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सिंध-PAK में 3 और नाबालिग हिंदू लड़कियों को मौलवियों ने जबरन इस्लाम कबूल करवाकर, किया निकाह के लिए मजबूर

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में एक बार फिर तीन नाबालिग हिंदू लड़कियों को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन कराकर निकाह कराने का मामला सामने आया है। ट्विटर पर वकील और कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन ने इन तीन घटनाओं को ट्वीट किया है।

पहला मामला सिंध प्रांत के टंडो मोहम्मद खान जिले का है। जहाँ पर एक मुस्लिम युवक ने पहले शेवानी नाम की एक लड़की को अगवा किया और उससे जबरन इस्लाम कबूल कराया गया। जिसके बाद मुस्लिम युवक ने उस लड़की से शादी कर ली।

वहीं, दूसरा मामला भी सिंध प्रांत के टंडो मोहम्मद खान का ही है। जहाँ पर मुस्लिम युवकों ने पहले 15 वर्षीय लड़की सनतारा को हथियार के बल पर अगवा किया। और बाद में मौलवियों ने उस नाबालिग लड़की का जबरन धर्म परिवर्तन करवाकर उस लड़की का निकाह एक मुस्लिम युवक से करा दी।

इसके अलावा तीसरा मामला सिंध के मीरपुरखास का है। जहाँ पर हथियार के बल पर मुस्लिम युवकों ने पहले एक हिंदू लड़की को अगवा कर उसका जबरन धर्म-परिवर्तन करावाया। जिसके बाद उस लड़की की निकाह एक मुस्लिम युवक से करवा दी गई।

इस लड़की की पहचान भगवंती कोहली के रूप में हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पुलिस ने बहुत देर के बाद भगवंती के पिता की एफआईआर दर्ज की। भगवंती के पिता ने बताया कि आरोपितों ने धमकी दी है अगर वह अपनी बेटी को वापस लेकर जायेंगे, तो वह उसकी हत्या कर देंगे। क्योंकि इस्लाम कबूल करने के बाद इस्लाम छोड़ने की सजा मौत होती है। पीड़िता के पिता का कहना है कि हथियारों से लैस लोग आकर उनकी बेटियों को उठा ले जाते हैं।

पाकिस्तान में हिंदूओं समेत सभी अल्पसंख्यकों पर अत्याचार जारी है। लेकिन इमरान खान सरकार के अधिकारी इस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं कर रहे हैं।

अमेरिका में स्थित सिंधी फाउंडेशन के अनुसार, पंजाब के सिंध प्रांत में हर साल करीब 1 हजार हिंदू लड़कियों को अगवा करके उन्हें जबरन इस्लाम कबूल कराया जाता है। इन लड़कियों की उम्र 12 से 28 साल के बीच होती है। धर्म परिवर्तन कराने के बाद मौलवी इनका निकाह मुस्लिम युवकों से करा देते हैं।

पाकिस्तान के पीएम इमरान खान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हमेशा दावा करते है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय सुरक्षित है। लेकिन आए दिन होने वाली इन घटनाओं से पता चलता है कि वास्तविक स्थिति इसके बिल्कुल उलट है।

पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों के साथ भेदभाव ,हिंसा, हत्या, अपहरण, रेप, जबरन धर्म परिवर्तन जैसी घटनाएँ लगातार बढ़ती जा रही हैं और पाकिस्तान की मीडिया तक इन विषयों पर बात करना जरुरी नहीं समझती है।

सूरत में बिहार के युवक की पीट-पीटकर हत्या, कॉन्ग्रेस पार्षद सतीश पटेल समेत अन्य पर मामला दर्ज

गुजरात के सूरत के भेस्तान इलाके में बिहार के एक शख्स की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई। घटना शनिवार (मई 30, 2020) की है। 23 वर्षीय संगम झा की हत्या मामले में एक कॉन्ग्रेस पार्षद भी शामिल है।

पुलिस के मुताबिक सचिन इलाके के रहने वाले संगम झा अपने 30 वर्षीय दोस्त सुजीत सिंह के साथ मोटरसाइकिल से पांडेसरा से वापस अपने घर जा रहे थे। इसी दौरान वे रास्ता भटक गए और भेस्तान इलाके में घुस गए।

वो रास्ता ढूँढने की कोशिश कर रहे थे कि इसी बीच वहाँ के लोगों ने उन्हें चोर समझ लिया। मौके पर इकट्ठा हुए लोगों के समूह ने उन्हें लाठी और लोहे की रॉड से पीटना शुरू कर दिया। संगम झा की मौके पर ही मौत हो गई जबकि सुजीत सिंह को काफी चोटें आईं।

उन्हें घायल हालत में सूरत नगर चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान संस्थान (Surat Municipal Institution of Medical Education and Research) में भर्ती कराया गया है। मामले में शिकायतकर्ता, सुजीत सिंह ने एक आरोपित के रूप में सतीश पटेल का नाम लिया है, जो भेस्तान के वडोड जियाय वार्ड से कॉन्ग्रेस पार्षद हैं।

इस बाबत FIR दर्ज कर ली गई है। FIR में कॉन्ग्रेस पार्षद के अलावा प्रतीक पटेल, मेहुल राजू, विशाल, पीनक व अन्य पर आईपीसी की धारा 143, 144, 147, 148, 149, 307, 323, 324 और 325 के तहत मामला दर्ज किया गया है। FIR में बताया गया है कि संगम झा के सिर पर गहरी चोट लगी, जिसकी वजह से उनकी मौके पर ही मौत हो गई थी।

इसके बाद सुजीत ने पुलिस को फोन किया। पांडेसरा पुलिस स्टेशन से उप-निरीक्षक केडी पटेल को मौके पर पहुँचे और दोनों को अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहाँ संगम झा को मृत घोषित कर दिया गया, वहीं सुजीत सिंह की हालत गंभीर है।

सहायक पुलिस आयुक्त जेके पांड्या ने कहा, “हमने कॉन्ग्रेस पार्षद सतीश पटेल समेत सभी आरोपितों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है और जाँच शुरू कर दी है। हमें कुछ संदेह है लेकिन जाँच जारी है।”

संगम झा उर्फ पंडित बिहार के शिवहर के रहने वाले थे और मुंबई के कांदिवली में अपने पिता अरुण झा, माँ कामिनी देवी और 14 व 17 साल के दो भाइयों के साथ रहते थे। उनके पिता दरवाजे और खिड़कियों का काम करते हैं। उन्हें संगम का शव सोमवार को मिला।

₹1.30 करोड़ के हथियार ख़रीदे, 75 गोलियों का हिसाब नहीं: दिल्ली दंगों में ताहिर हुसैन मुख्य आरोपित, चार्जशीट दायर

दिल्ली पुलिस ने मंगलवार (जून 2, 2020) को बड़ी कार्रवाई करते हुए फ़रवरी के अंतिम सप्ताह में दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों के मामले में 2 चार्जशीट दायर की है। इसमें आम आदमी पार्टी के (अब निलंबित) पार्षद ताहिर हुसैन को मुख्य आरोपित बनाया गया है। उसके भाई शाह आलम सहित 15 अन्य लोगों को आरोपित बनाया गया है। क्राइम ब्रांच की टीम ने दस्तावेजों के साथ कड़कड़डूमा कोर्ट पहुँच कर चार्जशीट दाखिल की।

इस मामले में कुल 70 गवाह हैं। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भारत यात्रा के दौरान दंगे कराने की साजिश पहले ही रच ली गई थी। इसके बाद पूरे नार्थ-ईस्ट दिल्ली में दंगे भड़कने लगे थे। कई हिन्दुओं को मार डाला गया था। चाँदबाग और जफराबाद में हुए दंगों को लेकर ये चार्जशीट दायर की गई। ताहिर हुसैन पर इन दंगों को फंड करने और इसका मास्टरमाइंड होने की बात कही गई है। दंगों को भड़काने में 1.3 करोड़ रुपए से भी ज्यादा फूँके गए।

ताहिर हुसैन के छत से मिले सबूतों के अलावा उसके खिलाफ कई अन्य सबूतों की बात की गई है। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने भी बताया है कि वो दंगे भड़का रहा था। पुलिस को उसके पास से एक पिस्टल भी मिला है, जिसके साथ मिले कुल 200 गोलियों में से 125 गोलियाँ हैं लेकिन 75 बुलेट्स गायब हैं। अब तक ताहिर इसका कोई जवाब नहीं दे पाया है कि 75 गोलियाँ कहाँ गईं। कपिल मिश्रा ने चार्जशीट पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि ताहिर आप नेता संजय सिंह का ख़ास है।

पुलिस ने उस वीडियो को भी सबूत के तौर पर लिया है, जिसमें ताहिर हुसैन के गुंडे पेट्रोल बम फेंकते दिख रहे हैं। बता दें कि आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा की हत्या के मामले में भी ताहिर हुसैन का ही नाम आया था। उसके गुंडे उसे घसीटते हुए ले गए और फिर चाकुओं से ताबड़तोड़ मार कर उनकी हत्या कर दी गई थी। अंकित शर्मा दोनों पक्षों को समझाने गए थे लेकिन ताहिर के गुंडों ने उलटा उन्हें ही निशाना बना लिया।

हिंदूवादी नेता भरत वैष्णव हत्याकांड मामले में रशीद खान और अमजद सैयद गिरफ्तार, गोली और तलवार से की थी हत्या

राजस्थान के हिंदूवादी नेता भरत वैष्णव की हत्याकांड मामले में दो और आरोपितों को गिरफ्तार किया गया है। छोटी सादड़ी थाना अधिकारी रविंद्र प्रताप सिंह ने इसकी जानकारी देते हुए बताया कि आरोपित रशीद खान और अमजद सैयद को गिरफ्तार किया गया है। आरोपितों के पास से पिस्टल, टोपीदार बंदूक और बाइक बरामद की गई। इससे पहले पुलिस ने हत्याकांड मामले में आरोपित रशीद लँगड़ा और इराक खान को गिरफ्तार किया था। शुरुआती पूछताछ में हत्या का कारण पैसों का लेनदेन सामने आया है।

रशीद लँगड़ा और इराक खान को गिरफ्तार करने के बाद पुलिस की पूछताछ में हत्याकांड की साजिश और कारण के बारे में खुलासा हुआ। थाना अधिकारी रविंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि आरोपितों ने धोखे से मृतक भरत वैष्णव को देवली के जंगल में बुलाया और फिर वहाँ पर बाकी साथियों के साथ मिलकर गोलियों से भून डाला। इतना ही नहीं, उनके ऊपर तलवार से भी वार किया गया।

इस दौरान उनके एक अन्य साथी किशनदास को भी आरोपितों ने मारने की कोशिश की, लेकिन वो वहाँ से भागने में सफल रहे। किशनदास ने पुलिस को दिए बयान में बताया कि भरत, उनके साढू का लड़का है। जब वो भरत के साथ जंगल में गए थे, तो आरोपित ने उन दोनों के ऊपर फायरिंग कर दी। भरत वहीं पर गिर गए और किशनदास के बाएँ हाथ पर बंदूक के छर्रे लगे। किशनदास ने वहाँ से भागने की कोशिश की तो रशीद तलवार लेकर उनके पीछे दौड़ा।

घटना 27 मई 2020 की है। आरोपित रशीद लँगड़ा ने बताया कि उसके पास शंकर जाट के 6-7 लाख रुपए बकाया थे। वो उसे देने में आना-कानी कर रहा था। इसके बाद शंकरन ने रशीद लँगड़ा से पैसे निकलवाने के लिए भरत वैष्णव को कहा। रशीद के मुताबिक इसके बाद भरत ने उसे धमकी दी कि वो शंकर के पैसे लौटा दे, वरना अंजाम बुरा होगा। रशीद का कहना था कि भरत ने शंकर से 2 लाख की सुपारी ली थी, तो उसने भी उसे 2 लाख रुपए लेकर मामला रफा-दफा करने के लिए कहा। भरत इसके लिए तैयार हो गए। मगर रशीद के पास पैसे नहीं थे देने के लिए।

इसके बाद उसने अपने साले अमजद को इस परेशानी के बारे में बताया। अमजद ने उसकी बात रशीद खान से करवाई। रशीद खान ने उससे कहा कि वो भरत को जंगल में अकेले बुला ले, वहीं पर उसे निपटा देंगे। रशीद लँगड़ा ने भरत से गीता की कसम खिलवाई और खुद कुरान की कसम खाकर अकेले मिलने का तय किया। उसने भरत को साटोला में आने को कहा। वहाँ से उसने साले अमजद को भरत को लाने भेजा। 

रशीद लँगड़ा, रशीद खान, सत्तार, इराक और गफूर खाँ वहीं पर खड़े रहे। अमजद ने भरत और उनके साथी को जंगल में लाकर बैठा दिया। इसके बाद रशीद लँगड़ा ने भरत को बातों मेंं लगाया और रशीद खान ने उस पर गोली चला दी। इतना ही नहीं, जब भरत तड़प रहे थे, तो रशीद लँगड़ा ने उनके गर्दन में यह कहते हुए तलवार घोंप दी कि उन्होंने उसे बहुत परेशान किया। इसके बाद सभी आरोपित वहाँ से फरार हो गए। आरोपितों के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 307, 34 के साथ ही आर्म्स एक्ट 3/25, 25 के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई की जा रही है। पुलिस शेष आरोपितों की तलाश कर रही है।

शाकिब ने अमन बन कर युवती को फाँसा: फूटा भांडा तो गला रेत कर मार डाला, 25 लाख के जेवर भी लूटे

मेरठ के दरौला थाना क्षेत्र स्थित लोइया गाँव का एक मामला सामने आया है, जहाँ एक युवक ने अपने मजहब की पहचान छिपा कर एक युवती को न सिर्फ झाँसा दिया बल्कि उसे मार भी डाला, उसकी हत्या कर दी। छात्रा की लाश जून 13, 2019 को ही मिली थी लेकिन उस हत्याकांड का पर्दाफाश आज लगभग एक साल बाद हुआ है। आरोपित शाकिब उसे पंजाब से मेरठ लेकर आया था। उसने पीड़िता के 25 लाख रुपए के जेवर भी हड़प लिए थे

मृतिका पंजाब के लुधियाना में बीकॉम की छात्रा थी। मेरठ निवासी शाकिब ने उसे फँसाने के लिए अपना फर्जी नाम अमन रख लिया था। छात्रा उसके झाँसे में आ गई थी और घर से 25 लाख रुपए की ज्वेलरी लेकर उसके साथ फरार हो गई थी। बाद में मेरठ पहुँचने पर जब उसकी असलियत सामने आई तो छात्रा ने इसका विरोध किया, जिसके बाद शाकिब ने उसके गहने हड़पने के लिए उसे मार डाला। इस राज़ को खुलने में 1 साल लग गए।

पुलिस ने इस मामले में मुख्य आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया है। उसके अलावा 4 अन्य युवकों को भी गिरफ़्तार किया गया है। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि पिछले साल सबी अहमद के खेत में पड़ोसी ईश्वर पंडित ने एक कुत्ते को इंसान का हाथ मुँह में लेकर भागते हुए देखा था, जिसके बाद उन्हें शक हुआ। जब गन्ने का खेत खुदवाया गया तो वहाँ से युवती की लाश मिली थी। लाश की सर और हाथ गायब थे। ऐसे में पहचान भी मुश्किल थी।

‘लाइव हिंदुस्तान’ की ख़बर के अनुसार, इसके बाद डिस्ट्रिक्ट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो और स्टेट क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो में मिसिंग केसेज की पड़ताल की गई। एसएसपी ने जानकारी दी कि इस छानबीन के बाद भी कोई सफलता नहीं मिल पाई थी। इसके बाद पुलिस की एक टीम को ये पता लगाने के लिए मुस्तैद किया गया कि लोइया गाँव के कौन-कौन से लोग हैं, जो बाहर कमाते हैं। एसएसपी साहनी ने बताया कि जहाँ-जहाँ बाहर ये लोग काम करते थे, वहाँ-वहाँ के थानों में जाकर मिसिंग केसेज दिखवाए गए।

जब पुलिस पंजाब पहुँची, तो उसे वहाँ सफलता मिली। एसएसपी ने कहा कि एक साल बाद जब आरोपित का पता लगा कर उसे शिकंजे में ले लिया गया है, तो पुलिस ने राहत की साँस ली है। ये एक साल की मेहनत का परिणाम है। युवती 23 वर्ष की थी। वो लुधियाना के मोतीनगर थाना क्षेत्र की निवासी थी। उसके लापता होने की रिपोर्ट थाने में दर्ज कराई गई थी, जहाँ पहुँचने पर यूपी पुलिस को आरोपित की पहचान करने में सफलता मिली।

शाकिब उसी इलाक़े में नौकरी करता था। उसने अमन बनकर प्रेम का जाल फैलाया था। दोनों मई 2019 में वहाँ से फरार हुए थे। दौराला में दोनों ने एक किराए के मकान में एक महीना बिताया था। फिर ईद आई और उस मौके पर शाकिब छात्रा को लेकर मेरठ पहुँचा। वहाँ जाते ही युवती सन्न रह गई क्योंकि उसे वहीं पर पता चला कि ये अमन नहीं शाकिब है और उसने अपनी मजहबी पहचान छिपाई है। इसके बाद हत्या की वारदात को अंजाम दिया गया।

भांडा फूटते ही दोनों के बीच झगड़ों का दौर शुरू हो गया था। एक बार शाकिब उसे बाहर घुमाने के बहाने ले गया। ईद के दिन ही रात 9 बजे उसने कोल्डड्रिंक में नशीली दवा मिला कर छात्रा को पिला दी थी। उसके बाद उसे बेहोशी की हालत में वो खेत में ले गया और उसकी गला रेत कर हत्या कर दी। उसने पहचान छिपाने के लिए सिर और हाथ काटकर कहीं और फेंक दिया था। पुलिस का कहना है कि इस वारदात में वो अकेले नहीं था। सभी से पूछताछ जारी है। बता दें कि ऐसे मामलों को ‘लव जिहाद‘ की संज्ञा दी जाती रही है

74 करोड़ को राशन, 8 करोड़ को गैस सिलिंडर: पोस्ट कोरोना वर्ल्ड में PM मोदी का ‘5 आई’ पर जोर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार (जून 2, 2020) को भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) के वार्षिक कार्यक्रम को सम्बोधित किया, जिसमें कई कारोबारियों ने हिस्सा लिया। पीएम मोदी ने इस दौरान कहा कि आज जहाँ एक तरफ कोरोना वायरस से लड़ने के लिए सख्त कदम उठाने हैं, वहीं दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था का भी ध्यान रखना है। पीएम ने कहा कि इस स्थिति में जब कामकाज को पटरी पर लाने की बात शुरू की गई है तो निश्चित तौर पर इसके लिए भारतीय उद्योग जगत के लोग बधाई के पात्र हैं।

प्रधानमंत्री ने कहा कि कोरोना ने हमारी गति जितनी भी धीमी की हो, लेकिन आज देश की सबसे बड़ी सच्चाई यही है कि भारत लॉकडाउन को पीछे छोड़कर अनलॉक-1 में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने बताया कि इस फेज में अर्थव्यवस्था का बहुत बड़ा हिस्सा खुल चुका है। उन्होंने कहा कि आज ये सब हम इसलिए कर पा रहे हैं, क्योंकि जब दुनिया में कोरोना वायरस पैर फैला रहा था, तो भारत ने सही समय पर, सही तरीके से सही कदम उठाए।

बकौल पीएम मोदी, दुनिया के तमाम देशों से तुलना करें तो आज हमें पता चलता है कि भारत में लॉकडाउन का बहुत व्यापक प्रभाव रहा है। पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि कोरोना के खिलाफ इकॉनमी को फिर से मजबूत करना सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकताओं में से एक है। उन्होंने जानकारी दी कि ‘प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना’ के तहत करीब 74 करोड़ लोगों को राशन का वितरण किया जा चुका है। प्रधानमंत्री ने आगे कहा:

“लॉकडाउन के दौरान सरकार ने गरीबों को 8 करोड़ से ज्यादा गैस सिलेंडर डिलिवर किए हैं। भारत को फिर से तेज़ विकास के पथ पर लाने के लिए, आत्मनिर्भर भारत बनाने के लिए 5 चीजें बहुत ज़रूरी हैं। Intent, Inclusion, Investment, Infrastructure और Innovation. हाल ही में काफी बोल्ड फ़ैसले लिए गए, उनमें इन पाँचों की झलक है। हमारे श्रमिकों के कल्याण को ध्यान में रखते हुए, रोजगार के अवसरों को बढ़ाने के लिए लेबर रिफॉर्म्स भी किए जा रहे हैं।”

स्वदेशी उत्पादों पर जोर देते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि देश में ऐसे प्रोडक्ट्स बनाने की ज़रूरत है जो ‘मेड इन इंडिया’ हों, ‘मेड फॉर द वर्ल्ड’ हों। उन्होंने पूछा कि कैसे हम देश का आयात कम से कम करें, इसे लेकर क्या नए लक्ष्य तय किए जा सकते हैं? पीएम ने संतुष्टि जताते हुए कहा कि सिर्फ 3 महीने के भीतर ही देश ने पीपीई किट्स की सैकड़ों करोड़ की इंडस्ट्री खड़ी की है। उन्होंने बताया कि अब गाँव के पास ही लोकल एग्रो प्रोडक्ट्स के क्लस्टर्स के लिए ज़रूरी इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार किया जा रहा है।

पीएम मोदी ने कहा कि हमारी सरकार प्राइवेट सेक्टर को देश की विकास यात्रा का पार्टनर मानती है। उन्होंने भरोसा दिलाया कि आत्मनिर्भर भारत अभियान से जुड़ी कारोबारियों की हर आवश्यकता का ध्यान रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि वो करोबारियों समेत अन्य हितधारकों से संवाद का ये सिलसिला यूँ ही कायम रखेंगे। उन्होंने सभी को सलाह दी कि देश को आत्मनिर्भर बनाने का संकल्प लें और इस संकल्प को पूरा करने के लिए अपनी पूरी ताकत लगा दें।

नरेंद्र मोदी ने याद दिलाया कि अब हमें अब एक ऐसी मजबूत लोकल सप्लाई चेन के निर्माण में निवेश करना है, जो वैश्विक सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी को और मजबूत करे। उन्होंने इस अभियान में CII जैसी दिग्गज संस्था को भी पोस्ट-कोरोना जगत में नई भूमिका में आगे आने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि इस समय नए सिरे से मंथन चल रहा है। और ऐसे समय में, भारत से दुनिया की अपेक्षा व उम्मीदें और बढ़ीं हैं। पीएम ने कहा कि आज दुनिया का भारत पर विश्वास भी बढ़ा है और नई आशा का संचार भी हुआ है।

‘मैं केवल अल्लाह के प्रति जवाबदेह हूँ…’ – डीएक्टीवेट करने के बाद जायरा वसीम 4 दिन में ही वापस

दंगल फिल्म में छोटी गीता फोगाट का किरदार निभाकर बॉलीवुड में प्रसिद्धि कमाने वाली जायरा वसीम पर अब मजहब का ऐसा सुरूर चढ़ा है कि वो इससे इतर कुछ बात करना पसंद ही नहीं करतीं।

हाल में उन्होंने देश भर में टिड्डियों के आक्रमण को अल्लाह का आजाब बताया था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर यूजर्स ने उन्हें खूब ट्रोल किया। बाद में जायरा ने अपना इंस्टाग्राम और ट्विटर अकॉउंट डिलीट कर दिया

इस बीच मशहूर कनाडाई पत्रकार तारेक फतेह ने उन पर निशाना साधते हुए कहा, “भारतीय मुस्लिम अभिनेत्री जायरा वसीम अल्लाह के प्रकोप का शिकार होने पर अपने ही देशवासियों का मजाक उड़ा रही हैं। देखें उन्होंने किस तरह से टिड्डियों के आतंक की व्याख्या की है।”

अब जायरा फिर ट्विटर पर लौट आई हैं। इस बार उन्होंने तारेक फतेह की टिप्पणी पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जायरा ने मजहब का हवाला देकर तारेक फतेह के लिए एक नोट लिखा और आखिर में ये भी स्पष्ट किया कि वह अब एक्ट्रेस नहीं हैं।

उन्होंने अपने नोट में कुरान का हवाला देते हुए लिखा, “अंकल फतेह, मैं यह मानती हूँ कि क्रोध और अभिशाप जैसे दावे करना (जब दुनिया कई चीजों से गुजर रही है), काफी असंवेदनशील है… हर चीज जो कुरआन में लिखी है, वह केवल इसलिए नहीं कि पढ़कर पीछे छोड़ दिया जाए, बल्कि अपनी जिंदगी के लिए सही राह बनाने के लिए है।” 

जायरा वसीम ने अपने ट्वीट में आगे लिखा, “मेरे शब्दों को गलत तरीके से लिया गया है। इन शब्दों से आप मेरे अच्छे या बुरे विचार तय नहीं कर सकते हैं। मैं इस बारे में आपको सफाई नहीं दूँगी। ये मेरे और मेरे रब के बीच की बात है और मैं इस चीज को समझाने नहीं जा रही हूँ। मैं केवल अल्लाह के प्रति जवाबदेह हूँ, उनकी बनाई हुई चीजों की तरफ नहीं।”

वे आगे लिखती हैं, “दुनिया पहले से ही नफरत और कट्टरता जैसी कई मुश्किल चीजों से गुजर रही है और कम से कम हम यह कर सकते हैं कि हम इसे ज्यादा न बढ़ाएँ। और जैसा कि मैं हमेशा कहती हूँ कि जब भी हम सच्चाई जानना चाहते हैं तो हम इसे विनम्रता के साथ चाहते हैं। बाकि अल्लाह बेहतर जानता है। अल्लाह हमारी रक्षा करे और हमें सारी मुसीबतों से बचाए। और हाँ, अब मैं एक्ट्रेस नहीं हूँ।”

गौरतलब है कि इससे पहले जायरा वसीम ने अपने ट्विटर पर कुरान की एक आयत का जिक्र करते हुए लिखा था, “इसलिए हमने उन पर बाढ़ भेजे, और टिड्डे भेजे, और भेजे जूएँ-चीलड़, और मेंढक भेजे, खून भेजा: ये वैसी चेतावनियाँ हैं जो स्वविश्लेषित हैं: लेकिन वो सब अपने अज्ञान में गहरे डूबे हुए थे- वैसे लोग जो पापी हैं।”

इस ट्वीट के बाद उनकी जमकर आलोचना हुई। लोगों ने उनकी मंशा पर सवाल खड़े किए और अब तारेक फतेह को लिखे नोट पर भी लोगों ने अपनी राय दी है।

कुछ लोगों ने जायरा के नोट पढ़कर लिखा है कि वो खुद है कि ट्विटर पर कुछ भी डालते हुए ये बात उनके जेहन में है कि वो जो भी बात कर रही हैं, वो उनके और अल्लाह के बीच की है। लेकिन अगर वाकई ऐसा है तो उन्हें ये सब पब्लिक प्लैटफॉर्म पर लिखने की आ्वश्यकता नहीं है अल्लाह खामोश गुफ्तगू भी सुन लेते हैं।

सनातन डेका के बाद अब असम में देबाशीष गोगोई की मॉब लिंचिंग: पिता के सामने ही भीड़ ने बेटे को मारा

असम से सनातन डेका के बाद अब एक अन्य युवक की मॉब-लिंचिंग की ख़बर आई है। आरोप लगाया गया कि युवक और उसके मित्र ने अपनी बाइक से दो महिलाओं को टक्कर मारी थी। 23 वर्षीय युवक की हत्या का ये मामला जोरहट का है। इससे पहले कामरूप में इसी तरह की एक घटना में सब्जी-विक्रेता सनातन डेका को मार डाला गया था। ताज़ा मामले में मृतक की पहचान देबाशीष गोगोई के रूप में हुई है।

ये घटना बुधवार (मई 29, 2020) की है। अधिकारियों ने बताया कि देबाशीष गोगोई मरियानी शहर के नजदीक स्थित नकाचारी मिलगाँव के रहने वाले थे। शनिवार की रात जोरहट मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल (JMCH) में इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने ‘द हिन्दू’ को बताया कि नागालैंड सीमा के पास स्थित गभरू पर्वत टी स्टेट में स्थित पिकनिक स्पॉट के पास जाने वाली सड़क पर ये घटना हुई।

टी स्टेट के गार्ड ने देबाशीष और उनके दोस्त आदित्य दास को अन्दर जाने से रोक दिया था। इसके बाद एक छोटी सी झड़प हुई, जो शांत हो गई थी। इसके बाद आरोप लगाया गया कि उन दोनों ने घर जा रही प्लांटेशन वर्कर्स में से दो महिलाओं को टक्कर मार दी। आदित्य ने बताया कि गार्डन की टी फैक्ट्री के पास उनकी गाड़ी फिसल गई थी और इसलिए गलती से ये एक्सीडेंट हुआ। उन्होंने बताया कि तभी भीड़ जमा हो गई और उन पर लात-घूसे बरसाए जाने लगे।

टी स्टेट देबेरापार पुलिस आउटपोस्ट के अंतर्गत आता है। पुलिस ने बताया कि इस घटना के सम्बन्ध में 4 लोगों को हिरासत में लेकर उनसे पूछताछ की गई, जिसके बाद उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। उनके खिलाफ़ मामला दर्ज कर लिया गया है। आउटपोस्ट के इंचार्ज आर दत्ता ने बताया कि बाकी आरोपितों को भी जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। देबाशीष के पिता ने बताया कि वो अपनी बेटी के साथ घटनास्थल पर गए थे, जब उन्हें उनके बेटे के एक्सीडेंट की सूचना मिली। लेकिन, उन्हें उनकी गाड़ी से बाहर नहीं उतरने दिया गया।

पिता ने बताया कि उनकी आँखों के सामने ही उनके बेटे को मारा-पीटा जाता रहा। जोरहट डिप्टी कमिश्नर ने इलाके में शांति-व्यवस्था बनाए रखने की अपील की है। इस मामले में आसिफ नायक, अशोक सावरा, सचिन सावरा और राधेश्याम कुर्मी को गिरफ्तार किया गया है। इन चारों के अलावा चौकीदार दीपक छाबरा को भी गिरफ्तार किया गया है। देबाशीष के परिवार वालों ने मामले की एफआईआर दर्ज कराई है।

इससे पहले कामरूप वाली घटना में सनातन डेका की साइकिल दो युवकों की स्कूटी से टकराई और स्कूटी पर खरोंच आ गई थी। स्कूटी चालकों को वह मामूली सी खरोंच देखकर इतना गुस्सा आया कि पहले उन्होंने सनातन को खुद पीटा और फिर अपने तीन अन्य साथियों को बुलवाकर उसे इतना मारा कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस ने इस मामले में फैजुल हक और युसूफउद्दीन अहमद को गिरफ्तार किया था।

महिला वकील उरूज रहमान ने साथी संग पुलिस पर फेंका ‘कॉकटेल बम’: $2,50,000 के बॉन्ड के बाद जमानत, घर में नज़रबंद

ब्रुकलिन में कोर्ट ने दो वकीलों को बॉन्ड भरने के बाद रिहा कर दिया है। उन दोनों ने पुलिस की गाड़ी पर मोलोटोव कॉकटेल का बम बना कर फेंका था। शनिवार (मई 30, 2020) को ये घटना हुई थी, जिसके बाद इन दोनों को गिरफ़्तार किया गया था। जस्टिस स्टीवन गोल्ड ने ब्रुकलिन कमिटी के दोनों सदस्यों के लिए $2,50,000 का बॉन्ड अप्रूव किया, जिसके बाद 32 वर्षीय कोलिनफोर्ड मैटिस और 31 साल की उरूज रहमान को रिहा कर दिया।

हालाँकि, फ़ेडरल प्रॉसीक्यूटरों ने इसका कड़ा विरोध किया। दोनों ही वकीलों को उनके घर में ही बंद रखा जाएगा और उनके द्वारा जमानत की शर्तों का किसी भी प्रकार से उल्लंघन किया जाता है तो उनकी हरकतों की जिम्मेदारी उनके उन रिश्तेदारों-दोस्तों को लेनी होगी, जिन्होंने दोनों के लिए बॉन्ड पर हस्ताक्षर किए हैं। फेडरल प्रॉसीक्यूटरों ने एक अलग कोर्ट में इस निर्णय के खिलाफ अपील की थी लेकिन उसे रद्द कर दिया गया।

उरूज रहमान ने अपने सोशल मीडिया प्रोफाइल में बताया है कि वो न्यूयॉर्क सिटी में पली-बढ़ी हैं। वो बताती हैं कि उनका परिवार भारत और पाकिस्तान से है। उरूज ने लिखा है कि उन्हें देश-दुनियाँ घूमना और नए दोस्त बनाना पसंद है। वो ख़ुद को उर्दू और हिंदी जानने वाली बताती हैं और उनका कहना है कि वो दूसरों को भी ये भाषाएँ सीखा सकती हैं। उरूज रहमान ने लिखा है कि उन्हें नई संस्कृतियों के बारे में जानना पसंद है।

प्रॉसीक्यूटर ने दोनों वकीलों की जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस ने एक्सप्लोसिव वाले कॉकटेल के साथ गाड़ी चलाते हुए सब कुछ दाँव पर लगा दिया था, तब जाकर इनकी गिरफ़्तारी संभव हुई। रहमान की हरकतों के बारे में प्रॉसीक्यूटर ने कोर्ट में कहा कि ये सामान्य व्यक्ति का व्यवहार नहीं हो सकता। उसने कहा कि जिस तरह से शहर में अफरातफरी का माहौल है, उन्हें छोड़ना खतरे से खाली नहीं होगा। प्रॉसीक्यूटर ने इन दोनों को ‘बम फेंकने वाला’ करार दिया।

प्रॉसीक्यूटर ने कहा, “उरूज रहमान ने पढ़ाई तो की है क़ानून की लेकिन उनकी हरकतों के बारे में पढ़ने के बाद ऐसा लगता है कि उन्होंने सारे कृत्य क़ानून के विपरीत ही किए हैं। उन्होंने पुलिस पर कॉकटेल बम फेंकने के साथ ही क़ानून का अपना करियर भी फेंक दिया।” वहीं मैटिस प्रिंसटन यूनिवर्सिटी और न्यूयॉर्क स्कूल ऑफ लॉ से पढ़े हुए हैं। वो मेनहट्टन की एक कम्पनी में कार्यरत थे लेकिन अप्रैल से ही उन्होंने छुट्टी ले रखी थी।

उरूज रहमान ख़ुद को एक ट्रैवलर भी बताती हैं

वहीं उरूज रहमान को न्यूयॉर्क स्टेट में अटॉर्नी के तौर पर भी रजिस्टर किया गया था। उन्हें फोर्डहम यूनिवर्सिटी स्कूल ऑफ लॉ से स्नातक उत्तीर्ण करने के बाद जून 2019 में बार में शामिल किया गया था। उनके डिफेंस वकील ने दोनों के क़ानूनी करियर और प्रतिष्ठित शैक्षिक संस्थानों से पढ़े होने की बात करते हुए कहा कि वो कम्युनिटी के लिए ख़तरा नहीं हैं। रहमान ने ही पुलिस पर बम फेंका था और वो प्रदर्शनकारियों को भी ये कॉकटेल बम देना चाह रही थीं, ताकि और अराजकता फैले।

भारतीय मीडिया में विदेशी संपादक… देश-विरोधी बातें छापना और प्रोपेगेंडा फैलाना है जिसका एकमात्र काम

किसी भी मीडिया ग्रुप में संपादक ही यह तय करता है कि कौन सी खबर कैसे प्रस्तुत की जाए या उन्हें प्रस्तुत किया भी जाए या नहीं। और ये खबर न सिर्फ अपने देश के नागरिकों की मानसिकता को प्रभावित करती है, बल्कि पूरे विश्व के सामने उस देश की छवि को भी प्रभावित करती है, जहाँ की ये मीडिया है। अब आप सोचिए, अगर किसी मीडिया ग्रुप का संपादक ही विदेशी हो तो वो किस तरह से उस देश को प्रभावित करता होगा क्योंकि उसकी देशभक्ति तो अपने देश के लिए होगी न कि उस देश के लिए, जहाँ की मीडिया में वह संपादक है।

आप सोच रहे होंगे मैं आज ये सब क्यों बता रहा हूँ। वो इसलिए कि भारत में भी विदेशी संपादक मौजूद हैं। जिनमें से एक ‘द हिन्दू’ के पूर्व संपादक और ‘द वायर’ के सह-संस्थापक सिद्धार्थ वरदराजन हैं, जो कि अमेरिका के नागरिक हैं और उन्होंने किस तरह से हमारी मानसिकता पर चोट पहुँचाने की कोशिश की, वो हमें उनकी रिपोर्टिंग से पता चल ही जाता है।

इसी सिद्धार्थ वरदराजन ने गुजरात दंगों पर आधारित एक रिपोर्ट गोधरा आउटलुक बनाया था। जिसमें उन्होंने बिना सबूत के बहुत ही मनगढ़ंत बातें कही थीं। जैसे कि अगर गोधरा कांड नहीं भी होता तो भी गुजरात दंगा होता। उन्होंने तो ये भी मानने से इनकार कर दिया कि साबरमती एक्सप्रेस की S-6 बोगी को कट्टरपंथियों के भीड़ ने जलाया था।

उनका मानना था कि पीएम नरेंद्र मोदी (तब गुजरात के सीएम मोदी) ने गोधरा कांड और उसके बाद हुए दंगे किसी साजिश के तहत किया था, जिससे उसका फायदा वह चुनाव में ले सकें। सिद्धार्थ के बिना सिर-पैर की बात ने सभी को गुमराह करने की कोशिश की।

लेकिन उन्हें ये समझना चाहिए कि पीएम मोदी 2001 से 2014 तक गुजरात के मुख्यमंत्री और उसके बाद 2014 से वर्तमान समय तक भारत के प्रधानमंत्री हैं, इस बीच कोई गुजरात जैसा दंगा क्यों नहीं हुआ? अब तो कोर्ट ने भी पीएम मोदी को निर्दोष मान लिया है और गोधरा कांड के मुख्य आरोपित सहित 31 कट्टरपंथियों को दोषी। तो अब उनका रिपोर्ट झूठा सिद्ध हो ही चुका है।

बीजेपी नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने सिद्धार्थ वरदराजन के खिलाफ दिल्ली हाईकोर्ट में केस भी किया था कि कोई विदेशी नागरिक कैसे भारतीय मीडिया का संपादक हो सकता है और उनके देश विरोधी रिपोर्टों को भी दिखाया था। बाद में दबाव में बीच केस में सिद्धार्थ को ‘द हिन्दू’ से इस्तीफा भी देना पड़ा। अब आप सोच सकते हैं कि इतने सालों तक देश के दूसरे सबसे बड़े अंग्रेजी समाचार पत्र का संपादक होकर पूरे विश्व के सामने भारत की कैसी इमेज बनाई होगी और किस हद तक लोगों की मानसिकता को आघात पहुँचाया होगा।

‘द हिन्दू’ से इस्तीफा देने के बाद सिद्धार्थ ने अपने अन्य दो साथियों के साथ ‘द वायर’ नामक ऑनलाइन न्यूज वेब पोर्टल बनाई, जिसमें भी वो देश विरोधी प्रोपेगेंडा चला रहे हैं। उन्होंने अपनी एक रिपोर्ट में कश्मीर को विवादित कश्मीर कहा। यही नहीं, वो लगातार भारतीय कश्मीर को भारतीय अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर, जिसको उन्होंने अवैध रूप से कब्जाया है, को आजाद कश्मीर कहते रहते हैं। दूसरे शब्दो में कहूँ तो वो पाकिस्तान की भाषा बोलते हैं।

वैसे तो उनके सभी आर्टिकल्स में देश विरोधी बात मिल ही जाएगी लेकिन मैं अभी हंदवाड़ा में हुए एनकाउंटर पर उनकी रिपोर्ट की बात करूँगा। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में आतंकवादियों को तथाकथित आतंकी कहा। जी हाँ, आपने सही सुना… तथाकथित आतंकी। और तो और, उन्होंने हमारे वीरगति को प्राप्त जवानों का भी अपमान किया। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में वीरगति को प्राप्त जवानों को ऐसे बताया जैसे कि कोई आम आदमी मरा हो। हमारे वीरों का इससे ज्यादा और अपमान तो हो ही नहीं सकता।

इंडियन एक्सप्रेस में पाकिस्तानी अखबार ‘न्यूज वीक पाकिस्तान’ के एक परामर्श संपादक खालिद अहमद का एक आर्टिकल छपा था। आप सोच सकते हैं कि किस प्रकार उसमें पाकिस्तानी एजेंडा भरा हुआ होगा। उन्होंने अपनी रिपोर्ट में कहा कि सुब्रमण्यम स्वामी ने कहा है, “भारत में मुस्लिमों को समान नागरिक नहीं माना जाता क्योकि मुस्लिम पूरे विश्व के लिए एक खतरा हैं और जहाँ वो अधिक होता है, वहाँ समस्याएँ अधिक होती हैं। और इस समस्या के हल के लिए पूरा देश हमारे साथ है।” और यह सब खालिद ने सुब्रमण्यम स्वामी के कनाडा की एक मीडिया को दी गई साक्षात्कार को तोड़-मोड़कर पेश किया था।

उनकी इसी रिपोर्ट के आधार पर संयुक्त राष्ट्र के ऐडम डियांग ने सुब्रमण्यम स्वामी पर आरोप लगाया था। इसके लिए स्वामी ने इंडियन एक्सप्रेस और ऐडम डियांग दोनों को लीगल नोटिस भी भेजा कि किस आधार पर उन्होंने उनको ऐसा बोला।

अब सोचिए एक पाकिस्तानी प्रोपेगेंडा वाला आर्टिकल संयुक्त राष्ट्र तक को प्रभावित करती है। भारत में ऐसे हजार आर्टिकल हर महीने छपते हैं, तो उससे पूरे विश्व के सामने भारत की कैसी छवि बनती होगी? और यही आर्टिकल भारतीयों के मानसिकता पर कैसा असर छोड़ता होगा। इनकी आर्टिकल अधिकतर अंग्रेजी में ही होती है, जिससे कि वो पूरे विश्व तक अपनी बात को पहुँचा सकें।

भारत में जो अभी प्रेस एक्ट चल रहा है, वो अंग्रेजों के ज़माने का है, जिसको संसोधित करने की बहुत जरूरत है। ऐसे प्रोपेगेंडा को रोकने के लिए और आपकी जानकारी के लिए मैं बता दूँ कि सुब्रमण्यम स्वामी के केस से प्रेरित होकर भारत सरकार ने एक नया प्रेस एक्ट लाने की कोशिश की थी लेकिन अभी भी लटका हुआ है। ऐसे देश-विरोधी लेखों और समाचारों को रोकने के लिए इसे पास करवाना बहुत जरूरी है। सही मायने में भारत को अगर किसी से खतरा है तो वो यही फेक न्यूज और प्रोपेगेंडा चलाने वालों और देश का अपमान करने वाले भारत में रहने वाले सम्पादकों से ही है।