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राजस्थान में 18+ दरिंदों ने 9 दिन तक किया नाबालिग का गैंगरेप: साहिल, शाहरुख़ समेत 20 गिरफ्तार, आरोपितों में 4 नाबालिग भी

राजस्थान में गैंगरेप का एक बड़ा मामला सामने आया है। कोटा की एक नाबालिग लड़की को झालावाड़ ले जाकर उसके साथ सामूहिक बलात्कार किया गया। 18 से भी अधिक दरिंदों ने 9 से भी ज्यादा दिनों तक उसका रेप किया। जब वो दर्द से कराहती थी तो उसे जबरन नशा दे दिया जाता था। नशा लेने से इनकार करने पर उसे बुरी तरह मारा-पीटा जाता था। चाकू दिखा कर धमकाया जाता था। इस वारदात की शुरुआत फरवरी 25, 2021 को हुई।

उस दिन पीड़िता की एक दोस्त और उसका साथी उसे लेकर कोटा के सुकेत से झालावाड़ गए। उसे बैग दिलवाने के बहाने वहाँ ले जाया गया। वहाँ उसे उन 18 दरिंदों के हवाले कर दिया गया, जिन्होंने उसका  घर, होटल, निर्माणाधीन मकान और खेत में कई बार बलात्कार किया। उसे मार्च 5, 2021 को वापस घर छोड़ दिया गया। पीड़िता की विधवा माँ ने अगले ही दिन थाने में जाकर इस मामले की रिपोर्ट दर्ज कराई।

भाई का आरोप है कि परिजन गुमशुदकी की रिपोर्ट दर्ज कराने कई बार थाने गए थे, लेकिन पुलिस ने उन्हें भगा दिया। माँ ने अपराधियों को फाँसी देने की माँग की है। इस मामले में 4 नाबालिग समेत 20 आरोपितों को पकड़ा जा चुका है। रामगंजमंडी के डीएसपी मंजीत सिंह ने इसे घिनौना कृत्य बताते हुए कहा कि बाकी आरोपितों को भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा। उसे झालावाड़ लेकर जाने वालों के नाम बुलबुल और चौथमल हैं।

पीड़िता ने ‘दैनिक भास्कर’ को बताया कि वहाँ पार्क में उसे कुछ लोग मिले, जिनका नाम नब्बू, सोनू (नाबालिग का बदला नाम) और एक था, जिसे बुलबुल उस्ताद बुलाती थी। उनके नाम पीड़िता को बाद में पता चला। नब्बू स्कूटी से उसे रात के समय एक कमरे में ले गया, लेकिन मोहल्ले वालों द्वारा हंगामा मचाने पर उसे वहीं छोड़ कर भाग गया। पीड़िता का आरोप है तब वहाँ की पुलिस ने उसका नाम-पता पूछ कर उसे भगा दिया।

पीड़िता ने बताया कि भागकर पार्क में आई तो वहाँ नब्बू, सोनू और साहिल फिर मिल गए। साहिल मुझे स्कूटी पर बैठाकर गागरोन ले गया, नब्बू और सोनू भी गागरोन आ गए। रात को एक निर्माणाधीन मकान में नब्बू ने रात भर रेप किया। वहाँ कोई एक लँगड़ा व्यक्ति था, जिसने उसे होटल ले जाकर रेप किया। इसके बाद राजा, छोटू और शाहरुख़ ने स्मैक-चिलम पीने के बाद उसका रेप किया। फिर उसे साहिल को सौंप दिया गया।

वहाँ कार से उसे गागरोन ले जाकर फिर गैंगरेप किया गया। इस दौरान उसकी पिटाई भी की गई। वहाँ किसी बिट्टू और चिंटू ने पूरी रात उसकी इज्जत लूटी। बिट्टू के दोनों सालों ने भी रेप किया। सुबह नाना नाम के लड़के ने उसे दिन भर घूमा कर वापस पार्क में छोड़ दिया, जिसके बाद छोटू, फद्दू, सोनू और डीके सहित कई लड़कों ने रेप किया। राजस्थान पुलिस ने बताया कि झालावाड़ में नाबालिग के साथ गैंगरेप के मामले में वो गंभीरता से कार्रवाई कर रही है।

रूस से पढ़ाई, लंदन में नौकरी और UP में ‘धर्मयोद्धा’: कौन हैं वामपंथी मीडिया की नाक में दम करने वाले डासना के महंत

लिबरल गिरोह उनसे परेशान है। वामपंथी मीडिया उन्हें हिन्दुओं की सबसे ‘कर्कश आवाज़’ कहता है। हाल ही में गाजियाबाद के डासना में एक नाबालिग लड़के आसिफ की पिटाई हुई, जिसके बाद दावा किया गया कि वो मंदिर में पानी पीने गया था। हालाँकि, एक व्यक्ति ने इस पूरे नैरेटिव पर तथ्यों से तगड़ा प्रहार किया। डासना में जब जात-पात या आस-पड़ोस की लड़ाई होती है तो एक ही व्यक्ति का समझौता अंतिम माना जाता है, यति नरसिंहानंद सरस्वती का।

53 वर्षीय यति नरसिंहानंद सरस्वती यूँ तो डासना देवी मंदिर के महंत हैं, लेकिन इलाके में हिन्दुओं के लिए अघोषित सरपंच भी। बंदूकों के साए में रहना उनकी मजबूरी भी है क्योंकि उन्हें जान से मारने की धमकियाँ कई वर्षों से मिल रही हैं। जब लखनऊ में कमलेश तिवारी की इस्लामी कट्टरपंथियों ने हत्या कर दी थी, तो पीड़ित परिवार के पक्ष में उनकी आवाज़ उठी थी। उन्होंने भारत से ‘इस्लाम के सफाए’ की बात की थी।

यति नरसिंहानंद सरस्वती रूस से शिक्षित हैं और मॉस्को व लंदन जैसे दुनिया के सबसे बड़े शहरों में कार्य करने के अनुभव उनके पास है। कहा जाता है कि वो कभी समाजवादी पार्टी के नेता हुआ करते थे। सांप्रदायिक दंगे, अपनी सेना का गठन, हेट स्पीच और आर्म्स एक्ट के उन पर आधा दर्जन से भी अधिक केस दर्ज हैं। उन्होंने आतंकी संगठन ISIS के खिलाफ सेना बनाने का ऐलान किया था। वो इस्लाम को धरती से हटाने की बातें करते हैं।

गाजियाबाद के लोग दबी जुबान से कहते हैं कि पुलिस-प्रशासन कई वर्षों से यति नरसिंहानंद सरस्वती व उनके क्रियाकलापों की निगरानी कर रहा है क्योंकि सत्ता की नजर में वो ऐसे व्यक्ति रहे हैं जो कभी भी बड़ी समस्या खड़ा कर सकता है। डासना जैसे मुस्लिम बहुल माने जाने वाले इलाके में किसी हिन्दू महंत का यूँ टिकना सचमुच एक बड़ी कहानी कहता है। वहाँ उनकी अपनी पंचायत लगती है। वो अपनी बैठकें बुलाते हैं।

मुस्लिमों द्वारा जनसंख्या बढ़ाने की साजिशों की बात करते हुए वो अक्सर ऐसे कई भाषण देते हैं, जिसे वहाँ का हिन्दू समाज सुनता भी है। जाति की बात करें तो वो ‘त्यागी’ समुदाय से आते हैं। आपको दिल्ली के ध्रुव त्यागी याद होंगे, जिन्हें अपनी बेटी से छेड़खानी के विरोध की ‘सजा’ मौत के रूप में भुगतनी पड़ी थी। उनकी हत्या के बाद भी महंत यति सरस्वती ने पंचायत बुलाई थी। जब दो हिन्दू समुदाय (यादव और गुर्जर) आपस में लड़ रहे थे, तब उन्होंने ही बीच-बचाव कर समझौता कराया।

दरअसल, यादवों और गुर्जरों के बीच संघर्ष एक रोड रेज की घटना के बाद चालू हुआ था। उस तनाव के कारण जब स्थिति नियंत्रण से बाहर होती जा रही थी, तब महंत सरस्वती ने आगे आकर शांति स्थापित करने के लिए पहल किया। उन्होंने दोनों समुदायों को समझाया था कि वे एक ही माँ के दो हाथ हैं, इसीलिए लड़ना बंद करें। उन्होंने दोनों समुदायों के लोगों को बताया कि कैसे हिन्दुओं की आपसी लड़ाई का फायदा हिंदुत्व-विरोधी ताक़तों को मिलता रहा है।

तब पुलिस ने उनकी गिरफ़्तारी के लिए वॉरंट भी प्राप्त कर लिया था, लेकिन वो इलाहबाद हाईकोर्ट से स्टे ऑर्डर लेने में कामयाब रहे। उनके ही शब्दों में, उन्होंने तत्कालीन ‘मॉस्को इंस्टिट्यूट ऑफ केमिकल मशीन बिल्डिंग’ से मास्टर्स की डिग्री ली है। इसके बाद उन्होंने बतौर इंजिनियर कार्य किया और मार्केटिंग टीम्स का नेतृत्व किया। विदेश में करीब एक दशक गुजारने के बाद वो 1997 में भारत लौटे।

राजनीति का माहौल उन्हें घर में ही मिला। उनके पिता रक्षा मंत्रालय में कार्यरत थे, लेकिन आज़ादी से पहले वो कॉन्ग्रेस के नेता हुआ करते थे। कुछ बड़ा करने के लिए खुद का जन्म हुआ मानने वाले यति नरसिंहानंद सरस्वती ने भीड़ राजनीति में हाथ आजमाने की सोची। भारत लौट कर वो गणित पढ़ाने लगे थे। उनका कहना है कि उन्होंने 1992 में ‘ऑल यूरोप ओलम्पियाड’ में गणित से विजेता घोषित किया गया, इसीलिए गणित उनकी मजबूती है।

यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कुछ यूँ ‘The Quint’ को धोया

उन्होंने एक बार बताया था कि उन्हें तभी सपा के यूथ विंग से ऑफर मिला, जिसके बाद वो पार्टी में शामिल हो गए। 1991 में सांसद बने भाजपा नेता बैकुंठ लाल वर्मा उर्फ़ प्रेम ने उन्हें आगे बढ़ाया और इस्लामी क्रूरता की कहानियाँ सुनाईं। उनका यूट्यूब पेज भी है, जिस पर उनके भाषण अपलोड होते हैं। फेसबुक और ट्विटर पर भी वो सक्रिय हैं। कई स्थानीय हिन्दुओं के इलाज में भी उन्होंने मदद की है। उनका सपना ‘इस्लाम मुक्त भारत’ का है। उनके शिष्य उन्हें ‘धर्मयोद्धा’ भी कहते हैं।

वो ‘अखिल भारतीय संत परिषद्’ के अध्यक्ष हैं और साथ ही ‘हिन्दू स्वाभिमान’ नामक संस्था भी चलाते हैं। हिन्दू युवाओं और बच्चों को आत्मरक्षा के प्रशिक्षण के लिए ‘धर्म सेना’ का भी गठन उन्होंने किया। वो मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को ‘कर्मयोगी’ मानते हैं और कहते हैं कि उन्होंने उत्तर प्रदेश को इस्लामी नरसंहार से बचा लिया। 3 वर्ष पहले गुरुग्राम में खुले में नमाज के विरोध में मुख्यमंत्री आवास के सामने वो अग्नि समाधि लेने पहुँचे थे, लेकिन उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया था।

आसिफ वाली घटना पर भी उन्होंने पूछा कि जब मंदिर के बाहर नल है, सड़क पार करने पर नल है और पास ही स्थित पंचायत भवन में पानी पीने की सार्वजनिक व्यवस्था है, फिर भी वो लड़का मंदिर के भीतर पानी पीने क्यों आया? उन्होंने जानकारी दी कि उनके महंत रहते इस मंदिर में 4 बार डकैती की घटनाएँ हो चुकी हैं। उन्होंने ‘The Quint’ वालों से पूछा कि क्या उन डकैतियों के वक़्त वो लोग यहाँ इंटरव्यू लेने आए?

UP के बाराबंकी में हटाई गई ‘पकरिया पेड़ वाली’ मजार, रात में ही प्रशासन ने समतल कर दी जमीन

उत्तर प्रदेश में सड़क का अतिक्रमण कर बनाए गए धार्मिक स्थानों को हटाने के मामले में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार सख्त नज़र आ रही है। इसी क्रम में बाराबंकी के फतेहपुर कस्बे के मुख्य मार्ग और मुंशीगंज बाजार में सड़क के बीचों-बीच स्थित सालों पुराने ‘पकरिया पेड़ वाली’ मजार को हटा कर कहीं और शिफ्ट कर दिया गया। प्रशासन ने शनिवार (मार्च 13, 2021) की रात ये कार्यवाही की।

इससे पहले वहाँ के स्थानीय लोगों और प्रबुद्ध जनों को भरोसे में लिया गया। उसे बातचीत की गई। ये पूरी प्रक्रिया देर रात की गई, ताकि कोई तनाव न उत्पन्न हो। शिफ्टिंग को लेकर SDM और CO की संयुक्त अध्यक्षता में कोतवाली परिसर में सभासदों, व्यापारियों व गणमान्य नागरिकों के साथ बैठक भी हुई। SDM पंकज सिंह ने बताया कि सरकार द्वारा सार्वजनिक स्थलों व रास्तों से ऐसे स्थान व अतिक्रमण हटाए जाने का निर्देश है।

स्थानीय लोगों ने भी कहा कि क्षेत्र के विकास के लिए मजार और पेड़ को हटा कर कहीं और शिफ्ट किए जाने से उन्हें कोई दिक्कत नहीं है। दरअसल, देवा से महादेवा व तराई क्षेत्रों को जोड़ने वाले मुख्य मार्ग पर पेड़ व मजार होने से इसकी दोनों तरफ सड़क संकरी हो गई थी। 80 साल पुराना पेड़ भी एक तरफ झुक चुका था। इस कारण वहाँ आए दिन ट्रैफिक जाम लगता था और लोगों को आवागमन में दिक्कत होती थी।

पेड़ की टहनियाँ आसपास बने दुकानों और घरों पर फ़ैल गई थीं, जिससे उन्हें नुकसान हो रहा था। इस पेड़ के गिरने से आसपास के मकान ध्वस्त भी हो सकते थे। वन विभाग, पीडब्ल्यूडी व ईओ नगर पंचायत पेड़ की आयु पूरी होने व जनहित में इसे तत्काल हटाने की रिपोर्ट प्रशासन को पहले ही सौंप चुके थे। भारी पुलिस बल की मौजूदगी में मजार को स्थानीय ईदगाह मैदान में रखा गया। वहीं मुस्लिम समाज के कुछ लोगों ने इसका विरोध भी किया।

यूपी में सार्वजनिक सड़कों पर एक जनवरी 2011 या इसके बाद हुए धार्मिक निर्माण हटाए जाएँगे। हाई कोर्ट के आदेश पर गृह विभाग की ओर ये निर्देश जारी किए गए थे। गृह विभाग की ओर से कहा गया है कि अतिक्रमण होने पर संबंधित जिला अधिकारी ही दोषी माना जाएगा। यूपी सरकार का दावा है कि 44 विकास योजनाओं को लागू करके राज्य देश में अग्रणी स्थान पर है। चार वर्षों में प्रदेश की अर्थव्यवस्था 10.90 लाख से बढ़कर 21.73 लाख करोड़ रुपए हो गई है। 

उस महिला के खिलाफ FIR, जिसने लगाया Zomato डिलीवरी बॉय पर मारपीट का आरोप: बॉलीवुड उतरा सपोर्ट में

बेंगलुरु में एक मेकअप आर्टिस्ट महिला हितेशा चन्द्राणी ने फूड डिलीवरी जोमैटो (Zomato) के एक डिलीवरी बॉय कामराज के खिलाफ मारपीट का आरोप लगाया था। इस मामले में कामराज का कहना था कि उस महिला ने खुद ही अपनी नाक तोड़ ली और उलटे उसी ने मारपीट की। अब इस मामले में पुलिस ने महिला के खिलाफ बेंगलुरू एलेक्ट्रॉनिक सिटी पुलिस थाने में FIR दर्ज की है। डिलीवरी बॉय की शिकायत पर ये मामला दर्ज किया गया है।

FIR में हितेशा चंद्राणी पर IPC की धारा-355 (मारपीट), 504 (अपमान) और 506 (आपराधिक धमकी) के तहत आरोप लगे हैं। मॉडल से मेकअप आर्टिस्ट बनीं हितेशा चंद्राणी खुद को सोशल मीडिया पर ‘ब्यूटी एण्ड फैशन इंफ्लुएंसर’ बताती हैं। इस घटना के सामने आने के बाद इंस्टाग्राम पर उनके फॉलोवर्स की संख्या 1.05 लाख पहुँच गई है। वहीं कामराज ने कहा कि वो मामले को और पेचीदा नहीं बनाना चाहते।

उन्होंने सच्चाई की जीत होने की बात करते हुए कहा कि वो कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। कामराज की माँ काफी बीमार रहती हैं। उनके पिता की 15 वर्ष पहले ही मृत्यु हो चुकी है और वो परिवार में अकेले कमाने वाले व्यक्ति हैं। उन्होंने कहा कि वो पिछले 26 महीनों से जोमैटो में कार्य कर रहे हैं और उनकी रेटिंग 4.7 है। हालाँकि, फिलहाल कंपनी ने केस खत्म होने तक उनकी ID बंद कर दी है और आश्वासन दिया है कि मामला सुलझते ही उसे चालू कर दिया जाएगा।

अभिनेत्री परिणीति चोपड़ा ने कामराज का समर्थन किया है। उन्होंने ‘जोमैटो इंडिया’ से निवेदन किया कि वो सच्चाई का पता लगाएँ और सार्वजनिक रूप से इसकी जानकारी दें। उन्होंने कहा कि वो मानती हैं कि वो व्यक्ति निर्दोष है और अगर वो सच में निर्दोष हैं तो झूठा आरोप लगाने वाली महिला को सज़ा दिलवाने में हमारी मदद करें। उन्होंने कहा कि ये अमानवीय, शर्मिंदा करने वाला और दिल तोड़ने वाला है।

परिणीति ने आश्वासन दिया कि अगर उनकी कोई मदद की ज़रूरत पड़ती है तो वो इसके लिए तैयार हैं। वहीं काम्या पंजाबी ने कहा कि कामराज की आँखें ही सच्चाई बयान करती हैं और जोमैटो के उस डिलीवरी बॉय की नौकरी नहीं जानी चाहिए, क्योंकि वो निर्दोष है। अभिनेता रोहित रॉय ने भी उसका समर्थन किया। सोशल मीडिया में भी लोगों ने कहा कि जल्द सच्चाई का पता लगना चाहिए, ताकि किसी को नुकसान न हो।

Zomato के संस्थापक दीपिंदर गोयल ने इस मामले में बयान जारी करते हुए कहा था, “हम कामराज के साथ भी लगातार संपर्क में हैं, यह सुनिश्चित करने के लिए कि कहानी के दोनों पक्ष प्रकाश में आए और निष्पक्षता से इस प्रक्रिया का पालन किया जाए। कामराज अभी तक 5,000 से ज्यादा डिलीवरी कर चुके हैं। उन्हें 5 में से 4.75 रेंटिंग मिले हैं, जो उच्चतम है।” कामराज ने भी इस मामले में मीडिया के सामने अपना पक्ष रखा था।

‘यहाँ नाबालिग करते हैं हत्याएँ, मंदिर में डकैती हुई तो कहाँ थे?’: आसिफ मामले में महंत ने ‘The Quint’ को दिखाया आईना

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के डासना इलाके स्थित एक देवी मंदिर में एक बच्चे की पिटाई का वीडियो वायरल करते हुए दावा किया गया था कि पानी पीने के कारण उसके साथ ऐसा किया गया। लेकिन, स्थानीय लोग कुछ और ही सच्चाई बताते हैं। इस विषय पर अखिल भारतीय संत परिषद के राष्ट्रीय संयोजक और शिव शक्ति धाम डासना के संत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने ‘The Quint’ को इस पूरे मामले पर आईना दिखाया।

दरअसल, मंदिर के बाहर एक बोर्ड लगा है, जिस पर लिखा है कि यहाँ मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित है। यति नरसिंहानंद सरस्वती ने मुस्लिमों की बढ़ती जनसंख्या पर आपत्ति जताते हुए कहा कि इस क्षेत्र में 95% मुस्लिम हैं और हिन्दू मात्र 5% बचे हैं। उन्होंने कहा कि इस मंदिर में आसपास के कई गाँवों के लोगों की श्रद्धा है और बड़ी संख्या में बहू-बेटियाँ दर्शन के लिए आती हैं, जिनके साथ ‘मुस्लिम गुंडे’ छेड़खानी करते हैं।

उन्होंने कहा कि अगर कोई हिन्दू लड़का इस तरह की हरकत करता है तो परिवार उसे डाँटता है और चेतावनी देता है, लेकिन मुस्लिमों के मामले में ऐसा नहीं है और जब उनके युवकों की छेड़खानी की शिकायत लेकर उनके परिजनों के पास विरोध दर्ज कराया जाता था तो मुस्लिम समाज के कई लोग उसके बचाव में आ जाते थे, जिनमें कई बुजुर्ग भी होते थे। उन्होंने बताया कि इन्हीं चीजों से परेशान होकर ‘मुस्लिमों का प्रवेश वर्जित’ वाला बोर्ड लगाया गया।

उन्होंने पूछा कि जब मंदिर के बाहर नल है, सड़क पार करने पर नल है और पास ही स्थित पंचायत भवन में पानी पीने की सार्वजनिक व्यवस्था है, फिर भी वो लड़का मंदिर के भीतर पानी पीने क्यों आया? ‘The Quint’ वालों ने ये पूछ कर यति नरसिंहानंद सरस्वती पर निशाना साधना चाहा कि उस लड़के को पढ़ने-लिखने नहीं आता था और वो बोर्ड पढ़ नहीं पाया। इस पर यति ने पूछा कि 14-15 वर्ष के लड़के को क्या पढ़ना नहीं आता?

उन्होंने कहा कि जब ऐसा तो फिर इतनी बड़ी संख्या में पैदा ही क्यों किए जा रहे हैं? उन्होंने जानकारी दी कि उनके महंत रहते इस मंदिर में 4 बार डकैती की घटनाएँ हो चुकी हैं। उन्होंने ‘The Quint’ वालों से पूछा कि क्या उन डकैतियों के वक़्त वो लोग यहाँ इंटरव्यू लेने आए? उन्होंने बताया कि उनसे पहले यहाँ जितने भी महंत रहे, उन्हें या तो पीट कर भगा दिया गया या मार डाला गया। उन्होंने पूछा कि तब ख़बरें प्रकाशित की गईं क्या?

यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि स्थानीय ही नहीं बल्कि वो दुनिया के सभी मुस्लिमों का यहाँ स्वागत करते हैं, वो आएँ और महादेव व माता के विधि-विधानों के हिसाब से पूजा करें। उन्होंने कहा कि वो अपने मस्जिद में हमें हवन-यज्ञ करने के लिए आमंत्रित करें। लेकिन, साथ ही उन्होंने कहा कि हमारी बहन-बेटियों के साथ छेड़खानी करने के लिए, हिन्दू प्रतिमाओं को अपमानित करने के लिए और उनकी रेकी कर के हत्या की साजिश के लिए कोई आएगा, तो ये बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

उन्होंने बताया कि वो 24 घंटे खतरे में जी रहे हैं क्योंकि PFI से उन्हें धमकियाँ मिलती रहती हैं व स्थानीय मुस्लिमों ने पंचायत कर के उनकी हत्या का फरमान सुनाया है। उन्होंने बताया कि जब उनकी हत्या में वो असफल रहे तो गाजियाबाद के मसूरी थाना क्षेत्र के डासना इलाके में दूधिया पीपल गाँव में भाजपा के स्थानीय मंडल अध्यक्ष बीएस तोमर की हत्या कर दी गई। उन्होंने पूछा कि CCTV कैमरे के सामने, पूरी दुनिया के सामने हुई इस वारदात पर ‘The Quint’ ने कोई वीडियो या डॉक्यूमेंट्री बनाई? उन्होंने कहा:

“मुझे बड़ा दुःख होता है जब आप (‘The Quint’ जैसे मीडिया संस्थान) कुछ घटनाओं को पकड़ कर हिन्दुओं को बदनाम करने के लिए कैमरा लेकर मंदिरों तक पहुँच जाते हैं, लेकिन सच्ची घटनाओं पर कभी ध्यान नहीं देते। आप कहते हैं ये छोटी घटना नहीं है। कौन सा चोर पकड़े जाने के बाद कहता है कि वो चोरी करने आया था? हमें इस परिसर में पत्रकार और सरकारी अधिकारी से लेकर कोई भी व्यक्ति मुस्लिम नहीं चाहिए। इलाके के एक-एक बच्चे को ये पता है। यहाँ आपको जो इतनी बंदूकें दिख रही हैं, वो मुस्लिमों के डर से हैं। हमें एक-एक रुपया भीख से लाना पड़ता है। जान की सुरक्षा के लिए बॉडीगार्ड्स रखने पड़ते हैं। पिछले वर्ष यहाँ के विधायक असलम चौधरी का बेटा मंदिर में लड़की छेड़ रहा था, जिसकी पिटाई हुई थी। वो भी नाबालिग था। तब ‘The Quint’ या ‘The Wire’ आया क्या?”

महंत यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि पुलिस ने दबाव डाल कर समझौता कराया। उन्होंने कहा कि ये सनातन धर्म को मानने वालों का मंदिर है। इसके बाद उन्होंने बताया कि इस मामले में हिरासत में लिए गए आरोपित उनके बच्चे हैं और उनके लिए वो कानूनी लड़ाई लड़ेंगे। उन्होंने कहा कि वो मंदिर के सम्मान, धर्म की रक्षा और हिन्दुओं के लिए अंतिम साँस तक लड़ेंगे। उन्होंने पूछा कि ‘The Quint’ और ‘The Wire’ जैसे चैनल उनके पीछे क्यों पड़े हुए हैं?

उन्होंने कहा कि मीडिया के फर्जी लोग, जिन्हें विदेश से और इस्लामी संस्थाओं से फंडिंग मिलती है, वो बिना मतलब इस मंदिर को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने पूछा कि जब हम तुम्हारे मस्जिदों में नहीं जा रहे और लड़कियों को नहीं छेड़ रहे, फिर हमने तुम्हारा क्या बिगाड़ा है कि हमारे मंदिर को बदनाम कर रहे हो? उन्होंने कहा कि जिसकी पिटाई हुई वो बच्चा नहीं था, डॉक्टर तोमर को भी नाबालिगों ने ही मारा था, यहाँ नाबालिग हत्याएँ करते हैं।

बता दें कि मंदिर के पुजारी ने कहा था कि मुस्लिम बच्चे को गलत तरीके से पीड़ित के तौर पर दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा था कि आसिफ मंदिर में पानी पीने नहीं आया था। ये लोग मंदिर में आकर हिंदू लड़कियों से छेड़खानी करते हैं और मूल्यवान चीजें चोरी कर लेते हैं। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ देखने में बच्चा लगता है, लेकिन उसके अंदर जो पलता है, उसके दिमाग में जो भरा जाता है, वह बच्चों का खेल नहीं है।

‘लड़कियों को छेड़ने आते हैं, देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी करते हैं’: क्या मंदिर में पानी पीने पर हुई आसिफ की पिटाई?

पिछले दिनों सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हुआ था। इस वीडियो के आधार पर दावा किया जा रहा है कि मंदिर में पानी पीने को लेकर आसिफ की पिटाई की गई। वीडियो वायरल होने पर हरकत में आते हुए पुलिस ने आरोपित को 13 मार्च की रात गिरफ्तार कर लिया था।

वायरल वीडियो उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले के डासना इलाके स्थित एक देवी मंदिर का बताया गया। इसके बाद से लिबरल और वामपंथी गिरोह हिंदुओं को उत्पीड़क और मुस्लिमों को पीड़ित के तौर पर पेश करने पर जुटे थे।

लेकिन एक स्थानीय व्यक्ति जो मंदिर का पुजारी भी है, ने पूरी घटना का एक अलग ही पहलू सामने रखा है। एक मीडिया संस्थान के साथ बातचीत में पुजारी ने कहा है कि मुस्लिम बच्चे को गलत तरीके से पीड़ित के तौर पर दिखाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि आसिफ मंदिर में पानी पीने नहीं आया था। ये लोग मंदिर में आकर हिंदू लड़कियों से छेड़खानी करते हैं और मूल्यवान चीजें चोरी कर लेते हैं।

मीडिया आउटलेट जन ज्वार ने पूरे घटनाक्रम को लेकर पीड़ित बताए जा रहे आसिफ और इस पुजारी से बात की है। जन ज्वार से बातचीत में आसिफ ने कहा है कि वह कबाड़ी है। उसने दावा किया है कि घटना वाले दिन जब वह लौट रहा था तो उसे प्यास लगी थी। मंदिर के भीतर जाकर उसने पानी पिया। लौटते वक्त उसकी पिटाई कर दी गई। 

जन ज्वार के साथ आसिफ और मंदिर के पुजारी की पूरी बातचीत आप यहाँ सुन सकते हैं

बातचीत में पुजारी ने इस घटना का एक चौंकाने वाला पहलू सामने रखा। उन्होंने कहा कि वह सिर्फ देखने में बच्चा लगता है, लेकिन उसके अंदर जो पलता है, उसके दिमाग में जो भरा जाता है, वह बच्चों का खेल नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वो बच्चे यहाँ पर आते किसलिए हैं? न तो वो यहाँ पर पूजा करने आते हैं, न पाठ करने आते हैं। वे यहाँ पर सिर्फ लड़कियों को छेड़ने आते हैं। हमारे देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणी और काम करने आते हैं।

उन्होंने इस घटना के बारे में बात करते हुए बताया कि मंदिर के बाहर भी नल लगा हुआ है और अगर किसी को प्यास लगती है तो वो वहाँ पर पानी पिएगा या मंदिर के अंदर 500 मीटर जाएगा? मंदिर के गेट पर भी नल लगा हुआ है, लेकिन वह मंदिर के पीछे मिला। बच्चे यहाँ पर कबाड़ी बनकर आते हैं और हमारा कीमती सामान चुरा कर ले जाते हैं।

पंडित ने सामने के शिवलिंग के बारे में बताते हुए कहा कि उन्होंने इस शिवलिंग के ऊपर बच्चों को कई बार गंदे काम करते हुए पकड़ा है। वे लोग उस पर टॉयलेट करते हैं, थूकते हैं, बकरियों को छोड़ देते हैं। पंडित ने बताया कि उन लोगों से प्रताड़ित होकर ही गेट और बोर्ड लगाया है। बता दें कि बोर्ड पर ‘यहाँ मुसलमानों का प्रवेश वर्जित है’ लिखा है। उन्होंने बताया कि यह बोर्ड 7-8 साल पहले सपा के कार्यकाल में लगा था।

उन्होंने कहा, “कॉलोनी की महिलाएँ और लड़कियाँ यहाँ आती हैं। ये मुस्लिम लड़के आकर छेड़खानी करते हैं। वो लड़का यहाँ पर चोरी करने ही आया था। इनको मदरसे में सिखाया जाता है कि हम इनके दुश्मन हैं। सोचने वाली बात है कि यहाँ पर 50 मस्जिद है, लेकिन वो वहाँ न जाकर मंदिर में क्यों आया? इस मंदिर में पहले भी 4 बार डकैती हो चुकी है। पिटे हैं यहाँ के पुजारी। हम चोरों से अपनी संपत्ति बचा रहे हैं। इस मंदिर से लाखों-करोड़ों की संपत्ति चोरी हो गई है।”

हिंदू पहचान के कारण ऑक्सफोर्ड में निशाना बनी रश्मि सामंत का मसला संसद में उठा, विदेशी मंत्री ने कहा- नस्लवाद से लड़ेंगे

ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में नस्लवाद का मुद्दा सोमवार (मार्च 15 2021) को संसद में उठा। इसके कारण हाल ही में भारतीय छात्रा रश्मि सामंत ने ऑक्सफोर्ड स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष के पद से इस्तीफा दे दिया था।

राज्यसभा में बोलते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, “महात्‍मा गाँधी की जमीन से होने के नाते, हम कभी नस्‍लवाद से आँखें नहीं चुरा सकते। खासतौर से तब जब यह किसी ऐसे देश में हो जहाँ हमारे लोग इतनी ज्‍यादा संख्‍या में रहते हैं। हमारे यूके के साथ मजबूत रिश्‍ते हैं। जरूरत पड़ने पर हम पूरी स्‍पष्‍टता से ऐसे मुद्दे उठाएँगे।”

उन्होंने विश्वास दिलाया कि सरकार ऐसे मामलों की बारीकी से निगरानी करेगी और आवश्यक होने पर संबंधित अधिकारियों के साथ इस मुद्दे को उठाएगी। उन्होंने कहा, “हम हमेशा नस्लवाद और असहिष्णुता के अन्य रूपों के खिलाफ लड़ाई को लड़ेंगे।”

गौरतलब है कि वामपंथी और हिंदू विरोधी प्रोपगेंडाबाजों ने रश्मि सामंत के ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन की अध्यक्ष पद पर जीत के बाद उन्हें घेरना शुरू किया था। तरह-तरह के इल्जाम लगा कर उन्हें इस्तीफा देने को मजबूर किया गया था। उनके ख़िलाफ़ इस्लामोफोबिक, ट्रांसफोबिक होने के इल्जाम लगाए गए थे। साथ ही उन्हें हिंदू होने के लिए भी निशाना बनाया गया था।

ऑक्सफोर्ड के फैकल्टी सदस्य डॉ. अभिजीत सरकार ने तो रश्मि के अकाउंट पर भगवान श्रीराम की डीपी देख ये तक कहा कि हो सकता है कि स्टूडेंट काउंसिल इलेक्शन पीएम मोदी द्वारा फंड किए गए हों। उन्होंने ये भी कहा कि वह तटीय कर्नाटक से आती हैं, जो इस्लामोफोबिक ताकतों का गढ़ रहा है।

इस्तीफा देने के बाद रश्मि कर्नाटक के उडुपी जिले में अपने घर लौट आईं। उन्होंने कहा था, “यह सच कि मैं हिंदू हूँ। यह मुझे ऑक्सफोर्ड एसयू का अध्यक्ष बनने के लिए असहिष्णु या अनफिट नहीं बनाता है। इसके विपरीत, मैं वास्तविक अर्थों में विविधता के मूल्य को समझती हूँ, हालाँकि विकसित दुनिया की पेचीदगियों के लिए मेरा संपर्क सीमित है।”

इंडिया अहेड न्यूज के साथ एक साक्षात्कार में उनके द्वारा सोशल मीडिया पोस्ट 5 साल पहले किए गए थे, जब वह किशोरी थी और मुद्दों के बारे में अपनी प्रतिबद्धता नहीं बनाई थी। उन्होंने यह भी कहा कि उनके द्वारा दिए गए कैप्शन दूसरों को चोट पहुँचाने के इरादे से नहीं दिए गए थे।

ऑक्सफोर्ड विश्वविद्यालय के एक फैकल्टी सदस्य द्वारा विवाद में घसीटे जाने के बारे में पूछे जाने पर सामंत ने कहा था कि हिंदू होना और ‘जय श्रीराम’ कहना अपराध नहीं है और वह इस बात से हैरान थी कि पद से इस्तीफा देने के लिए उन पर दबाव बनाने के लिए उनके माता-पिता की धार्मिक भावनाओं और अभिव्यक्तियों का खुले तौर पर अपमान किया गया।

रिया चकवर्ती की जमानत को NCB ने सुप्रीम कोर्ट में दी चुनौती, सुशांत सिंह केस से जुड़े ड्रग्स मामले में चार्जशीट भी कर चुकी है फाइल

सुशांत सिंह राजपूत मामले में उनकी गर्लफ्रेंड रही रिया चकवर्ती की मुश्किलें बढ़ सकती हैं। नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) ने रिया की जमानत के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। ड्रग्स मामले में गिरफ्तार की गई रिया को बॉम्बे हाई कोर्ट ने जमानत दे दी थी। 18 मार्च को मुख्य न्यायाधीश मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, जस्टिस एएस बोपन्ना और वी रामासुब्रमण्यम की खंडपीठ द्वारा एनसीबी की याचिका पर सुनवाई किए जाने की संभावना है।

पिछले दिनों इस मामले में NCB ने विशेष एनडीपीएस (NDPS) कोर्ट में चार्जशीट दायर की थी। इसमें 33 लोग आरोपित बनाए गए हैं। जिनमें रिया चकवर्ती और उसके भाई शौविक का नाम भी शामिल है। चार्जशीट में 200 चश्मदीदों के बयान का उल्लेख है। चार्जशीट 12000 से अधिक पन्नों का है। करीब 50 हजार पन्ने डिजिटल फॉर्मेट में भी कोर्ट के सामने पेश किया गया था।

एनसीबी ने पिछले साल अगस्त में सुशांत की मौत मामले में ड्रग्स कनेक्शन को लेकर दो मामले दर्ज किए थे। इसके बाद एजेंसी ने रिया, उसके भाई शौविक और अन्य को गिरफ्तार किया था। ये अभी जमानत पर बाहर हैं। एनसीबी ने सारा अली खान, श्रद्धा कपूर, रकुल प्रीत सिंह, दीपिका पादुकोण और उनकी मैनेजर रहीं करिश्मा प्रकाश जैसों से भी पूछताछ की थी।

कोर्ट ने रिया चक्रवर्ती को 1 लाख रुपए के निजी मुचलके पर जमानत दी थी। कोर्ट ने कहा था कि रिया को 10 दिनों में एक बार पुलिस स्टेशन जाकर हाजिरी लगानी होगी और जेल से रिहा होने के बाद अपना पासपोर्ट भी जमा करना होगा। कोर्ट ने यह भी कहा था कि वह बिना अनुमति के विदेश यात्रा पर नहीं जा सकती हैं और मुंबई छोड़ने से पहले जाँच अधिकारी को सूचित करना होगा

सुशांत सिंह राजपूत 14 जून 2020 को ब्रांदा के अपने फ्लैट में फंदे से लटके मिले थे। सीबीआई इस मामले के जाँच कर रही है। मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के ऐंगल की जाँच के दौरान प्रवर्तन निदेशालय (ED) को बॉलीवुड सेलिब्रिटीज और ड्रग पैडलर्स के बीच कनेक्शन मिले थे। इसके बाद एनसीबी ने कार्रवाई करते हुए कई जगहों पर छापेमारी और गिरफ्तारियाँ की थी।  

उस समय मीडिया रिपोर्टों से यह बात सामने आई थी कि रिया चक्रवर्ती के व्हाट्सऐप चैट ईडी ने सीबीआई और एनसीबी को सौंपे थे। कथित तौर पर रिया की चैट से पता चला था कि वह ड्रग्स का ‘इस्तेमाल और डीलिंग’ करती थीं।

पिछले साल दिसंबर में सीबीआई ने बताया था कि हर एंगल से जाँच की जा रही है और एजेंसी ने किसी भी पहलू को नकारा नहीं है। जाँच एजेंसी ने बताया था कि वह पूरे प्रोफेशनल तरीके से वैज्ञानिक तकनीकों का सहारा लेते हुए जाँच में आगे बढ़ रही है। राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी के पत्र के जवाब में सीबीआई ने यह बात कही थी

CBI ने कहा था कि इस मामले में जुलाई 25, 2020 को पटना के राजीव नगर थाने में सुशांत के पिता केके सिंह की शिकायत के बाद FIR दर्ज की गई थी। इसके बाद बिहार सरकार की सिफारिश के बाद इस मामले की सीबीआई जाँच के लिए एजेंसी को सौंपी गई। एजेंसी ने बताया था कि परिस्थितियों को बेहतर ढंग से समझने के लिए वरिष्ठ अधिकारियों ने कई बार घटनास्थल का दौरा किया और फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स की देखरेख में घटनास्थल का निरीक्षण हुआ।

जाँच एजेंसी ने बताया था, “फॉरेंसिक एक्सपर्ट्स ने कूपर हॉस्पिटल का भी दौरा किया और किया और जाना कि पोस्टमॉर्टम के लिए किन प्रक्रियाओं को अपनाया गया था। पीड़ित परिजनों और अन्य सूत्रों ने जो भी आपत्ति दर्ज कराई, उस पर जाँच की गई। सभी सम्बंधित गवाहों से पूछताछ हुई। सेल टॉवर लोकेशन और डिजिटल उपकरणों के डेटा की जाँच के लिए लेटेस्ट तकनीक का इस्तेमाल किया गया। जाँच टीम अलीगढ़, फरीदाबाद, हैदराबाद, मुंबई, मानेसर (गुरुग्राम) और पटना – हर सम्बंधित जगह गई।”

एंटीलिया केस: मुकेश अंबानी के घर के बाहर विस्फोटक लदी कार से लेकर सचिन वाजे के सस्पेंड होने तक कब, क्या हुआ

उद्योगपति मुकेश अंबानी के मुंबई स्थित घर का नाम है एंटीलिया। इस घर के बाहर 25 फरवरी 2021 को विस्फोटक लदी एक स्कॉर्पियो मिली। इसने सुरक्षा एजेंसियों के कान खड़े कर दिए। शुरुआत में जैश उल हिंद ने इसकी जिम्मेदारी ली। अब मुंबई क्राइम ब्रांच में रहा सचिन वजे इसका सूत्रधार बनकर उभरा है।

आइएस इस मामले में अब तक के घटनाक्रम पर नजर डालते हैं; 

25 फरवरी: मुकेश अंबानी के घर से कुछ दूरी पर खड़ी सिल्वर कलर की स्कॉर्पियो कार से 20 जिलेटिन छड़ें बरामद हुई। लावारिस गाड़ी में विस्फोटक मिलने की खबर मिलते ही मुंबई पुलिस के बम निरोधक दस्ता, डॉग स्क्वायड ने पड़ताल शुरू की। उसी रात ATS को पता चला कि गाड़ी मनसुख हिरेन की है जो 18 फरवरी को चोरी हो गई थी।

26 फरवरी: हिरेन को पूछताछ के लिए एपीआई सचिन वाजे दक्षिण मुंबई में पुलिस कमिश्नर के ऑफिस लेकर आया।

27-28 फरवरी: वाजे ने दोबारा हिरेन का बयान दर्ज किया।

28 मार्च: आतंकी संगठन ‘जैश उल हिंद’ ने इस घटना की जिम्मेदारी लेते हुए धमकी भरा संदेश दिया है। संगठन ने टेलीग्राम एप के जरिए इस घटना की जिम्मेदारी ली।

1 मार्च: क्राइम ब्रांच को पता चला कि हिरेन और वाजे एक-दूसरे को पहले से जानते हैं। इसके बाद केस असिस्टेंट कमिश्नर ऑफ पुलिस (ACP) नितिन अल्कानुर को ट्रांसफर कर दिया गया।

3 मार्च: मनसुख हिरेन ने पुलिस द्वारा प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की।

5 मार्च: मनसुख हिरेन का शव मिला। शुरुआत में सुसाइड की बात कही। लेकिन समय बीतने के साथ ही उनकी मौत पर रहस्य गहराने लगे।

6 मार्च: देवेंद्र फडणवीस द्वारा वाजे की भूमिका को लेकर सवाल उठाए जाने के बाद केस एटीएस को सौंप दिया गया।

7 मार्च: एटीएस ने हत्या, सबूत नष्ट करने, अज्ञात लोगों के खिलाफ साजिश का मामला दर्ज किया।

8 मार्च: एमएचए के आदेशों के बाद, एनआईए ने एटीएस से मामले को टेकओवर किया।

9 मार्च: देवेंद्र फडणवीस ने विधानसभा में हिरेन की पत्नी विमला का बयान पढ़ा।

11 मार्च: एक निजी साइबर फर्म ने बताया कि जैश ने जो संदेश भेजा था उसका टेलीग्राम चैनल दिल्ली के तिहाड़ जेल या इसके आसपास क्रिएट किया गया था। जेल में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी के बैरक से मोबाइल बरामद किया गया।

12 मार्च: वाजे का तबादला मुंबई पुलिस के नागरिक सुविधा केंद्र में कर दिया गया।

12 मार्च: हिरेन की हत्या के मामले में प्रथम दृष्टया सबूत के आधार पर ठाणे की अदालत द्वारा वाजे को अंतरिम जमानत से इनकार कर दिया गया।

13 मार्च: वाजे को रात 11.50 बजे एनआईए कार्यालय लाया गया और पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया गया।

14 मार्च: वाजे को 25 मार्च तक एनआईए की हिरासत में भेज दिया गया।

15 मार्च: सचिन वाजे को सस्पेंड कर दिया गया।

बाटला हाउस एनकाउंटर: IM आतंकी आरिज खान को फाँसी की सजा, दिल्ली की कोर्ट ने सुनाया फैसला

बाटला हाउस एनकाउंटर से जुड़े मामले में दिल्ली की साकेत कोर्ट ने इंडियन मुजाहिदीन (IM) के आतंकी आरिज खान को मौत की सजा सुनाई है। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश संदीप यादव ने इसे रेयरेस्ट ऑफ द रेयर केस बताया। साथ ही आरिज पर 11 लाख का आर्थिक दंड भी लगाया।

इससे पहले अदालत ने आरिज की सजा पर फैसला शाम 4 बजे तक सुरक्षित रख लिया था। पुलिस ने अदालत से निरीक्षक मोहन चंद शर्मा की हत्या के मामले में आरिज खान को मौत की सजा देने का अनुरोध किया था। बीती सुनवाई में अदालत ने इस मामले में उसे दोषी करार दिया था। आरिज खान को दिल्ली पुलिस ने 2018 में गिरफ्तार किया था।

अदालत ने आरिज खान को आर्म्स एक्ट और भारतीय दंड संहिता की धारा 302, 307 के तहत दोषी करार दिया है। 2008 में हुए बाटला हाउस एनकाउंटर केस के बाद से ही आरिज फरार था और 2018 में नेपाल से गिरफ्तार किया गया। आतंकी आरिज खान को बाटला हाउस एनकाउंटर में जान गँवाने वाले इंस्पेक्टर मोहन शर्मा की हत्या के लिए दोषी पाया गया है।

अस्‍पताल में इंस्‍पेक्‍टर शर्मा ने तोड़ा था दम

दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल को सूचना मिली थी कि इंडियन मुजाहिद्दीन के पाँच आतंकी बाटला हाउस के एक फ्लैट में किराए पर मकान लेकर रह रहे हैं। 19 सितंबर 2008 की सुबह इंस्पेक्टर मोहन चंद शर्मा आतंकियों को पकड़ने के लिए टीम लेकर बाटला हाउस में बिल्डिंग नंबर एल-18 के फ्लैट नंबर 108 में पहुँचे। उसी वक्त आतंकियों के साथ मुठभेड़ में उन्हें तीन गोलियाँ लग गईं। बाद में इलाज के दौरान उन्होंने अस्पताल में दम तोड़ दिया था। इस दौरान दो आतंकियों को मार गिराया गया था।

कौन है आतंकी आरिज खान?

साल 2008 में दिल्ली-जयपुर-अहमदाबाद और यूपी की अदालतों में जो धमाके हुए थे, उनके मुख्य साजिशकर्ताओं में आरिज का नाम था। इन सभी धमाकों में कुल 165 लोगों की जान गई थी, जबकि 535 लोग घायल हुए थे। धमाकों के बाद तब आरिज पर 15 लाख रुपए का इनाम घोषित किया गया था और उसक खिलाफ इंटरपोल ने रेड कॉर्नर नोटिस निकाला था।

बाटला हाउस वही एनकाउंटर है जिसको लेकर फरवरी 2012 में आजमगढ़ की एक रैली में कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा था कि जब उन्होंने एनकाउंटर की तस्वीरें सोनिया गाँधी को दिखाई, तब उनकी आँखों में आँसू आ गए