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OpIndia इम्पैक्ट: रामनवमी पर गुंडई कर रहा था हिस्ट्रीशीटर वाजिद शाह, अहमदाबाद पुलिस ने 3 को दबोचा; SC-ST सेल कर रही जाँच

अहमदाबाद में रामनवमी के मौके पर बीजेपी कार्यकर्ताओं को गालियाँ देने, बीजेपी के झंडों को फाड़ने और हिंदुओं को निशाना बनाने वाले कुख्यात बदमाश वाजिद शहंशाह को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ये गिरफ्तारी ऑपइंडिया की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट के बाद की गई।

खुद अहमदाबाद पुलिस ने वाजिद की गिरफ्तारी की सूचना दी है। यही नहीं, वाजिद के साथ ही उसके 2 अन्य साथियों को भी गिरफ्तार किया गया है।

बता दें कि रामनवमी (6 अप्रैल 2025) को अहमदाबाद के दानीलिमडा में वाजिद शहंशाह ने तनाव फैलाने की कोशिश की थी। दरअसल, रविवार (6 अप्रैल 2025) को रामनवमी के त्योहार के साथ ही भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस भी था। इस मौके पर अगले दिन यानी सोमवार (7 अप्रैल 2025) को पीरकमल मस्जिद के पास स्वामीनारायण हॉस्टल के मैदान में दानीलिमडा विधानसभा क्षेत्र का कार्यकर्ता सम्मेलन भी आयोजित किया जाना था। इसके साथ ही त्योहार का जश्न भी मनाया जाना था। इसकी तैयारियों के लिए दानीलिमडा वार्ड के बीजेपी अध्यक्ष भौमिक और अन्य कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल के पास बीजेपी के झंडे लगा रहे थे और लहरा रहे थे। इसी बीच वाजिद शहंशाह नाम का कुख्यात दंगाई मौके पर पहुँचा और उसने बीजेपी के झंडों को न सिर्फ उतारा, बल्कि फाड़कर फेंकने भी लगा।

यही नहीं, उसने बीजेपी कार्यकर्ताओं को जमकर गालियाँ भी दी। इस दौरान भौमिक व अन्य लोगों ने जब उसे रोकने की कोशिश की, तो वो जातिसूचक गालियाँ भी देने लगा और धक्का देकर उन्हें वहाँ से भगा दिया। इस दौरान ही दोनों ही तरफ से लोग जुटने लगे। जिसमें काफी संख्या मुस्लिमों की रही। हालाँकि इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने शहंशाह की कारगुजारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर शहंशाह और उसके साथी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की।

शिकायतकर्ता भौमिक सोखड़िया दानीलिमडा के बीजेपी वार्ड अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा, “सोमवार के कार्यक्रम के लिए मैं कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के झंडे लगा रहा था। उसी समय वाजिद शहंशाह नाम का कुख्यात बदमाश वहाँ पहुँचा। उसने गालियाँ देते हुए झंडे उखाड़ फेंके। हमारे विरोध करने पर उसने मुझे धक्का दिया और जातिसूचक गालियाँ देने लगा। उसने पीएम मोदी को लेकर भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया।”

बहरहाल, अब अहमदाबाद पुलिस ने आरोपित शहंशाह और उसके साथियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। इस मामले की जाँच एससी-एसटी सेल को सौंपी गई है।

होटल, कैफे, गोदाम… हर जगह किया रेप, नशा दे-देकर 7 दिन में 23 लोगों ने की दरिंदगी: वाराणसी गैंगरेप में दर्ज FIR की हर एक डिटेल

वाराणसी गैंगरेप में एफआईआर से चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। शुरुआत में खबर आई थी कि बॉयफ्रेंड ने अपने 6 दोस्तों के साथ मिलकर 19 साल की युवती का कार में रेप किया। लेकिन एफआईआर के मुताबिक 7 दिनों तक युवती ने हैवानियत झेली। इस दौरान 23 लोगों ने उसके साथ जबर्दस्ती की।

हुक्का बार, होटल, लॉज, कैफे कई जगह उससे रेप हुआ। इस दौरान उसे नशीला पदार्थ भी दिया गया। एफआईआर में 12 नामजद और 11 अज्ञात आरोपित बनाए गए हैं। इनमें से 9 को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है।

दरिंदगी की शुरुआत 29 मार्च 2025 को हुई थी। युवती अपनी सहेली से मिलने उसके घर गई थी। लेकिन वापस नहीं लौटी। 4 अप्रैल तक बारी-बारी से आरोपितों ने उससे रेप किया। 7 अप्रैल को पीड़िता की माँ की शिकायत के आधार पर पुलिस ने केस दर्ज किया।

FIR में दर्ज है हर एक दरिंदगी

ऑपइंडिया के पास एफआईआर की कॉपी है। इसमें घटना का पूरा विवरण दर्ज है। इसके अनुसार पीड़िता वाराणसी के लालपुर पांडेयपुर थाना क्षेत्र की रहने वाली है। 29 मार्च की रात वह अपनी एक सहेली के घर गई थी। वहाँ से लौटते समय उसे रास्ते में राज विश्वकर्मा मिला। दोनों पहले से परिचित हैं। विश्वकर्मा उसे अपने कैफे ले गया जो वाराणसी के लंका में स्थित है। यहाँ उसने रातभर युवती का रेप किया।

अगले दिन 30 मार्च को किसी तरह कैफे से निकली पीड़िता को समीर मिला। जो उसे अपने दोस्त के साथ बाइक पर ले गया। गलत हरकत कर उसे नदेसर के पास छोड़ दिया। 31 मार्च को पीड़िता के पास आयुष आया। उसके साथ सोहेल, दानिश, अनमोल, साजिद और जहीर नाम के उसके 5 दोस्त भी थे।

ये लोग पीड़िता को अपने दोस्त के मलदहिया स्थित कॉन्टिनेंटल कैफे लेकर गए। वहाँ युवती को नशीला पदार्थ पिलाया। फिर एक-एक कर कैफे के ही एक कमरे में उसके साथ रेप किया। इनलोगों ने पीड़िता को धमकी भी दी।

इसके बाद 1 अप्रैल को साजिद अपने दोस्तों के साथ गर्ल्स हॉस्टल के नाम पर एक होटल में ले गया। यहाँ तीन अज्ञात लोग पहले से मौजूद थे। युवती से होटल में मौजूद ग्राहकों का मसाज करने को कहा गया। इनकार करने पर भी आरोपित नहीं माने। इस दौरान भी एक व्यक्ति ने उसका यौन उत्पीड़न किया। फिर उसे होटल से बाहर निकाल दिया गया।

होटल से बाहर किए जाने के बाद इमरान जबर्दस्ती युवती को बाइक पर बिठाकर एक दूसरे होटल ले गया। यहाँ उसने नशीला पदार्थ देकर दुष्कर्म किया। इसके बाद पीड़िता को साजिद अपने दोस्तों के साथ लेकर औरंगाबाद के एक गोदाम में ले गया। यहाँ एक लड़का पहले से मौजूद था, जिसको साजिद जैब नाम से बुला रहा था। यहाँ पर जैब ने युवती के साथ दुष्कर्म किया।

वहां से साजिद अपने दोस्त अमन और एक अन्य व्यक्ति के साथ युवती को एक कमरे पर ले गया। वहाँ साजिद के दो दोस्तों ने युवती के साथ दरिंदगी की। इसके बाद युवती को अनजान सड़क पर छोड़ दिया। पीड़ित युवती ने सिगरा आइपी मॉल के पास पहुँचकर रात गुजारी।

2 अप्रैल को मॉल के पास ही राज खान अपने एक दोस्त के साथ पीड़िता से मिला। उसे हुकुलगंज बगवानाला के एक घर की छत पर ले गए। चाउमीन में नशीला पदार्थ मिलाकर उसे खिलाया और राज खान ने दुष्कर्म किया। इसके बाद नशे की हालत में युवती को अस्सी घाट पर छोड़ दिया।

अगले दिन युवती अपने एक सहेली के घर पहुँची और नशे की हालत में वहीं सो गई। 3 अप्रैल की शाम सहेली के घर से निकलने के बाद युवती को दानिश मिला। वह उसे एक कमरे पर ले गया। जहाँ पहले से सोहेल, शोएब और एक अन्य व्यक्ति मौजूद थे। सभी ने युवती के साथ दुष्कर्म किया। इसके बाद उसे नशे की हालत मे चौकाघाट के पास छोड़ दिया। 4 अप्रैल को पीड़िता किसी तरह पाने घर पहुँची और परिजनों को पूरी घटना के बारे में बताया।

थाना लालपुर-पाण्डेयपुर के DCP चंद्रकांत मीना ने बताया है कि घटनाक्रम 29 मार्च से चार अप्रैल का है। पीड़िता का कहना है कि वह अपनी मर्जी से दोस्त के घर गई थी। 4 अप्रैल को युवती के परिजन ने गुमशुदगी की रिपोर्ट दी थी। उसी दिन युवती मिल गई। इसके बाद छह अप्रैल को सामूहिक दुष्कर्म की शिकायत की गई। इसके आधार पर मुकदमा दर्ज किया गया है। 6 लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है।

ढह गए जर्मनी-जापान-चीन के बाजार, लेकिन भारत ने दिखाया दम: शेयर मार्केट क्रैश के लिए मोदी सरकार को कोसने वालों को पसंद नहीं आएँगे ये आँकड़े

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अन्य देशों से अमेरिका में आने वाले वस्तुओं पर अतिरिक्त शुल्क, यानी टैरिफ लगाते हुए दुनिया भर में ‘टैरिफ वॉर’ छेड़ दिया है। इससे दुनिया भर के शेयर मार्केट धड़ाम हो रहे हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने इसे ‘रेसिप्रोकल टैरिफ’ नाम दिया है, अर्थात जितने टैरिफ अमेरिका से निर्यातित वस्तुओं पर दूसरे देश लगाएँगे, अमेरिका भी उन देशों से आयातित वस्तुओं पर उतना ही कर लगाएगा। चीन ने भी अमेरिका से आने वाले सामानों पर 34% टैरिफ लगाया है, जिसपर ट्रम्प ने 50% और टैरिफ बढ़ाने की चेतावनी दी है।

सोमवार (7 अप्रैल, 2025) को चीन और भारत समेत कई बाजारों में इसका असर देखने को मिला। भारत में तो इस दिन का मार्केट क्रैश देश के इतिहास में मार्केट कैप के मामले में तीसरा सबसे बड़ा है। एक दिन में निवेशकों के 14.20 लाख करोड़ रुपए स्वाहा हो गए। वहीं प्रतिशत के मामले में ये एक दिन में छठा सबसे बड़ा क्रैश है। सेंसेक्स में एक दिन में 2227 पॉइंट्स की गिरावट दर्ज की गई। सबसे ज़्यादा क्षति यहाँ टाटा समूह को पहुँची, जिसे 2.40 लाख करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ा

रिलायंस को 1.30 लाख करोड़ रुपए और अडानी समूह को 61,000 करोड़ रुपए का घाटा हुआ। हालाँकि, इन आँकड़ों के बीच एक आँकड़ा यह भी है कि अप्रैल 2025 के पूरे पहले सप्ताह की बात करें तो बड़े वैश्विक बाजारों में सबसे कम असर भारत पर ही पड़ा। जैसा कि आप नीचे दिए गए टेबल में देख सकते हैं, भारत में निफ्टी एक सप्ताह में 4.33% घटा और सेंसेक्स 3.79%, जबकि अमेरिका, जापान, हॉन्गकॉन्ग, चीन, यूरोप, जापान, दक्षिण कोरिया और जर्मनी में इससे बड़ी गिरावट दर्ज की गई।

IndexCountry/RegionApr 1, 2025Apr 7, 2025Change (%)
Nifty 50भारत23,165.7022,161.60-4.33%
Sensexभारत 76,024.5173,137.90-3.79%
Dow Jonesअमेरिका41,989.9637,879.65-9.78%
Hang Sengहॉन्गकॉन्ग (चीन)23,206.8419,828.30-14.55%
Shanghai Compositeचीन3,348.443,096.58-7.52%
Euro Stoxx 50यूरोज़ोन5,320.304,662.45-12.36%
Nikkei 225जापान35,624.4831,136.58-12.59%
KOSPIदक्षिण कोरिया2,521.392,328.20-7.66%
DAXजर्मनी22,539.9819,689.75-12.64%

ऊपर दी गई तालिका में 1 अप्रैल एवं 7 अप्रैल 2025 के बीच के शेयर बाजारों के अंकों की तुलना की गई है और प्रतिशत के हिसाब से बताया गया है कि किस देश का बाजार कितना गिरा। सबसे अधिक मार हॉन्गकॉन्ग पर पड़ी है, जहाँ का बाजार 14.55% गिर गया, मात्र एक सप्ताह में। उसके बाद जर्मनी को 12.64% जापान को 12.59% और यूरोप को 12.36% की गिरावट झेलनी पड़ी। कई विपक्षी नेता भारत में शेयर मार्केट गिरने के लिए मोदी सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं, उन्हें ये आँकड़े देखने चाहिए।

आतंकी तहव्वुर राणा को भारत आना ही होगा, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने प्रत्यर्पण पर रोक से कर दिया इनकार: 26/11 की रची थी साजिश, दोस्त को मुंबई भेज कराई थी रेकी

मुंबई के 26/11 अटैक के आरोपित आतंकी तहव्वुर राणा की भारत आने से बचने की आखिरी कोशिश नाकाम हो गई। अमेरिका की सुप्रीम कोर्ट ने उसकी वो याचिका ठुकरा दी, जिसमें उसने अपने प्रत्यर्पण पर रोक लगाने की गुहार लगाई थी। अब राणा को भारत लाने का रास्ता साफ हो गया है।

64 साल का तहव्वुर राणा पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है, इस वक्त लॉस एंजिल्स के मेट्रोपॉलिटन डिटेंशन सेंटर में बंद है। उसने अपने बचपन के दोस्त डेविड कोलमैन हेडली की मदद की थी, जिसने मुंबई में हमले की जगहों की रेकी की थी। भारत लंबे वक्त से उसे अपने यहाँ लाने की माँग कर रहा था, और अब ये माँग पूरी होने वाली है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, राणा ने अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट में 27 फरवरी 2025 को ‘इमरजेंसी एप्लिकेशन फॉर स्टे’ दायर की थी। ये याचिका जस्टिस एलेना कागन के पास भेजी गई थी, जो सुप्रीम कोर्ट की एसोसिएट जस्टिस और नाइंथ सर्किट की जस्टिस हैं। उसने दावा किया था कि भारत आने पर उसकी जान को खतरा है और उसे टॉर्चर का शिकार होना पड़ सकता है। लेकिन पिछले महीने जस्टिस कागन ने उसकी अर्जी खारिज कर दी थी।

इसके बाद उसने फिर कोशिश की, पर इस बार भी सुप्रीम कोर्ट ने कोई राहत नहीं दी। राणा की दलील थी कि उसका पाकिस्तानी मूल और मुस्लिम होना उसे भारत में खतरे में डाल सकता है। मगर कोर्ट ने इसे नहीं माना और भारत प्रत्यर्पण को हरी झंडी दे दी।

इससे पहले, फरवरी में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी राणा के प्रत्यर्पण का ऐलान किया था। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ वॉशिंगटन में हुई एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में ट्रंप ने कहा था, “राणा को भारत भेजा जाएगा, जहाँ उसे इंसाफ मिलेगा।” राणा का नाम डेविड हेडली के साथ जुड़ा है, जो 26/11 हमले का मुख्य साजिशकर्ता था। हेडली ने मुंबई में कई जगहों की रेकी की थी, और राणा ने उसे फर्जी पहचान और पैसे देकर सपोर्ट किया था। अब राणा को भारत में कोर्ट के सामने पेश होना होगा, जहाँ उस पर सख्त कार्रवाई तय मानी जा रही है।

बता दें कि 26 नवंबर 2008 को लश्कर-ए-तैयबा के 10 आतंकियों ने पूरे मुंबई शहर को दहला दिया था। उस रात शुरू हुआ हमला चार दिन तक चला। आतंकियों ने लियोपोल्ड कैफे, छत्रपति शिवाजी टर्मिनस, ताज होटल, ओबेरॉय ट्राइडेंट, कामा हॉस्पिटल, नरीमन हाउस, मेट्रो सिनेमा और सेंट जेवियर कॉलेज को निशाना बनाया। उनके पास भारी मात्रा में हथियार थे—IED, RDX, हैंड ग्रेनेड और AK-47। इस हमले में 166 लोग मारे गए, जिनमें कुछ विदेशी नागरिक भी थे। करीब 300 लोग घायल हुए। NSG, मरीन कमांडो, मुंबई पुलिस, RAF, CRPF और फायर ब्रिगेड ने मिलकर ऑपरेशन चलाया। इस दौरान एक आतंकी अजमल कसाब जिंदा पकड़ा गया, जिसे 2012 में फाँसी दे दी गई।

तहव्वुर राणा इस हमले का बड़ा किरदार था। वो पाकिस्तानी मूल का कनाडाई नागरिक है और शिकागो में ‘फर्स्ट वर्ल्ड इमिग्रेशन सर्विसेज’ नाम की फर्म चलाता था। इस फर्म की एक ब्रांच मुंबई में भी थी, जिसके जरिए उसका दोस्त हेडली भारत आया और हमले की जगहों की रेकी की। राणा और हेडली बचपन के दोस्त थे। दोनों ने पाकिस्तान के हसन अब्दाल कैडेट स्कूल में पढ़ाई की थी। हेडली बाद में अमेरिका चला गया, जहाँ उसकी माँ अमेरिकी और पिता पाकिस्तानी थे। राणा ने पाकिस्तानी सेना में डॉक्टर की नौकरी की, फिर कनाडा जाकर वहाँ की नागरिकता ले ली।

भारत की जाँच एजेंसी NIA ने 405 पन्नों की चार्जशीट में राणा को मुख्य आरोपितों में शामिल किया था। चार्जशीट कहती है कि राणा ने लश्कर-ए-तैयबा और ISI के साथ मिलकर हमले की साजिश रची। उसने हेडली को फर्जी कागजात और पैसा दिया, ताकि वो मुंबई में टारगेट ढूँढ सके। राणा को पता था कि हेडली किससे मिल रहा है और क्या प्लान कर रहा है। उसने हमले की पूरी योजना में साथ दिया। अमेरिकी कोर्ट में राणा ने माना था कि उसे हेडली के लश्कर से रिश्तों की जानकारी थी। FBI ने उसे 2009 में शिकागो से पकड़ा था।

हेडली को भी अमेरिका में 2009 में गिरफ्तार किया गया था। 2013 में उसे 35 साल की सजा सुनाई गई। वो अमेरिकी नागरिक है, और भारत उसका भी प्रत्यर्पण चाहता है। हेडली ने मुंबई में कई जगहों की रेकी की थी-ताज होटल, CST, नरीमन हाउस। राणा ने अपनी फर्म के जरिए हेडली को कवर दिया। चार्जशीट में साफ है कि राणा ने आतंकियों को ठहरने की जगह और टारगेट चुनने में मदद की। वो हमले का ब्लूप्रिंट बनाने में शामिल था।

पेट्रोल-डीजल पर सरकार ने ₹2 प्रति लीटर बढ़ाई एक्साइज ड्यूटी, पर पब्लिक को नहीं देने होंगे ज्यादा पैसे: पेट्रोलियम मंत्रालय ने किया क्लियर, कहा- तेल कंपनियाँ उठाएँगी बोझ

केंद्र सरकार ने पेट्रोल और डीजल पर एक्साइज ड्यूटी में 2 रुपये प्रति लीटर का इजाफा कर दिया गया है। हालाँकि एक्साइज ड्यूटी बढ़ने के बावजूद आम लोगों के लिए पेट्रोल और डीजल के दामों में कोई बढ़ोतरी नहीं हो रही है। वित्त मंत्रालय के रेवेन्यू डिपार्टमेंट ने नोटिफिकेशन जारी कर इसकी जानकारी दी। ये नया नियम 8 अप्रैल 2025 से लागू होगा।

पेट्रोल-डीजल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ने के बावजूद आम लोगों के लिए राहत की बात ये है कि उनकी जेब पर कोई असर नहीं पड़ेगा। पेट्रोलियम एंड नैचुरल गैस मंत्रालय ने ट्वीट कर साफ किया कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियों को हिदायत दी गई है कि वो खुदरा दाम न बढ़ाएँ। यानी ये अतिरिक्त बोझ तेल कंपनियाँ खुद झेलेंगी।

पेट्रोल पर एक्साइज ड्यूटी 19.90 से बढ़कर 21.90 रुपये और डीजल पर 15.80 से 17.80 रुपये प्रति लीटर हो गई है। ये टैक्स रिफाइनरी से ईंधन निकलते वक्त लगता है और सीधे केंद्र सरकार के खजाने में जाता है। राज्य सरकारों को इसमें से कुछ नहीं मिलता। एक्साइज ड्यूटी एक फिक्स्ड राशि होती है, जो कीमत का बड़ा हिस्सा बनाती है और देश के रेवेन्यू का अहम स्रोत है।

बता दें कि पिछले साल सरकार ने विंडफॉल टैक्स को खत्म किया था। ये टैक्स भारत में बने पेट्रोल-डीजल के निर्यात पर लगता था, जब तेल कंपनियाँ मोटा मुनाफा कमा रही थीं। उस वक्त अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम आसमान छू रहे थे और कंपनियों को फायदा हो रहा था। अब एक्साइज ड्यूटी बढ़ाकर सरकार ने फिर से तेल से कमाई का रास्ता चुना है, लेकिन आम आदमी को राहत देने की कोशिश भी की है।

LPG सिलेंडर के दामों में ₹50 की बढ़ोतरी

एक तरफ एक्साइज ड्यूटी बढ़ने के बावजूद पेट्रोल-डीजल के दामों में आम लोगों के लिए कोई बढ़ोतरी नहीं की गई है, तो दूसरी तरफ घरेलू एलपीजी के दामों में 50 रुपये की बढ़ोतरी हुई है। सोमवार (7 अप्रैल 2025) से ये नई कीमत लागू हो गई। दिल्ली में अब 14.2 किलो का घरेलू सिलेंडर 853 रुपये का हो गया है।

उज्जवला योजना के लाभार्थियों के लिए सब्सिडी वाला सिलेंडर 500 से बढ़कर 550 रुपये हो गया। अगस्त 2024 के बाद ये पहली बार है जब घरेलू गैस महँगी हुई है। इससे पहले 1 अप्रैल को कमर्शियल एलपीजी के दाम 41 रुपये घटाए गए थे, जो अब दिल्ली में 1762 रुपये है।

‘ईसाई बनो भाग जाएगी बीमारी, दूर हो जाएगी गरीबी’: रामनवमी के दिन प्रलोभन देकर बिलासपुर में धर्मांतरण की कोशिश, प्रार्थना सभा के नाम पर जुटाए थे 50+ हिंदू-पास्टर समेत 6 गिरफ्तार

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ईसाई मिशनरियों का खेल जोरों पर है। यहाँ धर्मांतरण के कई मामले सामने आ चुके हैं। इस बीच, रामनवमी के दिन हिंदूवादी संगठनों ने सरकंडा थाना क्षेत्र के बहतराई में प्रार्थना सभा के नाम पर हो रहे धर्मांतरण का भंडाफोड़ कर दिया। हिंदूवादी कार्यकर्ताओं ने मौके पर पहुँचकर जमकर नारेबाजी की और हंगामा मचाया। जिसके बाद मौके पर पहुँची पुलिस ने पास्टर दीपक सिंह सिदार समेत 6 लोगों को गिरफ्तार कर लिया।

धर्मांतरण की सूचना पाकर पुलिस भी मौके पर पहुँची। पुलिस के पहुँचते ही माहौल और तनावपूर्ण हो गया। सरकंडा थाना प्रभारी नीलेश पांडेय अपनी टीम के साथ मौके पर पहुँचे। पूछताछ में पता चला कि दीपा गोटेल अपने घर में प्रार्थना सभा करवा रही थीं। वहाँ पास्टर दीपक सिंह सिदार और उनकी पत्नी पूजा सिदार लोगों को मजहबी ज्ञान दे रहे थे। मौके से पुलिस ने दीपा गोटेल, दीपक सिंह सिदार, पूजा सिदार, गुरुविंदर सिंह, शिवकुमार धीवर और मधु कुमार केंवट को पकड़ा और थाने ले आई।

टीआई नीलेश पांडेय ने बताया, “शिकायत मिली थी कि प्रार्थना सभा के बहाने धर्मांतरण हो रहा है। जाँच के बाद छत्तीसगढ़ धर्म स्वातंत्रय अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा रही है।” ऑपइंडिया के पास मौजूद एफआईआर की कॉपी भी इसकी पुष्टि करती है।

पुलिस को दी गई शिकायत में लिखा है, “निखिल आश्रम, अटल आवास में दीपा गोतेल एवं पास्टर दीपक सिंह सिदार और उसकी पत्नी पूजा सिदार के साथ ही गुरुविंदर सिंह, शिवकुमार धीवर और मधु कुमार केवरा के साथ करीब 50 लोगों को हिंदू धर्म छोड़कर ईसाई धर्म अपनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा था।”

हिंदू संगठन के कार्यकर्ता राम सिंह ठाकुर ने कहा, “हर रविवार को बहतराई के अटल आवास में प्रार्थना सभा होती है। रामनवमी के दिन भी चंगाई सभा के बहाने हिंदुओं को बुलाया गया था। ये लोग लालच देकर भोले-भाले लोगों का धर्म बदलवाते हैं।” उन्होंने कहा कि कोनी, सकरी, सिविल लाइन और मस्तूरी के बाद अब सरकंडा में भी ये खेल शुरू हो गया है। उन्होंने जोर देकर कहा, “हम इसे बर्दाश्त नहीं करेंगे।”

स्थानीय लोगों में से एक शख्स ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, “ये लोग पहले प्रलोभन देते हैं, फिर धीरे-धीरे दबाव बनाते हैं। हमारे मोहल्ले के कई लोग इन सभाओं में जा चुके हैं।” हिंदू संगठनों का कहना है कि बिलासपुर को धर्मांतरण का हब बनाने की साजिश रची जा रही है, और वो इसे रोकने के लिए हर कदम उठाएँगे।

एफआईआर की कॉपी

छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में ईसाई मिशनरी लंबे समय से सक्रिय हैं। अभी कुछ समय पहले भी पादरी समेत कई लोगों के खिलाफ मामला दर्ज हुआ था। उस समय हिंदुओं को देवी-देवताओं के खिलाफ ऊल-जलूल बोलकर भ्रमित किया जा रहा था। बहरहाल, पुलिस अब मामले की गहराई से जाँच कर रही है। गिरफ्तार किए गए लोगों से पूछताछ जारी है।

पाकिस्तान के भिखारियों से परेशान सऊदी अरब, भारतीय मुस्लिमों को भी हज के लिए नहीं देगा वीजा: जानिए क्यों 14 देशों के ज़ाइरीन पर लगाया बैन

हर साल लाखों मुस्लिम हज और उमराह के लिए सऊदी अरब जाते हैं। लेकिन, इस बार सऊदी सरकार ने कड़ा कदम उठाते हुए भारत समेत 14 देशों के लोगों के लिए वीज़ा जारी करने पर अस्थायी रोक लगा दी है। सरकार का कहना है कि इन देशों के कई लोग वीज़ा नियमों का पालन नहीं करते और हज में बिना पंजीकरण किए शामिल हो जाते हैं। इस बार सरकार ने सख्त रुख अपनाते हुए कहा कि अगर अब बिना रजिस्ट्रेशन हज में शामिल पाए गए तो पाँच साल तक सऊदी अरब में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।

रिपोर्ट्स के अनुसार, सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने अधिकारियों को हज यात्रा के सुचारू और सुरक्षित संचालन की गारंटी के लिए सख्त वीज़ा नियम लागू करने का निर्देश दिए है। यह प्रतिबंध जून के मध्य तक रहेगा। लगभग उसी समय, जब इस साल की हज यात्रा समाप्त होगी। जिन वीजा पर रोक लगाई गई है, उनमें उमराह वीजा के साथ-साथ बिजनेस और फैमिली विजिट वीजा भी शामिल हैं।

किन देशों पर लगी है पाबंदी?

सऊदी सरकार ने अधिकारिक तौर पर बताया कि भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, इंडोनेशिया, नाइजीरिया, मिस्र, मोरक्को, इथियोपिया, अल्जीरिया, इराक, जॉर्डन सूडान ट्यूनिशिया और यमन के नागरिकों के लिए वीज़ा पर रोक लगाई गई है। अब इन देशों के मुस्लिम नागरिकों को 13 अप्रैल, 2025 तक ही उमराह वीज़ा मिलेगा। इसके बाद हज खत्म होने तक वीज़ा नहीं दिया जाएगा।

क्यों लगाना पड़ा प्रतिबंध?

सऊदी अधिकारियों ने यह कदम लोगों को आधिकारिक अनुमति के बिना हज करने की कोशिश करने से रोकने के लिए उठाया गया है। अधिकारियों का कहना है कि इससे भीड़ और अव्यवस्था बढ़ती है, जिससे गंभीर हादसे होते हैं। इसके अलावा, कुछ लोग हज या उमराह के नाम पर भीख माँगने जैसे काम में भी शामिल पाए गए हैं।

कई लोग उमराह या टूरिस्ट वीज़ा लेकर सऊदी अरब पहुँचते थे और वहाँ रुककर हज में भी हिस्सा लेते थे जबकि हर देश के लिए हज का एक तय कोटा होता है। इससे न केवल नियमों का उल्लंघन होता है बल्कि सुविधाओं पर बोझ भी बढ़ता है।

पिछले साल हज में हुई कई मौतें

बता दें कि वर्ष 2024 के हज के दौरान भारी भीड़ और गर्मी के चलते लगभग 1301 लोगों की मौत हुई थी। सऊदी सरकार का मानना है कि नियम तोड़ने वाले यात्रियों के कारण ये हादसा हुआ था। बिना रजिस्ट्रेशन के भाग लेने वालों की वजह से भीड़ बढ़ी, जिससे स्वास्थ्य और ट्रांसपोर्ट की व्यवस्था बिगड़ गई। इसी को देखते हुए 2025 की आगामी हज में व्यवस्था बनाए रखने के लिए वीज़ा पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है।

हज यात्रा पर जाने वाले भारतीयों की मौत का आँकड़ा

विदेश मंत्रालय के अनुसार, हर साल बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक हज यात्रा के लिए सऊदी अरब जाते हैं। साल 2024 में एक लाख 75 हजार लोग हज के लिए गए थे, जिसमें 98 भारतीयों ने जाने गँवाई थी। साल 2023 में 187 नागरिकों की हज यात्रा के दौरान मौत हुई थी। इस्लाम के 5 स्तंभों में से हज प्रमुख स्तंभ माना जाता है। जो मुस्लिम लोग शारीरिक और वित्तिय रूप से सक्षम हैं उन्हें हज पर जाना अनिवार्य होता है।

सऊदी अरब ने पाकिस्तानी भिखारियों को दी चेतावनी

सऊदी अरब ने सितंबर 2024 में पाकिस्तान को उमराह के बहाने देश में प्रवेश करने वाले पाकिस्तानी नागरिकों को लेकर चेतावनी दी। पाकिस्तान के एक्सप्रेस ट्रिब्यून अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, “सऊदी हज मंत्रालय ने पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय को चेतावनी जारी की, जिसमें पाकिस्तानी भिखारियों को उमराह वीजा के तहत राज्य में प्रवेश करने से रोकने के लिए कार्रवाई करने का आग्रह किया गया है।”

इसके जवाब में पाकिस्तान के धार्मिक मामलों के मंत्रालय ने ‘उमराह अधिनियम’ को लागू करने की योजना बनाने की घोषणा की ताकि उन्हें कानूनी निगरानी में लाया जा सके।

गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने सऊदी राजदूत नवाफ बिन सईद अहमद अल-मल्की को आश्वासन दिया कि सऊदी अरब में भिखारियों को भेजने वाले जिम्मेदार आपराधिक नेटवर्क के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे। संघीय जांच एजेंसी (FIA) को इस कार्रवाई का नेतृत्व करने का काम सौंपा गया है, जिसका उद्देश्य उन माफियाओं को खत्म करना है जो राज्य में भिखारियों के अवैध प्रवेश की सुविधा प्रदान करते हैं।

रामनवमी की तैयारी कर रहे थे हिंदू, हिस्ट्रीशीटर वाजिद शहंशाह ने BJP का झंडा फाड़ दी जातिसूचक गालियाँ : अहमदाबाद की पीर कमाल मस्जिद के पास की घटना

एक तरफ रविवार (6 अप्रैल 2025) को पूरा देश रामनवमी का त्योहार मना रहा था, तो दूसरी तरफ गुजरात के अहमदाबाद में एक कुख्यात मुस्लिम उपद्रवी ‘वाजिद शहंशाह’ शहर की शांति भंग कर रहा था।

वाजिद शहंशाह ने अहमदाबाद के दानीलिमडा में रामनवमी पर आयोजित कार्यक्रम की तैयारी कर रहे हिंदुओं और बीजेपी कार्यकर्ताओं को जमकर गालियाँ दी और मुस्लिमों की भीड़ इकट्ठी कर बवाल की कोशिश की।

दरअसल, रविवार (6 अप्रैल 2025) को रामनवमी के त्योहार के साथ ही भारतीय जनता पार्टी का स्थापना दिवस भी था। इस मौके पर अगले दिन यानी सोमवार (7 अप्रैल 2025) को पीरकमल मस्जिद के पास स्वामीनारायण हॉस्टल के मैदान में दानीलिमडा विधानसभा क्षेत्र का कार्यकर्ता सम्मेलन भी आयोजित किया जाना था। इसके साथ ही त्योहार का जश्न भी मनाया जाना था। इसकी तैयारियों के लिए दानीलिमडा वार्ड के बीजेपी अध्यक्ष भौमिक और अन्य कार्यकर्ता कार्यक्रम स्थल के पास बीजेपी के झंडे लगा रहे थे और लहरा रहे थे। इसी बीच वाजिद शहंशाह नाम का कुख्यात दंगाई मौके पर पहुँचा और उसने बीजेपी के झंडों को न सिर्फ उतारा, बल्कि फाड़कर फेंकने भी लगा।

यही नहीं, उसने बीजेपी कार्यकर्ताओं को जमकर गालियाँ भी दी। इस दौरान भौमिक व अन्य लोगों ने जब उसे रोकने की कोशिश की, तो वो जातिसूचक गालियाँ भी देने लगा और धक्का देकर उन्हें वहाँ से भगा दिया। इस दौरान ही दोनों ही तरफ से लोग जुटने लगे। जिसमें काफी संख्या मुस्लिमों की रही। हालाँकि इसके बाद बीजेपी कार्यकर्ताओं ने शहंशाह की कारगुजारियों के खिलाफ प्रदर्शन किया और सड़क जाम कर शहंशाह और उसके साथी आरोपितों की गिरफ्तारी की माँग की।

बीजेपी कार्यकर्ताओं ने हमलावरों की पहचान और उनकी कारगुजारियों के वीडियो और तस्वीर वाले सबूत भी मुहैया कराए। इस दौरान घटनास्थल पर मौजूद रहे ऑपइंडिया के पत्रकार ने पुलिस से भी बातचीत की, जिसमें दानीलिमडा पुलिस के पीआई रावत ने कहा कि पुलिस आरोपितों को जल्द पकड़ेगी और उचित कार्रवाई करेगी।

जातिसूचक गालियों के साथ ही पीएम के लिए भी अपशब्दों का प्रयोग

इस मामले में FIR दर्ज कराने वाले शिकायतकर्ता ने ऑपइंडिया से बातचीत की। शिकायतकर्ता भौमिक सोखड़िया दानीलिमडा के बीजेपी वार्ड अध्यक्ष भी हैं। उन्होंने कहा, “सोमवार के कार्यक्रम के लिए मैं कार्यकर्ताओं के साथ पार्टी के झंडे लगा रहा था। उसी समय वाजिद शहंशाह नाम का कुख्यात बदमाश वहाँ पहुँचा। उसने गालियाँ देते हुए झंडे उखाड़ फेंके। हमारे विरोध करने पर उसने मुझे धक्का दिया और जातिसूचक गालियाँ देने लगा। उसने पीएम मोदी को लेकर भी अपशब्दों का इस्तेमाल किया।”

भौमिक ने आगे कहा, “जब पार्टी कार्यकर्ता वहाँ इकट्ठे हुए, तो शहंशाह वहाँ से भाग गया। मैंने दानीलिमडा पुलिस में शिकायत दर्ज कराई है।” उन्होंने कहा कि आरोपित कुख्यात बदमाश है और उसके खिलाफ पहले भी पुलिस में शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। ऐसे में पुलिस उसे गिरफ्तार कर उसका जुलूस निकाले, तब जाकर लोगों में पुलिस का भरोसा कायम होगा।

ब्याज का धंधा और कई अवैध गतिविधियों को अंजाम देता है शहंशाह

एक स्थानीय निवासी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि आरोपित कई असामाजिक गतिविधियों में शामिल है। वो गरीबों को ऊँची ब्याज दर पर पैसे देता है और पैसे न चुकाने वालों को मारता-पीटता है। कई बार उसके खिलाफ दानीलिमडा थाने में शिकायत दर्ज कराई गई है, लेकिन उसकी पहुँच के चलते उसके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होती। उस व्यक्ति ने कहा कि पुलिस इसलिए उसके खिलाफ कार्रवाई नहीं करती, क्योंकि स्थानीय कॉन्ग्रेस पार्षद और अन्य विपक्षी नेताओं से उसके अच्छे संबंध है। कई बार पार्षद के कहने पर उसे थाने से छोड़ा जा चुका है।

इस घटना को बीते कई घंटों का समय हो चुका है, इसके बावजूद आरोपित पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। ऑपइंडिया ने इस मामले में दानीलिमडा पुलिस स्टेशन के पीआई रावत से संपर्क किया, तो उन्होंने आरोपित को जल्द पकड़ने की बात कही। अब देखना ये है कि ऐसे आपराधिक किस्म के लोगों के खिलाफ पुलिस क्या कदम उठाती है।

लालू की लालटेन में तेल भरने को तैयार नहीं राहुल गाँधी, NSUI के लिए PK ने दी कुर्बानी: क्या कन्हैया के बहाने बिहार में तीसरा मोर्चा बनाने चली कॉन्ग्रेस?

बिहार में इस वर्ष के अंत में विधानसभा चुनाव होने हैं, जिसकी गहमा-गहमी शुरू हो चुकी है। एक तरफ़ भाजपा है जो महाराष्ट्र, हरियाणा और दिल्ली में जीत के बाद उत्साहित है। वहीं दूसरी तरफ़ राजद है जो जातीय राजनीति खेलकर सत्ता में वापसी की कोशिश में लगी है। मैदान में कॉन्ग्रेस भी है, जो राज्य में एक नए चेहरे को स्थापित करने में जुटी है। इनके अलावा LJP और HAM हैं जो NDA गठबंधन का हिस्सा हैं, यहाँ तक कि वक़्फ़ बिल पर भी भाजपा को इन दोनों दलों का समर्थन था। वामपंथी भी हैं, CPI(ML) का बिहार के कुछ जिलों में अच्छा प्रभाव है।

एक पार्टी VIP भी है जो निषाद समाज के वोटों पर अपना दावा ठोकती है। वहीं अब राज्य की राजनीति में ‘जन सुराज पार्टी’ के नाम से नए दल का भी आगमन हुआ है, जो राष्ट्रीय मीडिया में सुर्खियाँ बटोर रहा है। ये प्रशांत किशोर की पार्टी है, जो कभी लालू-नीतीश दोनों के क़रीबी रहे हैं। बिहार में ताज़ा समीकरण ये है कि कॉन्ग्रेस पार्टी के शक्ति-प्रदर्शन ने राजद को बेचैन कर दिया है। क्या लालू यादव कभी कॉन्ग्रेस के किसी चेहरे को उभरता हुआ देख पाएँगे? फिर तेजस्वी यादव का क्या होगा?

कन्हैया कुमार को राहुल गाँधी का पूरा आशीर्वाद, RJD के लिए खतरा

मामला कुछ यूँ है कि सोमवार (7 अप्रैल, 2025) को राहुल गाँधी ने बेगूसराय में कन्हैया कुमार के साथ पदयात्रा में हिस्सा लिया। इस पदयात्रा का नाम ‘नौकरी दो, पलायन रोको’ रखा गया है। बेगूसराय में सुभाष चौक से लेकर हर-हर महादेव चौक तक की यात्रा में राहुल गाँधी के साथ उतनी भीड़ तो नहीं उमड़ी, लेकिन वो एक सन्देश ज़रूर देकर गए। जगह-जगह फूल बरसाकर उनका स्वागत किया गया। सोशल मीडिया में भी पार्टी ने बिहार के संघर्ष और आवाज़ की उम्मीद इसी यात्रा को बताया। राजद और लालू परिवार ने इस यात्रा से दूरी बनाई रखी।

बेगूसराय से लौटकर राहुल गाँधी ने राजधानी पटना में 2 कार्यक्रमों में हिस्सा लिया। श्रीकृष्ण मेमोरियल हॉल में ‘संविधान सुरक्षा सम्मेलन’ में उन्होंने हिस्सा लिया, वहीं पार्टी के प्रदेश मुख्यालय ‘सदाकत आश्रम’ में भी पार्टी के नेताओं-कार्यकर्ताओं से बातचीत की। कॉन्ग्रेस के भीतर बिहार में बड़े दिनों के बाद इतनी गहमा-गहमी दिख रही है। लोकसभा चुनाव 2024 के समय से ही राहुल गाँधी ‘संविधान बचाओ’ का नारा देते रहे हैं, वो लगातार OBC/SC/ST की बातें करते रहे हैं, ऐसे में क्या एक बार फिर से बिहार चुनाव में ये पैंतरे रंग दिखाएँगे?

ये तो चुनाव परिणाम के बाद ही पता चलेगा, लेकिन महागठबंधन में ज़रूर इस रंग का असर दिखने लगा है। देशभर में I.N.D.I. गठबंधन तो फुस्स हो गया, लेकिन बिहार में अबतक राजद-कॉन्ग्रेस-वामदलों का गठबंधन चला आ रहा है। लालू यादव कभी किसी कॉन्ग्रेस नेता को बिहार में शक्तिशाली होते हुए नहीं देखना चाहते हैं। लोकसभा चुनाव से पहले पप्पू यादव ने कॉन्ग्रेस में शामिल होने से पहले लालू यादव और तेजस्वी यादव के साथ बैठक की थी, लेकिन पूर्णिया लोकसभा चुनाव में तेजस्वी यादव जमकर पप्पू यादव पर ही हमलावर रहे।

पप्पू यादव निर्दलीय लड़कर जीते, लेकिन उन्होंने कॉन्ग्रेस नहीं छोड़ी। अब कन्हैया कुमार के रूप में एक नया और चर्चित चेहरा उभर रहा है। कन्हैया कुमार फरवरी 2016 में JNU में लगे भड़काऊ नारों से ही सोशल मीडिया में चर्चित चेहरा रहे हैं, कॉन्ग्रेस में आने के बाद से ही उन्हें पार्टी की बड़ी बैठकों का हिस्सा बनते हुए देखा गया। वो बिहार के बेगूसराय से आते हैं, मीडिया और जनता के सामने बोलने में बेबाक हैं, ऐसे में पहली बार CM बनने के लिए जद्दोजहद कर रहे 2 बार के डिप्टी सीएम रहे तेजस्वी यादव शायद ही उन्हें भाव दें।

प्रशांत किशोर के साथ गठबंधन में जा सकती है कॉन्ग्रेस

ऐसे में अगर मोलभाव की मेज पर तेजस्वी यादव कॉन्ग्रेस को भाव नहीं दे रहे हैं, तो फिर अब पार्टी के पास क्या विकल्प होगा? कॉन्ग्रेस पार्टी के पास एक विकल्प ये हो सकता है कि वो PK के साथ गठबंधन में जुड़े। कॉन्ग्रेस पार्टी के पास आज भी हर इलाक़े में कैडर है, पार्टी बिहार में आज़ादी के बाद लंबे समय तक सत्ता में रही है। वहीं, PK के पास सोशल मीडिया हाइप और रणनीति है। प्रशांत किशोर ने पटना में मुस्लिमों का सम्मेलन किया था, वो वक़्फ़ बिल का विरोध कर चुके हैं, ईद-इफ्तारी में भी वो ख़ूब दिखाई दिए थे – ऐसे में कॉन्ग्रेस को उनसे गठबंधन में शायद ही कोई ऐतराज हो।

2024 में 4 सीटों पर हुए विधानसभा उपचुनाव में 2 सीटों पर जसुपा को प्रत्याशी बदलने पड़े थे, फिर भी पार्टी 10% से अधिक वोट पाने में कामयाब रही थी। हाँ, उसके बाद विधान पार्षदी के उपचुनाव में ज़रूर ‘जन सुराज पार्टी’ राजद-जदयू से आगे रही थी। हाल ही में पटना यूनिवर्सिटी में भी छात्र संघ के चुनाव हुए हैं, जिसमें अध्यक्ष पद पर ABVP जीती है। संयुक्त सचिव पद पर जसुपा की प्रत्याशी मात्र 182 वोटों से पीछे रह गई। राजद की करारी हार हुई, वहीं युवाओं में प्रशांत किशोर की पार्टी को लेकर उत्साह दिखा। अध्यक्ष पद पर प्रशांत किशोर ने NSUI को समर्थन दिया था।

हाल के दिनों में कॉन्ग्रेस द्वारा लिए गए कुछ फ़ैसलों को भी देखें तो ऐसा लगता है जैसे पार्टी बिहार में अपना स्वतंत्र जनाधार बढ़ाने की चेष्टा कर रही है। सभी 40 सांगठनिक जिलों में नए अध्यक्ष बनाए गए। साथ ही प्रदेश अध्यक्ष अखिलेश यादव को पद से हटा दिया गया। अखिलेश यादव UPA काल में राजद नेता थे और केंद्रीय कृषि राज्यमंत्री भी। उन्हें लालू यादव के क़रीबी नेताओं में गिना जाता था, ऐसे में ये भी माना गया कि उन्हें हटाने के पीछे सोच यही थी कि कॉन्ग्रेस लालू यादव और राजद से अलग अपनी मजबूत पहचान बनाए।

लालू यादव के बारे में ये भी बता दें कि उनकी जो भी डीलिंग होती है, वो सीधे सोनिया गाँधी से फोन पर बात करने के बाद, शायद यही कारण है कि वो कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा राज्य में भेजे गए प्रभारियों को भाव नहीं देते। 2021 में लालू यादव ने कॉन्ग्रेस द्वारा प्रभारी बनाकर भेजे गए भक्त चरण दास को ‘भकचोन्हर’ बता दिया था। अभी हाल ही में कॉन्ग्रेस के वर्तमान प्रभारी कृष्णा अल्लावारु ने बीमार लालू यादव से मुलाक़ात की है। बताया गया था कि वो लालू के स्वास्थ्य की जानकारी लेने गए थे।

क्षेत्रीय साथियों को डरा रही कॉन्ग्रेस, मुस्लिम वोटों पर भी नज़र

ख़ैर, इन तमाम चर्चाओं के बीच एक चीज तो तय लग रही है कि कॉन्ग्रेस और राजद में डील फाइनल नहीं हो पाई है, सीट बँटवारे को लेकर बातचीत आगे नहीं बढ़ पाई है। दिल्ली में AAP की हार का श्रेय भी कॉन्ग्रेस के चुकी है, भले ही आँकड़े इसकी पुष्टि न करते हों। यूपी में अखिलेश यादव ने कॉन्ग्रेस पार्टी को भाव देना बंद करते हुए ये तक कह दिया है कि कॉन्ग्रेस अब ख़त्म हो चली है। ऐसे में कॉन्ग्रेस क्षेत्रीय दलों को ये डर दिखा रही है कि अगर गठबंधन नहीं हुआ तो भले वो ख़ुद जीते न जीते, इन्हें तो हरा ही देगी।

‘हम तो डूबेंगे सनम, तुमको भी ले डूबेंगे’ वाले सिद्धांत पर चल रही कॉन्ग्रेस का PK से पहले भी नाता रहा है। उत्तर प्रदेश और पंजाब में प्रशांत किशोर कॉन्ग्रेस के लिए कार्य कर चुके हैं। एक बार तो उन्हें कॉन्ग्रेस में लेकर अध्यक्ष तक बनाए जाने की चर्च उठी थी, लेकिन फिर सामने आया था कि राहुल गाँधी को वो ख़ास पसंद नहीं हैं। प्रशांत किशोर ने बिहार में पदयात्रा की है, लोगों से दान भी लिया है, मुस्लिमों को भी रिझाया है, लालू और मोदी पर एक साथ हमला बोला है – ऐसे में आश्चर्य न हो अगर दोनों कल को साथ में चुनाव लड़ते हुए दिखें।

दलित-पिछड़ा, संविधान, आरक्षण – RJD से टकराते कॉन्ग्रेस के मुद्दे

कॉन्ग्रेस के जिलाध्यक्षों के चुनाव को लेकर भी राहुल गाँधी दोहरा रहे हैं कि पार्टी ने पिछड़ों को प्राथमिकता दी है, ‘अपर कास्ट’ के लोगों को हटाया है। राजद प्रवक्ता भी बार-बार पिछड़ा की रट लगाते रहते हैं। ऐसे में बिहार में उतरकर कॉन्ग्रेस का उसी पिच पर खेलने का अर्थ है सीधे RJD से टकराव मोल लेना। 9 अप्रैल को गुजरात में पार्टी का अधिवेशन भी होने जा रहा है, बिहार चुनाव से पहले इसे भी शक्ति-प्रदर्शन के रूप में ही देखिए। वहाँ भी संविधान, पिछड़ा और आरक्षण की बातें ही की जाएँगी।

इसका एक कारण ये भी है कि बिहार में नीतीश कुमार दलितों का उपवर्गीकरण कर महादलित का दर्जा बहुत पहले दे चुके हैं, वहीं राज्य में मोदी सरकार की जन-कल्याणकारी योजनाओं का फ़ायदा अधिकतर पिछड़े समाज को ही मिला है, ख़ासकर महिलाओं को। उधर 11 अप्रैल को प्रशांत किशोर पटना के गाँधी मैदान से ‘बिहार बदलाव रैली’ की शुरुआत करेंगे। बिहार की राजनीति अभी उस मोड़ पर खड़ी है जहाँ कोई किसी का दोस्त नहीं दिख रहा, यहाँ तक कि नीतीश कुमार भी भाजपा के लिए मजबूरी ही हैं। उनके हाल के कुछ वायरल वीडियोज ने भाजपा की टेंशन भी बढ़ाई है।

फिर भी, महादलित और महिला वोट बैंक नीतीश कुमार के साथ है और यही उनके चेहरे की ताक़त है। लालू परिवार के भ्रष्टाचार से पीड़ित रहे बिहार में नीतीश कुमार का इस मामले में ‘क्लीन’ नज़र आते हैं। तो क्या इस बार बिहार में एक तरफ भाजपा, जदयू, लोजपा और HAM, एक तरफ कॉन्ग्रेस और PK और एक तरफ राजद व वामदल दिखाई दे सकते हैं? इस त्रिकोणीय लड़ाई में VIP वाले मुकेश सहनी किधर जाएँगे? वो 60 सीटें माँग रहे हैं, कम से कम महागठबंधन में राजद के रहते तो ये संभव नहीं है।

जिस ‘मिशन अस्पताल’ पर धर्मांतरण-मानव तस्करी के दाग, वहाँ ‘लंदन का डॉक्टर’ बन सर्जरी कर रहा था नरेंद्र यादव: 7 मौतों के बाद सामने आया मामला

दमोह के मिशन अस्पताल में डॉक्टर नरेंद्र जॉन केम उर्फ नरेन्द्र यादव के खिलाफ मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी ने एफआईआर दर्ज कराई है। दरअसल, डॉक्टर ने इस अस्पताल में 15 मरीजों की हार्ट सर्जरी की थी जिसमें से 7 मरीजों की मौत हो गई। मामले की जाँच सीएमएचओ अशोक जैन की अगुवाई में डॉक्टर विशाल शुक्ला और डॉक्टर विक्रांत चौहान कर रहे हैं। ये दोनों जिला अस्पताल के डॉक्टर हैं। जाँच में सामने आया है कि मरीजों की मौत एन्जियोप्लास्टी के दौरान हुई। मृतक मरीजों में से 2 की पहचान अभी नहीं हो पाई है जबकि बाकी 5 मृतकों के परिजनों को पत्र लिख कर अस्पताल बुलाया गया है। जाँच की टीम इनसे बात करेगी। इनका बयान भी राष्ट्रीय मानवाधिकार की टीम दमोह सर्किट हाउस में दर्ज करेगी।

मिशन अस्पताल पहले भी विवादों में रहा है। अस्पताल पर मानव तस्करी और धर्मांतरण जैसे आरोप लगे हैं। इस मामले में दावा किया जा रहा है कि डॉक्टर नरेन्द्र जॉन केम यानी डॉक्टर नरेन्द्र यादव ने लंदन के कार्डियोलॉजिस्ट डॉक्टर एन जॉन केम के नाम से प्रैक्टिस की। वह मूल रूप से उत्तराखंड का रहनेवाला है। उसने 15 मरीजों के हार्ट का ऑपरेशन किया जिसमें से 7 मरीजों की मौत हो गई। पूछताछ शुरू होने से पहले ही डॉक्टर नरेन्द्र यादव फरार हो गया।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो ने इस मामले को 4 अप्रैल 2025 को सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, जिसके बाद मामले ने तूल पकड़ा।

हालाँकि दो महीने पहले सीएमएचओ ने इस मामले की शिकायत की थी। बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष दीपक तिवारी के मुताबिक, “डॉक्टर नरेन्द्र ने जनवरी-फरवरी 2025 में 15 मरीजों की एजियोप्लास्टी की थी। इनमें से 7 मरीजों की मौत हो गयी। कई परिजनों ने उनसे इस मामले में बात की। लेकिन उन्होने गंभीरता से नहीं लिया जिसके बाद मानवाधिकार आयोग ने इस मामले में संज्ञान लिया”

मृतकों के परिजनों ने बताई कहानी

एंजियोप्लास्टी के बाद मिशनरी अस्पताल में जिन मरीजों की मौत हुई उसमें से एक रहीसा बेग के बेटे नबी का दावा है कि 12 फरवरी को उसकी माँ को हार्ट अटैक आया था। आनन-फानन में नबी अपनी माँ को लेकर नजदीक के अस्पताल में पहुँचा। माँ की हालत गंभीर थी इसलिए रहीसा बेग को मिशन अस्पताल में ट्रांसफर कर दिया गया। डॉक्टर नरेन्द्र यादव ने बताया कि रहीसा बेग के दिल में दो ब्लॉकेज हैं एक 80% है और दूसरा 90% इसलिए एंजियोप्लास्टी करनी पड़ेगी। भोपाल ले जाने की बात जब बेटे नबी ने की तो डॉक्टर नरेन्द्र यादव ने यहीं ऑपरेशन करने की बात कही। मरीज के परिजनों से 50 हजार रुपए जमा करवाए गए। यहाँ तक कि क्या इलाज किया जा रहा है इसकी जानकारी भी नहीं दी गई। 15 फरवरी को रहीसा बेग की एंजियोप्लास्टी की गई और आधे घंटे बाद उसकी मौत हो गई।

एक अन्य मरीज सुमरत सिंह का कहना है कि वे मिशन अस्पताल अपने चाचा को लेकर आए थे। चाचा होश में थे। उन्हें वार्ड से बाहर निकाल दिया गया। अस्पताल के कई स्टाफ मिलकर चाचा का सीना दबा रहे थे। कुछ देर बार स्टाफ चले गए। परिजनों से कई सादे कागज पर हस्ताक्षर करवाए गए और कहा कि मरीज को वेंटिलेटर पर रखना होगा। हमने वार्ड में दरवाजे के शीशे से झांका तो देखा कि चाचा शांत थे। उन्हें वेंटिलेटर पर रखकर शाम 4 बजे तक इलाज का दावा करते रहे इसके बाद कर्मचारियों ने पूछने पर कहा कि चाचा की मौत हो चुकी है। इसके बाद शव सौंप दिया गया. सुमरत सिंह का कहना है कि जब चाचा की मौत पहले हो चुकी थी तो वेंटिलेटर पर क्यों शाम तक रखा? डॉक्टरों ने चाचा को बगैर देखे सिर्फ कर्मचारी के कहने पर मौत की पुष्टि कैसे कर दी?

अस्पताल ने दी सफाई

मिशन अस्पताल की प्रभारी प्रबंधक पुष्पा खरे के मुताबिक जाँच अधिकारियों ने जो भी दस्तावेज माँगे उसे दे दिए गए हैं। इंटीग्रेटेड वर्कफोर्स इंक्वायरी सॉल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के माध्यम से डॉक्टर की नियुक्ति की गई थी। 1 जनवरी को डॉक्टर नरेन्द्र यादव ने मिशन अस्पताल ज्वाइन किया था। अस्पताल का कहना है कि उन्होने सीधे भर्ती नहीं ली थी इसलिए डिग्री को लेकर वे कुछ नहीं कह सकते।

अस्पताल मालिक पर लगा था मानव तस्करी का आरोप

इस मुद्दे को सोशल मीडिया के माध्यम से सामने लाने वाले प्रियंक कानूनगो के मुताबिक सेंट्रल इंडिया क्रिश्चन द्वारा संचालित मिशन अस्पताल का संचालक और सर्वेसर्वा डॉक्टर अजय लाल नर्सिंग होम भी चलाता है। डॉक्टर लाल ने आधारशिला नाम से समाजसेवी संस्था भी चलाई थी जिसे पहले मिड इंडिया क्रिश्चियन मिशन नाम से जाना जाता था। संस्थान के पास ही बाल भवन अनाथालय भी था। 7 अगस्त 2024 को डॉक्टर लाल पर मानव तस्करी के आरोप लगे। उसे घर पर नजरबंद कर दिया गया लेकिन पुलिस के पहुंचने से पहले ही परिवार समेत विदेश फरार हो गया। अनाथालय को फिलहाल बंद कर दिया गया है।

मिशन अस्पताल 10 सालों से चल रहा है जहाँ 131 बेड हैं। अस्पताल के पास ऑक्सीजन प्लांट भी है इसके अलावा पैथ लैब, ब्लड बैंक, डायलिसिस यूनिट, इमरजैंसी, ट्रॉमा सेंटर, ऑपरेशन थियेटर समेत तमाम सुविधाएँ हैं।