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बब्बू और छब्बू मियाँ: दर्जी और पेंटर भाई कैसे बन गए भूमाफिया?

उत्तर प्रदेश सरकार के तर्ज पर मध्यप्रदेश सरकार भी गुंडों माफियाओं पर लगातार नकेल कस रही है। इसी कड़ी में नगर निगम की रिमूवल गैंग ने बुधवार (2 दिसंबर, 2020) सुबह भूमाफिया बब्बू उर्फ सुल्तान शेख और छब्बू उर्फ शाबिर के आलीशान मकान को ध्वस्त कर दिया। दिलचस्प बात यह है कि बब्बू और छब्बू मियाँ भूमाफिया बनने से पहले टेलर और पेंटर का काम करते थे।

खजराना थाना क्षेत्र में बब्बू और छब्बू ने अवैध रूप से तीन आलीशान मकान बना लिया था। जिसको नगर निगम और पुलिस ने पहले नोटिस जारी करके खाली करवाया। फिर जेसीबी और पोकलेन की मदद से करीब तीन घंटे में अवैध मकानों को जमीदोंज कर दिया।

बता दें दोनों ही माफियाओं पर मारपीट, चोरी, हत्या, हत्या की कोशिश के एक दर्जन से ज्यादा अपराध दर्ज है। 2015 में इनका नाम गुंडे शहजाद लाला हत्याकांड में सामने आया था। उससे पहले इन्हें मामूली चोरी चाकरी जैसे मामलों में गिना जाता था। धीरे-धीरे दोनों ने अपनी पहुँच नामी गुंडों और हिस्ट्रीशीटर से बनानी शुरू की। जिसके बाद उन्होंने इलाके में क्राइम को अंजाम देने के लिए गैंग बना कर गुंडों से काम करवाना शुरू कर दिया, ताकि पकड़े जाने पर इनका नाम सामने न आए।

कहा जाता है बब्बू-छब्बू सिंडीकेट में रसूखदार लोगों के साथ मिलकर विभिन्न पार्टियों के नेता और कुछ पुलिस अफसरों की मदद से क्राइम को अंजाम देते थे। और इसके काले कारनामों से दोनों मियाँ भाई ने अवैध कारोबार का साम्राज्य खड़ा कर लिया।

रिपोर्ट के अनुसार, बब्बू व छब्बू ने खजराना इलाके में कई सरकारी जमीनों पर कब्जा कर लिया था। और जमीन से संबंधित लोगों से साँठगाँठ कर इन्होंने इलाके में अवैध कॉलोनियों का निर्माण शुरू करवा दिया था। नोटरी के तहत प्लाट की नीलामी भी की गई।

इसी अवैध धंधे को देखते हुए इन दोनों ने टेलरिंग और पेंटर का काम बंद कर दिया। जमीन का यह अवैध धंधा इतना फला-फूला कि जिन बदमाशों के पास खाना खाने तक के पैसे नहीं रहते थे अब उनके पास गाड़ी और बंगला आ गया। साथ ही अलग अलग जगहों पर इन्होंने आगे के लिए पैसा लगाना शुरू कर दिया।

वहीं जब इसकी खबर प्रशासन को लगी तो पुलिस ने दोनों पर दबिश देनी शुरू कर दी। जिसके तहत बब्बू की गिरफ्तारी हो गई लेकिन छब्बू भोपाल में प्यारे मियाँ की शरण में चला गया। वही प्यारे मियाँ जोकि लड़कियों के अवैध धंधे के सिलसिले में सलाखों के पीछे है। नगर निगम ने 1 साल पहले बब्बू के पटेल नगर स्थित फार्म हाउस पर दबिश देकर अवैध बिल्डिंग को ध्वस्त करवाया था। उस दौरान पुलिस ने ग्राउंड में खड़ी 50 नई इलेक्ट्रिक बाइक भी बरामद की थी। ध्वस्तीकरण के दौरान दौरान बब्बू की पत्नी ने काफी हो-हल्ला भी मचाया था।

‘अब्बा कहीं जाते थे तो मैं बीमार हो जाती थी’ से ‘अब्बा घरेलू हिंसा करते हैं’: शेहला रशीद की आपबीती

अपने पिता की चिट्ठी के बाद देश भर में शुरू हुई चर्चा के बीच जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला राशिद ने उन पर तमाम आरोप लगाए हैं। शेहला ने कहा है कि उनके पिता ने उनकी परवरिश में कोई भी योगदान नहीं दिया है। शेहला ने कहा कि उनके पिता उनके बारे में कुछ नहीं जानते और उनकी माँ ने उनकी सारी परवरिश की है। शेहला ने अपने पिता पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है और कहा है कि वो इस केस में गवाह हैं, इसलिए उनके पिता ने यह सभी आरोप लगाए हैं।

बता दें कि इस बीच शेहला का एक पुराने ट्वीट का स्क्रीनशॉट वायरल हो रहा है। इसमें शेहला ने लिखा है कि बचपन में जब कभी उनके अब्बा कहीं बाहर जाते थे तो वह बीमार हो जाती थी। इस ट्वीट के सामने आने के बाद लोगों की तरह-तरह की प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही है कि जब उनके पिता की उनके परवरिश में कोई योगदान नहीं है, वो उनके बारे में कुछ भी नहीं जानते हैं तो फिर शेहला अपने अब्बा के इतनी करीब क्यों हैं कि उनके बाहर जाते ही बीमार हो जाती थी।

शेहला रशीद ने अपने ट्वीट में लिखा, “मेरी और मेरी बहन की परवरिश मेरी माँ ने ही की है। मेरे पिता कभी इमोशनली या फाइनेंशली मेरे साथ नहीं रहे। उन्हें ये भी नहीं पता कि हम किस क्लास में पढ़ रहे हैं। अपने पत्र में उन्होंने लिखा है कि शेहला 2017 में समाजशास्त्र से पीएचडी कर रही थी। इससे अधिक जानकारी तो उन्हें गूगल पर मिल जाती। उन्होंने कहा कि मैं 3 एनजीओ चलाती हूँ। ये बताता है कि वो मेरे बारे में कितना जानते हैं। जो भी लोग मुझे जानते हैं, उन्हें ये पता होगा कि मैं किसी एनजीओ से नहीं जुड़ी हूँ।”

वो नहीं जानते मेरा अकाउंट नंबर: शेहला

अगले ट्वीट में शेहला ने कहा, “मेरे पिता मेरे अकाउंट की जाँच की बात कह रहे हैं, लेकिन उन्हें ये नहीं पता कि मेरा अकाउंट नंबर है क्या? उनके अकाउंट से मेरे अकाउंट में आज तक कोई भी ट्रांजैक्शन नहीं हुआ है। वो कह रहे हैं कि साल 2017 में वो मुझसे मिले थे। 2017 में मुझे चिकन पॉक्स हुआ था, उस दौरान मेरी बहन ने उनसे कहा कि वो मुझे आकर देख लें। हालाँकि, इसके बावजूद जब वो नहीं आए तो हम लोगों ने उनसे बात करना बंद कर दिया।”

पिता पर लगाए गंभीर आरोप

उन्होंने आगे लिखा, “सच्चाई ये है कि उन्होंने मेरी माँ को आर्थिक रूप से परेशान किया और शारीरिक और मौखिक रूप से भी उन्हें बहुत तंग किया। मेरी माँ ने 32 साल सरकार की नौकरी की और हम सभी की परवरिश भी की। मेरी माँ ही मेरी माँ-बाप हैं, उन्होंने हमेशा नि:स्वार्थ रूप से हमें प्यार किया। वो हमेशा से मेरे पिता को सिर्फ इसलिए सहती रहीं कि हम अपने पिता को देखते रहें।”

पिता की चिट्ठी को बताया राजनीतिक स्टंट

शेहला ने कहा कि उनके पिता की लिखी चिट्ठी सिर्फ एक राजनीतिक स्टंट है, ताकि हम उनके खिलाफ किए गए घरेलू हिंसा के केस को वापस ले लें। उस केस में हम ना सिर्फ पक्षकार हैं, बल्कि गवाह भी हैं।

शेहला के पिता ने की थी कार्रवाई की माँग

बता दें कि जेएनयू की पूर्व छात्रा शेहला रशीद पर उनके पिता ने देश विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया है। उन्होंने डीजीपी को चिट्ठी लिखकर शेहला के खिलाफ कार्रवाई की माँग की है। शेहला के पिता ने आरोप लगाया है कि उनकी बेटी ने जुहूर बटाली और राशिद इंजिनियर से 3 करोड़ रुपए लिए थे। उन्होंने अपनी जान का खतरा बताते हुए डीजीपी से सुरक्षा की गुहार भी लगाई है। हालाँकि, शेहला ने पिता के सभी आरोपों से इनकार किया है।

‘अवार्ड वापसी’ की घरवापसी: किसानों के प्रदर्शन के बीच पंजाब के पूर्व खिलाड़ियों ने पुरस्कार लौटने की दी धमकी

पंजाब के अर्जुन और पद्म पुरस्कार विजेताओं ने अब प्रदर्शनकारी ‘किसानों’ के साथ एकजुटता दिखाने के लिए अपना पुरस्कार वापस करने की इच्छा व्यक्त की है। पद्म श्री और अर्जुन अवार्डी पहलवान करतार सिंह, अर्जुन अवार्डी बास्केटबॉल खिलाड़ी सज्जन सिंह चीमा और अर्जुन अवार्डी हॉकी खिलाड़ी राजबीर कौर उन लोगों में से हैं जो अपने पुरस्कार वापस करना चाहते हैं। उनका दावा है कि वे 5 दिसंबर को राष्ट्रपति भवन जाएँगे और अपना पुरस्कार बाहर में रख देंगे।

खिलाड़ियों ने प्रदर्शनकारियों को दिल्ली जाने से रोकने के लिए उन किए गए पानी की बौछार और आँसू गैस के इस्तेमाल पर नाराजगी जताई। प्रदर्शनकारी चार महीने का राशन लेकर आए हैं और विरोध प्रदर्शन जारी रखने के लिए तैयार हैं। सरकार ने मंगलवार (दिसंबर 1, 2020) को उनके साथ बातचीत की लेकिन अभी इसका कोई नतीजा नहीं निकला।

मंगलवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में वक्ताओं में से एक ने दावा किया कि पंजाब से 150 पुरस्कार वापस किए जाएँगे।

विरोध प्रदर्शन का ‘अवार्ड वापसी’ स्वरुप

भारत में कई पुरस्कार विजेताओं का मानना है कि उन्होंने सरकार से जो पुरस्कार जीता है वह सरकार के खिलाफ विरोध का एक रूप है। कथित तौर पर ‘बढ़ती असहिष्णुता’ पर कुछ साल पहले इसकी शुरुआत हुई जब फिल्म और साहित्य जैसे विभिन्न क्षेत्रों के कॉन्ग्रेस समर्थक लिबरलों ने पीएम मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार को अपना पुरस्कार लौटाने का फैसला किया। तब से यह चलन बन गया है।

हालाँकि, इस बात का कोई आँकड़ा उपलब्ध नहीं है कि ऐसा करने की घोषणा के बाद वास्तव में कितने लोगों ने अपने पुरस्कार और पुरस्कार राशि लौटा दी है। हिंदूफोबिक कवि मुनव्वर राणा और लेखक काशीनाथ सिंह ने अवार्ड वापसी की घोषणा करने के बाद न तो साहित्य अकादमी में अपने पुरस्कार भेजे और न ही 1 लाख रुपए का प्रशस्ति पत्र दिया।

पंजाब के किसानों का आंदोलन

पंजाब के किसान इस साल सितंबर में लागू किए गए केंद्र सरकार के कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे हैं, जिसमें सरकार ने किसानों को एपीएमसी (कृषि उपज बाजार समिति) के बाहर बेचने की अनुमति दी, जिससे बिचौलियों का सफाया हो गया।

केंद्र सरकार ने मौजूदा व्यवस्था के अनुसार मंडियों में उपज की बिक्री के पुराने प्रावधान को जारी रखा है। हालाँकि, पंजाब के किसान चाहते हैं कि सरकार शहर के एपीएमसी और मंडियों को बंद न करे। केंद्र सरकार ने बार-बार स्पष्ट किया है कि ये बंद नहीं हो रहे हैं, लेकिन अभी भी यह स्पष्ट नहीं है कि किसान पहले से मौजूद कानून के खिलाफ आंदोलन क्यों कर रहे हैं।

इसके अलावा, किसान अब एक कानून चाहते हैं जो एमएसपी (न्यूनतम बिक्री मूल्य) की गारंटी देता हो। एमएसपी हमेशा एक प्रशासनिक निर्णय रहा है, जो प्रत्येक मौसमी फसल के बाद मामले के आधार पर लिया जाता है। हालाँकि, किसान अब प्राइवेट प्लेयर की तरह मंडियों के बाहर के लिए एमएसपी सहित इसके लिए एक कानून चाहते हैं। जबकि यह फ्री मार्केट की अवधारणा के खिलाफ होगा।

‘जो इस्लाम में प्रतिबंधित, जिन्ना ने वह सब कुछ किया’: उनके नाम पर बनी शराब की बोतल गिन्ना वायरल, लोगों ने जमकर लिए मजे

सोशल मीडिया पर एक शराब की बोतल की तस्वीर खूब वायरल हो रही है। इस शराब की बोतल का नाम पाकिस्तान के संस्थापक मुहम्मद अली जिन्ना का उपहास करते हुए रखा गया है। शराब का नाम लिखा है ‘Ginnah’। इस बोतल पर उनका एक छोटा सा परिचय देते हुए बताया गया है कि जो चीजें इस्लाम में प्रतिबंधित हैं, जिन्ना ने वह सब कुछ किया। जैसे सिगार, शराब और पोर्क खाना।

बोतल के पीछे एक संदेश भी लिखा है, जिसमें यह दावा किया गया है कि इस शराब का नाम पाकिस्तान के संस्थापक मोहम्मद अली जिन्ना की याद में रखा गया है।

एक ट्विटर यूजर ने जिन्ना के नाम पर गिन्ना नाम की शराब की बोतल की तस्वीरें पोस्ट कीं। बोतल के लेबल पर लिखा है, “इन द मेमोरी ऑफ द मैन ऑफ प्लेजर, हू वाज जिन्ना।” इस खबर को एएनआई ने भी ट्वीट किया है। हालाँकि समाचार एजेंसी एएनआई ने इस बोतल की सत्यता की पुष्टि नहीं की है। लेकिन कई ट्विटर यूजर्स गिन्ना नाम की शराब के बारे में लगातार पोस्ट कर रहे हैं।

बोतल पर लिखा है “मोहम्मद अली जिन्ना पाकिस्तान के संस्थापक थे जो 1947 में एक धर्मनिरपेक्ष राज्य के रूप में अस्तित्व में आए।”

आगे लिखा है, कुछ दशक बाद पाकिस्तान के चार सितारा जनरल मोहम्मद जिया-उल-हक ने 1977 में तत्कालीन प्रधानमंत्री जुल्फिकार अली भुट्टो का तख्तापलट कर दिया था।

इस बारे में बॉटल पर लिखा है, ”कुछ दशक बाद पाकिस्तान को एक सैन्य तानाशाह ने वाशिंगटन डीसी में बैठे अपने समर्थकों की मदद से ऐसी स्थिति में पहुँचाया, मानों किसी को पहाड़ की चोटी से धक्का दे दिया गया हो। पाकिस्तान एक अशांत जगह के रूप में तब्दील हो गया। जहाँ वह (तानाशाह) और कुछ मौलाना अपने खतरनाक इरादों को अमलीजामा पहनाने लगे।”

लेबल पर लिखा गया है कि एमए जिन्ना को कभी भी यह मंजूर नहीं होगा जबकि उन्होंने पूल बिलियर्ड्स, सिगार, पोर्क सॉसेज के साथ-साथ बढ़िया स्कॉच व्हिस्की और शराब का आनंद लिया।

सोशल मीडिया पर वायरल अल्कोहल की इस बॉटल पर लिखा संदेश दरअसल, पाकिस्तान और जिन्ना पर कटाक्ष है। एक तरफ जहाँ जिन्ना के समर्थकों ने शराब की बोतल पर नाराजगी जताई है। तो वहीं दूसरी ओर कई सोशल मीडिया यूजर चुटकी लेते भी नजर आए हैं।

‘शिहाब ने मेरे शौहर को मुझसे दूर किया, अश्लील संदेश भेजे, जान से मारने की धमकी दी’: कर्नाटक में असिया बनी शांति की पीड़ा

कर्नाटक में लव जिहाद का मामला सामने आया है। यहाँ पर शांति जूबी नाम की हिंदू महिला को इस्लाम में धर्मांतरित किया गया। जिसके बाद उसका नाम असिया इब्राहिम खलील कट्टेकर कर दिया गया। राज्य अध्यक्ष राजेश कोल्हो और दक्षिण कन्नड़ जिला अध्यक्ष शब्बीर उल्लाल के नेतृत्व में ‘आधुनिक मानवाधिकार समिति’ ने आरोप लगाया कि सिया इब्राहिम खलील कट्टेकर को उसके पति इब्राहिम खलील कट्टेकर से जबरन दूर रखा जा रहा है। 

‘आधुनिक मानवाधिकार समिति’ ने यह आरोप इब्राहिम खलील के बड़े भाई शिहाब और परिवार के अन्य सदस्यों पर लगाया, जो इब्राहिम खलील कट्टेकर को अपनी पत्नी से दूर रहने के लिए मजबूर कर रहे हैं।

आसिया ने टाइम्स नाउ से बात करते हुए कहा कि उसने सोचा था कि उसकी जिंदगी सुरक्षित है, मगर यहाँ पर उसका साथ देने के लिए कोई नहीं है। इस्लाम में परिवर्तित होने से पहले उससे कहा गया था कि यह बहुत ही रंगीन और सुंदर है।

26 नवंबर को विश्व हिंदू परिषद की टीम आसिया से मिलने के लिए पहुँची और उसे दक्षिणा कन्नड़ जिले के सुलिया पुलिस स्टेशन ले गए और अपने ‘गायब’ पति को लेकर परिवार के खिलाफ शिकायत दर्ज कराने के लिए कहा। विश्व हिंदू परिषद की इस टीम में शरण पंपवेल, सुरेशा राज, लतीश गुंडया और अन्य लोग शामिल थे। उन्होंने महिला से वापस हिंदू धर्म में आ जाने की गुहार लगाई।

शांति जोबी केरल के कन्नूर की रहने वाली हैं। उसकी फेसबुक के जरिए अब्दुल हाजी कट्टेकर के बेटे इब्राहिम खलील कट्टेकर से दोस्ती हुई। दोनों एक-दूसरे को अच्छी तरह से जानने के बाद 12 जुलाई, 2017 को इस्लाम में परिवर्तित होने के बाद उसके साथ निकाह किया। निकाह के बाद, शांति जूबी ने अपना नाम बदलकर आसिया इब्राहिम खलील कट्टेकर रख लिया। इसके बाद ये दोनों बेंगलुरु, मैसूर आदि के विभिन्न किराए के घरों में रहे।

इब्राहिम की शादी के बारे में पता चलने के बाद, उसके बड़े भाई शिहाब और अन्य लोग आसिया के पति को सुलिया में उनके घर ले गए एवं आसिया को बेंगलुरु में ही छोड़ दिया। इसके बाद दोनों अलग रहने लगे। बताया जा रहा है कि जब आसिया ने अपने पति से संपर्क करने की कोशिश की, तो परिवार के सदस्यों ने उसे मारने की धमकी दी। 

दोनों पक्षों ने पुत्तुर और सुलिया पुलिस स्टेशनों में बैठक की और चर्चा की, लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं निकला। आसिया का कहना है कि उसके पति को कहीं छुपा दिया गया है और उसका मोबाइल बंद कर दिया गया है। वह कहती है कि जब वह अपने पति के परिवार के घर गई, तो उसे शिहाब ने हत्या की धमकी दी थी। कई संगठनों द्वारा उसकी मदद के लिए किए गए प्रयास भी विफल रहे।

आसिया ने आरोप लगाया है कि शिहाब उसे अश्लील मैसेज भेज रहा है। आसिया का कहना है कि उसकी माँग के अनुसार, दो लग्जरी कारों और दो स्कूटरों के अलावा कई बार 25 लाख रुपए से अधिक की धनराशि दी गई। फिर भी परिवार खुश नहीं है और मेंटली टॉर्चर कर रहे हैं। आसिया अपने इस आरोप को दोहराती है कि उसे उसके पति से दूर रखा गया है। आसिया ने अब मीडिया से संपर्क किया है और उनसे मदद माँगी है कि वो उसे उसके पति इब्राहिम खलील कट्टेकर से मिलने में मदद करे, ताकि वह उसके साथ विवाहित जीवन गुजार सके।

वहीं मुस्लिम ग्रुप ने आसिया के लव जिहाद के आरोपों का खंडन किया है। जमात के अध्यक्ष अशरफ मुस्लिम ने कहा कि प्रेम में धर्म की कोई भूमिका नहीं है। इसे ‘लव जिहाद’ कहना गलत है। कॉन्ग्रेस विधायक यूटी खंडेर ने इस पर कर्नाटक सरकार पर टिप्पणी करते हुए कहा कि वे एक विशेष समुदाय को नीचा दिखाना चाहते हैं।

सड़क से अतिक्रमण हटाने को कहा तो कॉन्ग्रेस नेता के भाई अब्बास सिद्दीकी ने पुलिसकर्मी से की मारपीट, गिरफ्तार

उत्तराखंड के टिहरी जनपद में कॉन्ग्रेस नेता एवं पूर्व राज्य मंत्री याकूब सिद्दीकी के भाई अब्बास सिद्दीकी एवं उसके साथ मजहबी कट्टरपंथियों के गिरोह ने एक पुलिसकर्मी मोहन सिंह नेगी, एसआई चौकी इंचार्ज ढुंगीधार, नई टिहरी के साथ बेहद अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए मारपीट की। जिसके बाद सरकारी कार्य में बाधा डालने, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने के आरोप में गिरफ्तार व्यापारी अब्बास सिद्दीकी को पुलिस ने न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

नई टिहरी के बौराड़ी बाजार में रविवार (नवम्बर 29, 2020) के दिन कपड़े का स्टॉल लगाने को लेकर एक व्यापारी अब्बास सिद्दीकी और पुलिसकर्मियों के बीच झड़प हुई। पुलिस ने आरोपित व्यापारी समेत 10 अज्ञात लोगों के खिलाफ मारपीट और सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कर आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है।

बौराड़ी के खुले बाजार में अब्बास सिद्दीकी और सलीम खान कपड़ों का स्टॉल लगाकर रखते हैं। रविवार को ढुंगीधार चौकी प्रभारी मोहन सिंह नेगी ने व्यापारी को सड़क किनारे से स्टॉल हटाने को कहा। रिपोर्ट्स के अनुसार, अब्बास सिद्दीकी ने पुलिस को बताया कि उन्होंने तहसील प्रशासन और नगर पालिका से स्टॉल लगाने की अनुमति ले रखी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब्बास और उसके साथी सड़क पर कुर्सी लगाकर बैठे हुए थे, जिसे हटाने की बात को लेकर व्यापारियों ने पुलिसकर्मी के साथ अभद्रता की।

इसी बीच व्यापारियों और पुलिस के बीच बातचीत झड़प में तब्दील हो गई और दोनों पक्षों में मारपीट होने लगी। व्यापारी अब्बास सिद्दीकी के समर्थन में कॉन्ग्रेस के प्रदेश महासचिव याकूब सिद्दीकी समेत समुदाय विशेष के लोग मौके पर पहुँचे और उन्होंने पुलिस की कार्रवाई का विरोध किया। अब्बास और उसके साथियों ने पुलिस से मारपीट और अभद्रता करते हुए उल्टा पुलिसकर्मियों पर ही उत्पीड़न करने का आरोप भी लगाया है।

पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट करने और कार्रवाई में बढ़ा डालने के आरोप में पुलिस अब्बास सिद्दीकी को थाने लेकर गई जहाँ अब्बास समेत 10 अन्य लोगों पर मामला दर्ज किया गया।

सोमवार 30 नवंबर, 2020 को आरोपितों को न्यायलय में पेश किया गया। कोतवाली निरीक्षक चंदन सिंह चौहान के अनुसार, पुलिसकर्मियों के साथ मारपीट के आरोप में गिरफ्तार व्यापारी अब्बास सिद्दीकी को सीजेएम की अदालत में पेश किया गया। न्यायालय के आदेश पर उसे जेल भेज दिया गया है। जिन 10 अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है उनकी शिनाख्त की जा रही है और जल्द ही अन्य सभी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

वहीं, व्यापारी अब्बास सिद्दीकी और उसके भाई याकूब सिद्दीकी ने भी पुलिस पर मारपीट करने और झूठे मुकदमा में फंसाने का आरोप लगाया है। व्यापारी के समर्थन में कॉन्ग्रेस के प्रदेश महासचिव के साथ अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने कलक्ट्रेट में बेमियादी धरना शुरू कर दिया है। उनकी माँग है कि यह केस वापस किया जाए। साथ ही, कथित अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों ने पुलिस की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए हैं।

सोशल मीडिया पर भी इस घटना को लेकर काफी रोष देखा जा रहा है। दरअसल, टिहरी गढ़वाल एक पहाड़ी जिला है, जहाँ पर मजहब विशेष के कुछ लोग काफी समय से निवास करते आ रहे हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में कुछ गिनी-चुनी जगहों पर ही मजहब विशेष की आबादी रहती है।

लोगों का आरोप है कि विगत कुछ समय में पहाड़ों की बदलती डेमोग्राफी और सामाजिक अपराध में इस समुदाय का योगदान बढ़ रहा है जिसको लेकर सरकार को कुछ कठोर कदम उठाने चाहिए। यही नहीं, अक्सर सोशल मीडिया पर पहाड़ी युवा ‘लैंड-जिहाद’ की साजिश को भी उजागर करते रहे हैं।

2 कॉन्ग्रेस नेताओं की हत्या, घिर गई केरल की वामपंथी सरकार: सुप्रीम कोर्ट ने दिया CBI जाँच का आदेश

केरल में पिछले साल दो कॉन्ग्रेसी नेताओं की निर्मम हत्या कर दी गई थी। कॉन्ग्रेस ने इन हत्याओं के लिए मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (CPM) के कार्यकर्ताओं को जिम्मेदार ठहराते हुए सीबीआई जाँच की माँग की थी। वहीं अब इस माँग को सुप्रीम कोर्ट की भी अनुमति मिल गई है। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला केरल की पिनराई विजयन सरकार के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, मृतक के परिजन और पार्टी कार्यकर्ताओं की माँग को देखते हुए हाइकोर्ट ने मामले में सीबीआई जाँच के आदेश दिए थे। जिसके बाद राज्य सरकार ने हाइकोर्ट के इस फैसले को नामंजूर करते हुए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था और आदेश को चुनौती दी थी।

दरअसल पीड़ित परिजनों और कॉन्ग्रेस ने पुलिस पर आरोपितों से मिले होने का गंभीर आरोप लगाया था। साथ ही पुलिस द्वारा मुख्य आरोपितों की गिरफ्तारी नहीं करने पर नाराजगी भी जताई थी। परिजनों का आरोप था कि हत्याकांड की साजिश कासरगोड के माकपा नेता ने रची थी और इस वजह से राज्य सरकार और पुलिस मामले को दबाने की कोशिश कर रही है। जिसके बाद मामले में सीबीआई जाँच की अपील की गई थी।

हालाँकि शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने भी एकल पीठ के सीबीआइ जाँच के आदेश को बरकरार रखा। इस फैसले के कारण विजयन सरकार सवालों के घेरे में आ गई है। कोर्ट के फैसले को चुनौती देते ही विपक्षी दलों ने राज्य सरकार को आड़े हाथों लेते हुए हमलावर हो गई थी। हत्या के बाद राज्य सरकार के रवैए को देखते हुए अब भी केरल में अन्य पार्टी दल सरकार की मंशा पर सवाल खड़े करते रहते हैं।

गौरतलब है कि केरल के कासरगोड में पिछले साल 17 फरवरी को युवा कॉन्ग्रेस के दो कार्यकर्ता कृपेश और शारथ लाल की बेरहमी से हत्या कर दी गई थी। हत्या के पीछे स्थानीय माकपा नेता पीथांबरन मुख्य आरोपित है।

पाकिस्तान में हथियारों के बल पर हो रहा हिंदू लड़कियों का रेप: कहीं पार्वती पर आलम करता है हमला, कहीं सिर पीटते नजर आते हैं पिता

पाकिस्तान में हिंदुओं की स्थिति बयान करने वाली एक वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आई है। वीडियो में एक बूढ़ा पिता है जिसकी जवान बेटी का अपहरण पिछले महीने हथियार के दम पर किया गया था और बाद में कई दिनों तक उसे प्रताड़िता किया गया। उसके साथ गैंगरेप किया गया और फिर उसे छोड़ दिया गया।

वीडियो में देख सकते हैं कि पिता अपनी पीड़ा कुछ अन्य लोगों को बता रहा है। लेकिन कहते-कहते वह अपना सिर पीटने लगता है और तेज-तेज रोने लगता है। इसके बाद वहाँ बैठे कई लोग उन्हें चुप कराते हैं, लेकिन अपनी बेटी के साथ घटी घटना को सोचकर उनकी आँख से आँसू गिरने बंद नहीं होते।

वॉयस ऑफ पाकिस्तान माइनॉरिटी के ट्वीट के मुताबिक, पूरी घटना 2 नवंबर को सिंध के सुजावाल गोठ की है। इस ट्वीट में लिखा है, “2 नवंबर को हरि की 22 साल की बेटी का हथियार लिए लोगों ने अपहरण किया। बाद में उसे प्रताड़ित किया, उसका शोषण किया और बर्बरता से उसका कई दिनों तक सामूहिक बलात्कार किया। बाद में उसे छोड़ दिया।”

इसके बाद पाकिस्तान के सामाजिक कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन एक ऐसे ही अन्य मामले को उजागर करते हैं और बताते हैं कि चंद्र कोहली की 15 वर्षीय लड़की का अपहरण भी सिंध के कुनरी में हुआ और उसके बाद उसका रेप करके उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया गया।

उन्होंने अपने ट्वीट में वीडियो भी शेयर की है। लड़की के पिता इसमें बता रहे हैं कि अपहरण वाले दिन हथियार से लैस लोग उनके घर में घर में घुसे और उन्हें पीटकर उनकी बेटी अपने साथ ले गए। उनका आरोप है कि नेशनल असेंबली के सदस्य नवाब यूसुफ का कर्मचारी मोहम्मद माजिद भी उनकी बेटी के अपहरण में शामिल था।

सिंध की इन दोनों घटनाओं में जहाँ दोनों परिवारों के आँसू अभी सूखे भी नहीं है। वहीं पाकिस्तान के सिंध इलाके में ही एक और हिंदू लड़की पर हमले की खबर है। हालाँकि, इस लड़की को कुछ महिलाओं के साहस से बचा लिया गया

जानकारी के मुताबिक, सिंध की पार्वती पर आलम जट्ट और उसके दोस्तों ने हमला किया था। उनका उद्देश्य उसका रेप करना था। लेकिन, तभी कुछ महिलाएँ मौके पर इकट्ठा हो गईं और लड़की को बचा लिया गया।

सिंध के लेखक जफर साहितो ने इस घटना पर लिखा, “सिंधी हिंदू लड़की पर आलम जट्ट और उसके दोस्तों ने हमला किया। ये उसका रेप करना चाहते थे, लेकिन कुछ महिलाओं के इक्ट्ठा हो जाने से लड़की बच गई। पाकिस्तान एक रेपिस्तान है जहाँ यौन शोषण, बाल शोषण, लिंग असमानता, और खासकर अल्पसंख्यकों पर अत्याचार हो रहा है।”

यहाँ बता दें कि ऐसी तमाम घटनाएँ पाकिस्तान से आए दिन आती रहती हैं। इस्लामी कट्टरपंथ पाकिस्तान में इतना अधिक है कि वहाँ हिंदुओं के साथ-साथ सभी अल्पसंख्यकों को तुच्छ माना जाता है। पिछले दिनों बहुसंख्यक आबादी ने क्रूरता दिखाते हुए सिंध में गैर मुस्लिमों के घर को जलाकर राख कर दिया था और महिलाओं को बुरी तरह पीटा गया था।

‘किसी भी केंद्रीय मंत्री को महाराष्ट्र में घुसने नहीं देंगे’: उद्धव के पार्टनर ने दी धमकी, ‘किसान आंदोलन’ का किया समर्थन

‘स्वाभिमानी शेतकारी संगठन’ के राजू शेट्टी ने धमकी दी है कि वो किसी भी केंद्रीय मंत्री को महाराष्ट्र में नहीं घुसने देंगे। ये पार्टी उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र की सत्ताधारी गठबंधन का हिस्सा है। महाराष्ट्र की सत्ताधारी ‘महा विकास अघाड़ी’ गठबंधन के साथी ने कहा कि वो कोल्हापुर, पुणे और औरंगाबाद में पंजाब और हरियाणा के आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में है। साथ ही संगठन ने पूरे महाराष्ट्र में जगह-जगह विरोध प्रदर्शन भी किए।

राजू शेट्टी ने धमकी दी कि अगर किसानों की समस्याओं का निपटारा नहीं हुआ, तो वे केंद्रीय मंत्रियों को महाराष्ट्र में घुसने नहीं देंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि सुधार के नाम पर केंद्र कॉर्पोरेट और बड़े औद्योगिक संस्थानों को शक्तियाँ देना चाहती है। उनका आरोप था कि मोदी सरकार के नए कृषि कानून किसानों को ताकतवर बनाने के बजाय वे और ज्यादा कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार किसानों को बड़े व्यापारियों की दया पर निर्भर रखना चाहती है।

उद्धव सरकार में पार्टनर राजू शेट्टी ने आगे कहा कि कृषि कानून में न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) का भी जिक्र नहीं किया गया है, जो कि किसानों की वित्तीय स्थिरता के लिए सबसे बड़ी आवश्यकता है। बता दें कि पीएम मोदी कई बार साफ़ कर चुके हैं कि MSP को ख़त्म नहीं किया गया है और न ही APMC को भंग किया गया है, लेकिन फिर भी इसके नाम पर दुष्प्रचार फैला कर किसानों को भड़काया जा रहा है।

केंद्र सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि किसानों के प्रदर्शन केवल पंजाब या हरियाणा तक सीमित नहीं हैं, बल्कि महाराष्ट्र सहित पूरे देश के किसान इस आंदोलन के समर्थन में आवाज़ उठा रहे हैं। बता दें कि राजू शेट्टी की पार्टी से कई गड़बड़ियों के कारण उसका चुनाव चिन्ह भी छीन लिया लिया गया है। एनसीपी ने एकनाथ खडसे, राजू शेट्टी, यशपाल भिंगे और आनंद शिंदे का नाम भेजा है, जिन्हें राज्यपाल कोटे से विधान पार्षद बनाया जाएगा।

ज्ञात हो कि उधर भारत के पूर्व क्रिकेटर योगराज सिंह ने भी कहा है कि उन्होंने पीएम मोदी सहित भाजपा के अन्य नेताओं के चेहरे देखे हैं, वो सभी ‘शैतानों की तरह’ दिखते हैं। पंजाबी में बोलते हुए उन्होंने कहा कि पीएम मोदी शायद ये नहीं जानते हैं कि भगवान और शैतान एक साथ नहीं रह सकते। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने अपनी जिंदगी उस मोड़ पर ला खड़ी की है, जहाँ उन्हें, उनके कैबिनेट मंत्रियों और RSS नेताओं की कब्रों के साथ ऐसा ही बर्ताव करेगी, जैसा औरंगजेब के कब्र के साथ किया जाता है।

कौन है Canadian Pappu, क्यों राहुल गाँधी से जोड़ा जा रहा है नाम: 7 उदाहरणों से समझें

कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता और आलाकमान के बेटे राहुल गाँधी के पॉलिटिकल स्टंट में कनाडाई PM से बेहद खास समानता पाए जाने की वजह से कनाडाई प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो को भी अक्सर ‘कनाडाई पप्पू’ कहा जाता है। इसका मुख्य कारण है राहुल गाँधी की पीआर और मार्केटिंग टीम जोकि अक्सर ट्रूडो से प्रेरित दिखाई देती है। यहाँ कुछ ऐसे उदाहरण है जिससे आप दो राजनीतिक नेताओं की हरकतों में एक ही तरह की समानता देखेंगे।

अपने आप को बुद्धिमान दर्शाना

जस्टिन ट्रूडो 2016 में एक रिपोर्टर को क्वांटम कंप्यूटिंग का पाठ सिखाने लग गए। वहीं उनके इस लड़कपन को देखते हुए अंतर्राष्ट्रीय मीडिया ने उनपर जमकर कटाक्ष किया।

वहीं दूसरी ओर हमारे नेता राहुल गाँधी ने फैसला किया कि वह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर एक सभा को संबोधित करेंगे।

हालाँकि, कुछ दिनों बाद पता चला कि वह सिर्फ इंडियन ओवरसीज कॉन्ग्रेस की एक सभा को संबोधित करने जा रहे थे और वास्तव में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसे किसी मुद्दे पर वो कोई बातचीत नहीं करेंगे।

फिटनेस

वहीं कनाडा के ट्रूडो को उनके फिटनेस के लिए भी जाना जाता है। साथ ही वे दुनिया के सबसे फिट नेताओं की लिस्ट में भी शामिल है। वह बॉक्सिंग करते है, साथ ही उन्हें एक हाथ बच्चें को पकड़ते और एक हाथ से स्पोर्ट्स का कोई एक्टिविटी करते हुए भी देखा गया गया है जिसके चलते भी उन्हें फिट कहा जाता है।

वहीं इसकी दूसरी तरफ राहुल गाँधी अचानक से एक दिन एकेडो (एक जापानी मार्शल आर्ट) में विशेषज्ञ बन जाते है।

बता दें एक दिन अचानक से सबके सामने यह खबर आती है कि राहुल गाँधी न केवल ऐकिडो को जानते हैं, बल्कि वह इसमें एक ‘ब्लैक बेल्ट’ खिलाड़ी भी हैं। इतना ही नहीं राहुल जाहिर तौर पर शूटिंग विशेषज्ञ भी हैं। वहीं राहुल गाँधी की कुछ ऐकिडो मूव्स करते हुए वीडियो भी वायरल हुई थी और शायद वह आखिरी वीडियो भी थी जिसे पीआर टीम ने सिर्फ दिखावे के लिए रिलीज किया था।

पिडी और केंजीए (Pidi and Kenzie)

आपको याद होगा कि जब कॉन्ग्रेस असम में हार गई उस समय पिडी यानी कि राहुल गाँधी का पालतू कुत्ता किस प्रकार प्रसिद्ध हुआ था, क्योंकि चुनाव के दरमियान राहुल गाँधी ने पार्टी की समस्याओं पर चर्चा करने के बजाय अपने पालतू कुत्ते के साथ खेलना ज्यादा उचित समझा। ट्रूडो ने राहुल गाँधी का यह स्टंट पहले किया था। दरअसल, उन्होंने चुनाव के दौरान तो ऐसा नहीं किया लेकिन अपने पालतू कुत्ते को दुनिया से जरूर रूबरू कराया।

जस्टिन ट्रूडो ने 2016 में ट्विटर पर अपने पालतू कुत्ते के बच्चे को लेकर घोषणा की थी।

जिसके बाद मीडिया ने उसे प्रधानमंत्री के परिवार का नया सदस्य बताते हुए जमकर मजे लिए।

जिसके एक साल बाद राहुल गाँधी ने भी अपने ‘प्यारे’ दोस्त यानी अपने पालतू कुत्ते का खुलासा किया था।

राहुल गाँधी के इस ट्वीट पर उन्हीं के पार्टी के पूर्व नेता हिमंत बिस्वा सरमा ने चुनाव को इससे जोड़ते हुए कटाक्ष किया था। जोकि असल मे राहुल गाँधी को बहुत चुभा होगा।

अचानक से दयालु दिखना

2016 में ट्रूडो की एक छोटे बच्चें के साथ बैठे हुए एक फोटो सोशल मीडिया पर वायरल हुई थी। दरअसल वह फ़ोटो 2015 की थी जब ट्रूडो एक स्कूल के बच्चे को सांत्वना दे रहे थे क्योंकि स्कूल में उसका दिन खराब गया था।

उसी प्रकार की ट्रूडो की एक और फोटो वायरल हुई थी, जिसमें उन्हें वीलचेयर पर बैठे एक आदमी की मदद करते हुए देखा गया था।

उसी प्रकार हमारे नेता राहुल गाँधी भी एक पत्रकार को बचाते हुए दिखे थे जोकि घायल हो गया था। दूसरी तरफ कॉन्ग्रेस के कार्यकत्ताओं ने कुछ दिनों बाद ही 1 पत्रकार को सिर्फ इसीलिए पीटा क्योंकि वह सार्वजनिक रैली में खाली कुर्सियों की फ़ोटो खींच रहा था।

फैंस

फैंस की बात करे तो जस्टिन ट्रूडो ने काफी फैंस है।

तो दूसरी तरफ हमारे नेता तो फैंस से मिलने के लिए बस तक से भी उतर जाते है।

जन्मदिन

राहुल गाँधी ने 2017 में बहुत ही बेबाकी से कॉन्ग्रेस समर्थक के 107 वर्षीय दादी को जन्मदिन की बधाई दी थी। इतना ही नहीं उन्होंने उसे मिलने के लिए भी बुलाया था।

लेकिन ये क्या जस्टिन ट्रूडो उनके पहले ही यह कर चुके हैं।

120 साल की महिला ने अपने जन्मदिन पर कनाडाई पीएम जस्टिन ट्रूडो से मिलने की इच्छा जताई थी।

तुलना और विरोधाभास

गौरतलब है कि राहुल गाँधी और जस्टिन ट्रूडो दोनों मजबूत राजनीतिक परिवारों से आते हैं। राहुल गाँधी के पिता, दादी और परदादा सभी भारत के प्रधानमंत्री रहे हैं। ट्रूडो के पिता पियरे ट्रूडो भी कनाडा के प्रधानमंत्री थे। लेकिन कनाडा में ट्रूडो के नेतृत्व में लिबरल पार्टी ने 2015 का चुनाव जीता तो वहीं राहुल गाँधी के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस 2019 के आम चुनावों में बहुत ही बुरी तरह हारी थी।

राहुल गाँधी वास्तव में जस्टिन ट्रूडो से प्रेरित हैं या नहीं यह कोई नहीं जानता है, लेकिन उनकी पीआर रणनीति समानताएं सोचने योग्य है। जिस वजह से ट्रूडो को कनाडा के राहुल गाँधी के समकक्ष जाना जाता है।