मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में बकरी चराने को लेकर दो गुटों में ऐसा विवाद हुआ कि एक RSS के कार्यकर्ता को अपनी जान गँवानी पड़ी। जानकारी के मुताबिक 18 मई को हुए इस विवाद में घायल राजेश फूलमाली ने 31 मई को अस्पताल में अपना दम तोड़ दिया।
राजेश की मौत की सूचना पाते ही जिला प्रशासन सक्रिय हो गया और संभावित तनाव को रोकने के लिहाज से पूरे गाँव को छावनी में तब्दील कर दिया।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 18 मई को खंडवा जिले के हापला और दीपाला गाँव के लोगों के बीच ये झड़प हुई थी। इसमें राजेश गंभीर रूप से घायल हुए थे और 13 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहने के बाद रविवार को उसने इंदौर के अस्पताल में दम तोड़ दिया।
उसके शव को सोमवार (जून 1, 2020) को जब अंतिम संस्कार के लिए खंडवा में उसके गाँव लाया गया, तो गाँव वालों ने हत्यारों की गिरफ्तारी, मुआवजा और सरकारी नौकरी की माँग को लेकर अंतिम संस्कार से इनकार कर दिया।
हालाँकि प्रशासन के बहुत समझाने के बाद वो अंतिम संस्कार के लिए तैयार हुए। इस दौरान के उनके साथ भाजपा के स्थानीय नेता राम डंगोरे और देवेंद्र वर्मा भी मौजूद रहे।
खांडवा जिले के एसपी ने इस संबंध में न्यू इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि इस मामले के मद्देनजर 22 लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है। इनमें से 19 को पुलिस ने गिरफ्तार भी कर लिया है। बाकी बचे आरोपितों को पकड़ने का भी प्रयास जारी है।
इसके अलावा रामनगर पुलिस चौकी के इंस्पेक्टर प्रभारी को मामले में ढिलाई के लिए जिला पुलिस लाइंस में अटैच कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि दो पक्षों के बीच विवाद हुआ था, जिसमें दोनों ही पक्षों ने थाने में एफआईआर कराई थी।
वहीं, स्थानीय विश्व हिंदू परिषद (VHP) के एक सदस्य नवनीत अग्रवाल ने आरएसएस कार्यकर्ता की हत्या होने पर यह आरोप लगाया है कि उनकी मौत दो समुदायों के बीच झड़प में नहीं हुई, बल्कि वो पूर्व नियोजित भीड़ की हिंसा का शिकार बने। हालाँकि पुलिस का कहना है कि अब तक की जाँच में कोई ऐसा तथ्य नहीं आया है।
कॉमेडियन आलोकेश सिन्हा ने हनुमान चालीसा का मजाक बनाने को लेकर माफ़ी माँगी है। उन्होंने कहा कि ये वीडियो 14 फ़रवरी का है। आलोकेश सिन्हा ने कहा कि उन्होंने हनुमान चालीसा के सम्बन्ध में कुछ बातें की थीं, जिसके लिए वह क्षमाप्रार्थी हैं। उन्होंने कहा कि वो धर्म से हिन्दू हैं और किसी भी हिन्दू को उनकी बातों से ठेस पहुँची है तो उसके लिए वो तहे दिल से माफ़ी माँगते हैं। रमेश सोलंकी ने उनके खिलाफ़ मामला दर्ज कराया था।
पूर्व शिवसेना नेता रमेश सोलंकी ने आलोकेश सिन्हा और ‘हैबीटेट मुंबई’ के खिलाफ मामला दर्ज कराया था। उन्होंने कहा था कि आजकल हिन्दू धर्म और हिन्दू देवी-देवताओं का मजाक बनाना एक फैशन बन गया है। उन्होंने गृह मंत्रालय और साइबर पुलिस को ऐसी घटनाओं के सम्बन्ध में एक्शन लेने की माँग की थी। उन्होंने आरोप लगाया था कि आलोकेश सिन्हा ने हनुमान चालीसा का मजाक बना कर हिन्दुओं की भावनाओं को ठेस पहुँचाई है।
आलोकेश सिन्हा ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि वो हनुमान जी का काफ़ी सम्मान करते हैं और सपने में भी उन्हें लेकर मजाक करने की नहीं सोच सकते। उन्होंने दावा किया कि उनका वो चुटकुला सेंसर बोर्ड को लेकर था, जिसने अनुष्का शर्मा अभिनीत ‘फिलौरी’ से हनुमान चालीसा को डिलीट करवा दिया गया था। बता दें कि इस फिल्म का एक दृश्य था जिसमें अभिनेता सूरज शर्मा हनुमान चालीसा पढ़ते हैं लेकिन भूत नहीं भागती है। सेंसर बोर्ड ने कहा था कि इससे धार्मिक भावनाएँ आहत होंगी।
सेंसर बोर्ड ने इस दृश्य को बेतुका करार दिया था। आलोकेश सिन्हा ने कहा कि वो हिन्दू समाज और हनुमान जी से माफ़ी माँगते हैं। उन्होंने बताया कि उनके पिता ने कारगिल युद्ध में लड़ाई लड़ी थी और वो उनके ही बेटे हैं। आलोकेश ने कहा कि वो इसी देश में रहने वाले हैं और इस देश के साथ कभी भी गद्दारी नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि वो अपने ही ‘भाइयों’ का कभी मजाक नहीं बना सकते। आलोकेश ने कहा कि उन्हें जैसे ही इस विवाद का पता चला, उन्होंने ये वीडियो बनाया।
कॉमेडियन आलोकेश सिन्हा ने आश्वासन दिया है कि वो आगे से कभी भी हिन्दू देवी-देवताओं या धर्म से सम्बंधित टॉपिक पर मजाक नहीं करेंगे। हनुमान चालीसा पर उपजे विवाद पर केस दर्ज होने के बाद जारी किए गए उनके माफीनामे पर रमेश सोलंकी ने कहा कि वो अब जनता पर छोड़ते हैं कि क्या किया जाना चाहिए। बता दें कि इससे पहले अरविन्द केजरीवाल ने चुनावी फायदे के लिए टीवी पर हनुमान चालीसा पढ़ कर विवाद खड़ा किया था।
विवादित तमिल सीरीज गॉडमैन को लेकर जी टीवी के मालिक सुभाष चंद्रा ने स्वयं भाजपा नेता सुब्रमण्यम स्वामी को आश्वस्त किया है कि वह अपने चैनल जी5 पर इस सीरीज को टेलीकास्ट नहीं होने देंगे। इस सीरीज के ख़िलाफ़ इससे पहले स्वामी के संगठन ‘विराट हिंदुस्तान’ ने विरोध प्रदर्शन किया था। ‘विराट हिंदुस्तान’ का संयोजन पूर्व आईएएस अधिकारी व स्वामी की विश्वासपात्रा चंद्रलेखा करती हैं।
द हंस इंडिया के अनुसार, चंद्रलेखा ने बताया कि जब उन्होंने गॉडमैन सीरीज से संबंधी ऐसे प्रोमो आदि देखे, जिनमें हिंदू धर्म का अपमान था, तो वह फौरन उस पर एक्शन लेकर उसे रोकना चाहती थीं। मगर, इसके बाद सुब्रम्ण्यम स्वामी ने खुद इस मामले पर संज्ञान लिया और त्वरित कार्यवाई करते हुए इस विषय पर जी चैनल के मालिक सुभाष चंद्रा से फोन पर संपर्क किया।
इस बातचीत में भाजपा नेता ने सुभाष चंद्रा से गॉडमैन को जी5 पर ऑन एयर न करने की अपील की, जिसके बाद सुभाष चंद्रा ने उन्हें आश्वस्त किया कि ये सीरीज उनके चैनल पर टेलीकास्ट नहीं होगी।
बाद में जी5 ने भी अपनी ओर से आधिकारिक बयान जारी कर दिया। जिसमें लिखा कि प्रतिक्रियाओं के आधार पर उन्होंने अपनी नई तमिल फिक्शन गॉडमैन को सस्पेंड कर दिया है। जारी बयान में कहा गया कि निर्माताओं, शो का और जी5 का ऐसा कोई उद्देश्य नहीं है कि वो किसी की धार्मिक, सामुदायिक या निजी भावनाओं को आहत करें।
Whenever Hindus have faced onslaught, Dr @Swamy39 has come to rescue.
In a recent case, Dr Swamy on Kanchi Mutt’s appeal, got the anti-Hindu series (Godman) removed from a Zee channel.
गौरतलब है कि इससे पहले कोयम्बटूर जिले के अंधनार मुरपोकु कषगम ने पुलिस अधीक्षक सुजीत कुमार से शिकायत की थी। साथ ही कहा था कि वह गॉडमैन के निर्देशक और मीडिया चैनल के ख़िलाफ़ ट्रेलर प्रसारित करने के आरोप में कार्रवाई करें। एसपी को लिखे पत्र में कहा गया था कि हाल ही में ऑनलाइन सीरीज गॉडमैन का ट्रेलर जारी हुआ, उसमें ब्राह्मणों और हिंदू धर्म का खराब चित्रण किया गया है।
उन्होंने आरोप लगाया था कि ट्रेलर स्पष्ट रूप से समाज के एक वर्ग की भावनाओं को आहत करने और लोगों को धर्म के आधार पर भेदभाव करने के इरादे से बनाया गया है, ताकि समाज में शांति को बाधित किया जा सके।
यहाँ बता दें कि इस सीरीज का ट्रेलर रिलीज होने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब आलोचना हुई थी। सोशल मीडिया पर अच्छी पकड़ रखने वाले कई यूजर्स ने इस फिल्म को एंटी हिंदू फिल्म करार दिया था। साथ ही कहा था कि ये केवल हिंदुत्व और हिंदुओं को बदनाम करने के लिहाज से बनाई गई है। इसमें डेनियल बालाजी अभिनेता है और इसे मिशनरी समूहों द्वारा प्रमोट किया जा रहा है।
Zee5 is about to premiere Godman, an Offensive, Anti-Hindu Hate-Film demeaning Hinduism and Hindus. This film is acted in by Daniel Balaji, and promoted by missionary groups.
Agniveer TN took up the issue vociferously and succeeded in getting Zee5 to withdraw the film’s trailer. pic.twitter.com/FDQuM2czFQ
इसके अलावा इस फिल्म की पूरी स्टार कास्ट जयाप्रकाश, सोनिया अग्रवाल, डेनियल बालाजी पर भी स्पष्ट रूप से हिंदुओं को बदनाम करने की मंशा रखने का आरोप लगा था।
हैदराबाद के बहादुरपुरा में रमजान के दौरान गांजा और शराब का सेवन करने के कारण एक युवक की उसके तीन दोस्तों ने हत्या कर दी। शेख मोहम्मद नाम के शख्स की लाश शनिवार (मई 30, 2020) रात मीर आलम टैंक के पास झाड़ियों से बरामद हुई थी। बताया जा रहा है कि 20 साल के शेख मोहम्मद की गला रेतकर हत्या की गई थी।
जानकारी के मुताबिक, शनिवार की शाम शेख मोहम्मद अपने कुछ पुराने विवादों को सुलझाने के लिए मोहम्मद साजिद खान, सैयद सिद्दीक और मोहम्मद अज़ार के साथ बाहर गया था। बहादुरपुरा के इंस्पेक्टर दुर्गा प्रसाद ने बताया, “तकरीबन 8 बजे वे उसे ले गए थे और 10.30 बजे शेख की दादी मुमताज़ बेगम को अपने पोते की मौत के बारे में पता चला। आरोपितों ने उसका गला काट दिया था।”
पुलिस ने कहा कि मामले की जाँच की जा रही है। तीनों की तलाश की जा रही है। आरोपितों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 302 के तहत मामला दर्ज किया गया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मृत शेख जब काफी छोटा था, तभी उसके पिता का निधन हो गया था। पिता के निधन के बाद से वह अपनी दादी के साथ रह रहा था।
मृतक के बारे में स्थानीय लोगों से सूचना मिलने के बाद शव की पहचान की गई। लाश की पहचान उसकी दादी ने की, जो कालापत्थर की रहने वाली है। शेख की दादी के अनुसार, उसे गांजा और शराब की लत थी। रमजान के दौरान गांजा पीने और शराब पीने को लेकर पहले भी उसका दोस्तों के साथ झगड़ा हुआ था।
केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी की मोदी सरकार की मेहनतकश मंत्रियों में गिनी जाती हैं। मंत्रालय के साथ-साथ अपने संसदीय क्षेत्र की जनता से भी लगातार संपर्क में रहती हैं। बावजूद इसके महिला कॉन्ग्रेस ने एक झूठा दावा कर लोगों को गुमराह करने का प्रयास किया।
महिला कॉन्ग्रेस ने एक पोस्टर शेयर करते हुए दावा किया कि अमेठी की जनता अपने सांसद को खोज रही है। उनके झूठ की पोल खोलते हुए स्मृति ईरानी ने अपने दौरे गिनाते हुए कॉन्ग्रेसियों से उनकी अध्यक्ष सोनिया गॉंधी के रायबरेली दौरे को लेकर सवाल पूछा है।
स्मृति ईरानी ने ट्वीट कर कहा, “8 महीने 10 बार 14 दिन का हिसाब मेरे पास है। लेकिन ये बताएँ कि सोनिया गाँधी कितनी बार अपने क्षेत्र रायबरेली में गई हैं।” इससे पहले महिला कांग्रेस ने पोस्टर शेयर करते हुए ट्वीट क्या था, “अमेठी ढूंढ रही है अपनी लापता सांसद स्मृति ईरानी को।”
आपको मुझसे इतनी मोहब्बत थी ये पता नहीं था .. चलें अब कुछ आपको भी हिसाब दिया जाए?8 महीने 10 बार 14 दिन का हिसाब है मेरे पास… लेकिन ये बताएँ सोनिया जी कितनी बार गयी इस दौरान अपने क्षेत्र में ? https://t.co/8pwANQbbG3
इस ट्वीट के जवाब में स्मृति ईरानी ने लिखा, “आपको मुझसे इतनी मोहब्बत थी ये पता नहीं था… चलें अब कुछ आपको भी हिसाब दिया जाए। 8 महीने 10 बार 14 दिन का हिसाब है मेरे पास है, लेकिन ये बताएँ सोनिया गाँधी इस दौरान कितनी बार अपने क्षेत्र (रायबरेली) में गईं।”
दरअसल अमेठी जिले में चिपकाए गए पर्चे में लिखा है कि सांसद बनने के बाद स्मृति ईरानी ने साल भर में दो दिन कुछ घंटों के लिए ही अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है। हमने कोरोना संकट के बीच ट्विटर के माध्यम से उनको अन्ताक्षरी खलते और एकाध व्यक्ति के साथ लंच करते हुए देखा है, लेकिन इस विपरीत परिस्थिति में उनको मासूम जनता ढूंढ रही है। अमेठी की जनता को यूँ ही छोड़ देना यह दर्शाता है कि अमेठी आपके लिए महज टूर है और पर्चे के आखिर में सवाल किया गया कि क्या आप अमेठी में सिर्फ कन्धा ही देने आएँगी?
आपको बता दें कि यह कोई पहला मौका नहीं कि जब स्मृति ईरानी ने अपनी हाजिरजवाबी से विपक्ष को को निरुत्तर कर दिया है। हाल ही में कॉन्ग्रेस का राष्ट्रीय समन्वयक होने का दावा करने वाले पांधी ने ट्विटर पर स्मृति ईरानी का मजाक उड़ाने की कोशिश करते हुए उन्हें भारत के इतिहास का सबसे ‘मूर्ख’ और ‘बेवकूफ’ सांसद बताया था।
पांधी के अपमानजनक ट्वीट का एक दिन बाद केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने बेहद विनम्र अंदाज में जवाब देकर सोशल मीडिया यूजर्स का दिल जीत लिया था। स्मृति ईरानी ने अपने जवाब में पूर्व कॉन्ग्रेस अध्यक्ष राहुल गाँधी पर निशाना साधते हुए लिखा था कि वो इस बात सहमत हैं, लेकिन कल्पना कीजिए कि उनके जैसे मूर्ख ने सुपर इंटेलीजेंट राहुल गाँधी को हरा दिया।
मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल का पहला साल पूरे होने के बाद सोमवार (जून 1, 2020) को पहली बार केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक हुई। बैठक के बाद केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर, नितिन गडकरी और नरेंद्र सिंह तोमर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की।
इस दौरान उन्होंने लॉकडाउन के बाद देश को फिर से पटरी पर लाने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी। केंद्रीय मंत्री जावड़ेकर ने बताया कि आत्मनिर्भर भारत के लिए कई तरह फैसले लिए गए हैं। उन्होंने बताया कि MSME की परिभाषा को और संशोधित किया गया है।
Taking forward the mantra of ‘Jai Kisan’,Cabinet has taken major decisions in favour of farmers.Minimum Support Prices have been fixed at 1.5 times the cost of production for 14 Kharif crops. Also,period for repayment of short term loans up to Rs 3 lakhs has been extended:PM Modi pic.twitter.com/jdj09phvJE
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में खरीफ की 14 फसलों का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) बढ़ाने की मँजूरी दी गई है। सरकार का कहना है कि नया एमएसपी किसानों की फसल के लागत मूल्य से 50-83% ज्यादा है। धान का एमएसपी 53 रुपए बढ़ाकर 1,868 रुपए प्रति क्विंटल कर दिया है। 14 फसलों पर किसानों को लागत से 50 से 83 फीसदी ज्यादा कीमत मिलेगी। इसके अलावा MSME (छोटे-मध्यम उद्योगों) से जुड़ी योजनाओं को भी मँजूरी दी गई।
पीएम मोदी ने इस दौरान कहा, “जब हमने आत्मनिर्भर भारत अभियान लॉन्च किया तो हमने केवल एमएसएमई सेक्टर की परिभाषा ही नहीं बदली, बल्कि ऐसे कई प्रस्तावों को भी लागू किया जिससे इसका प्रारूप बदला जा सके। यह लघु और मध्यम उद्योगों को मदद करने में कारगर साबित होगा। इससे रोजगार के कई अवसर पैदा होंगे।”
To provide impetus to the Atmanirbhar Bharat campaign, we have not only changed the definition of MSMEs sector, but have also approved several proposals to revive it. This will benefit the small and medium scale industries, as well as create huge employment opportunities: PM Modi https://t.co/5iIxce3Gah
इसके अलावा खेती और उस जुड़े काम के लिए 3 लाख तक के अल्पकालिक कर्ज के भुगतान की तारीख 31 अगस्त 2020 तक बढ़ाई गई है। साथ ही ब्याज छूट योजना के तहत 31 अगस्त तक, जो किसान अपनी ऋण अदायगी करेगा उसको 4% ब्याज पर ही कर्जा मिलेगा।
नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा कि लॉकडाउन के दौरान भी सरकार की पहली नजर किसान और गरीब पर ही थी। उन्होंने कहा कि प्रतिकूल समय में भी इस साल बंपर उत्पादन हुआ है। मक्का में 52 फीसदी बढ़ोतरी हुई है। सरकार की तरफ से धान खरीद को लेकर उन्होंने कहा कि अब तक 93 लाख मिट्रिक टन धान खरीदा गया है।
MSP rate for Paddy now at Rs 1868 per quintal, Jowar-Rs 2620/quintal, Bajra-Rs 2150/quintal, and 50% increase in Ragi, Moong, Groundnut, Soyabean, Til and Cotton, for the year 2020-21: Union Minister Narendra Tomar pic.twitter.com/9kcXSb0EVN
उन्होंने बताया कि धान के लिए MSP की दर अब 1868 रुपए प्रति क्विंटल, ज्वार के लिए 2620 प्रति क्विंटल, बाजरा -2150 रुपए/क्विंटल की गई है। रागी, मूँग, मूँगफली, सोयाबीन, तिल और कपास की एमएसपी में 50 फीसदी की बढ़ोतरी की गई है। ये फैसला साल 2020-21 के लिए है।
प्रधानमंत्री मोदी ने एमएसएमई सेक्टर को मजबूती देने के लिए एक ऑनलाइन प्लेटफार्म लॉन्च किया है। इसका नाम चैम्पियन्स रखा गया है। इसका मकसद छोटे और मध्यम उद्योगों की मदद करना, उनकी शिकायतों का समाधान करना और व्यापार के नए मौके तलाशने में मदद करना है।
50 करोड़ रुपए तक के कारोबार वाली इकाई भी एमएसएमई के अंतर्गत आएगी। एमएसएमई के निर्यात का टर्नओवर इसमें नहीं जोड़ा जाएगा। इससे नए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। सरकार ने 4000 करोड़ रुपए के डिस्ट्रेस फंड को मँजूरी दी है। साथ ही बंद हुई एमएसएमई के लिए 20 हजार करोड़ रुपए का फंड बनाने का फैसला लिया गया है।
इस दौरान पीएम मोदी ने कहा, “आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देने के लिए हमने न केवल MSMEs सेक्टर की परिभाषा बदली है, बल्कि इसमें नई जान फूँकने के लिए कई प्रस्तावों को भी मँजूरी दी है। इससे संकटग्रस्त छोटे और मध्यम उद्योगों को लाभ मिलेगा, साथ ही रोजगार के अपार अवसर सृजित होंगे।”
This is a one stop place for MSME sector. The focus areas are support & hand-holding, grievance redressal, harnessing entrepreneurial talent and discovering new business opportunities. https://t.co/diLjzKeRY5pic.twitter.com/d9t8XGJcxT
उन्होंने कहा, “देश में पहली बार सरकार ने रेहड़ी-पटरी वालों और ठेले पर सामान बेचने वालों के रोजगार के लिए लोन की व्यवस्था की है। ‘पीएम स्वनिधि’ योजना से 50 लाख से अधिक लोगों को लाभ मिलेगा। इससे ये लोग कोरोना संकट के समय अपने कारोबार को नए सिरे से खड़ा कर आत्मनिर्भर भारत अभियान को गति देंगे।”
उन्होंने बताया कि रेहड़ी पटरी वालों के लिए केंद्र सरकार ने पीएम स्व नीति (प्रधानमंत्री स्ट्रीट वेंडर आत्मनिर्भर निधि) का गठन किया है। फुटपाथ विक्रेताओं समेत रेहड़ी पटरी वालों को 10 हजार रुपए तक कर्ज दिया जाएगा।
इसके साथ ही प्रधानंत्री नरेंद्र मोदी ने पहली बार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए SPIC-MACAY के उद्घाटन के दौरान जनता को संबोधित किया। उन्होंने जनता को संबोधित करते कहा, “पूरी दुनिया में कोरोना के कारण जो तनाव है, लोगों में जो डर और दुविधा है, उसे संगीत और कला के माध्यम से कैसे दूर किया जाए, यही आपने इस साल के कार्यक्रम की थीम भी रखी है।”
उन्होंने कहा कि जिस तरह संगीत में एक सामंजस्य की जरूरत होती है, एक अनुशासन की जरूरत होती है, उसी तरह के सामंजस्य, संयम और अनुशासन से ही देश का प्रत्येक नागरिक आज इस महामारी से लड़ रहा है।
द रेसिस्टेंस फ्रंट यानी TRF पाकिस्तानी की आतंकी फैक्ट्री से निकला नया संगठन है। इसने उन सभी भारतीय नागरिकों को जान से मारने की धमकी दी है, जो कश्मीर से नहीं हैं और घाटी में बसने की योजना बना रहे हैं।
पत्रकार आरती टिक्कू सिंह ने ट्विटर पर आतंकी संगठन का एक पोस्टर शेयर किया है। इस पर कमांडर हमजा के हस्ताक्षर हैं। पोस्टर में आतंकी संगठन ने दावा किया है कि जानबूझकर किसी नागरिक, जाति और किसी भी धर्म या पंथ को नुकसान नहीं पहुँचाने की उनके संगठन की सख्त नीति है। लेकिन वे भाजपा के झाँसे में नहीं आने वाले हैं।
BREAKING @ians_india: Pakistan’s new #terror group for Kashmir ‘The Resistance Front’ while trying very hard to appear “secular” & “native”, THREATENS to KILL non-Kashmiris who plan to settle down in Kashmir under the new domicile law of the union territory of Jammu & Kashmir. pic.twitter.com/iTUxKSSe87
पोस्टर में कहा गया है कि भाजपा और आरएसएस घाटी के जनसांख्यिकीय में बदलाव की कोशिश कर रहे हैं। इसकी आड़ में आरएसएस अपने लोगों को कश्मीर में बसाना चाहता है। इसलिए आतंकी संगठन ने खुलेआम घोषणा की है कि जो भी गैर-कश्मीरी घाटी में बसने के इरादे से आएगा, उससे वह आरएसएस एजेंट की तरह निपटेगा।
इस महीने की शुरुआत में हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट में कहा गया था कि खुफिया एजेंसियों ने एक नए पाकिस्तान बेस्ड आतंकी संगठन को चिह्नित किया है, जो पाकिस्तान में लश्कर-ए-तैयबा (एलईटी) के तीन टॉप कमांडरों द्वारा संचालित है। कथित तौर पर टीआरएफ को जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद पिछले साल शुरू किया गया था।
भारतीय सुरक्षा अधिकारियों के अनुसार, लश्कर के नेताओं ने आतंकी संगठन टीआरएफ का गठन किया और पाकिस्तान से हाथ मिलाया। हिंदुस्तान टाइम्स के मुताबिक सुरक्षा रिपोर्ट्स में कहा गया है कि दक्षिण कश्मीर के लिए सज्जाद जट्ट, मध्य कश्मीर के लिए खालिद और उत्तरी कश्मीर के लिए हंजला अदनान को जिम्मेदारी दी गई है।
बिग बॉस-13 के प्रतिभागी रहे विकास पाठक उर्फ हिंदुस्तानी भाऊ ने प्रोड्यूसर एकता कपूर के खिलाफ मुंबई के खार पुलिस थाने में FIR दर्ज कराई है। एफआईआर में एकता कपूर पर एक वेब सीरीज के माध्यम से सेना का अपमान करने का आरोप लगाया है।
One More warrior added on Twitter @RealKingbhau (HINDUSTANI BHAU)
-Police Complaint filed today by @RealKingbhau against @ektarkapoor and #ShobhaKapoor for disrespecting our indian military, national emblem, colonel tag and defaming our country!
— Adv. Ashutosh J Dubey (@iamashu123) June 1, 2020
हिंदुस्तानी भाऊ का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हो रहा है। वीडियो में भाऊ एकता कपूर और उनकी माँ शोभा कपूर के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की बात कह रहे हैं।
भाऊ ने आरोप लगाया कि एकता कपूर ने अपनी एक वेब सीरीज में देश के जवान और उसकी वर्दी का मजाक बनाया है। इसके खिलाफ उन्होंने ये शिकायत दर्ज करवाई है। सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो को हिंदुस्तानी भाऊ ने खार थाने के सामने ही बनाया है। साथ ही वीडियो में उन्होंने एफआईआर की उस कॉपी भी दिखाई है।
इसके साथ ही भाऊ कहा है कि इस कृत्य के लिए एकता कपूर और उनकी माँ शोभा कपूर को इंडियन आर्मी से माफी माँगनी चाहिए। भाऊ का कहना है कि उनकी इस वेब सीरीज ने इंडियन आर्मी की गरिमा को ठेस पहुँचाई है।
He lodged a complaint against Ekta kapoor & her mother Shobha kapoor for using military uniform in a sex act in a web series that dou produced. Watch. pic.twitter.com/Nel42cC5v4
दरअसल विकास पाठक उर्फ हिंदुस्तानी भाऊ ने बीते दिन अपने आधिकारिक सोशल मीडिया अकाउंट के जरिए एक पोस्ट साझा की थी। इस पोस्ट में उन्होंने लिखा था कि वो जल्द ही बॉलीवुड की जानी-मानी हस्ती को एक्सपोज करने वाले हैं। इतना ही नहीं, उन्होंने ये भी कहा था कि वो इस बॉलीवुड स्टार के खिलाफ एफआईआर भी करने वाले हैं।
गौरतलब है कि हिंदुस्तानी भाऊ वीडियो में जिस वेब सीरीज की बात कर रहे हैं उसका नाम ‘ट्रिपल एक्स’ है। इस वेब सीरीज में दिखाया गया है कि इंडियन आर्मी का जवान जब बॉर्डर पर जाता है तो उसकी पत्नी उसकी पीठ पीछे अफेयर चलाती है। इस अफेयर में जवान की वर्दी के साथ अश्लीलता करते हुए दिखाया गया है, जो कि वर्दी का अपमान है।
पिछले साल झारखंड में विधानसभा चुनाव के बाद एक विधायक का ढोल मीडिया ने खूब पीटा था। ये थीं राज्य की सबसे कम उम्र की विधायक अंबा प्रसाद। बड़कागॉंव से कॉन्ग्रेस की इस विधायक ने एक ‘बड़ा’ कारनामा किया है।
लॉकडाउन में सैकड़ों लोगों की सभा को अंबा प्रसाद ने संबोधित किया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस दौरान पूलिस मूकदर्शक बनी रही। सोशल डिस्टेंसिंग का किसी को ख्याल नहीं था।
अंबा प्रसाद ने रविवार (31मई 2020) को केरेडारी प्रखंड के पांडू गाँव में सभा की। इसके लिए प्रशासन से इजाजत नहीं ली गई थी। उल्लेखनीय है कि कोरोना की वजह से लॉकडाउन के साथ इलाके में धारा 144 भी लागू है।
दरअसल विधायक ने एनटीपीसी कोयला खनन परियोजना क्षेत्र के कार्यों को लेकर विस्थपितों और प्रभावित भू-रैयतों के साथ बैठक की थी। बता दें केरेडारी के पांडू और तरहेसा गाँव में कनवेयर बेल्ट के लिए रास्ता बनाने का काम शुरू किया गया है। इस काम को रोकने के लिए अंबा प्रसाद ने ग्रामीणों के साथ बैठक की थी।
जानकारी के अनुसार इस सभा के आयोजन के दौरान केरेडारी के बेलतु पिकेट के पुलिसकर्मी बेंगवरी मोड़ के समीप गश्ती कर रहे थे। सिर्फ 300 कदम की दूरी पर मौजूद पुलिस वालों ने भी इतनी भारी संख्या में मौजूद लोगों की भीड़ ओर ध्यान नहीं दिया या फिर देख कर भी अनदेखा कर दिया।
कल हुई बैठक को लेकर झारखंड के भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह ने ट्विटर के जरिए, सोशल डिस्टेंसिग को ताक पर रखते हुए की गई जनसभा को लेकर कई फ़ोटो शेयर किए। जहाँ उन्होंने विधायक की इस लापरवाही को लेकर उनपर कार्यवाही की माँग की है।
सैकड़ों लोगों की जान जोखिम में डाल सभा के आयोजन ने तूल तब पकड़ा जब लोगों ने इसकी फ़ोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर डाल दिया।
इसके बाद कॉन्ग्रेस विधायक ने सफाई देते हुए कहा कि बैठक गाँव वालों ने अपनी समस्या के समाधान के लिए आयोजित की गई थी। विशेष आग्रह पर ही वो उनकी स्थिति को समझने वहाँ पहुँची थी। लेकिन लोगों की भीड़ देखते ही उन्होंने दूरी बना ली। उनकी बातों को सुनने के बाद वो वहाँ से तुरंत चली गई थीं। सोशल डिस्टेंसिग को मद्देनजर रखते हुए उन्होंने ग्रामीणों से उनके आवेदनों को जमा करा लिया और उन्हें समझ-बुझाकर वापस भेज दिया था।
जिला प्रशासन बताया कि किसी भी अधिकारी को इस बैठक की खबर नहीं थी। बैठक के लिए किसी भी प्रकार की अनुमति भी नहीं ली गई थी। सीओ अरुण कुमारी तिर्की ने बताया कि रैयतों के साथ बैठक के बारे प्रशासन को कोई सूचना नहीं दी गई थी।
क्या हरियाणा का मेवात मिनी पाकिस्तान है? यह सवाल पूर्व जस्टिस पवन कुमार की अगुवाई वाली 4 सदस्यीय जॉंच समिति की रिपोर्ट से खड़ी हुई है। यह रिपोर्ट बताती है कि मुस्लिम बहुल मेवात कैसे हिंदुओं खासकर दलितों के लिए कब्रिस्तान बनता जा रहा है। महिलाओं को अगवा करना, दुष्कर्म और जबरन धर्म परिवर्तन की कई घटनाएँ वैसे ही सामने आए हैं, जैसी खबरें पाकिस्तान से आती रहती है।
हरियाणा श्री वाल्मीकि महासभा ने इस कमिटी का गठन किया था। इससे संबंधित एक प्रेस विज्ञप्ति विहिप के राष्ट्रीय प्रवक्ता विनोद बंसल ने भी ट्वीट की है।
प्रेस विज्ञप्ति: दलितों का कब्रिस्तान बनता जा रहा है मेवात : जस्टिस पवन कुमार Mewat of Haryana becoming graveyard of Dalits : Justice Pawan Kumar pic.twitter.com/JuAYn31G2w
जब ऑपइंडिया ने इस संबंध में पूर्व न्यायधीश पवन कुमार से संपर्क किया, तो कई बातें निकलकर सामने आई। पूर्व न्यायाधीश ने बताया कि मेवात में समुदाय विशेष (बहुसंख्यक आबादी) का अल्पसंख्यकों पर अत्याचार इतना भीषण है कि जिले के करीब 500 गाँवों में से 103 गाँव ऐसे हैं जो हिंदूविहीनहो चुके हैं। 84 गाँव ऐसे हैं जहाँ अब केवल 4 या 5 हिंदू परिवार ही शेष हैं।
प्रेस रिलीज
पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार से ऑपइंडिया की बात
पूर्व न्यायाधीश पवन कुमार इस संबंध में बताते हैं कि वह दलितों पर अत्याचार के मामले में जाँच के लिए स्वयं मेवात गए थे। यहाँ उन्होंने 48 पीड़ितों को पूछताछ के लिए बुलाया। लेकिन, स्थानीय दलितों में समुदाय विशेष के लोगों की इतनी गहरी दहशत है कि इनमें से केवल 19 लोग ही उनके पास आए। इनमें से कुछ स्वयं पीड़ित थे और कुछ पीड़ितों के परिजन। यहाँ उन्होंने स्वंय उनसे बातचीत की, उनके बयान रिकॉर्ड किए।
पवन कुमार कहते हैं कि इन लोगों से बातचीत करने के बाद उन्हें मालूम चला कि मेवात में दलितों की स्थिति बेहद बुरी है। वहाँ लड़कियों से रेप, वधुओं का अपहरण, धर्मांतरण, दलितों से मारपीट की घटनाएँ आम हो गई है।
हमसे बात करते हुए पूर्व न्यायाधीश कुछ घटनाओं का जिक्र करते हैं, जिनका उल्लेख विज्ञप्ति में भी है। वे बताते हैं कि कुछ समय पहले समुदाय विशेष के 4 लड़कों ने एक पुलिस वाले के घर में ही एक बच्ची का रेप किया। लेकिन जब बाद में इस मामले पर शिकायत दर्ज हुई, तो आगे कोई कार्रवाई नहीं की गई।
इसके अलावा एक और घटना का उल्लेख करते हुए पूर्व न्यायधीश बताते हैं कि कुछ समय पहले एक लड़की को नौकरी का झाँसा देकर अगवा किया गया। फिर उसे कई दिनों तक बंधक बनाया गया और इस बीच 9 लोगों ने उसका रेप किया। मगर, जब दरिंदों के चंगुल से छूटकर लड़की ने थाने में आपबीती सुनाकर शिकायत दर्ज कराई, तो मामले पर कोई उपयुक्त कार्रवाई नहीं हुई। नतीजतन एक दिन उसका गला काटकर उसे मारने की कोशिश हुई, लेकिन न जाने कैसे वो उस समय बच गई। किंतु अगली बार फिर उस पर हमला हुआ और उसकी अंतत: हत्या कर दी गई।
उल्लेखनीय है कि विज्ञप्ति में लिखा गया है कि न्यायाधीश पवन कुमार ने कहा कि जबरन धर्मांतरण के कई उदाहरण सामने आए। किंतु किसी भी मामले में कोई कार्रवाई न होने के कारण धर्मांतरित व्यक्तियों के परिवारों पर धर्मांतरण का दबाव बनाया जाता रहा। ऑपइंडिया से बातचीत में धर्मांतरण से जुड़े एक वाकये का भी जिक्र किया।
उन्होंने कहा कि कुछ समय पहले मेवात में दो बच्चों की माँ को पहले एक मुस्लिम लड़का भगाकर ले गया। बाद में उसने उसे अवैवाहिक बताकर जबरन उसका धर्म परिवर्तन करवा दिया। लेकिन, तब भी पुलिस ने इस मामले पर कार्रवाई करनी उचित नहीं समझी। जबकि महिला की बेटियाँ इस संबंध में बताती रहीं कि उस लड़के के व्हॉट्सअप पर मैसेज आते थे कि तुम धर्म परिवर्तन करो।
पुलिस की ढिलाई पर ध्यान आकर्षित करवाते हुए गठित जाँच समिति के अध्यक्ष पवन कुमार बताते हैं कि मेवात में हालात इतने बुरे हैं कि पैसे माँगने पर दलितों को इतना मारा जाता है कि वो मुश्किल से बच पाते हैं। लेकिन जब वही पीड़ित जाकर पुलिस से इस संबंध में शिकायत करता है तो पुलिस एक्शन लेने की बजाय पीड़ित पर ही समझौते का दबाव बनाती है।
प्रेस विज्ञप्ति में बिछोर गाँव की एक और घटना का जिक्र होता है। इस संबंध में रिटायर्ड जज हमें बताते हैं कि वहाँ रामजीलाल को पेट से काटा गया। बाद में उसे जिंदा जला दिया गया। किंतु जब बात आरोपितों के ख़िलाफ़ कार्रवाई की आई तो पुलिस ने ये कहकर फाइल बंद कर दी कि वो आसमानी बिजली के कारण मरा है। पवन कुमार कहते हैं कि खुद सोचिए बिजली से कोई व्यक्ति मरेगा तो पेट थोड़ी काटा जाएगा? इस घटना में मृतक के घरवाले इतना ज्यादा डर गए कि उन्होंने गाँव से ही पलायन कर लिया।
इस बातचीत में हमें यह भी ज्ञात हुआ कि मेवात की बहुसंख्यक आबादी धीरे-धीरे दलितों के श्मशान घाट पर कब्जा कर रही है। साथ ही सरकार द्वारा मुहैया कराए गए उनके प्लॉट भी समुदाय विशेष के लोगों द्वारा धीरे-धीरे हड़पे जा रहे हैं। वहीं, मारपीट, उधारी का पैसा माँगने पर हमले की घटनाएँ तो मानो बेहद सामान्य हो गई हैं।
साभार: राजनीति गुरु
पूर्व न्यायाधीश स्पष्ट शब्दों में ऑपइंडिया से बात करते हुए कहते हैं कि मेवात में प्रशासन ढीला है और पुलिस के शह में ये सारा काम होता है। नतीजतन 104 गाँव से हिंदू बिलकुल गायब हो चुके हैं, जबकि 84 गाँव में 4-5 की संख्या में हिंदू परिवार बचे हैं। पवन कुमार कहते हैं कि मेवात में 500 गाँव हैं। लेकिन इनमें एक तिहाई गाँवों में से हिंदू गायब हो चुके हैं।
मामले में आगे की कार्रवाई पर पवन कुमार बताते हैं कि उन्होंने इस विषय में सभी तथ्य जुटाने के बाद अपनी रिपोर्ट तैयार करके मुख्यमंत्री को भेज दी है। इसके अलावा ये रिपोर्ट गृह मंत्रालय को और अनुसूचित जाति आयोग के चेयरमैन को भी भी दी गई है। अब इन तथ्यों की जाँच से उनका उद्देश्य केवल दलित समाज को न्याय दिलाने का और मेवात में कानून स्थापित करने का है।
वह कहते हैं कि मेवात में इस समय दलितों की जो स्थिति है, वैसी तो शायद पाकिस्तान में जो हिंदू बचे हैं, उनकी भी स्थिति न हो। जाँच टीम अध्यक्ष अध्यक्ष पवन कुमार स्पष्ट बताते हैं कि पाकिस्तान में रह रहे हिंदुओं भी बदतर हालात मेवात में दलितों की है।
आरोपों पर पुलिस ने क्या कहा?
यहाँ बता दें श्री वाल्मीकि महासभा द्वारा गठित इस 4 सदस्यीय जाँच टीम ने अपनी पड़ताल पूरी करके यह निष्कर्ष निकाला है कि दलितों पर अत्याचार प्रशासन और पुलिस की शह पर हो रहा है। विज्ञप्ति में कहा गया पहले तो दलितों की शिकायतें ही दर्ज नहीं होती थी दर्ज हो भी जाएँ, तो कार्यवाही नहीं होती।
इसके साथ ही इस रिलीज के जरिए पुलिस पर ये भी आरोप लगाया गया कि पुलिस वहाँ पीड़ितों को समझौता करने के लिए धमकाती है और पीड़ित पर ही झूठा केस दर्ज कराने की धमकी देते हैं। ऐसे में जब हमने इस संबंध में मेवात एसपी से बात की और पुलिस पर लग रहे आरोपों के बारे में पूछा तो उन्होंने मामलों में कार्रवाई के लिए चरणबद्ध प्रक्रिया का हवाला दिया।
उन्होंने कहा, “जब भी पुलिस के पास कोई दलित उत्पीड़न का कोई मामला आता है तो उस पर शिकायत दर्ज होती है और मामले में नियमानुसार कार्रवाई होती है। अगर कोई शिकायतकर्ता आता है तो उसके लिए एसएचओ का एवेन्यू खाली है, वह डीएसपी से मिल सकता है, एसपी से मिल सकता है।”
आगे, जब हमने इस दौरान उनसे विज्ञप्ति में पुलिस पर उठे प्रश्नों को लेकर सवाल करना चाहा तो संपर्क टूट गया। बाद में हमने कई बार दोबारा संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन बात नहीं हो पाई।
संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के अध्यक्ष महावीर भारद्वाज से ऑपइंडिया की बात
बता दें, मेवात में दलितों पर अत्याचार मामले में ऑपइंडिया ने सबसे पहले प्रेस रिलीज को जारी करने वाले संयुक्त हिंदू संघर्ष समिति के अध्यक्ष महावीर भारद्वाज से भी बात की। उन्होंने भी हमसे इस दौरान मेवात में दलितों की स्थिति को उजागर किया और पुलिस प्रशासन व प्रशासन को न्याय दिलाने में नाकाम बताया। उन्होंने भी कहा कि यहाँ छोटी-छोटी बच्चियों व महिलाओं का रेप होता है। बाद में उनकी हत्या हो जाती है। लेकिन पुलिस उनपर कोई कार्रवाई नहीं करती है।
वे कहते हैं कि स्थिति ये आन पड़ी है कि अब लड़कियाँ स्कूल जाने में डरने लगी हैं। इसके अलावा अनुसूचित जाति के बच्चों पर वहाँ बहुसंख्यक आबादी के बच्चे फब्तियाँ कसते हैं। इससे स्कूल जाने वाले बच्चों की संख्या कम हो गई है और हालात इतने गंभीर हैं कि वे सब पलायन की योजना बना रहे हैं। महावीर भारद्वाज कहते हैं कि स्वतंत्र भारत में, हरियाणा की धरती पर ऐसे मिनी पाकिस्तान बनाकर पाक से ज्यादा अत्याचार किए जा रहे हैं।
वे कहते हैं कि मेवात में बहुसंख्यक आबादी मुस्लिमों की है। ऐसे में इन अत्याचारों से तंग आकर कई हिंदू पलायन कर गए हैं। लेकिन अनुसूचित जाति के लोग, वर्तमान में इतने समर्थ नहीं है कि वह गाँव छोड़कर शहर जाएँ, अपना मकान लें, बिजनेस शुरू करके नए तरीके से जीवन जिएँ। इसलिए बस दलित वर्ग रुका है और उनपर अत्याचार हो रहे हैं।
पूर्व न्यायाधीश की भाँति महावीर भारद्वाज भी पुलिस की मंशा पर सवाल उठाते हुए कहते हैं मामला संज्ञान में आने के बाद अब FIR दर्ज करती है। मगर, बाद में उनपर समझौते का दबाव बनाती है और कहती है कि जब यही रहना है तो मिलकर रहो। भारद्वाज इस बातचीत में ये जानकारी भी देते हैं कि मेवात में यह सब बहुत पहले से हो रहा था, लेकिन पिछले एक-दो महीने में ज्यादा मामले संज्ञान में आने के बाद इस कदम को उठाया गया।
मेवात में महंत रामदास पर हमला
गौरतलब करवा दें कि बीते दिनों हरियाणा के मेवात जिला स्थित पुन्हाना में मुक्तिधाम आश्रम के प्रमुख महंत रामदास महाराज के साथ मुस्लिम बहुल इलाके में कुछ लोगों द्वारा कथित तौर पर बदसलूकी, मारपीट और जान से मारने की नीयत से हमला करने का मामला सामने आया था। महंत के समर्थन में आए हिंदूवादी संगठनों ने ऑपइंडिया से बातचीत में बताया था कि बुधवार (अप्रैल 29, 2020) की सुबह महंत रामदास महाराज पर आरोपितों ने धार्मिक भावनाओं को निशाना बनाते हुए अभद्र धार्मिक टिप्पणियाँ की। साथ ही इलाके के सभी साधु-संतों को पुन्हाना से भगा देने की धमकी भी दी थी।
महंत रामदास महाराज जब इस हमले के बाद किसी तरह जान बचाकर पुलिस के पास पहुँचे तो उसने कथित तौर FIR दर्ज करने से इनकार कर दिया। ऑपइंडिया ने इस मामले में जब पुलिस का पक्ष जानने की कोशिश की तो पुन्हाना थाना SHO ने इस मामले में किसी भी जानकारी के लिए हेडक्वार्टर से बात करने कहा था। उन्होंने कहा था कि उन्हें इस प्रकार की किसी घटना की जानकारी नहीं है।