Home Blog Page 3827

‘अब एक जोड़े के रूप में हम आगे नहीं बढ़ सकते’: बिल गेट्स और मिलिंडा ने की तलाक की घोषणा, टूटा 27 सालों का साथ

दुनिया के चौथे सबसे अमीर व्यक्ति और Microsoft के संस्थापक बिल गेट्स और उनकी पत्नी मिलिंडा ने तलाक लेने का फैसला लिया है। दोनों ने कहा, “हमें लगता है कि अब एक जोड़े के रूप में हम और आगे नहीं बढ़ सकते।” बिल और मिलिंडा पिछले 27 वर्षों से शादीशुदा थे। उन्होंने कहा कि काफी सोच-विचार करने के बाद और इस रिश्ते पर काफी काम करने के बाद उन्होंने निर्णय लिया है कि अब इस शादी को ख़त्म करना ही ठीक है।

मिलिंडा की बिल गेट्स से तब पहली बार मुलाकात हुई थी, जब उन्होंने 1980 में माइक्रोसॉफ्ट में नौकरी शुरू की थी। दोनों मिल कर NGO ‘बिल एंड मिलिंडा गेट्स फाउंडेशन’ चलाते हैं। ये NGO संक्रामक रोगों से गरीबों को बचाने और बच्चों के टीकाकरण का अभियान चलाने का दावा करता है। इसके लिए उन्होंने कई सौ करोड़ डॉलर्स खर्च किए हैं। दोनों की 2 बेटियाँ और एक बेटा है। बिल गेट्स और वॉरेन बफेट अक्सर अरबपतियों से अपने धन का एक हिस्सा समाजसेवा में दान करने की अपील करते रहे हैं।

बिल गेट्स की संपत्ति 130.5 बिलियन डॉलर (9.64 लाख करोड़ रुपए) है। उन्होंने 70 के दशक में माइक्रोसॉफ्ट की स्थापना की और दुनिया की इसी सबसे बड़ी सॉफ्टवेयर कंपनी के सहारे उन्होंने इतना धन कमाया। बिल और मिलिंडा ने अपने बयान में कहा, “पिछले 27 वर्षों से हमने अपने शानदार बच्चों का पालन-पोषण किया और एक ऐसा संगठन बनाया, जो पूरी दुनिया में लोगों को स्वस्थ और अच्छी ज़िंदगी जीने में सहायता कर रहा है।”

दोनों ने अपने संयुक्त बयान में कहा, “हम अब भी उस अभियान में विश्वास करते हैं, जो हमने शुरू किया था। हम इस संगठन के लिए काम करना जारी रखेंगे। लेकिन, अपने जीवन के अगले चरणों में हम एक पति-पत्नी के रूप में और विकसित नहीं हो सकते। अब हम जब नई ज़िंदगी शुरू करने जा रहे हैं, आप सबसे आग्रह है कि हमें इसके लिए प्राइवेसी और जगह दें।” बिल गेट्स 65 साल के हैं। मिलिंडा उनसे 9 वर्ष छोटी है।

1987 में मिलिंडा गेट्स ने मॉइक्रोसॉफ़्ट में बतौर प्रोडक्ट मैनेजर नौकरी शुरू की थी। उसी साल कंपनी के एक बिजनेस डिनर में दोनों साथ बैठे थे। इसके बाद दोनों एक-दूसरे को डेट करने लगे। बिल गेट्स ने एक बार बताया था कि दोनों एक-दूसरे का खूब ख्याल रखते थे और उनके पास दो ही विकल्प थे- ब्रेअकप या शादी। वहीं मिलिंडा के अनुसार, बिल इतना व्यवस्थित काम करते थे कि दिल के मामले में भी वो एक व्हाइटबोर्ड पर लिखते थे कि शादी करने के फायदे और नुकसान क्या-क्या हैं।

बिल गेट्स और मिलिंडा ने 1994 में लनाइ की द्वीप पर शादी रचाई थी। इस दौरान उन्होंने उस इलाके के सारे हेलीकॉप्टर्स को भाड़े पर ले लिया था, ताकि उस वक़्त कोई अनचाहा अतिथि ऊपर से न गुजरे। बिल गेट्स ने लगभग एक साल पहले माइक्रोसॉफ्ट बोर्ड से इस्तीफा देकर समाजसेवा में जीवन खपाने की बात कही थी। उनके फाउंडेशन ने कोरोना रिसर्च और वैक्सीन पर 1.7 बिलियन डॉलर (12.93 हजार करोड़ रुपए) खर्च किए हैं।

NDTV पत्रकार ने ABVP पर टीएमसी गुंडों के हमले को किया जस्टिफाई, गुल पनाग के पिता को ‘जश्न’ पर लगी लताड़

NDTV पत्रकार सौमित मोहन ने सोमवार (मई 3, 2021) को पश्चिम बंगाल में ABVP कार्यकर्ताओं पर हुए हमले को जस्टिफाई करने का प्रयास किया। मोहन ने ANI के ट्वीट पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “जैसी करनी वैसी भरनी।”

मोहन ने जिस ट्वीट पर अपनी टिप्पणी दी उसमें बताया गया था कि एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर टीएमसी गुंडों ने हमला किया है। इस ट्वीट में लिखा था कि 15-20 टीएमसी गुंडों ने एबीवीपी के कोलकाता ऑफिस पर हमला बोला। वहाँ तोड़फोड़ की। एबीवीपी कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट की और भगवान हनुमान व माँ काली की मूर्ति को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

सौमित की प्रोफाइल पर जाकर देखें तो पता चलता है कि उनके बायो में एनडीटीवी का उल्लेख है। उन्होंने अपना यह कमेंट डिलीट तो कर दिया है लेकिन इसके लिए अब तक माफी नहीं माँगी। हालाँकि एक ट्वीट में उन्होंने बताया कि उनके ट्विटर अकाउंट से 10: 45PM के आसपास छेड़छाड़ हुई थी, जबकि एबीवीपी कार्यकर्ताओं पर हुए हमले को जस्टिफाई 10:36PM पर किया गया था।

बता दें कि 2 मई 2021 को तृणमूल कॉन्ग्रेस ने राज्य में बहुमत लेकर दोबारा सत्ता वापसी की, वहीं भाजपा ने 77 सीटें जीतीं। इस दौरान ममता बनर्जी सुवेंदु अधिकारी से हार गईं। इसी के बाद से वहाँ लगातार भाजपा कार्यकर्ताओं पर हमले होने लगे। किसी को बेरहमी से प्रताड़ित किया गया तो किसी की हत्या कर दी गई। हत्या, हिंसा, आगजनी का आरोप टीएमसी के गुंडों पर लग रहा है।

ऐसी घटनाओं के बावजूद तृणमूल कॉन्ग्रेस की जीत का महिमामंडन करने में लगे एक पूर्व रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल को भी सोशल मीडिया पर नेटीजन्स ने जमकर लताड़ा। रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल एचएस पनाग व बॉलीवुड अभिनेत्री गुल पनाग के पिता ने टीएमसी की जीत पर लिखा, “एक तिरस्कृत महिला का गुस्सा नरक के प्रकोप जैसा होता है। (Hell hath no fury like a woman scorned)”

इस ट्वीट पर नेटीजन्स ने उनको लताड़ लगाते हुए लिखा, “हाँ सर वो तो दिख रहा है जिस तरह वहाँ कल से लोगों के घर जले हैं और मार रहे हैं।”

एक यूजर ने तो अपनी आंटी की कहानी ट्वीट में बताई। यूजर ने कहा कि वह न तो भाजपा समर्थक थीं और न वोटर, लेकिन टीएमसी गुंडों ने उनका घर तोड़ दिया, सिर्फ़ इसलिए क्योंकि उन लोगों को लगा वह भाजपा समर्थक हैं।

इस बीच पनाग ने यूजर्स के ट्वीट देख लिखा, “356 लगा दो! लेकिन इसके लिए हिम्मत चाहिए।”

उल्लेखनीय है कि विधानसभा चुनावों में टीएमसी की जीत के बाद से राज्य में हिंसा का दौर चल रहा है। अब तक 11 लोगों की मौत की रिपोर्ट सामने आ चुकी है। पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया है कि नतीजों के बाद उनकी पार्टी के करीब 100 दफ्तरों और कार्यकर्ताओं के घरों को तबाह कर दिया गया और कुछ को आग के हवाले कर दिया गया है। ममता बनर्जी ने ये कह कर पल्ला झाड़ लिया है कि जब तक वो शपथ नहीं ले लेतीं, कानून-व्यवस्था उनके हाथ में नहीं है।

‘माँ काली और हनुमान की प्रतिमाओं को तोड़ा’: बंगाल में लेफ्ट भी हिंसा का शिकार, अब तक 11 मौतों की रिपोर्ट

पश्चिम बंगाल में रविवार (मई 2, 2021) को हुई मतगणना में TMC की जीत के साथ ही सत्ताधारी दल के गुंडों पर हिंसा के आरोप लग रहे हैं। भाजपा के दफ्तरों में आग लगाने, कार्यकर्ताओं की हत्या, उनके घरों को तहस-नहस करने की खबरें आ चुकी है। बीजेपी ने अपनी 2 महिला पोल एजेंट के साथ गैंगरेप का भी दावा किया है। ‘अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP)’ ने भी अपने दफ्तरों और कार्यकर्ताओं को निशाना बनाने के आरोप टीएमसी के गुंडों पर लगाए हैं।

आरोप है कि राजधानी कोलकाता में स्थित ABVP के दफ्तर में तृणमूल कार्यकर्ता घुस गए और उन्होंने वहाँ जम कर तोड़फोड़ मचाई। साथ ही वहाँ मौजूद कार्यकर्ताओं के साथ मारपीट भी हुई। ABVP ने ये भी आरोप लगाया है कि TMC के गुंडों ने जान-बूझकर माँ काली और भगवान हनुमान की प्रतिमाओं के साथ तोड़फोड़ की। ABVP की महामंत्री निधि त्रिपाठी ने कहा कि जिन्होंने भी ममता बनर्जी के खिलाफ बोला, उनका खून बहाया जा रहा है।

उनका कहना है कि कोलकाता में ABVP के प्रान्त कार्यालय में 150 की संख्या में TMC के गुंडे नारेबाजी और हूटिंग करते हुए आए, जिन्होंने जम कर उपद्रव किया। इसके बाद सोमवार को दोपहर में 15-20 गुंडे भीतर घुस गए और कार्यालय में मौजूद पदाधिकारियों के साथ गाली-गलौज व हाथापाई की। दफ्तर में मौजूद श्यामा प्रसाद मुखर्जी, सुभाष चंद्र बोस और रवीन्द्रनाथ टैगोर की तस्वीरों को तोड़ डाला गया।

निधि त्रिपाठी के अनुसार, माँ काली और भगवान हनुमान की प्रतिमाओं को नीचे गिरा कर उन्हें पैरों तले रौंदा भी गया। उन्होंने कहा कि 100 के करीब गुंडे ABVP के कार्यालय को घेर कर खड़े थे। उन्होंने बताया कि TMC के गुंडे ये कहते हुए हमला कर रहे थे कि जिन्होंने ममता दीदी के चेहरे पर कालिख लगाई है और उनके खिलाफ बोला है, उन्हें हम बंगाल में नहीं रहने देंगे। उन्होंने कहा कि बदला लेने पर उतारू तृणमूल वाले खून बहा रहे हैं।

अब सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि वामपंथी नेता भी आरोप लगा रहे हैं कि उनके दफ्तरों पर हमले किए जा रहे हैं, कार्यकर्ताओं के साथ हिंसा हो रही है और आगजनी की जा रही है। JNU छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा कि TMC को जनादेश स्वीकार करना चाहिए और ये जनादेश लोगों के लिए काम करने के लिए मिला है, हिंसा के लिए नहीं। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी के कार्यकर्ता विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं के घरों पर हमले कर रहे हैं, जिसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता।

CPI(M) के वरिष्ठ नेता सीताराम येचुरी ने भी कहा कि TMC जिस तरह हिंसा कर अपनी जीत का जश्न मना रही है, वो निंदनीय है। उन्होंने कहा कि ऐसी हिंसा का प्रतिकार किया जाएगा, ये स्वीकार्य नहीं है। येचुरी ने आरोप लगाया कि कोविड-19 महामारी से निपटने की बजाए ममता बनर्जी अराजकता फैलाने में लगी हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि CPI(M) लोगों की मदद, सुरक्षा और राहत देने के लिए हमेशा मौजूद रहेगा।

शुभेंदु अधिकारी के विधानसभा क्षेत्र नंदीग्राम के केन्डमारी गाँव में तृणमूल के कार्यकर्ताओं ने भाजपा की महिला कार्यकर्ताओं को जमीन पर पटक-पटक कर पीटा, जिसका वीडियो वायरल होने के बाद लोग राज्य में महिला सुरक्षा पर भी सवाल उठा रहे हैं। पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने आरोप लगाया कि महिलाओं को पीटने वाले ‘TMC के मुस्लिम गुंडे’ हैं। अब तक करीब एक दर्जन लोगों की हत्या की बात कही जा रही है।

भाजपा कार्यकर्ता अभिजीत सरकार ने फेसबुक पर लाइव आकर तृणमूल की गुंडागर्दी के बारे में बताया था। इसके कुछ ही घंटों बाद उनकी हत्या कर दी गई। उनके पालतू कुत्तों के बच्चों को ही मार डाला गया। इस तरह की कई हत्याएँ हुई हैं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा आज मृत कार्यकर्ताओं के परिजनों से मुलाकात करेंगे। केंद्रीय गृह मंत्रालय ने बंगाल से रिपोर्ट रिपोर्ट तलब की है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने DGP और कोलकाता के कमिश्नर को विशेष निर्देश दिए हैं।

ननूर से भाजपा की दो पोलिंग एजेंट्स के साथ गैंगरेप की खबर सामने आई है। ‘दैनिक जागरण’ की खबर के अनुसार, 9 भाजपा, 1 ISF और एक तृणमूल के कार्यकर्ता हिंसा की भेंट चढ़ गए हैं। नंदीग्राम में कई दुकानों में घुस कर लूटपाट व तोड़फोड़ हुई। कोलकाता के उल्टाडांगा में एक भाजपा कार्यकर्ता को पीट-पीट कर मार डाला गया। नॉर्थ 24 परगना के भाटपाड़ा में क्रूड बम बरामद हुआ। ममता बनर्जी ने हिंसा रोकने की अपील करते हुए कहा कि भाजपा और अर्धसैनिक बलों ने हमें काफी प्रताड़ित किया है।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष ने आरोप लगाया है कि नतीजों के बाद उनकी पार्टी के करीब 100 दफ्तरों और कार्यकर्ताओं के घरों को तबाह कर दिया गया और कुछ को आग के हवाले कर दिया गया है। ममता बनर्जी ने ये कह कर पल्ला झाड़ लिया है कि जब तक वो शपथ नहीं ले लेतीं, कानून-व्यवस्था उनके हाथ में नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा पुरानी और राज्य के बाहर की तस्वीरें शेयर कर के अनर्गल आरोप लगा रही है।

नहीं रहे जगमोहन: 1990 में आतंकियों की आखिरी साजिश को विफल कर घाटी को बचाया था

जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल जगमोहन का निधन हो गया है। वे 94 साल के थे। दो बार जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल की जिम्मेदारी सँभालने वाले जगमोहन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में मंत्री भी रहे थे। कड़क नौकरशाह रहे जगमोहन के निधन पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शोक जताया है।

उनका पूरा नाम जगमोहन मल्होत्रा था। जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाने के बाद बीजेपी ने जब संपर्क अभियान शुरू किया था तो अमित शाह और मौजूदा बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा उनसे मिलने उनके घर पहुँचे थे। जगमोहन को पहली बार राज्यपाल बनाकर जम्मू-कश्मीर 1984 में कॉन्ग्रेस ने भेजा था। उस समय वह 1989 तक इस पद पर रहे। दूसरी बार वीपी सिंह की सरकार ने उन्हें जनवरी 1990 में राज्यपाल बनाकर भेजा और मई 1990 तक वे पद पर रहे।

जगमोहन ने दूसरी बार 1990 में 19 जनवरी की उसी शाम राज्यपाल पद की शपथ ली थी, जिस मनहूस रात घाटी की हर मस्जिद से एक ही आवाज आ रही थी कि हमें कश्मीर में हिंदू औरतें चाहिए, लेकिन बिना किसी हिंदू मर्द के। वह रात जब हिंदुओं को केवल तीन विकल्प दिए गए थे। पहला, कश्मीर छोड़कर भाग जाओ। दूसरा, धर्मांतरण कर लो। तीसरा, मारे जाओ। वह रात जिसने मानवीय इतिहास के सबसे बड़ी पलायन त्रासदियों में से एक का दरवाजा खोला। जिसके कारण करीब 4 लाख कश्मीरी हिंदू जान बचाने के लिए अपना घर, अपनी संपत्ति अपने ही देश में छोड़कर भागने को मजबूर हुए।

उस दिन को लेकर जगमोहन ने ‘कश्मीर: समस्या और समाधान’ में लिखा है, “अचानक विमान झटके के साथ नीचे झुका। ऐसा बाहरी हवा में दबाव के अन्तर के कारण हुआ। सीमा सुरक्षा बल का वह छोटा सा विमान उसे आसानी से झेल नहीं सकता था। पूरा विमान काँप उठा और उसके साथ मेरी विचारधारा भी। शायद इसने मुझे संस्मरण दिलाया कि मैं ऐसे राज्य में जा रहा हूँ जो अशांति और दहशत में फँसा है। यह 19 जनवरी 1990 की दोपहर थी। मैं विमान द्वारा दूसरी बार जम्मू-कश्मीर जा रहा था।”

उस रात क्या हुआ इससे हम सब परिचित हैं। जगमोहन ने खुद लिखा है कि पहले ही दिन आतंकवादियों, पाकिस्तान समर्थित तत्वों, कट्टरपं​थी और सांप्रदायिक तत्वों तथा राजनीतिक और शासकीय निहित तत्वों ने अपने-अपने तरीके से उन्हें कमजोर और पंगु बनाने का निर्णय कर लिया था। लेकिन, जगमोहन की असली चुनौती 26 जनवरी 1990 को इंतजार कर रही थी।

असल में उस साल की 26 जनवरी जुमे के दिन थी। ईदगाह पर 10 लाख लोगों को जुटाने की योजना बनाई गई थी। मस्जिदों के लाउडस्पीकरों से लोगों को छोटे-छोटे समूह में ईदगाह पहुँचने को उकसाया जा रहा था। श्रीनगर के आसपास के गाँव, कस्बों से भी जुटान होना था। योजना थी कि जोशो-खरोश के साथ नमाज अता की जाएगी। आजादी के नारे लगाए जाएँगे। आतंकवादी हवा में गोलियाँ चलाएँगे। राष्ट्रीय ध्वज जलाया जाएगा। इस्लामिक झंडा फहाराया जाएगा। विदेशी रिपोर्टर और फोटोग्राफर तस्वीरें लेने के लिए वहाँ जमा रहेंगे। उससे पहले 25 की रात टोटल ब्लैक आउट की कॉल थी।

साभार: कश्मीर: समस्या और समाधान

आतंकियों को कामयाबी का पूरा गुमान था। वे जानते थे कि गणतंत्र दिवस होने के कारण आवाजाही पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा। नेता और अधिकारी जम्मू में सलामी लेने में व्यस्त होंगे। स्थानीय अधिकारी कोई काम नहीं करेंगे। इस्लामी झंडा लहराते ही उनका सरेंडर करवाया जाएगा। तैयारियाँ पूरी थी और साजिश पर गुप्त तरीके से अमल हो रहा था। अंतिम वक्त में हैरान कर देने के मॅंसूबे थे। 14 अगस्त 1989 को वे इसका एक प्रयोग कर चुके थे। तब कुछ आतंकियों ने परेड की सलामी ली थी। पाकिस्तान का स्वतंत्रता दिवस मनाया गया था। अखबारों में उस जश्न की ख़बरें और तस्वीरें छपी थीं। अगले दिन भारत के स्वतंत्रता दिवस पर तिरंगे को सार्वजनिक रूप से जलाया गया था।

26 जनवरी से दो दिन पहले अफवाह फैलाई गई कि अर्धसैनिक बलों ने कश्मीर आर्म्ड फोर्सेस के चार जवानों को मार गिराया है। ‘खून का बदला खून’ का आह्वान किया गया। 25 जनवरी की सुबह श्रीनगर में भारतीय वायुसेना के स्क्वाड्रन लीडर रवि खन्ना और तीन अन्य अफसर की आतंकियों ने निर्मम हत्या कर दी। हत्या उस समय की गई जब वे ड्यूटी पर जाने के लिए अपनी दफ्तर की गाड़ी का इंतजार कर रहे थे। आतंकियों ने संदेश दे दिया था।

आतंकियों के लिए आज़ादी बस कुछ घंटे दूर थी। उन्हें लग रहा था कि इस साजिश की भनक जगमोहन को नहीं लगेगी। लगी भी तो 10 लाख लोगों पर बल प्रयोग का जोखिम नहीं उठाया जाएगा। लेकिन, मजहबी उन्मादियों को घुटने पर लाने का प्लान पहले से तैयार था। उन्हें चौंकाते हुए जगमोहन ने 25 जनवरी की दोपहर ही कर्फ्यू लगा दिया। अपने कुछ विश्वस्त सहयोगियों को उसी शाम बता दिया कि वे सलामी लेने जम्मू नहीं जाएँगे। श्रीनगर में ही डेरा डाले रहेंगे। सभी सरकारी विभागों को आदेश दिए कि हर हाल में दफ्तरों में लाइटें जलनी चाहिए। हर हाल में स्ट्रीट लाइट ऑन रहनी चाहिए। इसके लिए पीडब्ल्यूडी और बिजली विभाग को विशेष आदेश दिए गए। शाम हुई तो बिजली जल उठी। बकौल जगमोहन, आप इसे अथॉरिटी का सम्मान कहिए या डर, कर्मचारियों ने इसका पालन किया।

साभार: कश्मीर: समस्या और समाधान

इन लाइटों की रोशनी से जो गर्माहट पैदा हुई वह इस्लामिक आतंकवाद पर भारत की पहली मनोवैज्ञानिक जीत थी। इसने तय कर दिया कि जीतना भारत को ही है। कश्मीर को संविधान के आईन में ही चलना है, न कि किसी मजहबी उन्माद में जलना है। 1990 के जनवरी के आखिरी दिनों में जगमोहन ने राष्ट्रपति को लिखे पत्र में भी इस घटना का जिक्र किया था। जो कुछ इस तरह था,

आदरणीय राष्ट्रपति जी,
ठीक दस दिन पहले मैंने अपना कार्यभार संभाला था। तब से अब तक मैं एक छोटी रिपोर्ट लिखने के लिए दस मिनट का समय भी ​नहीं निकाल सका। स्थिति इतनी गंभीर और संकटपूर्ण थी।
… यह वाकई चमत्कार था कि 26 जनवरी को काश्मीर बचा लिया गया और हम राष्ट्रीय तथा अंतरराष्ट्रीय शर्मिंदगी उठाने से बच गए। इस दिन की कहानी लम्बी है और यह बाद में पूरे ब्यौरे के साथ बताई जानी चाहिए।
… मैंने 26 जनवरी को हुई घटनाओं में अपनी भूमिका पूरी तरह अदा की है और मुझे इसका गर्व है। लेकिन अपना काम जारी रखना मेरे लिए कठिन हो जाएगा यदि यह प्रभाव बना रहा कि जनता में मुझे पूरा समर्थन नहीं प्राप्त है। पहले से ही मुझे एक टूटा और बिखरा प्रशासन मिला है। यदि कमांडर पर ही हर रोज छिप कर वार किया जाए तो सफलता का क्या अवसर रह जाता है इसकी कल्पना की जा सकती है।
… कामचलाऊ समाधानों या सुगम रास्तों का सहारा लेना आत्मघाती नहीं तो गलत जरूर होगा। विष महत्वपूर्ण अंशों तक पहुॅंच चुका है। जब तक कि उसे पूरी तरह समाप्त नहीं किया जाता, हम एक संकटपूर्ण स्थिति से दूसरी में ही लड़खड़ाते रहेंगे।
आपका
-जगमोहन

वैसे जगमोहन को पहली बार जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल इंदिरा गाँधी की सरकार ने ही बनाया था। लेकिन यह भी छिपा नहीं कि बाद के वर्षों में वे कॉन्ग्रेस को खटकते रहे। उनका नाम लेकर कॉन्ग्रेस अपने शीर्ष परिवार की कश्मीर नीतियों की नाकामी को छिपाने की कोशिश करता रहा।

अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद उस समय राज्यसभा में विपक्ष के नेता रहे गुलाम नबी आजाद ने कहा था, “पिछले दिनों में जो घटनाएँ हुई हैं उससे जम्मू-कश्मीर और लेह-लद्दाख के लोग डरे हुए हैं। इससे 1990 की यादें ताजा हो गई हैं, जब वीपी सिंह की सरकार में बीजेपी ने जगमोहन को कश्मीर का राज्यपाल बनवाया था और फिर घाटी से कश्मीरी पंडितों को बसों में भर कर बाहर निकाला गया जो आज तक एक कलंक की तरह है।”

पत्रकार आदित्य राज कौल ने ट्वीट कर उस समय कहा था, “2014 में वाराणसी में एक साक्षात्कार के दौरान ने गुलाम नबी आजाद ने मुझे जगमोहन के बारे में सवाल पूछने को कहा था ताकि वे भाजपा पर निशाना साध सकें।” कश्मीरी पंडितों के मसीहा जगमोहन को खलनायक साबित करने के लिए एक अन्य कॉन्ग्रेसी और केन्द्र में मंत्री रह चुके सैफुद्दीन सोज तो बकायदा एक किताब ‘Kashmir: Glimpses of History and the Story of Struggle’ भी लिख चुके हैं।

यह सही है कि दूसरी बार, 1990 में जब जगमोहन को कुछ महीनों के लिए जम्मू-कश्मीर का राज्यपाल बनाया गया तो केन्द्र में वीपी सिंह की सरकार थी और वह भाजपा के समर्थन से चल रही थी। यह भी सच है कि उनके इस कार्यकाल में कश्मीरी पंडितों का बड़े पैमाने पर पलायन हुआ। लेकिन, इसका दूसरा पहलू यह भी है कि उनके राज्यपाल बनने से पहले 1987-88 से ही पंडितों ने घाटी छोड़ना शुरू कर दिया था। 14 सितंबर 1989 को भाजपा नेता पंडित टीका लाल टपलू की निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसके कुछ समय बाद ही जज नीलकंठ गंजू की हत्या कर दी गई। गंजू ने जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट के नेता मकबूल भट्ट को मौत की सजा सुनाई थी। जुलाई से नवंबर 1989 के बीच 70 अपराधी जेल से रिहा किए गए थे। घाटी में हमें पाकिस्तान चाहिए। पंडितों के बगैर, पर उनकी औरतों के साथ जैसे नारे लग रहे थे।

ऐसे माहौल में श्रीनगर पहुँचे जगमोहन ने कश्मीरी पंडितों को घाटी से सुरक्षित निकलने का मौका मुहैया कराया, जिसके लिए पंडित उन्हें आज भी मसीहा मानते हैं। अरुण शौरी ने 2004 में यूँ ही नहीं कहा था, “यह जगमोहन ही रहे, जिन्होंने भारत के लिए घाटी को बचाया।”

BJP की 2 पोल एजेंट से गैंगरेप की खबरों को बंगाल पुलिस ने नकारा

पश्चिम बंगाल राजनीतिक हिंसा के लिए हमेशा से कुख्यात रहा है। विधानसभा चुनावों में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की जीत के बाद राज्य में हिंसा का नया दौर शुरू हो गया है। बीजेपी के कार्यकर्ताओं, उनके घरों और कार्यालयों को निशाना बनाने की खबर दो मई से ही लगातार आ रही है। इंडिया टुडे ने कहा है कि बीजेपी ने ननूर में तृणमूल के गुंडों पर अपनी दो महिला कार्यकर्ताओं के साथ गैंगरेप का आरोप लगाया है। हालाँकि पश्चिम बंगाल पुलिस ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर इसे नकार दिया है।

इंडिया टुडे के एग्जीक्यूटिव एडिटर दीप हालदार ने भी बंगाल बीजेपी के हवाले से ट्वीट कर कहा था कि बीरभूम में भाजपा की दो महिला पोल एजेंट के साथ गैंगरेप हुआ है और कई महिलाओं को प्रताड़ित किया गया है। हालदार बंगाल में वामपंथी शासनकाल में हुए मरीचझापी नरसंहार पर किताब भी लिख चुके हैं।

सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत पटेल उमराव ने भी इसी तरह का दावा किया था। उन्होंने ट्वीट कर कहा था, “बीरभूम के ननूर के भाजपा प्रत्याशी की 2 इलेक्शन एजेंट के साथ TMC के मुस्लिम गुंडों नें गैंग रेप किया है। उनमें से 1 गायब है। वहाँ हजारों हिन्दू जान बचाने के लिए घर छोड़कर अज्ञात स्थान पर भागे हैं। पूरे बंगाल में हिंसा का तांडव हो रहा है, कहाँ हैं भद्र बंगाली?”

ननूर में हालात बिगड़ने को लेकर ट्वीट पूर्व सांसद स्वप्न दासगुप्ता ने भी किया था। उन्होंने बताया था कि बीरभूम जिले के ननूर में एक हजार से ज्यादा हिंदू परिवार हमलावर भीड़ से जान बचाने के लिए घर छोड़कर भाग गए हैं। महिलाओं के उत्पीड़न की खबरें आ रही है। साथ ही उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को टैग कर इलाके में सुरक्षा बंदोबस्त की गुहार भी लगाई है।

हालात केवल ननूर में ही खराब नहीं हैं। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव और बंगाल के प्रभारी कैलाश विजयवर्गीय ने एक वीडियो शेयर किया है। इसमें कुछ लोग महिलाओं को पीटते दिख रहे हैं। विजयवर्गीय का दावा है कि टीएमसी के मुस्लिम गुंडे नंदीग्राम के केंदमारी गॉंव में बीजेपी की महिला कार्यकर्ताओं को पीट रहे हैं।

बंगाल के बालुरघाट के सांसद सुकांता मजूमदार ने कुछ तस्वीरें ट्वीट करते हुए दावा किया है कि भटपारा में बीजेपी के कार्यालय और कुछ दुकानों में तोड़फोड़ की गई। इलाके में बम फेंके जाने की बात भी उन्होंने कही है।

कूच बिहार के सांसद निशीथ प्रमाणिक ने भी हिंसा को लेकर ट्वीट किया है। उन्होंने कहा है, “कूच बिहार नाताबारी, दिनहट्टा, सिताई विधानसभा क्षेत्रों में टीएमसी के गुंडे हिंदुओं के घरों पर हमला कर रहे हैं, मंदिर तोड़ रहे हैं, महिलाओं के साथ रेप और लोगों की हत्या की जा रही। सत्ता में आने के बाद नई सरकार यही सब कर रही है। मैं इसकी कड़ी निंदा करता हूँ और केंद्रीय गृह मंत्रालय से जल्द से जल्द हस्तक्षेप की अपील करता हूँ।”

कैलाश विजयवर्गीय का दावा है कि नतीजों के बाद से बंगाल में 9 बीजेपी कार्यकर्ताओं की हत्या हो चुकी है। इनमें से छह नाम सामने आ चुके हैं। जगदाल में शोभा रानी मंडल, राणाघाट में उत्तम घोष, बेलेघाट में अभिजीत सरकार, सोनारपुर दक्षिण में हरोम अधिकारी, सीतलकुची में मोमिक मोइत्रा और बोलपुर में गौरब सरकार की हत्या का बीजेपी ने दावा किया है।

गौरतलब है कि सबसे पहले अभिजीत सरकार की हत्या की खबर आई थी। हत्या से कुछ देर पहले अभिजीत ने फेसबुक लाइव के जरिए TMC के गुंडों की हरकतों के बारे में बताया था। उन्होंने बताया था कि TMC के गुंडे लगातार बमबारी कर रहे हैं। उनके घर और दफ्तर को तहस-नहस कर डाला है। उन्होंने कहा कि उनकी एक ही गलती है कि वे भाजपा कार्यकर्ता हैं।

हिंसा को लेकर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने रिपोर्ट तलब की है। राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने पुलिस महानिदेशक और कोलकाता के पुलिस कमिश्नर को तलब कर हिंसा पर तत्काल लगाम लगाने के निर्देश दिए हैं। बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा 4 और 5 मई को बंगाल दौरे पर जा रहे हैं। वे हिंसा से प्रभावित कार्याकर्ताओं से भी मिलेंगे।

‘लोगों की मदद के लिए मठ की ज़मीन भी बेच देंगे’: महामारी का वो दौर जब स्वामी विवेकानंद ने की थी लोगों की मदद

महामारी और संक्रमणों ने सम्पूर्ण इतिहास में अनेकों बार मानव जाति को बर्बाद किया है। प्रागैतिहासिक काल से लेकर वर्तमान के आधुनिक दिनों तक हमने इतिहास के माध्यम से कई महामारियों और चिकित्सा आपात स्थितियों का अनुभव किया था। कुछ ने तो ऐसा भयावह रूप लिया था की चारों ओर सिर्फ विनाश ही विनाश दिखाई दिया था जैसे ‘बुबोनिक प्लेग’ जो चौदहवीं शताब्दी में आया था और उसे ब्लैक डेथ के रूप में भी जाना जाता है।

जिसमें लाखों मनुष्यों की मृत्यु हुई थी और इसे मानव इतिहास के सबसे घातक महामारियों में से एक माना जाता है। पिछले एक साल में और विशेष रूप से पिछले एक महीने में कुछ इसी तरह की स्थितियाँ विकसित हुई हैं चीन के वुहान में पैदा हुई महामारी कोविड-19 के कारण।

खास कर जब दुनिया भर में मरने वालों की संख्या तीस लाख से अधिक हो गई है और एक नए संस्करण जिसे हम अभी ”डबल म्यूटेंट वेरिएंट” के नाम से जानते हैं उसका भारी प्रकोप दिखने को मिल रहा है। भारत में भी जहाँ एक तरफ टीकाकरण अभियान को 100 दिन पूर्ण हो गए हैं और अब 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों के लिए यह अभियान 1 मई से शुरू हो चुका है वहीं दूसरी तरफ नागरिकों और सरकारों के लिए अभी चुनौतियाँ कम नहीं हुई है।

इस दौर में हमें मनोवैज्ञानिक और भावनात्मक रूप से मजबूत करने के लिए कुछ ऐसा चाहिए जिसे हम इन परिस्थितयों से जोड़ कर भी देख सके और वह हमें हर रूप से मजबूत भी करे। 1898 को बंगाल में आई प्लेग महामारी के दौरान योद्धा संन्यासी स्वामी विवेकानंद द्वारा लिखित 122 वर्ष पुराने प्लेग मैनिफेस्टो पर हमारी खोज रुक सकती है।

यह मार्च 1898 का समय था, स्वामी विवेकानंद कलकत्ता प्रवास पर थे और वह नीलांबर मुखर्जी के बाग घर बेलूर में एक मठ में रुके हुए थे। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी अनेकों समस्या हो रही थी और सुधार के कोई संकेत नहीं थे, बल्कि यह लगातार बिगड़ रहा था। जिसको देखते हुए उनके गुरु भाइयों ने उन्हें दार्जिलिंग में प्रवास करने के लिए कहा क्योंकि वहाँ की पिछली यात्रा में हुए जलवायु परिवर्तन से विवेकानंद को शारीरिक लाभ हुआ था।

विवेकानंद 30 मार्च 1898 को दार्जिलिंग के लिए रवाना हुए और लगभग एक महीना वहाँ बिताया। हालाँकि वहाँ तक पहुँचने के लिए उन्हें पहाड़ पर अत्यधिक चढ़ाई करनी पड़ी और उस वर्ष जल्दी बारिश होने के कारण उन्हें बुखार हो गया और बाद में खाँसी और जुकाम भी रहा।

अप्रैल के अंत में विवेकानंद ने वापस कलकत्ता लौटने की योजना बनाई लेकिन वह ऐसा नहीं कर सके क्योंकि उन्हें फिर से बुखार और फिर इन्फ्लुएंजा का संक्रमण हो गया था। इस बीच 29 अप्रैल को उनके गुरुभाई स्वामी ब्रह्मानंद ने उन्हें सूचित किया कि कलकत्ता में प्लेग महामारी फैल गई है, कलकत्ता से बहुत से लोग पलायन कर रहे हैं और यदि आप का स्वास्थ्य अभी ठीक नहीं हैं तो डॉक्टर से सलाह लें और कुछ दिनों के बाद ही वापसी करें।

जैसे ही विवेकानंद को खबर मिली वे बीच में किसी भी स्थान पर रुके बिना कलकत्ता जाने के लिए तैयार हो गए। कलकत्ता पहुँचते ही वह राहत उपायों को आयोजित करके प्लेग और भगदड़ दोनों से निपटने के मिशन में खुद को झोंक दिया। विवेकानंद ने सबसे पहले कलकत्ता के लोगों को एक पत्र लिखा, जिसको हम सब ‘प्लेग मैनिफेस्टो’ के नाम से जानते हैं।

मूल रूप से अंग्रेजी में प्रारूपित और हिंदी और बंगाली में अनुवादित, स्वामी विवेकानंद ने अपने पत्र ‘प्लेग मैनिफेस्टो’ में बंगाल के लोगों को ‘डर से मुक्त रहने के लिए कहा क्योंकि भय सबसे बड़ा पाप है।’ स्वामी को पता था कि महामारी के वातावरण ने मानव को कमजोर कर दिया है। इसीलिए उन्होंने लोगों से आह्वान किया कि ‘मन को हमेशा खुश रखो। एक दिन तो मृत्यु होती ही है सबकी। कायरों को बार-बार मौत की वेदना का सामना करना पड़ता है, केवल अपने मन में भय के कारण।’

उन्होंने इस डर को दूर करने का आग्रह किया, ”आओ, हम इस झूठे भय को छोड़ दें और भगवान की असीम करुणा पर विश्वास रखें, कमर कस लो और कार्रवाई के क्षेत्र में प्रवेश करो। हमें शुद्ध और स्वच्छ जीवन जीना चाहिए। रोग, महामारी का डर, आदि, ईश्वर की कृपा से समाप्त हो जाएगा।”

अपने प्रेरणादायक शब्दों के बाद वह इन परिस्थितियों में क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए इन बिंदुओं पर प्रकाश डालते है। वह स्वच्छ रहने के लिए ,घर और उसके परिसर, कमरे, कपड़े, बिस्तर, नाली आदि को हमेशा साफ रखने के लिए कहते हैं। वह आगे लिखते हैं कि बासी, खराब भोजन न करें; इसके बजाय ताजा और पौष्टिक भोजन लें। कमजोर शरीर में बीमारी की आशंका अधिक होती है। यह सुनिश्चित किया गया था कि कलकत्ता के हर घर में प्लेग मैनिफेस्टो की प्रतिया पहुँचे।

प्रभावितों के लिए विवेकानंद राहत अभियान शुरू करने के लिए तैयार थे। जब उनके गुरुभाई ने उनसे पैसे के स्रोत के बारे में पूछा तो स्वामी जी ने कहा, “क्यों, यदि आवश्यक हो, तो हम नए खरीदे गए मठ मैदानों को बेच देंगे। हम संन्यासी हैं, और भिक्षा पर रहते हैं और पहले की तरह फिर से पेड़ के नीचे सोना शुरू कर देंगे।”

ऐसी नौबत नहीं आई और उन्हें काम के लिए पर्याप्त धन मिल गया था। भूमि का एक व्यापक भूखंड सरकारी अधिकारियों के साथ समन्वय करके किराए पर लिया गया था जहाँ आइसोलेशन सेंटर स्थापित किए गए थे। राहत कार्य युद्ध स्तर पर किया गया और स्वामी विवेकानंद द्वारा अपनाए गए उपायों ने लोगों को विश्वास दिलाया कि वह महामारी से लड़ सकते हैं। लोगों ने देखा कि संन्यासियों का काम केवल वेदांत का प्रचार करना नहीं है, बल्कि अपने देशवासियों के लिए वेदांत की शिक्षाओं को मूर्त रूप में लाना है।

अगले वर्ष मार्च महीने में कलकत्ता में दूसरी बार प्लेग ने दस्तक दी। विवेकानंद ने बिना समय गँवाते हुए राहत कार्य के लिए एक समिति का गठन किया जिसमे भगिनी निवेदिता को सचिव और उनके गुरुभाई स्वामी सदानंद को पर्यवेक्षक और स्वामी शिवानंद, नित्यानंद, और आत्मानंद को सदस्य बनाया गया। सभी ने कलकत्ता के लोगों को सेवा देने के लिए दिन-रात कार्य किया।

विवेकानंद ने आग्रह किया, “भाई, अगर आपकी मदद करने वाला कोई नहीं है, तो बेलूर मठ में श्री भगवान रामकृष्ण के सेवकों को तुरंत सूचना भेजें। हर संभव मदद पहुँचाई जाएगी। माता की कृपा से, मौद्रिक सहायता भी संभव हो जाएगी।” शामबाजार, बागबाजार और अन्य पड़ोसी इलाकों में मलिन बस्तियों की सफाई के साथ मार्च 1899 को राहत कार्य शुरू हुआ, वित्तीय सहायता के लिए गुहार समाचार पत्रों के माध्यम से भी लगाई गई।

भगिनी निवेदिता ने विवेकानंद के साथ प्लेग पर अनेकों व्याख्यान दिए। 21 अप्रैल को, उन्होंने ‘द प्लेग एंड द ड्यूटी ऑफ स्टूडेंट्स’ पर क्लासिक थिएटर में छात्रों से बात की। सिस्टर निवेदिता ने पूछा, “आपमें से कितने लोग स्वेच्छा से आगे आएँगे और झोपड़ियों की सफाई में मदद करेंगे?” भगिनी और स्वामी के शक्तिशाली शब्दों को सुनने के बाद, लगभग पंद्रह छात्रों का एक समूह प्लेग सेवा के कार्य के लिए सामने आया।

एक दिन, जब सिस्टर निवेदिता ने देखा कि स्वयंसेवकों की कमी है, तो उन्होंने स्वयं गलियों की सफाई शुरू कर दी। गोरी चमड़ी की महिला को अपनी गलियों में सफाई करते देखकर, इलाके के युवकों को शर्म महसूस हुई और उन्होंने झाड़ू उठाकर उनका समर्थन किया।

भगिनी निवेदिता ने खुद को अस्थायी रूप से एक ऐसी बस्ती में स्थानांतरित कर लिया था जो प्लेग महामारी से सबसे अधिक प्रभावित थी, जहाँ वह दिन-रात दीवारों को सफ़ेद रंग करने में लगी रहती थी और उन बच्चों की देखभाल करती थी जिनकी माताओं का महामारी से देहांत हो चुका था। संभावित खतरे को नजरअंदाज करते हुए भी वह अपने कार्य में संलग्न रही। उन्होंने अपनी एक अंग्रेजी मित्र, मिसेज कूलस्टन को लिखा, “अंतहीन काम है। केवल यहाँ रहना ही अपने आप में काम है।” अंततः रामकृष्ण मिशन की टोली ने इस बीमारी को नियंत्रित करने में कामयाबी हासिल की।

इसलिए एक जागरूक नागरिक के रूप में हमें आस-पास की अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए और कोरोना महामारी के बचाव के अनुकूल व्यवहार का पालन करते हुए अपने आस-पास के लोगों के लिए अधिक से अधिक मदद करने का और वातावरण को सकारात्मक बनाए रखने का प्रयास करना चाहिए क्योंकि सरकार बहुत कुछ कर सकती है लेकिन सब कुछ नहीं कर सकती।

CM योगी को फिर मिली जान से मारने की धमकी, कहा- 4 द‍िन में जो करना है कर लो

यूपी पुलिस के डायल 112 कंट्रोल रूम व्हाट्सएप पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए धमकी भरा मैसेज भेजा गया। कंट्रोल रूम पर मौजूद ऑपरेटर ने मैसेज मिलते ही अधिकारियों को सूचना दी। जिसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मैसेज भेजने वाले नम्बर के आधार पर रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। 

डायल 112 में 29 अप्रैल की शाम 7.58 मिनट पर मीडिया डेस्क के व्हाट्सएप नम्बर पर एक मैसेज आया था। जिसमें मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के लिए अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए उन्हें नुकसान पहुँचाने की धमकी दी गई। 

मैसेज में सीएम योगी को पाँचवे दिन जान से मार देने की धमकी दी गई थी। मैसेज में धमकी देने वाले ने कहा कि चार दिन के अंदर मेरा जो कुछ कर सकते हो कर लो। यह मैसेज पढ़ते ही ड्यूटी पर तैनात कॉल टेकर अंकित दूबे सन्न रह गए। उन्होंने धमकी भरा मैसेज आने की सूचना ऑपरेशन कमांडर अंजुल कुमार को दी। 

जिसके बाद सुशांत गोल्फ सिटी थाने में मोबाइल धारक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया गया। मुख्यमंत्री के लिए भेजे गए मैसेज को गम्भीरता से लेते हुए सर्विलांस सेल की मदद से जाँच जारी है। अभी तक संदिग्ध नम्बर की लोकेशन का सही पता नहीं चल सका है।

इससे पहले भी यूपी पुलिस की इमरजेंसी सेवा डायल 112 पर फोन कॉल कर के धमकी दी गई थी कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को AK-47 से मार डाला जाएगा। इसके बाद पुलिस ने आनन-फानन में सुशांत गोल्फ सिटी थाने में FIR दर्ज कर के कार्रवाई शुरू की। 

मोबाइल नंबर 8874028434 से आए व्हाट्सप्प मैसेज में लिखा था “उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को 24 घंटों के भीतर AK-47 से भून दूँगा। ढूँढ सको तो ढूँढ लो।” इसके बाद पुलिस विभाग में भी हड़कंप मच गया। तुरंत ही 112 में तैनात ऑपरेंशंस कमांडर सहेंद्र यादव ने इस मामले की FIR दर्ज करवाई थी।

वहीं सीआरपीएफ के मुंबई कार्यालय को मंगलवार (अप्रैल 6, 2021) की सुबह एक ई मेल भेजा गया। रिपोर्टों के मुताबिक इसमें उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जान से मारने की धमकी दी गई।

जानकारी के मुताबिक, मेल में धार्मिक स्थान जैसी जगह पर हमले की बात थी। यह भी लिखा था कि योगी आदित्यानाथ और अमित शाह को फिदायीन हमले में मारा जाएगा। इंडिया टुडे के अनुसार, मेल में उल्लेख था कि ‘हम 11 फिदायीन हमलावर हैं”, जो योगी आदित्यनाथ और अमित शाह को मारेंगे।

ममता ने शांति की अपील का दिखावा कर अपने कार्यकर्ताओं को उकसाया, गृहमंत्रालय ने माँगी हिंसा पर रिपोर्ट

हाल ही में संपन्न राज्य विधानसभा चुनावों में TMC की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में कई स्थानों से हिंसा की खबरें सामने आई। भाजपा कार्यकर्ता और समर्थक हमलावरों के निशाने पर थे। कथित टीएमसी गुंडों ने उन पर हमला किया और उनके कार्यालयों और दुकानों में तोड़फोड़ की। अब, ममता बनर्जी ने शांति बनाए रखने की अपील की है। हालाँकि, ऐसा करने में, उन्होंने भाजपा और केंद्रीय बलों पर अत्याचार करने का आरोप लगाकर भावनाओं को और भड़का दिया।

ममता बनर्जी ने कहा, “मैं सभी से शांति बनाए रखने और किसी भी हिंसा में शामिल नहीं होने की अपील करती हूँ। हम जानते हैं कि भाजपा और केंद्रीय बलों ने हमें बहुत प्रताड़ित किया है लेकिन हमें शांति बनाए रखना है। वर्तमान में, हमें कोविड-19 से लड़ाई लड़नी है।”

ममता बनर्जी ने शांति की अपील की, लेकिन उनकी अपील स्पष्ट नहीं थी। दंगाइयों और उपद्रवियों को प्रोत्साहन देते हुए उन्होंने भाजपा और केंद्र सरकार पर हिंसा का आरोप लगाया, उन पर ‘अत्याचार’ का आरोप लगाया और इस तरह टीएमसी समर्थकों द्वारा हिंसा को अप्रत्यक्ष रूप से उनके राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ जायज ठहराया।

उन्होंने आगे कहा, “मैं सिर्फ एक स्ट्रीट फाइटर हूँ। मैं लोगों को बढ़ावा दे सकती हूँ ताकि हम बीजेपी के खिलाफ लड़ सकें। एक अकेला सब कुछ नहीं कर सकता मुझे लगता है कि हम सब मिलकर 2024 की लड़ाई लड़ सकते हैं। सबसे पहले COVID की लड़ाई लड़ें।”

उन्होंने भाजपा पर चुनाव परिणामों के बाद राज्य में हिंसा का आरोप लगाने के लिए पुराने दंगों की तस्वीरों का उपयोग करने का आरोप लगाया। बनर्जी ने कहा, “वे (भाजपा) पुराने दंगों की तस्वीरें पोस्ट कर रहे हैं, यह उनकी आदत है। मैं किसी भी हिंसा को पसंद नहीं करती हूँ। बीजेपी ऐसा क्यों कर रही है? प्रचंड बहुमत से जीतने के बाद भी हमने किसी भी तरह का जश्न नहीं मनाया।”

उन्होंने टीएमसी कार्यकर्ताओं के जुनून को और भड़काते हुए कहा, “मुझे किसी से एक SMS मिला, जिसमें नंदीग्राम के रिटर्निंग ऑफिसर ने किसी को लिखा है कि अगर वह रिकाउंटिंग की अनुमति देता है तो उसकी जान को खतरा होगा। चार घंटे तक सर्वर डाउन रहा, राज्यपाल ने भी मुझे बधाई दी। अचानक सब कुछ बदल गया।”

हिंसा, आगजनी, पश्चिम बंगाल में TMC शासन की एक बानगी भी बीजेपी कार्यकर्ताओं और समर्थकों को मिली थी क्योंकि राज्य विधानसभा चुनावों में पार्टी की जीत के बाद हिंसा, आगजनी और तोड़फोड़ में TMC गुंडों का हाथ था। टीएमसी समर्थकों ने अपनी पार्टी की जीत का जश्न मनाते हुए भाजपा कार्यालयों में तोड़फोड़ की और उन पर हमला किया।

पश्चिम बंगाल में चुनाव परिणाम के बाद हिंसा की घटना पर केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट माँगी है। गृह मंत्रालय ने कहा कि सरकार विपक्षी दलों के कार्यकर्ताओं पर हुए हमले की पूरी जानकारी दें। बता दें कि बीजेपी और टीएमसी नेताओं की झड़प में 24 घंटे में 6 लोगों की मौत हो चुकी है। बीजेपी नेताओं का आरोप है कि चुनाव परिणाम आने के 24 घंटे के अंदर बीजेपी के 6 कार्यकर्ताओं की हत्या कर दी गई है। इसमें जगदाल से शोभा रानी मंडल, राणघाट से उत्तम घोष, बेलेघाट से अभिजीत सरकार, सोनारपुर दक्षिण से हरोम अधिकारी, सीतलकुची से मोमिक मोइत्रा और बोलपुर से गौरब सरकार का नाम शामिल है।

गौरतलब है कि भाजपा पर टीएमसी की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में हिंसा का प्रकोप जारी है। अभिजीत सरकार को कथित तौर पर टीएमसी की भीड़ द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया था। चुनाव जीतने के कुछ ही घंटों के भीतर, टीएमसी ने हेस्टिंग्स में बीजेपी के पार्टी कार्यालय का घेराव किया, आरामबाग में पार्टी कार्यालय को जला दिया और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी पर हमला किया जिन्होंने ममता बनर्जी को हराया।

बता दें कि हत्या से कुछ देर पहले अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी थी। उन्हें पता भी नहीं था कि फेसबुक पर लाइव कैसे आते हैं, लेकिन उन्होंने किसी तरह वीडियो बनाया और बताया कि TMC के गुंडे लगातार बमबारी कर रहे थे और उन्होंने उनके घर और दफ्तर को तहस-नहस कर डाला। उन्होंने कहा कि उनकी एक ही गलती है कि वे भाजपा कार्यकर्ता हैं। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया कि उनके घर और NGO दफ्तर को तोड़ डाला गया है। कुत्ते के 5 बच्चे को मार डाला गया।

अभिजीत ने कहा था कि उन्हें किसी भी पार्टी के जीतने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन बेरहम तरीके से उनके घर को ध्वस्त किया जा रहा है। इन दोनों वीडियो के अपलोड करने के बाद पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी गई। कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न माध्यमों से डर जताया है कि ममता के तीसरी बार सत्ता में लौटने से उनका जीना दूभर हो सकता है और उनकी जान को TMC वालों से खतरा हो सकता है।

सीएम योगी ने यूपी के व्यापारियों से की बातचीत, कोरोना से लड़ाई में ऑक्सीजन सहित इन मुद्दों पर हुई चर्चा

उत्तर प्रदेश में मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ कोरोना की बेकाबू रफ्तार को काबू करने के लिए हरसंभव कोशिश कर रहे हैं। सीएम योगी ने इसको लेकर रविवार (2 मई, 2021) को प्रदेश के व्यापारियों के साथ बैठक की।

उन्होंने व्यापारियों से अपील करते हुए कहा, ”आज जब प्रदेश और देश कोविड-19 संक्रमण की दूसरी लहर से प्रभावित है, तो संकट की इस घड़ी में व्यापारी वर्ग अपनी ऊर्जा और सहयोग के माध्यम से इस महामारी के विरुद्ध चल रही लड़ाई में अपना सक्रिय योगदान दें।”

सीएम ने उन्हें नाइट कर्फ्यू और सप्ताहिक लॉकडाउन में सहायता करने के लिए कहा। योगी ने उनसे आग्रह किया कि अगर कोई उन्हें परेशान करता है तो वे इसके लिए सीएम कार्यालय से संपर्क करें।

व्यापारियों ने हमेशा सभी बाधाओं में समाज और देश का समर्थन किया

प्रदेश के व्यापारियों और व्यापारिक संगठनों के साथ वर्चुअल माध्यम से संवाद करते हुए सीएम योगी आदित्‍यनाथ ने भरोसा जताया कि एक बार फि‍र इस लड़ाई में सफलता मिलेगी और कोरोना परास्त होगा। व्यापारियों ने हमेशा सभी बाधाओं में समाज और देश का समर्थन किया है।

इस बार कोरोना संक्रमण 30-50 गुना ज्यादा मजबूत

सीएम योगी ने बातचीत के दौरान कहा कि इस बार कोरोना संक्रमण 30-50 गुना ज्यादा मजबूत है। ऐसी स्थिति में राज्य में मेडिकल ऑक्सीजन की माँग बढ़ा दी है। हालाँकि राज्य सरकार के प्रयास कुछ हद तक माँग को पूरा करने के लिए प्रभावी साबित हो रहे हैं।

उन्होंने व्यापारियों और उद्यमियों से ऑक्सीजन उत्पादन के क्षेत्र में नए प्रयोग करने का अनुरोध करते हुए कहा, ”ऐसे कार्यों में सरकार हर सम्भव सहयोग प्रदान करेगी, ऑक्सीजन के उत्पादन को बढ़ावा देकर हम मानवता को बचा सकेंगे।”

जीवन और जीविका पर असर पड़ रहा

सीएम योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोरोना की दूसरी लहर देश और राज्य में जीवन और आजीविका दोनों को प्रभावित कर रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में जीवन और जीविका दोनों पर असर पड़ रहा है और कोरोना की चेन तोड़ने के उद्देश्य से साप्ताहिक लॉकडाउन, नाइट कर्फ्यू जैसी व्यवस्था प्रभावी की गई है। इस समय में आवश्यक और आपातकालीन सेवाओं को जारी रखा जा रहा है। आप लोग सहयोग बनाएँ रखें।

सीएम योगी ने कहा कि अगर किसी के साथ उत्पीड़न अथवा कोई अप्रिय घटना होती है, तो तत्काल स्थानीय प्रशासन को अवगत कराएँ और फिर भी आप अगर संतुष्ट नहीं हैं, तो मुख्यमंत्री कार्यालय को सूचित करें, त्वरित कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि हाल के दिनों में जीएसटी रिटर्न में वृद्धि हुई है। अब तक 16 लाख व्यापारी जीएसटी में पंजीकृत हो चुके हैं।

सीएम ने व्यापारियों से अपील कि है कि वे अधिक से अधिक संख्या में GST पंजीकरण कराएँ। व्यापारी कोविड प्रबंधन, नियंत्रण व बचाव के लिए अपना हर संभव सहयोग प्रदान करें।

सीएम ने कहा कि राज्य में भाजपा सरकार ने व्यापारियों के लिए सुरक्षा का वातावरण बनाया हुआ है। व्यापारियों के लिए सुरक्षा बीमा योजना के तहत ₹10 लाख के बीमा कवर का प्राविधान है, जिससे व्यापारी लाभान्वित हो रहे हैं।

हम कोविड-19 के विरुद्ध संघर्ष में प्रदेश सरकार के साथ हैं: व्यापारी

बताया जा रहा है कि मुख्यमंत्री ने गगन दास रमानी (आगरा), सजल जैन (झांसी), मनीष बंसल (अलीगढ़), रवि प्रकाश चैधरी (बस्ती), ओपी सिंह (लखनऊ) समेत कई व्यापारियों से संवाद किया। व्यापारियों ने कहा कि व्यापारी वर्ग कोविड-19 के विरुद्ध संघर्ष में प्रदेश सरकार के साथ है।

बता दें कि इस समय उत्तर प्रदेश देश में COVID-19 से सबसे अधिक प्रभावित राज्यों में से चौथे स्थान पर है, यहाँ 13 लाख से अधिक लोगों की कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। वहीं अब तक, राज्य में 3 लाख से कम एक्टिव मामले हैं, जबकि महामारी में 13,000 से अधिक लोग अपनी जान गँवा चुके हैं।

अदार पूनावाला धमकी मामले में राहुल कँवल ने माँगी माफी: शिवसेना ने इंडिया टुडे से की कार्रवाई की माँग

इंडिया टुडे के न्यूज डायरेक्टर राहुल कँवल ने सोमवार (मई 3, 2021) को ट्विटर पर अपने उस दावे के लिए माफी माँगी, जिसमें उन्होंने कहा था कि शिवसेना नेताओं ने सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (SII) के सीईओ अदार पूनावाला को चीनी कोरोना वायरस वैक्सीन को लेकर धमकी दी।

Rahul Kanwal issues an apology

कँवल ने कहा कि जिस नेता ने कथित तौर पर अदार पूनावाला को धमकी दी थी, वह स्वाभिमानी शेतकरी संगठन (एसएसएस) का राजू शेट्टी था, न कि शिवसेना। बता दें कि कँवल ने रविवार (मई 2, 2021) को कहा था कि अदार पूनावाला ने उन्हें वीडियो भेजे हैं, जिसमें शिवसेना के गुंडे उनकी फैक्ट्री के बाहर खड़े होकर उन्हें धमका रहे थे और वैक्सीन की माँग कर रहे थे।

कँवल की टिप्पणी वायरल होने के बाद, महाराष्ट्र की शिवसेना ने इंडिया टुडे समूह को एक पत्र जारी किया, जिसमें उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों का खंडन किया गया। इसे ‘बिल्कुल असत्य’ और ‘अपमानजनक’ कहते हुए, शिवसेना ने माँग की कि इंडिया टुडे समूह राहुल कँवल के खिलाफ कार्रवाई करे।

पत्र में कहा गया है, “हम उसी प्लेटफॉर्म पर उनसे माफी की भी उम्मीद करते हैं, जिस पर उन्होंने इस फर्जी खबर को हवा दी है।”

नतीजतन, कँवल ने अब अपने बयान को वापस ले लिया है और भ्रम और असुविधा के कारण खेद व्यक्त किया है। एंकर ने अब दावा किया कि उसे भेजे गए वीडियो में दिखाई दे रहे उपद्रवी अन्य राजनीतिक पार्टी के थे, न कि शिवसेना के।

हालाँकि, शिवसेना समर्थक सिर्फ सोशल मीडिया पर माफी माँगते पर राहुल कँवल से खुश नहीं हैं। समर्थकों द्वारा राहुल कँवल के लाइव शो में माफी माँगने की माँग की जा रही है, राजनीतिक पार्टी के खिलाफ उनके द्वारा आरोप टेलीविज़न शो के दौरान ही लगाए गए थे।

बता दें कि भारत में राहुल गाँधी और अन्य विपक्षी सदस्यों द्वारा लगातार भयभीत करने और उन्हें बदनाम करने के बाद भारत में शक्तिशाली लोगों की धमकियों का सामना करने के बाद, अदार पूनावाला अस्थायी रूप से देश से बाहर चले गए हैं।

केंद्र सरकार से सिक्योरिटी मिलने के बाद पहली बार इस बारे में बात करते हुए पूनावाला ने बताया कि भारत के पावरफुल लोग आक्रामक रूप से कॉल करके कोविशील्ड वैक्सीन की माँग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि उनके पास भारत के कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों, व्यावसायिक लोगों के आक्रामक फोन आ रहे हैं। सब के सब उन्हें जल्द से जल्द कोविशील्ड की आपूर्ति के लिए कह रहे हैं। उन्होंने संकेत दिए हैं कि वो वैक्सीन के निर्माण के विस्तार की योजना के साथ लंदन आए हैं। जल्द ही भारत वापस लौटेंगे।”

राहुल कँवल का बयान

चुनाव परिणामों को कवर करते हुए अपने सहयोगी राजदीप सरदेसाई के साथ बातचीत करते हुए, कोविड-19 की स्थिति और अदार पूनावाला के अस्थायी प्रवास का वर्णन किया। तभी राहुल कँवल ने खुलासा किया, “और मैंने वास्तव में यह देखा। उन्होंने (अदार पूनावाला) मुझे शिवसेना के कुछ स्थानीय लोगों के कुछ वीडियो भेजे, जिसमें उन्होंने गालियाँ दी और पहले टीका देने के लिए कहा।