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बाहर No Bed का नोटिस, UP प्रशासन के एक्शन में आते ही मिले 969 बेड खाली: कोविड अस्पतालों में धांधली की खुली पोल

कोरोना संकट के बीच अस्पतालों में जगह न मिलने की खबरें जहाँ लगातार सुर्खियों में छाई हुई हैं, वहीं आगरा से चौंकाने वाली खबर आई है। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार, तमाम शिकायतों के बाद यहाँ जिलाधिकारी ने जब कोविड अस्पतालों पर सख्त रुख अपनाया तो खाली बेडों को लेकर बड़ा खुलासा हुआ।

खबर के मुताबिक, जिलाधिकारी के एक्शन में आने के बाद एक-एक अस्पताल का ब्यौरा जाँचा गया तो सिर्फ 24 घंटे में पता चला कि कोविड अस्पतालों में 969 बेड खाली पड़े हैं। इनमें 147 वेंटीलेटर और 247 ICU वाले बेड हैं।

दरअसल, कुछ दिन पहले आगरा के जिलाधिकारी प्रभु एन सिंह ने सभी कोविड अस्पतालों को रिक्त बेड की सूचना सार्वजनिक करने और भर्ती मरीजों से शासनादेश में तय इलाज खर्च लेने के आदेश दिए थे। लेकिन अमर उजाला ने इस संबंध में जब अपनी छानबीन की तो उन्हें कई मरीज बेडों के लिए भटकते मिले। बुधवार को इसी सूचना पर डीएम ने एक्शन लिया और एक-एक अस्पताल का ब्यौरा चेक किया।

इस दौरान डीएम को कोविड अस्पतालों में 960 खाली बेड मिले, जिनके बारे में अस्पतालों ने कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी थी। डीएम ने रिकॉर्ड जाँचने के बाद अस्पताल संचालकों को फटकार लगाई और मुकदमा दर्ज करवाने की चेतावनी दी। इसके अलावा 1 घंटे के अंदर ICU, वेंटीलेटर, ऑक्सीजन व आइसोलेशन वार्ड में खाली बेड का ब्योरा कंट्रोल रूम पर दर्ज करते हुए इनके बारे नोटिस चिपकाने को कहा।

सोशल मीडिया पर यूजर कर रहे फ्रॉड का खुलासा

बता दें कि कोरोना संकट के समय में कोविड अस्पतालों में बेडों की संख्या पर सही डेटा को लेकर कई जगह पर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में प्रशासन कोविड मरीजों को धोखे में रखने वाले अस्पतालों के ख़िलाफ़ एक्शन ले रहा है।

सोशल मीडिया पर लोगों का कहना है कि दिल्ली और गाजियाबाद में फेक मरीजों के नाम से बेडों को ब्लॉक किया जा रहा है ताकि मनमानी कीमतों पर दूसरे मरीज को वहाँ भर्ती किया जा सके। यूजर्स के मुताबिक नोएडा, गाजियाबाद में 80 प्रतिशत अस्पताल ये सब कर रहे हैं। वहाँ पहले बेडों की उपलब्धता नहीं बताई जाती लेकिन फिर सौदा करके 1-2 लाख में बेड दिया जाता है।

कर्नाटक में भी अस्पतालों में पुलिस ने की छापेमारी, इकट्ठा किए डेटा

कर्नाटक में भी कोविड बेडों को ब्लॉक करने को लेकर मामला गरमाया हुआ है। वहाँ भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने कोविड अस्पतालों में रिश्वत लेकर कोविड बेडों को ब्लॉक करने का आरोप बीबीएमपी पर लगाया है।

भाजपा सांसद तेजस्वी सूर्या ने इस मामले को उठाते हुए कहा कि बीबीएमपी के वॉर रूम के अधिकारी कोविड-19 पॉजिटिव के बेडों को पैसों के लिए गलत तरीके से बुक कर रहे थे।

इस मुद्दे के उठने के बाद आज (6 मई 2021) कोविड वॉर रूम्स में पुलिस ने छापेमारी की और बहुत सारे डेटा इकट्ठा किए। अब इन्हीं डेटा के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी। पुलिस उन लोगों की तलाश में भी जुटी है, जिन्होंने फर्जी नामों के जरिए बेडों को ब्लॉक किया। अब तक इस मामले में 7 लोगों की गिरफ्तारी हुई है। कर्नाटक सरकार ने 80 प्रतिशत बेड कोविड मरीजों के लिए बुक करने के निर्देश दिए हैं।

भारत की मदद को आए कई विदेशी हिंदू मंदिर: करोड़ों रुपए, ऑक्सीजन कन्संट्रेटर और सिलिंडर से सहायता

भारत में कोरोना के कहर के बीच हिंदू मंदिरों ने देश का खूब साथ दिया। पिछले दिनों हमने आपको देश में स्थित उन तमाम मंदिरों के बारे में बताया, जो विपदा की इस घड़ी में सामने आए और मदद की पेशकश की।

आज हम आपको ऐसे ही कुछ विदेशी मंदिरों के बारे में भी बताने जा रहे हैं। ये हिंदू मंदिर भले ही विदेशों में स्थित हैं लेकिन जब बात हिंदुस्तान को संकट से उभारने की आई तो इन्होंने अपने सामर्थ्य से ज्यादा भारत को मदद दी।

बैंकॉक का हिंदू समाज देव मंदिर

सबसे ताजा मामला बैंकॉक से आया है। द ट्रिब्यून की खबर के अनुसार, एक सदी पुराना हिंदू समाज देव मंदिर, भारत की मदद के लिए आगे आया और अपने बूते भारतीयों को ऑक्सीजन सप्लाई में मदद की। ये मंदिर इस समय रॉयल थाई एयरफोर्स की मदद से भारत में ऑक्सीजन उपकरणों की मदद पहुँचा रहा है।

जानकारी के मुताबिक, मंदिर की ओर से 1 मई को 10 लीटर के 15 कन्संट्रेटर और 500 ऑक्सीजन मास्क भारत भेजे गए। बाद में 5 मई को भी 10 मशीनें फ्लाइट के जरिए भारत आईं।

मंदिर के सचिव ने बताया कि उन्होंने इंसानियत के नाते यह मदद की है। उन्हें अपने परिजनों और दोस्तों से भारत में ऑक्सीजन कंसन्ट्रेटर और ऑक्सीजन टैंक की कमी का पता चल रहा था। इसी कारण उन्होंने फंड इकट्ठा करके भारत की मदद की।

लंदन का श्रीस्वामीनारायण मंदिर

इसके बाद लंदन के श्रीस्वामीनारायण मंदिर ने भी भारत की स्थिति देखते हुए मदद करने के लिए फंड इकट्ठा किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक लंदन से दिल्ली बाइकाथॉन प्रोग्राम ऑर्गनाइज किया गया। इसका मकसद भारत के लिए फंड जमा करना था।

जानकारी के मुताबिक, इस आयोजन से मंदिर ने भारत के लिए 500,000 पाउंड यानी 5.1 करोड़ रुपए के आसपास फंड इकट्ठा किया है। आयोजन को CYCLE TO SAVE LIVES का नाम देकर 7,600 किलोमीटर साइकिल चलाई गई। इवेंट में भारतीयों के अलावा लोकल लोगों ने भी भाग लिया। 

इवेंट ऑर्गनाइजर्स ने कहा, “भारत में ऑक्सीजन की कमी है। हमें मदद की जरूरत है। हम भारत के लोगों को ये बता रहे हैं कि वो इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं। हम उनके साथ हैं, चाहे हम आपसे हजारों मील दूर बैठे हैं लेकिन हम आपके साथ हैं।”

UAE का हिंदू मंदिर

अबु धाबी में भारत की हर संभव मदद करने की घोषणा होने के बाद वहाँ के हिंदू मंदिर ने भी संकट की घड़ी में भारत की मदद करने का निर्णय लिया। BAPS हिंदू मंदिर ने पूजनीय स्वामी महाराज के देखरेख में ऑक्सीजन टैंक और सिलेंडर भेजने का निर्णय लिया। BAPS पर प्रकाशित एक खबर के अनुसार यह मंदिर भारत को 440 टन ऑक्सीजन हर माह देगा। इससे देश में करीब 50,000 सिलेंडर भरे जा सकेंगे।

इस क्रम में पिछले हफ्ते पहली मदद भी कर दी गई है। इस दौरान वहाँ से 44 टन तरल ऑक्सीजन, 130 ऑक्सीजन सिलिंडर, 600 सिलिंडर के लिए 30,000 लीटर मेडिकल ऑक्सीजन दी गई। साधुओं से लेकर मंदिर के स्वयंसेवक, सब इस समय भारत को ऑक्सीजन भेजने के लिए काम में जुटे हुए हैं।

स्विंडन के हिंदू मंदिर

ब्रिटेन के स्विंडन में भी हिंदुस्तान की मदद के लिए हिंदू मंदिर आगे आया है। वहाँ भी कोशिश हो रही है कि भारत में मेडिकल उपकरणों को भेजा जाए। भारतीय मूल के ब्रिटिश डॉक्टर अक्षय पात्रा यूके चैरिटी के साथ जुड़ कर अस्पतालों को उपकरण भेज रहे हैं और पीड़ितों को मेडिकल हेल्प भी मुहैया करवाई जा रही है।

कोरोना संकट में हिंदू मंदिर मदद को आगे आए

गौरतलब है कि कोरोना महामारी से आज पूरा भारत त्रस्त हो रखा है। हर जगह स्वास्थ्य सुविधाओं में कमी के कारण मौत की खबरें आ रही हैं। ऐसे में देश के तमाम मंदिर हैं, जिन्होंने पिछले दिनों अलग-अलग तरह से अपनी सहायता पेश की। पटना के महावीर मंदिर ने जहाँ ऑक्सीजन मुहैया करवाने का बीड़ा उठाया, वहीं मुंबई के स्वामी नारायण मंदिर को कोविड अस्पताल में तब्दील कर दिया गया। गजानन मंदिर में भी 500-500 बेड के अलग आइसोलेशन परिसर बनाए गए।

इसी तरह देश में मदद को आगे आए 24 मंदिरों के नाम आप इस लिंक पर क्लिक करके पढ़ सकते हैं।

आग बुझाने वाले सिलिंडर को रंग-पेंट कर ऑक्सीजन कह बेचा: दिल्ली में अब्दुल, शाह और रवि गिरफ्तार

दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत के कारण मरीजों के मरने का सिलसिला जहाँ दिन पर दिन बढ़ रहा है, वहीं जालसाज इस विपदा की स्थिति में भी धोखाधड़ी करने का कोई मौका नहीं छोड़ रहे। इसी क्रम में दिल्ली पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि ये ऑक्सीजन सिलेंडर के नाम पर जरूरतमंदों को फायर एक्सटिंगिशर पेंट कर करके बेच रहे थे। 

इंडिया टुडे की रिपोर्ट के मुताबिक, तीनों की पहचान रवि शर्मा, मोहम्मद अब्दुल और शम्भू शाह के तौर पर हुई है। तीनों अलीपुर निवासी हैं। पुलिस ने इनके पास से 530 फायर एक्सटिंगिशर (आग बुझाने वाले सिलेंडर) और 25 ऑक्सीजन गैस सिलेंडर बरामद किए हैं। इनके पास से इलेक्ट्रिक ग्राइंडर, स्प्रे पेंट कैन और 49 हजार कैश भी मिला है। इन सभी चीजों का प्रयोग ये लोग सिलेंडर पेंट करने के लिए करते थे।

पुलिस ने बताया कि इस फर्जी ऑक्सीजन सिलेंडर रैकेट का भंडाफोड़ राधा वल्लभ सेवा संघ नाम की एनजीओ ने किया। एनजीओ चलाने वाले मुकेश खन्ना ने बताया कि उन्होंने फर्श बाजार में पहले अपनी शिकायत देकर बताया कि ‘अपनी कॉलोनी’ में वर्षा इंजीनियरिंग नाम की ऑक्सीजन ड्रिस्ट्रीब्यूटर है। वह साढ़े चार लीटर का ऑक्सीजन सिलेंडर 5,500 रुपए में बेच रहे थे। लेकिन जब ज्यादा सिलेंडर माँगे गए तो उन्होंने कीमत बढ़ाकर 13000 रुपए कर दिया।

बढ़ी कीमतों पर सवाल पूछा गया तो कहा कि उन्हें अतिरिक्त टैक्स सरकार को देना होता है। खन्ना ने इसके बाद मामले की पड़ताल की और पाया कि सरकार ऐसा कोई एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लेती। प्रमाण इकट्ठा कर खन्ना ने पुलिस में ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी पर अपनी शिकायत लिखवाई।

दिल्ली पुलिस ने टीम बनाकर रेड डाली। जब पुलिस वहाँ पहुँची तो उन्हें पता चला कि वहाँ तो कुछ गैस सिलेंडरों को ऑक्सीजन सिलेंडर की तरह पेंट करके रखा गया था। मामले में डीसीपी ने कहा, “पड़ताल में पता चला कि ड्रिस्ट्रीब्यूटर रवि शर्मा, अब्दुल और शाह की मदद से कार्बन डायक्साइड भरने वाले फायर सिलेंडर के लाल पेंट को हटाकर उन्हें ऑक्सीजन सिलेंडर की तरह पेंट करके बेच रहा था।”

पुलिस ने बताया कि ये आरोपित खाली या फिर एक्सपायर हो चुके फायर एक्सटिंगिशर इकट्ठा करके उन्हें कबाड़ में बेचते थे या फिर उसमें CO2 भरते थे। लेकिन दिल्ली में ऑक्सीजन की किल्लत देख इन्होंने लोगों को ठग कर फायदा कमाने का प्लान बनाया। इसके लिए इन्होंने असली सिलेंडरों से लाल पेंट हटाया, फिर नॉजल फिक्स करने से पहले उसे काला पेंट किया और बाद में ऑक्सीजन सिलेंडर की तरह उसे बेचा।

बता दें कि इस समय दिल्ली में ऑक्सीजन के कारण कोहराम है। सुप्रीम कोर्ट खुद इस समय केंद्र सरकार से दिल्ली अस्पतालों में पर्याप्त ऑक्सीजन भेजने को कह रही है। लेकिन ऐसे ठग इस संकटकाल में भी लाचार लोगों को ठगने से बाज नहीं आ रहे। पिछले दिनों नोएडा पुलिस ने भी ऑक्सीजन सिलेंडर की कालाबाजारी में एक युवक को दिल्ली से पकड़ा था।

बंगाल हिंसा वाली रिपोर्ट राज्यपाल तक नहीं पहुँचे: CM ममता बनर्जी का ऑफिसरों को आदेश, गवर्नर का आरोप

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने राज्य की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पर यह आरोप लगाया है कि उन्होंने राज्य के अधिकारियों को चुनाव परिणाम के बाद शुरू हुई हिंसा पर रिपोर्ट देने से मना कर दिया। हिंसा पर आधारित यह रिपोर्ट राज्यपाल को दी जानी थी लेकिन सीएम ममता बनर्जी के कहने पर गृह सचिव ने राज्य की कानून व्यवस्था की रिपोर्ट राज्यपाल को दी ही नहीं। उन्होंने यह भी कहा कि डीजीपी और पुलिस कमिश्नर द्वारा दी गई रिपोर्ट भी आगे नहीं बढ़ाई गई।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने हिंदुस्तान टाइम्स के विनोद शर्मा से बात करते हुए उक्त आरोप लगाए हैं। इसके अलावा उन्होंने ट्वीट करके भी यह जानकारी साझा की।

चुनाव बाद शुरू हुई हिंसा पर बात करते हुए राज्यपाल धनखड़ ने कहा कि बंगाल में 02 मई को विधानसभा चुनाव परिणाम के आने के बाद से ही हत्या, लूटपाट और महिलाओं एवं बच्चों के खिलाफ अपराध जारी है। ऐसे में राज्यपाल ने बताया कि उन्होंने राज्य के गृह सचिव, डीजीपी और कोलकाता पुलिस कमिश्नर को हिंसा की रिपोर्ट देने के लिए आदेशित किया। उन्होंने बताया कि इस दौरान उनके द्वारा कई बार मुख्यमंत्री से बात की गई लेकिन उनके द्वारा किसी भी प्रकार का कोई एक्शन नहीं लिया गया।

राज्यपाल धनखड़ से यह प्रश्न किया गया कि हिंसा प्रारंभ होने के समय ममता बनर्जी ने राज्य के मुख्यमंत्री के रूप में शपथ नहीं ली थी तो क्या उन पर यह आरोप लगाया जा सकता है कि उन्होंने अधिकारियों को रिपोर्ट सबमिट करने से मना किया होगा?

इस पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने उत्तर देते हुए कहा कि राज्य गृह सचिव ने उनसे खुद यह बात कही कि उन्हें ममता बनर्जी द्वारा रिपोर्ट न देने के बारे में निर्देश आया था। इसके अलावा गृह सचिव ने राज्यपाल धनखड़ को यह भी अवगत कराया कि उन्हें डीजीपी और पुलिस कमिश्नर द्वारा राज्य कानून व्यवस्था पर दी गई रिपोर्ट भी राज्यपाल को न देने का निर्देश दिया गया था। राज्यपाल ने बताया कि 03 मई को चुनाव आचार संहिता समाप्त होने के बाद ममता बनर्जी के पास मुख्यमंत्री की सभी शक्तियाँ थीं।

ममता बनर्जी के शपथ ग्रहण के बाद वक्तव्य देने के प्रश्न पर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि स्वयं मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने ही इसके लिए उनसे आग्रह किया था और राज्य में लगातार चल रही हिंसा को देखते हुए उन्होंने इस मुद्दे को शपथ ग्रहण के बाद उठाना उचित समझा।

ज्ञात हो कि भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने हिंसा के दौरान राज्य का दौरा किया और हिंसा से पीड़ित लोगों से मिले। भाजपा अध्यक्ष के इस दौरे पर अपनी राय देते हुए बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने कहा कि वह एक संवैधानिक प्रमुख हैं और भाजपा अध्यक्ष के दौरे के विषय में विचार करना उनका अधिकार क्षेत्र नहीं है जब तक कि Covid-19 के प्रोटोकॉल्स का कोई उल्लंघन न हो। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बंगाल की स्थिति को देखते हुए यह आवश्यक है कि सभी पार्टियाँ इस मुद्दे पर आगे आएँ और लोगों में विश्वास उत्पन्न करें।

आपको बता दें कि पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव परिणाम आने के बाद से ही लगातार हिंसा हो रही है। भाजपा के कार्यकर्ताओं को प्रमुख रूप से निशाना बनाया जा रहा है। हजारों की तादाद में भाजपा कार्यकर्ता बंगाल से पलायन कर रहे हैं और असम की ओर जा रहे हैं। ऐसी परिस्थितियों में न केवल राज्यपाल अपितु गृह मंत्रालय ने भी राज्य में हो रही हिंसा की रिपोर्ट माँगी लेकिन उचित कार्रवाई न होने पर गृह मंत्रालय ने अपनी एक 4 सदस्यीय टीम बंगाल भेजी है जो सीधे गृह मंत्रालय को हिंसा की रिपोर्ट सौंपेगी।

सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट से ऑक्सीजन प्लांट के लिए 50 लाख रुपए, प्रतिदिन 51 सिलेंडर की होगी आपूर्ति

देश भर में कोरोना वायरस के कहर के बीच गुजरात का सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट लोगों की मदद के लिए आगे आया है। ट्रस्ट ने प्रभास पाटन स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र को ऑक्सीजन प्लांट लगाने के लिए 50 लाख रुपए की डोनेशन देने का ऐलान किया है।

सोमनाथ ट्रस्ट के मुताबिक, यह ऑक्सीजन प्लांट अगले तीन हफ्तों में चालू हो जाएगा। यह कार्य जिला स्वास्थ्य विभाग की देखरेख में होगा। यह ऑक्सीजन प्लांट प्रतिदिन 51 सिलेंडर की आपूर्ति कर सकेगा।

श्री सोमनाथ मंदिर ट्रस्ट इसके अलावा भी कई कार्य कर रहा है। कोरोना के इस दौर में सोमनाथ ट्रस्ट ने लीलावती भवन के 73 कमरों को सरकार को कोविड केयर सेंटर बनाने के लिए दे दिया है। इसके अलावा ट्रस्ट जिला प्रशासन के साथ मिलकर जरूरमंदों के लिए टिफिन सेवाएँ भी चला रहा है।

यहाँ हम उन 5 मंदिरों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने हाल में कोरोना की दूसरी लहर से उपजे संकट के बीच जनहित में कदम आगे बढ़ाए हैं। ये मंदिर कोविड मरीजों और गरीबों की सेवा कर रहे हैं। द्वारका स्थित इस्कॉन मंदिर लोगों को फूड पैकेट बाँट रहा है। मुंबई के कांदिवली इलाके में स्थित पावन धाम जैन मंदिर में 100 बेड्स की क्षमता वाला कोविड सेंटर बनाया गया है। यहाँ हरेक बेड के लिए ऑक्सीजन का भी इंतजाम किया गया है।

ओडिशा के पुरी स्थित‘श्री जगन्नाथ टेम्पल एडमिनिस्ट्रेशन (SJTA)’ ने सेवादारों, भक्तों और उनके परिवारों के लिए एक कोविड सेंटर की स्थापना का फैसला किया है। ग्रैंड रोड स्थित ‘भक्त निवास’ में सारे उपकरणों और सेवाओं के साथ इसकी व्यवस्था हुई है।

वहीं वाराणसी में काशी विश्वनाथ मंदिर की रसोई ने गरीबों का पेट भरने का जिम्मा उठाया है। मंदिर प्रशासन कई NGO के साथ मिल कर कोरोना मरीजों को भी भोजन पहुँचा रहा है।

इसी तरह से गुजरात के वड़ोदरा में भी मंदिरों ने बढ़-चढ़कर कोरोना के खिलाफ लड़ाई में हाथ बढ़ाया है। BAPS श्री स्वामीनारायण मंदिर ने 300 बेड्स वाले कोविड सेंटर की स्थापना की है। अतलदरा में 3.5 एकड़ में इस फैसिलिटी की स्थापना हुई है। ICU कमरों, पंखों और कूलर के अलावा यहाँ ऑक्सीजन और वेंटिलेटर की भी व्यवस्था होगी। जल्द ही 200 और बेड्स को जोड़ कर कोविड सेंटर की क्षमता को 500 बेड्स तक किया जाएगा।

इसके अलावा अयोध्या में राम मंदिर निर्माण का कार्य कर रहे ‘श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र’ ट्रस्ट ने देश में ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने के लिए अपना हाथ आगे बढ़ाया है। ट्रस्ट ने दशरथ मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन प्लांट स्थापित करने का निर्णय लिया है। इस ऑक्सीजन प्लांट को स्थापित करने में 55 लाख रुपए का खर्च आएगा।

चीन ने रद्द किया ऑस्ट्रेलिया के साथ आर्थिक डायलॉग, भारत-फ्रांस-ऑस्ट्रेलिया का हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में रणनीतिक गठबंधन

ऑस्ट्रेलिया और चीन के बीच तनाव लगातार बढ़ता ही जा रहा है। पहले ऑस्ट्रेलिया ने अपने राष्ट्रीय हितों और विदेशी संबंधों का हवाला देते हुए चीन के साथ हुए बेल्ट एण्ड रोड इनिशिएटिव (बीआरआई) से संबंधित समझौतों को रद्द कर दिया था वहीं अब चीन ने गुरुवार (06 मई) ऑस्ट्रेलिया के साथ ‘चीन-ऑस्ट्रेलिया इकोनॉमिक डायलॉग मकैनिज्म’ के अंतर्गत आने वाली सभी गतिविधियों को अनिश्चित काल के लिए बंद कर दिया है।

यह डायलॉग चीन के प्रमुख आर्थिक नीति निर्माता संस्थान नेशनल डेवलपमेंट एण्ड रिफॉर्म कमीशन (NDRC) और ऑस्ट्रेलिया सरकार के विभिन्न मंत्रालयों के मध्य स्थापित हुआ था।

ऑस्ट्रेलिया और चीन संबंधों की इस महत्वपूर्ण व्यवस्था को रद्द करते हुए NDRC ने कहा कि वर्तमान में ऑस्ट्रेलिया की सरकार के चीन के प्रति भेदभावपूर्ण रवैये और ‘कोल्ड वॉर’ की मानसिकता को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है कि NDRC के द्वारा ऑस्ट्रेलिया के साथ स्थापित इकोनॉमिक डायलॉग को रद्द किया जाए।

21 अप्रैल 2021 को ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन ने चीन के साथ हुए चार समझौतों को रद्द करने की घोषणा की थी। इन चार समझौतों में से दो समझौते ऑस्ट्रेलिया की विक्टोरिया प्रांत की सरकार ने किए थे, जो चीन की महत्वाकांक्षी परियोजना बीआरआई से जुड़े थे। ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री ने कहा था कि ये समझौते ऑस्ट्रेलिया की विदेश नीति और विदेशी संबंधों के प्रतिकूल थे।

संभवतः यही कारण है कि चीन ने भी ऑस्ट्रेलिया के साथ अपने संबंधों की पुनर्समीक्षा की है। हालाँकि ऑस्ट्रेलिया के मंत्री ने कहा कि चीन का यह निर्णय निराशाजनक है क्योंकि ऑस्ट्रेलिया सभी देशों के साथ बेहतर संबंधों को लेकर प्रतिबद्ध है।

पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया ने चीन को लेकर अपना रवैया अधिक स्पष्ट किया है। फिर चाहे वह चाइनीज कंपनी हुआवे को बैन करने की बात हो या फिर शिनजियांग और हॉन्गकॉन्ग में मानवाधिकारों पर आवाज उठाने की। इसके अलावा ऑस्ट्रेलिया ने ताइवान समेत चीन के आंतरिक मुद्दों पर चर्चा करने की माँग भी की थी। हालाँकि चीन से ऑस्ट्रेलिया के रिश्ते तब से ही खराब हैं, जब ऑस्ट्रेलिया ने कोरोना वायरस महामारी के विषय में चीन की स्वतंत्र रूप से जाँच की माँग की थी।

हालाँकि चीन और ऑस्ट्रेलिया के मध्य उत्पन्न हो रहे इस तनाव के कई दूसरे अर्थ भी हो सकते हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि पिछले कुछ समय से ऑस्ट्रेलिया, भारत के काफी निकट आया है। चाहे वह क्वाड समूह की बात हो अथवा हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत के साथ रणनीतिक साझेदारी की, ऑस्ट्रेलिया-भारत के संबंध पहले से अधिक प्रगाढ़ हुए हैं।

हाल ही में भारत, फ्रांस और ऑस्ट्रेलिया ने हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में मुक्त, समावेशी और अंतरराष्ट्रीय कानूनों के मुताबिक साझा मूल्यों की स्थापना को लेकर प्रतिबद्धता जाहिर की। लंदन में भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर, फ्रांस के विदेश मंत्री जीन ले ड्रियान और ऑस्ट्रेलिया की विदेश मंत्री मेराइस पेन के साथ एक बैठक में सम्मिलित हुए।

तीन देशों के विदेश मंत्रियों की इस बैठक में हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में सामरिक, सुरक्षा, आर्थिक और पर्यावरणीय चुनौतियों से निपटने के लिए एक साझा सहयोग की आवश्यकता पर चर्चा हुई। इसके अलावा बैठक में तीनों देशों की ओर से क्षेत्रीय समूहों जैसे आसियान, पैसिफिक आइलैंड फोरम, ओसिएन रिम एसोसिएशन और इंडियन ओसिएन नवल सिम्पोजियम की आवश्यकता और समूहों के संवर्धन पर भी चर्चा की गई।

ज्ञात हो कि हिन्द-प्रशांत क्षेत्र सदैव से ही पूरी दुनिया के लिए सामरिक रूप से महत्वपूर्ण रहा है। हालाँकि चीन अपनी विस्तारवादी नीति के तहत हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में अशान्ति का कारण बनता आया है लेकिन पिछले कुछ समय में जिस प्रकार से जापान, ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका हिन्द-प्रशांत क्षेत्र में भारत के हितों को ध्यान में रखते हुए सक्रिय हुए हैं, उससे निश्चित ही इस क्षेत्र में एक नई सामरिक स्थिति निर्मित होगी।

‘मेरी बहू क्रिकेटर इरफान पठान के साथ चालू है’ – चचेरी बहन के साथ नाजायज संबंध पर बुजुर्ग दंपत्ति का Video वायरल

भारत के पूर्व क्रिकेटर इरफान पठान पर गुजरात के एक बुजुर्ग दंपत्ति ने गंभीर आरोप लगाए हैं। बुजुर्ग व्यक्ति का कहना है कि उनके बेटे की पत्नी के साथ क्रिकेटर इरफान पठान के नाजायज संबंध हैं। जानकारी के अनुसार, बुजुर्ग व्यक्ति गुजरात पुलिस से रिटायर हैं। इनका नाम सैयद इब्राहिम है। इब्राहिम ने वीडियो जारी करके इरफान पठान पर इल्जाम लगाए और अपने लिए न्याय माँगा।

वीडियो में वह कहते हैं, “मेरा नाम सैयद इब्राहिम है। मेरे छोकरे (बेटे) की बहू क्रिकेटर इरफान पठान के साथ चालू (संबंध) है। वो उसके साथ सोती है और ये सब खुद वो अपने मुँह से बोलती है। मेरे बेटे पर 8 दिन से दबाव डाल रही है कि जैसा है, वैसे चलने दे। हमने पुलिस में रिकॉर्डिंग तक दी लेकिन हमारी सुनवाई नहीं होती।”

बुजुर्ग ने पूर्व क्रिकेटर पर आरोप लगाते हुए कहा, “इरफान पठान बड़े अधिकारियों से दबाव डलवाता है। आज हमारी ऐसी हालत आ गई कि हम सुसाइड करना चाहते हैं।” वीडियो में बुजुर्ग महिला को कहते सुना जा सकता है कि जब उनकी बहू उनके घर थी, तब भी उन्हें परेशान किया जाता था और अब भी उन्हें परेशान किया जा रहा है।

सैयद बताते हैं कि उन्हें धमकियाँ मिलती हैँ। उन्होंने पुलिस विभाग को अपनी सेवा दी। बावजूद इसके आज उन्हें इंसाफ नहीं मिल रहा। वह अपील करते हैं कि उन्हें बस उनकी मौत के बाद इंसाफ दिलाया जाए। वह पूछते हैं कि उनकी बहू उनके बेटे के साथ रहती नहीं है, तो वह उसके साथ रिश्ते को कैसे जारी रखे? पुलिस भी उनकी सुनवाई नहीं कर रही। शिकायत करने पर उन्हें ही बुलाकर तंग किया जाता है।

बुजुर्ग दंपत्ति पर बहू लगा चुकी है दहेज प्रताड़ना का इल्जाम

बता दें कि सैयद इब्राहिम की ये वीडियो इस समय सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है। लोग इसे शेयर करके इरफान पठान के ख़िलाफ़ कार्रवाई की माँग कर रहे हैं। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, इस बीच वेजलपुर पुलिस थाने से पता चला है कि इरफान पठान पर आरोप लगाने वाले इब्राहिम, उनकी पत्नी और बेटे सैयद के खिलाफ खुद बहू ने ही 11 मार्च, 2021 को दहेज के लिए प्रताड़ित करने की शिकायत दर्ज करवाई थी। अब पुलिस मामले की जाँच कर रही है। सैयद इब्राहिम का कहना है कि उनकी बहू उन्हें झूठे इल्जाम में फँसा रही है, उसके खुद इरफान से अवैध संबंध हैं।

शादी के पहले से थे इरफान पठान के बहू से संबंध

कथित तौर पर इब्राहिम की बहू इरफान पठान की चचेरी बहन है। उनके बेटे का कहना है कि उसकी पत्नी और इरफान के बीच काफी पहले से संबंध हैं और शादी के बाद भी दोनों के बीच अवैध संबंध बने हुए हैं। बेटे के मुताबिक इरफान और उसकी पत्नी अक्सर वीडियो कॉलिंग करते हैं। पत्नी अक्सर चोरी-छिपे इरफान के साथ घूमने जाती थी। लेकिन ये बातें जब पूरे परिवार को पता चलीं तो पत्नी ने उनके खिलाफ दहेज प्रताड़ना का झूठा आरोप लगा दिया।

उल्लेखनीय है कि कई मीडिया संस्थानों ने इस संबंध में इरफान पठान की प्रतिक्रिया जानने का प्रयास किया। हालाँकि, उनका फोन स्विच होने के कारण कोई जवाब नहीं मिल सका।

महाराष्ट्र पुलिस में दलाली और उद्धव-पवार का नाम: जिस महिला IPS ने खोले पोल, उनकी गिरफ्तारी पर HC की रोक

महाराष्ट्र की स्टेट इंटेलिजेंस कमिश्नर रहीं रश्मि शुक्ला के एक पत्र को लेकर ‘महा विकास अघाड़ी (MVA)’ सरकार कटघरे में आ गई थी, जिसमें उन्होंने राज्य में पुलिस अधिकारियों की ट्रांसफर-पोस्टिंग में दलालों के हावी होने की बात कही थी। इसके बाद मुंबई पुलिस ने शुक्ला और ‘अज्ञात लोगों’ के खिलाफ ट्रांसफर सम्बन्धी आंतरिक सूचनाओं को लीक करने का आरोप लगाते हुए FIR दर्ज कर लिया। उन पर गिरफ़्तारी की तलवार लटकने लगी।

अब मामला बॉम्बे हाईकोर्ट में चल रहा है। मुंबई पुलिस ने बॉम्बे हाईकोर्ट से कहा है कि अगर रश्मि शुक्ला जाँच में सहयोग करती हैं तो उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जाएगा। रश्मि शुक्ला ने मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई FIR को रद्द करने की माँग बॉम्बे उच्च-न्यायालय से की है। अब पुलिस ने भरोसा दिया है कि सुनवाई की अगली तारीख़ तक उनकी गिरफ़्तारी नहीं होगी, अगर वो जाँच में सहयोग करती हैं तो।

मुंबई पुलिस ने अप्रैल 26, 2021 को ही रश्मि शुक्ला को समन किया था। इसके बाद उन्होंने कोरोना वायरस संक्रमण की भयावह स्थिति को देखते हुए पुलिस के समक्ष उपस्थित होने में असमर्थता जताई थी। इसके 2 दिन बाद उनका बयान दर्ज करने के लिए फिर से समन भेजा गया। इसके बाद वो अधिवक्ता समीर नागरे के माध्यम से बॉम्बे HC पहुँचीं, जहाँ FIR रद्द कर के पुलिस को कोई सख्त कदम उठाने से रोकने का निर्देश देने की दरख़्वास्त की गई।

एसएस शिंदे और मनीष पितले की पीठ ने गुरुवार (मई 6, 2021) को सुनवाई करते हुए कहा कि कोरोना संक्रमण और हैदराबाद में पदस्थापित होने के कारण रश्मि शुक्ला को पुलिस के समक्ष उपस्थित होने में दिक्कत हुई होगी। पुलिस की तरफ से पेश हुए अधिवक्ता डारियस खम्बाटा ने कहा कि अगर कोरोना महामारी की वजह से वो मुंबई नहीं आ सकती हैं तो मुंबई पुलिस की एक टीम उनके लोकेशन पर जाकर उनका बयान दर्ज कर सकती है।

शुक्ला की तरफ से वरिष्ठ अधिवक्ता महेश जेठमलानी भी पेश हुए, जिन्होंने कहा कि मुंबई पुलिस उनके मुवक्किल को गिरफ्तार न करे और ये भी बताया कि वो जाँच में सहयोग कर रही हैं। शुक्ला के खिलाफ जिन धाराओं में मामला दर्ज किया है, उनमें 3 साल तक की सज़ा हो सकती है। इससे पहले मुंबई पुलिस को उनसे पूछताछ कर उनका बयान लेना होगा। CBI की तरफ से पेश हुए एडिशनल सोसिलिटर जनरल अनिल सिंह ने कहा कि ये मामला राज्य के पूर्व गृह मंत्री अनिल देशमुख से भी जुड़ा है, इसीलिए CBI इसकी जाँच कर रही है।

कोर्ट ने साफ किया कि इस केस में दिए गए आदेश का उस पर कोई फर्क नहीं पड़ेगा। रश्मि शुक्ला की तरफ से हाईकोर्ट में 6 वकील पेश हुए। वहीं दो वकीलों ने राज्य सरकार का पक्ष रखा। मुंबई के पूर्व पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह ने भी अपने खिलाफ दर्ज मामलों को CBI को ट्रांसफर करने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया था। महाराष्ट्र में कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारी MVA सरकार के खिलाफ खड़े हैं।

अब बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश के बाद वीडियो कॉल से रश्मि शुक्ला का बयान दर्ज किया जाएगा और अगली सुनवाई तक उनकी गिरफ़्तारी नहीं होगी। वो फ़िलहाल सेन्ट्रल डेपुटेशन पर हैदराबाद में बतौर ADG, CRPF पोस्टेड हैं। उन्होंने ट्रांसफर-पोस्टिंग में पुलिस-नेता नेक्सस का खुलासा किया था। 1988 कैडर की शुक्ला 30 वर्षों से भी अधिक से पुलिस सेवा में हैं। याचिका में उन्होंने कहा था कि वो सिर्फ अपना कर्तव्य कर रही थीं, भ्रष्टाचार को उजागर कर रही थीं।

अगस्त 2020 में तत्कालीन DGP सुबोध जायसवाल को भेजे गए पत्र में रश्मि शुक्ला ने बताया था कि उनकी टीम ने कुछ ऐसे फोन कॉल्स को इंटरसेप्ट करने में कामयाबी पाई है, जिससे पता चला है कि कई लोग पुलिस अधिकारियों की मनमाने ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने के बदले रुपए लेने के धंधे में शामिल हैं। 7 पन्ने के इस पत्र में कई बड़े नेताओं के नाम थे। पता चला कि रुपयों के बदले मनमानी ट्रांसफर-पोस्टिंग कराने वालों ने आपसी बातचीत में उद्धव ठाकरे, शरद पवार और अनिल देशमुख के नाम भी लिए हैं। 

480 पादरी गिरफ्तार: प्रोटोकॉल का उल्लंघन कर जमा हुए एक साथ, 100+ संक्रमित, 2 की मौत

केरल के मुन्नार में एक वार्षिक कार्यक्रम का हिस्सा बने चर्च ऑफ साउथ इंडिया (CSI) के 480 पादरियों को Covid-19 प्रोटोकॉल का उल्लंघन करने के लिए गिरफ्तार किया गया है। इस कार्यक्रम में हिस्सा लेने वाले 100 से ज्यादा पादरी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए थे। इसके अलावा 2 पादरियों की मौत हो गई थी जबकि 5 गंभीर अवस्था में थे।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, पादरियों और समुदाय सदस्यों की कॉन्फ्रेंस पिछले माह 13 अप्रैल से 17 अप्रैल के बीच CSI क्राइस्ट चर्च में हुई थी। सैकड़ों पादरी अलग-अलग जगह से इस रिट्रीट मीट को अटेंड करने आए थे। खबर में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि कार्यक्रम को टालने के अनुरोध के बावजूद बैठक हुई। साथ ही कहा गया था कि अगर कोई पादरी इसमें शामिल नहीं हुआ तो उस पर अनुशासनात्मक कार्रवाई होगी।

खबर पर द न्यू इंडियन एक्सप्रेस के ट्वीट का स्क्रीनशॉट

गुरुवार (06 मई) को पुलिस ने बताया कि तहसीलदार के बयान के आधार पर मामला दर्ज किया गया, जिसके तहत चर्च ऑफ साउथ इंडिया (CSI) के 480 पादरियों को रिट्रीट आयोजित करने और उसमें भाग लेने के लिए गिरफ्तार किया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार, CSI ट्रस्ट एसोसिएशन के सचिव और ज्वाइंट क्रिश्चियन काउंसिल के सदस्य जैकब मैथ्यू ने कहा कि सरकार और काउंसिल के निर्देशों को मीटिंग के दौरान पूरी तरह नकारा गया। वहीं केंद्रीय केरल चर्चों और कोच्चि चर्चों की मीट को Covid-19 के बढ़ते मामलों के कारण आगे बढ़ा दिया गया था। लेकिन दक्षिण केरल के CSI ने बिना राज्य सरकार को जानकारी दिए ये मीट आयोजित की।

हालाँकि, CSI अपने ऊपर लगे सभी आरोपों को खारिज कर रहा है। CSI के साउथ केरल सूबे के सचिव टीटी प्रवीण ने दावा किया कि संक्रमण कार्यक्रम के कारण नहीं फैला। उनका कहना है कि यह इल्जाम लगा कर सिर्फ एक निगेटिव अभियान चलाया जा रहा है।

मुन्नार के इंस्पेक्टर केआर मनोज ने समाचार एजेंसी PTI को बताया कि तहसीलदार के बयान के आधार पर चर्च प्रबंधन और 480 पादरियों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है और पादरियों को केरल एपिडेमिक डिसीज ऐक्ट (KEDA) और आईपीसी की धारा 269 के तहत गिरफ्तार किया गया है। मनोज ने यह भी कहा कि कार्यक्रम की फोटो और वीडियो को जब्त करके आगे की कार्यवाई की जा रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार अधिकतर पादरी मुन्नार के CSI रिट्रीट सेंटर में 270 किमी दूर तिरुअनंतपुरम से बस के माध्यम से लाए गए थे। संक्रमितों में CSI मॉडरेटर और साउथ केरल सूबे के बिशप ए धर्माराज रसालम भी शामिल हैं। हालाँकि CSI यही दावा करता रहा कि कार्यक्रम में किसी भी प्रकार से Covid-19 के प्रोटोकॉल्स का कोई उल्लंघन नहीं हुआ है।

CM केजरीवाल या उनके वकील – कौन है झूठा? दिल्ली में ऑक्सीजन पर एक ने झूठ बोला है – ये है सबूत

दिल्ली में ऑक्सीजन संकट को लेकर 6 मई को दिल्ली सरकार से जुड़ी दो विरोधाभासी जानकारी सामने आई। एक खबर में बताया गया कि दिल्ली सरकार के वकील ने दिल्ली को 730 MT ऑक्सीजन मिलने से इंकार किया है और दूसरी खबर में बताया गया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री 730 MT टन ऑक्सीजन मिलने पर केंद्र को धन्यवाद दे रहे हैं।

6 मई को 12:54 पर ANI ने सुप्रीम कोर्ट में ऑक्सीजन संकट पर हो रही सुनवाई को लेकर एक ट्वीट थ्रेड शेयर किया। इसके आखिरी ट्वीट्स में से एक में जस्टिस शाह और दिल्ली सरकार के वकील राहुल मेहरा का कोट था। इसी ट्वीट में लिखा गया था कि राहुल मेहरा ने सुप्रीम कोर्ट को बताया कि दिल्ली सरकार को केवल 555 MT ऑक्सीजन मिली है न कि केंद्र के दावों के मुताबिक 730 MT ऑक्सीजन।

ऑक्सीजन संकट पर सुप्रीम कोर्ट में हुई सुनवाई पर ANI का स्क्रीनशॉट

इस सूचना के लगभग दो घंटे बाद 2:52 पर एएनआई ने एक और ट्वीट किया। इस ट्वीट में बताया गया कि दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है और 730 MT ऑक्सीजन दिल्ली को देने के लिए धन्यवाद दिया है। एएनआई के ट्वीट में प्रमाण के तौर पर अरविंद केजरीवाल का पत्र भी लगाया गया है।

इस पत्र में लिखा है, “हम केंद्र सरकार से लगातार प्रार्थना कर रहे थे कि 700 टन ऑक्सीजन हमें दी जाए। कल पहली बार 730 टन ऑक्सीजन मिली। मैं लोगों की तरफ से दिल से आपका आभार व्यक्त करता हूँ। आपसे निवेदन है कि कम से कम इतनी ऑक्सीजन दिल्ली को जरूर दिलवाई जाए। इसमें कोई कटौती न हो। पूरी दिल्ली इसके लिए आपकी आभारी होगी।”

दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी को लिखा आभार पत्र

अब जाहिर सी बात है कि दिल्ली सरकार से जुड़ी दोनों ही बातें अलग-अलग हैं। एक को सरकार के वकील ने सर्वोच्च न्यायालय में कहा है और दूसरे को दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने स्वयं स्वीकारा है। इनमें से कौन सच है या कौन झूठा… ये पता लगाना बहुत मुश्किल है।

बता दें कि सीएम केजरीवाल का दावा और केंद्र सरकार का दावा एक दूसरे से मेल खाता है जबकि दिल्ली सरकार की ओर से राहुल मेहरा द्वारा कही गई बात (अगर बयान कल के संदर्भ में है तो) सरकार के बयान को ही झूठा बता रही है।

नीचे लाइव लॉ पर कवर हुई आज की हियरिंग का एक स्क्रीनशॉट है। इसमें सॉलिस्टर जनरल के हवाले से कहा गया है कि कल ही दिल्ली को 730 MT ऑक्सीजन मिली। यही बात केजरीवाल ने भी अपने पत्र में कही है कि दिल्ली को कल 730 MT ऑक्सीजन मिली।

लाइव लॉ से लिया गया स्क्रीनशॉट, हियरिंग 6 मई की है।

बता दें कि दिल्ली में 700MT ऑक्सीजन देने के लिए केंद्र को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था। इसके बाद आज की सुनवाई में सॉलिस्टर जनरल तुषार मेहता ने अदालत को बताया कि दिल्ली को कल 730 MT ऑक्सीजन दी गई और सर्वे का हवाला देकर ये भी कहा कि दिल्ली में पर्याप्त ऑक्सीजन है।