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जिस ‘नेपाली’ का सिर मूँड़ा लिखा ‘जय श्री राम’, वो निकला भारतीय: ₹1000 के लिए कराया वीडियो शूट, 6 गिरफ्तार

वाराणसी में जिस व्यक्ति का जबरन सिर मूँड़ कर उस पर ‘जय श्री राम’ लिख दिया गया था, वो भारतीय निकला है। इससे पहले ख़बर आई थी कि वो व्यक्ति नेपाली था, जिसका सिर मूँड़ कर उससे नेपाल के प्रधानमंत्री ओली के खिलाफ नारे लगवाए गए और उसे गंजे सिर पर ‘जय श्री राम’ लिख दिया गया। वाराणसी पुलिस ने खुद इस बात की सूचना दी है कि उक्त व्यक्ति 1000 रुपए लेकर भाड़े का नेपाली बना था।

शनिवार (जुलाई 18, 2020) को एसएसपी अमित पाठक ने खुलासा किया कि वीडियो में नेपाली बता कर पेश किया जा रहा व्यक्ति मूल रूप से भारतीय है। उसका नाम धर्मेंद्र भारतीय है। पुलिस ने बताया है कि साड़ी की दुकान में काम करने वाले धर्मेंद्र की आर्थिक तंगी का फायदा उठाते हुए कुछ लोगों ने उसे लालच दिया और वीडियो शूट करवाने के लिए ये सब ड्रामा रचा। विश्व हिंदू सेना के संस्थापक और मुख्य आरोपित अरुण पाठक ने ये सब किया।

वाराणसी पुलिस ने बताया है कि इस मामले में अब तक 6 लोगों की गिरफ़्तारी हो चुकी है। इससे पहले खुलासा हुआ था कि पाठक ने अपने फेसबुक प्रोफाइल के बॉयो में लिखा है, “बाला साहेब का शिष्य एवं एक सनातन।” इसके अलावा अन्य जानकारियों में भी इस बात का उल्लेख है कि वो साल 2000 से 2003 तक शिवसेना का जिलाध्यक्ष रह चुका है। उसकी फेसबुक पर अपलोड तस्वीर देखने पर भी मालूम चलता है कि शिवसेना के बड़े नेताओं के साथ भी उसका उठना-बैठना रहा है।

उसकी टाइमलाइन पर कई पोस्टर भी हैं। इनमें बाला साहेब की तस्वीर साफ देखी जा सकती है। यहाँ बता दें शिवसैनिक अरुण पाठक ने पीएम ओली की टिप्पणी के बाद उनकी निंदा के लिए विश्व हिंदू सेना के बैनर तले गंगा किनारे घाटों और मंदिरों पर पोस्टर लगवाए थे। इनके माध्यम से उसने ओली को चीन के इशारों पर चलना बंद करने की चेतावनी भी दी थी। उसने ही इस हरकत की साजिश रची थी।

इसके बाद अपनी इस हरकत को जायज भी ठहरा रहा था। उसने कहा कि उसके कार्यकर्ताओं ने एकदम सही कदम उठाया। उसने दावा किया था कि नेपाली प्रधानमंत्री लगातार भारत के प्रति अपना जहर उगल रहे हैं, लेकिन जब बात हमारे भगवान श्रीराम की होगी, तो यह बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उसने वाराणसी नेपाली नागरिकों को धमकाया भी था। इस घटना की चहुँओर निंदा हुई थी।’

ज्ञात हो कि नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने 13 जुलाई को कहा था कि श्री राम नेेपाली थे और भारत ने सांस्कृतिक अतिक्रमण करने के लिए वहाँ फर्जी अयोध्या का निर्माण कराया। इसके साथ ही पीएम केपी शर्मा ओली ने यह भी कहा था, ”हालाँकि वास्तविक अयोध्या बीरगंज के पश्चिम में थोरी में स्थित है, भारत अपने यहाँ भगवान राम का जन्मस्थल होने का दावा करता है।” वहीं अब अजीबोगरीब दावे के बाद खुद को बुरी तरह घिरता देख ओली ने विदेश मंत्रालय के जरिए सफाई पेश करवाई थी।

1 साल, 6 बैंक खाते, ₹75 करोड़ का लेनदेन, IPL में की सट्टेबाजी: विकास दुबे ने 80 अपराधियों के साथ बोला था पुलिस पर हमला

जाँच में खुलासा हुआ है कि विकास दुबे के पास अथाह रुपए थे और उसने काफी संपत्ति अर्जित की थी। पिछले 1 साल में उसके 6 बैंक खातों से 75 करोड़ रुपए का लेनदेन हुआ था। ये सारा लेनदेन उसके करीबी जय वाजपेयी के साथ हुए थे। साथ ही उसने 5 करोड़ रुपए आईपीएल में सट्टेबाजी में भी लगाए थे। एसटीएफ की जाँच में पता चला है कि जय वाजपेयी ही विकास के सारे सट्टेबाजी के कामों को देखता था।

जय वाजपेयी को ये काम दिया गया था कि वो विकास दुबे द्वारा दी गई रकम को सट्टेबाजी में लगाए। ऑनलाइन सट्टेबाजी के इस गिरोह में कई विदेशियों की भी संलिप्तता का पता चला है। बता दें कि विकास दुबे एनकाउंटर मामले की जाँच के लिए एसआईटी गठित कर दी गई है, जिसे लखनऊ में दफ्तर भी दिया गया है। वहाँ तमाम सम्बंधित लोगों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। वहीं ED ने भी रुपए की हेराफेरी मामले में जाँच शुरू की है।

ईडी द्वारा जय के ब्रह्मनगर में 6 मकान, आर्यनगर में 2 मकान और पनकी में 1 मकान की खरीद-फरोख्त का विवरण जुटाया जा रहा है। साथ ही इस मामले के सम्बन्ध में लोगों की सहूलियत के लिए एक ईमेल ([email protected]) और एक फोन नंबर (0522-2214540) जारी किया गया है, जहाँ कोई भी व्यक्ति इस केस के जुड़ी जानकारियाँ साझा कर सकता है।

साथ ही इस मामले में अधिकारियों की मिलीभगत की भी जाँच की जा रही है और इस सम्बन्ध में भी पुलिस को सूचना दी जा सकती है। वहीं यूपी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में भी इस मामले में अपना पक्ष रखते हुए बताया कि ये तेलंगाना के साइबराबाद एनकाउंटर से बिलकुल अलग है। सरकार ने कहा कि इस दुर्घटना के बारे में पुलिस के पास तमाम साक्ष्य सामग्रियाँ मौजूद हैं। योगी सरकार ने कहा कि तेलंगाना के उलट यहाँ जाँच आयोग का भी गठन किया गया।

ये भी बताया गया है कि विकास दुबे ने अपनी छत पर 80 के आसपास अपराधियों को तैनात कर रखा था। इस दावे का भी खंडन किया गया कि उसने उज्जैन में आत्मसमर्पण किया था। उसे गिरफ्तार किया गया था। उसने 3 जुलाई की रात पुलिसकर्मियों का क़त्ल करने के बाद भागने के लिए 3 किलोमीटर की दौड़ लगाई थी। उसे पुलिस के आने की खबर पहले ही मिल चुकी थी, जिसके बाद उसने गुर्गों के साथ हिंसा की साजिश रची।

राम मंदिर निर्माण के लिए 5 अगस्त को होगा भूमि पूजन: PM मोदी के शामिल होने की अटकलें, आज की बैठक में होंगे कई अहम फैसले

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण बहुत जल्द ही शुरू हो सकता है। अभी तक सामने आई ख़बरों और मीडिया सूत्रों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि 5 अगस्त को भूमि पूजन हो सकता है। ख़बरों की मानें तो इस आयोजन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी शामिल हो सकते हैं। इस बारे में श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने जानकारी दी।   

उन्होंने बताया कि ट्रस्ट के उत्तराधिकारी नृत्य गोपाल दास ने प्रधानमंत्री को एक पत्र लिखा। पत्र में उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी को आधारशिला रखने और श्रीराम मंदिर के भूमि पूजन पर आमंत्रित भी किया है। लेकिन अभी तक प्रधानमंत्री कार्यालय की तरफ से इस कार्यक्रम के सिलसिले में कोई पुष्टि नहीं हुई है।   

कुछ समय पहले महंत कमल नयन दास ने इस कार्यक्रम को लेकर बात की थी। उनका कहना था कि ट्रस्ट सावन मास के दौरान ही राम मंदिर के लिए भूमि पूजन करना चाहता है। अभी तक इस बारे में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है कि राम मंदिर निर्माण का कार्य कब से शुरू होने वाला है। निर्माण की तिथि का ऐलान भी जल्द होने की उम्मीद जताई जा रही है।   

इस दौरान श्रीराम जन्मभूमि से जुड़ी कुछ अफवाहें भी सामने आने लगीं थीl जैसे राम मंदिर निर्माण का समय नज़दीक आ रहा है वैसे इस मामले से संबंधित अफ़वाहों का बाज़ार भी गर्म हो रहा हैl एक समाचार पत्र में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक़ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अयोध्या में सर्व धर्म स्थल बनाना चाहते हैं। फिर इस विषय पर एबीपी न्यूज़ के विकास सिंह भदौरिया संवाददाता ने ट्वीट करते सही जानकारी दीl 

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “अयोध्या में राम मंदिर ही बनेगा। सर्व धर्म स्थल बनाने का पीएम का कोई इरादा नहीं है। अयोध्या में सर्व धर्म स्थल बनाने से राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्रा ने इनकार है। कुछ अखबारों ने ऐसी गलत ख़बर छापी थी। नृपेन्द्र मिश्रा ने भी इस मामले पर स्पष्टीकरण दिया। उन्होंने कहा मेरे हवाले से गलत ख़बर प्रकाशित की गई।” 

राम मंदिर निर्माण पर योजना तैयार करने के लिए शनिवार के दिन 3 बजे बैठक होनी थी। बैठक जारी है। अयोध्या के सर्किट हाउस में होने वाली श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ ट्रस्ट की बैठक में राम मंदिर निर्माण से जुड़े कई अहम पहलुओं पर चर्चा होगी। बैठक में राम मंदिर निर्माण समिति के चेयरमैन नृपेन्द्र मिश्रा समेत कई संत भी हिस्सा ले रहे हैं।   

हालाँकि, नृपेन्द्र मिश्रा 16 जुलाई से ही अयोध्या में मौजूद हैं। उनके साथ राम जन्मभूमि ट्रस्ट के सुरक्षा सलाहकार केके शर्मा और बीएसएफ के पूर्व महानिदेशक भी मौजूद हैं। इतना ही नहीं इंजीनियर्स का एक समूह भी वहाँ मौजूद है जो राम मंदिर निर्माण की बारीकियों पर अपनी नज़र बनाए हुए है। ख़बरों के अनुसार राम मंदिर का प्रतिरूप तैयार करने वाले चंद्रकांत सोमपुरा के बेटे निखिल सोमपुरा भी आज होने वाली बैठक में शामिल हो सकते हैं।  

आतंकियों के लिए IED मँगाने की फिराक में थी सादिया शेख, कभी जाकिर नाइक से करना चाहती थी निकाह

भारत में अपने प्रसार के लिए वैश्विक आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (ISIS) अब नए तौर-तरीके आजमा रहा है। आतंकी संगठन अब इसके लिए महिलाओं का सहारा ले रहा है। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के खुलासे के अनुसार, ISIS ने अपनी विचारधारा फैलाने के लिए महिलाओं को कमान देना शुरू कर दिया है। NIA के अनुसार, मेट्रो सिटीज की इन महिलाओं ने सोशल मीडिया को हथियार बना कर आतंकी विचारधारा फैलाने का बीड़ा उठाया है।

इन महिलाओं को ISIS ने विस्फोटक जमा करने का काम भी दे रखा है। एजेंसी को इस मामले में एक बड़ी सफलता भी हाथ लगी है। NIA ने पुणे से सादिया शेख नामक महिला को गिरफ़्तार किया है, जो इस्लामी कट्टरपंथी विचारधारा को फैलाने में लगी हुई थी। सादिया अनवर शेख कभी आतंकी जाकिर मूसा से निकाह करने के लिए जम्मू कश्मीर तक पहुँच गई थी। जम्मू-कश्मीर पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर डी-रैडकलाइज वाली प्रक्रिया पूरी कर के छोड़ दिया था।

कहा जाता है कि जाकिर मूसा ने सादिया के अरमानों पर पानी फेरते हुए उसके साथ निकाह करने से इनकार कर दिया था। इसके बाद वो निकाह का प्रस्ताव लेकर जम्मू-कश्मीर में ISIS के सबसे बड़े सरगना वकार के पास गई, लेकिन वकार ने भी उसके प्रस्ताव ठुकरा दिया। इसके बाद उसने इसी आतंकी संगठन का खुरासान मॉड्यूल ज्वाइन कर लिया था। सादिया टेलीग्राम ऐप का प्रयोग कर के दूसरे आतंकियों से IED मँगाने की फिराक में थी।

इससे पहले स्पेशल सेल ने इस्लामिक स्टेट खुरासान मॉड्यूल की आतंकी हिना बशीर और जहानजेब सामी को गिरफ्तार किया था। उनसे हुई पूछताछ में सादिया के बारे में कई चीजें पता लगी थीं। ‘आजतक’ की ख़बर के अनुसार, सादिया टेलीग्राम ऐप पर अहल-ए-वफ़ा नाम की आईडी बना कर गिरफ्तार हिना बेग और जहानजेब के अलावा दिल्ली के तिहाड़ जेल में कैद आतंकी अब्दुल्ला बाशित से लगातार सम्पर्क में थी।

अब्दुल वासित तिहाड़ जेल से ही ‘वॉइस ऑफ इंडिया’ नामक कट्टरवादी मैगजीन निकाल रहा था, जिसमें ये महिलाएँ उसकी मदद कर रही थीं। इस पत्रिका का उपयोग सीएए को लेकर लोगों को भड़काने के लिए भी किया गया था। इसके लिए आपत्तिजनक कंटेंट्स प्रकाशित किए गए थे। दिल्ली और जम्मू-कश्मीर में ये आतंकी धारदार हथियारों से हमला करने की फिराक में थे। फ़िलहाल इनसे पूछताछ जारी है।

कॉन्स्टेबल के ‘इशारे’ से गई CM की कुर्सी: जब राजीव के लिए एक हाथ वाले जोशी को गहलोत ने लगाया ठिकाने

एक हैं अशोक गहलोत और एक थे हरिदेव जोशी। इंदिरा के जमाने के दिग्गज कॉन्ग्रेसी रहे जोशी को पार्टी में उनके बेटे राजीव गॉंधी के जमाने में ठिकाने लगाया गया था। इसके पीछे गहलोत का बड़ा हाथ बताया जाता है। जोशी के पतन के बाद ही राजस्थान कॉन्ग्रेस की सियासत में गहलोत का सूरज चढ़ता गया। आजकल वे सचिन पायलट नामक चुनौती को ठिकाने लगाने के जोड़-तोड़ में लगे हैं।

हरिदेव जोशी तीन बार राजस्थान के मुख्यमंत्री रहे। पार्टी में उनकी तूती बोलती थी। जब वे 1985 में दूसरी बार सीएम बने तब तक कॉन्ग्रेस पर राजीव पूरी तरह काबिज हो चुके थे। देश के प्रधानमंत्री थे। उनकी कैबिनेट में गहलोत भी थे। राजीव राजस्थान पर भी अपनी पूरी पकड़ चाहते थे।

जोशी के रहते यह संभव नहीं दिख रहा था। लिहाजा उन्होंने प्रदेश अध्यक्ष बनाकर गहलोत को दिल्ली से जयपुर भेजा। जोशी ने इस फैसले का विरोध तो नहीं किया, लेकिन पार्टी की बैठकों से खुद भी दूर रहते थे और उनके कैबिनेट सहयोगी भी। इसके बाद की कहानी पर आने से पहले यह जानते हैं कि जोशी राजस्थान की सियासत में शीर्ष तक कैसे पहुॅंचे थे।

हरिदेव जोशी राजस्थान स्थित बँसवाड़ा के रहने वाले थे। बचपन में उनका हाथ टूट गया तो बाँस की पट्टियों से ही गाँववालों ने इसे सीधा करने की कोशिश की लेकिन बात बिगड़ गई। डॉक्टर के पास गए तो पता चला कि हाथ बेकार हो चुका है और उसे काटना पड़ेगा। बावजूद इसके जोशी ने स्वतंत्रता संग्राम में भाग लिया। गिरफ्तार भी हुए।

कॉन्ग्रेस में उनकी सक्रियता को देखते हुए उन्हें प्रदेश महासचिव का पद दिया गया। वे पहली बार अक्टूबर 1973 में मुख्यमंत्री बने थे। पहली बार उनका कार्यकाल करीब साढ़े तीन वर्षों का रहा। मार्च 1985 में दूसरी बार सीएम बने तो कार्यकाल करीब तीन साल ही चला। तीसरा और आखिरी कार्यकाल चार महीने का रहा था।

असल में इसके बाद हुए विधानसभा चुनावों मे कॉन्ग्रेस को बुरी हार मिली थी और जोशी का पद चला गया। हालॉंकि उनका राजनीतिक अस्त जनवरी 1988 में ही हो गया था जब उन्हें राजीव ने इस्तीफा देने को मजबूर कर दिया। वैसे भी लगातार 10 विधानसभा चुनाव जीत कर जननेता की छवि बनाने वाले जोशी कभी भी गॉंधी परिवार की पहली पसंद नहीं रहे थे।

जनवरी 1988 में जब जोशी से इस्तीफा लिया गया तब गहलोत ही पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष थे। जोशी के इस्तीफे से जुड़ी एक दिलचस्प घटना का विवरण राजस्थान के वरिष्ठ पत्रकार श्याम आचार्य ने अपनी किताब तेरा तुझको अर्पण में किया है।

उन्होंने लिखा है कि राजीव गॉंधी ने दिल्ली के बाहर किसी शांत जगह पर केंद्रीय कैबिनेट की बैठक करने का फैसला किया। जगह चुनी गई राजस्थान की सरिस्का। लेकिन उस समय राजस्थान में भयंकर अकाल पड़ा था। इसकी वजह से इस फैसले की आलोचना होने लगी। इसे देख राजीव ने बैठक की जगह तो नहीं बदली, लेकिन जोशी तक सादगी बरतने का संदेश भिजवाया।

कहते हैं कि राजीव खुद गाड़ी ड्राइव कर बैठक स्थल तक जा रहे थे। वे जैसे ही सरिस्का से ठीक पहले चौराहे पर पहुॅंचे वहॉं तैनात कॉन्स्टेबल ने बाईं तरफ मुड़ने का इशारा किया। राजीव ने गाड़ी मोड़ी तो रास्ता एक मैदान में जाकर खत्म हो गया।

मैदान में सरकारी गाड़ियों की कतार लगी थी। वे समझ गए कि उनके निर्देशों का पालन नहीं हुआ है। आचार्य ने लिखा है कि राजीव ने हरिदेव से पूछा- जोशी जी आपने यह क्या तमाश कर रखा है? हू गेव द इंस्ट्रक्शन (किसने यह आदेश दिया)? जोशी ने तत्कालीन डीजीपी पीसी मिश्रा को आगे कर दिया और उन्होंने बताया कि दिल्ली से ही इसके निर्देश आए थे। राजीव ने कहा- हू गेव इंस्ट्रक्शन, मैंने नहीं दिया। यह कह वे आगे बढ़ गए। जोशी का माला तक नहीं पहना। इस घटना के जो चश्मदीद थे उनमें अशोक गहलोत भी शामिल थे।

जोशी इस घटना के बाद खुद को बेहद अपमानित महसूस कर रहे थे। उन्होंने खुद को कमरे में बंद कर लिया। हालॉंकि बाद में राजीव ने उन्हें मिलने के लिए बुलाया ​भी। लेकिन, उनकी विदाई की पटकथा तैयार हो चुकी थी। आचार्य के अनुसार उस समय राजनीतिक गलियारों में यह चर्चा जोर-शोर से थी कि गहलोत ने ही उस कॉन्स्टेबल से राजीव की गाड़ी को मैदान की ओर मुड़ जाने का इशारा करने के लिए कहा था।

आचार्य ने उस घटना का जो विवरण लिखा है उससे पार्टी नेताओं को लेकर गॉंधी परिवार की सोच का भी पता चलता है। जब हरिदेव जोशी कोप भवन में गए शीर्षक से लिखी कथा में बताया गया है कि इस घटना के बाद निकट सहयोगियों ने जोशी को सलाह दी कि आज जो कुछ हुआ है उसके बाद उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए। लेकिन, जोशी ने जवाब दिया, “बंधु नेहरू परिवार में सब को गुस्सा आता है। इंदिरा जी को आता था। कोई खास बात नहीं है। सब ठीक हो जाएगा।” लेकिन उसके बाद जोशी के लिए कुछ भी ठीक नहीं हुआ। 20 जनवरी 1988 को उनसे इस्तीफा ले लिया गया।

कोयंबटूर: अज्ञात उपद्रवियों ने 3 हिंदू मंदिरों में की तोड़-फोड़, आगजनी, त्रिशूल को भी किया क्षतिग्रस्त

तमिलनाडु के कोयंबटूर में शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) की रात अज्ञात बदमाशों ने तीन हिंदू मंदिरों में जमकर उत्पात मचाया और फिर आग लगा दी। उपद्रवियों ने कोयंबटूर के टाउन हॉल के मगालियम्मन मंदिर, रेलवे स्टेशन पर विनयनगर मंदिर और नल्लमपलायम के सेलवा विनयगर मंदिर में तोड़-फोड़ और आगजनी की।

पुलिस ने बताया कि अज्ञात अपराधियों ने मंदिर के सामने रखी संपत्तियों को क्षतिग्रस्त कर दिया, कपड़ों और टायरों को जला दिया और एक त्रिशूल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। कोयंबटूर शहर की पुलिस ने घटनाओं की जाँच शुरू कर दी है।

इस घटना के बाद, शनिवार (जुलाई 18, 2020) को हिंदू संगठनों के कार्यकर्ता- हिंदू मुन्नानी और बीजेपी मंदिर के बाहर इकट्ठा हुए और उपद्रवियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की माँग की। भाजपा के प्रदेश उपाध्यक्ष वनाथी श्रीनिवासन ने इन घटनाओं की निंदा की और मुख्यमंत्री एडप्पादी के पलानीस्वामी से कहा कि जो लोग इस कृत्य में लिप्त हैं उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, उपद्रवियों ने शहर के टाउन हॉल में फाइव कॉर्नर के पास एनएच रोड पर मगालियम्मन मंदिर में कपड़े और टायर जला दिए। उन्होंने मंदिर के सामने रखे त्रिशूल को भी क्षतिग्रस्त कर दिया।

कोयंबटूर पुलिस ने मंदिर के आस पास से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज के जरिए खुलासा किया कि एक बाइक सवार शख्स को मंदिर की संपत्तियों को क्षतिग्रस्त करते और आग लगाते हुए देखा जा सकता है।

इसी तरह, कुछ अज्ञात अपराधियों ने कोयंबटूर रेलवे जंक्शन के सामने विनयनगर मंदिर में भी एक टायर जलाया। हालाँकि, रेलवे जंक्शन परिसर में चौबीसों घंटे पुलिस गश्त कर रही है, लेकिन सूत्रों का मानना है कि यह घटना तब हुई जब पुलिस कर्मी वहाँ मौजूद नहीं थे।

ऐसी ही एक अन्य घटना में, अज्ञात लोगों ने शुक्रवार रात को नल्लमपलायम के पास सेल्वा विनयगर मंदिर परिसर में आग लगा दी।

घटना के कारण स्थानीय निवासियों में दहशत फैल गई है। मंदिरों के बाहर पुलिस कर्मियों को तैनात किया गया है और घटना की जाँच शुरू कर दी गई है।

बता दें कि, ये घटनाएँ शुक्रवार को कोयंबटूर में पेरियार की प्रतिमा को खंडित करने के एक दिन बाद हुई थीं।

राहुल गाँधी ने किया हिन्दुविरोधी पेरियार का महिमामंडन, जिन्होंने तोड़ी थी भगवान गणेश की मूर्ति और जलाए थे राम के चित्र

तमिलनाडु में पेरियार की एक प्रतिमा पर भगवा रंग चढ़ाने की घटना के बाद कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी ने हिन्दुओं को लेकर घृणा फैलाने वाले ईवी रामासामी उर्फ ​​’पेरियार’ की प्रशंसा और महिमामंडन किया है। शनिवार (जुलाई 18, 2020) को एक ट्वीट में राहुल गाँधी ने लिखा, “घृणा की मात्रा किसी भी विशाल प्रतीक को कभी भी प्रभावित नहीं कर सकती है।”

पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष ने सिर्फ प्रतिमा को नुकसान पहुँचाने पर ही विचार व्यक्त नहीं किए बल्कि उस व्यक्ति का भी महिमामंडन किया, जिसे हिंदू विरोधी ‘बुद्धिजीवी’ के रूप में व्यापक रूप से पहचाना जाता है।

दरअसल, तमिलनाडु में कोयंबटूर के सुंदरपुरम इलाके में ईवी रामासामी जिसे कि ‘पेरियार’ के नाम से जाना जाता है, की प्रतिमा शुक्रवार (जुलाई 17, 2020) को भगवा रंग में नजर आई। जिसके बाद डीएमके, आदि के कार्यकर्ताओं ने मौके पर प्रदर्शन किया।

कुछ लोगों द्वारा पेरियार की प्रतिमा पर भगवा रंग से पुताई कर दी गई थी। पुलिस के अनुसार, पेरियार समर्थकों ने दोषियों को गिरफ्तार करने की माँग करते हुए चेतावनी दी है कि अगर ऐसी घटनाएँ फिर से हुई तो वे अपना प्रदर्शन उग्र कर देंगे।

पेरियार की यह प्रतिमा वर्ष 1995 में इस शहर में स्थापित की गई 3 समाज सुधारकों की प्रतिमाओं में से एक है। इस मामले में कथित रूप से भारत सेना संगठन के सदस्य 21 वर्षीय अरुण कृष्णन ने पुलिस के सामने आत्मसमर्पण भी कर दिया है।

कॉन्ग्रेस का पेरियार प्रेम

यह ध्यान रखने वाली बात है कि दक्षिण भारत में पेरियारवादियों के समर्थन की बदौलत ही 2019 के लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी 50 सीटों को पार करने में सफल रही। इस तरह से देखा जाए तो हिन्दुओं के प्रति नफरत फैलाने वाले पेरियार का महिमामंडन कर राहुल गाँधी सिर्फ पेरियार विचारधारा के समर्थकों का एहसान ही वापस कर रहे हैं।

सोनिया गाँधी के नेतृत्व तहत कॉन्ग्रेस पार्टी का लंबा इतिहास बताता है कि एक भी कोई ऐसा हिंदू-विरोधी कार्यकर्ता या ‘बुद्धिजीवी’ नहीं है, जिसे कॉन्ग्रेस पार्टी अपना समर्थन नहीं देती है। सत्ता में UPA के दौरान, सोनिया गाँधी ने अपनी राष्ट्रीय सलाहकार परिषद को उन कार्यकर्ताओं के साथ जोड़ दिया, जिन्होंने विदेशों से फंड प्राप्त किया और विवादित हिंदू-विरोधी सांप्रदायिक हिंसा विधेयक का मसौदा तैयार किया।

यह भी याद रखने की जरूरत है कि राहुल गाँधी के नेतृत्व वाली कॉन्ग्रेस पार्टी ने सिर्फ और सिर्फ हिंदू समुदाय के प्रति अनादर की गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाया है, जिसे सोनिया गाँधी ने भलीभाँती सींचने का काम किया।

उदाहरण के लिए, कॉन्ग्रेस अध्यक्ष के रूप में राहुल गाँधी के कार्यकाल के दौरान, केरल में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने देश में कहीं भी गोमांस प्रतिबंध के प्रति अपने विरोध प्रदर्शन में एक बछड़े की निर्मम हत्या की थी। ऐसी परिस्थितियों में, यह बिल्कुल भी आश्चर्यजनक नहीं है कि राहुल गाँधी ने पेरियार का महिमामंडन किया।

हिन्दू विरोधी पेरियार

पेरियार ने रामायण के बारे में कई भ्रम फैलाए। श्री राम पर जातिवादी होने का आरोप लगाने से लेकर यह तक दावा किया गया कि उन्होंने महिलाओं को मार डाला। पेरियार के अनुसार, हिंदू महाकाव्य रामायण और महाभारत को द्रविड़ पहचान को मिटाने के लिए ‘चालाक आर्यों’ द्वारा लिखा गया था। अगर पेरियार की मानें तो, राम, भरत को सिंहासन ना मिलने की साजिश का हिस्सा थे, जो पेरियार के अनुसार दशरथ के योग्य उत्तराधिकारी थे।

राम के प्रति अपनी घृणा के अलावा, पेरियार ने भगवान गणेश की मूर्तियों को भी खंडित किया था। उसने श्री राम के चित्र भी जलाए थे। उसकी मृत्यु के बाद, पेरियारवादियों ने दशहरा के साथ ही ‘रावण लीला’ को वार्षिक आयोजन बनाने का प्रयास किया।

आज इंदिरा गाँधी का पोता उन्हीं लोगों के साथ खड़ा है, जिन्होंने इंदिरा गाँधी का जीवन भर विरोध किया था। यह राहुल गाँधी और उनकी माँ, सोनिया गाँधी के तहत कॉन्ग्रेस पार्टी की मानसिकता में आए बदलाव को भी दर्शाता है, जहाँ पार्टी सक्रिय रूप से हर किसी को हिंदू देवी-देवताओं के बारे में बोलने के लिए प्रेरित करती है और हिंदुओं की भावनाओं को आहत करने का हर प्रपंच करती है।

अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी: कोरोना त्रासदी के दौर में भी महिलाओं संग वही हिंसा

महिलाएँ घरों में काम करती हैं। महिलाएँ दफ्तरों में भी काम करती हैं। महिलाएँ सड़क निर्माण भी करती हैं और सड़क बनाने में अपना योगदान भी देती हैं। इन सारे कामों के बाद महिलाएँ घर की रोटी भी बनाती हैं। साथ-साथ महिलाओं को घर भी सँभालना है और बच्चे भी। महिलाएँ डॉक्टर भी हैं, महिलाएँ पुलिस भी हैं। इन सब जिम्मेदारियों के अलावा महिलाएँ वो हर एक काम कर रही हैं जिसके लिए हम इनको कोरोना वॉरियर्स कह रहे हैं।

कोरोना वॉरियर्स के तौर पर फ्रंट लाइन में खड़ी महिलाओं की कुछ झलकियाँ इस प्रकार हैं। पहले बात आशा वर्कर्स की करते हैं। आज देश के कई राज्यों में आशा वर्कर्स अपनी जान को जोखिम में डाल कर राज्य सरकारों के साथ मिलकर कोरोना वायरस से बचने के लिए लोगों को जागरूक कर रही हैं। उन्हें मास्क पहनने और सोशल डिस्टेंसिंग के फायदे समझा रही है। इसके अलावा वे कोरोना के कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग को भी बख़ूबी अंजाम दे रही हैं।

इस कड़ी में दूसरा नाम भारत की आँगनबाड़ी कार्यकर्ताओं का है। ये महिला कार्यकर्ता न केवल कुपोषण के ख़िलाफ़ लड़ रही हैं, बल्कि देश में कोरोना के प्रकोप को कम करने में भी जुटी हुई हैं। इनका सामान्य कर्तव्य ग्रामीण भारत भर में महिलाओं और बच्चों के पोषण में सुधार करना है, परंतु इस वायरस के आने के बाद से वे अब डोर-टू-डोर जाकर लोगों की ट्रैवल हिस्ट्री पता कर रही हैं।

इस वायरस के लक्षणों एवं इससे बचाव के उपायों पर लोगों को जागरूक करने काम कर रही हैं। इसके कॉन्टैक्ट ट्रेसिंग और बाहर से आए लोगों को क्वॉरंटीन करने का भी काम कर रही हैं। आज के समय में आशा वर्कर्स और आँगनबाड़ी महिला कार्यकर्ता कोरोना के खिलाफ लड़ाई में प्रशासन की आँख-हाथ-पाँव बनी हुई हैं। संक्षेप में कहें तो, ये “कम्युनिटी सर्विलांस” का कार्य कर रही हैं।

ऐसे में जब इन महिला कोरोना वॉरियर्स का सम्मान होना चाहिए तो स्थितियाँ ठीक इसके विपरीत नजर आ रही हैं। फील्ड में ड्यूटी के दौरान इन्हें लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। कई जगहों पर आशा वर्कर्स के साथ बदसलूकी के मामले सामने आ चुके हैं।

जरा सोचिए! ये महिलाएँ अपने पूरे परिवार की देखभाल का जिम्मा उठाए हुए हैं। बाहर निकल अपना और अपने पूरे परिवार के लोगों की जान जोख़िम में डाल लोगों की मदद कर रही हैं और बदले में उन्हें क्या मिल रहा है। इस मुद्दे पर आज हम सभी को सोचने की जरूरत है।

बात यहीं खत्म नहीं होती है। इतना महत्वपूर्ण योगदान देने के बात भी महिलाओं पर घरेलू हिंसा कम नहीं हो रहे हैं। महिलाओं की यह परंपरागत पीड़ा है। वह पीड़ा जिसे वो उस देश में सदियों से जूझती चली आ रही हैं इस महासंकट के दौरान एक अजीब आँकड़ा सामने आया है कि महिलाओं के ऊपर अत्याचार तेजी से बढ़ गए हैं।

महिलाओं की स्थिति पर चिंता प्रकट करते हुए संयुक्त राष्ट्र संघ के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने कहा है कि विश्व में कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते हुए संक्रमण का महिलाओं की सामाजिक और आर्थिक स्थिति पर बुरा प्रभाव पड़ा है, और इस वजह से सामाजिक असमानता में वृद्धि हुई है। एंटोनियो गुटेरेस ने महिलाओं पर बढ़ रही हिंसा पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि लोगों को महिलाओं के महत्व को समझना होगा।

अब आप जरा सोचिए! कोरोना संक्रमण की इस वैश्विक त्रासदी में महिलाएँ जहाँ बाहर पुरुषों की तुलना में वायरस का अधिक शिकार बन रही है, वहीं घर में वो प्रताड़ना भी झेल रही है। महिलाएँ जहाँ एक तरफ कोरोना जैसी महामारी से बुरी तरीके से प्रभावित हैं तो वही दूसरी तरफ लॉकडाउन की वजह से पुरुषों द्वारा महिलाओं पर घरेलू अत्याचार भी तेजी से बढ़े हैं।

भारत में इस मुद्दे को संज्ञान में लेते हुए भारतीय महिला आयोग तथा भारतीय स्त्री शक्ति जैसी समाज सेवी संस्थाओं द्वारा कई महत्वपूर्ण कदम उठाए। भारतीय महिला आयोग के पास घरेलू हिंसा से जुड़े कई मामले दर्ज हुए। हालाँकि ये बात भी है कि भारतीय महिला आयोग ने कड़ी कार्रवाई करते हुए इस पर रोक लगाने के कई प्रयास भी किए हैं।

लेकिन क्या ये प्रयास काफी हैं? क्या ये प्रयास बिना महिलाओं की सहभागिता के सफल हो सकते हैं? जरा ठहरिए और सोचिए कि जननी के साथ हम क्या कर रहे हैं। वो जननी जो न केवल प्रसव पीड़ा झेल आपको पैदा करती है बल्कि इस त्रासदी के दौर में आपको बचाने के लिए घर और बाहर, अपना सब कुछ न्योछावर भी कर रही है। यहाँ तक कि अपनी जान भी।

आज हमें यह समझने की जरूरत है कि कोरोना वायरस से लड़ने में महिलाओं की भूमिका बेहद अहम है। ये एक महत्वपूर्ण इकाई के रूप में कार्य करती हैं, और इस संकट घड़ी में परिवार से लेकर समाज तक सभी को सुरक्षित रखने में अपना सफल योगदान दे रही हैं।

वर्षों पहले राष्ट्रकवि मैथलीशरण गुप्त ने लिखा था, “अबला जीवन हाय तुम्हारी यही कहानी, आँचल में है दूध और आँखों में पानी।” सोचिए जरा कि आँचल के दूध को पीकर बड़ा हुआ समाज क्या महिलाओं के साथ इस त्रासदी में भी न्याय कर पा रहा है?

समाज में महिलाओं की स्थिति सदैव प्रथम है, आदि शक्ति की पूजा सबसे पहले होती है। शिव भी सती के लिए ही तांडव करते हैं। अर्धनारीश्वर रूप चराचर जगत को थामे हुए है। जननी “सृष्‍ट‍ि का मूल” है। कम से कम जिस देश में वेदों, पुराणों में महिलाओं को पूज्य माना गया है उस देश में तो महिलाएँ सताई न जाएँ।

मनुस्मृति के अध्याय 3 में उद्धृत श्लोक संख्या 56 यहाँ प्रासंगिक है,

यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः
यत्रैतास्तु न पूज्यन्ते सर्वास्तत्राफलाः क्रियाः

अर्थात, जहाँ स्त्रियों की पूजा होती है वहाँ देवता निवास करते हैं और जहाँ स्त्रियों की पूजा नहीं होती है, उनका सम्मान नही होता है, वहाँ किए गए समस्त अच्छे कर्म निष्फल हो जाते हैं। आपने कई बार इसे सुना और पढ़ा होगा। लेकिन इसे फिर पढ़िए और मनन करिए, साथ ही उस नारी के प्रति श्रद्धा रखिए जो आपके लिए सब कुछ न्यौछावर कर रही है।

‘ड्रोन बॉय’ प्रताप के फर्जी दावे पर वास्तविक ड्रोन निर्माता जर्मन कम्पनी ने दी चेतवानी, कहा- स्पष्ट करें नहीं तो कानून का सामना

तथाकथित ‘ड्रोन बॉय’ प्रताप एनएम द्वारा एक कन्नड़ चैनल को दिए एक इंटरव्यू में अपने साथ ड्रोन की एक फोटो दिखाने और उसे अपने द्वारा बनाने के दावे के ठीक 2 दिन बाद ही उस ड्रोन के वास्तविक निर्माता ने प्रताप और उनके बीच इस ड्रोन के निर्माण को लेकर किसी भी तरह के संबंध से इनकार किया है।

जर्मन कंपनी, बिल्ज़आई – मल्टीकॉप्टरसिस्टम (BillzEye – Multicoptersysteme), जिसने कि ‘ड्रोन बॉय’ प्रताप द्वारा दिखाए गए फोटो में नजर आ रहे ड्रोन को बनाया, ने अपनी वेबसाइट में एक बयान जारी कर इस बात की पुष्टि की है कि प्रताप ने ‘बीटीवी लाइव’ चैनल पर दिए इंटरव्यू में झूठ बोला था।

कंपनी के मालिक बिल गुटबियर द्वारा जर्मन में जारी बयान में कहा गया है कि जर्मनी के हनोवर में आयोजित CeBIT 2018 में ड्रोन को प्रदर्शित किया गया था, और कई आगंतुकों ने प्रदर्शन के लिए अपने बूथ और उनके ड्रोन की तस्वीरें लेने का अनुरोध किया था।

बिल गुटबियर का कहना है कि प्रताप एनएम ने स्टॉल से संपर्क किया और उनसे ड्रोन के बारे में सवाल पूछे, जैसे कि वे क्या कार्य कर सकते हैं आदि, और उन्होंने प्रसन्नतापूर्वक उनके सवालों के जवाब भी दिए।

बातचीत के बाद, प्रताप ने पूछा था कि क्या वह और उसका दोस्त स्टॉल की तस्वीरें ले सकते हैं? और बिल इसके लिए सहमत भी हो गए थे। तस्वीरें लेने के बाद, प्रताप और उनके दोस्त ने अलविदा कहते हुए स्टॉल छोड़ दिया था।

बिल ने कहा कि हनोवर एक्सपो में प्रदर्शित सभी ड्रोन, विशेष रूप से प्रताप के साथ फोटो में दिखाए गए BETH-01 ड्रोन, BillzEye – Multicoptersysteme की संपत्ति हैं, और ‘ड्रोन बॉय’ प्रताप का इस ड्रोन के डिजाइन, इसके विकास, निर्माण या फिर इसके वितरण से कोई लेना-देना नहीं है।

बयान में आगे कहा गया – “वह बिल्ज़आई का कर्मचारी, सहयोगी भागीदार या शेयरधारक नहीं है। यह ड्रोन, जो उनकी तस्वीर का मुख्य आकर्षण है, बिल गुटबियर द्वारा विशेष रूप से डिजाइन और निर्मित किया गया था।” बयान में आगे कहा गया है कि कंपनी के पास मौजूद ड्रोन के दस्तावेजों, सीएडी फाइल्स और तस्वीरों से यह प्रमाणित भी किया जा सकता है।

दरअसल, प्रताप एनएम ने दावा किया है कि उनके स्मार्टफोन पर उनके द्वारा दिखाया गया ड्रोन उन्हीं का है और उन्होंने ही इसे बनाया भी था। ड्रोन के वास्तविक निर्माता ने कहा – “यह गलत बयान है। उन्होंने हनोवर में CEBIT 2018 में ड्रोन का केवल एक फोटो लिया था, और अगर वह ऐसा दावा करता है, तो वह झूठ बोल रहा है।”

उन्होंने आगे कहा है कि चूँकि प्रताप एनएम ने ड्रोन के संबंध में गलत बयान दिया है, इसलिए बिल गुटबियर ने उन्हें तथ्यों को स्पष्ट करने के लिए कहा है। अगले बयान में उन्होंने कहा कि अगर प्रताप इस अनुरोध का अनुपालन नहीं करता है और वह फर्जी दावा करना जारी रखता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

‘ड्रोन बॉय’ प्रताप का इंटरव्यू

ऑपइंडिया द्वारा तथाकथित ‘ड्रोन बॉय’ प्रताप एनएम के झूठे दावों की पोल खोलने के ही कुछ दिनों बाद कहा कि उसने ई-कचरे (ई-वेस्ट) का इस्तेमाल कर के 600 ड्रोन बनाए हैं और इसके लिए उसने कई पुरस्कार और पदक जीते हैं।

प्रताप एनएम कन्नड़ चैनल ‘बीटीवी लाइव’ के साथ एक इंटरव्यू दे रहा था। शो में, प्रताप ने कई प्रमाण पत्र दिखाए, जिसमें उन्होंने ड्रोन प्रतियोगिताओं को जीतने और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय कार्यक्रमों में शामिल होने का दावा किया।

इंटरव्यू में प्रताप ने जर्मन कम्पनी के ड्रोन को अपना बताया था

लेकिन उन घटनाओं के आयोजकों ने पहले ही इस तरह की प्रतियोगिताओं और पुरस्कारों के आयोजन से इनकार करते हुए स्पष्ट कर दिया था कि प्रताप एनएम झूठ बोल रहा है।

जबकि, प्रताप ने अपने द्वारा बनाए गए किसी भी ड्रोन को दिखाने से साफ़ इनकार कर दिया था। उन्होंने अपने फोन पर मौजूद CEBIT 2018 में ड्रोन के साथ अपनी एक तस्वीर जरूर दिखाई थी।

यह तस्वीर कई वेबसाइटों द्वारा पहले से ही प्रकाशित की गई थी, साथ ही उनकी ‘उपलब्धियों’ पर आधारित स्टोरी और शो में, उन्होंने दावा किया था कि वह खुद उस ड्रोन के डेवलपर हैं।

लेकिन ऑपइंडिया के ही एक फैक्ट चेक में यह स्पष्ट किया गया था कि प्रताप के दावे झूठे और बेबुनियाद हैं और यह ड्रोन एक जर्मन कंपनी BillzEye – Multicoptersysteme द्वारा बनाया गया है।

उल्लेखनीय है कि इसी ड्रोन बॉय ने दावा किया था कि उसने ई-कचरे और मिक्सर ग्राइंडर से 600 ड्रोन विकसित किए थे। प्रताप की इन कहानियों पर यकीन करते हुए कई ऐसे लेख सामने आए थे जिनमें दावा किया जाने लगा की प्रताप ने दुनिया भर के विभिन्न ड्रोन एक्सपो में कई स्वर्ण पदक जीते हैं, 87 देशों द्वारा उसे आमंत्रित किया गया है, और अब पीएम मोदी के साथ ही डीआरडीपी से उन्हें काम पर रखने के लिए कहा गया है। जबकि वास्तव में यह सब सिर्फ एक काल्पनिक कहानी थी, जिस कहानी का निर्माण ड्रोन बॉय प्रताप एनएम ने ही किया था।

कॉन्ग्रेसी नेता ने बताया- रम, काली मिर्च और अंडे से कोरोना वायरस का इलाज, सोशल मीडिया पर जमकर लोगों ने उड़ाया मजाक

देश और दुनिया में कोरोना वायरस के कहर ने कोहराम मचा रखा है। दुनियाभर के वैज्ञानिक कोरोना वैक्सीन पर लगातार काम कर रहे हैं। सभी को कोरोना की दवा या वैक्सीन का बेसब्री से इंतज़ार है। इसी बीच कर्नाटक के उल्लाल शहर नगरपालिका के कॉन्ग्रेस पार्षद का वीडियो (17 जून, 2020) सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। जिसमें उन्होंने कोरोना वायरस को खत्म करने के लिए लोगों को एक अजीबोगरीब उपाय सुझाया है।

दरअसल, कर्नाटक के मंगलुरु के कॉन्ग्रेस पार्षद रविचंद्र गट्टी ने एक भ्रामक वीडियो के जरिए बताया कि कैसे रम, काली मिर्च और अंडे से कोरोना संक्रमण से बचा जा सकता है। उन्होंने बकायदा इसकी पूरी जानकारी दी है। इस वायरल वीडियो में कॉन्ग्रेस नेता गट्टी ने कहा, “बेंगलुरू और मेदिकरी में कई लोग रम पीते है। मैं ना रम पीता हूँ ना मछली खाता हूँ। आप बस एक चम्मच काली मिर्च के पाउडर को 90 मि.ली. रम में डालें। इसे अपने हाथों से अच्छी तरह से हिलाएँ और पी लें। कोरोना को पूरी तरह से ख़त्म करने के लिए इसके साथ ही दो आधे उबले हुए आमलेट खाएँ।”

कॉन्ग्रेस नेता गट्टी इतने पर भी नहीं रुके बल्कि उन्होंने यहाँ तक कहा, “मैंने कई दवाइयाँ आजमाईं, लेकिन सिर्फ इसी घरेलू नुस्खे ने काम किया। मैं एक राजनेता के रूप में नहीं, बल्कि कोरोना समिति के सदस्य के रूप में आपको ये सुझाव दे रहा हूँ”

कॉन्ग्रेस नेता रविचंद्र गट्टी ने यह वीडियो 1 मिनट का बनाया है। जिसमें वे कन्नड़ में बोलते हुए नजर आ रहे है। इस भ्रामक वीडियो में उन्होंने एक विशेष ब्रांड को दिखाते हुए एक रम की बोतल भी पकड़ रखी है। यह वीडियो कई दिनों से सोशल मीडिया पर काफी ट्रोल हो रहा है।

जहाँ कुछ लोग गलत सूचना फैलाने के लिए उल्लाल सीएमसी पार्षद की आलोचना कर रहे हैं, वहीं कुछ लोग जमकर कॉन्ग्रेसी नेता का मजाक उड़ा रहे हैं।

टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, मंगलुरु के विधायक यूटी खदर ने कहा, “जिला प्रशासन को यह पता लगाना चाहिए कि उसने सोशल मीडिया पर ऐसा वीडियो क्यों साझा किया। गट्टी पिछले 15 वर्षों से एक सामाजिक कार्यकर्ता है। हम इस मुद्दे को लेकर पार्टी नेताओं से भी चर्चा करेंगे। पार्टी से बात कर गट्टी के खिलाफ आगे की कार्रवाई पर फैसला लिया जाएगा।”

बता दें, कर्नाटक में लगातार कोरोना वायरस का प्रकोप जारी हैं। राज्य में कोरोना संक्रमितों की कुल संख्या 55 हज़ार के पार चली गई। जिसमें 33211 एक्टिव केस है। 20757 लोग ठीक होकर घर जा चुके हैं। वहीं 1147 लोग इस महामारी के चलते अपनी जान गँवा चुके हैं।