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…और अब कुतिया के साथ इंसानी बर्बरता, कुल्हाड़ी से मारते-काटते हुए युवक का Video वायरल

जानवरों के साथ होती वीभत्सता की आए दिन नई तस्वीर सामने आ रही। अभी आज सुबह ही हमने असम से वायरल हुए वीडियो में एक तेंदुए के साथ इंसानी क्रूरता के उदाहरण को देखा ही था। तभी, एक कुतिया (female dog) का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो गया। 

इस वीडियो में एक व्यक्ति बदहवास तरीके से कुतिया को कुल्हाड़ी से मारता दिख रहा है। 

सोशल मीडिया पर शेयर किए जा रहे वीडियो के कैप्शन की मानें तो यह घटना आँध्र प्रदेश के काली पटनम मोगाल्टूर के पास की है। जिसे फिलहाल कई यूजर्स द्वारा साझा किया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, इस वीडियो में पॉमेरेनियन (Pomeranian) ब्रीड की एक मादा डॉग को एक आदमी ने रस्सी से बाँधा हुआ है और वो उस पर कुल्हाड़ी से वार कर रहा है। 

हालाँकि, इस बीच पीछे से एक बच्चे के रोने की आवाज आ रही है और कुछ आवाजों को सुनकर ऐसा लग रहा है, जैसे वो उसे रोकने की कोशिश कर रहे हैं। 

किंतु, हम वीडियो में देख सकते हैं कि आदमी को किसी की बात से कोई फर्क़ नहीं पड़ रहा, वो वीडियो बनाने वालों की ओर देखता है और फिर कुतिया को मारने लगता है। थोड़ी देर बाद जब उसका गुस्सा शांत पड़ता है तो वह उस कुतिया को बाहर कर देता है।

इस दौरान वह कुतिया को इतनी तेज खींचता है कि वह चलने की बजाय घसीटते हुए जाती है, उससे पूरे रास्ते सीधे खड़ा भी नहीं हुआ जाता।

भाजपा किसान मोर्चा के राष्ट्रीय कार्यकारी सदस्य अमित दीक्षित इस वीडियो को शेयर करते हुए लिखते हैं, “शब्द कम पड़ रहे हैं इस राक्षस के लिए। लगता है महाविनाश निकट है।”

इसी प्रकार एक अन्य यूजर अफजल महमूद लिखता है, “इंसानियत मर गई है। हथिनी के बाद एक और शर्मसार घटना! एक निर्दोष कुतिया को कैसे बाँध के कुल्हाड़ी से पीटता हुआ! यह घटना आँध्र प्रदेश के काली पटनम मोगाल्टूर के पास की है। सारी समाजिक संस्थाएँ व पुलिस एक्शन ले। इसको ज्यादा रिट्वीट व शेयर करके सरकार तक बात पहुँचाए।”

उल्लेखनीय है कि आँध्र प्रदेश की इस घटना से पहले असम में तेंदुए के साथ, हिमाचल प्रदेश में गाय के साथ और केरल में गर्भवती हथिनी के साथ ऐसी ही अमानवीय हरकतों की खबरें सामने आई थीं।

असम में जहाँ रविवार को एक तेंदुए को मारकर उसके दाँत और नाखून निकाल लिए गए और बाद में उसके शव की पूरे इलाके में परेड भी कराई गई। वहीं, हिमाचल प्रदेश में एक गाय को बम खिलाने की घटना सामने आई थी।

इससे पहले 27 मई को एक 15 वर्षीय गर्भवती हथिनी एक अमानवीय कृत्य का शिकार हो गई थी। उसे किसी उपद्रवी शख्स ने पटाखों से भरा अनानास खिलाया था, जिससे हथिनी के मुँह में विस्फोट हो गया और वह बुरी तरह जख्मी हो गई। हथिनी की पोस्टमार्टम रिपोर्ट से पता चला कि वह गर्भवती थी। उसका जबड़ा टूट गया था और मुँह में विस्फोट के कारण वह अनानास चबाने के बाद कुछ खा नहीं पा रही थी।

कोरोना के कारण दे दीजिए बेल: आतंकी साजिश में शामिल महिला हिना बशीर बेग का वकील

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान आतंकी हमला करने की साजिश रचने के आरोप में गिरफ्तार कश्मीरी महिला हिना बशीर बेग कोरोना संक्रमित पाई गई है। हिना फिलहाल राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) की हिरासत में है।

दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट ने NIA को हिना को फौरन लोकनायक जय प्रकाश (एलएनजेपी) अस्पताल में भर्ती कराने का निर्देश दिया है। अदालत ने उसके पति जहांजैब सामी और अन्य आरोपित अब्दुल बासित को न्यायिक हिरासत में भेज दिया है। दोनों की 10 दिवसीय हिरासत रविवार (जून 7, 2020) को समाप्त हो गई थी और जाँच एजेंसी ने उन्हें और अधिक समय रिमांड में रखने की माँग नहीं की।

आरोपितों का कोरोना परीक्षण 6 जून को अदालत के निर्देश पर किया गया था। राष्ट्रीय जाँच एजेंसी ने अदालत को बताया कि जहांजैब सामी और मोहम्मद अब्दुल्ला की कोरोना रिपोर्ट निगेटिव है, लेकिन हिना बशीर बेग की रिपोर्ट पॉजिटिव पाई गई है।

इस बीच, बेग के वकील एमएस खान ने एक अर्जी देकर उसे दो महीने के लिए अंतरिम जमानत देने की माँग की है। इसमें दिल्ली में बढ़ते कोरोना वायरस के पॉजिटिव मामलों की बढ़ती संख्या और अस्पतालों में असुविधा का हवाला दिया गया है। अर्जी पर आने वाले दिनों में सुनवाई होने की संभावना है।

वकील ने अर्जी में कहा है, “दिल्ली कोरोना वायरस संक्रमण के बढ़ते मामलों से निपटने के लिए संघर्ष कर रही है और सरकारी अस्पतालों में उपयुक्त इलाज की सुविधाओं का अभाव है, जिसकी खबरें मीडिया में आने के बाद दिल्ली सरकार को कोविड-19 मरीजों के इलाज के लिए 56 निजी अस्पतालों की सूची जारी करने को मजबूर होना पड़ा है।”

बता दें कि इन आरोपितों को आतंकी संगठन इस्लामिक स्टेट (IS) की विचारधारा को आगे बढ़ाने और नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ विरोध को भड़काने के आरोपों में गिरफ्तार किया गया था।

जानकारी के मुताबिक तीनों आरोपितों के इस्लामिक स्टेट खुरासान प्रांत (ISKP) के साथ कथित संबंध हैं। उन्हें दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने मार्च में गिरफ्तार किया था।

दिल्ली पुलिस ने जब इस मामले में बासित को गिरफ्तार किया, तब वह एक अन्य मामले में पहले से जेल में था। बाद में यह मामला NIA को सौंप दिया गया। NIA ने 20 मार्च को आईपीसी की धारा 120 (बी), 124 (ए) और 153 (ए) के अलावा गैर कानूनी गतिविधि रोकथाम अधिनियम (UAPA) की संबद्ध धाराओं के तहत मामला दर्ज किया था।

जाँच एजेंसी ने कहा कि आरोपी आतंकी समूह इस्लामिक स्टेट की विचारधारा का प्रसार करने और भारत में आतंकवादी हमले करने की साजिश रच रहे थे। वे आईएसकेपी के लिए लोगों की भर्ती भी कर रहे थे। दिल्ली पुलिस ने इससे पहले कहा था, “एक ऑडियो संदेश में अब्दुल बासित ने जहांजैब से कहा कि वह कुछ ऐसे लोगों को प्रोत्साहित करे जो अकेले ट्रक या लॉरी से रौंदकर लोगों को मार सके।” पुलिस के मुताबिक तीनों अबू उस्मान अल कश्मीरी से संपर्क में थे, जो आईएसकेपी के भारतीय मामलों का प्रमुख है।

न्यूजलॉन्ड्री का पाक प्रेम: पाकिस्तानी पत्रकार को किया हमदर्दी भरा व्हाट्सएप्प… जो हमारे हाथ लग गया

न्यूजलॉन्ड्री को पाकिस्तानी टीवी पैनलिस्ट के भारतीय चैनलों पर, खास कर अर्नब गोस्वामी के रिपब्लिक टीवी पर, आने और वहाँ कड़े शब्द सुनाए जाने पर काफी दर्द हुआ है। यह बात छिपी नहीं है कि इस वेबसाइट पर, जो हर दिन लोगों द्वारा नकारा जा रहा है, आप आँख मूँद कर भी कहीं उँगली रख दें तो वो अर्नब गोस्वामी से जुड़े किसी लेख पर चली जाएगी।

इस्लामाबाद (पाकिस्तान) में रहने वाली पत्रकार आरज़ू काज़मी पाकिस्तान का पक्ष रखने के लिए तमाम भारतीय चैनलों पर आती रहती हैं। वस्तुतः, पाकिस्तान के कई पत्रकार, रक्षा विशेषज्ञ आदि भारतीय मीडिया चैनलों पर आ कर भारत-पाकिस्तान से जुड़े मसलों पर पाकिस्तान का पक्ष रखने लगातार आते रहते हैं, और टीवी डिबेट में दिखते रहते हैं। आरज़ू भी ऐसी ही एक पैनलिस्ट हैं।

न्यूजलॉन्ड्री ने यूँ तो अर्नब को निशाना बना कर लगभग हर दिन एक स्टोरी करने का लक्ष्य रखा हुआ है, पर इस बार पाकिस्तान से हमदर्दी दिखाते हुए नई स्टोरी करने की कोशिश की। इसी सिलसिले में अपने आप को भारत से न्यूजलॉन्ड्री का पत्रकार बताते हुए ‘कपिल’ नाम के व्यक्ति ने आरज़ू काज़मी को व्हाट्सएप्प के ज़रिए हमदर्दी जताने, और नीचा दिखाने की भी शब्दावली का प्रयोग करते हुए मैसेज किया।

हाय, मैं भारत से कपिल हूँ। मैं न्यूजलॉन्ड्री में एक रिपोर्टर हूँ। वस्तुतः, मैं अर्नब गोस्वामी जैसे मीडिया चैनल एंकरों को ले कर, आप जैसे लोगों को भारतीय शो पर बुला कर बेवजह धुलाई करने और घृणा फैलाने की बात पर एक खबर बना रहा हूँ। इसलिए, मैं यह जानना चाह रहा था कि क्या वो आपको इसके लिए पैसे देते हैं? और यह भी कि जब आप जानती हैं कि आपको बिना किसी बात के वहाँ धोया जाएगा, तो आप लोग आते ही क्यों हैं? मेरा मतलब है कि आप लोगों को वहाँ जाने के लिए कौन सी बात प्रेरित करती है? क्या आप मेरे इन प्रश्नों का उत्तर दे सकती हैं?

जाहिर सी बात है कि कोई भी सामान्य बुद्धि-विवेक का व्यक्ति ऐसे शब्दों के निहितार्थ को समझ जाएगा कि उसकी मदद की आड़ में उसे नीचा दिखाने की भी कोशिश की जा रही है। फिर वह मैसेज घूम-फिर कर हमारे पास आ गया।

इसे इस तरह से देखिए कि जैसे किसी पाकिस्तानी शो पर कोई भारतीय जानकार अपना पक्ष रखने जाता है, वैसे ही कोई पाकिस्तानी भी भारतीय शो पर अपने राष्ट्र का पक्ष रखेगा ही। इसमें कोई बुराई नहीं है। डिबेट में आमतौर पर यही होता है और इसी तरह से आम आदमी को दोनों पक्षों को सुनने का मौका मिलता है।

चूँकि बात भारत-पाकिस्तान की होती है तो कभी-कभी वातावरण में बाता-बाती की गर्मी भी होती है, पैनलिस्ट एक-दूसरे पर आक्षेप भी करते हैं, जोर से बोलते भी हैं। यह आज के टीवी डिबेट की सामान्य प्रक्रिया हो गई है।

इस पर न्यूजलॉन्ड्री का पाकिस्तान के पत्रकार से ऐसे सवाल पूछना कि क्या ‘घृणा फैलाने के लिए’ वो पैसे के लिए ऐसी करती हैं, उनकी विचित्र सोच का परिचायक है।

कमाल की बात यह है कि जब उसी शो पर वामपंथियों और शहरी नक्सलियों को, जिसमें जॉन दयाल टाइप के प्राणी शामिल हैं, जब अर्नब उसी अंदाज में सवाल करता है, तब न्यूजलॉन्ड्री उससे पूछने नहीं जाता कि क्या इस बात के उसे पैसे मिलते हैं!

नोट: इस लेख के प्रकाशित होने के बाद स्वयं को कथित रिपोर्टर कपिल काजल का एम्प्लॉयर बताते हुए 101reporters.com के संपादक हेमंत गैरोला ने हमें यह बताया कि कपिल ने ‘न्यूज़लॉन्ड्री’ के नाम का इस्तेमाल स्वयं ही किया था, न कि न्यूज़लॉन्ड्री ने उन्हें ऐसा करने कहा था। अब बात यह है कि न्यूज़लॉन्ड्री ने उन्हें ऐसा नहीं कहा, यह साबित करना नामुमकिन है। फिर भी न्यूज़लॉन्ड्री के द्वारा बयान लेने के बाद अपने हिसाब से कुछ भी लिखने की प्रवृत्ति के बावजूद, हम इस खबर को पत्रकारिता की नैतिकता के नाम पर उक्त सूचनाओं के साथ अपडेट कर रहे हैं।

बड़ी साजिश का हिस्सा थी हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या, 50 लोगों ने 2 दिन पहले की थी बैठक: 1100 पन्नों की चार्जशीट में खुलासा

दिल्ली दंगों के दौरान हेड कॉन्स्टेबल रतनलाल की हत्या कर दी गई थी। पुलिस ने इस मामले में 1100 पन्नों की चार्जशीट दायर की है। रतनलाल की हत्या 24 फ़रवरी को हुई थी।

पुलिस ने चार्जशीट में खुलासा किया है कि इससे 2 दिन पहले 22 फ़रवरी को ही 50 लोगों के एक समूह ने बैठक की थी, जहाँ हिंसा की पूरी साज़िश रची गई। दंगाइयों ने अपने घर के बच्चों व बुजुर्गों को पहले ही घर के भीतर रहने को बोल दिया था और ख़ुद हथियार लेकर निकले।

ये लोग 23 फरवरी को भी हंगामे के लिए निकले थे, लेकिन उस दिन ज्यादा कुछ नहीं किया गया और ये सभी वापस आ गए। 24 फरवरी को सारे उपद्रवी एक बार फिर से घर से बाहर निकले और हिंसा शुरू कर दी। शाहदरा के डीसीपी अमित शर्मा, एसपी अनुज शर्मा और हेड कांस्टेबल रतनलालगंभीर रूप से घायल हो गए थे। बाद में इलाज के दौरान रतनलाल की मौत हो गई थी।

उनकी मौत के बाद पूरे देश में एक आक्रोश की लहर दौड़ गई थी और सभी ने एक सुर में इस घटना की निंदा की थी। इस मामले में 5 मास्टरमाइंड हैं, जिनमें सलीम खान, सलीम मुन्ना और शादाब का नाम शामिल है। ‘आज तक’ की ख़बर के अनुसार, इस मामले की जाँच के लिए गठित एसआईटी ने कुल 17 आरोपितों को गिरफ़्तार किया था। उन सभी को आरोपितों की सूची में डाला गया है। कई आरोपित फरार भी हैं।

चार्जशीट में पुलिस ने पुख्ता सबूत पेश किए हैं। जानकारों का कहना है कि पुलिस का पक्ष इस मामले में काफी मजबूत है और सुनवाई के बाद आरोपितों के गुनाहों का साबित होना तय है। चार्जशीट में सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल की वीडियो फुटेज और फोन कॉल डिटेल्स के साथ-साथ मौके पर उपस्थित गवाहों, पुलिसकर्मियों और और अन्य चश्मदीदों के बयान भी जोड़े गए हैं। इस घटना में क़रीब 60 लोग गवाह के रूप में अपना बयान दर्ज करा चुके हैं।

पुलिस ने चार्जशीट में ये भी कहा है कि रतनलाल की हत्या एक गहरी साजिश का हिस्सा थी। 24 फरवरी को मौजपुर क्रॉसिंग के पास हिन्दुओं और मुस्लिमों के बीच झड़प से दोपहर 12 बजे के क़रीब हिंसा भड़क उठी थी। एक वरिष्ठ अधिकारी ने ‘टाइम्स नाउ’ को बताया कि 5000 लोग वहाँ जुट गए थे और पत्थरबाजी भी हो रही थी। 1 बजे एक बड़ी भीड़ ने चाँदबाग में डीसीपी और अन्य पुलिस अधिकारियों पर हमला बोल दिया, जिसमें महिलाएँ और बच्चे भी शामिल थे।

दिल्ली पुलिस की मानें तो चाँदबाग में जिस तरह से सीएए विरोधी प्रदर्शन में लोगों को भड़काया गया और धरने ओर बिठाया गया, उसका दंगे फैलाने में अहम रोल था। रतन लाल की हत्या भी साज़िश का हिस्सा थी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने बलिदानी कॉन्स्टेबल की पत्नी को पत्र लिख कर संवेदना जताते हुए कहा था कि रतनलाल एक बहादुर एवं कर्तव्यनिष्ठ पुलिसकर्मी थे, जिन्होंने कठिन चुनौतियों का सामना किया और एक सच्चे सिपाही की तरह उन्होंने देश की सेवा में अपने जीवन का सर्वोच्च बलिदान दिया है। उन्होंने रतन लाल के निधन को असामयिक बताते हुए कहा था कि वो एक सच्चे सिपाही थे।

‘गोली का सामना करना जानते हैं?’ – जिस IAF ऑफिसर ने शुरू किया लद्दाख एयरस्ट्रिप, कॉन्ग्रेसी नेता को यूँ कराया था चुप

भारत-चीन के बीच लद्दाख में चल रहे तनाव के दौरान दौलत बेग ओल्डी हवाई पट्टी का इस्तेमाल हुआ है। चीन के साथ हालिया तनाव के बीच इसी स्ट्रिप का इस्तेमाल कर इलाके में सैनिकों की तैनाती की गई। सेना को लॉजिस्टिक्स सपोर्ट समय से पहुॅंचाने के लिहाज से यह बेहद महत्वपूर्ण एयरस्ट्रिप है।

लद्दाख का दौलत बाग ओल्डी (DBO) दुनिया की सबसे ऊँची एयरस्ट्रिप है। यह 16,614 फीट की ऊँचाई पर स्थित है। इसे एडवांस लैंडिंग ग्राउंड भी कहा जाता है। मगर यह एयरस्ट्रिप 1965 से 2008 के बीच नॉन-ऑपरेशनल रहा था।

इसकी दोबारा से शुरुआत मई 2008 में वायु सेना के तत्कालीन वाइस चीफ एयर मार्शल (सेवानिवृत) प्रणब कुमार बारबोरा ने किया था। वो भी बिना तत्कालीन सरकार को बताए।

कौन है प्रणब कुमार बारबोरा

एयर मार्शल प्रणब कुमार बारबोरा ने 01 जून 09 को एयर हेडक्वार्टर में एयर मार्शल के तौर पर 26वें उप-प्रमुख के रूप में पदभार संभाला था। एयर मार्शल प्रणव को एक फाइटर पायलट के रूप में जून 1970 में कमीशन दिया गया था। बतौर पायलट उन्होंने 3500 घंटे फाइटर प्लेन उड़ाया है। उन्होंने 1971 में बांग्लादेश के विभाजन के वक्त हुए युद्ध में भी हिस्सा लिया था। प्रणब एक क्वालिफाइड फ्लाइंग इंस्ट्रक्टर और फाइटर कॉम्बैट लीडर हैं।

अपने करियर में उन्होंने कई चुनौतीपूर्ण दायित्वों का निर्वहन किया। जैसे – मिग-21 स्क्वाड्रन के कमांडिंग ऑफिसर, एयर कॉम्बैट सिम्युलेटर यूनिट और फाइटर विंग के मुख्य संचालन अधिकारी। वह टैक्टिक्स और एयर कॉम्बैट डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट में डायरेक्टिंग स्टाफ के रूप में तैनात थे।

उन्हें कई प्रतिष्ठित पदों के लिए भी चुना गया। जैसे – फाइटर बेस के एयर ऑफिसर कमांडिंग, भारत के दूतावास में एयर अतैशे (air attache), मॉस्को, इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ के सहायक प्रमुख और वायु सेना के सहायक प्रमुख।

वह उत्तर-पूर्व के पहले ऐसे अधिकारी थे, जिन्हें एयर मार्शल के पद पर प्रोमोट किया गया था। एयर मार्शल के पद पर प्रोमोट होने के बाद, उन्हें वरिष्ठ एयर स्टाफ अधिकारी के रूप में नियुक्त किया गया और बाद में उन्होंने पूर्वी एयर कमान संभाली। वह पश्चिमी एयर कमान और एयर अफसर कमांडिंग इन चीफ अधिकारी भी थे। देश सेवा में किए गए कार्यों के लिए परम विशिष्ट सेवा पदक और वायु सेना पदक भी उन्हें मिला है।

प्रणब कुमार बारबोरा की खासियत रही है – बिना लाग-लपेट के अपनी बात रखना। 26/11 में हुए आतंकी हमले को लेकर प्रणब कुमार बारबोरा ने पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक नहीं करने के फैसले को लेकर पूर्व पीएम मनमोहन सिंह पर नाराजगी जताई थी। 26/11 के हमले को लेकर बौखलाई भारतीय वायु सेना ने कॉन्ग्रेस की मनमोहन सरकार को पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक करने का विकल्प दिया था।

टाइम्स नाउ को दिए एक इंटरव्यू में बारबोरा ने कहा था, “अगर हम पाकिस्तान पर स्ट्राइक करते तो यह 100 प्रतिशत सफल होता, बिना किसी दुर्घटना के साथ। मगर बिना सरकार की अनुमति के हम इसको अंजाम नहीं दे सकते थे। हमने यूपीए सरकार के सामने कई प्रस्ताव रखे और उनसे हार्ड इंटेलीजेंस के लोगों के साथ की डिमांड रखी। क्योंकि ये इंटेलिजेंस एजेंसी की जिम्मेदारी है। क्योंकि अगर हम बिना तैयारी के स्ट्राइक करते और हम उसमें सफल नहीं होते तो हम लोगों के सामने हँसी का पात्र होते।”

अक्टूबर 2016 में एक TV डिबेट के दौरान प्रणब कुमार बारबोरा ने कॉन्ग्रेस प्रवक्ता को यह कह कर चुप करा दिया था कि क्या वो गोली का सामना करना जानते हैं? या क्या वो यह जानते हैं कि सर्जिकल स्ट्राइक किसे कहते हैं और आइसोलेटेड स्ट्राइक किसे कहते हैं?

पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक को लेकर एक इंटरव्यू में पूर्व वायुसेना प्रमुख एयर चीफ मार्शल फली होमी मेजर ने भी कहा था कि भारतीय वायुसेना युद्ध के लिए पूरी तरह तैयार थी लेकिन सरकार ने इस विषय में अपना मन नहीं बनाया। वायुसेना प्रमुख होमी ने कहा था:

“किसी ने युद्ध को लेकर अपना मन नहीं बदला (26/11 के बाद) बल्कि सरकार ही अपना मन नहीं बना सकी। मैं जनता के क्रोध और नाराज़गी की भावना को समझता हूँ। भारतीय वायु सेना पाकिस्तान पर हमला करने के लिए तैयार थी। हालाँकि, सरकार क्या चाहती थी? हम तो किसी भी तरह की कार्रवाई के लिए तैयार थे।”

एयर चीफ मार्शल ने यह भी कहा कि सीमा पार जिहादी कैम्पों को तबाह करने के लिए एयर स्ट्राइक की भी योजना थी लेकिन भारत सरकार इसके पक्ष में नहीं थी क्योंकि उसे डर था कि सीमा पार आतंकियों पर की गई कोई भी कार्रवाई ‘पूर्ण युद्ध’ का रूप धारण कर सकती है।

अरविंद केजरीवाल को बुखार और गले में खराश, किया खुद को आइसोलेट: कल होगा कोरोना टेस्‍ट

देश की राजधानी दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के बीच दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की तबियत खराब हो गई है। फिलहाल केजरीवाल ने हल्के बुखार और गले में खराश की शिकायत के बाद खुद को घर में ही आइसोलेट कर लिया है। महामारी के बढ़ते प्रकोप के कारण अब उनका कोरोना टेस्ट किया जाएगा।

दिल्‍ली सरकार के मंत्री सौरभ भारद्वाज ने केजरीवाल की तबीयत खराब होने की पुष्टि करते हुए बताया कि रविवार (07 जून, 2020) को हल्के बुखार और गले में खराश की शिकायत के चलते सीएम ने खुद को घर में आइसोलेट कर लिया है। अब कोरोना टेस्ट के बाद ही कुछ पता चल सकेगा कि उनमें कोरोना के लक्षण हैं या नहीं।

वहीं सोमवार (08 जून, 2020) को होने वाली सभी बैठकों को सीएम ने स्थगित कर दिया है। मंत्री भारद्वाज ने बताया कि फिलहाल सीएम के संपर्क में आने वालों लोगों ने सावधानी बरतनी शुरू कर दी है। हालाँकि मंत्री ने बताया कि कैबिनेट की मीटिंग्‍स तो दूर-दूर बैठकर होती थीं, लेकिन ऐसे समय में सरकारी अधिकारियों को सावधानी बरतनी चाहिए।

वहीं बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने एक ट्वीट कर भगवान से केजरीवाल के ठीक होने की कामना की है। ट्वीट में कपिल मिश्रा ने लिखा, “ईश्वर आपको शीघ्र ठीक करें, भगवान करे आपकी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव आए।”

दरअसल शनिवार (07 जून, 2020) को ही सीएम केजरीवाल ने दिल्ली में कोरोना की स्थिति की जानकारी देने के लिए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। इसके बाद सीएम की तबीयत थोड़ी नाजुक हुई। वहीं फिलहाल दिल्ली सरकार ने दिल्‍ली में एसिम्‍प्‍टोमेटिक और प्री-सिम्‍प्‍टोमेटिक केसेज के कोरोना टेस्‍ट पर रोक लगा दी है। सरकार की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि सिर्फ लक्षण वाले संदिग्‍धों का टेस्‍ट किया जाएगा।

आपको बता दें कि रविवार (07 जून, 2020) को सीएम अरविंद केजरीवाल ने वीडियो कॉन्‍फ्रेंसिंग के माध्यम से घोषणा की थी कि अब दिल्ली की प्राइवेट अस्‍पतालों में सिर्फ दिल्‍ली के मरीजों का ही इलाज किया जाएगा। वहीं केंद्र सरकार के हॉस्पिटल जैसे एम्स, सफरदरजंग और राम मनोहर लोहिया (आरएमएल) में सभी लोगों का इलाज हो सकेगा, जैसा अब तक होता भी आया है।

हालाँकि सीएम ने साफ किया था कि कुछ प्राइवेट हॉस्पिटल जो स्पेशल सर्जरी करते हैं जो कि कहीं और नहीं की जाती, उसे दिल्ली के साथ ही बाहर का भी व्यक्ति करा सकेगा।

आपको बता दें कि दिल्‍ली में कोरोना मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्‍ली में कोरोना से मरने वालों की संख्या 812, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 28936 हो गई है। इनमें से 17125 केस एक्टिव हैं। राहत की खबर यह है कि 10999 मरीज ठीक होकर अपने घरों को लौट चुके हैं।

बंगाल: व्हीलचेयर पर डिलीवरी के बाद मर गई महिला, डॉक्टर पूछ रहे थे- लॉकडाउन में बच्चा क्यों प्लान किया?

पश्चिम बंगाल के आसनसोल जिला अस्पताल में डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से रविवार (जून 7, 2020) रात एक गर्भवती महिला की जान चली गई। मृत महिला के पति रवि कुमार यादव ने आरोप लगाया कि प्रसव पीड़ा से कराह रही उनकी पत्नी से डॉक्टरों ने बेहद बेतुका सा सवाल करते हुए पूछा कि लॉकडाउन में बच्चा क्यों प्लान किया?

न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए रवि कुमार यादव ने कहा, “मैं 5 जून को अपनी पत्नी को आसनसोल जिला अस्पताल में एडमिट कराने के लिए लेकर लाया था। यहाँ लाने के बाद शुरू में मेरी पत्नी का कोई इलाज नहीं किया गया। इतना ही नहीं अस्पताल के एक बेड पर 4-5 मरीजों को एडजस्ट किया गया था और कोरोना के खतरे के बीच सोशल डिस्टेन्सिंग के नियमों की भी धज्जियाँ उड़ाई जा रही थी।”

रवि कुमार यादव ने आगे बताया कि अस्पताल के एक डॉक्टर ने उनकी पत्नी और अन्य गर्भवती महिला से पूछा कि उन्होंने लॉकडाउन में बच्चे का प्लान क्यों किया? महिला के पति ने बताया कि अस्पताल में कोई भी डॉक्टर उनकी पत्नी को देखने के लिए राजी नहीं था।

उन्होंने बताया कि 6 जून को बड़ी मुश्किल से एक डॉक्टर उनकी पत्नी की इलाज के लिए राजी हो गए। इस डॉक्टर ने परिजनों से कहा कि महिला का ऑपरेशन करना होगा। हालाँकि जब महिला को लेबर रूम में ले जाया जा रहा था तब व्हीलचेयर पर ही उन्हें प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। महिला की डिलीवरी व्हीलचेयर पर ही हुई।

महिला के पति रवि के मुताबिक अत्यधिक पीड़ा में होने की वजह से उनकी पत्नी को हार्ट अटैक आ गया जिससे उनकी मौत हो गई। मृतक महिला के पति ने आरोप लगाया कि समय पर इलाज ना मिल पाने और डॉक्टरों की लापरवाही की वजह से उनकी पत्नी की मौत हो गई। जब डॉक्टरों ने उनका इलाज शुरू किया, उस वक्त उनका बच्चा भी साँस नहीं ले पा रहा था और अस्पताल में वेंटिलेटर की सुविधा नहीं होने की वजह से उसकी भी मौत हो गई।

ऑर्डर श्रीमद्भगवद्गीता का, विश्व बुक्स ने स्पेशल गिफ्ट के नाम पर साथ भेजी ‘भागवत पुराण कितना अप्रासंगिक’

अमेजॉन (Amazon) पर ऑनलाइन डिलीवरी सर्विस के नाम पर हिंदू धर्मग्रंथों के बारे में घृणा फैलाने का वाकया एक बार फिर सामने आया है। इसका खुलासा ट्विटर यूजर अंजी (Anji) ने किया है।

अंजी ने बताया कि उन्होंने अमेजॉन के जरिए विश्व बुक्स से श्रीमद्भगवद्गीता मँगाने का ऑर्डर दिया। जब उनके ऑर्डर की डिलीवरी हुई, तो उसके साथ एक और बुक थी जिसका शीर्षक था- भागवत पुराण कितना अप्रासंगिक

अंजी ने ट्विटर पर बताया है कि उन्होंने यूपी गाजियाबाद स्थित विश्व बुक से श्रीमद्भगवद्गीता का ऑर्डर अमेजॉन के जरिए दिया था। लेकिन बुक विक्रेता ने उनके एक ऑर्डर की जगह दो आइटम डिस्पैच कर दिए।

जब उन्हें इस ऑर्डर की डिलीवरी हुई तो उसमें श्रीमद्भगवद्गीता महापुराण के अलावा एक किताब और थी। किताब के ऊपर विशेष उपहार लिखा था, जिसका शीर्षक भागवत पुराण कितना अप्रासंगिक था।

अंजी लिखते हैं कि विक्रेता द्वारा भेजी गई उक्त पुस्तक पुराण का प्रतिवाद है और पाठकों को पुराण पढ़ने से रोकने के लिए स्पष्ट रूप से लक्षित है। वे किताब की तस्वीर डालते हुए उसके अंदर मौजूद सर्वे कार्ड को भी ट्विटर पर साझा करते हैं, जिसमें किताब के बारे में राय और विश्व बुक्स की अन्य किताबें पढ़ने की इच्छा व प्रतिक्रिया के बारे में पूछा गया था।

इसके अलावा अंजी बताते हैं कि ये पहली बार नहीं है, जब इस विक्रेता ने अमेजॉन के जरिए इस प्रकार की किताबें अपने कस्टमर को भेजने का काम किया। इससे पहले भी लोगों ने अमेजॉन पर रिव्यू लिखे हैं, जहाँ सत्यम एस नाम का यूजर लिखता है कि किताब विक्रेता ने उसे भी एक किताब फ्री भेजी थी। जिसमें हिंदुत्व औऱ श्रीमद्भगवद्गीता के ख़िलाफ़ विचार प्रस्तुत थे।

हालाँकि अपने रिव्यू में कस्टमर ने उस किताब का नाम नहीं लिखा था और कहा था कि वह उस किताब को लिखने वाले लेखक का प्रचार नहीं करना चाहता। लेकिन विक्रेता से कहना चाहता है कि जब कोई पवित्र ग्रंथ पढ़ना चाहे, अपने विचारों को शुद्ध करना चाहे, शांत जीवन जीना चाहे, तो तुम होते कौन हो नकारात्मता फैलाने वाले? अपने रिव्यू में यूजर ने विक्रेता के ख़िलाफ़ एक्शन लेते हुए उसे ब्लॉक करने की माँग की थी।

अंजी ने भी अपने थ्रेड में आगे लिखा कि यदि पुराण मैंने ऑर्डर किया है, तो इसका मतलब मैं उसे पढ़ने चाहता हूँ, विक्रेता को कोई अधिकार नहीं है कि वह मेरे धर्मग्रंथ का प्रतिवाद भेजकर मेरे विश्वास का मजाक उड़ाए।

यहाँ बता दें कि ये वाकये एक दो संख्या तक सीमित नहीं हैं। साल 2017 में एक ऐसा ही मामला आया था। उस समय योगिनी देशपांडे नाम की एक महिला ने अपने मैसेज शेयर किए थे और बताया था कि उन्हें अमेजॉन द्वारा बाइबल भेजी गई थी, जबकि उन्होंने ‘जेएनयू में एक लड़की रहती थी’ नाम की किताब ऑर्डर की थी।

इन आरोपों को सिद्ध करने के लिए उन्होंने कई प्रमाण भी साझा किए थे। इन प्रमाणों में टेक्स्ट मैसेज से लेकर किताब की तस्वीर, उसका प्रथम पृष्ठ आदि भी शेयर किए थे। इस मामले में हैरत की बात ये थी कि दोनों किताबों के विषय वस्तु बिलकुल अलग-अलग थी और दोनों का आपस में कोई संबंध नहीं था।

बाद में पता चला कि इस तरह की घटना कई उपभोक्ताओं के साथ हो चुकी है। कई लोगों को ऐसी किताबें भेजी गई हैं। किसी ने सुपरहीरोज की किताब ऑर्डर की तो उन्हें ये मिला, किसी ने अंग्रेजी की किताब मँगाई तो उन्हें बाइबल पहुँची।

खाना माँगने आई 8 साल की नाबालिग का सेक्सुअल मोलेस्टेशन: मोहम्मद नूह (75) और अब्दुल जफर (68) सहित 6 गिरफ़्तार

तमिलनाडु में सेक्सुअल मोलेस्टेशन की एक घटना में 6 लोगों को गिरफ़्तार किया गया है। इनमें दो नाबालिग हैं। इन पर 8 साल की एक लड़की से सेक्सुअल मोलेस्टेशन का आरोप है। नाबालिग पीड़िता भूखी थी और अपने पड़ोस में खाना माँगने गई थी, जहाँ उसके साथ बलात्कार किया गया।

घटना कन्याकुमारी स्थित नागरकोविल की है। सोशल मीडिया पर इस घटना के सामने आने के बाद लोग काफी आक्रोशित हैं। आरोपितों में 75 वर्षीय मोहम्मद नूह, 68 वर्षीय अब्दुल ज़फर, 53 वर्षीय ज़ाफर हुसैन और 52 वर्षीय जहदसान शामिल है।

‘मातृभूमि’ की ख़बर के अनुसार, नाबालिग लड़की की माँ की मानसिक स्थिति ठीक नहीं है, जिससे परिवार पर दुःखों का पहाड़ टूट पड़ा है। उसके पिता की भी नौकरी चली गई है, जिस कारण आर्थिक रूप से भी परिवार की स्थिति दयनीय हो गई है।

इसी दौरान उक्त लड़की पड़ोस में भोजन के लिए आई थी, जहाँ उसका सेक्सुअल मोलेस्टेशन किया गया। जाँच में पता चला है कि आरोपित पीड़िता को काफ़ी पहले से ही प्रताड़ित कर रहे थे और इनकी बुरी नज़र उस पर थी।

लड़की ने दो दिनों पहले अपने पिता को बताया था कि कुछ लोग उसके साथ शारीरिक दुर्व्यवहार कर रहे हैं, जिससे उसे दर्द हो रहा है। जब उसके पिता ने पड़ताल की तो पता चला कि उसके साथ कई दिनों से दुर्व्यवहार किया जा रहा था। इस मामले में जिला एसपी और कुलाचल महिला पुलिस के समक्ष शिकायत दर्ज कराई गई है। नाबालिग आरोपितों को तिरुनेलवेली बाल सुधार गृह में रखा गया है। एसपी मामले की जाँच कर रहे हैं। हाल ही में केरल में एक महिला के साथ उसके 5 साल के बच्चे के सामने गैंगरेप की घटना सामने आई थी।

कन्याकुमारी एसपी कार्यालय ने ऑपइंडिया को बताया कि 8 वर्षीय लड़की का गैंगरेप नहीं किया गया है, उसका सेक्सुअल मोलेस्टेशन किया है। सामूहिक बलात्कार की बात को पुलिस ने नकार दिया है। पुलिस ने लड़की के साथ यौन दुर्व्यवहार करने वाले सभी आरोपितों के खिलाफ “लैंगिक उत्पीड़न से बच्चों के संरक्षण का अधिनियम 2012” (POCSO) एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है।

साथ ही पुलिस ने चेतावनी दी है कि पीड़िता के बयान का वीडियो अगर किसी ने सोशल मीडिया पर शेयर किया तो उसके खिलाफ भी इसी एक्ट के तहत एक्शन लिया जाएगा।

अपडेट: यह स्टोरी नवीनतम सूचनाओं के आधार पर आज (जून 9, 2020) अपडेट की गई है।

बंद मदरसे में मिली 14 साल के बच्चे की लाश, हाथ-पैर बँधे थे और खून से लथपथ था चेहरा: घर से कटहल लाने निकला था

बिहार में एक बंद मदरसे से 14 साल के बच्चे की लाश मिली है। घटना पूर्णिया जिले के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के मंझेली स्थित मदरसा नुरुल होदा की है। शनिवार रात यहॉं से लौवा कुंड गाँव के शोएबुर का शव मिला।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक घटना वाले दिन शोएबुर अपनी माँ से कटहल लाने की बात कहकर घर से निकला था। बाद में उसकी लाश उस मदरसे से मिली, जहाँ वो आम दिनों में पढ़ने जाता था। बताया जा रहा है कि शोएबुर का चेहरा खून से लथपथ था। बगल में खून के धब्बे पड़े हुए थे। उसका हाथ-पैर बेंच से बँधे थे और सिर पर भी गहरे जख्म के निशान थे।

खबरों के अनुसार, तसलीम ने अपने भाई की हत्या का आरोप लगाया है। उसने बताया, “जब शाम को दुकान बंद कर मैं घर जा रहा था तो मेरी माँ ने मुझे फोन पर पूछा कि शोएबुर तुम्हारे साथ है? मैंने कहा कि नहीं वह मेरे साथ नहीं है। माँ ने बताया कि वह घर से कटहल लाने की बात कहकर गया था, लेकिन अबतक वापस नहीं लौटा है। इसके बाद हमलोगों ने उसकी तलाश शुरू की।”

प्रभात खबर के पूर्णिया संस्करण में प्रकाशित खबर

तसलीम के मुताबिक, भाई को ढूँढने के दौरान उन्हें रास्ते में एक युवक ने बताया कि शोएबुर को उसने मंझेली मदरसा के पास कुछ घंटे पहले देखा था। इसके उन्होंने उसे मदरसा के अंदर जाकर ढूँढना शुरू किया। शोएबुर को खोजते हुए वे मदरसे के पीछे स्थित कटहल के पेड़ के समीप गए, जहाँ उन्होंने उसकी चप्पल देखी। तभी दूसरे भाई की नजर खून के धब्बों पर पड़ी। आगे जाकर देखा तो उन्हें वहाँ शोएबुर का शव दिखा। रिपोर्ट्स के अनुसार, मृतक के भाई का दावा है कि जब शोएबुर का शव उन्हें मिला, तब उसके हाथ और पैर रस्सी से बँधे थे।

मदरसा में छात्र की लाश मिलने की खबर सुनते ही लोगों की भीड़ लग गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही मुफस्सिल थानाध्यक्ष घटनास्थल पर पहुँचे थे और शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया गया था।

दैनिक भास्कर के अनुसार, डीएसपी आनंद पांडेय ने बताया कि पुलिस सभी बिन्दुओं पर जाँच कर रही है। जल्द ही अपराधी को गिरफ्तार कर लिया जाएगा। स्थानीय लोगों का कहना है कि मदरसा लॉकडाउन के बाद से बंद पड़ा था। मदरसा के हेड मौलवी मोहम्मद अवेदूर रहमान ने ने बताया कि उन्हें शनिवार को साढ़े 10 बजे रात में ग्रामीणों द्वारा लाश मिलने की खबर मिली। इसके बाद मदरसे के अन्य शिक्षकों को वहाँ भेजा गया।

हेड मौलवी ने कहा कि लॉकडाउन लागू होने के बाद से मदरसा बंद था। 30 मई से हमलोग मदरसा आते हैं और दोपहर में वापस चले जाते है। मदरसा में पढ़ाई का काम फिलहाल बंद है, सिर्फ ऑफिस खोला जाता है। मदरसा में फिलहाल कोई नहीं रहता है।