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पाकिस्तान की बढ़ी मुश्किलें: चीन ने भी दिया इमरान को बड़ा झटका, महत्वाकांक्षी CPEC प्रोजेक्ट को रोका

पाकिस्तान में चल रही अस्थिरताओं के बीच चीन ने उससे दूरियाँ बनानी शुरू कर दी है। कोरोना महामारी और चल रहे राजनीतिक संकट के बीच ड्रैगन ने चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (सीपीईसी) के प्रोजेक्ट पर रोक लगा दी है। इस रोक ने यह साबित कर दिया कि ऐसा कोई सगा नहीं जिसे चीन ने ठगा नहीं। अब इस कड़ी में चीन ने अपने करीबी कहे जाने वाले दोस्त पाकिस्तान को अपना निशाना बनाया है।

एशिया टाइम्स की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यह प्रोजेक्ट पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति को पटरी पर लाने के लिए काफी महत्व रखता है। जिसका रुक जाना पाकिस्तान के लिए एक बड़ा झटका साबित हो सकता है। दरअसल, पाकिस्तान ने सीपीईसी के निवेश की कुल धनराशि का एक हिस्सा कर्ज के रूप में चीन से माँगने की योजना बनाई थी। कहा जा रहा कि चीन ने यह कदम इसलिए उठाया है ताकि पाकिस्तान प्रेशर में आकर ऊँची कीमत पर लोन लेने को तैयार हो जाए।

बता दें सीपीईसी की कई परियोजनाओं पर पहले ही रोक लगा दिया गया था। इनमें वे परियोजनाएँ भी शामिल हैं जिन्हें 2018 में इमरान सरकार ने सिर्फ इसलिए रोक दिया था क्योंकि इनमें पिछली सरकार के भ्रष्टाचार का संदेह था। वहीं यह भी एक सच्चाई है कि इमरान खान की अगुवाई में पाकिस्तान सरकार बड़े बुनियादी ढाँचागत कामों में सुस्त पड़ी भी हुई है।

रिपोर्ट में यह बात भी सामने आई है कि चीन द्वारा यह कदम सीपीईसी अथॉरिटी के चेयरमैन रिटायर्ड लेफ्टिनेंट जनरल असीम सलीम का नाम भ्रष्टाचार में सामने आने के बाद लिया गया है। असीम सलीम का यह कारनामा चीन के लिए बेहद ही चौकाने वाली बात थी असल में उसने खुद मिलिट्री को साझेदार बनाया था क्योंकि उसे भ्रष्टाचार का डर था। लेकिन वहाँ भी भ्रष्टाचार के मामले आने लगे।

गौरतलब है कि पाकिस्तान में माहौल इस वक्त बेहद ही खराब है। वहीं विपक्षी पार्टियाँ सरकार के खिलाफ पिछले कुछ समय से प्रदर्शन कर रहे हैं। विपक्षी दलों के गठबंधन ने सरकार की पाबंदी के बावजूद 22 नवंबर को पेशावर में मेगा रैली का ऐलान किया है।

बता दें कि पाकिस्तान में मौजूदा सरकार के खिलाफ 11 विपक्षी दलों ने पाकिस्तान डेमोक्रेटिक मूवमेंट (पीडीएम) के नाम से गठबंधन बनाया है, इसके प्रवक्ता अब्दुल जलील जान ने कहा, हमने इमरान सरकार के खिलाफ निर्णायक लड़ाई छेड़ दी है।

बेंगलुरु दंगा मामला: NIA ने SDPI के चार ठिकानों सहित 43 जगहों पर की छापेमारी, कई अहम दस्तावेज बरामद

देश के कई हिस्सों में दंगों के लिए आरोपित माने जाने वाली पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) पर एक बार फिर राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) का शिकंजा कसने लगा है। एनआईए ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को बेंगलुरु दंगा मामले में 43 जगहों पर छापेमारी की और यह छापेमारी पीएफआई के पॉलिटिकल फ्रंट सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया (SDPI) के चार ठिकानों पर भी मारी गई। एनआईए का दावा है कि इस छापेमारी के दौरान अनेक अहम दस्तावेज बरामद हुए हैं।

एनआईए के एक अधिकारी ने बताया कि यह मामला इसी साल बेंगलुरु में दो पुलिस थानों में दंगाइयों ने भारी उत्पात मचाया था। घातक हथियारों से लैस इन दंगाइयों ने पुलिस थानों की इमारतों सार्वजनिक और निजी संपत्तियों को नष्ट किया। साथ ही सरकारी कर्मचारियों पर भी हमला बोला। दंगे से आसपास के इलाकों में दहशत फैल गई और इस दंगे का मकसद समाज में आतंक फैलाना था। एनआईए के आला अधिकारी के मुताबिक, बाद में यह मामला जाँच के लिए एनआईए को सौंप दिया गया। इस मामले में पीएफआई की पॉलिटिकल फ्रंट के एक पदाधिकारी को भी गिरफ्तार किया गया था।

मामले की आरंभिक जाँच के दौरान यह पाया गया कि दंगा पूरी तरह से सुनियोजित था और इसमें सोशल डेमोक्रेटिक पार्टी ऑफ इंडिया के लोगों का भी हाथ था। दोनों थाना क्षेत्रों में हुए दंगे के इस मामले में क्रमशः 124 और 169 आरोपित गिरफ्तार किए जा चुके हैं। आज की छापेमारी के दौरान एनआईए को तलवार, चाकू और लोहे की छड़ आदि हमले में प्रयोग की गई सामग्रियाँ बरामद हुईं। साथ ही एसडीपीआई, पीएफआई से संबंधित अहम दस्तावेज भी बरामद हुए हैं। मामले की जाँच जारी है।

गौरतलब है कि पीएफआई का नाम लगातार देश के विभिन्न भागों में हो रहे दंगों को भड़काने और दंगों के लिए पैसा पहुँचाने के आरोपों में आता रहा है। चाहे दिल्ली के दंगे हों, उत्तर प्रदेश हो, केरल में प्रोफेसर का हाथ काटने का मामला हो या फिर बेंगलुरु के दंगे हों, हर जगह पीएफआई का नाम सामने आता रहा है।

उल्लेखनीय है कि बेंगलुरु में हुई हिंसा मामले में फरार चल रहे कॉन्ग्रेस नेता व पूर्व मेयर संपत राज को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। क्राइम ब्रांच के ज्वाइंट कमिश्नर संदीप पाटील ने बताया, “कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व बेंगलुरु मेयर संपत राज को डीजे हल्ली और केजी हल्ली में हुई हिंसा मामले में गिरफ्तार कर लिया गया है।”

उन पर हिंसक भीड़ को उकसा कर दंगे भड़काने का आरोप है। पिछले दिनों कोरोना के इलाज के दौरान संपत एक निजी अस्पताल में भर्ती होने के बाद फरार हो गए थे। इसके बाद से पुलिस लगातार इनकी तलाश कर रही थी।

इससे पहले कॉन्ग्रेस नेता संपत राज के नज़दीकी सहयोगी रियाजुद्दीन को गिरफ्तार करके न्यायिक हिरासत में भेजा गया था। रियाजुद्दीन पर आरोप था कि उसने संपत राज को छुपने और फरार होने में मदद की। वह कॉन्ग्रेसी नेता को पहले नगरहोले स्थित एक फार्म हाउस लेकर गया था और उसने कुछ दिनों तक संपत राज को वहीं छुपाया था।

बता दें कि पूरे मामले की शुरुआत एक कथित भड़काऊ सोशल मीडिया पोस्ट को माना जाता है, जिसे कॉन्ग्रेस विधायक श्रीनिवास मूर्ति के भतीजे नवीन ने पोस्ट किया था। हालाँकि, स्थिति बिगड़ने पर इस पोस्ट को डिलीट कर दिया गया था लेकिन तब तक दंगाइयों ने हिंसा फैलाना शुरू कर दिया था।

‘सोनिया गाँधी, अहमद पटेल को 700 करोड़ का लाभ’: अगस्ता वेस्टलैंड घोटाले में नाम आने पर बीजेपी ने बोला हमला

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला फिर चर्चा में है। अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हैलीकॉप्‍टर घोटाला मामले में सोनिया गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेताओं के कथित तौर पर नाम सामने आने के बाद भाजपा ने बुधवार (18 नवंबर, 2020) को पार्टी पर जमकर हमला किया। बता दें कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाया गया कि सौदा होने पर पार्टी की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी और वरिष्ठ नेता अहमद पटेल को 700 करोड़ रुपए मिलने की उम्मीद थी।

एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए भाजपा के वरिष्ठ नेता और राष्ट्रीय प्रवक्ता राज्यवर्धन सिंह राठौर ने कहा कि इटली की अदालत द्वारा नवंबर 2012 में अगस्ता वेस्टलैंड की शुरू हुई एक जाँच ने वीवीआईपी हेलिकॉप्टर सौदे में अनियमितताओं को उजागर किया था। क्रिश्चियन मिशेल के एक खुलासे का हवाला देते हुए, राठौड़ ने कहा कि करोड़ों के अगस्ता घोटाले में वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेताओं सहित सोनिया गाँधी भी शामिल थी।

भ्रष्टाचारों से लिप्त कॉन्ग्रेस पर हमला करते हुए राठौड़ ने कहा, “जब भी रक्षा सौदों में घोटाले की बात आती है तो कॉन्ग्रेस का नाम आता है। उन्होंने कहा कि जीप घोटाला, टाट्रा ट्रक घोटाला, बोफोर्स घोटाला और अब अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला, ये सब कॉन्ग्रेस के शासन में हुए हैं। क्या कारण है कि रक्षा समझौतों में कॉन्ग्रेस ने हमेशा घोटाले किए हैं? पार्टी के वरिष्ठ सदस्य यानी सोनिया गाँधी, राहुल गाँधी को स्पष्टीकरण देना चाहिए और इस बात का जवाब देना चाहिए कि इस घोटाले में पार्टी के वरिष्ठ नेताओं का नाम क्यों आए हैं।”

मुख्य आरोपित क्रिश्चियन मिशेल के बयान का जिक्र करते हुए, राठौड़ ने आरोप लगाया कि कॉन्ग्रेस पार्टी के गाँधी परिवार की घोटाले में प्रत्यक्ष भूमिका थी। उन्होंने कहा, “मिशेल ने अपने बयान में ‘इटली की महिला के बेटे के साथ मुलाकात करने का जिक्र किया था जो प्रधानमंत्री बनने की कतार में हैं।”

राठौड़ ने कहा, “चार्जशीट में यह उल्लेख किया गया है कि रक्षा अधिकारियों, नौकरशाहों, राजनेताओं को किकबैक का भुगतान किया गया था और यह सब स्विस पुलिस द्वारा जब्त दस्तावेजों पर आधारित है। क्रिश्चियन मिशेल का बयान और एक अन्य आरोपित राजीव सक्सेना से पूछताछ में भी यह सब कुछ सामने आया है।”

राहुल गाँधी पर तंज कसते हुए राठौड़ ने कहा कि जो व्यक्ति बार-बार, छोटी-छोटी चीजों पर ट्वीट करता है वह इतने बड़े घोटाले में स्पष्ट रूप से अपने नेताओं के नाम सामने आने के बावजूद भी चुप्पी साधे हुए हैं।

गौरतलब है कि कर्नल राज्यवर्धन राठौर का प्रेस बयान मुख्य आरोपित राजीव सक्सेना द्वारा सलमान खुर्शीद, कमलनाथ के बेटे बकुल नाथ और सोनिया गाँधी के करीबी सहयोगी अहमद पटेल के घोटाले में शामिल होने के बारे में किए गए खुलासे के बाद सामने आया है।

बता दें, 3,600 करोड़ रुपए के अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी हेलीकॉप्टर सौदे घोटाले में आरोपित राजीव सक्सेना ने पूछताछ में कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेताओं अहमद पटेल और सलमान खुर्शीद तथा कमलनाथ के पुत्र बकुल नाथ के नाम लिए हैं।

उल्लेखनीय है, सक्सेना को दुबई में यूएई के सरकारी सुरक्षा एजेंसियों द्वारा गिरफ्तार किया गया था और बाद में 30 जनवरी 2019 को भारत में प्रत्यर्पित किया गया था। वहीं प्रवर्तन निदेशालय की पूछताछ में उसकी 385 करोड़ रुपए की संपत्ति का मामला भी सामने आया था

अगस्ता वेस्टलैंड घोटाला

भारत ने प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति और अन्य VVIP की सेवा के लिए 12 अगस्ता वेस्टलैंड AW101 हेलीकॉप्टर खरीदने के लिए यूपीए शासन के तहत 2010 में एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इसमें कुछ राजनेताओं और लोक सेवकों का अपने आधिकारिक पदों का दुरुपयोग करते हुए मोटी घुस लेने का आरोप लगा था। घोटाला सामने आने के बाद 2013 में सौदा रद्द कर दिया गया था।

अगस्ता वेस्टलैंड वीवीआईपी चॉपर घोटाले के सामने आने के बाद इसने तमाम कॉन्ग्रेसी नेताओं की पोल खोल कर रख दी थी। वहीं बिचौलिए क्रिश्चियन मिशेल को दुबई से भारत लाया गया था।

76 लापता बच्‍चों को ढूँढकर महिला हेड कॉन्स्‍टेबल ने माता-पिता को सौंपी उनकी खुशियाँ: दिल्ली पुलिस ने दिया ये इनाम

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के समयपुर बादली पुलिस थाने में तैनात एक महिला हेड कॉन्स्टेबल को उसकी मेहनत कार्य निष्ठा और ईमानदारी को देखते हुए उच्च अधिकारियों ने उसे आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन (बिना बारी की तरक्की) देने का फैसला किया है। इस संबंध में दिल्ली पुलिस के आधिकारिक ट्विटर हैंडल से एक ट्वीट कर जानकारी दी गई है। बता दें कि महिला हेड कांस्टेबल सीमा ढाका को यह पुरस्कार लापता हुए 76 बच्चों को ढूँढ़ने के बाद मिला है। अपनी तरक्की की खबर सुनने के बाद सीमा ढाका भी काफी खुश हैं।

दिल्ली पुलिस के प्रवक्ता से मिली जानकारी के मुताबिक इस वर्ष पाँच अगस्त को पुलिस आयुक्त एसएन श्रीवास्तव ने राजधानी में लापता बच्चों को ढूँढने और उनके माता-पिता को सौंपने के लिए पुलिस खेमे को प्रोत्साहित किया। इस दौरान उन्होंने इस काम को जल्द पूरा करने वाले पुलिसकर्मियों को बिना बारी की तरक्की देने का भी वादा किया। 

श्रीवास्तव के ऐलान के मुताबिक अगर कोई कॉन्स्टेबल या हेड कॉन्स्टेबल अगर एक वर्ष के अंदर 14 वर्ष से कम उम्र के कम से कम 50 बच्चों की खोज निकालने पर आउट-ऑफ-टर्न प्रमोशन दिया जाएगा। इसके अलावा शर्त यह भी थी की इन बच्चों में से 15 बच्चों की उम्र आठ साल से कम होना अनिवार्य था। 15 बच्चों को खोज निकालने पर ‘असाधारण कार्य पुरस्कार’ देने की घोषणा की गई थी।

बता दें कि दिल्ली के समयपुर बादली पुलिस थाने में तैनात महिला हेड कॉन्स्टेबल सीमा ढाका ने 76 लापता बच्चों का पता लगाया, इन 76 बच्चों को दिल्ली और अन्य राज्यों से तीन महीने के भीतर पता लगाया गया। इसके साथ जिन 76 बच्चों की खोज सीमा ने की है उनमे से 56 की उम्र 14 साल से कम की है। उनके द्वारा खोजे गए बच्चों को बिहार, बंगाल एवं देश के अन्य हिस्सों से बरामद किया गया है।

दिल्ली में कोरोना काबू करने के लिए अमित शाह ने फिर सँभाला मोर्चा: दिल्ली पहुँचे डॉक्टर, घर-घर होगा सर्वे

देश की राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस को लेकर गृह मंत्रालय एक्शन में आ गया है। 15 नवंबर को केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के बीच हुई मीटिंग के फैसलों के मुताबिक संक्रमण के प्रसार को रोकने के लिए तेजी से कदम उठाए जा रहे हैं।

गृह मंत्रालय ने 10 टीमों का गठन किया है। ये 10 टीमें 100 प्राइवेट अस्पतालों का दौरा करेंगी। यह 10 टीमें अस्पतालों में बेड की क्षमता और ICU बेड की जानकारी इकट्ठा करके वहाँ के हालात के बारे में गृह मंत्री को जानकारी देंगी।

गृह मंत्रालय के प्रवक्‍ता ने बुधवार (नवंबर 18, 2020) को ट्विटर पर इन कदमों के बारे में जानकारी दी है। जिनमें ये मुख्य कदम शामिल है:-

हाउस टू हाउस सर्वे की प्लानिंग अडवांस स्टेज पर पहुँच गई है। यह सर्वे 25 नवंबर से शुरू हो सकता है। ICMR और दिल्ली सरकार RT-PCR टेस्ट की संख्या को नवंबर के आखिर तक 60 हजार रोजाना तक बढ़ाने के प्रयास कर रहे हैं। 17 नवंबर तक यह 10 हजार टेस्ट प्रतिदिन है।

मंत्रालय ने बताया कि 45 डॉक्टर और पैरामिलिट्री फोर्स के 160 पैरामेडिक्स पहले ही दिल्ली आ चुके हैं। उनको डीआरडीओ के कोविड-19 हॉस्पिटल और छतरपुर कोविड केयर सेंटर में तैनात किया गया है। बाकी डॉक्टर्स भी कुछ दिनों में आ जाएँगे।

डीआरडीओ 250 आईसीयू बेड्स को ऐड करेगा। पहले से दिल्ली में उसके 250 आईसीयू बेड्स हैं। उधर, डीआरडीओ भी अगले चार-पाँच दिनों में 35 और BIPAP बेड एयरपोर्ट वाले कोविड सेंटर में लगाएगा।

10 बहु-विषयक टीमें बनाई गई हैं। ये दिल्ली के करीब 100 प्राइवेट हॉस्पिटल्स में जाएँगी। वहाँ जाकर देखा जाएगा कि क्या बेड कपेसिटी और टेस्टिंग बढ़ाने का कोई विकल्प मौजूद है। टीमों ने यह काम शुरू कर दिया है।

भारतीय रेलवे करीब 800 बेड वाले ट्रेन कोच देगी। इन्हें शकूर बस्ती रेलवे स्टेशन पर रखा जाएगा।

भारत इलेक्ट्रोनिक्स लिमिटिड (BEL) ने बेंगलुरु से 250 वेंटिलेटर्स भेजे हैं। यह इस हफ्ते के आखिर तक दिल्ली पहुँच जाएँगे। उधर, केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय ने दिल्ली एयरपोर्ट के पास डीआरडीओ कोविड सेंटर को 35 BIPAP मशीन दिए हैं।

बता दें कि गृह मंत्री अमित शाह के निर्देश पर आईसीएमआर दिल्‍ली में कोविड 19 टेस्टिंग के लिए मोबाइल वैन उपलब्‍ध कराने में दिल्‍ली सरकार की मदद कर रहा है। अगले सप्‍ताह से इसके तहत 20000 टेस्‍ट संभव होंगे।

बता दें कि दिल्ली में कोरोना केसों की संख्या दिन प्रति दिन तेजी से बढ़ रही है। मंगलवार को कोरोना के 6,396 नए केस सामने आए थे। राजधानी दिल्ली में अब तक कोरोना के 495,598 केस सामने आ चुके हैं। इसमें से 7,812 लोग वायरस से अपनी जान गँवा चुके हैं।

कट्टर इस्लामिक संगठन के सामने झुकी पाकिस्तान, फ्रांस के खिलाफ समझौते पर साइन: फ्रांसीसी राजदूत को करेंगे निष्कासित

पाकिस्तान में हमेशा से इस्लामवादी कट्टरपंथी समूहों और इस्लामिक कट्टरपंथियों का बोलबाला रहा है। हमेशा से पाकिस्तान के एक्सटर्नल और इंटरनल पॉलिसी में इनका दबाव देखने को मिला है। वहीं पाकिस्तान के हर आधिकारिक शासन ने भी हमेशा इन अराजकतावादी समूहों को सराहा और सर्वोच्च स्थान पर रखा है।

हाल ही में पाकिस्तानी सरकार ने कट्टर इस्लामिक संगठन तहरीक-ए-लब्बैक(टीएलपी) के साथ एक समझौते पर हस्ताक्षर किया है। बता दें टीएलपी ने पैगंबर मुहम्मद के कार्टून दिखाने पर फ्रांस के खिलाफ देश भर में विरोध प्रदर्शन करने का आह्वान किया था।

पाकिस्तान के आंतरिक मंत्री ब्रिगेडियर आर एजाज शाह और धार्मिक मामलों के मंत्री नूर-उल-हक कादरी ने बातचीत की और दोनों पक्षों में हुए समझौते पर हस्ताक्षर किया। समझौते में पाकिस्तान सरकार ने तहरीक-ए-लब्बैक से वादा किया है कि वो 2 महीने के भीतर फ्रांसीसी राजदूत को निष्कासित करेगें। इसके अलावा, पाकिस्तान अपना कोई राजदूत फ्रांस नहीं भेजगा। सरकारी स्तर पर फ्रेंच उत्पादों का बहिष्कार भी किया जाएगा। यहीं नहीं तहरीक-ए-लब्बैक के गिरफ्तार कार्यकर्ताओं की सुरक्षित रिहाई पर भी सरकार सहमत हो गई है।

हालाँकि, समझौते पर हस्ताक्षर करने के तुरंत बाद, पाकिस्तान की सरकार ने यह भी कहा कि यह मुद्दा अभी भी सुलझा नहीं है। सरकार ने इस बात की भी पुष्टि नहीं की कि कैसे फ्रांसीसी उत्पादों का व्यापक बहिष्कार किया जाएगा।

विदेशी कार्यालय के प्रवक्ता ज़ाहिद हाफ़िज़ चौधरी ने बीबीसी उर्दू को बताया, “पाकिस्तान ने अभी तक कोई निर्णय नहीं लिया है; समय आने पर मीडिया को सूचित किया जाएगा।”

सरकार ने कथित तौर पर टीएलपी के साथ पहले भी एक समझौता किया था, लेकिन सरकार द्वारा किए गए वादों में से किसी भी वादे को पूरा नहीं किया गया था। कुछ विश्लेषकों का मानना ​​है कि यह समझौत सरकारी अधिकारियों द्वारा प्रदर्शित उनकी अनिच्छा को स्पष्ट करता है।

इस सप्ताह के रविवार से टीएलपी के समर्थकों ने राजधानी इस्लामाबाद में एक बेहद ही उग्र प्रदर्शन किया था। वहीं सरकार द्वारा उनकी माँगों पर सहमति जताने के बाद टीएलपी ने अपना प्रदर्शन समाप्त किया।

प्रदर्शन कर रहे भीड़ के एक प्रवक्ता एजाज अशरफी ने कहा, “सरकार द्वारा एक समझौते पर हस्ताक्षर करने के बाद हम अपने विरोध को समाप्त कर रहे हैं जो आधिकारिक रूप से फ्रांसीसी उत्पादों का बहिष्कार करेगा।”

गौरतलब है कि कुछ दिन पहले पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों को कट्टर बताते हुए उन पर इस्लाम पर हमला करने का आरोप लगाया था।

इमरान खान ने अपने ट्वीट में फ्रांसीसी राष्ट्रपति पर निशाना साधते हुए कल लिखा, “एक नेता की पहचान होती है कि वह इंसानों को एकजुट करता है, जैसा कि मंडेला ने लोगों को विभाजित करने की बजाय उन्हें एक करने पर जोर दिया। लेकिन एक आज का समय है, जब राष्ट्रपति मैक्रों देश से रेसिज्म, ध्रुवीकरण हटाने की बजाय अतिवादियों को हीलिंग टच और अस्वीकृत स्थान देने में लगे हैं, जो निश्चित रूप से उनकी कट्टरवादी सोच को दिखाता है।”

इमरान खान ने ट्वीट में यह भी लिखा, “यह दुखद है कि राष्ट्रपति मैक्रों ने विवादित कार्टून को बढ़ावा देते हुए जानबूझकर समुदाय वालों को भड़काने की कोशिश की है।”

पाक पीएम ने कहा कि इस समय फ्रांस राष्ट्रपति को संयम से काम लेते हुए कट्टरपंथियों को दरकिनार करने की रणनीति अपनानी चाहिए थी। लेकिन उन्होंने इस्लाम की जानकारी न होने के बावजूद मजहब पर हमला करते हुए इस्लामोफोबिया को बढ़ावा देना चुना, जबकि उन्हें आतंक पर हमला करना चाहिए था।

उल्लेखनीय है कि टीएलपी तहरीक-ए-लब्बैक या रसूल अल्लाह (TLYRA) आंदोलन की राजनीतिक शाखा है, जिसने पहले पाकिस्तान में ईश निंदा के विरोध में भारी भीड़ इकट्ठा की थी। खादिम हुसैन रिज़वी की अध्यक्षता वाला यह समूह 2011 में सुर्खियों में आया था, जब पंजाब प्रांत के गवर्नर सलमान तासीर की हत्या करने वाले पुलिसकर्मी मुमताज़ कादरी की फाँसी का इस समूह ने विरोध किया था।

बता दें गवर्नर की हत्या इसलिए की गई थी क्योंकि उसने देश के ईश निंदा कानूनों के प्रति अपनी अस्वीकृति व्यक्त की थी। टीएलपी ने 2017 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कई हफ्तों तक प्रदर्शन भी किया था। संक्षेप में, इमरान खान को पाकिस्तान का प्रधानमंत्री बनाने के पीछे टीएलपी का बड़ा हाथ है।

लद्दाख को चीन का हिस्‍सा बताने पर ट्विटर इंडिया ने संसदीय समिति से माँगी लिखित माफी

लद्दाख को चीन का हिस्सा दिखाने पर माइक्रो ब्लॉगिंग साइट ट्विटर ने लिखित तौर पर माफी माँगी है। इससे पहले बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी की अध्यक्षता में गठित संसदीय समिति ने ट्वीटर को ऐसा करने के लिए फटकार लगाई थी और इसे राजद्रोह जैसा करार दिया था। ट्विटर इंडिया के मुख्‍य गोपनीयता अधिकारी डेमियन करेन ने एक हलफनामे पर हस्‍ताक्षर कर माफीनामा भेजा।

मीनाक्षी लेखी ने बताया कि ट्विटर ने भारतीय भावनाओं को आहत करने के लिए माफी माँगी है और 30 नवंबर 2020 तक गलती को सुधारने की शपथ ली है। बता दें कि ट्विटर ने बीते 18 अक्‍टूबर को एक व्‍यक्ति के वीडियो कॉलिंग के दौरान लद्दाख की एक लोकेशन को चीन के हिस्‍से के रूप में दिखाया था। इसके बाद से ट्विटर का विरोध होने लगा था और भारत सरकार ने इस पर ट्विटर से जवाब माँगा था।

इस पर इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के सचिव ने ट्विटर के सीईओ जैक डोर्से को पत्र लिखकर इस पर आपत्ति जताई थी। ट्विटर को कड़ी चेतावनी देते हुए मंत्रालय के सचिव ने लिखा था कि इस तरह की हरकतों से सिर्फ और सिर्फ ट्विटर की छवि खराब होती है। इसके अलावा ट्विटर का यह रवैया उसकी निरपेक्षता पर भी सवाल खड़े करता है। कड़े शब्दों में यह कहा गया कि आने वाले समय में इस तरह की गलतियाँ स्वीकार नहीं की जाएँगी। यह सरासर गैर ज़िम्मेदाराना हरकत थी, जिसका सीधा प्रभाव लोगों की भावनाओं और देश की अखंडता पर पड़ता है। 

गौरतलब है कि हाल ही में ट्विटर ने लेह को केन्‍द्र शासित प्रदेश लद्दाख के बजाय जम्मू-कश्मीर के हिस्‍से के रूप में दिखाया था। इसके बाद मंत्रालय ने ट्विटर के ग्‍लोबल वाइस प्रेसिडेंट को भेजे गए अपने नोटिस में लिखा था, “ट्विटर ने यह जान-बूझकर किया है। उसने लेह को जम्मू-कश्मीर के हिस्से के रूप में दिखाकर भारत की संप्रभु संसद की इच्छा को कम करने के लिए ये कदम उठाया है, जिसने लद्दाख को भारत का एक केंद्र शासित प्रदेश घोषित किया था।” बता दें कि लेह, केन्‍द्र शासित प्रदेश लद्दाख का मुख्‍यालय है। 

मंत्रालय ने अपने नोटिस में ट्विटर को 5 कार्य दिवसों का समय देते हुए निर्देश दिया था कि वह ‘यह बताए कि गलत मानचित्र दिखाकर भारत की क्षेत्रीय अखंडता का अपमान करने के लिए ट्विटर और उसके प्रतिनिधियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्‍यों न शुरू की जाए।’

‘कब तक सीता को रुबिया बनने देंगे, कितनी नरगिस ने सुनील दत्त से शादी की’: लव जिहाद कानून पर बोले MP के प्रोटेम स्पीकर

मध्य प्रदेश की शिवराज सरकार लव-जिहाद के खिलाफ कानून लाने में जुटी है। इस बात की घोषणा हाल ही में राज्य के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने की थी। लेकिन अब लव जिहाद को लेकर प्रोटेम स्पीकर रामेश्वर शर्मा ने बड़ा बयान दिया है। रामेश्वर शर्मा ने तो इसे आतंकी संगठन ISIS का षड्यंत्र तक बता दिया।

उन्होंने कहा, “पाकिस्तान और ISI एजेंट सीता को रुबिया में बदलने की साजिश करते हैं। हम कब तक सीता को रुबिया बनने देंगे, कब तक हम सीता को मरने देंगे? मुझे नरगिस और सुनील दत्त की तरह सच्चा प्यार दिखाओ। आप ही बताइए कितनी नरगिस ने सुनील दत्त से शादी की?”

प्रोटेम स्पीकर ने कहा कि एमपी में शिवराज चौहान सरकार ने लव जिहाद पर कानून बनाने का निर्णय लिया है। कानून के संदर्भ में गृह मंत्री ने ब्रीफिंग भी दी है। उन्होंने कहा कि लव जिहाद कानून को और भी सख्त बनाए जाने की जरुरत है। इस कानून में हम अधिक सजा के प्रावधान पर विचार करेंगे।

बकौल शर्मा जिन लड़कियों को डरा धमकाकर धर्म बदलवाया जाता है, ऐसे लोगों पर धर्म बदलने की कार्रवाई के साथ अपहरण, लूट और अन्य तरह की धाराएँ भी लगाई जानी चाहिए। ऐसे मामलों में जिन सहयोगियों की मदद से पीड़िता को धमकाया या फुसलाया जाता है, उनके खिलाफ अपराधिक कार्रवाई हो। अगर बेटी के साथ गैंग रेप या रेप होता है या हत्या होती है इसके मामले में भी सह आरोपित पर केस दर्ज हो।

उन्‍होंने 5 साल नहीं, बल्कि 10 साल की सजा का प्रावधान करने की बात कही है। रामेश्‍वर शर्मा ने दलित और आदिवासी की बेटियों के धर्मांतरण के बाद उन्हें आरक्षण का लाभ न देने की माँग भी की है। उन्‍होंने यह भी कहा कि मजहबी संगठनों और कॉन्ग्रेस का विरोध करने से कुछ नहीं होगा। यह षड्यंत्र चल रहा है। हमारा विधेयक वोट के खातिर नहीं, बल्कि संस्कृति के लिए है।

उन्होंने कहा कि इस कानून में हम इस बात का प्रावधान भी करने पर विचार कर रहे हैं कि अगर कोई एससी/ एसटी महिला धर्म परिवर्तन कर दूसरे मजहब के व्यक्ति से शादी करती है, तो उससे एससी/ एसटी को मिलने वाली सुविधाएँ वापस ले ली जाए।

रामेश्वर शर्मा ने कहा कि लव जिहाद कानून के अंतर्गत अपहरण, बलात्कार, हत्या, डराने धमकाने के जैसी धाराओं को जोड़ा जाए इसके साथ हम विचार करेंगे कि अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग की बहन, बेटी यदि धर्म परिवर्तन कर मजहब विशेष या ईसाई से शादी करती है तो उनके आरक्षण संबंधी सभी सुविधाएँ खत्म हो जानी चाहिए, क्योंकि ना तो वो हिंदू रहेगी और ना ही अनुसूचित जाति/जनजाति से रहेगी।

बता दें कि मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार (नवंबर 17, 2020) को कहा था कि मध्य प्रदेश ‘फ्रीडम ऑफ रिलिजन बिल, 2020’ को विधानसभा में पेश करने की तैयारी कर रहा है। इसमें लव जिहाद के खिलाफ पांच साल के कठोर कारावास का प्रावधान होगा। हम यह भी प्रस्ताव कर रहे हैं कि ऐसे अपराधों को संज्ञेय और गैर-जमानती अपराध घोषित किया जाए।

गृह मंत्री मिश्रा ने कहा था, “आगामी विधानसभा सत्र अहम होने वाला है, क्योंकि राज्य सरकार लव जिहाद को लेकर धर्म स्वातंत्र्य कानून के लिए विधेयक पेश करेगी। विधेयक के कानून बनने के बाद आरोपित पर गैर जमानती धाराओं के तहत पाँच साल की सजा दी जाएगी। लव जिहाद के अपराध में सहयोग करने वाले को भी मुख्य आरोपित की तरह सजा का प्रावधान होगा। इसके अलावा, शादी के लिए जबरन धर्मांतरण कराने वालों को भी सजा देने का प्रावधान किया जाएगा।”

पश्चिम बंगाल में एक और BJP नेता को पीट-पीटकर मारा: परिजनों ने TMC के गुंडों पर लगाया हत्या का आरोप

पश्चिम बंगाल में बीजेपी नेताओं पर हमले रुकने का नाम नहीं ले रहे हैं। कूच बिहार में बीजेपी के एक और कार्यकर्ता की पीट-पीटकर हत्या का मामला सामने आया है। मृतक कार्यकर्ता का नाम कलाचंद कर्मकार (kalachand Karmakar) है और उनकी उम्र 55 साल है। जानकारी के मुताबिक वह बीजेपी के बूथ कमेटी के सचिव भी रहे हैं।

बीजेपी नेता पर किए गए हमले में दो अन्य कार्यकर्ता भी घायल हो गए हैं। जानकारी के मुताबिक मामला कूचबिहार (Cooch Behar) जिले के तूफानगंज (Tufanganj) के नकटीगाछ ग्राम पंचायत के चमटा के करमापाड़ा इलाके का है। घटना के बाद से पूरे इलाके में तनाव फैला हुआ है। पुलिस ने इस मामले में एक आरोपित को गिरफ्तार किया है। एसपी का कहना है कि इसमें कोई राजनीतिक एंगल नहीं है।

मृतक बीजेपी नेता के परिवार वालों ने टीएमसी के गुंडों पर हत्या का आरोप लगाया है। परिवार ने पुलिस को दी शिकायत में पाँच टीएमसी कार्यकर्ता का नाम लिया है। आरोप है कि पाँचों टीएमसी कार्यकर्ताओं ने बेरहमी से बीजेपी नेता की पिटाई की, जिसमें उन्हें गंभीर चोटें आई। जब इलाज के लिए उन्हें हॉस्पिटल ले जाया गया तो डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया। बीजेपी ने टीएमसी पर राजनीतिक हत्याओं का आरोप लगाया और यह दावा किया कि बंगाल के लोग कभी इसका समर्थन नहीं करेंगे।

गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के मथुरापुर में गुरुवार (30 जुलाई, 2020) को भाजपा बूथ सचिव गौतम पात्र का शव पेड़ से लटका मिला था। बीते 24 घंटे के भीतर बंगाल में दो भाजपा कार्यकर्ताओं के शव पेड़ से लटके मिले थे। इससे पहले पूर्वी मिदनापुर जिले के कछुरी गाँव में बीजेपी कार्यकर्ता पूर्णचंद्र दास का शव पेड़ से लटका मिला था।

मृतक के परिजनों व बीजेपी पार्टी ने सत्तारूढ़ तृणमूल कॉन्ग्रेस पर हत्या का आरोप लगाया था। बंगाल बीजेपी ने ट्वीट करके ममता सरकार पर हमला बोलते हुए कहा था, “24 घंटे के भीतर बंगाल में एक और बीजेपी के कार्यकर्ता की राजनीति द्वेष के कारण हत्या कर दी गई। मथुरापुर में बूथ सचिव गौतम पात्र को भी बुरी तरह हत्या कर पेड़ से लटका दिया गया था। इस तरह राजनीतिक हत्याएँ राज्य की मुख्यमंत्री जो गृहमंत्री भी है उनके कार्यालय में बहुत ही आम हो चुकी है। परन्तु वह अब इस जिम्मेदारी से नहीं बच सकती हैं।”

लोक परंपराओं को बढ़ाने वाली गोवा की पहली महिला राज्यपाल मृदुला सिन्हा का निधन: PM मोदी, अमित शाह ने जताया दुःख

गोवा की पूर्व राज्‍यपाल, प्रतिष्ठित साहित्‍यकार व भाजपा नेता मृदुला सिन्‍हा (77) का बुधवार (नवंबर 18, 2020) को निधन हो गया। पीएम मोदी और अमित शाह समेत कई नेताओं ने उनके निधन पर दुख जताया।

उनके बारे में बता दें कि वह पूर्व राज्यपाल होने के साथ-साथ पाँचवा स्तंभ नाम से पत्रिका निकाल चुकी थीं। वह हिंदी लेखिका होने के साथ-साथ केंद्रीय कार्यसमिति की सदस्य थीं। पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में वह केंद्रीय समाज कल्याण बोर्ड के अध्यक्ष पद को भी संभाल चुकी थीं। उन्होंने लोक परंपराओं को बढ़ाने का काम भी अपने जीवन में बड़ी शिद्दत से किया था।

उन्हें यूपी हिंदी संस्थान का साहित्य भूषण सम्मान, दीन दयान उपाध्याय पुरस्कार समेत कई दूसरे सम्मान मिले थे। कई साहित्यिक मंचों से भी उन्हें सम्मानित किया जा चुका था। मौजूदा जानकारी के अनुसार 27 नवंबर 1942 को बिहार के मुजफ्फरनगर के छपरा गाँव में जन्मीं मृदुला सिन्हा गोवा की पहली महिला राज्यपाल थीं।

आज उनके निधन के बाद बहुत से नेता और आमजन अपना दुख प्रकट कर रहे हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लिखा, “मृदुला सिन्हा जी को जनता की सेवा के लिए उनके प्रयासों के लिए याद किया जाएगा। वह एक कुशल लेखिका भी थीं, जिन्होंने साहित्य के साथ-साथ संस्कृति की दुनिया में भी व्यापक योगदान दिया। उनके निधन से दुखी हूँ। उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना। ओम शांति।”

गृहमंत्री अमित शाह ने लिखा, “गोवा की पूर्व राज्यपाल व वरिष्ठ भाजपा नेता मृदुला सिन्हा जी का निधन बहुत दुःखद है। उन्होंने जीवन पर्यन्त राष्ट्र, समाज और संगठन के लिए काम किया। वह एक निपुण लेखिका भी थी, जिन्हें उनके लेखन के लिए भी सदैव याद किया जाएगा। उनके परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ। ॐ शान्ति।”

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने लिखा, “पूर्व राज्यपाल एवं साहित्यकार श्रीमती मृदुला सिन्हा का निधन मेरे लिए बेहद पीड़ादायक है। वे अपने लम्बे सार्वजनिक जीवन में हर दायित्व को निभाने में सहज और सफल रहीं। एक लेखिका के रूप में भी उन्होंने अपनी एक अलग पहचान बनाई। उनका पूरा जीवन समाज और साहित्य की सेवा के प्रति समर्पित रहा।”