीषण बाढ़ के बाद ये इलाका पानी में चला गया और मालाबार का कोचीन सबसे बड़ा बंदरगाह बन कर उभरा और यहूदी भी उधर ही बसने लगे। रब्बन के दो बेटों के बीच संपत्ति विवाद के कारण भी उनका पलायन हुआ। इससे वहाँ के राजाओं द्वारा उन्हें दी जा रही सुरक्षा में भी कमी आई।

जोसेफ रब्बन को भारतीय राजाओं ने कर में छूट से लेकर व्यापार में सहायता तक प्रदान की। लेकिन, दुनिया भर में यहूदियों के खिलाफ ‘Anti–Semitism’ की भावना का पीछा भारत में भी नहीं छूटा और कुछ विदेशी ताकतों ने यहूदियों पर अत्याचार किया। 1524 में कोडुंगल्लूर में मुस्लिमों और यहूदियों के बीच जबरदस्त संघर्ष हुआ। एक मुस्लिम सरदार के आतंक के कारण भी वहाँ से यहूदियों का पलायन हुआ।

फिर हिन्द महासागर में कारोबार के लिए यूरोप और इस्लामी ताकतों में हिंसक संघर्ष होने लगा, जिसमें यहूदी काफी कमजोर पड़ गए। गोवा में जब पुर्तगाल का शासन आया, तब फिर यहूदियों पर अत्याचार हुए। यहूदियों का भारत के साथ सम्बन्ध काफी पुराना है। प्रसिद्ध ग्रन्थ ‘सूर्य सिद्धांत’ को एक यहूदी खगोलविद सनद इब्न अल यहूदी ने 9वीं शताब्दी में अरबी में अनुवाद किया। दोनों सभ्यताओं के बीच गणित और खगोल ज्ञान का आदान-प्रदान हुआ।

यहूदियों के पवित्र स्थल को सिनेगॉग कहते हैं। आज भी भारत में आपको कई सिनेगॉग मिलेंगे। हालाँकि, इनमें से कई अब सक्रिय नहीं हैं और देखभाल के अभाव में ध्वस्त होने लगे हैं। अरब और यूरोप में जहाँ यहूदियों को घृणा व हिंसा का सामना करना पड़ता था, भारत में उन्हें शांति मिलती थी और सिनेगॉग के निर्माण की इजाजत भी। केरल में पहला सिनेगॉग के निर्माण के लिए राजा ने ही जमीन दी थी।

भारत में अब भी 60 से भी अधिक यहूदियों के सक्रिय और निष्क्रिय सिनेगॉग मौजूद हैं। महाराष्ट्र में इनमें से कई अब भी मौजूद हैं। पहले यहूदी लोग अपने घरों में ही सिनेगॉग बना कर प्रार्थना करते थे। कोंकण में अब भी आपको ‘बेने इजरायल’ समुदाय के यहूदी मिल जाएँगे, जो मराठी भाषी हैं। केरल में पहली बार 1564 में ‘Paradesi Synagogu’ का निर्माण हुआ, जो यहाँ का सबसे पुराना है। इसके लिए भी जमीन कोच्चि के महाराजा ने ही दी थी।

PM-CARES से ₹2000 करोड़ खर्च कर सरकार ने देश भर में वितरित किए करीब 50,000 वेंटिलेटर, महाराष्ट्र को मिले सबसे ज्यादा

कोरोना वायरस के कहर के बीच महामारी से निपटने और अस्पतालों में बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने के लिए PM-CARES फंड से देश भर में राज्यों को करीब 50,000 वेंटिलेटर वितरित गए हैं, ये जानकारी बीजेपी ने दी।

पार्टी ने एक ट्वीट में कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत कोरोना वायरस के खिलाफ बहादुरी से लड़ रहा है। PM-CARES फंड से देश भर में लगभग 50,000 वेंटिलेटर वितरित किए गए हैं।”

ये “मेड-इन-इंडिया” वेंटिलेटर लगभग 2000 करोड़ रुपए की लागत से PM CARES फंड से खरीदे गए थे और सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में सरकार द्वारा संचालित COVID अस्पतालों को कोरोना मरीजों के बेहतर इलाज के लिए आवंटित किए गए थे।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, कुल 45,946 वेंटिलेटर में से महाराष्ट्र (देश में कोरोना वायरस से सबसे ज्यादा प्रभावित राज्य) को सबसे ज्यादा वेंटिलेटर दिए गए, जबकि दिल्ली को सबसे कम आवंटन किया गया था।

गौरतलब है कि महाराष्ट्र को 5,555 वेंटिलेटर, दिल्ली को 763, पंजाब को 810, उत्तर प्रदेश को 5316, पश्चिम बंगाल को 1245, तमिलनाडु को 1450, जबकि केंद्रीय संस्थानों को 3569 मशीनें दी गई थीं। केंद्र ने कहा है कि जून 2021 के अंत तक सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में अतिरिक्त 14,000 वेंटिलेटर वितरित किए जाएँगे।

पीएम ने दिया ऑडिट का निर्देश

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हाल ही में वेंटिलेटरों को स्टोर करके रखने और उनका इस्तेमाल नहीं किए जाने की रिपोर्ट्स को गंभीरता से लिया है। उन्होंने अधिकारियों को केंद्र सरकार द्वारा राज्यों को दिए गए वेंटिलेटर्स के इंस्टालेशन, उनके संचालन का ऑडिट करने का निर्देश दिया है। साथ ही पीएम ने जरूरत पड़ने पर वेंटिलेटर को ऑपरेट करने के लिए स्वास्थ्यकर्मियों को फिर से ट्रेनिंग देने का सुझाव भी दिया है।

वहीं केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने भी कई राज्यों में तकनीकी खामियों के कारण बेकार पड़े वेंटिलेटर्स का सही इस्तेमाल करने की अपील की है। मंत्रालय ने इस मामले में एक बयान जारी कर जानकारी दी है कि वेंटिलेटर की समस्याओं को ठीक करने के लिए एक वॉट्सऐप ग्रुप बनाया गया है। इसमें राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के नोडल अधिकारियों, वेंटिलेटर यूजर हॉस्पिटल और उसे बनाने वाली कंपनियों की टेक्निकल टीम के लोग शामिल हैं, जो कि समस्याओं का समाधान करने के लिए काम करेंगे।