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‘कराची में टोटल ब्लैकआउट, देखा गया IAF जेट्स का फॉर्मेशन’ – Pak में हलचल, भारत में मीम्स की बौछाड़

सोशल मीडिया में बुधवार (जून 10, 2020) के अहले सुबह अचानक से कराची ट्रेंड करने लगा। पाकिस्तान और भारत में लोगों ने इसे ट्विटर पर ट्रेंड कराया। ये सब शुरू हुआ कराची के ही एक व्यक्ति के ट्वीट से। पाकिस्तानी नागरिक आदिल खान ने दावा किया कि पूरे कराची में ब्लैकआउट कर दिया गया है। साथ ही उसने पाकिस्तान वायुसेना का हैशटैग भी लगाया। इसके कुछ देर बाद उसने फिर ट्वीट किया कि सब ठीक हो गया है।

पाकिस्तान में कुछ अन्य लोगों ने भी कराची के ऊपर से जेट के मँडराने की आवाज़ सुनी। वहीं भारत में कुछ लोगों ने इसका ये अर्थ लगाया कि भारतीय वायुसेना के कई फाइटर जेट्स कराची से होकर लौटे हैं, जिस कारण पाकिस्तान बेचैन है। तरह-तरह के मीम्स शेयर कर के इस पर ख़ुशी जताई गई। उन लोगों का कहना था कि कराची में IAF के डर से पाकिस्तानी वायुसेना ने ब्लैकआउट किया है।

सबसे ज्यादा मजाक ‘पाकिस्तान डिफेंस’ की उस ट्वीट का बना, जो उसने बालाकोट एयर स्ट्राइक के एक दिन पहले किया था। उस ट्वीट में उसने पाकिस्तानी जेट की तस्वीर शेयर करते हुए लिखा था कि पाकिस्तानी जनता चैन की नींद सो सकती है क्योंकि पाक वायुसेना जाग रही है। हालाँकि, उसी रात बालाकोट में एयर स्ट्राइक हुआ और भारतीय वायुसेना ने कई आतंकियों को मार गिराया। लोगों ने उस ट्वीट का स्क्रीनशॉट लेकर पाकिस्तान का मजाक बनाया और पूछा कि क्या उन्हें ये पल याद है?

ताहा अली नामक एक पाकिस्तानी नागरिक ने दावा किया कि भारतीय वायुसेना के विमानों का एक फॉर्मेशन देखा गया है, जिसके बाद पाकिस्तानी एयर फाॅर्स ने पेट्रोलिंग बढ़ा दी है और इसी क्रम में कराची के ऊपर से पेट्रोलिंग की गई। उसने अपनी बातों का सबूत दिखाने के लिए सैटेलाइट इमेज टाइप की तस्वीर भी शेयर की। ताहा ने अभिनन्दन प्रकरण पर तंज कसते दावा किया कि कराची के सभी रेस्टॉरेंट्स ने चाय जमा कर ली है क्योंकि इसकी कमी पड़ सकती है।

हालाँकि, भारतीय या पाकिस्तानी आधिकारिक सूत्रों की तरफ से दोनों देशों के लोगों द्वारा किए जा रहे दावों की पुष्टि नहीं की गई है। वहीं कुछ पाकिस्तानियों ने दावा किया कि चीन और नेपाल के साथ-साथ भारत अब पाकिस्तान से भी युद्ध कर के तीन मोर्चों पर एक साथ लड़ना चाह रहा है। इस पर भारतीय हैंडल्स ने जवाब दिया कि कराची के ऊपर उनके अपने देश की वायुसेना भी मँडराए तो वहाँ के लोगों की रूह काँप उठती है।

कराची में टोटल ब्लैकआउट पर देखें कुछ मजेदार ट्वीट:

गाय की एंटीबॉडी से होगा कोरोना का खात्मा, USA में क्लिनिकल ट्रायल शुरू: प्लाज्मा थेरेपी से 4 गुना ज्यादा शक्तिशाली

कोरोना वायरस के ख़िलाफ़ लड़ाई में अब गायों का भी योगदान होगा। इस पर रिसर्च चल रहा है। अमेरिका में स्थित साउथ डकोटा के गायों का अधययन किया जा रहा है कि वो किस तरह कोरोना के ख़िलाफ़ दवा या वैक्सीन बनाने में मददगार हो सकती हैं। एक बायोटेक कम्पनी ने कुछ जेनेटिकली मॉडिफाइड गायों द्वारा ऐसे एंटीबॉडी का उत्पादन किए जाने की बात कही है, जो SARS-CoV-2 का तगड़ा प्रतिरोधक हो सकता है।

बता दें कि यही वो रोगजनक है, जो कोरोना वायरस संक्रमण का कारण है। कम्पनी ने योजना बनाई है कि कुछ ही दिनों में इसका क्लिनिकल उपयोग शुरू किया जाएगा। ‘जॉन हॉपकिंस यूनिवर्सिटी सेंटर फॉर हेल्थ सिक्योरिटी’ के संक्रामक रोग फिजिशियन अमेश अदलजा ने कहा कि इस दिशा में चीजें आशावान दिख रही हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना के ख़िलाफ़ जितने भी काउंटर मेजर्स हमारे पास हो सकते हैं, उनकी व्यवस्था की जानी चाहिए।

अंतरराष्ट्रीय ‘साइंस’ मैगजीन के अनुसार, SAb Biotherapeutics ने दावा किया है कि गाय के शरीर में बनी हुई एंटीबॉडी से कोरोना संक्रमितों का इलाज संभव है। कोरोना के इलाज के लिए एंटी प्लाज्मा थेरेपी जैसे इलाजों का सहारा लिया जा रहा है। गाय की एंटीबॉडी से कोरोना के इलाज पर रिसर्च की ख़बर ने एक उम्मीद पैदा की है। हालाँकि, इस प्रक्रिया के लिए गाय के शरीर में कुछ अनुवांशिक बदलाव किया जाता है। एंटीबॉडी तैयार होने में क़रीब एक महीने का समय लग जाता है।

लेकिन, कम्पनी ने ये भी कहा है कि एक गाय द्वारा दिए गए एंटीबॉडी से सैकड़ों कोरोना के मरीजों का इलाज संभव है। अभी जो प्लाज्मा थेरेपी की तकनीक आजमाई जा रही है, उससे इसके चार गुना ज्यादा प्रभावशाली होने की बात कही जा रही है। कम्पनी के अध्यक्ष और सीईओ एडी सुलियन ने गाय के शरीर को एक कारखाने के सामान बताया है। गायों के शरीर में अन्य छोटे प्राणियों के मुकाबले कहीं अधिक ख़ून होता है।

गायों के ख़ून की एक और ख़सियत ये है कि उसमें मनुष्यों के मुकाबले दोगुनी मात्रा में एंटीबॉडी होती है। इसके अलावा गाय विभिन्न प्रकार की पॉलीक्लोनल एंटीबॉडी विकसित करती है, जिसका उपयोग वायरस के विभिन्न भागों पर हमले के लिए किया जाता है। ये एक ‘रेंज ऑफ मॉलिक्यूल्स’ होता है जो वायरस के कई भागों पर हमला बोलता है। कोरोना वायरस संक्रमण के शुरुआती दौर में ही कम्पनी ने इसका क्लिनिकल ट्रायल संपन्न कर लिया था।

इसके लिए सबसे पहले गाय को ‘स्टार्टर इम्यूनाइजेशन’ देना पड़ता है। इसका अर्थ है कि उनके खून में वायरस इंजेक्ट करना पड़ता है। ये डीएनए वैक्सीन के माध्यम से किया जाता है, जो उस वायरस के जीनोम को कैरी करता हो। इसके बाद गाय के खून में इसका एंटीबॉडी बनना शुरू हो जाता है। इसके बाद वायरस के स्पाइक प्रोटीन का हिस्सा डाला जाता है, जो इसके Passkey की तरह काम करता है। अब देखना ये है कि स्वस्थ लोगों के भीतर जब इस एंटीबॉडी को डाला जाएगा तो वे क्या कोरोना से इम्यून हो जाएँगे?

‘वॉशिंगटन यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ मेडिसिन’ के संक्रामक रोग विशेषज्ञ जेफरी हेंडरसन ने गायों द्वारा उत्पादित की जाने वाली एंटीबॉडी को ‘लॉजिकल नेक्स्ट स्टेप’ करार दिया है। उन्होंने बताया कि ये पूरी प्रक्रिया वैज्ञानिक है और 100 साल से भी पहले हुए अनुभवों पर आधारित है। गाय द्वारा दी गई एंटीबॉडी को बाकी मोनोक्लोनल एंटीबॉडी से ज्यादा शक्तिशाली भी माना जा रहा है क्योंकि ये वायरस को पूरी तरह तहस-नहस करने में सक्षम है।

मेरठ ‘लव जिहाद’: क्या पुलिस एनकाउंटर में मारा गया एकता की हत्या का आरोपित शाकिब?

लुधियाना के अंकुजा आनंद नगर की रहने वाली एकता लव जिहाद में मारी गई। उसे मारने वाले शाकिब (Shakib) ने अमन बनकर उसे प्रेमजाल में फँसाया। करीब छह माह प्यार का नाटक किया। उसके बाद दौराला के लोइया गाँव में लाकर स्वजनों के साथ मिलकर एकता को मौत के घाट उतार दिया।

लेकिन क्या इस घटना में हत्यारोपित शाकिब पुलिस एनकाउंटर में मारा गया?

हिन्दुस्तान टाइम्स, ट्रिब्यून इंडिया से लेकर अन्य बड़े मीडिया संस्थानों ने शाकिब (Shakib) की मौत को लेकर खबर प्रकाशित की हैं। द ट्रिब्यून (The Tribune) ने अपनी रिपोर्ट में लिखा है कि शाकिब की पुलिस के साथ हुई मुठभेड़ में उसे गोलियाँ लगीं और अस्पताल में इलाज के दौरान मंगलवार (जून 02, 2020) को अस्पताल में साकिब की मौत हो गई।

यही नहीं, ट्रिब्यून ने समाचार एजेंसी पीटीआई के हवाले से लिखा है कि एसएसपी ने खुद उन्हें बताया कि एकता की हत्या में आरोपित शाकिब की मौत हो गई है और इस मुठभेड़ में घायल कॉन्स्टेबल का भी इलाज चल रहा है।

ट्रिब्यून की खबर

‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ ने भी 04 जून को प्रकाशित रिपोर्ट में शाकिब के अस्पताल में मौत की खबर का जिक्र किया है।

सोशल मीडिया पर हिन्दुस्तान टाइम्स और ट्रिब्यून की इन दो रिपोर्ट्स के आधार पर ही बड़ी मात्रा में लोग इसे ‘हैदराबाद मॉडल’ कहते हुए शेयर कर रहे हैं।

क्या है शाकिब की मौत की हकीकत

वास्तव में, एकता की हत्या में आरोपित शाकिब की अस्पताल में मौत की खबर एकदम बेबुनियाद हैं और उसका अभी भी अस्पताल में इलाज चल रहा है।

एकता के मामा से जब ऑपइंडिया ने इस बारे में बात की तो उन्होंने स्पष्ट करते हुए कहा-

“हमने भी मीडिया में शाकिब की मौत की ख़बरें देखीं लेकिन ऐसा कुछ नहीं है। उसे गोली से जख्म लगा है, और उसे छूकर गोली निकली थी और उसे ज्यादा जख्म नहीं हुए थे। उसे 4 गोलियाँ हाथ और पैर में लगी हैं, लेकिन उसकी मौत की खबर सिर्फ अफवाह हैं और मीडिया ने अपने अनुमान से कही हैं। वो गोलियों से सिर्फ घायल हुआ था और शाकिब अभी जेल में है। यदि ऐसा होता तो हमें सबसे पहले खबर होती।”

मेरठ ‘लव जिहाद’ केस के विवेचना अधिकारी एमपी सिंह से जब ऑपइंडिया ने सम्पर्क किया तो उन्होंने बताया कि शाकिब की मौत नहीं हुई और वो अभी जेल में है। मेरठ के क्राइम रिपोर्टर ने भी विवेचना अधिकारी की बात को ही दोहराते हुए बताया कि शाकिब की मौत की खबर समाचार एजेंसी पीटीआई की गलती के कारण हुआ है और जो भी समाचार स्रोत उसकी मौत की खबर प्रकाशित कर रहे हैं, वह पीटीआई की खबर को ही आधार बनाकर इसे प्रकाशित कर रहे हैं जबकि हकीकत में ऐसा नहीं है और शाकिब की मौत की खबर सिर्फ अफवाह है।

शाकीब की मौत की अफवाह फैलाने के प्रथम दोषी पीटीआई को बताते हुए एसएसपी ने यहाँ तक कहा है कि वो उन्हें तलाश रहे हैं और उन्हें नोटिस भेजने की भी तैयारी कर रहे हैं।

(नोट- ऑपइंडिया के पास इन सभी बातचीत का ऑडियो सुरक्षित है)

गिरफ़्तारी के बाद भी शाकिब ने की थी भागने की कोशिश

पुलिस ने बताया कि सोमवार (जून 1, 2020) को जब शाकिब को हत्या की जगह पर ले जाया जाने लगा, तो उसने एक कॉन्स्टेबल की पिस्टल छीनी और रास्ते में पुलिस पर फायरिंग करके भागने की कोशिश की। जवाबी फायरिंग में इस शातिर को गोली लगी। साथ ही एक कॉन्स्टेबल को भी गोली लगी है। शाकिब के पैर में चार गोली लगने के बाद पुलिस उसका अस्पताल में उपचार करा रही है, जबकि उसकी दोनों भाभी रेशमा और इस्मत को जिला जेल भेज दिया गया। मुसर्रत, अयान और मुस्तकीम को अस्थाई जेल में भेजा गया। उनके क्वारंटाइन का समय पूरा होने के बाद जिला जेल भेजा जाएगा।

मेवात बना मिनी पाकिस्तान, पुलिस लाचार क्यों: अजीत भारती का सवाल | Ajeet Bharti on Mewat being mini Pakistan

हरियाणा का मेवात मिनी पाकिस्तान बन गया है। मेवात को दलितों का कब्रिस्तान कहा जा रहा है। यहाँ 500 में से 103 गाँव हिन्दूविहीन बना दिए गए हैं। 84 गाँवों में सिर्फ 4 या 5 हिन्दू परिवार रह गए हैं। यहाँ पर बच्चियों के साथ रेप हो रहा है, जबरन धर्म परिवर्तन का खेल खुलेआम चल रहा है। यहाँ पुलिस के घर में भी बच्ची के गैंगरेप के आरोप लगे हैं। फिर पुलिस इतनी लाचार क्यों है?

पूर्व जस्टिस पवन कुमार ने बताया कि मेवात में अल्पसंख्यक हिन्दुओं पर समुदाय विशेष की बहुसंख्यक आबादी का अत्याचार इतना भीषण है कि उन्होंने वहाँ के 48 पीड़ित दलितों को बुलाया था, लेकिन स्थानीय समुदाय विशेष की दहशत की वजह से मात्र 19 लोग ही आए। इनमें से कुछ पीड़ित थे और कुछ उनके परिजन। इन लोगों से बात करने बाद पता चला कि मेवात में दलितों की स्थिति बेहद दयनीय है। वहाँ लड़कियों से रेप, बहुओं का अपहरण, धर्मान्तरण, दलितों के साथ मार-पीट काफी आम बात है।

पूरी वीडियो यहाँ क्लिक कर के देखें।

द वायर ने बिना अनुमति के इस्तेमाल की तस्वीर, चोरी पकड़े जाने पर माँगी आधी-अधूरी माफी

द वायर के फाउंडर एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन ने मंगलवार (जून 9, 2020) को सोशल मीडिया ट्विटर पर एक आधा अधूरा माफीनामा जारी किया। उन्होंने यह माफीनामा तब जारी किया, जब एक यूजर ने बताया कि कैसे द वायर ने उनके द्वारा बनाए गए नक्शे को हैप्पीमन जैकब और लेफ्टिनेंट जनरल आरएस पनाग (सेवानिवृत्त) के साथ चर्चा के दौरान इस्तेमाल किया।

@KesariDhwaj हैंडल से ट्विटर यूजर ने वायर पर अपने डिस्कशन में बिना उनकी अनुमति के नक्शा इस्तेमाल करने का आरोप लगाया। यह नक्शा लद्दाख सीमा के साथ चीनी और भारतीय सैनिकों की स्थिति के बारे में था। ट्विटर यूजर ने वायर द्वारा उपयोग की गई तस्वीर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए कहा कि दूसरों की चीज इस्तेमाल करने से पहले उनसे अनुमति ले लेनी चाहिए।

ट्विटर यूजर की शिकायत का संज्ञान लेते हुए, द वायर के फाउंडर एडिटर सिद्धार्थ वरदराजन ने अपनी टीम द्वारा की गई गलती के लिए आधी-अधूरी माफी माँगी। उन्होंने अपनी टीम का बचाव करते हुए लिखा कि चूँकि यह तस्वीर पब्लिक डोमेन में था तो उनकी टीम को लगा कि यह पर्याप्त है। हालाँकि, आगे उन्होंने कहा कि उन्हें अनुमति लेनी चाहिए थी।

गौरतलब है कि द वायर का कॉपीराइट सामग्री को चुराने का पुराना इतिहास रहा है, इससे पहले राज्यसभा टीवी ने भी वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट को इस मामले में नोटिस भेजा था। राज्य सभा टीवी (RSTV) ने अपनी कानूनी नोटिस में वायर पर टीवी की कॉपीराइट सामग्री के “अवैध और गैरकानूनी तरीके से चोरी करने या प्राप्त करने और चोरी की संपत्ति का उपयोग करने” का आरोप लगाया था।

द वायर ने 17 सितंबर 2018 को एक लेख प्रकाशित किया था, जिसका शीर्षक था, “RSTV benches anchor for the question about Vajpayee’s role in Quit India Movement’। नोटिस में कहा गया है कि इसमें उन्होंने एक वीडियो क्लिप का इस्तेमाल किया था, जिसमें एंकर एक और अन्य वरिष्ठ पत्रकार अटल बिहारी वाजपेयी के साथ चर्चा कर रहे थे।

नोटिस में कहा गया है कि द वायर ने अपनी लेख में जिस वीडियो क्लिप का इस्तेमाल किया है, वह राज्यसभा टीवी की एक्सक्लूसिव प्रॉपर्टी है और पोर्टल द्वारा इस्तेमाल की गई क्लिप में राज्यसभा टीवी का लोगो भी नहीं है। नोटिस में यह भी कहा गया है कि द वायर ने इस क्लिप के इस्तेमाल के लिए RSTV से कोई अनुमति नहीं ली थी।

उमर खालिद पर गोली चलने का अकेला चश्मदीद भी यही खालिद सैफ़ी था, जो आज दिल्ली दंगो की साजिश में हुआ गिरफ्तार

दिल्ली दंगों की साज़िश के मामले में एसआईटी ने खालिद सैफी (Khalid Saifi) को गिरफ्तार किया है। खालिद सैफी (Khalid Saifi) को चाँद बाग में हुई हिंसा की साजिश में शामिल होने के आरोप में अरेस्ट किया गया है।

खालिद सैफी की गिरफ्तारी के बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने कहा कि ये वही खालिद सैफी है जो उमर खालिद पर गोली चलने का अकेला गवाह था।

खालिद सैफी की गिरफ्तारी के बाद भाजपा नेता कपिल मिश्रा ने ANI की एक पुरानी खबर का स्क्रीनशॉट शेयर करते हुए लिखा है –

“ये हैं खालिद सैफी – दिल्ली दंगो में हथियार लाने और ताहिर हुसैन को हथियार और पैसे दिलवाने के लिए गिरफ्तार। जब उमर खालिद पर गोली चलने की झूठी खबर आई थी। तब मीडिया में गोली चलने का अकेला विटनेस ये खालिद सैफी ही था। मैंने ये बात 13 अगस्त 2018 को ही बताई थी।”

उमर खालिद को गोली लगने की घटना का अकेला चश्मदीद था खालिद सैफ़ी

दरअसल, JNU छात्र नेता उमर खालिद पर कथित रूप से गोली लगने का यह मामला 13 अगस्त 2018 को सामने आया था। तब कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में ‘खौफ से आजादी’ नाम के कार्यक्रम का आयोजन ‘यूनाइटेड अंगेस्ट हेट’ और ‘नॉट इन माई नेम’ नाम की संस्थाओं के बैनर तले किया गया था।

इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए उमर खालिद भी पहुँचे थे। इस मौके पर मौजूद एक प्रत्यक्षदर्शी ने कहा था कि कार्यक्रम शुरू होने के पहले कॉन्स्टिट्यूशन क्लब के बाहर उमर अपने कुछ साथियों के साथ चाय पी रहे थे, इतने में हाथ में पिस्तौल लिए सफेद शर्ट पहने एक शख्स आया और उसने उमर को मारने के लिए जैसे ही पीछे दबोचा तो उनके साथियों ने उसे पकड़ने का प्रयास किया। 

उस प्रत्यक्षदर्शी ने कहा था कि हमलावर ने वहाँ से भागते हुए उमर खालिद पर गोली चलाई थी। यह प्रत्यक्षदर्शी और कोई नहीं बल्कि दिल्ली दंगों के पहले इसी JNU छात्र उमर खालिद (Umar Khalid) और ताहिर हुसैन के बीच शाहीनबाग (Shaheen Bagh) में मीटिंग करवाने वाला खालिद सैफी ही था। 08 जनवरी को शाहीनबाग में हुई मीटिंग में उमर खालिद, ताहिर हुसैन और खालिद सैफी शामिल थे।

दलितों के साथ हुई 25 आपराधिक घटनाएँ, जो ‘जय भीम, जय मीम’ वालों की खोलती हैं पोल

कई राजनेता और लेफ्ट लिबरल गैंग के लोग दलित-मजहबी एकता की बात करते हैं लेकिन ज़मीनी वास्तविकता कुछ और ही है। वो वास्तविकता ये है कि दलितों के साथ कट्टरपंथियों द्वारा अपराध किए जाने पर न तो कोई नेता पीड़ितों के पक्ष में बोलता है और न ही लिबरल गैंग का कोई सदस्य। हम यहाँ आपको पिछले कुछ सालों में हुए 25 ऐसे अपराधों के बारे में बता रहे हैं जब पीड़ित दलित थे और आरोपित मजहब विशेष के, लेकिन दलित प्रेम का दिखावा करने वालों ने चूँ तक न किया।

1. मुरादाबाद में समुदाय विशेष ने दलितों का बाल काटने से इनकार किया

यूपी के मुरादाबाद का पीपलसाना एक समुदाय विशेष बहुल इलाक़ा है। वहाँ मजहब विशेष के हजामों ने दलितों का बाल काटने से इनकार कर दिया। उनका कहना था कि अगर वो अपने सैलूनों में दलितों की हजामत करेंगे तो उनके तौलिए गंदे हो जाएँगे। नौशाद नामक एक हजाम ने बताया कि अगर दलित यहाँ बाल कटवाएँगे तो उसके सामुदाय के लोग आना बंद कर देंगे।

2. समुदाय विशेष ने दलितों के कारण सैलून जाना बंद किया

ये घटना उसी इलाक़े की है। भेदभाव की बात सामने आने के बाद प्रशासन ने हस्तक्षेप किया और कहा कि दलितों को रोकना सही नहीं है। इसके बाद लोगों ने अपने ही कौम के हजामों के पास बाल कटवाने के लिए जाना छोड़ दिया क्योंकि वो प्रशासन के कहने पर दलितों के भी बाल काट रहे थे।

3. दलित लड़की से यौन दुर्व्यवहार, उसके भाई की पिटाई

2019 जून की घटना। एक दलित की सिर्फ़ इसीलिए पिटाई की गई क्योंकि उसने अपनी बहन के साथ हो रहे दुर्व्यवहार का विरोध किया था। इस मामले में एससी-एसटी लगाने के बाद आरोपितों की गिरफ़्तारी संभव हो सकी।

4. समुदाय विशेष के हमले, घर बेचने का दबाव

बेगूसराय में मजहब विशेष ने एक दलित परिवार पर हमला किया। ये घटना बिहार के बेगूसराय स्थित नूरपुर की है। मजहबी भीड़ ने हिन्दू परिवार के घर में घुस कर हमला किया और परिवार की दो महिलाओं के साथ बदतमीजी की। एक व्यक्ति की हत्या का प्रयास। परिवार को घर बेच कर भागने की धमकी दी गई।

5. कन्वर्ट नहीं होने पर दलित की हत्या

अगस्त 2018 की घटना। दिल्ली में संजय कुमार का मृत शरीर कई दिनों बाद मिला। इस मामले में आरोपित का नाम सलीम है, जिसने संजय की हत्या इसीलिए कर दी क्योंकि एक दूसरे समुदाय की लड़की से शादी के बाद उन्होंने इस्लाम कबूल करने से मना कर दिया। उनके गुदाद्वार से कोई चीज घुसा कर उनका मलाशय बाहर निकाल लिया गया था। हत्या बेरहमी पूर्वक की गई थी।

6. दलित महिला का गैंग रेप

मेरठ की लव जिहाद की घटना। जनवरी 2018 में एक दलित युवती ने आरोप लगाया कि एक दूसरे समुदाय का व्यक्ति उससे जबरन निकाह करने और इस्लाम अपनाने की जिद कर रहा है। मना करने पर उसने अपने दोस्तों के साथ मिल कर लड़की का अपहरण किया और 1 सप्ताह तक उसके साथ गैंगरेप करता रहा। अश्लील वीडियो भी रिकॉर्ड कर लिया गया।

7. समुदाय विशेष वालों ने दलितों के वैवाहिक समारोह में हमला बोल दिया

जून 2019 की घटना। मध्य प्रदेश के देवास जिले में दूसरे मजहब के लोगों ने एक दलित परिवार के वैवाहिक समारोह पर हमला बोल दिया। रात के 9 बजे बरात जैसे ही पीपलवाड़ा मस्जिद के पास से गुजरी, उस पर हमला कर दिया गया। एक व्यक्ति की हत्या कर दी गई। कई घायल हुए। समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों ने हमले से पहले लाउडस्पीकर की आवाज़ कम करने की धमकी दी थी।

8. दलित लड़की का यौन शोषण, विरोध करने पर हमला

अप्रैल 2019 में देवरिया के गौरी बाजार में दलितों पर इस्लामी भीड़ ने हमला बोल दिया। रहमत अली ने एक दलित लड़की के साथ छेड़खानी की थी, जिसका दलित विरोध कर रहे थे। रहमत खिड़की से लड़की के कमरे में घुस कर उससे बदतमीजी कर रहा था। विरोध के बावजूद वह अगले रात फिर पहुँचा। हमले के दौरान समुदाय विशेष ने बस्ती में स्थित बाबासाहब आंबेडकर की प्रतिमा को भी क्षतिग्रस्त कर डाला।

9. आगरा में दलितों पर हमला

मंटोला क्षेत्र के टीला नंदग्राम में प्रमोद नाम का दलित लड़का नजदीकी आरओ प्लांट में पानी लेने गया था। लौटते वक़्त शाहरुख़ और सलमान ने उसे पानी सहित गिरा दिया। जब उसके माता-पिता विरोध करने आए तो अकरम और युसूफ के नेतृत्व में सैकड़ों लोग हिंसक हो उठे और दलितों के घरों को तोड़ा जाने लगा। शीशे के बोतल फेंके गए। गोलीबारी की गई।

10. दलितों पर जातिवादी टिप्पणी की, फिर हमला बोला

सुनील नामक एक दलित युवक पर पीलीभीत में एक अंडे की दुकान पर कमील रज़ा और उसके दोस्तों ने जातिवादी टिप्पणी की। इसके बाद दोनों समुदायों के बीच झड़प हुई। दोनों पक्षों के दुकानों को क्षति पहुँची।

11. यूपी में दलित महिलाओं का यौन शोषण

मई 2018 में मिजाज, टप्पू, इजहार, नासिर, अरशद, अल्ताफ और फिरोज ने एक शादी समारोह में घुस कर दलित महिलाओं के साथ छेड़खानी की, उन्हें प्रताड़ित किया। जब उन्होंने विरोध किया तो महिलाओं पर हमला बोल दिया गया। महिलाओं को बचाने अन्य लोग सामने आए तो उनके साथ भी मारपीट की गई।

12. राजस्थान में दलित की मॉब लिंचिंग

22 साल के खेताराम भील की मोब लिंचिंग कर दी गई। उनका ‘गुनाह’ सिर्फ इतना था कि उनका एक दूसरे मजहब की लड़की के साथ प्रेम सम्बन्ध था। उनके हाथ-पाँव बाँध कर इस्लामी भीड़ ने इतनी पिटाई की कि उनकी मौत हो गई। वो खून से लथपथ होकर भाग रहे थे लेकिन कोई बचाने नहीं आया।

13. मजहब विशेष ने दलितों के अंतिम संस्कार का विरोध किया

तमिलनाडु के थेनि जिले में मजहब विशेष के लोगों ने अपने बहुलता वाले इलाक़े से एक दलित व्यक्ति की शवयात्रा के गुजरने पर विरोध जताया। हालाँकि, वो शवयात्रा का नियमित रूट ही था, दलितों ने जानबूझ कर वहाँ से गुजरने की योजना नहीं बनाई थी। मजहब विशेष वालों के विरोध के बाद दोनों समुदायों के बीच हिंसा हुई।

14. उत्तर प्रदेश में दलितों और समुदाय विशेष के बीच सांप्रदायिक झड़प

सरधना के दुरवेशपुर गाँव में मजहब विशेष और दलितों के बीच हुई एक छोटी सी झड़प एक बड़े सांप्रदायिक हिंसा की वारदात में बदल गई। दोनों पक्षों के बीच पत्थरबाजी और फायरिंग हुई। फ़रवरी 2018 में हुई इस घटना में दोनों ही पक्षों के कई लोग घायल हो गए।

15. कटिहार में दलित परिवार को जलाया

बिहार के कटिहार में एक दलित परिवार को जलाने के मामले में अब्दुल और उसकी बीवी को गिरफ्तार किया गया। जून 2018 में आज़मगढ़ थाना क्षेत्र के अंतर्गत हुई इस घटना में दलित बज्जन दास और उनकी पत्नी का घर इसीलिए जला डाला गया क्योंकि मुसलामानों के कहने पर उन्होंने वहाँ से छोड़ कर जाने का फैसला नहीं लिया। जलाने के समय दोनों अन्दर ही सो रहे थे, इसीलिए बुरी तरह झुलस गए।

16. तीन दलितों को गोली मारी, एक की मौत

उत्तर प्रदेश के बिजनौर में लोकसभा चुनाव से पहले एक झड़प के बाद आसिफ, रकीब और रिहान ने मिल कर बुलाकी सिंह व उनके दो अन्य दोस्तों को गोली मार दी। तीनों ने गिरफ़्तारी के बाद अपना गुनाह कबूल कर लिया।

17. दलित से काम करवाया, पैसे माँगने पर पीटा

ये घटना मेरठ के भगत सिंह बाजार की है’। जनवरी 2019 में दलित सफाईकर्मी अंकुश से शाहरुख़ ने अपनी चाय की दुकान साफ़ कराई लेकिन जब उसने रुपए माँगे तो उसकी पिटाई कर दी। शाहरुख़ ने कई दिनों से उसके रुपए मार रखे थे। वहीं बाजार के बाकी दुकानदार समय पर पेमेंट कर देते थे।

18. मंदिर में भजन बजाने पर दलितों पर हमला

मेरठ के घसौली की घटना। जून 2019 में जब कुछ दलित मंदिर के अन्दर स्पीकर बजा कर भजन कर रहे थे तो समुदाय विशेष के स्थानीय लोगों ने इसका विरोध करते हुए उन पर हमला बोल दिया। मंदिर के अन्दर 6 लोगों की पिटाई की गई। दूसरे समुदाय के लोगों ने चेताया कि मस्जिद के पास ही मंदिर है, इसीलिए लाउडस्पीकर मत बजाओ। अकरम, करीम, सद्दाम, जुल्फिकार, अब्दुल और आरिफ गिरफ्तार।

19. गौतम नगर का नाम इस्लाम नगर रखने की कोशिश

फ़रवरी 2018 में समुदाय विशेष के प्रभाव वाले अमरोहा में एक जगह का नाम बदल कर गौतम नगर से इस्लाम नगर करने की कोशिश की गई। आज़ादी से पहले से उसे गौतम नगर के नाम पर ही जाना जाता रहा है। वहाँ 1500 दलित रहते हैं और कईयों की दुकानें भी हैं। उन सभी को डरा-धमका कर रखा जाता है।

20. मस्जिद से दलित युवक की लाश मिली

एक दलित युवक की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई, जिसकी लाश एक मस्जिद से बरामद की गई। जनवरी 2018 में यूपी के हाथरस में ये घटना हुई। मृतक अमित कुमार गौतम के परिवार ने आलम, सद्दाम, खालिद, सुकैल और आसू पर मामला दर्ज कराया। अमित किसी कागजी काम से निकला थे लेकिन उसे मार डाला गया।

21. धर्मान्तरण से किया इनकार तो दलित परिवार की पिटाई

हरियाणा के मेवात स्थित नगीना खंड में जनवरी 2018 में एक दलित परिवार पर मजहबी भीड़ ने इसीलिए हमला बोल दिया क्योंकि उसने इस्लाम में कन्वर्ट होने से इनकार कर दिया था। परिवार पर जातिवादी टिप्पणी भी की गई। 3000 लोगों के उस गाँव में मात्र 7 दलित परिवार हैं और बाकी समुदाय विशेष से हैं, जिससे उन्हें काफ़ी डर कर रहना पड़ता है। हाल ही में एक ख़बर आई थी कि मेवात दलितों का कब्रगाह बनता जा रहा है।

22. शाहनवाज ने 9 साल की बच्ची का बलात्कार किया

उत्तर प्रदेश की घटना। शाहनवाज नामक व्यक्ति एक 9 साल की दलित बच्ची का बलात्कार करते हुए रंगे हाथों पकड़ा गया। उसने कपड़े देने के लालच से लड़की को बुलाया और उसे कमरे में ले जाकर बलात्कार किया। उसने घर आकर रोते हुए अपने माँ-बाप को इसके बारे में बताया, जिसके बाद उसी तुरंत दबोच कर पुलिस के हवाले कर दिया गया।

23. नाबालिग दलित बच्ची का गैंगरेप, फिर धमकी

उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में 5 लोगों ने मिल कर एक नाबालिग बच्ची का बलात्कार किया। साथ ही पूरी वारदात को कैमरे में शूट कर के लड़की को धमकाया कि अगर उसने किसी को कुछ भी बताया तो वीडियो वायरल कर दिया जाएगा। फ़रवरी 2019 में हुई इस घटना में सबुर, फरीद, दानिश और माज को गिरफ्तार किया गया।

24. दलित महिला और नाबालिग के बलात्कार की कोशिश, कुल्हाड़ी से हमला

फ़रवरी 2018 की घटना। उत्तर प्रदेश के प्रतापगढ़ में एक दलित महिला और एक नाबालिग लड़की के बलात्कार की कोशिश की गई। समुदाय विशेष के लोग एक दलित परिवार के घर में घुस कर ऐसा कर रहे थे। जब वो कामयाब नहीं हुए तो उन्होंने कुल्हाड़ी से दोनों पर हमला बोल दिया। शकील, शहीद और मुहम्मद को इस मामले में गिरफ्तार किया गया। महिला का काफी दिनों तक इलाज चला। पीडिता की स्थिति गंभीर थी।

25. युवक ने दलित महिला के साथ बदतमीजी की

आगरा की घटना। जून 2017 में एक दलित महिला दवा खरीदने जा रही थी, तभी समुदाय विशेष के कुछ दबंगों लोगों ने उसका दुपट्टा छीन लिया और उसके साथ छेड़छाड़ करने लगे। महिला ने किसी तरह तेजी से भाग कर अपनी जान बचाई। कुछ लोगों ने महिला को बचाना चाहा तो उनकी भी जम कर पिटाई की गई।

दो बच्चों का अब्बू वसीम, ‘दिनेश रावत’ बनकर करता रहा रेप: ‘हिन्दुओं को शर्मसार’ करने के लिए किया वीडियो वायरल

मेरठ बलात्कार मामले में आरोपित वसीम अहमद ने कबूल कर लिया है कि उसने पीड़िता के साथ रेप करने के पीछे मकसद एक हिंदू महिला को इंटरनेट पर शर्मसार करने का था। स्वराज्य के रिपोर्ट के अनुसार, पीड़ित हिंदू महिला ने अपनी शिकायत में कहा है कि आरोपित वसीम अहमद ने उससे कहा था कि वह उनलोगों (हिंदुओं) को सबक सिखाना चाहता है।

स्वराज्य की रिपोर्ट में कहा गया है कि जाँच अधिकारी ने भी यह पुष्टि की कि पुलिस पूछताछ के दौरान वसीम ने कहा कि उसने यह सब एक हिंदू महिला को इंटरनेट पर शर्मसार करने के मकसद से किया था।

Portion of FIR (image courtesy: Swarajyamag.com)

पुलिस के मुताबिक, वसीम ने पीड़िता के साथ बनाए गए यौन संबंध के वीडियो शूट किए और फिर उस वीडियो को इंटरनेट पर वायरल कर दिया था। फिलहाल फोन जब्त कर लिया गया है और जाँच की जा रही है।

पीड़िता की तरफ से दर्ज कराए गए FIR में कहा गया है, “वसीम अहमद (पिता- मोमीन) ने मुझे अपना झूठा नाम दिनेश रावत बताकर मुझसे दोस्ती की और मुझे अपने घर बुलाकर मेरे साथ शारीरिक संबंध बनाए। जब मैंने उससे शादी के लिए कहा तो उसने असलियत बताई कि मेरा नाम वसीम है तथा मेरी शादी हो चुकी है एवं दो बच्चे भी हैं। मैंने जानबूझकर तुम लोगों को सबक सिखाने के लिए तुम्हें धोखा दिया है। मेरे विरोध करने पर वसीम ने मुझसे मारपीट की और धमकी दी कि अगर तुमने इस बारे में किसी से कुछ कहा तो तुम्हें और तुम्हारे घरवालों को जान से मार देंगे।”

बता दें कि रविवार (जून 7, 2020) को मेरठ के मुंडाली थाना क्षेत्र के अजराड़ा निवासी वसीम अहमद को लव जिहाद के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। उसके खिलाफ दो केस दर्ज किए गए- एक आईटी एक्ट का और दूसरा युवती से दुष्कर्म का। 

वसीम अहमद ने हापुड़ निवासी एक हिंदू युवती को पहले पहचान छिपाकर अपने प्रेमजाल में फँसाया और फिर 2 साल तक उसके साथ दुष्कर्म करता रहा। इस बीच वसीम ने दुष्कर्म पीड़िता के वीडियो और फोटो भी सोशल मीडिया पर वायरल कर दिए।

पीड़िता की शिकायत के अनुसार उसकी और वसीम की दोस्ती फेसबुक पर हुई। इसके बाद दोनों के बीच नजदीकियाँ बढ़ी और एक दिन वसीम ने उसे अपने घर बुलाकर शारीरिक संबंध बनाए और जब पीड़िता ने उससे शादी की बात कही तो उसने अपनी पहचान बताते हुए कहा कि वो शादीशुदा है और दो बच्चों का बाप है। पीड़िता ने 6 जून को मुंडाली पुलिस स्टेशन में FIR दर्ज करवाई थी।

Fake Aadhar card obtained by Waseem Ahmed/ Image Source: Swarajya

पुलिस ने बाताया कि आरोपित वसीम अहमद ने अपना नाम और पहचान छिपाकर मेरठ के नौचंदी क्षेत्र के एक अस्पताल में नौकरी करता रहा। इस दौरान उसने फर्जी तरीके से आधार कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस, वोटर कार्ड और अन्य कागजात ‘दिनेश कुमार रावत’ के नाम से बनवा लिए थे। वसीम की फेसबुक पर आईडी भी दिनेश रावत के नाम से है। इतनी ही नहीं, वसीम ने अपने फेसबुक आईडी में खुद को पंजाब केशरी का पत्रकार बताया था।

Original documents of Waseem Ahmed/ Image Source: Swarajya

जब पुलिस ने वसीम अहमद के अकाउंट को खँगाला तो पाया कि वो हर दिन प्रेस की कटिंग शेयर किया करता था। इनमें से कुछ में वसीम अहमद का बायलाइन था। मगर खबर के फॉन्ट और बायलाइन में काफी अंतर पाया गया। जब पुलिस ने उससे अखबार का कोई आईडी कार्ड वगैरह माँगा तो वो कोई भी कार्ड नहीं दिखा पाया।

Waseem Ahmed Facebook account/ Image Source: Swarajya

पुलिस ने पहले वसीम पर आईपीसी की धारा 376, 323 और 506 के तहत मामला दर्ज किया था। मगर फिर पहचान छुपाकर युवती को फँसाने के जुर्म में उसके खिलाफ आईपीसी की धारा 419 और 420 के साथ ही सूचना प्रौद्योगिकी एक्ट की धारा 66 के तहत ममाला दर्ज किया गया।

‘प्रश्न राहुल गाँधी से किया जा रहा है, जवाब देने पतलकार आ रहे हैं’: बबीता फोगाट ने प्रोपेगेंडाबाज पत्रकारों पर कसा तंज

चीन के साथ लद्दाख बॉर्डर को लेकर राजनीति तनाव चरम पर है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच ट्विटर पर जमकर बयानबाजी हो रही है। इस बीच कुश्ती चैंपियन बबीता फोगाट ने भी एंट्री मारी और कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी पर जमकर निशाना साधा।

उन्होंने अपने ट्विटर अकाउंट पर लिखा, “राहुल गाँधी जी से एक बात पूछनी थी। वो भारत की तरफ हैं या चाइना की तरफ?? आजकल उनका चाइना प्रेम ज्यादा ही उमड़ रहा है। क्या बात हिंदुस्तान पर विश्वास नहीं रहा?”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कॉन्ग्रेस की मीडिया कोऑर्डिनेटर राधिका खेड़ा ने लिखा, “एक बात आपसे भी पूछनी थी। आपको देश की सुरक्षा की चिंता है या मोदी जी के नाकामी की?”

भला बबीता फोगाट कहाँ चुप रहने वाली थी। उन्होंने इसका करारा जवाब देते हुए कहा, “राहुल गाँधी जी से कहें यह नया हिंदुस्तान है घर में घुसकर मारता है। हमें हमारे नेतृत्व और सेना दोनों पर भरोसा है। राहुल जी को समझाएँ चीनी का ज्यादा उपयोग सेहत के लिए हानिकारक होता है। कॉन्ग्रेस मोदी जी से घबराई हुई लग रही है। क्यों राजनीति चमकाने के लिए अब चीन का सहारा लेना पड़ रहा है?”

द प्रिंट की जैनब सिकंदर ने बबीता फोगाट को लिखा, “फोगाट मैडम पहले राष्ट्रवाद का अर्थ समझ लो। राष्ट्र भारत है, भाजपा नहीं। और डायलॉगबाजी कम करें। ये कोई आमिर खान की फिल्म नहीं है। विदेश नीति की बात है।”

इसका जवाब देते हुए बबीता फोगाट ने लिखा, “चाइना प्रेम राष्ट्रवाद है तो फिर ये राष्ट्रवाद कॉन्ग्रेस को मुबारक। दुश्मन देश चाइना की तारीफ और अपने देश की बुराई। ऐसी विदेश नीति कॉन्ग्रेस की ही हो सकती है। देश का नेतृत्व मजबूत हाथों में है और देश की सेना पर हमें गर्व है। रही बात फिल्म की देश का झंडा ऊँचा किया तभी फिल्म बनी है।”

जैनब सिकंदर ने फिर से इस पर प्रतिक्रिया देते हुए लिखा, “भारत में चीन के घुसपैठ के बारे में जानकारी लेना, सवाल उठाना देश विरोधी होना है? वाह री बबीता। इस वाली बबीता पर भी फिल्म बन ही जाए और घणी बावड़ी टाइप का गाना भी डाला जाए, क्यों?” इस बार बबीता ने तंज कसते हुए पूछा कि पहले भी कई बार सबूत दिए जा चुके हैं सबूत माँगने वाली आदत गई नहीं है क्या अभी?

इसके साथ ही उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर आर्मी चीफ तक पर भ्रामक खबर फैला चर्चा में आया प्रशांत कनौजिया ने बबीता की फिल्म ‘दंगल’ के सुपरहिट होने को लेकर टारगेट किया। बबीता ने भी इसका मुँहतोड़ जवाब देते हुए कहा, “देश के लिए कुछ कमा कर दिया है। तुम्हारी तरह देश की इज्जत मिट्टी में तो नहीं मिला रही। देश की शान बढ़ाई है चाइना में जाकर भी। तुम जैसे पतलकार का क्या किया जाए जो कॉन्ग्रेस के हाथों में बिक चुके हैं।”

इसके बाद बबीता एक और ट्वीट करते हुए लिखती है, “प्रश्न राहुल गाँधी से किया जा रहा है। जवाब देने पतलकार आ रहे हैं। क्यों भाई राहुल गाँधी जी को जवाब देना नहीं आता है क्या?? देश के सम्मान और स्वाभिमान के साथ कोई समझौता नहीं हो सकता। यह बात कॉन्ग्रेस अच्छी तरह से समझ ले। यह चाइना और पाकिस्तान प्रेम एक दिन कॉन्ग्रेस को मिटा देगा।”

गौरतलब है कि इससे पहले कुश्ती चैंपियन बबीता फोगाट देश में कोरोना संक्रमण के अधिकतर मामलों के लिए जिम्मेदार माने जा रहे तबलीगी जमात पर एक ट्वीट करने के कारण चर्चा में आ गई थी। इस ट्वीट में उन्होंने तबलीगी जमात को जाहिल कहा था। जिसे देखकर कट्टपंथी उनपर हमलावर हो गए थे। जिसके बाद बबीता ने एक वीडियो जारी कर कहा था कि वह ‘जायरा वसीम’ नहीं हैं और न ही वह किसी तरह की धमकी से डरने वाली हैं।

तबरेज हो या अखलाक, जैनब जैसों को दो पैसा फर्क नहीं पड़ता, सारा ज्ञान वामपंथी विचार के लिए है

केरल में गर्भवती हथिनी को अनानास में पटाखे रखकर खिलाकर हत्या करने की घटना ने जहाँ इंसानियत को शर्मसार कर दिया वहीं मीडिया में बैठे हिन्दूफ़ोबिया के आधार पर अपनी दुकान चला रहे ‘तथाकथित बौद्धिक उदारवादियों’ द्वारा इस एक घटना को हिन्दुओं के खिलाफ ही इस्तेमाल किया जा रहा है।

इसमें सबसे वाहियात यह देखना है कि अपने फर्जी ‘ज्ञान’ को सही साबित करने के लिए वो अपने पूर्वजों, यानी बाबर और अकबर तक के हवाले से गलत और झूठी जानकारी को बेहद तार्किक तरीके से पूरी बेशर्मी के साथ पेश करते हुए भी नजर आ रहे हैं।

इन्हीं प्रपंचकारियों में एक नाम है ज़ैनब सिकंदर (Zainab Sikander) का। हालाँकि, तथ्य और तर्कों से ज़ैनब सिकंदर हमेशा से ही एक निश्चित दूरी बनाकर चलती आई हैं, लेकिन जब आप झूठ के जरिए सत्ता के खिलाफ माहौल बनाने की वकालत करने वाले शेखर गुप्ता के ‘द प्रिंट’ का इस्तेमाल अपने विचारों को सत्यापित करने के लिए कर रहे हों, तब आपको समझ आ जाता है कि यह झूठ किस स्तर पर समाज को हानि पहुँचाने में सक्षम है।

द प्रिंट के ही एक ‘लेख’ में ज़ैनब सिकंदर ने लिखा है कि हिन्दुओं को जानवरों की हत्या से कोई फर्क नहीं पड़ता, जब तक कि हत्यारा कोई दलित, मुस्लिम और ईसाई ना हो और हत्याएँ राजनीतिक होती हैं।

ज़ैनब सिकंदर का फर्जी तथ्यों पर आधारित ‘लेख’

हालाँकि, ज़ैनब सिकंदर ने यह नहीं बताया है कि वो इस निष्कर्ष पर व्यक्तिगत रूप से पहुँची हैं या फिर हमेशा की तरह ही यह भी एक और आसमानी कल्पना के सहारे ही उन्होंने सस्ती लोकप्रियता के लिए यह कारनामा किया है।

यूँ तो ऐसे लेख, हेडलाइन और लिखने वाले के नाम के कारण पढ़ने योग्य नहीं होते, लेकिन इससे इनके मन के चोर को पकड़ने का रास्ता मिल जाता है। और यह तब अधिक प्रमाणित हो जाता है जब उसे पढने पर आप देखते हैं कि एक तथ्यविहीन लेख को ऐसे आदमी के आधार पर रचा गया है, जो कट्टरपंथी इस्लामिक विचारधारा के समर्थक फैक्ट चेकर्स के आधार पर लिखा गया हो।

ज़ैनब सिकंदर के लेख के आधार मजहबी फैक्ट चेकर्स

ज़ैनब शायद यह नहीं जानना चाहेंगी कि उनके यह फैक्ट चेकर पिछले सात दिन से अभी तक भी गर्भवती हथिनी की मौत की रिपोर्ट को ‘डेवलपिंग स्टोरी’ बता रहे हैं और किसी भी निष्कर्ष पर सिर्फ इस कारण नहीं पहुँच पा रहे हैं क्योंकि इस ह्त्या में एक समुदाय विशेष के आरोपितों का नाम निकल आया है।

यानी, जिस ‘रिसर्च’ का आधार जुबैर जैसे कट्टरपंथी ‘रीवर्स इमेज रीसर्चर’ हों, जो हिन्दुओं की हत्या पर चुप रहते हैं और ऑल्टन्यूज के ज़रिए कट्टरपंथियों और आतंकियों तक का बचाव करते रहते हैं, उन्हें गम्भीरता से बिलकुल भी नहीं लेना चाहिए फिर भी, उनके झूठ और प्रपंचों का पर्दाफ़ाश करना आवश्यक होता है।

लेकिन तीन साल पुरानी तस्वीरों को आज की बताकर, क्रिश्चियनों की तस्वीरों को भारत का बताकर निरंतर प्रोपेगेंडा में शामिल ज़ैनब सिकंदर को तथ्यों से क्या वास्ता हो सकता है? उन्हें तो पहचान ही हिन्दू विरोधी मानसिकता पर कायम रहकर मिलती है।

‘द प्रिंट’ की पत्रकार जैनब सिकंदर कितनी तथ्यपरक बातें करती हैं इसके ट्विटर पर कई उदाहरण मौजूद हैं, उनमें से कुछ सबसे ज्यादा दुखद फर्जी प्रपंच-

पाकिस्तान की तस्वीर को भारत का बताती ज़ैनब
तस्वीर की हकीकत
ज़ैनब का EVM पर आक्रोश
जैनब की तस्वीर की हकीकत

हिन्दुओं को जानवरों का हत्यारा साबित करने के लिए बाबर के फर्जी इतिहास की शरण में ज़ेनब

फ़र्जी इतिहासकार ज़ैनब सिकन्दर ने अपने इस लेख में लिखा है कि हिन्दुओं में पशु हत्या की प्रवृत्ति की मुगलों को जानकारी थी और यही कारण है कि गाय की सुरक्षा और गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने का उल्लेख बाबर के शासनकाल के दौरान भी मिलता है।

बकौल ज़ैनब, बाबर मुग़ल अधिकृत इलाकों में गोहत्या पर प्रतिबंध सुनिश्चित करने के लिए अपने बेटे हुमायूँ को सलाह देने के लिए जाना जाता है और अकबर ने भी यह प्रतिबंध जारी रखा, जैसा कि उनके 1586 के ‘फरमान’ में पाया गया..आदि आदि।

हिस्ट्री ग्रेजुएट ज़ैनब का व्हाट्सएप आधारित दावा

बाबर द्वारा हुमायूँ को लिखे गए ‘सहिष्णु’ खत की वास्तविकता

लेकिन क्या वास्तव में इतिहास की किताबें और साक्ष्य ज़ैनब सिकंदर के दावे से मेल खाते हैं? जवाब है नहीं। ज़ैनब सिकंदर मुगल आक्रान्ता बाबर के इस फरमान के बारे में यह बताना भूल गईं या शायद उन्हें मालूम तक ना हो, कि बाबर ने हुमायूँ को यह नसीहत व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी में दी थी।

वास्तविकता यह है कि जिस हिंडोल सेनगुप्त द्वारा कल्पना के आधार पर लिखी गई किताब में बाबर के हुमायूँ को लिखे ऐसे किसी पत्र का जिक्र किया गया है, उसे मुग़ल और मराठा इतिहास पर कई ग्रन्थ लिखने वाले ख्यातिप्राप्त इतिहासकार जादूनाथ सरकार, आरसी मजूमदार से लेकर रोमिला थापर तक फर्जी साबित कर चुके हैं।

यह तथाकथित ‘बाबर का पत्र’ पहली बार वर्ष 1930 में सामने आया था, जब भोपाल के नवाब ने ये पत्र सामने लाकर कहा कि बाबर बहुत धर्म निरपेक्ष और सहिष्णु था। लेकिन जब भारतीय ऐतिहासिक अभिलेख आयोग ने पत्र की जाँच करनी चाही, तो नवाब ने उसे सौंपने से इनकार कर दिया था। इस बारे में शेखर गुप्ता की स्तम्भकार ज़ैनब सिकंदर शायद ही जानती हों, या फिर जानने में रूचि रखीं हों।

जब भारत के राष्ट्रीय अभिलेखागार ने ‘बाबर के इस पत्र’ की एक फोटो प्रति हासिल की तो उन्होंने घोषणा की कि यह एक ‘बेहद अनाड़ी जालसाजी’ थी। इस पत्र की ‘रॉयल सील’ में ‘गाजी’ शब्द तक को गलत लिखा गया था, पत्र में लिखी गई तारीखें झूठी पाईं गईं थीं और यहाँ तक ​​कि इस पर लगी सील भी झूठी थी।

ट्विटर पर ‘ट्रू इंडोलोजी’ भी इसका जिक्र कर चुके हैं –

इसके अलावा जिस अकबर द्वारा गोहत्या पर प्रतिबंध लगाने का जिक्र ज़ैनब ने अपनी इस रिपोर्ट में लिखा है, वह उसके पीछे के राजनीतिक कारणों से भी परिचित होंगी ही और यह भी जानती ही होंगी कि वास्तविकता के धरातल पर मुगलों ने कभी भी गोहत्या पर नियंत्रण नहीं लगाया।

मुगलों द्वारा लिया गया एकमात्र फैसला, जिस पर मुगलों द्वारा काम भी किया गया वह सिर्फ और सिर्फ हिन्दुओं की आस्था और मंदिरों का विध्वंश था, इसके अलावा हिन्दुओं के प्रति शायद ही उनका कोई फैसला लेने के बारे में सोचा भी गया हो और ऐसे में ‘मुग़ल’ और ‘सहिष्णुता’ शब्द एक साथ लिए जाने तक बेवकूफाना ही है।

ज़ैनब सिकंदर एक लाइन का कुछ लिखें या हजार शब्दों का कुछ लिखें, उसका एक ही मकसद है अपनी हिन्दूघृणा को साकार रूप देना और अपने ‘मजहबी टार’ को अपनी कल्पनाओं के साहित्य से सींचना।

गर्भवती हथिनी की मौत तो छोड़िए, आखिर में सिर्फ यही साबित होता है कि ज़ैनब सिकन्दर जैसे ‘इन्टरनेट जीवियों’ को अखलाक और तबरेज की मौत से भी फर्क नहीं पड़ता, उनका सम्बन्ध सिर्फ और सिर्फ वामपंथी विचारधारा के पोषण के लिए इसी प्रकार के सिलसिलेवार तरीके से भ्रामक लेख लिखने मात्र से होता है, जिसे तब तक लिखा जाता रहा, जब तक वह समाज के कम से कम एक प्रतिशत लोगों को भी सच लगना शुरू ना हो जाए।

और द प्रिंट के इस लेख में भी उसके द्वारा यह कुत्सित कार्य सिर्फ और सिर्फ केरल में हुई गर्भवती हथिनी के हत्यारों को बचाना है, ठीक उन्हीं इस्लामिक कट्टरपंथी फैक्ट चेकर्स की तरह, जिनके फर्जी ज्ञान के आधार पर वह वास्तविकता से परे पूरा लेख लिख डालती हैं।