Home Blog Page 4751

दिल्ली सरकार नहीं चाहती कि सच्चाई सामने आए, जबकि ऐसे कई वीडियो आ चुके: केजरीवाल सरकार को SC की फटकार

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार को चेतावनी देते हुए कहा है कि वो डॉक्टर और नर्सों को सरकारी अस्पताल की दुर्दशा सामने लाने के लिए दंडित ना करें और ना ही उन्हें धमकाए। दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार ने ऐसे कोरोना वॉरियर्स को धमकाया है, जिन्होंने कोरोना वार्ड में अमानवीय स्थिति के वीडियो बनाए। इसके बाद ऐसे प्रकरण सामने आए, जिनमें बताया गया कि अब उन्हें (वीडियो बनाने वाले को) अरविन्द केजरीवाल सरकार द्वारा प्रताड़ित किया जा रहा है।

देश की राजधानी दिल्ली में कोरोना वायरस संक्रमण के बिगड़ते हालातों को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार (जून 17, 2020) को एक बार फिर दिल्ली की अरविन्द केजरीवाल सरकार को फटकार लगाई है। सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को इसका स्वत: संज्ञान लेते हुए कोरोना वायरस से संक्रमित मरीजों के समुचित इलाज और सरकारी अस्पतालों में शवों के गरिमामयी ढंग से निपटान से संबंधित मामले की सुनवाई शुरू की।

सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार से पूछा – “दिल्ली ने इस मामले में क्या किया है? कृपया डॉक्टरों, नर्सों की सुरक्षा करें। वे कोरोना वॉरियर्स हैं। दिल्ली सरकार नहीं चाहती कि सच्चाई सामने आए। ऐसे कई वीडियो सामने आए हैं।”

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली सरकार से कहा – “मैसेंजर पर गोली न चलाएँ, डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मचारियों को धमकी न दें, उन्हें समर्थन दें। आप इस तरह से सच्चाई को दबा नहीं सकते। आपने एक डॉक्टर को निलंबित क्यों किया, जिसने आपके एक अस्पताल की दयनीय स्थिति का वीडियो बनाया था?”

इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में दिल्ली सरकार से एक हलफनामा भी देने को कहा है। आगे की सुनवाई शुक्रवार के लिए तय की गई है।

मेवात में हिंदुओं को न्याय दिलाने के लिए खट्टर सरकार का फैसला: बनेगा धर्मांतरण विरोधी कानून, गोकशी मामले फास्ट ट्रैक कोर्ट में

हरियाणा के मेवात में दशकों से हिंदुओं पर हो रहे अत्याचारों को रोकने के लिए खट्टर सरकार के फैसलों का विश्व हिंदू परिषद ने स्वागत किया है। कुछ समय पहले तक VHP खट्टर सरकार से इस मामले के मद्देनजर नाराज चल रही थी। मगर, अब संगठन ने खट्टर सरकार की घोषणाओं से संतुष्ट होते हुए इसे हिंदुओं के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया है।

बता दें कि सीएम खट्टर ने मंगलवार की बैठक में मेवात में धर्म परिवर्तन जैसी घटनाओं को रोकने के लिए घोषणा की थी कि वह धर्म स्वतंत्र विधेयक नियम लेकर आएँगे, ताकि धर्म परिवर्तन के मामले में मजबूती व सख्ती से कार्रवाई हो सके। 

अपनी हालिया प्रेस रिलीज में VHP ने हिन्दू समाज, मीडिया चैनलों तथा अन्य सहयोगियों की एकजुटता को नमन किया। साथ ही विहिप के केंद्रीय संयुक्त महामंत्री डॉ सुरेन्द्र जैन ने आशा जताई कि मुख्यमंत्री की ओर से इन घोषणाओं पर जल्द अमल होगा। ताकि पीड़ित समाज संतोष अनुभव कर सकें।

गौरतलब है कि हरियाणा के मेवात में हिंदू दलितों पर हो रहे अत्याचारों में लॉकडाउन के दौरान अभूतपूर्व वृद्धि देखने को मिली थी। ऐसे में विहिप ने हिंदुओं की पीड़ा को दूर करने के लिए हिंदू समाज और मीडिया के एक वर्ग का आभार व्यक्त किया। साथ ही खट्टर सरकार के फैसलों को उसका ही परिणाम बताया।

यहाँ बता दें कि कल सचिवालय के सभागार में हुई बैठक के दौरान मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर ने हिंदू समाज की पीड़ा को समझते हुए कुछ घोषणाएँ की। जिनके बाद मेवात के हिंदुओं के लिए आवाज उठाने वालों में संतोष दिखा। ये घोषणाएँ निम्नलिखित हैं-

  1. धर्मांतरण व लव जिहाद को रोकने के लिए धर्मांतरण विरोधी कानून बनाया जाएगा।
  2. गोकशी के मामलों को फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुना जाएगा। गौ हत्यारों को कड़ी सजा दिलवाने के लिए यदि आवश्यकता होगी तो वर्तमान कानून में आवश्यक संशोधन किया जाएगा।
  3. नूँह (मेवात) में RRB की बटालियन स्थापित की जाएगी, जिससे मेवात में कानून का राज्य पुन: स्थापित करने में सहायता मिल सके।
  4. हिंदुओं के धार्मिक व सार्वजनिक संपत्तियों पर से कब्जा हटाकर उनके लिए एक बोर्ड बनाया जाएगा, जो इन संपत्तियों की देखभाल व सुरक्षा सुनिश्चित करेगा।

विश्व हिंदू परिषद ने इस घोषणाओं के बाद इसे हिंदू समाज की विजय बताया है। साथ ही सीएम खट्टर से उम्मीद की है कि अपनी घोषणाओं पर वह जल्द अमल करेंगे।

यहाँ बता दें कि बीते दिनों मेवात में दलित उत्पीड़न और धर्म परिवर्तन की घटनाओं पर सख्त रवैया न अपनाने को लेकर विश्व हिंदू परिषद (VHP) ने खट्टर सरकार के रवैये पर नाराजगी जताई थी। VHP नेताओं का कहना था कि मई में संगठन के प्रतिनिधिमंडल के मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर से भेंट करने के बाद भी राज्य सरकार ने उच्चस्तरीय जाँच की दिशा में न कदम उठाए और न ही आरोपियों के खिलाफ मुकदमे दर्ज कर उनके खिलाफ कार्रवाई की।

सलमान खान पुलिस को फोन कर, पैसे की बात से बनाता था प्रेशर: जिया खान की माँ ने लगाए गंभीर आरोप

एक्‍टर सुशांत सिंह राजपूत की मौत ने अब बॉलीवुड इंडस्‍ट्री पर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। तमाम सेलेब्‍स और सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि फिल्‍मी बैकग्राउंड से ताल्‍लुक न रखने वाले एक्‍टर्स को इंडस्‍ट्री में आउटसाइडर के तौर पर ट्रीट किया जाता है। यही नहीं, हर मौके पर उनकी खिंचाई की जाती है। एक्टर सुशांत सिंह के सुसाइड के बाद से ही सोशल मीडिया पर एक बार फिर नेपोटिज्म को लेकर चर्चा तेज हो गई है। लोग सोशल मीडिया पर एक बार फिर करण जौहर, खान परिवार के लोगों को निशाने पर लेते हुए बॉलीवुड में मौजूद भाई-भतीजावाद को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। 

इस सबके बीच दिवंगत एक्‍ट्रेस जिया खान की माँ राबिया अमीन ने सुपरस्टार सलमान खान को कठघरे में खड़ा कर दिया है। राबिया अमीन ने सलमान खान पर कई सनसनीखेज आरोप लगाते हुए लंदन से एक वीडियो जारी किया है। 

https://www.instagram.com/p/CBgKlXQlQGw/?utm_source=ig_web_copy_link

इस वीडियो में राबिया अमीन कहती हैं, “मेरी संवदेनाएँ सुशांत सिंह राजपूत की फैमिली के साथ हैं। सही मायने में यह दिल दहला देने वाला मामला है। यह कोई मजाक नहीं चल रहा रहा। अब बॉलीवुड को बदलना होगा, बॉलीवुड को जागना होगा। बॉलीवुड को पूरी तरह से ऐसा करना बंद करना होगा। खिंचाई करना भी एक तरह से किसी की हत्‍या करना ही है।”

राबिया ने आगे कहा, “जो कुछ भी हो रहा है, उसने मुझे 2015 की याद दिला दी, जब मैं सीबीआई ऑफिसर से मिलने गई थी। उसने मुझे लंदन से बुलाया और बताया कि हमें कुछ अहम सबूत मिले हैं। जब मैं वहाँ पहुँची तो उन्होंने बताया कि मुझे सलमान खान का फोन आया। वह रोज फोन करते हैं और पैसे की बात करते हैं। कहते हैं कि लड़के से पूछताछ मत करो, उसे मत छुओ तो हम क्‍या कर सकते हैं मैडम।”

राबिया के मुताबिक, “ऑफिसर भी इन चीजों से फ्रस्‍टेटेड और नाराज लग रहे थे। फिर मैं मामले को दिल्‍ली के उच्‍च अधिकारियों तक ले गई और मैंने इसकी शिकायत की लेकिन अगर ऐसा ही होना है कि आप अपने पैसे से, प्रेशर से जाँच को प्रभावित कर रहे हैं तो मुझे नहीं मालूम कि एक नागरिक के तौर पर हम किस दिशा में जा रहे हैं। मैं कहना चाहती हूँ कि खड़े होइए, लड़िए और विरोध कीजिए। बॉलीवुड के इस जहरीले व्‍यवहार को रोकिए।”

बता दें कि महज 25 साल की उम्र में 3 जून 2013 को जिया खान ने आत्महत्या कर ली थी। उनका शव मुंबई के जुहू स्थित घर में मिला था। उनकी मौत आज भी रहस्य बनी हुई है लेकिन जिया के बॉयफ्रेंड रहे एक्‍टर सूरज पंचोली पर एक्‍ट्रेस को आत्महत्या के लिए उकसाने का आरोप लगा। मामले में सूरज को जेल भी जाना पड़ा था लेकिन जिया की माँ के मुताबिक उनका सलमान खान ने काफी सपोर्ट किया।

गौरतलब है कि इससे पहले सलमान खान की फिल्म ‘दबंग’ के निर्देशक अभिनव कश्यप ने सुशांत की मौत की जाँच की माँग करते हुए आरोप लगाया था कि अरबाज खान और सलमान खान उनके करियर को अपनी मुट्ठी में रखना चाहते थे, इसलिए उन्होंने ‘दबंग 2’ का निर्देशन करने से इनकार कर दिया। वहीं बॉलीवुड अभिनेत्री कंगना रनौत और रवीना टंडन ने भी इंडस्ट्री की अंदरुनी ‘गंदगी’ को उजागर किया था।

‘मरना सब को है, देश के लिए मरना सम्मान की बात, मुझे अपने बेटे पर गर्व है’ – बलिदानी कर्नल संतोष बाबू के पिता

पूर्वी लद्दाख के भारत-चीन बॉर्डर पर गलवान घाटी में सोमवार (15, जून 2020) को हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना की तरफ से नेतृत्व कर रहे 16वीं बिहार रेजिमेंट के कमांडिंग ऑफिसर कर्नल संतोष बाबू देश के लिए बलिदान हो गए। वे अपने माँ-बाप के इकलौते संतान थे। बेटे की मौत की घटना सुनने के बाद भी कर्नल के माँ-बाप टूटे नहीं। उन्होंने बोला कि उन्हें अपने बेटे पर गर्व है।

बलिदानी कर्नल संतोष बाबू के पिता बी उपेंदर को बेटे के वीरगति होने की खबर मंगलवार को मिली। बलिदानी बेटे की खबर ने उन्हें अंदर से झकझोर जरूर दिया है, मगर वो हारे नहीं है। अपने बेटे को याद करते हुए उन्होंने बताया, “मुझे पता था कि एक दिन आएगा, जब मुझे यह सुनना पड़ सकता है, जो मैं आज सुन रहा हूँ और मैं इसके लिए मानसिक रूप से तैयार था। मरना हर किसी को है लेकिन देश के लिए मरना सम्मान की बात है और मुझे अपने बेटे पर गर्व है।”

पिता का दर्द

एसबीआई बैंक से रिटायर्ड कर्नल संतोष बाबू के 62 वर्षीय पिता बेटे पर गर्व महसूस करते हुए बताते हैं कि कर्नल ने अपने 15 साल के सेना के करियर में कुपवाड़ा में आतंकियों का सामना किया था और आर्मी चीफ उनकी तारीफ कर चुके हैं।

पिता ने बताया कि उन्होंने ही अपने बेटे को आर्मी जॉइन करने के लिए प्रेरित किया था। यह जानने के बावजूद कि इसमें खतरे भी हैं। उनके अनुसार, संतोष ने आंध्र प्रदेश के कोरुकोंडा में सैनिक स्कूल जॉइन किया था। और तभी से उन्होंने अपना पूरा जीवन को सेना को समर्पित कर दिया था।

कर्नल से की गई आखिरी बातचीत

पिता ने बताया कि उन्हें अभी भी अपने कर्नल बेटे से की गई आखिरी बात याद है। कर्नल संतोष ने 14 जून उनसे फोन पर बात की थी। सीमा पर तनाव के बारे में पूछने पर कर्नल ने कहा था, “आपको मुझसे यह नहीं पूछना चाहिए। मैं आपको कुछ नहीं बता सकता हूँ। हम तब बात करेंगे, जब मैं वापस आ जाऊँगा।” और यही पिता-पुत्र की आखिरी बातचीत थी। इसके अगली रात को ही कर्नल संतोष गलवान घाटी में वीरगति को प्राप्त हो गए।

बलिदानी कर्नल ने अपने पैरंट्स को बताया था कि जो टीवी पर वे लोग देख और सुन रहे हैं, जमीनी स्तर पर उसकी सच्चाई काफ़ी अलग है।

कर्नल संतोष की निजी जिंदगी

कर्नल संतोष के पिता ने बताया, ‘मैं सेना जॉइन करना चाहता था लेकिन कर नहीं सका। 10 साल के अपने बेटे को मैंने यूनिफॉर्म पहना कर देश की सेवा करने का सपना जगाया। उन्होंने कक्षा 6 से 12 तक सैनिक स्कूल में पढ़ाई की। उसके बाद वह NDA और फिर IMA में जाकर ऑफिसर बने और उसके बाद जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील जगहों पर पोस्टिंग भी हुई।

कर्नल के पिता और मां मंजुला तेलंगाना के सूर्यपेट में रहते हैं। कर्नल के वीरगति प्राप्त होने की खबर सबसे पहले उनकी पत्नी संतोषी को दी गई। कर्नल की पत्नी संतोषी अपने 8 साल की बेटी और 3 साल के बेटे के साथ दिल्ली में रहती हैं।

देश के लिए बलिदान

कर्नल के पिता कहते हैं, “15 साल में मेरे बेटे को चार प्रमोशन मिले। पिता के तौर पर मैं चाहता था कि वह खूब ऊँचाइयों को चूमें। मैं जानता था कि सेना के जीवन में अनिश्चितता होती है, इसलिए हमें संतोष है कि उसने देश के लिए सबसे बड़ा बलिदान दे दिया।”

देश के लिए बलिदान हुए बेटे की राह देखती माँ

कर्नल संतोष के पार्थिव शरीर को बुधवार तक शमशाबाद एयरपोर्ट पर लाया जाएगा। इसके बाद सड़क के रास्ते अंतिम संस्कार के लिए सूर्यापेट ले जाएगा। कर्नल की माँ अपने बेटे को आखिरी बार देखने के लिए बेचैन हैं। वो बताती हैं कि उन्होंने कर्नल को हैदराबाद ट्रांसफर लेने के लिए कहा था ताकि वह परिवार के पास आ सकें। बेटे को लेकर उन्होंने कहा, “मैं खुश हूँ कि उसने देश के लिए अपना जीवन दे दिया लेकिन माँ के तौर पर दुखी हूँ। मैंने अपना इकलौता बेटा खो दिया।”

‘एक गलती कमलेश तिवारी ने भी की थी…’ – अमीश देवगन की गलती पर कट्टरपंथियों की धमकी

न्यूज18 के एंकर अमीश देवगन की एक गलती पर अब उन्हें कट्टरपंथियों की धमकी मिल रही है। उन्होंने 16 जून को अपने शो में ख्वाजा गरीब नवाज के लिए अनजाने में ‘आक्रांता’ शब्द का प्रयोग कर दिया था। इसके बाद उन्हें हिंदूवादी नेता का हश्र याद दिलाकर बताया जा रहा है कि पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ बोलकर एक गलती कमलेश तिवारी ने भी की थी।

सोशल मीडिया पर अमीश देवगन ने अपनी इस गलती के लिए सार्वजनिक तौर से माफी भी माँग ली है। उन्होंने लिखा, “मेरे एक डिबेट में मैंने अनजाने में खिलजी को चिश्ती कह दिया। इस गलती के लिए मैं तहेदिल से माफी माँगता हुए। इससे सूफी संत मोइनुद्दीन चिश्ती, जिनका मैं सम्मान करता हूँ, उनके अनुयायियों को दुख हो सकता है। मैंने इस दरगाह पर दुआएँ माँगी हैं। मुझे अपनी गलती पर खेद है। “

हालाँकि, अमीश देवगन की माफी के बाद कट्टरपंथी शांत नजर नहीं आ रहे। उन्होंने अमीश देवगन पर एफआईआर करवा दी है। उनके ख़िलाफ़ पुलिस एक्शन की माँग कर रहे हैं और साथ ही उनसे कह रहे हैं कि क्या कमलेश तिवारी का हाल याद आ गया, जो इतनी जल्दी माफी माँग ली।

सोशल मीडिया पर इस समय अमीश देवगन के लिए बहुत कमेंट हैं। कुछ लोग उनके सपोर्ट में हैं। तो कुछ उन्हें धमका रहे हैं। अब्दुल कादेर नाम का यूजर अमीश के ट्वीट के नीचे रजा अकादमी द्वारा दायर की गई शिकायत को डालता है और कहता है- “अमीश देवगन तुझे कल सुबह पता चलेगा कि तूने क्या किया। बस इंतजार कर और देख। तुझे नफरत फैलाने के अलावा कुछ आता है क्या?”

इसी प्रकार जमीर अंसारी ऑनलाइन कंपलेंट की कॉपी को डालता है। वह लिखता है, “मैंने ख्वाजा गरीब नवाज पर अपमानजनक टिप्पणी करने के आरोप में अमीश देवगन के ख़िलाफ़ मुंबई पुलिस में शिकायत दर्ज करवा दी है। मैं अनुरोध करता हूँ सबसे, इस कुत्ते के ख़िलाफ़ कानूनी एक्शन लें।”

फिर मोहम्मद दाउद अशरफ नाम का यूजर अमीश देवगन के ट्वीट पर लिखता है, “कमलेश तिवारी का हाल याद आ गया क्या जो इतनी जल्दी माफी माँग लिया तू।”

इसके बाद यही दाउद अशरफ स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखता है- “एक गुस्ताखी कमलेश तिवारी ने की थी। इसे वो याद आ गई शायद जो माफी निकलने लगी।”

क्या हुआ था कमलेश तिवारी के साथ

यहाँ याद दिला दें कि पैगंबर मोहम्मद के ख़िलाफ़ बोलने पर हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी को इसी तरह की धमकियाँ मिली थीं और पिछले साल उनकी हत्या को बहुत ही सुनियोजित ढंग से अंजाम दिया गया था।

गुजरात से उत्तर प्रदेश और नेपाल तक इस मामले में कट्टरपंथियों के तार एक दूसरे से जुड़े पाए गए थे। इस घटना को अंजाम देने के लिए करीब 72 कट्टरपंथियों का ग्रुप बनाया गया था और एक हत्यारे से पूछा गया था कि क्या तुमसे हो पाएगा?

बता दें कि अब उन्हीं हिन्दू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की हत्या की याद अमीश देवगन के मामले में ताजा की गई है। कट्टरपंथियों की इन धमकियों का क्या इशारा है, इसे पूरा कमलेश तिवारी हत्याकांड का घटनाक्रम याद करके समझा जा सकता है।

नदी से निकाल रहे थे रेत, निकला ऐतिहासिक शिव मंदिर: भगवान परशुराम से इस मंदिर के अभिषेक का अनुमान

आँध्र प्रदेश के नेल्लोर में मंगलवार (जून 16, 2020) को पेरुमलापाडु गाँव (Perumallapadu village) के पास पेन्ना नदी तल में रेत खनन के दौरान एक मंदिर जैसी संरचना नजर आई है। लोगों का दावा है कि यह 200 वर्ष पुराना शिव मंदिर है।

उनके अनुसार, साइट की एक विस्तृत जाँच की जाएगी और इसे भावी पीढ़ी के लिए संरक्षित करने के लिए कदम उठाए जाएँगे।

वहीं एंडोस्मेंट असिस्टेंट कमिश्नर वी रवीन्द्र रेड्डी कहते हैं कि मंदिर की बात सामने आने के बाद विभाग जल्द ही स्थानीय लोगों की इच्छा अनुसार मंदिर के नवीनीकरण के लिए कदम उठाएगा।

गौरतलब है कि इससे पहले ओडिशा की राजधानी भुवनेश्वर के नयागढ़ जिले में महानदी के जल में 500 साल पुराने गोपीनाथ मंदिर के अवशेष दिखाई दिए थे। स्थानीयों ने कहा था कि जल में लीन हो चुके इस मंदिर के दर्शन 11 साल पहले हुए थे। इसके बाद इसके अग्र भाग के दर्शन पानी का स्तर कम होने से अब फिर हुए हैं।

गोपीनाथ मंदिर के अग्र भाग दिखने के बाद इसे INTACH की महानदी वैली हेरिटेज साइट्स डॉक्यूमेंटेशन प्रोजेक्ट का हिस्सा बनाया गया था। एक स्थानीय ने बताया था कि सन् 1933 में उनका गाँव सम्पूर्ण रूप से नदी में विलीन हो गया था। उस समय उनकी उम्र 6 साल थी। तब उनके पाँच भाई-बहनों ने पद्मवती यूपी स्कूल में शरण ली थी। उस साल बाढ़ आने के साथ नदी अपनी धारा बदलकर सबके लिए काल बन गई थी।

वहीं, प्रोजेक्ट सचिव ने ओडिशा में जलमग्न हुए मंदिरों के बारे में जानकारी देते हुए बताया था कि ओडिशा में ऐसे बहुत से मंदिर हैं, जो पानी में डूबे हुए हैं। इसमें हीराकुद जलभंडार में 65 मंदिर शामिल हैं। नदियों में भी बहुत से मंदिर समाहित हैं, जिनका सर्वे होना चाहिए। कुछ मंदिर अभी भी खड़े हैं और कुछ ढह गए हैं। मॉडल के तौर पर गोपीनाथ मंदिर को पुन: महानदी से निकालकर जमीन में स्थापित किया जाना चाहिए। 

लद्दाख में चीन की कहानी और वो लोग जो हँसते हुए सवाल पूछ रहे हैं

लद्दाख के गलवान घाटी में जो हुआ वो संक्षेप में कुछ यूँ है कि जब दोनों ही सेनाओं के सीनियर अफसरों के बीच, सेना को पीछे ले जाने पर समझौता हो गया, तो कुछ भारतीय सेना के जवान और अफसरों ने, बिना किसी हथियार के चीनी सैनिकों द्वारा बनाए गए कैंप की तरफ जा कर हटने को कहा।

चीनी सैनिकों ने इस बात पर पत्थरबाजी कर दी और कमाडिंग ऑफिसर, कर्नल संतोष समेत भारतीय पार्टी पर कँटीले तारों से लिपटे डंडे आदि से बुरी तरह हमला किया। जब तक भारतीय खेमे तक बात पहुँचती, भारतीय सैनिकों को चीनी सेना के दूसरे कैंप से आए सैनिकों ने घेर लिया था। कर्नल संतोष वीरगति को प्राप्त हुए।

दोनों तरफ से झड़प लड़ाई चलती रही और यह बड़े इलाके में फैल गई। घाटी के नीचे तेज बहती नदी में कई जवान गिरे और दोनों ही तरफ से सैनिक बलिदान हुए। बाद में 17 घायल सैनिकों ने भयावह ठंढ और ऑक्सीजन की कमी वाली इस ऊँचाई पर अपने जख्मों से लड़ते हुए अंतिम साँस ली।

चीन ने अभी तक आधिकारिक आँकड़ा नहीं दिया है और उसकी प्रोपेगेंडा साइट यह बताने में लगी हुई है कि भारत ही उनके इलाके में घुस आया था और चीन की सेना डरपोक नहीं है, मुँहतोड़ जवाब देगी। अलग-अलग सूत्रों से पता लगा है कि चीन के कम से कम 43 जवान मरे हैं और यह संख्या बढ़ भी सकती है। भारत के जो 20 जवान वीरगति को प्राप्त हुए, वह भी ज्यादा हो सकती है।

भारत की सेना पर कुछ लोग उँगली उठा रहे हैं, राष्ट्र के नेतृत्व पर चटकारे ले कर सवाल पूछे जा रहे हैं।

सवाल पूछने में समस्या नहीं है, वो हमारा अधिकार है क्योंकि हमने सरकार चुनी है। लेकिन बात यह कि सवाल पूछने वाले लोग दो तरह के हैं। एक वो हैं जो इससे व्यथित हैं कि आखिर ये हो कैसे रहा है, भारत क्या कर रहा है, इसका कोई समाधान क्यों नहीं। दूसरे वो हैं जो पूछ रहे हैं कि कहाँ है 56 इंच का सीना। इनके सवाल में एक अश्लील हँसी बंद है, जो सवाल सिर्फ इसलिए पूछ रहा ताकि वो जता सके कि तुमने चीन का क्या बिगाड़ लिया, तुम तो कमजोर हो।

पहली तरह के लोगों का सवाल जायज है, और निराशा से उपजा है। यह निराशा कई कारणों से हो सकती है। कई बार हमें पता नहीं होता कि सीमावर्ती इलाके की चौकसी कैसे होती है, वहाँ की जमीनी सच्चाई क्या है, सेनाएँ काम कैसे करती हैं आदि। एक कारण यह हो सकता है कि सैनिकों के हताहत होने की खबर से एक नागरिक के तौर पर हम उद्विग्न होते हैं। एक कारण यह हो सकता है कि इतने सैन्य उपकरण खरीदने के बाद भी हम कमज़ोर क्यों दिखते हैं।

इस पर जवाब देने से पहले, उन दुरात्माओं पर टिप्पणी आवश्यक है जिनकी आँखों में भारतीय सेना पर हुए हर हमले के बाद एक अलग चमक दिखती है। इनके सवालों के पीछे दर्द नहीं होता, वेदना नहीं होती, बल्कि एक उपहास भरा तंज होता है। वो सवाल पूछते हुए जवाब दे रहे होते हैं कि भारत एक राष्ट्र के नाम पर बेकार है, और हमारी सेना किसी काम की नहीं।

ऐसे लोग चीन से पैसे भी लेते हैं, हथियारों के दलाल भी होते हैं, और वर्तमान सरकार के विरोध में किसी भी हद तक गिरने को तैयार हैं। इन्हें इस बात से मतलब नहीं है कि इनके कुकर्मों से सेना का मनोबल गिरेगा और लोगों में सामूहिक निराशा देखने को मिलेगी, जो कि सही नहीं।

यह निराशा की भावना पिछली सरकारों के समय से ही है जब चीन या पाकिस्तान किसी भी दर्जे की हरकत कर के निकल जाता था और भारतीय सेना के हाथ राजनैतिक कारणों से बँधे होते थे। आम जनता ने स्वयं के राष्ट्र को पाकिस्तान से भी ओछा मानना शुरू कर दिया क्योंकि हमेशा उसके द्वारा पोषित आतंकवाद ने हमारे देश को तबाह किया, घुसपैठिए आते रहे और सीमा पर हमारे सैनिकों की हत्या होती रही।

यह निराशा इस स्तर की हो चुकी है कि आम आदमी सरकार और सेना, दोनों पर ही, संदेह करने लगता है कि वो जो भी बोलेंगे, झूठ बोलेंगे और चीन ने तो भारत को बुरी तरह से पराजित किया है, जो कि ये बताना नहीं चाहते। इन लोगों को अपनी सेना द्वारा जवाब देने की घटना गलत और किसी तथाकथित रक्षा जानकार की बात सही लगने लगती है।

सरकार क्या कर रही है?

सरकार बहुत कुछ कर रही है, और हर बात पब्लिक में नहीं बताई जाती। जो बातें पब्लिक में हैं उनमें से एक है कि भारत अपनी सीमा पर, अपने इलाके में लगातार सैन्य ढाँचे बनाए जा रहा है। सड़कें और एयरस्ट्रिप बन रही हैं। मिलिट्री स्तर से ले कर रक्षा मंत्रालय और विदेश मंत्रालय के स्तर पर बातचीत जारी है।

कुछ लोग ‘बातचीत’ की बात पर हँसने लगते हैं, इसे कायरता मानते हैं। शायद इन्हीं लोगों के कारण सैनिकों की जानें जाती हैं। एक ग़ैरज़िम्मेदार नागरिक की तरह हमने अपनी सेना या सरकारों पर इतना दवाब बना दिया है, हमारी आशा ऐसी हो गई है कि सीमा पर कोई भी विवाद हो, हमारी इच्छा सीधे युद्ध की होती है।

युद्ध न तो संभव है, न करना चाहिए क्योंकि वहाँ लाशें हर दिन गिरेंगी, आर्थिक नुकसान इतना होगा कि हम पाँच साल पीछे चले जाएँगे। आपको क्या लगता है कि इन बीस बलिदानियों का कोई मोल नहीं? क्या आप यह नहीं चाहेंगे कि भले ही चीनी सेना दो दिन बाद वापस जाती, लेकिन यह रक्तपात न होता तो बेहतर रहता?

चीनी सेना कई कारणों से बदमाशी कर रही है। उसके देश के राजनैतिक हालात खराब हैं। उसने कई बार इस तरह की बातें की हैं जब वो भारतीय सीमा में घुस आते हैं। ये वो तब करते हैं जब उन्हें अपने राष्ट्र को यह दिखाना होता है कि वो तो दुनिया में किसी की नहीं सुनते। एक तानाशाही सरकार अपनी सैन्य क्षमता का तमाशा बनाने के लिए कई बार ऐसा कर चुकी है, फिर वापस चली जाती है।

चीन ने न तो ऐसा पहली बार किया है, न आखिरी बार। लेकिन हाँ डोकलाम से गलवान तक, उन्हें वैसा जवाब मिला जैसा उन्होंने सोचा नहीं था। इस बार लाशों की गिनती पर उनकी चुप्पी बताती है कि उनको कैसा झटका लगा है, बीजिंग से कुछ स्वतंत्र पत्रकार बता रहे हैं कि अस्पतालों में लगातार लाशें आ रही हैं, और उन्हें लगातार ‘जलाया’ जा रहा है।

बातचीत ही एकमात्र उपाय क्यों?

बातचीत एकमात्र उपाय इसलिए हो जाता है क्योंकि दूसरा कोई भी उपाय ऐसा नहीं जो प्रैक्टिकल हो। युद्ध जवाब नहीं है, न ही सैन्य क्षमता को एक स्तर के बाद ले जाना। गिरती अर्थव्यवस्था के दौर में, कोरोना से जूझते राष्ट्र युद्ध का सदमा नहीं झेल सकते। इसलिए, अंतरराष्ट्रीय दवाब बना कर चीन को अपनी प्रसारवादी नीतियों की समीक्षा करने पर मजबूर करना होगा।

बातचीत से ज़िंदगियाँ बचती हैं, इसलिए यह सही रास्ता है। बाकी के दूसरे रास्तों में चीन पर व्यापारिक दवाब बनाना भी है जिसमें दोनों देशों के बीत व्यापार के अंतर 50 बिलियन डॉलर से ज्यादा है। कुछ लोग कह रहे हैं कि व्यापार बंद कर दो। हो सकता है हो भी जाए, लेकिन जिन चीजों को भारत वहाँ से आयात करता है, वो क्या भारत में, उससे सस्ते, या उतने ही दामों पर बनाने की क्षमता भारत में है!

नहीं है। इसलिए, पहले अपनी मैनुफ़ैक्चरिंग ठीक किए बिना ऐसा करना अपनी ही इकॉनमी को तबाह करने जैसा होगा क्योंकि कई उद्योंगों में लगने वाले कई तरह की चीजें सीधे चीन से ही आती हैं। चीन किसी की बात नहीं मानता, इसलिए एक तरह से किसी बड़े राष्ट्र या यूएन से दबाव बनवाना भी उतना सही नहीं ही लगता।

हाँ, भारत अपनी तरफ से ताइवान और तिब्बत को स्वतंत्र राष्ट्र मान कर अपने दूतावास बना ले, उन्हें औपचारिक रूप से भाव देना शुरु करे, और बाकी मित्र राष्ट्रों से भी यह कराए तब चीन का नेतृत्व इसे एक चैलेंज की तरह देखेगा। तब भारत, एक तरह से, चीन को उसी की भाषा में दवाब देगा जहाँ वो बिना बात के किसी ऐसे इलाके में भटकते हुए घुस जाएगा जहाँ जाने का कोई औचित्य नहीं।

इसलिए, जब तक ऐसा नहीं हो रहा, अपनी सेना पर विश्वास रखिए। उन लोगों का मनोबल बढ़ाइए जो हमारी रक्षा कर रहे हैं। उन्हें एक संख्या में मत लपेटिए क्योंकि आपकी राजनैतिक विचारधारा अलग है। ऐसे समय पर सिर्फ भारत ही ऐसा देश है जहाँ के नागरिक यह मानने लगते हैं कि नेपाल भी हमसे आँखें उठा कर बोलेगा, और हम कुछ नहीं कर पाएँगे।

भारत के 20 बलिदान, तो चीन के 43 सैनिकों के हताहत होने की खबरें, संख्या बढ़ सकती है: मीडिया रिपोर्ट्स

भारत और चीन की सेनाओं के बीच लद्दाख बॉर्डर पर गलवान घाटी के पास हिंसक झड़प में चीन के 43 सैनिकों के हताहत होने की बात मीडिया में सामने आई है, जिसमें चीन के मारे गए, घायल और गंभीर घायल चीनी सैनिक भी शामिल बताए जा रहे हैं।

वहीं, भारतीय सेना ने स्पष्ट किया है कि इस झड़प में 20 भारतीय सैनिकों को वीरगति प्राप्त हुई, हालाँकि, यह भी बताया जा रहा है कि संख्या अभी 20 से अधिक भी हो सकती है।

भारतीय सेना ने आधिकारिक बयान में कहा है कि शून्य से काम के तापमान में चली इस झड़प में हमारी सेना के 17 सैनिक बुरी तरह से घायल थे जो बाद में वीरगति को प्राप्त हो गए।

आज दिन में ही दोनों तरफ से सेना और उनके अधिकारियों की मौत की खबरें सामने आई। इसमें भारतीय सेना के एक अफसर और दो जवान के बलिदान की खबरों के कुछ देर बाद ही भारतीय सेना द्वारा जारी एक अपडेट में बताया गया है कि इस झड़प में दोनों देशों की सेना के अधिकारियों को हानि पहुँची है।

चीन की ओर से जारी एक अधिकारिक बयान में आरोप लगाया है कि भारत के सैनिकों के द्वारा उनकी सीमा में घुसपैठ की कोशिशें की गईं और चीनी सैनिकों पर हमला किया गया।

बताया जा रहा है कि इस झड़प के दौरान किसी तरह की कोई गोली नहीं चली है, यानी हाथापाई और पत्थरबाजी हुईं, जिनमें सैनिकों को क्षति पहुँची है।

भारतीय सेना की ओर से जारी किए गए आधिकारिक बयान में कहा गया है- “गलवान घाटी में सोमवार की रात को डि-एस्केलेशन की प्रक्रिया के दौरान भारत और चीन के सैनिकों के बीच हिंसक झड़प हुई। इस दौरान भारतीय सेना के एक अफसर और दो जवान शहीद हो गए हैं। दोनों देशों के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी इस वक्त इस मामले को शांत करने के लिए बड़ी बैठक कर रहे हैं।”

‘चीन के हाथों 45 सालों बाद जवानों का खून’ वामपंथी मीडिया द्वारा सुनाया जा रहा अक्साई चीन के सच का अधूरा हिस्सा है

पूर्वी लद्दाख के गलवान घाटी में भारतीय सेना की चीनी सैनिकों से झड़प के बाद मीडिया में एक बात को प्रमुखता से प्रकाशित किया जा रहा है कि पिछले 45 सालों में पहली बार चीनी सेना के हाथों भारतीय सेना का खून बहा है। ये वही मीडिया और तंत्र है, जो हमेशा ही इस अक्साई चीन क्षेत्र को ‘विवादित क्षेत्र’ बनाने वाले भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरु के इस क्षेत्र के ‘महत्त्व’ पर दिए गए ऐतिहासिक बयान को सामने रखने में हिचकिचाता रहा है।

यह मीडिया दर्शकों, और अपने पाठकों को इस सूचना से वंचित रखता है कि इस अक्साई क्षेत्र में इतिहास में पहली बार भारत ने अपने निर्माण कार्य शुरू किए हैं, जो कि चीन की बौखलाहट का प्रमुख कारण बना हुआ है। यह सब कुछ ऐसे समय में घटित हुआ है, जब कुछ ही दिन पहले मीडिया में चीन द्वारा अपने सैनिकों को इस क्षेत्र से करीब डेढ़ किलोमीटर पीछे बुला लेने के समाचार देखे गए थे।

आज की घटना के बाद चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस झड़प को लेकर दोष पूरी तरह से भारतीय सेना पर डालते हुए कहा है कि सोमवार को भारतीय सेना ने नियंत्रण रेखा का गंभीर तौर पर उल्लंघन किया है। इस सबके बीच गलवान घाटी में पिछले कुछ समय से बढ़ रही गतिविधियों पर चर्चा किया जाना आवश्यक है।

सोमवार रात को दोनों देशों के सैनिकों के बीच झड़प हुई। जिस क्षेत्र में यह घटना हुई वो पूरा इलाका सामरिक दृष्टि से बेहद संवेदनशील है। इस झड़प के दौरान दो परमाणु संपन्न देशों – भारत और चीन के जवान डंडो और पत्थरों से आपस भीड़ गए।

इस लाठीबाजी और पत्थरबाजी में जहाँ भारतीय सेना ने अपने एक अधिकारी और दो सैनिकों को खोया तो वहीं चीन अपने सैनिकों के ‘हताहत’ होने की बात तो स्वीकार कर रहा है, लेकिन यह स्पष्ट रूप से नहीं कह रहा है कि चीन के कितने सैनिक इस झड़प में मारे गए। लेकिन कोरोना जैसी वैश्विक त्रासदी का सृजन करने वाला यह कम्युनिस्ट देश किसी सच को स्वीकार करे, यह आशा करना भी महज एक छलावा है। हालाँकि, अभी हताहतों की संख्या बढ़ने की भी खबर है।

ऊँचाई पर स्थित ये हिस्सा सामरिक दृष्टि से संवेदनशील है

दरअसल, वर्ष 1975 में लाइन ऑफ़ एक्चुअल कंट्रोल यानी, एलएसी पर चीन ने घात लगाकर हमला किया था, जिसमें चार भारतीय सैनिकों ने जान गँवाई थी। तभी से दोनों देशों में झड़प तो कई बार हुई, लेकिन जान किसी की कभी नहीं गई। बीते एक माह में लद्दाख के इस क्षेत्र में कई मौकों पर भारत और चीन की सेनाएँ आमने-सामने हुईं हैं। दोनों देशों के सैनिकों के बीच हुई हाथापाई के वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर किए गए।

जिस पूरे इलाके में आजकल चायनीज सेना और भारतीय सेना के बीच गतिविधियाँ तेज हुईं हैं, वह गलवान घाटी इस पूरे इलाके में सबसे ऊँचाई पर स्थित है। यह ऐसी जगह है, जहाँ से लम्बी दूरी तक नजर रखी जा सकती है, साथ ही इस जगह से उस सड़क को भी आसानी से निशाना बनाया जा सकता है, जहाँ से भारतीय सेना रसद और हथियारों की सप्‍लाई करती है। चीन की बौखलाहट का कारण भी यह सड़क ही है।

भारत ने हाल ही में इस क्षेत्र में सड़क निर्माण किया है। जिसका कि चीन की कम्युनिस्ट सरकार की ओर से काफी विरोध किया गया था। जबकि, भारत ने चीन के विरोध के बावजूद अक्साई चीन पर भारत के नियन्त्रण पर चीन को किसी ग़लतफ़हमी में ना रहने का सन्देश दिया। इसी जगह पर स्थित पैंगॉन्‍ग लेक का एक हिस्‍सा जहाँ भारत में आता है, तो वहीं दूसरा हिस्‍सा चीन में।

इसी गलवान घाटी से कुछ ही दूरी से अक्‍साई चिन का वो क्षेत्र शुरू हो जाता है, जिस पर चीन वर्ष 1962 से ही अवैध रूप से अपना अधिकार बताता आया है। इतने वर्षों बाद भारत ने चीन द्वारा इस क्षेत्र में किए जा रहे अवैध निर्माणों के विरोध में स्पष्ट कर दिया था कि ये क्षेत्र भारतीय सीमा के अंतर्गत आता है, और इसमें चीन का हस्‍तक्षेप किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा।

चीन चाहता है कि वह इस इलाके में अपना प्रभुत्व स्थापित कर भारतीय सेना पर निरंतर नजर रख सके। लेकिन उसे ऐसा करने में पहली बार समस्या का सामना करना पड़ रहा है। यही कारण है कि भारतीय सैनिकों के बलिदान की आड़ लेकर वामपंथी मीडिया से लेकर कॉन्ग्रेस जैसे दल भी भारतीय सेना के बलिदान पर चिंतित नजर आ रही है। यह चिंता और कुछ नहीं, बल्कि केंद्र सरकार की कार्यशैली को लेकर जनता को गुमराह करना मात्र है। वरना यह वही विपक्षी दल है, जो हमेशा से ही भारतीय सेना के अधिकारों पर भद्दे चुटकुले बनाते और उनका समर्थन करते देखे गए हैं।

इसके अलावा अक्साई चीन क्षेत्र में चीन की सेना की बढ़ती गतिविधियों का एक और प्रमुख कारण चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग का अपने ही देश और विश्वभर में कोरोना वायरस के संक्रमण को लेकर हो रहा विरोध प्रदर्शन भी है। ऐसे में चीन से कई बड़े निवेशकों द्वारा अपना निवेश वापस खींच लेने के कारण बढ़ी आर्थिक मंदी के कारण पार्टी पर जिनपिंग की पकड़ कमजोर हो रही है।

एक लम्बे समय से ही चीन की कम्युनिस्ट सरकार अपने पैसे के बल पर पूरे विश्वभर में ही संस्थाओं को प्रभावित करने में सक्षम रहा है। सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा की मीडिया को खरीदने और उन्हें प्रभावित करने की खबरें भी निरंतर मीडिया में बनी हुई हैं। ये वो दल हैं जो चीन की ओर से कम्युनिस्ट सरकार के हितों की ढाल का काम कर रहे हैं।

ऐसे में भारतीय मीडिया द्वारा भारतीय सेना के बलिदान को 45 साल में हुए पहले ‘खूनी संघर्ष’ जैसी सनसनीखेज ख़बरों से पाटने के बजाए चीन का वास्तविक मर्म सामने रखना चाहिए, जो कि केंद्र सरकार और भारतीय सेना द्वारा अक्साई चीन क्षेत्र में दिखाया जा रहा साहस ही है और यही बौखलाहट चीन की कम्युनिस्ट सरकार के खोखलेपन को सामने रखने के लिए काफी है।

पालघर: दो साधुओं की पीट-पीट कर हत्या के मामले में 11 आरोपित कोरोना पॉजिटिव, 6 के रिपोर्ट का इंतज़ार

महाराष्ट्र के पालघर जिले में भीड़ द्वारा दो साधुओं और उनके ड्राइवर की पीट-पीट कर हत्या करने के मामले में गिरफ्तार 11 आरोपित कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए हैं। पुलिस ने मंगलवार (जून 16, 2020) को यह जानकारी दी।

बता दें कि पालघर जिले के गढ़चिंचले गाँव में भीड़ ने कार से मुंबई से सूरत जा रहे दो साधुओं और उनके चालक की पीट-पीट कर हत्या कर दी थी। इस मामले में कुल 156 लोगों को गिरफ्तार किया गया था।

पालघर पुलिस थाने के एक अधिकारी ने बताया कि सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में ले लिया गया है, लेकिन उन्हें विभिन्न पुलिस हवालातों में रखा गया है, क्योंकि पालघर जेल में काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि वाड़ा में पुलिस हवालात में रखे गए 17 आरोपियों की हाल में जाँच की गई, जिनमें से 11 लोग संक्रमित पाए गए और छ: अन्य की जाँच के परिणाम का इंतजार किया जा रहा है।

उन्होंने बताया कि संक्रमित पाए गए लोगों को स्थानीय अस्पतालों में भर्ती कराया गया है और उनके संपर्क में आए लोगों का पता लगाया जा रहा है। इससे पहले, गिरफ्तार किए गए कम से कम दो आरोपित कोरोना संक्रमित पाए गए थे।

गौरतलब है कि 16 अप्रैल 2020 को जूना अखाड़े से जुड़े दो साधु 70 वर्षीय कल्पवृक्ष गिरि महाराज और 35 वर्षीय सुशील गिरि महाराज अपने ड्राइवर 30 वर्षीय नीलेश तेलगेडे के साथ एक अन्य साधु के अंतिम संस्कार में शामिल होने के लिए मुंबई से गुजरात जा रहे थे। इसी बीच पालघर जिले के गढ़चिंचले गाँव के 200 से अधिक लोगों की भीड़ ने इकठ्ठा होकर साधुओं पर हमला किर दिया था। इस दौरान भीड़ ने दोनों साधुओं के साथ उनके एक ड्राइवर की पीट-पीटकर हत्या कर दी थी।

बता दें कि साधु समेत तीन लोगों की पीट-पीट कर हत्या करने की पूरी घटना वहाँ मौजूद कुछ पुलिसकर्मियों के सामने हुई। मामले में अब तक 35 पुलिसकर्मियों का तबादला हो चुका है।

आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत ने भी इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा था, “2 साधुओं की हत्या। क्या यह होना चहिए? क्या कानून-व्यवस्था किसी को हाथ में लेना चाहिए था? ऐसे में पुलिस की भूमिका क्या होनी चाहिए थी? ये सभी चीजें ऐसी हैं जिन पर सोचा जाना चाहिए।” 

वहीं अखिल भारतीय संत समिति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर इस मामले की सीबीआई जाँच की माँग कर चुकी है। पत्र में उन्होंने हत्या के पीछे बड़ी साजिश की आशंका जताते हुए कहा कि उन्हें महाराष्ट्र के गृह मंत्री पर भरोसा नहीं है।