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27 साल बाद बाबरी विध्वंस केस में 30 सितंबर को आएगा कोर्ट का फैसला: आडवाणी, जोशी, कल्याण सहित 49 हैं आरोपित

बाबरी विध्वंस मामले में 27 साल से सुनवाई कर रही सीबीआई की एक विशेष अदालत अब 30 सितंबर को अपना फैसला सुनाएगी। अदालत ने इस मामले में आरोपित लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह और उमा भारती, विनय कटियार को फैसले के दिन अदालत में उपस्थित रहने के निर्देश दिए हैं।

बता दें 6 दिसंबर, 1992 को विवादित ढाँचे को ध्वस्त करने के आरोप में 49 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। जिनमें से 17 लोगों का निधन हो चुका है। वकील केके मिश्रा ने बताया कि सीबीआई की अदालत ने बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में अंतिम फैसला देने के लिए 30 सितंबर की तारीख तय की है। मिश्रा मामले के 32 में से 25 आरोपितों की वकालत कर रहे हैं, जिनमें भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी, मुरली मनोहर जोशी, कल्याण सिंह, उमा भारती सहित कई अन्य शामिल हैं।

गौरतलब है कि 24 जुलाई को वरिष्ठ बीजेपी नेता लालकृष्ण आडवाणी ने 1992 बाबरी मस्जिद विध्वंस मामले में विशेष सीबीआई अदालत के सामने वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए अपना बयान दर्ज कराया था। खुद को निर्दोष बताते हुए आडवाणी ने कहा था कि उन पर लगाए गए आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।

इस मामले में मुरली मनोहर जोशी और उमा भारती भी अपना बयान दर्ज करा चुके हैं और खुद को निर्दोष भी बता चुके हैं। जोशी ने उस वक्त केंद्र की तत्कालीन कॉन्ग्रेस सरकार पर आरोप लगाते हुए झूठे सबूत पेश करने की बात भी कही।

उल्लेखनीय है कि अयोध्या में छह दिसंबर 1992 को ‘कारसेवकों’ ने विवादित बाबरी मस्जिद के ढाँचे को गिरा दिया था। उनका दावा था कि मस्जिद की जगह पर राम का प्राचीन मंदिर हुआ करता था। राम मंदिर आंदोलन का नेतृत्व करने वाले लोगों में आडवाणी और जोशी भी शामिल थे।

12 साल की लड़की 5 दिन बाद बरामद: बंटी खान समेत 7 लोग गिरफ्तार, हिंदूवादी संगठनों ने किया था प्रदर्शन

उत्तर प्रदेश के आगरा जिले के इबादतनगर इलाके से 11 सितंबर को अगवा की गई किशोरी को पुलिस ने बुधवार (16 सितंबर, 2020) को बरामद कर लिया है। पुलिस ने मामले में मुख्य आरोपित बंटी खान समेत 7 आरोपितों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।

रिपोर्ट के अनुसार, इरादतनगर की रहने वाली 12 साल की नाबालिग किशोरी से बंटी खान नाम के एक युवक ने दोस्ती की थी। बंटी अपने कुछ दोस्तों के साथ मिलकर टिकटॉक पर वीडियो बनाता था। साथ ही एक मेडिकल दुकान पर काम करता था। 5 दिन पहले यानी 11 सितंबर को लड़की अपने घर से टहलने निकली थी, जिसके बाद वह वापस नहीं आई। परिजनों ने उसे ढूँढने की बहुत कोशिश की लेकिन वह नहीं मिली। जिसके बाद परिजनों के इसकी शिकायत पुलिस में की।

परिजनों ने अपनी शिकायत में बंटी खान और उसके अन्य 2 दोस्तों के खिलाफ अपहरण का शक जाहिर किया था। वहीं मामले में पुलिस की तरफ से ढीले रवैए को देखते हुए परिवारवालों ने अपनी समस्या हिंदूवादी संगठनों से भी की। जिसके बाद संगठनों ने इस मामले में पुलिस से सख्त कदम उठाने की माँग करते हुए अपना विरोध प्रदर्शन दर्ज किया।

लोगों में बढ़ते आक्रोश को देखते हुए पुलिस ने खोजबीन शुरू कर दी। वहीं मंगलवार को दबिश देते हुए पुलिस ने मुकदमें में दर्ज बंटी खान समेत 7 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। एसएसपी ने नाबालिग की तलाश में सात टीमें लगाई थी। वहीं मामले में पुलिस के रवैए को देखते हुए इरादतनगर के इंस्पेक्टर का तबादला भी कर दिया।

मामले में एसएसपी बबलू कुमार ने बताया कि बुधवार सुबह किशोरी को बरामद कर आरोपित भी गिरफ्तार कर लिया है। किशोरी का मेडिकल कराया जा रहा है। मुख्य आरोपित और अपहरण में सहयोग करने वाले अन्य आरोपितों को भी गिरफ्तार कर जेल भेजा दिया गया है।

‘हीरो के साथ सोकर मिलते हैं फिल्मों में 2 मिनट के रोल’: कंगना ने जया बच्चन को जवाब देते हुए किया नया खुलासा

महाराष्ट्र सरकार और कंगना रनौत के बीच अभी जुबानी जंग खत्म भी नहीं हुई थी कि संसद सत्र में जया बच्चन की स्पीच ने सोशल मीडिया पर नई बहस छेड़ दी। कंगना ने इसी बहस की प्रतिक्रिया में एक नया ट्वीट किया और कहा कि उन्होंने इंडस्ट्री को फेमेनिज्म सिखाया और यहाँ देश भक्ति व नारी प्रधान फिल्में की।

कंगना ने एक ट्वीट के रिप्लाई में लिखा, “कौन सी थाली दी है जया जी और उनकी इंडस्ट्री ने? एक थाली मिली थी जिसमें दो मिनट के रोल आइटम नम्बर्ज़ और एक रोमांटिक सीन मिलता था वो भी हीरो के साथ सोने के बाद। मैंने इस इंडस्ट्री को फ़ेमिनिज़्म सिखाया, थाली देश भक्ति नारी प्रधान फ़िल्मों से सजाई, यह मेरी अपनी थाली है जया जी आपकी नहीं।”

बता दें कि कल जया बच्चन ने संसद सत्र में अपने भाषण के दौरान रवि किशन को निशाना बनाते हुए ताना दिया था कि ऐसे लोग जिस थाली में खाते हैं उसी में छेद करते हैं। इसके बाद रवि किशन का जवाब आया और जया बच्चन ट्विटर पर ट्रेंड करनी लगी। कंगना रनौत ने भी इस बीच जया बच्चन से पूछा कि जैसा उनके साथ हुआ वैसा उनकी बेटी श्वेता के साथ होता या जैसा सुशांत के साथ हुआ वैसे उनके बेटे अभिषेक के साथ होता तो भी क्या वह ऐसे ही कहतीं?

उनके इस ट्वीट पर 3 हजार से ज्यादा कमेंट आए। लेकिन कॉन्ग्रेस नेता डॉ उदित राज ने इसका रिप्लाई देते हुए कंगना रनौत को नालायक बता दिया। डॉ उदित राज ने लिखा, “कंगना रनौत आप जैसी नालायक बेटी जया बच्चन की होती तो उसके साथ ऐसा ही होता।”

यहाँ बता दें कि कॉन्ग्रेस नेता डॉ उदित राज इससे पहले भी कंगना पर टिप्पणी कर चुके हैं। महाराष्ट्र राज्यपाल से मिलने पर कंगना के लिए डॉ उदित राज ने कहा था कि वह नशेड़ी और भाजपा समर्थक हैं। उन्होंने ट्वीट में लिखा था, “नशेड़ी कंगना रनौत से आज राज्यपाल मिले। गोदी मीडिया, भाजपा आईटी सेल और भक्त सभी समर्थन कर रहे हैं। चोर, अपराधी और भ्रष्ट सभी का स्वागत बशर्ते भाजपा का समर्थक हो।”

‘झाड़-फूँक’ करने वाले फैय्याज अली ने किशोरी को अगवा कर इस्लाम कबूल करवाकर की थी निकाह की तैयारी, कानपुर पुलिस ने किया गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के कानपुर में जादू-टोना करने वाले फैय्याज अलीने किशोरी को अगवा कर धर्म परिवर्तन (इस्लाम कबूल) करवाने की कोशिश की। पुलिस ने देर शाम आरोपित को गिरफ्तार कर लिया। उस पर अपहरण, दुष्कर्म और पॉक्सो एक्ट के तहत केस दर्ज किया गया है। वहीं, युवती को मेडिकल जाँच के बाद परिजनों को सौंप दिया गया।

मामला कानपुर के सरसौल के महाराजपुर थाना क्षेत्र का है। महाराजपुर के एक गाँव निवासी रिक्शा चालक की 17 वर्षीय बेटी को फैय्याज अली ने प्रेम जाल में फँसा लिया। वह झाड़-फूँक भी करता था। किशोरी के भाई का आरोप है कि किशोरी घर से बाहर दुकान में सामान लेने गई थी, तभी आरोपित फैय्याज अली ने किशोरी को अगवा कर लिया। आरोप है कि वह किशोरी पर जबरन मुस्लिम धर्म स्वीकारने का दबाव बना रहा था। फैय्याज उसके साथ निकाह करने की भी तैयारी में था।

भाई की तहरीर पर महाराजपुर पुलिस ने आरोपित फैय्याज अली के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। एसओ राघवेंद्र सिंह ने बताया कि आरोपित को गिरफ्तार कर लिया गया है। उससे पूछताछ जारी है। आरोपित के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं।

पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद किशोरी को आरोपित के चंगुल से छुड़ा लिया है। फिलहाल युवक और किशोरी से थाने में पूछताछ चल रही है। पीडि़ता की मानसिक हालत ठीक नहीं है। पीड़िता के भाई ने बताया कि जब उन्हें बहन की कुछ हरकतें अजीब लगीं तो उससे पूछताछ की। पहले वह टालती रही, बाद में उसने पूरी बात बताई और फैय्याज के साथ रहने की जिद करने लगी। उसके घर से बाहर निकलने पर पाबंदी लगाई तो आरोपित फैय्याज ने धमकाना शुरू कर दिया।

जानकारी के मुताबिक पुलिस ने जब पीड़िता को आरोपित फैय्याज के चंगुल से छुड़ाकर महाराजपुर थाना लाया गया तो उसके बाजू में ताबीज और हाथों में हरी चूड़ियाँ थीं। इसके साथ ही उसके पास से उर्दू में लिखा एक पर्चा भी मिला। परिजनों का कहना कि पीड़िता ने बातचीत के दौरान बताया है कि उसे जाजमऊ की एक मस्जिद में ले जाया गया था। वहाँ पर झाड़-फूँक करके उसे मुस्लिम बनाने की कोशिश की गई।

गौरतलब है कि पिछले दिनों बजरंग दल के नेताओं ने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र लिखकर कानपुर में लव जिहाद और धर्म परिवर्तन मामलों में शामिल व्यक्तियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने का आग्रह किया था। बजरंग दल के अध्यक्ष अतुल द्विवेदी और राज्य सचिव रामजी तिवारी ने पत्र में बताया था कि कुछ मुट्ठी भर संगठन ऐसे हैं, जो राष्ट्र विरोधी कृत्यों में शामिल हैं।

बजरंग दल का कहना था कि वे भारत में बहुसंख्यक हिंदू समाज के प्रति नफरत फैला रहे हैं। वे नियमित रूप से देश को अस्थिर करने के प्रयासों में संलग्न हैं और भारत की सांस्कृतिक विरासत को धूमिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

दशकों बाद वापस अपने घर पधारे राम, लक्ष्मण व सीता: ब्रिटिश पुलिस ने भारत को सौंपा 1978 में चोरी हुई विजयनगर काल की मूर्तियाँ

1978 में तमिलनाडु के विष्णु मंदिर से चोरी हुई विजयनगर काल की भगवान राम, माँ सीता और लक्ष्मण की 3 बेशकीमती मूर्तियाँ ब्रिटिश पुलिस द्वारा लंदन में भारतीय वाणिज्य दूतावास को सौंप दी गई हैं।

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, इस अवसर पर लंदन में भारतीय उच्चायोग के भवन में इंडिया हाउस में एक औपचारिक समारोह आयोजित किया गया। जिसमें मेट्रोपॉलिटन पुलिस के अधिकारी, इंडिया हाउस के कर्मचारी और केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री प्रह्लाद सिंह पटेल ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए भाग लिया।

वहीं इस समारोह के दौरान एक हिंदू पुजारी द्वारा देवताओं की एक पारंपरिक पूजा- अर्चना भी की गई थी। इन मूर्तियों की वापसी भारत की सांस्कृतिक विरासत की चोरी और तस्करी की गई कलाकृतियों को वापस लाने के लिए भारत सरकार के बढ़ते प्रयासों का एक हिस्सा है।

इस कार्यक्रम के दौरान मंत्री प्रहलाद पटेल ने कहा कि 1947 से 2014 के बीच हमें केवल 13 मूर्तियों को वापस किया गया था। लेकिन सरकार के बढ़ते प्रयासों के परिणामस्वरूप 2014 के बाद विदेशी देशों द्वारा 40 से अधिक कलाकृतियों को भारत को सौंप दिया गया है।

स्वराज्य की एक रिपोर्ट के अनुसार, मूर्तियों को आनंदमंगलम राम, लक्ष्मण और सीता के नाम से जाना जाता है। ये मूर्तियाँ विजयनगर काल में कांस्य प्रतिमाओं से विशेष रूप से तैयार की जाती थी। इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट के एस विजय कुमार की रिपोर्ट के अनुसार इन मूर्तियों की उपस्थिति की पुष्टि पिछले साल हुई थी जब एक स्वयंसेवक ने एक तस्वीर भेजी थी। तस्वीरों को श्री राजगोपाला स्वामी मंदिर, आनंदमंगलम, मयूरम तालुक, तंजावुर जिले से चोरी की गई मूर्तियों के साथ मिलान किया गया था।

तमिलनाडु सरकार के मूर्ति विंग के अधिकारियों की मदद से, लंदन में भारतीय दूतावास और एएसआई ने मूर्तियों की पहचान और उत्पत्ति की पुष्टि की थी।

कथिततौर पर भारत के पहले उच्चायुक्त, लंदन के सचिव राहुल नंगारे ने उस डीलर का पता लगाया था जिसके पास ये मूर्तियाँ थी। कथित तौर पर वह भी इन मूर्तियों की चोरी की स्थिति से अनजान थे। डीलर ने इन मूर्तियों के महत्व को समझने के बाद वापस इन मूर्तियों को उन्हें सौंप दिया।

इंडिया प्राइड प्रोजेक्ट ने बताया कि उसी समूह की एक और हनुमान मूर्ति है, जिसे वर्तमान में दक्षिण पूर्व एशिया के एक संग्रहालय में प्रदर्शित किया गया है।

अब मूर्तियों को वापस मंदिर में पूजा के लिए लाया जाएगा। गौरतलब है कि लंदन पुलिस ने 2018 में 12 वीं शताब्दी की बुद्ध प्रतिमा सौंपी थी, जो 1961 में नालंदा में एएसआई संग्रहालय से चोरी हो गई थी।

लव जिहाद: अब्दुल्ला से अमन बने चार बीवियों के अधेड़ शौहर ने किशोरी को प्रेमजाल में फँसाकर किया दुष्कर्म, गिरफ्तार

उत्तर प्रदेश के मेरठ जिले में एक और लव जिहाद का मामला सामने आया है। चार बच्चों के अब्बू और चार बीबियों के शौहर अब्दुल्ला ने अमन चौधरी बनकर 17 साल की किशोरी को प्रेम जाल में फँसा लिया और फिर उसके साथ दुष्कर्म किया। 

पुलिस ने आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। पीड़ित किशोरी को भी पुलिस ने बरामद कर लिया है। घटना थाना कंकरखेड़ा क्षेत्र की है। जहाँ का रहने वाला अधेड़ अब्दुल्ला ने अमन चौधरी बनकर 17 साल की एक किशोरी को अपने प्रेमजाल में फँसा लिया। अब्दुल्ला से अमन चौधरी बने अधेड़ ने किशोरी को बहला-फुसलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया।

नाबालिग किशोरी 3 सितंबर को गायब होती है और बुधवार (सितंबर 16, 2020) को 13 दिन बाद जब किशोरी को बरामद किया गया तब मामले में सनसनीखेज खुलासा हुआ। किशोरी को प्रेम जाल में फँसाने वाले अधेड़ शख्स की उम्र लगभग 42 साल है। अधेड़ नकली बाल लगाता था जिससे वो जवान दिख सके।

3 सितंबर को अब्दुल्ला उर्फ अमन एक नाबालिग किशोरी को बहला फुसलाकर अपने साथ ले गया था। मामले में अपहरण का मुकदमा दर्ज किया गया था। किशोरी को अगवा करने के बाद आरोपित ने उसे गंगानगर इलाके में रखा था। 13 दिन बाद आरोपित गिरफ्तार हुआ तो उसने खुद ही सारी कहानी बताई। पुलिस ने मामले में अपहरण, बलात्कार और पोस्को एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

अब्दुल्ला अपना नाम अमन बताता था और नकली बाल लगाकर किशोरियों को प्रेम जाल में फँसाता था। इसके बाद आरोपित किशोरियों के साथ घिनौनी वारदात को अंजाम देता था। आरोपित पहले से शादीशुदा है और उसके 4 बच्चे भी हैं। ये भी बताया जा रहा है कि उसकी 4 बीबियाँ भी हैं।

पुलिस मामले की जाँच कर रही है। मामले में एसपी सिटी अखिलेश नारायण ने बताया कि बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया गया है और अभियुक्त को गिरफ्तार कर लिया गया है। उसे कोर्ट में पेश किया जा रहा है, जहाँ से उसे जेल भेजने की कार्रवाई होगी।

गौरतलब है कि पिछले दिनों लुधियाना के अंकुजा आनंद नगर की रहने वाली एकता लव जिहाद में मारी गई। उसे मारने वाले शाकिब (Shakib) ने अमन बनकर उसे प्रेमजाल में फँसाया। करीब छह माह प्यार का नाटक किया। उसके बाद मेरठ के दौराला के लोइया गाँव में लाकर स्वजनों के साथ मिलकर एकता को मौत के घाट उतार दिया।

वहीं एक और मामले में पहले नाबालिग लड़की को अगवा कर मेरठ से देवबंद ले जाया गया, फिर वहाँ जबरन मज़हब बदलवाने के बाद उसे प्रयागराज ले जाकर निकाह कर दिया गया। मामला तूल पकड़ने पर पुलिस को किशोरी के साथ ‘शौहर’, शौहर का भाई और जीजा भी बरामद हुए। लड़की चार मई से लापता चल रही थी।

दिल्ली हिंदू विरोधी दंगो में आरोपित उमर खालिद की गिरफ्तारी की 8 प्रमुख वजहें

जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद को दिल्ली हिंदू विरोधी दंगों की साजिश के मामले में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने गिरफ्तार कर लिया है। उमर खालिद का नाम दिल्ली दंगों की लगभग हर चार्जशीट में दर्ज है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आने के पहले दिए भाषण, आरोपितों के साथ हुई बातचीत के कॉल रिकार्ड व मीटिंग और आरोपितों के बयानों में साजिशकर्ता बताते हुए उमर खालिद की गिरफ्तारी हुई है।

उमर खालिद की गिरफ्तारी की वजह:-

  1. दिल्ली दंगों में उमर खालिद की भूमिका सबसे पहली बार तब सामने आई जब 20 फरवरी को उस पर विवादित भाषण देने का आरोप लगा। उसने अपने भाषण में कहा मुस्लिमों को डोनाल्ड ट्रंप के सामने यह दिखाना ही होगा कि वह देश की सरकार के विरुद्ध लड़ रहे हैं। डोनाल्ड ट्रंप 24 फरवरी को भारत की यात्रा पर आए थे और इसी दिन से दंगे और हिंसा शुरू हो गई थी।
  2. दिल्ली दंगों के मामले में दायर की गई चार्जशीट में साफ़ लिखा है कि उमर खालिद दंगों के मुख्य आरोपित खालिद सैफी की मदद से ताहिर हुसैन के संपर्क में था। उमर खालिद यूनाइटेड अगेंस्ट हेट (UAH) का भी हिस्सा रह चुका है, जिसने सीएए के विरोध में PUCL और अन्य के साथ मिल कर अभियान चलाया था।
  3. खालिद सैफी ने 9 जनवरी को ताहिर हुसैन और उमर खालिद के बीच शाहीन बाग़ में बैठक कराई थी। इस मीटिंग में कुछ बड़ा करने का निर्णय लिया गया था, जिससे सरकार हिल जाए।
  4. चार्जशीट के मुताबिक उमर खालिद ने ताहिर से यह भी कहा था कि दंगों के लिए पैसे की चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि पॉपुलर फ्रंट और इंडिया (PFI) इसकी फंडिंग करेगा। 
  5. शाहीन बाग में ताहिर हुसैन और खालिद सैफी के साथ मीटिंग के दौरान उमर खालिद लगातार इस बात पर जोर देता रहा कि दंगे तभी होने चाहिए, तब डोनाल्ड ट्रंप भारत दौरे पर होंगे।
  6. उमर खालिद की गिरफ्तारी के बाद अब स्पेशल सेल के पास चार्जशीट दायर करने के लिए 180 दिन हैं। हालाँकि, कई FIR में खालिद की दंगे में भूमिका स्पष्ट है।
  7. अंकित शर्मा की हत्या में भी ताहिर हुसैन के अलावा उमर खालिद की अहम भूमिका थी।
  8. उमर खालिद के सहयोगी ताहिर हुसैन के जिहादी भीड़ ने अंकित शर्मा की निर्ममता से हत्या कर दी थी। अंकित शर्मा के शरीर को 50 बार चाकू से वार किया गया था।

गौरतलब है कि उमर खालिद का नाम सबसे पहली बार चर्चा में आया 2016 के ‘टुकड़े-टुकड़े गैंग’ प्रकरण के बाद। 9 फरवरी 2016 को जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय में आतंकवादी अफज़ल गुरु की बरसी के मौके पर विरोध-प्रदर्शन हुआ। प्रदर्शन की वजह थी आतंकवादी अफज़ल गुरु का पुण्य स्मरण (टुकड़े टुकड़े गैंग के लिए)। उस प्रदर्शन के दौरान ऐसे कई नारे लगाए गए जो डरावने और हैरान करने वाले थे, उन नारों में सबसे ज़्यादा विवादित थे भारत तेरे टुकड़े होंगे-इंशाअल्लाह, इंशाल्लाह और भारत की बर्बादी तक जंग रहेगी जंग रहेगी। 

युद्ध पिपासु शी जिनपिंग: इतनी जल्दी नहीं मानेगा हार, देश को रहना होगा कठिन दिनों के लिए तैयार

महाभारत के वनपर्व में यक्ष का प्रश्न था कि इस सृष्टि में सबसे बड़ा आश्चर्य क्या है?
युधिष्ठिर ने यक्ष को उत्तर दिया कि इस धरती पर निरंतर मौत का नृत्य देखते रहने के बावजूद व्यक्ति ऐसा आचरण करता है कि वह कभी यहाँ से जाएगा ही नहीं।

“अहन्यहनि भूतानि गच्छन्तीह यमालयम्।
शेषाः स्थावरमिच्छन्ति किमाश्चर्यमतः परम् ॥”

युधिष्ठिर का यक्ष को दिया गया ये उत्तर शी जिंगपिंग सहित विश्व के सभी तानाशाहों पर एकदम सटीक बैठता है। विश्व को बलपूर्वक अपने कब्ज़े में करने की पिपासा अनंतकाल से धरती पर युद्धों का कारण रही है।

शी जिनपिंग इन दिनों इतिहास में अमर होने की अपनी चाह में युद्ध पिपासु बन बैठे हैं। कभी वह हॉन्ग कॉन्ग में निहत्थे प्रदर्शनकारियों पर दमन करते हैं, तो कभी ताइवान पर धावा बोल देते हैं। दक्षिण चीन सागर के तटवर्ती देशों से वे रोज़ पन्गा लेते हैं तो कभी वे सुकेकु द्वीपों को लेकर जापान पर चढ़ बैठते हैं।

दुनिया के तकरीबन हर देश से चीन की तकरार हो रही है। अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया, कनाडा, यूरोपीय देशों यहाँ तक कि चेकोस्लोवाकिया तक को चीन के मंत्री और राजदूत अभद्र अराजनयिक भाषा में धमकियाँ देते हैं।

भारत के साथ तो लद्दाख में नियंत्रण रेखा पर चीन की ज़ोर जबरदस्ती ने युद्ध की स्थिति पैदा कर दी है। प्रतिष्ठित अमेरिकी पत्रिका ‘न्यूज़वीक’ के अनुसार भारत के साथ इस संघर्ष की पटकथा व्यक्तिगत रूप से खुद राष्ट्रपति शी जिंगपिंग ने ही लिखी है।

अन्य कई सूत्र भी इसी तरफ संकेत करते हैं कि शी जिनपिंग ही खुद भारत के साथ इस संघर्ष के जनक है। ये अलग बात है कि अभी तक शी जिंगपिंग ने जैसा चाहा था, वैसा हो नहीं पाया है।

चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के अखबार ‘ग्लोबल टाइम्स’ के तकरीबन हर लेख में भारत को याद दिलाया जाता है कि उसे 1962 को नहीं भूलना चाहिए। चीनी मामलों की जानकार तथा फाउंडेशन फॉर डिफेंस डेमोक्रेसी की विशेषज्ञ क्लियो पास्कल के अनुसार चीन ने सोचा था कि 1962 की हार के बाद से भारतीय नेतृत्व और फौज ‘मानसिक रूप से कमज़ोर और रक्षात्मक’ होंगी।

वे इसके लिए अंग्रेज़ी में ‘psychologically paralysed’ उद्धरण का प्रयोग करती हैं। इसलिए चीन ने गलवान में भारत को ललकारने का दुस्साहस किया। वे कहती हैं कि भारत ‘मानसिक रूप से कमज़ोर नहीं निकला’ बल्कि उसने चीन को मुँहतोड़ जबाव दिया। उनके अनुसार, 15 जून की इस लड़ाई में भारत का हाथ ऊपर रहा और इसमें चीन के 60 सैनिक मारे गए।

इससे शी जिंगपिंग आगबबूला है। उनकी रणनीति तो थी कि वे इस संघर्ष में जीत हासिल करके दुनिया और चीन की जनता को बता देंगें कि एशिया में अब सिर्फ एक ही ताकत है, वह है चीन। दरअसल यहाँ शी जिंगपिंग की मानसिकता को समझने की ज़रूरत है।

उनके दो लक्ष्य साफ़ दिखाई देते हैं। पहला तो चीन में अपने राज को स्थाई बनाना। और दूसरा चीन को विश्व की एकमात्र महाशक्ति के रूप में स्थापित करना।

बड़े ही अमानुषिक रूप से उन्होंने कोरोना की मानवीय त्रासदी (जो चीन की ही देन है) और अमरीकी चुनावों की आपाधापी का समय चुना। इन दोनों ही लक्ष्यों की पूर्ति के लिए शी जिंगपिंग समझते हैं कि उन्हें दुनिया को अपनी सामरिक ताकत का दबदबा दिखाना ज़रूरी है। भारत उनके इन उद्देश्यों में आड़े आता है।

2012 में शी जिंगपिंग के सत्ता सँभालने के बाद से ही चीन की सेना भारत की सीमा पर बेजा हरकतें करती आई है। डोकलाम इसी कड़ी का एक हिस्सा था। याद कीजिए, शी जिंगपिंग जब सितम्बर 2014 में भारत आए थे, तो उस समय सीमा पर चुमार में भी चीन की तरफ से अतिक्रमण हुआ था।

चीन ने अपनी तरफ के क्षेत्रों में सड़क और पुलों तथा अन्य रक्षा ढाँचे का लगातार निर्माण किया है। लेकिन भारत ने भी पिछले कई साल में रक्षात्मक तौर-तरीके छोड़ कर सड़क, पुल तथा अन्य निर्माण का काम तेज़ किया है। इससे जब चीन ने मई के महीने में लद्दाख में बदनीयती से फौजें और भारी असला जमा करना शुरू किया तो भारत ने भी उसके मुकाबिल अपनी फौजें तैनात कर दीं।

चीन इस दौरान लगातार भारत को गीदड़ भभकियाँ भी देता रहा। ये सही है कि चीन भारत से आर्थिक और सामरिक रूप से ताकतवर दिखता है। चीन की ताकत को बढ़ा-चढ़ा कर पेश करने का काम भारत और दुनिया के अन्य हिस्सों में उसके वामपंथी हितैषी करते आए हैं। पर ये कागज़ पर ही ज़्यादा है।

चीन की सेना ने कोई भी बड़ा युद्ध जीता नहीं है। 1979 में वियतनाम की सेना तक ने उसका घमंड तोड़ दिया था। जबकि भारत की सेना को तो सियाचिन की बर्फीली घाटियों से लेकर कारगिल की उँचाइयों को जीतने का महारत हासिल है। हमारी सेना जम्मू कश्मीर में लगातार पाकिस्तान और उसके जिहादियों से युद्ध कर ही रही है।

क्लियो पास्कल कहती हैं कि खुली ज़मीन पर कब्ज़ा करने में तो चीन की सेना यानी पीएलए को महारत हासिल है, पर जब उसके सामने कोई दूसरी सेना अड़ जाए तो वह पीछे हट जाती है। पास्कल ने पिछले दिनों भारतीय सेना द्वारा ऊँची चोटियों पर कब्ज़ा करने का उदाहरण इसी सन्दर्भ में दिया। उनका मानना है कि पिछले पचास वर्षों में ऐसा जोरदार रक्षात्मक प्रत्याक्रमण भारत ने कभी नहीं किया। इससे पीएलए का नेतृत्व हतप्रभ है।

शी जिंगपिंग क्या इतनी जल्दी हार मानेगें?

2022 में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी की बैठक में वे अपने को देश का चेयरमेन घोषित करना चाहते हैं। चीन में माओ के बाद ये पद खत्म कर दिया गया था। उनकी मंशा खुद को आजीवन चेयरमेन घोषित कर एकछत्र राज करने की है।

शी जिंगपिंग की आलोचना के लिए हाल ही में कम्युनिस्ट पार्टी से निष्काषित बीजिंग की प्रोफेसर काई शिया तो यहाँ तक कहती हैं कि शी जिंगपिंग ‘एक माफिया बॉस’ की तरह इन दिनों अपने देश को चला रहे हैं। उनसे अलग राय रखने वालों को तुरंत बाहर का रास्ता दिखा दिया जाता है।

न्यूज़वीक के अनुसार गलवान की अपमानजनक हार की खिसियाहट में शी जिंगपिंग अपनी सेना के कई अफसरों की बलि चढ़ा सकते हैं। लेकिन साथ में ये चेतावनी भी दी कि झल्लाहट में वे सीमा पर बड़ा कारनामा करने की भी सोच सकते हैं।

भारत और चीन के विदेश मंत्रियों ने तनाव घटाने के लिए जो पाँच सूत्रीय फार्मूला दिया है, वह शी जिंगपिंग कितना मानेंगे? भारत के लिए यही यक्ष प्रश्न है।

यक्ष को तो धर्मराज युधिष्ठिर ने प्रश्नों के तर्कसंगत और बुद्धियुक्त उत्तर से शांत कर के सरोवर का जल पी लिया था। पर जब सामने सत्ता और ताकत के नशे में चूर शी जिंगपिंग जैसा क्रूर, निर्मम, दमनकारी और घोर विस्तारवादी तानाशाह हो तो फिर शांति की आशा करना अपने को धोखा देना होगा। कोरोना के इस घनघोर संकट के बीच भारतीय सेना और देश को कठिन दिनों के लिए तैयार रहना होगा।

हिंदू धार्मिक पुस्तक को टॉयलेट पेपर बनाना अपराध नहीं: पुलिस के एक्शन पर लोगों ने पूछा – ‘कुरान होता तो?’

सोशल मीडिया पर पिछले दिनों हरतालिका तीज व्रत कथा की पवित्र पुस्तक को ‘टॉयलेट पेपर’ के रूप में प्रयोग करने वाली पत्रकार सुष्मिता सिन्हा के ख़िलाफ़ हिंदू आईटी सेल के एक सदस्य ने दिल्ली के गोविंदपुरी थाने में शिकायत दर्ज करवाई थी। मगर, दिल्ली पुलिस ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

दिल्ली पुलिस के गोविंदपुरी थाने से इसके बदले हिंदू आईटी सेल के सदस्य को एसएचओ से जवाब मिला कि सुष्मिता ने धार्मिक पुस्तक को टॉयलेट पेपर की तरह इस्तेमाल करके कुछ भी गलत नहीं किया है।

सोमवार को इस मामले में साकेत डिस्ट्रिक्ट कोर्ट के समक्ष एक्शन टेकन रिपोर्ट दायर की गई। इस रिपोर्ट में बताया गया कि हिंदू देवी-देवताओं को अपमानित करने के मामले में पत्रकार के खिलाफ अदालत में दायर शिकायत में कोई अपराध नहीं पाया गया है।

यह रिपोर्ट मेट्रोपॉलिटियन मेजिस्ट्रेट जीतेंद्र प्रताप सिंह के समक्ष गोविंदपुरी पुलिस थाने के एसआई द्वारा दायर की गई। कोर्ट ने इस एटीआर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए अगली सुनवाई की तारीख 23 अक्टूबर को तय की। जहाँ शिकायतकर्ता को अपनी दलील रखने का मौका दिया जाएगा।

इस खबर पर हिंदू आईटी सेल ने ट्वीट करके पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा,” हिंदू आईटी सेल के सदस्य आशुतोष द्वारा सुष्मिता सिन्हा के ख़िलाफ़ शिकायत में एसएचओ का कहना है कि हमारी धार्मिक पुस्तक का इस्तेमाल टॉयलेट पेपर के रूप में करके उसने कुछ गलत नहीं किया है। तो क्या पुलिस सोचती है कि हिंदुओं का अपमान करना उचित है?”

विकास पांडे पूछते है, “हमारे वकील मुकेश शर्मा, सुष्मिता सिन्हा के ख़िलाफ़ अदालत पहुँचे क्योंकि उसने हमारी पवित्र किताब का अपमान किया। दिल्ली पुलिस ने अपने रिप्लाई में लिखा है कि उनकी पड़ताल में कोई दण्डनीय अपराध नहीं किया गया। क्या वह ये सब तब भी कहते, जब कुरान के साथ ऐसा होता? या ऐसा सिर्फ़ इसलिए क्योंकि यह हिंदुओं के साथ हुआ है?”

वो लिखते हैं, “लेकिन हमें हारना नहीं है। हम कानूनी लड़ाई लड़ेंगे आखिरी तक। मुझे विश्वास है माननीय अदालत हमारी याचिका पर सुनवाई करेगी और पुलिस को उसका काम गंभीरता से करने को कहेगी।”

गौरतलब है कि पिछले दिनों अपने यूट्यूब चैनल पर बनाए गए विवादित वीडियो के कारण सुष्मिता सिन्हा चर्चा में आई थी। इस वीडियो में वह हरतालिका तीज की पुस्तक को हाथ में लेकर कहती दिखी थी कि उन्होंने इस ‘रद्दी’ के लिए पूरे 15 रुपए खर्च किए हैं और अब इसका क्या प्रयोग किया जाना चाहिए। इसके बाद उन्होंने कहा था कि तीज की कथा वाली पुस्तक को वो टॉयलेट पेपर बनाएँगी या टिश्यू पेपर, इस सम्बन्ध में उन्हें सलाह चाहिए।

वीडियो देखने के बाद ‘हिन्दू आईटी सेल’ ने इसका विरोध किया था। अपने ट्वीट में ‘हिन्दू आईटी सेल’ ने जानकारी दी थी कि सुष्मिता सिन्हा ने अपने इंस्टाग्राम पर एक स्टोरी लगाई, जिसमें उन्होंने दिखाया कि हरतालिका तीज व्रत कथा की पुस्तक उनके टॉयलेट में ‘टॉयलेट पेपर’ की जगह टँगी हुई है।

सुष्मिता सिन्हा के बारे में बताया गया कि वो ‘बोलता हिंदुस्तान’ के लिए काम करती हैं, जो मोहम्मद रहमान के स्वामित्व में है। वैसे ये पहली बार नहीं है, जब उन्होंने इस तरह की हरकत की हो। उन्होंने राम मंदिर भूमिपूजन के अगले दिन 6 अगस्त को एक फोटो शेयर करते हुए लिखा कि जो ज़िंदा हैं, उन्हें तो नहीं मिला घर, लेकिन एक पत्थर को मिल गया।

‘हिन्दू आईटी सेल’ ने तब कहा था कि वामपंथियों को सीधे-सादे हिन्दुओं और उनके देवी-देवताओं को गाली देने में खासा मजा आता है।

बता दें कि उत्तर भारत में तीज का पर्व महिलाओं के बीच खासा लोकप्रिय है और उस दिन वो अपने परिवार के सुखद भविष्य के लिए उपवास करती हैं और पूजा करती हैं।

जया बच्चन का कुत्ता टॉमी, देश के आम लोगों का कुत्ता कुत्ता: बॉलीवुड सितारों की कहानी

अगर बात बदनामी की ही है, तो आतंकियों से सम्बन्ध रखने, उनकी मदद करने से ज्यादा बदनामी की बात क्या होगी? बॉलीवुड के जाने-माने नाम महेश भट्ट और उनके परिवार के सदस्यों पर यही आरोप था। मुंबई हमलों (26/11) की साजिश रचने वाले डेविड हेडली ने स्वीकारा था कि उसने भट्ट को 26/11 को दक्षिणी मुंबई की तरफ ना जाने की सलाह दी थी।

डेविड हेडली को मुंबई घुमा-घुमा कर दिखाने का आरोप महेश भट्ट के बेटे पर ही रहा है। मगर नहीं इनसे तो बदनामी नहीं होती, बदनामी तो तब होती है जब कोई इस बारे में बोल बैठे?

आतंकियों से सम्बन्ध रखने का ये पहला मामला भी नहीं था। फ़िल्मी सितारों में से कइयों की तस्वीरें भारत से भागे हुए आतंकी दाउद इब्राहीम के साथ दिखी थीं। दाउद के दिए हुए एके 56 के साथ ही संजय दत्त पकड़ा गया था।

इससे क्या बदनामी हुई? नहीं, बिलकुल नहीं। बल्कि उल्टा बॉलीवुड के सितारे प्ला-कार्ड लिए हुए संजय दत्त के समर्थन में खड़े नजर आए। उस पर फिल्म बनाने वाले राजकुमार हिरानी ने इंडिया टुडे के साथ एक इंटरव्यू में बताया था कि संजय दत्त 308 लड़कियों को अपने बिस्तर तक ले जाने के लिए एक अनोखा तरीका इस्तेमाल करता था। वो एक नकली कब्र पर उन्हें ले जाता और कहता कि वहाँ वो उन्हें अपनी माँ से मिलवाने लाया है! ऐसी चीज़ों को जब फिल्मों में दिखाया गया, तब भी बदनामी नहीं हुई थी।

बॉलीवुड के एक दूसरे पोस्टर-बॉय पर तो तारिकाओं से मारपीट करने का अभियोग लगातार लगता रहा है। खुद जया बच्चन की बहु, ऐश्वर्या राय बच्चन भी उसकी शिकार हो चुकी हैं।

इसके अलावा सलमान पर काले हिरण मारने का अभियोग रहा। बिश्नोई लोगों का विरोध ना झेलना पड़ता, तो अपने कुकृत्य में वो कामयाब भी होते। मुंबई में, संभवतः नशे में धुत्त होकर गाड़ी फुटपाथ पर सोए अल्पसंख्यक समुदाय के मजदूरों पर चढ़ा देने का भी उस पर मामला रहा है। पत्रकारों से मारपीट तो सलमान के लिए आम बात है, लेकिन इन सब से बदनामी कहाँ होती है? बदनामी तो तब होती है जब कोई इस बारे में बोल बैठे!

कुछ वर्षों पहले जिया खान नाम की एक युवा अभिनेत्री की आत्महत्या का मामला आया था। ऐसा तो बिलकुल नहीं है कि आत्महत्या बॉलीवुड के लिए कोई नई बात हो, मगर ये मामला इसलिए प्रकाश में आया क्योंकि जिया खान अपना लम्बा सा सुसाइड नोट छोड़ गई थी। इस नोट में आदित्य पंचोली के बेटे सूरज पंचोली का नाम साफ़-साफ़ आता है।

लेकिन किसी को आत्महत्या की कगार तक पहुँचा देना भी कोई बदनामी की बात थोड़ी है? वैसे इस मामले में भी जिया खान की माँ ने आरोप लगाए थे कि महेश भट्ट ने जिया खान को अवसाद ग्रस्त और मानसिक समस्याओं से पीड़ित स्वीकारने के लिए धमकाया था।

बॉलीवुड में “कास्टिंग काउच” पर एक स्टिंग ऑपरेशन हुआ था, जिसे कई लोगों ने देखा होगा। इस मामले में जाने-माने खलनायक शक्ति कपूर भी फँसे थे। मगर इसके उजागर होने पर मामला थमा हो, “कास्टिंग काउच” बंद हो गया हो, ऐसा भी नहीं। जानी-मानी हस्ती सरोज खान ने इस मसले पर कहा था “वो कम से कम रोटी तो देती है। रेप करके छोड़ तो नहीं देते?”

वैसे तो जिस्म बेच कर रोटी का इंतजाम करना भारतीय कानूनों के हिसाब से वेश्यावृति होगा लेकिन संविधान और कानूनों को मान लें तो फिर बॉलीवुड का सेलेब्रिटी कैसा? और हाँ, ध्यान रहे कि इनसे भी कोई बदनामी नहीं होती।

असली मामला तो “तुम्हारा कुत्ता कुत्ता और मेरा कुत्ता टॉमी” वाला है। इस देश में रहकर, यहीं के नागरिकों द्वारा सर पर बिठाए जाने के कारण जो लोग खुद को सेलेब्रिटी मानते हैं, वो जब इसी देश के बारे में कहते हैं कि यहाँ रहने में डर लगता है, या ये कि यहाँ असहिष्णुता का माहौल है, तब तो वो “जिस थाली में खाया, उसी में छेद करना” भी नहीं होता। जिस थाली में खाया, उसी में छेद करना तब हो जाता है, जब बॉलीवुड में काम कर चुका कोई बोल दे कि यहाँ नशे के व्यापार और अपराधी-आतंकी तत्वों से जान पहचान रखने वालों का बोलबाला है।

बाकी हमें उम्मीद है कि जया बच्चन जी के घर में आइना भी होगा। कभी सजते-संवरते उसमें अपनी आँखों से आँखे मिला कर देखिएगा। हो सकता है कुछ शर्म बाकी हो तो वो आँखों में उतर आए। देश का क्या है, तुम्हारा कुत्ता कुत्ता और हमारा कुत्ता टॉमी सुनने के बाद भी जिस थाली में खाया उसमें छेद करने वालों को ढूँढ ही लेगा।