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‘2013 के वक़्फ़ क़ानून ने मुस्लिम कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं के हौसले किए बुलंद’: ‘राइजिंग भारत समिट’ में बोले PM मोदी – ईसाइयों-गुरुद्वारों की जमीनें हड़पी गईं

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने CNN-News18 द्वारा आयोजित ‘Rising Bharat Summit’ में वक़्फ़ संशोधन क़ानून को सामाजिक न्याय की दिशा में एक ठोस और बड़ा क़दम करार दिया। रामेश्वरम के पम्बन पुल के हाल ही में हुए उद्घाटन का जिक्र करते हुए उन्होंने बताया कि क़रीब 100 वर्ष पहले अंग्रेजों ने वहाँ पुल बनाया था, लेकिन सुनामी के कारण वो क्षतिग्रस्त हो गया। पीएम मोदी ने कहा कि लोग माँग करते रहे लेकिन कोई काम नहीं हुआ, हमारी सरकार आई तो देश को पहले वर्टीकल-लिफ्ट सी-ब्रिज मिला।

पीएम मोदी ने इस दौरान ‘Delay is the enemy of Development’ (देरी विकास का दुश्मन है) का नारा दिया। पीएम मोदी ने जानकारी दी कि पिछले 100 दिनों में सेना के लिए मेड इन इंडिया लाइट कॉम्बैट हेलीकॉप्टर खरीद को हरी झंडी मिली और वक्फ कानून में संशोधन का बिल पास हुआ। बकौल पीएम मोदी, ये 100 दिन 100 फैसलों से भी बढ़कर है, ये 100 संकल्पों के सिद्धि का है। उन्होंने मुद्रा योजना के 10 वर्ष पूरे होने की भी चर्चा की और बताया कि कैसे पहले खाता खोलने के लिए भी बैंक गारंटी चाहिए थी, लोन तो सामान्य परिवारों के लिए सपना हुआ करता था।

उन्होंने जानकारी दी कि पिछले एक दशक में इस योजना के तहत 52 करोड़ लोन बिना गारंटी के दिए गए, जबतक ट्रैफिक लाइट रेड से ग्रीन होती है तबतक 100 मुद्रा लोन क्लियर हो जाते हैं। उन्होंने बताया कि जबतक किसी OTT पर आप एक एपिसोड खत्म करते हैं, तबतक 5000 मुद्रा लोन जारी कर दिए जाते हैं। इसकी वजह से 11 करोड़ लोगों को पहली बार स्वरोजगार के लिए ऋण मिला है। बकौल पीएम मोदी, ये 11 करोड़ लोग फर्स्ट टाइम एन्टरप्रेनर बनेंगे।

पीएम मोदी ने बताया कि 37 लाख करोड़ रुपए का लोन मुद्रा के जरिए दिया गया, कई देशों की तो इतनी GDP भी नहीं है। उन्होंने याद दिलाया कि पहले पिछड़े जिलों में अधिकारियों को ‘पनिशमेंट पोस्टिंग’ के लिए भेजा जाता था – ये सोच थी ‘पिछड़ा को पिछड़ा रहने देने की’। पीएम मोदी ने बताया कि इन जिलों में उनकी सरकार ने काम किया और आज वही Aspirational (आकांक्षी) जिले विकास की नई गाथा लिख रहे हैं, वहाँ के युवा कह रहे हैं – ‘हम भी कर सकते हैं।

पीएम मोदी ने कहा कि जब विकास को आकांक्षाएँ मार्गदर्शित करती हैं तो वो टिकाऊ भी होती है और समावेशी भी। पीएम मोदी ने कहा कि अलग मुल्क का विचार सामान्य मुस्लिम परिवारों का नहीं बल्कि कुछ कट्टरपंथियों का था, जिसने तुष्टिकरण की राजनीति करने वाली कॉन्ग्रेस ने खाद-पानी दिया जिससे कट्टरपंथी नेताओं को सत्ता और दौलत मिली, जबकि ग़रीब व पसमांदा मुस्लिमों को उपेक्षा, अशिक्षा और बेरोजगारी मिली। वहीं मुस्लिम महिलाओं को शाहबानो जैसा अन्याय मिला जहाँ उनका अधिकार कट्टरपंथ की भेंट चढ़ गया, उन्हें मिला चुप रहने का आदेश और कट्टरपंथियों को मिला खुला लाइसेंस।

पीएम मोदी ने 2013 में वक़्फ़ क़ानून में हुए संशोधन को मुस्लिम कट्टरपंथियों और भू-माफियाओं को ख़ुश करने का प्रयास बताते हुए कहा कि इस क़ानून ने संविधान के ऊपर खड़े होने का भ्रम खड़ा किया। पीएम मोदी के अनुसार, संविधान द्वारा खोले गए न्याय के रास्तों को वक़्फ़ क़ानून ने संकुचित कर दिया, जिससे भू-माफियाओं के हौसले बुलंद हुए। उन्होंने इस दौरान केरल में ईसाई परिवारों, कर्नाटक में किसानों और हरियाणा में गुरुद्वारों पर वक़्फ़ के कब्जे का जिक्र किया।

पीएम मोदी ने कहा कि सिर्फ़ एक नोटिस आता था और लोग अपने ही घर के लिए कागज़ ढूँढ़ते रह जाते थे। उन्होंने देश की संसद को सर्व समाज और मुस्लिमों के हित में शानदार क़ानून बनाने के लिए बधाई देते हुए कहा कि इससे वक़्फ़ की भावना की भी रक्षा होगी और महिलाओं व पसमांदा मुस्लिमों के अधिकार सुरक्षित रहेंगे, ये 75 वर्ष में संसद में दूसरी सबसे लंबी डिबेट थी – दोनों सदनों को मिला कर 16 घंटे चर्चा हुई, JPC की 38 बैठकें हुईं, 128 घंटे चर्चा हुई और देशभर से लगभग 1 करोड़ ऑनलाइन सुझाव आए।

पीएम मोदी ने कहा कि ये दिखाता है कि हमारा लोकतंत्र सिर्फ़ संसद की चहारदीवारी तक सीमित नहीं है बल्कि जन-भागीदारी से चलता है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान ये भी ऐलान किया कि जल्द ही भारत क दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। उन्होंने कहा कि विकास की इस अभूतपूर्व गति को भारत के युवा और उनके आकांक्षाएँ व महत्वाकांक्षाएँ ड्राइव कर रही हैं। 2025 के 100 दिन पूरे होने के उपलक्ष्य में पीएम मोदी ने कहा कि इनमें हुए निर्णयों में भी युवा आकाँक्षाओं की झलक दिखेगी, जिसमें भविष्य की मजबूत नींव रखी गई।

वक्फ संशोधन अधिनियम-2025 लागू, केंद्र सरकार ने भी सुप्रीम कोर्ट में दाखिल किया कैविएट : 10 याचिकाओं पर 15 अप्रैल से हो सकती है सुनवाई

वक्फ (संशोधन) अधिनियम-2025 मंगलवार (8 अप्रैल 2025) से लागू हो गया है। केंद्र सरकार ने अधिसूचना जारी कर इसे हकीकत में बदल दिया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने 5 अप्रैल को इसे मंजूरी दी और अब अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय ने इसे लागू कर दिया है।

इस बीच, इस कानून के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में 10 से ज्यादा याचिकाएँ दायर हो चुकी हैं। डीएमके, कॉन्ग्रेस के इमरान प्रतापगढ़ी और मोहम्मद जावेद, AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी, राजद के मनोज झा, फैयाज अहमद और आप के अमानतुल्ला खान ने इसे चुनौती दी है। जमीयत उलमा-ए-हिंद और मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड भी खिलाफ हैं। इनका कहना है कि ये कानून गलत है और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चोट करेगा।

सुप्रीम कोर्ट 15 अप्रैल को इन याचिकाओं पर सुनवाई कर सकता है। दूसरी तरफ, केंद्र सरकार भी सुप्रीम कोर्ट पहुँची है और कैविएट दाखिल कर कहा है कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा केंद्र सरकार को सुने बिना बिना कोई भी एकतरफा आदेश पारित नहीं किया जाए। अदालत कोई भी आदेश पारित करने से पहले केन्द्र सरकार की दलील भी सुने।

बता दें कि संसद के दोनों सदनों में खूब बहस और हंगामे के बाद ये कानून पास हुआ था। लोकसभा में 288 सांसदों ने हामी भरी, तो 232 ने विरोध किया। राज्यसभा में 128 वोट पक्ष में और 95 खिलाफ पड़े।

बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट में कपिल सिब्बल जैसे बड़े वकील जमीयत की ओर से लड़ रहे हैं और सरकार भी तैयार है। अब सबकी नजर 15 अप्रैल पर टिकी है कि आगे क्या होगा।

गाड़ियाँ फूँकी, पुलिस पर पत्थरबाजी, सड़क पर उपद्रव… जैसे CAA के समय जलाई थीं ट्रेनें, वैसे ही अब बंगाल से शुरू हुई वक्फ बिल विरोधी हिंसा

जहाँ एक तरफ संसद के दोनों सदनों से पारित होने और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के हस्ताक्षर के बाद वक्फ संशोधन अधिनियम कानून बन गया है, वहीं दूसरी तरफ पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में इसके खिलाफ हिंसा भी शुरू हो गई है। इस्लामी भीड़ इस कानून के खिलाफ सड़क पर उतरी। उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया है, जिसमें पुलिस की गाड़ियाँ भी शामिल हैं। कुछ पुलिसकर्मियों ने इन्हें रोकने की कोशिश की, लेकिन उपद्रवियों ने पुलिस को भी नहीं छोड़ा। कई पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं।

मुस्लिम संगठनों ने मुर्शिदाबाद में विरोध प्रदर्शन का आह्वान किया था। पुलिस ने जब उन्हें समझाने-बुझाने की कोशिश की तो इन्होंने पुलिस पर ही पत्थरबाज़ी शुरू कर दी। अंततः पुलिस को भी इन हिंसक उपद्रवियों को रोकने के लिए आँसू गैस के गोले छोड़ने पड़े और लाठीचार्ज का सहारा लेना पड़ा। बता दें कि अब तक एक दर्जन याचिकाएँ नए वक्फ कानून के विरुद्ध सुप्रीम कोर्ट में दायर की जा चुकी है। फ़िलहाल मौके पर भारी पुलिस बल को तैनात किया गया है।

‘ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड’ (AIMPLB) ने भी 11 अप्रैल से देशभर में बंद का आह्वान किया है। भीड़ में बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोगों को देखा जा सकता है। एक वीडियो में पुलिस का वाहन सड़क पर गिरा हुआ और धू-धूकर जलता हुआ दिखाई दे रहा है। कई अन्य वाहन भी फूँक दिए गए। बता दें कि इससे पहले मणिपुर में वक्फ बिल का समर्थन करने पर भाजपा के अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के प्रदेश अध्यक्ष का घर जला दिए जाने की ख़बर सामने आई थी।

पश्चिम बंगाल में भाजपा के सह-प्रभारी अमित मालवीय ने भी कई वीडियो शेयर करके दिखाया कि कैसे मुर्शिदाबाद में इस्लामी भीड़ उत्पात मचा रही है। उन्होंने जानकारी दी कि पश्चिम बंगाल में एक सप्ताह में इस तरह की 4 घटनाएँ सामने आ चुकी हैं – बेलडांगा, मोथाबाड़ी, नौदा और जंगीपुर। उन्होंने बताया कि जो मुर्शिदाबाद कभी गौड़ महाधिराज शशांक का स्थल था, ममता बनर्जी के राज में अब इस्लामी भीड़ यहाँ मनमानी करती फिर रही है। उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल के एक बड़े हिस्से पर अपना नियंत्रण खो चुकी हैं।

अमित मालवीय ने आरोप लगाया है कि ममता बनर्जी द्वारा दिए गए भड़काऊ भाषण इस तरह की घटनाओं का कारण हैं। उन्होंने याद दिलाया कि ये वही क्षेत्र है जहाँ कार्तिक पूजा के दौरान हिन्दुओं पर हमले किए गए थे। अमित मालवीय ने इस्लामी भीड़ की इस हरकत को संविधान का खुला अपमान व उल्लंघन करार दिया। बता दें कि मुर्शिदाबाद एक ऐसा इलाक़ा है जहाँ हिन्दू अल्पसंख्यक हैं। मुस्लिमों की जनसंख्या यहाँ 67% के पार चली गई है। वहीं हिन्दू यहाँ मात्र एक तिहाई रह गए हैं।

ये भी याद करना चाहिए कि 2019 में CAA के खिलाफ हिंसा भी पश्चिम बंगाल से ही शुरू हुई थी। कई रेलवे स्टेशनों और रेल पटरियों के अलावा रेलगाड़ियों को भी निशाना बनाया गया था। दिल्ली में फरवरी 2020 में हुए हिन्दू विरोधी दंगों से ढाई महीने पहले 13 दिसंबर, 2019 को ही पश्चिम बंगाल में हिन्दू विरोधी हिंसा शुरू हो गई थी। एक ट्रेन में आग लगा दी गई थी। कई ट्रेनों को रद्द करना पड़ा था। एक यात्री ने बताया था कि मस्जिद से घोषणा के बाद हजारों लोगों ने ट्रेन रोकी और तोड़फोड़ की।

52 करोड़ लोन, फायदा पाने वालों में 70% महिलाएँ, 1+ करोड़ को रोजगार: मुद्रा योजना के 10 साल पूरे, जानिए कैसे आए बदलाव

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना ने मंगलवार (8 अप्रैल 2025) को 10 साल पूरे कर लिए। 2015 में शुरू हुई ये योजना सूक्ष्म और लघु उद्योगों को सस्ते और आसान ऋण देकर उन्हें मजबूत करने के मकसद से लॉन्च की गई थी। इन 10 सालों में इस योजना ने समाज में गहरे बदलाव लाए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स (पहले ट्विटर) पर एक पोस्ट किया, जिसमें उन्होंने बीते एक दशक में मुद्रा योजना की उपलब्धियाँ गिनाईं। उन्होंने लिखा, “आज हम मुद्रा योजना के 10 वर्ष मना रहे हैं। मैं उन सभी को बधाई देता हूँ, जिनके जीवन में इस योजना से बेहतरी आई है। इस दशक में मुद्रा योजना ने कई सपनों को सच किया है। उन लोगों को भी वित्तीय सहायता देकर सशक्त बनाया गया है, जिन्हें पहले कभी अनदेखा किया गया था। यह दिखाता है कि भारत के लोगों के लिए कुछ भी असंभव नहीं है।”

पीएम मुद्रा योजना की उपलब्धियाँ

आँकड़ों की बात करें तो प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) के तहत इन 10 वर्षों में 52 करोड़ से ज्यादा लोन बाँटे गए हैं, जिनकी कुल कीमत 32.61 लाख करोड़ है। सबसे खास बात ये है कि इसमें 70% लाभार्थी महिलाएँ रही हैं, जिन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने का मौका मिला। इसके अलावा, इस योजना ने एक करोड़ से ज्यादा लोगों को रोजगार के अवसर दिए हैं। ये आँकड़े बताते हैं कि मुद्रा योजना ने न सिर्फ आर्थिक विकास को बढ़ावा दिया, बल्कि सामाजिक ढाँचे को भी मजबूत किया है।

वित्त मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान में कहा, “व्यापार का एक कदम आगे बढ़ाने की सोच सिर्फ बड़े शहरों तक ही नहीं, बल्कि छोटे कस्बों और गाँवों तक भी पहुँची है, जहाँ पहली बार उद्यमी बने लोग अपनी किस्मत बदल रहे हैं। सोच में बदलाव आ रहा है- लोग अब नौकरी खोज नहीं रहे, बल्कि नौकरी दे रहे हैं।”

क्रेडिट फ्लो में आई बढ़त

SBI की रिपोर्ट्स के अनुसार, मुद्रा योजना के कारण ही सूक्ष्म, लघु एवँ मध्यम उद्योग (एमएसएमई) के क्रेडिट फ्लो में उछाल देखा गया है। एमएसएमई का ऋण वित्त वर्ष 2014 में ₹8.51 लाख करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2024 में ₹27.25लाख करोड़ हो गया है। 2025 में इसके ₹30 करोड़ तक जाने का अनुमान लगाया जा रहा है। बैंक के क्रेडिट में एमएसएमई की हिस्सेदारी वित्त वर्ष 2014 में 15.8% से बढ़कर 2024 में लगभग 20% तक हो गई। यह भारतीय अर्थव्यवस्था में एमएसएमई की बढ़ती भूमिका को भी दर्शाता है।

इस विस्तार से छोटे कस्बों और और ग्रामीण क्षेत्रों में व्यापार को वित्तीय सहायता पाने के लिए सक्षम बनाया है, जो पहले संभव नहीं था। इससे भारत की आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था बेहतर हुई और जमीनी स्तर पर रोजगार सृजन को बढ़ावा मिला है।

मुद्रा योजना से जुड़े व्यवसायों से 2015 से 2018 के बीच लोगों को एक करोड़ से अधिक नौकरियाँ मिली। महिलाओं और सामाजिक रूप से कमजोर समुदाय को मुद्रा योजना सशक्त बना रही है। इस योजना के तहत सबसे बड़ी उपलब्धियों में एक यह भी है कि कुल लाभार्थियों में से 68% महिलाएँ हैं। मुद्रा योजना ने महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने और देश भर में महिला उद्यमियों के आगे बढ़ाने में सहायता की है।

वित्त मंत्रालय के अनुसार, वित्त वर्ष 2016 और 2025 के बीच, मुद्रा योजना के तहत प्रति महिला कंपाउंड एनुअल ग्रोथ रेट (CAGR) की दर 13% तक बढ़कर ₹62,679 हो गई। वहीं, प्रति महिला वृद्धिशील जमा राशि 14% की CAGR से बढ़कर 95,269 रुपए हो गई। महिलाओं को अधिक फंड देने वाले राज्यों में महिलाओं द्वारा संचालित एमएसएमई उद्यमों के जरिए अधिक रोजगार मिला है।

महिला सशक्तिकरण की दिशा में, पीएम मुद्रा योजना की समावेशी दृष्टिकोण ने पारंपरिक ऋण बाधाओं को तोड़ा है। SBI की एक रिपोर्ट के अनुसार, 50% मुद्रा खाते SC, ST और OBC उद्यमियों के पास हैं जिससे वित्त की व्यापक पहुँच को दर्शाता है। साथ ही 11% मुद्रा ऋण धारक अल्पसंख्यक समुदाय से हैं, जिससे इस योजना के हाशिए पर पड़े समुदायों को औपचारिक अर्थव्यवस्था में सक्रिय भागीदार बनने में सक्षम बनाया है।

एक दशक में खुले 52 करोड़ ऋण अकाउंट

पिछले 10 वर्षों में मुद्रा योजना ने 52 करोड़ से अधिक ऋण खाते खोलने में सहायता की, जो उद्यमशीलता की गतिविधि में बढ़ोतरी द्खाता है। किशोर लोन के शेयर (50,000 से 5 लाख रुपए) वित्त वर्ष 2016 में 5.9% से बढ़कर 2025 में 44.7% हो गए हैं। ये छोटे उद्योगों की असल प्रगति को दिखाता है। तरुण श्रेणी (5 लाख से 10 लाख रुपए) में भी तेजी आ रही है जो यह सिद्ध करती है कि मुद्रा योजना महज व्यवसाय शुरू करने के बारे में नहीं पर साथ ही उन्हें बढ़ाने में मदद करती है।

आधिकारिक आँकड़े बताते हैं कि औसत ऋण का आकार तीन गुणा तक बढ़ गया है। 2016 में यह 38 हजार रुपए था, 2023 में 72 हजार रुपए हुआ और 2025 में 1.02 लाख रुपए तक हो गया है। यह बढ़ती अर्थव्यवस्थाओं और बाजार की गहराई को दर्शाता है। इसके अलावा वित्त वर्ष 2023 में ऋण वितरण में 36 फीसद की बढ़त दर्ज हुई, जो देश भर में उद्यमशीलता के विश्वास के साथ पुनरुद्धार के संकेत हैं।

तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश में सबसे अधिक मुद्रा ऋण वितरण

वित्त मंत्रालय ने अपने एक बयान में कहा कि 28 फरवरी 2025 तक तमिलनाडु ने ₹3,23,647.75 करोड़ के साथ सबसे अधिक ऋण वितरण दर्ज किया है। वहीं, उत्तर प्रदेश इसमें ₹3,14,360.86 करोड़ के साथ दूसरे स्थान पर हैं। इसमें कर्नाटक ₹3,02,146.41 करोड़ के साथ तीसरे स्थान पर हैं। इनके बाद पश्चिम बंगाल, बिहार, महाराष्ट्र का स्थान है। केंद्र शासित प्रदेशों में जम्मू और कश्मीर में 21,33,342 ऋण खातों में ₹45,815.92 करोड़ के साथ ऋण वितरण में सबसे आगे है।

देश भर में लोगों की बदली जिंदगी

दिल्ली में अपने घर पर रहकर कपड़े सिलने का काम करने वाली कमलेश ने अपना काम बढ़ाया, तीन अन्य महिलाओं को रोजगार दिया और अपने बच्चों को एक अच्छे स्कूल में पढ़ा रही हैं। बिंदू ने रोजाना 50 झाड़ू से व्यवसाय शुरू किया, अब 500 झाड़ू रोजाना की एक यूनिट शुरू कर चुकी हैं। मंत्रालय के अनुसार, अब ये अपवाद नहीं है। लोग बड़े कदम बढ़ा रहे हैं और आगे बढ़ रहे हैं।

पूर्व जज के खिलाफ रेप केस सुप्रीम कोर्ट ने किया खारिज, शादी का झाँसा दे यौन शोषण का था आरोप: कहा- सहमति से बने संबंध, रिश्ते बिगड़ने पर दर्ज कराया मामला

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (7 अप्रैल, 2025) को एक पूर्व जज को बड़ी राहत दी है। उस पर बलात्कार, धोखाधड़ी और धमकी का आरोप है। महिला ने दावा किया है कि पूर्व न्यायिक अधिकारी ने शादी का झूठा वादा किया और उसका शोषण किया था।

जस्टिस BV नागरत्ना और सतीश चंद्र शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि पूर्व अधिकारी और महिला दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे और महिला को पूरी जानकारी थी कि पुरुष शादीशुदा है। हालाँकि, वो अपने पार्टनर से अलग रहता था।

कोर्ट ने कहा कि महिला इस रिश्ते के परिणाम को अच्छी तरह से जानती थी और रिश्ते में खटास आने के बाद उसने आपराधिक मुकदमा दायर किया था।

सहमति से संबंध के बाद विवाह के लिए मजबूर नहीं कर सकते: कोर्ट

कोर्ट ने इस बात पर जोर दिया कि यदि कोई एक पक्ष दूसरे से अलग होने का निर्णय ले लेता है तो उसे संबंध से हटने का अधिकार है। सहमति से बनाए गए संबंधों के आधार पर शादी करने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता।

खंडपीठ ने कहा, “हमने पाया है कि रिश्तों में खटास आने पर आपराधिक कार्यवाही शुरू करने की प्रवृत्ति बढ़ रही है। हर सहमति पर आधारित संबंध, जिसमें विवाह की संभावना हो सकती है, यदि बाद में रिश्ता टूट जाए तो उसे झूठे विवाह के बहाने का रंग नहीं दिया जा सकता।” सुप्रीम कोर्ट फरवरी 2024 के कलकत्ता उच्च न्यायालय के उस आदेश के खिलाफ अपील पर सुनवाई कर रहा था, जिसमें 2015 के मामले से पूर्व न्यायिक अधिकारी को बरी करने से इनकार कर दिया था।

शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि वह हल्दिया में तत्कालीन न्यायाधीश से अपने तलाक के केस के दौरान मिली थी। उसने दावा किया कि न्यायाधीश ने उससे शादी करने का वादा किया, आर्थिक मदद की और कुछ दिनों तक उसके साथ शारीरिक संबंध भी बनाए।

महिला ने आरोप लगाया कि तलाक हो जाने के बाद पूर्व जज उससे मिलने में आनाकानी करने लगा और धीरे-धीरे सारे संपर्क तोड़ दिए। पहले न्यायाधीश ने उसके बेटे की परवरिश का खर्च भी उठाने की बात कही थी लेकिन बाद में मुकर गया।

दिल्ली में 19 साल के हिमांशु को चाकुओं से गोद डाला, क्योंकि मुस्लिम लड़की से की शादी: शाहरुख ने अपने भाई साहिल के साथ मिलकर मार डाला

दिल्ली के गोकुलपुरी इलाके में मुस्लिम लड़की से प्यार और शादी करने पर हिंदू युवक की हत्या कर दी गई। सोमवार (7 अप्रैल 2025) की रात 19 साल के हिमांशु की चाकुओं से गोदकर हत्या कर दी गई।

हिमांशु का कसूर बस इतना था कि उसने एक मुस्लिम लड़की से दोस्ती की थी, जो बाद में शादी तक पहुँच गई। इस बात से नाराज लड़की के भाई शाहरुख (19) और उसके बड़े भाई साहिल (22) ने मिलकर हिमांशु की जान ले ली। ये खबर सुनते ही मृतक के परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने सड़क जाम कर इंसाफ की माँग की, जिससे इलाके में हंगामा मच गया।

जानकारी के मुताबिक, हिमांशु और शाहरुख की 16 साल की बहन में पहले दोस्ती थी। बाद में दोनों ने लव मैरिज कर ली। ये बात लड़की के परिवार को इतनी नागवार गुजरी कि शाहरुख और साहिल ने हिमांशु को रास्ते से हटाने की ठान ली। सोमवार देर रात मौका देखकर दोनों ने चाकुओं से ताबड़तोड़ वार किए और हिमांशु को बचने का कोई मौका तक नहीं दिया।

घटना की खबर फैलते ही गोकुलपुरी में सन्नाटा पसर गया। मृतक के परिजनों का गुस्सा सड़कों पर फूट पड़ा। उन्होंने सड़क जाम कर पुलिस से सख्त कार्रवाई की माँग की। हालात बिगड़ते देख पुलिस ने इलाके में भारी बल तैनात कर दिया, ताकि कोई अनहोनी न हो।

पुलिस ने फौरन एक्शन लिया और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर दोनों आरोपित भाईयों शाहरुख और साहिल को गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में पता चला कि अपनी बहन के साथ हिमांशु की शादी से शाहरुख इतना नाराज था कि उसने अपने बड़े भाई साहिल के साथ मिलकर हत्या की साजिश रची। ये भी खुलासा हुआ कि हिमांशु का पहले कुछ आपराधिक मामलों से नाम जुड़ा था, जब वो नाबालिग था। लेकिन इस बार उसकी जान लेने की वजह सिर्फ उसकी शादी थी।

हिमांशु की हत्या ने न सिर्फ एक परिवार को तोड़ा, बल्कि पूरे इलाके में डर और तनाव फैला दिया। पुलिस अब मामले की गहराई से जाँच कर रही है, ताकि पूरी सच्चाई सामने आए।

जयपुर की अदालत सुना रही थी सजा, हँस रहे थे आतंकी; शायरी पढ़ रहे थे उनके वकील: 4 को उम्रकैद, सीरियल ब्लास्ट में 71 लोगों की हुई थी मौत

राजस्थान की राजधानी जयपुर में 17 वर्ष पूर्व हुए बम ब्लास्ट के बाद मिले ज़िंदा बम के मामले में 4 आतंकियों को विशेष अदालत ने सज़ा सुनाई है। स्पेशल कोर्ट ने 600 पन्नों का फ़ैसला सुनाया। शुक्रवार (4 अप्रैल, 2025) को ही सैफुर्रहमान, मोहम्मद सैफ, मोहम्मद सरवर आजमी और शाहबाज अहमद को इस मामले में दोषी ठहराया जा चुका था। याद दिला दें कि 13 मई, 2008 को जयपुर में 8 सीरियल ब्लास्ट हुए थे। वहीं चाँदपोल बाजार में स्थिर गेस्ट हाउस के पास से नौवाँ ज़िंदा बम बरामद हुआ था।

इन धमाकों में 71 लोगों की मौत हुई थी और 185 घायल हुए थे। बड़ी बात ये है कि सज़ा सुनाए जाने के दौरान भी इन आतंकियों के चेहरे पर जरा सी भी शिकन नहीं थी, न ही उन्हें अपने कृत्य पर पछतावा था। चारों आतंकी अदालत में और बाहर निकलते समय मुस्कुराते-हँसते नज़र आए। आतंकियों के वकील ने इस दौरान शायरी के जरिए ये जताने की कोशिश की कि ये सभी निर्दोष हैं। उसने कहा, “तुम्हारा शहर, तुम ही कातिल तुम ही मुद्दई, तुम ही मुंशिफ – हमें यकीन है, गलती हमारी ही निकलेगी।”

हालाँकि न्यायाधीश रमेश कुमार जोशी ने शायरी का जवाब शायरी से ही दिया। उन्होंने कहा, कुदरत के फैसले पर कभी शक मत करना ,अगर सजा मिल रही है तो गुनाह भी हुआ होगा, सबसे बड़ा न्यायालय हमारा मन होता है, क्या सही है और क्या गलत उसे सब पता होता है, राह गलत नहीं होती है गलत तो चुनाव होता है।” बता दें कि बम ब्लंट करने के लिए इन्होंने एक नाबालिग के साथ मिलकर रेकी की थी। शाहबाज़ ने एक साइबर कैफे में जाकर ‘इंडियन मुजाहिद्दीन’ के नाम से धमाकों की जिम्मेदारी ली थी।

कोर्ट में सज़ा सुनाए जाने के बाद जब एक आतंकी को पुलिस जेल लेकर जा रही थी, तब वो मुस्कुरा रहा था। वहीं एक आतंकी तो पुलिस की वैन में बैठकर बाहर उँगली भी दिखा रहा था। सीरियल ब्लास्ट के मामले में शाहबाज़ को छोड़कर अन्य को फाँसी की सज़ा सुनाई गई थी, लेकिन फिर हाईकोर्ट ने इन्हें बरी कर दिया था। राज्य सरकार इस फ़ैसले के ख़िलाफ़ सुप्रीम कोर्ट गई है। 12 आतंकी बस में बम लेकर दिल्ली से जयपुर गए थे। इन्होंने 9 साइकिल खरीदीं और अलग-अलग स्थानों पर बम उसपर रखकर पार्क कर दी।

इसके बाद ये आतंकी शताब्दी एक्सप्रेस ट्रेन पकड़कर वापस दिल्ली पहुँच गए। फिर इन्होंने बम ब्लास्ट के बाद हुई दहशत को न्यूज़ चैनलों पर देखा। उत्तर प्रदेश के साहिबाबाद स्थित एक साइबर कैफे से मेल करके जिम्मेदारी ली गई। शाम के 7:20 और 7:36 के बीच 8 बम फट चुके थे। ज़िंदा बम मिलने के मामले में ATS ने दिसंबर 2019 सप्लीमेंट्री चार्जशीट दायर की थी। इस मामले में 112 गवाहों के बयान लिए गए। सबूतों की कमी के कारण आतंकियों को बरी किया गया था।

थाने में हाजिर हुआ सपा MP जियाउर्रहमान बर्क, 10 वकील लेकर आया था-SIT ने ढाई घंटे की पूछताछ: जामा मस्जिद के सदर ने संभल हिंसा का बताया था ‘साजिशकर्ता’

संभल की शाही जामा मस्जिद में नवंबर 2024 को सर्वे के दौरान भड़की हिंसा के मामले में एसआईटी टीम जाँच कर रही है। इसी कड़ी में मंगलवार (8 अप्रैल 2025) को समाजवादी पार्टी के सांसद जियाउर्रहमान बर्क से SIT ने करीब ढाई घंटे तक पूछताछ की।

पूछताछ के दौरान थाने के अंदर का माहौल गर्म था, मानो हर सवाल के साथ हिंसा की परतें खुल रही हों। मस्जिद कमेटी के सदर जफर अली ने गिरफ्तारी के बाद पूछताछ में बर्क का नाम लिया था, जिसके बाद SIT की नजरें सांसद पर टिक गईं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, सुबह 11 बजे बर्क अपने 10 वकीलों की ‘फौज’ के साथ संभल के नखासा थाने पहुँचा। बाहर निकलते वक्त बर्क ने कहा, “ये जाँच का मामला है, इस पर क्या बोलूँ?” बर्क ने कहा कि एसआईटी ने जो सवाल उनसे पूछे, उन्होंने सभी के जवाब दे दिए हैं।

SIT इंचार्ज कुलदीप कुमार ने बताया, “24 नवंबर 2024 की हिंसा के सिलसिले में बर्क को बुलाया गया था। ढाई-तीन घंटे तक पूछताछ हुई, उनका बयान दर्ज किया गया। जरूरत पड़ी तो फिर बुलाएँगे।”

जानकारी के मुताबिक, पूछताछ में बर्क से कई तीखे सवालों का सामना करना पड़ा। क्या उन्होंने भीड़ को भड़काया? क्या जफर अली के साथ मिलकर साजिश रची? सर्वे के दौरान अचानक 700-800 लोगों की भीड़ कैसे जुट गई? FIR में साफ लिखा है कि सुहैल इकबाल ने भीड़ को उकसाया और कहा, “सांसद बर्क हमारे साथ हैं, अपने मंसूबे पूरे करो।” इसके बाद पत्थरबाजी और गोलीबारी शुरू हो गई। एक गोली तो सीधे सीओ के पैर में लगी। क्या ये सब सुनियोजित था?

बर्क ने थाने पहुँचने से पहले कहा, “मैं कानून और संविधान में विश्‍वास रखता हूँ। न्‍यायपालिका में मेरी आस्‍था है। आज मेरी तबीयत ठीक नहीं थी। मेरे डॉक्‍टर ने मुझे आराम करने की सलाह दी है, लेकिन इसके बावजूद मैं थाने जा रहा हूँ ताकि पुलिस प्रशासन को यह ना लगे कि मैं जाँच में सहयोग नहीं कर रहा हूँ।”

बता दें कि जफर अली ने SIT को बताया कि बर्क ने 23 नवंबर की रात उनसे फोन पर बात की थी। पुलिस की चार्जशीट में दावा है कि दोनों ने मिलकर हिंसा की साजिश रची। बर्क का नाम अब सिर्फ हिंसा से ही नहीं, बल्कि उनके मकान निर्माण के मामले से भी जुड़ गया है। नपाई हो चुकी है, कई नोटिस जारी हुए, 500 रुपये का जुर्माना भी लगा। लेकिन बर्क जवाब देने से कतराते रहे। बहरहाल, सच जो भी हो, संभल की गलियों में अभी भी डर और सवाल बाकी हैं।

‘सारे बॉयफ्रेंड चुप थे, तब मैं खड़ा हुआ’: ‘इंटरनेशनल लेडी’ पर भिड़े TMC के 2 सांसद, कीर्ति आज़ाद से बोले कल्याण बनर्जी – दम है तो मुझे गिरफ़्तार करवाओ

तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) के सांसदों में आपस में ही रार छिड़ गई है। TMC के सांसदों की Whatsapp ग्रुप चैट की स्क्रीनशॉट वायरल हो गई है। भाजपा नेताओं ने भी इसे हाथोंहाथ लिया है और इसे लेकर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना भी हो रही है। चैट की शुरुआत में कल्याण बनर्जी ने लिखा है, “मैं कोलकाता पहुँच चुका हूँ। अपनी BSF और दिल्ली पुलिस को मुझे गिरफ़्तार करने के लिए भेजो। इंटरनेशनल ग्रेट लेडी, गृह मंत्रालय में तुम्हारे संपर्क काफ़ी मजबूत हैं।”

ये साफ़ नहीं है कि कल्याण बनर्जी यहाँ ‘इंटरनेशनल ग्रेट लेडी’ किसे बोल रहे हैं। कल्याण बनर्जी आगे लिखते हैं कि वो उस सज्जन को बधाई देना चाहते हैं जिसने ‘बहुमुखी प्रतिभा की धनी इंटरनेशनल लेडी’ की ‘सुंदर गतिविधियों’ का भंडाफोड़ किया। कल्याण बनर्जी लिखते हैं कि उस दिन उसका एक भी बॉयफ्रेंड उसके साथ खड़ा नहीं हुआ, लेकिन वो ‘मूर्ख’ व्यक्ति जिसे वो BSF से गिरफ़्तार कराना चाहती थीं वो उसके पीछे खड़ा था। इसके बाद कल्याण बनर्जी ने लिखा है कि आज एक 30 साल पुराना खिलाड़ी उन्हें गिरफ़्तार कराने के लिए उस महिला के पीछे खड़ा है।

बता दें कि कल्याण बनर्जी पश्चिम बंगाल के श्रीरामपुर से लोकसभा सांसद हैं। उन्होंने 2024 में लगातार चौथी बार इस सीट से जीत दर्ज की है। 1980 के दशक में भारतीय क्रिकेट टीम की तरफ से खेल चुके कीर्ति आज़ाद व्हाट्सएप्प पर ही कल्याण बनर्जी के इस मैसेज पर उखड़ गए। उन्होंने कल्याण बनर्जी को शांत होने की नसीहत देते हुए कहा कि वो नादाँ बच्चों की तरह हरकतें कर रहे हैं। कीर्ति आज़ाद ने कल्याण बनर्जी से कहा कि ‘दीदी’ ने आपको सबको साथ लेकर चलने की एक बड़ी जिम्मेदारी सौंपी है।

वर्धमान-दुर्गापुर से सांसद कीर्ति आज़ाद ने कल्याण बनर्जी को शांत होकर सो जाने की सलाह देते हुए आगे लिखा, “मेरा आपसे कोई व्यक्तिगत झगड़ा नहीं है, इसीलिए राजनीति न सही लेकिन उम्र में मेरे से बड़े होने के नाते मैं अपील करता हूँ कि आप सबको साथ लेकर चलिए। अपनी बचकानी और अस्थिर हरकतें बंद कीजिए। एक समझदार इंसान की तरह बर्ताव कीजिए, किसी को भड़काइए मत। ठण्डे दिमाग से सोचिए।” इसके बाद ‘शुभ रात्रि’ कहकर कीर्ति आज़ाद ने इतिश्री कर ली।

कीर्ति आज़ाद के इस जवाब से कल्याण बनर्जी और बिदक गए। उन्होंने कीर्ति आज़ाद के राजनैतिक इतिहास को लेकर बात करनी शुरू कर दी। कल्याण बनर्जी ने लिखा, “आप मुझे सलाह मत दीजिए, कीर्ति। आपको आंतरिक राजनीति करने के लिए भाजपा से बाहर फेंक दिया गया था। कल को आप पार्टी को बेचना चाह रहे थे। आप अभी भी आंतरिक राजनीति में कप्तान हैं। आप इतने लोकप्रिय हैं कि चुनाव हार गए। मुझे गिरफ़्तार करवा के अपनी ‘दोस्त’ के सामने अपनी ताक़त साबित कीजिए।”

साथ ही कल्याण बनर्जी ने ये भी धमकाया कि वो दुर्गापुर पहुँचकर कीर्ति आज़ाद की पोल खोलेंगे। साथ ही उन्होंने जवाब दिया कि वो 2011 से ही अपनी जिम्मेदारियों को निभा रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कीर्ति आज़ाद व अन्य लोग साजिशें रच रहे हैं। साथ ही याद दिलाया कि ये लोग पार्टी में तब आए हैं, जब ये सत्ता में है। वहीं कृष्णानगर से TMC की संसद महुआ मोइत्रा के पूर्व पार्टनर व अधिवक्ता जय अनंत देहाद्राई ने भी इस पूरे प्रकरण पर प्रतिक्रिया दी है।

याद दिला दें कि जय अनंत देहाद्राई ने महुआ मोइत्रा पर अपने कुत्ते की चोरी का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा कि कल्याण बनर्जी पीड़ितों की उस लंबी सूची में सबसे ताज़ा हैं, जिसमें मनुष्य से लेकर जानवर तक शामिल हैं। जय अनंत देहाद्राई ने भी ‘इंटरनेशनल लेडी’ की तरफ इशारा करते हुए कहा कि मानसिक रूप से अस्थिर और भावनात्मक रूप से संतुलित व्यक्ति ने लगातार परेशान करके धमकाया है। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि उसकी मूल प्रवृति एक विक्षिप्त अपराधी की है।

शकीदुल, दुलाल अख्तर, सद्दाम हुसैन… ‘किन्नर’ बन दिल्ली में छिपे थे बांग्लादेशी घुसपैठिए, 7 दिनों की निगरानी के बाद पुलिस ने दबोचा: IMO ऐप का कर रहे थे इस्तेमाल

दिल्ली के जहाँगीर पुरी में पुलिस ने सनसनीखेज तरीके से पाँच अवैध बांग्लादेशियों को धर दबोचा। ये लोग कोई साधारण घुसपैठिए नहीं हैं, बल्कि इन्होंने अपनी पहचान छिपाने के लिए ट्रांसजेंडर का रूप धारण कर रखा था। पकड़े गए लोगों ने हार्मोनल इंजेक्शन और सर्जरी तक करा डाली थी, ताकि उन पर शक न किया जा सके। हालाँकि दिल्ली पुलिस ने उन्हें धर दबोचा और अब इन बांग्लादेशी घुसपैठियों को वापस डिपोर्ट करने की तैयारी चल रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, उत्तर-पश्चिम जिला पुलिस ने सात दिन की कड़ी रेकी और तकनीकी जाँच के बाद सोमवार (7 अप्रैल 2025) की सुबह जाल बिछाया। जिसमें जहाँगीर पुरी मेट्रो स्टेशन के पास से मो. शकीदुल (24, शेरपुर), मो. दुलाल अख्तर उर्फ हज़ेरा बीबी (36, जमालपुर), मो. आमिरुल इस्लाम उर्फ मोनिका (31, ढाका), मो. माहिर उर्फ माहि (22, टांगाइल) और सद्दाम हुसैन उर्फ रुबीना (30, दिनाजपुर) को पकड़ा गया। बांग्लादेशी घुसपैठियों के पास से सात मोबाइल फोन बरामद हुए, जिनमें प्रतिबंधित IMO ऐप इंस्टॉल था। इस ऐप से ये बांग्लादेश में अपने परिवार से गुपचुप बात करते थे।

जानकारी के मुताबिक, एजेंटों की मदद से ये लोग भारत में घुसे थे। भारत में अवैध तरीके से रहते हुए वो पकड़े न जाएँ, इसके लिए उन्होंने हार्मोनल इंजेक्शन से लेकर सर्जरी तक का सहारा लिया और ट्रांसजेंडर बन कर जिंदगी काट रहे थे। पुलिस को पता चला कि ये लोग ट्रेनों के जरिए दिल्ली पहुँचे और भीख माँगने जैसी गतिविधियों में लिप्त थे।

इस पूरे मामले में बड़ा सवाल ये भी है कि क्या सिर्फ जीवन यापन के लिए इन घुसपैठियों ने ट्रांसजेंडर बनने जैसा कदम उठाया, या इसके पीछे कोई और मोटिव भी था? बहरहाल, दिल्ली पुलिस अब इनकी मंशा खंगाल रही है। पकड़े गए सभी आरोपितों को आरके पुरम के एफआरआरओ को सौंप दिया गया है और प्रत्यर्पण की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।