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बंगाल: 2 सीटों पर राहुल गाँधी की रैली, दोनों जगह कॉन्ग्रेस उम्मीदवार की जमानत जब्त; साथी भी लाज नहीं बचा पाए

292 सदस्यीय पश्चिम बंगाल विधानसभा की तस्वीर स्पष्ट हो चुकी है। 213 सीटों के साथ तृणमूल कॉन्ग्रेस लगातार तीसरी बार सरकार बनाने जा रही है। 2016 में 3 सीटें पाने वाली बीजेपी ने 77 सीटें हासिल कर राज्य के मुख्य विपक्षी दल का तमगा हासिल कर लिया है। इस बार चुनाव में सबसे बुरी गत कॉन्ग्रेस और उसकी चुनावी साथी वाम दलों की हुई है।

दिलचस्प यह है कि कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने जिन दो सीटों पर रैली की, वहाँ कॉन्ग्रेस उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई। ये सीटें हैं मतिगारा-नक्सलबाड़ी और गोलपोखर। यहाँ 14 अप्रैल को राहुल की रैलियाँ हुई थी। मतिगारा-नक्सलबाड़ी सीट पर कॉन्ग्रेस का बीते एक दशक से कब्जा था। लेकिन इस बार उसके उम्मीदवार रहे निवर्तमान विधायक शंकर मालाकार 9% वोट पाकर तीसरे स्थान पर रहे। गोलपोखर में भी कॉन्ग्रेस उम्मीदवार तीसरे स्थान पर रहे और उन्हें महज 12% वोट मिले। 2006 और 2016 में इस सीट पर भी कॉन्ग्रेस को सफलता मिली थी।

मतिगारा-नक्सलबाड़ी में बीजेपी को मिली है जीत (साभार: चुनाव आयोग)

दो मई को आए नतीजों पर गौर करें तो पता चलता है कि कॉन्ग्रेस-वाम दलों के गठबंधन ने जिसमें इंडियन सेक्युलर फ्रंट (ISF) भी थी, के उम्मीदवार केवल 42 सीटों पर जमानत बचा पाए हैं। किसी भी उम्मीदवार की जमानत तब जब्त होती है जब वह कुल पड़े मतों का 16.5 फीसदी हासिल करने में असफल रहता है। चुनाव आयोग के आँकड़ों पर गौर करने पर पता चलता है कि इस गठबंधन के 85 फीसदी उम्मीदवारों की जमानत इस चुनाव में नहीं बची है।

गोलपोखर में भी कॉन्ग्रेस उम्मीदवार की नहीं बची जमानत (साभार: चुनाव आयोग)

कॉन्ग्रेस के 11, वाम दल के 21 और ISF के 10 उम्मीदवार ही जमानत बचा पाए। इन चुनावों में कॉन्ग्रेस और लेफ्ट दोनों का खाता नहीं खुल पाया। कॉन्ग्रेस को 2.94% तो वाम दलों को लगभग 5% वोट मिले हैं। वहीं ISF एक सीट जीतने में कामयाब रही है।

बंगाल में किसको कितनी सीटें (साभार: चुनाव आयोग)

आईएसएफ चार सीटों पर दूसरे नंबर पर भी रही। इससे बंगाल में फुरफुरा शरीफ के मौलवी अब्बास सिद्दीकी के प्रभाव का भी पता चलता है। वाम दल और कॉन्ग्रेस भी चार-चार सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। लेकिन, गौर करने वाली बात यह है कि कॉन्ग्रेस 90 और वाम दल 170 सीटों पर लड़े थे, जबकि आईएसएफ ने 30 सीटों पर ही अपने प्रत्याशी उतारे थे।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस ने बंगाल में न केवल उन वाम दलों से गठबंधन किया था, जिनसे वह केरल में मुकाबिल थी, बल्कि बंगाल चुनाव से उसके शीर्ष परिवार ने दूरी भी बना रखी थी। लेकिन, असम और केरल में भी राहुल और प्रियंका के जोर लगाने के बावजूद कॉन्ग्रेस अपनी किस्मत बदलने में कामयाब नहीं हो पाई है।

केजरीवाल सरकार ने जुलाई 2020 से अप्रैल 2021 के बीच एक भी वेंटिलेटर नहीं खरीदा: RTI से खुलासा

दिल्ली में कोविड -19 के बढ़ते मामलों के बीच, अरविंद केजरीवाल की अगुवाई वाली दिल्ली सरकार दूसरी लहर की तैयारी करने में विफल रही। आरटीआई कार्यकर्ता विवेक पांडे ने दिल्ली सरकार ने जुलाई 2020 से अप्रैल 2021 के बीच कितने वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सिलेंडर और टैंक खरीदे थे, यह जानने के लिए एक आरटीआई डाला था।

आरटीआई में पूछे गए सवाल

सूचना का अधिकार (आरटीआई) आवेदन में, पांडे ने सरकार से जुलाई 2020 से अप्रैल 2021 के बीच दिल्ली सरकार द्वारा खरीदे गए वेंटिलेटरों की कुल संख्या का विवरण प्रदान करने के लिए कहा था। दूसरे प्रश्न में, उन्होंने सरकार से उसी अवधि के दौरान ऑक्सीजन सिलेंडर और टैंकों की खरीद पर दिल्ली सरकार द्वारा खर्च किए गए धन की जानकारी माँगी। 

दिल्ली सरकार द्वारा कोई वेंटिलेटर नहीं खरीदा गया था

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय से प्राप्त उत्तर के अनुसार, उक्त अवधि के बीच एक भी वेंटिलेटर की खरीद नहीं की गई थी। जवाब में, विभाग ने कहा कि दिल्ली सरकार की केंद्रीय खरीद एजेंसी ने जुलाई 2020 और अप्रैल 2021 के बीच किसी भी वेंटिलेटर का ऑर्डर या खरीद नहीं की है।

Reply to RTI filed by RTI activist Vivek Pandey

विभाग ने दूसरे सवाल के जवाब में कहा कि दिल्ली सरकार की केंद्रीय खरीद एजेंसी ने जुलाई 2020 से अप्रैल 2021 के बीच 4500 यूनिट ऑक्सीजन सिलेंडर / टैंक की खरीद के लिए 4,15,79,908 रुपए खर्च किए। सभी ऑक्सीजन सिलेंडर जुलाई 2020 में खरीदे गए थे। इसका मतलब है कि तब से, दिल्ली सरकार ने मेडिकल ऑक्सीजन के लिए सिलेंडर और टैंक खरीदने के लिए कोई पैसा खर्च नहीं किया।

हालाँकि यह स्पष्ट नहीं है कि दिल्ली सरकार द्वारा खरीदे गए ऑक्सीजन सिलेंडर या टैंक की क्षमता क्या थी। सिलेंडर की कीमत क्षमता और ब्रांड के आधार पर भिन्न होती है। सरकार की मानें तो एक ही क्षमता की सभी इकाइयाँ खरीदी गईं, जिसकी प्रति यूनिट लागत 9,239 रुपए है। सामान्य तौर पर, ऑक्सीजन सिलेंडर 5,000 रुपए से 9,000 रुपए के बीच मिलते हैं।

दिल्ली में कोविड की स्थिति

2 मई को दिल्ली में 20,394 नए कोविड -19 ममले सामने आए। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय के अनुसार, रविवार को दिल्ली में 24,444 लोग महामारी से ठीक हुए, जबकि 407 लोगों की जान गई। 71,977 टेस्ट किए गए। अब तक, दिल्ली में 11,94,946 मामले दर्ज किए गए हैं। 10,85,690 लोग ठीक हुए हैं।

बांग्ला-बंगाली देश से ऊपर, बाकी सब बेकार: ममता की लगाई ‘उप-राष्ट्रवादी खेला’ से जलेंगे और राज्य भी

ममता बनर्जी ने लगातार तीसरी बार सत्ता में वापसी कर ली है। इसे निश्चित रूप से उनकी एक बड़ी उपलब्धि के रूप में देखा जाएगा। राजनीतिक पंडितों के लिए आश्चर्य की बात यह रही कि दस वर्षों के शासन के बाद ममता बनर्जी अपनी सीट तो हार गईं पर उनकी पार्टी फिर से जीत गई। ऐसा बहुत कम होता है। भाजपा द्वारा सरकार बनाने की संभावनाएँ तेज थीं पर राजनीति की अपनी चाल होती है। कई बार चुनाव परिणाम परंपरा, तर्क, योजना या गणित से आगे रहते हैं। 

सत्ता में ममता बनर्जी की वापसी के क्या कारण हैं? उनकी पार्टी के नेताओं के अनुसार उनकी अपनी नेतृत्व क्षमता, स्वच्छ प्रशासन और कारगर सरकार ही प्रमुख कारण हैं। राजनीतिक विश्लेषक कान्ग्रेस पार्टी और वाम दलों द्वारा अपने ‘सेक्युलर’ वोट तृणमूल कॉन्ग्रेस के पक्ष में ट्रांसफर कर देना प्रमुख कारण बता सकते हैं। उनके समर्थक इस सफलता का श्रेय “खेला होबे” जैसे नारे को दे सकते हैं और उनके राजनीतिक सलाहकार प्रशांत किशोर अपनी योजना में ममता दीदी को पहली बार बंगाल की बेटी के रूप में प्रोजेक्ट करने को सबसे बड़ा कारण बता सकते हैं।

पर मुझे लगता है कि सफलता के इस शोर में एक महत्वपूर्ण कारण पर चर्चा शायद न हो और वह कारण है बांग्ला उप राष्ट्रवाद। अब इसे प्रशांत किशोर द्वारा बनाई गई रणनीति का हिस्सा माने या फिर पहले से चली आ रही एक सोच जो इस चुनाव में अचानक सार्वजनिक हो गई, पर इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि इस चुनाव में शायद इसे वेदर बैलून के रूप में इस्तेमाल किया गया और मुझे यह भी लगता है कि इसके अपेक्षित परिणाम भी आए। 

ऐसा नहीं है कि एक रणनीतिकार के रूप में प्रशांत किशोर ने यह काम पहली बार किया। चुनाव के मौकों पर किसी नेता को बाहरी बताने की यह रणनीति वे पहले भी उत्तर प्रदेश और बिहार में नरेंद्र मोदी के खिलाफ आजमा चुके थे पर वहाँ जनता ने इसे तवज्जो नहीं दिया था। कारण शायद यह हो सकता है कि उत्तर प्रदेश और बिहार के लोग खुद भारत के कई प्रदेशों में रहने के लिए जाने जाते हैं। पर पश्चिम बंगाल में प्रशांत किशोर द्वारा आजमाई गई इस रणनीति का एक अलग ही रूप दिखा जब चुनाव प्रचार के दौरान अपने भाषणों में ममता बनर्जी ने केवल भाजपा के नेताओं को ही नहीं बल्कि दल के समर्थकों और चुनाव आयोग द्वारा तैनात किए गए केंद्रीय सुरक्षा बलों के जवानों को बंगाल के बाहर का बताया। अपनी इस शिकायत के साथ उन्होंने दो बातें और जोड़ दी; पहली यह कि “बाहर से आए” इन लोगों को बांग्ला बोलना नहीं आता और दूसरी यह कि पश्चिम बंगाल में इनकी वजह से ही कोरोना का संक्रमण बढ़ा है। 

उनके इस दृष्टिकोण का संभावित असर और परिणाम भी चुनाव के दौरान ही दिखा। भारतवर्ष ने देखा कि उनके द्वारा अपने दल के समर्थकों से सुरक्षाबलों को घेरने की उनकी अपील का शीतलकुची में क्या परिणाम हुआ। चुनाव के समय किसी राज्य में अपनी ड्यूटी करने आए केंद्रीय सुरक्षा बलों के लिए ऐसी बात इससे पहले किसी मुख्यमंत्री ने कही हो, ऐसा नहीं जान पड़ता। एक बार के लिए यह लग सकता है कि ममता बनर्जी ने जो किया वह उनके केंद्र से असहयोग आंदोलन के विस्तार का ही एक रूप है, पर ध्यान से देखने पर लगता है कि यह जाँच करने के लिए सीबीआई को अपने राज्य में न घुसने देने की घोषणा या नागरिकता संशोधन कानून को पश्चिम बंगाल में लागू न करने की घोषणा से आगे का मामला है। यह केंद्र-राज्य संबंधों पर राजनीति से आगे की बात है जिसमें एक अलग तरह का खेल दिखाई देता है जो आगे चलकर एक वृहद रूप ले सकता है।  

यह संभावित वृहद रूप क्या हो सकता है? जो कुछ भी इस बार विधानसभा चुनावों में दिखा या आजमाया गया, उससे मिली सफलता तृणमूल कॉन्ग्रेस को प्रेरित करेगी कि पार्टी इसे भविष्य में बार-बार आजमाए। यदि ऐसा हुआ तो पश्चिम बंगाल की राजनीति के तमिलनाडु की द्रविड़ियन पार्टियों के हिंदी विरोधी राजनीति जैसी होने का खतरा पैदा हो जाएगा। एक ऐसी स्थिति जिसमें बांग्ला न बोलने वालों को बाहर वाला समझे जाने की संभावना बनेगी। जिसमें अपनी ड्यूटी करने के लिए केंद्र सरकार या उसकी संस्थाओं की ओर से आए सरकारी कर्मचारियों को बाहर वाला बताए जाने का खतरा रहेगा। बंगाल से बाकी के भारत के लोगों का सम्बन्ध बहुत पुराना है पर राजनीतिक कदमों की सफलता के साथ एक समस्या यह होती है कि उसे बार-बार आजमाया जाता है।

क्षेत्रीय नेताओं की राजनीति उनके इर्द-गिर्द घूमती है। साथ ही शासन में रहकर लंबे समय तक राज्यों को नियंत्रित करने की महत्वाकांक्षा उनसे ऐसा बहुत कुछ करवाती है जो परंपरागत राजनीति से हटकर होता है। ऐसे नेताओं के साथ एक समस्या यह होती है कि कभी कोई राजनीतिक फॉर्मूला काम कर जाता है तो वे उसी फार्मूले के नए-नए रूप अप्लाई करते रहते हैं। ममता बनर्जी ने जो फार्मूला इस बार आजमाया उसे वे आगे भी आजमाएँगी। इस आजमाइस में राज्य की दिशा और दशा क्या होगी, इसका निर्णय समय करेगा।

‘मार्च के बाद मोदी सरकार ने नहीं की वैक्सीन की खरीद’: मीडिया के झूठ की आँकड़ों से खुली पोल, सीरम ने भी बताया सच

मीडिया का एक धड़ा ये अफवाह फैला रहा है कि भारत सरकार ने कोरोना वैक्सीन की खरीद के लिए लिए निर्माताओं को कोई ऑर्डर ही नहीं दिया है। ‘फ़ोर्ब्स’ से लेकर ‘बिजनेस स्टैण्डर्ड’ तक ने इस तरह की अफवाहें फैलाईं। ‘फ़ोर्ब्स’ ने लिखा कि वैक्सीन निर्माताओं ने चेताया है कि कई महीनों तक वैक्सीन की कमी रह सकती है, ऐसे में भारत सरकार ने नए डोज की खरीद के लिए कोई ऑर्डर दिया ही नहीं है।

वैक्सीन को लेकर फ़ोर्ब्स ने फैलाई अफवाह

उधर ‘बिजनेस स्टैण्डर्ड’ ने भी यही बात दोहराई। उसने लिखा कि अब तक 18-45 आयुवर्ग के लोगों के लिए टीकाकरण की अनुमति मिल गई है, केंद्र सरकार ने वैक्सीन की खरीद के लिए कुछ नहीं किया है। इसने लिखा कि सीरम (SII) या ‘भारत बॉयोटेक’ में से किसी को भी ऑर्डर प्लेस नहीं किया गया है। लिखा कि दोनों कंपनियों को क्रमशः 10 करोड़ और 2 करोड़ वैक्सीन डोजेज के लिए ऑर्डर इससे पहले मार्च में ही दिया गया था।

‘बिजनेस स्टैण्डर्ड’ ने भी फैलाया झूठ

सोशल मीडिया में भी इन ख़बरों के आधार पर खूब झूठ फैलाया गया। लोगों ने सवाल पूछा कि जब भारत में वैक्सीन की कमी है तो फिर नए डोज के लिए कंपनियों को ऑर्डर क्यों नहीं दिया गया?

हालाँकि, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री डॉक्टर हर्षवर्धन ने इन आरोपों को निराधार बताया है। उन्होंने उन ख़बरों पर संज्ञान लिया, जिसमें कहा जा रहा था कि भारत सरकार ने वैक्सीन की खरीद के लिए मार्च के बाद से कोई ऑर्डर नहीं किया है। उन्होंने कहा कि ये मीडिया रिपोर्ट्स एकदम गलत हैं और तथ्यों पर आधारित नहीं हैं। अब आइए आपको बताते हैं कि सच्चाई क्या है। SII को 28 अप्रैल 2021 को ही 1732.5 करोड़ रुपए एडवांस में दिए गए हैं।

इन रुपयों से मई, जून और जुलाई के लिए 11 करोड़ वैक्सीन की डोज की खरीद की गई। मई 3, 2021 तक उनमें से कोविशील्ड वैक्सीन की 8.744 डोज भारत सरकार को SII द्वारा डिलीवर भी की जा चुकी है। इसी तरह ‘भारत बॉयोटेक’ (BBIL) को भी 787.5 करोड़ रुपए उसी दिन दिए गए, ताकि कोवैक्सीन की 2 करोड़ डोज की खरीद हो सके। इनमें से 88.13 लाख कोवैक्सीन डिलीवर भी की जा चुकी है।

इन दोनों ही कंपनियों को 100% एडवांस देकर वैक्सीन बुक की गई। अभी इसे 5 दिन भी नहीं हुए हैं कि मीडिया कहने लगा कि पिछले 2 महीनों से वैक्सीन की खरीद नहीं की जा रही है। अब तक भारत सरकार सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को कोरोना वैक्सीन की 16.54 करोड़ डोज मुफ्त में उपलब्ध करा चुकी है। उन प्रदेशों के पास अभी भी 78 लाख से अधिक डोज उपलब्ध हैं। अगले तीन दिन दिनों में उन्हें और 56 लाख डोज पहुँच जाएगी।

भारत सरकार ने कहा है कि वैक्सीन के मूल्यों में परिवर्तन और कोविड-19 के खिलाफ लड़ाई तेज़ करते हुए केंद्र सरकार अपने कोटे की 50% वैक्सीन की खरीद करेगी और सभी राज्यों को मुफ्त में उपलब्ध कराने की प्रक्रिया जारी रखेगी। इसके बावजूद मीडिया के एक धड़े ने अफवाह फैलाई कि सरकार वैक्सीन नहीं खरीद रही है और राज्यों के साथ सौतेला व्यवहार हो रहा है। SII ने भी सरकार के बयान की पुष्टि की है।

सीरम ने कहा कि वो भारत सरकार के इस बयान की की प्रशंसा करते हुए इसमें दिए गए तथ्यों की पुष्टि करते हैं। SII ने कहा कि वे पिछले साल से ही केंद्र सरकार के साथ मिल कर करीबी से कार्य कर रहा है और समर्थन के लिए धन्यवाद भी देता है। संस्थान ने कहा कि जितना हो सके, उतनी ज़िंदगियाँ बचाने के लिए वैक्सीन का पूर्ण क्षमता के साथ उत्पादन जारी रहेगा। इससे झूठ फैलाने वालों की पोल खुल गई है।

गहने चुराए, तोड़फोड़: बंगाल में चुनावी जीत के बाद एक और BJP कार्यकर्ता के घर पर TMC गुंडों का हमला

पश्चिम बंगाल में रविवार (मई 2, 2021) को विश्वनाथ धर नाम के एक भाजपा कार्यकर्ता के घर पर टीएमसी के गुंडों ने हमला किया। यह घटना पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में पनिहाटी नगरपालिका के घोला मल्लिकपारा में हुई।

पश्चिम बंगाल राज्य विधानसभा चुनावों में तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) की जीत के बाद, पार्टी के उपद्रवियों ने कई भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों को निशाना बनाया। रविवार को टीएमसी के गुंडों ने धर के घर में तोड़फोड़ की और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। बताया जा रहा है कि उपद्रवियों ने पहले सीसीटीवी कैमरों को नष्ट किया और फिर भाजपा कार्यकर्ता के घर को लूटना शुरू कर दिया। उन्होंने आलमीरा खोला और उसमें से नकदी एवं आभूषण चुरा लिए। बाहर जाते समय, उन्होंने उनकी मारुति कार और एक रॉयल एनफील्ड (बुलेट) बाइक को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

घटना से संबंधित एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उपद्रवियों द्वारा किए गए नुकसान और लूटपाट को देखा जा सकता है। वीडियो में घरेलू सामान इधर-उधर फेंके देखे जा सकते हैं। यह भी देखा जा सकता है कि खिड़की के शीशे टूटे हुए हैं और काँच के छोटे टुकड़े फर्श पर बिखरे पड़े हैं। उपद्रवियों ने घर पर पथराव किया था, जिसके प्रमाण वीडियो में स्पष्ट रूप से देखे जा सकते हैं।

(Video Courtesy: Youtube/Opindia)

वीडियो के बैकग्राउंड में एक महिला को रोते हुए यह कहते हुए सुना जा सकता है, “सब कुछ रिकॉर्ड करो और पुलिस को भेजो। हमारे ऊपर ऐसा अत्याचार! किसी अन्य घर को इस तरह की बर्बरता का सामना नहीं करना पड़ा। क्या कोई इस तरह किसी और के घर को नुकसान पहुँचाता है?”

TMC द्वारा BJP कार्यकर्ताओं और नेताओं पर अत्याचार

चुनाव जीतने के कुछ ही घंटों के भीतर, टीएमसी ने हेस्टिंग्स में बीजेपी के पार्टी कार्यालय का घेराव किया, आरामबाग में पार्टी कार्यालय को जला दिया और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी के वाहन पर हमला किया, जिन्होंने ममता बनर्जी को हराया है। 

News18 की पत्रकार पायल मेहता ने ऐसे ही एक हमले का सीसीटीवी फुटेज शेयर किया था। कैमरे में कैद हुए दृश्यों में देखा जा सकता है कि हिंसक भीड़ ने दक्षिण कोलकाता के कस्बा इलाके में रविवार शाम एक भाजपा कार्यकर्ता के घर पर हमला किया। लगभग 15 सेकंड के वीडियो में, तृणमूल कॉन्ग्रेस का झंडा देखा जा सकता है। गुंडों ने शुरू में घर का दरवाजा खोलने की कोशिश की। हालाँकि, जब वे विफल रहे तो उन्होंने ईंटों और डंडों से हमला किया।

2 मई को बीजेपी कार्यकर्ता अभिजीत सरकार को कथित तौर पर टीएमसी की भीड़ द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया। बता दें कि हत्या से कुछ देर पहले अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी थी। उन्हें पता भी नहीं था कि फेसबुक पर लाइव कैसे आते हैं, लेकिन उन्होंने किसी तरह वीडियो बनाया और बताया कि TMC के गुंडे लगातार बमबारी कर रहे थे और उन्होंने उनके घर और दफ्तर को तहस-नहस कर डाला। उन्होंने कहा कि उनकी एक ही गलती है कि वे भाजपा कार्यकर्ता हैं। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया कि उनके घर और NGO दफ्तर को तोड़ डाला गया है। कुत्ते के 5 बच्चे को मार डाला गया।

अभिजीत ने कहा था कि उन्हें किसी भी पार्टी के जीतने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन बेरहम तरीके से उनके घर को ध्वस्त किया जा रहा है। इन दोनों वीडियो के अपलोड करने के बाद पीट-पीटकर उनकी हत्या कर दी गई। कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न माध्यमों से डर जताया है कि ममता के तीसरी बार सत्ता में लौटने से उनका जीना दूभर हो सकता है और उनकी जान को TMC वालों से खतरा हो सकता है।

बिल्लू खान और शाहिद ने सीताराम व उनके बेटे रवि को तेज हथियार से किया लहूलुहान: UP पुलिस ने दर्ज की FIR

उत्तर प्रदेश के मथुरा स्थित नवनीत नगर में मारपीट की एक घटना हुई। ‘विश्व हिन्दू परिषद (VHP)’ के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने दावा किया कि सोमवार (मई 3, 2021) की सुबह कोतवाली थाना क्षेत्र के नवनीत नगर में ‘इस्लामी जिहादी’ बिल्लू खान व उसके परिजनों ने वहीं के निवासी सीताराम व उनके बेटे रवि पर तेज धारदार हथियार से हमला कर लहूलुहान कर दिया। मथुरा पुलिस ने भी इस घटना पर प्रतिक्रिया दी है।

मथुरा के CO सिटी ने बताया कि ये आज सुबह 5 बजे की घटना है। आरोपितों में एक का नाम बिल्लू खान है और दूसरा उसका बेटा शाहिद है। इन्होंने सीताराम, रवि और कमलेश के साथ मारपीट की। पुलिस के अनुसार, इस घटना में 2 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने कहा कि इस घटना में शामिल सभी लोगों का मेडिकल कराया जा चुका है और मुकदमा दर्ज हो गया है। पुलिस ने शीघ्र वैधानिक कार्रवाई का आश्वासन भी दिया है।

विनोद बंसल ने सीताराम के बेटे रवि का वीडियो भी शेयर किया। दोनों पिता-पुत्र इस हमले में घायल हुए हैं और उन्हें काफी चोटें आई हैं। बंसल ने आरोप लगाया कि आरोपित के विक्षिप्त होने की कहानी गढ़ी जा रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश पुलिस से इस मामले में तुरंत कार्रवाई करने की माँग की। सोशल मीडिया पर भी लोगों ने इस घटना को लेकर अपना विरोध दर्ज कराया और पीड़ितों से सहानुभूति जताई।

26 जनवरी ‘किसान’ दंगे में 299 पुलिसकर्मी घायल हुए, करोड़ों की संपत्ति को पहुँचा नुकसान: RTI में खुलासा

केंद्र सरकार द्वारा लाए गए तीन नए कृषि कानूनों के खिलाफ दिल्ली की सीमाओं पर किसानों का विरोध प्रदर्शन अभी भी जारी है। इस साल 26 जनवरी को हजारों किसान ट्रैक्टर मार्च के दौरान सिंघु, टिकरी और गाजीपुर बॉर्डर पर पुलिस की बैरिकेडिंग तोड़कर दिल्ली की सीमा में दाखिल हो गए थे।

उन्होंने न केवल सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाया, बल्कि लाल किले पर खालिस्तानी झंडा भी फहराया। ये भारत के लिए काला दिन था। इस दौरान निहंग हाथों में खुली तलवारें लिए हुए दिखे थे। वहीं कथित किसानों ने पथराव कर कई दर्जन पुलिसकर्मियों को भी घायल कर दिया था।

गणतंत्र दिवस 2021 के दौरान हुए दंगों के बाद लाल किले पर मौजूद दीप सिद्धू सहित कई प्रदर्शनकारियों और किसान नेताओं को गिरफ्तार किया गया था। किसान नेता राकेश टिकैत और योगेंद्र यादव पर हत्या का प्रयास जैसी गंभीर धाराओं के तहत मामले दर्ज किए गए थे।

योगेंद्र यादव पर आउटर दिल्ली में 307 के तहत मामला दर्ज किया गया था। अब, आरटीआई कार्यकर्ता विवेक पांडे द्वारा दायर की गई आरटीआई के जवाब में दी गई जानकारी में खुलासा हुआ है कि उन दंगों के बाद कितना नुकसान हुआ था।  

पांडे ने दिल्ली पुलिस के साथ एक आरटीआई (सूचना का अधिकार) दायर की, ताकि दिल्ली के सभी पुलिस स्टेशनों से दंगों में हुए नुकसान के बारे में पता लगाया जा सके। उन्होंने इसमें निम्न में दिए गए सवाल पूछे।

  • इस रैली में जलाए गए वाहनों की कुल संख्या का विवरण
  • रैली में संपत्ति को होने वाले नुकसान का विवरण
  • रैली के दौरान कुल कितनी संपत्ति को नुकसान पहुँचा
  • किसानों और पुलिस के बीच झड़प में घायल होने वाले पुलिसकर्मियों की संख्या
  • किसानों और पुलिस के बीच झड़प में घायल होने वाले किसानों की संख्या
आरटीआई कार्यकर्ता विवेक पांडे द्वारा दायर की गई आरटीआई का स्क्रीनशॉट

उन्हें एक को छोड़कर सभी पुलिस स्टेशनों से जवाब मिला। पांडे ने ऑपइंडिया के साथ आरटीआई विवरण साझा किया, और यहाँ वे विवरण हैं जो हमें दंगों के दौरान कथित किसानों को हुए नुकसान के बारे में मिले। उन्हें एक को छोड़कर सभी पुलिस स्टेशनों से जवाब मिला। यहाँ कथित किसानों द्वारा दंगों के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को कितना कितना नुकसान पहुँचाया गया और कितने पुलिसकर्मी घायल हुए सबकी जानकारी दी गई है।

दंगों के दौरान कुल 299 पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इनमें से बाहरी जिले में 115, द्वारका में 37, सेंट्रल में 19 और नॉर्थ जिले में 24 लोग घायल हुए थे। आरटीआई के जवाबों में एक बात और सामने आई थी। वह 20 लाइव राउंड के साथ एक इंसास राइफल की मैगजीन थी, जो दंगों के दौरान गायब हो गई थी।

गौरतलब है कि 26 जनवरी को ट्रैक्टर रैली प्रदर्शन के दौरान आंदोलनकारी किसानों ने लाल किले पर कब्जा कर लिया था और अपना झंडा फहरा दिया था। इसके अलावा उग्र किसानों ने लाल किला समेत कई जगहों पर जमकर तोड़फोड़ की और पुलिस पर भी जानलेवा हमला किया था। 

ममता बनर्जी की जीत के नशे में TMC कार्यकर्ताओं ने BJP वर्कर की लूट ली दुकान: वीडियो वायरल

इंटरनेट पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वायरल हो रहे इस वीडियो में लोगों को एक दुकान को लूटते हुए देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो पश्चिम बंगाल में टीएमसी की जीत के शुरुआती रूझानों के बाद शूट किया गया है। बताया जा रहा है कि दुकान को इसलिए लूट लिया गया, क्योंकि यह भाजपा कार्यकर्ता का था।

जिस दुकान में लूटपाट की गई, वह हावड़ा के शिबपुर में स्थित है।

अब एक और वीडियो सामने आया है जहाँ एक मुस्लिम महिला को यह कहते हुए सुना जा सकता है कि दुकान उसके भाई की थी और वह भाजपा कार्यकर्ता था। उसी वीडियो में देखी गई एक अन्य मुस्लिम महिला रो रही थी क्योंकि दुकान लूट ली गई थी।

भाजपा पर टीएमसी की जीत के बाद पश्चिम बंगाल में हिंसा का प्रकोप जारी है। अभिजीत सरकार को कथित तौर पर टीएमसी की भीड़ द्वारा मौत के घाट उतार दिया गया था। चुनाव जीतने के कुछ ही घंटों के भीतर, टीएमसी ने हेस्टिंग्स में बीजेपी के पार्टी कार्यालय का घेराव किया, आरामबाग में पार्टी कार्यालय को जला दिया और बीजेपी नेता शुभेंदु अधिकारी पर हमला किया जिन्होंने ममता बनर्जी को हराया।

बता दें कि हत्या से कुछ देर पहले अभिजीत सरकार ने फेसबुक लाइव के माध्यम से अपनी बात रखी थी। उन्हें पता भी नहीं था कि फेसबुक पर लाइव कैसे आते हैं, लेकिन उन्होंने किसी तरह वीडियो बनाया और बताया कि TMC के गुंडे लगातार बमबारी कर रहे थे और उन्होंने उनके घर और दफ्तर को तहस-नहस कर डाला। उन्होंने कहा कि उनकी एक ही गलती है कि वे भाजपा कार्यकर्ता हैं। एक अन्य वीडियो में उन्होंने बताया कि उनके घर और NGO दफ्तर को तोड़ डाला गया है। कुत्ते के 5 बच्चे को मार डाला गया।

अभिजीत ने कहा था कि उन्हें किसी भी पार्टी के जीतने से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन बेरहम तरीके से उनके घर को ध्वस्त किया जा रहा है। इन दोनों वीडियो के अपलोड करने के बाद पीट-पीट कर उनकी हत्या कर दी गई। कई भाजपा कार्यकर्ताओं ने विभिन्न माध्यमों से डर जताया है कि ममता के तीसरी बार सत्ता में लौटने से उनका जीना दूभर हो सकता है और उनकी जान को TMC वालों से खतरा हो सकता है।

मिलिए वनाती श्रीनिवासन से, कोयंबटूर के मैदान में हिंदी, हिंदू और मोदी विरोधी कमल हासन को चटाई है धूल

तमिलनाडु के विधानसभा चुनावों में इस बार बीजेपी खाता खोलने में सफल रही है। उसे 4 सीटों पर कामयाबी मिली है। इनमें से एक सीट कोयंबटूर दक्षिण की भी है। त्रिकोणकीय मुकाबले में यहाँ बाजी बीजेपी की वनाती श्रीनिवासन के हाथ लगी। मक्कल निधि मय्यम (MNM) बनाकर राजनीति के मैदान में उतरे कमल हासन के चुनाव लड़ने की वजह से यह सीट चर्चा में रही थी।

वनाती ने हासन को 1728 वोटों के करीबी अंतर से हराया। वे पहली बार विधायक बनी हैं। 2 मई को हुई मतगणना के शुरुआती दौर में एमएनएम के कमल हासन आगे चल रहे थे। लेकिन कुछ दौर की गिनती के बाद कॉन्ग्रेस के मयूरा जयाकुमार ने बढ़त बना ली। शुरुआत में तीसरे नंबर पर चल रही बीजेपी की वनाती श्रीनिवासन ने आखिर के राउंडों में बढ़त बनाते हुए जीत हासिल की।

विधानसभा चुनाव से पहले कयास लग रहे थे कि कमल हासन चुनावी समर में चेन्नई से उतरेंगे। लेकिन आखिर में उन्होंने कोयंबटूर दक्षिण की सीट चुनी थी। 1.75 लाख वोटर्स वाले कोयंबटूर साउथ में एमएनएम प्रमुख कमल हासन के चुनाव लड़ने का ऐलान करने से यहाँ मुकाबला रोचक हो गया था। उनको चुनौती देने के लिए कॉन्ग्रेस ने पार्टी के तमिलनाडु प्रदेश के कार्यकारी अध्यक्ष मयूरा जयकुमार तो बीजेपी ने राष्ट्रीय महिला मोर्चा की राष्ट्रीय अध्यक्ष वनाती श्रीनिवासन को मैदान में उतारा।

साभार: चुनाव आयोग

बीजेपी की 50 वर्षीय नेता और चेन्नई हाई कोर्ट की वकील वनाती श्रीनिवासन कोयंबटूर में काफी लोकप्रिय रही हैं। उन्हें पिछले साल अक्टूबर में ही बीजेपी महिला मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। उस समय इस फैसले को तमिलनाडु के विधानसभा चुनाव से ही जोड़कर देखा गया था।

गौरतलब है कि शुरू से ही नरेंद्र मोदी के धुर आलोचक रहे कमल हासन ने अपना पूरा अभियान हिंदू और हिंदी विरोधी नैरेटिव के इर्द-गिर्द केंद्रित रखा था। राष्ट्रीय भाषा हिंदी को देश की अन्य पुरानी भाषाओं की तुलना में ‘अभी डायपर में एक छोटा बच्चा’ कहने से लेकर मुगलों के पहले हिंदू शब्द के अस्तित्व को खारिज करने समेत अपने कई बयानों को लेकर कमल हासन विधानसभा चुनावों से पहले ही विवादों में रहे।

नतीजों के बाद कमल हासन ने ट्वीट कर समर्थकों का शुक्रिया अदा किया और कहा कि वह लोगों का फैसला स्वीकार करते हैं।

वहीं वनाती श्रीनिवासन ने समर्थकों का शुक्रिया अदा करते हुए लिखा, “हम जीत गए हैं! कोवई दक्षिण आपके आशीर्वाद और समर्थन के लिए शुक्रिया। मैं अपने मतदाताओं, नेताओं, पीएम नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, पार्टी अध्यक्ष जेपी नड्डा और तमिलनाडु के सभी बीजेपी कार्यकर्ताओं का उनकी कड़ी मेहनत और समर्पण के लिए शुक्रिया अदा करती हूँ।”

वनाती को बीजेपी नेताओं से बधाई संदेश मिले, खासकर पार्टी की दिग्गज महिला नेता स्मृति ईरानी ने उन्हें तमिलनाडु चुनावों में जीत के लिए बधाई दी।

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2021 में एमके स्टालिन की अगुवाई में डीएमके ने बहुमत हासिल किया है।

भारत में जलती चिताओं का मजाक उड़ा घिरी चीनी कम्युनिस्ट पार्टी, फजीहत के बाद ट्वीट डिलीट

भारत में कोरोना त्रासदी में मदद का दावा कर सहानुभूति बटोरने का प्रयास कर रहे चीन की घटिया मानसिकता को खुद उसकी ही पार्टी ने दुनिया के सामने उजागर कर दिया है। इससे चीन की सत्तारूढ़ पार्टी की देश ही नहीं दुनिया भर में जमकर किरकिरी हो रही है।

दरअसल चीन की कम्युनिस्ट पार्टी (Chinese Communist Party) के एक सोशल मीडिया अकाउंट से भारत में जारी कोरोना संकट का मजाक बनाया गया है। इसमें कहा गया कि भारत में चिताएँ जल रही हैं, जबकि चीन अंतरिक्ष में स्पेस स्टेशन तैयार कर रहा है। पोस्ट में साझा की गई तस्वीर में चीन के तियांहे मॉड्यूल और इसके जलते ईंधन की तुलना भारत में चलती चिताओं से की गई।

चीन की माइक्रो ब्‍लॉगिंग वेबसाइट वीबो (Weibo) पर कम्‍युनिस्‍ट पार्टी के सेंट्रल पोलिटिकल एंड लीगल अफेयर्स के अकाउंट से किए गए इस विवादित पोस्‍ट के बाद सोशल मीडिया में बवाल मच गया। इस पोस्‍ट में एक तरफ चीन के रॉकेट लॉन्‍च करने और दूसरी तरफ भारत में लाशों के जलाए जाने की तस्‍वीर को दिखाया गया है। इस पोस्‍ट में कैप्‍शन लिखा है, “चीन की जलाई हुई आग बनाम भारत की जलाई हुई आग।”

Th controversial Weibo post mocking India’s funeral pyres, via Twitter

इसमें हैशटैग के साथ भारत में कोरोना मामलों के चार लाख पार होने का जिक्र भी किया गया। हालाँकि, इस तस्वीर को लेकर चीन में ही आलोचना शुरू हो गई। चीनी नागरिकों ने पोस्ट को लेकर नाराजगी जाहिर की, जिसके बाद इसे डिलीट कर दिया गया।

इस पोस्‍ट पर चीन के सोशल मीडिया यूजर्स ने बहुत तीखी प्रतिक्रिया दी और कम्‍युनिस्‍ट पार्टी की भारत में कोरोना त्रासदी के प्रति असंवेदनशीलता दिखाने के लिए कड़ी आलोचना की। वीबो यूजर्स ने कहा कि यह पोस्‍ट ‘अनुचित’ है और चीन को भारत के साथ सहानुभूति दिखानी चाहिए। 

इस आलोचना के बाद चीन के सरकारी भोपू ग्‍लोबल टाइम्‍स के एडिटर हू शिजिन ने लिखा कि हमें भारत के लिए मानवीयता के परचम को इस बार ऊपर उठाना चाहिए। भारत के प्रति संवेदना व्यक्त करनी चाहिए और चीनी समाज के नैतिकता को ऊँचा रखना चाहिए। हू ने कहा कि अपने अकाउंट पर लोगों की भागीदारी बढ़ाने के लिए इस तरह का तरीका अपनाना बिल्कुल भी ठीक नहीं है।

हालाँकि, बाद में हू शिजिन का भी असली चेहरा दुनिया के सामने आ गया। हू शिजिन ने ट्वीट करके कहा, “कई चीनी लोगों की चिंता है कि ऑक्‍सीजन कंसट्रेटर्स और वेंटिलेटर जैसी आपातकालीन सप्‍लाइ जो चीन भारत को देगा उसका इस्‍तेमाल भारत के गरीब मरीजों को बचाने की बजाय देश के अमीरों की जरूरत को पूरा करेगा।” इस तरह ग्‍लोबल टाइम्‍स के एडिटर ने भारत की व्‍यवस्‍था पर सवाल उठाए।

वहीं, जब इस मामले पर चीन के विदेश मंत्रालय से जवाब माँगा गया तो इसने जवाब देने के बजाय कहा कि हमें उम्मीद है कि हर कोई महामारी के खिलाफ भारत की लड़ाई का समर्थन करने वाली चीनी सरकार और लोगों के विचारों पर ध्यान देगा। मंत्रालय ने आगे कहा कि आने वाले दिनों में कोरोना से लड़ने के लिए अन्य जरूरी मेडिकल सप्लाई को भारत भेजा जाएगा। हाल ही में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग (Xi Jinping) ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को संदेश भेजते हुए भारत में कोरोना की स्थिति पर संवेदना व्यक्त की। उन्होंने भारत में कोविड-19 मामलों के उछाल से निपटने के लिए समर्थन और मदद देने की पेशकश भी की।