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भगवान के सिर पर लात मार ईसाई धर्म कबूल करवाने वाला पादरी गिरफ्तार: 699 गाँव को बनाया Christ village

हिंदुओं के देवी देवताओं को लात मारकर साधारण ग्रामों को ‘Christ Villages’ बनाने वाले ईसाई पादरी प्रवीण चक्रवर्ती को आँध्र प्रदेश की CID टीम ने 13 जनवरी 2021 को गिरफ्तार कर लिया। उसके व उसके संगठन साइलम ब्लाइंड सेंटर (Sylom Blind Centre’) के खिलाफ LRPF (Legal Rights Protection Forum) ने साल 2019 में गृह मंत्रालय में शिकायत दर्ज करवाई थी।

पादरी के ख़िलाफ़ विभिन्न धार्मिक समूहों के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने और पूजा स्थल में अपराध करने के लिए आईपीसी की विभिन्न धाराओं- 153 ए, 153 बी (1) (सी), 505 (2), 295 ए, 124 ए और 115 के तहत आरोप लगाए गए हैं। उसके ऊपर सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66 f के तहत भी मामला दर्ज हुआ है।

LRPF द्वारा शेयर की गई चक्रवर्ती की एक वीडियो में देख सकते हैं कि वो बता रहा है कि कैसे वह गाँव में रह रहे लोगों से ईसाई धर्म कबूल करवाता है। उसने कहा कि पहले एक पादरी को गाँव में बुला कर बाइबल पढ़ाई जाती है। फिर, जब गाँव में हर कोई ईशु को अपना पालनहार मान लेता है और पत्थर के भगवानों और पेड़ों को लात मार देता है, तब वह गाँव Christ village में तब्दील हो जाता है। वह वीडियो में यह भी कहता है कि कई वाकयों में जो उसने खुद भगवान के सिर पर लात मारी और ऐसा करके वह बहुत खुश भी हुई।

एक अन्य वीडियो में वह अमेरिकी डोनर के साथ बात करता है और कहता है, “हमारे संघ में 3642 पादरी हैं और अब तक 699 क्राइस्ट विलेज बना चुके हैं। एक महीने में वह इसे 700 कर देंगे।”

अब इन्ही प्रमाणों के आधार पर व गुंटूर निवासी सिंगम लक्ष्मी नारायण द्वारा दायर शिकायत के आधार पर आंध्र प्रदेश पुलिस ने पादरी प्रवीण को गिरफ्तार किया है। सीआईडी ​​चीफ पीवी सुनील कुमार ने कहा है कि अपराधी के खिलाफ तत्काल कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

LRPF ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) में भी पादरी के विरुद्ध शिकायत की है। इसमें बताया गया है कि Sylom Blind Center बाल श्रम से बच्चों को मुक्त कराने के नाम पर FCRA फंड इकट्ठा करता है। इस शिकायत में यह भी कहा गया कि सेंटर कभी भी किसी मामले में संबंधित अधिकारियों को सूचित नहीं करता था और बाल श्रम करवाने वाले आरोपितों को बिना सजा दिलवाए जाने देता थे। इसमें लिखा है कि इस एनजीओ के विरुद्ध कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि इसने भारत को ऐसा दर्शाया है जैसे यहाँ पर अधिकांश मात्रा में गुलाम जनसंख्या रहती हो। इसके अलावा इस एनजीओ ने लॉकडाउन नियमों का भी पालन नहीं किया जिसके कारण 318 बच्चे कोविड पॉजिटिव पाए गए।

पूर्व पत्नी पर लगे धोखाधड़ी के आरोप तो भूतपूर्व CM कुमारस्वामी ने किया पहचानने से इनकार, कहा- मुझे नहीं पता वो कौन है

कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और साउथ सिनेमा की मशहूर अभिनेत्री राधिका कुमारस्वामी इन दिनों धोखाधड़ी के मामले को लेकर सुर्खियों में है। केंद्रीय अपराध शाखा पुलिस उनपर शिकंजा कसते हुए लगातार मामले की पूछताछ में जुटी है।  मीडिया रिपोर्ट के अनुसार सीसीबी ने राधिका कुमारस्वामी से बुधवार को करीब चार घंटे तक पूछताछ की थी। इसी बीच खबर आ रही है कि राधिका के पति पूर्व CM कुमारस्वामी ने उन्हें पहचानने से इनकार कर दिया है।

कुमारस्वामी रविवार को मंड्या जिले श्रीरंगा पटना तालुक के नेरलेकेरे गाँव के दौरे पर थे, उसी दौरान मीडिया के सामने इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़ते हुए कहा कि उन्हें नहीं पता कि राधिका कौन है!। दरअसल, मीडिया उनसे राधिका कुमारस्वामी को मिले CCB (सेंट्रल क्राइम ब्यूरो) के नोटिस के बारे में जानना चाहती थी।

मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए पूर्व कर्नाटक सीएम ने कहा, “कौन है राधिका… मुझे नहीं पता कि वो कौन है… मुझे उन लोगों के बारे में क्यों परेशान होना चाहिए, जिनके बारे में मुझे कुछ नहीं पता। मुझे उन लोगों के बारे में मत पूछो जिन्हें मैं नहीं जानता।” खबरों की माने तो 2006 में एचडी कुमारस्वामी ने राधिका से शादी की थी। दोनों की एक बेटी भी है जिसका नाम शमिका कुमारस्वामी है।

गौरतलब है कि राधिक पर युवराज नाम के शख्स के साथ मिलकर एक रियल एस्टेट कारोबारी से धोखाधड़ी कर 75 लाख रुपए लेने का आरोप है। कथिततौर पर युवराज ने अभिनेत्री के एकाउंट में 75 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। इसी सिलसिले में पूर्व सीएम की पत्नी इस वक्त जाँच एजेंसी के सवालों के घेरे में है और शुक्रवार को केंद्रीय अपराध शाखा (CCB) के सामने पेश हुई थी। बता दें युवराज पहले से ही राजनेताओं और सरकारी कर्मचारियों सहित कई लोगों को धोखा देने के आरोप में गिरफ्तार हैं।

उल्लेखनीय है कि सीसीबी ने पिछले साल दिसंबर में युवराज को गिरफ्तार किया था। एक रियल एस्टेट कारोबारी ने उसके खिलाफ चुनाव में टिकट देने के नाम पर 10 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी करने की शिकायत दर्ज कराई है। युवराज के घर पर छापेमारी के दौरान 26 लाख रुपए बरामद हुआ था।

बता दें कि राधिका कुमारस्वामी कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी की पत्नी हैं। साथ ही कन्नड़ फिल्मों की मशहूर अभिनेत्री भी हैं। उन्होंने मसाला, गुड लक, जनपाड़ा, रुद्र तांडव सहित साउथ सिनेमा की कई फिल्मों में अभिनय किया है और फिल्मी पर्दे पर अपनी खास पहचान छोड़ी है।  

बुर्के ही बुर्के: किसान आंदोलन में बुर्के वाले भी आ गए हैं; सनद रहे रतनलाल को बुर्केवालियों ने ही घसीट कर मारा था

शाहीन बाग के प्रदर्शन से लेकर दिल्ली दंगों तक का सफर तय करने वाली ‘बुर्केधारियों’ ने अब किसान आंदोलन पर अपना डेरा जमाया है। सोशल मीडिया पर सामने आई तस्वीर में देख सकते हैं कि बुर्के पहनने वाली तमाम महिलाएँ मंच पर जाकर फोटो खिंचवा रही हैं। तस्वीर देखकर नहीं लगता कि इनका संबंध किसान परिवार से है या ये खुद किसानी करती हैं। तो ऐसे में सवाल है कि आखिर ये सब यहाँ कर क्या कर रही हैं?

किसान आंदोलन में बुर्काधारी महिलाएँ
किसान आंदोलन में बुर्काधारी महिलाएँ (तस्वीर साभार: सोशल मीडिया)

किसान प्रदर्शन की आड़ में पहले ही खालिस्तानी 26 जनवरी को अपना झंडा इंडिया गेट पर फहराने की माँग उठा रहे हैं। वामपंथी भी पहले ही किसान महिलाओं के हाथ में उमर खालिद और शरजील इमाम जैसे कट्टरपंथियों की तस्वीर थमा कर उनकी रिहाई के लिए आवाज उठा चुके हैं। ऐसे में अब इन बुर्के वाली महिलाओं के प्रदर्शन मंच तक पहुँचने के मायने कितने डरावने हो सकते हैं, इसका अंदाजा लगाने के लिए उत्तरपूर्वी दिल्ली में हुए दंगों को याद करने की जरूरत है।

कॉन्सटेबल रतनलाल की हत्या याद है आपको? चाँदबाग से एक वीडियो सामने आई थी। वीडियो में तमाम बुर्केधारी महिलाएँ पुलिस के पीछे जाकर उन पर हमला करते हुए दिखीं थी। इसी भीड़ ने वहाँ दंगों का आगाज किया था और आईपीएस अमित शर्मा को बुरी तरह जख्मी करके कॉन्सटेबल रतन लाल की जान ले ली थी। वीडियो में साफ दिखा था कि कैसे बुर्के में चेहरा छिपा कर इन महिलाओं ने पुलिस पर हमला किया था और बाद में अचानक गोलियाँ चलने की आवाज आई थी।

‘दिल्ली राइट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी (Delhi Riots 2020: The Untold Story)’ की लेखिका मोनिका अरोड़ा ने भी अपनी किताब में इन बुर्केधारी महिलाओं की पोल पट्टी खोली थी। उन्होंने बताया था कि उस दिन हिंसा से पहले महिलाओं ने बुर्के के भीतर चाकू और तलवार तक छिपा रखे थे और जब रोड जाम खुलवाने डीसीपी अमित शर्मा अन्य पुलिस अधिकारियों के साथ गए तो प्रदर्शन कर रही महिलाओं ने अपने बुर्के में छिपाए पत्थर, चाकू और तलवार से पुलिस अधिकारियों पर हमला कर दिया।

घटनाओं से स्पष्ट है कि बुर्केधारी महिलाओं का ‘किसी’ प्रदर्शन तक पहुँचना कितना खतरनाक हो सकता है। वो भी तब जब न इनके चेहरों की पहचान हो सकती है और न इनके मनसूबों की। शाहीन बाग में माहौल बनाने के बाद जो भयावह तस्वीर राष्ट्रीय राजधानी ने इन महिलाओं की देखी क्या उसके बाद भी उपस्थिति पर सवाल उठाना उचित नहीं है कि आखिर इनका किसान प्रदर्शन से क्या लेना-देना है? और ये सब वहाँ किसके समर्थन में मंच तक पहुँची हैं या इनके जरिए क्या संदेश देने की कोशिश हो रही है?

एक ओर किसान यूनियन के नेता हैं कि वो न केंद्र सरकार से बातचीत करना चाहते हैं और न ही सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश हैं। उनकी मंशा वैसे ही तमाम दिल्लीवासियों के लिए चिंता का विषय है और ऐसे समय में इन तस्वीरों का सामने आना…! लोकतांत्रिक अधिकारों के नाम पर इनका कहीं भी एकत्रित होते जाना इस बात की याद नहीं कराता कि ऐसी तस्वीरें शाहीन बाग प्रदर्शन में भी देखी जा चुकी हैं बल्कि उस दृश्य को ताजा करता है जब शाहीन बाग के विकराल रूप के कारण उत्तर पूर्वी दिल्ली के कम से कम 50 परिवारों ने अपने सपूतों को गँवाया।

₹3,72,618 करोड़ का घाटा: ट्रंप मामले पर फेसबुक और ट्विटर को एक सप्ताह में लोगों ने दिखाई ‘औकात’

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनॉल्ड ट्रंप को अपने प्लेटफॉर्म से ब्लॉक करने के बाद कई सोशल मीडिया साइट्स को अरबों का नुकसान झेलना पड़ा। ट्विटर और फेसबुक जैसे महारथियों को ही अपने एक फैसले के चलते कुल 51.2 बिलियन डॉलर यानी 3 लाख 72 हजार करोड़ रुपए का घाटा हुआ।

हैरानी की बात यह है कि ट्रंप समर्थकों ने इन टेक दिग्गजों को मात्र एक हफ्ते में ही इस जगह पहुँचा दिया। कैपिटल हिल में हिंसा के बाद ट्रंप को अलग-अलग प्लेटफॉर्म से ब्लॉक किया गया था।

ट्रंप को ब्लॉक करने से पहले फेसबुक, ट्विटर ने परिणामों की शायद कल्पना नहीं की थी। उन्होंने केवल अतिरिक्त हिंसा की संभावना के मद्देनजर प्रतिबंध लगाया। बाद में पता चला कि फेसबुक को सोमवार तक 4% और मंगलवार को 2.2% की गिरावट देखनी पड़ी क्योंकि शेयरधारकों ने स्टॉक डंप कर दिया था। नतीजतन मंगलवार को बाजार बंद होने तक फेसबुक की मार्केट $47.6 बिलियन नीचे रही।

इसी तरह ट्विटर ने सप्ताह की शुरुआत के साथ 6.4% की गिरावट दर्ज की और मंगलवार को बाजार बंद बोने तक 2.4 % की गिरावट हुई। ट्विटर के मार्केट कैप में कुल गिरावट 3.5 बिलियन डॉलर की हुई। ट्विटर के लिए यह दर बुधवार को 2.9% बढ़ी लेकिन फेकबुक उसी हालत में रहा।

बता दें कि एक निर्णय के कारण इतना नुकसान देखकर ट्विटर प्रमुख को अब अपने निर्णय पर पछतावा होने लगा है। उनका कहना है कि उनके सामने असामान्य और मुश्किल परिस्थितियाँ थीं जिसकी वजह से पूरा ध्यान लोगों की सुरक्षा पर केंद्रित करना पड़ा। उन्होंने अपनी मजबूरी बताते हुए अफसोस जताया और कहा कि ट्रंप के अकॉउंट पर बैन लगाना एक तरह से ट्विटर की असफलता भी है क्योंकि वह इस प्लेटफॉर्म पर स्वस्थ संवाद को बढ़ावा देने के लिए जरूरी कदम नहीं उठा सके।

जैक ने इस संबंध में 14 जनवरी 2021 को कई ट्वीट किए। उन्होंने कहा कि वह न तो कोई गर्व महसूस कर रहे हैं और न ही जश्न मना रहे हैं। उनके अनुसार कई बार ट्रंप को चेतावनी दिए जाने के बाद उनके अकॉउंट को हटाया गया। उनका निर्णय जनसुरक्षा के मद्देनजर लिया गया था।

दूरगामी परिणामों पर बात करते हुए उन्होंने कहा, “इस तरह की कार्रवाई से जनसंवाद में बाधा पैदा होती है और ये हमें बाँटता है। इससे वैश्विक संवाद के हिस्से पर किसी एक व्यक्ति या कंपनी का नियंत्रण मजबूत होता है और मुझे लगता है कि यह भयावह है।”

उनके अनुसार, “अभी तक ट्विटर जैसे प्लेटफॉर्म की शक्तियों और उत्तरदायित्व को लेकर संतुलन बना हुआ था क्योंकि ये इंटरनेट का एक छोटा सा हिस्सा है। अगर लोग हमारे नियमों से सहमत नहीं होते तो वे आसानी से दूसरी सेवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं। इससे हमारी शक्ति सीमित थी। पिछले हफ्ते इस अवधारणा को चुनौती दी गई जब तमाम टूल प्रोवाइडर ने अपने प्लेटफॉर्म पर कुछ चीजों को खतरनाक समझते हुए बैन लगाने का फैसला किया। मुझे नहीं लगता कि सभी कंपनियों ने एक दूसरे से पूछकर यह फैसला लिया बल्कि कंपनियाँ स्वयं इस नतीजे पर पहुँची। और दूसरी कंपनियों के फैसलों से ही उनका हौसला बढ़ा।”

डॉर्सी कहते हैं कि किसी एक पल के लिए यह प्रतिबंध उचित हो सकता है लेकिन लंबे समय के लिए ये मुक्त इंटरनेट व्यवस्था के आदर्श के लिए विनाशकारी साबित होगा। उनके अनुसार किसी कंपनी की तरफ से होने वाले रेगुलेशन और सरकार की सेंसरशिप में फर्क है मगर कई बार ये दोनों एक जैसे हो सकते हैं। उनका कहना है कि ये वक्त अनिश्चतताओं और संघर्ष से भरा है मगर उनका प्रयास यही है कि वह दुनिया के लोगों के बीच आपसी समझ बढ़ाने और शांतिपूर्ण सह अस्तित्व को प्रोत्साहित कर सकें। इसके लिए उन्हें और ज्यादा पारदर्शी होना पड़ेगा।

खुद न्यूड होकर तस्वीरें बेच रही हैं लड़कियाँ-महिलाएँ… आखिर क्या है मजबूरी, जानिए OnlyFans का बिजनेस मॉडल

कोरोना महामारी हर किसी के लिए एक जैसी नहीं रही है। कुछ लोगों ने इस बीच बहुत कुछ खो दिया तो कुछ लोग ऐसे भी हैं, जिन्हें अपने रोज के गुजारे के लिए बहुत कठिन कदम भी उठाने पड़े होंगे। सवाना बेनाविडेज़ (Savannah Benavidez) नाम की एक महिला ने अपने 2 साल के बेटे की देखभाल करने के लिए जून में अपनी नौकरी छोड़ दी थी। वह एक एक मेडिकल बिलर के रूप में काम करती थी। लेकिन अपने खर्च उठाने के लिए उसे कुछ काम की अब भी जरूरत थी।

न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, 23 साल की बेनाविडेज़ ने इसके लिए ‘ओनली फैंस’ (OnlyFans) नाम के एक सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अकाउंट बनाया। ‘ओनली फैंस’ पर यूजर्स मासिक चार्ज पर ग्राहकों को ओरिजिनल सामग्री बेचते हैं। सवाना नेअपने ओनली फैंस अकाउंट पर अपनी नग्न तस्वीरें पोस्ट करनी शुरू कर दीं।

ऐसा कर के बेनाविडेज़ ने जुलाई माह से अब तक करीब 64,000 डॉलर कमा लिए, जिससे उसने सिर्फ अपना रोजाना का खर्चा ही नहीं उठाया बल्कि अपना किराए देने से लेकर कार के पेमेंट तक किया। इस पर बेनाविडेज़ का कहना है कि उसने अपनी नग्न तस्वीरें बेचकर इतने रूपए कमा लिए जितने वो अपनी नौकरी पर रहते नहीं कमा सकी और अब उसे ये तक मालूम नहीं कि आखिर वो इन रुपयों से करेगी क्या?

सवाना की ही तरह रूपए कमाने का सपना लेकर रेस्टोरेंट में काम करने वाली लेक्सी ऐग्जेंबर्गर (Lexi Eixenberger) ने भी OnlyFans पर अकाउंट बनाया। 22 साल की लेक्सी को कोरोना महामारी के बीच तीन बार नौकरी खोनी पड़ी। इस वजह से अक्टूबर माह तक उसे रुपयों की इतनी जरूरत हुई कि उसे डेंटल हाइजीन स्कूल छोड़ना पड़ा। उसने जीने के लिए प्लाज्मा डोनेट करने जैसे काम भी किए लेकिन ऐसा कर के भी उसकी जरूरतों लायक खर्च भी नहीं उठ सका। इसके बाद लेक्सी ने भी ओनली फैन्स की ओर रुख किया और अब तक केवल 500 डॉलर कमाए हैं।

ब्रिटेन की OnlyFans, 2016 में सामने आया था, जिसकी लोकप्रियता में कोरोना महामारी के दौरान जमकर उछाल आया। दिसंबर तक इसके 90 मिलियन से अधिक यूजर्स और 01 मिलियन से अधिक ‘कंटेंट क्रिएटर’ हो चुके थे, जो कि 2019 में महज 1,20,000 के आसपास हुआ करते थे।

लाखों अमेरिकियों के बेरोजगार होने के साथ ही, बेनाविडेज़ और लेक्सी जैसे कुछ लोग अपने और अपने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के लिए ‘ओनली फैंस’ का सहारा ले रहे हैं। कोरोना वायरस की महामारी ने महिलाओं और खासकर बच्चों का पोषण करने वाली उन महिलाओं पर बड़ा और गहरा प्रभाव डाला है, जो रेस्टॉरेन्स, या फिर कोई अन्य रोजगार के जरिए अपना परिवार चला रहीं थीं।

एंजेला जोन्स नाम की समाजशास्त्र की एक एसोसिएट प्रोफेसर का कहना है कि बहुत से लोग हताशा और डिप्रेशन के चलते ‘ओनली फैन्स’ की ओर रुख करते हैं। ये वे लोग हैं जो अपने पेट भरने को लेकर चिंतित हैं, और किसी भी तरह अपना गुजारा करनेको लेकर हताश हैं।

लेकिन ऐसे प्रयोग में हर किसीको सवाना बेनाविडेज़ जैसी कामयाबी नहीं मिली। लेक्सी जैसे ही दर्जनों और हैं, जो बड़ी रकम बनाने का ख़्वाब देखकर ‘ओनली फैंस’ से जुडी लेकिन उनके हाथ सिर्फ नाकामयाबी आई क्योंकि वो महज कुछ सौ डॉलर से ज्यादा बमुश्किल कमा सके। यही नहीं, ऐसा करने के बाद उनकी भविष्य में कोई और नौकरी पाने की भी संभावना काम हो जाती हैं।

इस प्लेटफॉर्म पर सबसे अधिक और ‘सफल’ कंटेंट डालने वालों में मॉडल, पोर्न स्टार और सेलिब्रिटी होते हैं, जिनके पास पहले से ही बड़ी सोशल मीडिया फॉलोइंग होती है। वे अन्य प्लेटफॉर्म्स के जरिए अपने फ़ॉलोअर्स को उनके ‘OnlyFans’ अकाउंट तक ले ही आते हैं।

जबकि, बहुत से कंटेंट क्रिएटर, जो धन के अभाव में इस प्लेटफॉर्म से जुड़ते हैं, उनके पास बड़ी सोशल मीडिया फॉलोइंग भी नहीं होती या किसी भी तरह से लगातार बिजनेस को बनाए रखने का कोई तरीका नहीं होता। इसके अलावा, अपनी पहचान और ‘ओनली फैंस’ अकाउंट को अपने परिवार या पीयर ग्रुप्स से गोपनीय बनाए रखना एक और चैलेंज उनके सामने होता है।

‘राम मंदिर के लिए चंदा माँगने पर बिके हुए मुसलमानों से पथराव करवाएँगे’ – सपा सांसद एसटी हसन का विवादित बयान

समाजवादी पार्टी के मुरादाबाद से सांसद एसटी हसन ने राम मंदिर निर्माण के लिए चंदा इकट्ठा कर रहे लोगों के खिलाफ विवादित बयान दिया है। सांसद एसटी हसन ने यूपी में सत्तारूढ़ भाजपा सरकार पर आरोप लगाया है कि वह राजनीतिक फायदे के लिए स्वयं राम मंदिर का चंदा लेने निकले लोगों पर पथराव करवा सकती है।

राम मंदिर और हिंदुओं को टारगेट करते हुए सांसद एसटी हसन ने कहा, “भाजपा के पास एक बड़ा अच्छा हथियार है। हिंदुओं को भी समझना चाहिए कि ये सब कुछ कर लेते हैं। इनके पास फॉर्मूला है हिन्दू-मुसलमान का। ये आखिर में आकर ऐसा हिन्दू-मुसलमान करेंगे कि भोले-भाले लोग धर्म भावनाओं में बह कर इनको वोट दे देंगे।”

सपा सांसद एसटी हसन ने आगे कहा, “राम मंदिर बन रहा है। अब इसका मुद्दा खत्म हो गया है, लेकिन भाजपा के लोग जब चंदा लेने निकलेंगे तो चंद बिके हुए मुसलमानों से पथराव करवा देंगे। पथराव के बाद जो होगा, वो आप मध्य प्रदेश में देख चुके हैं। इसके माध्यम से हिंदुओं को ये सन्देश दिया जाएगा कि हम ये हालात कर सकते हैं।”

उन्होंने कहा कि भाजपा उत्तर प्रदेश में हिंदू-मुस्लिम के बीच सद्भाव को बिगाड़ कर चुनावों में लाभ ले सकती है और इसमें कुछ बिके हुए मुसलमान उनका साथ देंगे। उनके अनुसार दरअसल पथराव करने वाले भी यही हैं और उसका फायदा उठाने वाले भी यही हैं।

मुरादाबाद से समाजवादी पार्टी के सांसद एसटी हसन ने कहा कि भाजपा की सियासत को समझने की आवश्यकता है, आखिर इस तरह की राजनीति कब तक चलेगी। उनके अनुसार हिंदू-मुसलमान करने से रोटी-रोजी नहीं चलती। भाजपा चुनावों से पहले ध्रुवीकरण का प्रयास कर सकती है।

कॉन्ग्रेस नेता मुश्ताक हुसैन ने पार्टी की ही महिला नेता से 4 साल तक किया दुष्कर्म: देता था निकाह का झाँसा, FIR

मध्य प्रदेश के बुरहानपुर जिले में कॉन्ग्रेस नेता ने अपनी ही पार्टी के नेता पर दुष्कर्म का आरोप लगाया है। कॉन्ग्रेस कमेटी की महिला पदाधिकारी का आरोप है कि पार्टी के अल्पसंख्यक विभाग के जिलाध्यक्ष मुश्ताक हुसैन ने प्रेम जाल में फँसा कर यौन शोषण किया है। पुलिस ने कॉन्ग्रेस महिला नेता की शिकायत के आधार पर मुश्ताक हुसैन पर मामला दर्ज कर लिया है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ 11 जनवरी को कॉन्ग्रेस नेता ने एक होटल में प्रेस वार्ता करते हुए इस बात का खुलासा किया। महिला नेता ने कहा, “कॉन्ग्रेस नेता मुश्ताक हुसैन ने मेरे साथ धोखा किया है। मुश्ताक विगत 4 वर्षों से निकाह का झाँसा देकर शारीरिक शोषण कर रहा था। उसके साथ प्रेम प्रसंग होने की वजह से मेरा तलाक भी हो गया। जब मैंने निकाह की बात कही तो वह मुझे जान से मारने की धमकी देने लगा। उसने मुझे धमकाते हुए कहा कि अगर मैंने इस रिश्ते की बात किसी और से कही तो वह मुझे जान से मार देगा।”

कॉन्ग्रेस नेता ने यह भी बताया कि उन्होंने इस घटनाक्रम की शिकायत जिलाध्यक्ष समेत प्रदेश के कई नेताओं से की थी लेकिन उन्होंने इस बात को पूरी तरह नज़रअंदाज़ कर दिया। कोई विकल्प नहीं नज़र आने की सूरत में कॉन्ग्रेस की महिला नेता ने बुरहानपुर एसपी राहुल कुमार लोढ़ा से इस मामले की लिखित शिकायत की। इसके बाद पुलिस ने कॉन्ग्रेस के मुश्ताक हुसैन पर एफ़आईआर दर्ज की। 

कॉन्ग्रेस की महिला नेता ने यह भी कहा है कि मुश्ताक हुसैन के घर की कई महिलाएँ इस घटना को लेकर उन्हें परेशान कर रही हैं। कुछ दिनों पहले कई महिलाओं ने उनके घर आकर हिंसा की थी और इसके बाद समझौता करने के लिए धमकी भी दी थी। कॉन्ग्रेस नेता ने स्पष्ट रूप से कहा है कि अगर मुश्ताक हुसैन पर कार्रवाई नहीं होती है तो वह एसपी ऑफिस में लगे सीसीटीवी कैमरा के समक्ष आत्महत्या कर लेंगी। 

इस शिकायत के आधार पर बुरहानपुर के गणपति नाका पुलिस थाने में मुश्ताक हुसैन पर दुष्कर्म की धाराओं के तहत मामला दर्ज कर लिया गया है। घटना पर एसपी राहुल कुमार लोढ़ा का कहना है कि पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है। वहीं दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्ष ने कहा कि प्रदेश कॉन्ग्रेस कमेटी को इस मामले में सूचित कर दिया गया है। कमेटी मुश्ताक हुसैन को पद से हटाने की अनुशंसा करेगी।        

गूगल पर मौजूद हैं आपके व्हाट्सएप्प प्राइवेट ग्रुप चैट और नंबर! जानें कितने सुरक्षित हैं आप

WhatsApp ने आपकी प्राइवेसी को ख़िलवाड़ मान लिया है। अत: आपके प्राइवेट ग्रुप चैट गूगल के सर्च इंजन पर कभी मिल जाएँ तो हैरान होने की आवश्यकता नहीं है। अपनी नई पॉलिसी लाकर यूजर्स की प्राइवेसी में हस्तक्षेप करने वाले मैसेजिंग प्लेटफॉर्म व्हाट्सएप्प को इस समय जब हर जगह से लताड़ लग रही है। उस समय यूजर्स ने यह भी पाया कि कई लोगों के प्राइवेट चैट ग्रुप भी गूगल सर्च इंजन पर मौजूद हैं।

ये ताजा मामला रविवार (जनवरी 10,2021) को दर्ज किया गया। इससे मालूम चला कि प्राइवेट ग्रुप से जुड़ने के इन्वाइट लिंक के अलावा कई यूजर्स की प्रोफाइल भी सर्च इंजन पर थी, जिसका सीधा सा एक मतलब ही है कि यदि कोई चाहे तो आपकी न केवल ग्रुप चैट में अपनी मर्जी से एंट्री ले सकता है बल्कि उस ग्रुप से जुड़े नंबरों को भी पता कर सकता है।

इससे पहले इस तरह किसी व्यक्ति विशेष की निजता में हस्तक्षेप के आरोप इस मैसेजिंग एप पर साल 2019 में लगे थे। जिसके बाद कंपनी ने अपने बयान में कहा था कि उन्होंने मामला उजागर होने के बाद अपनी सुरक्षा को और बढ़ाया है।

पिछली बार जब यह समस्या आई थी, तो कंपनी ने कहा था कि मार्च 2020 से, व्हाट्सएप ने अपने सभी लिंक पेजों के लिए ‘noindex’ टैग को शामिल किया है। इससे इन लिंक्स को अनुक्रमण से बाहर रखा जा सकता है। इसके बाद नवंबर 2019 में सामने आए लिंक गूगल पर कहीं नहीं पाए गए हैं लेकिन अब है कि अब कुछ मामले सामने आए हैं।

साइबर जानकार राजशेखर राजाहरिया ने 10 जनवरी को अपने ट्वीट में लिखा, “आपके व्हाट्सएप्प गुप शायद उतने भी सुरक्षित नहीं है जितना की आप सोच रहे हैं। व्हॉट्सएप ग्रुप चैट के इन्वाइट लिंक, यूजर प्रोफाइल दोबारा से सार्वजनिक की जाने लगी है।” उन्होंने अपने ट्वीट के साथ कुछ तस्वीरें शेयर की। इन तस्वीरों में देख सकते हैं कि कई नंबर की चैट गूगल के सर्च इंजन पर ही दिख रही हैं।

ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि नहीं करता है कि ये नंबर अब भी गूगल पर नजर आ रहे हैं या फिर मैसेजिंग एप ने इसका कोई समाधान खोज लिया है। मगर 11 जनवरी को राजशेखर इस बात की जानकारी दे चुके हैं कि मैसेजिंग एप ने दोबारा मामला उजागर होने के बाद ग्रुप इन्वाइट और प्रोफाइल लिंक को गूगल सर्च से हटा दिया है।

मीडिया खबरों के अनुसार साइबर एक्सपर्ट्स का कहना है “noindex’ टैग जोड़ना एक उचित समाधान नहीं है क्योंकि चैट कुछ ही महीनों में दोबारा से प्लेटफॉर्म पर है।” उनका मानना है कि व्हाट्सएप जैसी बड़ी तकनीकी कंपनियाँ यदि वास्तव में उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता की फिक्र करती हैं तो उनको एक उचित समाधान की तलाश करनी चाहिए। इससे पहले करीब 1500 ग्रुप इन्वाइट लिंक गूगल के सर्च रिजल्ट पर पाए गए थे।

फाइनेंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक डेवलपर्स आमतौर पर किसी भी पृष्ठ के लिए robots.txt file का इस्तेमाल करते हैं कि Google किसी पेज तक जा सकता है या नहीं। मगर WhatsApp ने कथित तौर पर chat.whatsapp.com सबडोमेन के लिए robots.txt फ़ाइल का उपयोग नहीं किया है। इससे Google पर ग्रुप चैट में अतिक्रमण हो सकता है।

रामसेतु के निर्माण और इतिहास की पड़ताल के लिए ASI ने दी समुद्र के भीतर रिसर्च प्रॉजेक्‍ट को मंजूरी

रामसेतु का जिक्र आपने रामायण में जरूर सुना होगा। रामसेतु के बारे में दुनिया उतना ही जानती है, जितना कि रामायण में बताया गया है, लेकिन अब भारत और श्रीलंका के बीच समुद्र में मौजूद रामसेतु कितना पुराना है और इसका निर्माण कैसे हुआ था, इसका पता लगाने के लिए ऑर्कियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया (ASI) के अधीन आने वाले सेंट्रल एडवायजरी बोर्ड ने एक अंडरवाटर रिसर्च प्रॉजेक्‍ट को मंजूरी दे दी है जो कि इसी साल शुरू होगा।

टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार इस प्रोजेक्ट पर जो वैज्ञानिक काम करेंगे, उन्होंने उम्मीद जताई है कि अत्‍याधुनिक तकनीक से उन्‍हें पुल की उम्र और रामायण काल का भी पता लगाने में मदद मिलेगी।

भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) के तहत आने वाले केंद्रीय पुरातत्व सलाहकार बोर्ड ने CSIR और नेशनल इंस्टट्यूट ऑफ ओसनोग्राफी, गोवा (NIO) को इस संबंध में शोध को लेकर पिछले महीने मंजूरी दी है। इसे लेकर ठोस वैज्ञानिक जानकारी अगले कुछ वर्षों में सामने आ सकती है। NIO डायरेक्टर प्रोफेसर सुनील कुमार सिंह के अनुसार, “प्रस्तावित अध्ययन पुरातात्विक वस्तुओं, रेडियोमेट्रीक और भौगोलिक समय और दूसरे पर्यावरण संबंधित डाटा पर आधारित होगा।”

उन्होंने कहा, “रेडियोमेट्रिक तकनीक से ये पता लगाया जाएगा कि ढाँचा कितना पुराना है। ऐसा माना जाता है कि रामसेतु से जुड़े ये पत्थर कोरल या प्यूमिस स्टोन से बने हुए हैं। कोरल पत्थर में दरअसल कैल्शियम कार्बोनेट होते हैं जिसकी मदद से रामायण के काल और ढाँचा कितना पुराना है, इस संबंध में जानकारी हासिल करने में मदद मिलेगी।”

बता दें, इस रिसर्च में रेडियोमेट्रिक और थर्मोल्‍यूमिनेसेंस (TL) डेटिंग जैसी तकनीकों का इस्‍तेमाल किया जाएगा। रेडियोमैट्रिक डेटिंग किसी वस्तु की आयु का पता लगाने के लिए रेडियोएक्टिव अशुद्धियों की तलाश करता है। जब किसी वस्तु को गर्म किया जाता है तो TL डेटिंग उसकी लाइट का विश्लेषण करती है।

ऐतिहासिकता और रामायण काल की तिथि इतिहासकारों, पुरातत्वविदों और वैज्ञानिकों के बीच एक बहस का विषय बनी हुई है। इस स्टडी में इस बात की भी जानकारी मिलेगी कि क्‍या पुल के आस-पास कोई बस्‍ती भी थी या नहीं।

एनआईओ पानी की सहत के 35 से 40 मीटर नीचे जाकर सैंपल लेगा। इसके लिए ‘सिंधु संकल्‍प’ या ‘सिंधु साधना’ नाम के जहाजों का इस्‍तेमाल किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि NIO ने पाँच साल पहले देश भर में पानी के अंदर शोध के लिए ASI के साथ एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किया था। उस समय रामसेतु और द्वारका को लेकर शोध की बात भी हुई थी। द्वारका को भगवान कृष्ण की नगरी कहा जाता जिसके बारे में मान्यता है कि ये बाद में समुद्र में डूब गई।

अधिकारियों के अनुसार द्वारका पर शोध के लिए अतिरिक्त 28 लाख का बजट प्रस्तावित है जबकि रामसेतु के लिए शुरुआती बजट के तौर पर 10 लाख दिए जाएँगे। इस शोध को लेकर NIO के एक अधिकारी का कहना है कि यह परियोजनाएँ वैज्ञानिक जाँच हैं, न कि केवल विश्वास का विषय।

गौरतलब है कि एएसआई ने इससे पहले 2007 में कहा था कि उस इस दावे के संबंध में कोई सबूत नहीं मिले हैं। बाद में सुप्रीम कोर्ट ने एएसआई ने इस हलफनामे को वापस ले लिया था।

रामायण के अनुसार, भगवान राम जब लंका के राजा रावण की कैद से अपनी पत्‍नी सीता को बचाने निकले थे तो रास्‍ते में समुद्र पड़ा। इस समुद्र को पार करने के लिए वानरों ने छोटे-छोटे पत्‍थरों की मदद से इस पुल को तैयार किया था। भारत और श्रीलंका के बीच बना यह पुल करीब 48 किलोमीटर लंबा है। इस पुल की गहराई 3 फीट से लेकर 30 फीट तक है।

पकड़ा गया बिलाल, बीवी का काट डाला था सिर और गुप्तांग: अलग-अलग जगह गाड़ा-फेंका था शरीर के हिस्सों को

अपनी ही बीवी का सिर काट देने का आरोपित शेख बिलाल पकड़ा गया। राँची पुलिस इस विभत्स हत्या के पीछे के मकसद को समझने के लिए अब बिलाल से पूछताछ करेगी।

14 जनवरी 2021 को राँची ग्रामीण के एसपी नौशाद आलम ने शेख बिलाल के पकड़े जाने की सूचना दी।

कब, कहाँ, कैसे मिली लाश

झारखंड की राजधानी राँची स्थित ओरमाँझी में युवती की सिर कटी लाश बरामद हुई थी। युवती का कटा हुआ सिर उसके पहले पति बिलाल खान के खेत से बरामद किया गया है। युवती का सिर बिलाल खान के खेत में दफ़नाया गया था, जिसे पुलिस अधिकारियों ने खोद कर निकलवाया है। 

महिला का शव नग्न अवस्था में मिला था और सिर कटा हुआ था। इसके बाद पुलिस की टीम ने जाँच शुरू कर दी थी। युवती के शरीर पर एक भी कपड़ा नहीं मिला था। युवती का गुप्‍तांग भी काट दिया गया था। 

जिस युवती की लाश बरामद की गई थी, बिलाल उसका उसका पहला पति है। इसके अलावा, पुलिस ने दूसरे पति खालिद को भी हिरासत में लिया है। युवती पिछले 2 महीने से लापता थी।