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क्यों पड़ा Cyclone का नाम Tauktae, क्यों तबाही मचाने आते हैं, जमीन पर क्यों नहीं बनते? जानिए चक्रवातों से जुड़ा सब कुछ

चक्रवाती तूफान (Cyclone) Tauktae ने शनिवार (15 मई, 2021) रात को अपनी दिशा बदल दी और यह तूफान पूर्व की ओर खिसक गया। भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने चक्रवात Tauktae को ‘अति भीषण चक्रवाती तूफान’ की श्रेणी में रखा था, लेकिन अक्सर तूफान स्थल भाग के संपर्क में आने पर कमजोर हो जाते हैं इसलिए चक्रवात Tauktae की कैटेगरी को ‘अति भीषण’ से ‘भीषण’ में बदला जा सकता है। अति भीषण चक्रवाती तूफान (Very Severe Cyclonic Storm) का मतलब है कि अब चक्रवात जिन हवाओं को समेटे रखता है, उनकी रफ्तार लगभग 118-221 किमी प्रति घंटे की होती है।

भारत के पश्चिम में स्थित अरब सागर में उत्पन्न हुए इस Tauktae Cyclone ने केरल, गोवा, कर्नाटक और महाराष्ट्र में अपना भयानक रूप दिखाया और अब यह गुजरात की ओर लगातार लगभग 16 किमी/घंटे की रफ्तार से बढ़ रहा है। तूफान की ताकत का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि Tauktae Cyclone के केंद्र की परिधि 30 से 35 किमी है और तूफान के केंद्र में लगभग 150 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएँ चल रही हैं।

Tauktae Cyclone का मूवमेंट

साल 2020 में बंगाल की खाड़ी में ‘अम्फान’ चक्रवात उत्पन्न हुआ था जो सुपर साइक्लोन में बदल गया था। यह 1999 के बाद से दूसरा सुपर साइक्लोन था। साल 2020 में ही मुंबई में चक्रवात ‘निसर्ग’ ने भयानक नुकसान किया था। तीन ओर से समुद्र से घिरा होने के कारण भारत हमेशा से ही इन चक्रवातों से जूझता रहा है।

आखिर इन चक्रवाती तूफानों के बनने के पीछे क्या कारण है और इनके नाम किस आधार पर रखे जाते हैं? भारत के अलावा दुनिया भर में इन चक्रवाती तूफानों की स्थिति क्या है? तो आइए ढूँढते हैं इन सभी प्रश्नों के उत्तर।

चक्रवात (Cyclone) के प्रकार : 

दुनिया भर में चक्रवातों को प्रमुख रूप से दो भागों में विभाजित किया गया है। उष्णकटिबंधीय चक्रवात और शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात। उष्णकटिबंधीय चक्रवात कर्क रेखा और मकर रेखा के बीच के क्षेत्र में आते हैं अर्थात भूमध्य रेखा के आस-पास के क्षेत्रों में। शीतोष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में आने वाले चक्रवात शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवात होते हैं। शीतोष्ण कटिबंधीय चक्रवातों को फ्रन्टल या वेव साइक्लोन भी कहा जाता है।

अक्सर लोगों में यह भ्रम रहता है कि साइक्लोन, हैरीकेन और टाईफून में भी क्या कोई अंतर है, तो आपको बता दें कि ये सभी उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान ही हैं। दुनिया में अलग-अलग जगह पर इन्हें इस प्रकार विभिन्न नामों से जाना जाता है। जैसे हिन्द महासागर और दक्षिणी प्रशांत क्षेत्र में आने वाले तूफ़ानों को ‘ट्रॉपिकल साइक्लोन (Tropical Cyclone)’ या सिर्फ साइक्लोन कहा जाता है। उत्तर अटलांटिक, कैरेबियन और पूर्वोत्तर प्रशांत क्षेत्र में उठने वाले तूफ़ानों को हैरीकेन कहा जाता है। उत्तर-पश्चिमी प्रशांत क्षेत्र के तूफान टाईफून कहे जाते हैं। यह क्षेत्र इस प्रकार के तूफ़ानों के लिए सबसे सुभेद्य क्षेत्र हैं। इसके अलावा पश्चिमी अफ्रीका और संयुक्त राज्य अमेरिका के दक्षिणी भागों में आने वाले तूफानों को टॉरनेडो कहा जाता है।

दुनिया के अलग-अलग भागों में आने वाले उष्णकटिबंधीय चक्रवात

इन चक्रवाती तूफ़ानों को इनमें समाहित हवा की गति और इनकी तीव्रता के आधार पर भी विभाजित किया जाता है। इन तूफ़ानों का सबसे न्यूनतम स्तर ‘डिप्रेशन (Depression)’ कहा जाता है जहाँ हवा की गति लगभग 50 किमी या उससे भी कम होती है। इन चक्रवाती तूफ़ानों का सबसे भयानक और विनाशकारी रूप ‘सुपर साइक्लोनिक स्टॉर्म (Super Cyclonic Storm)’ कहा जाता है। इसमें हवा की गति 222 किमी से भी अधिक हो जाती है।

हवा की गति के आधार पर चक्रवाती तूफ़ानों का वर्गीकरण

हमेशा से ही एक बड़ा प्रश्न इन तूफ़ानों के नाम को लेकर उठता रहता है कि आखिर इन तूफ़ानों के नाम किस प्रकार निर्धारित किए जाते हैं? विभिन्न क्षेत्रों में स्थित देशों के द्वारा विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) की देखरेख में इन तूफ़ानों को नाम प्रदान किया जाता है। हिन्द महासागर क्षेत्र में आने वाले तूफ़ानों के नाम रखने के लिए सितंबर 2004 में एक समझौता हुआ। इस समझौते के तहत हिन्द महासागर क्षेत्र के आठ देश, बांग्लादेश, भारत, मालदीव, म्याँमार, ओमान, पाकिस्तान, श्रीलंका और थाईलैंड तूफ़ानों के लिए नामों का एक समूह देंगे, जिसमें से बारी-बारी से तूफान का नामकरण होगा। हालाँकि, अब इस समझौते में देशों की संख्या बढ़कर 13 हो गई है।

वर्तमान में अरब सागर से उठने वाले चक्रवाती तूफान Tauktae का नाम म्याँमार द्वारा दिया गया है। Tauktae, गेको छिपकली का बर्मीज नाम है। यह छिपकली बहुत तेज आवाज करती है।   

उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफ़ानों के बनने के लिए कुछ आवश्यक शर्तें भी होती हैं। ये शर्तें पूरी होने पर ही समुद्री क्षेत्रों में किसी चक्रवाती तूफान का निर्माण हो पाता है।

सबसे पहली आवश्यकता है कि समुद्र की एक विशाल सतह का तापमान 27° C से अधिक होना चाहिए। इससे होता यह है कि इस सतह के संपर्क में आने वाली हवा गर्म होती है और ऊपर उठती है। गर्म हवा के ऊपर उठने के कारण बाहरी ठंडी हवा उस खाली स्थान को तेजी से भरने के लिए आती है।

यहाँ पृथ्वी की घूर्णन गति से उत्पन्न कोरियॉलिस बल के कारण बाहर से आने वाली ठंडी हवा तेज गति से एक सर्पिलाकार पथ पर घूमने लगती है। इस हवा के घूर्णन की दिशा इस बात पर निर्भर करती है कि तूफान किस गोलार्ध में उत्पन्न हुआ है। यदि तूफान उत्तरी गोलार्ध में है तो इसका घूर्णन घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में अर्थात एंटी-क्लॉकवाइज होगा लेकिन यदि यही तूफान दक्षिणी गोलार्ध में है तो इसकी घूर्णन की दिशा उत्तरी गोलार्ध के विपरीत अर्थात घड़ी की सुई की दिशा (क्लॉकवाइज) होगी।

समुद्र की सतह पर पहले से बना हुआ कम दबाव का क्षेत्र भी इन चक्रवाती तूफ़ानों के निर्माण में सहायक होता है। इसके अलावा ऊर्ध्वाधर पवनों की गति में भिन्नता को भी तूफ़ानों के निर्माण में सहायक माना जा सकता है।

अब समझते हैं कि एक चक्रवात का निर्माण कैसे होता है और वो कौन से कारक होते हैं जिनसे एक तूफान की गति, उसके द्वारा प्रभावित क्षेत्र और स्थानीय मौसम में परिवर्तन निर्धारित होता है।

किसी भी चक्रवात के निर्माण या प्रारम्भिक अवस्था में समुद्र से वाष्पीकृत जलवाष्प और अपेक्षाकृत अधिक तापमान ऊपरी हवा में स्थानांतरित होता है। आप यह मान सकते हैं कि एक चक्रवात को भी ईंधन की आवश्यकता होती है और उसका यह ईंधन होती है गर्म जलवाष्प। इसके कारण समुद्र की सतह से ऊपर उठने वाली संघनित हवा के संवहन के कारण बड़े पैमाने पर क्यूमलस बादलों का निर्माण होता है।

उष्णकटिबंधीय चक्रवाती तूफान का दूसरा चरण उसका सबसे खतरनाक स्तर होता है। इस चरण में ऊपर उठने वाली हवा क्षोभमंडल (ट्रोपोपॉज) पर क्षैतिज रूप से फैल जाती है। ऊपरी क्षेत्र में हवा के फैलने के कारण एक उच्च दबाव का क्षेत्र बन जाता है। इससे संवहन क्रिया प्रारंभ होती है और उच्च दबाव से निम्न दबाव क्षेत्र की ओर हवा का तेजी से संचालन होता है जो आँधी-तूफान का कारण बनता है।

हिन्द महासागर या ऐसे ही उष्ण कटिबंधीय क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले चक्रवाती तूफ़ानों का तीसरा और अंतिम चरण तब होता है जब तूफान किसी ठंडे जल क्षेत्र अथवा जमीन से होकर गुजरते हैं। ठंडे क्षेत्र से गुजरने के कारण तूफ़ानों को जलवाष्प नहीं मिल पाती जो कि इनका मुख्य ईंधन है। ऐसा ही कुछ तब होता है जब ये तूफान तटीय क्षेत्रों से टकराते हैं। स्थल भाग पर पहुँचने के कारण भी इन्हें जलवाष्प नहीं मिलती जिसके कारण ये कमजोर हो जाते हैं और एक समय के बाद समाप्त हो जाते हैं। तूफ़ानों के समाप्त होने में एक बड़ा कारक उनमें समाहित हवा की गति भी है।

आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि सभी चक्रवाती तूफान विनाशकारी नहीं होते हैं। कई तूफान समुद्र में ही बनते हैं और वहीं नष्ट हो जाते हैं। अक्सर उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में उत्पन्न होने वाले चक्रवाती तूफान समुद्री पवनों के संपर्क में आने के कारण गतिमान हो जाते हैं जो तटीय क्षेत्रों की ओर बढ़ जाते हैं और उन क्षेत्रों में वर्षा के माध्यम से अपना जल निष्काषित करते हैं।  

भारत हमेशा ही उष्णकटिबंधीय चक्रवातों के दायरे में आता है क्योंकि यहाँ के आसपास के समुद्री क्षेत्र में चक्रवात उत्पन्न होने की सभी आवश्यक परिस्थितियाँ मौजूद हैं। अक्सर इन समुद्री तूफ़ानों से पश्चिम बंगाल, ओडिशा, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और गुजरात अधिक प्रभावित रहते हैं।   

चक्रवाती तूफ़ानों से प्रभावित भारतीय क्षेत्र

अब आप यह प्रश्न कर सकते हैं कि चक्रवात कभी भी भूमि या स्थल भाग पर क्यों उत्पन्न नहीं होते हैं? इसका एक ही जवाब है, तूफान के लिए ईंधन की उपलब्धता और हम पहले ही बता चुके हैं कि एक चक्रवाती तूफान के लिए आवश्यक है गर्म जलवाष्प जो कि स्थल भाग में उपलब्ध नहीं हो पाती। हालाँकि यहाँ नदियाँ और तालाब होते तो हैं लेकिन उनमें इतनी शक्ति नहीं होती कि उससे एक बड़ा चक्रवाती तूफान तैयार हो सके। इसीलिए स्थल भाग में जमीन के अत्यधिक गर्म होने पर कभी-कभी बवंडर तैयार होते हैं लेकिन ये अल्पकालिक होते हैं।    

क्या CM योगी आदित्यनाथ को ग्रामीणों ने गाँव में घुसने से रोका? कॉन्ग्रेस नेताओं, वामपंथी पत्रकारों के फर्जी दावे का फैक्ट चेक

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सोमवार (मई 16, 2021) कोविड -19 की स्थिति का जायजा लेने के लिए कई शहरों का दौरा किया। कोविड मरीजों को समय पर इलाज मिल सके, ये सुनिश्चित करने के लिए वह उनके परिवार के सदस्यों से मिलने के लिए गए। इस दौरान उन्होंने लोगों से मास्क पहनने और खुद को संक्रमण से बचाने के लिए सावधानी बरतने का आग्रह किया।

पश्चिमी यूपी युवा कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष ओमवीर यादव, अभिनेत्री नगमा और सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी कंवल चड्ढा सहित कुछ उपद्रवियों और विपक्षी दलों के नेताओं ने इस दौरे का एक वीडियो पोस्ट किया जिसमें सीएम योगी लोगों को सावधानी बरतने की सलाह देने के बाद अपनी कार में वापस जाते हुए दिखाई दे रहे थे।

विपक्षियों ने इस वीडियो को शेयर करते हुए यह दिखाने की कोशिश की कि क्षेत्र के निवासियों ने सीएम योगी का रास्ता रोक दिया और उन्हें गाँव में प्रवेश नहीं करने दिया। ओमवीर यादव ने लिखा, “बस करो अब हमें आपकी ज़रूरत नहीं है। जनपद मेरठ के बिजौली गाँव में एक बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपनी एक गली में खाट खड़ी कर जाने से रोक दिया। मुख्यमंत्री के लाख कहने पर भी बुजुर्ग ने रास्ता नहीं खोला और सीएम योगी को वापस जाना पड़ा।”

अभिनेत्री नगमा ने लिखा, “यह घटना रविवार (मई 16, 2021) की है। UP जनपद मेरठ के बिजौली गाँव में एक बीजेपी विरोधी बुजुर्ग ने मुख्यमंत्री आदित्यनाथ योगी को अपनी एक गली में जाने से रोक दिया। मुख्यमंत्री के लाख इसरार करने पर भी बुजुर्ग ने रास्ता नहीं खोला और योगी को वापस जाना पड़ा।”

इस वीडियो में सुनाई दे रहा था कि सीएम योगी सभी से सावधानी बरतने और मास्क पहनने की अपील कर रहे हैं। हालाँकि ओमवीर यादव द्वारा पोस्ट किए गए वीडियो से उस हिस्से को हटा दिया गया था। इस वीडियो में ग्रामीणों द्वारा सीएम योगी के पक्ष में लगाए गए नारे भी सुने जा सकते हैं।

कंवल चड्ढा ने लिखा, “बिजौली गाँव में मेरठ में एक बूढ़े व्यक्ति ने अपनी खाट को सड़क के प्रवेश द्वार पर रखा और बहुत मजबूती से यूपी के सीएम आदित्यनाथ से कहा, “बस बहुत हो गया, हमें यहाँ आपकी जरूरत नहीं है।” उन्होंने आदित्यनाथ को अपने गाँव में प्रवेश करने से मना कर दिया। आखिर में सीएम को वापस जाना पड़ा।”

मेरठ पुलिस ने गुमराह करने वाले ट्वीट का किया खंडन

मेरठ पुलिस ने सोशल मीडिया पर किए गए भ्रामक दावों का खंडन किया। उन्होंने कहा, “आपने सोशल मीडिया पर जो पोस्ट किया है वह निराधार और भ्रामक है। यह फेक न्यूज फैलाने के दायरे में आता है। माननीय मुख्यमंत्री ने मेरठ जिले के बिजौली गाँव में कंटेनमेंट जोन में एक परिवार से मुलाकात की और स्थिति का जायजा लिया।”

उन्होंने आगे कहा कि परिवार ने उनका आभार व्यक्त किया जब उन्होंने पूछा कि क्या उन्हें समय पर दवा और इलाज मिल रहा है। ग्रामीणों ने सीएम के समर्थन में नारे भी लगाए। उन्होंने कहा, ”उसके बाद उन्होंने प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में ग्राम प्रधान व आरआरटी से बातचीत की और बिजौली ऑक्सीजन प्लांट का दौरा किया। खाट को इसलिए रखा गया क्योंकि क्षेत्र एक कंटेनमेंट जोन था।” पुलिस ने उन्हें चेतावनी दी कि सोशल मीडिया पर कोई भी भ्रामक पोस्ट न करें, अन्यथा वे उनके खिलाफ कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करेंगे।

पत्रकार संजीव गोयल ने मेरठ पुलिस की चेतावनी के बाद वीडियो को डिलीट कर दिया। हालाँकि, इस रिपोर्ट के प्रकाशित होने तक बाकियों के ट्विटर अकाउंट पर यह भ्रामक पोस्ट मौजूद था।

निष्कर्ष: नहीं, ग्रामीणों ने सीएम योगी को अपनी गली में घुसने से नहीं रोका। उन्होंने प्रवेश नहीं किया क्योंकि यह एक कंटेनमेंट जोन था। विपक्षी नेताओं, कलाकारों और कुछ पत्रकारों द्वारा किए गए दावे फर्जी थे।

मेवात के आसिफ की हत्या में सांप्रदायिक एंगल नहीं, पुरानी राजनीतिक दुश्मनी: हरियाणा पुलिस

हरियाणा पुलिस ने आसिफ की रविवार (मई 16, 2021) को हुई हत्या में किसी भी तरह के सांप्रदायिक एंगल से इनकार किया है। रिपोर्टों के अनुसार, आसिफ अपने दो चचेरे भाइयों के साथ अपनी बहन के घर से लौट रहा था जब उन पर कथित तौर पर पुरुषों के एक समूह ने हमला किया और उन्हें पीट-पीट कर मार डाला।

हालाँकि, उसकी मृत्यु की रिपोर्ट आने के तुरंत बाद, कुछ मीडिया हाउसों ने दावा किया कि उसे मारे जाने से पहले ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए मजबूर किया गया था, जिसकी वजह से घटना ने सांप्रदायिक मोड़ ले लिया।

मकतूब मीडिया रिपोर्ट

केरल स्थित पोर्टल मकतूब मीडिया ने दावा किया कि आसिफ को ‘जय श्री राम का नारा लगाने के लिए मजबूर’ किया गया था और धार्मिक नारे को ‘हिंदू राष्ट्रवादी उग्रवादियों के युद्ध’ के रूप में संदर्भित किया। हालाँकि, मकतूब मीडिया ने इस तथ्य को साबित करने के लिए कोई सबूत पेश नहीं किया।

शरजील उस्मानी का ट्वीट

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के पूर्व छात्र शरजील उस्मानी ने भी मामले में झूठ फैलाते हुए ‘जय श्री राम’ का एंगल दिया। उसने जस्टिस फॉर आसिफ का हैशटैग देते हुए ट्वीट किया कि ‘जय श्री राम’ का जाप करने वाला हिंदू किसी आतंकवादी से कम नहीं होता है। इसके साथ ही एक और ट्वीट में कहा कि 30 हिंदू लोगों के समूह ने आसिफ की हत्या कर दी।

शरजील उस्मानी का ट्वीट

वास्तव में, यहाँ तक ​​कि एक गवाह के शुरुआती बयान में कहा गया था कि कैसे उन पर एक ऐसे समूह द्वारा हमला किया गया, जहाँ ज्यादातर पुरुष उन्हें जानते थे।

वीडियो में सुना जा सकता है कि गवाह ने अपराध के सांप्रदायिक होने का कोई संकेत नहीं दिया।

अब, हरियाणा पुलिस ने भी एक बयान दिया है और किसी भी सांप्रदायिक एंगल से इनकार किया है। पुलिस के मुताबिक आसिफ हत्याकांड के मुख्य आरोपित आसिफ उर्फ सद्दू के खिलाफ दो और प्रदीप उर्फ पटवारी के खिलाफ पाँच मामले दर्ज हैं।

शुरुआती जाँच में पता चला है कि आसिफ सोहना से बसपा नेता जावेद अहमद का करीबी सहयोगी है। वह नूंह से कॉन्ग्रेस विधायक चौधरी आफताब अहमद का रिश्तेदार है। प्रदीप स्थानीय भाजपा नेता भल्ला का करीबी सहयोगी है, जो भाजपा के सोहना विधायक कंवर संजय सिंह के करीबी सहयोगी हैं।

जानकारी के मुताबिक गाँव में दो जाति-आधारित समूह हैं, एक जाकिर जाति का आसिफ और दूसरा गुर्जर जाति का प्रदीप के नेतृत्व में। प्रत्येक ग्रुप में 15-20 सदस्य हैं। करीब 20 दिन पहले आसिफ के गुट ने प्रदीप के गुट के सदस्यों को पीटा था और उसी का बदला लेने के लिए प्रदीप के गुट ने आसिफ पर हमला किया था।

फिल्मी सेट पर कभी कपड़े और जूत सँभालते थे ‘दबंग’ सलमान ख़ान: जैकी श्रॉफ ने किया बड़ा खुलासा

बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान इन दिनों अपनी फिल्म ‘राधे योर मोस्ट वांटेड भाई’ को लेकर सुर्खियों में हैं। भले ही उनकी फिल्म ओटीटी प्लेटफॉर्म पर कुछ खास कमाल न कर पाई हो, लेकिन रिलीज के चार दिन बाद भी ‘राधे’ की चर्चा जोरों पर है।

सलमान खान हमेशा से न्यू कमर्स को लॅान्च करते आए हैं। कहा जाता है कि वह जिस पर हाथ रख देते हैं उसकी किस्मत चमक जाती है। लेकिन उन्हें किसने बॉलीवुड में काम दिलवाया, ये शायद आप नहीं जानते होंगे।

दरअसल, ‘राधे’ फिल्म में अहम भूमिका निभाने वाले अभिनेता जैकी श्रॉफ ने दबंग खान को लेकर एक मजेदार खुलासा किया है। हाल ही में बॉम्बे टाइम्स को दिए एक इंटरव्यू में जैकी ने कहा कि 1988 में जब मैं ‘फलक’ फिल्म की शूटिंग कर रहा था, तब सलमान खान मेरे कपड़े और जूते सँभालते थे। इंडस्ट्री में उन्हें ब्रेक दिलाने में मेरी अहम भूमिका रही है।

जैकी श्रॉफ आगे कहते हैं कि वह सलमान को तब से जानते हैं, जब वह मॉडल हुआ करते थे और फिर असिस्टेंट डायरेक्टर बने। वो मुझे बड़ा भाई मानते थे और मेरे छोटे भाई की तरह हैं। जब वो असिस्टेंट डायरेक्टर थे तब मैं उनके फोटो उन प्रोड्यूसरों को दिखाया करता था, जिनके साथ काम कर रहा होता था।

उन्होंने कहा कि आखिरकार केसी बोकाड़िया के ब्रदर इन लॉ ने उन्हें बॉलीवुड में ब्रेक दे ही दिया। 1989 में फिल्म ‘मैंने प्यार किया’ ने उन्हें स्टारडम दिया, लेकिन मुझे लगता है कि मेरी वजह से उन्हें इंडस्ट्री में ब्रेक मिला। अभिनेता ने कहा कि सल्लू के साथ उनकी दोस्ती उतनी नहीं है, मगर जब भी कुछ बड़ा आता है तो वो पहले मेरे बारे में सोचते हैं।

बता दें कि ‘राधे’ में जैकी श्रॉफ ने सलमान खान के सीनियर पुलिस अफसर की भूमिका निभाई है। इस किरदार में वह कहीं-कहीं कॉमेडी भी करते हुए नजर आ रहे हैं। फिल्म में इन दोनों के अलावा दिशा पटानी ने भी काम किया है।

पाकिस्तानी न्यूज चैनल ने मुस्लिमों से इजरायल के खिलाफ जिहाद का किया आह्वान, कहा- ‘कुरान के 9वें अध्याय में अल्लाह का यही संदेश’

इजराइल और फिलिस्तीन के बीच जारी चल रहे संघर्ष के बीच, ‘बोल न्यूज’ के नाम से एक पाकिस्तानी समाचार चैनल ने मुसलमानों से इजराइल के खिलाफ “जिहाद” करने का आह्वान किया है। इस कार्यक्रम को रविवार (16 मई) को “टाइम फॉर जिहाद इज़राइल बनाम फिलिस्तीन” शीर्षक से ऑन एयर किया गया था।

कार्यक्रम की शुरुआत में ही शो की होस्ट नूर-उल-अरफीन ने इजराइली डिफेंस फोर्स द्वारा आतंकी संगठन हमास पर हमले का जिक्र करते कहा, “जब मैं आपसे बात कर रहा हूँ तो दुनिया की सबसे बड़ी मानवीय त्रासदी चल रही है। इससे पहले कि मैं इसके बारे में आगे बात करूँ, मैं आपको याद दिला दूँ कि कुरान इन हालातों में मोमिनों को क्या करने की सलाह देता है। कुरान के 9वें अध्याय, सूरह-ए-तौबा पर प्रकाश डालते हुए एंकर ने जिहाद करने की बात की।”

शो के होस्ट ने जोर देते हुए कहा, “आज मैं जो कुछ भी कहूँगा वो इस्लाम के प्रति धार्मिक जुड़ाव का नजरिए होगा। न तो मुझे अंतरराष्ट्रीय संबंधों को लेकर कोई रुचि है और न ही मैं जनहित के किसी दिशा-निर्देशों का पालन करूँगा। आप सूरह-ए-तौबा की कई आयतें और उसकी व्याख्या स्क्रीन पर देख सकते हैं। वह अल्लाह की खोज में जिहाद का आह्वान करता है, चाहे वह कम हो या ज्यादा। सभी मुसलमानों के लिए अल्लाह का यही संदेश है।”

नूर-उल-अरफीन ने अफसोस जताया कि दुनिया के मुसलमान कहते हैं कि वे अंतरराष्ट्रीय संबंधों और संधियों से बंधे हैं और इस तरह जिहाद के लिए तैयार नहीं हैं। कुरान के चौथे अध्याय सूरह-एन-निसा पर प्रकाश डालते हुए उन्होंने कहा, “मुसलमानों आप असहाय महिलाओं और बच्चों पर किए गए अत्याचारों को क्यों नहीं देखते? क्या कोई सच्चा मुस्लिम नेता नहीं है जो दुनिया पर राज करने की लालसा रखने वालों के हाथ रोक सके? यह गाजा में अब तक का सबसे घातक हमला है, जिसमें 150 से अधिक लोग बलिदान हुए हैं।”

पाकिस्तानी एंकर ने इजराइली सैन्य बलों को “इज़राइल रक्षा बल ” बताने की बजाय उसे “यहूदी रक्षा बल” कहना चुना। एंकर ऐसा करके पाकिस्तानी लोगों की यहूदी विरोधी भावना को भड़काना चाहता है। अपने शो में उसने एक भी बार हमास के हमले की निंदा नहीं की। एंकर ने खेद व्यक्त करते हुए कहा कि यहूदी बलों ने अल-जज़ीरा कार्यालय पर हमला किया और यह सब दुनिया भर के मुसलमानों को “जिहाद” करने के लिए एक जागृत कॉल था।

अमेरिका ने मुसलमानों के चेहरे मारा करारा तमाचा

बोल न्यूज़ के एंकर ने जो बाइडेन को अमेरिकी अध्यक्ष बताते हुए कहा, “संयुक्त राज्य अमेरिका के अध्यक्ष, जो बिडेन ने मुसलमानों के चेहरे पर उनके घोर अमानवीय स्वभाव को प्रदर्शित करते हुए एक जोरदार तमाचा दिया है। इससे सभी मुसलमानों को शर्मिंदगी उठानी पड़ी है। बाइडेन ने इजराइल के प्रधानमंत्री को फोन कर कहा है कि अपनी सीमा की सुरक्षा करना उसके अधिकार में है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि मीडिया संगठनों के कार्यालयों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। उनके अनुसार, “निर्दोष मुस्लिम फिलिस्तीनियों” का जीवन कोई मायने नहीं रखता।

2 मिलियन से अधिक सब्सक्राइबर्स के बावजूद पाकिस्तानी न्यूज चैनल का एंकर आतंकवाद, धार्मिक नफरत और नरसंहार का खुला आह्वान करने से पीछे नहीं हटा। नूर-उल-अरफीन ने ऐलान किया कि यहूदी ताकतों के कार्यों का बदला लेना चाहिए, मुसलमान किसी भी अंतरराष्ट्रीय नियमों से नहीं बंधे हैं। पाकिस्तान के चैनलों में यहूदियों का विरोध सामान्य सी बात है, लेकिन बोल न्यूज के एंकर ने एक कदम आगे निकलकर अमेरिका के खिलाफ बोला है।

भारत में दूसरी लहर नहीं आने की भविष्यवाणी करने वाले वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने सरकारी पैनल से दिया इस्तीफा

वरिष्ठ वायरोलॉजिस्ट शाहिद जमील ने भारत में कोविड-19 के प्रकोप की गंभीरता की भविष्यवाणी करने में विफल रहने के बाद भारतीय SARS-CoV-2 जीनोम सीक्वेंसिंग कंसोर्टिया (INSACOG) के वैज्ञानिक सलाहकार समूह के अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया।

बता दें कि INSACOG का वैज्ञानिक सलाहकार समूह, पिछले साल केंद्र सरकार द्वारा देश में COVID-19 महामारी विज्ञान निगरानी के लिए स्थापित किया गया था। समूह के तहत, भारत में COVID-19 के प्रचलित स्ट्रेनों का अध्ययन करने के लिए राष्ट्रीय रोग नियंत्रण केंद्र के तत्वाधान में 10 राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं को एक साथ लाया गया था।

यह कदम तब सामने आया है, जब भारत विनाशकारी कोरोना वायरस महामारी से बुरी तरह जूझ रहा है। कोरोना के नए वैरिएंट सामने आ रहे हैं। अस्पताल मरीजों से भरा हुआ है। बीमार लोगों को इलाज के लिए काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। जमील और उनके नेतृत्व वाला समूह सक्रिय कोरोना वायरस स्ट्रेनों के देश भर में फैलने के बाद भी पता नहीं लगा पाया, जिसकी वजह से कोरोना वायरस का यह प्रकोप फिर से सामने आया।

विशेषज्ञों का दावा है कि भारत का कोरोना वायरस संकट B.1.617 स्ट्रेन और B.1.17 स्ट्रेन के मिश्रण से हुआ है, जिसे यूके स्ट्रेन के रूप में जाना जाता है। जीनोम मैपिंग समूह के रूप में, INSACOG देश में फैल रहे स्ट्रेन पर नजर रखने के लिए जिम्मेदार था। हालाँकि, देश भर में कोरोना वायरस के मामलों में वृद्धि के साथ, जमील के नेतृत्व वाला समूह, प्रकोप की गंभीरता की भविष्यवाणी करने के अपने प्रयास में स्पष्ट रूप से विफल रहा।

जमील ने अपनी विफलता के लिए केंद्र को दोषी ठहराया

हाल ही में, जमील ने केंद्र सरकार पर कोरोना वायरस प्रकोप की गंभीरता की पहचान करने में अपनी विफलता के दोष को हटाने की कोशिश की। केंद्र द्वारा उन्हें दी गए काम में गड़बड़ी करने के बाद, उन्होंने न्यूयॉर्क टाइम्स में एक लेख लिखा, जिसमें उन्होंने कहा कि भारत में वैज्ञानिक ‘साक्ष्य-आधारित नीति निर्माण के लिए सख्त प्रतिक्रिया’ का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने लिखा, “डेटा के आधार पर निर्णय लेना फिलहाल एक और आपदा है, क्योंकि भारत में महामारी नियंत्रण से बाहर हो गई है।” 

साभार: न्यूयॉर्क टाइम्स

अपने लेख में, जमील, जो वर्तमान में अशोका विश्वविद्यालय में त्रिवेदी स्कूल ऑफ बायोसाइंसेज के निदेशक हैं, ने सुझाव दिया कि उन्हें केंद्र सरकार को INSACOG के वैज्ञानिक सलाहकार समूह के प्रमुख के रूप में प्रस्तावित करना चाहिए था। उन्होंने टेस्टिंग और आइसोलेशन को बढ़ाने, अधिक अस्थायी सुविधाओं का निर्माण करके अस्पताल के बिस्तरों को बढ़ाने, सेवानिवृत्त डॉक्टरों और नर्सों को शामिल करने और महत्वपूर्ण दवाओं एवं ऑक्सीजन की आपूर्ति श्रृंखला को मजबूत करने की आवश्यकता पर बल दिया।

वायरोलॉजिस्ट ने टीकाकरण की गति बढ़ाने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि भारत को अपने टीकाकरण अभियान को बढ़ाना चाहिए, जिसका लक्ष्य हर दिन 7.5 मिलियन से 10 मिलियन खुराक का टीकाकरण होना चाहिए। इस उपलब्धि को हासिल करने के लिए उन्होंने केंद्र को वैक्सीन की आपूर्ति बढ़ाने और डिलीवरी प्वाइंट को दोगुना करने का सुझाव दिया था। जमील ने टीकाकरण की पहुँच बढ़ाने के लिए निजी क्षेत्र को शामिल करने का भी प्रस्ताव रखा।

हालाँकि ये सभी सिफारिशें सीधे तौर पर केंद्र से करना चाहिए था न कि किसी विदेशी मीडिया आउटलेट में प्रकाशित कॉलम में। यह ध्यान देने योग्य है कि जमील ने पहले देश के सामने आने वाले कोरोना वायरस खतरे को कम बताया था और COVID-19 के प्रकोप को समाप्त घोषित कर दिया था।

जमील ने पहले कोरोना वायरस के प्रकोप की दूसरी लहर की संभावना को खारिज कर दिया था

जनवरी 2021 में एक इंटरव्यू में, जमील ने देश में कोरोना वायरस की स्थिति के बारे में बोलते हुए कहा था कि वह मोटे तौर पर इस बात से सहमत हैं कि देश के लिए सबसे बुरा समय खत्म हो गया है। जमील ने साक्षात्कार में कहा था, “सबसे बुरा दौर खत्म हो सकता है लेकिन हम निश्चित रूप से इससे बाहर नहीं निकले हैं। मेरी सलाह होगी कि लोग सावधानी बरतते रहें।”

यह पूछे जाने पर कि क्या भारत में कोरोना वायरस के प्रकोप की दूसरी लहर होगी, जमील ने नकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें नहीं लगता कि देश कोरोना वायरस प्रकोप की दूसरी लहर का सामना करेगा। जमील ने कहा, “भारत की पहली लहर काफी व्यापक थी। पीक बहुत तेज नहीं थी। नतीजतन, मुझे लगता है कि भारत में दूसरी लहर नहीं हो सकती है।” उन्होंने अनुमान लगाया कि भारत में लगभग 300-400 मिलियन लोग पहले ही संक्रमित हो चुके हैं इसलिए देश कोरोना वायरस की दूसरी लहर के संकट से बच जाएगा।

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इतना ही नहीं, वायरोलॉजिस्ट ने सीरम इंस्टीट्यूट के कोविशील्ड और भारत बायोटेक के कोवैक्सिन को मिली आपात मंजूरी पर भी सवाल उठाए थे। उन्होंने दोनों टीकों के परीक्षण डेटा पर संदेह व्यक्त किया था। कोविशील्ड के बारे में, जमील ने कहा था कि वैक्सीन ने ब्राजील और यूके में किए गए ट्रायल से परस्पर विरोधी प्रभावकारिता डेटा दिया। भारत बायोटेक के कोवैक्सिन के संबंध में वायरोलॉजिस्ट ने कहा कि इसकी प्रभावकारिता के बारे में डेटा उपलब्ध नहीं था।

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ऐसे समय में जब जीनोम मैपिंग समूह को देश में सक्रिय विभिन्न स्ट्रेनों और प्रकोप की दूसरी लहर पैदा करने के लिए उनके संभावित विषाणु को ट्रैक करने का प्रयास करना चाहिए था, सलाहकार समूह के प्रमुख शाहिद जमील वैज्ञानिक समुदाय और जनता को गलत संदेश बेजने में व्यस्त थे कि भारत में कोरोना वायरस प्रकोप का एक और लहर नहीं आएगा।

कैप्टन अमरिंदर पर 2015 के मामले में आवाज उठाने पर अपने ही विधायक को धमकाने का आरोप: पंजाब कॉन्ग्रेस में दरार

कॉन्ग्रेस विधायक परगट सिंह ने सोमवार (मई 17, 2021) को मीडिया को दिए एक बयान में खुलासा किया कि उन्हें पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह की तरफ से धमकी भरा मैसेज देने के लिए कैप्टन संदीप संधू का फोन आया था।

कॉल पर कैप्टन संधू ने कथित तौर पर कहा कि सीएम ने कहा है कि उन्होंने कॉन्ग्रेस विधायक परगट सिंह के खिलाफ सभी दस्तावेज एकत्र कर लिए हैं और उन्हें कार्रवाई का सामना करने के लिए तैयार रहना चाहिए। बता दें कि कैप्टन संधू पंजाब के सीएम के राजनीतिक सलाहकार हैं।

जालंधर कैंट के विधायक ने एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए कहा, “भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान होने के नाते, मैं इस तरह का संदेश पाकर स्तब्ध था। लेकिन अगर बेअदबी और पुलिस फायरिंग के मामलों पर सच बोलना उन्हें मंजूर नहीं था, तो उन्हें जो करना है, वो करने दें।”

परगट सिंह ने अन्य विधायकों और मंत्रियों जैसे सुखजिंदर रंधावा, चरणजीत चन्नी, सांसद प्रताप बाजवा और विधायक नवजोत सिंह सिद्धू के साथ पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा एसआईटी जाँच को रद्द करने के बाद बेअदबी मामले को गंभीरता से नहीं लेने के लिए सीएम के खिलाफ आवाज उठाई थी।

यह आरोप लगाना कि अन्य विधायकों और मंत्रियों को भी लपेटे में लिया जा रहा है, वास्तव में डीजीपी विजिलेंस कोई और नहीं बल्कि सीएम के वरिष्ठ सलाहकार बीआईएस चहल हैं। परगट सिंह ने कहा, “अगर विजिलेंस को कुछ करना है, तो उसे एक XEN से जुड़े सिंचाई घोटाले को तार्किक निष्कर्ष पर ले जाना चाहिए। लेकिन बड़ी मछली को बचाने का प्रयास किए जा रहा है।”

पंजाब कॉन्ग्रेस के भीतर दरारें और गहरी हो गई हैं

कॉन्ग्रेस सांसद प्रताप बाजवा ने भी इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “पंजाबियों की आँखों और कानों को अच्छा लगता, अगर विजिलेंस ने बादल के दरवाजे पर 2007-2017 से चूक और कमीशन के कृत्यों के लिए दस्तक दी होती। सिद्धू और सहयोगियों के खिलाफ अचानक उछाल गलत सलाह, गलत समय और कॉन्ग्रेस के हित के लिए हानिकारक है।”

ऑपइंडिया ने पहले बताया था कि कैसे विजिलेंस ब्यूरो ने नवजोत सिंह सिद्धू के संबंध में 5 ‘संदेहपूर्ण सौदों’ का खुलासा किया था, जिन्होंने आरोप लगाया था कि यह सब इसलिए किया जा रहा था क्योंकि उन्होंने बेअदबी मामले पर मुख्यमंत्री के खिलाफ आवाज उठाई थी।

नारदा केस में विशेष CBI कोर्ट ने ममता बनर्जी के चारों मंत्रियों को दी जमानत, TMC कार्यकर्ताओं ने किया केंद्रीय बलों पर पथराव

नारदा स्टिंग मामले में सीबीआई की विशेष अदालत ने सोमवार (17 मई 2021) की शाम को ममता बनर्जी के चारों नेताओं को जमानत दे दी। सोमवार की सुबह सीबीआई ममता सरकार के मंत्री फिरहाद हाकिम, सुब्रत मुखर्जी, विधायक मदन मित्रा और पूर्व मेयर सोवन चटर्जी को पूछताछ के लिए अपने दफ्तर ले गई। बाद में इन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था। हालाँकि, आज ही न्यायमूर्ति अनुपम मुखर्जी के नेतृत्व वाली विशेष सीबीआई अदालत ने चारों आरोपितों को जमानत दे दी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कोलकाता में निजाम पैलेस यानी सीबीआई दफ्तर के बाहर तृणमूल कार्यकर्ताओं (टीएमसी) ने जमकर हंगामा व उत्पात मचाया। सीबीआई दफ्तर के बाहर सुरक्षा में तैनात केंद्रीय बलों पर टीएमसी कार्यकर्ताओं ने पत्थरबाजी भी की।

वहीं, अपने नेताओं की गिरफ्तारी के विरोध में सबसे पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी सुबह करीब 10:48 बजे CBI दफ्तर पहुँच गईं और छह घंटे तक वहीं बैठी रहीं। उन्होंने एजेंसी को अपनी गिरफ्तारी की चुनौती भी दी थी और टीएमसी ने सीबीआई पर बदले के तहत कार्रवाई करने का आरोप लगाया था।

इसके चलते यहाँ देखते ही देखते TMC के लोगों का हुजूम उमड़ गया। बताया जा रहा है कि पहले यहाँ सीबीआई की कार्रवाई के खिलाफ नारेबाजी की गई और कुछ ही देर में टीएमसी के लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। समाचार न्यूज एजेंसी ANI ने इसका वीडियो भी साझा किया है।

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने भी सीबीआई दफ्तर के बाहर आगजनी और पथराव के बावजूद पुलिस के मूकदर्शक बने रहने पर नाराजगी जताई।

गौरतलब है कि बंगाल में साल 2016 के विधानसभा चुनाव से पहले नारदा स्टिंग टेप सार्वजनिक हुए था। स्टिंग ऑपरेशन कथित तौर पर नारदा न्यूज पोर्टल के मैथ्यू सैमुअल ने किया था। इन स्टिंग्स में टीएमसी नेताओं को कथित तौर पर कंपनी के प्रतिनिधियों से रुपए लेते हुए देखा गया था। 

स्टिंग्स सामने आने के बाद राज्य में खूब बवाल मचा, जिसके बाद यह मामला हाई कोर्ट पहुँचा था। इसके बाद मामले की जाँच सीबीआई को सौंप दी गई थी। मैथ्यू सैमुअल सीबीआई द्वारा टीएमसी नेताओं की गिरफ्तारी का स्वागत किया है।

महाराष्ट्र: पुलिस ने कब्रिस्तान में नमाज के लिए इकट्ठे 60 लोगों पर किया FIR, Covid दिशा-निर्देशों की उड़ी थी धज्जियाँ

महाराष्ट्र में सख्त लॉकडाउन लागू होने के बावजूद, नमाज अदा करने के लिए मुंबई पुलिस ने 50-60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है। न्यूज ट्रैक ने इसकी जानकारी दी।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस को शुक्रवार (मई 14, 2021) को मुंबई के माहिम कब्रिस्तान में मुस्लिमों के एक बड़े जमावड़े की सूचना मिली थी। वे गुपचुप तरीके से नमाज पढ़ रहे थे, जबकि कोरोना वायरस महामारी को रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के बाद धार्मिक और सार्वजनिक स्थानों को बंद कर दिया गया है। पुलिस ने मौके पर पहुँच कर सभी को पकड़ लिया। माहिम थाने में 50-60 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया। ताजा जानकारी के मुताबिक पिछले शुक्रवार को मुंबई के माहिम कब्रिस्तान में नमाज अदा की गई थी।

पुलिस ने लॉकडाउन दिशानिर्देशों का उल्लंघन करने के लिए कब्रिस्तान प्रबंधन के खिलाफ भी मामला दर्ज किया है। कब्रिस्तान प्रबंधन ने अभी तक कोई बयान जारी नहीं किया है। मामले के बारे में बात करते हुए, विकास शिंदे नाम के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “लगभग 60 लोग माहिम में सुन्नी मुस्लिम कब्रिस्तान में नमाज अदा कर रहे थे। जैसे ही पुलिस को इसकी जानकारी हुई वह तुरंत मौके पर पहुँची और सभी को रंगेहाथ पकड़ लिया। पुलिस ने अभी तक किसी को गिरफ्तार नहीं किया है।”

राजस्थान पुलिस ने डूंगरपुर मस्जिद में ईद की बड़ी सभा का किया भंडाफोड़

इससे पहले 14 मई को, राजस्थान पुलिस ने मुसलमानों के एक समूह पर लाठीचार्ज किया था, जो राजस्थान के डूंगरपुर में एक स्थानीय मस्जिद में ईद के अवसर पर कोरोना वायरस की दूसरी लहर के बीच जारी लॉकडाउन के नियमों की पूरी तरह से अवहेलना करने के लिए एकत्र हुए थे।

इंडिया टीवी के पत्रकार मनीष भट्टाचार्य के अनुसार, राजस्थान पुलिस ने सूचना मिलने के बाद डूंगरपुर शहर की एक स्थानीय मस्जिद में छापेमारी की, जिसमें कई मुसलमानों ने लॉकडाउन के आदेशों के बावजूद ईद मनाने के लिए लोगों को इलाके में जमा किया था। जैसे ही पुलिस मौके पर पहुँची, उन्होंने एक बड़ी सभा देखी, जो एक स्थानीय मस्जिद में सोशल डिस्टेंसिंग के दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए एकत्र हुई थी।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वायरल हुए वीडियो में दर्जनों लोगों को पुलिस के डर से मस्जिद से बाहर निकलते और भागते देखा जा सकता है। सार्वजनिक सभा के खिलाफ सख्त आदेशों के बावजूद, कई दर्जन स्थानीय लोग बंद परिसर के अंदर जमा हो गए थे, जिससे कोविड फैलने का खतरा था।

ऑक्सीजन जमाखोरी मामले में कोर्ट ने ‘खान चाचा’ नवनीत कालरा को 3 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजा, होगी पूछताछ

ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी के मामले में गिरफ्तार हुए रेस्टोरेंट्स संचालक नवनीत कालरा को दिल्ली पुलिस ने सोमवार (मई 17, 2021) को साकेत कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने नवनीत कालरा को तीन दिन की पुलिस हिरासत में भेज दिया है। मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस ने कोर्ट से कालरा की पाँच दिन की रिमांड माँगी थी।

बता दें कि दिल्ली में खान मार्केट स्थित खान चाचा रेस्टोरेंट के अलावा कई अन्य रेस्टोरेंट से ऑक्सीजन कंसंट्रेटर की कालाबाजारी करने के मामले में मुख्य आरोपित नवनीत कालरा को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने रविवार (मई 16, 2021) देर रात गिरफ्तार किया था। नवनीत कालरा गुरुग्राम में अपने साले के फॉर्महाउस में छिपा हुआ था। नवनीत के रेस्टोरेंट और फॉर्महाउस से दिल्ली पुलिस ने 524 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बरामद किए थे।

पुलिस अधिकारियों के मुताबिक रविवार रात गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस ने गुरुग्राम में स्थित नवनीत कालरा के साले के फॉर्महाउस पर छापेमारी की। जहाँ से नवनीत कालरा को गिरफ्तार कर लिया गया। इससे पहले साकेत कोर्ट ने नवनीत कालरा की अग्रिम जमानत याचिका खारिज कर दी थी जिसके बाद दिल्ली हाईकोर्ट ने भी कालरा की गिरफ्तारी पर रोक लगाने से इनकार किया था।

लोधी कॉलोनी थाना पुलिस ने सबसे पहले सेंट्रल मार्केट के एक रेस्टोरेंट्स से 419 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बरामद किए थे। इसके साथ ही 5 आरोपितों को भी गिरफ्तार किया था। आरोपित की निशानदेही पर पुलिस ने खान मार्केट के दो अन्य रेस्टोरेंट्स से भी 105 ऑक्सीजन कंसंट्रेटर बरामद किए थे। इस मामले में पुलिस ने 420, आवश्यक वस्तु अधिनियम और महामारी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया था।

ऑक्सीजन की कालाबाजारी से जुड़ी नवनीत कालरा की ऑडियो क्लिप भी बीते 9 मई, 2021 को लीक हुई थी। इसमें वह यह कहते सुना गया था कि उसके ऊपर “बहुत अधिक दबाव” है और वह सभी कॉल्स का जवाब नहीं दे सकता। कालरा इस ऑडियो में कह रहा था, “मेरे पास 2 लाख कॉल्स हैं। इसलिए मैं हर किसी के पर्सनल सवालों का जवाब नहीं दे सकता हूँ। आपको कौन सा मॉडल (ऑक्सीजन कॉन्सेंट्रेटर) भेजा गया है, इसकी डिटेल्स मैसेज में दी गई है। मैं खान मार्केट के लोगों को उनके उपयोग के लिए प्रति व्यक्ति एक मशीन दे सकता हूँ।” नवनीत कालरा पर AAP पर कॉन्ग्रेस मेहरबान रही है।