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26/11 हमले पर भारत ने खारिज की पाक आतंकियों की लिस्ट, कहा- मुख्य साजिशकर्ताओं को बचाने की है कोशिश

भारत ने मुंबई में हुए 26/11 हमले को लेकर पाकिस्तान के हालिया दावों को खारिज कर दिया है। भारत का आरोप है कि जिन आतंकियों की सूची पाकिस्तान की ओर से जारी की गई है वह सटीक नहीं है। इसके जरिए सिर्फ़ पाक ने हमले में शामिल मास्टरमाइंड और प्रमुख साजिशकर्ताओं को बचाया है।

गुरुवार (नवंबर 13, 2020) को विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान द्वारा जारी लिस्ट को नकारा। मंत्रालय की ओर से कहा गया, “हमने पाकिस्तान की मीडिया रिपोर्टों को देखा है कि देश की संघीय जाँच एजेंसी ने मोस्ट वांटेड, हाई प्रोफाइल आतंकवादियों पर एक अपडेटेड पुस्तक जारी की है, जिसमें कि 26/11 के मुंबई हमलों में शामिल कई पाकिस्तानी नागरिकों के नाम हैं।”

मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, “लिस्ट में लश्कर-ए-तैयबा के कुछ चुनिंदा सदस्य शामिल हैं, जिसे संयुक्त राष्ट्र ने पाकिस्तान में स्थित आतंकवादी इकाई घोषित किया है, इसमें 26/11 हमले को अंजाम देने के लिए इस्तेमाल की गई नावों के चालक दल के सदस्य भी शामिल हैं, लेकिन इसमें जघन्य आतंकी हमले में शामिल प्रमुख साजिशकर्ताओं के नाम नहीं हैं।”

आगे अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, “यह एक फैक्ट है कि 26/11 के आतंकवादी हमले की योजना पाकिस्तान से क्रियान्वित की गई। यह सूची साफ बताती है कि पाकिस्तान के पास मुंबई आतंकी हमले के साजिशकर्ताओं और उनके सहयोगियों से जुड़े सभी आवश्यक जानकारी और सबूत हैं।”

गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 को हुए मुंबई हमले में 28 विदेशियों सहित कुछ 166 लोग मारे घए थे। सबसे अधिक लोग छत्रपति शिवाजी टर्मिनल पर मारे गए थे। वहीं ताजमहल होटल में 31 लोगों को आतंकियों ने अपनी गोली का शिकार बनाया था।

ऐसे में सभी इस हमले के पहलुओं को देखते हुए प्रवक्ता ने कहा, “भारत सरकार ने बार-बार पाकिस्तान सरकार से आह्वान किया है कि मुंबई आतंकी हमलों के मुकदमे में अपने अंतरराष्ट्रीय दायित्वों का निर्वहन करने में वो अपनी उलझाऊ और देर करने की युक्तियाँ छोड़ दे।” श्रीवास्तव ने बताया कि अब तक कई दूसरे देश भी इस संबंध को समझा चुके हैं।

यहाँ बता दें कि पिछले कई साल से भारत लगातार पाकिस्तान पर मुंबई आंतकी हमले को लेकर दवाब बना रहा था। इसी दबाव के चलते पाक ने मुंबई हमले में शामिल पाकिस्तान के आतंकियों के नाम जारी किए थे। इनमें साहिवाल जिले के मोहम्मद उस्मान, लाहौर जिले के अतीक-उर-रहमान, हाफिजाबाद के रियाज अहमद, गुजरांवाला जिले के मुहम्मद मुश्ताक, डेरा गाजीपुर जिले के मुहम्मद नईम, सरगोधा जिले के अब्दुल शकूर, मुल्तान के मुहम्मद साबिर, लोधरान जिले का मोहम्मद उस्मान, रहीम यार खान जिले के शकील अहमद का नाम शामिल था।

चंदा बाबू जैसों के डर का नाम है जंगलराज, आँकड़ों की लीपापोती से नहीं धुलेगा लालू का ये दाग

बिहार विधानसभा चुनावों के दौरान एक शब्द का बार-बार इस्तेमाल हुआ है। यह है- जंगलराज। 1990 से 2005 तक के उस वक्त के लिए जिस दौरान बिहार में लालू प्रसाद यादव और उनकी पत्नी राबड़ी देवी का शासन रहा, जंगलराज कहा जाता है।

10 नवंबर 2020 को बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आए। लिबरल बिरादरी के लिए एनडीए का सत्ता बचा लेना बड़ा झटका था, क्योंकि उन्होंने सपनों में लालू के जंगलराज के उत्तराधिकारी कहे जाने वाले तेजस्वी यादव को शपथ लेते भी देख लिया था। इसी छटपटाहट में नतीजों के अगले दिन प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द प्रिंट‘ ने राकेश चंद्रा की एक लेख प्रकाशित की। चंद्रा टाटा इंस्टीट्यूट आफ सोशल साइंस (TISS) के सेंटर फॉर हेल्थ पॉलिसी, प्लानिंग और मैनेजमेंट में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। इस लेख के जरिए यह बताने की कोशिश की गई है कि नीतीश कुमार और बीजेपी भले लालू-राबड़ी के राज को जंगलराज कहें, लेकिन यह झूठ है। अपनी बातों को साबित करने और ‘राजद के युवराज’ के दामन को पाक-साफ़ बताने के लिए लेखक ने आँकड़ों की बाजीगरी दिखाई है।

आँकड़ों के जरिए यह भ्रम पैदा करने की कोशिश की गई है कि जंगलराज कोरी कल्पना के सिवा कुछ नहीं है। लिबरल मीडिया और कथित बुद्धिजीवी जमीन से कितने कटे हैं और अपनी ही कल्पनाओं के संसार में किस कदर उतराते रहते हैं, यह बिहार के चुनाव नतीजों ने पहले ही साबित कर दिया है। इस लेख के तथ्यों पर आने से पहले जरा इस बयान को गौर से पढ़िए;

“मरना तो है ही अब ईश्वर मार दे या शहाबुद्दीन”

करीब चार साल पहले यह बात एक पिता ने कही थी। इस पिता का नाम है- चंदा बाबू। चंदा बाबू के दो बेटों को शहाबुद्दीन ने तेजाब से नहलाकर मार डाला था। तीसरे बेटे की गवाह बनने पर हत्या कर दी थी। शहाबुद्दीन कौन था? वह लालू प्रसाद यादव की राजद का सांसद था। अपनी सामानांतर सरकार चलाता था। पुलिस पर भी गोलियाँ बरसाने से नहीं डरता था। वह नाराज हो जाता था तो सत्ता समर्पण कर देती थी। उसने यह खौफ किसके राजनीतिक राजनीतिक संरक्षण की वजह से बनाया था? सीधा सा जवाब है- लालू प्रसाद यादव।

आँकड़ों में चंदा बाबू के तीन बेटों का मारा जाना तो केवल तीन हत्या के रूप में दर्ज है। लेकिन, क्या यही आँकड़े यह भी बताते हैं कि उन्हें किस बेरहमी से मारा गया था? चंदा बाबू ने किस भय में जिंदगी गुजारी? इस घटना ने कितने माँ-बाप को डराया ? इसने कितने शहाबुद्दीन को कानून को रौंद देने की छूट दी?

डाटा भले यह बता दे कि कितनी हत्या हुई। कितने किडनैप किए गए। लेकिन, क्या उससे यह भी पता चलेगा कि उस दौर में हत्या और अपहरण एक ‘उद्योग’ बन चुका था? एक कारोबार था, पैसे कमाने का एक जरिया था? राजनेताओं, अधिकारियों और माफियाओं का ऐसा गठजोड़ इसके पहले कहीं देखा ही नहीं गया था? और सबसे बड़ी बात अपराध का साम्राज्य शहाबुद्दीन जैसे गुंडों और ‘सालों’ के भरोसे चलता था?

16 अक्टूबर 1994 की रात त्रिवेणीगंज से राजद का विधायक रहा योगेन्द्र नारायण सरदार एक दलित युवती को उसके घर से उठाकर अपनी जीप में डालता है। उससे रेप करता है। डाटा में तो यह केवल रेप के तौर पर दर्ज होगा। लेकिन, इसने दलितों में किस कदर खौफ भरा होगा, महिलाएँ खुद को कितनी असुरक्षित और असहाय महसूस कर रही होंगी, कैसे बताएगा?

आम आदमी की तो छोड़िए। उस दौर में कौन सुरक्षित था। IAS अधिकारी बीबी विश्वास की पत्नी, माँ, भतीजी का लगातार दो साल तक यौन शोषण किया गया। जब मामला सामने आया तो आरोपित को बचाने में पूरी सरकार लग गई। कौन सा आँकड़ा इस हकीकत को बताएगा?

बाथे नरसंहार हो या अन्य जातीय नरसंहार, डाटा में वह केवल चंद लोगों की हत्या कही जाएगी। लेकिन इसने भूमिहारों का जनमानस किस वृहद रूप से प्रभावित किया, वह डाटा से सामने नहीं आएगा। ‘भूरा बाल साफ करो’ के नारे से सवर्णों में पैदा हुआ डर आँकड़े नहीं बताते।

आप गिनते जाएँगे पर उस दौर की ऐसी घटनाओं की फे​हरिस्त खत्म नहीं होगी। असल में जंगलराज एक अहसास है, जिसे केवल कुछ आँकड़ों के दम पर नहीं झुठलाया जा सकता। यह 2020 में भी कायम है। यही कारण है कि जब हमने अपने चुनावी कवरेज के दौरान गया के व्यापारियों से सवाल किया: गंदगी, जाम और जलजमाव आपके शहर की पहचान बन गई है, फिर भी आप बीजेपी को वोट क्यों करते हैं? उनका जवाब था- धंधा तो आराम से कर लेते हैं। यह डर नहीं होता कि कब कौन किधर से आएगा और गल्ले पर ही कॉलर पकड़ लेगा।

कायदे से तो TISS के एक प्रोफेसर को यह पता होना चाहिए कि डेटा की क्वांटिटेटिव अनालिसिस से ही सारी बातें पता नहीं चलतीं। अगर वे सामाजिक डर को मापने में असफल रहे हैं, सिर्फ डेटा पर ही खेल कर, उन अपराधों के होने के तरीकों की व्याख्या नहीं कर पाते, तो उन्हें ऐसे संस्थानों में पढ़ा कर विद्यार्थियों को मूर्ख बनाना छोड़ देना चाहिए।

जंगलराज जैसे नाम आँकड़ों पर नहीं, लोगों के भीतर एक अपराध को लेकर जगे खौफ के कारण मिलते हैं। जब पुलिस केस दर्ज न करे, केस दर्ज करने पर आपकी हालत चंदा बाबू जैसी हो जाए, तो वो डेटा में नहीं लिखा जाता।

जंगलराज का वह डर 2020 का बिहार भी महसूस करता है। यही कारण है कि केनार चट्टी के युवा हों या पटना की कॉलेज गर्ल्स, जिससे भी हमने अपने चुनावी कवरेज के दौरान बात की, वह इस बात को लेकर सशंकित थे कि यदि राजद सत्ता में लौटती है तो जंगलराज का वही डर फिर से लौटेगा।

ये शंकाएँ भी बेजा नहीं थी। 11 नवंबर को बेनीपट्टी विधानसभा के मलमल गाँव की 60 साल की एक महिला ने हमें बताया, “ढेनी टोल बला सब काइल्हे स घर धेने छै। सब छलै ललटेम बला स पाई लेने। हारि गेलै त नुकाएल छै। लेकिन रमनरेस्बा के बेटा भैर गाम गाड़ी पर हुर्र-हुर्र करैत छलै जे ककरो स मारि भ जै।”

सत्ता हाथ से छिटक जाने के बाद भी एक वर्ग विशेष के लोगों से इस बुजुर्ग महिला को दिख रहा डर भला कौन सा आँकड़ा बताएगा प्रोफेसर साहब? याद रखिएगा निर्भया बलात्कार केस भी डाटा में एक ही गिना जाएगा, लेकिन उस एक बलात्कार ने पूरे देश को हिलाकर रख दिया था।

राजस्थान में गाय को खिलाया विस्फोटक पदार्थ, मुँह से निकल रहा खून ही खून: अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज

राजस्थान के पाली जिले के मारवाड़ जंक्शन उपखंड में मानवता को शर्मशार करने वाली घटना सामने आई है। जहाँ किसी असामाजिक तत्व ने गाय को विस्फोटक पदार्थ खिला दिया जोकि उसके मुँह में ही फट गया। विस्फोटक पदार्थ के फटने से गाय गंभीर रूप घायल हो गई है। पुलिस ने मामले में एफआईआर दर्ज कर जाँच में जुट गई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, विस्फोटक के फटने से गाय के मुँह से खून ही खून बह रहा है। इस मामले के बारे में सूचना मिलते ही मारवाड़ जंक्शन के गो पुत्र सेना के कार्यकर्ता मौके पर पहुँचे। वहीं इसी दौरान बजरंग दल ने पशु एंबुलेंस से घायल तड़पती गाय को चिकित्सालय पहुँचाया, जहाँ गाय का उपचार चल रहा है।

इलाके के जाडन पशु चिकित्सालय में लहूलुहान और दर्द से तड़पती गाय का इलाज किया जा रहा है। वहीं घटना के बाद गाँव के लोग काफी आक्रोशित है। गो पुत्र सेना, बजरंग दल, विश्व हिंदू परिषद के कार्यकर्ताओं ने घटना की निंदा करते हुए ऐसी हरकत करने वालों के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई करने के लिए माँग करते हुए गाँव वालों के साथ विरोध प्रदर्शन भी कर रहे हैं।

वहीं गाय के साथ हुए इस क्रूर घटना पर नाराजगी व्यक्त करते हुए गो पुत्र सेना के कार्यकर्ताओं ने सिरियारी थाने में अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। घटना पर संज्ञान लेते हुए थाना अधिकारी सुरेश सारण ने बताया कि मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी गई है। जल्दी ही अपराधी को गिरफ्तार किया जाएगा।

गौरतलब है कि ऐसी ही एक घटना केरल में हुई थी। जहाँ एक गर्भवती हथिनी का खाने में मिले विस्फोटक को खाने से मौत हो गई थी। दरअसल, 27 मई, 2020 को एक 15 वर्षीय गर्भवती हथिनी ऐसे ही एक अमानवीय कृत्य का शिकार हो गई। उसे किसी उपद्रवी शख्स ने एक पटाखों से भरा अनानास खिलाया, जिससे हथिनी के मुँह में विस्फोट हो गया और वह बुरी तरह जख्मी हो गई। हथिनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह गर्भवती थी। उसका जबड़ा टूट गया था और मुँह में विस्फोट के कारण वह अनानास चबाने के बाद कुछ खा नहीं पा रही थी।

‘वो दरवाजा तोड़कर मेरे बिस्तर तक आए.. जेल में मेरे बाथरूम में कैमरे लगे थे’: मरयम नवाज का इमरान सरकार पर आरोप

पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की बेटी व पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) की उपाध्यक्ष मरयम नवाज ने इमरान सरकार पर बड़ा आरोप लगाया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मरयम नवाज ने दावा किया है कि उन्हें जेल की जिस सेल में रखा गया था, वहाँ पर खुफिया कैमरे लगे हुए थे। पाकिस्तान के एक समाचार चैनल के साथ बात करते हुए मरयम ने अपने साथ हुए दुर्व्यवहार का जिक्र किया।

उन्होंने एक साक्षात्कार में इन बातों का खुलासा करते हुए कहा कि वह अब तक दो बार जेल जा चुकी हैं और यदि वह हिरासत में रहने के दौरान महिलाओं के साथ होने वाले बर्ताव को विस्तार से बता दें तो इमरान सरकार को अपना चेहरा भी छिपाने की जगह नहीं मिलेगी। 

इसके बाद साक्षात्कर्ता ने जब उनसे उन चीजों को सबके सामने साझा करने को कहा कि आखिर ऐसा क्या होता है, तो मरयम ने कहा कि वह इस बारे में अभी नहीं बताएँगी क्योंकि वह जद्दोजहद कर रही हैं और वह इसकी आड़ में छिपकर विक्टिम प्ले नहीं करना चाहतीं। लेकिन वह बताना जरूर चाहती हैं कि औरत चाहे पाक में हो या दुनिया के किसी और कोने में वह कमजोर नहीं हैं।

आगे मरयम नवाज ने इमरान सरकार पर सवाल उठाते हुए कहा, “अगर आप मरयम नवाज के होटल का कमरा तोड़कर उसके बिस्तर तक पहुँच सकते हैं, अगर उसे सच बोलने के लिए उसके पिता के सामने गिरफ्तार किया जा सकता है, अगर उसके जेल की कोठरी और बाथरूम के अंदर कैमरे लगाए जा सकते हैं, और अगर उसे व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया जा सकता है, तो पाकिस्तान की कोई महिला सुरक्षित नहीं है।”

याद दिला दें कि मरयम नवाज ने पिछले महीने अपने सोशल मीडिया अकॉउंट के माध्यम से यह जानकारी दी थी कि वो कराची के एक होटल में रुकी हुई थीं। तभी पुलिस ने उनके कमरे का दरवाजा तोड़ डाला और उनके पति कैप्टेन सफ़दर अवान को गिरफ्तार कर के ले गई। पुलिस ने किस तरह से दरवाजे का लॉक तोड़ा, इसे दिखाने के लिए मरयम नवाज शरीफ ने वीडियो भी शेयर किया था। 

पुलिस के जाने के बाद उन्होंने दरवाजे के टूटे हुए लॉक को जमीन पर गिरा दिखाया। इसके बाद अंतरराष्ट्रीय लेखक तारिक फतह ने भी मरयम को ‘डायनामिक विपक्षी नेता’ बताते हुए पाकिस्तान पुलिस की इस हरकत की निंदा की थी।

Video: ‘यही है वो कुत्ता जिसने इस्लाम को गाली दी’- यूट्यूबर फयेज़ ने उगला फ्रांसीसी राष्ट्रपति के लिए जहर

जब से फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने इस्लामी कट्टरपंथ के विरुद्ध जंग छेड़ी है तब से ही उनके विरुद्ध नफरत भरा अभियान चलाया जा रहा है। दुनिया भर के तमाम मुस्लिम फ्रांसीसी राष्ट्रपति के घृणित और हिंसा को बढ़ावा देने की बात कर रहे हैं। ऐसे तमाम कट्टर इस्लामी प्रदर्शनकारियों के बीच बर्लिन में रहने वाले सीरियाई मूल के यूट्यूबर फयेज़ कनफश ने बर्लिन की सड़कों पर फ्रांस के राष्ट्रपति के लिए जहर उगलते हुए उन्हें ‘मैक्रों द डॉग’ कह कर संबोधित किया। सबसे ज़्यादा मज़े की बात यह है कि सीरियाई मूल का (अप्रवासी) यूट्यूबर खुद को सटायरिस्ट (व्यंग्यकार) कहता है। 

अपना विरोध दर्ज कराते हुए यूट्यूबर अपने साथ एक व्यक्ति को लेकर आया जिसने इमैनुएल मैक्रों का मास्क पहन रखा था। यह वीडियो इंटरनेट पार काफी वायरल हो रहा है, जिसमें एक व्यक्ति को हथकड़ियाँ बाँध कर घसीटा जा रहा है और उसने फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों का मास्क पहन रखा है। वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि यूट्यूबर फयेज़ ने मास्क पहने हुए व्यक्ति को हथकड़ियाँ बाँध रखी हैं और आस-पास मौजूद लोग उसे ऐसा करने के लिए और प्रोत्साहित करते हैं। 

यूट्यूबर इतने पर ही नहीं रुकता है बल्कि वह फ्रांसीसी राष्ट्रपति के मास्क में आग लगा कर लोगों से विरोध करने को कहता है और उन्हें ‘कमीना-कुत्ता’ कहता है।

इसके बाद फयेज़ आस-पास मौजूद लोगों को आगाह करता है कि जो लोग इस्लाम की बुराई करते हैं उनके साथ ऐसा ही बर्ताव होगा। फिर मौके पर मौजूद लोग उसके साथ अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाते हैं। लोगों (मुस्लिम) के अल्लाह-हू-अकबर चिल्लाने के बाद यूट्यूबर फयेज़ कहता है, “मैं इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण हूँ कि मोहम्मद अल्लाह का दूत है।” फिर वह कहता है, “इसे (मेक्रों) मारने की ज़रूरत नहीं है, यह असली नहीं है। तुम बस इंतज़ार करो कुत्ते, तुम शवरमा (चिकन) खाना चाहते हो? मैं तुम्हें अपना जूता खिलाऊंगा, बोलो अल्लाह-हू-अकबर।” 

इसके बाद मास्क पहने हुए व्यक्ति को घसीटते हुए सीरियाई यूट्यूबर कहता है, “यही है मैक्रों, हमने इसे जला दिया। तुमने इस्लाम का अपमान करने की हिमाकत की? तुम कमीने हो, जानवर हो, तुम बस इंतज़ार करो कुत्ते, चलो सभी मेरे साथ आओ। चलो मैक्रों चलो! जो इंसान इस्लाम और पैगंबर का अपमान करेगा उसके साथ ऐसा ही होगा। यह वही कुत्ता है जिसने इस्लाम का अनादर किया, मैं कसम खाकर कहता हूँ अगर तुमने (मैक्रों) फिर से ऐसा किया तो परिणाम भयावह होगा। तुम कुत्ते, कीड़े मकोड़े, कमीने! इसकी पत्नी हिजाब पर पाबंदी लगाना चाहती है क्योंकि बच्चे डरे हुए हैं।” 

सबसे ज़्यादा हैरानी की बात यह है कि ऐसी मानसिकता और रवैये रखने वाले इंसान के यूट्यूब पर 1 मिलियन (10 लाख से अधिक) फॉलोवर हैं। फिर भी वह अपने चैनल का इस्तेमाल गैर मुस्लिम लोगों के विरुद्ध घृणा फैलाने के लिए करता है। 

जर्मनी की पुलिस कर रही है मामले की जाँच 

जैसे ही यह घटना इंटरनेट पर चर्चा का कारण बनी ठीक उसके बाद ही जर्मनी की पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया और फ्रांस के राष्ट्रपति के लिए घृणा फैलाने के आरोप में यूट्यूबर फयेज़ के विरुद्ध जाँच शुरू कर दी। 23 साल के सीरियाई यूट्यूबर से इस मामले में पूछताछ भी की जा चुकी है, इस बात की जानकारी उसने खुद दी थी। उसने पूछताछ में यह बताया कि वह जर्मनी और पश्चिम के लोगों को दिखाना चाहता था कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का भी दायरा होता है। इसके बाद अपनी बात में विरोधाभास पैदा करते हुए उसने कहा कि उसका लक्ष्य कभी भी हिंसा को बढ़ावा देना नहीं था। 

उसने बताया कि वह 4 साल पहले सीरिया से जर्मनी आया था। अपने पूरे बयान में उसने कहा, “हम बस इतना कहना चाहते थे कि अगर अभिव्यक्ति की आज़ादी की आड़ में पैगंबर का अपमान किया जा सकता है तब इस बात को लेकर बुरा नहीं मानना जब हम तुम्हारे नेताओं का अपमान करते हैं।” 

दुनिया भर के मुस्लिम फ्रांस के विरोध में 

इस्लामी कट्टरपंथ के मुद्दे पर फ्रांसीसी राष्ट्रपति के कड़े रवैये पर तुर्की और पाकिस्तान जैसे कई इस्लामी मुल्क काफी बड़े पैमाने पर आहत हुए थे और उन्होंने इस्लामोफोबिया का आरोप लगाते हुए फ्रांस की गतिविधियों की निंदा भी की थी। पाकिस्तानी नेशनल एसेम्बली में तो इस बात को लेकर एक प्रस्ताव पारित किया गया कि फ्रांस से पाकिस्तानी दूत को वापस बुला लिया जाए (जबकि फ्रांस में पाकिस्तान का कोई दूत था ही नहीं)। दुनिया भर के तमाम मुस्लिम फ्रांस के विरोध में आगे आए थे जिसमें भारत की मुस्लिम आबादी का एक बड़ा हिस्सा शामिल था। वहीं फ्रांस के लोगों पर इस्लामी कट्टरपंथियों द्वारा किए हमले के बाद भारत सरकार ने फ्रांस का समर्थन किया था।         

हरीश साल्वे ने कोर्ट में मेरा पक्ष रखने का 1 रुपया तक नहीं लिया: अर्णब ने अपने वकील के प्रति जताया आभार

तलोजा जेल से रिहा होने के बाद रिपब्लिक टीवी के एडिटर-इन-चीफ अर्णब गोस्वामी ने गुरुवार (नवंबर 12, 2020) को अपने लाइव शो में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे के प्रति आभार व्यक्त किया। साल 2018 के सुसाइड केस में बेल दिलाने के लिए हरीश साल्वे ने ही उनके केस को सुप्रीम कोर्ट में पेश किया था और अपने तर्कों से वो अर्णब को जमानत दिलाने में सफल भी हुए।

वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे की इसी सहायता के लिए अर्णब ने अपने रात 9 बजे वाले डिबेट शो में उनके प्रति कृतज्ञता जाहिर की और बताया कि साल्वे ने उनका केस कोर्ट में लड़ने के लिए न्यूज नेटवर्क से 1 रुपया भी नहीं लिया।

उन्होंने कहा,

“मैं नहीं जानता कि आप सभी में से कितने लोग यह जानते हैं, लेकिन हरीश साल्वे ने अदालत में अपनी कीमती उपस्थिति के लिए हमसे एक रुपया भी नहीं लिया है। वह हमारे लिए निस्वार्थ खड़े रहे। यह कुछ ऐसा है जिसके लिए मैं अपना आभार और धन्यवाद भी व्यक्त नहीं कर सकता।”

गौरतलब है कि अर्णब के ख़िलाफ़ जिस मामले में महाराष्ट्र सरकार ने कार्रवाई की है उसमें उन पर आरोप था कि उन्होंने साल 2018 में अन्वय नाइक को उनका 83 लाख रुपए का बकाया नहीं चुकाया। यह केस 2019 में सबूतों के अभाव में बंद हो चुका था। लेकिन अर्णब को फँसाने के लिए इसे दोबारा रीओपन किया गया।

इसी केस पर अपना पक्ष रखते हुए साल्वे ने अर्णब को जेल से निकलवाया। उन्होंने कोर्ट में कहा,

वह (अन्वय नाइक) आर्थिक परेशानी से गुजर रहे थे इसलिए उन्होंने आत्महत्या की, फिर यह आत्महत्या के लिए उकसाने वाला केस कैसे हो गया। उकसाने के लिए अपराध में प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से संलिप्ता होनी चाहिए। अगर कल को कोई आत्महत्या करेगा और महाराष्ट्र सरकार पर इल्जाम लगा देगा तो क्या मुख्यमंत्री को गिरफ्तार किया जाएगा।” इसके बाद साल्वे ने व्यक्तिगत स्वतंत्रता का हवाला देकर अर्णब के लिए अंतरिम जमानत की माँग की।

यहाँ बता दें कि बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने अर्णब गोस्वामी को पूरे मामले में बेल दी थी। जमानत आदेश में सुप्रीम कोर्ट ने इसे मानने के लिए मुंबई पुलिस को निर्देशित किया था। जस्टिस चंद्रचूड़ ने अर्णब को बेल देते हुए कहा था-  “हम मानते हैं कि जमानत नहीं देने में हाईकोर्ट गलत था।” 

कोर्ट मे मामले में सुनवाई करते हुए कई सख्त टिप्पणियाँ की। सुप्रीम कोर्ट के न्यायाधीश जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि अगर हम आज इस मामले में हस्तक्षेप नहीं करते हैं तो बर्बादी की राह पर बढ़ जाएँगे। उन्होंने कहा कि किसी की विचारधारा अलग हो सकती है और वो चैनल नहीं देखे, लेकिन संवैधानिक अदालतें अगर ऐसी आज़ादी की सुरक्षा नहीं करती हैं तो वो बर्बादी की राह पर बढ़ रही है।

कोर्ट ने इसके बाद  अर्नब गोस्वामी और दो अन्य आरोपितों को 50,000 रुपए के बांड पर अंतरिम जमानत पर रिहा किया गया। पुलिस आयुक्त को यह सुनिश्चित करने के लिए निर्देशित किया जाता है कि आदेश का तुरंत पालन किया जाए।

‘चायनीज लड़ियों के बिना भारत में काली होगी दिवाली’: चीन ने ‘वोकल फॉर लोकल’ का बनाया मजाक

प्रधानमंत्री मोदी के ‘आत्मनिर्भर भारत’, ‘स्वदेशी’ और ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ का प्रभाव कितना व्यापक है इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चायनीज मुखपत्र ‘ग्लोबल टाइम्स’ हिन्दुओं के पवित्र त्यौहार दीपावली को भी अपने अजेंडा के लिए इस्तेमाल करता नजर आ रहा है। चीन का मानना है कि चायनीज लड़ियों के बिना दीपावली काली रहने जा रही है।

दरअसल, चीनी सामान के बहिष्कार और स्वदेशी को लेकर बढ़ रही जागरूकता का प्रभाव अब चीनी बाजार में नजर आने लगा है। यही वजह है कि चीनी सरकार बौखलाई हुई है। ग्लोबल टाइम्स के मुताबिक, चीन की सरकार का कहना है कि चायनीज LED लड़ियों के बिना भारत में दीपावली की रात काली रहेंगी। इसी के साथ, ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की ‘वोकल फ़ॉर लोकल’ की मुहीम का भी मजाक बनाने का प्रयास किया है।

‘वोकल फॉर लोकल’ अपील की आलोचना करते हुए ‘ग्लोबल टाइम्स’ ने लिखा है कि पीएम मोदी की इस अपील का असर नहीं हो रहा है। उनकी इस अपील के बावजूद भारतीय कारोबारी एवं उपभोक्ता चीन से बड़ी मात्रा में एलईडी लाइट्स खरीद रहे हैं। और यह माँग इतनी ज्यादा है कि चायनीज कंपनियों को सप्लाई करने में समस्या आ रही है जिस कारण चीनी कंपनियाँ दिन-रात काम कर रही हैं।

ग्लोबल टाइम्स ने अपनी बात को साबित करने के लिए एक फैक्ट्री के सेल्स मैनेजर वांग के बयान का उल्लेख भी रिपोर्ट में किया है। इस रिपोर्ट में वांग के हवाले से कहा गया है कि दिवाली के समय पर ऑर्डर की आपूर्ति करने के लिए कंपनी अक्टूबर महीने से अपनी पूरी क्षमता के साथ चल रही है। सेल्स मैनेजर का कहना है कि बड़े पैमाने पर उत्पादों का निर्माण होने से लागत कम आती है।

रिपोर्ट में इस सेल्स मैनेजर के बयान को कोट करते हुए कहा गया कि उन्हें दसियों लाख इकाइयों से जुड़े निर्यात ऑर्डर मिले हैं। जिसमें भारत का नाम भी शामिल है। उनकी ऑटोमेटेड प्रोडक्शन लाइन हर दिन 1 लाख एलईडी लाइट बनाती है। मगर यह ऑर्डर पूरे करने के लिए पर्याप्त नहीं है, इसलिए वह अपनी प्रोडक्शन लाइन बढ़ा रहे हैं।

इसके बाद वांग के बढ़ते कारोबार के दम पर ग्लोबल टाइम्स ने भारत में बिन एलईडी के लाइट का मुद्दा खूब भुनाया और यह बखान किया कि उनकी कंपनी किस प्रकार की लाइटें बनाती हैं।

बता दें कि चीन के मुखपत्र का अपने पाठकों से यह भी कहना है कि भारत सरकार ने गत अप्रैल महीने में चीन निर्मित इलेक्ट्रानिक्स सामानों पर निर्भरता कम करने के लिए कदम उठाए थे लेकिन उनके पास इलेक्ट्रानिक्स उत्पादों की माँग में कमी नहीं आई है।

रिपोर्ट में ‘साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट’ के हवाले से कहा गया है कि दिवाली के मौके पर भारत एलईडी वल्बों का बड़ी मात्रा में चीन से आयात करता आया है। भारत की आयात की यह रकम 13.4 करोड़ डॉलर है।

ग्लोबल टाइम्स की मानें तो अभी भी भारतीय कारोबारी उनसे संपर्क कर रहे हैं और उन्हें ऑर्डर दे रहे हैं। मुखपत्र में विशेषज्ञों के नाम पर शिंघुआ यूनिवर्सिटी में नेशनल स्ट्रेटजी इंस्टीट्यूट के रिसर्च विभाग के निदेशक क्वेन फेंग के हवाले से भी प्रोपगेंडा फैलाया गया।

जहाँ फेन ने कहा कि मोदी सरकार ने चीनी सामानों पर निर्भरता कम करने के लिए त्योहारों के मौकों पर लोगों से स्थानीय वस्तुओं की खरीदारी करने की अपील की है, लेकिन चीनी वस्तुओं की कीमत कम एवं उनकी गुणवत्ता बेहतर होने से भारतीय उपभोक्ताओं में चीन निर्मित वस्तुओं की माँग काफी ज्यादा है। आगे कहा कि भारत में दिवाली प्रकाश का पर्व है लेकिन चीन के एलईडी वल्बों के बिना यह दीपावली ‘काली’ हो जाएगी। इसलिए भारतीय उपभोक्ता चीनी लाइट जम कर खरीद रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि चीन का दावा चाहे कुछ भी हो लेकिन इस बात से इंकार नहीं किया जा सकता कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आह्वान के बाद से लोगों ने चीनी लाइट्स व सामानों का बहिष्कार किया है। ट्विटर पर स्वदेशी दीवाली जैसे शब्द डालने पर अनेकों लोगों द्वारा चलाए जा रहे ऐसे अभियान सामने आ रहे हैं जिनमें विदेशी कंपनियों के हर सामान को बॉयकॉट करके स्वदेशी चीजों की ओर लोगों को आकर्षित करवाया जा रहा है ताकि भारतीय ब्रांड भी खुद को स्थापित कर पाएँ और देश का पैसा चीन जैसे मुल्कों में भी न जाए।

‘राहुल गाँधी में अनगढ़ छात्र के गुण.. योग्यता-जुनून की कमी’: बराक ओबामा के संस्मरण पर हंगामा

हाल ही में संपन्न हुए बिहार चुनाव में कॉन्ग्रेस के निराशाजनक प्रदर्शन के बाद एक बार फिर कई आलोचकों ने राहुल गाँधी के ‘कमज़ोर’ प्रदर्शन का विरोध किया है। कॉन्ग्रेस ने बिहार में 70 सीटों में से महज 19 सीटें जीतने में कामयाबी हासिल की, जिस कारण ‘महाठबंधन’ को भी सत्ता से वंचित रहना पड़ा। अब वो पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा के एक संस्मरण के कारण चर्चा का विषय बने हैं।

राहुल गाँधी को अब अपनी नई किताब- ‘ए प्रॉमिस्ड लैंड’ (A promised Land) में अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा की भी कड़ी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है। 44वें अमेरिकी राष्ट्रपति ने राहुल गाँधी और भारत के पूर्व पीएम डॉ मनमोहन सिंह पर निशाना साधा है। NYT की समीक्षा के अनुसार, यह पुस्तक ओबामा की एक आत्मकथा है जो ‘व्यक्तिगत से अधिक राजनीतिक’ है।

‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ की एक पुस्तक की समीक्षा के अनुसार, ओबामा ने वायनाड के सांसद राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए कहा, “उनमें एक ऐसे ‘घबराए हुए और अनगढ़ (Unformed- जो तराशा न गया हो)’ छात्र के गुण हैं, जिसने अपना पूरा पाठ्यक्रम पूरा कर लिया है और वह अपने शिक्षक को प्रभावित करने की चाहत रखता है, लेकिन उसमें ‘विषय में महारत हासिल’ करने की योग्यता या फिर जूनून की कमी है।”

अपने संस्मरण में बराक ओबामा ने राहुल की माँ और कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी का भी जिक्र किया है। समीक्षा में कहा गया है, “हमें चार्ली क्रिस्ट और रहम एमैनुएल जैसे पुरुषों के हैंडसम होने के बारे में बताया जाता है लेकिन महिलाओं के सौंदर्य के बारे में नहीं। सिर्फ एक या दो उदाहरण ही अपवाद हैं जैसे सोनिया गाँधी।”

इस पुस्तक समीक्षा में कहा गया है कि अमेरिका के पूर्व रक्षा मंत्री बॉब गेट्स और भारत के पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह, दोनों में बिलकुल भावशून्य सच्चाई/ईमानदारी है। उल्लेखनीय है कि ओबामा का 768 पन्नों का यह संस्मरण 17 नवंबर को बाजार में आने वाला है। अमेरिका के पहले अफ्रीकी-अमेरिकी राष्ट्रपति ओबामा ने अपने कार्यकाल में दो बार 2010 और 2015 में भारत की यात्रा की थी।

इसमें रूस के राष्ट्रपति पुतिन पर भी टिप्पणी की गई। इसमें कहा गया कि रूस के राष्ट्रपति व्लादिमिर पुतिन ओबामा को शिकागो मशीन चलाने वाले मजबूत, चालाक बॉस की याद दिलाते हैं। पुतिन के बारे में ओबामा लिखते हैं, ‘‘शारीरीक रूप से वह साधारण हैं।’’

यहाँ बता दें कि राहुल गाँधी व सोनिया गाँधी को लेकर ओबामा की यह टिप्पणी सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर कई नेटीजन्स ने इस पूरे मामले पर चुटकी ली है। उन्होंने ‘माफी माँग ओबामा’ हैशटैग चला कर पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति की बात पर न केवल सहमति व्यक्त की है बल्कि मीम शेयर कर करके पूरे गाँधी परिवार का मजाक भी उड़ाया है।

‘गलती से हो गया था अकाउंट लॉक’: गृहमंत्री अमित शाह की DP हटाने पर ट्विटर ने दी सफाई

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्विटर पर केंद्रीय गृहमंत्री के आधिकारिक अकॉउंट से उनकी तस्वीर गुरुवार (नवंबर 12, 2020) को अचानक गायब होने पर सोशल मीडिया यूजर्स ने हैरानी व्यक्त की। गृहमंत्री के ट्विटर अकॉउंट पर उनके प्रोफाइल में लगी तस्वीर की जगह बहुत देर तक यही लिखा नजर आया कि कॉपीराइट होल्डर की रिपोर्ट के बाद तस्वीर को हटाया गया है। 

बता दें कि गृहमंत्री अमित शाह की ट्विटर डिस्प्ले पिक्चर उनकी ऑफिशियल वेबसाइट पर भी है। लेकिन बावजूद इसके इसे कॉपीराइट का हवाला देकर हटाए जाने से लोग स्क्रीनशॉट शेयर कर करके इसका कारण पूछने लगे।

वैसे आमतौर पर ट्विटर ऐसा तब करता है जब किसी ने कॉपीराइट का दावा किया हो, लेकिन तब भी इतने बड़े प्लेटफॉर्म से यह अपेक्षा नहीं की जाती है कि वह बिना सत्यापित किए किसी शिकायत पर कार्रवाई करें। इसीलिए सोशल मीडिया पर जैसे ही नेटीजन्स ने अपने सवाल दागने शुरू किए, ट्विटर ने फौरन अमित शाह की तस्वीर को पूर्ववत कर दिया।

उल्लेखनीय है कि अमित शाह देश के दूसरे सबसे ज्यादा फॉलो किए जाने वाले नेता हैं। उन्हें ट्विटर पर 23.6 मिलियन लोगों द्वारा फॉलो किया जाता है। वहीं 296 अकॉउंट्स को वह स्वयं फॉलो करते हैं। ऐसे में ट्विटर की ऐसी हरकत की आलोचना होना लाजिमी है।

यदि हम स्वयं अमित शाह के वेबपेज पर जाकर देखेंगे तो हमें उनकी डीपी वाली तस्वीर यहाँ सबसे पहले देखने को मिलेगी। ऐसे में तस्वीर के ऊपर किसी और के कॉपीराइट का तो कोई सवाल ही नहीं है। फिर आखिर किस आधार पर ट्विटर ने अमित शाह की तस्वीर हटाई, ये एक बड़ा सवाल है।

अपने ही प्लैटफॉर्म पर अपनी ही आलोचना झेलने के बाद ट्विटर ने शुक्रवार को एक सफाईनामा पेश किया है। इसमें उन्होंने इस पूरी घटना को अंजाने में हुई गलती कहकर टाला है। ट्विटर प्रवक्ता ने कहा, “एक अनजाने में हुई गलती के कारण, हमने अपने वैश्विक कॉपीराइट नीतियों के तहत इस अकॉउंट को अस्थायी रूप से बंद कर दिया था। लेकिन अब इस निर्णय को पूरी तरह बदल कर अकॉउंट चालू कर दिया गया है। 

भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी की DP भी ट्विटर ने हटाई

उल्लेखनीय है कि एक ओर जहाँ केंद्रीय गृहमंत्री के अकॉउंट पर ट्विटर की ऐसी लापरवाही सामने आई, इसी बीच भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने भी दावा किया कि कल ट्विटर ने एक अंजान बांग्लादेशी की रिपोर्ट के कारण उनकी डिस्प्ले तस्वीर को हटा दिया था। बांग्लादेशी ने दावा किया था कि तस्वीर पर उसका पेटेंट है।

स्वामी ने अपने ट्विटर पर बताया कि ट्विटर ने इस शिकायत को सत्यापित किए बिना तस्वीर को हटाया था लेकिन उनकी टीम द्वारा पूरा मामला गौर करवाए जाने के बाद उसे रिस्टोर कर दिया है। सुब्रमण्यम स्वामी के समर्थकों ने भी ट्विटर पर यह दावा किया है कि उनकी तस्वीर को बिना सत्यापित किए हटाया गया। बाद में जब स्वामी की टीम के कारण यह मामला संज्ञान में आया तब उसे दोबारा सेट किया गया।

दिलचस्प बात यह है कि ट्विटर से अमित शाह और सुब्रमण्यम स्वामी के ख़िलाफ़ ऐसी गलती उसी समय हुई जब आईटी मंत्रालय ने लेह के केंद्र शासित प्रदेश के बजाय जम्मू और कश्मीर का हिस्सा दिखाने के लिए ट्विटर के ग्लोबल वाइस प्रेजिडेंट को बृहस्पतिवार (नवम्बर 12, 2020) को नोटिस भेजा

बता दें कि इस नोटिस में ट्विटर को अगले 5 दिनों में सारा मामला समझाने का निर्देश दिया गया था कि भारत की क्षेत्रीय अखंडता का अपमान करने के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं की जानी चाहिए?

इससे पहले पिछले माह भी , सरकार ने ट्विटर के सीईओ जैक डोरसी को एक पत्र लिखा था, जिसमें लेह की गलत जानकारी देने पर ‘निराशा और नाराजगी’ व्यक्त की गई थी। सरकार के संज्ञान में आते ही इस पर कड़ी आपत्ति जताई गई थी कि ट्विटर ने लेह की भू-स्थिति को जम्मू-कश्मीर, ‘पीपुल्स रिपब्लिक ऑफ चाइना’ के हिस्से के रूप में दिखाया था।

महाराष्ट्र में एक और संत पर हमला, आश्रम में घुसकर 7-8 लोगों ने प्रियशरण महाराज को मारा चाकू

महाराष्ट्र में साधू संतों पर हमले की घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं। पिछले दिनों ही महाराष्ट्र के पालघर में हुई संतों की हत्या मामले में अभी ढंग से इंसाफ मिला भी नहीं है कि औरंगाबाद से एक और संत पर हमले की घटना सामने आ गई है। 

खबर है कि इस बार संत प्रियशरण महाराज पर जिले के चौक परिसर के लाडसावंगी मार्ग पर स्थित उनके आश्रम में घुसकर हमला किया गया। हमलावर 7-8 की तादाद में थे। इन्होंने आश्रम में घुसने के लिए पहले उसकी कड़ी तोड़ी और फिर संत से मारपीट करके उनके कंधे पर चाकू से वार भी किया। हैरानी की बात यह है कि यह लोग कोई चोर नहीं थे। ये सिर्फ संत को मारने व धमकाने के लिहाज से आए थे। उन्होंने संत प्रियशरण महाराज को जान से मारने की धमकियाँ भी दी।

बता दें कि, पूरी घटना बुधवार (नवंबर 11,  2020)  की है। फुलबारी पुलिस अब जाँच करने में जुटी है कि आखिर ये लोग कौन थे? अभी तक पुलिस को मारपीट का कारण पता नहीं चल सका है या पुलिस यह पता लगाने में भी असमर्थ है कि महाराज से उपद्रवियों की आखिर क्या दुश्मनी थी। चौका क्षेत्र में सताल शिवारा में राधे गोविंद सेवा मिशन नामक एक आश्रम है। राधा गोविंद सेवा आश्रम में बड़ी संख्या में भक्त आते हैं।

स्ट्रेचर पर संत को अस्पताल ले जाते हुए

पुलिस के मुताबिक, प्रियशरण महाराज राजस्थान के मूल निवासी हैं। उन्होंने पिछले कुछ सालों से क्षेत्र में एक आश्रम शुरू किया और अब वह वहाँ एक गो-सेवा आश्रम भी चलाते हैं। उनके आश्रम में कई सेवक-सेविकाएँ हैं। इसके अलावा पास में ही एक खेत भी है जहाँ महाराज के अनुयायी रहते हैं। 

घटना वाले दिन जब हमलावर आश्रम में घुसे तो उन्होंने पहले एक महिला को धमकाया। इसके बाद उससे महाराज का पता पूछा और फिर उनके साथ मारपीट की। इस दौरान महाराज और हमलावरों में हाथापाई भी हुई जिससे वह घायल हो गए। हमलावरों ने प्रियशरण महाराज के कंधे पर चाकू से हमला किया। महाराज को बाद में निजी अस्पताल में भर्ती करवाया गया।

मले में घायल संत प्रिय शरण महाराज (चित्र साभार: mbs.news)

याद दिला दें कि इससे पहले महाराष्ट्र के पालघर में 16 अप्रैल को गड़चिनचले गाँव में तकरीबन 200 लोगों की भीड़ द्वारा तीन लोगों को कथित तौर पर चोर समझकर मौत के घाट उतार दिया गया था, जिनमें दो साधू और एक उनका ड्राइवर शामिल था।

यह पूरी घटना वहाँ मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई थी। इसके बाद साधुओं को अस्पताल ले जाया गया था, जहाँ उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। जूना अखाड़े के दो साधु महंत सुशील गिरी महाराज (35), महंत चिकने महाराज कल्पवृक्ष गिरी (65) अपने ड्राइवर निलेश तेलगडे (30) के साथ मुंबई से गुजरात के सूरत में अपने साथी के अंतिम संस्कार के लिए जा रहे थे। उन्होंने वैन किराए पर ली थी। कोरोना वायरस के दौरान जारी लॉकडाउन के बीच वे 120 किलोमीटर का सफर तय कर चुके थे।