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चीन में सूअर से फैलने वाला नया फ्लू वायरस: ‘पर्सन टू पर्सन ट्रांसमिशन’ की क्षमता, पूरे विश्व में फैलने का खतरा

अभी चीन के वुहान से निकले कोरोना वायरस से दुनिया उबरा भी नहीं है कि एक ऐसी ही नई समस्या ने सिर उठाना शुरू कर दिया है। चीन में वैज्ञानिकों ने एक नए फ्लू का पता लगाया है, जिसके वैश्विक आपदा में बदलने की आशंका जताई गई है। ये फ्लू सूअरों में फैल रहा है लेकिन इससे मनुष्यों को भी संक्रमित होने की आशंका है। विशेषज्ञों का कहना है कि ‘पर्सन टू पर्सन ट्रांसमिशन’ की क्षमता वाला ये वायरस पूरे विश्व में फ़ैल सकता है।

हालाँकि, अभी इसके तत्काल में इतनी बड़ी समस्या बनने की आशंका नहीं है लेकिन वैज्ञानिक कह रहे हैं कि इसके पास हर वो क्षमता है, जिससे ये पूरी दुनिया को अपनी चपेट में ले सके और एक बड़ी जनसंख्या को संक्रमित कर सके, इसीलिए इस पर काफ़ी क़रीब से नज़र रखने की ज़रूरत है। ये एकदम से नया है, इसीलिए लोगों के पास इससे लड़ने लायक इम्युनिटी नहीं है और इससे निपटने के लिए कोई योजना भी नहीं है।

सूअर के माँस का विश्व में बहुत बड़ा बाजार है, ऐसे में स्वाइन इंडस्ट्री वर्कर्स में इसके सबसे पहले फैलने की आशंका है, जिसके बाद ये अन्य लोगों को अपनी चपेट में ले सकता है। ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल अकादमी ऑफ साइंसेज’ जर्नल में सूअरों में फ़ैल रहे इस वायरस पर नज़र रखने की चेतावनी दी गई है। इससे पहले 2009 में स्वाइन फ्लू फैला था, जिसने पूरी दुनिया को तबाह किया था।

हाल ही में चीन के युन्नान प्रांत में एक व्‍यक्ति की को हंता वायरस से मौत हो गई थी। पीड़‍ित व्‍यक्ति काम करने के लिए बस से शाडोंग प्रांत लौट रहा था। उसे हंता वायरस से पॉजिटिव पाया गया था। बस में सवार 32 अन्‍य लोगों की भी जाँच की गई थी। हंता वायरस चूहे या गिलहरी के संपर्क में इंसान के आने से फैलता है। सेंटर फॉर डिजिज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन के मुताबिक, चूहों के घर के अंदर और बाहर करने से हंता वायरस के संक्रमण का खतरा रहता है।

वैज्ञानिकों ने जानकारी दी कि सूअर के अंदर ही इस वायरस को रोकने के लिए कदम उठाना होगा। इसके अलावा वहाँ काम करने वाले लोगों पर भी इसे लागू करना पड़ेगा। वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि अभी आगे और ज्‍यादा वायरस के आने का खतरा लगातार बना हुआ है।

CAA दंगों में लिप्त कॉन्ग्रेसी नेता शाहनवाज आलम गिरफ्तार: प्रियंका गाँधी का करीबी, UP अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ का है अध्यक्ष

उत्तर प्रदेश में कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं ने सोमवार (जून 29, 2020) की रात हजरतगंज थाने के सामने जा कर जम कर हंगामा किया। दरअसल, ये कॉन्ग्रेसी यूपी कॉन्ग्रेस के अल्पसंख्यक सेल के अध्यक्ष शाहनवाज आलम को गिरफ्तारी से भड़के हुए थे।

शाहनवाज आलम को रात में गिरफ्तार किया गया। इससे कॉन्ग्रेस कार्यकर्ता भड़क गए और उन्होंने थाने का घेराव कर के बवाल काटना शुरू कर दिया। पुलिस द्वारा लाख समझाने के बावजूद वो हंगामे पर उतारू रहे, जिसके बाद अंत में यूपी पुलिस को लाठियाँ चटका कर उन्हें खदेड़ना पड़ा।

बता दें कि यूपी कॉन्ग्रेस के माइनॉरिटी सेल के अध्यक्ष शाहनवाज आलम को सोमवार की रात 8 बजे तब गिरफ्तार किया गया, जब वो कॉन्ग्रेस मुख्यालय से अपने घर पहुँचे ही थे।

हज़रतगंज पुलिस ने दिसंबर 19, 2019 को लखनऊ में सीएए के विरोध में हुई हिंसा और आगजनी के मामले में शाहनवाज आलम को गिरफ्तार किया है। उन पर हिंसा में लिप्त होने और लोगों को भड़काने का आरोप है। डीसीपी सेंट्रल दिनेश सिंह ने शाहनवाज आलम की गिरफ्तारी की पुष्टि की है।

पुलिस ने कहा है कि दिसम्बर 2019 में सीएए विरोधी हिंसा के बाद से ही वो रडार पर था लेकिन उसके ख़िलाफ़ सबूत नहीं मिल रहे थे। जब-जब पुलिस को साक्ष्य मिले हैं, उसे धर-दबोच गया है। शाहनवाज से हजरतगंज के एसपी के नेतृत्व में पुलिस टीम पूछताछ में लगी है।

कॉन्ग्रेस का कहना है कि ये गिरफ्तारी का सही तरीका नहीं है और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सरकार बदले की राजनीति पर उतर आई है। इसीलिए शाहनवाज आलम की गिरफ्तारी के 1 घण्टे बाद से ही उबले कॉन्ग्रेसियों ने बवाल काटना शुरू कर दिया।

बाद में पुलिस की लाठी खा कर वो तितर-बितर हुए। उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस कमिटी के अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू और सीएलपी नेता आराधन मिश्रा सहित कॉन्ग्रेस के कई नेतागण हज़रतगंज कोतवाली आया धमके। वहाँ पुलिस और इन कॉन्ग्रेस नेताओं के बीच काफी देर तक जोरदार बहस चलती रही।

हंगामे पर उतारू कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं को पुलिस ने पहले समझाया, लेकिन जब वे नहीं माने तब नारेबाजी कर रहे कार्यकर्ताओं हल्का लाठीचार्ज करना पड़ा। कोतवाली परिसर को खाली कराने में पुलिस को खासी मशक्कत करनी पड़ी।

इसी क्रम में उत्तर प्रदेश कॉन्ग्रेस ने एक सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया है। इस वीडियो क्लिप में यूपी के पुलिसकर्मी सादे कपड़ों में दिख रहे हैं। पुलिस शाहनवाज आलम को बोलेरो गाड़ी से थाने ले जाती हुई दिख रही है।

आलम को कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा का करीबी नेता माना जाता है। यूपी में उसे प्रियंका गाँधी की कोर टीम का हिस्सा माना जाता है। ऐसे में उसे बचाने के लिए कॉन्ग्रेस नेताओं का सड़क पर आना लाजिमी है।

कॉन्ग्रेस पार्टी शाहनवाज के मुस्लिम होने के कारण इसे ‘मुस्लिमों पर अत्याचार’ को मुद्दा बना कर उछाल रही है। हालाँकि, सीएए विरोधी दंगों को लेकर सरकार सख्त है और कड़ी कार्रवाई कर रही है।

प्रियंका गाँधी ने विरोध जताते हुए कहा कि कॉन्ग्रेस के नेता और कार्यकर्ता जनता के मुद्दों पर आवाज उठाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। उन्होंने दावा किया कि भाजपा सरकार यूपी पुलिस को दमन का औज़ार बनाकर दूसरी पार्टियों को आवाज उठाने से रोक सकती है, हमारी पार्टी को नहीं।

प्रियंका गाँधी ने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा कि देखिए किस तरह यूपी पुलिस ने हमारे अल्पसंख्यक विभाग के अध्यक्ष को रात के अंधेरे में उठाया गया। उनका आरोप है कि फर्जी आरोपों को लेकर कॉन्ग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू को भी को चार हफ़्तों के लिए जेल में रखा गया था। प्रियंका गाँधी ने आरोप लगाया कि ये पुलिसिया कार्रवाई दमनकारी और आलोकतांत्रिक है। हालाँकि, पुलिस ने कहा कि वो तय प्रक्रिया के तहत कार्रवाई कर रही है।

चीनी सरकार को भी नहीं देते किसी भारतीय नागरिक का डेटा: प्ले स्टोर से हटाए जाने के बाद TIkTok

भारत सरकार ने चीन पर डिजिटल स्ट्राइक करते हुए टिक-टॉक (TikTok) और हेलो एप सहित 59 चीनी एप्लीकेशंस को प्रतिबंधित कर दिया। भारत सरकार ने कहा है कि देश की सम्प्रभुता और सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए ये निर्णय लिया गया।

अब TikTok ने प्रतिबंधित होने के बाद बयान जारी किया। सोमवार (जून 29, 2020) को TikTok को बैन किए जाने के बाद अगले ही दिन गूगल प्ले स्टोर और एप्पल एप स्टोर ने भी उसे निकाल फेंका।

TikTok ने अपने आधिकारिक बयान में कहा है कि भारत सरकार ने चीन के 59 एप्लीकेशंस को प्रतिबंधित किया है और वो इस आदेश के पालन की प्रक्रिया में हैं। साथ ही TikTok ने ये भी जानकारी दी है कि उसके लोग भारत सरकार में इस मामले से जुड़े लोगों से संपर्क में है और जल्द ही वो उनसे मिल कर अपना स्पष्टीकरण देने वाले हैं।

TikTok ने कहा कि वो भारत सरकार के नियम-क़ानून के दायरे में रहते हुए डेटा की प्राइवेसी और सिक्योरिटी की ज़रूरतों का ख्याल रखता है। साथ ही TikTok ने ये भी दावा किया कि उसने भारत के किसी भी नागरिक की कोई भी सूचना किसी भी विदेशी सरकार के साथ साझा नहीं किया है। TikTok का कहना है कि इसमें चीन की सरकार भी शामिल है। कम्पनी ने अपने ट्विटर हैंडल पर आधिकारिक बयान जारी करते हुए कहा:

“अगर हमसे विदेश में किसी भी देश की सरकार कहे भी कि उन्हें लोगों के डेटा की सूचना चाहिए, तब भी हम ऐसा नहीं करेंगे। हमारे लिए हमारे यूजरों की प्राइवेसी और सत्यनिष्ठा सबसे ऊपर है। TikTok ने इंटरनेट को लोकतान्त्रिक बनाया है और 14 भारतीय भाषाओं में इसे उपलब्ध कराया है। लाखों यूजर्स, कलाकार, कहानीकार, शिक्षकों और परफॉर्मर्स अपनी जीविका के लिए TikTok पर निर्भर हैं। इनमें से कई तो ऐसे हैं, जिन्होंने इंटरनेट ही पहली बार प्रयोग किया है।”

ये बयान TikTok इंडिया के हेड निखिल गाँधी ने जारी किया है। बता दें कि सरकार ने ‘मेक इन इंडिया’ पर भी जोर दिया है। लोगों ने भारतीय प्रतिभाओं व स्टार्टअप्स को इन एप्लीकेशंस की तर्ज पर एप्स डेवेलोप करने को कहा गया है, ताकि यहाँ जॉब्स भी क्रिएट हों और इंडस्ट्री में प्रतिस्पर्द्धा भी बढ़े। फ़िलहाल सोशल मीडिया में लोगों ने चीन पर डिजिटल स्ट्राइक के लिए सरकार को धन्यवाद दिया है।

आँध्र प्रदेश में 2 महीने में तीसरी बार गैस लीक: 2 मजदूरों की मौत, 4 अस्पताल में भर्ती

आँध्र प्रदेश के विशाखापत्तनम में मंगलवार (जून 30, 2020) की सुबह एक फैक्ट्री में गैस लीकेज के कारण 2 मजदूरों की मौत हो गई। घटना सेनर लाइफ साइंसेस प्राइवेट लिमिटेड कंपनी में घटी। यहाँ बेन्जीमिडेजोल गैस लीक हुई और फैक्ट्री पर काम कर रहे मजदूर इसकी चपेट में आ गए। हालाँकि, गैस के रिसाव के कुछ समय बाद हालात पर काबू पा लिया गया

न्यूज एजेंसी एएनआई के मुताबिक परवाडा पुलिस थाने के इंस्पेक्टर उदय कुमार ने बताया, “दो लोगों की मौत हुई है और चार लोगों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अब हालात पूरी तरह से काबू में है। जिन दो लोगों की मौत हुई, वे साइट पर ही मौजूद थे। गैस का फैलाव अन्य किसी जगह पर नहीं हुआ है।”

बताया जा रहा है जिस समय गैस लीक का यह हादसा हुआ, उस समय फार्मा कंपनी में 30 लोग काम कर रहे थे। अचानक छह वर्करों को चक्कर आया और वे बेहोश होकर गिर पड़े। सभी बेहोश कर्मचारियों को अस्पताल ले जाया गया जहाँ दो की मौत हो गई। चार का इलाज अस्पताल में चल रहा है। मारे गए कर्मचारियों की पहचान नरेंद्र और गौरी शंकर के रूप में हुई है।

अब इस मामले के संबंध में राज्य के मुख्यमंत्री वाईएस जगन मोहन रेड्डी ने जाँच के आदेश दिए हैं। प्रदेश मुख्यमंत्री कार्यालय के अनुसार, फैक्ट्री में यह हादसा देर रात साढ़े 11 बजे हुआ। इसके तुरंत बाद फैक्ट्री को बंद कर दिया गया और जरूरी कदम उठाए गए। गैस लीक कैसे हुई इसकी जाँच चल रही है। फिलहाल प्रथम दृष्टया में तकनीकी कारण से गैस लीक होना बताया जा रहा है।

गौरतलब है कि पिछले 2 महीने में प्रदेश में लीकेज की यह तीसरी घटना है। इससे पहले 7 मई को विशाखापट्टनम के करीब एक फैक्ट्री में लीक से 11 लोगों की मौत हुई थी। इस घटना में सीएम जगन मोहन रेड्डी ने मारे गए लोगों के परिजनों को 1 करोड़ रुपए की सहायति राशि देने का ऐलान किया था। इसके बाद इसी महीने 27 तारीख को कुर्नूल में भी एक हादसा हुआ था। जहाँ कंपनी के मैनेजर की मौत हो गई थी।

भारत की पहली स्वदेशी वैक्सीन, COVAXIN कोविड-19 से लड़ने के लिए तैयार: मानव परीक्षण की मिली मंजूरी

कोरोना वायरस के बढ़ते कहर के बीच भारत की एक कंपनी भारत बायोटेक ने बड़ी राहत की खबर का ऐलान किया है। दरअसल, कंपनी का दावा है कि उन्होंने कोरोना की वैक्सीन COVAXIN तैयार कर ली है।

बड़ी बात ये है कि उन्हें इस वैक्सीन को इंसानों पर आजमाने के लिए अनुमति भी मिल गई है। अब आगे मानव ट्रायल के नतीजों के आधार पर इस वैक्सीन को अपनाने का फैसला लिया जाएगा।

भारत बायोटेक ने अपने अधिकारिक बयान में कहा कि उसने भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद यानी ICMR और राष्ट्रीय विषाणु विज्ञान संस्थान (NIV) के साथ मिलकर इसे तैयार किया है।

सेंट्रल ड्रग्स स्टैंडर्ड कंट्रोल ऑर्गेनाइजेशन (CDSCO)और स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय ने इस स्वदेशी वैक्सीन के फेज-1 और फेज-2 मानव क्लीनिकल परीक्षण की मंजूरी दे दी है।

कंपनी ने अपने बयान में कहा कि अगले महीने से इस वैक्‍सीन का इंसानों पर परीक्षण शुरू हो जाएगा। कंपनी ने यह भी बताया कि कोरोना वायरस स्ट्रेन (SARS-CoV-2 स्ट्रेन) को पहले पुणे स्थित NIV में अलग किया गया और बाद में भारत बायोटेक को ट्रांस्फर कर दिया गया।

न्यूज एजेंसी एएनआई के अनुसार, एमडी डॉ कृष्णा ईल्ला ने कहा, “हमें कोविड-19 के भारत के पहले स्वदेशी वैक्सीन कोवैक्सिन की घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है। इसे तैयार करने में ICMR और NIV का सहयोग उल्लेखनीय रहा। CDSCO के सक्रिय दृष्टिकोण से इसके परीक्षण की मंजूरी मिलने में सहायक रहा।”

गौरतलब हो कि कोवैक्सीन पहली देसी वैक्सीन है, जिसे भारत बायोटेक ने तैयार किया है। हैदराबाद की जिनोम वैली में अति सुरक्षित लैब की बीएसएल-3 (बायोसेफ्टी लेवल 3) में इसे बनाया गया

इसके बाद कंपनी द्वारा प्री-क्लीनिकल स्टडीज के नतीजे सरकारी संस्‍थानों को सौंपे गए। फिर डीसीजीआई और स्वास्थ्य मंत्रालय ने ह्यूमन ट्रायल के फेज-1 और फेज-2 की अनुमति दी।

भारत बायोटेक के अध्यक्ष और प्रबंध निदेशक डॉ. कृष्णा ईल्ला के मुताबिक, रिसर्च एंड डेवेलपमेंट (आरएंडडी) टीम के अथक प्रयासों का ही नतीजा है कि यह काम सार्थक हो पाया।

यहाँ बता दें भारत बायोटेक का वैक्सीन बनाने में पुराना अनुभव रहा है। इससे पहले कंपनी ने पोलियो, रेबीज, रोटावायरस, जापानी इनसेफ्लाइटिस, चिकनगुनिया और जिका वायरस के लिए भी वैक्सीन बनाई है।

मरे हुए जानवर के खाल के अंदर छिपाकर की जा रही बछड़े की तस्करी, BSF के जवानों ने बचाई जान

बंगाल में भारत-बांग्लादेश सीमा पर बीएसएफ की कड़ी निगरानी व सख्ती के चलते जब पशु तस्करों की कोई चाल कामयाब नहीं हो रही तो अब वे घृणित एवं क्रूर हथकंडे अपनाकर सभी सीमाओं को लाँघने पर उतारू हैं।

बीएसएफ के दक्षिण बंगाल फ्रंटियर के जवानों ने अब मालदा जिले से तस्करों की एक ऐसी ही घिनौनी करतूत का पर्दाफाश किया है। इस मामले में मरे हुए जानवर के शव (खाल) के अंदर एक बछड़े को छिपाकर नदी के रास्ते बांग्लादेश में तस्करी की जा रही थी। 

यह घटना रविवार (जून 28, 2020) शाम की है। 44वीं बटालियन सीमा सुरक्षा बल सेक्टर मालदा के सजग सीमा प्रहरियों ने तस्करों की इस करतूत का भंडाफोड़ कर बछड़े को बचाया।

अधिकारियों ने बताया कि महानंदा नदी, जो कि सीमा चौकी आदमपुर और सीमा चौकी कुमारपुर जिला मालदा के बीच से बांग्लादेश की तरफ बहती है, में जब जवान निगरानी कर रहे थे तो उन्होंने एक प्लास्टिक की बोरी से बँधा हुआ कुछ पानी में तैरता देखा।

बीएसएफ अपनी गश्त करने वाली नाव को उस तरफ ले कर गए और नजदीक जाकर देखा कि एक मरे हुए जानवर की बॉडी के अंदर कुछ बँधा हुआ था। इसके साथ जलकुंभी भी बँधा हुआ था। इसके अलावा केले के पेड़ का तना भी बँधा हुआ था। 

जब इसको बीएसएफ जवानों ने गौर से देखा तो पाया कि मरे हुए जानवर की खाल में एक छेद से किसी जानवर की नाक बाहर दिखाई दे रहा था। जब इसे खोला गया तो उसके अंदर से एक जिंदा बछड़ा निकाला गया, जिसकी टाँगे और आँख रस्सी तथा कपड़े से बाँध रखी थी। बछड़ा तड़प रहा था, क्योंकि उसे साँस लेने में दिक्कत हो रही थी। सीमा प्रहरियों ने तुरंत बछड़े को बाहर निकाल कर उसका बचाव किया

बीएसएफ के अधिकारी ने कहा, “गो तस्करों ने मवेशियों की तस्करी के क्रूर और निर्मम तरीके अपनाने शुरू कर दिए हैं।” उन्होंने बताया कि खासकर बरसात व बाढ़ के समय में जब नदियों में पानी उफान पर होता है, उसका बहाव तेज हो जाता है तो तस्कर पशुओं को नदी की धारा में बहा देते हैं ताकि यह बहकर बांग्लादेश चले जाएँगे तथा वहाँ बांग्लादेशी तस्कर इसे निकाल लेंगे। लेकिन, हमारे जवान पूरी तरह सजग हैं और तस्करों की कोई भी कुटिल व घृणित चाल को सफल नहीं होने दे रहे। 

वहीं, 44वीं बटालियन के एक वरिष्ठ अधिकारी का कहना है कि उनकी बटालियन के जवानों ने सीमा रेखा पर चौकसी इस कदर बढ़ा दी है कि तस्कर पूरी तरह से हताश हो चुके हैं और तस्करी करने के लिए इस तरह के घृणित हथकंडे अपना रहे हैं।

इसके इतर असम दक्षिण सलमार मनकचर जिले से सीमा सुरक्षा बल ने नौ मवेशी तस्करों को पकड़ा। उनके पास से आठ पशुओं के सिर बरामद किए गए। गिरफ्तार किए गए मवेशी तस्करों की पहचान मेहर सैफुल हक, रफीकुल इस्लाम, रफीकुल इस्लाम, सफीदुर इस्लाम, मोहम्मद आफ्टर अली और नूरुद्दीन के रूप में की गई और वे सभी दक्षिण सलमारा कंकड़धार जिले के निवासी थे।

चीनी ऐप कैसे चुराते हैं आपके डेटा: अजीत भारती की विस्तृत रिपोर्ट | Ajeet Bharti on India blocking 59 Chinese apps

भारत सरकार ने टिकटॉक समेत 59 ऐप को बैन कर दिया। इसमें सेल्फी लेने वाले ऐप से लेकर, शॉर्ट वीडियो बनाने वाले, फाइल शेयर करने वाले और प्राइवेसी को खंडित करने वाले ऐप हैं। आपको पता भी नहीं होता है और मोबाइल क्लीन करने, फास्ट करने के नाम पर आपके डेटा चुरा लिए जाते हैं।

सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने इस पर बयान जारी करते हुए बताया कि ये सारे ऐप्स भारत की संप्रभुता, अखंडता, राष्ट्रीय प्रतिरक्षा, राष्ट्रीय सुरक्षा और पब्लिक ऑर्डर पर खतरा बन कर उभरा है। ये गंभीर चिंता का विषय है। इस पर जल्द कदम उठाने की जरूरत है। इसको लेकर सरकार को काफी समय पहले से आगाह किया जा रहा था। और आखिरकार भारत ने इसे बैन कर दिया। बहुत कम ऐसे देश हैं, जो ऐसे ऐप को बैन करने की सामर्थ्य रखते हैं।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें।

ताहिर हुसैन ने कहा: 8 जनवरी को ही खालिद सैफी, उमर खालिद से मिल कर दंगे की योजना बना ली थी

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़के दंगों से संबंधित चार्जशीट में आम आदमी पार्टी (AAP) के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया गया है। चार्जशीट में 24 और 25 फरवरी को चाँदबाग के एक पार्किंग लॉट में आगजनी और करावल नगर इलाके में एक गोदाम में लूटपाट और आगजनी से संबंधित है। दोनों ही घटनाओं में ताहिर हुसैन को मास्टरमाइंड बताया गया है। पार्किंग लॉट में आगजनी के दौरान कम से कम सौ वाहनों को आग लगा दी गई थी। 

चार्जशीट में बताया गया है कि 24 फरवरी को दोपहर 2:15 बजे ताहिर और अन्य आरोपित लियाकत अली, मोहम्मद आबिद, मोहम्मद शादाब, इरशाद, मोहम्मद रेहान, अरशद प्रधान आदि ने ताहिर के छत पर से प्रदीप पार्किंग लॉट के ऊपर पत्थरबाजी की, पेट्रोल बम फेंके।

चार्जशीट के अंश

इतना ही नहीं, इसके बाद इसके बाद कुछ और आरोपित शाह आलम, गुलफाम रियासत अली, अरशद कैय्यम, राशिद सैफी आदि पार्किंग लॉट के पास पहुँचे और उसका शटर तोड़ दिया। गाड़ियों में आग लगा दी, जिसने पार्किंग में खड़े सभी वाहनों को अपनी चपेट में ले लिया। साथ ही आरोपितों ने वहाँ पर उपस्थित लोगों को लूट लिया।

इसके बाद वे पहली मंजिल पर पहुँच गए और वहाँ मौजूद लोगों के पैसे और कीमती सामान लूट लिए। वहाँ एक शादी समारोह के लिए भोजन की तैयारी चल रही थी। हुसैन और अन्य लोगों ने तैयार किए गए भोजन को भी बर्बाद कर दिया।

चार्जशीट के अंश

चार्जशीट में कहा गया है कि 24 और 25 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए दंगे की योजना 8 जनवरी 2020 को ही तैयार कर ली गई थी। ताहिर हुसैन ने पूछताछ के दौरान खुद ये बातें कही।

ताहिर हुसैन ने बताया कि उसने 8 जनवरी को ही सीएए विरोधी प्रदर्शन स्थल शाहीनबाग में खालिद सैफी (India Against Hate Group) और उमर खालिद (JNU) के साथ मिलकर इस दंगे की योजना बना ली थी। उसने कबूला कि वो और भी कई सीएए विरोधी प्रदर्शन के आयोजकों से संपर्क में था।

ताहिर ने पूछताछ के दौरान ये भी बताया कि वो सीएए विरोधी प्रदर्शनों के लिए पैसे की भी व्यवस्था करता था और अपनी कंपनी के अकाउंट से भी उन्हें फंडिंग करता था। उसने यह भी खुलासा किया कि दिल्ली में एंटी सीएए प्रोटेस्ट की शुरुआत से ही वो लियाकत अली, इरशाद, शादाब, आबिद, मोहम्मद रेहान और अरशद प्रधान आदि के संपर्क में था।

दंगाइयों से सीधे संपर्क में था ताहिर हुसैन

इसके अलावा वो एंटी सीएए प्रोटेस्ट आयोजित करने वाले आयोजकों और कुछ वकीलों के भी संपर्क में था। ताहिर जिन एंटी सीएए आयोजकों के संपर्क में था, उसमें से कुछ नाम इस प्रकार हैं- हाजी मंगता (चाँद बाग मजार के पास स्थित प्रोटेस्ट साइट), हाजी बल्लो (खजूरी खास स्थित श्री राम कॉलोनी प्रोटेस्ट साइट), वाजिद खान (शाहीन बाग का प्रोटेस्ट साइट), डॉक्टर एमएम अनवर (फरुकिया मस्जिद के पास बृजपुरी पुलिया प्रोटेस्ट साइट)।

चार्जशीट के मुताबिक दंगे से संबंधित मामले में अब तक कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है। पिंजरा तोड़ की नताशा नरवाल और देवांगना कलीता को जाफराबाद दंगा के मामले में गिरफ्तार किया गया। खालिद सैफी को जगतपुरी दंगा मामले में और मोहम्मद अनीस को राजधानी स्कूल दंगा मामले में गिरफ्तार किया गया है। इ

सके अलावा चाँद बाग दंगा मामले में ताहिर के साथ ही लियाकत अली, अरशद प्रधान, मोहम्मद इरशाद, राशिद सैफी, मोहम्मद आबिद और मोहम्मद शादाब को गिरफ्तार किया गया है। इन सबका ताहिर हुसैन से सीधा संपर्क था।

बता दें कि ताहिर हुसैन फिलहाल आईबी स्टाफ अंकित शर्मा की हत्या और दिल्ली हिंसा में संलिप्तता के चलते गिरफ्तार है। आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा की हत्या करने के बाद उनकी लाश को नाले में फेंक दिया गया था।

मामले में गिरफ्तार अन्य आरोपित सलमान ने बताया था कि दंगाइयों ने अंकित का मजहब जानने के लिए उनके कपड़े उतारे थे। धर्म पुख्ता कर उन्हें चाकुओं से गोद डाला। सलमान ने बताया कि उसने खुद अंकित पर 14 बार चाकू से वार किए। अंकित के चेहरे पर काला कपड़ा डाल उन्हें आप के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के घर में ले जाया गया था। अंकित का शव 26 फरवरी को चॉंदबाग के नाले से मिला था।

दंगों को भड़काने में 1.3 करोड़ रुपए से भी ज्यादा फूँके गए। ताहिर हुसैन के छत से मिले सबूतों के अलावा उसके खिलाफ कई अन्य सबूतों की बात की गई है। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने भी बताया है कि वो दंगे भड़का रहा था। पुलिस को उसके पास से एक पिस्टल भी मिली थी। इसके साथ मिले कुल 200 गोलियों में से 75 बुलेट्स गायब थे।

उल्लेखनीय है कि सीएए, एनआरसी विरोध के नाम पर 23-24 फरवरी को दिल्ली में शुरू हुई हिंदू विरोधी हिंसा में 53 लोगों ने अपनी जान गँवा दी थी। 200 से अधिक लोग घायल हुए थे। इस दौरान दंगाइयों ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली के जाफराबाद, मौजपुर, बाबरपुर, घोंडा, चांदबाग, शिव विहार, भजनपुरा, यमुना विहार इलाकों में सरकारी और निजी संपत्ति को काफी नुकसान पहुँचाया था।

शिकारियों का रखा क्रूड बम खा गई गाय, मुँह में ही फटा, जबड़ा बुरी तरह जख्मी: आंध्र में केरल जैसी घटना

आंध्र प्रदेश के जंगलों में शनिवार (27 जून, 2020) को घास चरने गई एक गाय ने क्रूड बम खा लिया। यह उसके मुँह में फट गया, जिससे वह गंभीर रूप से जख्मी हो गई। पुलिस ने मामले की जाँच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक घटना आंध्र प्रदेश में चित्तूर जिले के पेड्डा पंजनी मंडल के कोगिलेरू गाँव की है। सब इंस्पेक्टर लोकेश रेड्डी ने बताया कि यह घटना उस वक्‍त हुई जब गाय जंगल में चरने गई थी। दरअसल बम जंगली जानवरों के लिए के लिए शिकारियों ने छिपा रखा था। इसे गाय ने चबा लिया और विस्‍फोटक उसके मुँह में ही फट गया।

लोकेश रेड्डी ने आगे कहा कि यह गाय ‘गोमाता पीठम’ नामक आश्रम की है। इस आश्रम में 70 गायों की देखभाल की जाती है। पुलिस ने बताया कि कुछ शिकारियों ने जंगली सूअरों को फंसाने के लिए जंगल में विस्फोटक लगाए थे।

इससे पहले हिमाचल प्रदेश में एक गाय को बम खिलाने की घटना सोशल मीडिया पर सामने आई थी, जिसमें गुरदयाल सिंह ने कहा था कि लोग गौरक्षा की बात कर रहे हैं, जबकी एक गर्भवती गाय को विस्फोटक खिला दिया गया।

गुरदयाल सिंह ने इस कृत्य के लिए नंदलाल नाम के व्यक्ति को जिम्मेदार बताया था। गुरदयाल का कहना था कि गाय के साथ ऐसी हरकत करने के बावजूद नंदलाल का कहना है कि उन्हें अब जो करना है करे लें और प्रधान से लेकर तमाम लोग उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकते।

उससे पहले 27 मई को केरल के मल्लपुरम से एक दिल दहलाने वाली घटना सामने आई। 15 वर्षीय गर्भवती हथिनी एक अमानवीय कृत्य का शिकार हो गई थी। उसे किसी उपद्रवी ने पटाखों से भरा अनानास खिलाया था, जिससे हथिनी के मुँह में विस्फोट हो गया और वह बुरी तरह जख्मी हो गई थी।

हथिनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला था कि वह गर्भवती थी। उसका जबड़ा टूट गया था और मुँह में विस्फोट के कारण वह अनानास चबाने के बाद कुछ खा नहीं पा रही थी। इस विस्फोट से उसकी जीभ और मुँह पर गंभीर चोटें आईं। इसके बाद वह एक नदी में चली गई और तीन दिनों के बाद आखिर में उसने प्राण त्याग दिए थे।

इस घटना की सोशल मीडिया पर बड़े पैमाने पर आलोचना हुई थी। इसके बाद लोगों ने शासन-प्रशासन से मामले की जाँच कराने और दोषियों पर कड़ी कार्रवाई करने की माँग की थी।

TikTok समेत 59 चीनी एप पर रोक, सीमा पर तनाव के बीच मोदी सरकार का बड़ा फैसला

चीन के साथ जारी तनाव के बीच केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने 59 चीनी एप पर रोक लगा दी है।

इनमें टिकटॉक (TikTok) भी शामिल है। इसके अलावा यूसी ब्राउजर, कैम स्कैनर जैसे और भी कई ब्लॉक किए गए हैं। सरकार ने इन एप्स को सुरक्षा के लिहाज से खतरनाक बताया है।

भारत सरकार ने इन 59 एप्स को ब्लॉक करने का निर्णय लेते हुए कहा कि ये सारे एप्स भारत की संप्रभुता, अखंडता, प्रतिरक्षा, सुरक्षा और सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा हैं। सरकार ने भारतीय नागरिकों के डेटा की सुरक्षा और निजता पर चिंता जताते हुए कहा कि एंड्रायड और iOS प्लेटफॉर्म्स पर ये सारे एप्स डेटा चुराते हैं और विदेशों में स्थित सर्वर पर भेज देते हैं।

सूचना और प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने अपने बयान में यह भी कहा है कि कई लोगों ने डेटा सुरक्षा को ले कर सरकार से शिकायत की थी। सरकार ने उसका संज्ञान लेते हुए इन्हें ब्लॉक करने का निर्णय लिया है, क्योंकि ये न सिर्फ डेटा चोरी करते हैं बल्कि बिना यूजर को बताए, उनका इस्तेमाल गलत तरीकों से करते हैं। इससे अंततः भारत की संप्रभुता और राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता है।

इन सारी बातों को ध्यान में रखते हुए मंत्रालय ने लिखित बयान में कहा है कि यह हमारे लिए त्वरित कार्रवाई करने का समय है, क्योंकि इस तरह के खतरे गंभीर चिंता का विषय हैं। मंत्रालय ने यह भी कहा है कि आपातस्थिति मान कर यह फैसला लिया गया है।

गौरतलब है कि गलवान घाटी में चीनी सेना ने भारतीय सैनिकों पर धोखे से वार किया था। इसमें भारत के 20 सैनिक बलिदान हो गए थे। इसके बाद से ही देश में चीनी उत्पादों और एप के बहिष्कार की मॉंग ने जोर पकड़ रखा था। कई चीनी परियोजनाओं पर भी पिछले दिनों रोक लगाई गई थी।

गलवान की हिंसक झड़प के बाद चीन के भीतर भी वहॉं के सरकार को लेकर नाराजगी बढ़ती जा रही है। संघर्ष में चीन के 43 सैनिकों के मारे जाने की खबर आई थी। हालॉंकि चीन ने अब तक इसे सार्वजनिक नहीं किया है। इसकी वजह से सैनिकों के परिजन गुस्से में हैं। बताया जाता है कि कम्युनिस्ट सरकार अब उनकी आवाज दबाने में लगी है।