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दिल्ली दंगों के खिलाड़ी खालिद सैफी की वो सब फोटो यहाँ हैं, जिन्हें देखकर आप कहेंगे…

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने दिल्ली हिंसा के मामले में खालिद सैफी को गिरफ्तार किया है। खालिद सैफी (Khalid Saifi) पर आरोप है कि उसने दिल्ली में हिंसा से पहले शाहीन बाग में जेएनयू के पूर्व छात्र उमर खालिद और पूर्व आम आदमी पार्टी के पार्षद ताहिर हुसैन के बीच मीटिंग करवाई थी। शाहीन बाग में इस साल 8 जनवरी को दोनों की मुलाकात हुई थी, इस मीटिंग में उमर खालिद, ताहिर हुसैन और खालिद सैफी शामिल थे।

लेकिन खालिद सैफी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उसकी तस्वीरों की बाढ़ आ गई है। इन तस्वीरों में यह खालिद सैफी वामपंथी मीडिया से लेकर, प्रोपेगेंडा जगत की हस्तियों और आम आदमी पार्टी नेताओं के साथ नजर आ रहा है।

इनमें कुछ प्रमुख नाम रेमन मैग्सेसे पुरस्कार विजेता और एनडीटीवी के प्रोपेगेंडा पत्रकार रवीश कुमार, आम आदमी पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से लेकर सोशल मीडिया पर इस्लामिक विचारधारा की समर्थक RJ सायमा आदि नाम शामिल हैं।

एक नजर ऐसी ही कुछ तस्वीरों में खालिद सैफी के साथ कुछ प्रमुख हस्तियाँ –

ट्विटर पर अंकुर सिंह ने ऐसा ही तस्वीरों का एक समूह ट्वीट किया है जिसमें खालिद सैफी दिल्ली के उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, रवीश कुमार से लेकर JNU के छात्र नेता कन्हैया कुमार के साथ देखे जा सकते हैं।

एक अन्य ट्वीट में अंकुर सिंह ने खालिद सैफी की कुछ और तस्वीरें ट्वीट की हैं इनमें खालिद सैफी को वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ की आरफा खानम, धान को गेहूँ बताने वाले यूट्यूबर अभिसार शर्मा, राजदीप सरदेसाई और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल के साथ देखा जा सकता है।

इस तस्वीर में ख़ालिद सैफी को JNU के छात्र नेता उमर खालिद और अन्य कॉमरेड साथियों के बीच देखा जा सकता है –

एक अन्य तस्वीर में खालिद सैफी को RJ सायमा के साथ भी देखा गया है। ये वही रेडियो जॉकी सायमा है, जो शाहीन बाग़ से लेकर दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के बीच सोशल मीडिया पर निरंतर इस्लामिक विचारधारा के समर्थन और मजहबी कारणों से चर्चा में बनी हुई नजर आई थीं –

एक सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण सेल्फी जो खालिद सैफी द्वारा ली गई है उसमें उनके साथ संजुक्ता बासु और गुर्मेह्र कौर नजर आ रही हैं –

आम आदमी पार्टी नेता आतिशी मार्लेना के साथ खालिद सैफी –

बॉलीवुड अभिनेता प्रकाश राज के साथ खालिद सैफी –

खालिद सैफी की ऐसी ही कुछ तस्वीरों को ट्वीट करते हुए ‘पॉलिटिकल कीड़ा’ नामक ट्विटर एकाउंट ने लिखा है – डराने वाली तस्वीरें खालिद सैफी के अकेले की नहीं बल्कि इन सभी वामपंथी विचारधारा के चेहरों के साथ ली गई उसकी तस्वीरें हैं।

उल्लेखनीय है कि उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में एसआईटी (SIT) ने आज (जून 9, 2020) खालिद सैफी को गिरफ्तार किया है। खालिद सैफी को चाँद बाग में हुई हिंसा की साजिश में शामिल होने के आरोप में अरेस्ट किया गया है। इससे पहले AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर हो चुकी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने दावा किया है कि खालिद सैफी ने ही दिल्ली दंगों से पहले उमर खालिद और ताहिर हुसैन की मीटिंग करवाई थी। ये मीटिंग 8 जनवरी को शाहीन बाग में हुई थी। इसमें उमर खालिद, ताहिर हुसैन और खालिद सैफी शामिल थे।

मीटिंग में उमर खालिद ने कहा था कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली में होंगे तो कुछ बड़ा करना है। वित्तीय सहायता पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के लोग देंगे। बता दें कि खालिद सैफी यूनाइटेड अगेंस्ट हेट नाम का संगठन चलाता है। इसका जिक्र गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में भी किया हुआ है।

‘भारत में एक मुस्लिम को एक हिंदू की थूक चाटने के लिए मजबूर किया जा रहा’ – फैक्ट चेक

30 मई को फ्रेंड्स ऑफ कश्मीर 6 नाम के ट्विटर अकॉउंट से एक विवादास्पद वीडियो साझा की गई। वीडियो में नजर आ रहे एक पीड़ित व्यक्ति को लेकर दावा किया गया कि फासिस्ट भारत में अल्पसंख्यक असुरक्षित हैं।

वीडियो के साथ लिखा गया, “भारत में, एक मुस्लिम व्यक्ति को एक हिंदू की थूक चाटने के लिए मजबूर किया जा रहा है। शायद उसके रमजान के रोजे को तोड़ने के लिए…!”

वीडियो में देख सकते हैं कि एक व्यक्ति दूसरे व्यक्ति को चाँटा मारता है। उससे उठक-बैठक करवाता है। वहाँ खड़ी कार पर थूकता है और फिर उससे उस थूक को चाटने के लिए कहता है।

वीडियो में पीड़ित व्यक्ति को सफेद कपड़े पहने देखा जा सकता है और उसे मारने वाले युवक को यह भी कहते सुना जा सकता है, “क्यों बोला रमजान का नाम? अब बोलेगा रमजान का नाम? तेरे को डीसीपी को दूँ क्या?”

बता दें कि इस वीडियो को पिछले हफ्ते इसी एंगल के साथ, जिसमें हिंदुओं को बदनाम करने की कोशिश की गई थी, उसे शेख अजिजूर रहमान नाम के व्यक्ति ने भी शेयर किया था। जिसकी फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक वह द गार्जियन का पत्रकार है और अब वह इस वीडियो को डिलीट कर चुका है।

सच क्या है?

द टाइम्स ऑफ इंडिया के अनुसार, ये वाकया गुजरात के सूरत में लिंबायत इलाके का है। इस मामले को सबसे पहले टीवी9 गुजराती ने 7 अप्रैल को रिपोर्ट किया था। वीडियो में नजर आ रहे दोनों युवक समुदाय विशेष से हैं। थप्पड़ मारने वाले का नाम सलमान है।

पूरे मामले की बात करें तो दरअसल, सलमान नहीं चाहता था कि दूसरा युवक किसी रमजान नाम के युवक के ख़िलाफ़ गवाही दे। इसलिए वह पीड़ित को इस प्रकार परेशान कर रहा था।

इस पूरे वाकये को दिव्य भास्कर ने डिटेल में कवर किया है। रिपोर्ट बताती है कि वीडियो में नजर आने वाली गाड़ी सूरत नगर निगम के बाग विभाग की है। पुलिस का भी कहना है कि आरोपित के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज हो गई है।

अब जैसा कि इस वीडियो में केवल रमजान नाम सुनकर हिंदुओं पर झूठा आरोप लगाया जा रहा है और भारत की छवि को बिगाड़ने की कोशिश की जा रही है, तो ये बात ध्यान रहे कि इस साल रमजान 24 अप्रैल से शुरू हुए थे और घटना 7 अप्रैल की है। यानी रमजान से पूर्व। इसलिए ये दावा कि मुस्लिम आदमी को किसी हिंदू आदमी ने थूक चाटने पर मजबूर किया, बिलकुल गलत है।

यह भी जान लें कि ये पहली बार नहीं है जब हिंदू समुदाय को बदनाम करने के लिए किसी रिपोर्ट को इस तरह का कम्युनल एंगल दिया गया हो। इससे पहले ट्विटर यूजर कामरान ने एक फेक न्यूज शेयर की थी। जिसमें यूपी के गाँव में कुछ ब्राह्मणों पर आरोप लगाया जा रहा था कि उन्होंने शिवजी के एक मंदिर में 16 साल की बच्ची की जीभ की बलि चढ़ा दी। बाद में जब मामले की पड़ताल हुई तो पता चला कि लड़की ने अपनी खुद काट ली थी।

दिल्ली दंगों में जिसने करवाई थी उमर खालिद और ताहिर हुसैन की मीटिंग, वो खालिद सैफी हुआ गिरफ्तार

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों के मामले में एसआईटी (SIT) ने आज (जून 9, 2020) खालिद सैफी को गिरफ्तार किया है। खालिद सैफी को चांद बाग में हुई हिंसा की साजिश में शामिल होने के आरोप में अरेस्ट किया गया है। इससे पहले AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के ख़िलाफ़ चार्जशीट दायर हो चुकी है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, क्राइम ब्रांच ने दावा किया है कि खालिद सैफी ने ही दिल्ली दंगों से पहले उमर खालिद और ताहिर हुसैन की मीटिंग करवाई थी। ये मीटिंग 8 जनवरी को शाहीन बाग में हुई थी। इसमें उमर खालिद, ताहिर हुसैन और खालिद सैफी शामिल थे।

मीटिंग में उमर खालिद ने कहा था कि जब अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दिल्ली में होंगे तो कुछ बड़ा करना है। वित्तीय सहायता पापुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के लोग देंगे। बता दें कि खालिद सैफी यूनाइटेड अगेंस्ट हेट नाम का संगठन चलाता है। इसका जिक्र गृहमंत्री अमित शाह ने संसद में भी किया हुआ है।

सैफी को इससे पहले 26 फरवरी को खुरेजी खास से गिरफ्तार किया गया था। मगर, अब इस मामले में आगे की कार्रवाई करते हुए क्राइम ब्रांच की एसआईटी ने खालिद सैफी को अपनी हिरासत में लिया है। साथ ही टाइम्स नाउ के अनुसार, पुलिस ने यह भी बताया है कि सैफी का नाम पहले से चार्जशीट में है।

चार्जशीट में सैफी पर आरोप है कि उसने प्रदर्शन में सबको इकट्ठा करने का काम किया था। इसके अलावा उमर खालिद और ताहिर हुसैन दोनों से अच्छे संबंध होने के कारण उसने दोनों की मीटिंग भी करवाई थी।

गौरतलब है कि क्राइम ब्रांच द्वारा में खालिद सैफी की गिरफ्तारी के बाद सोशल मीडिया पर उसकी बहुत सी तस्वीरे घूम रही हैं। एक तस्वीर में वह मनीष सिसोदिया के साथ नजर आ रहा है। एक में रवीश कुमार के साथ और एक में कन्हैया कुमार के साथ। इसके अलावा कुछ अन्य तस्वीरें भी हैं, जिसमें वह अभिसार शर्मा, राजदीप सरदेसाई, आरफा खानुम जैसे मीडिया गिरोह के लोगों के साथ भी सेल्फी ले रहा है।

यहाँ बता दें कि अभी बीते 2 जून को इससे पहल दिल्ली पुलिस ने दंगों के मामले में 2 चार्जशीट दायर की थी। इस चार्जशीट में ताहिर को मुख्य आरोपित बनाया गया था। चार्जशीट में दिल्ली पुलिस ने कहा है दंगे कराने के लिए ताहिर हुसैन ने करोड़ों ख़र्च किए थे। इस दौरान वह जेएनयू के पूर्व छात्र नेता उमर खालिद से लगातार संपर्क में था।

मानसी से आलिया बनी गर्भवती सौतन को बेगम शबाना ने बीच सड़क मारी गोली, शौहर जफर ने लाकर दी थी पिस्टल

उत्तरप्रदेश के मुरादाबाद में एक शबाना नाम की महिला ने सोमवार को अपनी गर्भवती सौतन की बीच सड़क गोली मारकर हत्या कर दी। बाद में पिस्टल लहराते हुए शव के चारों ओर घूमती रही। मृतिका की पहचान आलिया उर्फ मानसी शर्मा के रूप में हुई।

दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, घटना सिविल लाइन इलाके की विद्या नगर कालोनी की है। जहाँ ट्रांसपोर्ट का काम करने वाले जफर की पहली पत्नी शबाना अपने शौहर के साथ रहती थी। उसी के घर के बगल में उसकी सौतन आलिया भी किराए के घर में ही रहती थी।

खबर की मानें तो, जफर ने डेढ़ साल पहले ही दूसरा निकाह किया था। इसके बाद मानसी ने अपना नाम बदलकर आलिया कर लिया और जफर के साथ शबाना के घर के पड़ोस में रहने लगी। घटना के समय मृतिका 7 माह की गर्भवती थी।

कहा जा रहा है कि जफर ने जब मानसी से दूसरा निकाह किया था, तभी से उसकी पहली पत्नी शबाना अपनी सौतन से बदला लेने का मौका तलाश रही थी।

ऐसे में उसका आलिया से आए दिन झगड़ा होता रहता था। लेकिन, सोमवार को जब आलिया अपनी भतीजी मुस्कान के साथ दवा लेकर लौट रही थी, तभी शबाना ने उसका रास्ता रोक लिया।

शबाना ने सबसे पहले गोली से फायर मुस्कान पर किया, लेकिन उस समय वह चूक गई। बाद में जब आलिया अपनी भतीजी को बचाने आगे बढ़ी तो शबाना ने उसपर 4 गोलियाँ दाग दीं। चारों की चारों आलिया को ही लगी।

इस दौरान सड़क पर कई लोग मौजूद थे। मगर, कोई भी शबाना को रोकने या आलिया को बचाने आगे नहीं बढ़ा। देखते-ही -देखते आलिया ने दम तोड़ दिया और शबाना बस 9mm पिस्टल लहराते शव के आगे घूमती रही और खुद ही उससे बात करती रही।

रिपोर्ट के अनुसार, पुलिस का कहना है कि शबाना को यह पिस्टल जफर ने ही लाकर दी थी। इसके बाद शबाना ने इसे खुद यूट्यूब पर चलाना सीखा। वर्तमान में जफर फरार है।

हिंदू होने और जनेऊ पहनने की सजा मिली सरपंच अजय पंडिता को: हिंदुओं का पैसा चलेगा, हिन्दू नहीं

जम्मू कश्मीर के अनंतनाग जिले में आतंकियों ने सोमवार (जून 8, 2020) को कॉन्ग्रेस के हिंदू सरपंच अजय पंडिता (भारती) की गोली मारकर हत्या कर दी। अजय पंडिता की हत्या उस वक्त की गई, जब वो बागान में गए हुए थे। उनके परिवार में माँ-पिता के अलावा पत्नी और दो बेटियाँ हैं। आतंकियों ने पीछे से उन पर वार कर मौत की नींद सुला दी। कश्मीर में हिंदुओं की हत्या कोई नई बात नहीं है और अजय पंडिता की हत्या भी इसीलिए हुई, क्योंकि वो एक कश्मीरी पंडित हिंदू थे और साथ ही वो एक जनसेवक के पद भी थे। 

हमने इस घटना को लेकर कश्मीरी पंडित जनर्लिस्ट दिव्या राजदान से बात की। उन्होंने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए कहा, “कश्मीर में 700 साल से ज्यादा से कश्मीरी पंडितों का नरसंहार होता आ रहा है और हमारा जनेऊ हमेशा में रक्त में लिपटा रहा है। ये सिर्फ कश्मीरी पंडितों का ही नहीं सभी हिंदुओं का हाल रहा है। आज यह समय आ गया है कि हम समझें कि यह स्थिति काफी गंभीर है, क्योंकि इसका जो मूल कारण है, वो इस्लाम से आता है। अजय पंडिता की बात करें तो उन्होंने कोई ऐसा अपराध नहीं किया था कि उन्हें मौत के घाट उतार दिया जाए। उनका अपराध बस इतना था कि उनका नाम अजय पंडिता था, वो जेनेऊधारी थे, इसीलिए उन्हें मौत की नींद सुला दिया गया।” 

वो आगे कहती हैं, “कहीं न कहीं आज भी कश्मीर इस्लामिक स्टेट है, वहाँ पर मजहब विशेष का वर्चस्व है और वो नहीं चाहते हैं कि 1% भी हिंदू वहाँ पर रहे। वहाँ पर हिंदुओं के लिए कोई जगह नहीं है। अनुच्छेद 370 हट गया, लेकिन आज भी हिंदुओं की हालत जस की तस है। आज भी वहाँ 1990 की तरह की ही स्थिति है, जब हमारा 7 बार नरसंहार हुआ। अगर आज हम वहाँ पर गए तो हमारा 8वीं बार नरसंहार होगा। मगर मैं हमेशा से कहती हूँ कि हमारा 8वीं बार नरसंहार नहीं होगा, क्योंकि उसके लिए हम बचेंगे ही नहीं। हमें पूरी तरह से हमेशा के लिए खत्म कर दिया जाएगा।”

दिव्या राजदान का कहना है कि आज जो अजय पंडिता के साथ हुआ है, उसका विरोध करने के लिए जनआक्रोश की आवश्यकता है। पूरे भारत को एक होने की आवश्यकता है। इसके साथ ही उन्होंने सारे मीडिया हाउस, सभी हिन्दू भाई-बहनों और भारतीय नागरिकों से अपील की है कि वो इसके खिलाफ आवाज उठाएँ और लोगों को जागरुक करें, क्योंकि जो कश्मीर में हुआ है, वो सिर्फ कश्मीर की बात नहीं है, पूरे भारत की बात है। पूरे देश में किसी न किसी कोने में एक कश्मीर तैयार हो रहा है। इसके पीछे उन्होंने इस्लाम के माध्यम से लोगों को बहकाने, आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने, मारने-काटने, रेप करने के लिए उकसाना बताया। 

दिव्या ने आगे कहा कि इसके पीछे जमात है, हुर्रियत के लोग हैं, पाकिस्तान है, इसके पीछे एक अंतरराष्ट्रीय साजिश है, जो कि सरकार को पता है, लेकिन फिर भी इस पर काम नहीं हो रहा है। उन्होंने बताया कि कश्मीर को अगर इस्लामिक स्टेट कहें तो इसमें कोई बड़ी बात नहीं होगी, क्योंकि यहाँ पर लगभग 99% समुदाय विशेष से हैं, और 1% से भी कम में हिंदू, सिख आदि हैं। वो कहती हैं, “देश में एक इस्लामिक स्टेट है और वो कश्मीर है। तो इसे आप हल्के में मत लीजिए, जो चीज इराक और सीरिया में होती आ रही है वही कश्मीर में भी हो रहा है और यह 13वीं शताब्दी से हो रहा है। आज भी 21वीं शताब्दी में इराक और सीरिया में हो रहा है, कश्मीर में उसी का प्रतिबिंब दिख रहा है और यही असलियत है।”

हमने इंडिया फॉर कश्मीर (India4Kasmir) के संस्थापक रोहित कचरू से भी बात की। उन्होंने कहा कि इसमें चौंकने वाली तो कोई बात ही नहीं है। ये तो एक दिन होना ही था। अब तो हमलोगों ने इतनी लाशें देख ली, इतनी लाशों को कंधा दे दिया कि अब समझ में ही नहीं आता कि कैसे रिएक्ट करूँ? उन्होंने बताया कि जिस इलाके में ये घटना हुई है, वहाँ पर एक भी हिंदू राजनीतिक क्षेत्र में नहीं है, न तो एमएलए और न ही एमपी। एकमात्र हिंदू सरपंच अजय पंडिता थे, जिन्हें आतंकवादियों ने मौत के घाट उतार दिया। 

वो आगे कहते हैं कि आतंकवादियों ने उन्हें मारा है तो इसका मतलब है कि वो कुछ अच्छा कर रहे होंगे। स्थानीय लोगों को डर होगा कि कल को कहीं ये एमएलए या एपमपी न बन जाए, कहीं ये लोगों की सोच को न बदल दे, लोगों के अंदर के भय को न मिटा दे। इसलिए इसे यहीं पर खत्म कर दो। जड़ से ही मिटा दो। स्थानीय लोग आतंकवादियों से संपर्क करते हैं और वो आकर गोली मारकर चले जाते हैं और कोई उन्हें पकड़ भी नहीं पाता है। इसके बाद सोशल मीडिया पर मजहब विशेष के कश्मीरी इसकी तारीफ करते हैं कि वाह, बहुत अच्छा काम किया। 

तो सोचने वाली बात है कि जब उन्हें हिंदू सरपंच तक बर्दाश्त नहीं तो फिर भला वो एमएलए एमपी क्या बनने देंगे? उन्होंने तो राज्य को इस्लामिक बना दिया है। वहाँ शरिया चलता है। वो कहते हैं, पीएम मोदी ने अनुच्छेद 370 हटाकर बहुत अच्छा काम किया है। इसके लिए मैं उनका सदा आभारी रहूँगा। लेकिन अभी भी जमीनी स्तर पर काफी कुछ करना बाकी है। हकीकत में वहाँ के लोगों की स्थिति आज भी नहीं सुधरी है। हम सरकार से कश्मीरी पंडितों के पॉलिटिकल इमपॉवरमेंट की माँग करते हैं। डोमिसाइल से आप 1-2 लाख लोगों को तो वहाँ भेज दोगे, लेकिन होगा क्या? वो एक दो बम गिराकर सबको उड़ा देंगे। उनके लिए तो ये और भी अच्छा होगा। एक साथ इतने हिंदुओं को मारना तो जिहाद है उनके लिए।

रोहित आगे कहते हैं, “इसलिए हमें पॉलिटिकल एम्पॉवरमेंट चाहिए। जब आप एंग्लो इंडियन को नॉमिनेशन दे सकते हो तो हमें क्यों नहीं? जब तक हमारे पास पॉलिटिकल पावर नहीं होगी, हम कुछ नहीं कर पाएँगे। कल को यदि हम कश्मीर से चुनाव लड़ने का सोचें तो उस क्षेत्र से नहीं लड़ेंगे, क्योंकि जो अजय पंडिता के साथ हुआ है, वो हमारे साथ भी हो सकता है। इंसान तभी यह कर सकता है, जब वह अपने परिवार की मोह-माया त्याग दे और ये सोच ले कि वो मरने जा रहा है। इधर कुछ हिंदू भी बीजेपी कॉन्ग्रेस में ही उलझ रहे हैं। ये नहीं देखते कि एक हिंदू मरा है। उनका तो मकसद ही हमें उलझाना है, जो उन्होंने कर दिया। उनका बलिदान बेकार नहीं जाना चाहिए। सरकार को हमारी सुरक्षा के लिए सोचना चाहिए।”

हमने इस बारे में और अधिक जानकारी के लिए इंडिया फॉर कश्मीर (India4Kasmir) की प्रवक्ता साक्षी मट्टू से बात की। उन्होंने इसके पीछे की वजह डोमिसाइल सर्टिफिकेट (प्रोसिजर) रूल्स, 2020 को बताया। जिसके तहत 1989 के बाद कश्मीर घाटी से विस्थापित उन सभी हिंदू परिवारों को प्रदेश का स्थाई निवासी होने का प्रमाण पत्र जारी किया जाएगा, जो प्रदेश से निकलकर देश के अन्य हिस्सों में बस गए। मगर, उनके बच्चों या परिवार के अन्य सदस्यों को राज्य का स्थाई निवासी होने का प्रमाण पत्र नहीं मिल पाया। 

उन्होंने बताया कि 1990 में भी इसी तरह से शुरुआत हुई थी। पहले हिंदूओं के प्रतिष्ठित और नामी नेताओं को निशाना बनाया गया। वो कहती हैं, “अनंतनाग और शोपियाँ आतंकवादियों का हब है। अजय पंडिता वहाँ से चुनाव जीतकर सरपंच बने थे। तो अब सोचने वाली बात है कि वो वहाँ पर सेवा तो खास समुदाय की ही कर रहे थे न। क्योंकि हिंदू तो वहाँ पर 1% से भी कम है। इनके लिए हर हिंदू काफिर है और इनका किसी भी प्रतिष्ठित या शासन करने वाले पोस्ट पर रहना उन्हें कतई बर्दाश्त नहीं है।”

साक्षी ने कहा, “370 के बाद इनकी कमर टूट गई है। सरकार ने बहुत ही उम्दा तरीके से इसे हैंडल किया है, मगर ये नया डोमिसाइल लॉ इन्हें पच नहीं रहा है, क्योंकि इससे वहाँ के विस्थापित हिंदुओं को फिर से स्थाई नागरिक का अधिकार मिल सकता है। ये बातें उन्हें खटक रही है। वो लोग दावा करते हैं कि कश्मीर इस्लामिक राज्य है, मगर कश्मीर का नाम ऋषि कश्यप के नाम पर पड़ा था तो जाहिर सी बात है कि हिंदू संस्कृति थी। मगर सच्चाई यही है कि कश्मीर का इस्लामीकरण हो चुका है। वह शरिया के हिसाब से चलता है, मगर अब डोमिसाइल आने से उन्हें लग रहा है कि उनका हुकूमत खत्म होने वाला है। इसलिए इस तरह की वारदात करके वो ये संदेश देना चाहते हैं कि कश्मीर में 1990 से लेकर अभी तक कुछ नहीं बदला है। अभी भी वहाँ पर हिंदुओं की स्थिति वैसी ही है। उन्होंने संदेश दिया है कि अगर आप यह सोचते हैं कि कोई दूसरे धर्म का यहाँ पर आकर रह सकता है, तो वो बात अपने दिलो-दिमाग से निकाल दीजिए।”

इसके साथ ही वो मानवाधिकार आयोग और वामपंथी लॉबी पर भी हमला बोला। उन्होंने कहा कि ये कश्मीर में इंटरनेट बंद होने पर तो दुनिया सिर पर उठा लेते हैं, खास मजहब के साथ कुछ होता है तो उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उछाला जाता है, मगर जब बात हिंदुओं के हत्या की होती है, तो ये इनकी डिक्शनरी में फिट ही नहीं होता है। ये उनके लिए मायने ही नहीं रखते है। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री फारुख अब्दुल्ला पर भी निशाना साधा। आतंकवादियों ने स्पष्ट संदेश दिया कि जब सरपंच की हत्या हो सकती है, तो फिर आप कितने सुरक्षित हो, खुद सोच लो। 

साथ ही उन्होंने इस तरफ भी इशारा किया कि हिंदू सरपंच की हत्या के बाद आप कश्मीरी कट्टरपंथियों के सोशल रिएक्शन देखेंगे तो आप समझ जाएँगे कि आखिर ऐसा क्यों हो रहा है? आतंकवादियों के हौसले वहाँ पर बुलंद क्यों हैं? उन्होंने कहा कि अगर आप एक टूरिस्ट की तरह कश्मीर जाएँगे तो आपकी काफी आवभगत करेंगे, क्योंकि उन्हें पैसा चाहिए, आप नहीं। अगर आप वहाँ के निवासी बनने की कोशिश करेंगे तो यही होगा। वहीं एक्टिविस्ट आशीष कौल ने बताया कि उन्हें लगातार इस्लामी आतंकवाद की तरफ से धमकियाँ मिलती रहती थी।

बंगाल का रोजिबुल मोल्ला जो BJP सांसद के गैंगरेप की बात कहता, सैनिकों के मृत्यु का जश्न मनाता छुट्टा घूम रहा है

पश्चिम बंगाल के दक्षिण 24 परगना के जयनगर निवासी रोजिबुल मोल्ला (Rojibull Molla) ने हिंदुओं समेत भारतीय सैनिकों के प्रति अपनी नफरत फेसबुक पोस्टों के जरिए बयान की।

रोजिबुल मोल्ला ने न केवल अपने पोस्टों में हिंदू देवी-देवताओं के लिए अभद्र भाषा का उपयोग किया। बल्कि सुभाष चंद्र बोस के लिए अपमानजनक शब्द लिखे, इंडियन आर्मी के लिए घृणा दिखाई और भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी के साथ गैंगरेप करने की मंशा को भी उजागर किया।

पाक के समर्थन में बंगाल के इस कट्टरपंथी रोजिबुल मोल्ला ने भारतीय सेना के लिए कहा, “जब पाकिस्तानी सैनिक भारतीय सेना को मारते हैं, तो मैं खुश हो जाता हूँ।” इसके अलावा उसने अपने फेसबुक पोस्ट में नेताजी सुभाष चंद्र के लिए भी बेहद अभद्र भाषा का प्रयोग किया। जिसपर काफी लोगों ने उसे उसके पोस्ट पर खरी-खोटी सुनाई।

अपने एक विवादित पोस्ट में रोजिबुल मोल्ला ने वर्तमान में भाजपा सांसद लॉकेट चटर्जी से गैंगरेप करने की इच्छा जाहिर की। उसने लिखा,”लॉकेट चटर्जी बहुत सेक्सी है। काश हम उसका गैंगरेप कर सकते। हालाँकि इससे पहले भाजपा के कई नेताओं ने उसका इस्तेमाल किया है।”

इसके अलावा रोजिबुल की एक और पोस्ट भी सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रही है और लोग उसकी गिरफ्तारी के लिए कोलकाता पुलिस से माँग कर रहे हैं। अपने पोस्ट में रोजिबुल मोल्ला ने हिंदू देवी, माँ दुर्गा, भगवान राम और काली माँ को लेकर अभद्र टिप्पणी की है।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब हिंदुओं के ख़िलाफ़ जहर उगलने के लिए उनके देवी-देवताओं को निशाना बनाया गया हो। इससे पहले भी अप्रैल में पुलिस ने मुर्शिदाबाद से एक युवक को गिरफ्तार किया था। युवक की पहचान वासु यादव के तौर पर हुई थी। उसने अपने फेसबुक पर हिन्दू देवी-देवताओं के अश्लील चित्र बनाकर बेहूदा सन्देशों के साथ पब्लिश किया था।

ट्विटर पर इन तस्वीरों को अभय पंडित नाम के शख्स ने ट्वीट करते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस के साथ ही उन्नाव पुलिस को भी टैग किया था। जिसके बाद उन्नाव पुलिस ने फौरन संज्ञान लेते हुए लिखा, “उक्त आईडी/अकाउंट के विरुद्ध साइबर सेल द्वारा आवश्यक विधिक कार्यवाही की जा रही है।”

वासु यादव नाम के शख्स ने फेसबुक अकाउंट में अपनी लोकेशन कराची, पाकिस्तान बताई थी। उसने इस अकाउंट पर हिंदुओं की आस्था पर चोट करते हुए माँ काली, दुर्गा और भगवान शिव की तस्वीरों को अश्लील तरीके से पेश किया था।

ममता बनर्जी को राजनीतिक शरणार्थी बना देगी बंगाल की जनता, CAA का विरोध पड़ेगा महँगा: अमित शाह

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने मंगलवार (जून 9, 2020) को पश्चिम बंगाल की जनता को वर्चुअल रैली के जरिए सम्बोधित किया। उन्होंने बंगाली महापुरुषों और राजनीतिक हिंसा में मारे गए बंगाल के भाजपा कार्यकर्ताओं को याद कर के अपने सम्बोधन की शुरुआत की और कहा कि उन सबके बलिदान का ‘सोनार बांग्ला’ के निर्माण में बड़ा योगदान होगा। उन्होंने तकनीकी माध्यम से 75 वर्चुअल रैलियों की बात करते हुए कहा कि कोरोना भी भाजपा के जनसम्पर्क अभियान को डिगा नहीं सकता।

उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल एक ऐसा अकेला राज्य बन गया है, जहाँ राजनीतिक हिंसा अभी भी हो रही है और बंगाल की जनता ने पीएम मोदी की अपील मान कर भाजपा की झोली में 42 में से 18 सांसदों की सीटें डाल दी थीं। उन्होंने कहा कि भाजपा सिर्फ़ आंदोलन करने बंगाल में नहीं आई है बल्कि संस्कारी बांग्ला बनाने के लिए लड़ रही है। उन्होंने कहा कि सत्ता ममता बनर्जी के पास है लेकिन स्थिति नहीं संभल रही है तो केंद्र को दोष दिया जा रहा है।

अमित शाह ने कहा कि जब नरेंद्र मोदी को भाजपा संसदीय दल का नेता चुना गया था, तभी उन्होंने बता दिया था कि उनकी सरकार ग़रीबों और पिछड़ों की सरकार होगी। उन्होंने पिछले 6 साल को परिवर्तन के साल बताया। उन्होंने कहा कि जन-धन के 31 करोड़ बैंक एकाउंट्स खोल गए। उन्होंने बताया कि सिर्फ़ कोरोना आपदा के बीच 51 करोड़ लोगों के बैंक एकाउंट्स में डायरेक्ट ट्रांसफर के माध्यम से पैसे पहुँचे। इससे पहले शाह ने वर्चुअल रैली के जरिए बिहार और ओडिशा को सम्बोधित किया था।

उन्होंने कहा कि 50 लाख लोगों के जीवन में ‘आयुष्मान भारत योजना’ के कारण लाभ मिला है। लेकिन पश्चिम बंगाल में तृणमूल कॉन्ग्रेस की सरकार ने इस डर से केंद्र सरकार की योजनाओं को लागू नहीं किया क्योंकि नरेंद्र मोदी कहीं वहाँ लोकप्रिय नहीं हो जाएँ। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार किसानों के खाते में रूपए भेजना चाहती है लेकिन किसानों की सूची राज्य सरकार द्वारा उपलब्ध नहीं कराई गई है।

अमित शाह ने बताया कि नरेंद्र मोदी की सरकार ने 8 करोड़ महिलाओं को गैस सिलिंडर दिया, जिससे उन्हें लकड़ी के चूल्हे पर खाना बनाने से आजादी मिली। उन्होंने बताया कि ढाई करोड़ लोगों के घर में मुफ्त बिजली का कनेक्शन पहुँचाया गया। साथ ही 10 करोड़ घरों के अंदर शौचालय पहुँचाया गया, ताकि माताओं-बहनों को शौच के लिए बाहर न निकलना पड़े। उन्होंने कहा कि 2022 तक ‘प्रधानमंत्री आवास योजना’ के तहत सभी को घर मिलेगा।

साथ ही अमित शाह ने ममता बनर्जी से भी हिसाब माँगा और कहा कि कहीं हिसाब के नाम पर वो भाजपा के मारे गए कार्यकर्ताओं और बम धमाकों की संख्या न बता दें। पूर्व भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यूपीए सरकार के दौरान पाकिस्तान से रोज आतंकी घुसते थे और सैनिकों के सिर काट कर ले जाते थे, दिल्ली दरबार में कोई चूँ नहीं करता था। उन्होंने उरी और पुलवामा के बाद हुए सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक की बात करते हुए कहा कि दुनिया को अब समझ में आ गया कि हमारे सैनिकों का ख़ून सस्ता नहीं है।

केंद्रीय गृह मंत्री ने श्यामा प्रसाद मुखर्जी के बलिदान की बात करते हुए अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने की चर्चा की। उन्होंने कहा कि देश के सभी लोग चाहते थे कि जहाँ भगवान श्रीराम का जन्म हुआ, वहाँ एक भव्य राम मंदिर बने और कई आंदोलन हुए लेकिन कोर्ट के सामने सटीक दलीलें पीएम मोदी के आने के बाद ही रखी गईं, जिसके बाद लोकसभा में पीएम मोदी ने राम मंदिर ट्रस्ट के गठन की घोषणा की।

उन्होंने आरोप लगाया कि तुष्टिकरण की राजनीति के कारण तीन तलाक मुद्दे को कोई छूता भी नहीं था। उन्होंने शाहबानो मामले पर कॉन्ग्रेस सरकार द्वारा कोर्ट का निर्णय पलटे जाने की याद दिलाई। उन्होंने सीएए की चर्चा करते हुए कहा कि शरणार्थियों की यहाँ किसी ने सुध नहीं ली लेकिन भारत सरकार ने उन्हें सम्मान दिया। 1947 का वादा सीएए के जरिए 2019 में पूरा किया गया। उन्होंने कहा कि ममता बनर्जी इस फ़ैसले के बाद गुस्से से लाल हो गई थीं।

उन्होंने ममता बनर्जी से पूछा कि मतुआ और नामशूद्र समाज ने उनका क्या बिगाड़ा है? उन्होंने भविष्यवाणी करते हुए कहा कि बंगाल की जनता ममता बनर्जी को ही राजनीतिक शरणार्थी बना देगी। जब मतपेटियाँ खुलेंगी तो उन्हें पता चल जाएगा। उन्होंने कहा कि ग़रीबों को अब तक शुद्ध पीने का पानी नहीं मिल रहा था। उन्होंने बताया कि गुजरात के कुछ हिस्सों में क्लोराइड के कारण युवाओं के बाल सफ़ेद हो जाते थे। शाह ने कहा:

“नरेंद्र मोदी ने जल शक्ति मंत्रालय का गठन किया। देश के 25 करोड़ लोगों को शुद्ध पीने का पानी पहुँचाने का संकल्प लिया है, जिसका सबसे ज्यादा फायदा बंगाल को मिलेगा। मोदी सरकार ने साढ़े 9 करोड़ किसानों के बैंक अकाउंट में 72 हज़ार करोड़ रुपए भेजे लेकिन ममता बनर्जी ने किसानों की सूची नहीं दी। उन्होंने कहा कि कोरोना के मारे किसानों और उनके 6000 रुपए के बीच ममता बनर्जी आ रही हैं। हमने मछुआरा विभाग अलग से बनाया। सीडीएस के पद की गठन की।”

उन्होंने जानकारी दी कि आदिवासी समाज के लिए 100 से भी अधिक ‘एकलव्य’ स्कूल का निर्माण करवाया, जिससे शिक्षा का दीप वहाँ तक पहुँचा। उन्होंने कहा कि पीएम मोदी ने देश को महामारी के ख़िलाफ़ इस तरह से तैयार किया कि केंद्र और राज्य सरकारों के साथ-साथ 130 करोड़ लोग भी लड़ रहे हैं, ये नेतृत्व का प्रभाव है। उन्होंने कहा कि जिस तरह से जनता कर्फ्यू सफल हुआ, विदेशी हतप्रभ हो गए कि पुलिस के बिना ये कैसे संभव हुआ?

उन्होंने दावा किया कि विकसित राष्ट्र भी ये देखने आ रहे हैं कि भारत कोरोना से लड़ने में सफल हुआ। उन्होंने बताया कि 1.7 लाख करोड़ का पैकेज शुरुआत में ही दिया गया जिसके अंतर्गत महिलाओं के खातों में रुपए डाले, कंस्ट्रक्शन वर्कर्स को मदद की गई। गैस सिलिंडर मुफ्त दिए गए और ग़रीबों को मदद दी गई। उन्होंने आँकड़े गिनाए कि केंद्र सरकार की योजनाओं का पश्चिम बंगाल को क्या फायदा मिला है।

अमित शाह ने कहा कि जिस पश्चिम बंगाल रामकृष्ण परमहंस और विवेकानंद ने हिंदुत्व की अलख जताई थी, वहाँ आज बम धमाके हो रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ममता बनर्जी भाजपा नेताओं को रैली करने से रोकती हैं, पत्रकारों पर एफआईआर दर्ज किया जाता है, होमगार्ड्स को टीएमसी की सेना बना कर रख दिया है। उन्होंने कहा की शिक्षा व्यवस्था चरमराई हुई है और राज्य में भ्रष्टाचार की कोई सीमा ही नहीं है, गिनाए ही नहीं जा सकते।

हिन्दुओं, ब्राह्मणों, प्राचीन इतिहास की घृणा से सनी हैं ‘विश्व बुक्स’ की किताबें, धर्मग्रंथों का घोर अपमान

हमारे देश में कई ऐसी पुस्तकें लिखी जाती हैं, जिनमें हमारी अपनी ही विरासत का मखौल उड़ाया जाता है। इनमें से एक ‘विश्व बुक्स’ प्रकाशन संस्थान भी है, जिसकी किताबें हिंदुत्व का मजाक बनाने के लिए ही लिखी जाती हैं। ‘विश्व बुक्स’ की अधिकतर पुस्तकें बच्चों और छात्रों के लिए लिखी जाती है। वो लोग ही इसे ज्यादा पढ़ते हैं। कई पुस्तकें वयस्कों के लिए भी हैं। इनमें से अधिकतर हिन्दूघृणा से सनी हुई किताबें हैं।

उदाहरण के लिए इसके एक किताब का शीर्षक देखिए- “धार्मिक कर्मकांड- पंडों का चक्रव्यूह“, जिसमें ब्राह्मणों का मजाक बनाया गया है। इसमें हिन्दू धर्म की पूजा पद्धतियों को नकारते हुए इसे ब्राह्मणों की साजिश बताया गया है। यानी, ब्राह्मणों, साधुओं, हिन्दू धर्म और मंदिरों को बदनाम करने का ‘विश्व बुक्स’ ने बीड़ा उठाया हुआ है। राकेश नाथ द्वारा लिखित इस पुस्तक के कवर पर ही भगवा वस्त्रों में एक ब्राह्मण को कमण्डल लेकर भागते हुए दिखाया गया है।

जब छात्र व बच्चे इन चीजों को पढ़ते होंगे तो क्या वो अपने ही धर्म और समाज के प्रति हीन भावना से ग्रसित नहीं हो जाते होंगे? ब्राह्मणों को इस तरह से पेश किया गया है जैसे वो समाज के सबसे बड़े विलेन्स हों। इसी तरह इसने जयप्रकाश यादव द्वारा लिखित पुस्तक ‘धर्म: एक धोखा’ नामक पुस्तक का प्रकाशन किया है, जिसमें धर्म को छल-कपट का विषय बताया गया है। इसके कवर पेज पर भी कमंडल लिए एक ब्राह्मण को दिखाया गया है।

राकेश नाथ की ही एक और पुस्तक है- “धर्म का शाप- आतंक, विभत्स्ता, क्रूरता, व बर्बरता का जनक”, जिसमें व्यक्ति को धर्म के कारण दबे-कुचले होने की बात कही गई है। इसके अलावा हिन्दू समाज को अपने ही प्रति ‘हीनता’ से भरने के लिए हिन्दुओं को हार जाने वाला समुदाय बता कर एक पुस्तक में समेटा गया है और उसे नाम दिया गया है- :द हिस्ट्री ऑफ़ हिंदूज- द सागा ऑफ़ डिफिट्स, जिसमें हिन्दू समाज को डरपोक प्रदर्शित किया गया है।

इससे पहले एक ट्विटर यूजर अंजी ने खुलासा किया था कि उन्होंने अमेजॉन के जरिए विश्व बुक्स से श्रीमद्भगवद्गीता मँगाने का ऑर्डर दिया था लेकिन साथ में हिन्दूघृणा से सनी किताब भी आई। जब उनके ऑर्डर की डिलीवरी हुई, तो उसके साथ एक और बुक थी जिसका शीर्षक था- “भागवत पुराण कितना अप्रासंगिक।” उक्त पुस्तक पुराण का प्रतिवाद है और पाठकों को पुराण पढ़ने से रोकने के लिए स्पष्ट रूप से लक्षित है।

बाद में पता चला कि इस तरह की घटना कई उपभोक्ताओं के साथ हो चुकी है। कई लोगों को ऐसी किताबें भेजी गई हैं। किसी ने सुपरहीरोज की किताब ऑर्डर की तो उन्हें ये मिला, किसी ने अंग्रेजी की किताब मँगाई तो उन्हें बाइबल पहुँची। जाहिर है, वो भले ही मुफ्त में चीजें दे दें लेकिन उन्हें हिन्दुओं के ख़िलाफ़ घृणा को भड़काना ही है, हर हाल में। ऐसे पाठकों को ख़ासकर निशाना बनाया जा रहा है, जो आस्तिक हैं, धर्म में विश्वास रखते हैं।

इसी तरह की एक पुस्तक है “हम अध्यात्मवादी होते हैं“, जिसमें डॉक्टर सुरेंद्र कुमार शर्मा नामक व्यक्ति ने दावा किया है कि हिन्दू अपनी प्राचीन संस्कृति का ढोल पीटते रहते हैं और उनका अलग अध्यात्मवाद है। साथ ही इसमें लिखा है कि अध्यात्मवादी होना एक ‘षड्यंत्र’ था, जिसे ऋषियों, नायकों, अवतारों और मुनियों ने बुना था। दावा किया गया है कि उन्होंने ऐसा इसीलिए किया, ताकि विशेष वेश बना कर अपने स्वार्थों की पूर्ति कर सकें।

इस पुस्तक के डिस्क्रिप्शन में लिखा है कि ये पाठकों को ‘अध्यात्मवाद की भूलभुलैया’ से बाहर लेकर आएगा। राकेश नाथ की एक अन्य पुस्तक में रामचरितमानस की रचना करने वाले कवि तुलसीदास को ही बदनाम किया गया है। इस पुस्तक का ही नाम है, “तुलसीदास- द मिसगाईडर ऑफ हिन्दू सोसाइटी“, अर्थात उन्हें हिन्दू समाज को पथभ्रष्ट करने वाला व्यक्ति बताया गया है। इसमें लिखा है कि हिन्दुओं को विदेशी सलीमशाहियीं के जूतों के नीचे कीड़े-मकोड़ों की तरह रौंदा जाता था।

तुलसीदास के साहित्य को ‘आडम्बर’ घोषित कर दिया गया है और उन्हें हिन्दुओं को पुरुषार्थ छोड़ कर राम भरोसे रहने के लिए प्रेरित करने वाला व्यक्ति बताया गया है। इस पुस्तक में इन चीजों का ‘पोल खोलने’ का दावा किया गया है। इसी लेखक की “हम हिन्दुओं में क्या नैतिकता है?” नामक पुस्तक में पूछा गया है कि भारत में अवतार क्यों पैदा हुए हैं और उनकी लम्बी लाइनें क्यों लग गई हैं? इसमें विदेशी आक्रांताओं के हमले का कारण हिन्दुओं के विवेकहीन पाखंडों, आडम्बरों और मान्यताओं को बताया गया है।

इस पुस्तक में हिन्दुओं की सही स्थिति का आकलन करने का दावा करते हुए नैतिकता सिखाने की बात कही गई है। इसी लेखक की एक अन्य पुस्तक ‘ब्राह्मण यूनियन‘ को भी ‘विश्व बुक्स’ ने ही पब्लिश किया है और इसमें भी ब्राह्मणों को बदनाम किया गया है। “क्या हिन्दू नारी आज भी उपेक्षित है?“- इस पुस्तक में स्त्रियों की स्थिति को जबरदस्ती धर्म से जोड़ कर दिखाने की कोशिश की गई है। “धर्म का धंधा” भी ऐसी ही एक पुस्तक है।

एक पुस्तक में तो हिन्दुओं के धर्मग्रंथों को ही हमारे ऊपर लादा गया एक बोझ बता दिया गया है। “कितने अप्रासंगिक हैं धर्मग्रन्थ?” में हमारी अपनी ही प्राचीन पुस्तकों को कूड़ा-करकट की तरह दिखाया गया है। “जैन धर्म ग्रंथों की कितनी वास्तविकता?” नामक पुस्तक में रीति-रिवाजों को मनुष्य को विवेकहीन बनाने का एक जरिया बताया गया है। लिखा है कि आदेश और प्रवचन इत्यादि अनुयायियों को बरगलाने का एक जरिया हैं।

बता दें कि ‘विश्व बुक्स’ दिल्ली प्रेस ग्रुप का ही एक एसोसिएट है, ऐसा उसकी ही वेबसाइट पर बताया गया है। दिल्ली प्रेस 9 भाषाओं में 32 मैगजीन्स का प्रकाशन करता है। ‘विश्व बुक्स’ का मुख्यालय गाजियाबाद के साहिबाबाद में स्थित है। अब आप अंदाज़ा लगा सकते हैं कि ये किस नेक्सस का काम है। ऐसी किताबों को जबरदस्ती लोगों को पढ़वाना एक ऐसी मुहिम का हिस्सा है, जिससे लोग अपने ही धर्म और इतिहास से विमुख हो जाएँ।

इससे पहले चंपक पत्रिका के अक्टूबर 2019 संस्करण के एक हिस्से में पत्रिका बच्चों से कश्मीर में अपने जैसे अन्य बच्चों के नाम पत्र लिखने और उनसे वहाँ की स्थिति के बारे में पूछने के लिए अपील की गई थी। पत्रिका के इस संस्करण में कहा गया है कि कश्मीर के विशेष दर्जे को निरस्त किए जाने के बाद घाटी में स्थिति ठीक नहीं है। हजारों सैनिकों और सेना की बटालियनों को कश्मीर भेजा गया है और जगह-जगह कर्फ्यू लगा हुआ है।

लिखा गया था कि यहाँ तक कि टेलीफोन लाइनों और इंटरनेट सेवाओं को भी निलंबित कर दिया गया है। मतलब उनपर बड़ा अत्याचार हो रहा है। आप हमें पत्र भेंजे हम उन्हें निश्चित रूप से कश्मीर के बच्चों तक पहुँचाएँगे। ऐसा करके बच्चों में ये जहर बोने की कोशिश है कि देखिए वहाँ के बच्चे किस हाल में हैं। कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं है कि इससे पहले वहाँ के क्या हालात थे। इसी तरह ‘दिल्ली प्रेस ग्रुप्स’ की किताबें प्रपंच फैलाती हैं।

इसकी सबसे पुरानी पत्रिका ‘द कारवाँ’ के एज़ाज अशरफ की एक घटिया रिपोर्ट में, उन्होंने हमारे शहीद सैनिकों की ‘जाति का विश्लेषण’ किया था। कारवाँ का एजेंडा तो ऐसा है, जिसमें उन्होंने उन बलिदानी सैनिकों को भी नहीं छोड़ा, जिनकी पाकिस्तान जैसे आतंकी स्टेट द्वारा प्रायोजित आतंकी संगठन जैश द्वारा निर्मम हत्या कर दी गई थी। इसने अमित शाह, पीएम मोदी, एनएसए डोभाल और उनके बेटे पर कई घटिया आधारहीन रिपोर्ट प्रकाशित किए हैं। 

कोरोना के गणित में फेल, ट्वीट डिलीट कर भागी MP कॉन्ग्रेस, लोगों ने पूछ ही लिया – कौन चला रहा इसे?

मध्य प्रदेश में शिवराज सरकार पर निशाना साधने के चक्कर में कॉन्ग्रेस का मजाक बन चुका है। अभी कल प्रदेश मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अपने इंदौर दौरे के दौरान मीडिया में बयान दिया कि उनके प्रदेश में कोरोना मरीजों का रिकवरी दर 64% है और मृत्यु दर केवल 4%।

ऐसे में मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने हड़बड़ी में अपने ट्विटर से बेतुका प्रश्न उठाया। जिसके कारण हर जगह उनकी गणित का मजाक उड़ाया गया और बाद में अपनी घटा-जोड़ के कारण हुई फजीहत से उन्हें अपना ट्वीट ही डिलीट करना पड़ा।

दरअसल, मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस ने कल शिवराज सिंह चौहान का बयान आने के बाद ट्विटर पर एक सवाल पूछा कि आखिर जब प्रदेश में 64% रिकवरी दर है, मृत्युदर 4% तो बाकी लोगों का क्या होगा? अपने इस सवाल के लिए उन्होंने दोनों आँकड़ों (64%+4%) को जोड़ा और बाद में 100 में से घटाकर शेष बचे 32% के लिए उन पर निशाना साध दिया।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस यह समझ ही नहीं पाई कि इस गणित में 32% कोरोना के एक्टिव केस हैं और संक्रमण से ठीक होने वाले मरीजों का ही रिकवरी रेट 64% बताया जा रहा है। उन्होंने अपने ट्वीट में प्रदेश मुख्यमंत्री से पूछ डाला कि आखिर 32% लोगों का क्या होगा?

अब इसी को देखकर लोगों ने उनका मजाक उड़ाना शुरू किया। एक यूजर ने पूछा कि क्या प्रदेश में 100 प्रतिशत लोग कोरोना पॉजिटिव थे? कुछ लोगों ने इस ट्वीट को देखकर यहाँ यथा राजा तथा प्रजा वाला तंज कसा। किसी ने कहा कि कॉन्ग्रेस में कॉमन सेंस की ही कमी है।

कहाँ हुई मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस से गड़बड़?

दरअसल, शिवराज सिंह चौहान ने मीडिया को दिए बयान में कोरोना संक्रमितों के हालात बताए थे। मसलन मध्य प्रदेश में कोरोना के कुल 9401 मामले आए हैं और इनमें से 6331 ठीक हो चुके हैं। तो उसके हिसाब से इस समय वहाँ का रिकवरी दर हुआ 64%।

ऐसे ही मृत्यु दर भी कुल मृतकों की संख्या और कुल संक्रमितों की संख्या को ध्यान में रखकर निकाला जाएगा। जैसे प्रदेश में अब तक मृतकों की संख्या 412 हो गई है। जबकि कुल संक्रमित मामले 9401 हो गए हैं। ऐसे में वहाँ का मृत्यु दर 4% है। इसका साफ मतलब है कि 3070 केस अभी वर्तमान में सक्रिय हैं। जिसका हिसाब एमपी कॉन्ग्रेस माँगना चाहती थी।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस को क्या समझना चाहिए?

इस गणित के अलावा एक बात और जो मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस को ऐसे अटपटे ट्वीट करने से पहले समझनी चाहिए। वो यह कि कभी भी रिकवरी रेट या फिर फैटेलिटी रेट, आपको शेष बचे केसों की क्या स्थिति है, इसके बारे में सटीक जानकारी नहीं दे सकते। आम भाषा में समझें तो एक अस्पताल का उदाहरण लीजिए।

यदि कोई अस्पताल अपने यहाँ किसी निश्चित बीमारी के संबंध में रिकवरी दर की बात करेगा, तो वह उसी आँकड़े पर बात करेगा, जितने केस उस बीमारी के आए और जितने उसने पूर्ण रूप से ठीक करके भेजे।

या मृत्यु दर पर भी ऐसे ही आँकड़े निकालेगा कि आखिर कितने केस उससे संबंधित कुल आए थे और उनमें से कितनों की उस बीमारी के कारण मौत हुई। न कि वो इसके प्रति जवाबदेह होगा कि बाकी प्रतिशत का क्या स्टेटस है। जाहिर है जो लोग ठीक भी नहीं हुए या जिन्होंने बीमारी से जंग भी नहीं हारी, और तब भी अस्पताल में हैं, उनका इलाज जारी ही होगा।

मध्य प्रदेश कॉन्ग्रेस भविष्य में ऐसे सवाल उठाने से पहले यह जाने कि कुल मामलों में से रिकवरी रेट या मृत्यु दर निकलने के बाद शेष केसों की स्थिति इसलिए भी नहीं बता पाना मुश्किल होता है, क्यूँकि हालात हर बार अलग-अलग होते हैं।

कई बार मरीज एक अस्पताल में आता तो है, मगर असंतुष्ट होकर दूसरे अस्पताल चला जाता है या फिर कभी-कभी दूसरे राज्य। इसके अलावा हालात ऐसे भी होते हैं कि सुविधा न होने के कारण अस्पताल उस मरीज को दूसरी जगह शिफ्ट कर देता है…

इस दौरान, खुद सोचिए अस्पताल उस मरीज को किसी भी श्रेणी में कैसे गिनेगा? या फिर कैसे बताएगा कि उसकी स्थिति क्या है? अस्पताल भी उन्हीं मामलों पर रिकवरी रेट या डेथ रेट बता पाएगा, जितना उसके पास डेटा मौजूद होगा। अन्यथा बाकी सबको वह संक्रमित या बीमार ही बताएगा।

भारत-ऑस्ट्रेलिया के बीच रक्षा समझौता: बेचैन चीन ने कहा- हमें अलग-अलग मोर्चों पर घेरने की तैयारी कर रहा भारत

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ऑस्ट्रेलिया के पीएम स्कॉट मॉरिसन ने गुरुवार (जून 4, 2020) को एक रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किया। इससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय सम्बन्ध को व्यापक रणनीतिक साझेदारी में बदलने में मदद मिलेगी, इसीलिए इस डील को अहम माना जा रहा है। अब जब भारत-चीन के बीच सीमा विवाद चल रहा है और तनाव की स्थिति है, ऐसे में इस डील ने ऑस्ट्रेलिया को लेकर भी बीजिंग के कान खड़े कर दिए हैं।

चाइनीज मीडिया इसे चीन को घेरने की रणनीति के रूप में देख रही है। ट्विटर पर रोज अपनी सेना के शक्ति प्रदर्शन से डराने की कोशिश करने वाले ‘ग्लोबल टाइम्स’ को भी इससे गहरा सदमा लगा है और उसने इसे चीन को घेरने की रणनीति करार दिया। उसने लिखा कि बीजिंग को अलग-थलग करने के लिए अन्य देशों के साथ भारत समझौता कर रहा है। साथ ही उसने भारत पर आरोप लगाया कि भारत चीन को एक साथ कई फ्रंट्स पर घेरना चाहता है।

कुछ चाइनीज विशेषज्ञ मान रहे हैं कि चीन का मुकाबला करने के लिए ही भारत और ऑस्ट्रेलिया ने हाथ मिलाया है। ऑस्ट्रेलिया से भी हाल के दिनों में चीन के सम्बन्ध अच्छे नहीं रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया अब तक रक्षा मामलों में अमेरिका पर और आर्थिक मामलों में चीन पर ही निर्भर रहा है। अब तक उसका रुझान यही रहा है कि दोनों देशों के बीच बैलेंस बना कर चला जाए। लेकिन, एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में ऑस्ट्रेलिया अमेरिका के सबसे महत्वपूर्ण साझेदारों में से एक है।

हाल के दिनों में ऑस्ट्रेलिया ने चीन पर ताबड़तोड़ हमले किए हैं और कई फैसलों में अंतरराष्ट्रीय मंच पर उसके विरोध में रहा है। दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था चीन पर भले ही ऑस्ट्रेलिया की निर्भरता हो लेकिन अब उसने उससे दूरी बनानी शुरू कर दी है। इधर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच पहला इनफॉर्मल समिट 2018 में वुहान में हुआ था। उसके बाद भारत-चीन रिश्तों में प्रगति आई है और सीमा विवाद पर भी बात आगे बढ़ी।

‘असुरक्षित भावना’ से ग्रसित चाइनीज मीडिया रिपोर्ट्स की मानें तो चीन दक्षिण एशिया और अफ्रीका में बड़ा रोल प्ले करना चाहता है, इसीलिए उसने कई छोटे देशों से साझेदारी बढ़ा दी है जबकि भारत के पास कोरोना वायरस संक्रमण के बीच दुनिया में अपनी साख बचाने की चुनौती है। भारत अब पश्चिमी जगत के ज्यादा क़रीब जा रहा है और हाल के फ़ैसले पिछले ढर्रे से एक शिफ्ट की तरफ इशारा कर रहे हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने जब से इंडो-पैसिफिक रणनीति तैयार की है, तभी से वो भारत को इसका हिस्सा बनाना चाहते हैं।

भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जी-7 राष्ट्रों की बैठक के लिए आमंत्रित करना इसी कड़ी का एक हिस्सा हो सकता है। सीमा विवाद के बीच भारत भी चाहता है कि चीन पर पश्चिमी जगत से दबाव बने। इसी बहाने अमेरिका से रिश्ते तगड़े करने के प्रयास किए जाते हैं कि ये भारत की रणनीति में बदलाव की ओर एक इशारा होगा। हालाँकि, भारत अब तक चीन को घेरने की अमेरिकी रणनीति का हिस्सा बनने से कतराता रहा है।

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया के बीच क्वाडीलेटरल बातचीत पहले ही शुरू हो चुकी थी। और अब ऑस्ट्रेलिया के साथ भारत के सबंधों में नजदीकियाँ भी बढ़ने लगी हैं। हिन्द महासागर में भारत और ऑस्ट्रेलिया वैसे भी प्रतिस्पर्द्धी रहे हैं। लोकेशन के हिसाब से ऑस्ट्रेलिया इंडोनेशिया जैसे देशों का क़रीबी भी रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का ‘एक्ट ईस्ट पॉलिसी’ पर विश्वास रहा है, ताकि दक्षिण-पूर्वी एशिया के देशों के साथ सम्बन्ध प्रगाढ़ हो सकें।

दक्षिण-पूर्वी एशिया और हिन्द महासागर में भारत बड़ा किरदार अदा करने की रणनीति पर लगा हुआ है। भारत ने ख़ुद को ‘Bay of Bengal Initiative for Multi-Sectoral Technical and Economic Cooperation (BIMSTEC)’ का भी सदस्य बना रखा है, जो सात देशों का समूह है। इसके सेक्रेटेरिएट के ख़र्च का लगभग एक तिहाई हिस्सा भारत ही वहन करता रहा है। भारत अब तक ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य साझेदारी से कतराता रहा है।

एक्सरसाइज मालाबार में भी भारत, अमेरिका और जापान की सेनाओं के बीच अभ्यास होता है लेकिन उसमें ऑस्ट्रेलिया शामिल नहीं है। अब भारत ने ऑस्ट्रेलिया के साथ सैन्य अभ्यास का मार्ग प्रशस्त करने वाले दस्तावेज पर हस्ताक्षर कर दिया है। मालाबार एक्सरसाइज में भी ऑस्ट्रेलिया को जोड़ा जा सकता है। चीन का कहना है कि भारत अमेरिका के हाथों का प्यादा न बन कर अपनी कूटनीतिक स्वतंत्रता को ज्यादा महत्ता दे रहा है। यही कारण है कि चीन को घेरने की रणनीति का हिस्सा नहीं बनना, एक निर्णय के तहत लिया गया था। उसकी ये बेचैनी जायज है।

ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री स्कॉट मॉरिसन ने रविवार (मई 31, 2020) को आम की चटनी के साथ समोसे का स्वाद लिया था। इस मौके पर भी उन्होंने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को याद किय था। स्कॉट मॉरिसन ने समोसे के साथ तस्वीर पोस्ट की और कहा था कि वह भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ इसे साझा करना चाहेंगे। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसके जवाब में कहा था कि वह कोविड-19 को हराने के बाद उनके साथ समोसे का आनंद लेंगे।