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वाराणसी में ‘नकली नेपाली’ का सिर मुँडवाने वाला अरुण पाठक शिवसैनिक ही है, पार्टी फैला रही फर्जी खबर

नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने नेपाल में भगवान राम का जन्म और असली अयोध्या के होने का विवादित दावा किया। इसके कुछ दिन बाद ही सोशल मीडिया पर कथित नेपाली युवक का वाराणसी में गंगा के किनारे जबरन सिर मुँडवाने और जय श्री राम का नारा लगवाने का वीडियो वायरल हुआ।

इस घटना को एक ऐसी भीड़ ने अंजाम दिया, जिसका नेतृत्व कथित रूप से अपने फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार शिवसेना से जुड़े अरुण पाठक नाम के एक व्यक्ति ने किया था। हालाँकि, बाद में ये सच सामने आ गया कि मात्र पैसों के लिए एक भारतीय व्यक्ति को लालच देकर नेपाली बनाया गया था।

भीड़ ने उस कथित नेपाली आदमी से नेपाल और वहाँ के पीएम ओली के खिलाफ नारे भी लगवाए। वीडियो वायरल होने के बाद सेक्युलर लिबरल मीडिया ने शुरुआत में इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों को दोषी ठहराया था।

अफसोस! बाद में उस नकली नेपाली व्यक्ति से यह काम करवाने वाला शख्स अरुण पाठक निकाला। वो शिवसेना का सदस्य है। वही शिवसेना, जिसकी वर्तमान में कॉन्ग्रेस और एनसीपी के गठबंधन से महाराष्ट्र में सरकार है। और लिबरलों की नजर में वह अपनी अलग छवि धारण कर चुकी है।

वाराणसी प्रशासन ने जैसे ही इस बात का खुलासा किया कि पीड़ित व्यक्ति नेपाली नहीं बल्कि एक भारतीय नागरिक था, जिसकी पहचान पुलिस ने धर्मेंद्र सिंह के रूप में की। पुलिस ने यह भी बताया कि यह पूरी घटना पहले से बनाए गए प्लान के मुताबिक की गई थी।

उस नकली नेपाली बने व्यक्ति धर्मेंद्र सिंह से शिवसेना नेता और उसके आदमियों ने 16 तारीख को मुलाकात की। जहाँ उन्होंने धर्मेंद्र को एक गलत सूचना दी कि गंगाघाट पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। उसे बताया गया कि उसे सर मुंडवाकर श्री राम के नाम का जाप करना होगा। इसके साथ ही उसे बताया गया कि इस काम के लिए उसे 1000 रुपए भी दिए जाएँगे।

मीडिया में अरुण पाठक शिवसेना नेता के रूप में खूब वायरल हुआ। हालाँकि उसके इस काम ने न सिर्फ भारत के हितों को नुकसान पहुँचा बल्कि इससे नेपाल के लोगों के खिलाफ इस तरह के व्यवहार और दुष्प्रचार के कारण शिवसेना को भी भारी शर्मिंदगी का सामना करना पड़ा।

शर्मिंदगी से उबरने के लिए उद्धव ठाकरे की अगुवाई वाले अब इस तथाकथित ‘सेक्युलर पार्टी’ ने अरुण पाठक से दूरी बना लेने की कोशिश की। जिसके लिए मीडिया के सामने यह दावा भी किया गया कि अरुण पाठक और शिवसेना का आपस में कोई संबंध नहीं है।

शिवसेना ने रविवार को एक ट्वीट में भी दावा किया कि अरुण पाठक को पार्टी विरोधी गतिविधियों के लिए आठ साल पहले ही पार्टी से बर्खास्त कर दिया गया था।

फैक्ट चेक

शिवसेना ने यह दावा किया कि अरुण पाठक शिवसेना से संबंधित नहीं हैं और उन्हें आठ साल पहले पार्टी ने बर्खास्त कर दिया था। शिवसेना का यह दावा बिल्कुल झूठ है।

सोशल मीडिया पर अरुण पाठक द्वारा पोस्ट की गई तस्वीरों से 2019 तक शिवसेना और उसके बीच संबंध स्पष्ट है। अपने वाल पर अरुण पाठक ने शिवसेना नेताओं के साथ कई तस्वीरें पोस्ट की हैं।

नीचे दिए गए तस्वीरों में अरुण पाठक को शिवसेना विधायक सुनील राउत के बगल में बैठे देखा जा सकता है। शिवसेना के पूर्व नेता बालासाहेब ठाकरे की ग्राफिटी भी पोस्ट में दिखाई दे रही है, जिसे अरुण पाठक ने महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से कुछ दिन पहले 18 अक्टूबर, 2019 को पोस्ट किया था।

अरुण पाठक द्वारा पोस्ट की गई एक दूसरी तस्वीर में, उसे एक अन्य पार्टी नेता के साथ शिवसेना पार्टी का शॉल पहने देखा जा सकता है। इस तस्वीर को 9 अक्टूबर, 2019 को पोस्ट किया गया था।

वहीं शिवसेना का पटका पहने अरुण ने एक तस्वीर 16 जुलाई, 2019 को पोस्ट की थी।

सबसे बड़ी बात, एक तस्वीर में शिवसेना नेता अरुण पाठक को शिवसेना के प्रमुख और महाराष्ट्र के सीएम उद्धव ठाकरे के साथ भी देखा गया। पोस्ट की गई इस तस्वीर में, यह साफ देखा जा सकता है कि दोनों एक-दूसरे का उल्लासपूर्वक अभिवादन कर रहे हैं। यह तस्वीर इस बात की पुष्टि करता है कि अरुण के शिवसेना से अच्छे संबंध थे। और यह बात गलत साबित होती है कि उन्हें 8 साल पहले शिवसेना से बर्खास्त कर दिया गया था।

यह तस्वीर अरुण पाठक ने 26 अप्रैल, 2019 को पोस्ट किया था।

उपरोक्त तस्वीरों से, यह स्पष्ट रूप से कहा जा सकता है कि अरुण पाठक शिवसेना का बहुत सक्रिय सदस्य है। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाली पार्टी के दावे जिसमें कहा गया कि अरुण पाठक को आठ साल पहले बर्खास्त कर दिया गया था, पूरी तरह से सिर्फ और सिर्फ वाराणसी में सिर मुँडवाने वाली घटना से बचने के लिए किया गया।

पशु अधिकारों की आड़ में क्यों हिन्दूघृणा फैला रहा PETA: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Peta India Pushing Hinduphobia issue

PETA यानी पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स। PETA ने रक्षा बंधन पर एक होर्डिंग लगाया कि गाय को भी बहन मानो और उनकी रक्षा करो। हिन्दू पहले से ही गाय को अपनी माँ मानते हैं और पूजती भी हैं। हिन्दुओं का कोई भी पर्व ऐसा नहीं है, जिसमें जानवरों को मारने की प्रेरणा दी जाती है या फिर उनके चमड़े आदि का प्रयोग किया जाता है। जबकि बाकी धर्मों में होता है।

PETA हर हिन्दू त्योहार के समय इस तरह का प्रोपेगेंडा ले आता है। हिंदुओं से घृणा करने वाली यह संस्था जानवरों की निर्ममता से हत्या को बढ़ावा भी देती है। PETA गाय पर ऊँगली सिर्फ इसलिए उठाती है, क्योंकि ये हिन्दुओं के लिए एक प्रतीक है। ये बीफ खाने वालों को कुछ नहीं कहते, क्योंकि उनसे डरते हैं। उनके ब्रांड एम्बेसडर बीफ खाने वालों का समर्थन करते हैं।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें।

अब किशनगंज बॉर्डर पर नेपाल पुलिस ने भारतीयों पर की फायरिंग, एक की हालत गंभीर

भारत-नेपाल के बीच चल रही टेंशन का असर अब भारतीय सीमावर्ती क्षेत्र के नागरिकों पर पड़ने लगा है। सीमा पर बिहार के किशनगंज में नेपाल पुलिस ने तीन भारतीय युवकों पर गोलीबारी कर दी, जिसमें एक युवक घायल हो गया है। घायल युवक की हालत बिगड़ने पर उसे पूर्णिया रेफर कर दिया गया है।

जानकारी के मुताबिक, 25 साल के जितेंद्र कुमार सिंह और उनके दो साथी अंकित कुमार सिंह और गुलशन कुमार सिंह शनिवार (जुलाई 18, 2020) की रात लगभग साढ़े सात बजे, अपने मवेशियों को ढूँढने के लिए भारत-नेपाल सीमा पर माफी टोला के पास गाँव के खेत में गए थे।

सीमा पर तैनात नेपाल पुलिस इन युवकों पर अचानक फायरिंग कर दी। जितेंद्र को कंधे में गोली लगी। ग्रामीणों ने घायल जितेंद्र को प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र टेढ़ा गाछ लाए, लेकिन स्थिति को देखते हुए डॉक्टरों ने उसे पूर्णिया रेफर कर दिया है, जहाँ उसकी हालत गंभीर बनी हुई है।

किशनगंज के SP ने बताया कि नेपाल पुलिस की तरफ से गोलीबारी में एक भारतीय गंभीर रूप से घायल हो गया है। इस मामले की जाँच की जा रही है। वहीं इस घटना के बाद से सीमा पर SSB भी अलर्ट पर है। SP कुमार आशीष ने फोन पर ANI को बताया कि नेपाल पुलिस से इस मामले पर बात की गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

एसएसबी की 12वीं बटालियन के डिप्टी कमांडेंट बिरेन्द्र चौधरी ने इस घटना की पुष्टि की है। साथ ही उनका कहना है कि हालात पर नजर रखी जा रही है और नेपाल के अधिकारियों से भी बात की जा रही है। सीमा क्षेत्र में नेपाल पुलिस की इस हरकत के बाद लोगों में काफी गुस्सा भी है और सभी नेपाल पुलिस के ऊपर कार्रवाई की माँग कर रहे हैं।

इससे पहले नेपाल पुलिस ने इसी साल 12 जून को बिहार में सीतामढ़ी स्थित लगने वाले बॉर्डर पर एक भारतीय नागरिक को गोली मार दी थी। नेपाली सैनिकों की ओर से की गई फायरिंग में उस वक्त तीन अन्य नागरिक घायल हो गए थे। उस समय नेपाली पुलिस बल की गोली से मृत विकेश यादव के शव को इंडो-बॉर्डर पर रखकर ग्रामीणों ने विरोध-प्रदर्शन किया था।

गौरतलब है कि लॉकडाउन की शुरुआत से ही भारत-नेपाल सीमा पूरी तरह से सील है। लोगों की आवाजाही पूरी तरह से बंद है। नेपाल सरकार ने भारत-नेपाल सीमा पर अतिरिक्त सुरक्षा बल की तैनाती कर रखी है। खासकर सीमा के मुख्य रास्तों के अलावा पगडंडियों पर भी सुरक्षा सख्त है। नेपाल में जहाँ नेपाली सशस्त्र बल ने कैम्प लगाकर सुरक्षा में जुटी हैं। वहीं, भारतीय सीमा में एसएसबी की मौजूदगी पहले से है और लगातार सीमा पर निगरानी की जा रही है।

कारोबार बचाने के लिए चीन से नाता तोड़ने की तैयारी में Tiktok, लंदन में बना सकती है हेडक्वार्टर

चीनी कंपनी टिकटॉक (Tiktok) को भारत समेत कई देशों में प्रतिबंध का सामना करना पड़ रहा है। इसे देखते हुए वह चीन से अपना नाता पूरी तरह से तोड़ने की तैयारी में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक टिकटॉक अपना नया हेडक्वार्टर लंदन में बना सकती है। फिलहाल इसके लिए यूके सरकार से कंपनी की बातचीत चल रही है।

इकोनॉमिक्स टाइम्स के रिपोर्ट के मुताबिक, नया हेडक्वार्टर बनाने के लिए टिकटॉक लंदन समेत अन्य शहरों के नाम पर भी विचार कर रही है। हालाँकि, अभी तक किसी भी शहर के नाम पर अंतिम फैसला नहीं हुआ है।

अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि लंदन के अलावा अन्य किन शहरों के नाम पर विचार हो रहा है। लेकिन खबर ये भी है कि टिकटॉक ने इस साल अमेरिका के कैलिफोर्निया में हायरिंग तेज की है। इसमें वाल्ट डिज्नी के पूर्व को-एक्जीक्यूटिव पाउचिंग केविन मेयर का नाम भी शामिल है। मेयर को टिकटॉक का चीफ एक्जीक्यूटिव बनाया गया है।

चीन का लगभग सभी पड़ोसी देशों से संबंध खराब होने के टिकटॉक को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है। वहीं अमेरिका को शक है कि चीन टिकटॉक पर यूजर्स का डेटा शेयर करने का दबाव बना सकता है। बता दें टिकटॉक का मालिकाना हक चीन की कंपनी बाइटडांस के पास है।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार कंपनी पिछले कई सप्ताह से अमेरिका पर फोकस कर रही है। लेकिन नया हेडक्वार्टर लंदन में बनाए जाने की भी काफी सम्भावनाएँ हैं। मीडिया सूत्र का अनुमान है कि टिकटॉक आने वाले वर्षों में चीन से बाहर लंदन समेत अन्य प्रमुख स्थानों पर भी महत्वपूर्ण साइज में वर्कफोर्स बढ़ा सकती है।

गौरतलब है कि गलवान घाटी में चीन के साथ हुए हिंसक झड़प के बाद भारत सरकार ने भारत की संप्रभुता और अखंडता, भारत की रक्षा, राज्य की सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए टिकटॉक समेत 59 चाइनीज ऐप पर भारत में प्रतिबंध लगा दिया था। सरकार ने कहा था कि ये चीनी ऐप लोगों के डेटा की गोपनीयता को ध्यान में रखते हुए सुरक्षित नहीं हैं।

भारत सरकार के एक्शन के बाद गूगल प्ले स्टोर पर अब चायनीज मोबाइल ऐप TikTok पूरी तरह से बंद कर दिया गया है। यानी, अब भारत में ना ही टिकटॉक को यूजर्स अब डाउनलोड कर सकते हैं और ना ही इसे इस्तेमाल कर पाएँगे। दरअसल भारतीय खुफिया एजेंसियों ने सरकार को 52 एप्स को लेकर अलर्ट जारी किया था और देश के नागरिकों को भी इन एप्स को इस्तेमाल करने से मना किया था।

मासिक इनकम ₹14000, स्विस बैंक में 40000000 डॉलर: 80 साल की रेणु थरानी के काले धन की कुंडली

नाम: रेणु थरानी। उम्र: 80 साल। आय: 1.70 लाख सालाना। स्विस बैंक में जमा: 4 करोड़ डॉलर।

करीब 14 हजार रुपए की मासिक आमदनी से आप पूरी जिंदगी में कितना बचा पाएँगे? रेणु थरानी ने तो इसी कमाई से करीब 2 अरब रुपए स्विस बैंक अकाउंट में जमा भी कर लिए।

असल में स्विस बैंक एचएसबीसी के खाते जब लीक हुए तो उसमें रेणु थरानी का भी नाम था। पता चला कि एक खाता 2004 में जीडब्ल्यू इन्वेस्टमेंट्स नाम से खोला गया। उसमें चार करोड़ डॉलर जमा हैं। उस समय के हिसाब यह रकम करीब 196 करोड़ रुपए थी।

रविवार को इनकम टैक्स अपीलेट ट्राइब्यूनल (आईटीएटी) की मुंबई शाखा ने इस मामले में अहम फैसला सुनाया।आईटीएटी ने रेण को संपत्ति पर टैक्स के साथ पेनाल्टी भी अदा करने का आदेश दिया है।

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक 80 वर्षीय रेणु थरानी का एचएसबीसी जेनेवा में अकाउंट है। स्विस बैंक में थरानी फैमिली ट्रस्ट के नाम के इस बैंक की एकमात्र विवेकाधीन लाभार्थी हैं। केमन आइलैंड आधारित जीडब्ल्यू इन्वेस्टमेंट के नाम पर इसे जुलाई 2004 में खोला गया था।

इस कंपनी ने व्यवस्थापक के रूप में फंड को फैमिली ट्रस्ट को ट्रांसफर कर दिया। थरानी ने 2005-06 में दाखिल आईटी रिटर्न में इसकी जानकारी नहीं दी। इस मामले को दोबारा 31 अक्टूबर 2014 को खोला गया। इस दौरान थरानी ने एक शपथपत्र देकर यह भी कहा कि उनका एचएसबीसी जेनेवा में कोई बैंक अकाउंट नहीं है ना ही वह जीडब्ल्यू इन्वेस्टमेंट बैंक में डायरेक्टर या शेयरहोल्डर थीं।

उन्होंने खुद को नॉन रेजिडेंट बताया और दावा किया कि यदि कोई राशि है भी तो उनसे टैक्स नहीं लिया जा सकता है। 2005-06 के आईटी रिटर्न में थरानी ने बताया था कि उनकी सालाना आमदनी महज 1.7 लाख रुपए है। उन्होंने इसमें बेंगलुरु का पता दिया था और अपना टैक्सपेयर स्टेटस भारतीय बताया था।

इस पर जब आईटीएटी बेंच को शक हुआ तो उसने सवाल खड़ा किया कि ऐसा कैसे हो सकता है कि वह तब एनआरआई रेजिडेंशियल स्टेटस के फर्स्ट ईयर में हों और इतने काम कम टाइम में 200 करोड़ रुपए खाते में जमा हो गए।

पीठ ने कहा कि यदि थरानी की आयकर रिटर्न को ध्यान में रखा जाए तो जितना धन उनके स्विस बैंक खाते में है उसे कमाने के लिए उन्हें 11 हजार 500 साल लगे होंगे। पीठ ने कहा कि करदाता मदर टेरेसा की तरह कोई सार्वजनिक पर्सनैलिटी नहीं हैं कि कोई भी उनके खाते में 4 मिलियन डॉलर जमा कराए। केमेन आइलैंड भी परोपकारी कामों के लिए नहीं जाना जाता, बल्कि मनी लॉन्ड्रिंग के लिए उसकी पहचान है।

ITAT पीठ ने कहा थरानी ने कन्सेंट वेवर फॉर्म पर हस्ताक्षर नहीं किए हैं, जो आयकर विभाग को सक्षम बनाता है कि वह विदेशी बैंकों से संबंधित जानकारी हासिल करे। वह विभाग की ओर से प्राप्त विवरण की सत्यता से इनकार नहीं कर सकती हैं।

5 अगस्त को 3 घंटे अयोध्या में रहेंगे PM मोदी, राम मंदिर के लिए करेंगे भूमि पूजन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 5 अगस्त को अयोध्या में श्रीराम मंदिर निर्माण के लिए भूमि पूजन में शामिल होंगे। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक प्रधानमंत्री मोदी सुबह 11 बजे अयोध्या पहुँचेंगे। बताया जा रहा है कि पीएम मोदी सुबह 11 बजे से दोपहर 1 बजकर 10 मिनट तक अयोध्या में रहेंगे। 5 अगस्त को भूमि पूजन का कार्यक्रम सुबह 8 बजे शुरू होगा।

इससे पहले अयोध्या में राम मंदिर निर्माण को लेकर रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की शनिवार (जुलाई 18, 2020) को बैठक हुई। इस बैठक में इस पर चर्चा की गई कि भूमि पूजन की तारीख क्या होगी। खबर ये भी है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को रामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से 3 अगस्त और 5 अगस्त की तारीख भेजी गई थी। जिनमें से किसी एक को PMO फाइनल करना था।

विश्व हिंदू परिषद और श्री रामजन्मभूमि तीर्थक्षेत्र न्यास के सूत्रों के मुताबिक द्वितीया सह तृतीया तिथि अपने आप में सर्वार्थ सिद्धि योग वाली है। इसलिए प्रधानमंत्री इस दिन अयोध्या आ सकते हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पहले भी न्यास के अध्यक्ष और श्री मणिराम जी की छावनी के श्रीमहंत नृत्यगोपालदास ने पत्र लिख कर श्रावणी पूर्णिमा और भाद्रपद कृष्ण पक्ष की द्वितीया की दोनों तिथियों के मंगल मुहूर्त का ब्योरा और न्योता दोनों भेजे थे।

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने जानकारी देते हुए बताया था कि आयोजन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं। उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के उत्तराधिकारी नृत्य गोपाल दास ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को आधारशिला रखने और श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन पर आमंत्रित भी किया है।

देश के प्रधानमंत्री बनने के बाद पहली बार नरेंद्र मोदी अयोध्या जाएँगे। पाँच अगस्त को पीएम मोदी करीब 3 घंटा रामनगरी अयोध्या में रहेंगे। भूमि पूजन के बाद पीएम नरेंद्र मोदी मंदिर की आधारशिला भी रखेंगे। इस दौरान वह श्रीराम मंदिर का भूमि व शिलान्यास करने के साथ ही अयोध्या में पर्यटन पर भी कार्यक्रम देखेंगे।

बीते वर्ष पाँच अगस्त को ही कश्मीर से धारा 370 हटाई गई थी। गौरतलब है कि ट्रस्ट के सदस्य चंपत राय ने जानकारी दी थी कि गुजरात के भव्य सोमनाथ मंदिर का निर्माण करने वाले सोमपुरा मार्बल ब्रिक्स को ही राम मंदिर के निर्माण के लिए जिम्मेदारी दी जाएगी। मंदिर बनाने के लिए 10 करोड़ परिवारों द्वारा दान दिया जाएगा। ट्रस्ट ने कहा है कि राम मंदिर निर्माण में वित्त की कमी नहीं होगी। मंदिर की नींव का निर्माण मिट्टी की क्षमता के आधार पर 60 मीटर नीचे किया जाएगा।

मुझे डायन, नरभक्षी और सुशांत सिंह को बलात्कारी घोषित कर दिया था: कंगना रनौत का बॉलीवुड माफिया पर वार

बॉलीवुड की मशहूर अदाकारा कंगना रनौत ने हाल ही में रिपब्लिक टीवी समाचार चैनल को एक साक्षात्कार दिया। साक्षात्कार में उन्होंने बॉलीवुड से जुड़े कई अहम पहलुओं पर अपना नज़रिया रखा।

रिपब्लिक टीवी के एडिटर इन चीफ अर्नब गोस्वामी से बात करते हुए कंगना ने सुशांत सिंह राजपूत, बॉलीवुड माफिया, भाई-भतीजावाद पर खुल कर बात की। साथ ही उन घटनाओं का भी ज़िक्र किया जब उनके सामने हालात बहुत मुश्किल थे।  

कंगना ने सुशांत सिंह राजपूत की मौत को ‘हत्या’ करार दिया। साथ ही कई दिग्गज निर्माता, निर्देशकों और फिल्म प्रोड्यूसर्स पर इसका आरोप लगाया। कंगना ने कहा इन मूवी माफियाओं समेत तमाम लोगों ने मिल कर सुशांत सिंह का करियर ख़त्म किया है।

34 वर्षीय अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत 14 जून के दिन अपने आवास पर मृत पाए गए थे। इसके बाद बहस छिड़ी थी कि फ़िल्मी दुनिया में भाई-भतीजावाद (नेपोटिज्म) के चलते उनके साथ गलत रवैया अपनाया गया। उन्हें दरकिनार किया गया जिसकी वजह से सुशांत ने ऐसा कदम उठाया।  

कंगना रनौत ने सबसे पहले मुंबई पुलिस पर सवाल किया। उन्होंने कहा, “मुंबई पुलिस ताकतवर लोगों को समन क्यों नहीं भेजती? इन लोगों को कलाकारों से ऐसे कहने का अधिकार किसने दिया कि तुम्हारा अंत नज़दीक है? अगर यह (महेश भट्ट) जानते थे कि सुशांत सिंह अच्छा महसूस नहीं कर रहे हैं तो उन्होंने सुशांत के पिता को इस बारे में क्यों नहीं बताया? रिया ने महेश भट्ट को कॉल क्यों किया? वह कौन है?” 

तय होते थे सुशांत के फैसले 

कंगना ने कहा, “मुझे समन भेजा गया था लेकिन मैंने बयान दर्ज करने के लिए किसी को मनाली भेजने के लिए कहा। इसके बाद मुंबई पुलिस की तरफ से कोई जवाब नहीं आया।”

कंगना के मुताबिक़ मुंबई पुलिस को 2 बड़े प्रोड्यूसर्स को समन भेजना चाहिए था। कारण जौहर और आदित्य चोपड़ा। कंगना ने यशराज फिल्म पर भी सुशांत सिंह राजपूत को मानसिक रूप से प्रताड़ित करने का आरोप लगाया। कंगना ने खुलासा किया कि यशराज बैनर की टैलेंट एजेंसी ने सुशांत को हायर किया था। सुशांत के लगभग सारे पेशेवर फैसले वही लेते थे। उनकी नीतियाँ इतनी भयानक थी कि एक कलाकार मन मुताबिक फैसले भी नहीं ले सकता था।  

कई बड़े मौके छीने गए सुशांत सिंह से 

कंगना के मुताबिक इस दौरान सुशांत को कई बड़े बजट की फिल्म में काम करने का मौक़ा मिला था। लेकिन यशराज बैनर से कॉन्ट्रैक्ट होने के चलते सुशांत किसी बड़े समझौते पर हस्ताक्षर नहीं कर सकते थे।

सुशांत को संजय लीला भंसाली की फिल्म में रणवीर सिंह की तरह मुख्य भूमिका निभाने का मौक़ा मिला था। लेकिन इस तरह के तमाम बड़े मौके उससे छीन लिए गए थे।

कंगना ने इस बात का दावा किया कि यशराज बैनर से समझौता होने के चलते सुशांत की तरक्की पूरी तरह थम गई थी। उसे किसी और बड़े बैनर की फिल्म में काम करने से रोक दिया जा रहा था। इसके लिए कंगना ने आदित्य चोपड़ा को भी ज़िम्मेदार ठहराया है।  

रिया-सुशांत के बीच क्या कर रहे थे महेश भट्ट

इसके साथ ही कंगना रनौत ने महेश भट्ट पर कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा, “सुशांत सिंह पर मानसिक दबाव बनाने में महेश भट्ट ने अहम भूमिका निभाई। कंगना ने कहा महेश भट्ट को बहुत बुरा लग जाता था अगर कोई उनकी फिल्म नकारता था।”

महेश भट्ट पर सवाल करते हुए कंगना ने कहा, “वह (महेश भट्ट) क्यों सुशांत की काउंसलिंग कर रहे थे? किसने उन्हें ऐसे बात करने का अधिकार दिया, तुम्हारा अंत नज़दीक है। अगर उन्हें पता था कि सुशांत सिंह अच्छा महसूस नहीं कर रहा है तो उन्होंने इस बारे में सुशांत के पिता को क्यों नहीं बताया? वह रिया और सुशांत के बीच क्या कर रहे थे? सभी जानना चाहते हैं। मुंबई पुलिस महेश भट्ट से सवाल क्यों नहीं कर रही है?” 

फ़िल्मी दुनिया में अपने संघर्ष का ज़िक्र करते हुए भी कंगना ने कई हैरान कर देने वाली बातें बताई। कंगना ने कहा, “एक समय ऐसा आया जब उन्हें आत्महत्या का विकल्प सही लगने लगा। इंडस्ट्री में उनके प्रति लोगों का जैसा रवैया था, उसकी वजह से वह ऐसा सोचने लगी थी।”

साल 2016 के घटनाक्रम का ज़िक्र करते हुए कंगना ने कहा, “साल 2016 में ब्लॉकबस्टर आने के बाद मैंने 19 ब्रांड साइन किए। फिर मेरे एक्स (पुराने साथी) ने मुझ पर मुकदमा कर दिया। ब्रांड कंपनी में एक नियम होता है, अगर हमारे खिलाफ कोई मुकदमा चल रहा है तो ब्रांड अपना करार रद्द कर देते हैं।”  

2 महीने में 18 ब्रांड्स ने रद्द किए कॉन्ट्रैक्ट 

कंगना ने कहा, “मेरे जैसी कलाकार जिसे सिर्फ अभिनय की वजह से 3 राष्ट्रीय पुरस्कार मिले, पद्मश्री मिला। न मैं कभी करण जौहर के अच्छे कलाकारों की सूची का हिस्सा बन पाई और न कभी सुशांत बन पाया। महज़ 2 महीने के भीतर 18 ब्रांड्स ने मेरे साथ कॉन्ट्रैक्ट ख़त्म कर दिया था। मेरे पास विकल्प ही कहाँ बचे थे? शायद मेरे दिमाग में आत्महत्या का ख़याल नहीं आया होगा, पर अपना सिर मुॅंड़वा कर गायब हो जाने का ख़याल ज़रूर आया था। मुझे बॉलीवुड के लोग नरभक्षी और ‘डायन’ तक कहते थे।”

छोटे शहर वाले इज्ज़त देखते हैं, पैसे नहीं 

कंगना ने कहा, “मेरे रिश्तेदार मुझे अपने बच्चों से नहीं मिलने देते थे, क्योंकि मुझे nymphomaniac (असंतुलित हारमोंस) बना दिया गया था। मुझे सार्वजनिक स्थानों पर कई चीज़ें कही जाती थीं। ऐसे में मेरे सामने शादी और बच्चों का विकल्प ही नहीं रह गया था।”

उन्होंने कहा, “इनलोगों ने सुशांत सिंह को एक बलात्कारी में तब्दील कर दिया था। वह कैसे अपने घर बिहार वापस जाता? छोटे शहरों में पैसे नहीं देखे जाते, सम्मान देखा जाता है।”

इसके बाद कंगना ने बताया कि उन्हें सलमान खान की फिल्म ‘सुल्तान’ ठुकराने पर आदित्य चोपड़ा ने धमकी दी थी। कंगना ने कहा, “मैंने जैसे ही सलमान खान की सुल्तान के लिए ना कहा, आदित्य ने कहा इसके बाद वह कभी मेरे साथ काम नहीं करेंगे।”

अंत में कंगना ने कहा, “फिल्म के निर्देशक मेरे घर पर आए, उन्होंने पूरी कहानी सुनाई। मेरी आदित्य चोपड़ा के साथ मीटिंग थी, जिससे मैं उनसे मिल कर माफ़ी माँग सकूँ। लेकिन कुछ ही देर में ख़बर आई कि कंगना ने सुल्तान के लिए ना कहा। इसके बाद उनका मैसेज आया, तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे ना कहने की? अब तुम ख़त्म हो।”   

BJP नेता की नाबालिग बहन की रेप के बाद हत्या का आरोप, बंगाल पुलिस ने कहा यौन उत्पीड़न का कोई निशान नहीं

अपडेट: पश्चिम बंगाल में उत्तरी दिनाजपुर में 15 वर्षीय नाबालिग लड़की के साथ रेप और हत्या का मामला गर्माने के बाद राज्य पुलिस ने उसके पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बारे में बताया है। इंडिया टुडे की रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का कहना है कि लड़की के पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में कहीं भी यौन उत्पीड़न की कोशिश या चोट का जिक्र नहीं है। बच्ची की मौत अधिक मात्रा में जहर पीने की वजह से हुई है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में लड़की के शरीर पर कहीं भी खरोच के निशान नहीं हैं।

इसके अलावा मीडिया में ये भी बताया जा रहा है कि जिस फिरोज नाम के युवक को अभी तक पुलिस आरोपित समझकर ढूँढ रही थी, उसकी लाश भी सोनारपुर इलाके में एक तालाब से मिली है। लोगों का कहना है कि यही वो फिरोज है, जिस पर रेप के आरोप हैं। हालाँकि परिजनों से लाश की शिनाख्त कराने की कोशिश अभी जारी है।

पश्चिम बंगाल में एक बीजेपी नेता की 16 वर्षीय बहन को अगवा कर रेप करने और हत्या का मामला सामने आया है। घटना उत्तर दिनाजपुर के चोपरागज की है। आरोपित फिरोज अली सत्ताधारी तृणमूल कॉन्ग्रेस (TMC) से जुड़ा बताया जा रहा है।

उत्तर दिनाजपुर में भाजपा के बूथ अध्यक्ष की बहन को उसके घर से कथित रूप से अगवा किया गया। रविवार (जुलाई 19, 2020) सुबह उसकी अस्पताल में मौत हो गई।

इस घटना के विरोध में, भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों ने उत्तर दिनाजपुर के चोपरागज के कालागढ़ में राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 31 पर टायर जलाकर सड़क को अवरुद्ध कर दिया।

मामले में बीजेपी बंगाल ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा, “चोपरा में 16 वर्षीय एक लड़की का फिरोज अली नाम के एक शख्स ने रेप किया। उसकी आज सुबह मौत हो गई। क्या उसने स्थानीय भाजपा बूथ अध्यक्ष की बहन होने की कीमत चुकाई? और दुख की बात है कि एक महिला मुख्यमंत्री द्वारा शासित राज्य लड़कियों की सुरक्षा नहीं कर सकता।”

पीड़िता के परिजनों के मुताबिक भाजपा बूथ अध्यक्ष की बहन रविवार सुबह अपने घर के बगल में शौच के लिए गई थी। उसी समय उपद्रवियों ने कथित तौर पर उसका अपहरण कर लिया।

इसके बाद पीड़िता को सोनारपुर ग्राम पंचायत में चोपरा के पास एक खाली जगह पर ले जाया गया और वहाँ उसके साथ बलात्कार किया गया। फिर बदमाश लड़की को वहीं छोड़कर फरार हो गए। बाद में आरोपितों पर पीड़िता को जहर देकर मारने का प्रयास करने का भी आरोप लगाया गया।

जानकारी के मुताबिक जब लड़की की तलाश की गई तो वो बेहोशी की अवस्था में मिली। उसे तुरंत स्थानीय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जब वहाँ पर उसकी हालत में सुधार नहीं आया तो फिर उसे इस्लामपुर सब-डिविजनल अस्पताल ले जाया गया। हालाँकि वहाँ पर इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई।

उत्तर दिनाजपुर जिला भाजपा ने इस घटना के लिए तृणमूल कॉन्ग्रेस को जिम्मेदार ठहराया है। उत्तर दिनाजपुर जिले के भाजपा महासचिव सुरजीत सेन ने कहा, “तृणमूल ने ऐसा किया है।” भाजपा कार्यकर्ताओं ने आरोपियों की गिरफ्तारी की माँग को लेकर राष्ट्रीय राजमार्ग 31 पर टायर में आग लगा दी। बाद में भारी पुलिस बल गया और स्थिति को नियंत्रण में लाया।

पुलिस ने मौके से एक पर्स, आधार कार्ड, मोबाइल फोन बरामद किया है। घटनास्थल से कुछ दूरी पर एक साइकिल भी मिली। इस संबंध में इस्लामपुर के पुलिस अधीक्षक सचिन मक्कड़ ने कहा, ”मैं जाँच कर रहा हूँ। दोषियों की तलाश जारी है।”

छलिया कॉन्ग्रेस: सोनिया गाँधी के नेतृत्व में पार्टी नेता की विधवा और बेटी को दिखाया नीचा, बेटे के पीछे दौड़ा दी एजेंसियाँ

सचिन पायलट और ज्योतिरादित्य सिंधिया तो नए उदाहरण हैं। कॉन्ग्रेस में ओल्ड गार्ड की मदद से शीर्ष परिवार युवा नेतृत्व को कुचलने के जतन हमेशा से करता रहा है। ताकि ‘युवराज’ के लिए पार्टी के भीतर कोई चुनौती नहीं पैदा हो।

यह कहानी जगन मोहन रेड्डी की है। आंध्र प्रदेश के मौजूदा मुख्यमंत्री जगन और उनका पूरा परिवार एक वक्त कॉन्ग्रेस नेतृत्व के निशाने पर था। उन पर यह कहर तब टूटा जब एक दुर्घटना में उनके पिता वाई एस राजशेखर रेड्डी की मौत हो गई। राजशेखर उस वक्त अविभाजित आंध्र प्रदेश के सीएम थे और प्रदेश में कॉन्ग्रेस की वापसी का श्रेय उनको ही जाता है।

लेकिन, उनकी मौत के बाद कॉन्ग्रेस के नेतृत्व ने उनका मान नहीं रखा। उनकी पत्नी और बेटी तक को नीचा दिखाया गया। आखिरकार जगन को वो पार्टी छोड़नी पड़ी जो उनके पिता ने सींचा था। इस तरह कॉन्ग्रेस ने युवराज की राह का कॉंटा तो खत्म कर दिया, पर आंध्र में अपनी ही कब्र खोद ली।

साल था 2010। उस समय केंद्र में कॉन्ग्रेस के नेतृत्व में यूपीए की सरकार थी। सरकार और संगठन की सर्वेसर्वा सोनिया थीं। एक दिन दो महिलाएँ उनसे मिलने पहुँचती हैं। पहले तो उन्हें 15 मिनट इंतजार कराया गया, फिर ड्राइंग रूम में रूखे-सूखे चेहरे के साथ सोनिया ने उनसे मुलाक़ात की।

इस मुलाकात में और क्या-क्या हुआ वह जानने से पहले जगन की ‘ओडारपु यात्रा’ पर लौटते हैं। यह जानने की कोशिश करते हैं आखिर 37 साल के एक नेता को कॉन्ग्रेस क्यों घर में कैद रखना चाहती थी? कॉन्ग्रेस क्यों चाहती थी कि यह युवा नेता अपने घर से निकले ही ना?

‘ओडारपु यात्रा’ को जगन मोहन रेड्डी ने अपने पिता और आंध्र प्रदेश के लोकप्रिय मुख्यमंत्री रहे राजशेखर रेड्डी को सच्ची श्रद्धांजलि बता कर पेश किया था। सितम्बर 2, 2009 को सीएम राजशेखर रेड्डी की एक हेलीकॉप्टर दुर्घटना में मौत हो गई थी। मौसम खराब था। हेलीकॉप्टर एक पेड़ से टकराया और गिर कर ब्लास्ट हो गया। इसके 1 दिन बाद 60 वर्षीय रेड्डी सहित 4 अन्य की जली हुई लाशें मिलीं।

राजशेखर रेड्डी कॉन्ग्रेस के वो नेता थे, जिन्होंने अपने बलबूते आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस का झंडा गाड़ा था। उनकी मौत के बाद केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक तक को कैंसल कर दिया गया था। उस उस समय तो कॉन्ग्रेस ने उनके परिवार के प्रति बहुत सहानुभूति दिखाई, लेकिन पार्टी ने मन बना लिया था कि अब आंध्र में सोनिया गाँधी के किसी वफादार को ही पद दिया जाएगा। के रोसैया और फिर किरण रेड्डी को मुख्यमंत्री बनाया गया।

लेकिन, यहाँ सबसे ज्यादा गौर करने वाली बात ये है कि राजशेखर रेड्डी की मौत के बाद आंध्र प्रदेश में कई लोगों ने आत्महत्या कर ली थी। वो इतने लोकप्रिय थे कि ये लोग अपने प्रिय नेता की मौत को बर्दाश्त नहीं कर पाए। मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो 100 से भी अधिक लोगों ने रेड्डी की मौत के बाद खुद की जान ले ली थी। ‘हिंदुस्तान टाइम्स’ ने तब 122 का आँकड़ा दिया था। उनके बेटे जगन रेड्डी ने तुरंत बयान जारी कर शांति की अपील की थी।

आंध्र प्रदेश के लोगों में राजशेखर रेड्डी की अलग पहचान थी, कॉन्ग्रेस चाहती तो उस समय उनसे अपने जुड़ाव को भुना कर लोकप्रिय बन सकती थी लेकिन उसने ऐसा कुछ नहीं किया। जगन रेड्डी ने तब अपने बयान में कहा था कि उनके पिता राजशेखर रेड्डी कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी मुस्कुराया करते थे और इन आत्महत्याओं से उन्हें दुःख ही होगा, इसीलिए लोग ऐसा न करें। उन्होंने जनता से कहा कि इससे उन्हें शांति नहीं मिलेगी।

आंध्र प्रदेश के हर टीवी चैनल पर उनका बयान चला। लोग उन्हें लगभग अगला मुख्यमंत्री मान चुके थे। हर एक आत्महत्या की कहानी दर्दनाक थी। जहाँ एक युवक ने सुसाइड नोट में लिखा था कि रेड्डी ने जनता के लिए अपना जीवन दिया और मैं उनके लिए अपना जीवन दे रहा। एक विकलांग व्यक्ति को सरकारी योजना के तहत पेंशन मिल रहा था, उसने आत्महत्या कर ली। एक व्यक्ति का ये खबर सुन कर ही हार्ट अटैक हो गया।

जगन मोहन रेड्डी ने उन सभी लोगों की जानकारियाँ जुटाई, जिन्होंने उनकी पिता की मौत के बाद अपनी जान दे दी थी। उन्होंने एक ‘यात्रा’ के जरिए इन सभी लोगों के परिवारों से मिलने की योजना बनाई। नीतीश कुमार हों या लालकृष्ण आडवाणी, भारत की राजनीति में समय-समय पर नेताओं ने ऐतिहासिक यात्राओं के जरिए राजनीति का रुख ही बदल दिया है। कुछ ऐसा ही जगन रेड्डी की ‘ओडारपु यात्रा’ से हुआ।

उनके इस फैसले ने कॉन्ग्रेस को नाराज कर दिया। आलाकमान उनकी बढ़ती लोकप्रियता से नाराज था। सोनिया गाँधी और उनके सिपहसालारों में असुरक्षा की भावना घर कर गई। कॉन्ग्रेस ने अपने नेताओं को उनकी यात्रा में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया, फिर भी जगन रेड्डी की यात्राओं में कॉन्ग्रेस के विधायकों सहित कई नेताओं ने शिरकत की। उन्हें अभूतपूर्व समर्थन मिलता चला गया। कॉन्ग्रेस हाइकमान की नाराजगी धरी रह गई।

अब वापस आते हैं सोनिया गाँधी की उन महिलाओं के साथ मुलाकात पर, जहाँ से ये कहानी हमने शुरू की थी। इसका वर्णन सीएनएन-न्यूज़ 18 के वरिष्ठ एडिटर डीपी सतीश ने विस्तृत रूप से किया है। दोनों महिलाओं में से एक दिवंगत राजशेखर रेड्डी की पत्नी विजयलक्ष्मी थीं, जिन्हें राज्य के लोग प्यार से विजयम्मा कहते थे। दूसरी उनकी बेटी शर्मिला रेड्डी थी। दोनों हैदराबाद से नई दिल्ली सोनिया से मिलने पहुँची थी। 10, जनपथ में हुए इस तनावपूर्ण मुलाकात के दौरान इन दोनों को उम्मीद थी कि राजीव गाँधी के साथ उनके पति के मधुर संबंधों को देखते हुए सोनिया उनका खुले दिल से स्वागत करेंगी।

सोनिया गाँधी ने राजशेखर रेड्डी या उनकी मौत को लेकर सहानुभूति जताना या उनकी यादों की बात करना तो दूर, उन्होंने सीधा ‘मुद्दे की बात’ शुरू कर दी। वो मुद्दे की बात थी- जगन मोहन रेड्डी जितनी जल्दी हो सके अपनी ‘ओडारपु यात्रा’ को बंद करें। जब ये बैठक हुई थी, तब ये यात्रा अपने मध्य में थी। जब विजयलक्ष्मी ने इस यात्रा के पीछे की सोच को समझाना शुरू किया तो सोनिया गाँधी गुस्सा हो गईं।

तमतमाई सोनिया कुर्सी से उठ खड़ी हुई और उन्हें चुप रहने को कहा। इसके बाद वो चली गईं। रेड्डी परिवार की दोनों महिलाओं को इस अपमान के बाद हैदराबाद लौटना पड़ा। बाद में विधायक विजयम्मा और उनके सांसद बेटे जगन ने अपने पदों से इस्तीफा देकर ‘वाइएसआर कॉन्ग्रेस’ का गठन किया और अपनी-अपनी सीटों से दोबारा चुने गए। कहते हैं, इसी अपमान के बाद जगन ने बदले की कसम खा ली थी।

जगन रेड्डी ने तभी आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस को खत्म करने की शपथ ले ली थी, ऐसा उनके कारीबियों का कहना है। परिवार के अपमान की आग में जल रहे जगन को अपने पिता की मौत के बाद मुख्यमंत्री बनाए जाने की उम्मीद थी लेकिन सोनिया के करीबियों ने उनकी राह रोक दी। उसने एक ऐसे नेता को सीएम बना दिया जिसका कोई जनाधार ही नहीं था।

आखिर क्या कारण था कि जगन अपने पिता की विरासत को संभालना चाहते थे? दरअसल, जगन को अपने पिता की लोकप्रियता और जनता के बीच उनके मान-सम्मान को लेकर अंदाज था। उन्हें पता था कि आंध्र में कॉन्ग्रेस की कमान किसने थाम कर रखी है। राजशेखर की मौत के बाद हुई आत्महत्याओं ने उन्हें बता दिया था कि उनके पिता कितने बड़े जननेता थे। ऐसे में उन्हें आलाकमान द्वारा नजरंदाज किया जानया रास नहीं आया।

हालाँकि, जगन रेड्डी को अगले चुनावों में सत्ता तो नहीं मिली लेकिन उनका अभियान भविष्य के लिए था, उनकी सोच दूरदर्शी थी। कॉन्ग्रेस ने ऐसी गलती कर दी कि उसका फायदा सबसे पहले चंद्रबाबू नायडू और फिर जगन ने उठाया। वनवास में चल रहे नायडू प्रकट हुए और अपने बने-बनाए संगठन के जारी कॉन्ग्रेस के नकारे नेतृत्व के खिलाफ अभियान शुरू किया। पार्टी ने आंध्र विभाजन कर के पहले ही सब गुड़-गोबर कर रखा था।

प्रदेश को बाँटने के लिए रेड्डी परिवार तो दूर, पार्टी ने आंध्र में अपने संगठन तक से विचार-विमर्श नहीं किया था। लेकिन, जगन रेड्डी के पीछे पड़ी कॉन्ग्रेस ने इससे भी बड़ी गलती कर दी। मई 2012 में एक बेनामी संपत्ति मामले में जूडिशल रिमान्ड पर जेल भेज दिया गया। उनकी माँ ने सीधा सोनिया को इसके लिए जिम्मेदार बताया। सीबीआई को मामले की जाँच दी गई। ये सब कुछ 18 सीटों पर होने वाले उपचुनाव के लिए किया गया।

कॉन्ग्रेस ने मेगास्टार चिरंजीवी को केन्द्रीय मंत्रिमंडल में शामिल कर डैमेज कंट्रोल की कोशिश की लेकिन वो भी पार्टी को बचा नहीं पाए। जगन अपने पिता के राजनीति के दिनों मे उद्योगपति रहे थे और सीमेंट से लेकर मीडिया इंडस्ट्री तक मे सफलता के झण्डे गाड़े थे, ऐसे में उनके खिलाफ संपत्ति और अवैध लेन-देन के मामले बनाना कोई बहुत बड़ी बात नहीं थी। कम से कम उनके समर्थकों का तो यही आरोप था।

विजयम्मा ने स्पष्ट कहा था कि उपचुनाव से उनके बेटे को दूर रखने के लिए कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने ये सारा ड्रामा रचा था। लगभग डेढ़ साल तक उन्हें हैदराबाद के जेल में कैद रखा गया। लेकिन, रेड्डी परिवार की महिलाएँ किसी और मिट्टी की बनी थीं। उनकी माँ और बेटी ने सोनिया के हाथों हुए अपमान को याद रखते हुए न सिर्फ़ राजनीति में वाइएसआर को जिंदा रखा, बल्कि जगन के उद्योगों को भी सफलतापूर्वक चलाया।

चंद्रबाबू नायडू ने जैसे ही 2019 लोकसभा चुनावों में राष्ट्रीय राजनीति में दिलचस्पी लेनी शुरू की, जगन ने पूरा ध्यान घर में लगाया। आज स्थिति ये है कि कॉन्ग्रेस के पास राज्य में एक अदद विधानसभा सीट तक नहीं है। लोकसभा चुनाव के साथ आंध्र में हुए विधानसभा चुनावों में जगन ने 86% सीटें जीत कर अपना सीएम बनने का सपना या मिशन पूरा किया। लोकसभा में भी उनके 22 सांसद जीते। राज्यसभा में उनके पास 6 सांसद हैं।

70 साल के नायडू की ढलती उम्र और आंध्र प्रदेश में कॉन्ग्रेस के खात्मे के बाद लगता नहीं कि जगन रेड्डी इतनी जल्दी जाएँगे। वो लम्बी पारी खेलने आए हैं। अन्य विपक्षी नेताओं की तरह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनके रिश्ते तल्ख़ भी नहीं हैं। जगन रेड्डी, ज्योतिरादित्य सिंधिया और सचिन पायलट तो इस दशक के उदाहरण हैं, पीछे जाएँ तो हम पाएँगे कि कॉन्ग्रेस हमेशा युवा नेताओं से भयभीत रही है। हालाँकि, इसका खामियाजा अंततः उसे भी भुगतना पड़ा है।

इंटरनेट की तरह हर दिन खत्म करना होगा 100 ग्राम सैनिटाइजर (खुद की बोतल से): WHO ने जारी की चेतावनी

विश्व में जारी कोरोना वायरस महामारी के बीच WHO ने नई चेतावनी जारी की है। WHO ने सुओ मोटो संज्ञान लेते हुए सख्त चेतावनी जारी की है कि अब लोगों को अपने दैनिक डेढ़ GB इंटरनेट की तर्ज पर ही अपना 100 ग्राम हैंड-सैनिटाइजर और हैंड वॉश भी रोजाना खर्च करना आवश्यक होगा।

WHO ने यह सख्त निर्देश दिल्ली बेस्ड अनपेड ट्रोल हार्ट हैकर आशुतोष सिंह की हरकतों को देखकर दिए हैं। दरअसल, हार्ट हैकर आशुतोष सिंह, जो कि पेशे से अनपेड ट्रोल हैं, ने कोरोना वायरस के दौरान एक भी दिन अपने बैग में रखे हैंड-सैनिटाइजर का इस्तेमाल नहीं किया।

लेकिन आशुतोष सिंह जब भी किसी सार्वजनिक स्थान पर अपना मोबाइल चार्ज करने को जाते हैं तो वो वहाँ पर लगे सरकारी सैनिटाइजर का भरपूर उपयोग कर लेते हैं। प्रत्यक्षदर्शियों ने हार्ट हैकर आशुतोष को कुछ हैंड सैनिटाइजर खुद पर छिड़कते हुए और दो घूँट पीते हुए भी देखा।

यह सिलसिला मार्च के माह में शुरू हुए देशव्यापी बंद के बाद से लेकर अब तक लगभग हर रोज ही दोहराया गया। आशुतोष सिंह की यह हरकत CCTV कैमरे में भी कैद हो चुकी है।

इस बारे में एक दिन आशुतोष के ही मित्र हैंडसम धनेश सिसोदिया ने नाराजगी भी व्यक्त की। हैंडसम सिसोदिया ने कहा कि आशुतोष सिंह ने अपना हैंड सैनिटाइजर भी खरीदा था लेकिन उस 100 ग्राम की बोतल में जितना हैंड सैनिटाइजर मार्च के माह था, जुलाई के आखिर तक भी उतना ही बचा हुआ है। हैंडसम सिसोदिया ने इस पर कड़ी आपत्ति दर्ज करते हुए एक दिन कहा – “हम क्या यहाँ पागल बैठे हैं?”

हार्ट हैकर आशुतोष सिंह के इस कारनामे के सामने आने के बाद स्वरा घासकर और कुणाल सेहरा ने ट्विटर पर इसे लेकर ऑनलाइन कैम्पेन भी चलाया। इस मुहिम से जुड़े और युवाओं ने बताया कि यह समस्या सिर्फ दिल्ली बेस्ड हार्ट हैकर आशुतोष की ही नहीं बल्कि देश के और भी कई हिस्सों में लोगों के साथ देखी गई है।

लोगों ने कहा कि जो लोग पहले अपने दोस्त से फ्री वाई-फ़ाई माँगा करते थे, वही लोग अब दोस्ती का वास्ता देकर हैंड सैनिटाइजर माँगने लगे हैं। इस पर WHO ने नई गाइडलाइंस जारी करते हुए कहा – “अबे (अपशब्द) कुछ तो शर्म करो। अगर तुम्हारे 5 महीने पुराने 100 ग्राम सैनिटाइजर से पहले कोरोना की महामारी खत्म हो गई तो दुनिया को क्या मुँह दिखाओगे?”

अब WHO इस निष्कर्ष पर पहुँचा है कि यदि जनसाधारण के बीच तालमेल रखना चाहते हैं तो हर व्यक्ति को रोजाना अपना 100 ग्राम सैनिटाइजर किसी भी सूरत में खत्म करना ही होगा।

हालाँकि, WHO के इस फैसले के विरोध में एक जनहित याचिका यह कहते हुए डाल दी गई है कि जो लोग अल्कोहल यानी, मदिरा को ही सैनिटाइजर मानकर इस्तेमाल कर रहे थे, वो रोजाना 100 ग्राम से अधिक खर्च कर सकते हैं या नहीं?

इस पर अभी WHO के आधिकारिक बयान का इंतजार है।