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सुशांत सिंह राजपूत के परिवार ने कभी नहीं कहा आत्महत्या है, मुंबई पुलिस ने मराठी में लिखे बयान पर जबरन करवाए हस्ताक्षर: वकील

सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के वकील विकास सिंह ने मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज किए गए बयान के बारे में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि सुशांत सिंह के परिवार से बयान जबरन मराठी भाषा में रिकॉर्ड करवाया गया, जिस कारण परिवार ने इस पर आपत्ति भी जताई। गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की मौत को लेकर मुंबई पुलिस की विश्वसनीयता पर शुरुआत से ही सवाल उठते रहे हैं।

उन्हें कथित तौर पर इस बयान पर हस्ताक्षर करने के लिए भी मजबूर किया गया था, जबकि परिवार को इसकी कोई भी जानकारी नहीं थी कि इसमें मराठी में क्या लिखा गया। सिंह ने आगे स्पष्ट किया कि सुशांत सिंह की कोई बीमा पॉलिसी नहीं थी और उनके परिवार पर लगाए गए आरोप बेहद अपमानजनक हैं।

दिवंगत बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत के परिवार के वकील, विकास सिंह ने अपने नवीनतम संवाददाता सम्मेलन में उन सभी बातों का खंडन किया है जिनमें यह कहा जा रहा था कि सुशांत सिंह के परिवार को उनके कथित मानसिक स्वास्थ्य के बारे में जानकारी थी। उनके अनुसार, सुशांत के मानसिक स्वास्थ्य के बारे में उनके परिवार के लोगों को जानकारी होने जैसी बातें फैलाई गई हैं।

दरअसल, इस बात को लेकर जबरदस्त बहस हो रही है कि सुशांत सिंह के मर्डर का दावा कर रहा परिवार उनकी आत्महत्या की बात मुंबई पुलिस को दिए बयान में स्वीकार कर चुकी है। इस विवाद पर सुशांत सिंह के परिवार के वकील विकास सिंह ने परिवार की ओर से इन खबरों से इनकार करते हुए मुंबई पुलिस पर यह आरोप लगाया है।

रिपोर्ट के अनुसार, एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान सुशांत के परिवार के वकील विकास सिंह ने मीडिया के सवालों का जवाब देते हुए कहा कि परिवार ने कभी ऐसा स्टेटमेंट नहीं दिया है कि सुशांत ने आत्महत्या की है। उन्होंने कहा कि ये स्टेटमेंट मुंबई पुलिस ने मराठी में रिकॉर्ड किए थे और परिवार ने इस पर आपत्ति भी जताई थी कि अगर वो परिवार से इस पर हस्ताक्षर करवा रहे हैं तो कृपया मराठी में मत लिखें। उन्होंने कहा कि इसके बावजूद उनसे जबरदस्ती मराठी में लिखे बयान पर साइन करवाया गया और उन्हें नहीं पता था कि क्या लिखा गया है।

उन्होंने आगे कहा, “ये बयान सुशांत सिंह राजपूत के परिवार को पढ़कर नहीं सुनाए गए। वो सिर्फ मराठी में लिखे गए थे। किसी को पढ़कर भी नहीं सुनाए गए। अगर आप मराठी में पढ़कर सुनाएँगे भी तो सामने वाले को जो मराठी नहीं जानता है, वही बताएँगे, जो आप सुनाना चाहते हैं। वो कैसे चेक करेगा क्या लिखा हुआ है। ये एक सिंपल सा लॉजिक है।”

वकील विकास सिंह का यह भी दावा है कि FIR में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यह रिया चक्रवर्ती ही थी, जो दिवंगत अभिनेता की समस्याओं के लिए जिम्मेदार थी। कथित तौर पर यह भी कहा गया है कि अभिनेत्री ने उन्हें जो भी दवाइयाँ दीं या डॉक्टर से सलाह ली, उनका कभी भी परिवार के सामने खुलासा नहीं किया गया।

इसके अलावा, उनका कहना है कि जो पर्चे उनके साथ साझा किए गए थे, उनमें कभी किसी तरह की बीमारी का जिक्र नहीं था। केवल कुछ दवाओं के नाम ही उन पर लिखे गए थे। वकील के मुताबिक, सुशांत सिंह राजपूत 8 जून की पोस्ट पर काफी डरे हुए थे, जिसके बारे में उन्होंने अपनी बहन को भी बताया था।

प्रधानमंत्री मोदी ने वेतन से ₹2.25 लाख दान कर की थी ‘पीएम केयर्स फंड’ की शुरुआत

पीएम केयर्स फंड को लेकर एएक बहुत अच्छी बात सामने आई है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी निजी बचत से 2.25 लाख रूपए पीएम केयर्स फंड में दान किए थे। 31 मार्च 2020 के दौरान फंड संबंधी रसीद और भुगतान के मुताबिक़ शुरूआती तौर पर 2.25 लाख रूपए दान किए गए थे।  

पीएम केयर्स फंड में हुए भुगतान की तस्वीर

इसके बाद 30,75,85,32,035 रूपए स्वैच्छिक तौर पर पीएम केयर्स फंड में दान किए गए थे। इसमें लगभग 39,67,748 रूपए विदेश से दान किए गए थे। रेगुलर खाते में इंटरेस्ट इनकम (ब्याज आय) और विदेशी सहयोग 35,32,728 और 575 रूपए था। वहीं 2049 रूपए का भुगतान बतौर सर्विस टैक्स कुल फंड से विदेशी धनराशि के परिवर्तन में किया गया था। 31 मार्च 2020 तक पीएम केयर्स फंड में कुल धनराशि 30,76,62,56,047 रूपए थी।

इस संबंध में एबीपी न्यूज़ के पत्रकार ने ट्विटर पर ट्वीट करके जानकारी भी दी। उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा ‘प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीएम केयर्स फण्ड की शुरुआत अपनी बचत के 2.25 लाख रुपए दान देकर की थी। ये रकम पीएम ने अपनी तनख्वाह से चुकाई थी, ABP न्यूज़ के पास फण्ड की ऑडिटेड स्टेमेन्ट की कॉपी है। यह कॉपी विपक्ष के सवालों का करारा जवाब है।’

कोरोना वायरस महामारी का प्रकोप और प्रभाव बढ़ने के बाद 28 मार्च को पीएम केयर्स फंड (Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations) की शुरुआत की गई थी। इसके अलावा एक पब्लिक चैरिटेबल ट्रस्ट की शुरुआत ‘Prime Minister’s Citizen Assistance and Relief in Emergency Situations Fund’ (PM CARES Fund)’ के नाम से की जाएगी। यह एक नेशनल फंड होगा जो कोरोना वायरस जैसी महामारी और आपदाओं का सामना करने के लिए समर्पित होगा।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस ट्रस्ट के चेयरमैन होंगे और इसके सदस्यों में गृह मंत्री, रक्षा मंत्री और वित्त मंत्री शामिल हैं। भारत का हर वह नागरिक जो दान करना चाहता है वह pmindia.gov.in पर अपनी इच्छानुसार दान कर सकता है। दान करने के लिए अन्य जानकारी यह हैं: 

  • Name of the Account ——— PM CARES
  • Account Number ————– 2121PM20202
  • IFSC Code ———————— SBIN0000691
  • SWIFT Code ——————— SBININBB104
  • Name of Bank & Branch —– State Bank of India, New Delhi Main Branch

यूक्रेन की नाबालिग लड़की से पाकिस्तानी टूरिस्ट ने किया रेप: बच्ची की माँ के साथ रहता है लिव-इन में, गिरफ्तार

मथुरा में विदेशी नाबालिग लड़की का बलात्कार करने के आरोप में कल (सितंबर 2, 2020) यूपी पुलिस ने एक पाकिस्तानी युवक को गिरफ्तार किया है। युवक टूरिस्ट वीजा लेकर भारत आया था और पिछले पाँच साल से लड़की को जानता था। घटना की शिकायत लड़की के घरवालों ने कोतवाली में दी थी।

जानकारी के अनुसार, यूक्रेन निवासी पीड़िता के पिता द्वारा कोतवाली में दर्ज कराए गए मुकदमे के अनुसार 31 अगस्त को रात करीब 8:30 बजे पाकिस्तानी युवक लड़की के यहाँ आया और नाबालिग को अकेला पाकर उसके साथ जबरन दुष्कर्म किया।

शिकायत में पिता ने बताया कि जब वह 1 सितंबर को लौट कर आए तो उनकी बेटी ने उन्हें अपने साथ हुई घटना के बारे में जानकारी दी। कहा जा रहा है लड़की के पिता धार्मिक समारोह में जा जाकर भजन कीर्तन गाते थे। घटना वाली रात वह अपने गुरू से मिलने गए हुए थे। इसी दौरान आनंद कुमार नामक पाकिस्तानी ने रेप की घटना को अंजाम दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक आरोपित भी संगीत का टीचर है।

लड़की के पिता ने शिकायत में यह भी कहा कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म करने वाला युवक उनकी पूर्व पत्नी के साथ पिछले काफी समय से लिव इन रिलेशनशिप में रह रहा है। वह मूल रूप से कराची पाकिस्तान का रहने वाला है और वर्तमान में बराहघाट स्थित एक अपार्टमेंट में रह रहा है। बता दें, पिता की तहरीर के बाद पुलिस ने युवक को गिरफ्तार कर लिया है।

नवभारत टाइम्स की खबर के अनुसार, यूक्रेन की इस नाबालिग के माता-पिता इस्कॉन भक्त हैं। माता-पिता के बीच तलाक हो चुका है जिसक बाद से दोनों अलग-अलग रहते हैं। बच्ची अपने पिता के साथ रहती है। युवक भी कई सालों से टूरिस्ट वीजा पर भारत में रुका हुआ है।

मामले में एसपी (सिटी) उदय शंकर सिंह ने बताया, “पाकिस्तान के कराची शहर के नारायण पुरा इलाका निवासी आनन्द नामक युवक पिछले पाँच वर्ष से यूक्रेन निवासी एक किशोरी को संगीत की शिक्षा दे रहा था। वह यहाँ टूरिस्ट वीजा पर आया हुआ है। किशोरी के माता-पिता भी पिछले दस वर्ष से वृन्दावन में रहकर भजन-कीर्तन करते हैं।”

… अब खुलेआम धमकी, POK जैसी क्यों लग रही मुंबई: संजय राउत पर कंगना रनौत का पलटवार

शिवसेना नेता संजय राउत की धमकी के बाद बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत ने इस मामले पर अपनी प्रतिक्रिया दी है। कंगना ने अपने हालिया ट्वीट में खुलेआम मिली धमकी पर पूछा है कि आखिर क्यों मुंबई में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (POK) जैसी लगने लगी है।

कंगना ने ट्वीट में लिखा, “संजय राउत ने खुलेआम मुझे धमकी दी और मुंबई वापस न आने को बोला। आजादी के नारों के बाद अब खुली धमकी। मुंबई पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) की तरह क्यों लग रही है?”

गौरतलब है कि इससे पहले कंगना ने एक ट्वीट में अपनी सुरक्षा हिमाचल या फिर केंद्र सरकार से माँगी थी। अपने ट्वीट में उन्होंने मुंबई पुलिस की सुरक्षा स्वीकारने से मना किया था। इसके बाद शिवसेना नेता संजय राउत ने शिवसेना के मुखपत्र ‘सामना’ में रनौत के बयानों को खारिज करते हुए उनके बयान को शर्मनाक बताया था।

राउत ने लिखा था, “हम उनसे मुंबई न आने का अनुरोध करते हैं। यह मुंबई पुलिस का अपमान करने के अलावा और कुछ नहीं है। गृह मंत्रालय को इस पर कार्रवाई करनी चाहिए।”

यहाँ बता दें कि सुशांत मामले में लापरवाही दिखाने के कारण मुंबई पुलिस पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। कंगना का पहले भी मानना था कि इस केस की जाँच सीबीआई ही निष्पक्ष होकर कर पाएगी और अब जब वह इस केस से अप्रत्यक्ष रूप से जुड़ गई हैं, तो उनके बयान लगातार चर्चा में हैं, इसलिए वह मुंबई पुलिस के ख़िलाफ़ भी मुखर होकर बोल रही है।

उन्होंने मुंबई पुलिस से सुरक्षा लेने से मना भी। ऐसा अपने खिलाफ सोशल मीडिया पर किए गए अपमानजनक ट्वीट को मुंबई पुलिस कमिश्नर परमबीर सिंह द्वारा लाइक करने को लेकर किया था। कंगना रनौत ने ट्वीट करते हुए पूछा था कि जब मुंबई पुलिस प्रमुख ही इस तरह बदमाशी और अपराध को बढ़ावा देंगे तो मुंबई में उनकी सुरक्षा को लेकर कौन जिम्मेदार होगा? वहीं जब मुंबई पुलिस ने कमिश्नर का बचाव किया तो कंगना ने उन्हें फोर्स के नाम पर धब्बा बता दिया।

मंगलवार (सितंबर 1, 2020) को कंगना ने मुंबई पुलिस पर जबरदस्त हमला बोलते हुए ट्वीट किया कि इस समय मुंबई पुलिस अब तक की सबसे निचले स्तर पर पहुँच गई है। कंगना ने अपने ट्वीट में दो स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए दावा किया मुंबई पुलिस कमिश्नर ऐसे अपमानजनक सोशल मीडिया पोस्ट्स को लाइक कर रहे हैं, जो सुशांत को न्याय दिलाने की आवाज उठाने वाले लोगों के खिलाफ लिखे गए हैं। उन्होंने लिखा कि सार्वजनिक रूप से परेशान करने वालों और धमकाने वालों की निंदा करने का बजाय इसे प्रोत्साहित कर रहे हैं।

गायों की डंडे से कर रहा था पिटाई, बछड़े ने सीने पर ऐसी मारी दुलत्ती कि गोबर में लोट गया: लोगों ने कहा- यही है ‘Instant Karma’

सोशल मीडिया पर एक वीडियो चर्चा में है। वीडियो में बहुत सी गायों का एक झुंड मौजूद है। तभी एक आदमी गाय को डंडे से मारने लगता है लेकिन इसके बाद जो हुआ वह किसी के लिए भी हैरान कर देने वाला था। जिस दौरान वह व्यक्ति गाय को डंडों से मार रहा था तभी एक बछड़े ने उसे अपने पैरों से मार दिया।  

सिर्फ 10 सेकेंड की अवधि का यह वीडियो भारतीय वन सेवा के अधिकारी सुशांता नंदा ने साझा किया है। उनके द्वारा ट्विटर पर साझा किए गए इस वीडियो को अब तक लगभग 22 हज़ार लोग देख चुके हैं। इसके अलावा लगभग 1.6 हज़ार लोग पसंद कर चुके हैं और 280 लोग रीट्वीट कर चुके हैं। वीडियो साझा करते हुए उन्होंने कैप्शन में लिखा “What goes around, Does come around” यानी जैसा आप दूसरों के साथ करते हैं, वैसा आपके साथ भी होता है।  

हालाँकि, वीडियो कब और कहाँ का है इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं उपलब्ध है। लेकिन वीडियो में साफ़ देखा जा सकता है कि सफ़ेद कपड़ों में एक व्यक्ति गाय को डंडे से पीट रहा है। तभी एक बछड़ा भागते हुए बीच में आता है और उस व्यक्ति के सीने पर अपने पिछले पैरों से पूरी ताकत लगा कर मारता है। इसके बाद व्यक्ति तुरंत मौके पर गिर जाता है। ट्विटर पर इस वीडियो को लेकर कई तरह की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आ रही हैं।  

इंग्लैंड के गायक जॉन लेनन का एक गाना है ‘instant karma’ यह गाना 1970 में जारी किया गया था। इस गाने की शुरूआती पंक्ति है ‘Instant Karma’s gonna get you, Gonna knock you right on the head।’ मायने आपका कर्म आपके पास आता ही है और सीधा आपके सिर पर चोट करता है। जॉन लेनन के इस गाने के बाद इस शब्द का चलन बहुत ज्यादा बढ़ा है।  

मोटे तौर पर इसका अर्थ हुआ हर कर्म या किए धरे का कुछ न कुछ परिणाम होता है। सोशल मीडिया के दौर में इस शब्द के इर्द गिर्द तमाम मीम, फोटो और वीडियो मिल जाएँगे। यह वीडियो इस बात का बेहद जीवंत उदाहरण है। बल्कि सोशल मीडिया पर यह शब्द (instant karma) अक्सर चर्चा में भी रहता है इसलिए तमाम सोशल मीडिया यूज़र्स ने इस वीडियो को instant karma की सटीक मिसाल करार दिया।   

पाकिस्तान की इंटरनेशनल बेइज्जती: 2 भारतीयों को घोषित करवाना चाहता था आतंकवादी, UNSC ने लगाई फटकार

पड़ोसी मुल्क पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा है। पाकिस्तान ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव 1267 का हवाला देते हुए भारत के दो लोगों को अंतरराष्ट्रीय आतंकवादी घोषित करने की माँग उठाई। लेकिन पाकिस्तान की इस माँग को सुरक्षा परिषद ने सिरे से नकार दिया।

पाकिस्तान की इस माँग को खारिज करने में सुरक्षा परिषद के 5 सदस्य देशों ने अहम भूमिका निभाई। इनमें अमेरिका, इंग्लैंड, फ्रांस, जर्मनी और बेल्जियम हैं। इस मुद्दे पर संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी प्रतिनिधि टीएस तिरुमूर्ति ने ट्वीट भी किया।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “पाकिस्तान ने पिछले कुछ समय में लगातार प्रयास किए हैं कि आतंकवाद संबंधी प्रस्ताव 1267 का राजनीतिकरण हो। इसके अलावा पाकिस्तान ने इसे धार्मिक रंग देने का भी पूरा प्रयास किया है लेकिन सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान की इस कोशिश को पूरी तरह विफल कर दिया है। हम परिषद के हर उस सदस्य का आभार जताते हैं, जिन्होंने पाकिस्तान की इस कोशिश को नाकाम करने में योगदान दिया है।” 

साल 2019 के दौरान पाकिस्तान ने प्रस्ताव 1267 के तहत कुल 4 भारतीय नागरिकों को आतंकवादियों की सूची में डालने की माँग उठाई थी। चीन ने भी इस मुद्दे पर पाकिस्तान का समर्थन किया था। सुरक्षा परिषद ने पहले ही दो नामों को इस सूची में डालने से मना कर दिया था। वहीं दो और नाम अंगारा अप्पाजी गोविंदा पट्टनाइक दुग्गीवालसा को कल (2 सितंबर 2020) आतंकवादी घोषित करने से मना कर दिया। सूत्रों की मानें तो पाकिस्तान के पास अपने दावों को साबित करने के लिए किसी भी तरह के ठोस सबूत नहीं थे।  

इसके पहले फ्रांस समेत अन्य सदस्यों ने पाकिस्तान को अपने दावे सिद्ध करने का मौक़ा दिया था। उन्होंने पाकिस्तान को इस संबंध में सबूत पेश करने के लिए कहा था लेकिन पाकिस्तान ऐसा नहीं कर पाया था। बल्कि इस मुद्दे पर अंतिम आदेश जारी करने से पहले पाकिस्तान के सबूतों का इंतज़ार भी किया गया। इसके बावजूद इस्लामाबाद अपनी बात साबित नहीं कर पाया। जिसके बाद संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तान की माँग को पूरी तरह खारिज करते हुए अपना फैसला सुनाया।  

पाकिस्तान की इस चाल को बदले की भावना के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल बीते वर्ष 1 मई को भारत जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने में कामयाब हुआ था। जिसके जवाब में पाकिस्तान ने यह चाल चली थी लेकिन बदले की भावना से उठाए गए इस कदम में पाकिस्तान कामयाब नहीं हुआ।

इसके ठीक एक हफ्ते पहले भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद पाकिस्तान को फटकार लगा चुका है। बुधवार (26 अगस्त 2020) को सुरक्षा परिषद ने पाकिस्तानी दूत के बयान को अस्वीकार कर दिया था। साथ ही यह भी कहा था कि पाकिस्तानी दूत का यह बयान आधिकारिक रूप से दर्ज नहीं किया जाएगा।  

संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि मुनीर अकरम ने बयान दिया था। बयान में उन्होंने भारत को लेकर कई तरह के दावे किए थे। अंत में पता चला कि उनके सारे झूठे हैं और भारत को लेकर दुष्प्रचार करते हैं। सोमवार के दिन पाकिस्तान जैसे गैर सदस्यों को सुरक्षा परिषद की बैठक शामिल होने की इजाज़त नहीं मिली थी।

पाकिस्तान की तरफ से जारी किए गए बयान के बाद भारत की तरफ प्रतिक्रिया आई थी। तिरुमूर्ति ने ट्वीट करते हुए लिखा ‘हमने देखा कि संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान मिशन की तरफ से बयान जारी किया गया था। बयान संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि की तरफ से जारी किया गया था। लेकिन हम एक बात नहीं समझ पाए कि जब सुरक्षा परिषद की सभा गैर सदस्यों के लिए खुली ही नहीं थी तो उन्होंने बयान कहाँ दर्ज कराया था।’           

‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ को ब्लूम्सबरी ने करवाया लीक: आरोप पर लेखिकाएँ करेंगी पुलिस से शिकायत दर्ज

दिल्ली दंगों पर आधारित किताब की लेखिकाएँ अब Bloomsbury Publishing India Pvt के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवा रही हैं। आज दोपहर 3 बजे वह पुलिस हेडक्वार्टर में पुलिस आयुक्त कार्यालय में अपनी शिकायत दर्ज करवाएँगी। इसकी जानकारी बुद्धिजीवियों और शिक्षाविदों के समूह (group of intellectuals and academicians) द्वारा जारी की गई प्रेस रिलीज में दी गई है।

रिलीज के मुताबिक, किताब की लेखिकाओं का आरोप है कि ब्लूम्सबरी ने उनकी आने वाले किताब ‘दिल्ली रायट्स 2020: द अनटोल्ड स्टोरी’ की मैनुस्क्रिप्ट कई मीडिया पोर्टल्स और कार्यकर्ताओं को दी।

बता दें कि पिछले दिनों भी ब्लूम्सबरी पर किताब की मैनुस्क्रिप्ट लीक करने के आरोप लगे थे। हालाँकि तब शिकायत नहीं हुई थी। पर, अब इस किताब की लेखिकाओं ने कार्रवाई करने का फैसला ले लिया है।

मोनिका अरोड़ा, सोनाली चितालकर और प्रेरणा मल्होत्रा ​की यह वही किताब है, जिसे वामपंथियों और इस्लामी कट्टरपंथियों के दबाव में आकर प्रकाशन ने प्रकाशित करने से रद्द कर दिया था और एक बयान में हवाला यह दिया था कि लेखकों ने उसे किताब की वर्चुअल प्री पब्लिकेशन लॉन्च के आयोजन के बारे में नहीं बताया था।

इसके बाद कुछ ही दिन में इस किताब की मैनुस्क्रिप्ट व्हाट्सएप पर वायरल होने लगी। कई नेटिज़न्स ने सवाल भी उठाया था कि आखिर कैसे पूरी पुस्तक को अवैध रूप से जारी किया गया। उनका कहना था कि इस तरह से पुस्तक को सोशल मीडिया पर सर्कुलेट नहीं किया जा सकता।

फिर, यह बात सामने आई कि वायरल हो रही कॉपी वही है, जो ब्लूम्सबरी के पास थी। क्योंकि मैनुस्क्रिप्ट का दूसरे पन्ने पर स्पष्ट रूप से लिखा है कि यह एक कॉपी है। इसे ब्लूम्सबरी द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

इसके अलावा यह भी सोचने वाली बात थी कि आम तौर पर लेखकों, प्रकाशन हाउस और संपादक के अलावा इस रूप में मैनुस्क्रिप्ट किसी और के पास उपलब्ध नहीं होती। इसलिए यह स्पष्ट है कि लेखकों द्वारा इस मैनुस्क्रिप्ट को वायरल नहीं किया जाएगा, क्योंकि इससे पुस्तक की बिक्री को नुकसान पहुँचेगा, जो अब गरुड़ प्रकाशन द्वारा प्रकाशित किया जा रहा है।

ऐसे में सवाल उठा कि क्या पब्लिशिंग हाउस द्वारा मैनुस्क्रिप्ट की कॉपी को लीक किया गया है? ध्यान देने वाली बात यह भी है कि व्हाट्सएप पर मैनुस्क्रिप्ट के वायरल होने से पहले वामपंथी पोर्टल TheQuint द्वारा इसे सबसे पहले एक्सेस किया गया था।

कफील खान मतलब भगवान श्रीकृष्ण… कॉन्ग्रेसी नेशनल हेराल्ड की संपादक मृणाल पांडे ने लिखा

हाल ही में विवादित चिकित्सक कफील खान को मथुरा कारागार से रिहा किया गया। कुछ लोगों को रिहाई की इस ख़बर से कुछ ज़्यादा ही तसल्ली और सुकून मिला। ऐसा ही एक नाम है कॉन्ग्रेस के मुखपत्र की संपादक मृणाल पांडे का।

मृणाल पांडे इस बात पर इतनी ख़ुश हुईं कि कफील खान की श्रीकृष्ण से तुलना कर दी। मृणाल पांडे की तरफ से ऐसी प्रतिक्रिया हैरान करने वाली नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के प्रति उनकी नफ़रत किसी से छुपी नहीं है।

मृणाल पांडे ने कफील खान की मथुरा जेल से रिहाई को श्रीकृष्ण जैसा बता दिया। मृणाल पांडे इतने पर ही नहीं रुकी। इसके बाद उन्होंने यह भी कह डाला कि जैसे श्रीकृष्ण ने कंस का अंत किया था, ठीक वैसे ही कफील भी बच्चों के हत्यारे से मुक्ति दिलाएँगे। कफील खान उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में हुई बच्चों की मौत के मामले में आरोपित रहे हैं।  

इसके अलावा कफील खान पर इस मामले में फेक न्यूज़ (फ़र्ज़ी ख़बरें) फैलाने को लेकर भी जाँच जारी है। निलंबित किए जाने के बाद भी अस्पताल में दाख़िल होने और मरीजों का इलाज करने के मामले में भी उन पर जाँच चल रही है। पिछले साल दिसंबर महीने में कफील खान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में नागरिकता संशोधन अधिनियम पर भड़काऊ भाषण दिया था।  

जिसकी वजह से जनवरी 2020 में कफील खान को गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उत्तर प्रदेश पुलिस ने कफील खान पर राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम लगाया था। हालाँकि बीते दिन इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने इस मामले में कफील खान की रिहाई के आदेश दिए थे। कॉन्ग्रेस की सचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने न्यायालय के इस आदेश की सराहना की थी।   

कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी इस बात पर फूली नहीं समाई थी। प्रियंका ने मंगलवार को ट्वीट करते हुए लिखा, “आज इलाहाबाद हाई कोर्ट ने डॉ कफील खान के ऊपर से रासुका हटाकर उनकी तत्काल रिहाई का आदेश दिया। आशा है कि यूपी सरकार डॉ कफील खान को बिना किसी विद्वेष के अविलंब रिहा करेगी। डॉ कफील खान की रिहाई के प्रयासों में लगे तमाम न्याय पसंद लोगों व यूपी कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ताओं को मुबारकबाद।”

नागरिकता संशोधन कानून और NRC को लेकर भड़काऊ भाषण देने के आरोप में जेल में बंद डॉ कफील खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट ने सितंबर 1, 2020 को बड़ी राहत प्रदान की थी। मामले की सुनवाई करते हुए कोर्ट ने खान के ऊपर से NSA हटाया। साथ ही सरकार को उन्हें अविलंब रिहा करने के आदेश दिए।

जय श्रीराम का नारा कम्युनल है क्या? – फेसबुक प्रमुख से पूछे गए कई सवाल, 150 से ज्यादा का नहीं मिला जवाब

सोशल मीडिया के बड़े प्लेटफॉर्म फेसबुक की निष्पक्षता को लेकर हर राजनैतिक दल के मन में बड़ा सवाल है। सत्ताधारी पार्टी को लग रहा है कि फेसबुक विपक्ष से साँठ-गाँठ किए बैठा है और विपक्ष को लग रहा है कि फेसबुक के भाजपा से लिंक हैं। 

ऐसी उठा पटक के बीच में बुधवार (सितंबर 2, 2020) को संसदीय समिति की बैठक हुई। इस बैठक में फेसबुक भारत के प्रमुख अजित मोहन शामिल हुए। समिति की अध्यक्षता शशि थरूर ने की। यह बैठक करीब 3 घंटे चली। इस बैठक में दोनों पक्षों ने अजित मोहन के सामने फेसबुक के झुकाव के बारे में बात की।

एक ओर कॉन्ग्रेस सांसदों की ओर से हेटस्पीच के कई उदाहरण दिए गए। वहीं, दूसरी ओर से भाजपा के सांसदों ने फेसबुक से कई तीखे सवाल कर डाले। भाजपा ने अजित मोहन से जय श्रीराम के नारे से लेकर कश्मीर मुद्दे पर उनकी राय माँगी।

उन्होंने पूछा कि क्या जय श्रीराम कहना फेसबुक की पॉलिसी के हिसाब से सांप्रदायिक है? उन्होंने मोहन से पूछा कि क्या वह मानते हैं कि कश्मीर में सुरक्षा के नाम पर भारत सरकार आतंक फैला रही है, जैसा कि उन्होंने अपने आलेखों में लिखा है?

इसके अलावा चुनावों में फेसबुक की भूमिका और फेसबुक के कॉन्ग्रेस से संबंधों के बारे में खुल कर पूछा गया। उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर क्यों फेसबुक अपने को भारत में बिचौलिया कहता है? फेसबुक के अफसरों का कॉन्ग्रेस नेता अहमद पटेल से क्या रिश्ते हैं? फेसबुक के फैक्ट चैकिंग बोर्ड में शामिल कोई पार्टनर क्या कॉन्ग्रेस के डाटा एनेलेटिक्स में काम कर चुका है?

इसके बाद साल 2019 में लोकसभा चुनावों में दक्षिणपंथी अकाउंट्स को हटाने की बात भी भाजपा सांसदों ने उठाई। उन्होंने पूछा कि क्या यह सही है कि राष्ट्रवादी विचारधारा से जुड़े वे 700 पेज हटाए गए, जिनकी कुल फॉलोइंग 26 लाख से अधिक थी। वहीं कॉन्ग्रेस और वामपंथी विचारधारा से जुड़े जो लेख हटाए गए, उनकी कुल फॉलोइंग 2 लाख थी?

सांसदों ने पूछा कि साल 2019 में फेसबुक ने चुनावों को कितना प्रभावित किया? नरेंद्र मोदी के बयानों के कितने फैक्ट चेक हुए और सोनिया गाँधी के बयानों को कितनी बार चेक किया गया। भाजपा सांसदों ने इस दौरान फेसबुक पर ईस्ट इंडिया कंपनी जैसी नीति अपनाने पर भी सवाल किए। उन्होंने पूछा कि क्या 21 वीं सदी की ईस्ट इंडिया कम्पनी फेसबुक है, जो भारतीय कानूनों को नहीं मानती और बाँटो एवं राज करो के नियम में यकीन करती है? 

यहाँ बता दें, इस संसदीय बैठक में दोनों पक्षों ने फेसबुक कार्रवाई के बारे में अजित मोहन से पूछा। भाजपा ने फैक्ट चेक टीम में प्रतीक सिन्हा के अपॉइंटमेंट पर सवाल उठाए। साथ ही यह भी पूछा कि क्या भाजपा, शिवसेना, विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल या आरएसएस से किसी की नियुक्ति वहाँ की गई? जिसका कंपनी ने कोई डेटा उपलब्ध नहीं कराया।

समिति बैठक में शामिल मंत्रियों ने पूछा कि ‘फेसबुक फॉर मुस्लिम’ जैसे ग्रपु पर क्या एक्शन लिया गया। जिस पर फेसबुक की ओर से प्रतिनिधि ने कहा कि उनके पास ऐसी कोई पॉलिसी नहीं है कि वह उसे ब्लॉक करें या ऑब्जेक्ट करें।

कमिटी ने फेसबुक से कंंटेंट को हटाने की संपूर्ण जानकारी माँगी। विशेष तौर पर उस कंटेंट को हटाने की, जो साल 2019 में चुनाव के दौरान हटाए गए। उन्होंंने उदाहरण देते हुए पूछा कि सिख फॉर जस्टिस ग्रुप पर भारत का एक विकृत नक्शा दिखाया गया। लेकिन फेसबुक ने उसे नहीं हटाया जबकि जय श्री राम और देवी-देवताओं की तस्वीर हेट पोस्ट कहकर हटा दी गईं।

कुल मिलाकर इस बैठक में 150 से अधिक प्रश्नों के जवाब अजित मोहन से सांसदों को नहीं मिल पाए। इस बैठक में थरूर के अलावा, निशिकांत दुबे, राज्यवर्धन सिंह राठौर, महुआ मित्रा, सन्नी देओल, लॉकेट चटर्जी, नीतिक प्रमाणिक और नसीर हुसैन शामिल हुए। 

इससे पहले याद दिला दें कि कानून मंत्री रविशंकर ने फेसबुक सीईओ को पत्र लिखा था। पत्र में उन्होंने फेसबुक पर एकतरफा होने की बात कही थी। उन्होंने बताया था कि कैसे साल 2019 में फेसबुक ने दक्षिणपंथियों के अकॉउंटस बंद कर दिए थे या फिर उनकी रीच घटा दी थी। जबकि फेसबुक को तो संतुलित और निष्पक्ष होना चाहिए था। उन्होंने यह भी कहा था कि फेसबुक इंडिया टीम में कई वरिष्ठ अधिकारी एक विशेष राजनीतिक विचारधारा के समर्थक हैं।

PM मोदी एकाउंट हैक मामले में ट्विटर जुटा रहा पूरी जानकारी, जाँच कर सुधारने में लगा सिस्टम

बीती रात (2-3 सितंबर) को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एकाउंट हैक कर लिया गया था। फ़िलहाल इसे रिकवर यानी हैकर्स की पहुँच से बाहर निकाला जा चुका है। इस मामले पर ट्विटर की तरफ से भी प्रक्रिया आई है। ट्विटर ने अपना पक्ष रखते हुए यह बात स्वीकारी है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर एकाउंट हैक किया गया था।  

ट्विटर ने अपनी तरफ से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ट्विटर एकाउंट हैक किया गया था। फ़िलहाल वो इस मामले की जाँच कर रहे हैं। कुछ समय पहले पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा और एलन मस्क जैसी कई नामी हस्तियों के एकाउंट हैक किए गए थे। उसके बाद बिटकॉइन की माँग की गई थी।  

समाचार एजेंसी रॉयटर्स से बात करते हुए ट्विटर ने इस मुद्दे पर जानकारी दी। ट्विटर ने कहा है कि उन्हें पता है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के एकाउंट के साथ क्या हुआ है। और वो इस मामले को पूरी तरह सुधारने में लगे हुए हैं। हालाँकि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं है कि किसी अन्य ट्विटर एकाउंट के साथ भी ऐसा हुआ है।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ट्विटर एकाउंट पर तमाम तरह की जानकारी साझा की जाती है। विशेष रूप से प्रधानमंत्री मोदी की निजी वेबसाईट narendramodi.in और NaMo App से जुड़े अपडेट्स भी साझा किए जाते हैं। इस पर ट्विटर का साफ़ तौर पर कहना है कि वह इस मामले की पड़ताल में लगे हुए हैं और जल्द ही उन्हें नतीजे हासिल होंगे।  

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट (www.narendramodi.in) का टि्वटर अकाउंट रात में हैक हो गया था। जॉन विक (John Wick) नाम के हैकर ने अकाउंट हैक करने के बाद कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए बिटक्वॉइन में डोनेशन की माँग की।

2-3 सितंबर की रात में 3 बजकर 9 मिनट से 3 बजकर 16 मिनट तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का टि्वटर अकाउंट हैक रहा। इस दौरान हैकर ने कुल चार ट्वीट किए। इनमें से तीन ट्वीट कोविड-19 रिलीफ फंड के लिए पैसे की माँग को लेकर थी। 

रात के 3 बजकर 16 मिनट पर हैकर जॉन विक ने यह बताया कि उसने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पर्सनल वेबसाइट का ट्विटर अकाउंट हैक कर लिया है। पेटीएम मॉल की डेटा चोरी में भी इसी हैकर ग्रुप जॉन विक का नाम आया था। साइबर सिक्योरिटी फर्म साइबल ने तब इस बात का दावा किया था। लेकिन PM मोदी के पर्सनल ट्विटर अकाउंट को हैक करने वाले ने अपने आखिरी ट्वीट में इस बात से इनकार किया है।