इस्लामाबाद में श्रीकृष्ण मंदिर का निर्माण क्या शुरू हुआ, पाकिस्तान में माहौल ऐसा बन गया जैसे एक हिन्दू मंदिर से उनका मुल्क ही खतरे में आ जाएगा। अब एक नया वीडियो पाकिस्तान में खूब वायरल हो रहा है, जिसमें इस्लामाबाद के श्रीकृष्ण मंदिर विवाद को लेकर भारतीयों को कुत्ता कहा गया है और ‘औकात में रहने’ की सलाह दी गई है।
पंजाबी भाषा के इस गाने में गायक कहता है- ‘हिंदुस्तानी कुत्तों, तुस्सी रहो ज़रा औकात विच्च’। इसके बाद सोशल मीडिया पर इसका विरोध शुरू हो गया है।
इस गाने में पाकिस्तानी फौज का दृश्य दिखा कर इनका महिमामंडन किया गया है और साथ ही धमकी दी गई है कि पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में कभी मंदिर नहीं बनने दिया जाएगा। गाने के वीडियो में पाकिस्तानी फौज के सिपाही बंदूक से निशाना साधते और हेलीकॉप्टरों से उतर कर पोजिशन लेते दिख रहे हैं। जिस तरह से वीडियो में भारत और हिंदुओं के प्रति ज़हर बोया गया है, उसकी जम कर आलोचना हो रही है। इस्लामी कट्टरवादी अब एक गाने के सहारे हिंदुओं को नीचा दिखा रहे हैं।
सिंध के मानवाधिकार कार्यकर्ता कपिल देव ने इस गाने के वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए लिखा कि इस्लामाबाद के निर्माणाधीन श्रीकृष्ण मंदिर विवाद ने एक बार फिर से हिन्दुओं के प्रति घृणा को सामने ला दिया है। उन्होंने हिन्दुओं को ‘हिंदुस्तानी कुत्तों” कहे जाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि वीडियो में पाकिस्तानी फ़ौज को दिखा कर उन्हें बदनाम किया जा रहा है, जिस पर कार्रवाई होनी चाहिए।
#Temple issue has once again exposed hatred for #Hindus in Pakistan as it can been seen in this song calling Hindus as “Hindustani kutto (Indian dogs)”. The visuals showing armed forces are aimed at maligning Pak Army. I hope action will be taken against them. #MandirTauBanegapic.twitter.com/OeqgSfQg3D
बता दें कि पिछले दिनों इस संबंध में इस्लामी शिक्षा देने वाले संस्थान जामिया अशर्फिया के मुफ्ती जियाउद्दीन ने कहा था कि गैर मुस्लिमों के लिए मंदिर या अन्य धार्मिक स्थल बनाने के लिए सरकारी धन खर्च नहीं किया जा सकता। इसी संस्था ने मंदिर निर्माण को लेकर फतवा जारी करते हुए कहा था कि अल्पसंख्यकों (हिंदुओं) के लिए सरकारी धन से मंदिर निर्माण कई सवाल खड़े कर रहा है। इस फतवे के अलावा इस्लामाबाद हाई कोर्ट में मंदिर निर्माण को लेकर एक याचिका भी डाली गई थी।
सीडीए के प्रवर्तन और भवन नियंत्रण विभागों की एक संयुक्त टीम कुछ दिनों पहले एच-9/2 में मंदिर निर्माण स्थल पर पहुँची और श्रमिकों को निर्माण का काम रोकने का निर्देश दिया था। सीडीए के प्रवक्ता मज़हर हुसैन ने कहा था कि नागरिक प्राधिकरण के भवन नियंत्रण कानूनों ने स्पष्ट रूप से ये कहा कि जब तक इमारत के निर्माण के लिए मँजूरी नहीं मिल जाती तब तक इस जमीन पर कोई काम नहीं होगा।
बीती रात आई खबरों के अनुसार बॉलिवुड अभिनेता अमिताभ बच्चन कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। साथ ही उनके बेटे अभिषेक बच्चन भी कोरोना पॉजिटिव हैं। कल रात अमिताभ बच्चन ने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट से इस बारे में सूचना दी। इसके कुछ ही समय बाद उनके बेटे अभिषेक बच्चन ने भी बताया कि उनकी जाँच में कोरोना पॉजिटिव आई है।
ट्विटर पर इस बात की जानकारी देते हुए अभिषेक बच्चन ने लिखा, “आज के दिन कुछ ही समय पहले मैं और मेरे पिता जी की रिपोर्ट कोरोना पॉजिटिव आई। हम दोनों में कोरोना के हल्के लक्षण मिले हैं, फिलहाल हम दोनों अस्पताल में भर्ती हो चुके हैं। हमने इस बात की जानकारी हर संबंधित अधिकारी को दे दी है, साथ ही परिवार के अन्य सदस्यों और काम करने वालों की भी जाँच की जाएगी। मेरा आप सभी से निवेदन है कि आप सभी चिंता न करें, धैर्य बनाए रखें। धन्यवाद।”
Earlier today both my father and I tested positive for COVID 19. Both of us having mild symptoms have been admitted to hospital. We have informed all the required authorities and our family and staff are all being tested. I request all to stay calm and not panic. Thank you. ??
इसके बाद अभिषेक बच्चन ने दूसरा ट्वीट करते हुए कहा, “हम इस संबंध में बीएमसी से लगातार जुड़े हुए हैं।” साथ ही उन्होंने यह गुज़ारिश भी की है कि जितने लोग उनके या उनके परिवार के संपर्क में आए थे, वह अपनी जाँच करा लें।
The BMC has been in touch and we are complying with them. ??
इसके अलावा पूर्व भारतीय क्रिकेटर चेतन चौहान भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं। जिसके बाद संन्यास ले चुके क्रिकेटर आकाश चोपड़ा और तेज़ गेंदबाज़ आरपी सिंह ने उनके जल्द स्वस्थ्य होने की आशा की है। आकाश चोपड़ा ने इस मामले पर ट्वीट करते हुए लिखा, “चेतन चौहान भी कोरोना पॉजिटिव पाए गए हैं, उन्हें शुभकामनाएँ दे रहा हूँ। आप जल्द ही ठीक हो जाइए सर, यह रात आपके लिए मुश्किल होगी बिग बी और चेतन जी।”
Chetan Chauhan ji is also tested positive for #COVIDー19. Sending best wishes in his direction too…get well soon, sir. Tough night this one…Big B and Chetan Ji.
फिर भारतीय क्रिकेट टीम के पूर्व तेज़ गेंदबाज़ आरपी सिंह ने भी ट्वीट करके उनके बेहतर स्वास्थ्य की कामना की। ट्वीट में उन्होंने लिखा, “अभी मालूम चला कि चेतन चौहान को कोरोना है, वह जल्द ठीक होकर वापस लौटें।”
चेतन चौहान फिलहाल उत्तर प्रदेश सरकार में केंद्रीय मंत्री हैं और उन्होंने भारतीय टीम की तरफ से कुल 40 टेस्ट मैच खेले हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ज़्यादातर मैच 70 के दशक के अंत में खेले हैं। वह सुनील गावस्कर के साथ भारतीय टीम के लिए ओपनिंग करते थे।
— R P Singh रुद्र प्रताप सिंह (@rpsingh) July 11, 2020
बीती रात अमिताभ बच्चन ने अपने ट्वीट में लिखा था, “मैं कोरोना पॉजिटिव पाया गया हूँ, मुझे अस्पताल में भर्ती किया जा रहा है।” इसके बाद उन्होंने यह भी कहा कि जितने भी लोग पिछले 10 दिन के दौरान उनके संपर्क में आए हों, अपनी ज़रूर अपनी जाँच करा लें। इसके बाद उन्हें मुंबई के नानावती अस्पताल में शनिवार की रात भर्ती कराया गया।
T 3590 -I have tested CoviD positive .. shifted to Hospital .. hospital informing authorities .. family and staff undergone tests , results awaited .. All that have been in close proximity to me in the last 10 days are requested to please get themselves tested !
इस खबर के सार्वजनिक होने के बाद बॉलिवुड के तमाम सितारों और सेलेब्रेटी ने उन्हें स्वस्थ होने की शुभकामनाएँ दीं। इनमें अनुपम खेर, विक्की कौशल, रवीन टंडन, सोनू सूद, मीका सिंह, सचिन तेंदुलकर, निम्रत कौर, रणदीप हुड्डा और परिणीती चोपड़ा समेत कई कलाकार शामिल थे।
न सिर्फ ज़मीन पर बल्कि सोशल मीडिया पर भी इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें धमकाने में लगे हैं, जो भारतीयता या देश की बातें करते हैं। इसका उदाहरण तब देखने को मिला, जब याना मीर नामक एक महिला ने अपने भतीजे की सेना की वर्दी में तस्वीर डाली। एक्टिविस्ट याना मीर ने अपने भतीजे मोहम्मद की तस्वीर शेयर की, जो सेना की वर्दी पहने हुए था और काफी क्यूट लग रहा था। लेकिन इस्लामी कट्टरवादियों ने उसे भी नहीं बख्शा। उन्होंने भड़क कर मोहम्मद के मौत तक की भी दुआ माँग ली।
दरअसल, याना ने लिखा कि उनका भतीजा मोहम्मद भारत के लिए जम्मू कश्मीर के आतंकियों से लड़ने के लिए तैयार है। साथ ही उन्होंने लिखा कि मोहम्मद आर्मी मेजर से प्रेरित है। साथ ही उन्होंने ‘नारा-ए-तकबीर’ के साथ-साथ ‘जय हिन्द’ भी लिखा। जहाँ अधिकतर लोगों ने बच्चे और याना मीर की प्रशंसा की, कुछ इस्लामी कट्टरवादी भी बीच में घुस आए और गालियाँ बकी। इनमें से एक नाम सुलैत फैसल नामक इस्लामी कट्टरपंथी का भी है, जिसने याना मीर के भतीजे के मरने की बात कही।
फैसल ने लिखा कि वो ऐसा कुछ कहना नहीं चाहता है लेकिन वो आशा करता है कि याना मीर का भतीजा उसी तरह मारा जाए, जिस तरह से भारत की ‘डरपोक सेना’ जम्मू कश्मीर के निर्दोष नागरिकों की ‘हत्याएँ’ करती हैं। साथ ही उसने तंज कसते हुए पूछा कि क्या कश्मीर चाहिए? इसके बाद उसने अश्लीलता प्रकट करते हुए लिखा- ‘__ मेरा!’ सोशल मीडिया में कई लोगों ने फैसल के इस ट्वीट की निंदा की और उसके इस असंवेदनशील ट्वीट को डिलीट करने के लिए कहा।
सुहैत फैसल का भद्दा ट्वीट रिप्लाई
सुलैत फैसल के ट्विटर हैंडल के अनुसार, वो पाकिस्तान के कराची का रहने वाला है। उसने लिखा है कि वो एक कवि बनना चाहता है। उसने अपनी ट्वीट को डिलीट करना तो दूर की बात, उलटा वो अपने ट्वीट के पक्ष में तर्क देता रहा। उसने अपनी ट्वीट को एकदम जायज ठहराया। कुछ लोगों ने इसे पाकिस्तान की मानसिकता बताया तो कुछ ने इसे इस्लामी कट्टरवाद करार दिया।
जहाँ तक याना मीर की बात है, उन्होंने अपनी कवर पिक में भाजपा नेता वसीम बारी कि तस्वीर लगा रखी है, जिनकी आतंकवादियों ने हत्या कर दी थी। गौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर के बांदीपोरा जिले में आतंकियों ने बुधवार (जुलाई 08, 2020) देर शाम भाजपा के जिलाध्यक्ष वसीम बारी की हत्या कर दी थी। आतंकवादियों ने वसीम बारी के अलावा उनके पिता और भाई की भी गोली मारकर हत्या कर दी गई। उमर भाजपा की जिला युवा इकाई का सदस्य थे, जबकि उनके पिता बशीर शेख भाजपा के जिला उपाध्यक्ष रह चुके थे।
कानपुर का कुख्यात गैंगस्टर विकास दुबे अपने साथियों की तरह ही एनकाउंटर में मारा गया है। विकास दुबे उज्जैन के महाकाल मंदिर में पकड़ा गया था। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार लगातार हो रहे उसके करीबी गुर्गों के एनकाउंटर को देखते हुए वह अपने ठिकाने से 6 दिनों बाद लोगों के सामने आया था। वह नहीं चाहता था कि पुलिस उसकी खोजबीन के चलते उसके अन्य साथियों का भी एनकाउंटर करे। अब शस्त्र वाला मामला उठा है।
यूपी से उज्जैन गई एसटीएफ टीम के अनुसार विकास अपने साथियों की मौत से टूट चुका था। वह अंदर ही अंदर कमजोर होता जा रहा था। अमर दुबे और अतुल दुबे की मौत ने उसे अंदर से झकझोर दिया था। गैंग के साथी होने के साथ साथ ये लोग विकास के रिश्तेदार भी थे। अपने पुराने रिकॉर्ड को देखते हुए विकास जानता था कि वो आसानी से जेल से छूट जाएगा लेकिन उसके बाद मारे गए लोगों के परिजनों को क्या मुँह दिखएगा।
वहीं विकास के एनकाउंटर के बाद पुलिस उसके करीबियों, रिश्तेदारों और उसको आश्रय देने वाले लोगों पर अपना शिकंजा कसती नजर आ रही है। पुलिस अब विकास दुबे द्वारा इस्तेमाल किए जा रहे हथियारों की जाँच कर रही हैं। इसमें यह बात सामने आई है कि विकास दुबे अपने साथ 12- 14 हथियारों को रखता था। जिनके लाइसेंस करीबियों के नाम रजिस्टर्ड थे।
रिपोर्ट्स के अनुसार, विकास ने दुबे ने कानपुर में अपने राजनीतिक रसूख के बल पर कई लोगों के नाम पर हथियारों के लाइसेंस बनवाएं थे। जिससे वह लोगों के अंदर अपने डर को कायम रखता था। पुलिस अब उन सभी हथियारों के लाइसेंस निरस्त करने के लिए कार्यवाही कर रही हैं।
विकास के इन करीबियों नाम पर थे शस्त्र
विकास के घर और उसके पास से बरामद किए गए असलहों का मालिक असल में कोई और था। जाँच के दौरान पता लगा कि विष्णुपाल पुत्र देवी लाल के नाम रिवाल्वर और डबल बैरल बंदूक (केस में नामजद), जहान यादव पुत्र गेंदालाल यादव के नाम डबल बैरल बंदूक (गिरफ्तार), दयाशंकर पुत्र श्याम नारायण के नाम से सिंगल बैरल बंदूक (गिरफ्तार), आलोक पुत्र मदनलाल के नाम डबल बैरल बंदूक हैं।
इसके अलावा राम सिंह पुत्र छोटेलाल के नाम डबल बैरल बंदूक (नामजद), श्रीकांत पुत्र बबन शुक्ला के नाम डबल बैरल बंदूक, यादवेंद्र पुत्र गेंदालाल के नाम राइफल, राजन पुत्र जिल्ल्लेदार के नाम डबल बैरल, दीपक पुत्र रामकुमार के नाम राइफल, और अंजली दुबे पत्नी दीपक दुबे के नाम एक रिवाल्वर का लाइसेंस है। बता दें इन सभी हथियारों के लाइसेंस को लेकर डीजीपी ऑफिस ने कानपुर नगर और देहात पुलिस से ये रिपोर्ट माँगी है।
पुलिस से लुटे गए हथियारों की खोजबीन
वारदात वाली रात को बदमाशों ने 8 पुलिसकर्मियों की हत्या के साथ उनके सरकारी असलहों को भी लूट लिया था। जिसको खोजने के लिए पुलिस ने बिकरु गाँव में तलाशी अभियान चलाया है। पुलिस लोगों के घर घर जाकर असलहों को जमा करने के निर्देश दे रहीं है।
पुलिस ने पूरे इलाके में घोषणा करते हुए कहा है कि 2/3 जुलाई की रात गाँव में हुए हमले के दौरान पुलिस से लूटे गए हथियार जिसके भी पास हों, वो पुलिस के समक्ष आकर हथियार जमा करें, वरना कड़ी कार्रवाई की जाएगी। बता दें पुलिस ने अब तक लूटे गए असलहों में से 3 पिस्टल बरामद कर ली है, लेकिन उसे अभी भी एके-47 और इंसास रायफल की तलाश है।
पिछले कई दिनों से सोशल मीडिया ‘ड्रोन बॉय’ प्रताप एनएम (Drone boy Prathap NM) के किस्सों से लबरेज़ है, जिसे कि सब लोग ‘ड्रोन वैज्ञानिक’ बता रहे हैं। इन्टरनेट यूजर्स ऐसी कहानियाँ साझा कर रहे हैं कि कैसे प्रताप ने दुनिया भर के विभिन्न ड्रोन एक्सपो में कई स्वर्ण पदक जीते हैं, 87 देशों द्वारा उसे आमंत्रित किया गया है, और अब पीएम मोदी के साथ ही डीआरडीपी से उन्हें काम पर रखने के लिए कहा गया है।
हालाँकि, कर्नाटक के 22 वर्षीय लड़के की कहानियाँ नई नहीं हैं, लेकिन वे पिछले 2 वर्षों से इंटरनेट पर घूम रही हैं, और अब अचानक उसकी कहानियाँ वायरल होने लगी हैं। और जबकि अधिकांश भारतीय इस ‘ड्रोन बॉय’ की कहानियों को कई बार साझा कर रहे हैं, कुछ ऐसे हैं, जो सोचते हैं कि उनकी कहानियाँ संदिग्ध रूप से नासा की उन कहानियों के समान हैं जिनमें अक्सर ‘स्कूल बॉय का नासा द्वारा चयन’ जैसे किस्से कहे जाते हैं, जो कि लगभग हमेशा ही झूठी निकल आती हैं। इसी संदर्भ में, प्रताप एनएम के बारे में किए जा रहे दावों का विश्लेषण यहाँ दिया जा रहा है।
पदक और पुरस्कार
दिसंबर 2018 में ‘डेक्कन हेराल्ड’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रताप ने जर्मनी के हनोवर में आयोजित ‘इंटरनेशनल ड्रोन एक्सपो 2018’ में अल्बर्ट आइंस्टीन इनोवेशन गोल्ड मेडल जीता, जर्मनी में आयोजित इंटरनेशनल ड्रोन एक्सपो में स्वर्ण पदक हासिल किया, CeBIT ड्रोन में पहला स्थान हासिल किया। एक्सपो 2018, हनोवर, जर्मनी में, और दिसंबर 2017 में जापान के टोक्यो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रोबोटिक प्रदर्शनी में स्वर्ण पदक भी जीता।
अगर हम ध्यान से देखें, तो हम पाएँगे कि उन्होंने वर्ष 2018 में जर्मनी स्थित हनोवर में तीन, इंटरनेशनल ड्रोन एक्सपो में दो और CeBIT ड्रोन एक्सपो में एक पुरस्कार जीता। इन नाम वाली सभी घटनाओं को इन्टरनेट पर सर्च करने पर वेब सर्च आपको कोई भी रिजल्ट नहीं दिखाता है। CeBIT एक कंप्यूटर एक्सपो है, जो जर्मनी के हनोवर में होता है, लेकिन CeBIT द्वारा अलग से कोई ‘ड्रोन एक्सपो’ आयोजित करने से सम्बंधित किसी भी प्रकार की कोई रिपोर्ट मौजूद नहीं है। हनोवर में आयोजित किसी अन्य अंतरराष्ट्रीय ड्रोन एक्सपो की भी कोई रिपोर्ट उपलब्ध नहीं है, इसलिए यह स्पष्ट नहीं हो पाता कि प्रताप ने कहाँ भाग लिया और पुरस्कार जीते।
इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि इन एक्सपो में प्रताप के जीतने की कोई स्वतंत्र रिपोर्ट भी मौजूद नहीं है। जबकि CeBIT इनोवेशन अवार्ड CeBIT ईवेंट में दिया जाता है, लेकिन इस ईवेंट के बारे में कोई रिपोर्ट नहीं है कि प्रताप ने यह अवार्ड जीता है। पिछले सभी नामांकित व्यक्ति और पुरस्कार के विजेता मोटोरोला, मैकएफी आदि जैसी कंपनियाँ हैं, और किसी भी व्यक्ति विशेष द्वारा यह पुरस्कार जीतने की कोई रिपोर्ट या विवरण उपलब्ध नहीं है।
इसी तरह, हनोवर में किसी भी ड्रोन एक्सपो में ‘अल्बर्ट आइंस्टीन इनोवेशन मेडल’ की भी कहीं कोई रिपोर्ट नहीं है। इस नाम के पुरस्कार के सभी सर्च रिजल्ट केवल प्रताप एनएम की कहानियों की ओर इशारा करते हैं, लेकिन इस तरह के पुरस्कार के बारे में बताने वाला कोई अन्य स्रोत उपलब्ध नहीं है। ‘अल्बर्ट आइंस्टीन वर्ल्ड अवार्ड ऑफ़ साइंस’ नामक एक पुरस्कार है, लेकिन विजेताओं की सूची में हमारे ‘ड्रोन बॉय’ प्रताप का नाम शामिल नहीं है, और यह CeBIT द्वारा सम्मानित नहीं किया गया है। हलाँकि, एक पदक के साथ प्रताप की तस्वीर जरूर है और एक प्रमाण पत्र, जो कह रहा है कि CeBIT द्वारा ‘अल्बर्ट आइंस्टीन इनोवेशन मेडल’, CeBIT द्वारा ऐसे किसी अवार्ड देने कि कोई जानकारी कहीं मौजूद नहीं है।
प्रताप एनएम की रिपोर्ट्स के अनुसार, उन्होंने जापान 2017 में अंतरराष्ट्रीय रोबोट प्रदर्शनी में एक रोबोट प्रतियोगिता में भाग लिया था, जिसके लिए उनके विमान से आवागमन के खर्च में उनके कॉलेज के शिक्षकों द्वारा मदद की गई थी। टोक्यो में आयोजित अंतरराष्ट्रीय रोबोट प्रदर्शनी एक व्यापार मेला है, जहाँ रोबोट बनाने वाली कंपनियाँ भाग लेती हैं। उनके रोबोट के साथ कॉलेज और विश्वविद्यालय के छात्र भी इस शो में भाग लेते हैं, लेकिन ड्रोन के इस कार्यक्रम का हिस्सा होने का कोई रिकॉर्ड नहीं है, और इस आयोजन में प्रथम पुरस्कार, या किसी भी पुरस्कार को जीतने का कोई रिकॉर्ड नहीं है।
भले ही, दुनिया में कई रोबोट प्रतियोगिताएँ होती हैं, लेकिन अंतरराष्ट्रीय रोबोट प्रदर्शनी में आयोजित होने वाली किसी भी प्रतियोगिता का कोई रिकॉर्ड नहीं है, जो मूल रूप से औद्योगिक रोबोटों के लिए एक व्यापार मेला है। हालाँकि, छात्र अपनी रचनाओं को प्रदर्शित करने के लिए भी इसमें भाग लेते हैं, लेकिन वे किसी प्रतियोगिता में शामिल नहीं होते हैं।
जबकि प्रताप ने कथित तौर पर अपने ड्रोन के लिए बड़ी संख्या में पुरस्कार और पदक जीते हैं, लेकिन एक भी तस्वीर या वीडियो कहीं मौजूद नहीं है, जिसमें उन्हें इस तरह के पुरस्कार प्राप्त करते हुए दिखाया गया हो। इस तरह के पदक और पुरस्कारों के साथ उनकी कुछ तस्वीरें हैं, लेकिन वे किसी भी समारोह से नहीं हैं, जहाँ उन्हें यह प्राप्त हुआ होगा।
उन्होंने आईआईटी और आईआईएम में ड्रोन पर एक सत्र को संबोधित करने का भी दावा किया है, लेकिन उस दावे की पुष्टि करने के सम्बन्ध में कोई रिपोर्ट नहीं है।
ड्रोन
‘ड्रोन बॉय’ पर इंटरनेट की अधिकांश कहानियाँ ‘एडेक्सलाइव’ द्वारा दिसंबर, 2019 में प्रकाशित एक रिपोर्ट पर आधारित हैं। एडेक्सलाइव ‘द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ की एक पहल है। यह एक एक्सपो के दौरान अपने ड्रोन के साथ प्रताप की तस्वीर पेश करता है। दर्जनों वेबसाइट्स द्वारा खींची गई तस्वीरें नीचे दी गई हैं –
एसीएसएल स्टॉल पर एसीएसएल ड्रोन के साथ प्रताप
यहाँ हम प्रताप के साथ एक बेहद आधुनिक नजर आने वाला ड्रोन देखते हैं। लेकिन पहली नज़र के बाद, कोई भी देख सकता है कि ड्रोन को कई जगहों पर ACSL नाम को ब्रांड किया गया है। यह ACSL एक जापानी कंपनी है, जो मानव रहित हवाई वाहन या ड्रोन बनाती है। यह आसानी से देखा जा सकता है कि यह वास्तव में प्रताप के साथ खींचे गए ड्रोन पर ACSL का लोगो है। थोड़ा सा ऑनलाइन सर्च से ही पता चलता है कि यह ACSL द्वारा बनाया गया PF-1 ड्रोन है, और यह ‘ड्रोन बॉय’ द्वारा रिसाइकिल किए गए भागों से बना ड्रोन नहीं है। तस्वीर में एक ACSL ब्रांडेड शर्ट वाला व्यक्ति भी है, और स्टॉल की दीवार में और दीवार पर लगे टीवी पर भी ACSL का लोगो देखा जा सकता है। ये सभी इस संभावना की ओर इशारा करते हैं कि प्रताप ने किसी प्रदर्शनी में भाग लिया था, जहाँ ACSL ने अपने ड्रोन दिखाए थे, और खुद को खड़ा कर जापानी कंपनी द्वारा बनाए गए ड्रोन में से एक के साथ फोटो लिया था।
‘ड्रोन बॉय’ प्रताप पर ‘द बेटर इंडिया’ द्वारा प्रकाशित एक अन्य लेख में ऊपर दी गई फोटो के अलावा, प्रदर्शनी स्टालों में कई अलग-अलग प्रकार के ड्रोन के साथ उनकी कई तस्वीरें हैं। तस्वीरों में से एक में यह निर्धारित किया जा सकता है कि यह जापान में एक प्रदर्शनी है। यहाँ भी, निम्नलिखित तस्वीरों में, ACSL का ब्रांड क्वाडकॉप्टर के एक मोटर में दिखाई देता है, जिसका अर्थ है कि यह जापानी कंपनी द्वारा बनाया गया एक और ड्रोन है।
एक और एसीएसएल ड्रोन के साथ प्रताप
इसके अलावा, जापानी में सेल विवरण को भी डेस्क पर देखा जा सकता है, जिसका अर्थ है कि यह एक व्यावसायिक उत्पादन के लिए निर्मित ड्रोन है। उसी लेख में अन्य तस्वीरें भी दिखाती हैं कि प्रताप को जापान और जर्मनी में प्रदर्शित व्यावसायिक उत्पादन ड्रोन के साथ तस्वीरें खींची जा रही हैं। ड्रोन प्रचार सामग्री के साथ हैं, और उनमें से कोई भी रिसाइकिल किए गए ‘ई-कचरे’ से बना हुआ नहीं दिखता है, क्योंकि प्रताप को रीसाइक्लिंग सामग्री द्वारा ड्रोन बनाने के लिए जाना जाता है।
‘रेडिट’ के एक यूजर ने एक ई-मेल ACSL को भेजा, जिसमें पूछा गया कि क्या प्रताप उनकी कंपनी के लिए काम करता है या उसने उनके लिए ड्रोन विकसित किए हैं? जवाब में, कंपनी ने स्पष्ट रूप से कहा कि वह कंपनी के किसी भी उत्पाद विकास में शामिल नहीं है। उन्होंने कहा कि ई-मेल मिलने से पहले उन्हें इसकी जानकारी भी नहीं थी। उन्होंने यह भी पुष्टि की कि प्रताप के साथ फोटो में देखा गया पीएफ -1 ड्रोन जापान में इन-हाउस विकसित किया गया था, और उनके पास आईपी पेटेंट और अधिकार हैं। यह साबित करता है कि प्रताप ने जापान के एसीएसएल ड्रोन के साथ फोटो खिंचवाई थी, और वह इसकी निर्माण प्रक्रिया से जुड़ा नहीं है।
एसीएसएल का जवाब प्रताप के साथ किसी भी लिंक से इनकार करता है
ई-कचरे का उपयोग करके कथित तौर पर 600 ड्रोन बनाने के बावजूद, यह एक बड़ा आश्चर्य है कि ड्रोन बॉय द्वारा बनाए गए ड्रोन का एक भी फोटो या वीडियो इंटरनेट पर उपलब्ध नहीं है। विभिन्न वेबसाइटों पर उनके साथ दिखाई देने वाले ड्रोन की सभी तस्वीरें विभिन्न कंपनियों द्वारा बनाए गए व्यावसायिक उत्पादन वाली ड्रोन हैं।
बाढ़ राहत
‘एडेक्सलाइव’ के लेख के अनुसार, कर्नाटक में 2019 में बाढ़ के दौरान, प्रताप ने अपने ड्रोन का उपयोग प्रभावी क्षेत्रों में भोजन और राहत सामग्री पहुँचाने के लिए किया था। लेख में एक राहत-बचाव नाव में एक ड्रोन रिमोट के साथ प्रताप की तस्वीर भी है, जिसमें दो बचावकर्मी हैं। लेकिन यहाँ भोजन वितरित करने के लिए ‘अपने ड्रोन’ का उपयोग करने के इस दावे के साथ दो समस्या हैं।
सबसे पहली समस्या यह कि विभिन्न तस्वीरों में उसके साथ जिस तरह के ड्रोन देखे गए हैं, वे बाढ़ जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान भोजन वितरित करने के लिए उपयोगी नहीं हैं। ये छोटे ‘रोटरी विंग ड्रोन’ बेहद कम वजन ले जा सकते हैं, और इसलिए उन्हें भोजन वितरित करने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। आमतौर पर, नावों और हेलीकाप्टरों का उपयोग बाढ़ वाले क्षेत्रों में राहत सामग्री वितरित करने के लिए किया जाता है, ड्रोन का उपयोग नहीं किया जाता है। लेकिन बाढ़ जैसी आपदाओं के दौरान राहत कार्यों में ड्रोन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। वे हुए नुकसान का पता लगाने, फँसे हुए लोगों का पता लगाने आदि में बहुत उपयोगी हैं।
Yuneec Typhoon H + रिमोट के साथ प्रताप, दुसरे चित्र में तुलना के लिए दिया गया रिमोट
दूसरी समस्या इस तस्वीर में नजर आ रही वह रिमोट-कंट्रोल यूनिट है जिसे प्रताप अपने हाथों में पकड़े हुए है। फिर, यह एक व्यावसायिक रूप से निर्मित यूनिट है, और इसे ई-कचरे से घर पर नहीं बनाया जाता है। जब हमने विभिन्न ड्रोन और उनके रिमोट को देखा, तो हमने पाया कि प्रताप द्वारा पकड़े गए रिमोट आश्चर्यजनक रूप से Yuneec Typhoon H + ड्रोन के लिए ST16S ग्राउंड स्टेशन के समान लग रहा है।
इसलिए, यह इस संभावना की ओर इशारा करता है कि प्रताप बाढ़ की स्थिति का आकलन करने में एक टाइफून एच+ ड्रोन के संचालन में बचावकर्मियों की सहायता कर रहा था, और वह अपने द्वारा ई-कचरे से रिसाइकिल कर बनाए गए किसी ड्रोन का उपयोग नहीं कर रहा था।
अफ्रीकी घटना, जो गणित को भी धता बताती है
‘एडेक्सलाइव’ द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में, प्रताप ने सूडान में एक साँप द्वारा काट ली गई 8 वर्षीय लड़की को एंटीवेनम (विषरोधी) देने के लिए अपने ड्रोन का उपयोग करने की कहानी सुनाई। उनके अनुसार, एक व्यक्ति इस साँप, एक काले मांबा द्वारा काटे जाने के बाद केवल 15 मिनट तक जीवित रह सकता है। उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने ईगल 2.8 ड्रोन का इस्तेमाल किया, जो 280 किमी प्रति घंटे की दूरी तय कर सकता है, और वह जगह सड़क से 10 घंटे की दूरी पर थी जहाँ वह मौजूद था।
इस दावे में कई चीजें हैं, जो आपस में जुड़ती नजर नहीं आती हैं। सड़क से वह जगह 10 घंटे की दूरी पर थी, जिसका मतलब था कि घटनास्थल लगभग 400-500 किमी दूर था। ‘उसका ड्रोन’ एक घंटे में 280 किमी की दूरी तय कर सकता है, जिसका मतलब है कि एंटीवेनम को डिलीवर करने के लिए प्रत्येक दूरस्थ स्थान पर ड्रोन के लिए 1.5-2 घंटे का समय लगेगा। यहाँ पर उसके स्वयं के दावे के अनुसार, लड़की को 15 मिनट के भीतर एंटी-वेनम की आवश्यकता के लिए बहुत देर हो जाएगी।
लेकिन वह यह भी दावा करता है कि एंटी-वेनम साढ़े आठ मिनट में दिया गया था। जिसका मतलब है, ड्रोन ने 3000 किमी प्रति घंटे से अधिक की गति से यात्रा की। यह ध्वनि, या मैक 3 फाइटर की गति का लगभग तीन गुना है। इस तरह की गति केवल जेट सेनानियों द्वारा इस्तेमाल की जा सकती है, न कि रोटरी-विंग ड्रोन से। भारतीय बल के स्वामित्व वाला कोई भी फाइटर जेट मैक 3 पर उड़ान नहीं भर सकता है। यहाँ तक कि यूएसए और इज़राइल द्वारा बनाए गए सैन्य ड्रोन भी सुपरसोनिक गति से उड़ान नहीं भरते हैं। इसलिए, यह संभव नहीं है कि प्रताप का ड्रोन इतनी तेज गति से उड़े।
‘ड्रोन बॉय’ पहले कहता है कि उसके ड्रोन की गति 280 किमी प्रति घंटे है, फिर वह कहता है कि ड्रोन एक ऐसी जगह पर पहुँचा, जो केवल 8.5 मिनट में सड़क से 10 घंटे दूर है, निश्चित रूप से यह एक गणित को झूठा साबित करने वाला दावा है।
ड्रोन बॉय के दावे के साथ अगली समस्या बैटरी चालित ड्रोन की कैटेगरी है। इस तरह के ड्रोन उस तरह की दूरी को कवर नहीं कर सकते, जो उन्होंने सूडान में कवर करने का दावा किया है। DJI Mavic 2 जूम ड्रोन, इस श्रेणी में सबसे लंबी रेंज वाले ड्रोन हैं, जो अधिकतम 8 किमी की दूरी तय कर सकते हैं और इसका अधिकतम उड़ान समय 31 मिनट है। बैटरी चालित ड्रोन किसी भी सूरत में 400 किमी से अधिक दूरी तय नहीं कर सकता है, जो कि अगर हम उसके वापसी की यात्रा पर भी विचार करें तो यह दोगुना होगा।
ड्रोन्स का एक और महत्वपूर्ण सीमा कण्ट्रोल यूनिट के साथ कनेक्टिविटी है। ड्रोन के साथ वायरलेस कनेक्शन के साथ हैंडहेल्ड रिमोट कंट्रोल का उपयोग कर ड्रोन संचालित किए जाते हैं। और इस कनेक्शन की सीमा है। इसलिए, बैटरी क्षमता और रेडियो सिग्नल रेंज दोनों ड्रोन की सीमा को सीमित करते हैं।
बड़े सैन्य ड्रोन, जैसे कि संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रीडेटर ड्रोन में यह सीमा नहीं है। वे इंजन का उपयोग करके उड़ते हैं ना की बैटरी की शक्ति से, और वे उपग्रह कनेक्शन का उपयोग करके नियंत्रित होते हैं, जिसका अर्थ है कि उन्हें दुनिया में कहीं से भी नियंत्रित किया जा सकता है।
‘ड्रोन बॉय’ प्रताप ने कहा कि सूडान के एक विशेष आदिवासी इलाके में एक साल में ब्लैक माम्बा के काटने से 22,000 लोग मारे गए। यह दावा किसी भी समाचार रिपोर्ट द्वारा समर्थित नहीं है। हालाँकि, अफ्रीका में बहुत सारे लोग सर्पदंश से मर जाते हैं, यहाँ तक कि महाद्वीप के सभी सर्पदंश से होने वाली वार्षिक मृत्यु भी 22,000 से कम है। इसके अलावा, सर्पदंश के ऐसे हर मामले में साँप की पहचान करना संभव नहीं है।
सूडान वाली कहानी के बारे में किए गए दावों का समर्थन कोई भी तर्क और ड्रोन की ज्ञात क्षमता नहीं करती है और इस प्रकार यह एक पूरी तरह से बनी हुई कहानी की तरह लगता है।
ई-कचरा
प्रताप ने कथित तौर पर ई-कचरे का उपयोग करके लगभग 600 ड्रोन बनाए हैं। हालाँकि, यह सच है कि रद्दी गैजेट्स से बहुत सारे इलेक्ट्रॉनिक और इलेक्ट्रिकल कंपोनेंट्स का इस्तेमाल DIY प्रोजेक्ट्स में किया जा सकता है, लेकिन प्रताप ने अपने तरीके के बारे में जिस तरह का विवरण दिया है, उससे संदेह पैदा होता है। ‘एडेक्सलिव’ की कहानी में, प्रताप कहता है –
“उदाहरण के लिए, अगर कोई मिक्सर-ग्राइंडर है, जो खराब है, तो मैं मोटर निकाल सकता हूँ और इसे अपने ड्रोन में उपयोग कर सकता हूँ। इसी तरह, मैं अपने ड्रोन का निर्माण करने के लिए टूटे हुए टीवी से चिप्स और प्रतिरोधों का उपयोग करता हूँ। हाँ, मिक्सर-ग्राइंडर में एक मोटर होता है, लेकिन यह ड्रोन में इस्तेमाल करने के लिए उपयुक्त नहीं है। यह 500-600 वाट बिजली की खपत के साथ एक भारी एसी मोटर है, जबकि ड्रोन डीसी मोटर्स का उपयोग करते हैं, और कम बिजली का उपभोग करने की आवश्यकता होती है ताकि बैटरी लंबे समय तक चले। ड्रोन में AC मोटर का उपयोग करने का मतलब होगा कि इसमें डीसी से एसी इन्वर्टर की जरूरत होगी, क्योंकि ड्रोन वो बैटरी चलाते हैं जो डीसी पावर देते हैं। यह ड्रोन को बहुत भारी बना देगा क्योंकि इनवर्टर में भारी उपकरण होते हैं, और यह केवल पुराने मिक्सर ग्राइंडर मोटर का उपयोग करने के लिए एक अतिरिक्त डिवाइस को जोड़ने के लिए एक व्यावहारिक समाधान नहीं है, जब कि वास्तव में डीसी मोटर्स कई उपकरणों में मौजूद होते हैं जिन्हें ड्रोन निर्माण के लिए बचाया जा सकता है।”
ड्रोन बनाने के लिए टूटे हुए टीवी से ‘चिप’ और प्रतिरोधों (रेजिस्टर) का उपयोग करने का दावा भी संदिग्ध है। जबकि, प्रतिरोधक साधारण विद्युत घटक होते हैं, जिनका उपयोग अन्य उपकरणों में किया जा सकता है, चिप्स में सॉफ्टवेयर और निर्देश होते हैं, जो उस उत्पाद के लिए विशिष्ट होते हैं, जिनके लिए इसे बनाया जाता है और उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक उत्पादों में चिप्स का अन्य उपकरणों में उपयोग नहीं किया जा सकता है। सामान्य भाषा में कहें तो टीवी की चिप्स का उपयोग ड्रोन में या किसी भी अन्य उपकरण में नहीं किया जा सकता है क्योंकि वो एक विशेष प्रोग्राम के लिए ही तैयार किए जाते हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि प्रताप द्वारा ई-कचरे से बनाए गए 600 ड्रोनों में से कोई भी तस्वीर या वीडियो मौजूद नहीं है, क्योंकि उसकी सभी तस्वीरें उसके अपने द्वारा नहीं बल्कि विभिन्न प्रदर्शनियों में लगाए गए वाणिज्यिक ड्रोन की हैं।
तर्क को पराजित करने वाली कहानियाँ
ड्रोन बॉय प्रताप पर ‘ऑर्गेनाइजर’ की एक हालिया कहानी में इस कार्यक्रम में उनकी भागीदारी पर एक दिलचस्प कहानी है। वह कहता है कि जैसा कि उसकी जेब में पैसा नहीं था, उसने टोक्यो जाने के बाद आयोजन स्थल तक पहुँचने के लिए प्रसिद्ध बुलेट ट्रेन भी नहीं ली थी। लेकिन समस्या यह है कि बुलेट ट्रेन या शिंकानसेन सेवा जापान में एक इंटर-सिटी हाई-स्पीड ट्रेन सेवा है, और टोक्यो में अंतरराष्ट्रीय रोबोट प्रदर्शनी टोक्यो बिग साइट पर आयोजित की जाती है। जिसका मतलब है, किसी को प्रदर्शनी स्थल तक पहुँचने के लिए बुलेट ट्रेन की आवश्यकता नहीं है, जो वास्तव में अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे से सिर्फ 15 किलोमीटर दूर है।
यह भी दिलचस्प है कि जब वह दावा करता है कि दिसंबर 2017 में उसकी जापान यात्रा उसके अध्यापकों की वित्तीय मदद से संभव हो सकी थी, तो वह कुछ ही महीनों बाद बिजनेस क्लास की यूरोप यात्रा कर रहा था। ड्रोन बॉय के एक बयान के अनुसार, “जब मैंने पहली बार फ्रांस की यात्रा की, तो लोग चौंक गए और बिजनेस क्लास में यात्रा करने के लिए मुझे जज किया। हालाँकि, यह मेरे लिए कोई मायने नहीं रखता था।” इस बयान से हम यह भी तय नहीं कर पा रहे हैं कि ड्रोन बॉय आखिर कहना क्या चाह रहे थे?
प्रताप एनएम ने ई-कचरे से 600 ड्रोन का दावा किया है। किसी भी फोटोग्राफिक या उसी के प्रमाण के वीडियोग्राफी के अभाव के अलावा, उसका दावा एक और सवाल भी उठाता है। डिवाइस बनाने में समय लगता है, यहाँ तक कि ड्रोन को एसेम्बल करने में जो रेडी टू यूज किट्स होती हैं, जो कि इन दिनों आसानी से उपलब्ध हैं, उन्हें इस्तेमाल करने में भी समय लगता है। ड्रोन बॉय ने टेलीविज़न जैसी बेकार वस्तुओं से प्रतिरोधों और चिप्स का उपयोग करके लॉजिक बोर्ड और मोटर्स को अपने दम पर इकट्ठा करने का दावा किया है। इस तरह की एक परियोजना को पूरा होने में कई सप्ताह लगेंगे। जैसा कि वह कहता है कि उसके साथ कोई सहायक भी नहीं है, अगर यह एक औद्योगिक सेटअप में नहीं किया जाता है तो ऐसी स्थिति में 600 ड्रोन बनाने का मतलब कई वर्षों की मेहनत होता है। जबकि इस बीच, वह ड्रोन प्रतियोगिताओं में भाग ले रहा है और तमाम तर्कों के विपरीत 87 देशों के एक्सपो में व्याख्यान दे रहा है। संक्षेप में, यह पूरी टाइमलाइन इन सभी दावों का समर्थन नहीं करती है।
चमत्कारिक संयोग
प्रताप एनएम का कहना है कि उनके द्वारा बनाए गए ड्रोन में से एक का नाम ईगल 2.8 है। आश्चर्यजनक रूप से, यह नाम एक प्रसिद्ध ड्रोन बॉय द्वारा बनाए गए ड्रोन के समान है, जो गुजरात के हर्षवर्धन सिंह जाला द्वारा बनाया गया ईगल ए-7 है। 17 वर्षीय हर्षवर्धन सिंह एरोबोटिक्स 7 के संस्थापक और सीईओ हैं, और उन्होंने ईगल ए-7 ड्रोन विकसित किया है जो कथित तौर पर बारूदी सुरंगों का पता लगा सकता है और उन्हें नष्ट कर सकता है। प्रताप एनम के विपरीत, हर्षवर्धनसिंह के ड्रोन की तस्वीरें और वीडियो ऑनलाइन उपलब्ध हैं। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि तस्वीरों से यह स्पष्ट होता है कि वे घर के बने ड्रोन हैं, और वे ए-7 और ईगल ए-7 ब्रांडिंग करते हैं, और इसलिए वे व्यावसायिक रूप से ड्रोन का उत्पादन नहीं करते हैं, जैसे कि प्रताप के एक्सपो से बरामद तस्वीरों के मामले में है, जिनमें किसी और ही ब्रांड के स्टीकर लगे हुए हैं।
यह इस संभावना की ओर इशारा करता है कि प्रताप एनएम हर्षवर्धन सिंह जाला से इतना प्रेरित था कि उसने अपने ‘अनदेखे ड्रोन’ को हर्षवर्धन सिंह के ही ड्रोन का नाम दे दिया।
निष्कर्ष यह निकलता है कि ड्रोन वैज्ञानिक प्रताप एनएम द्वारा कोई भी ड्रोन बनाने, किसी भी पुरस्कार और पदक जीतने का कोई सबूत नहीं है। उन्होंने जो पुरस्कार और पदक जीते हैं, वे काल्पनिक हैं और वास्तव में हैं ही नहीं। विभिन्न वेबसाइट्स पर उसके बारे में सभी कहानियाँ उसी कहानी को कहने वाली अन्य वेबसाइट्स पर आधारित हैं। उनकी उपलब्धियों के संबंध में किए गए दावों में कई तकनीकी और तार्किक खामियाँ हैं, और सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि उनका दावा दूसरे ‘ड्रोन बॉय’ लड़के की कहानी के समान है।
नोट- यह लेख मूल रूप से अंग्रेजी में राजू दास द्वारा लिखा गया है, जिसे आप इस लिंक पर पढ़ सकते हैं।
अमेरिका ने चीन में उइगरों पर हो रहे अत्याचार को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिका ने एक चीनी संस्था सहित चार शीर्ष अधिकारियों पर प्रतिबंध लगा दिया है। इस घटना पर भड़के चीन ने पलटवार करते हुए अमेरिका को जवाबी कार्रवाई की धमकी दी है। चीन ने नए अमेरिकी प्रतिबंधों को आपसी संबंधों के लिए हानिकारक भी करार दिया है।
दरअसल, चीन पर लगातार आरोप लग रहे हैं कि वह शिनजियांग प्रांत में उइगरों और अन्य अल्पसंख्यकों पर जुल्म कर रहा है, जिसमें शारीरिक शोषण के साथ ही नरसंहार तक के आरोप लगे हैं। जिसके बाद इसे गंभीरता से लेते हुए अमेरिका ने यह कार्रवाई की है।
अमेरिका ने मानवाधिकारों का उल्लंघन करने को लेकर जिन नेताओ पर प्रतिबंध लगाया है उनमें शिनजियांग उइगर स्वायत्त क्षेत्र (XUAR) के चीनी कम्युनिस्ट पार्टी सचिव चेन क्वांगो (Chen Quanguo), पूर्व उप पार्टी सचिव झू हैलुन (Zhu Hailun), शिनजियांग पब्लिक सिक्योरिटी ब्यूरो के पार्टी सचिव वैंग मिंगशान (Wang Mingshan) और पूर्व पार्टी सचिव हुओ लियुजुन (Huo Liujun) शामिल हैं। ये सभी सर्वोच्च रैंक वाले चीनी अधिकारी हैं।
अमेरिका ने ग्लोबल मैग्निट्स्की एक्ट के तहत इन सभी चीनी अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाया है। यह कानून दुनिया के उन सभी लोगों पर लागू होता है जो मानवाधिकारों का उल्लंघन करते है। जिसके चलते अब इन सभी अधिकारियों के साथ वित्तीय लेन-देन करना अमेरिका में अपराध है और उनके पास जो भी अमेरिका आधारित संपत्तियां होंगी, वह फ्रीज कर दी जाएँगी। प्रतिबंध के बाद से अधिकारियों और उनके परिवारों को अमेरिका में प्रवेश करने की मनाही होगी। इसके साथ ही शिनजियांग सार्वजनिक सुरक्षा ब्यूरो के पर भी प्रतिबंध लगाए गए हैं।
अमेरिका की तरफ से लिए गए इस फैसले की जानकारी देते हुए विदेश मंत्री माइक पोम्पियो ने कहा कि चीन के शिनजियांग में उइगर और अन्य अल्पसंख्यक समूहों के सदस्यों को निशाना बनाने और मानवाधिकारों के हनन के मामले में चीन पर निशाना साधा था। इसके साथ उन्होंने चीनी अधिकारियों पर लगाई गई पाबंदियों को लेकर भी जानकारी दी है।
इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने चीन के खिलाफ कोरोना वायरस महामारी फैलाने को लेकर सख्ती दिखाई थी। इसके साथ ही चीन में बिना किसी अपराध के हांगकांग समेत उइगरों व दूसरे अल्पसंख्यक समुदाय को जेलों में बंद करने के लिए भी दोषी ठहराया था।
गौरतलब है कि उइगर समुदाय में ज्यादातर समुदाय विशेष के नागरिक हैं। इस समुदाय की शिनजियांग प्रांत में सबसे ज्यादा आबादी है। चीन प्रशासन इनको हमेशा आतंवादियों की श्रेणी में रखती है। इन लोगों पर अत्याचार किया जाता है। बिना बात कार्रवाई की जाती है। कई जगह इनके मस्जिदों को भी नष्ट किया जा चुका है। इन लोगों गुलाम बना कर रखा गया है। चीनी प्रशासन ने इन पर कई पाबंदियाँ लगा रखी है। इसके साथ इनकी हर एक गतिविधियों पर भी नजर रखी जाती है।
उल्लेखनीय है कि कुछ हफ़्तो पहले चीन प्रशासन द्वारा उइगर महिलाओं का जबरदस्ती गर्भपात कराने की भी खबर सामने आई थी। उइगर महिलाओं का नियमित रूप से प्रेग्नेंसी टेस्ट कराया जाता है। साथ ही उनके गर्भाशय में यंत्र फिट कर दिए जाते हैं। हज़ारों महिलाओं का जबरन गर्भपात कराए जाने की भी ख़बर सामने आई है। कहा जा रहा है कि अब तक लाखों महिलाओं के साथ ये सब कुछ किया जा चुका है। जहाँ पूरे चीन में गर्भपात की संख्या घटती जा रही है, शिनजियांग में इसमें जबरदस्त वृद्धि आई है।
उइगरों में जिन लोगों के ज्यादा बच्चे होते हैं, उन्हें चीन जबरदस्ती प्रताड़ना कैम्पों में ठूँस देता है। जिनके दो से ज्यादा बच्चे हैं, उन माता-पिता के बच्चों को उनसे दूर कर दिया जाता है। उन्हें भारी धनराशि जमा करवाई जाती है। बिलखते माता-पिता अपने बच्चों से दूर उन्हें खोजने में लगे रहते हैं। साथ ही पुलिस ऐसे लोगों के घर पर छापेमारी करती है और बच्चों तक को भी उठा कर ले जाती है।
कजाखस्तानी मूल की एक उइगर महिला गुलनार ओमिरजाख ने जैसे ही अपने तीसरे बच्चे को जन्म दिया, चीन की कम्युनिस्ट सरकार को इसकी भनक लग गई। इसके बाद अधिकारियों और मेडिकल टीम भेज कर उसके गर्भाशय में IUD में गर्भनिरोधक यंत्र डाल दिए गए। इसके 2 साल बाद जनवरी 2018 में चीनी अधिकारी उसके पास फिर पहुँचे और तीन बच्चे पैदा करने के लिए 2 लाख रुपए की धनराशि दंडस्वरूप देने को कहा। इसके लिए उन्हें मात्र 3 दिनों का समय दिया गया।
ऐसा नहीं करने पर महिला को धमकी दी गई कि उसे और उसके पति को लाखों दूसरे उइगरों की तरह प्रताड़ना कैम्पों में डाल दिया जाएगा। शिनजियांग में डर का आलम ये है कि मात्र 1 साल में बच्चों के जन्म की दर 24% घट गई है, जबकि राष्ट्रीय स्तर पर ये औसत काफ़ी कम, मात्र 4.2% ही है।
फ़रवरी के अंत में हुए दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में भीड़ ने जम कर कहर बरपाया था। सीएए विरोध के नाम पर भड़काए गए इन दंगों में 53 लोग मारे गए और सैकड़ों घायल हुए। इनमें से एक ताहिर हुसैन भी है, जो आम आदमी पार्टी का निलंबित निगम पार्षद है। करावल नगर में दंगे भड़काने में उसकी भूमिका सबसे अहम थी। यहाँ हम दिल्ली दंगों में फाइल की गई चार्जशीट में ताहिर हुसैन की करतूतों का खुलासा करेंगे।
सबसे पहले आपको ले चलते हैं अमन इ-रिक्शा की दुकान पर, जो हर्ष ट्रेडिंग कम्पनी द्वारा संचालित किया जाता था। इसे फ़रवरी 25, 2020 को जला दिया गया। चार्जशीट की एफआईआर नंबर 114 में ताहिर हुसैन और उसके गुर्गों द्वारा हिन्दुओं की दुकानें जलाने के डिटेल्स हैं। इसमें बताया गया है कि ताहिर हुसैन ने कैसे दिल्ली में हुए हिन्दू विरोधी दंगों में हिन्दुओं की संपत्ति को जम कर नुकसान पहुँचाया और इसके लिए साजिश रची।
अमन इ-रिक्शा दुकान को जला दिया गया। शिकायतकर्ता के अनुसार, उसे कुल 30 लाख का रुपए नुकसान हुआ क्योंकि दुकान में जो भी था उसे जला डाला गया। उससे पहले दुकान को पूरी तरह लूट भी लिया गया था। चाँदबाग़ पुलिया के पास स्थित मस्जिद से ताहिर हुसैन ख़ुद भीड़ का नेतृत्व कर रहा था। इस दौरान वो कह रहा था कि शेरपुर चौक पर एक भी हिन्दू को बख्शा नहीं जाना चाहिए।
दुकानें लूट ली गईं, उन्हें जला डाला गया, हिन्दुओं पर पत्थरबाजी की गई और पेट्रोल बम फेंके गए। चार्जशीट में स्पष्ट लिखा है कि ताहिर हुसैन ने ही भीड़ को ये कह कर को भड़काया था कि हिन्दुओं ने दूसरे समुदाय वालों की दुकान को आग लगाया है, इसीलिए उन्हें छोड़ा नहीं जाना चाहिए। दरअसल, ताहिर हुसैन ने उमर खालिद और खालिद सैफी के साथ मिल कर 8 जनवरी को ही दंगों की साजिश रच ली थी।
दिल्ली दंगों की चार्जशीट का एक भाग
इन सबके अलावा शेल कंपनियों के माध्यम से भी पैसों का भारी लेनदेन किया गया था। फर्जी कंपनियों के माध्यम से हुए लेनदेन और ताहिर हुसैन के अकाउंट में आए संदिग्ध रुपयों से पता चलता है कि दंगे कराने के लिए उसके पास कई संगठनों द्वारा धनराशि प्रदान की गई थी। जेएनयू के छात्र नेता रहे उमर खालिद ने ताहिर हुसैन को आश्वस्त किया था कि ‘पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया’ उसे दंगों के लिए वित्त मुहैया कराएगा।
दंगों से पहले 22 फ़रवरी को ताहिर हुसैन ने थाने से अपने 100 राउंड्स वाली पिस्टल भी छुड़ा ली थी, जो जनवरी से ही थाने में जमा रखी हुई थी। चार्जशीट के अनुसार, दंगों से ठीक पहले पिस्तौल ले जाने के सम्बन्ध में उसने कोई संतुष्ट करने वाला जवाब नहीं दिया। उसके पास से 64 लाइव कारतूस मिले थे और 22 खाली कारतूस जब्त किए गए थे। बाकी कारतूसों को कहाँ प्रयोग में लाया गया था, इस सम्बन्ध में उसके पास कोई जवाब नहीं था।
24-25 फ़रवरी की रात ताहिर हुसैन ने अपने परिवार की ‘सुरक्षा’ के बहाने मुस्तफाबाद स्थित अपने घर पर रखा था लेकिन वो खुद अपनी इमारत में मौजूद रहा। चार्जशीट के अनुसार, हिन्दुओं के खिलाफ भीड़ का नेतृत्व करने और ‘स्थिति पर नज़र रखने के बहाने’ वो वहाँ मौजूद रहा। उसने पुलिस को कई कॉल्स किए, ताकि उसकी दंगों में भागीदारी पर किसी को शक न हो। मई 5 को उसने अपने कबूलनामे पर साइन किया, जिसमें उसने इलाक़े के सारे कैमरों को तोड़ डालने की बात स्वीकार की है।
ताहिर हुसैन ने कबूल किया है कि सीएए के समर्थन में भी रैलियाँ होने वाली थीं, इसीलिए उसने ‘हिन्दुओं को सबक सिखाने’ के लिए दंगों की साजिश रची। इसी क्रम में उसने अपने घर को इस्लामी भीड़ के लिए लॉन्चपैड बनाया, ताकि हिन्दुओं को निशाना बनाया जा सके। उसने ईंट-पत्थर व अन्य हथियार जमा करने की बात भी कबूल की। उसने बताया कि उसके समर्थक ‘अल्लाहु अकबर’ और ‘काफिरों को मारो’ चिल्ला रहे थे।
ताहिर हुसैन का कबूलनामा-1
हालाँकि, यहाँ ताहिर हुसैन की ये बात विश्वास लायक नहीं है कि अफवाह के बाद कट्टरपंथियों ने हिंसा की क्योंकि जाँच में पता चल चुका है कि दंगों की तैयारी लम्बे समय से हो रही थी, इसीलिए इस्लामी भीड़ ही इसके लिए जिम्मेमदार थी। ये लोग इसकी साजिश लम्बे समय से रच रहे थे और तैयार भी बैठे थे। अब आते हैं वामपंथी मीडिया पर, जिसने ताहिर हुसैन को बचाने के लिए उसके द्वारा पुलिस को कॉल्स करने का बहाना बनाया।
‘द वायर’ ने तो ताहिर हुसैन का इंटरव्यू तक लिया था, जिसमे उसने पुलिस को ‘बचाव के लिए’ कई कॉल्स करने का दावा किया था। एनडीटीवी ने भी किया था। उसी वीडियो में इसने कोर्ट में सरेंडर करने की बात करते हुए न्यायपालिका में भरोसा जताया था। इसके अलावा उसके ट्वीट्स को भी मीडिया ने बढ़ा-चढ़ा कर पेश किया था, जिसमे उसने खुद के ‘फँसे होने’ और दंगों का शिकार होने की बात कही थी।
जहाँ ताहिर हुसैन पहले कह रहा था कि दंगों से 2 दिन पहले ही पुलिस ने उसे बचाया था, कबूलनामे में वो साफ़ बताता है कि वो अपने परिचितों के यहाँ छिपता फिर रहा था और उसने अपने घर पर अर्धसैनिक बलों को तैनात देख कर वापस भीड़ को भड़काने का काम किया था। आम आदमी पार्टी के कई नेताओं ने ताहिर हुसैन का बचाव किया था। अमानतुल्लाह खान ने तो अब भी ताहिर के बचाव में मोर्चा खोल रखा है।
बाद में ताहिर हुसैन ने ख़ुद एक वीडियो जारी कर दावा किया कि भीड़ ने उसके घर पर कब्जा कर के उसे हमले का लॉन्चपेड बना दिया है और वो खुद दंगों का शिकार है क्योंकि 2 दिन पहले ही पुलिस ने उसे बचाया था। ‘द वायर’ ने इन्हीं तर्कों की बात करते हुए उसके द्वारा पुलिस को बार-बार कॉल किए जाने का मुद्दा बनाया था। ताहिर ने ख़ुद अपने कबूलनामे में बताया दिया है कि वो ख़ुद को निर्दोष दिखाने के लिए ऐसा कर रहा था।
एनडीटीवी का प्रोपगंडा
क्या ये वामपंथी मीडिया पोर्टल अब इसके लिए माफ़ी माँगेंगे? उसने ख़ुद को ‘दंगों में फँसा हुआ’ दिखाने के लिए और अपने पक्ष में सबूत बनाने के लिए ये ड्रामा रचा था, ऐसा उसने ख़ुद स्वीकार किया है। साथ ही उसने कहा कि उसे पता था कि हथियारों से लैस भीड़ पुलिया के पास से ही पुलिस को भगा देगी। एक और आश्चर्यजनक बात उसने ये कही है कि उसने 24-25 फरवरी की रात पुलिस के साथ क्षेत्र में घूम कर लोगों से ‘शांति की अपील’ भी की थी।
यानी उसने ‘काफिरों को मारने’ और ‘हिन्दुओं को सबक सिखाने’ के लिए ये सब किया। आपको पता है कि अपने बयान के अंत में ताहिर हुसैन ने क्या कहा- ‘मुझसे गलती हो गई। मुझे माफ़ कर दीजिए।‘ ऑपइंडिया ने आईबी में कार्यरत रहे अंकित शर्मा हत्याकांड में भी ताहिर हुसैन की संलिप्तता को लेकर कई लेख और ख़बरें प्रकाशित की थी। अब चार्जशीट के बाद इसकी एक के बाद एक परत खुल रही है।
‘द वायर’ ने की थी ताहिर हुसैन को बचाने की कोशिश
दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन ने न्यायिक हिरासत के दौरान पुलिस के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था, जिसमें उसने जानकारी दी है कि वो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा का निवासी है। उसके तीन और भाई हैं, जिनके नाम हैं- नजर अली, शाह आलम और शाने आलम। 8वीं तक पढ़ा ताहिर हुसैन 1993 में अपने पिता के साथ दिल्ली आया था और दोनों पिता-पुत्र बढ़ई का काम करते थे।
ताहिर हुसैन ने जानकारी दी कि उसने भीड़ को अपनी छत पर खड़े होकर गोलीबारी और पत्थरबाजी करने को कहा क्योंकि उसे लगता था कि उसका घर ऊँचा है तो वो हिंदुओं को आसानी से निशाना बना सकता है। उसने कबूल किया है कि भीड़ पेट्रोल बम लेकर आई थी। उसने बताया कि उसके भाई शाह आलम ने समर्थकों संग मिल कर महक सिंह की पार्किंग में आग लगाई थी।
भाजपा के राज्यसभाः सांसद सुब्रह्मण्यम स्वामी ने बॉलीवुड के तीनों खान पर करारा हमला बोलते हुए पूछा है कि क्या ये क़ानून से ऊपर हैं जो कनेक्शन की जाँच नहीं की जा रही है? सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या पर भी शक जताते हुए अधिवक्ता ईशकरण भंडारी से कहा है कि वो इस मामले में कोर्ट जाने के विकल्पों को देखें। बता दें कि तीनों खान पहले से ही जनता की आलोचना का सामना कर रहे हैं।
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने सुशांत सिंह राजपूत की आत्महत्या मामले में सीबीआई जाँच के लिए भी आवाज़ उठाई है। पूर्व कैबिनेट मंत्री सुब्रह्मण्यम स्वामी ने माँग की गई कि तीनों खानों की संपत्ति की जाँच की जाए। स्वामी ने सवाल उठाया कि बॉलीवुड के तीन बाहुबली सलमान खान, शाहरुख खान और आमिर खान सुशांत सिंह राजपूत के कथित आत्महत्या मामले पर चुप्पी क्यों साधे हुए हैं? उन्होंने विदेश, खासकर दुबई में उनकी सम्पत्तियों की जाँच के लिए भी आवाज़ उठाई।
सुब्रह्मण्यम स्वामी ने ट्विटर पर पूछा, “किसने उन्हें बँगले गिफ्ट किए? कैसे उन्होंने इतनी बड़ी संपत्ति खरीदी? प्रवर्तन निदेशालय की एसआईटी, आईटी और सीबीआई द्वारा इसकी जाँच की जानी चाहिए। क्या तीनों खान कानून से ऊपर हैं?” इससे पहले उन्होंने अधिवक्ता भंडारी को सुशांत सिंह राजपूत मामले में तथ्यों की जाँच कर के सीबीआई जाँच की गुंजाइश पर विचार करने को कहा था।
The assets created by these 3 Khan Musketeers in India and abroad especially in Dubai need to be investigated . Who gifted them bunglows and properties there and how they bought it and the cartelisation needs to be investigated by SIT of ED , IT and CBI. Are they above the law?
बता दें कि शेखर सुमन ने स्पष्ट कहा था कि उन्हें इस बता पर यकीन नहीं है कि सुशांत सिंह राजपूत जैसा मजबूत इरादों वाला और प्रतिभाशाली व्यक्ति आत्महत्या कर सकता है। उन्होंने कहा था कि अगर ऐसा होता तो वो कोई न कोई सुसाइड नोट ज़रूर छोड़ जाते। उन्होंने सुशांत सिंह राजपूत की मृत्यु के मामले में सीबीआई जाँच के लिए दबाव बनाने हेतु ‘जस्टिस फॉर सुशांत फोरम’ की स्थापना की है। उन्होंने बताया कि इसका उद्देश्य है तानाशाही और गुटबाजी ख़त्म करना और माफियाओं पर लगाम लगाना।
बता दें कि अभिनेत्री कंगना रनौत और रवीना टंडन के अलावा निर्देशक अभिनव सिंह कश्यप ने भी बॉलीवुड में गुटबाजी के ख़िलाफ़ आवाज़ उठाई थी। बकौल अभिनव, वो लोग ऐसे सफेदपोश हैं जिनके सभी से अच्छे सम्बन्ध हैं और इस खेल में सभी शामिल हैं। उनकी थ्योरी है- “हमाम में सब नंगे हैं, जो नहीं हैं, उनको नंगा करो क्योंकि अगर एक भी पकड़ा गया तो सभी पकड़े जाएँगे।”
कानपुर एनकाउंटर की जाँच के लिए अब योगी आदित्यनाथ सरकार ने एसआईटी का गठन कर दिया है। गौरतलब है कि कानपुर में आठ पुलिसकर्मियों की गैंगस्टर विकास दुबे और उसके साथियों ने जघन्य हत्या की थी। इस मामले की विस्तृत जाँच के लिए अपर मुख्य सचिव संजय भूसरेड्डी की अध्यक्षता में एसआईटी का गठन किया गया है। एसआईटी को 31 जुलाई तक अपनी जाँच पूरी करके सरकार को रिपोर्ट सौंपनी है।
#KanpurEncounter case: State Government has ordered that a Special Investigation Team (SIT) will conduct the investigation in the case. SIT will be headed by Additional Chief Secretary Sanjay Bhoosreddy. pic.twitter.com/95H9OGHRc0
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, अपर पुलिस महानिदेशक हरिराम शर्मा और पुलिस उपमहानिरीक्षक जे. रवींद्र गौड़ को भी एसआईटी में शामिल किया गया है। एसआईटी के जरिए घटना से जुड़े विभिन्न प्रकरण की जाँच की जाएगी। यहाँ विकास दुबे के उदय के कारणों की भी पड़ताल की जाएगी। बेहद मुस्तैदी के साथ 31 जुलाई 2020 एसआईटी को अपनी जाँच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध करवानी होगी।
रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि एसआईटी के जरिए गैंगस्टर विकास दुबे और पुलिस के रिश्तों के साथ उस पर अब तक एक्शन न होने के कारणों की भी जाँच की जाएगी। इसके अलावा विकास दुबे के एक साल के कॉल रिकॉर्ड की भी विस्तृत जाँच की जाएगी। ताकि पता चल सके कि वो कहाँ गया। किससे बात की और किस-किस ने उसकी मदद की।
इसके अलावा विकास दुबे के खिलाफ अब तक आई शिकायतों पर थानाध्यक्ष चौबेपुर और जनपद के अन्य अधिकारियों के जरिए क्या जाँच की गई और क्या कार्रवाई की गई। हुई या नहीं, इसकी रिपोर्ट भी सौंपी जाएगी। साथ ही विकास दुबे और उसके साथियों के संपर्क में आए सभी पुलिसकर्मियों के खिलाफ सबूत मिलने के बाद उन पर भी कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मुख्य आरोपित ताहिर हुसैन ने न्यायिक हिरासत के दौरान पुलिस के समक्ष अपना बयान दर्ज कराया था, जिसमें उसने जानकारी दी है कि वो मूल रूप से उत्तर प्रदेश के अमरोहा का निवासी है। उसके तीन और भाई हैं, जिनके नाम हैं- नजर अली, शाह आलम और शाने आलम। 8वीं तक पढ़ा ताहिर हुसैन 1993 में अपने पिता के साथ दिल्ली आया था और दोनों पिता-पुत्र बढ़ई का काम करते थे।
शुरुआत में उसने अपने ही मकान में फर्नीचर कि फैक्ट्री खोली थी, जिसके माध्यम से वो विभिन्न कंपनियों के शोरूम तैयार करता था। बिजनेस बढ़ने के साथ उसने ग्रेटर नोएडा, बेंगलुरू और कोलकाता में भी अपनी फैक्ट्री के ब्रांच खोले। साथ ही उसने 2012-13 में दिल्ली के खजूरी खास में अपने लिए मकान खरीदा और वहाँ फैक्ट्री भी स्थापित की। उसी इमारत मे वो रहता भी था और साथ ही उसका दफ्तर भी उसी में था।
अपने बयान में ताहिर हुसैन ने बताया है कि वो आम आदमी पार्टी से निगम पार्षद चुना गया लेकिन पार्टी ने अभी उसे निलंबित कर रखा है। उसने बड़ा खुलासा किया है कि वो CAA के समर्थकों को सबक सिखाना चाहता था। उसके कबूलनामे के अनुसार, उसने कहा कि जिस तरह से CAA के विरोध मे दंगे हो रहे थे। इसके समर्थन मे भी धरनों कि तैयारी थी। दंगों कि साजिश ने बारे में उसने बताया है:
“मेरा घर इलाके में सबसे ऊँचा था। CAA समर्थकों को सबक सिखाने के लिए मैंने अपने सहयोगियों के साथ पहले ही साजिश रच ली थी। घर में कन्स्ट्रक्शन का काम भी चल रहा था, ऐसे में ईंट-पत्थर इत्यादि समान पहले ही जमा कर लिए गए थे। मेरी लाइसेंसी पिस्टल थाने में जमा थी, जिसे मैं दंगों के 2-3 दिन पहली ही छुड़ा कर लाया था। पुलिस के हाथ सबूत न लगे, इसीलिए मैंने पहले ही क्षेत्र के सारे सरकारी व प्राइवेट CCTV कैमरे तोड़वा दिए थे। मैंने अपने समर्थकों को हर तरीके से तैयार रहने कह दिया था।”
ताहिर हुसैन ने पुलिस को बताया कि जब वो फरवरी 24, 2020 को अपने भाइयों एवं समर्थकों संग अपने दफ्तर मे बैठा था, तभी माहौल तनावपूर्ण हो गया और भीड़’ अल्लाहु अकबर’ व ‘मारो काफिरों को’ जैसे नारे लगाते हुए लाठी-डंडे से मुस्तैद थी। उसके समर्थकों ने ताहिर को बताया कि ‘हिन्दू लोग दूसरे समुदाय के घरों मे आग लगा रहे हैं’, जिसके बाद उसे गुस्सा आ गया और उसने अपने साथियों से कहा कि अब हिंदुओं को सबक सिखाने का वक्त आ गया है।
ताहिर हुसैन ने जानकारी दी कि उसने भीड़ को अपनी छत पर खड़े होकर गोलीबारी और पत्थरबाजी करने को कहा क्योंकि उसे लगता था कि उसका घर ऊँचा है तो वो हिंदुओं को आसानी से निशाना बना सकता है। उसने कबूल किया है कि भीड़ पेट्रोल बम लेकर आई थी। उसने बताया कि उसके भाई शाह आलम ने समर्थकों संग मिल कर महक सिंह की पार्किंग में आग लगाई थी।
ताहिर हुसैन ने ये भी बताया है कि कैसे उसने सबूत अपने पक्ष मे बनाने के लिए चालाकियाँ कीं। उसने चाँदबाग पुलिस स्टेशन और PCR को अपने मोबाईल से कई कॉल्स किए। बकौल ताहिर, उसे पता था कि उसके बुलाने के बावजूद पुलिस नहीं आएगी क्योंकि भीड़ इतनी मुस्तैद थी कि वो भारी से भारी पुलिस बल को भी मार के भगा सकती थी। उसने करावल नगर में हिंदुओं के दुकानों को आग के हवाले करने की बात भी कबूल की है। उसने कहा कि चारों ओर धुआँ ही धुआँ था।
उसने बताया कि शाम को जब पुलिस आई थी तो हिन्दू समुदाय के लोग ‘दिल्ली पुलिस ज़िन्दाबाद’ के नारे लगा रही थी और लोग ‘अल्लाहु अकबर’ बोल रहे थे। इस दौरान ताहिर हुसैन जाकिर नगर मे अपने परिचित तारिक मोइन रिजवी के घर मे छिपा हुआ था। फिर वो मूँगा नगर में इलियास के घर में छिपा। वो इस दौरान भीड़ को फिर से भड़काने की साजिश रचता रहा। अगले दिन भी वो अपने घर गया लेकिन अर्धसैनिक बलों के जवानों को देख वापस लौट गया।
ताहिर हुसैन ने स्वीकार किया है कि चाँदबाग पुलिस के पास फरवरी 25, 2020 को उसके इशारे पर ही हजारों मजहबी लोगों की भीड़ जमा हुई थी। इसके बाद हिंदुओं की दुकानों को आग के हवाले किया जाने लगा, लूटा जाने लगा और पत्थरबाजी चालू हो गई। ताहिर ने कहा कि इस दौरान वो बार-बार पुलिस को फोन कर के अपने बचने की भूमिका भी तैयार कर रहा था। पूरे कांड को अंजाम देने के बाद वो छिपता फिरता रहा।
बता दें कि चार्जशीट में पुलिस ने ताहिर के यहाँ काम करने वाले दो कर्मचारियों को मुख्य गवाह बनाया है। इन दोनों की पहचान गिरिष पाल और राहुल कसाना के रूप में हुई है। दोनों ने पुलिस को बताया है कि वे 24 फरवरी को खजूरी खास इलाके में हुसैन के कार्यालय में ही मौजूद थे। इन्होंने पुलिस को दिए बयान में बताया कि आखिर दंगों के दिन ताहिर हुसैन क्या कर रहा था और उस दिन उन लोगों ने क्या-क्या देखा।