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मेवात: मुस्लिम युवकों के गिरोह ने दलित राहुल के सिर पर मारा फरसा, कहा- ‘यहाँ रहना है तो जूती के नीचे रहना होगा’

हरियाणा के मेवात जिले में दलितों पर अत्याचार की घटनाओं के क्रम में आज मामला- 24 वर्षीय राहुल का है। राहुल पर 21 अप्रैल 2020 को उसके गाँव उलेटा में मुस्लिम समुदाय के अनीश सहित कुछ लड़कों ने जानलेवा हमला बोला। जब उसका परिवार उसे बचाने गया, तो उन लोगों ने परिवार के सदस्यों पर भी हमला किया। इस पूरी घटना के दौरान राहुल के घर की महिलाओं पर भी मुसीबत टूट पड़ी और पुरुषों से भी मारपीट हुई।

स्थानीय सूत्रों की मदद से ऑपइंडिया ने जब मेवात के हालातों के मद्देनजर राहुल के चाचा जसवंत को संपर्क किया, तो उन्होंने अपने परिवार की आपबीती हमसे साझा की। उन्होंने बताया कि कैसे एक मजदूर परिवार का उलेटा गाँव में बहुल आबादी के लोगों ने जीना मुहाल कर दिया है। कैसे उन्हें जातिसूचक शब्द बोलकर घृणित महसूस कराया जाता है। कैसे उनकी शिकायत पर कोई त्वरित कार्रवाई नहीं होती। कैसे उन्हें आए दिन घुट-घुटकर जीना पड़ता है।

जसवंत बताते हैं, “कुछ समय पहले हमारे भतीजे ने अनीश नाम के लड़के को 6000 रुपए में अपना मोबाइल बेचा था। उस समय अनीश ने राहुल को सिर्फ़ 4000 रुपए दिए। जिसके कारण राहुल ने उसे फोन का बिल नहीं दिया। राहुल चाहता था कि एक बार 2000 हजार रुपए मिल जाएँ, तो वह अनीश को बिल भी दे देगा। वरना पता नहीं पैसे मिले या न मिले।”

राहुल के चाचा के मुताबिक, 21 अप्रैल को जब राहुल अपने घर से बाहर निकला तो अनीश ने रास्ते में उसे रोका और जातिसूचक शब्दों से अपमानित करते हुए बिल की माँग की। जब राहुल ने कहा कि वे उसे उसके 2000 रुपए लौटा दे, तो वह बिल भी तुरंत लाकर दे देगा। राहुल की ये बात कहते ही लड़ाई शुरू हो गई। थोड़ी देर बाद अनीश ने राहुल का कॉलर पकड़ा और मुस्लिम बहुल आबादी के लड़कों के साथ मिलकर उसपर हमला बोल दिया।

जसवंत कहते हैं कि इस दौरान गाँव के कुछ वरिष्ठों ने भी उनके लिए जातिसूचक शब्द बोले और उसे मारने-पीटने को बोला। मगर, जब चीखने-चिल्लाने की आवाज सुनकर उसके घर के लोग मौके पर पहुँचे, तो उन्होंने देखा कि वहाँ उनका घर का लड़का ही पीटा जा रहा था।

जसवंत कहते हैं, “हमारे घर के लोगों ने जब राहुल को बचाने का प्रयास किया। तो हमारे साथ भी मारपीट हुई और हमारे घर की महिलाओं को भी मारा गया। कुल 4 पुरुष और तीन महिलाओं के साथ मारपीट हुई। इसी बीच हमारे भाई की पत्नी को भी दो लोगों ने पकड़ा और उसे कमरे में अंदर ले जाने लगे। मगर, भला हो गाँव के कुछ लोगों का, जिन्होंने सही समय में आकर हम सबको उनसे बचाया। वरना उस दिन पता नहीं क्या हो जाता।”

राहुल

3 बच्चों के पिता जसवंत बताते हैं कि कम से कम 350 मुस्लिम घरों के बीच में 30-35 हिंदू परिवार वाले इस गाँव उलेटा में हिंदुओं का पिटना बहुत ज्यादा आम है। लोगों में बहुल आबादी का इतना खौफ है कि वे थाने जाने में भी हिचकते हैं। उनके मन में मानो बैठ गया है कि उनके पक्ष में कार्रवाई नहीं होगी। जसवंत अपनी आपबीती सुनाते हुए कहते हैं कि अगर आज हमें कहीं 12X12 का कमरा कोई रहने को दे दे, तो हम आज सपरिवार इस जगह को छोड़ने को तैयार हैं।

उलेटा का यह मजदूर अपनी मजबूरी सुनाते हुए कहता है कि गाँव का सरपंच तक उनसे उनका हाल नहीं लेता। इस बार तो ऐसा हुआ है कि कोई भी इस बारे में बात तक पूछने नहीं आया। बल्कि बदले में उन्हें गाँव के रसूखदार शख्स ने यह बोला कि यहाँ रहना है तो उनके जूती के नीचे रहना पड़ेगा।

जसवंत के अनुसार, उनकी स्थिति मेवात में बहुत ज्यादा खराब है, “आए दिन लड़ाई-झगड़ा हो जाता है। अब 21 अप्रैल वाली घटना में ही देखिए, बड़ी मशक्कत के बाद पुलिस ने हमारा मामला उपयुक्त धाराओं के साथ एससी/एसटी एक्ट के तहत 23 अप्रैल को दर्ज किया। लेकिन 30 अप्रैल तक हमारे केस से एससी/एसटी एक्ट को हटा दिया गया। वहीं 5 आरोपितों को भी रियायत मिल गई। हमारी माँग बस यही है कि FIR में हरिजन एक्ट लगाया जाए।” वे कहते हैं कि उन्होंने मामले में एक्ट हटाने से असंतुष्ट होने के कारण दूसरे डीएसपी से कार्रवाई की माँग भी की थी। जिसके बाद उनके मामले की तफ्तीश पुन्हाना डीएसपी विवेक चौधरी को सौंपी गई।

धारा हटाने की वजह पूछने पर जसवंत ने बताया कि उनके परिवार के लोगों ने अपने मामले में सबूत के तौर पर एक वीडियो पेश की थी। लेकिन बाद में उसी वीडियो को देखते हुए उनके केस से sc/st एक्ट हटा दिया और कहा गया कि ये मामला झगड़े का है। इसमें कोई गलत शब्द (जातिसूचक) नहीं है। जबकि जसवंत कहते हैं कि उन लोगों ने पहले ही ये बात साफ कर दी थी कि वो वीडियो सिर्फ़ इसलिए बनाई थी, ताकि पता चल सके कि कितने लोगों ने हमला किया।

ऑपइंडिया ने SC/ST एक्ट हटाए जाने पर किया पुलिस को संपर्क

ऑपइंडिया ने जब आरोपों की पुष्टि के लिए नगीना थाने में संपर्क किया। तो, SHO रमेश चंद्रा ने बताया कि राहुल के केस की जाँच फिरोजपुर झिरका के डीएसपी वीरेंद्र कर रहे थे। मगर, अब यह जाँच पुन्हाना डीएसपी विवेक चौधरी के पास है।

इसके बाद हमने धारा हटाने की वजह जानने के लिए फिरोजपुर झिरका डीएसपी को संपर्क किया। मगर, जैसे ही हमने उनसे मामले के बारे में पूछा, तो दूसरी ओर से कॉल डिस्कनेक्ट हो गई। इसके बाद हमने उनसे फिर संपर्क करने का प्रयास किया। मगर, हमारी कॉल नहीं रिसीव की गई।

फिर, हमने डीएसपी पुन्हाना विवेक चौधरी को संपर्क किया। उन्होंने ऑपइंडिया को इस बातचीत में बताया कि राहुल के केस में दोबारा से SC/ST एक्ट लगा दी गई है। इसके अलावा वेलफेयर ऑफिसर को भी पत्र लिख दिया गया है। मामले में चार्जशीट भी फाइल हो गई है।

डीएसपी विवेक चौधरी के बयान और पीड़ित परिवार के बयानों में विरोधाभास पाते हुए हमने इस संबंध में जसवंत को फिर संपर्क किया। हमने उनसे पूछा कि क्या उन्हें एस/एसटी एक्ट दोबारा लगने के बारे में जानकारी नहीं है?

तो उन्होंने बताया, हम बहुत बार थाने गए। पूछताछ की। लेकिन हमें इस बारे में पता नहीं चला। हालाँकि, बाद में डीएसपी विवेक चौधरी से बात करके जसवंत ने स्वयं पुष्टि की अब मामले में SC/ST एक्ट जोड़ दी गई है। इसके बारे में स्वयं डीएसपी ने उन्हें बताया।

10-12 साल पहले भी हुआ था झगड़ा

43 वर्षीय जसवंत कहते हैं कि उन्होंने 1992 के बाद से अब तक अपने गाँव में ऐसे अत्याचार के कई मामले देखे हैं। इनमें करीब 20 बार तो उनका परिवार इन अत्याचारों का भुक्तभोगी रहा है। वे बताते हैं कि 10-12 साल पहले भी उनकी इसी परिवार से लड़ाई हुई थी।

तब खेत जाते समय उनके परिवार यानी दलित घर की लड़कियों के ऊपर गंदा पानी डाल दिया गया था। मगर, जब इस बदसलूकी का विरोध करते हुए उनसे पूछा गया कि ये क्या हरकत है, तो उन्होंने अपनी गलती नहीं मानी और बदले में बहस करने लगे।

इसके बाद मुस्लिम परिवार ने अपने यहाँ आई एक पाँच महीने गर्भवती महिला के गर्भ गिरने का इल्जाम जसवंत के परिवार पर लगा दिया और उनके परिवार खिलाफ़ भ्रूण हत्या का मामला दर्ज करवाने की पूरी कोशिश की। बहुत प्रयासों के बाद इन लोगों ने गाँव वालों की मिन्नतें कर करके, गवाह इकट्ठा कर करके उस केस से अपना पीछा छुड़ाया। इस मामले में उनके परिवार के 50 हजार रुपए खर्च हो गए थे। जसवंत कहते हैं कि इतने साल हो गए ये सब झेलते-झेलते, उन लोगों को इन सबका कोई उपाय नहीं दिखता, इसलिए वे अब अपने बच्चों को पढ़ाते-लिखाते हैं, ताकि आगे वे ये सब न झेलें।

मामले में राहुल ने करवाई थी FIR

बता दें, जसवंत ने ऑपइंडिया से बातचीत के बाद राहुल के साथ हुई मारपीट मामले में दर्ज एफआईआर को भी साझा किया। जिसमें केस से जुड़ी सभी बातों का उल्लेख है।

एफआईआर में स्पष्ट शब्दों में लिखा है कि 21 अप्रैल 2020 को हुई इस घटना में तारिफ, वारिस, वाजिद, मोमिन अनीश, युसुफ, मुस्तुफा, आदिल, इस्लाम, अलीम, मजलिस, आरिफ, रुकसिना, ताहिरा, मिमकिना ने मिलकर उसपर व उसके परिवार पर जानलेवा हमला किया। साथ ही उनकी जाति को लेकर उनपर बार-बार टिप्पणी की। मगर, अन्य ग्रामीणों के आने से मामला काबू में आया। बाद में पास के अस्पताल में जाकर इन लोगों ने अपनी मेडिकल जाँच कराई।

23 अप्रैल को शाम 7:05 पर दर्ज एफआईआर में एफआईआर में राहुल ने बताया है कि उसपर इस घटना में तारीफ ने फरसे से हमला किया और अलीम ने तो बीच में ये भी कहा, “इस साले चमार को जान से मार दे मैं अपने आप देख लूँगा।” इतना ही नहीं राहुल की शिकायत के अनुसार आरोपितों ने उसे और उसके परिवार को जान से मारने की धमकी दी तथा जाते-जाते कहा कि आज बच गए लेकिन समय आने पर वो उन्हें मार देंगे। अगर गाँव में रहना है तो जूती के नीचे दबके रहना होगा।

इसके अलावा इस एफआईआर में ये शिकायत भी है कि साल के 6 महीनों में आरोपित उनसे झगड़ा करते रहते हैं। बाद में दबाव बनाकर फैसला करवा लेते हैं। इसलिए, अब वे लोग बस इतना चाहते हैं कि आरोपितों पर पहली बात तो कार्रवाई हो और दूसरा उनके जान-माल की रक्षा की जाए। वरना इन सब घटनाओं के कारण उन्हें मजबूरन अपना गाँव छोड़ना होगा।

CM खट्टर के पास शिकायत लेकर पहुँचा था पीड़ित परिवार, नहीं हो पाई मुलाकात

गौरतलब है कि मेवात में हिंदुओं पर होते अत्याचारों के मद्देनजर मुख्यमंत्री खट्टर ने कल दो समूह के लोगों के साथ मिनी सचिवालय में एक बैठक की थी। जहाँ जसवंत भी अपने परिजनों के साथ अपनी शिकायत लेकर पहुँचे। लेकिन, उनके कहे मुताबिक, सीएम ने उन लोगों से मुलाकात नहीं की और अंदर बैठे लोगों से बात करके चले गए। इसके बाद जसवंत और उनके साथ के सभी लोग सुबह 9 बजे से सचिवालय के बाहर इंतजार करते-करते शाम को घर लौटे।

बता दें, मुख्यमंत्री खट्टर भले ही बाहर इंतजार में बैठे लोगों से नहीं मिल पाए। लेकिन शाम तक मीडिया में उनकी घोषणाओं की खबरें आ गईं। जिनसे हिंदूवादी संगठनों में काफी संतोष देखने को मिला। विश्व हिंदू परिषद ने इसे हिंदू समाज की विजय बताया। साथ ही उम्मीद की घोषणाओं पर जल्द अमल किया जाएगा।

विदेश मंत्री का चीन को स्पष्ट संदेश: गलवान घाटी में जो हुआ वो चीन द्वारा पूर्व नियोजित था, जिसने अन्य घटनाओं को अंजाम दिया

चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से अपील की है कि इस घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को कड़ी सजा दें। साथ ही भारत को अपने जवानों पर नियंत्रण रखने की सलाह भी दी है। भारतीय विदेश मंत्री द्वारा चीन को कड़ा संदेश देते हुए कहा गया कि गलवान घाटी में जो हुआ वह चीन द्वारा पूर्व नियोजित और सुनियोजित कार्रवाई थी, जो इसके बाद की अन्य घटनाओं के लिए जिम्मेदार था।

चीन ने भरोसा दिलाया है कि जितनी जल्दी संभव होगा, वह तनाव कम करने और पीछे हटने की कोशिश करेगा। चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने भारत से यह भी कहा है कि वह उन लोगों को दंडित करें जिन्होंने यह विवाद शुरू किया।

चीनी विदेश मंत्री वांग ने जोर देते हुए कहा कि दोनों पक्षों को मतभेदों को सुलझाने के लिए मौजूदा तंत्र के माध्यम से संचार और समन्वय मजबूत करना चाहिए।

बातचीत के बाद विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि इस घटना का भारत-चीन द्विपक्षीय संबंधों पर गंभीर प्रभाव पड़ेगा। उन्होंने कहा कि समय की माँग यह थी कि चीनी पक्ष अपनी गतिविधियों पर विचार करता और आवश्यक कदम उठाता।

चीनी विदेश मंत्रालय ने लद्दाख क्षेत्र में सीमा पर हुई इस हिंसक झड़प के बाद कहा है कि भारत और चीन, दोनों देश विवाद सुलझाने के लिए उचित तरीका अपनाने पर सहमत हुए हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज भारत के बलिदानी सैनिकों को श्रद्दांजलि देते हुए कहा कि उनका यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। PM मोदी ने कई राज्यों के मुख्यमंत्रियों के साथ बैठक में लद्दाख में चल रहे विवाद पर कहा कि भारत शांति चाहता है, लेकिन करारा जवाब देने की क्षमता रखता है। पीएम मोदी ने इस विषय पर आगामी शुक्रवार को एक सर्वदलीय बैठक भी बुलाई है।

उल्लेखनीय है कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि चीन के 40 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई हैं। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है।

चीन और भारत के बीच तकरीबन पिछले एक माह से चले आ रहे सीमा विवाद को निपटाने के लिए कई स्तर की बैठकें हुईं। गत 6 जून को दोनों देशों के बीच हुई बातचीत के बाद चीन विवादित सीमा से पीछे हटने को तैयार हो गया। लेकिन चीन ने बाद में सेना नहीं हटाई। जब भारतीय पक्ष ने इसे लेकर शिकायत दर्ज की तो बड़ी संख्या में आए सैनिकों ने भारतीय जवानों पर लाठी, डंडों और रॉड से हमला कर दिया।

लोहे के डंडे, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पत्थर से लैस थे चीनी सैनिक: निहत्थे भारतीय सैनिकों पर हमले की थी पहले से तैयारी

चीन हमेशा धोखाधड़ी और पीठ पीछे वार करने को लेकर कुख्यात हैं। वहीं फिर अपनी दोगली साजिश रचते हुए सोमवार (15 जून, 2020) रात डंडे और नुकीली चीजों से लैस चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों पर हमला कर दिया। अचानक हुए इस खूनी हमले से भारतीय सैनिक अनजान थे। जिसकी वजह से भारतीय सेना के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हो गए हैं। वहीं चीन के भी 40 से अधिक सैनिकों के मारे जाने की खबर है।

चीन ने अस्थाई टेंट हटाने से किया मना

रिपोर्ट्स के अनुसार पूर्वी लद्दाख इलाके में चीन की फौज ने आगे आकर अस्थाई कैंप लगा लिया था। जिसके बाद चुशूल में भारत चीन के बीच अधिकारी स्तर की बातचीत में यह तय किया गया था कि दोनो देशों की फौजें अप्रैल में जहाँ थीं वापस उसी पोजिशन पर लौट जाएँगी।

भारतीय सैनिकों को टेंट हटाने के निर्देश दिए गए। मगर उच्चाधिकारियों में हुए फैसले के बावजूद भ्रम में डूबे चीनी सैनिकों ने अपनी संख्या पर घमंड करते हुए पीछे हटने को राजी नहीं हुए। पेट्रोल प्वाइंट-14 पर चीन के सैनिकों से बात करने पहुँचे भारतीय सेना के कमांडिंग ऑफिसर संतोष बाबू और अन्य सैनिकों को चीनी सेना ने घेर लिया।

हमले के लिए पहले से तैयार थे चीनी सैनिक

चीन की हरकतों को देखते हुए भारतीय सैनिकों ने भी इसका मुँहतोड़ जवाब दिया। चीनी सेना ने पहले से ही अपने पास लाठी-डंडे, रॉड, हॉकी स्टिक, बेसबॉल क्लब, ड्रैगन पंच, पाईप, पत्थर, कीलें, बूट की नोक जमा कर लिया था। और उसी का इस्तेमाल वे हिंसा के दौरान कर रहे थे। दोनों ओर से हो रही इस लड़ाई को लड़ते-लड़ते सैनिक पहाड़ की चोटी के नजदीक पहुँच गए। जिसकी वजह से भी चीनी जवानों और कई भारतीय जवान नीचे गिर गए।

चीन की ओर से जारी एक अधिकारिक बयान में आरोप लगाया है कि भारत के सैनिकों के द्वारा उनकी सीमा में घुसपैठ की कोशिशें की गईं और चीनी सैनिकों पर हमला किया गया। बताया जा रहा है कि इस झड़प के दौरान किसी तरह की कोई गोली नहीं चली है, यानी हाथापाई और पत्थरबाजी हुईं, जिनमें सैनिकों को क्षति पहुँची है।

चीनी सैनिकों ने पहाड़ो से फेंके भारी भरकम पत्थर

वहीं पहाड़ी पॉइंट 14 पर पहले से मौजूद चीनी सैनिकों ने भारतीय सैनिकों को निशाना बनाते हुए उनके ऊपर बड़े-बड़े पत्थरों को फेक कर भी हमला किया। बिना किसी हथियार के भारतीयों सैनिकों ने उनका डट कर मुकाबला किया। हालाँकि, इस झड़प में कई भारतीय सैनिकों को तो संभलने तक का मौका नहीं मिला था।

55 भारतीय सैनिकों को कमजोर समझना पड़ा महँगा

इस झड़प में भारतीय सैनिकों ने चीनी सैनिकों की अकल को ठिकाने लगाने का काम किया है। रिपोर्ट्स के मुताबिक करीब 2 दर्जन चीनी सैनिक मौत के मुँह में हैं। वहीं 110 चीनी सैनिकों को इलाज की बेहद जरूरत है। जिनको अस्पताल पहुँचाने के लिए चीनी सेना के हेलीकॉप्टर उस इलाके पर मंडरा रहे थे।

चीन की तरफ से सौंपे गए बलिदानियों के शव

भारतीय सैन्य अधिकारियों ने बताया कि मंगलवार सुबह चीनी सैनिकों ने भारतीय जवानों के शव को भारत के हवाले किया। वहीं पेइचिंग ने अपने मारे गए सैनिकों की कोई भी संख्या अभी तक जारी नहीं कि हैं। लेकिन भारतीय सेना ने दावा किया है कि उन्होंने चीनी सेना की बातचीत सुनी है और चीन के 40 से अधिक सैनिकों के मारे जाने का अनुमान है।

भारत शांति चाहता है लेकिन संप्रभुता सर्वोच्च, उकसाने पर मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम: PM मोदी

लद्दाख सीमा पर गलवान घाटी में भारतीय सेना की चीनी सेना के साथ हुई झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए भारतीय सैनिकों को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, गृह मंत्री अ​मित शाह और 15 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्यमंत्रियों ने श्रद्धांजलि दी।

इसी अवसर पर पीएम मोदी ने कहा कि सैनिकों का यह बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा। भारत की अखंडता और संप्रभुता सर्वोच्च है और इसकी रक्षा करने से हमें कोई रोक नहीं सकता। भारत शांति चाहता है, लेकिन भारत उकसाने पर हर हाल में मुँहतोड़ जवाब देने में सक्षम है, चाहे परिस्थितियाँ कैसी भी हों। पीएम मोदी ने कहा कि हमारे जवान चीनी सैनिकों को मारते-मारते वीरगति को प्राप्त हुए हैं।

भारत-चीन सीमा पर तनाव की स्थिति पर चर्चा करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आगामी 19 जून को सर्वदलीय बैठक बुलाई है। शुक्रवार को शाम 5 बजे बुलाई गई इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चीन के साथ सीमा पर जारी इस संघर्ष को लेकर आगे की परिस्थितियों पर चर्चा करेंगे। विभिन्न राजनीतिक दलों के अध्यक्ष इस ऑनलाइन मीटिंग में हिस्सा लेंगे।

इसी बीच कॉन्ग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए कहा – “क्या हमारे सैनिक और अधिकारी अभी भी लापता हैं? हमारे कितने सैनिक या अधिकारी गंभीर रूप से घायल हैं? चीन ने किन क्षेत्रों पर कब्जा किया है? चीन हमारी जमीन पर किस तरह कब्जा कर लिया? इससे निपटने के लिए सरकार की क्या नीति है? कॉन्ग्रेस इस संकट में हमारी सेना, सैनिकों, उनके परिवारों और सरकार के साथ खड़ी है।”

उल्लेखनीय है कि लद्दाख की गलवान घाटी में सोमवार रात भारत और चीनी सैनिकों के बीच हाथापाई और संघर्ष हुआ, जिसमें भारत के 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए जबकि चीन के 40 से अधिक जवानों के हताहत होने की सूचना सामने आई हैं। कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि भारतीय ऑफिसर और उनके दो जवानों पर चीनी सैनिकों ने पत्थरों और लोहे की रॉड से हमला बोल दिया था। इसके बाद भारतीय सैनिक चौंक गए और इसका जवाब दिया गया। इसके बाद आधी रात तक हिंसक झड़प चलती रही। चीन अभी तक अपने सैनिकों की मौत का आँकड़ा छुपा रहा है और सीमा पर संघर्ष के लिए भारत को ही दोषी ठहरा रहा है।

विषम परिस्थितियों में भी चीन के लिए भारत में बल्लेबाजी करने वाले कौन हैं?

एक ऐसा व्यक्ति जिसकी पूरी पहचान किसी का पुत्र होने में सिमटी हुई है। यह बेचारा अंडे का कवच तोड़ कर बाहर आना चाहता है पर मूर्खता के एम्नियोटिक तरल में तैरता यह प्राणी पचास साल की उम्र में भी बाहर आने को तैयार नहीं हुआ है। मानव शिशु यूँ तो गर्भावस्था के चौथे महीने से बाहर की आवाज, संगीत आदि के प्रति संवेदनशील हो जाता है, लेकिन कुछ विलक्षण लोग होते हैं जो जीवन के पचासवें साल में अपने गालों पर पड़ने वाले डिम्पल के आकार का दिमाग लिए, किसी अमीर घर में पैदा होने के कारण न सिर्फ जीवित हैं, बल्कि लाखों मूर्खों द्वारा तारणहार कह कर पूजे भी जाते हैं।

जाहिर है कि मैं किसी राहुल गाँधी की बात नहीं कर रहा हूँ। वो तो भारतभूमि की वैसी प्रतिभाओं में से एक हैं जिन्हें समुचित वातावरण नहीं मिला है कि फल-फूल कर अपनी खुशबू बिखेर सकें। राहुल गाँधी तो, माफ कीजिएगा ‘जी’ लगाना भूल जाता हूँ, वैसे कान्ग्रेस वाले कभी भी जीभ लगाना नहीं भूलते। उनकी महिमा ही इतनी अपरंपार है। इसलिए श्रीयुत राहुल गाँधी जी पर टिप्पणी करना मेरी औकात से बाहर है, न ही मुझे 200 FIR करवाने हैं।

हालाँकि, जो बातें राहुल गाँधी ने पब्लिक में लिखी हैं, उनका विश्लेषण तो किया ही जा सकता है। एक बिलकुल ही अलग, वैज्ञानिक बात अगर कहूँ, जिसे गंजे और पंचरवाले की सॉल्टन्यूज टीम ने सत्यापित किया है, कई बार कुछ बातें जब आप पढ़ेंगे तो जैसे वायरस अपने लक्षण छोड़ता है, वैसे ही कुछ लोगों के ट्वीट या बयान सुन कर आप बहुत ही सहजता से जान जाएँगे कि ये कमाल चरस का है, गाँजे का है, स्मैक का है या फिर कुछ नया करने के चक्कर में एक ही चायपत्ती से बीस बार चाय बनाने के बाद उसे सुखा कर, उन्नत नस्ल के घोड़े की लीद में मिला कर पीने के बाद उपजा है।

जैसे कि पाकिस्तानी पीएम इमरान खान को ले लीजिए, वो जब भी कुछ बोलता या लिखता है तो आप समझ जाएँगे कि इसने अपनी बाँह पर पतले पाइप बाँधे होंगे, फिर नसों के फूलने के बाद एक इंजेक्शन लिया होगा, सर को हिलाया होगा और तब वो बात बोली या लिखी होगी। आप पूछ लीजिए, वो खुद बता देंगे।

लेकिन राहुल गाँधी जो लिखते हैं, भले ही वो राष्ट्रविरोधी बातें ही क्यों न हों, वो पूरे होश में लिखते हैं। इसके कई कारण हो सकते हैं। एक तो कारण है कि दर्द होता है। जिसके शरीर के कोशिकीय आधार के दोनों भाग, सारे गुणसूत्र, उन दोनों भागों में से एक के स्वयं का एक भाग, फिर उस एक भाग का एक भाग, या तो प्रधानमंत्री थे या प्रधानमंत्री के भी बॉस थे, वह अगर प्रधानमंत्री बनना तो छोड़िए अपनी पार्टी के मुखिया होने तक को ठीक से नहीं निभा पाया, तो दर्द तो होगा ही।

आप ही बताइए कि कोट के ऊपर जनेऊ पहनने के बाद भी, तमाम तरह के परमुटेशन-कॉम्बिनेशन के बाद भी अपना गोत्र सही-सलामत बचा लेने वाले, शिवभक्त, रामभक्त राहुल गाँधी जी के हाथ से सत्ता चली गई तो बेचारे ऐसे नहीं बोलेंगे तो क्या करेंगे!

बहन दादी जैसे बाल रख रही है, नाक की लम्बाई तो सबने चुनावों के समय देखी ही। आजकल राहुल गाँधी भी वर्चुअल मीटिंग में सर पर बड़े ही शिद्दत से घुँघराले बालों के पेचोखम का मुजाहिरा करते हुए देश में अपने कंधे पर ढो कर, निजी तौर पर कम्प्यूटर लाने वाले पिता की तरह दिखने की कोशिश कर रहे हैं। वो भी तो जानते हैं कि कॉन्ग्रेस समर्थक तो बाल और नाक देख कर ही वोट देता है… वरना इनके विजन तो ऐसे-ऐसे रहे हैं कि सारे राजनीतिज्ञ सर पकड़ कर बैठ जाते हैं।

अगर कोई ढंग का मोटिवेशन न हो, जो कि जगजाहिर कारणों से राहुल गाँधी की विलक्षण प्रतिभा ही है (हें हें हें), तो कोई कैसे इस आदमी की बड़ाई कर सकता है! मतलब रघुराम राजन से ले कर, रवीश कुमार तक, जाहिर है कि टैलेंट की तो फोटो सूँघ कर ही उनकी कुशाग्र बुद्धि का पता लगाने वाले लोग हैं, तो वो अगर इनके पीछे हों तो कोई विशेष कारण तो होगा ही न!

अब हम सोनियानंदन, राजीवपुत्र, प्रियंकाबंधु, रॉबर्ट जी के साले राहुल गाँधी के कुछ चुनिंदा ट्वीटों पर चर्चा करेंगे जो उन्होंने देश की सेना, देश के नेतृत्व आदि को नीचा दिखाने के लिए हर उस समय पर किया जैसे समय में पूरी दुनिया के विपक्षी पार्टियों का व्यवहार अपने राष्ट्र के साथ होता है, मनोबल बढ़ाने वाला होता है।

राहुल गाँधी के ट्वीट की धूर्तता को आप देखेंगे तो कहेंगे, “न न न न न न… ये आदमी ऐसे ट्वीट सोच ही नहीं सकता… ये इसकी मानसिक क्षमता से परे है।” क्योंकि राहुल गाँधी बिना किसी सहायता के जब भी बोलते पाए जाते हैं तो यही प्रतीत होता है कि ये आदमी सुबह में बिल्ली की फोटो के साथ किसी को ‘गुड मॉर्निंग जीजू, मुझे न चाँद पर जमीन चाहिए, दिलाओगे न?’” टाइप की ही बातें कर सकता है, अंग्रेजी या हिन्दी के शब्द-संयोजन की बात तो छोड़िए, स्पेलिंग ही ठीक से लिख दे तो कालांतर में स्वयं को ये भारत रत्न दे देगा!

फिर भी, हम तो फेस वैल्यू पर ही लेंगे, वैसे भी कॉन्ग्रेस का पूरा इतिहास फेस वैल्यू पर ही टिका हुआ है। फेस वैल्यू पर लेने का मतलब कि राहुल गाँधी के ट्विटर पर है, तो उन्होंने ही लिखा होगा। ये बात अलग है कि इस बात को मानने के लिए स्वयं को तैयार करने में मुझे दिल पर एक खास प्रथम परिवार के मस्तिष्कों के सामूहिक भार का कंकड़ रखना पड़ा, जो कि मेरी साँस के झोंके में उड़ गया।

हाल के एक ट्वीट की चर्चा करें तो वह गलवान घाटी में हमारे बीस सैनिकों के बलिदान के बाद लिखा गया है, जहाँ राहुल गाँधी ने बड़ी ही सहजता से यह पूछा है कि मोदी चुप क्यों हैं, कहाँ छुपे हुए हैं, वहाँ क्या हुआ, देश को बताते क्यों नहीं? चीन की हिम्मत कैसे हुई हमारे जवानों को मारने की? वो हमारी जमीन कैसे ले सकते हैं!”

इस एक ट्वीट में इतना खोखलापन और इतनी धूर्तता है कि फिर से आदमी सोचने लगता है, क्या राहुल गाँधी ये लिख सकता है? सतही तौर पर यह ट्वीट तो एक चिंतित व्यक्ति का दिखता है, लेकिन ऐसा है नहीं। इस ट्वीट के जरिए, राहुल गाँधी ने प्रश्न किए हैं ताकि इनके नाम में, और वश में हो तो तस्वीर या फोटो में, जी लगाने वाली जनता को वो दिखा सकें कि देखो इसने प्रश्न पूछा है।

लेकिन किस समय? क्या भारतीय सेना ने इस पर प्रेस कॉन्फ़्रेंस नहीं की? क्या उनके द्वारा दी गई जानकारी इतनी अविश्वसनीय है कि राहुल गाँधी को पीएम से जवाब चाहिए। साथ ही, राहुल गाँधी के ट्वीट में ‘चुप्पी’ का मतलब शाब्दिक चुप्पी से नहीं है, वो प्रधानमंत्री को यह पूछ कर यह दिखाना चाह रहे हैं कि उनकी सरकार होती तो बीजिंग में तिरंगा होता।

सरकार में न होने का यह फायदा है कि आप ‘न्याय योजना’ जैसे शिगूफे छोड़ सकते हैं, आप ख्वाबों में चीन पर हमले कर सकते हैं, आप अमेरिका को मुँहतोड़ जवाब दे सकते हैं, और पाकिस्तान को तो इतने बम मार सकते हैं कि अफगानिस्तान में भी भूकम्प आ जाए। राहुल गाँधी भी वही कर रहे हैं। सरकार के बाहर हो कर सरकार को क्या करना चाहिए यह बता रहे हैं जबकि बेचारे भूल गए (जो कि कुछ पदार्थों के सेवन का साइड इफ़ेक्ट में भी आता है) कसाब की गैंग ने तीन दिनों तक मुंबई में जो किया था, उसके बाद एयर स्ट्राइक को तैयार एयर फोर्स को मनमोहन-सोनिया ने कुछ भी करने से मना किया था।

राहुल गाँधी यह कह सकते हैं कि चीन की हिम्मत कैसे हुई हमारी जमीन लेने की, क्योंकि मैंने पहले भी कहा है कि जहाँ मानव भ्रूण चौथे महीने से संवेदनशील हो जाता है, वहीं कुछ लोग पचास की उम्र तक माता के गर्भ के एम्नियोटिक तरल में ही कैद रहते हैं। चीन ने कितनी जमीन पर कॉन्ग्रेस के किस प्रधानमंत्री और यूपीए के किस प्रधानमंत्री के काल में कब्जा किया है, उसका ज्ञान राहुल गाँधी को नहीं है। एकदम ही अलग संदर्भ में, विषयांतर करते हुए, एक वैज्ञानिक बात बताना चाहूँगा कि कई मादक पदार्थों के सेवन से भूतकाल में हुई घटनाओं या सूचनाओं को ले कर स्मृतिदोष सामान्य माना गया है। कृपया मादक पदार्थों के सेवन, चाहे वो कितनी ही उच्च कोटि का क्यों न हो, नहीं करना चाहिए। जनहित में जारी।

राहुल गाँधी यह भी लिखते हैं कि वो सेना के साथ और सैनिकों के साथ खड़े हैं, और उन्हें सेना के आधिकारिक बयान पर भी भरोसा नहीं। उन्होंने भारतीय सेना द्वारा चीनियों के 43 जवान मार गिराने पर, भले ही मान लीजिए कि ये अपुष्ट खबर है, एक शब्द नहीं लिखा। ऐसे समय में तो व्यक्ति, अगर वो राष्ट्रभक्त हो, तो सूत्रों से मिलने वाली खबर को भी ऐसे लिखता है मानो वह सत्य हो। वह ऐसा इसलिए करता है क्योंकि उसे विश्वास होता है कि उसकी सेना, जो ऐसी-ऐसी जगहों पर तैनात है, वह हस्तमैथुन में मस्त चीनियों को पहाड़ी युद्ध में किसी भी दिन कायदे से मार गिराने में सक्षम है।

गलवान में जो हुआ, वो ऐसा नहीं है कि हमारे सैनिकों की लापरवाही या उनके कमतर होने के कारण हुआ। वहाँ वही हुआ जो चीन की प्रकृति है: बात किया कि वो पीछे हटेंगे, जगह खाली करेंगे, सहमति बन गई दोनों तरफ के अफसरों में। उसके बाद जब हमारे सैनिक, बिना किसी हथियार के (ताकि उन्हें ऐसा न लगे कि वो लड़ाई के इरादे से आए हैं, या शायद प्रोटोकॉल हो) आगे गए तो उन पर पत्थरबाजी हुई, बिना गोली चलाए उन्होंने क्रूरता से कँटीले तारों से लपेटे रॉड से हमारे जवानों और अफसर पर हमला किया।

फिर जो हुआ वो सामने है कि चीन को इतना नुकसान पहुँचा है कि वो संख्या तक बताने में हिचकिचा रहा है। भारत ने इसके बाद भी उन्हें अपनी लाशें उठाने के लिए हेलिकॉप्टर ले कर भीतर आने दिया। ऐसे में आप सोचिए कि आप एक नागरिक के तौर पर किस बयान पर विश्वास करना चाहेंगे: अपनी सेना के अफसरों के बयान पर या फिर चीन के ग्लोबल टाइम्स पर?

राहुल गाँधी का ट्वीट अपनी ही सेना को नीचा दिखाने को तत्पर है। उन्होंने सैनिकों के बलिदान को तो संज्ञान में लिया है क्योंकि ऐसा न करने पर पार्टियाँ चुनाव हारती रही हैं, लेकिन उन्होंने अपने जवानों की वीरता और शौर्य के प्रमाण पहले भी माँगे हैं, आज भी छद्म रूप से वही कर रहे हैं। यहाँ वो हर बार की ही तरह, सैनिकों के बलिदान पर उन्हें श्रद्धांजलि देते नजर आते हैं, पर सरकार को उसी बहाने ऐसे घेर रहे हैं जैसे हमारी सेना तो पीठ दिखा कर भाग आई।

और राहुल कोई अकेले तो हैं नहीं। एक पूरा गिरोह है जो पाकिस्तान के मामले में ‘अमन की आशा’ के गीत गाने लगता है क्योंकि वो जानते हैं कि सरकार पर दवाब बनाएँगे तो उसे सामूहिक सहमति समझ कर पाकिस्तान पर हमला ही न कर दे, लेकिन वही गिरोह चीन के मामले में हमेशा उकसाता हुआ दिखता है। चीन पर भारत हमला नहीं कर सकता, यही जमीनी हकीकत है। दूसरी बात, चीन से युद्ध एक ही फ्रंट पर नहीं होगा, भारत आर्थिक रूप से इस युद्ध को लड़ने में काफी पीछे चला जाएगा।

ये कमजोरी नहीं है, ये दुश्मन को आँकने जैसा है। जिस राहुल गाँधी की नैपी सूँघने वाले अपने कार्यकाल में तीन दिन तक एक टेरर अटैक को झेलते रहे और उसके बाद भी पाकिस्तान पर चूँ तक न कर सके, वो कह रहे हैं कि चीन पर भारत चुप क्यों है! जैसा कि पहले भी मैंने कहा, सरकार से बाहर होने पर नेता लोग प्याज़ तीन रुपए किलो करने से ले कर, हर सिंगल प्राणी को मनमुताबिक गर्लफ्रेंड या ब्वॉयफ्रेंड उपलब्ध कराने की बात सिर्फ कहते ही नहीं, पूरा गणित भी समझाते हैं कि किस राज्य में सप्लाय ज्यादा और डिमांड कम है।

राहुल गाँधी से हमें कोई आशा है नहीं। अब तक तो बेचारे की माताजी ने भी उम्मीद त्याग दी है लेकिन फिर भी वीडियो चैट के लिए बाल में जेल लगा कर पिता की छवि उतारने के लिए कंघी से ज्वार-भाटा स्टाइल के कर्ल्स तो ला ही देती हैं! क्या करेगी, माँ तो माँ होती है। अब कोई कैसा भी पैदा हो गया हो, बुद्धि भले ही धीमी हो, लेकिन माँ क्या अपने बुजुर्ग शिशु को त्याग देगी?

वैसे ही, राहुल गाँधी विशिष्ट जगह के बाल भले ही घुँघराले कर लें, लेकिन उसके नीचे का मस्तिष्क उनसे वही करवा रहा है जो गैंग चाहता है। यह वही गैंग है जो वर्तमान भारत सरकार को हर आयाम में असफल दिखाना चाहता है। ये गैंग लोगों की नजरों में भारतीय सेना की छवि खराब करना चाहता है, उनका मनोबल तोड़ना चाहता है, वरना ऐसे समयों में चिरपरिचित अश्लील हँसी के साथ ‘कहाँ गया 56 इंच’ पूछने की बेहूदगी एक अपरिमार्जित शुक्राणु की ही देन कर सकता है।

‘क्या सैनिकों के ताबूत पर PM CARES लिखा होगा’ – CSK ने टीम डॉक्टर को घटिया ट्वीट पर नौकरी से किया सस्पेंड

आईपीएल की टीम चेन्नई सुपर किंग्स (CSK) ने बुधवार (जून 17, 2020) को टीम के डॉक्टर डॉ मधु थोट्टापपिल्लई (Dr. Madhu Thottappillil) को उनके द्वारा किए गए एक विवादित ट्वीट में PM CARES फंड और बलिदानी सैनिकों पर कटाक्ष करने के लिए निलंबित कर दिया है। डॉक्टर मधु 2008 में आईपीएल की शुरुआत से ही चेन्नई सुपर किंग्स के आधिकारिक टीम डॉक्टर थे।

डॉ मधु थोट्टापपिल्लई ने अपने आधिकारिक ट्विटर एकाउंट से भारतीय सेना की चीनी सैनिकों से झड़प में बलिदानी भारतीय सैनिकों के बारे में ‘पीएम केयर्स फंड’ (PM CARES Fund) पर कटाक्ष करते हुए ट्वीट किया था। इस ट्वीट को लेकर सोशल मीडिया में लोगों के बीच नाराजगी देखी गई। जिसके बाद डॉ मधु ने यह ट्वीट डिलीट कर दिया था। हालाँकि, उसके स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया में वायरल हो गए थे। चेन्नई सुपर किंग्स ने एक ट्वीट के माध्यम से डॉक्टर को निकालने की जानकारी दी है।

दरअसल, डॉ मधु ने लद्दाख क्षेत्र में 20 भारतीय सैनिक के बलिदान की खबरों के सामने आने के बाद ‘पीएम केयर्स’ पर कटाक्ष करते हुए अपने ट्वीट में लिखा था – “मैं ये जानने को उत्सुक हूँ कि जो ताबूत वापस आएँगे क्या उस पर ‘पीएम केयर’ का स्टीकर लगा होगा?”

इस ट्वीट पर विवाद बढ़ता देख उन्होंने अपना ट्विटर अकाउंट लॉक भी कर दिया। इस ट्वीट को लेकर कई ट्विटर यूजर्स ने चेन्नई सुपरकिंग्स से शिकायत की और कहा कि ये शर्म की बात है कि मेडिकल पेशे से जुड़ा एक शख्स इतना असंवेदनशील हो सकता है और भारतीय सेना के जवानों की मौत पर मजाक कर रहा है।

विवाद बढ़ने के बाद आईपीएल की टीम चेन्नई सुपरकिंग्स ने इसका जवाब देते हुए कहा – “चेन्नई सुपर किंग्स प्रबंधन को डॉ मधु थोट्टापपिल्लई के व्यक्तिगत ट्वीट की जानकारी नहीं थी। उन्हें टीम डॉक्टर के रूप में उनके पद से निलंबित कर दिया गया है। चेन्नई सुपरकिंग्स को उनके ट्वीट पर खेद है जो प्रबंधन की जानकारी के बिना किया गया और यह दुर्भावनापूर्ण था।”

चेन्नई सुपर किंग्स ने अपने एक ट्वीट में साफ किया कि उन्हें डॉ मधु थोट्टापपिल्लई के ट्वीट के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।

उल्लेखनीय है कि अक्साई चीन क्षेत्र के गलवान घाटी में भारतीय सेना और चीनी सेना के बीच हुई हिंसक झड़प में 20 भारतीय सैनिक वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि 43 चीनी सैनिकों के मरने की खबर भी सामने आई हैं।

ऐसे में डॉ मधु ने उस फंड पर निशाना साधने का प्रयास किया था, जिस ‘पीएम केयर्स फंड’ (PM CARES Fund) कोरोना वायरस महामारी के खिलाफ लड़ाई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से दान करने की अपील की थी, इसमें कई लोगों ने बड़ी मात्रा में अपना सहयोग दिया है जो कि विपक्ष के साथ ही मीडिया के लिए भी बड़ा सरदर्द बनकर उभरा है।

MP में खून से लथपथ मिली गाय, फटे मुँह से खाने-पीने में असमर्थ: विस्फोटक खिलाए जाने की आशंका

MP में एक गाय को विस्फोटक मिश्रित भोजन खाने से घायल होने का मामला सामने आया है। केरल में गर्भवती हथिनी और हिमाचल प्रदेश में गर्भवती गाय को विस्फोटक खिलाने की घटना के बाद अब मध्य प्रदेश के उमरिया में जानवरों के साथ क्रूरता की यह इस प्रकार की तीसरी घटना है।

आशंका जताई जा रही है कि उमरिया में एक माह के बछड़े को दूध पिलाती गाय को किसी ने विस्फोटक खिला दिया और अब उसके बचने की उम्मीद काफी कम बताई जा रही हैं। पीड़ित गाय कुछ खाने में भी असमर्थ है और न ही वह पानी पी सकती है।

गाय द्वारा विस्फोटक मिला भोजन खाने का संदेह

यह घटना मध्य प्रदेश के गिन्जरी गाँव की है। गाय के मलिक ओमप्रकाश अग्रवाल बताते हैं, कि वो रोजाना गाय को चरने के लिए छोड़ देते थे। रिपोर्ट्स के अनुसार उनका कहन अहै कि गाय घर के आसपास ही 500 मीटर के अंदर घूमकर चरती रहती थी।

शाम होने पर वापस घर आ जाती थी और आकर अपने 1 महीने के बच्चे को दूध पिलाती थी। इसी क्रम में गाय 14 जून को भी आसपास चरने गई थी, मगर वह शाम को घर वापस नहीं आई। गाय के नहीं लौटने पर उन्होंने पूरी रात उसे ढूँढा मगर वह नहीं मिली।

अगले दिन भी ओमप्रकाश ने गाय की तलाश जारी रखी लेकिन उस दिन भी उन्हें घर खाली हाथ लौटना पड़ा। कड़ी मशक्कत के बाद जब 16 जून को उन्हें गाय वापस मिली तो वह खून से पूरी तरह लथपथ थी। गाय का मुँह बुरी तरह से फटा हुआ था।

ओमप्रकाश ने आशंका जताई है कि विस्फोटक पदार्थ खाने की वजह से उसका जबड़ा और मुँह ज़ख्मी हो गया है। गाय की गंभीर हालत को देखते ही उन्होंने पुलिस में इसकी शिकायत दर्ज की।

साथ ही पशु चिकित्सक को बुलाकर गाय का इलाज कराया गया। चिकित्सक ने बताया कि गाय की हालत काफ़ी नाजुक है। न वो कुछ खा पी सकेगी, न ही अपने बछड़े को दूध पिला सकेगी।

पुलिस ने किया मामला दर्ज

ओमप्रकाश अग्रवाल के तहरीर पर पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। जिला पुलिस अधीक्षक (एसपी) सचिन शर्मा ने बताया कि घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके ने पर पहुँचकर एक पशु चिकित्सक को बुलाया। पुलिस अब घायल गाय के मामले की जाँच कर रही है।

बजरंग दल ने की जल्द कार्रवाही की माँग

गाय के साथ हुई इस क्रूरता को लेकर बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने आरोपित को जल्द से जल्द गिरफ्तार कर कड़ी सजा की माँग की हैं। साथ ही मामले पर कार्रवाई नहीं करने पर आंदोलन करने की धमकी भी दी हैं। बजरंग दल के नेता उपेंद्र सिंह ने कहा, “इस मामले में पुलिस ने अगर आरोपी को गिरफ्तार नहीं किया तो हम उसे तलाश कर लेंगे।”

जारी है गाय-बछड़ों सहित जानवरों पर अत्याचार

गौरतलब है कि एक हफ्ते पहले ही आगरा में दो युवकों ने एक बछड़े को डंडे से पीट-पीट कर मार डाला। क्योंकि भूख से बेहाल सड़क पर घूमते हुए एक बछड़े ने उसकी गाय-भैसों के साथ मिलकर उसके द्वारा दिया गया चारा खाने लगा था। जिसे देखते ही दो युवकों ने बछड़े पर जम कर लाठियाँ बरसानी शुरू कर दीं। उन दोनों ने बछड़े को इतना मारा कि उसकी मौत हो गई। जिसकी वीडियो पास के एक सीसीटीवी में कैद हो गई थी।

गाय और हथिनी को खिलाया गया था विस्फोटक

बता दें कि इस से पहले हिमाचल में बिलासपुर जिले के झंडुत्ता इलाके में एक गर्भवती गाय को विस्फोटक खिला दिया गया था, जिससे गाय बुरी तरह से घायल हो गई थी। जख्मी गाय ने इलाज के दौरान एक बछड़े को जन्म दिया था। मगर पशु चिकित्सकों का कहना था कि गाय अब नॉर्मल दिनों की तरह ढेर सारा चारा एक साथ नहीं खा सकेगी।

वहीं कुछ दिनों पहले केरल के मलप्पुरम एक 15 वर्षीय गर्भवती हथिनी एक अमानवीय कृत्य का शिकार हो गई थी। जहाँ उपद्रवी शख्स ने उसे पटाखों से भरा अनानास खिला दिया था, जिससे हथिनी के मुँह में विस्फोट हो गया और वह बुरी तरह जख्मी हो गई। हथिनी की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह गर्भवती थी। उसका जबड़ा टूट गया था और मुँह में विस्फोट के कारण वह अनानास चबाने के बाद कुछ खा नहीं पा रही थी।

बांग्लादेश: सिर्फ मई 2020 में 10 मंदिरों पर हुआ हमला, लूटपाट, मूर्तियाँ की गई क्षत-विक्षत

बांग्लादेश में हिंदुओं का उत्पीड़न लगातार बढ़ता जा रहा है। पिछले महीने यानी मई 2020 में ही हिंदुओं को प्रताड़ित करने वाली कई घटनाएँ सामने आई हैं, जो सोचने पर मजबूर तो करती ही है, साथ ही वहाँ के अल्पसंख्यक हिंदुओं की दयनीय व्यथा को भी बयाँ करती है। वर्ल्ड हिन्दू फेडरेशन बांग्लादेश चैप्टर (world hindu federation bangladesh chapter) द्वारा जारी प्रेस रिलीज के अनुसार मई 2020 में ही हिंदुओं के 10 मंदिरों को तोड़ दिया गया। मूर्तियों को क्षत-विक्षत कर दिया गया।

  1. प्रेस रिलीज के मुताबिक 3 मई 2020 को दिनाजपुर नगरपालिका क्षेत्र में एक लाख टके का भुगतान न करने पर लोकल क्रिमिनल मामून और उसके गिरोह ने पूर्ण चंद्र रॉय के घर एवं मंदिर पर हमला किया और नष्ट कर दिया।
  2. 4 मई 2020 को सुबह के लगभग 3 बजे चटगाँव के लोहगारा में शांति बिहार में 40 हथियारबंद लोगों ने मंदिर पर हमला किया। उपद्रवियों ने मंदिर की खिड़कियाँ, दीवारें और बुद्ध की मूर्ति को तहस नहस कर दिया
  3. इसके बाद 5 मई 2020 को नेत्रकोना जिले के दुर्गापुर उपजिला के बकलजोरा यूनियन में उपद्रवियों ने कुमुदगंज बाजार काली मंदिर की मूर्ति को खंडित कर दिया।
  4. उपद्रवियों ने 8 मई 2020 को सिराजगंज जिले के बेलकुची चावला में जिधुरी साह पारा मंदिर की मूर्तियों को तहस नहस कर दिया। सिराजगंज जिले डब्ल्यूएचएफ बांग्लादेश चैप्टर के नेताओं ने मंदिर का दौरा किया और दोषियों को तत्काल गिरफ्तार करने की माँग की।
  5. 9 मई 2020 को रात में बदमाशों ने नेत्रकोना जिले के कलमाकंद उपजिला के नागदरा गाँव में 100 साल पुरानी काली मंदिर की मूर्ति के साथ बर्बरता की।
  6. 10 मई 2020 को सुनामगंज जिले के छतक नगर पालिका के टाटीकोना गाँव में फेसबुक पर टिप्पणी करने को लेकर आतंकवादियों ने हिंदू परिवारों पर हमला किया और उनके घरों एवं मंदिरों को नष्ट कर दिया। इस हमले में कम से कम 10 लोग घायल हो गए। घायल व्यक्तियों की पहचान तापस दास (30), शिप्लू दास (28), पाब्लू दास (32), पिपलू दास (26), सुमन दास (28), रतुल चौधरी (31), शिमला दास (28) और अन्य के रूप में हुई।
  7. 11 मई 2020 को उपद्रवियों ने लालमोनिरहाट जिले के चपरहट इमेंद्रघाट में प्रसिद्ध श्री श्री माँ बिदवेश्वरी मंदिर की मूर्ति के साथ तोड़ फोड़ की।
  8. 12 मई 2020 को लगभग 1 बजे, अपराधियों के एक समूह ने निलफामारी सदर अपजिला में दक्षिण हरो राधागोबिंद मंदिर का ताला तोड़ने और मंदिर में प्रवेश करने की कोशिश की। हालाँकि, स्थानीय लोगों ने उनका पीछा किया और उनमें से एक को पकड़ लिया और उसे सदर पुलिस स्टेशन को सौंप दिया।
  9. 13 मई 2020 को ही उपद्रवियों ने रंगमती जिले के श्री श्री मगादेश्वरी मंदिर में मूर्ति के साथ छेड़छाड़ की और मंदिर के दान पेटी से पैसे चुरा लिए।
  10. 13 मई को ही चोरों ने पीछे की दीवार को तोड़कर सुइहारी में क्षत्रिय समिति के पर्थ सारथी मंदिर में प्रवेश किया और मंदिर के आभूषण और अन्य कीमती सामान चुरा लिया।

मारा गया चीनी सैनिकों का कमांडिंग ऑफिसर भी, लद्दाख की गलवान घाटी में हुए झड़प में भारत के 4 और सैनिकों की हालत गंभीर

लद्दाख सीमा पर गलवान घाटी में 15-16 जून की रात भारत-चीन की सेना में हुई झड़प में चीन यूनिट का कमांडिग ऑफिसर (सीओ) भी मारा गया। न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, कमांडिग ऑफिसर के अलावा चीन के 40 सैनिकों के मरने की खबर है।

सीमा पर बढ़ते तनाव को देखते हुए अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह तीनों सेना प्रमुखों के साथ बैठक कर रहे हैं। वहीं, 4 भारतीय सैनिकों की हालत अभी गंभीर बनी हुई है। रिपोर्ट्स में बताया जा रहा है कि सरकार ने आर्मी को सीमा पर कार्रवाई करने के लिए खुली छूट दे दी है।

गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सैनिकों की झड़प की साइट पर चीन के हेलीकॉप्टरों की आवाजाही से इस बात का अंदाजा लगाया जा रहा है कि वहाँ बड़े पैमाने पर चीन के सैनिक हताहत हुए हैं। ANI ने सूत्रों के हवाले से खबर दी है कि मृतक और घायल चीनी सैनिकों की संख्या का झड़प की साइट पर स्टेचरों की संख्या, एम्बुलेन्स और हेलीकाप्टरों की आवाजाही से 40 से अधिक का अनुमान है। साथ ही जिस भारतीय यूनिट से झड़प हुई उसने भी बड़ी संख्या में चीनी सैनिकों के घायल और मृत होने की बात कही है।

ANI का अपने सूत्रों के हवाले से कहना है कि चीन के मृत और घायल सैनिकों की सही संख्या नहीं बताई जा सकती है लेकिन कई बातों को ध्यान में रखते हुए इसके 40 से अधिक होने का अनुमान है।

गौरतलब है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह के बीच मंगलवार देर रात तक गलवान में हुई घटना को लेकर बातचीत हुई है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई में सुरक्षा मामलों की कैबिनेट की बैठक के बाद सरकार ने सेना को खुली छूट दे दी। सरकार ने कहा कि जमीनी हालात के मुताबिक सेना कार्रवाई करे।

बता दें, भारतीय सेना ने मंगलवार देर रात इस घटना पर विस्तृत बयान जारी किया। बयान के मुताबिक, 6 जून के समझौते के मुताबिक गलवान घाटी के पास सैनिकों के पीछे हटने की प्रक्रिया जारी थी। जब भारतीय दस्ता बॉर्डर किनारे चीन की स्थिति को जाँचने पहुँचा, तब दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हो गई।

शुरुआत में भारत में 1 कमांडिंग अफसर और 2 जवानों के वीरगति प्राप्त होने की बात सामने आई थी, लेकिन बाद में सेना ने जानकारी दी कि अन्य 17 घायल भी वीरगति को प्राप्त हो गए हैं, यानी इस झड़प मे कुल 20 जवानों की जानें गईं।

इस बीच रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि गलवान घाटी में भारतीय जवानों का जान गँवाना बेहद दर्दनाक और परेशान करने वाला है। राष्ट्र हमारे वीर सैनिकों के इस बलिदान को कभी नहीं भूलेगा।

वहीं, विदेश मंत्रालय की ओर से भी इस मामले में बयान जारी किया गया। MEA के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा कि भारत सीमा पर शांति बनाए रखने का पक्षधर है। भारत सीमा विवाद के किसी भी मुद्दे का शांति और संवाद के जरिए समाधान का पक्षधर है।

भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अनुराग श्रीवास्तव ने कहा, “चीन के सैनिकों की तरफ से यथास्थिति को न मानने का प्रयास हुआ और इसके कारण टकराव की नौबत आई। इसमें दोनों तरफ के सैनिक मारे गए, घायल हुए। जबकि दोनों तरफ से उच्च स्तर पर बन रही सहमति के आधार पर इसे टाला जा सकता था।”

अनुराग श्रीवास्तव ने आगे कहा, “सीमा प्रबंधन पर जिम्मेदाराना दृष्टिकोण जाहिर करते हुए भारत का स्पष्ट तौर पर मानना है कि हमारी सारी गतिविधियाँ हमेशा एलएसी (वास्तविक नियंत्रण रेखा) के भारतीय हिस्से की तरफ हुई हैं। हम चीन से भी ऐसी ही उम्मीद करते हैं।”

पिलाया पेशाब, जूते में पानी भरकर पीने को किया मजबूर… 5000 रुपए भी लिए: राजस्थान में प्यार करने की सजा

राजस्थान के सुमेरपुर थाने के एक गाँव में मानवता को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। खबर है कि यहाँ के कुछ ग्रामीणों ने एक युवक को अपनी जाति की महिला से बात करने के कारण पेशाब पिलाया। जूते में डालकर पानी पीने को मजबूर किया और उसके साथ मारपीट की गई। अब इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, कालूराम नाम का युवक अपने गाँव की एक विवाहिता से अक्सर फोन पर बातें करता था। इस बात का पता एक दिन विवाहिता के भाई को चल गया। उसने इस संबंध में अपने रिश्तेदारों को बताया। इसके बाद 11 जून को भारूंडा रोड पर 3 लोगों ने कालूराम का अपहरण किया और सिरोही के सरदारपुर गाँव के पास एक कुएँ पर ले गए।

यहाँ पहले 9 आरोपितों ने मिलकर उससे मारपीट की। फिर उसका मोबाइल और सिम तोड़ दिया। इन 9 आरोपितों की पहचान लक्ष्मणराम, जवानाराम, भीमाराम, हकमाराम, नवाराम, लाखाराम, लक्ष्मणराम सुपरणा, गाेपाराम, दरगाराम के रूप में हुई।

खबर के अनुसार, इन लोगों ने मारपीट के बाद कालूराम को शराब की बोतल में पेशाब भरकर पिलाया। फिर दूसरे आरोपित ने कालूराम के चाचा और भाई को बुलवाया और उन्हें भी रातभर पेड़ से बाँधकर रखा व मारपीट भी की। इसके बाद आरोप है कि इन लोगों ने लड़के के माता-पिता को बुलाकर उनसे 5000 रुपए भी लिए। तब जाकर इन्हें छोड़ा।

अब पुलिस के संज्ञान में मामला आने के बाद मालूम चला है कि आरोपितों ने भेव गाँव के दरगाराम देवासी के कहने पर पीड़ित कालूराम का अपहरण किया था। फिर उसके साथ ये अमानवीय हरकत की।

पुलिस ने मंगलवार को इस संबंध में 9 लोगों के ख़िलाफ अपहरण और मारपीट का मामला दर्ज कर लिया है। 15 जून को इनमें से 5 आरोपितों की गिरफ्तारी हुई है। जबकि एक नाबालिग आरोपित को भी हिरासत में लिया गया है।

भास्कर की रिपोर्ट के मुताबिक, एसपी कल्याणरमल मीणा ने बताया कि इस घटनाक्रम के बारे में स्टेट कंट्रोल रूम समेत उच्च अधिकारियों को जानकारी दे दी गई है। यह मामला पाली जिले का है, इसलिए वहाँ की पुलिस इसपर कार्रवाई कर रही है। पुलिस का कहना है कि आरोपित, पीड़ित युवक को स्वजाति महिला से प्रेम करने के लिए सबक सिखाना चाहते थे।

गौरतलब है कि इस मामले की वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल है। लोग इसे शेयर करते हुए मुख्यमंत्री गहलोत को टैग कर रहे हैं। लोगों का कहना है कि राजस्थान में कानून व्यवस्था चरमरा सी गई है। हर दिन लूट, बलात्कार, आत्महत्या, दलित उत्पीड़न, जूते से पानी पिलाने और पेशाब पिलाने जैसी मानवीयता को शर्मसार करने वाली घटनाएँ हो रही है। इसलिए इन पर उपयुक्त कार्रवाई हो, ताकि ऐसे मामले दोबारा न हों।

बता दें कि इस घटना से पहले पिछले साल सितंबर में एक मामला उदयपुर से भी आया था। उस समय भी एक युवक को महिला के साथ भागने पर अपहरण करके पेशाब पिलाया गया था।