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मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख, घायलों को ₹50 हजार: PM मोदी ने बंगाल को दिया ₹1000 करोड़ का राहत पैकेज

अम्फान तूफान (amphan cyclone) के कारण पश्चिम बंगाल और ओडिशा में मची भारी तबाही को देखते हुए आज (मई 22, 2020) प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हालातों का जायजा लेने बंगाल पहुँचे। यहाँ उन्होंने हवाई सर्वेक्षण कर स्थिति को परखा और फिर ₹1000 करोड़ के राहत पैकेज का ऐलान किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बशीरहाट में अधिकारियों के साथ बातचीत करने के बाद और तूफान के कारण बुरी तरह प्रभावित हुए जिलों का जायजा लेने के बाद, तुरंत पश्चिम बंगाल के लिए ₹1,000 करोड़ के राहत पैकेज की घोषणा की।

इसके अलावा उन्होंने इस मौके पर तूफान के कारण मरने वालों के परिजनों को 2 लाख रुपए देने व घायलों को 50 हजार रुपए की आर्थिक मदद पहुँचाने का ऐलान किया।

पीएम मोदी ने कहा, कोरोना वायरस महामारी के बीच हम तूफान अम्फान के लिए तैयार थे। बावजूद इसके हम 80 लोगों की जान को नहीं बचा पाए। राज्य में इंफ्रास्ट्रक्चर को भारी नुकसान हुआ है। लोगों के घर टूट गए हैं।

पीएम नरेंद्र मोदी ने इस दौरान ममता बनर्जी, राज्यपाल जगदीप धनखड़ और राज्य के अन्य अधिकारियों के साथ समीझा बैठक की। इस बैठक में पीएम ने उन्हें आश्वस्त किया कि वे बंगाल की इस दुख की घड़ी में उनके साथ खड़े हैं।

उन्होंने कहा, बंगाल जल्द-जल्द से खड़ा हो जाए और तेज गति से आगे बढे़, इसके लिए भारत सरकार बंगाल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम करेगी और जो भी आवश्यकताएँ होगी उन आवश्यकताओं को पूर्ण करते हुए बंगाल की मदद के लिए हम खड़े रहेंगे।

बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हालातों को देखते हुए इस दौरान 80 लोगों की मौत पर दुख व्यक्त किया। जिन परिवारों ने अपने स्वजनों को खोया उनके प्रति केंद्र सरकार की ओर से संवेदना प्रकट की।

जानकारी के अनुसार, बंगाल में तूफान से प्रभावित इलाकों को देखने के बाद अब प्रधानमंत्री ओडिशा के दौरे पर भी जाएँगे। जहाँ वे मुख्यमंत्री नवीन पटनायक से मिलकर हालातों का जायजा लेंगे।

‘मोदी की योजनाओं को पत्रकारों ने अनदेखा किया’: क्या शेखर गुप्ता के कबूलनामे वाला वीडियो CPR ने हटाया

शेखर गुप्ता प्रोपेगेंडा पोर्टल द प्रिंट के मालिक और एडिटर्स गिल्ड के मुखिया हैं। उनका वह वीडियो शायद डिलीट कर दिया गया है, जिसमें उन्होंने यह कबूला था कि मोदी सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं के प्रभाव की पत्रकारों ने अनदेखी की थी। इसका मूल वीडियो सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च (CPR India) के यूट्यूब पेज पर अपलोड किया गया था।

शेखर गुप्ता ने चुनावों के दौरान मोदी सरकार की योजनाओं की अनदेखी की बात ‘हाउ इंडिया वोटेड’ नामक चर्चा के दौरान कही थी। उन्होंने कहा था, “मैं ईमानदारी से इस बात को स्वीकार करता हूँ कि हम पत्रकारों ने जान-बूझकर कर मोदी सरकार की लोककल्याणकारी योजनाओं पर ध्यान नहीं दिया। इसका असर देखने के बाद भी हम इसे अस्वीकार करने की कोशिश करते हैं।” मई 2019 में इस वीडियो को खूब देखा गया था। लेकिन, CPR India के यूट्यूब पेज से अब शायद इस चर्चा का वीडियो को हटा दिया गया है।

अब यदि कोई सीपीआर इंडिया के यूट्यूब पेज पर जाकर उस वीडियो को देखना चाहे तो वीडियो का केवल दूसरा भाग ही दिखाता है। पहला भाग वहाँ नहीं दिखाई पड़ता। जिस हिस्से की हम बात कर रहे हैं वो पहले भाग में था। इसमें शेखर गुप्ता को पारंपरिक रूप से एक पत्रकार के रूप में देखा गया था। उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी का विरोध कर यह स्वीकार किया था कि मीडिया के लोगों ने जान-बूझकर पीएम मोदी द्वारा शुरू की गई कल्याणकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभावों को नजरअंदाज किया।

CPR India के यूट्यूब पेज का स्क्रीनशॉट

31 मई 2019 को, ऑपइंडिया द्वारा एक लेख प्रकाशित किया था जिसमें शेखर गुप्ता की टिप्पणियों के विवरण को कवर किया गया था। उस लेख में कहा गया कि, “शेखर गुप्ता मानते हैं कि पत्रकारों ने मोदी सरकार की कल्याणकारी योजनाओं के सकारात्मक प्रभावों को अनदेखा किया।”

ऑप इंडिया द्वारा प्रकाशित उस लेख में यूट्यूब के उस वीडियो को भी एम्बेड किया गया था जो अब गायब हो गया है। जब हमने 2019 के लेख को दोबारा देखा, तो एम्बेडेड वीडियो दिखाता है कि यह अब उपलब्ध नहीं है।

30 मई 2019 को ट्विटर पर भी कुछ लोगों द्वारा ट्वीट कर इस यूट्यूब लिंक साझा किया था और अब वहाँ भी यूट्यूब लिंक का वीडियो अनुपलब्ध दिखा रहा है।

हालाँकि वीडियो अब उपलब्ध नहीं है, लेकिन ऑपइंडिया इस बात की पुष्टि नहीं कर सकता है कि सीपीआर इंडिया ने वीडियो को फिर से अपलोड किया है या नहीं, या फिर अनलिस्टेड या प्राइवेट कर दिया है। वर्तमान में, केवल दूसरा वीडियो सीपीआर इंडिया की वेबसाइट पर उपलब्ध है।

प्रिंट के यूट्यूब चैनल पर अब भी उपलब्ध है वीडियो

सीपीआर इंडिया द्वारा गायब किया वीडियो अभी भी द प्रिंट के यूट्यूब चैनल पर उपलब्ध है और वहाँ मीडिया के लिए शिखर गुप्ता ने जो कहा था वो देखा जा सकता है।

लोकसभा चुनावों में कॉन्ग्रेस पार्टी की शर्मनाक हार पर बोलते हुए, गुप्ता ने कहा कि पार्टी ऑटोइम्यून बीमारी से पीड़ित है। उन्होंने कहा, “चुनाव प्रचार के इतने दिनों में, मैंने राहुल गाँधी या कॉन्ग्रेस पार्टी के किसी भी व्यक्ति को कभी नहीं सुना कि उनकी अपनी सरकार यूपीए 2 ने क्या किया। यह कॉन्ग्रेस पार्टी की ऑटोइम्यून बीमारी है।” गुप्ता ने कहा कि वे मोदी को दोष देना चाहते हैं, वे मीडिया को दोष देना चाहते हैं।

उन्होंने कहा, “योजनाओं के नाम पर वोट बहुत लंबे समय तक दिए गए। इस देश में मतदाता कॉन्ग्रेस की योजनाओं पर भरोसा नहीं करता है। साथ ही कहा कि अतीत में जो कुछ भी हुआ, वह बहुत कम हुआ है।”

गुप्ता ने स्वीकार किया कि हालाँकि वह मोदी सरकार की योजनाओं के खिलाफ सबूतों की तलाश कर रहे थे, लेकिन उन्हें कोई सबूत नहीं मिला। उन्होंने कहा, “हम सरकार के विपरीत सबूत देखने की उम्मीद कर रहे थे, लेकिन हम यह मिल नहीं रहा था। हमें गैस सिलेंडर मिल रहे थे। हम किसी भी घर के अंदर झॉंकेंगे और गैस सिलेंडर पाएँगे।”

उन्होंने कहा, शुरू में मुझे लगा था कि मुद्रा लोन बकवास है, ये सब नकली होंगे। लेकिन मेरे पास आजमगढ़ के 50 किलोमीटर दूर का एक वीडियो है, जिसमें एक दलित ने कहा है कि मुझे 50,000 रुपये का ऋण मिला है। मैंने इससे अपनी चाय की दुकान खोली। मैं हर महीने 1,300 रुपए चुकाता हूँ। यदि मैं समय पर भुगतान नहीं करता, तो बैंक प्रबंधक मेरे पास किसी को भेजता है।

यह बात जानकर मैं वापस आया और मैंने बड़े डेटा की जाँच की, जिससे मुझे यह पता चला कि अब तक कुल 4.81 करोड़ लोगों को मुद्रा ऋण मिला है और 2.1 लाख करोड़ रुपए का भुगतान किया गया है। इन्हीं सब बातों को देखते हुए गुप्ता ने कहा कि मैं ईमानदारी से इस बात को स्वीकार करता हूँ कि हम पत्रकारों ने इन बातों की तरफ ध्यान न देने को चुना।

गुप्ता ने कहा कि कॉन्ग्रेस पार्टी में मोदी के इस शासन का मुकाबला करने के लिए बुद्धि की कमी थी क्योंकि पार्टी को तथ्य पसंद नहीं थे। साथ ही गुप्ता ने कॉन्ग्रेस पार्टी की आलोचना करते हुए कहा, “यह कॉन्ग्रेस पार्टी में बुद्धि, प्रतिबद्धता और अहंकार की कमी है।”

बता दें, ऑपइंडिया ने CPR India से यह जानने की कोशिश की है कि आख़िरकार उनके यूट्यूब पेज से उस वीडियो को क्यों हटाया गया। CPR India द्वारा हमारे ईमेल का जवाब देने पर यह लेख अपडेट किया जाएगा।

एक्सपोज हुआ ऑल्टन्यूज के प्रतीक सिन्हा का दोमुँहापन: ऐप के जरिए इकट्ठा कर रहा है निजी सूचनाएँ

हिन्दूफ़ोबिया से ग्रसित स्वघोषित फैक्ट चेकर और प्रोपेगेंडा वेबसाइट ऑल्ट न्यूज़ (Alt News) अपनी मोबाईल एप्लीकेशन के जरिए लोगों की व्यक्तिगत सूचनाएँ जुटा रहा है। यह इस कारण भी घातक साबित हो सकता है क्योंकि यही ऑल्ट न्यूज़ और इसके संस्थापक अक्सर सोशल मीडिया पर लोगों की गुप्त जानकारियाँ इकट्ठी कर उनके परिवार के लोगों को और उन्हें निशाना बनाते हुए पाए गए हैं।

लोगों की निजी जानकारियाँ चुराने वालों के हाथ अब खुद देंगे आप अपनी सीक्रेट डिटेल्स

ऑल्ट न्यूज़ की मोबाइल एप्लिकेशन द्वारा जुटाई जा रही जानकारियाँ इस कारण भी चर्चा का विषय है क्योंकि यही ऑल्ट न्यूज़ और इसके संस्थापक अक्सर आधार कार्ड से लेकर, फेसबुक और अब आरोग्य सेतु एप्लीकेशन पर लोगों की निजी जानकारियाँ इकट्ठी करने का आरोप लगा चुके हैं।

ऐसे में ऑल्ट न्यूज़ का दोमुँहापन उन्हीं की मोबाइल एप्लीकेशन के जरिए बेहद बेशर्मी से सार्वजनिक हो चुका है। यह इस बात का भी प्रमाण है कि ऑल्ट न्यूज़ जैसे प्रोपेगेंडा वेबसाइट और ‘प्रगतिशील इंटरनेट उदारवादियों’ की कथनी और करनी में जमीन-आसमान का फर्क होता है।

ऑल्ट न्यूज़ की मोबाइल ऐप इंस्टाल करने पर, आपके एक बटन दबाते ही वो आपकी इन सब जानकारियों को जुटा लेते हैं

ऑल्ट न्यूज़ की एप्लीकेशन को मोबाइल पर इंस्टाल करने पर यह एप्लीकेशन लोगों से उनकी लोकेशन, कैमरा, टेलीफोन, स्टोरेज के साथ-साथ मोबाइल में मौजूद लगभग हर उस चीज का कंट्रोल माँगता है, जो कि ऑल्ट न्यूज़ जैसे लोगों, जो कि वामपंथियों के सीधे सम्पर्क में होने के साथ-साथ खुद को ‘फैक्ट चेकर’ घोषित करने से पहले फेसबुक पर ऐसे पेज चलाते थे, जिन पर हिन्दुओं की आस्था को निशाना बनाया जाता था, के पास होना किसी भी व्यक्ति की सुरक्षा के लिए घातक साबित हो सकती हैं।

यही नहीं, ऑल्ट न्यूज़ के संस्थापक इस पेज के जरिए गोमूत्र-गाय से सम्बंधित भद्दे चुटकुले भी शेयर किया करते थे। हिन्दुओं की आस्था को ठेस पहुँचाने वाली इसी भाषा का प्रयोग पुलवामा आतंकी हमले के फिदायीन आतंकी अब्दुल अहमद डार ने भी किया था।

वहीं, ऑल्ट न्यूज़ के संस्थापक, जो कि अक्सर अपनी मम्मी के साथ सोशल मीडिया पर फर्जी खबर फैलाते हुए पकड़े जाते हैं, कुछ ही दिन पहले सरकार द्वारा कोरोना वायरस के संक्रमण से जुडी जानकारियों के लिए बनाई गई आरोग्य सेतु एप्लीकेशन को इंस्टाल ना करने की राय ट्विटर पर शेयर करते देखे गए थे।

यह वैसा ही है, जैसे देश के वामपंथी पूँजीवादी व्यवस्थाओं और उद्योगपतियों को गाली देते नजर आते हैं लेकिन उन्हीं की बनाई विमान सेवाओं से देश-विदेश भ्रमण कर और उन्हीं की बनाई महँगी शराब को अपनी आलिशान बैठकों में इस्तेमाल करते हुए बताते हैं कि पूंजीवादियों ने सब कुछ हड़प लिया है।

प्राइवेसी की चिंता या फिर मोदी-घृणा का अंध-लेप?

सतही तौर पर प्रतीक सिन्हा का आक्रामक रवैया इस चोले में दिखता है, मानो वो वाकई भारतीय नागरिकों की निजता/प्राइवेसी को ले कर चिंतित हों। लेकिन ऐसा वास्तव में है नहीं। जहाँ आरोग्य सेतु ऐप का लक्ष्य लोगों को जानकारी उपलब्ध करा कर संक्रमण को रोकने का है, वहीं, स्वयं प्रतीक सिन्हा का ऑल्टन्यूज सिर्फ लोगों की हर तरह की जानकारी इकट्ठा करने के लिए बेवजह अपने ऐप के जरिए उनसे डेटा लेता है।

ऑल्ट न्यूज ऐप को भला आपके फोन, तस्वीरें, आपके माइक्रो एसडी कार्ड आदि में इतनी रुचि क्यों है? इस सवाल का कोई जवाब नहीं है, खास कर तब जब इसे प्रतीक सिन्हा के ट्वीट को संदर्भ में रख कर देखा जाए।

प्रतीक सिन्हा की समस्या यह है कि उन्हें हर बात पर हल्ला करना है। लोगों तक उनकी पहुँच का एक मात्र तरीका है कि झाँव-झाँव करते हुए, सरकार की हर बात में नुक्स निकाल कर हल्ला करते रहना कि सरकार डाका डाल रही है।

कोरोना की इस महामारी में तकनीक के इस्तेमाल से सरकार जानकारी पहुँचाने का, संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए, न्यूनतम डेटा ले कर एक पूरी आबादी को सचेत रखना चाहती है। यही काम जब एप्पल और गूगल कर रहे हैं, तब यही लोग कहेंगे कि ‘भारत में भी काश ऐसा होता कि फोन से पता चल जाता’। जबकि आरोग्य सेतु ऐप ने ये काम काफी पहले ही कर लिया।

खैर, सरसरी निगाह डालने पर कोविड-19 की इस लड़ाई में हमारे सामने तीन चीजें हैं: बीमारी को फैलने से रोकना, अर्थव्यवस्था को बचाना और प्राइवेसी का हनन न्यूनतम स्तर पर करना। अगर आपको सरकार नाम, लोकेशन और ब्लूटूथ का आँकड़ा दे रही है, ताकि आप ही सुरक्षित रहें, तो फिर आपको स्मार्टफोन के दौर में प्राइवेसी की बात इस संदर्भ में तो नहीं ही करनी चाहिए।

बात होती है मंशा की। जहाँ सरकार के ऐप में हर डेटा को लेने के पीछे का उद्देश्य स्पष्टता से लिखा हुआ है, ऑल्टन्यूज ने वैसा नहीं किया है। उसने इसे बिलकुल ही धुँधला रखा है कि वो इतनी जानकारी क्यों लेना चाह रहा है? वो तस्वीरों का क्या करता है, फोन की जानकारी क्यों चाहिए, स्टोरेज कार्ड को ‘मोडिफाय’ करने के पीछे क्यों लगा हुआ है?

ये वैसे ही लोग हैं जो आजीवन सरकारों को कोसते हैं कि गाँवों में जल-संक्रमण वाली बीमारियों से लोग मरते हैं, और जब सरकार इनके घरों में शौचालय बनवा कर देती हैं तो कहते हैं कि सरकार अब हमारे शौचालय में घुसना चाहती है और मल त्यागना सिखाती है। ये लोग वही हैं जो शौचालय में शौच करने को भी प्राइवेसी से जोड़ देते हैं, भले ही उससे ऐसी आबादी की भावी बीमारियों से ग्रसित होने की संभावना घट रही हो।

बुलंदशहर में रात के अँधेरे में उपद्रवियों ने ‘नवग्रह मंदिर’ पर बोला हमला, रामदरबार की मूर्ति टूटने पर लोगों में रोष

उत्तर प्रदेश के जिला बुलंदशहर के ‘नवग्रह मंदिर’ में गुरुवार (21 मई, 2020) रात को अँधेरे का फायदा उठाकर उपद्रवियों ने हमला बोल दिया। मंदिर में घंटों तक मचाए गए उत्पात में रामदबार की एक मूर्ति पूरी तरह से खंडित हो गई। सुबह में इसकी जानकारी पुजारी के द्वारा जैसे ही इलाके के लोगों को हुई। लोगों के अंदर रोष व्याप्त हो गया। सूचना पर पहुँची बुलंदशहर पुलिस मामले की जाँच में जुट गई है।

जानकारी के मुताबिक गुरुवार की रात कुछ उपद्रवियों ने बुलंदशहर के सिकंदराबाद एसडीएम कॉलोनी स्थित ‘नवग्रह मंदिर’ में दीवार फाँदकर महला बोल दिया। इस दौरान घंटों तक मचाए गए उत्पाद में उपद्रवियों ने लंबे डंडे की मदद से राम दरबार में लगी लक्ष्मण की मूर्ति को पूरी तरह से खंडित कर दिया। इतना ही नहीं इस दौरान उपद्रवियों ने मंदिर परिसर में बने पुजारी के कमरे के ताले को भी तोड़ने का भरपूर प्रयास किया, हालाँकि उपद्रवी इसमें कामयाब नहीं हो सके।

हर रोज की तरह शुक्रवार (22 मई, 2020) की सुबह करीब पाँच बजे मंदिर में पूजा अर्चना के लिए पुजारी पंडित आशीष उपाध्याय पहुँचे तो वह मंदिर में टूटी मूर्तियों को देखकर दंग रह गए। पुजारी ने बताया कि जब मंदिर की छत पर पहुँचे तो उन्होंने देखा कि उनके कमरे के ताले को भी एक लम्बे सरिया की मदद से तोड़ने का प्रयास किया गया, लेकिन वह इसे तोड़ नहीं सके।

इसकी जानकारी इलाके के लोगों को मिलते ही मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई और घटना को लेकर अपना रोष व्यक्त करने लगी।

मामले का वीडियो:

साभार: पत्रिका

वहीं मंदिर समिति की सूचना के बाद तत्काल थाना पुलिस मौके पर पहुँची गई। घटना स्थल पर पहुँची पुलिस ने मंदिर के पुजारी के साथ आस-पास के लोगों से भी पूछताछ की और फिर मामले की जाँच में जुट गई।

एसएचओ सिकंदराबाद के मुताबिक घटना बीती रात की है। मंदिर में स्थापित लक्ष्मण की मूर्ति का एक हाथ खण्डित हुआ है। घटना के संबंध में थाना सिकंदराबाद पर सुसंगत धाराओं में अभियोग पंजीकृत कर अग्रिम विधिक कार्यवाही की जा रही है। फिलहाल कहा जा रहा है कि कानून व्यवस्था संबंधित कोई समस्या नहीं है।

सीओ गोपाल चौधरी के मुताबिक मंदिर में कुछ शरारती तत्वों ने इस घटना को अंजाम दिया है तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज किया जाएगा और जल्द से जल्द मूर्तियों को मंदिर में लगवाया जाएगा।

ऑन स्क्रीन राजदीप सरदेसाई की चाटुकारिता: अजय बिष्ट पर नो प्रॉब्लम, एंटोनियो माइनो पेट पर लगी

सोशल मीडिया में एक वीडियो शेयर हो रहा है जो राजदीप सरदेसाई की हिप्पोक्रेसी बयॉं करती है। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अजय बिष्ट कहे जाने पर उन्हें कोई फर्क नहीं पड़ता, लेकिन जैसे ही एंटोनियो माइनो का जिक्र आता है उनके हाव-भाव बदल जाते हैं।

वीडियो इंडिया टुडे के एक डिबेट शो का है। इस शो के दौरान राजदीप कॉन्ग्रेस प्रवक्ता की बातों को सुनकर अलग प्रतिक्रिया देते हैं। लेकिन, भाजपा प्रवक्ता की बात सुनकर तिलमिला जाते हैं।

भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने सोशल मीडिया इस डिबेट का वीडियो शेयर किया है। इस शो के एक स्लॉट में कॉन्ग्रेस प्रवक्ता सुष्मिता देव सीएम योगी आदित्यनाथ का जिक्र ‘अजय बिष्ट’ कहकर करती हैं। कहती हैं कि उनके पास कोई कारण नहीं था कि वे बस सेवा को अस्वीकारें। इसे सुनकर वरिष्ठ पत्रकार राजदीप शांतचित्त से शो को आगे बढ़ा देते हैं।

लेकिन इसी शो में जब भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया सोनिया गाँधी के लिए ‘एंटोनियो माइनो’ शब्द का प्रयोग करते हैं और बोलने की कोशिश करते हैं कि उनकी पार्टी (कॉन्ग्रेस) महाराष्ट्र में है… तो सरदेसाई बीच में ही उन्हें रोकते हैं। उनसे कहते हैं कि आखिर इस पूरे मामले में एंटोनियो माइनो को क्यों लेकर आया जा रहा है। उनका इससे क्या लेना-देना है।

गौरव भाटिया इसका जवाब भी देते हैं। वे कहते हैं, “जब योगी आदित्यनाथ को किसी अन्य नाम से बुलाया जाता है, तो आप शांत रहते हैं, इसलिए मैं यहाँ एंटोनिया माइनो का नाम लेकर आया, जो आपकी बहुत करीबी हैं।”

गौरतलब है कि अब सोशल मीडिया पर इंडिया टुडे के इस डिबेट में हुए इन दो अलग-अलग वाकयों को एक साथ जोड़कर सरदेसाई की निष्पक्ष पत्रकारिता पर सवाल उठाए जा रहे हैं। कोई उन्हें एंटोनिया माइनो का चमचा बोल रहा है तो कोई उन्हें कॉन्ग्रेसी पत्रकार बोल रहा है।

एक यूजर ने सरदेसाई के लिए ये भी लिखा है कि उनके जैसे पत्रकार जिदंगी में मुकाम पाने के लिए चाटुकारिता करते नजर आए हैं। इसलिए इन जैसे पत्रकारों को कोई सलाह देने की जरूरत नहीं हैं। इनका सिर्फ़ बहिष्कार होना चाहिए।

यहाँ बता दें, कि अभी कुछ समय पहले ही राजदीप सरदेसाई का एक और कारनामा सामने आया था। इस वाकए में भी वे राहुल गाँधी की चाटुकारिता करने में इतना अधिक बह गए थे कि दूसरे पत्रकार शीला भट्ट ने उनकी पोल खोल दी थी।

दरअसल बीते दिनों राहुल गाँधी ने लॉकडाउन के दौरान मीडिया से बातचीत की एक सीरिज शुरू की थी, जिसके बाद राजदीप सरदेसाई ने कॉन्ग्रेस के उत्तराधिकारी की अनस्क्रिप्टेड मीडिया इंटरैक्शन के लिए उनकी सराहना की।

मगर, शीला भट्ट ने बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बातचीत तो अच्छी रही मगर इसे ‘फ्री व्हीलिंग’ नहीं कहा जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि पत्रकारों द्वारा पहले ही पूछे जाने वाले प्रश्न कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता रणदीप सुरजेवाला को सौंप दिए गए थे। साथ ही, वही पत्रकार सवाल पूछ सकते थे जिन्हें कॉन्ग्रेस पार्टी द्वारा चिन्हित किया गया था।

‘स्वघोषित NDTV रिपोर्टर, शिव सेना सदस्य शाह फैजल ने दी मुस्लिमों द्वारा सामूहिक रेप की धमकी’

शाह फ़ैज़ल ट्विटर पर एक युवक को धमकी दी है कि वो उसकी माँ और बहन का बलात्कार करेगा। शाह फैजल के ट्विटर एकाउंट पर उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वो NDTV का पूर्व रिपोर्टर रह चुका है और शिवसेना पार्टी का सदस्य भी है।

शाह फैजल ने जिस युवक को उसके इनबॉक्स में भद्दी गालियाँ देते हुए बलात्कार की धमकी दी है, उसने ये स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए शाह फ़ैजल की गिरफ्तारी की माँग की है।

निलय नाम के इस ट्विटर यूजर ने लिखा है – “हैलो मुम्बई पुलिस, शाह फैज़ल नाम का ये आदमी मेरे माँ और बहन के बलात्कार की धमकी दे रहा है।”

निलय ने मुम्बई पुलिस के एकाउंट को टैग कर शाह फैज़ल की गिरफ्तारी की माँग की है।

शाह फैज़ल द्वारा भेजे गए संदेश, जिनमें अपशब्दों का प्रयोग किया गया है –

शाह फैज़ल का ट्विटर एकाउंट –

शाह फैज़ल के ट्विटर एकाउंट में एजाज खान से लेकर राना अयूब के ट्वीट को शेयर किया गया है। ये वही एजाज खान है जो अक्सर अपनी भड़काऊ और साम्प्रदायिक बयानों के कारण जेल जाते रहते हैं।

शाह फैज़ल मुम्बई घनानंद तल अटपडी का रहने वाला है। ये सूचना उसके अपने ट्विटर एकाउंट से शेयर की गई है।

शाह फैज़ल ने ट्विटर पर एक पोस्ट शेयर किया है जिसमें बुर्का पहने हुए 3 महिलाओं की सांकेतिक तस्वीर के साथ उन्हें तीर चलाते दिखाया गया हैं। इस फोटो के साथ कैप्शन में लिखा है –

“उठती नही तीर ओ तलवार अब मैदान-ए-जंग में, अय्याशियों ने शेर कौम को बुजदिल बना दिया..”

इस फोटो को रीट्वीट करते हुए शाह फैज़ल ने लिखा है- माशा अल्लाह क्या खूब लिखा है। हर एक सच्चे मुस्लिम के दिल की यही आवाज है।”

नोट: ऑपइंडिया ने ट्विटर पर शाह फैजल को मैसेज और NDTV को मेल कर, फैसल के NDTV से जुड़ाव के बारे में स्पष्टीकरण माँगा गया था लेकिन रिपोर्ट लिखे जाने तक दोनों जगहों से कोई जवाब नहीं आया है।

CM योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी, गोमती नगर थाने में FIR दर्ज

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को बम से उड़ाने की धमकी दी गई है। जिसके बाद गोमती नगर थाने में इस सम्बन्ध में एफआईआर दर्ज करा दी गई है।

यह धमकी UP के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को उत्तर प्रदेश- 112 के व्हाटसएप नम्बर पर बृहस्पतिवार (मई 21, 2020) की शाम दी गई, जिसमें कहा गया कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर बम से हमला किया जाएगा।

यह धमकी मोबाइल सन्देश के द्वारा दी गई। कन्ट्रोल रूम से तुरन्त इसकी सूचना पुलिस अफसरों को दी गई। इस सन्देश से तुरन्त एक्शन में आई पुलिस ने धमकी देने वाले नम्बर की जाँच शुरू कर दी है।

इंस्पेक्टर धीरज कुमार की ओर से दर्ज एफआईआर के मुताबिक रिपोर्ट्स के अनुसार, यूपी 112 के सोशल मीडिया डेस्क के व्हाटसऐप नम्बर 7570000100 पर मोबाइल नम्बर 8828453350 से बृहस्पतिवार रात 12:32 मिनट पर एक धमकी भरा मैसज आया।

इस मैसेज में लिखा था कि वो योगी आदित्यनाथ को बम से हमला कर जान से मार देगा…। इस संदेश में उसने उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को कुछ लोगों की जान का दुश्मन बताया

मोबाइल ऐप ‘ट्रू कॉलर’ पर इस नम्बर को चेक करने पर लिखा आता है- “गाइज़ ही गे…जस्ट एब्यूज हिम”

FIR दर्ज

अधिकारियों ने बताया कि गोमती नगर थाने में धारा 505 (1) बी, 506 और 507 के तहत केस दर्ज किया गया है। धमकी भरा सन्देश रात 12 बजकर 32 मिनट पर आया और त्वरित कार्रवाई करते हुए थाने में महज 19 मिनट के अंदर 12 बजकर 51 मिनट पर एफआईआर दर्ज करा दी गई।

योगी ने विकास की खातिर गोरखनाथ मंदिर की चहारदीवारी और उससे सटे 200 दुकानों पर चलवा दिया बुल्‍डोजर

उत्‍तर प्रदेश के मुख्‍यमंत्री योगी आदित्‍यनाथ ने गोरखपुर में विकास के ख़ातिर गोरखनाथ मंदिर की चहारदीवारी पर बुल्‍डोजर चलवा दिया। साथ ही गोरखपुर में मोहद्दीपुर से जंगल कौड़िया तक बन रहे 17 किलोमीटर लंबे फोरलेन के लिए गोरखनाथ मंदिर की एक-दो नहीं, दो सौ से ज्‍यादा दुकानें जमींदोज की जा रही हैं।

जाम की समस्या से मिलेगी मुक्ति

दरअसल, गोरखपुर के करीब 10 लाख हल्‍के और भारी वाहन वाले लोगों को आए दिन जाम की समस्या का सामना करना पड़ता था। इसके समाधान के लिए सरकार द्वारा मोहद्दीपुर से जंगल कौड़िया तक 17 किलोमीटर लम्‍बे फोरलेन का निर्माण किया जा रहा है। ताकि शहर में प्रवेश करने वाले लोगों को जाम का सामना नहीं करना पड़े।

योगी सरकार ने दिखाई थी हरी झंडी

सोमवार (17मई,20) से निर्माण में आड़े आ रहीं गोरखनाथ मंदिर परिसर से सटी दुकानों के ध्वस्तीकरण का काम शुरू कर दिया गया था और बुधवार तक लगभग 100 दुकानें ध्वस्त कर दी गईं। इसी क्रम में लगभग 100 दुकानें और तोड़ी जाएँगी। मंदिर की दुकानें तोड़ने की हरी झंडी खुद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दी है। इस आदेश के बाद पूरा प्रशासनिक अमला दुकानों को तोड़ने में लगा है।

ध्वस्त मकानों और दुकानों की जगह मिलेगी नई जगह

गोरखनाथ मंदिर के सचिव द्वारिका तिवारी ने बताया कि जिन मकानों और दुकानों को तोड़ा जा रहा है इन सभी दुकानदारों को सरकार की तरफ से नए दुकान और मकान बना कर दिए जाएँगे। इसके लिए सब्जी मंडी में पाँच मंजिला भवन तैयार हो रहा है, जिसमें दुकानों का निर्माण होगा। इन सभी दुकानों के प्रभावित दुकानदारों को लगभग छह महीने के अंदर दुकानें और अधिकतम एक साल के अंदर मकान बनाकर दे दिए जाएँगे।

योगी का काम है उनकी पहचान

बता दें 2017 में योगी आदित्‍यनाथ के मुख्‍यमंत्री बनने पर देश-विदेश में पक्ष-विपक्ष के लोग गाहे-बेगाहे पूछते रहते थे कि एक संन्‍यासी की सत्‍ता कैसी होगी। मुख्‍यमंत्री का पद संभालने के बाद अपने द्वारा किए गए निर्माणों से योगी ने लोगों को यह बात तो साफ कर दिया था कि संन्‍यास का मतलब पलायन नहीं है। वह संयासी लोक कल्याण के लिए बने और उनके लिए राजनीति कोई पेशा नहीं है।

इसी लोककल्‍याण की भावना से योगी सुबह से लेकर देर रात तक काम करते रहते हैं। उनके कामों से यह तो स्‍पष्‍ट होता है कि वह संन्‍यासी हैं लेकिन धर्म को अंधविश्‍वास और अराजकता से जोड़ने के सख्‍त विरोधी भी हैं।

योगी आदित्यनाथ द्वारा अपनी ही वैध दुकानें तुड़वा देने से प्रशासन को यह संदेश तो मिल ही गया है कि इस संयासी मुख्यमंत्री के लिए लोकहित सर्वोपरि है और इसकी राह में मंदिर, मस्जिद इत्‍यादि धार्मिक स्‍थल ही क्‍यों न हों, किसी को भी बाधक नहीं बनने दिया जाएगा।

RBI ने दी EMI के भुगतान पर 3 महीने की अतिरिक्‍त छूट, लगातार 3 बार रेपो रेट में कटौती

भारत के केंद्रीय रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने रेपो रेट में कटौती करते हुए इसे 4.40% से घटाकर 4% कर दी है। रिज़र्व बैंक ने लॉकडाउन के बाद लगातार तीन बार रेपो रेट में कटौती की है। दरअसल, रेपो रेट में कटौती से बैंकों से मिलने वाले क़र्ज़ पर असर पड़ता है क्योंकि इसका असर ब्याज दरों पर पड़ता है।

इसके साथ ही RBI ने लोन की किस्‍त देने पर 3 महीने की अतिरिक्‍त छूट दी है। यानी, अगले 3 महीने तक बैंक से लिए गए ऋण के भुगतान न करने पर बैंक किसी प्रकार का दबाव नहीं बनाएगा।

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने आज ऐसी ही कुछ प्रमुख घोषणाएँ कीं। प्रेस वार्ता में शक्तिकांत दास ने कहा कि महँगाई दर अभी भी 4% से नीचे रहने की संभावना है, लेकिन लॉकडाउन के वजह से यह बढ़ सकती है।

EMI भुगतान में 3 और महीनों की राहत

रिज़र्व बैंक के गवर्नर शक्तिकांत दास ने बैंकों का लोन चुका रहे लोगों को राहत देते हुए लोन चुकाने की अवधि को और तीन महीनों के लिए आगे बढ़ाने की घोषणा की है। इससे पहले इसी साल 27 मार्च को आरबीआई ने बैंकों से लोन मोरैटोरियम की अवधि तीन महीने के लिए बढ़ाने को कहा था।

भुगतान की अवधि तीन महीने और बढ़ने से अब 6 महीने के मोरैटोरियम की सुविधा हो गई है। यानी, इन 6 महीने अगर ग्राहक अपनी EMI नहीं चुकाते हैं तो आपका लोन डिफॉल्ट या NPA कैटेगरी में नहीं माना जाएगा।

RBI गवर्नर शक्तिकांत दास ने प्रेस कॉन्फ्रेंस शुरू करते हुए कहा कि हमें यह भरोसा रखना होगा कि भारत इस मुश्किल वक्त से उबर जाएगा। उन्होंने कहा कि कोरोना की वजह से आर्थिक नुकसान हुआ है। जबकि भारत में बिजली व पेट्रोलियम उत्पाद की खपत में गिरावट आई है।

प्रेस वार्ता में RBI गवर्नर ने बताया कि MPC की बैठक में 6-5 सदस्यों ने ब्याज दरें घटाने के पक्ष में सहमति जताई। इस फैसले से होम लोन, कार लोन, पर्सनल लोन सहित सभी तरह के कर्ज पर EMI सस्ती होगी।।

इसके साथ ही शक्तिकांत दास ने आशंका जताई है कि चालू वित्तीय वर्ष की जीडीपी ग्रोथ रेट नेगेटिव रह सकता है। उन्हीने कहा कि कोरोना वायरस के कारण जारी लॉकडाउन की वजह से देश में महँगाई बढ़ने की आशंका है।

अच्छे मानसून की उम्मीदों पर उन्होंने कहा कि कृषि से काफी उम्मीदे है। हालाँकि, माँग और आपूर्ति का अनुपात गड़बड़ाने के कारण देश की अर्थव्यवस्था थमी हुई है, फिर भी RBI द्वारा लिए जा रहे फैसलों का असर सितम्बर माह तक दिखना शुरू हो जाएगा।

भारत बना पीपीई मैन्युफैक्चरिंग में दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा हब, विदेशों में बढ़ी पीपीई किट की डिमांड

कोरोना काल में भारत अब दुनियाभर में पीपीई किट का दूसरा सबसे बड़ा विनिर्माता यानी मैन्युफैक्चरर बन गया है। इस बात की जानकारी गुरुवार (21मई,20) को सरकार द्वारा दी गई।

कोरोना वायरस की वजह से दुनियाभर में पिछले दो महीनें में पर्सनल प्रोटेक्टिव इक्विपमेंट (PPE) किट की माँग तेजी से बढ़ी है। जिसको देखते हुए भारत ने इसके प्रोडक्शन में इतनी तेज़ी से काम किया कि आज भारत दुनिया में चीन के बाद पीपीई किट बनाने वाला दूसरा देश बन गया है।

पहले इस किट के लिए भारत चीन और अमेरिका पर निर्भर रहता आया है। और अभी हाल ही में चीन द्वारा भेजे गए खराब क्वालिटी के पीपीई किट की वज़ह से भारत को काफ़ी दिक्कतों का सामना भी करना पड़ा था। लेकिन विश्व स्वास्थ्य संगठन से मिली मंजूरी के बाद भारत में अब किट तैयार की जाने लगी हैं।

सिर्फ़ दो महीने के भीतर ही भारत पीपीई किट बनाने में इतना काबिल हो गया है कि अब विदेशों में भी इसकी डिमांड आए दिन बढ़ती चली जा रही है। यहाँ तक कि कई एयरलाइंस कंपनियों से भारत को बड़े ऑर्डर हासिल हुए हैं।

मौजूदा समय में भारत में 106 मैन्युफैक्चरर पीपीई किट बनाने का काम कर रहे हैं। ये पीपीई किट किसी और देश के मुकाबले में कम लागत पर और बेहतरीन क्वालिटी के बनाए जा रहे हैं।

कपड़ा मंत्रालय द्वारा जारी बयान

कपड़ा मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि उसने पीपीई की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में सुधार करने के लिए कई कदम उठाए हैं। यही कारण है कि भारत दो महीने से भी कम समय में पीपीई का दूसरा सबसे बड़ा मैन्युफैक्चरर बन गया है। मंत्रालय ने यह सुनिश्चित करने के लिए भी कदम उठाए हैं कि पूरी आपूर्ति श्रृंखला में केवल प्रमाणित कम्पनियाँ ही पीपीई की आपूर्ति करें। अब कपड़ा समिति, मुंबई भी स्वास्थ्य कर्मचारियों और अन्य अन्य कोविड-19 योद्धाओं के लिए आवश्यक पीपीई की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन करेगी।

प्रधानमंत्री द्वारा पहले ही दी गई थी जानकारी

भारत में कोरोना संकट से पहले एक भी पीपीई किट और एन-95 मास्क नहीं बनता था, लेकिन अब हर दिन दो लाख पीपीई किट और 2 लाख एन-95 मास्क बनाए जा रहे हैं। ये जानकारी प्रधानमंत्री मोदी ने लॉकडाउन के दौरान 12 मई को देश के नाम संबोधन करते हुए साझा किया था।

पीपीई किट की कमी के कारण देश में काफ़ी राजनीति हुई थी। विपक्षी दलों और खासकर कॉन्ग्रेस ने कई बार पीपीई किट की कमी का मुद्दा उठाकर सरकार पर निशाना साधा था और इसे सरकार की नाकामयाबी भी बताया था। लेकिन अब इन सारी राजनीति पर पानी फिर गया।