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6 महीने जेल में रखा, बार-बार याचिका की खारिज: आखिरकार ISKCON संत चिन्मय कृष्ण दास को बांग्लादेश में जमानत, हिन्दुओं की आवाज उठाने पर ठोंक दिया था देशद्रोह

बांग्लादेश में राजद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किए गए ISKCON संत चिन्मय कृष्ण दास को जमानत मिल गई है। उन्हें बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने जमानत दी है। चिन्मय कृष्ण दास को हिन्दुओं के अधिकारों के लिए आवाज उठाने पर मोहम्मद यूनुस की सरकार ने गिरफ्तार कर लिया था।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, चिन्मय कृष्ण दास को बुधवार (30 अप्रैल, 2025) को बांग्लादेश के हाई कोर्ट ने जमानत दी। जस्टिस अताउर रहमान और जस्टिस मोहम्मद अली रेजा ने उनकी जमानत का आदेश पारित किया। इससे पहले 23 अप्रैल, 2025 को उन्हें जमानत देने से मना करते हुए आदेश सुरक्षित रख लिया था।

चिन्मय कृष्ण दास की अभी जेल से रिहाई नहीं हुई है, कोर्ट का आदेश जेल अधिकरियों के पास पहुँचने के बाद उन्हें रिहा कर दिया जाएगा। चिन्मय कृष्ण दास के लिए जमानत की याचिका डालने वाले वकील अपूर्ब कुमार भट्टाचार्य ने कोर्ट को बताया था कि हिन्दू संत जेल के भीतर बीमार हैं और समस्याओं से गुजर रहे हैं।

चिन्मय कृष्ण दास को यह जमानत उनके गिरफ्तार किए जाने के 6 महीने बाद दी गई है। उनके गिरफ्तार किए जाने के बाद रिहाई की माँग करने वाले हिन्दुओं पर भी हमला कर दिया गया था। उन्हें जेल के भीतर खाना देने गए लोग भी गिरफ्तार कर लिए गए थे।

बांग्लादेश में चिन्मय कृष्ण दास को जमानत ना देने के लिए भी लगातार प्रयास हो रहे थे। एक बार उन्हें 30 मिनट सुनवाई के बाद जमानत देने से इनकार किया गया तो एक बार उनकी याचिका में खामी निकाल दी गई थी। उनके वकील रबीन्द्र घोष पर भी हमला हुआ था।

क्यों गिरफ्तार हुए थे चिन्मय कृष्ण दास?

25 अक्टूबर, 2024 को बांग्लादेश के चटगाँव में हिन्दुओं ने एक रैली आयोजित की थी। इस रैली का नेतृत्व चिन्मय कृष्ण दास कर रहे थे। यह रैली चटगाँव में ऐतिहासिक लाल दीघी मैदान में आयोजित की गई थी। इसमें हजारों हिन्दू शामिल हुए थे। चटगाँव में यह रैली हिंदुओं पर इस्लामी कट्टरपंथियों के हमलों के विरोध में आयोजित की गई थी।

इस रैली के दौरान हिन्दुओं ने भगवा झंडे लहराए और सरकार से कार्रवाई की माँग की। चटगाँव में हुई इस रैली के कारण इस्लामी कट्टरपंथी बिदक गए। उन्होंने इस रैली में एक जगह पर एक भगवा झंडा, बांग्लादेश के झंडे से ऊँचा लहराता हुआ देख लिया।

इसी के आधार पर फिरोज खान नाम के एक शख्स ने चटगाँव में ही चिन्मय कृष्ण दास समेत 19 लोगों के खिलाफ FIR दर्ज करवाई थी। फिरोज खान ने आरोप लगाया था कि बांग्लादेश का झंडा नीचे करके लहराया जा रहा था जो इसका अपमान है और यह देशद्रोह का कार्य है। फिरोज ने आरोप लगाया था कि इससे चिन्मय कृष्ण दास देश में अशांति लाना चाहते हैं।

इसके बाद चिन्मय कृष्ण दास को गिरफ्तार कर लिया गया तगा। उन्हें चटगाँव की अदालत में पेश किया गया। यहाँ मजिस्ट्रेट काजी नजरुल इस्लाम ने उन्हें देशद्रोह का आरोपित मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया और जेल भेज दिया था।

‘शौर्य चक्र विजेता की माँ को पाकिस्तान डिपोर्ट होने का डर’: इंडियन एक्सप्रेस की खबर का J&K पुलिस ने किया फैक्ट चेक, कहा- ऐसी झूठी बातें मत फैलाओ

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद लगातार पाकिस्तानी नागरिकों की वापसी कराई जा रही है। इसी बीच पाकिस्तानियों की पीड़ा दिखाने के नाम पर कुछ मीडिया संस्थान प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। इसी कड़ी में अंग्रेजी मीडिया संस्थान इंडियन एक्सप्रेस ने एक झूठी खबर चलाई। इंडियन एक्सप्रेस ने यह प्रोपेगेंडा सच्चाई जानते हुए किया।

इंडियन एक्सप्रेस ने बुधवार (30 अप्रैल 2025) ने एक भ्रामक खबर प्रकाशित की। इस खबर में इंडियन एक्सप्रेस ने दावा किया कि आतंकियों से लड़ते हुए एक सैन्य ऑपरेशन में बलिदान हुए जम्मू कश्मीर पुलिस के एक जवान की माँ को भी डिपोर्ट किया जाने वाला है।

इंडियन एक्सप्रेस के श्रीनगर एडिशन में 30 अप्रैल, 2025 को प्रकाशित इसी खबर में यह भ्रामक दावे किए गए

इंडियन एक्सप्रेस ने अपने श्रीनगर एडिशन में दावा किया कि शौर्य चक्र विजेता बलिदानी मुदस्सिर शेख की माँ शमीमा को पाकिस्तान वापस भेजे जाने वाली लिस्ट में रखा गया। इंडियन एक्सप्रेस ने बताया कि शमीमा के भारत छोड़े जाने की अफवाह भी फ़ैल गई।

उसने मुदस्सिर के परिजनों के भी कुछ बयान छापे। इनसे ऐसा सन्देश गया कि मुदस्सिर की माँ शमीमा को भारत छोड़ना ही पड़ा है। हालाँकि, इस पूरी खबर कि सच्चाई खुद शमीमा और बारामूला पुलिस ने पहले ही बयान कर दी थी। शमीमा अख्तर भारत में ही रहने वाली हैं।

29 अप्रैल, 2025 को एक्स (पहले ट्विटर) पर बारामूला पुलिस ने बताया था, “बलिदानी कांस्टेबल मुदस्सिर अहमद उर्फ ​​बिंदास की माँ के कथित डिपोर्टेशन के संबंध में सोशल मीडिया पर प्रसारित खबरें झूठी और निराधार हैं और उनका स्पष्ट रूप से खंडन किया जाता है।” पुलिस ने जनता और मीडिया से इस मामले को लेकर गलत सूचना फैलाने से बचने का आग्रह किया है।

वहीं शमीमा अख्तर का खुद का बयान इसी खबर में बताता है कि वह श्रीनगर इलाज के लिए गईं थी और इस बीच कुछ लोगों ने उनके पाकिस्तान जाने सम्बन्धी अफवाह फैलाई। शमीमा अख्तर ने पाकिस्तान जाने की बातों को नकार दिया है।

अब इंडियन एक्सप्रेस की यह खबर सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है। नेटिजन्स इसे पाकिस्तान के हित में उठाया गया कदम बता रहे हैं। अंकुर सिंह नाम के एक्स यूजर ने कटिंग को शेयर करते हुए लिखा, “क्या पाकिस्तानियों के लिए सहानुभूति बटोरने को ऐसी खबरें चलाई जा रही हैं?”

अन्य यूजर ने इंडियन एक्सप्रेस को फेक खबर फैलाने और भारत की छवि बिगाड़ने के चलते बैन करने की माँग की है। कमेंट में उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय, गृह मंत्री कार्यालय, सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय और केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव को टैग भी किया है।

कौन थे मुदस्सिर अहमद ?

कॉन्स्टेबल मुदस्सिर अहमद शेख साल 2022 में आतंकियों से लड़ते हुए बलिदान हो गए थे। पुलिस को 25 मई 2022 को एक वाहन में सवार हथियारों से लैस तीन आतंकवादियों की गतिविधि के बारे खुफिया जानकारी मिली थी। यह आतंकवादी अमरनाथ यात्रा पर हमला करने जा रहे थे।

इसके बाद बारामूला में सुरक्षाबलों ने आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया। इस ऑपरेशन में कॉन्स्टेबल मुदस्सिर अहमद शेख भी शामिल थे। उनको ऑपरेशन के बीच गोली लग गई। इलाज के लिए ले जाते समय मुदस्सिर अहमद की मौत हो गई।

इस ऑपरेशन में मुदस्सिर अहमद ने अप्रतिम शौर्य दिखाया था और एक आतंकी को गाड़ी से खींच लिया था। उनकी इस वीरता के चलते 2023 में उन्हें शौर्य चक्र से सम्मानित किया गया था। उनकी माँ शमीमा अख्तर ने अपने पति के साथ राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू से यह सम्मान प्राप्त किया था।

उरी में उनके नाम पर एक चौक भी है और कई पुलिस स्टेशन में भी उनकी तस्वीरें लगी हुई है। हालाँकि, इंडियन एक्सप्रेस ने यह सब ध्यान ना रखते हुए भ्रामक खबर फैलाई जिसकी सच्चाई बाहर आ गई।

सूरज की गर्मी से पिघलते हुए ग्लेशियर को मिलेगी ‘विज्ञान की छाया’, ग्लोबल वार्मिंग से निपटने के लिए ताप को कम करने पर काम कर रहे वैज्ञानिक: जानिए सब कुछ

विश्व भर के वैज्ञानिक तपती धरती को ठंडा करने के लिए एक नया प्रयोग करने जा रहे हैं। पिघलते ग्लेशियर बचाने और ग्लोबल वार्मिंग से लड़ने को वैज्ञानिक अब सूरज की रोशनी को ठंडा करना चाहते हैं। इसके लिए वैज्ञानिकों ने तकनीक भी खोज ली है।

यूनाइटेड किंगडम (UK) के वैज्ञानिक ने ग्लोबल वॉर्मिंग कम करने के लिए एक प्रयोग पर काम कर रहे हैं। इस प्रयोग में वह सूरज की रोशनी को कम करने या परावर्तित कर वापस अंतरिक्ष में भेजने की कोशिश करेंगे। ब्रिटिश सरकार की एडवांस रिसर्च एंड इनवेंशन एजेंसी (ARIA) की ओर से इस प्रयोग के लिए लगभग ₹550 करोड़ रुपए (50 मिलियन यूरो) का फंड तय किया है।

द टेलीग्राफ की एक रिपोर्ट के अनुसार, एरिया के प्रोग्राम डायरेक्टर प्रोफेसर मार्क साइम्स ने बताया कि ये कुछ ही जगहों पर किया जाएगा। उन्होंने कहा, “हम जो कुछ भी करेंगे वह सुरक्षित होगा। इस अनुसंधान के प्रति हम पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।”

इस प्रयोग के जरिए वैज्ञानिक प्रयोगशाला से इतर असल दुनिया में आने वाले परिणाम के आँकड़े जुटाना चाहते हैं ताकि इसको बड़े स्तर पर लागू करने के जोखिम पता किए जा सकें। सोलर जियोइंजीनियरिंग के जरिए किए जाने वाले इस प्रयोग का सीधा असर पर्यावरण पर होने का दावा किया जा रहा है।

इस प्रयोग के जरिए पृथ्वी ठंडी होने की बात कही जा रही है। यह भी बताया गया है कि बारिश के समय और तरीके में बदलाव हो सकता है। हालाँकि इस प्रक्रिया के कुछ नुकसान भी हैं, जिनका असर दीर्घकालिक हो सकता है।

क्यों हो रहा प्रयोग?

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर पूरी दुनिया चिंता में है। पृथ्वी का तापमान लगातार बढ़ रहा है। इससे समुद्र का पानी गर्म हो रहा है और पहाड़ों पर मौजूद ताजे पानी के ग्लेशियर पिघल रहे हैं। इसे कम करने को लेकर दुनिया भर में वार्ता, कार्यक्रम समेत कई जतन किए जा रहे हैं। कई सुझाव दिए जा रहे हैं।

इसके अलावा जीवाश्म ईंधन को ना जलाने, अक्षय ऊर्जा का उपयोग करने और वैकल्पिक ऊर्जा का उपयोग करने समेत तमाम तरह की बातें हो रही हैं। हालाँकि इन सब का अब तक कोई गंभीर परिणाम निकल कर सामने नहीं आ रहा है।

संयुक्त राष्ट्र (UN) की 2024 की पर्यावरण को लेकर एक रिपोर्ट के अनुसार, कार्बन उत्सर्जन वर्तमान में जिस गति से बढ़ रहा है, उसके जारी रहने से वर्ष 2100 में पृथ्वी का तापमान 3.1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है। उस स्थिति में दुनिया भर में सूखा, बाढ़ जैसी आपदाएँ आ सकती हैं।

इससे फसलें तक बर्बाद हो सकती हैं। समुद्र के बढ़े हुए जलस्तर से शहर डूब सकते हैं। कई बीमारियाँ फैल सकती हैं। इसके लिए पेरिस जलवायु समझौते में वैश्विक औसत तापमान वृद्धि को 1.5 डिग्री तक कम करने का लक्ष्य दुनिया भर के कई देशों ने लिया था। हालाँकि, फिर भी बढ़ते ग्लोबल वार्मिंग में ये लक्ष्य हासिल करना मुश्किल लग रहा है।

सूरज की रोशनी घटाने का विचार

विज्ञान के शोध और आविष्कार को प्रकाशित करने वाली अंतर्राष्ट्रीय पत्रिका नेचर में 2014 में एक अध्ययन प्रकाशित हुआ था। इसमें बताया गया कि 2014 में आइसलैंड में एक ज्वालामुखी विस्फोट हुआ जिससे बड़ी मात्रा में सल्फर डाइऑक्साइड के कण हवा में पहुँचे। इससे बादलों में एक चमक देखी गई और पृथ्वी का तापमान भी कम हुआ।

लंदन स्थित इंपीरियल कॉलेज के सेबेस्टियन ईस्थम ने बताया, “विमान यात्रा के दौरान निकलने वाले जेट ईंधन में मौजूद सल्फर स्ट्रेटोस्फेयर (समताप मंडल) तक जाता है। सल्फर में कूलिंग इफेक्ट पहले से ही होते हैं तो इसका हम सही तरह से उपयोग कर सकते हैं।”

ये वैज्ञानिक तकनीक आ सकती है काम

इस प्रयोग के लिए वैज्ञानिक जियोइंजीनियरिंग की एक तकनीक स्ट्रेटोस्फेरिक एयरोसोल इंजेक्शन (SAI) की प्रक्रिया का उपयोग करेंगे। इस प्रक्रिया में हवाई जहाज के एक समूह से सल्फर या कैल्शियम कार्बोनेट के कण (एयरोसोल कणों) को स्ट्रैटोस्फेयर में छिड़का जाता है। इससे सूर्य की किरणें अंतरिक्ष की ओर परावर्तित हो जाती हैं। इससे पृथ्वी का वातावरण ठंडा हो जाता है।

जियोइंजीनयरिंग की दूसरी तकनीक मरीन क्लाउड ब्राइटनिंग है। इस प्रक्रिया में समुद्र के पानी से निकला वो नमक जिसको खाने लायक नहीं बनाया जा सकता, उसे बादलों में छिड़का जाता है। इससे बादल चमकदार बनते हैं जो सूर्य की किरणों को अंतरिक्ष में वापस भेजने में अपनी भूमिका निभाते हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सूर्य की रोशनी करने का ये प्रयोग सफल होता है, तो आगामी 10 वर्षों के भीतर इसे बड़े पैमाने पर लागू किया जा सकता है।

प्रयोग में कई खतरे भी

जियोइंजीनियरिंग तकनीक को लेकर वैज्ञानिकों में मतभेद है। कृत्रिम रूप से जलवायु को बदलने का प्रयास करने वाली इस तकनीक पर कई विशेषज्ञों का कहना है कि यह उत्सर्जन को कम करने के प्रयासों से सिर्फ ध्यान भटकाने का एक कदम है। पृथ्वी पर उत्सर्जन जस का तस ही है।

मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर माइल्स एलन का कहना है कि इस प्रयोग को शुरू तो आसानी से किया जा सकता है लेकिन प्रयोग का सुरक्षित होना एक अलग मसला है जिसमें दशकों लग सकते हैं। उन्होंने बताया है कि इसके अलावा अगर ये प्रयोग एकदम से रोका जाता है तो पृथ्वी का तापमान अचानक 4 से 6 गुणा तक बढ़ जाएगा।

उनके अनुसार, ये धरती के लिए ग्लोबल वार्मिंग से कहीं अधिक नुकसानदायक सिद्ध होगा।

वैज्ञानिकों ने चेताया

इस तकनीक का प्रयोग ना करने के लिए 60 वैज्ञानिकों के एक समूह ने एक खुला पत्र लिखा है। उन्होंने कहा है कि एयरोसोल और पर्यावरण के बीच सामंजस्य स्थापित नहीं होता तो पृथ्वी पर प्राकृतिक आपदाएं बढ़ सकती हैं। ओजोन परत को नुकसान हो सकता है।

सूर्य की किरणें कमजोर हो सकती हैं तो प्रकाश संश्लेषण में कमी आ सकती है। इससे फसलों और प्रकृति को नुकसान होगा। कुल मिलाकर वैज्ञानिकों का कहना है कि यह तकनीक रासायनिक हथियार के बराबर ही खतरनाक है।

निष्कर्ष

एक तरफ लगातार बढ़ते तापमान से हर कोई परेशान है तो इसे कम करने के वैज्ञानिक शोध को बढ़ावा मिलना स्वाभाविक है। लोग ग्लोबल वार्मिंग से राहत तो चाहते हैं लेकिन संसाधनों का दोहन बंद नहीं करना चाहते। वहीं दूसरी ओर वैज्ञानिकों के समूह का कहना है कि इस तरह के प्रयोग को धरातल पर लाने से पहले गहन पड़ताल जरूरी है क्योंकि ये विनाश का कारण भी बन सकता है।

अंग्रेजों ने 208 साल पहले चुराई थी मराठा योद्धा की सोना जड़ित तलवार, अब उसे लंदन से वापस भारत ला रही BJP सरकार: महाराष्ट्र CM ने किया ऐलान, जानें कौन थे ‘राजे रघुजी भोसले’

जब अंग्रेजों ने भारत में लूटपाट मचाई थी तब उन्होंने मराठा साम्राज्य के नागपुर खजाने से कई ऐतिहासिक वस्तुएँ लूट ली थीं। इन्हीं में से एक थी मराठा सेनापति राजे रघुजी भोसले की लोकप्रिय ‘रघुजी तलवार’। अब इसे वापस भारत लाया जा रहा है। हाल ही में महाराष्ट्र की बीजेपी सरकार ने तलवार को 47.15 लाख रुपये में नीलामी के दौरान खरीदा।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस ने तलवार को खरीदने की जानकारी दी। उन्होंने एक्स पर रघुजी तलवार की फोटो शेयर करते हुए मराठा विरासत के लिए अहम बताया। उन्होंने लिखा, “मुझे यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि राज्य सरकार ने नागपुर के भोसले परिवार के संस्थापक राजे रघुजी भोसले की ऐतिहासिक तलवार खरीद ली है, जिसकी लंदन में नीलामी हुई थी। इस प्रकार, हमारे मराठा साम्राज्य का एक मूल्यवान और ऐतिहासिक खजाना अब महाराष्ट्र में आएगा।”

लंदन के एक बिचौलिए से खरीदी तलवार

महाराष्ट्र सरकार ने रघुजी तलवार को लंदन से एक बिचौलिए से खरीदा है। सीएम ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि इसे सीधे नीलामी में खरीदने में कुछ तकनीकी समस्याएँ आ रही थी। राज्य के सांस्कृतिक कार्य मंत्री आशीष शेलार, सांस्कृतिक कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव और मुख्यमंत्री कार्यालय के अधिकारी विकास खड़गे ने इस कार्य को तेजी से पूरा किया। राज्य सरकार तलवार के लिए 47.15 लाख रुपये की नीलामी रकम का भुगतान करेगी। इसके बाद तलवार को महाराष्ट्र लाया जाएगा।

नीलामी आयोजित करने वाली सोथबी ने अपने पोर्टल पर रघुजी तलवार से जुड़ी सूचना साझा की। इसके अनुसार बाल्केट-हाल्ट तलवार 38,100 पाउंड में बेची गई है। नीलामी से पहले 6 हजार से 8 हजार पाउंड के बीच अनुमान लगाया गया था।

तलवार पर सोने का महीन

राजे रघुजी भोसले की यह तलवार मराठा शैली की ‘फिरंग’ किस्म की है। जो मराठा काल में काफी प्रसिद्ध थी। तलवार में एक तरफ ही धार है, जिसकी ब्लेड यूरोप में निर्मित हैं लेकिन तलवार पर भारतीय कलाकारी की झलक है। तलवार की हिल्ट (हाथ पकड़ने वाला हिस्सा) पारंपरिक ‘बास्केट स्टाइल’ में है, जिस पर सोने का महीन काम किया गया है। तलवार पर ‘श्रीमंत रघोजी भोसले सेना साहेब सुभा’ लिखा है।

इतिहासकारों के अनुसार, जब 1817 में ईस्ट इंडिया कंपनी ने नागपुर का खजाना लूटा था। तभी यह तलवार भी अंग्रेजों के हाथ लगी थी। भारत से लौटते वक्त अपने साथ लंदन ले गए और अब तक वहीं किसी निजी संग्रह में इसे रखा गया था।

कौन थे रघुजी भोसले ?

रघुजी भोसले मराठा सम्राट छत्रपति शाहू महाराज के शासनकाल में एक प्रमुख सेनानायक थे। उनकी युद्ध नीति, साहस और नेतृत्व से प्रभावित होकर शाहू महाराज ने उन्हें ‘सेना साहेब सुभा’ की उपाधि दी थी। रघुजी भोसले ने 1745 में बंगाल के नवाबों के खिलाफ युद्ध अभियान का नेतृत्व किया। उन्होंने न केवल बंगाल और ओडिशा को मराठा साम्राज्य में शामिल किया। बल्कि दक्षिण भारत में भी अपनी राजनीतिक और सैन्य पकड़ मजबूत की।

पहलगाम में हिंदुओं की हत्या करवाने के बाद साइबर अटैक पर उतरा पाकिस्तान, लेकिन रहा नाकाम: देर रात LOC पर की हिमाकत तो भारतीय सेना ने दिया मुँहतोड़ जवाब

पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान के सर पर भारत का खतरा मंडरा रहा है। हमले से बचने के लिए पाकिस्तान हर संभव प्रयास कर रहा है। इस बीच पाकिस्तान की एक नापाक कोशिश सामने आई है। पाकिस्तानी हैकर भारत के साइबर सिक्योरिटी को हैक करने की कोशिश कर रहे हैं हालाँकि ये वार भी खाली गया है।

जानकारी के अनुसार IOK हैकर यानि ‘इंटरनेट ऑफ़ खिलाफ़ा’ नामक समूह भारत की ऑनलाइन सेवाओं को रोकने और पर्सनल इंफोर्मेशन चुराने का काम कर रही थी। जिसके बाद भारतीय साइबर सुरक्षा प्रणाली को पाकिस्तान की इस नापाक हरकत की भनक लगी और ये हमला समय रहते विफल कर दिया गया।

इसके अलावा भारत की साइबर सुरक्षा प्रणाली को आर्मी वेलफेयर हाउसिंग ऑर्गनाइजेशन (AWHO) के डेटाबेस चुराने की जानकारी मिली। इसके अलावा भारतीय वायु सेना प्लेसमेंट संगठन पोर्टल को भी हैक करने का एक साथ प्रयास किया गया। सभी चार साइटों को तुरंत अलग कर दिया गया और कार्रवाई की गई, जिसके चलते समय रहते किसी भी तरह की कोई डेटा चोरी नहीं हो पाई।

शायद पाकिस्तान जानता नहीं है, कि वे कितने भी प्रयास भारत के खिलाफ कर ले, अंत में विफल ही होना है। क्योंकि भारतीय सेना अपनी डिजिटल स्पेस की रक्षा करने के लिए, साइबर सिक्योरिटी को लगातार अपग्रेड करती रहती है और हमेशा अलर्ट रहती है।

पाकिस्तान को हमले का डर

वहीं भारत के एक्शन के बाद पाकिस्तान में हमले के डर का माहौल है। और इसी बीच पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तरार ने बुधवार (30 अप्रैल 2025) को बताया कि उन्हें “विश्वसनीय खुफिया जानकारी” मिली है, कि भारत अगले 24 से 36 घंटों के भीतर सैन्य कार्रवाई कर सकता है।

यह दावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा मंगलवार (29 अप्रैल 2025) को बैठक के बाद किया गया। बैठक में पीएम मोदी ने भारतीय सशस्त्र बलों को पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जवाब देने के लिए खुली छूट दी है।

एक्स (पहले ट्विटर) पर पोस्ट किए गए एक बयान में, तरार ने चेतावनी दी कि किसी भी तरह के हमले का जवाब वे देगा और भारत को ही जवाबदेह ठहराया जाएगा।

तरार ने कहा, “पाकिस्तान के पास विश्वसनीय खुफिया जानकारी है कि भारत पहलगाम की घटना को झूठा बहाना बनाकर अगले 24 से 36 घंटों के भीतर सैन्य हमला करने का इरादा रखता है।”

यह दावा ऐसे समय में आया है जब नियंत्रण रेखा (LoC) पर पहले से ही पाकिस्तानी सेना द्वारा गोलीबारी की जा रही है और भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के बाद कश्मीर घाटी में आतंकवाद विरोधी अभियानों को तेज कर दिया है।

पहलगाम आतंकी हमले के बाद LOC पर गोलीबारी

22 अप्रैल 2025 को हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद पाकिस्तानी सेना नियंत्रण रेखा (LOC) पर उकसावे के लिए छोटे हथियारों से गोलीबारी कर रही है, जिसका जवाब भी पाकिस्तानी सेना को प्रभावी ढंग से दिया जा रहा है। 29-30 अप्रैल 2025 की रात पाकिस्तानी सेना की ओर से कश्मीर के नौशेरा, सुंदरबनी और अखनूर सेक्टरों में फिर से गोलीबारी की गई, जिसका भारतीय सेना ने मुँहतोड़ जवाब दिया।

भारतीय सेना ने 28-29 अप्रैल 2025 की रात को भी कुपवाड़ा और बारामूला जिलों के विपरीत क्षेत्रों के साथ-साथ जम्मू और कश्मीर के अखनूर सेक्टर में नियंत्रण रेखा (LoC) के पार पाकिस्तान सेना द्वारा फिर से गोलीबारी कर उकसाने की प्रक्रिया को विफल कर दिया।

भारतीय सेना के अनुसार, भारतीय सैनिकों ने पाकिस्तानी सेना द्वारा बिना उकसावे के की गई गोलीबारी का तेजी से और प्रभावी ढंग से जवाब दिया। 25-26 अप्रैल 2025 की रात को भी पाकिस्तानी सेना द्वारा की गई गोलीबारी के बाद भारत के जवाब का लगातार पाँचवाँ दिन है।

इससे पहले भी भारतीय सेना ने 27-28 अप्रैल 2025 की रात को कुपवाड़ा और पुंछ जिलों के विपरीत क्षेत्रों में LoC के पास पाकिस्तान सेना की गोलीबारी का मुँहतोड़ जवाब दिया था।

अपने तरीके से जवाब देने को स्वतंत्र है भारत, उसे आत्मरक्षा का पूरा अधिकार: इजरायल का खुला समर्थन, पहलगाम आतंकी हमले को 7 अक्टूबर के हमास अटैक जैसा बताया

पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने भारत के प्रति अपना पूरा समर्थन जताया। यह भारत में पुलवामा हमले के बाद सबसे बड़ा आतंकी हमला था। अजार ने साफ तौर पर कहा कि इजरायल भारत के आत्मरक्षा के अधिकार का समर्थन करता है और भारत की संप्रभुता का सम्मान करता है।

न्यूज चैनल WION के साथ बातचीत में रुवेन अजार ने पहलगाम हमले की तुलना 7 अक्टूबर 2023 को इजरायल में हमास के हमले से की। उन्होंने कहा, “इस हमले का तरीका, लोगों को सिर में गोली मारना, धर्म के आधार पर निशाना बनाना, और छुट्टियाँ मना रहे आम लोगों को मारना, बिल्कुल वैसा ही है जैसा हमने इजरायल में देखा। वहाँ लोग म्यूजिक फेस्टिवल में थे, अपने घरों में सो रहे थे, तभी आतंकियों ने उन्हें मार डाला, लूटा और जलाया।”

उन्होंने इस हमले को आतंकवाद की वैश्विक समस्या का हिस्सा बताया और कहा कि भारत और इजरायल दोनों एक ही तरह के दर्द से गुजर रहे हैं। उन्होंने भारत के साथ एकजुटता दिखाते हुए कहा, “हम भारत के आत्मरक्षा के हक को पूरी तरह समर्थन देते हैं। यह हक संयुक्त राष्ट्र के चार्टर में भी दर्ज है। भारत को कोई सलाह देने की जरूरत नहीं, वह खुद जानता है कि उसे क्या करना है।” हमले के तुरंत बाद इजरायल ने भारत के प्रति संवेदना जताई और हर तरह की मदद की पेशकश की।

रुवेन अजार ने बताया कि उन्होंने भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर से मुलाकात की और कहा, “हमने संवेदना के साथ-साथ हर तरह की मदद का भरोसा दिया। भारत के पास पहले से ही बहुत कुछ है, लेकिन हम खुफिया जानकारी, तकनीक, और आतंकवाद से निपटने के तरीकों में सहयोग को और बढ़ाने को तैयार हैं।” बता दें कि भारत और इजरायल के बीच पहले से चले आ रहे गहरे रिश्ते की बात की और कहा कि यह सहयोग सिर्फ संकट के समय नहीं, बल्कि हर दिन होता है। वैसे, हम आपको याद दिला दें कि कारगिल युद्ध के दौरान, जब अमेरिका ने मदद से इनकार कर दिया था, तब इजरायल ने भारत का साथ दिया था।

इजारयली राजदूर रुवेन अजार ने भारत की भौगोलिक और मौसमी चुनौतियों का जिक्र किया और कहा कि इजरायल भारत से बहुत कुछ सीख सकता है, खासकर इतने बड़े देश में आतंकवाद से निपटने के तरीकों से। उन्होंने कहा, “भारत को विशाल इलाकों और मुश्किल मौसम में काम करना पड़ता है, यह हमारे लिए सीखने की बात है। वहीं, इजरायल के पास कुछ अलग अनुभव हैं, जैसे आतंकियों द्वारा बनाई गई सुरंगों से निपटना या मजहबी उन्माह में बौखलाए आतंकियों को रोकना।” उन्होंने इन अनुभवों को साझा करने की बात कही, ताकि दोनों देश एक-दूसरे की मदद कर सकें।

आतंकवादी संगठनों के बीच वैश्विक साठगांठ पर चिंता जताते हुए अजार ने कहा कि हाल ही में हमास की पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में मौजूदगी को भारत और इजरायल दोनों ने गंभीरता से लिया। उन्होंने कहा, “आतंकी संगठन एक-दूसरे से प्रेरणा लेते हैं, ट्रेनिंग देते हैं, और मजहबी उन्माद फैलाते हैं। हमास ने 7 अक्टूबर को जो बर्बरता की, उसे वह अपने समर्थकों को दिखा रहा था, ताकि अपने दुश्मनों में डर पैदा कर सके। यही चिंता की बात है।” उन्होंने पहलगाम हमले को भी इसी तरह की रणनीति का हिस्सा बताया, जहाँ आतंकियों ने छुट्टियाँ मना रहे लोगों को निशाना बनाया।

पाकिस्तान के ‘स्वतंत्र जाँच’ के प्रस्ताव को अजार ने पूरी तरह खारिज किया। उन्होंने इसे ‘धोखा’ करार देते हुए कहा, “एक तरफ आतंकियों को पनाह देना और दूसरी तरफ जाँच की बात करना, यह दोहरा चरित्र है।” उन्होंने मुंबई 26/11 और पठानकोट हमलों का जिक्र किया, जब भारत ने पाकिस्तान को सबूत दिए, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने कहा, “पाकिस्तान का यह प्रस्ताव सिर्फ दुनिया को भ्रमित करने की कोशिश है।” भारत की कूटनीतिक कार्रवाइयों की तारीफ करते हुए उन्होंने कहा कि भारत अपने क्षेत्र और पड़ोसी देशों की स्थिति को अच्छे से समझता है और उसे कोई सलाह देने की जरूरत नहीं।

रुवेन अजार ने आतंकवाद को एक वैश्विक समस्या बताते हुए अंतरराष्ट्रीय सहयोग की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने भारत द्वारा कुछ YouTube चैनलों पर बैन लगाने जैसे कदमों की सराहना की और कहा कि ऐसी कंपनियों को सजा मिलनी चाहिए जो आतंकियों को अपने प्लेटफॉर्म इस्तेमाल करने देती हैं। उन्होंने आतंकवाद को पैसा और पनाह देने वाले देशों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की वकालत की। उन्होंने कहा, “सीरिया, लेबनान, ईरान जैसे देशों को सजा मिली है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र इस दिशा में कुछ खास नहीं कर रहा। भारत और इजरायल जैसे देशों को मिलकर काम करना होगा।”

पहलगाम हमले को इजरायल के राजदूत रुवेन अजार ने इस क्षेत्र के लिए एक बड़ा मोड़ बताया, जैसा कि हमास का हमला उनके क्षेत्र के लिए था। उन्होंने कहा, “यह हमला इसलिए खास है क्योंकि आतंकियों ने छुट्टियाँ मना रहे लोगों को निशाना बनाया, ताकि उस इलाके में डर फैल जाए।” उन्होंने उम्मीद जताई कि यह घटना दुनिया को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट करेगी। उन्होंने कहा, “आतंकवाद अब सिर्फ किसी एक देश की समस्या नहीं। यूरोप, अमेरिका, भारत, इजरायल हर जगह लोग धर्म के नाम पर मारे जा रहे हैं। हमें इसे रोकने के लिए साथ मिलकर काम करना होगा।”

इस इंटरव्यू के आखिर में रुवेन अजार ने भारत के आत्मरक्षा के हक को फिर से दोहराया और कहा, “हम भारत के साथ खड़े हैं। भारत को जो करना है, वह उसकी अपनी मर्जी है, लेकिन हम उसका पूरा समर्थन करते हैं।”

सेना को खूली छूट, PM मोदी ने कहा- कब-कहाँ-कैसे लेना है एक्शन तय करिए: पहलगाम आतंकी हमले के बाद तीनों आर्मी चीफ संग की बैठक, NSA-CDS-रक्षा मंत्री भी थे मौजूद

जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पूरे देश को झकझोर दिया। आतंकियों ने हिंदू पर्यटकों को निशाना बनाया, जिसके बाद देश में गुस्सा और आक्रोश फैल गया। भारत सरकार ने इस हमले का जवाब देने के लिए तुरंत कड़े कदम उठाए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सेना को खुली छूट दे दी है।

प्रधानमंत्री आवास पर सोमवार और मंगलवार (28-29 अप्रैल 2025) को दो हाई-लेवल बैठकें हुईं। इनमें रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह, राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल, चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान, थलसेना प्रमुख जनरल उपेंद्र द्विवेदी, नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश के त्रिपाठी और वायुसेना प्रमुख अमर प्रीत सिंह शामिल रहे। करीब 90 मिनट तक चली इन बैठकों में पहलगाम हमले के बाद की सुरक्षा स्थिति, आतंकियों के खिलाफ चल रहे ऑपरेशनों और भविष्य की रणनीति पर गहन चर्चा हुई।

पीएम मोदी ने कहा, “आतंकवाद का समूल नाश करना हमारी राष्ट्रीय प्रतिबद्धता है।” उन्होंने सेना की पेशेवर क्षमताओं पर भरोसा जताते हुए जवाबी कार्रवाई के तरीके, समय और लक्ष्य तय करने का पूरा अधिकार सशस्त्र बलों को सौंप दिया।

इससे पहले, सोमवार (28 अप्रैल 2025) को पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा मोहम्मद आसिफ ने डर जताया था कि पहलगाम हमले के पलटवार में भारत पाकिस्तान पर कभी भी हमला कर सकता है। आसिफ ने रॉयटर्स से कहा था कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत सैन्य हमला कर सकता है। ऐसे में पाकिस्तान ने अपनी सेना को मजबूत किया है और सैन्य हमले की आशंका में रणनीतिक फैसले लिए हैं। आसिफ ने कहा कि पाकिस्तान हाई अलर्ट पर है और वजूद का खतरा होने पर पाकिस्तान परमाणु हथियारों का भी इस्तेमाल कर सकता है।

बता दें कि पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत सरकार (Government of India) ने कूटनीतिक और आर्थिक मोर्चे पर भी सख्त कदम उठाए थे। सिंधु जल संधि को निलंबित कर दिया गया, अटारी सीमा (Atari Border) को तत्काल बंद किया गया, पाकिस्तानी नागरिकों के वीजा रद्द किए गए और पाक उच्चायोग के रक्षा, वायु और नौसेना अताशे को एक हफ्ते में भारत छोड़ने का आदेश दे दिया। इस आदेश के बाद पाकिस्तानियों के भारत से वापस लौटने की भीड़ बढ़ गई, तो देश के अलग-अलग हिस्सों में उनकी धरपकड़ भी तेज हो गई।

मुस्लिम दुकानदारों के साथ कारोबार जारी रखेगा बाँके बिहारी मंदिर, पहलगाम अटैक के बाद बहिष्कार की हो रही थी माँग: पुजारियों ने बताया ‘अव्यावहारिक’

वृंदावन के मशहूर बाँके बिहारी मंदिर ने मुस्लिम समुदाय के साथ व्यापार बंद करने की माँग को साफ तौर पर ठुकरा दिया है। मंदिर के पुजारी और प्रबंध समिति के सदस्य ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने इस माँग को व्यवहारिक रूप से गलत बताया। उन्होंने कहा कि वृंदावन में हिंदू और मुस्लिम बरसों से शांति और भाईचारे के साथ रहते हैं।

दरअसल, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद कुछ हिंदू संगठनों ने वृंदावन और मथुरा में प्रदर्शन किए। इन संगठनों ने हिंदू तीर्थयात्रियों और दुकानदारों से मुस्लिम समुदाय के साथ लेन-देन न करने की अपील की। साथ ही, मुस्लिम दुकानदारों से कहा गया कि वे अपनी दुकानों पर मालिक का नाम लिखें, ताकि उनकी पहचान हो सके।

काशी विद्वत परिषद के सदस्य नागेंद्र महाराज ने कहा था, “हमने मुस्लिम दुकानों की पहचान कर ली है। हिंदू दुकानदारों से कहा गया है कि वे उनके साथ व्यापार न करें और न ही उस समुदाय के लोगों को नौकरी दें।”

मुस्लिमों की बाँके बिहारी में आस्था

लेकिन मंदिर प्रशासन ने इस माँग को खारिज कर दिया। मंदिर के पुजारी और प्रबंधन समिति के सदस्य ज्ञानेंद्र किशोर गोस्वामी ने सोमवार (28 अप्रैल 2025) को बयान दिया, “यह माँग व्यवहारिक नहीं है। मुस्लिम कारीगर और बुनकर यहाँ बाँके बिहारी के लिए वस्त्र बुनते हैं। कई मुस्लिम भक्त भी मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं।” उन्होंने बताया कि भगवान के लिए मुकुट और चूड़ियाँ जैसे सामान भी मुस्लिम कारीगर बनाते हैं। गोस्वामी ने कहा कि ज्यादातर स्थानीय लोग भी मानते हैं कि मंदिर में सभी समुदायों का योगदान बना रहना चाहिए।

पहलगाम हमले पर बोलते हुए उन्होंने कहा, “हमले के दोषियों को सख्त सजा मिलनी चाहिए। हम सरकार के साथ हैं। लेकिन वृंदावन में हिंदू और मुस्लिम शांति से रहते हैं।”

बता दें कि पिछले महीने भी मंदिर प्रशासन ने एक प्रस्ताव खारिज किया था, जिसमें मुस्लिम बुनकरों के बनाए भगवान कृष्ण के वस्त्रों पर रोक की बात थी। उस समय मंदिर ने कहा था कि वस्त्रों की पवित्रता और शुद्धता सबसे जरूरी है। अगर मुस्लिम कारीगर आस्था के साथ वस्त्र बनाते हैं, तो उनके वस्त्र लेने में कोई परेशानी नहीं है।

जस्टिन ट्रूडो के जाते ही कनाडा की जनता ने बाँध दिया खालिस्तानियों का बोरिया-बिस्तर: जगमीत सिंह खुद चुनाव हारे, पार्टी राष्ट्रीय दर्जा बचाने में रही नाकाम

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की लिबरल पार्टी ने सोमवार को संघीय चुनाव में जीत हासिल की है। वहीं पियरे पोलिएवरे की कंजर्वेटिव पार्टी ने हार स्वीकार कर ली है। चुनाव के नतीजों से सबसे बड़ी बात ये रही कि लिबरल पार्टी जो कुछ महीने पहले तक प्रधानमंत्री रहे जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में भारी हार का सामना कर रही थी, उसने जीत हासिल की है।

इस चुनाव में खालिस्तानी नेता जगमीत सिंह की पार्टी एनडीपी को करारी शिकस्त मिली है। न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी के नेता जगमीत सिंह भी खुद ब्रिटिश कोलंबिया के बर्नाबी सेंट्रल से चुनाव हार गया है। इतना ही नहीं उसकी न्यू डेमोक्रेटिक पार्टी का नेशनल पार्टी का दर्जा भी छिन गया है। राष्ट्रीय पार्टी के लिए कम से कम 12 सीटों की जरूरत थी लेकिन उसे सिर्फ 7 सीटें हासिल हुई हैं। करारी हार का जिम्मा उठाते हुए जगमीत सिंह ने पार्टी अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया है। जगमीत सिंह पिछले 8 सालों से पार्टी प्रमुख था।

हार स्वीकार करते हुए जगमीत सिंह ने कहा, ” मैं निराश हूँ कि हम ज्यादा सीटें नहीं जीत सके लेकिन हमारी पार्टी को लेकर मैं आशावादी हूँ। “

हालाँकि जगमीत सिंह की पार्टी की करारी हार को कनाडा में खालिस्तानियों को करारा झटका के तौर पर देखा जा रहा है। उसकी हार से भारत और कनाडा के बीच राजनयिक और व्यापारिक संबंधों को फिर से स्थापित करने में मदद मिलेगी। हाल के वर्षों में जगमीत सिंह और पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो की गठजोड़ ने भारत के साथ कूटनीतिक रिश्ते खराब किए। इनलोगों ने आतंकवादी हरदीप निज्जर की हत्या में भारत के शामिल होने का आरोप भी लगाया। यही नहीं प्रधानमंत्री ट्रूडो ने 2020 में भारत में किसान आंदोलन के पक्ष में बयान दिया था। ऐसा करने वाले वो दुनिया के एकमात्र नेता थे। भारत ने ट्रूडो प्रशासन पर खालिस्तानियों के प्रति नरम रूख अपनाने का आरोप भी लगाया था। अब नए हालात में भारत-कनाडा के रिश्ते में सुधार हो सकता है। पीएम मोदी ने कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी को जीत की बधाई दी है।

कनाडा चुनाव के नतीजों को ट्रंप की नीतियों से प्रभावित भी माना जा रहा है। देश के पब्लिक ब्रॉडकास्टर सीबीसी के मुताबिक लिबरल पार्टी की यह वापसी राष्ट्रपति ट्रम्प की टैरिफ नीतियों और कनाडा पर हमलों के कारण हुई है क्योंकि कुछ दिनों पहले तक पूर्व प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो के नेतृत्व में पार्टी भारी हार का सामना कर रही थी। अपने विजय भाषण में भी कार्नी ने अमेरिका की आलोचना की है।

उन्होंने कहा, ” हम अमेरिकी विश्वासघात के सदमे से उबर चुके हैं, लेकिन हमें सबक कभी नहीं भूलना चाहिए। जैसा कि मैं महीनों से चेतावनी दे रहा हूं, अमेरिका हमारी जमीन, हमारे संसाधन, हमारा पानी, हमारा देश चाहता है। ये बेकार की धमकियाँ नहीं हैं। राष्ट्रपति ट्रम्प हमें तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं ताकि अमेरिका हम पर कब्ज़ा कर सके। ऐसा कभी नहीं होगा। लेकिन हमें इस वास्तविकता को भी पहचानना चाहिए कि हमारी दुनिया मौलिक रूप से बदल गई है।”

बांग्लादेश में हिंदू मंदिर तोड़ा, 200 साल पुराने श्मशान को ‘पशु बाजार’ में बदलने की साजिश: भेद खुला तो अधिकारी बोले- भूल से गिर गया पिलर

बांग्लादेश में हिंदुओं के निर्माणाधीन मंदिर और 200 साल पुराने श्मशान को नष्ट किया जा रहा है, ताकि उसे ‘पशु बाजार’ बनाया जा सके। ये मामला मैमनसिंह जिले के उचाखिला यूनियन का है, जहाँ रविवार (27 अप्रैल 2025) को हिंदुओं ने मंदिर में तोड़फोड़ और 200 साल पुराने श्मशान को ‘पशु बाजार’ में बदलने के प्रयासों के खिलाफ कड़ा विरोध प्रदर्शन किया।

जानकारी के अनुसार, हिंदुओं का आरोप है कि ईश्वरगंज उपजिला के निर्बाही अधिकारी (UNO) मोहम्मद एरशादुल अहमद हिंदू मंदिर और श्मशान को जबरन ध्वस्त करवा रहा है, ताकि वो वहाँ पर पशु बाजार बना रहे।

स्थानीय हिंदू नेता पिंटू चौधरी ने बताया कि उचाखिला यूनियन का श्मशान करीब 200 साल पुराना है और इसके समीप ही एक मंदिर का निर्माण कार्य प्रगति पर था। पिंटू चौधरी ने बताया कि UNO ने शनिवार (26 अप्रैल 2025) को मंदिर को गिराने का आदेश जारी कर दिया और श्मशान को किसी अन्य स्थान पर स्थानांतरित करने की घोषणा भी कर दी है।

हिंदू नेता पिंटू चौधरी ने कहा, “यह श्मशान और मंदिर हमारी आस्था का प्रतीक हैं और इन्हें किसी भी कीमत पर स्थानांतरित नहीं किया जा सकता। सनातन धर्म के अनुयायी इस घटना से अत्यंत क्रोधित हैं और इसीलिए सड़कों पर उतरकर अपना विरोध जता रहे हैं।”

एक अन्य स्थानीय हिंदू नेता परेश साहा ने बताया कि एक इस्लामी ग्रुप हिंदुओं को इलाके से भगाने के लिए धमका रहा है, लेकिन उसके खिलाफ सरकार कोई कार्रवाई नहीं कर रही। परेश साहा ने यह भी आरोप लगाया कि श्मशान भूमि को पशु बाजार बनाने के उद्देश्य से रेत से भरा जा रहा है। इसके अलावा शनिवार (26 अप्रैल 2025) को मंदिर के खंभों को भी तोड़ डाला।

बांग्लादेश पूजा उदजापन फ्रंट के सचिव बिजोय मित्रा शुवो ने बताया कि विध्वंस को रोकने के लिए हिंदुओं द्वारा पहले ही जानकारी दे दी गई थी, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन की ओर से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। हालाँकि, यूएनओ मोहम्मद एरशादुल अहमद ने इस पूरी घटना को मामूली बताने की कोशिश की और कहा कि मंदिर के खंभों का गिरना ‘अनजाने में’ हुआ है।

एक तरफ प्रशासन इसे गिरा रहा है, तो दूसरी तरफ मुस्लिम संगठन मामले से जुड़ी खबरों को दबाने में जुट गए हैं। इस्लामी आंदोलन की ईश्वरगंज उपजिला शाखा, इस घटना को तूल न देने का प्रयास कर रही है। सोमवार (28 अप्रैल 2025) को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने मंदिर और श्मशान के विध्वंस की खबरों को झूठा कहा।

बांग्लादेश में निशाने पर हिंदू

बांग्लादेश में पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के 5 अगस्त 2024 को सत्ता से हटने के बाद से ही हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाएँ लगातार सामने आ रही हैं। ऑपइंडिया इन मामलों की विस्तृत पड़ताल और रिपोर्टिंग करता रहा है।

ढाका के पतन के 3 दिनों के भीतर हिंदू मंदिरों, दुकानों और व्यवसायों पर कम से कम 205 हमले हुए हैं। ऑपइंडिया ने सबसे पहले खुलासा किया था कि कैसे मुस्लिम छात्रों ने 60 हिंदू शिक्षकों, प्रोफेसरों और सरकारी अधिकारियों को उनके पदों से इस्तीफा देने के लिए मजबूर किया।

मानवाधिकार कार्यकर्ता और निर्वासित बांग्लादेशी ब्लॉगर, असद नूर ने हाल ही में खुलासा किया है कि अल्पसंख्यक समुदाय को अब ‘जमात-ए-इस्लामी‘ में शामिल होने के लिए मजबूर किया जा रहा है।

इसके बाद 28 सितंबर 2024 और 1 अक्टूबर 2024 के दौरान को ऋषिपारा बारवारी पूजा मंडप में कुल 4 मूर्तियों को और मणिकादी पालपारा बारवारी पूजा मंडप में 5 हिंदू मूर्तियों को तोड़ा था। फिर 3 अक्टूबर 2024 को, बांग्लादेश के ढाका डिवीजन के किशोरगंज में गोपीनाथ जिउर अखरा दुर्गा पूजा मंडप में 7 हिंदू देवी-देवताओं की मूर्तियों को नष्ट किया गया।

5 नवंबर 2024 को, चटगांव शहर के हजारी गली में हिंदू समुदाय पर पुलिस और कानून प्रवर्तन अधिकारियों ने हमला किया। 29 नवंबर 2024 को, एक हिंसक मुस्लिम भीड़ द्वारा हिंदू अल्पसंख्यकों पर हमला किया और 3 मंदिरों में तोड़फोड़ की। हमला जुम्मे की नमाज खत्म होने के तुरंत बाद हुआ। 30 नवंबर 2024 को, कारवान बाजार से पुलिस ने मुन्नी साहा नामक एक प्रमुख हिंदू पत्रकार को गिरफ्तार किया।

13 दिसंबर 2024 को चरमपंथियों के एक समूह ने महाश्मशान काली माता मंदिर पर हमला किया, 7 देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ी और सोने के आभूषण चुरा लिए। इसके बाद 19 दिसंबर 2024 को, अलाउद्दीन नामक एक मुस्लिम व्यक्ति ने पोलाशकंडा काली मंदिर में एक मूर्ति को तोड़ी। एक अन्य 37 वर्षीय अजहरुल नामक मुस्लिम व्यक्ति ने मैमनसिंह जिले के हलुआघाट उपजिला में कई देवी-देवताओं की मूर्तियों को तोड़ी।

चिनमोय कृष्ण दास प्रभु और उनके सहयोगियों की हालिया गिरफ्तारी, हिंदू संगठन इस्कॉन पर प्रतिबंध लगाने के प्रयास और ‘राजद्रोह’ के मामलों के साथ हिंदू विरोध प्रदर्शनों को दबाना मुहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार द्वारा हिंदुओं के संगठित उत्पीड़न को दिखाता है।