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2004, 2010, 2012, 2025… नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर बार-बार क्यों मचती है भगदड़, इस बार कैसे हुईं मौतें, क्या अचानक प्लेटफॉर्म बदला जाना कारण: जानिए सब कुछ

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ घटना में 18 लोगों की जान चली गई और 10 लोग घायल हो गए। पहले बताया जा रहा था कि रेलवे स्टेशन पर भगदड़ वाला माहौल 15 फरवरी की रात तब बना जब 9:55 के करीब सूचना आई कि प्रयागराज जाने वाली एक ट्रेन दूसरे प्लैटफॉर्म पर है। उसी समय प्लैटफॉर्म नंबर 14, 15 पर खड़े होकर इंतजार कर रहे यात्री तेजी से भागे और स्थिति बिगड़ती गई। हालाँकि बाद में उत्तर रेलवे के जनसंपर्क अधिकारी ने बताया कि ये घटना एक यात्री के पैर फिसलने के बाद हुई।

उत्तर रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी हिमांशु शेखर उपाध्याय ने समाचार एजेंसी एएनआई को बताया, “यह दुखद घटना उस वक्त घटी, जब पटना की ओर जाने वाली मगध एक्सप्रेस नई दिल्ली रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 14 पर खड़ी थी, और जम्मू की ओर जाने वाली उत्तर संपर्क क्रांति प्लेटफॉर्म नंबर 15 पर खड़ी थी। इस दौरान प्लेटफॉर्म 14-15 की ओर आ रहा एक यात्री सीढ़ियों पर फिसल कर गिर गया, और उसके पीछे खड़े कई यात्री इसकी चपेट में आ गए।”

उन्होंने बताया कि इस घटना की उच्च स्तरीय समिति द्वारा जाँच की जा रही है। कोई भी ट्रेन रद्द नहीं की गई, न ही प्लेटफॉर्म में कोई बदलाव किया गया… प्लेटफॉर्म पर स्थिति अब सामान्य है। सभी ट्रेनें अपने सामान्य समय पर चल रही हैं…”

भारतीय रेलवे ने इस घटना के बाद पीड़ितों को मुआवजा देने की घोषणा की है। मृतकों के परिजनों को 10 लाख रुपए का मुआवजा दिया जाएगा। गंभीर रूप से घायल लोगों को 2.5 लाख रुपए और मामूली रूप से घायल लोगों को 1 लाख रुपए का मुआवजा मिलेगा।

इस मामले की जाँच के लिए दो सदस्यीय समिति भी गठित की गई है। इसमें पीसीसीएम (रेलवे के प्रधान मुख्य वाणिज्य प्रबंधक), उत्तर रेलवे नरसिंह देव और पीसीएससी उत्तर रेलवे पंकज गंगवार शामिल हैं। समिति ने एनडीएलएस रेलवे स्टेशन के सभी वीडियो फुटेज को सुरक्षित करने का आदेश दिया है।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जुटी भीड़

2004, 2010, 2012 में भी हुई थी भगदड़

बता दें कि ये पहली बार नहीं है कि नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मची हो। इससे पहले भी साल 2004, 2010 और 2012 में अलग-अलग कारणों से नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर भगदड़ मची थी, जिसमें कई लोगों की जान गई थी।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जुटी भीड़

साल 2004 में छठ के मौके पर भीड़ देखी गई थी। सबको घर लौटना था। प्लेटफॉर्म पर हर जगह लोग थे। अचानक से उस समय ट्रेन के दूसरे प्लेटफॉर्म पर होने की जानकारी लोगों को मिली और भगदड़ मचने लगी। इस घटना में 11 लोग घायल हुए थे और 5 लोगों की मौत हो गई थी।

नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जुटी भीड़

इसी तरह मई 2010 में भी कुछ ऐसा ही हुआ था। समय गर्मियों की छुट्टी का था और पटना जाने वाले लोग क्रांति एक्सप्रेस का इंतजार कर रहे थे। ट्रेन को प्लेटफार्म 13 पर आना था लेकिन वो आई प्लैटफॉर्म नंबर 12 पर। यात्रियों को जैसे ही इसकी जानकारी हुई वहाँ तुरंत भगदड़ मच गई। इस आपाधामी में 2 लोगों की मौत हो गई जबकि कम से कम 15 यात्री घायल हुए थे।

इसके बाद साल 2012 में भी नई दिल्ली रेलवे स्टेशन पर एक दुर्घटना हुई थी। उस समय विक्रमशिला एक्सप्रेस अपने निर्धारित समय से 5 मिनट देरी से दोपहर 2.50 बजे प्लेटफार्म 12 की बजाय प्लेटफार्म 13 से रवाना हुई थी। इसके तुरंत बाद, यात्रियों की भीड़ प्लेटफार्म 13 पर खड़ी सप्त क्रांति एक्सप्रेस की ओर दौड़ पड़ी, जो आमतौर पर प्लेटफार्म 12 से चलती है। इस भगदड़ में 35 साल की महिला और 14 साल के लड़के की मौत हो गई थी।

चोर चोरी से जाए हेराफेरी से न जाए… जो हैंडल दिल्ली CM का, उसे चुनाव हारने के बाद केजरीवाल ने करवा लिया अपने नाम: मुख्यमंत्री कार्यालय का X को पत्र- एक्सेस वापस दो

आम आदमी पार्टी (AAP) के संयोजक अरविन्द केजरीवाल पर दिल्ली के मुख्यमंत्री का सरकारी एक्स (पहले ट्विटर) हैंडल चुराने का आरोप लगा है। इसको लेकर अब दिल्ली मुख्यमंत्री के कार्यालय ने सोशल मीडिया कम्पनी एक्स को ईमेल लिखा है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने नाम पर बनाए गए एक फर्जी अकाउंट को भी बंद करने का अनुरोध एक्स से किया है।

दिल्ली मुख्यमंत्री कार्यालय ने अपने इमेल में लिखा, “हमारे संज्ञान में आया है कि X पर, ‘@CMODelhi’ यूजरनेम वाला वाला ग्रे टिक लगा आधिकारिक हैंडल अब अनाधिकृत रूप से ‘@KejriwalAtWork’ में बदला गया है।”

मुख्यमंत्री कार्यालय ने एक्स को ईमेल में बताया है कि उसके आधिकारिक हैंडल का नाम बदले जाने के चलते ‘@CMODelhi’ उपयोग में लेने के लिए उपलब्ध हो गया था। किसी ने इस नाम से एक पैरोडी अकाउंट बना लिया है। मुख्यमंत्री कार्यालय ने X से अनुरोध किया है कि वह इस हैंडल को बंद करके वापस उन्हें एक्सेस दे।

मुख्यमंत्री कार्यलय ने माँग की है कि ‘@CMODelhi’ वाले हैंडल का आईडी और पासवर्ड उन्हें सौंपा जाए जिससे इसका दुरूपयोग ना हो। अभी इस विषय में एक्स की तरफ से जवाब दिए जाने के विषय में कोई जानकारी सामने नहीं आई है।

गौरतलब है कि राज्यों के मुख्यमंत्री या इसी तरह के आधिकारिक अकाउंट किसी निजी व्यक्ति के नहीं होते। अगर उस पद पर कोई नया व्यक्ति आता है तो इन्हें उसके नाम या फोटो के साथ अपडेट कर दिया जाता है। यह नियम भारत के प्रधानमंत्री के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ‘PMOIndia’ तक में लागू होता है।

अरविन्द केजरीवाल पर आरोप है कि उन्होंने सरकारी हैंडल को निजी बनाने की कोशिश की। भाजपा ने आरोप लगाया था कि केजरीवाल ने पहले आधिकारिक अकाउंट का नाम बदला और फिर एक घंटे के भीतर ही यह अकाउंट डिलीट कर दिया गया। वर्तमान में दिल्ली मुख्यमंत्री का कोई भी ट्विटर अकाउंट नहीं दिखता है।

गौरतलब है कि हाल ही में सम्पन्न में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा को सीटें मिली थीं। AAP को इस चुनाव में 22 सीट मिली थीं। AAP इस चुनाव के बाद सत्ता से बाहर हो गई थी। भाजपा ने अभी दिल्ली का मुख्यमंत्री तय नहीं किया है। परंपरा के अनुसार, नए मुख्यमंत्री के आने पर ट्विटर अकाउंट में बदलाव होते हैं।

मुरादाबाद में किताब खरीदने निकली हिंदू लड़की घर नहीं लौटी, पीड़ित माँ बोली- दिलशाद उठा ले गया, स्कूल आने-जाने पर छेड़ता था: सुल्तानपुर में भी युवती गायब, मुस्लिम बनाने की धमकी

उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में एक मुस्लिम युवक एक हिन्दू नाबालिग को उठा ले गया। हिन्दू नाबालिग को वह लम्बे समय से परेशान कर रहा था। लड़की के परिजनों ने इस विषय में अब FIR दर्ज करवाई है और कार्रवाई की माँग की है। वहीं सुल्तानपुर में भी एक हिन्दू युवती को घर से ले जाने और धर्मांतरण का आरोप मुस्लिम युवकों पर लगा है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, मुरादाबाद के सोनकपुर थाना क्षेत्र में एक गाँव में रहने वाली नाबालिग हिन्दू लड़की 11 फरवरी, 2025 से गायब है। हाई स्कूल की छात्रा हिन्दू लड़की पहले कॉलेज गई थी और वापस आकर किताब खरीदने की बात कह कर वापस घर से निकली थी। हालाँकि, इसके बाद वह घर नहीं आई।

पहले घरवालों ने इस संबंध में काफी तलाश की लेकिन कोई सुराग ना लगने पर वह पुलिस के पास पहुँचे। घरवालों ने आरोप लगाया कि गाँव का ही मुस्लिम युवक दिलशाद उनकी बेटी को लेकर गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि दिलशाद लगातार उनकी बेटी को स्कूल आते-जाते समय छेड़ता था।

दिलशाद भी इस दौरान अपने घर पर मौजूद नहीं है। पीड़ित परिवार ने बताया है कि दिलशाद के घरवाले दबंग हैं जबकि वह लोग मेहनत मजदूरी करने वाले हैं। स्थानीय हिन्दुओं ने आरोप लगाया है कि दिलशाद हिन्दू लड़की का धर्मांतरण करवाने की जुगत में है। उन्होंने बताया है कि दिलशाद चचेरा भाई भी एक हिन्दू लड़की को अगवा करके उससे निकाह कर चुका है।

पीड़ितों ने इस मामले में पुलिस से कार्रवाई की माँग की है। एसपी मुरादाबाद ने बताया है कि लड़की और दिलशाद की तलाश को टीमें गठित कर दी गई हैं। हालाँकि, अभी तक दोंनो के विषय में कोई जानकारी नहीं मिल सकी है।

सुल्तानपुर में भी धर्मांतरण का आरोप

उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में भी एक हिन्दू लड़की को बहला फुसला कर ले जाने का आरोप मुस्लिम युवकों पर लगा है। दोस्तपुर थाना क्षेत्र में पीड़ित पिता ने बताया है कि उनकी 19 वर्षीय बेटी को तीन मुस्लिम दानिश, आवेश और कैफ अपने साथ ले गए हैं। वह लड़की के साथ पहले से फोन पर बात करता था।

हिन्दू लड़की के पिता ने इस संबंध में दानिश के घर भी शिकायत की थी लेकिन यहाँ से उन्हें धमकी ही मिली। मामले में अब पुलिस को सूचना दी गई है। FIR भी इस मामले में दर्ज करवाई गई है। पुलिस ने मामले में जल्द आरोपितों की गिरफ्तारी का आश्वासन दिया है।

कहीं हिंदू बन प्यार का झाँसा, कहीं नौकरी के नाम पर फँसाना… गोरखपुर हो या पूर्णिया, रेशमा खान से लेकर आफताब खान तक लड़कियों को बना रहे ‘धंधे वाली’

पिछले दिनों उत्तर प्रदेश के गोरखपुर और बिहार के पूर्णिया से सेक्स रैकेट का खुलासा हुआ था। एक को ऑपरेट कर रही थी 22 साल की रेशमा खान और दूसरे को ऑपरेट कर रहा था आफताब खान। ये लोग लड़कियों को फँसाकर उन्हें सेक्स के धंधे में धकलते थे और ऐसा न करने पर उन्हें ब्लैकमेल किया जाता था।

रेशमा खान ने अपना धंधा गोरखपुर और आसपास के इलाकों में फैला रखा था। वह लड़कियों की मजबूरी का फायदा उठाकर उन्हें धंधे में धकेलती थी और उससे पैसा कमाती थी। उसने करीबन 300 लड़कियों को सेक्स रैकेट में फँसाकर इतने रुपए कमाए थे कि मात्र 22 साल की उम्र में उसे लग्जरी जीवन जीने की आदत पड़ गई थी।

वहीं आफताब खान की बात करें तो लग्जरी जीवन आफताब भी जीता था लेकिन लड़कियों को धोखे में रखने के लिए। उसने थार खरीद रखी थी और उस पर ‘जय बजरंगबली’ लिखवा रखा था। वो लड़कियों को अपना नाम अंकित तिवारी नाम बताकर प्रेम जाल में फँसाता था। वहीं आफताब के दोस्त शाकिब ने अपना नाम राजीव साह रखा हुआ था। यह लोग लड़कियों से वेश्यावृत्ति करवाने के लिए एक रात के 10 लजार रुपए तक लेते थे। इसके अलावा ये लोग लड़कियों को दूसरे राज्य में बेचने का काम भी करते थे।

पूर्णिया में चल रहे सेक्स रैकेट का खुलासा 29 जनवरी को हुआ था। इस दौरान 11 नाबालिगों को रेस्क्यू किया गया था जबकि पुलिस छापेमारी में 32 लोग पकड़े गए थे। वहीं गोरखपुर की रेशमा खान के बारे में खुलासा अभी हाल में हुआ है। हालिया रिपोर्ट्स में सामने आया कि वो अनिरुद्ध ओझा नाम के व्यक्ति से जुड़ी थी जिसका खुद का काम भी लड़कियों को बहला-फुसलाकर ब्लैकमेल करके उनका रेप करना था।

रेशमा खान इन्हीं के साथ थी और दूसरी लड़कियों को हुक्का बार लाकर उन्हें सेक्स धंधे में धकेलती थी। उसका काम था कि वो हुक्का बार में आने वाली लड़कियों पर नजर रखती थी और बाद में उनकी लाचारी का फायदा उठाकर उनसे रेप करती थी। पुलिस की पड़ताल से पता चलता है कि उसने 300 के करीब लड़कियों को सेक्स धंधे में धकेल दिया था। वह हुक्का बार में आने वाली लड़कियों को निशाना बनाती थी और समझाती थी कि अगर वह अपने साथ और लड़कियों को जोड़ेगी तो उन्हें कमीशन मिलेगा। अगर वह उनका सहयोग नहीं करेंगी तो उनकी तस्वीरें उनके परिवार वालों को भेज दी जाएँगी।

रेशमा इंटरव्यू के बहाने भी लड़कियों को होटल में बुलाती थी। इसके बाद वह उनका रेप कराती थी और तस्वीरें लेकर उनसे जबरन वेश्यावृत्ति करवाती थी। आपको जानकर हैरानी होगी कि 10वीं फेल रेशमा के कनेक्शन देवरिया, कुशीनगर, महाराजगंज, मऊ, बलिया, आजमगढ़, बस्ती, सिद्धार्थनगर ही नहीं बल्कि नेपाल तक में भी थे।

पुलिस ने इन दोनों केसों में कई आरोपितों को गिरफ्तार किया है। गोरखपुर मामले में मुख्य साजिशकर्ता रेशमा खान अरेस्ट है लेकिन पूर्णिया मामले में आफताब फरार है। पुलिस उसकी तलाश में छापेमारी कर रही है। रेशमा खान ने पूछताछ में बताया कि करीब 3 साल पहले वह जीनस बाटल रेस्टोरेंट के मालिक अनिरुद्ध ओझा के संपर्क में आई थी और उसके बाद वो पहले इस गिरोह का शिकार बनी, बाद में वो खुद इस गिरोह की मुख्य संचालक बन गई।

कौन हैं एलिजाबेथ, गौरव गोगोई से शादी के बाद भी कैसे रहा पाकिस्तान से जुड़ाव: CDKN-तौकीर शेख से क्या हैं कनेक्शन, असम CM ने क्यों कहा- पूरे इकोसिस्टम की जड़ें खोदेंगे

कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई की ब्रिटिश पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई के ISI से लिंक वाले आरोपों पर SIT जाँच हो सकती है। असम के मुख्यमंत्री हिमंता बिस्वा सरमा ने SIT जाँच को जरूरी बताया है। उन्होंने गोगोई के पत्नी के शादी के बाद भी पाकिस्तान जाने के सबूत होने का दावा किया है। इस बीच एलिजाबेथ कोलबर्न के पाकिस्तानी सुपरवाइजर पर नए खुलासे हुए हैं। गौरव गोगोई के पाकिस्तानी हाई कमिश्नर से मिलने को लेकर भी प्रश्न उठ रहे हैं।

CM सरमा ने क्या कहा?

असम सीएम हिमंता बिस्वा सरमा ने शनिवार (15 फरवरी, 2025) को कहा, “हमारे पास पक्की जानकारी है कि एलिजाबेथ गोगोई अपनी शादी के बाद भी पाकिस्तान गई हैं। वह सांसद के साथ गई थीं या अकेली, इन बातों की पुष्टि हो जाएगी। कई नई जानकारियाँ भी सामने आ रही हैं।”

उन्होंने कहा कि रविवार को होने वाली कैबिनेट बैठक में इस मामले की SIT जाँच के लिए चर्चा होगी। CM सरमा ने स्पष्ट किया है कि यह जाँच मात्र एलिजाबेथ कोलबर्न तक ही नहीं बल्कि उसने जुड़े लोगों और बाकी इकोसिस्टम को भी दायरे में लेकर की जाएगी।

उन्होंने कहा है कि जाँच के लिए एक केस दर्ज किया जाएगा, इसके बाद उनके पासपोर्ट और वीजा की जानकारी जुटाई जाएगी। उन्होंने इस बात पर भी चिंता जताई है कि क्या गौरव गोगोई के पिता तरुण गोगोई के मुख्यमंत्री रहते हुए ISI का मुख्यमंत्री दफ्तर तक दखल था। उन्होंने इसकी जाँच भी करवाने की बात कही है।

सीएम हिमंता बिस्वा ने गौरव गोगोई की पाकिस्तानी हाई कमिश्नर अब्दुल बासित से मुलाक़ात को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न का एक पुराना ट्वीट दिखाया है, जिसमे वह इस्लामाबाद में होने सम्बन्धित बात लिख रही हैं।

कौन हैं एलिजाबेथ कोलबर्न?

गौरव गोगोई के ऊपर उठे विवाद के केंद्र में उनकी पत्नी एलिजाबेथ कोलबर्न गोगोई हैं। कोलबर्न और गौरव गोगोई की मुलाक़ात संयुक्त राष्ट्र सचिवालय में काम करने के दौरान 2010 में हुई थी। इसके बाद दोनों में प्रेम संबंध बन गया। 2013 में कोलबर्न और गोगोई का विवाह हो गया।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, गौरव गोगोई के पिता और तब असम के मुख्यमंत्री तरुण गोगोई इस विवाह के लिए पहले तैयार नहीं थे। हालाँकि, बाद में उन्होंने अपनी सहमति इसको लेकर दे दी थी। एलिजाबेथ लन्दन स्कूल ऑफ़ इकोनॉमिक्स से पढ़ी हुई हैं और ज्यादातर करियर उनका NGO में काम करते हुए गुजरा है।

कोलबर्न वर्तमान में ऑक्सफ़ोर्ड पॉलिसी मैनेजमेंट संस्थान में काम करती हैं। यह संस्थान पर्यावरण को लेकर काम करता है। एलिजाबेथ कोलबर्न इससे पहले CDKN नाम के एक NGO में काम कर चुकी हैं। इस NGO में पाकिस्तानी हस्तक्षेप का आरोप है।

क्या हैं कोलबर्न पर आरोप?

एलिजाबेथ कोलबर्न की नागरिकता को लेकर सबसे पहले CM बिस्वा सरमा ने प्रश्न उठाए थे। उन्होंने पूछा था कि विवाह के 12 साल के बाद भी कोलबर्न के पास भारतीय नागरिकता क्यों नहीं और वह अपनी ब्रिटिश नागरिकता क्यों बनाए हुए हैं। विवाह के पहले और बाद भी जिन संगठनों के साथ कोलबर्न ने काम किया, उनको लेकर प्रश्न उठे हैं।

कोलबर्न 2011-15 के बीच क्लाइमेट एंड डेवलपमेंट नॉलेज नेटवर्क (CDKN) के लिए काम किया था। दावा है कि वह इस दौरान अधिकतर समय पाकिस्तान में रहीं। CDKN से ही जुड़े एक संगठन LEAD के लिए वह पाकिस्तान में काम करती थीं। उनके पाकिस्तान सरकार की एक टास्क फ़ोर्स में भी शामिल रहने का दावा किया गया है।

यह टास्क फ़ोर्स कथित तौर पर पाकिस्तान के लिए पैसा जुटाती थी। इसके ISI का एक मुखौटा होने का दावा है। इसी को लेकर उन पर ISI लिंक के आरोप लगाए गए हैं। पाकिस्तान और भारत में काम करने के दौरान कोलबर्न का सुपरवाइजर एक पाकिस्तानी अली तौकीर शेख था। उसका भारत विरोधी प्रोपेगेंडा भी अब सामने आया है।

CDKN के एक और संगठन ICLEI से जुड़े होने की बात सामने आई है। ICLEI को भारत विरोधी जॉर्ज सोरोस ने 2.1 मिलियन डॉलर (लगभग ₹17 करोड़) की धनराशि दी थी। इसके अलावा कोलबर्न के एक अमेरिकी सेंटर टॉम उडाल से भी जुड़े होने का आरोप लगाया गया है जो पाकिस्तान का हमदर्द रहा है।

सुपरवाइजर कर रहा था भारत को बदनाम

अली तौकीर शेख स्वयं को एक पर्यावरण और पानी से जुड़े मुद्दों का एक्सपर्ट बताता है। वह कई NGO के साथ काम कर चुका है। अब शेख के भारत विरोधी एजेंडा चलाने के सबूत सामने आए हैं। उसे अपने ट्विटर अकाउंट से भारत की गलत छवि विश्व के सामने पेश करने की कोशिश की थी।

एलिजाबेथ के साथ काम करने वाले शेख ने भारतीय मुस्लिमों की नागरिकता चले जाने उन्हें डिटेंशन सेंटर में भेजे जाने जैसी अफवाह फैलाई जाएँगी।

शेख ने लव जिहाद और तबलीगी जमात के मामलों पर भी जहर फैलाया था। उसने दिल्ली दंगों का मामला संसद में उठाने पर कॉन्ग्रेस सांसद गौरव गोगोई की तारीफ़ भी की थी। इसको लेकर उसने एक ट्वीट किया था। अली शेख इसके अलावा और भी कई भारत विरोधी ट्वीट कर चुका है।

उसने बांग्लादेशी घुसपैठियों के भारत में घुसने को समस्या मानने से इनकार किया था। उसने दावा किया था कि भाजपा इसे हिन्दू-मुस्लिम विवाद की तरह पेश कर रही है। अली तौकीर शेख ने लगातार असम से जुड़े मुद्दों पर सरकार या फिर भाजपा के खिलाफ ट्वीट किए थे। जबकि पाकिस्तानी नागरिक होने के चलते इसने उनका कोई सीधा सरोकार नहीं था।

गौरव गोगोई पर भी सवाल

एलिजाबेथ कोलबर्न के अलावा उनके पति गौरव गोगोई को भी CM हिमंता बिस्वा सरमा ने घेरा है। CM बिस्वा सरमा ने बताया था कि 2015 में पाकिस्तानी हाई कमिश्नर अब्दुल ने गौरव गोगोई को बुलाया था। गौरव गोगोई इस मुलाक़ात में अपने साथ 50-60 छात्रों को लेकर गए थे। CM सरमा ने पूछा है कि तब क्या गौरव गोगोई ने विदेश मंत्रालय से अनुमति ली थी।

CM सरमा ने एक ट्वीट में बताया है कि अब्दुल बासित से मुलाक़ात के कुछ ही दिनों बाद गौरव गोगोई ने भारत के कोस्ट गार्ड के विषय में कई प्रश्न पूछे थे। गौरव गोगोई ने पूछा था कि कोस्ट गार्ड कौन से नए राडार स्टेशन स्थापित कर रहा है और कौन सर्विलांस के साजोसामान खरीद रहा है। उन्होंने इसे सिर्फ एक संयोग मानने से इनकार किया है।

CM सरमा ने इन प्रश्नों की टाइमिंग को लेकर प्रश्न उठाए हैं। MP गौरव गोगोई के NGO के एक लेख में बांग्लादेशी घुसपैठियों पर दया दिखाने की बात कही गई थी। इसमें BSF पर मानवाधिकार उल्लंघन करने की बात कही गई थी। इसको लेकर भी प्रश्न उठे हैं।

वहीं लोकसभा में कॉन्ग्रेस के उपनेता गौरव गोगोई ने इन सभी आरोपों को निराधार बताया है और कहा है कि वह ऐसे आरोपों पर कानूनी कार्रवाई करने वाले हैं। उन्होंने कहा था कि अगर उनकी पत्नी ISI एजेंट हैं तो वह स्वयं R&AW के एजेंट हैं।

BJP ने दिया मौका, चायवाला बन गया रायगढ़ का मेयर: छत्तीसगढ़ निकाय चुनावों में भाजपा की शानदार जीत; 10 नगर निगम और 36 नगरपालिका पर हुआ कब्जा

छत्तीसगढ़ की नगर निकाय चुनावों में भाजपा ने शानदार जीत दर्ज की है। भाजपा ने राज्य के सभी 10 नगर निगम चुनावों में जीत हासिल करके कॉन्ग्रेस का सूपड़ा साफ कर दिया है। वहीं, नगरपालिका परिषद और नगर पंचायतों में भी भगवा आगे है। भाजपा ने कॉन्ग्रेस को पछाड़कर रायगढ़ नगर निगम का चुनाव भी जीता है। यहाँ से चाय का दुकान चलाने वाले भाजपा के मेयर प्रत्याशी जीवर्धन चौहान जीते हैं।

जीवर्धन चौहान ने कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी जानकी काटजू को 34,000 वोटों के भारी अंतर से हराया है। जीवर्धन चौहान ने जीत का श्रेय रायगढ़ की जनता को दिया है। इसके साथ ही उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और रायगढ़ विधायक एवं राज्य के वित्त मंत्री ओपी चौधरी को धन्यवाद दिया, जिनकी वजह से उन्हें चुनाव लड़ने का मौका मिला। उन्होंने कहा कि वे रायगढ़ के महापौर के रूप में विकास का काम करेंगे।

चुनाव जीतने के बाद भी जीवर्धन सिंह चौहान अपनी दुकान में लोगों को चाय पिला रहे हैं। भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा के प्रदेश मंत्री जीवर्धन ने कहा कि वे पहले भी चायवाला थे और अब भी चायवाला बनकर लोगों के बीच रहेंगे। उन्होंने कहा कि वे अपनी दुकान में रहकर ही लोगों की समस्याओं को सुनेंगे और उसका समाधान करेंगे। उन्होंने कहा कि वे रायगढ़ में मूलभूत सुविधाओं की कमी नहीं होने देंगे।

नगर निगमों में जीतने वाले उम्मीदवारों की सूची (साभार: दैनिक भास्कर)

जीवर्धन चौहान की जीत पर ओपी चौधरी कहा कि रायगढ़ की जनता जनार्दन का आशीर्वाद मिलने का पूर्ण विश्वास था। पिछले एक वर्ष में लोगों ने राज्य में विकास की नई राजनीति को देखा है। चाय का ठेला चलाकर ईमानदारी से जीवन-यापन करने वाले जीवर्धन चौहान और भाजपा पार्षदों को जनता ने जो आशीर्वाद दिया है, उसे हृदय से स्वीकार करते हुए भाजपा लोगों की आशाओं के अनुरूप कार्य करती रहेगी।

बता दें कि चुनाव प्रचार के दौरान जीवर्धन चौहान के लिए छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और वित्त मंत्री ओपी चौधरी ने जमकर प्रचार किया था। इसके साथ ही अलग-अलग समय पर दोनों बड़े नेताओं ने जीवर्धन चौहान के ठेले पर चाय भी बनाई थी और लोगों को पिलाया था। इसके कारण चुनाव से पहले ही रायगढ़ के मेयर (महापौर) उम्मीदवार घोषित हो चुके जीवर्धन चौहान भारी मतों से जीते।

नगरपालिका के उम्मीदवारों की सूची (साभार: दैनिक भास्कर)

रायगढ़ के नगर निकाय चुनाव में भाजपा को 33 वार्डों में जीत मिली है। वहीं, कॉन्ग्रेस 12 वार्डों में सिमट कर रह गई है। एक वार्ड में बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के प्रत्याशी ने जीत हासिल की है। इसके साथ ही 2 निर्दलीय भी जीते हैं। रायगढ़ में करीब 69.68 प्रतिशत मतदान हुआ है। यहाँ मेयर के लिए 7 और वार्ड पार्षद के लिए 144 प्रत्याशी चुनावी मैदान में थे।

रायपुर में भाजपा ने 15 साल बाद वापसी की है। भाजपा ने नगर निगम की सभी 10 सीटों पर जीत दर्ज की है। वहीं, 49 नगरपालिका में 36 पर भाजपा ने जीत हासिल की है, जबकि 7 में कॉन्ग्रेस, 1 में AAP और 5 निर्दलीय जीते हैं। बता दें कि 10 नगर निगमों में मेयर और पार्षदों के साथ 49 नगरपालिका और 114 नगर पंचायतों समेत 173 नगरीय निकायों के अध्यक्ष और पार्षद के चुनाव हुए हैं।

शब-ए-बारात की रात दिल्ली के जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर मुस्लिम भीड़ ने मचाया हुड़दंग: गेट फांदकर निकलने की वीडियो वायरल, सवाल उठने पर DMRC ने दी पूरी जानकारी

दिल्ली मेट्रो का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। इसमें दिख रहा है कि नमाजी टोपी पहने मुस्लिम किशोर और युवाओं सहित भीड़ मेट्रो स्टेशन पर हुड़दंग मचा रही है। वे एग्जिट गेट पर टोकन या मेट्रो कार्ड स्वैप किए बिना ही उसे फाँदकर क्रॉस कर रहे हैं। वीडियो के सामने आने के बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने सवाल उठाया है। इसके बाद दिल्ली मेट्रो रेल कॉरपोरेशन (DMRC) ने बयान जारी किया है।

दिल्ली मेट्रो में सुरक्षा की जिम्मेदारी सेंट्रल इंडस्ट्रियल सिक्योरिटी फोर्स (CISF) के पास है। वीडियो वायरल होने के बाद लोग CISF पर भी सवाल उठा रहे हैं। वहीं, DMRC ने कहा, “कुछ यात्रियों द्वारा एएफसी गेट को कूदकर बाहर निकलने के बारे में सोशल मीडिया पर प्रसारित एक वायरल वीडियो के संदर्भ में डीएमआरसी यह सूचित करना चाहता है कि उक्त घटना 13 फरवरी 2025 की शाम को मैजेंटा लाइन पर जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन की है।”

DMRC ने आगे कहा, “कुछ यात्रियों द्वारा एएफसी गेट को कूदकर बाहर निकलने के कारण कुछ समय के लिए यात्रियों की अस्थायी भीड़ उमड़ पड़ी थी। ऐसे यात्रियों को परामर्श देने के लिए सुरक्षाकर्मी और अन्य कर्मचारी पर्याप्त रूप से मौजूद थे और स्थिति कभी भी नियंत्रण से बाहर नहीं हुई। बल्कि, यह एएफसी गेट पर अचानक भीड़ उमड़ने के कारण कुछ यात्रियों की क्षणिक प्रतिक्रिया थी।”

कहा जा रहा है कि यह वीडियो 13 फरवरी 2025 शब-ए-बारात की रात 11:22 बजे का है। इसे मैजेंटा लाइन पर जामा मस्जिद मेट्रो स्टेशन पर रिकॉर्ड किया गया था। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, DMRC बताया कि एक ही समय पर दो ट्रेनें स्टेशन पर आ गईं, जिससे भीड़ बढ़ गई और एग्जिट गेट पर भीड़ जमा हो गई। एग्जिट गेट पर प्रेशर बढ़ने के कारण उसने अस्थायी रूप से काम करना बंद कर दिया।

अधिकारियों के मुताबिक, इस स्थिति में यात्रियों को पास के साइड गेट से बाहर निकलने की अनुमति दी गई थी। हालाँकि, कुछ यात्रियों ने जल्दबाजी में AFC (ऑटोमेटिक फेयर कलेक्शन) गेट को फाँदकर बाहर जाने का प्रयास किया। कुछ देर के बाद स्टेशन पर सामान्य स्थिति बहाल हो गई। किसी तरह की अफरातफरी या हिंसा नहीं हुई। अधिकारियों का कहना है कि इस संबंध में कोई आधिकारिक शिकायत दर्ज नहीं की गई है।

सत्ता जाते ही बढ़ी अरविंद केजरीवाल की मुश्किल, ‘शीशमहल’ में किए भ्रष्टाचार की होगी पड़ताल: CVC ने दिए जाँच के आदेश, BJP नेता ने 2024 में दी थी शिकायत

दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के ‘शीशमहल’ को रेनोवेट कराने में हुए भ्रष्टाचार मामले में केंद्रीय सतर्कता आयोग द्वारा जाँच के आदेश दिए गए हैं। जानकारी के मुताबिक, इस मामले में केंद्रीय लोक निर्माण विभाग (सीपीडब्ल्यूडी) को विस्तृत जाँच करने को कहा गया है।

बता दें कि इस मामले में शिकायत भाजपा नेता विजेंद्र गुप्ता द्वारा दायर की गई थी। 14 अक्टूबर 2024 को गुप्ता ने केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) में दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के 6 फ्लैग स्टाफ रोड स्थित पूर्व आवास पर अवैध निर्माण के संबंध में शिकायत दर्ज कराई थी।

बीजेपी नेता ने आरोप लगाए थे कि केजरीवाल ने 40,000 वर्ग गज (8 एकड़) में फैली एक आलीशान हवेली (‘शीश महल’) बनाने के लिए भवन निर्माण नियमों का उल्लंघन किया। शिकायत में इस बात पर प्रकाश डाला गया कि राजपुर रोड पर प्लॉट नंबर 45 और 47 (पहले टाइप-वी फ्लैट में वरिष्ठ अधिकारियों और न्यायाधीशों के आवास थे) और दो बंगलों (8-ए और 8-बी, फ्लैग स्टाफ रोड) सहित सरकारी संपत्तियों को ध्वस्त कर दिया गया और नए आवास में मिला दिया गया।

16 अक्तूबर को सीवीसी ने इस मामले में शिकायत दर्ज की और गंभीरता से मामले की जाँच शुरू की। 5 नवंबर 2024 को CVC ने CPWD (केंद्रीय लोक निर्माण विभाग) को विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। CPWD द्वारा प्रस्तुत प्रारंभिक तथ्यात्मक रिपोर्ट के आधार पर (जिसमें कहा गया था कि 40,000 वर्ग गज (8 एकड़) में फैली इस हवेली के निर्माण में नियमों का उल्लंघन हुआ है) CVC ने 13 फरवरी 2025 को विस्तृत जाँच करने का आदेश दिया।

इस विस्तृत जाँच में यह देखा जाएगा कि क्या नवीनीकरण में खर्च की गई राशि वैध थी या नहीं, और क्या इसमें कोई वित्तीय अनियमितताएँ थीं। विजेंद्र गुप्ता ने दूसरी शिकायत में भी ‘फिजूलखर्ची‘ और ‘बड़े पैमाने पर वित्तीय अनियमितता’ का आरोप लगाया था। ये शिकायत शिकायत 21 अक्तूबर 2024 को दर्ज कराई गई थी।

जर्मनी जाकर विदेश मंत्री एस जयशंकर ने लगाई पश्चिमी देशों की क्लास, दो टूक बोले- हमारा लोकतंत्र खतरे में नहीं, अपना मॉडल न थोपें

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने पश्चिमी देशों को लोकतंत्र को लेकर आइना दिखाया और कहा भारत में यह समय के साथ और भी जीवंत होते जा रहा है। उन्होंने ‘खतरे में लोकतंत्र’ की बात करने वाले पश्चिमी देशों पर बांग्लादेश का लिए बिना कटाक्ष किया। विदेश मंत्री ने कहा कि पश्चिम ने ग्लोबल साउथ में गैर-लोकतांत्रिक ताकतों को प्रोत्साहित किया। वे बाकी दुनिया पर अपने लोकतंत्र का मॉडल थोपने में लगे रहते हैं।

विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि पश्चिमी देशों को भी पश्चिम के बाहर के सफल मॉडलों को अपनाना चाहिए। उन्होंने मतदान के दौरान अंगुली पर लगी स्याही को दिखाते हुए कहा, “हमारे लिए लोकतंत्र केवल एक सिद्धांत नहीं, बल्कि एक डिलीवर किया गया वादा है।” उन्होंने पश्चिमी देशों को बताया कि बीतते समय के साथ भारत में लोकतंत्र और भी जीवंत होते जा रहा है।

जयशंकर ने कहा, “भारत ने आजादी के बाद लोकतंत्र को इसलिए अपनाया, क्योंकि यह हमारे परामर्शात्मक (consultative) और बहुलवादी (pluralistic) समाज के मूल्यों से मेल खाता था।” पश्चिमी देशों की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा कि अतीत में पश्चिम ने लोकतंत्र को सिर्फ अपने तक सीमित रखा और ग्लोबल साउथ में गैर-लोकतांत्रिक शक्तियों को समर्थन दिया।

जयशंकर ने शुक्रवार (14 फरवरी 2025) को जर्मनी की राजधानी म्यूनिख में आयोजित सुरक्षा सम्मेलन में भाग लिया। इस दौरान कुछ वक्ताओं ने दुनिया में लोकतंत्र का भविष्य खतरे में बताया। हालाँकि, भारतीय विदेश मंत्री जयशंकर ने इसे खारिज कर दिया और कहा, “मैं लोकतंत्र को लेकर आशावान हूँ। मैं अभी अपने राज्य के चुनाव में हिस्सा लेकर आया हूँ।”

उन्होंने आगे बताया, “बीते साल हमारे देश में राष्ट्रीय चुनाव हुए और कुल मतदाताओं में से करीब दो तिहाई ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया।” उन्होंने अंगुली पर मतदान वाली स्याही को दिखाते हुए कहा, “मैं एक अपेक्षाकृत निराशावादी पैनल में आशावादी व्यक्ति हूँ। मैं अपनी अंगुली उठाकर शुरू करूँगा। इसे बुरा मत मानिएगा। जो निशान आप मेरे नाखून पर देख रहे हैं, वह अभी-अभी हुए मतदान का निशान है।”

जयशंकर ने बताया कि राष्ट्रीय चुनावों में लगभग 90 करोड़ मतदाताओं में लगभग 70 करोड़ मतदाताओं ने मतदान किया। उन्होंने बताया, “हम एक ही दिन में इन सभी वोटों की गिनती करते हैं। जब परिणाम घोषित होता है तो कोई भी उस पर विवाद नहीं करता। हम अच्छे से मतदान कर रहे हैं और हमारे लोकतंत्र की दिशा के बारे में आशावादी हैं।

इससे जुड़ा तर्क देते हुए उन्होंने कहा, “आधुनिक युग में जब से हमने मतदान करना शुरू किया है, तब से लेकर आज जो मतदान हो रहा है, उसमें 20 प्रतिशत अधिक लोग मतदान कर रहे हैं। इसलिए, पहला संदेश यह है कि लोकतंत्र पर कोई संकट नहीं है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र के लिए चुनौतियाँ भी हैं। अलग-अलग देशों में हालात अलग-अलग हैं, लेकिन कई देशों में लोकतंत्र अच्छे से काम कर रहा है।

वक्ताओं में शामिल अमेरिकी सीनेटर एलिसा स्लोटकिन ने कहा कि लोकतंत्र ‘खाने की मेज पर भोजन नहीं रखता’। इस पर जयशंकर ने कहा कि भारत 80 करोड़ लोगों को पोषण सहायता देता है। उन्होंने कहा कि दुनिया के कुछ ऐसे हिस्से हो सकते हैं जहाँ ऐसा नहीं होता हो, लेकिन कुछ ऐसे हिस्से भी हैं, जहाँ ये सब हो रहा है और इनमें भारत भी शामिल है।

महाकुंभ पर फर्जी जानकारी फैलाने वालों की खैर नहीं, अब तक 54 सोशल मीडिया अकॉउंटस् पर FIR दर्ज: CM योगी के निर्देश पर UP पुलिस कर रही सख्ती से निगरानी

महाकुंभ पर फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ सीएम योगी आदित्यनाथ सख्त हैं। उनके निर्देश पर यूपी पुलिस सोशल मीडिया पर 24*7 नजर बनाए हुए है। इसी कारण से कुंभ को लेकर झूठ फैलाने के 54 सोशल मीडिया अकॉउंट्स पर अब तक कार्रवाई हो चुकी है। 13 फरवरी को भी निगरानी के दौरान दो भ्रामक वीडियोज के बारे में पता चला। एक मिस्र से थी और एक पटना से। दोनों को दिखाकर महाकुंभ को बदनाम करने का प्रयास हो रहा था।

मिस्र की वीडियो को दिखाकर बताया जा रहा था कि मिस्र में बहुत भीषण आग लग गई है। घटना में 40-50 वाहन भी जल गए हैं, लेकिन जब जाँचा गया तो वीडियो साल 2020 में कायरो के पाइपलाइन अग्निकांड के दौरान रिकॉर्ड की गई थी।

इस झूठ को फैलाने वालों में ‘इंडिया विद कॉन्ग्रेस’ नाम का एक्स हैंडल भी शामिल है। इसके अलावा हरिंद्र राव, अनिल पटेल, विशाल बाबू, नेमी चंद, सिफा बदौरिया और हेलो प्रयागराज जैसे अकॉउंट शामिल हैं।

इसके अलावा पटना वाली वीडियो को साझा करके ऐसे दिखाया गया जैसे राष्ट्रवादी लोग कुंभ में आर्मी जवानों के ऊपर चप्पल फेंक रहे हैं। हकीकत जबकि ये है कि ये वीडियो पुष्पा-2 के लॉन्च के दौरान एक इवेंट में शूट किया गया था। इस मामले में भी 15 लोगों के खिलाफ मुकदमा दायर हो गया है।

इनमें इंद्रजीत बराक, सुनील, निहाल, निहाल शेख, डिंपी, सत सेवा, संदेश वाटक न्यूज, लोकेश मीणा, राज सिंह चौधरी, युनूस आलम, अमीनुद्दीन सिद्दीकी, अरविंद यादव अहिरवाल, शिवम कुमार कुशवाहा, जैन रेणु, अमित कुमार नाम के सोशल मीडिया यूजर्स का नाम है।

बता दें कि इससे पहले नेपाल की एक वीडियो को साझा करके भ्रम फैलाया गया था कि महाकुंभ में हुई भगदड़ के बाद शव लावारिस पड़े हैं। वहीं 9 फरवरी को भी धनबाद की वीडियो शेयर करके ऐसे ही झूठा दावा किया गया कि उत्तर प्रदेश पुलिस अपने लापता रिश्तेदारों की तलाश कर रहे तीर्थयात्रियों की पिटाई कर रही है। 12 फरवरी को भी वर्ष 2021 में गाजीपुर में मिले शवों की तस्वीरों को महाकुंभ से जोड़ने वाले 7 अकॉउंट पर एक्शन लिया गया था।

अब पुलिस ऐसी ही फर्जी जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ एक्शन ले रही है। लोगों से भी आग्रह किया जा रहा है कि वे सटीक जानकारी के लिए आधिकारिक स्रोतो पर ही भरोसा करें और असत्यापित सामग्री को साझा करने से बचें।