असम से लेकर बिहार तक भारी बारिश और नदियों में बढ़ते जलस्तर से जनजीवन अस्त-व्यस्त है। देश के इन दोनों राज्यों में बाढ़ से स्थिति गंभीर बनी हुई है। इसकी वजह से लाखों लोग प्रभावित हुए हैं, जान और माल दोनों का ही नुकसान हुआ है। इस बीच सोशल मीडिया पर असम की बाढ़ से जोड़कर लगातार गलत फोटो और वीडियो भी शेयर किए जा रहे हैं।
असम में बाढ़ के प्रकोप के बीच सोशल मीडिया पर एक लड़के की तस्वीर वायरल हो रही है, जिनमें इस लड़के को बाढ़ के पानी से एक हिरण को बचाने की कोशिश करते देखा जा सकता है। सोशल मीडिया पर इन तस्वीरों को इस दावे के साथ वायरल किया जा रहा है कि यह घटना असम की है।
इन तस्वीरों में देखा जा सकता है कि लड़का लगभग पूरा पानी में डूबा हुआ है, लेकिन डरे हुए हिरण के बच्चे को बाहर निकाल रहा है। सोशल मीडिया यूजर्स इस लड़के की तुलना मशहूर फिल्म ‘बाहुबली’ के काल्पनिक कैरेक्टर ‘बाहुबली’ और ‘शिवगामी’ से कर रहे हैं।
कर्नाटक कॉन्ग्रेस के नेता रक्षित शिवराम (Rakshith Shivaram) ने भी इन तस्वीरों को शेयर करते हुए अंग्रेजी में कैप्शन लिखा, जिसका हिंदी अनुवाद कुछ इस तरह होगा: “असम का असली ‘बाहुबली’ जिसने हिरण के बच्चे को डूबने से बचाया।”
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही तस्वीर
सच क्या है?
ये तस्वीरें असम में आई मौजूदा बाढ़ की नहीं, बल्कि 2014 में बांग्लादेश में आई बाढ़ की है। रिवर्स इमेज सर्च की मदद से हमें ‘डेली मेल’ की रिपोर्ट मिली, जो फरवरी, 2014 में छपी थी। यह खबर बांग्लादेश में बाढ़ के बारे में है।
इसमें इसी तरह की एक तस्वीर का इस्तेमाल किया गया है, जिसमें एक लड़का हिरण के बच्चे को बाढ़ के पानी से बचा रहा है। खबर के मुताबिक, यह घटना बांग्लादेश के नोआखली जिले की है।
बाढ़ के दौरान हिरण का बच्चा अपने झुंड से बिछड़ गया था। बिलाल नाम के एक लड़के ने उसे असहाय हालत में देखा तो अपनी जिंदगी दाँव पर लगाकर उसे बढ़ते पानी से बाहर निकाल लाया। ‘डेली मेल’ के मुताबिक, ये तस्वीरें वाइल्ड लाइफ फोटोग्राफर हसीबुल वहाब ने खींची थीं। उस समय वे नोआखली के दौरे पर थे। बाद में “कैटर्स न्यूज एजेंसी” ने इसे प्रसारित किया था।
निष्कर्ष
इस तरह साफ है कि बाढ़ के पानी से डूबते हुए हिरण के बच्चे को बचाने के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाले लड़के की तस्वीर असम की नहीं हैं। ये तस्वीरें छह साल पुरानी हैं और बांग्लादेश की हैं।
प्रियंका गाँधी ने भी शेयर की थी पुरानी तस्वीर
गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी ने सोमवार (जुलाई 20, 2020) को बाढ़ की पुरानी तस्वीरें पोस्ट कर कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं से असम और बिहार में आई बाढ़ की वजह से प्रभावित लोगों की मदद करने की अपील की थी।
हालाँकि इस ट्वीट को लेकर प्रियंका गाँधी खुद ही घिर गई। प्रियंका के ट्वीट को यूजर्स ने हाथों हाथ लेते हुए जहाँ उन पर जमकर निशाना साधा, वहीं कुछ ने इसे ठीक करने की सलाह भी दी थी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार (जुलाई 22, 2020) को ‘इंडिया आइडियाज समिट’ (India Ideas Summit) को संबोधित किया। अपने संबोधन में पीएम मोदी ने भारत में निवेश करने के फायदे गिनाए। उन्होंने बताया कि किस-किस सेक्टर में संभावनाएँ हैं। पीएम मोदी ने कहा कि भारत में निवेश का इससे अच्छा समय नहीं हो सकता।
#WATCH live: PM Modi delivers keynote address at India Ideas Summit, via video conferencing. https://t.co/0iWLqo0wMM
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इंडिया आइडियाज समिट को संबोधित करते हुए कहा कि आज भारत के प्रति पूरी दुनिया आशावादी है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत खुलेपन, अवसरों और प्रौद्योगिकियों का एक आदर्श संयोजन प्रदान करता है। भारत में लोगों और शासन में खुलेपन में विश्वास रखता है। खुले दिमाग खुले बाजार बनाते हैं और खुले बाजार अधिक समृद्धि का कारण बनते हैं।
Today, there is global optimism towards India. This is because India offers a perfect combination of openness, opportunities and options: PM Modi pic.twitter.com/MDVd9GYec2
पीएम मोदी ने कहा, “हम सभी इस बात पर सहमत है कि दुनिया को बेहतर भविष्य की जरूरत है। हम सभी को एक साथ आकर बेहतर भविष्य देना होगा। मैं पूरी तरह से मानता हूँ कि भविष्य को लेकर अप्रोच मानव केंद्रित होना चाहिए। भारत में निवेश का अवसर काफी बड़ा है। भारत आपको अपने किसानों की मेहनत में निवेश करने के लिए आमंत्रित करता है।”
India invites you to invest in infrastructure.
Our nation is witnessing our largest infrastructure creation drive in history. Be a partner in building housing for millions, or roads, highways and other such structures in India: PM Modi
उन्होंने आगे कहा, “डिफेंस और स्पेस सेक्टर में आकर निवेश करें। हम डिफेंस में निवेश के लिए FDI कैप बढ़ाकर 74 फीसदी कर रहे हैं। स्पेस सेक्टर में भी हम सुधार कर रहे हैं।”
We also welcome you to invest in defence and space. We’re raising the FDI cap for investment in defence sector to 74%: PM Modi pic.twitter.com/KoXQP46JEb
प्रधानमंत्री ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग की घरेलू क्षमता को बढ़ाना होगा। वित्तीय संस्थाओं को मजबूत करना होगा। आज दुनिया भारत की ओर देख रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि भारत खुलेपन, अवसरों और तकनीक का एक बेहतरीन मिश्रण है।
India invites you to invest in India’s healthcare sector.
India’s healthcare sector is growing 22% every year. Our companies are also progressing in production of medical technology, medicines and diagnostics: PM Modi
प्रधानमंत्री मोदी ने आगे कहा, “भारत आपको स्वास्थ्य सेवा में निवेश करने के लिए आमंत्रित करता है। भारत में हेल्थकेयर सेक्टर हर साल 22 प्रतिशत से भी अधिक तेजी से बढ़ रहा है। हमारी कंपनियाँ चिकित्सा-प्रौद्योगिकी, टेलीमेडिसिन और डाइग्नोसिस में भी प्रगति कर रही हैं। भारत आपको रक्षा और अंतरिक्ष में निवेश करने के लिए आमंत्रित करता है। हम रक्षा क्षेत्र में निवेश के लिए एफडीआइ कैप को 74% तक बढ़ा रहे हैं।”
Investment is the best show of confidence. Every year, we’re reaching record highs in FDI.
Each year is significantly higher than the previous.
FDI inflows in India in 2019-20 were 74 billion dollars, an increase of 20% from last year: PM Modi
पीएम मोदी ने कहा कि 2019-20 में भारत में एफडीआइ प्रवाह 74 बिलियन अमरिकी डॉलर था। यह पिछले वर्ष से 20% ज्यादा है। अप्रैल और जुलाई के बीच भारत ने 20 बिलियन अमेरिकी डॉलर से अधिक का विदेशी निवेश आकर्षित किया है।
गौरतलब है कि इससे पहले विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा था, “हम समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी, कनेक्टिविटी, कोरोना वायरस, जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि इसका बड़ा हिस्सा यह है कि हम कैसे द्विपक्षीय एजेंडे को मजबूत करते हुए बड़े एजेंडे को आकार देते हैं।”
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और तृणमूल कॉन्ग्रेस की प्रमुख ममता बनर्जी ने बुधवार (जुलाई 22, 2020) को उत्तर प्रदेश, गाजियाबाद के पत्रकार विक्रम जोशी के परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की है। इसके साथ ही ममता बनर्जी ने कहा कि देश में डर का माहौल है। मंगलवार को विक्रम जोशी की कुछ बदमाशों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी।
पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ने ट्विटर पर कहा कि देश में लोगों की आवाज को दबाया जा रहा है और मीडिया को भी नहीं बख्शा जा रहा है। उन्होंने आगे कहा कि देश में डर का माहौल बन गया है।
My heartfelt condolences to the family of Vikram Joshi, a fearless journalist who passed away today. He was shot in UP for filing an FIR to book his niece’s molesters. An atmosphere of fear has has been created in the country. Voices being muzzled. Media not spared. Shocking.
वहीं, इससे पहले ममता बनर्जी ने भाजपा पर भी इसी तरह का आरोप लगाया था, जिसमें उन्होंने दावा किया था कि देश में भय का शासन है। ममता बनर्जी ने तृणमूल कॉन्ग्रेस की एक वर्चुअल रैली को संबोधित करते हुए कहा था कि आज देशभर में भय के राज के कारण लोग अपनी बात रखने में असमर्थ हैं।
People unable to speak due to reign of fear across the country: West Bengal CM Mamata Banerjee at TMC rally
विडंबना यह है कि, ममता बनर्जी मोदी सरकार पर मीडिया की आवाज दबाने का झूठा आरोप लगा रही है। जबकि, यह कोई छुपी हुई बात नहीं है कि ममता बनर्जी की खुद की सरकार का रिपोर्ट कार्ड इस मामले में बेहद खराब रहा है। जहाँ अभिव्यक्ति की आजादी के नाम पर उनकी सरकार ने न सिर्फ़ मीडिया को धमकाया बल्कि उनके खिलाफ केस तक दर्ज कराए हैं।
बता दें कि ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली पश्चिम बंगाल सरकार ने अपनी सरकार के कामकाज की आलोचना करने वाले पत्रकारों और मीडिया को कई बार धमकाया है। हाल ही में, पश्चिम बंगाल के आरामबाग टीवी नाम के एक वेब न्यूज़ चैनल के पत्रकार शेख सफीकुल इस्लाम को पश्चिम बंगाल पुलिस ने 29 जून को गिरफ्तार कर लिया था।
रिपोर्ट के अनुसार, आरामबाग टीवी को राज्य सरकार की कार्रवाई का सामना इसलिए करना पड़ा, क्योंकि उसने कोरोनो वायरस महामारी के दौरान राज्य के विभिन्न क्लब्स को दान देने पर ममता बनर्जी सरकार से सवाल किया था।
इस चैनल ने यह भी खुलासा किया था कि सरकार जिन क्लब्स को डोनेशन दे रही है, उनमें से कई क्लब वास्तव में मौजूद ही नहीं हैं। जिसके बाद चैनल और उसके मालिक शेख सफीकुल इस्लाम के खिलाफ कई प्राथमिकी दर्ज की गईं।
ऑपइंडिया के खिलाफ एफआईआर
ममता बनर्जी की अगुवाई वाली सरकार ने न्यूज़ पोर्टल पर एक लेख प्रकाशित करने के लिए ‘ऑपइंडिया’ के सम्पादकों के साथ एक ऐसे व्यक्ति पर भी एफआईआर दर्ज करने का कारनामा किया था, जिसका कि संचार पोर्टल से कोई सम्बन्ध नहीं था।
हालाँकि, ऑपइंडिया से जुड़े तीन व्यक्तियों के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने के लिए भारत के सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था। शीर्ष अदालत ने इस मुद्दे पर राज्य सरकार को नोटिस भी जारी किया था।
पश्चिम बंगाल में बिगड़ती कानून व्यवस्था
गौरतलब है कि ममता बनर्जी उत्तर प्रदेश की सरकार पर कानून व्यवस्था की स्थिति को लेकर हमला कर रही है। जबकि वो खुद अपने राज्य पश्चिम बंगाल में राजनीतिक विरोधियों को लक्षित करने वाले अपराधों की बढ़ती संख्या को अनदेखा कर रही है।
अभी दो दिन पहले ही ममता बनर्जी के राज्य में एक ख़ौफनाक घटना घटी थी। जहाँ पश्चिम बंगाल के उत्तर दिनाजपुर के चोप्रागज में रविवार सुबह एक भाजपा बूथ अध्यक्ष की 16 वर्षीय बहन को उसके घर से अपहरण कर लिया गया था। जिसके बाद उसका बलात्कार किया गया और हत्या कर दी गई।
वहीं, पश्चिम बंगाल की भाजपा इकाई ने इस घटना को लेकर एक ट्वीट किया था कि 16 वर्षीय लड़की के साथ एक फिरोज अली ने बलात्कार किया, जो कथित तौर पर टीएमसी से जुड़ा था।
उल्लेखनीय है कि इस हफ्ते की शुरुआत में, पश्चिम बंगाल में भाजपा के एक विधायक देवेंद्र नाथ रॉय का शरीर पिछले सोमवार को सार्वजनिक स्थान पर फाँसी पर लटका हुआ मिला था। देवेंद्र नाथ रॉय उसी के एक रात पहले से लापता थे। मृतक के परिवार ने इसे सुनियोजित हत्या करार दिया है। इसके साथ ही परिवार वालों ने इसके पीछे तृणमूल सरकार का भी हाथ बताया था।
मीडिया जगत का एक जाना-माना नाम बरखा दत्त ट्विटर पर आज अचानक ट्रेंड करने लगीं। इस ट्रेंड के पीछे उनकी कोई नई रिपोर्टिंग नहीं बल्कि साल 2004 की एक रिपोर्टिंग थी। जिसका विषय कश्मीरी पंडित थे। इस ट्रेंड में बरखा के नाम के आगे Apologise भी लिखा नजर आया। सैंकड़ों लोगों ने इस #ApologiseBarkha पर ट्वीट किया और बरखा से उनके शब्दों पर माफी माँगने को बोला।
इस हैशटैग के अंतर्गत सोशल मीडिया यूजर्स ने बरखा की साल 2004 में एनडीटीवी के लिए की गई रिपोर्टिंग की क्लिप शेयर की। साथ ही उसी को आधार बनाकर कुछ ऐसे ट्वीट भी शेयर किए गए जिसमें उन्हें उनके अलग-अलग मामलों पर अलग-अलग मत रखने के लिए पाखंडी कहा गया और राहुल गाँधी जितना मूर्ख बताया गया।
अब इस वीडियो में ऐसा क्या है? जो शो एयर होने के 16 साल बाद उनपर ये परेशानी आ पड़ी। तो बता दें, इस वीडियो में बरखा ये कहती हुई सुनी जा सकती हैं कि कश्मीरी पंडित कश्मीर के विशेषाधिकृत लोग थे। वे कहती हैं कि कश्मीरी पंडित भले ही घाटी में अल्पसंख्यक थे। लेकिन उनका वहाँ सरकारी नौकरी जैसी जगहों पर एकाधिकार था और उन्होंने सबको दबाकर रखा हुआ था।
अब इस बात में कितनी सच्चाई है और कितना झूठ? इस बात को ऐसे समझा जा सकता है कि पिछले दिनों एक बुजुर्ग कश्मीरी हिंदू महिला बरखा का ये इंटरव्यू देखने के बाद बेहद दुखी हो गई थीं और उन्होंने कहा था कि वो बरखा दत्त की बातों से बिलकुल सहमत नहीं हैं।
वीडियो में महिला को कहते सुना जा सकता है कि यदि कश्मीरी पंडित के पास वहाँ मोनोपॉली होती तो वे कभी भागते नहीं। वे कहती हैं उनके साथ वहाँ जो हुआ है। अगर बरखा के साथ होता तो वह भी कश्मीर में नहीं रुकतीं। कट्टरपंथियों के अत्याचार याद करते हुए वे आगे कहती हैं कि कश्मीरी पंडितों के साथ और उनकी बेटियों के साथ क्या कुछ नहीं हुआ।
वे बताती हैं कि मुस्लिम उनसे कहते थे कि हम यहाँ पाकिस्तान बनाना चाहते हैं। हम कश्मीरी पंडित औरतों को चाहतें हैं। लेकिन कश्मीरी पंडित आदमियों के बगैर…”वहाँ हमने जो कमाया जो हमारे पास था, सब हमारी मेहनत थी। अगर हम वहाँ गरीबों पर अत्याचार करते तो हम अपना घर कभी नहीं छोड़ते। हम कैसे भागे हैं, हमारे साथ क्या हुआ है।”
महिला के अनुसार, उनके खुद के बच्चों के नाम मस्जिद में लिख दिए गए थे और ऐलान हुआ था कि ये पंडित हैं इन्हें मारो। वे कहती हैं, “हम जानते हैं कि हम अपने बच्चों को बचाने के लिए कैसे भागे। ये बरखा कैसी बात कर रही है। उसे ऐसी बात नहीं करनी चाहिए। वो हमेशा फेक न्यूज लिखती हैं। क्योकि उसे उसके पैसे मिलते हैं। मुझे उसपर गुस्सा आ रही है। उसे इसके लिए माफी माँगनी चाहिए। उसने ये गलत बात क्यों बोली।”
यहाँ बता दें, कई संगठनों के अलावा इस समय बरखा से ट्विटर पर कई लोग माफी माँगने को बोल रहे हैं। लोग बरखा को सच्ची पत्रकारिता पर धब्बा बता रहे हैं क्योंकि उन्होंने गरीब व सताए गए कश्मीरी पंडितों को अपनी वीडियो में विशेषाधिकृत बोला। लोगों का कहना है कि ये उनके पक्षपात का साफ उदाहरण है।
बरखा दत्त की रिपोर्टिंग को ऑल्ट न्यूज का साथ
गौरतलब हो कि सोशल मीडिया पर बरखा की हकीकत का एक और सबूत मिलने के बाद एक ओर जहाँ अधिकांश लोग उनपर अपना गुस्सा निकाल रहे हैं। वहीं आल्ट न्यूज सफाई दे रहा है कि ये वीडियो तो साल 2004 की है और लोग इसलिए वायरल कर रहे हैं कि वो एक नरसंहार पर स्पष्टीकरण दे रही हैं। इस लेख को बरखा ने भी शेयर किया है।
ऑल्ट न्यूज के इस गहरे अध्य्यन पर बरखा ने लिखा है कि जब ट्रोलर को कुछ नहीं मिलता तो वो फेक न्यूज चलाते हैं। लेकिन ऑल्टन्यूज ने इसका भांडाफोड़ किया है और बताया है कि ये क्लिप पंडितों के साथ हुए अन्याय पर एक लंबी चर्चा थी। इसलिए अब ट्रोलर जाएँ और नया झूठ तलाशें।
सोचिए जरा! इतना सब होने के बावजूद भी बरखा दत्त और उनकी लॉबी के ये लोग मानने को तैयार नहीं हैं कि उनसे कोई गलती हुई है। साल 2004 में भले ही कोई बरखा या एनडीटीवी से जवाब माँगने वाला नहीं था। लेकिन अब आतताइ चेहरों की हकीकत से सब वाकिफ हैं और ये भी जानते हैं कि इनके अपराधों को दूसरा कोण देकर लीपा-पोती करने वाले आखिर क्या चाहते हैं।
जिन कश्मीरी पंडितों के लिए बरखा अपनी 23 सेकेंड की क्लिप में ये बोलते दिख रहीं हैं कि उनकी मोनोपॉली थी। उन्हें याद करना चाहिए वो हिंदू सरपंच जिसे हाल ही में गोली मारी गई और जानना चाहिए कि आज भी वहाँ की स्थिति पूरी तरह से सुधरी नहीं है। आज भी वहाँ हिंदू भय में है।
लेकिन हाँ! अब उन्हें ये सहारा है कि जिस अनुच्छेद 370 को परिधि में रखकर पहले उन पर अत्याचार हो रहे थे। वे अब उससे मुक्त हैं और जिस भूमि को एक समय कट्टरपंथी पाकिस्तानी भूमि कहते थे वो अब पूर्ण रूप से भारत की है। आज हिंदुओं को वहाँ अपना अधिकार पता चलता है और ‘हर घर से अफजल निकलेगा’ जैसे नारे बोलने से पहले कोई भी व्यक्ति बार-बार सोचेगा।
और शायद अब देश की जनता भी तकनीक के माध्यम से और अन्य संसाधनों की वजह से इतनी सशक्त हो गई है कि बरखा जैसे लोगों की पक्षपाती रिपोर्टिंग आर्काइव समझकर सहेजने से ज्यादा उन्हें उजागर करना अपना कर्तव्य समझता है।
Every few months when trolls run out of ways to attack they pull out this fake news. @AltNews busted this foolish, repetitive lie long back. https://t.co/fNVE20LPDT. The clip is from a long show on the injustice against the Pandits https://t.co/8g6KfLmZAE. Now go, find a new lie
यहाँ बता दें कि केवल बरखा नहीं है जो अपने कुकर्मों पर मीडिया लॉबी का साथ पाकर अपनी गलती को भी जस्टिफाई करने की कोशिश कर रही। एक कॉन्ग्रेस नेता भी है। जिन्होंने पूर्व में मान रखा है कि उन्हें भारत बिलकुल नहीं पसंद और वो भारत से नफरत करते हैं।
वो भी आज कश्मीरी पंडितों के साथ हुए अत्याचार का ठीकरा कट्टरपंथियों से हटाकर भाजपा पर फोड़ रहे हैं। सलमान निजामी नाम का ये नेता अपने ट्वीट में लिख रहा है कि कश्मीरी पंडितों के साथ जो हुआ वो भारत का ध्रुविकरण करने के लिए भाजपा का प्लान था। बस समुदाय विशेष को बलि का बकरा बना दिया गया। उस समय वीपी सरकार गठबंधन में थी और आडवाणी, वाजपेयी, मुफ्ती और जगमोहन द्वारा मुख्य भूमिका में थे। यह एक कठोर सच्चाई है!
इंडिया आइडियाज समिट (India Ideas Summit) में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने भारत-अमेरिका संबंधों पर विस्तार से अपने विचार रखे। उन्होंने कहा, “हम (भारत-अमेरिका) दुनिया को आकार देने के लिए एक साथ मिलकर काम करने की क्षमता रखते हैं। भारत और अमेरिका में बड़े एजेंडे तय करने की क्षमता है।”
वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए जयशंकर ने कहा, “हम समुद्री सुरक्षा, आतंकवाद विरोधी, कनेक्टिविटी, कोरोना वायरस, जलवायु परिवर्तन पर काम कर रहे हैं। मुझे लगता है कि इसका बड़ा हिस्सा यह है कि हम कैसे द्विपक्षीय एजेंडे को मजबूत करते हुए बड़े एजेंडे को आकार देते हैं।”
We (India-US) have the ability today, by working together, to shape the world. We are working on maritime security, counter-terrorism, connectivity, #COVID19, climate change… I think large part of it is how we, while strengthening bilateral agenda, shape the larger agenda: EAM https://t.co/Ou8yXTa2o9
विदेश मंत्री ने आगे कहा, “मुझे लगता है, अमेरिका को वास्तव में अधिक बहुपक्षीय व्यवस्था के साथ अधिक बहुध्रुवीय दुनिया के साथ काम करना सीखना होगा। अमेरिका को उन गठबंधनों से परे जाना चाहिए जिनके साथ यह पिछली दो पीढ़ियों में आगे बढ़ा है।”
उन्होंने कहा, “दोनों देशों के बीच प्रतिभा के इर्द-गिर्द एक बंधन है, जो हमारी अर्थव्यवस्था, तकनीक और नवीनीकरण के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। इस वैश्विक ज्ञान की दुनिया में, हमें अधिक लचीला बनने की आवश्यकता है। अपने द्विपक्षीय एजेंडे को मजबूत करते हुए, हम एक बड़े एजेंडे को कैसे आकार देते हैं? अमेरिकी प्रशासन इस दिशा में आगे बढ़ रहा है और यह सोच रहा है कि भारत को और अधिक प्रभावी ढंग से कैसे जोड़ा जाए।”
#COVID19 stressed our intn’l institutions & tested traditional alliances,but from crisis comes clarity. For US-India partnership, it’s a time of singular opportunity, a moment for it to rise to its full potential: Nisha Biswal,Pres, US-India Business Council at India Ideas Summit pic.twitter.com/aXmgEzL7xU
वहीं, यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल की अध्यक्ष निशा बिस्वाल ने कहा कि कोरोना वायरस ने हमारी अंतरराष्ट्रीय संस्थानों को नुकसान पहुँचाया है लेकिन संकट से स्पष्टता आती है। अमेरिका-भारत साझेदारी के लिए यह एक अवसर का समय है, अपनी संपूर्ण क्षमता में वृद्धि करने का क्षण है।
I especially commend India’s recent decision to ban 59 Chinese Mobile apps including TikTok that project serious security risk for Indian people. I am happy to report that India is arising US defense and security partner in Indo Pacific and globally: Mike Pompeo, US Secy of State pic.twitter.com/namP17m3za
India has a chance to check global supply chain away from China & reduce reliance on Chinese companies in areas like telecom, medical supplies & others. India is in this position because it has earned the trust of many nations including US: Mike Pompeo, US Secretary of State https://t.co/WSep0xtw6v
अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोंपियो ने इंडिया आइडियाज समिट में कहा कि अमेरिका ने पीएम मोदी को अगले जी 7 शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया है, जहाँ हम अंतरराष्ट्रीय समृद्धि तंत्र को आगे बढ़ाएँगे। उन्होंने कहा, “हम दुनिया के सबसे पुराने और सबसे समृद्ध लोकतंत्र हैं और यह महत्वपूर्ण है कि हमारे जैसे लोकतंत्र एक साथ काम करें। भारत इंडो-पैसिफिक में अमेरिका का उभरता हुआ रक्षा साझेदार है।”
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी आज इंडिया आइडियाज समिट में मुख्य भाषण देंगे। इस कार्यक्रम में महामारी के बाद विश्व में भारत-अमेरिका सहयोग और उनके संबंधों पर चर्चा होगी। वर्चुअल समिट की मेजबानी यूएस-इंडिया बिजनेस काउंसिल द्वारा की जा रही है। इस साल काउंसिल के गठन की 45वीं वर्षगाँठ है। इस साल समिट की थीम ‘बेहतर भविष्य का निर्माण’ है।’ प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी एक बयान में इसकी जानकारी दी गई।
पूर्वी दिल्ली के शकरपुर क्षेत्र में मंगलवार को दिनदहाड़े एक बच्ची के अपहरण की कोशिश करने का मामला सामने आया है। अपहरणकर्ता अपने मंसूबे में सफल हो जाते मगर माँ ने दिलेरी दिखाते हुए बदमाशों से डट कर मुकाबला किया। अपनी 4 वर्षीय लड़की को बचाने के बाद, महिला ने बदमाशों को भी पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वे भागने में सफल रहे। यह पूरी घटना इलाके में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई।
A mother was able to save her four-year-old daughter from being kidnapped on Tuesday from the clutches of armed kidnappers in Shakarpur area of East. @DelhiPolice ?? pic.twitter.com/1XdJJb3dIU
वायरल वीडियो में आप देख सकते है कि, एक शख्स एक बच्चे को गोद में लेकर घर से बाहर निकलते हुए दिखाई दे रहा है। उसने हेलमेट पहन रखा है। वह बच्ची को एक काले रंग की बाइक पर बैठाने की कोशिश करता है। जिस पर अपहरणकर्ता का एक और साथी पहले से उसका इंतजार कर रहा होता है। जिसके बाद बच्ची की माँ दौड़ते हुए बाहर आती है और अपने बच्चे को अपहरणकर्ता के चंगुल से निकाल लेती है। छीना झपटी में बाइक पर सवार एक बदमाश गिर जाता है। वहीं दूसरा बदमाश यह सब देख भागने लगता है। शोर सुनकर आसपास के रहने वाले लोग भी इकट्ठा हो जाते है, जो फिर अपहरणकर्ताओं को पकड़ने की कोशिश करते है।
वहीं दूसरे वीडियो में देखा जा सकता है कि बदमाश जब बाइक से भाग रहे थे एक शख्स अपनी स्कूटी बीच में लगा देता हैं। जिससे रास्ता बंद हो जाता है। जब अपहरणकर्ता वहाँ से गुजरता है तो वो आदमी उसे धक्का दे देता है। जिसके चलते वह गिर जाता है। जिसके बाद अपहरणकर्ता अपनी जान बचाते हुए बाइक वहीं छोड़ कर फरार हो जाता है। जिस आदमी ने अपनी स्कूटी को सड़क के बीच में रखते हुए बदमाशों को रोकने की कोशिश की थी, वह कार्य पुलिस के लिए काफ़ी मददगार साबित हुआ। क्योंकि पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के लिए बाइक के पंजीकरण नंबर का इस्तेमाल किया।
A mother was able to save her four-year-old daughter from being kidnapped on Tuesday from the clutches of armed kidnappers in Shakarpur area of East. @DelhiPolice ?? pic.twitter.com/1XdJJb3dIU
A mother was able to save her four-year-old daughter from being kidnapped on Tuesday from the clutches of armed kidnappers in Shakarpur area of East. @DelhiPolice ?? pic.twitter.com/1XdJJb3dIU
नवभारत टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, अपहरण की पूरी साजिश बच्चे के चाचा ने रची थी। दरअसल, परिवार में पैसे से जुड़ा कुछ विवाद चल रहा था। इसलिए बच्चे के पिता के भाई ने उसे को अगवा करने की साजिश रची थी। अपनी ही भतीजी को किडनैप करने के लिए उसने दो गुंडों को हायर किया था।
बदमाशों ने पहले घर में जाकर महिला से पानी माँगा। जब वह दो गुंडों के लिए पानी लाने के लिए अंदर गई, तो उन्होंने बच्चे को पकड़ लिया और भागने की कोशिश की। माँ तेजी से गुंडों के पीछे भागी और अपने बच्चे को बदमाशों से छीन लिया और शोर मचा दिया।
इस पूरे वारदात के पीछे चाचा द्वारा की गई साजिश का पता लगने के बाद पुलिस ने बच्चे के चाचा के घर पर छापा मारा था। इसके साथ ही दिल्ली पुलिस अब दोनों अपहरणकर्ताओं की तलाश करने में जुटी है।
सुशांत सिंह राजपूत आत्महत्या मामले में मुंबई पुलिस अब तक कई लोगों से पूछताछ कर चुकी है। इस केस की जाँच के तहत हाल ही में फिल्ममेकर आदित्य चोपड़ा और संजय लीला भंसाली के बयान लिए गए थे। जिसके बाद दोनों के बयान में अंतर देखने को मिला है।
संजय लीला भंसाली ने पुलिस को बयान देते हुए कहा था कि उन्होंने 2015 में यशराज फिल्म्स से पूछा था कि क्या वह सुशांत को उनकी फिल्म ‘बाजीराव मस्तानी’ करने की इजाजत दे सकते हैं? क्योंकि उस समय सुशांत का यशराज फिल्म्स के साथ कॉन्ट्रैक्ट था।
रिपार्ट के अनुसार, संजय से तब यशराज फिल्म्स ने कहा था कि सुशांत की डेट्स अभी फ्री नहीं हैं क्योंकि वह प्रोडक्शन के साथ बिजी हैं। उस वक्त सुशांत सिंह की फिल्म ‘पानी’ की तैयारी चल रही थी। शेखर कपूर के डायरेक्शन में बनने वाली फिल्म पानी उस समय रोक दी गई थी। खबरें थीं कि शेखर कपूर और आदित्य चोपड़ा के बीच क्रिएटिव डिफ्रेंस की वजह से फिल्म अटकी हुई थी।
वहीं आदित्य चोपड़ा की बात करें तो उन्होंने मुंबई में वर्सोवा स्टेशन में दिए अपने बयान में कहा है कि उनके प्रॉडक्शन हाउस को संजय लीला भंसाली ने अप्रोच किया ही नहीं। ऐसे में दोनों हस्तियों के बयानों में अंतर देखने को मिल रहा है। आदित्य ने ये भी कहा कि YRF ने सुशांत को 2016 में ‘एमएस धोनी’ में काम करने दिया था, जिससे साबित होता है कि उनके प्रॉडक्शन हाउस ने सुशांत को कभी दूसरे फिल्ममेकर्स के साथ काम करने से नहीं रोका। हालाँकि, अभी इस बात पर मुंबई पुलिस के द्वारा किसी भी तरह की मुहर नहीं लगाई गई है।
पुलिस इन्वेस्टिगेशन के दौरान भंसाली ने यह भी बताया है कि सुशांत को तीन फिल्में ऑफर हुई थी जिनमें गोलियो की रासलीला: रामलीला, बाजीराव मस्तानी और पद्मावत और एक और फिल्म थी जो कभी बन नहीं पाई। इन सभी फिल्मों में सुशांत की जगह बाद में रणवीर सिंह ने काम किया था।
गौरतलब है कि सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या ने फ़िल्मी दुनिया के पीछे की ख़ौफनाक सच्चाई को जगजाहिर कर दिया हैं। जहाँ एक तरफ सुशांत के फैन इस सदमे से बाहर नहीं आ पा रहे हैं। वहीं सोशल मीडिया के जरिए सुशांत के फैन, बॉलीवुड सेलेब्रिटीज़ और यहाँ तक कि कई नेताओं ने सुशांत की मौत को लेकर सीबीआई जाँच की माँग कर रहे है।
बता दें, 14 जून, 2020 को बॉलीवुड अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत ने मुंबई स्थित अपने आवास पर आत्महत्या कर ली थी। इसके बाद से सुशांत की मौत को लेकर फिल्म इंडस्ट्री के लोग एक दूसरे को उनकी मौत का जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।
धार्मिक अल्पसंख्यकों के अधिकारों का हनन करने वाला चीन अब देश के ईसाई समुदाय का शोषण करने पर उतर आया है। यहाँ रहने वाले ईसाई समुदायों को ‘क्रॉस’ हटाने व घरों में जीसस क्राइस्ट की तस्वीर की जगह कम्युनिस्ट नेताओं की तस्वीर लगाने को कहा गया है। चीन पर पहले से ही उइगरों के शोषण व उनके अधिकारों के हनन का आरोप है।
डेली मेल में छपी रिपोर्ट के मुताबिक ईसाई समुदाय के लोगों को कम्युनिस्ट पार्टी की लोकल कमिटी ने कई प्रांतों में ऐसे आदेश दिए हैं। लोगों से कहा गया है कि इन धार्मिक प्रतीकों को हटाकर वे कम्युनिस्ट पार्टी के फाउंडर माओत्से तुंग और वर्तमान राष्ट्रपति शी जिनपिंग की तस्वीरें लगाएँ।
इसके अलावा बीते दिनों एक अभियान चलाकर चीन के चार राज्यों में सैकड़ों चर्चों के बाहर लगे धार्मिक प्रतीक चिन्हों को हटाया जा चुका है। इसके पीछे तर्क दिया गया था कि समानता स्थापित करने के लिए इमारतों के जरिए किसी धर्म की पहचान नहीं होनी चाहिए।
अमेरिकी न्यूज साइट रेडियो फ्री एशिया के अनुसार, चीन के अन्शुई, जियांग्सु, हेबई और झेजियांग में मौजूद चर्चों के बाहर लगे सभी धार्मिक प्रतीकों और तस्वीरों को जबरन हटवा दिया गया है।
China ‘orders Christians to destroy church crosses and takes down images of Jesus’ https://t.co/TnaGszn42a
मीडिया रिपोर्ट में हुआनान प्रांत में कम्युनिस्ट पार्टी के कार्यकर्ताओं द्वारा क्रॉस तोड़े जाने के बाद विरोध में इकट्ठे हुए लोगों का भी ज़िक्र है। जानकारी के मुताबिक शिवान क्राइस्ट चर्च के बाहर एक बड़ा क्रॉस लगा था, जिसे हटाने का आदेश आया था लेकिन लोगों ने ऐसा नहीं करने दिया। इसके बाद कुछ सरकारी अधिकारी आए और उनकी देख-रेख में ये तोड़ दिया गया।
इससे पहले 7 जुलाई को भी लोगों के विरोध के बावजूद झेजियांग के एक चर्च में भी तोड़-फोड़ की गई थी। बता दें कि जिनपिंग सरकार ने एक आदेश जारी कर देश में किसी भी तरह की धार्मिक किताबों के इस्तेमाल या उनके ट्रांसलेशन पर भी पिछले साल ही रोक लगा दी थी। आदेश न मानने वालों को सजा की धमकी भी दी गई थी।
गौरतलब है कि कैम्पेन फॉर उइगर के एडवाइज़री बोर्ड के चेयरमैन तुर्दी होजा के मुताबिक़ चीन में लाखों उइगरों को कंसंट्रेशन कैम्प में रखा जा रहा है।
उन्होंने अपने एक लेख में कहा कि चीनी सरकार ने लगभग 30 लाख उइगरों और अन्य तुर्की बोलने वाले लोगों को कंसंट्रेशन कैम्प में बंद कर रखा है। चीन सरकार उन पर झूठा आरोप लगाती है कि उन्हें मानसिक परामर्श की ज़रूरत है, इस बहाने इलाजा का दावा कर उन्हें कंसंट्रेशन कैम्प में बंद करती है, फिर उन पर अत्याचार करती है। जबकि उसमें से कई बुद्धिजीवी और कलाकार हैं।
इसके अलावा होजा ने यह भी कहा, “जब भी चीन की करतूतों का ज़िक्र होता है, दुनिया में कोई भी उसके खिलाफ बोलता हुआ नहीं नज़र आता है। यह उइगरों से बेहतर और कोई नहीं जानता है। मैं खुद साल 2017 के बाद अपने रिश्तेदारों से संपर्क नहीं कर पाया हूँ, ठीक ऐसे ही बचे हुए उइगर चीन के बाहर ही रह रहे हैं। चीन ने ऐसा तकनीकी सेटअप तैयार कर लिया है जिसकी वजह से पश्चिमी हिस्से में रहने वाले 15 लाख उइगरों का जीवन नर्क हो गया है।”
सीमा पर भारत और चीन के जवानों के बीच हिंसक झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए कर्नल संतोष बाबू की पत्नी संतोषी को तेलंगाना सरकार ने डिप्टी कलेक्टर के पद पर नियुक्ति दी है।
मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव ने बुधवार (जुलाई 22, 2020) को संतोषी को सरकारी नौकरी का नियुक्ति पत्र सौंपा। चंद्रशेखर राव ने अफसरों को निर्देश दिए हैं कि शहीद की पत्नी की नियुक्ति हैदराबाद या आसपास के इलाकों में ही की जाए।
Ms. Santoshi wife of Colonel Santosh Babu who martyred at India-China border met CM Sri KCR today. Hon’ble CM handed over the appointment letter as Deputy Collector. Later CM had lunch with the family members of Colonel Santosh Babu who came along with Santoshi. pic.twitter.com/U3Re2m8pUV
कर्नल संतोष बाबू की पत्नी संतोषी अपनी 8 साल की बेटी और 3 साल के बेटे के साथ फिलहाल दिल्ली में रहती हैं। संतोषी को ही सबसे पहले संतोष बाबू के वीरगति को प्राप्त होने का पता चला था। वहीं संतोष बाबू की माँ हैदराबाद में रहती हैं। वह चाहती थीं कि बेटे का ट्रांसफर किसी तरह हैदराबाद में ही हो जाए।
बता दें कि कर्नल बाबू के वीरगति के प्राप्त होने के बाद राज्य सरकार ने उनके परिजनों को 5 करोड़ रुपए, रहने के लिए एक प्लॉट और एक सरकारी नौकरी का वादा किया था। इस वादे को निभाते हुए सीएम राव ने कर्नल संतोष बाबू की पत्नी को यह पद दिया।
गौरतलब है कि पिछले महीने 15 जून को गलवान घाटी में चीन के अवैध कब्जे को लेकर भारत और चीन की सेनाओं में खूनी संघर्ष हुआ था। इस संघर्ष में कर्नल संतोष बाबू समेत सेना के कुल 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए थे। चीन के भी कम के कम 43 सैनिक और अधिकारी इस झड़प में मारे गए।
भारतीय सेना की तरफ से नेतृत्व कर रहे 16वीं बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू अपने माँ-बाप के इकलौती संतान थे। बेटे की मौत की घटना सुनने के बाद भी कर्नल के माँ-बाप टूटे नहीं। उन्होंने कहा था कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है।
अपने बेटे को याद करते हुए उन्होंने कहा था, “मुझे पता था कि एक दिन आएगा, जब मुझे यह सुनना पड़ सकता है, जो मैं आज सुन रहा हूँ और मैं इसके लिए मानसिक रूप से तैयार था। मरना हर किसी को है लेकिन देश के लिए मरना सम्मान की बात है और मुझे अपने बेटे पर गर्व है।”
वहीं उनकी माँ ने कहा था, “मैं खुश हूँ कि मेरे बेटे ने देश के लिए अपना जीवन दे दिया लेकिन माँ के तौर पर दुखी हूँ। मैंने अपना इकलौता बेटा खो दिया।”
पिछले दिनों रक्षा अनुसंधान और विकास संगठन (DRDO) ने कोविड-19 के इलाज के लिए बने अस्पताल के वॉर्डों का नाम बलिदान सैनिकों के नाम पर रखा। डीआरडीओ ने बताया था कि दिल्ली में नई कोविड -19 फैसिलिटी के विभिन्न वार्डों का नाम चीन के साथ हुए खूनी झड़प में लद्दाख की गलवान घाटी पर बलिदान हुए जवानों के नाम पर रखा जाएगा। जिसमें अस्पताल के आईसीयू और वेंटीलेटर वार्ड का नाम कर्नल बी संतोष बाबू के नाम पर रखा गया है।
उत्तर प्रदेश पुलिस ने ईद-उल-जुहा (बकरीद) को सकुशल संपन्न कराए जाने को लेकर जरूरी दिशा-निर्देश यानी एडवाइजरी जारी कर दी है। निर्देशों के मुताबिक, बकरीद पर मस्जिदों में सामूहिक नमाज पर रोक लगाई गई है। इसके अलावा खुले स्थानों पर कुर्बानी देने और खुले में माँस ले जाने पर भी पाबंदी लगाई गई है।
दरअसल, सावन के आखिरी सोमवार को ही बकरीद पड़ रही है। जिसको मद्देनजर रखते हुए पुलिस ने विशेष सतर्कता बरतने के निर्देश दिए हैं। सभी लोगों को अपने घरों में रहकर ही नमाज़ पढ़ने और बकरीद का त्यौहार मनाने की अपील की गई है। राज्य के डीजीपी ने एक पत्र जारी किया है। जिसमें सभी जिलों के पुलिस अधिकारियों से कहा गया है कि कुर्बानी के दौरान गोवंश की हत्या को लेकर कई बार पहले भी सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हुआ है। इसलिए इस बात का खास ध्यान रखा जाना चाहिए कि प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी न दी जाए। छोटी सी छोटी घटना का भी संज्ञान लिया जाए और जो भी विधिक कार्रवाई हो उसका पालन किया जाए।
जारी दिशानिर्देश में यह भी कहा गया, “पुलिस लाउडस्पीकर का इस्तेमाल कर लोगों को सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने के लिए जागरूक करे। सोशल मीडिया पर भी नजर बनाए रखें। भ्रामक सूचना प्रसारित करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। थानाध्यक्ष और क्षेत्राधिकारी हर घटना को गंभीरता से लें।”
इसके साथ ही यूपी के डीजीपी द्वारा जारी किए पत्र में कहा गया है कि प्रदेश में मिश्रित और संवेदनशील इलाकों की निगरानी ड्रोन कैमरे से की जाए। गोवध और गोवंश के अवैध परिवहन पर पूर्ण प्रभावी नियंत्रण के लिए जरूरी उपाय करने के लिए कहा गया है। इस बार बकरीद का त्योहार 1 अगस्त को मनाया जाएगा। यह त्योहार तीन दिन तक मनाया जाता है, ऐसे में यूपी के डीजीपी ने पुलिस अधिकारियों को सतर्क रहने के लिए कहा है।
मौलवियों से भी अपील की गई है कि वे इस एडवाइजरी के बाबत लोगों को जागरूक किया जाए। इसके साथ ही सोशल मीडिया के विभिन्न माध्यमों जैसे कि व्हाट्सएप्प, फेसबुक, इंस्टाग्राम, ट्विटर आदि पर भी निगरानी बनाए रखने के सख्त निर्देश दिए गए है। और गाइडलाइन का उल्लंघन करने वालों के लिए कार्रवाई के भी निर्देश दिए गए है।
प्रतिबंधित पशुओं की कुर्बानी को लेकर फैलाए जाने वाले अफवाहों पर भी सतर्कता बरतने के लिए कहा गया है। गाइडलाइन में यह भी कहा गया है कि संवेदनशील जगहों की सीसीटीवी से निगरानी की जाएगी। इसके अलावा संवेदनशील क्षेत्रों को चिह्नित करते हुए वहाँ सेक्टर मजिस्ट्रेट की तैनाती करने के निर्देश दिए गए है।