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हम सब डरे हैं, MLA झूठी शिकायत करती हैं: विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या के बाद पूरे थाने ने माँगा ट्रांसफर

राजस्थान के राजगढ़ थाने के एसएचओ विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या का मामला तूल पकड़ता जा रहा है। थाने के पुलिसकर्मियों द्वारा बीकानेर रेंज के आईजी को लिखा एक पत्र सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है। पत्र में डरे होने की बात कहते हुए पुलिसकर्मियों ने सामूहिक तबादले की गुहार लगाई है।

पत्र में सादुलपुर की विधायक और उनके कार्यकर्ताओं पर पुलिसकर्मियों की उच्च अधिकारियों से झूठी शिकायतें करने का आरोप लगाया गया है। कहा गया है कि इसके कारण ही हाल में थाने में तैनात कुछ लोगों को लाइन हाजिर किया गया था।

पत्र में लिखा गया है कि राजगढ़ थाने में तैनात सभी लोग डरे हुए और इस घटना से दुखी हैं। उनका मनोबल टूट गया है। इसलिए उन सभी का कहीं और सामूहिक तबादला कर दिया जाएग।

गौरतलब है कि सादुलपुर से कॉन्ग्रेस की कृष्णा पुनिया विधायक हैं। विश्ननोई सुसाइड केस में उन पर लगातार उँगली उठ रही है। हालॉंकि उन्होंने इसके लिए बीजेपी की ओछी राजनीति को जिम्मेदार बताया है। पूनिया ने उन्होंने विश्नोई की कॉल डिटेल निकाल पूरे मामले की जॉंच की मॉंग की है।

विश्नोई चुरू जिले के राजगढ़ थाना प्रभारी थे। शनिवार की सुबह अपने सरकारी क्वार्टर में फंदे से लटके मिले थे। कहते हैं कि उनकी पोस्टिंग पब्लिक डिमांड पर होती थी। जब किसी इलाके में अपराध बेकाबू हो जाता था तो विश्नोई को वहॉं भेजा जाता था। जाहिर है ऐसे अधिकारी की आत्महत्या की खबर से हर किसी को हैरान होना था और वे हुए भी।

विश्नोई दो सुसाइड नोट छोड़कर गए हैं। इनमें से एक में अपने जिले की एसपी तेजस्विनी गौतम को उन्होंने लिखा है, “आदरणीय मैडम। माफ करना। प्लीज, मेरे चारों तरफ इतना प्रेशर बना दिया गया कि मैं तनाव नहीं झेल पाया। मैंने अंतिम साँस तक मेरा सर्वोत्तम देने का राजस्थान पुलिस को प्रयास किया। निवेदन है कि किसी को परेशान नहीं किया जाए। मैं बुजदिल नहीं था। बस तनाव नहीं झेल पाया। मेरा गुनहगार मैं स्वयं हूँ।”

दूसरा सुसाइड नोट उन्होंने अपने माता-पिता के नाम से लिखा था। इसमें लिखा है, “आदरणीय मॉं-पापा। मैं आपका गुनाहगार हूँ। इस उम्र में दुख देकर जा रहा हूॅं। उमेश, मन्कू और लक्की मेरे पास कोई शब्द नहीं है। आपको बीच मझधार में छोड़कर जा रहा हूँ। पता है ये कायरों का काम है। बहुत कोशिश की खुद को सॅंभालने की, पर शायद गुरु महाराज ने इतनी सॉंस दी थी। उमेश दोनों बच्चों के लिए मेरा सपना पूरा करना। संदीप भाई पूरे परिवार को सॅंभाल लेना प्लीज। मैं खुद गुनाहगार हूॅं। आप सबका विष्णु।”

यही नहीं फंदे पर लटके पाए जाने से एक दिन पहले विश्नोई ने एक परिचित के साथ व्हाट्सएप पर चैटिंग की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें गंदे पॉलिटिक्स में फॅंसाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन करने की बात भी कही थी।

वायरल हो रही विश्नोई की व्हाट्सएप चैटिंग

विश्नोई की आत्महत्या मामले में लॉरेंस गैंग का नाम सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि विश्नोई जिस मर्डर केस की तहकीकात में जुटे थे उसके तार इसी गैंग से जुड़े थे। इसी जॉंच के सिलसिले में वे आत्महत्या से पहले रात के तीन बजे थाने भी गए थे।

पोस्टमार्टम के बाद विश्नोई का शव रविवार को श्रीगंगानगर जिले स्थित उनके पैतृक गॉंव ले जाया गया। भारत माता की जय और विष्णुदत्त अमर रहे, जैसे नारों के बीच उनका अंतिम संस्कार हुआ। गहलोत सरकार ने मामले की जॉंच सीआईडी (क्राइम ब्रांच) के एसपी विकास शर्मा को सौंपी। बावजूद इसके सीबीआई जॉंच की मॉंग उठ रही है।

दिल्ली के LNJP अस्पताल के बाहर ठेले पर ही शव ले जाते दिखे दो लोग, वीडियो ने खोली केजरीवाल की व्यवस्थाओं की पोल

दिल्ली में लगातार बढ़ते कोरोना मरीजों की संख्या के बीच सोशल मीडिया पर वायरल एक वीडियो ने अस्पतालों की अव्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी है। दरअसल, वीडियो में दो व्यक्ति LNJP अस्पताल के बाहर से ठेले पर एक शव को ले जाते हुए दिखाई दे रहे हैं।

उक्त वीडियो को बीजेपी नेता कपिल मिश्रा ने अपने एकाउंट से ट्विट किया है। सोशल मीडिया पर शेयर वीडियो के साथ कपिल मिश्रा ने लिखा है कि यह घटना बीते गुरुवार 21 मई, 2020 में दिल्ली के सरकारी अस्पताल LNJP के पास की है। कपिल मिश्रा ने केजरीवाल सरकार पर टिप्पणी करते हुए लिखा, “आज टीवी पर केजरीवाल ने 2 करोड़ रुपए के विज्ञापन दिए हैं।”

जानकारी के मुताबिक उक्त वीडियो एलएनजेपी अस्पताल के गेट नंबर चार की है। इस वीडियो को गाड़ी में बैठकर सुनील कुमार एलेडिया ने अपने मोबाइल से बनाया है। एलेडिया ने बताया कि वे किसी बेघर व्यक्ति के बीमार होने पर उसे उपचार के लिए भर्ती कराने अस्पताल गए थे।

वायरल वीडियो में आप देख सकते हैं कि दो लोग रात के अँधेरे में अस्पताल के बाहर से हाथ के ठेले पर एक शव को रखकर दिल्ली के इंडिया गेट की ओर जाते हुए दिखाई दे रहे हैं। इनमें से एक युवक ने अपने चेहरे को अपने रुमाल से तो दूसरे ने अपने चेहरे को मास्क से ढका हुआ है।

इस वीडियो ने अस्पताल प्रशासन के साथ ही दिल्ली सरकार की व्यवस्थाओं पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। हालाँकि, अभी तक यह साफ नहीं हो सका है कि जो लोग ठेले से शव को ले जा रहे हैं उनका उससे (मृतक) से क्या संबंध है।

आपको बता दें कि इससे पहले देश की आर्थिक राजधानी मुंबई के एक अस्पताल से कोरोना पॉजिटिव मरीज के भागने का वीडियो सामने आया था। इतना ही नहीं एक अस्पताल से वायरल हुए वीडियो में देखा गया था कि शवों के बीच मरीजों का उपचार किया जा रहा था और इन शवों को घंटो तक मरीजों के बीच रखे हुए देखा गया था। इसे लेकर अस्पताल प्रशासन को सफाई देनी पड़ी थी।

आपको बता दें कि केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय की रिपोर्ट के मुताबिक दिल्ली में कोरोना से मरने वाले लोगों की संख्या 231, जबकि इससे संक्रमित लोगों की संख्या 12910 हो गई है। अगर पूरे देश की बात करें तो मरने वालों की संख्या 3867, जबकि संक्रमित मरीजों की संख्या 131868 हो गई है।

दिल्ली में सोशल डिस्टेंसिंग की उड़ी धज्जियाँ, ईद से पहले जामा मस्जिद के पास मार्केट में दिखी भारी भीड़

सोमवार (मई 25, 2020) को देश भर में ईद मनाई जाएगी। उससे पहले आज (मई 24, 2020) दिल्ली में सोशल डिस्टेंसिंग की जमकर धज्जियाँ उड़ाई गई। जामा मस्जिद के पास मार्केट में भारी संख्या में पहुँचे लोगों की भीड़ ने कोरोना के मद्देनजर जारी दिश-निर्देशों को ताक पर रख दिया।

जामा मस्जिद के ठीक सामने मटिया महल बाजार में भारी भीड़ दिखी। ईद से पहले बड़ी संख्या में खरीदारी करने के लिए लोग सड़कों पर निकले। इस दौरान दिल्ली पुलिस लगातार लोगों से अपील करती रही कि वो सार्वजनिक जगहों पर इकट्ठा न हों। सामाजिक दूरी का ध्यान रखें।

लेकिन पुलिस की अपील का लोगों पर कोई खास असर पड़ता नहीं दिखा। कोरोना का संक्रमण लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में ये भीड़ डराने वाली है। ईद की खरीददारी के लिए हजारों की संख्या में लोग सड़कों पर उतरे और उन्होंने कोरोना संक्रमण के प्रसार का डर और भी बढ़ा दिया।

सैकड़ों की संख्या में लोग बाजार में खरीददारी कर रहे थे। इसलिए ये कहना गलत नहीं होगी कि कहीं ना कहीं लॉकडाउन 3 के बाद सरकार द्वारा दी गई रियायतों का लोग गलत फायदा उठा रहे हैं। इस भीड़ को देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि अगर इनमें एक भी कोरोना पॉजिटिव शख्स हुआ तो हालात कितने खराब हो सकते हैं।

कोरोना वायरस के लगातार बढ़ते मामलों को देखते हुए पुलिस-प्रशासन सतर्क है। दिल्ली पुलिस ने लोगों से अपील की है कि वो इस बार सोशल डिस्टेंसिंग का ध्यान रखते हुए ईद मनाएँ और गले न मिलें। इसके साथ ही उन्होंने लोगों से घर पर ही नमाज पढ़ने की अपील की है, ताकि कोरोना संक्रमण को फैलने से रोका जा सके। इसके अलावा दिल्ली पुलिस जामिया में निगरानी के लिए ड्रोन कैमरे का इस्तेमाल भी कर रही है।

गौरतलब है कि इसी तरह का नज़ारा मुंबई के भिंडी बाजार में देखने को मिला। ‘एबीपी न्यूज़’ की ख़बर के अनुसार, भिंडी बाजार में बड़ी संख्या में ईद की ख़रीददारी के लिए निकले लोगों ने सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने से इनकार कर दिया। हालाँकि, उलेमाओं और मजहबी नेताओं से अपील करवाई गई थी कि लोग ईद की नमाज घर में ही पढ़ें और बाहर न निकलें। बावजूद इसके मुंबई में रोजदारों ने उनकी बातें नहीं सुनी।

NDTV ने ‘सूत्रों’ के नाम पर भारतीय सेना को लेकर छापी फर्जी खबर, आर्मी ने किया खारिज, बताया- फेक न्यूज़

भारत और चीन के बीच लाइन ऑफ एक्चुअल कंट्रोल (LAC) पर तनाव बढ़ता ही जा रहा है। इसी बीच एनडीटीवी ने इसे लेकर फेक न्यूज़ फैलाने में देर नहीं लगाई। हालाँकि, वो इससे पहले भी राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े संवेदनशील मुद्दों को लेकर इस तरह की हरकतें कर चुका है।

शनिवार (23मई, 2020) को, एनडीटीवी द्वारा सच्चाई का दावा करते हुए एक लेख प्रकाशित किया गया, जिसमें एक स्रोत के आधार पर कहा गया कि सेना और भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) के एक भारतीय गश्ती दल को चीनी सैनिकों द्वारा हिरासत में लिया गया था और बाद में रिहा कर दिया गया था।

एनडीटीवी के अनुसार, भारतीय सैनिकों को हिरासत में उस वक़्त लिया गया जब अभी जल्द ही भारत और चीनी सैनिकों के बीच तनाव का माहौल पैदा हो गया था।

NDTV के ‘सूत्र’ के अनुसार, रिपोर्ट में कहा गया है कि इस सप्ताह के शुरू में लद्दाख में दोनों पक्षों के बीच हाथापाई के दौरान, चीनी सैनिकों ने ITBP के हथियार छीन लिए थे, जिसे बाद में वापस सौंप दिया गया था और भारतीय जवान वापस लौट आए थे।

एनडीटीवी ने अपने ‘सूत्रों’ के हवाले से बताया, “पिछले बुधवार को स्थिति बहुत अस्थिर हो गई जब भारतीय जवानों और चीनियों के बीच हाथापाई हुई और हमारे कुछ जवानों को हिरासत में ले लिया गया।”

एनडीटीवी के रिपोर्ट के अनुसार दोनों पक्षों के कमांडरों की एक सीमा बैठक के बाद स्थिति को शांत कर दिया गया।

इंडिया टुडे ने भी इसी खबर को चलाने के लिए उसी तरह ‘स्रोतों’ का हवाला दिया।

भारतीय सेना ने NDTV की रिपोर्ट को बताया फेक

भारतीय सेना ने NDTV की रिपोर्टों का स्पष्ट रूप से खंडन किया है। एएनआई के रिपोर्ट के अनुसार, भारतीय सेना की ओर से प्रवक्ता कर्नल अमन आनंद ने कहा, “हम इस तरह की खबरों का खंडन करते हैं। मीडिया इस तरह की गलत खबरें चलाता है तो इससे सिर्फ राष्ट्रीय हित को नुकसान पहुँचता है।”

बता दें भारतीय सेना द्वारा स्पष्टीकरण के बावजूद एनडीटीवी ने न तो अपनी उस रिपोर्ट हटाया और न ही उस गलत सूचना को सही किया।

चीन ने लद्दाख में गलवान नदी पर स्थापित किए अस्थाई टेंट

भारत और चीन के बीच तनाव पिछले हफ़्ते के बाद से बढ़ गया है जब रिपोर्ट सामने आई थी 5-6 मई को सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हुए हाथापाई के बाद चीन ने पैंगोंग त्सो के पास अत्यधिक सैनिकबल को तैनात किया था और लद्दाख में गलवान नदी में अस्थायी टेंट भी स्थापित किया था।

ईस्टर्न सेक्टर में सैनिकों के बीच तनाव

5-6 मई को सिक्किम के नाकु ला सेक्टर में भारत और चीन के सैनिकों के बीच हाथापाई हुई थी। जिसमें दोनों तरफ के सैनिकों को मामूली चोटें भी आई थी। इसके बाद दोनों ही देशों ने सीमा पर अतिरिक्त जवानों को तैनात किया है, जिसमें लद्दाख में गलवान घाटी प्रमुख है। इस तनाव को कम करने के लिए इस हफ्ते में पाँच दौर की वार्ता हुई, लेकिन कोई हल नहीं निकल सका।

तब भंवरी बनी थी मुसीबत का फंदा, अब विष्णुदत्त विश्नोई सुसाइड केस में उलझी राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार

राजनीति में संयोग महत्वपूर्ण होते हैं। संयोग से समीकरण बनते हैं। संयोग से वे हालात पैदा होते हैं, जो भविष्य की तस्वीर दिखाते हैं। ऐसा ही संयोग राजस्थान की राजनीति में इस वक्त बनता दिख रहा है।

असल में, एक पुलिस अधिकारी की आत्महत्या से इस वक्त प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार और उसकी एक विधायक पर सवाल उठ रहे हैं। सवाल उसी तरह के हैं जिनसे 2011 में राजस्थान की कॉन्ग्रेस सरकार और उसके नेताओं को जूझना पड़ा था।

2011 में भंवरी देवी नाम की एक नर्स के गायब होने से राजस्थान की सियासत गरम हो गई थी। ठीक उसी तरह जैसे आज विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या पर सियासी उफान दिख रहा है। संयोगों की सियासत देखिए उस वक्त भी प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार थी। मुख्यमंत्री आज की तरह ही अशोक गहलोत थे। विवादों के केंद्र में कॉन्ग्रेस नेता महिपाल मदेरणा और मलखान सिंह उसी तरह थे, जैसे आज कृष्णा पूनिया पर उँगली उठ रही है।

​विष्णुदत्त विश्नोई की आत्महत्या की खबर सामने आने के बाद न केवल सियासत गरम है, बल्कि सोशल मीडिया में आम लोगों की प्रतिक्रिया देखें तो ऐसा लगता है कि उन्हें भी इस पर यकीन नहीं हो रहा। ये राजस्थान के वे लोग हैं जिनके इलाके में अपने सेवा काल के दौरान विश्नोई तैनात रहे थे। इन लोगों ने विश्नोई के होने से अपराधियों में पैदा डर को देखा था। ये उन आंदोलनों के गवाह रहे हैं जो तब हुए जब विश्नोई का तबादला उनके इलाके से कर दिया गया था।

विष्णुदत्त विश्नोई के सुसाइड नोट

विष्णुदत्त विश्नोई चुरू जिले के राजगढ़ थाना प्रभारी थे। शनिवार की सुबह अपने सरकारी क्वार्टर में फंदे से लटके मिले थे। कहते हैं कि उनकी पोस्टिंग पब्लिक डिमांड पर होती थी। जब किसी इलाके में अपराध बेकाबू हो जाता था तो विश्नोई को वहॉं भेजा जाता था। जाहिर है ऐसे अधिकारी की आत्महत्या की खबर से हर किसी को हैरान होना था और वे हुए भी।

विश्नोई दो सुसाइड नोट छोड़कर गए हैं। इनमें से एक में अपने जिले की एसपी तेजस्विनी गौतम को उन्होंने लिखा है;

आदरणीय मैडम। माफ करना। प्लीज, मेरे चारों तरफ इतना प्रेशर बना दिया गया कि मैं तनाव नहीं झेल पाया। मैंने अंतिम साँस तक मेरा सर्वोत्तम देने का राजस्थान पुलिस को प्रयास किया। निवेदन है कि किसी को परेशान नहीं किया जाए। मैं बुजदिल नहीं था। बस तनाव नहीं झेल पाया। मेरा गुनहगार मैं स्वयं हूँ।

दूसरा सुसाइड नोट उन्होंने अपने माता-पिता के नाम से लिखा था। इसमें लिखा है;

आदरणीय मॉं-पापा। मैं आपका गुनाहगार हूँ। इस उम्र में दुख देकर जा रहा हूॅं। उमेश, मन्कू और लक्की मेरे पास कोई शब्द नहीं है। आपको बीच मझधार में छोड़कर जा रहा हूँ। पता है ये कायरों का काम है। बहुत कोशिश की खुद को सॅंभालने की, पर शायद गुरु महाराज ने इतनी सॉंस दी थी। उमेश दोनों बच्चों के लिए मेरा सपना पूरा करना। संदीप भाई पूरे परिवार को सॅंभाल लेना प्लीज। मैं खुद गुनाहगार हूॅं। आप सबका विष्णु।

दोनों सुसाइड नोट में खुद को गुनहगार बताने वाले एक अधिकारी की आत्महत्या पर सवाल क्यों उठ रहे हैं? इसकी वजह है वह दबाव जिसका जिक्र एसपी को लिखे नोट में विश्नोई ने की है। अब उन पर दबाव किस तरह का था यह उन्होंने साफ नहीं किया है।

यही नहीं फंदे पर लटके पाए जाने से एक दिन पहले विश्नोई ने एक परिचित के साथ व्हाट्सएप पर चैटिंग की थी। इसमें उन्होंने कहा था कि उन्हें गंदे पॉलिटिक्स में फॅंसाने की कोशिश हो रही है। उन्होंने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति के लिए आवेदन करने की बात भी कही थी।

विष्णुदत्त विश्नोई, राजस्थान
राजस्थान में पुलिस इंस्पेक्टर विष्णुदत्त विश्नोई के सुसाइड पर उठे सवाल

यहीं से पूरे मामले में एथलीट से कॉन्ग्रेस की विधायक बनीं कृष्णा पुनिया पर सवाल उठ रहे हैं। हालॉंकि पूनिया इसके लिए बीजेपी की ओछी राजनीति को जिम्मेदार बताती हैं। उन्होंने विश्नोई की कॉल डिटेल निकाल पूरे मामले की जॉंच की मॉंग की है।

यह भी कहा जा रहा है कि विश्नोई अपने थाने के कुछ पुलिसकर्मियों को लाइन हाजिर करने से भी नाराज थे। ऐसा कथित तौर पर कृष्णा पूनिया ने मुख्यमंत्री अशोक गहलोत को कहकर करवाया था।

भंवरी देवी याद है?

भंवरी देवी सितंबर 2011 में एक दिन अपने घर से निकलती है और फिर कभी लौटकर नहीं आती। 12 दिनों तक जब उसका कोई पता नहीं चला तो पति अमरचंद ने पुलिस में रिपोर्ट लिखवाई। अमरचंद ने पत्नी के गायब होने के लिए उस समय की गहलोत सरकार में मंत्री रहे महिपाल मदेरणा को जिम्मेदार ठहराया है।

सियासी पारा चढ़ा। फिर कॉन्ग्रेस विधायक मलखान सिंह का भी नाम आया। सरकार को मजबूरन सीबीआई जॉंच के आदेश देने पड़े। जॉंच में ‘सेक्स, सीडी और सियासत’ की जो परतें खुलीं वह हैरान करने वाली थी। सरकार के साथ-साथ कॉन्ग्रेस नेताओं की साख डूब चुकी थी। 2013 के विधानसभा चुनाव के नतीजों में यह साफ दिखा।

तब शहाबुद्दीन था, आज लॉरेंस गैंग

भंवरी मामले में राजू नाम के एक शख्स का बार-बार नाम आ रहा था। गायब होने के करीब 126 दिन बाद पता चला कि भंवरी की हत्या हो गई है और राजू नाम का शख्स असल में राजस्थान का दुर्दांत अपराधी शहाबुद्दीन था। इसी तरह विश्नोई की आत्महत्या मामले में लॉरेंस गैंग का नाम सामने आ रहा है। कहा जा रहा है कि विश्नोई जिस मर्डर केस की तहकीकात में जुटे थे उसके तार इसी गैंग से जुड़े थे। इसी जॉंच के सिलसिले में वे आत्महत्या से पहले रात के तीन बजे थाने भी गए थे।

विश्नोई पंचतत्व में विलीन पर सियासी धुआँ थमा नही है

पोस्टमार्टम के बाद विश्नोई का शव रविवार को श्रीगंगानगर जिले स्थित उनके पैतृक गॉंव ले जाया गया। भारत माता की जय और विष्णुदत्त अमर रहे, जैसे नारों के बीच उनका अंतिम संस्कार हुआ।

इस बीच राजगढ़ थाने में तैनात पुलिस​कर्मियों ने बीकानेर रेंज के आईजी को एक पत्र लिखा है। इसमें सामूहिक रूप से अपना ट्रांसफर करने की गुहार लगाई है। इनका कहना है कि विश्नोई के साथ जो कुछ हुआ उससे वे भयभीत हैं। पत्र में सादुलपुर की विधायक (कृष्णा पूनिया) और उनके कार्यकर्ताओं पर उच्च अधिकारियों से झूठी शिकायत कर पुलिसकर्मियों को प्रताड़ित करने का आरोप भी लगाया गया है।

बीकानेर रेंज के आईजी को लिखा पत्र

तपिश का अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि गहलोत सरकार ने मामले की जॉंच सीआईडी (क्राइम ब्रांच) के एसपी विकास शर्मा को सौंपी। बावजूद इसके सीबीआई जॉंच की मॉंग उठ रही है।

अब देखना यह है कि गहलोत सरकार और कॉन्ग्रेस विधायक आरोपों के कठघरे से बाहर निकल पाती हैं या फिर भंवरी देवी मामले की तरह ही विश्नोई सुसाइड केस में भी आखिरकार कॉन्ग्रेस की लुटिया डूबेगी ही।

जो भी हो कोरोना संकट के इस दौर में राजस्थान की सियासत नई करवट ले रही है। नजर बनाए रखिएगा।

गाड़ी में मामूली खरोंच आने पर फैजुल अली ने चार साथियों के साथ सब्जी विक्रेता सनातन डेका को पीट-पीट कर मार डाला

असम में एक सब्जी विक्रेता की पाँच लोगों ने निर्ममता से पीट-पीट कर हत्या कर दी। यह वीभत्स हत्या असम के हाजो के पास मनाहकुची में हुई, जहाँ सनातन डेका पर फैजुल अली और उसके दोस्तों ने जानलेवा हमला किया था।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, तेतेलिया गाँव के सनातन डेका एक कारखाने में मजदूर के रूप में काम करते थे, लेकिन लॉकडाउन के कारण फैक्ट्री बंद हो गई थी, इसलिए उन्होंने आर्थिक कठिनाइयों से निपटने के लिए अपनी साइकिल पर सब्जियाँ बेचने का काम शुरू किया था।

हाजो की सड़कों पर सब्जियाँ बेचने के क्रम में सनातन की साइकिल गलती से एक स्कूटी से टकरा गई। उस स्कूटी पर फैजुल अली और लाजिल अली सवार थे। साइकिल के स्कूटी में टकराने से फैजुल और लाजिल को गुस्सा आ गया और उन दोनों ने गुस्से में आकर सनातन डेका को पीटना शुरू कर दिया।

इसके अलावा उन्होंने इलाके में सब्जियाँ बेचने को लेकर भी सनातन के साथ बहस की। वे अपनी स्कूटी पर आए मामूली खरोंच से इतने क्रोधित हो गए कि उन्होंने सनातन की पिटाई करने के लिए और लोगों को भी बुला लिया। जिसके बाद तीन और लोग, शब्बीर अली, यूसुब अली और फरजान अली मौके पर पहुँचे और उन दोनों के साथ मिलकर सनातन डेका की पिटाई कर दी।

सनातन डेका को गंभीर रूप से घायल करने के बाद, अपराधी मौके से फरार हो गए। जल्द ही इलाके के लोगों ने उन्हें स्थानीय अस्पताल में भर्ती कराया। लेकिन भर्ती होने के एक घंटे के भीतर उन्होंने दम तोड़ दिया।

बताया जा रहा है कि फैजुल अली एक एजीपी नेता का भाई है। हाजो पुलिस ने मामले में केस दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। साथ ही पुलिस ने दोषियों की तलाश भी शुरू कर दी है।

अनुष्का शर्मा पर लगे रासुका, पाताल लोक में मेरी तस्वीर का गलत इस्तेमाल: बीजेपी MLA नंदकिशोर गुर्जर

गाजियाबाद के लोनी विधानसभा से बीजेपी के विधायक नंदकिशोर गुर्जर ने बॉलीवुड एक्ट्रेस और पाताल लोक की प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। रासुका के तहत कार्रवाई की माँग की है। उनका आरोप है कि इस वेब सीरीज में बिना अनुमति के उनकी और सांसद अनिल अग्रवाल की फोटो इस्तेमाल की गई है।

विधायक के मुताबिक वेब सीरीज में इस्तेमाल फोटो उनकी व अनिल अग्रवाल की फोटो को एडिट कर बनाया गया है। ये फ़ोटो 30 मार्च 2018 की है, जब योगी आदित्यनाथ ने गाजियाबाद में एलिवेटेड रोड का उद्घाटन किया था।

नंदकिशोर गुर्जर ने अपने शिकायत में कहा है, “बॉलीवुड अभिनेत्री एवं अमेजन प्राइम पर प्रसारित पाताल लोक की प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा ने वेब सीरीज में बालकृष्ण वाजपेयी नाम के अपराधियों से संबंध रखने वाले नेता के साथ एक मार्ग का उद्घाटन करते हुए मेरी व अन्य भाजपा नेताओं की तस्वीर दिखाई है। मैं वर्तमान में भाजपा का विधायक हूँ और मेरी अनुमति लिए बगैर मेरी तस्वीर का इस्तेमाल किया गया हैl इसके अलावा इस वेब सीरीज में गुर्जर जाति का चित्रण डकैत एवं गलत कार्यो में शामिल दिखाया गया हैl”

उन्होंने कहा है, “पंजाब के जाट (जट), ब्राह्म्ण, त्यागी आदि जातियों को आपस में जातीय भेदभाव एवं जातिसूचक शब्दों के माध्यम से इनका जीवन निम्नस्तर का दर्शाकर समाज में आपसी वैमनस्यता को बढ़ावा दिया जा रहा है। जो धर्म चींटी को भी आटा डालता है और विश्व कल्याण की कामना करता है, उस धर्म की छवि बिना कारण मॉबलिचिंग की घटना को 1990 रामजन्मभूमि के कारसेवकों से जोड़कर प्रदर्शित की गई है। जैसे रामजन्मभूमि आंदोलन के समय से हिंदू न होकर दानव हो गया है। सीरीज में भाजपा की छवि भी खराब करने की कोशिश की गई है।”

विधायक ने कहा है, “विदेशी ताकतों की शह पर वेब सीरीज में हमारी जाँच एजेंसी को भी कठघरे में खड़ा कर एवं भारतीय नागरिकों को पाकिस्तानी एवं हिज्बुल का आतंकी बताकर पाकिस्तान के खिलाफ वैश्विक स्तर पर भारत की आतंक के खिलाफ मुहिम को चोट पहुँचाई गई है। पाकिस्तान की जाँच एजेंसी को क्लीन चिट देने का कार्य किया गया है। इससे बड़ा कोई राष्ट्रद्रोह नहीं हो सकता।” उन्होंने कहा है, ” राष्ट्रविरोधी कृत्य करने पर अनुष्का शर्मा पर रासुका लगाकर वेब सीरीज को तुरंत बंद करने का कार्य किया जाए।”

बात दें बॉलीवुड एक्ट्रेस और प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा अपनी वेब सीरीज पाताल लोक को लेकर इस वक़्त चर्चा का विषय बनी हुई हैं। हाल ही में वकील वीरेन सिंह गुरुंग ने शो की प्रोड्यूसर अनुष्का शर्मा को लीगल नोटिस भेजा था। इसमें उन्होंने आरोप लगाया था कि इस वेब सीरीज के दूसरे एपिसोड में महिला पुलिस अफसर द्वारा एक नेपाली व्यक्ति से पूछताछ के दौरान जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल कर उसकी बेइज्जती की गई है।

‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए कहा, फिर मेरे भाई को मारा: कामिल ने लगाया आरोप, दिल्ली पुलिस ने बताया अफवाह

दिल्ली निवासी मो. कामिल ने आरोप लगाया कि उसके भाई से सिर्फ इस बात के लिए मारपीट की गई क्योंकि आरोपित उससे ‘जय श्रीराम’ बोलने के लिए दवाब बना रहे थे। इसके बाद हरकत में आई दिल्ली पुलिस ने पीड़ित से पूछताछ की और कहा कि यह मामला दो समुदाय के लड़कों के बीच महज झगड़े का है।

मामला बीती रात दिल्ली के जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे का है। यहाँ दो युवकों के बीच किसी बात को लेकर मारपीट हो गई। घटना के बाद यमुना बाजार निवासी पीड़ित के भाई मोहम्मद कामिल ने आरोप लगाते हुए बताया कि वह अपने छोटे भाई आदिल के साथ बीती रात (23 मई, 2020) को स्कूटी से दवा लेके वापस अपने घर आ रहा था।

तभी जाफराबाद मेट्रो स्टेशन के नीचे स्कूटी का पेट्रोल खत्म हो गया, जिसके बाद आदिल स्कूटी को पैदल ही लेकर जाने लगा। इसी बीच एक दूसरी स्कूटी पर सवार होकर आए युवकों ने आदिल के साथ मारपीट शुरू कर दी।

कामिल का आरोप है कि इस दौरान पार्किंग से 8-10 लड़के और आ गए और उन्होंने आदिल से ‘जय श्री राम’ बोलने के लिए कहा। इसके बाद फिर गंदी-गंदी गालियाँ देते हुए उसके साथ मारपीट की। कामिल के मुताबिक उसके छोटे भाई आदिल के साथ इतनी मारपीट की गई कि उसके सर में गहरी चोट आई है। इसके बाद उसे तत्काल ज़ीटीबी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया है।

सूचना के बाद दिल्ली पुलिस कामिल के घर पहुँची और उससे पूछताछ करते हुए उसकी शिकायत को दर्ज किया। पुलिस मामले को अभी तक संदिग्ध मान रही है। हालाँकि मामले को लेकर अभी पुलिस जाँच में जुटी हुई है।

दिल्ली पुलिस के मुताबिक मौजपुर बाबरपुर मेट्रो स्टेशन के पास रात 2 बजे के आसपास अलग-अलग समुदाय के लड़कों के बीच झगड़ा हुआ। दोनों को चोट लगी है। यह आपसी झगड़ा है, लेकिन इसे सांप्रदायिक रंग देने की कोशिश की जा रही है। सतर्कता बरतते हुए इलाके में पुलिस बल तैनात की गई है। फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है।

इस मामले को लेकर दिल्ली नॉर्थ ईस्ट के डीसीपी को जब हमने कॉल किया, तो जवाब मिला कि इस संबध में जानकारी जाफराबाद थाने से ही मिल सकेगी।

इसके बाद जाफराबाद थानाध्यक्ष राम मेहर सिंह से बात की गई तो उन्होंने कहा कि सांप्रदायिक झगड़े जैसा कुछ भी नहीं है। यह सब अफवाह है।

लेकिन पीड़ित खास मजहब से हैं, इसलिए पत्रकारिता का गिरोह एक्टिव है। वायर ने पुलिस से बात भी की है, उनका पक्ष भी जाना है लेकिन टाइटल और सब-टाइटल में ये सारी जानकारी छिपाकर टोपी पहने लड़कों के साथ सांप्रदायिक गाली और मारपीट का जिक्र किया है।

पाकिस्‍तान सरकार ने हिंदुओं की बस्‍ती पर चलवाया बुलडोजर, चिलचिलाती गर्मी में बेघर हुए सैकड़ों लोग, देखें वीडियो

कोरोना महामारी के संकट में जब दुनिया भर के देशों में सरकारें अपने नागरिकों से घरों में रहने का आग्रह कर रहीं है, तब पाकिस्तान में सरकार के इशारे पर हिंदुओं की बस्ती उजाड़ दी गई। बहावलपुर में इमरान सरकार के मंत्री के नेतृत्व में हिंदुओं के घर जमीदोंज कर दिए गए।

पाकिस्तान के गृह मंत्री तारिक बशीर चीमा की निगरानी में चिलचिलाती गर्मी में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं के घरों को बुलडोजर से गिरवा दिया गया। बता दें कि तारिक बशीर चीमा, पाक पीएम इमरान खान के कैबिनेट के सदस्य भी हैं। इस दौरान चीमा के साथ पाकिस्तान के प्रधान सूचना अधिकारी शाहिद खोखर भी मौजूद थे।

चिलचिलाती धूप में अल्‍पसंख्‍यक हिंदुओं के परिवारों के महिला पुरुष, बच्‍चे और बुजुर्ग चिल्लाते और दया की याचना करते रहे, लेकिन इमरान सरकार के मंत्रियों का उनके प्रति दिल नहीं पसीजा और इन सभी परिवारों के सामने ही उनका घर चंद मिनटों में गिराकर मलबे में तब्दील कर दिया गया। इन सभी का आशियाना मलबे के नीचे दब गया और ये परिवार आँसू बहाते देखते रह गए।

ये मंजर बेहद दर्दनाक था जब बुलडोजर लोगों के घरों को बेरहमी से तोड़ रहे थे और महिलाएँ, पुरुष और बच्चे रहम की भीख माँग रहे थे। हिंदुओं के घरों पर बुलडोजर चलने की दर्दनाक तस्वीरें देख हर कोई दहल गया।

विडंबना यह है कि यह घटना तब सामने आई जब पाकिस्तान के मानवाधिकार आयोग ने अल्पसंख्यक अधिकारों की रक्षा करने में विफल रहने के लिए पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ सरकार पर हमला किया।

हाल ही में इसी तरह की एक घटना पंजाब प्रांत के खानवेल जिले में घट चुकी है। वहाँ इमरान खान की पार्टी पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के एक प्रभावशाली नेता के इशारे पर ईसाई समुदाय के घरों और कब्रिस्तान को उजाड़ दिया गया

पाकिस्तान मानवाधिकारों के उल्लंघन की ऐसी घटनाओं के लिए काफी पहले से बदनाम है। सिंध और पाकिस्तान के अन्य हिस्सों से ऐसी बेशुमार घटनाएँ सामने आती हैं जहाँ हिंदू लड़कियों को अगवा कर धर्म परिवर्तन कर दूसरे मजहब में निकाह करा दिया जाता है। पाकिस्तान की विभिन्न सरकारों ने कई मौकों पर देश में अल्पसंख्यक समुदायों के हितों की रक्षा करने का वादा किया है। लेकिन अल्पसंख्यकों पर बड़े पैमाने पर इस तरह के हमले एक अलग दास्तान बयाँ करते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में पाकिस्तान से एक वीडियो सामने आया था, जिसके मुताबिक भील समुदाय के घरों में तोड़फोड़ की गई थी और एक हिन्दू लड़कों को किडनैप कर लिया गया था। तबलीगी जमात के किडनैपर लड़के को छोड़ने के लिए उसके परिवार से इस्लाम कबूल करने के लिए कहता है। मगर उसकी माँ का कहना था कि वो इस्लाम अपनाने से अच्छा मरना पसंद करेंगी।

भाई जीशान ने साजिद, अमजद और वाजिद के साथ मिलकर 10 साल की बहन के साथ किया गैंगरेप फिर हत्या, गिरफ्तार

राजस्थान के जयपुर में एक भाई द्वारा तीन दोस्‍तों के साथ मिलकर अपनी सगी 10 साल की मंदबुद्धि बहन से गैंगरेप कर उसे मौत के घाट उतारने का शर्मनाक मामला सामने आया है। मनोहरपुर थाना पुलिस ने वारदात का पर्दाफाश करते हुए मामले में लिप्त चारों आरोपितों को शनिवार (मई 23, 2020) को गिरफ्तार कर लिया।

17 मई की शाम को हुई वारदात में भाई ने छोटी बहन का अपहरण करने के बाद सुनसान जगह पर अपने तीन दोस्तों के साथ बारी-बारी से गैंगरेप किया। इसके बाद गला दबाकर बहन की हत्या कर दी।

चारों ने लाश को पहाड़ी वन क्षेत्र में एक नाले में फेंक दिया। बच्ची के शरीर से उसके कपड़े और चप्पल उतारकर आस-पास बबूल के पेड़ों पर फेंक दिया। वारदात में मुख्य अभियुक्त शातिर भाई व उसके दोस्तों ने पुलिस को गुमराह करने के लिए पुलिस के साथ लापता बहन को तलाश करने में मदद का नाटक करते हुए गुमराह करने का प्रयास भी किया। मगर सीसीटीवी फुटेज, मोबाइल कॉल डिटेल्स के आधार पर हुई जाँच में पुलिस की गिरफ्त में आ गए। 

पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार आरोपितों के नाम जीशान अली, साजिद अली, अमजद अली और वाजिद अली है। इनमें जीशान अली मुख्य आरोपित है, जो मृतक बच्ची का बड़ा भाई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुलेश चौधरी ने बताया कि आरोपितों ने पूछताछ के दौरान गुनाह कबूला।

आरोपितों ने बताया कि मंदबुद्धि होने के कारण पीड़िता कपड़ों में शौच करती थी। वो बोझ थी, इसलिए उनलोगों ने उसकी हत्या की सोची। इसके बाद 17 मई की शाम को जीशान अली अपने तीनों आरोपित दोस्तों के साथ अपनी मंदबुद्धि बहन को घर से बहाना कर टोडी गाँव के पहाड़ी जंगलों में ले गया। वहाँ भाई जीशान और उसके तीनों दोस्तों ने मासूम बच्ची से बारी-बारी से दुष्कर्म किया। इसके बाद गला दबाकर हत्या कर शव को नाले में फेंक दिया। 

पुलिस ने बताया कि मृतक बच्ची के पिता ने 18 मई को मनोहरपुर थाने में एक रिपोर्ट दर्ज करवाई थी। जिसमें बताया कि उनकी 10 साल की बेटी मानसिक विक्षिप्त है। वह 17 मई शाम 4 बजे अचानक घर से लापता हो गई है।

इसके बाद पुलिस ने अपहरण का केस दर्ज कर जाँच शुरु किया। इसके बाद 21 मई को लापता हुई बच्ची का शव मनोहरपुर के कुंभावास में वन क्षेत्र में क्षत-विक्षत हालत में मिला। पुलिस ने एफएसएल टीम से मौका मुआयना करवाया। इसके बाद शव का निम्स हॉस्पिटल, चंदवाजी में पोस्टमार्टम करवाया। जिसमें बच्ची की हत्या व दुष्कर्म का मामला सामने आया।

जयपुर ग्रामीण पुलिस अधीक्षक शंकर दत्त शर्मा ने बताया कि इस मामले में परिवार के बाकी सदस्यों की भूमिका की भी जाँच की जा रही है। मामले की जाँच अतिरिक्त्त पुलिस अधीक्षक सलेश चैधरी को सौंपी गई है।