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जलील हुआ द वायर: सफूरा जरगर पर फर्जी, उन्मादी रिपोर्टिंग के लिए दिल्ली पुलिस ने लगाई फटकार

दिल्ली पुलिस ने ‘द वायर’ को एक फर्जी रिपोर्ट प्रकाशित करने के लिए फटकार लगाई है। दिल्ली दंगों की आरोपित सफूरा जरगर से जुड़ी इस रिपोर्ट में वामपंथी प्रोपेगेंडा पोर्टल ने पुलिस और न्यायपालिका पर मुस्लिम समुदाय के खिलाफ कट्टरता का आरोप लगाया था।

दिल्ली पुलिस ने कहा है कि ‘द वायर’ के रिपोर्टर ने इस रिपोर्ट में बिना तथ्यों की जाँच के ही लिखा है कि एक हिंदू और एक मुस्लिम व्यक्ति पर एक ही मामले में मुकदमा दर्ज किया गया था और फिर भी उनके साथ अलग-अलग व्यवहार किया गया।

वास्तव में, दोनों पूरी तरह से अलग-अलग मामले थे और वामपंथी प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ के पत्रकार ने उन्हें मिलाकर वास्तविकता से दूर, अपने अलग, बेबुनियाद निष्कर्ष निकाले। दिल्ली पुलिस ने कहा है कि पत्रकारिता के सामान्य मापदन्डों में रिपोर्ट बनाने से पहले तथ्यों को जाँच कर लेना भी आवश्यक होता है, जिसका ‘द वायर’ की रिपोर्ट में पालन नहीं किया गया है।

हालाँकि, निश्चित तौर पर यह नहीं कहा जा सकता है कि ‘द वायर’ द्वारा किया गया यह काम वास्तव में एक गलती थी और एक जानबूझकर किया गया षड्यंत्र!

दिल्ली पुलिस ने प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ को फटकारते हुए कहा कि रिपोर्टर ने पूर्वाग्रह और भेदभाव की एक परिकल्पना से उन्माद फैलाने के लिए एक ही नंबर वाली दो अलग-अलग एफआईआर मिलाईं।

यानी FIR-59, जो दो अलग-अलग तारीखों में दायर किए गए थे। एक, 6 मार्च 2020 को दिल्ली पुलिस की अपराध शाखा द्वारा दायर की गई थी। दूसरी, 26 फरवरी 2020 को स्पेशल सेल द्वारा।

पहली FIR दिल्ली दंगों के मामले से संबंधित थी, जो अभी भी भारतीय दंड संहिता, शस्त्र अधिनियम और गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के विभिन्न प्रावधानों के तहत जाँच के दायरे में है। दूसरी FIR आर्म्स एक्ट के संबंध में दायर किया गया था। इसमें जाँच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दायर कर दी गई है और मामला अब विचाराधीन है।

दिल्ली पुलिस ने कहा कि दूसरे मामले के अदालती आदेश में, जिसमें कि सह-अभियुक्त एक मुस्लिम व्यक्ति था, सभी विवरण उपलब्ध हैं।

दिल्ली पुलिस के बयान की प्रति-1

बयान में कहा गया है कि ‘द वायर’ के पत्रकार ने काल्पनिक रूप से मुद्दे को हवा देने का प्रयास किया है। इसमें ‘द वायर’ की रिपोर्ट को ‘पत्रकारीय दुस्साहस’ का काम बताया है और कहा गया है कि रिपोर्टर ने UAPA के एक प्रावधान को एकदम अलग और पूरी तरह से अनसुना बताया।

बयान में कहा गया है, “यह काफी दुखद है कि ‘सिंगल एफआईआर, डबल स्टैंडर्ड’ की एक काल्पनिक कहानी में दो अलग-अलग एफआईआर के दो अलग-अलग मामलों को एक कर के दर्ज करते हुए, लेखक ने एक अधिकृत स्रोत से क्रॉस-चेकिंग और तथ्यों को जाँचने के सामान्य पत्रकारिता मानदंडों का ख्याल नहीं रखा।”

दिल्ली पुलिस के बयान की प्रति-2

दिल्ली पुलिस ने इस बयान में आगे कहा है, “अनुरोध किया जाता है कि इस जवाब को ध्यान में रखा जाना चाहिए और पत्रकारिता के सर्वश्रेष्ठ पेशेवर नैतिकता के अनुरूप, उसी तरह से प्रमुखता के साथ प्रकाशित और ट्वीट किया जाना चाहिए।”

क्या था मामला

‘द वायर’ ने “दिल्ली सांप्रदायिक हिंसा: गर्भवती सफूरा को जेल, ‘गन सप्लायर’ सिरोही को बेल” शीर्षक से भ्रामक रिपोर्ट प्रकाशित की थी।

सिमी पाशा द्वारा लिखी गई इस बेहद ‘रचनात्मक’ रिपोर्ट में सवाल पूछा गया था, “दंगा के दौरान अवैध हथियार रखने वाले व्यक्ति को कैसे जमानत दी जा सकती है, जबकि दंगों में जिसके खिलाफ कुछ भी बरामद नहीं किया गया, वह सलाखों के पीछे है?”

यह पहली बार नहीं है जब प्रोपेगेंडा वेबसाइट ‘द वायर’ को झूठ और फर्जी रिपोर्ट्स के लिए जलील होना पड़ा है। इससे पहले भी उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा इसके संस्थापक पर झूठी खबर फ़ैलाने को लेकर FIR दर्ज की जा चुकी है।

24 मजदूरों की मौत, 15 गंभीर: औरैया हादसे पर CM योगी ने आईजी से माँगी रिपोर्ट

उत्तर प्रदेश के औरैया में शनिवार (मई 16, 2020) तड़के एक भीषण सड़क हादसा हुआ। हादसे में 24 मजदूरों की मौत हो गई। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ (Yogi Aditynath) हादसे पर कानपुर रेंज के कमिश्नर और आईजी से रिपोर्ट तलब की है।

हादसे के शिकार मजदूर लॉकडाउन के बीच एक ट्रक पर सवार होकर घर लौट रहे थे। औरैया के पास उनकी ट्रक की टक्कर एक अन्य ट्रक से हो गई।

योगी आदित्यनाथ ने औरैया में हुए हादसे का संज्ञान लेते हुए जान गँवाने वाले मजदूरों के परिवारों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त की है। साथ ही मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया है कि सभी घायलों को तुरंत चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराई जाए।

इसके साथ ही उन्होंने कमिश्नर और कानपुर के आईजी मोहित अग्रवाल को घटनास्थल का दौरा कर दुर्घटना के कारणों की तत्काल रिपोर्ट देने को कहा है। उन्होंने का कि जो लोग भी इसके जिम्मेदार पाए जाएँगे, उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

हादसे पर सीएम योगी ने दुख व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, ”जनपद औरैया में सड़क दुर्घटना में प्रवासी कामगारों/श्रमिकों की मृत्यु दुर्भाग्यपूर्ण एवं दुःखद है। मेरी संवेदनाएँ मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के साथ हैं। पीड़ितों को हरसंभव राहत प्रदान करने, घायलों का समुचित उपचार कराने व दुर्घटना की त्वरित जाँच करवाने के निर्देश भी दिए गए हैं।”

इस घटना को लेकर औरैया के डीएम अभिषेक सिंह ने बताया कि हादसा सुबह करीब 3:30 बजे हुआ। 24 लोगों की मौत हो गई है और लगभग 15-20 लोगों को चोटें आई हैं। उनमें से अधिकांश बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल हैं।

औरैया की चीफ मेडिकल ऑफिसर (CMO) अर्चना ​श्रीवास्तव ने जानकारी देते हुए बताया कि 24 लोगों की मौत हो चुकी है। 22 लोग अस्पताल में भर्ती हैं, जिनमें से 15 लोगों की हालत गंभीर हैं। उन्हें सैफई PGI रेफर किया गया है। ये सभी राजस्थान से बिहार और झारखंड जा रहे थे।

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मजदूरों के पलायन को लेकर दी गई हिदायत के महज 12 घंटे बाद ही ये हादसा हो गया। शुक्रवार (मई 15, 2020) को ही मुख्यमंत्री ने सख्त हिदायत दी थी कि कोई भी मजदूर पैदल या असुरक्षित तरीके से यात्रा न करें।

इसको लेकर अधिकारियों को भी निर्देश जारी किए गए थे। साथ ही सीएम ने ये भी कहा था कि ट्रकों में भरकर मजदूरों को ले जाने वालों पर भी सख्त कार्रवाई होगी।

इससे पहले गुरुवार को उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर में एक दर्दनाक सड़क हादसे में बिहार के 6 मजदूरों की मौत हो गई थी। ये सभी मजदूर बिहार के गोपालगंज, आरा और पटना के रहने वाले थे।

वहीं बुधवार को मध्य प्रदेश के गुना में हुए एक ऐसे ही सड़क हादसे में आठ मजदूरों की जान चली गई, जबकि 50 से ज्यादा घायल हो गए। पिछले दिनों महाराष्ट्र के औरंगाबाद में भी ट्रेन ट्रैक पर सो जाने की वजह से 17 प्रवासी मजदूरों की जान चली गई थी।

‘इंशाअल्लाह, मेरा इंडिया इस्लामिक राज्य हो जाएगा’: हिंदू घृणा से सने NSUI महासचिव शौकत अली से मिलिए

कॉन्ग्रेस के छात्र संगठन NSUI से जुड़े शौकत अली शाहीन (Shokit Ali Shaheen) की हिंदूफोबिक टिप्पणियाँ सोशल मीडिया पर सामने आई है। फेसबुक प्रोफाइल में उसने जम्मू-कश्मीर में NSUI का जिला महासचिव होने की बात कही है।

शाहीन द्वारा फेसबुक पर की गई हिंदू-घृणा और मजहबी वर्चस्व से लिप्त टिप्पणियाँ कुछ इस प्रकार हैं –

  1. ‘हिंदू इस पृथ्वी पर एक आतंकवादी धर्म है’,
  2. ’57 इस्लामिक देश हैं और इस्लाम पूरी दुनिया में चमक रहा है…’
  3. ‘कुरान विज्ञान का मार्गदर्शक है…’
  4. ‘निरक्षर, गंदे, भद्दे हिंदू ही हमारे भारत में धार्मिक प्रदूषण फैला रहे हैं…’
  5. ‘इंशाअल्लाह, मेरा इंडिया इस्लामिक राज्य हो जाएगा।’
  6. ‘गाय का गोबर और गोमूत्र पीने वाली कौम’
शौकत अली के प्रोफाइल का वायरल स्क्रीनशॉट

शुक्रवार (मई 15, 2020) को शौकत अली के इन हिंदू विरोधी और भड़काऊ टिप्पणियों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल हो गए।

फेसबुक प्रोफाइल के अनुसार, NSUI के इस कथित महासचिव ने अपने प्रोफाइल में जिक्र किया है कि वह पूँछ (जम्मू-कश्मीर) से है और उसने डिग्री कॉलेज राजौरी से पढ़ाई की है।

इसके अलावा, जल्द ही शौकत अली के एकाउंट से जानकारी मिलती है कि वह जवाहर नवोदय विद्यालय (जेएनवी) से भी पढ़ चुका है। शाहीन ने खुद को एक ‘वैज्ञानिक विचारक’ के रूप में वर्णित किया और लिखा है कि वह वर्तमान में दिल्ली में रह रहा है।

हालाँकि, हिन्दू विरोधी टिप्पणियों के स्क्रीनशॉट सोशल मीडिया पर वायरल होते ही उसने अपना पेज निष्क्रिय कर दिया। शायद, हिंदू समुदाय के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने के बाद FIR की संभावना के कारण, शौकत ने तुरंत अपना फेसबुक अकाउंट डिलीट या अस्थायी रूप से बंद कर दिया।

यह भी संभव है कि शौकत अली के फेसबुक एकाउंट पर हिंदू-घृणा से भरे हुए अन्य पोस्ट और टिप्पणियाँ भरे पड़े हों, जिस कारण उपरोक्त कमेंट्स को हटाने के बजाए अपने एकाउंट को ही पूरी तरह से गायब करने के लिए वह मजबूर हो गया होगा।

यह भी ध्यान देने की बात है कि हिन्दुओं के खिलाफ गो-मूत्र और गाय से संबंधितसमबन्धित कटाक्ष उसी भाषा की याद दिलाते हैं, जो पुलवामा में हुए फिदायीन आतंकी हमले से पहले उसके अभियुक्त आदिल अहमद डार ने इस्तेमाल की थी।

कॉन्ग्रेस की विचारधारा के मूल में है हिन्दू-घृणा

यह महज एक संयोग नहीं है कि शाहीन कथित तौर पर कॉन्ग्रेस पार्टी के छात्र संघ से जुड़ा हुआ है। कॉन्ग्रेस के नेता, लंबे समय से हिंदुओं के खिलाफ घृणा को बढ़ावा देते आए हैं और ऐसे बयानों को अपनी विचारधारा का आधार साबित करने का प्रयास किया है।

लगभग हर दूसरे दिन ऐसे मामले सामने आते हैं जिनमें कॉन्ग्रेस नेता या उनके सोशल मीडिया प्रभारी गो-मूत्र पर चुटकुले और तंज कसते नजर आते हैं।

हाल ही में, जब दुनिया कोरोना वायरस के खतरे से जूझ रही थी, महिला कॉन्ग्रेस की सोशल मीडिया समन्वयक, लावण्या बल्लाल ने एक ट्वीट में कटाक्ष करते हुए कहा था कि बाहर के लोग कोरोना वायरस का ‘इलाज’ बेच रहे हैं जबकि ‘भारत के पास गो-मूत्र’ है।

इसके अलावा, यह कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ही थे, जिन्होंने लश्कर की तुलना में ‘भगवा आतंक’ शब्द को स्थापित करने का प्रयास किया था। वहीं, पी चिदंबरम और सुशील कुमार शिंदे ने बिना किसी प्रमाण या कारण के हिंदुओं को आतंकवादी कहा था।

कॉन्ग्रेस नेता और पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा था कि हमारे देश के संसाधनों पर खास समुदाय का पहला अधिकार है। इन सबको यदि एक बार के लिए छोड़ भी दिया जाए तो कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता दिग्विजय सिंह ने जिस तत्परता से हिन्दुओं को आतंकवादी साबित करने का प्रयास किया है, वह जगजाहिर है।

भारत को वेंटिलेटर देगा अमेरिका, ट्रंप ने कहा- हम मिलकर अदृश्य शत्रु को हरा देंगे

अमेरिका ने कोरोना वायरस से लड़ाई में भारत का भरपूर साथ देने की बात कही है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुक्रवार (मई 15, 2020) को कहा कि वह कोरोना से जंग में भारत और पीएम नरेंद्र मोदी के साथ खड़े हैं। साथ ही उन्होंने भारत को वेंटिलेटर देने की घोषणा की।

ट्रंप ने ट्वीट करते हुए कहा, “मुझे यह घोषणा करते हुए गर्व हो रहा है कि अमेरिका भारत में हमारे दोस्तों को वेंटिलेटर दान करेगा। हम महामारी के इस समय भारत और नरेंद्र मोदी के साथ हैं। हम वैक्सीन के विकास पर भी सहयोग कर रहे हैं। हम मिलकर इस अदृश्य शत्रु को हरा देंगे।”

ट्रंप ने ये भी कहा कि इस साल के अंत तक कोरोना वायरस का टीका विकसित होने की संभावना है। उन्होंने कहा, “मैं कुछ ही समय पहले भारत से लौटा हूँ और हम भारत के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। अमेरिका में भारतीय बहुत बड़ी संख्या में हैं। उनमें से कई लोग वैक्सीन विकसित करने में जुटे हुए हैं। वे बेहतरीन वैज्ञानिक और अनुसंधानकर्ता हैं।”

अमेरिकी राष्ट्रपति ने उम्मीद जताई कि इस साल के अंत तक या उससे कुछ समय बाद कोरोना वायरस का टीका बाजार में उपलब्ध हो सकता है। ट्रंप की ओर से वायरस के मामलों के लिए प्रशासन में नियुक्त किए गए एक पूर्व दवा कार्यकारी मोनसेप स्लोई ने कहा कि हमारा प्रयास वर्ष 2020 के अंत तक टीका तैयार करने का है।

ट्रंप ने कहा कि सरकार कोविड-19 का टीका विकसित करने की दिशा में काम कर रही करीब 100 टीमों के कार्यों का मूल्यांकन कर रही है। 14 टीमों को आशाजनक परिणाम मिल रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कोविड-19 का टीका विकसित करने के ‘ऑपरेशन वार्प स्पीड’ नामक अभियान में पूर्व फार्मास्युटिकल कार्यकारी मोनसेफ सलोई और अमेरिकी सेना की मैटीरियल कमान के कमांडर जनरल गुस्ताव पेर्न अहम भूमिका निभाएँगे और इसका नेतृत्व करेंगे।

उन्होंने व्हाइट हाउस के रोज गार्डन में संवाददाताओं से कहा कि वर्ष के अंत से पहले कोरोनोवायरस वैक्सीन के विकास को गति देने के लिए एक बड़े प्रयास की शुरुआत की है। वह राज्यों को आर्थिक गतिविधियों को दोबारा शुरू करने के साथ ही इसे आगे बढ़ते हुए देखना चाहते हैं।

गौरतलब है कि हाल ही में अमेरिका ने कोरोना वायरस के रोकथाम के लिए भारत को अतिरिक्त तीन मिलियन US डॉलर की आर्थिक मदद देने का एलान किया था। इससे पहले ट्रंप प्रशासन ने USAID के माध्यम से भारत को 5.9 मिलियन US डॉलर की मदद देने का ऐलान किया था।

इससे पहले भारत ने कोविड-19 से लड़ने में मदद करने के लिए अमेरिका को हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन दवा भेजी थी। अमेरिका में कोरोना संक्रमण और उससे होने वाली मौत के आँकड़े बहुत ज्यादा हैं। यहाँ वायरस के कारण 87 हजार लोगों की जान जा चुकी है, जबकि संक्रमितों की संख्या 14 लाख पर पहुँच गई है।

विशाखापत्तनम जासूसी मामला: NIA ने मुंबई से मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद हारून को किया गिरफ्तार

राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) ने आज (मई 15, 2020) को विशाखापत्तनम जासूसी केस में बड़ी कामयाबी हासिल करते हुए मामले के मुख्य साजिशकर्ता मोहम्मद हारून हाजी अब्दुल रहमान लकड़ावाला को मुंबई से गिरफ्तार कर लिया।

ये मामला पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI को भारतीय नौसेना से जुड़ी संवेदनशील सूचनाएँ सौंपने से संबंधित है। इस मामले की जॉंच का जिम्मा NIA को पिछले साल दिसंबर में दिया गया था।

NIA ने एक बयान में बताया कि मोहम्मद हारून लकड़ावाला सीमा पार व्यापार की आड़ में अपने हैंडलर्स से मिलने के लिए कई मौकों पर पाकिस्तान के कराची गया था। इसी दौरान वह 2 पाकिस्तानी जासूसों के संपर्क में आया। जिनका नाम अली और रिज़वान है। इन 2 पाकिस्तानी जासूसों ने ही हारून को नौसेना कर्मियों के बैंक खाते में नियमित अंतराल पर पैसा जमा करने का निर्देश दिया था।

गौरतलब है कि अब तक इस मामले में 14 गिरफ्तारी हुई है। इनमें से एक पाकिस्तान में जन्मा भारतीय नागरिक शैस्ता कियासर (Shaista Qiaser) भी है। इससे पहले पुलिस ने इस संबंध में आंध्र प्रदेश से 13 लोगों को फरवरी में गिरफ्तार किया था।

इनमें 11 नौसेना के और 2 आम नागरिक शामिल थे। जाँच में इस बात का खुलासा हुआ था कि इन सैनिकों को हनी ट्रैप के जरिए फँसाया गया और फिर इनसे नौसेना संबंधी संवेदनशील जानकारी लीक करवाई गई।

बता दें,पाकिस्तान से जुड़े जासूसी रैकेट का भंडाफोड़ पिछले साल 20 दिसंबर को भारतीय खुफिया एजेंसियों ने 7 भारतीय नौसेना कर्मियों और एक ऑपरेटर की गिरफ्तारी के साथ किया था।

इसके अलावा इस पूरे केस के जाँच को ‘ऑपरेशन डॉलफिन नोज’ का नाम दिया गया था। पुलिस ने नौसेना कर्मियों को पकड़ते हुए यह खुलासा किया था कि ये सभी पाकिस्तानी महिलाओं के साथ फेसबुक, व्हॉट्सअप जैसे सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर जुड़े हुए थे और पैसों के बदले उन्हें भारतीय नौसेना के जहाजों, पनडुब्बियों और अन्य रक्षा प्रतिष्ठानों के बारे में संवेदनशील जानकारी साझा कर रहे थे।

J&K: जुमे पर नमाज के लिए पुलवामा में सड़क पर उतरे लोग, सुरक्षा बलों पर किया पथराव

शुक्रवार (15 मई, 2020) को जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में जुमे की नमाज अदा करने के लिए लॉकडाउन का उल्लंघन करते हुए बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए। सुरक्षाबलों ने समझाने की कोशिश की तो पथराव शुरू कर दिया। आखिरकार हालात को काबू में करने के लिए पुलिस को आँसू गैस के गोलों का प्रयोग करना पड़ा।

पुलवामा में इस तरह की यह पहली घटना नहीं है। अप्रैल में भी पुलवामा जिले के कसबायार द्रबगाम इलाके की जामिया मस्जिद में कुछ लोग नमाज अदा करने के लिए जमा हो गए। पुलिस द्वारा रोके जाने पर धक्कामुक्की की थी।

इसी तरह उत्तर प्रदेश के जिला सहारनपुर क्षेत्र के गाँव उमाही कला की जकरिया मस्जिद में शुक्रवार (मई 1, 2020) को बड़ी संख्या में मुस्लिम समुदाय के लोग लॉकडाउन के नियमों का उल्लंघन करते हुए नमाज अदा करने के लिए इकट्ठा हो गए थे। इस बात की जानकारी जैसे ही पुलिस को हुई वह तत्काल टीम के साथ मौके पर पहुँच गई। पुलिस को देख मस्जिद में नमाज अदा कर रहे लोगों के बीच भगदड़ मच गई। पुलिस ने 15 लोगों को मौके से गिरफ्तार कर लिया था।

असम के लखीमपुर जिले के दक्खिन पंडोवा गाँव की एक मस्जिद में गुरुवार (30 अप्रैल, 2020) रात को कुछ लोग लॉकडाउन का उल्लंघन कर नमाज अदा करने के लिए एकत्र हो गए थे। पुलिस ने मस्जिद के अंदर इमाम सहित 12 लोगों को मौके पर पाया। पुलिस ने सभी को लॉकडाउन का हवाला देते हुए इकट्ठा न होने और सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करने की बात कही।

इसके बाद जैसे ही पुलिस की टीम मस्जिद से निकली उस पर पथराव शुरू हो गया। इसमें ग्राम प्रधान सहित चार पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। पथराव में पुलिस का वाहन भी क्षतिग्रस्त हो गया था।

इससे पहले उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में 3 अप्रैल को सामूहिक नमाज रुकवाने पहुँची पुलिस पर पथराव की घटना सामने आई थी। गुरुवार (3 अप्रैल, 2020) रात शहर के सराय रहमान स्थित गड्डा मस्जिद में नमाज पढ़ने के लिए लोग जुटे थे। सूचना मिलने पर पुलिस पहुँची तो इन लोगों ने पुलिस पर हमला कर दिया। इस मामले में अलीगढ़ पुलिस ने 3 लोगों को गिरफ्तार किया था।

मुंबई में कोरोना संक्रमितों के आँकड़े छिपा रही बीएमसी: बीजेपी नेता नीतेश राणे का दावा

देश की आर्थिक राजधानी मुंबई में कोरोना वायरस का प्रकोप नियंत्रण से बाहर हो रहा है। स्थिति दिनोंदिन बिगड़ती जा रही है। जैसा कि हम जानते हैं, मुंबई जनसंख्या के मामले में काफी सघन महानगर है। पूरे भारत और महाराष्ट्र में कोरोना के अब तक जितने मामले आए हैं, उनमें मुंबई के काफ़ी मामले हैं।

हालाँकि जिस तरह मुंबई में यह महामारी बढ़ रही है, बीजेपी नेता नीतेश राणे ने शहर में कोरोना वायरस मामलों की संख्या कम होने के बारे में चौंकाने वाला दावा किया है। प्रशासन पर COVID-19 मामलों को कम करने का आरोप लगाते हुए, राणे ने दावा किया कि मुंबई में अधिकारियों ने कोरोना वायरस के संदिग्ध मरीजों को श्रेणीबद्ध करना बंद कर दिया है, ताकि शहर से रिपोर्ट किए गए कुल मामलों को कम किया जा सके।

राणे ने दावा किया कि अधिकारियों द्वारा प्रतिदिन रिपोर्ट की जा रही संख्या मुंबई में कोरोनावायरस के प्रकोप के सही आँकड़े नहीं दर्शाती है। वास्तविक में संक्रमण के आँकड़े आधिकारिक नंबरों से काफ़ी ज्यादा है। राणे ने बीएमसी पर आरोप लगाया कि वह कोरोना वायरस प्रकोप से निपटने में अक्षम है।

कई ट्विटर उपयोगकर्ताओं ने भी बीएमसी खिलाफ कोरोनोवायरस मामलों को कम करने का आरोप लगाते हुए
राणे के आरोपों के साथ सहमति व्यक्त की है। कुछ लोगों ने यह भी दावा किया हैं कि प्रशासन कोरोना वायरस के कारण होने वाली मृत्यु की संख्या को कम करने के लिए निमोनिया को मृत्यु का कारण बता रहे हैं।

एक अन्य ट्विटर उपयोगकर्ता ने कहा कि उन्हें यह भी संदेह है कि कोरोना वायरस के कारण होने वाली मौतों की संख्या के बारे में अधूरी जानकारी जारी करके प्रशासन जनता को धोखा दे रही है। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने शहर में भाजपा के शीर्ष अधिकारियों को मुंबई में श्मशान कार्यकर्ताओं के साथ जाँच करने के अपील की थी, ताकि हमें प्रशासन के अनुमान और असल के मृत्यु दर के बारे में पता चल सके।

महाराष्ट्र में विशेषकर मुंबई में कोरोना वायरस के मामले ख़तरनाक दर से बढ़ रहे हैं। मुंबई में कोरोना वायरस संक्रमण के मामलों सबसे ज्यादा गुरुवार (14.5.20) को 998 मामले सामने आए, जिस वजह से शहर में कुल आँकड़े 16,579 पहुँच गए थे। लगभग 25 रोगियों ने संक्रमण के कारण दम तोड़ दिया, जिसके चलते मृत्यु दर 600 पार चला गया।

राज्य द्वारा नियुक्त कोरोना वायरस टास्क फोर्स ने सरकार को अगले दो दिनों के लिए निजी और सरकारी अस्पतालों दोनों में 80 प्रतिशत बेड आरक्षित करने के लिए कहा है, यह दर्शाता है कि शहर कोरोनो वायरस के खिलाफ अपनी लड़ाई के सबसे महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर चुका है। डॉ. संजय ओक (जो टास्क फोर्स का नेतृत्व करते हैं) के अनुसार लगभग 20,000 लोगों को आगामी दिनों में अस्पताल में भर्ती करने की आवश्यकता हो सकती है।

45 मिनट की वह रूह कँपा देने वाली घटना: कोरोना संक्रमित का इलाज कर निकली गर्भवती नर्स से घुसपैठिए ने किया रेप

इटली से एक रूह कॅंपा देने वाली घटना सामने आई है। गर्भवती नर्स के साथ बेरहमी से बलात्कार किया गया। वह कोरोना संक्रमित होने के कारण अवसादग्रस्त मरीजों का इलाज कर लौट रही थीं।

घटना नेपल्स शहर के मुख्य रेलवे स्टेशन के पीछे स्थित बस स्टॉप अर्नाल्डो लुसी मेट्रोपार्क पर घटी। आरोपित की पहचान सेनेगल से आए अवैध प्रवासी के रूप में हुई है। उसे पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मगर, पीड़िता के लिए वे 45 मिनट भुला पाना मुश्किल है।

पीड़िता नर्स कहती हैं, “मुझे नहीं मालूम कि मुझे शारीरिक पीड़ा अधिक प्रभावित कर रही है या फिर मानसिक पीड़ा।” वे अपने दर्द को समेटते हुए आगे के जीवन के बारे में सोचती हैं और कहती हैं कि अब वह इन सबसे उबरकर उन लोगों की मदद के लिए आगे बढ़ेंगी, जिन्होंने इस दुख को महसूस किया है।

खबरों के मुताबिक, रविवार को दोपहर में करीब 3 बजे 48 वर्षीय नर्स नेपल्स के अस्पताल से अपनी ड्यूटी पूरी करके निकली थीं और अर्नाल्डो लुसी मेट्रोपार्क बस स्टॉप पर खड़े होकर बस का इंतजार कर रही थीं।

चूँकि, कोरोना महामारी के कारण हर जगह यातायात बाधित है। इसलिए उस दिन उनके बस स्टैंड पर पहुँचने के बाद भी बस आने में एक घंटा बचा था और आसपास कोई नहीं था। अचानक बाड़ के ऊपर से आरोपित युवक ने छलांग लगा दी और उनकी तरफ दौड़ने लगा।

पहले महिला नर्स को लगा कि वह कोई चोर है, जो उनसे उनका पर्स चुराने आ रहा है। इसलिए खुद को अकेला पाकर वे उसे खुद ही अपना पर्स देने लगी। लेकिन, जब तक नर्स पूरा मामला समझ पातीं। युवक उन्हें खींचता हुआ ले गया।

नर्स बताती हैं “वह मेरे पूरे शरीर पर हाथ लगा रहा था और जब मैं उसका विरोध कर रही थी, खुद को बचाने की कोशिश कर रही थी, तो वो गुस्सा हो रहा था।”

उन दर्दनाक 45 मिनटों को याद करते हुए गर्भवती नर्स कहती हैं कि उन्होंने इस दौरान बार-बार व्यक्ति से खुद को छोड़ने की गुहार लगाई और खुद के गर्भवती होने की बात बता बताकर रहम की भीख माँगी। मगर, वो व्यक्ति बार-बार यही कहता रहा, “मैं जो कर रहा हूँ, वो करने दो वरना मैं तुम्हें मार डालूँगा। सिर्फ़ खड़ी रहो और चिल्लाओ मत।”

नर्स, इटली के अखबार को उस दिन की आपबीती बताती हैं और कहती है, “वो व्यक्ति मुझसे साइज में दोगुना था और अपने शरीर का सारा भार मेरे बैक पर डाल रहा था। मेरी जीन्स टाइट थी और जब वो उसे नहीं उतार पाया तो मुझ पर गुस्सा उतारने लगा।”

उनके मुताबिक, उन्होंने इस बीच उस व्यक्ति को कहा भी अगर कोई इस दौरान आ गया तो वो गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पर वो उनकी बातों को सुनने की बजाय उनकी जींस उतारने की कोशिश करता रहा। इसके कारण उसकी उनकी पीठ और गर्दन पर चोट आ गई।

इन 45 मिनट में एक समय ऐसा भी आया जब उस शख्स ने गर्भवती नर्स को गला दबाकर मारने की कोशिश की। लेकिन, नर्स की खुशकिस्मती ये थी कि इसी बीच सामने से आती बस के एक ड्राइवर की नजर महिला पर पड़ी और उसने चिल्लाकर सबको घटना के बारे में बताया। इसके थोड़ी देर बाद पुलिस भी मौके पर पहुँची और आरोपित युवक को गिरफ्तार कर लिया। महिला की स्थिति देखते हुए उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया। उसके पति को पूरे वाकये के बारे में सूचना दी गई।

नर्स का कहना है कि वे अभी अपने काम पर वापस नहीं लौटी हैं, क्योंकि इस घटना ने उनके पूरे परिवार को झकझोर दिया है। उनका पति अब भी खुद को पूरी घटना के लिए दोषी मान रहा है। उसके जेहन में बस यही बात है कि वह अपनी पत्नी को बचाने में असमर्थ रहा।

तबरेज पर राहुल गाँधी ने मोटे-मोटे आँसू बहाए, सुभान अंसारी की लिंचिंग पर चुप क्यों: झारखंड के पूर्व CM रघुवर दास

झारखंड के दुमका में 11 मई को भीड़ ने पीट-पीटकर सुभान अंसारी की हत्या कर दी थी। इस मामले को लेकर राज्य के पूर्व सीएम रघुवर दास ने कॉन्ग्रेस और झामुमो से तीखे सवाल पूछे हैं।

सिलसिलेवार ट्वीट के जरिए उन्होंने सुभान अंसारी की मॉब लिंचिंग पर कॉन्ग्रेस की चुप्पी को लेकर सवाल पूछे हैं। कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गॉंधी, राहुल गॉंधी और प्रियंका गॉंधी को घेरा है।

पूर्व मुख्यमंत्री रघुवर दास ने ट्वीट करते हुए लिखा है कि 11 मई को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिला दुमका में सरेआम काठीकुंड, शिकारीपाड़ा थाना क्षेत्र में बकरी चोरी का आरोप लगाकर दो लोगों की निर्मम तरीके से पिटाई की गई। इनमें से एक सुभान अंसारी की मौत हो गई। मॉब लिंचिंग की इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना पर आखिर कॉन्ग्रेस चुप क्यों है?

दास ने एक के बाद एक कई ट्वीट करते हुए कॉन्ग्रेस पार्टी को निशाने पर लिया और 2019 में तबरेज अंसारी की मौत को मानवता पर धब्बा बताने वाली कॉन्ग्रेस को उसकी मानवता याद दिलाई। उन्होंने लिखा, “इस घटना को बीते 4 दिन हो गए, लेकिन मॉब लिचिंग के शिकार सुभान अंसारी के लिए न तो कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी को आँसू बहाने का समय मिला और न ही राहुल गाँधी व उनकी बहन प्रियंका गाँधी को इस पर कुछ बोलने या फिर इस पर कुछ ट्वीट करने का मन हुआ है।”

दास ने कॉन्ग्रेस से सवाल किया कि आखिर इनके (कॉन्ग्रेस) ट्वीट और आँसू भी सेलेक्टिव क्यों होते हैं? उन्होंने राहुल गाँधी और कॉन्ग्रेस नेता गुलाम नबी आजाद को आड़े हाथों लेते हुए लिखा, “राहुल गाँधी ने 17 जून 2019 को सरायकेला में तबरेज अंसारी पर हुए हमले पर मोटे-मोटे आँसू बहाए थे। गुलाम नबी आजाद ने सरायकेला की घटना के बाद पूरे झारखंड को मॉब लिचिंग का अड्डा बता दिया था। लेकिन सुभान अंसारी के मामले में अब तक गुलाम नबी आजाद ने भी अपनी जुबान नहीं खोली है।”

पूर्व सीएम ने चुप्पी पर सवाल उठाते हुए लिखा है, “ऐसा दोहरा व्यवहार सिर्फ इसलिए किया जा रहा है, क्योंकि उस समय झारखंड में भाजपा की सरकार थी। आज यहाँ झामुमो के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस, राजद और वामपंथियों की अवसरवादी सरकार शासन में है।”

उन्होंने राज्य सरकार से माँग की कि अंसारी के मामले की जाँच के लिए सरकार को एसआईटी का गठन करना चाहिए और उसकी पत्नी खैरून बीबी एवं पीड़ित परिवार की आर्थिक मदद भी की जानी चाहिए।

रघुवर दास ने कहा है कि हेमंत सोरेन राज्य की जनता को बताएँ कि वह और उनकी पार्टी तो दावा करती थी कि अभी सरकार में मॉब लिचिंग नहीं होगी तथा किसी की भी भूख से मौत नहीं मौत नहीं होगी, लेकिन अब इस तरह उनके गृह जनपद दुमका में हुई मॉब लिचिंग पर आखिर उनके पार्टी के नेताओं के होठ क्यों सिले हुए हैं।

उन्होंने एक पिछली घटना का जिक्र करते हुए लिखा, “रामगढ़ के गोला में संग्रामपुर गाँव में तीन अप्रैल को 17 वर्षीय दलित महिला उपासो देवी की भूख से हुई मौत हो गई थी, लेकिन उसकी मौत का जिम्मेदार आखिर कौन है?”

आपको बता दें कि बीते सोमवार (11 मई, 2020) शाम को मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के गृह जिला दुमका के काठीकुंड प्रखंड के झिलमिल गाँव में बकरी चोरी करने का आरोप लगाकर भीड़ ने पेड़ से बाँधकर दो लोगों की निर्मम तरीके से पिटाई की गई थी। इसमें 26 वर्षीय सुभान अंसारी ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि 22 वर्षीय दुलाल मिर्धा का हालत गंभीर बनी हुई है।

नरेंद्र मोदी को फेक न्यूज फैलाकर हराएँ: शेखर गुप्ता के द प्रिंट ने विपक्ष को बताए गुर

पिछले कुछ समय में फर्जी खबरों को फैलाने में मुख्यधारा मीडिया ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस बात के पर्याप्त सबूत हैं कि फेक न्यूज फैलाने के पीछे उनका मुख्य उद्देश्य द्वेष के अतिरिक्त कुछ नहीं हेता। द प्रिंट ने आज इसी बात को साबित करते हुए अपनी वेबसाइट पर एक लेख प्रकाशित किया है। जिसका लब्बोलुबाब यह है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को हराने के लिए विपक्ष फेक न्यूज फैलाए।

इस लेख में मुख्यत: इस बात पर जोर दिया गया कि लिबरलों को/विपक्षियों को नरेंद्र मोदी के खिलाफ़ छिड़ी जंग में किस प्रकार फेक न्यूज को बढ़ावा देना चाहिए। इस लेख में अपनी बातों को सही ठहराने के लिए द प्रिंट ने अमेरिकी थिंक-टैंक रैंड कॉर्पोरेशन के लिए लिखे गए क्रिस्टोफर पॉल और मिरियम मैथ्यूज के एक लेख का हवाला दिया है।

प्रिंट के लेख में तर्क दिया गया कि पूरे विश्व में आज झूठ को तेजी से फैलाना प्रोपेगेंडा फैलाने का सबसे शक्तिशाली उपकरण बनता जा रहा है। इसलिए जो लोग इस प्रोपेगेंडा को हराना चाहते हैं, उन्हें अपने झूठ को आग की तरह फैलाना होगा। जैसे हिंदी में कहते हैं कि लोहा ही लोहे को काटता है। जब जनता के मत को फर्जी खबरों और झूठों से बरगलाया जा रहा है, उस समय विपक्ष फैक्ट चेक करके पूरा खेल नहीं जीत सकता।

बता दें, इस लेख में हालाँकि, अपनी सारी बातें द प्रिंट ने सकारात्मक रूप से दर्शाने की कोशिश की है। लेकिन वास्तविकता में उनका क्या मतलब है इस बात को अच्छे से समझा जा सकता है।

द प्रिंट का ये लेख इतने बिंदुओं पर नहीं खत्म होता। लेख में अंत तक आते-आते अभिव्यक्ति की आजादी पर प्रतिबंध लगाने व राजनैतिक विरोधियों पर कार्रवाई करने का आह्वान की बात शामिल कर ली जाती है। साथ ही इस लेख में विपक्षियों को सुझाव दिया जाता है कि वे अपने विरोधियों के झूठ की श्रृंखला पर प्रहार करें।

लेखक चरणबद्ध तरीके से समझाता है कि कैसे विपक्षियों को हराया जा सकता है। वह कहता है कि अगर विपक्षी शासित राज्य अपने राज्यों में फर्जी खबरों और सांप्रदायिक घृणा फैलाने वालों पर शिकंजा नहीं कस रहे तो वह बहुत बड़ी गलती कर रहे हैं।

अब ये ध्यान देने वाली बात है कि ‘हेट स्पीच’ का मतलब जरूरी नहीं एक व्यक्ति के लिए जो हो, वहीं दूसरे व्यक्ति के लिए भी हेट स्पीच कहलाए। दरअसल, हर व्यक्ति अपने मतों के हिसाब से किसी की बातों को हेट स्पीच कहता है और सरकार भी अपना राजनैतिक पलड़ा देखते हुए इसकी परिभाषा तय करता है।

उदाहरण के लिए अर्नब गोस्वामी के केस में यही हुआ। जहाँ कॉन्ग्रेस पॉर्टी ने सोनिया गाँधी पर सवाल उठाए जाने को कम्यूनल वॉयलेंस यानी साम्प्रदायिक हिंसा करार दे दिया। साथ ही जहाँ-जहाँ कॉन्ग्रेस शासित राज्य थे, वहाँ उन पर शिकायत दर्ज हो गई और कार्रवाई की माँग उठने लगी। आज शेखर गुप्ता का द प्रिंट अपने इस लेख के जरिए जिन बातों को तर्कों में गढ़कर समझा रहा है, उसका निष्कर्ष यही है कि कैसे राजस्थान और छत्तीसगढ़ जैसे राज्यों में नरेंद्र मोदी के समर्थकों को दबाया जाए।

यहाँ स्पष्ट तौर पर बता दें कि मुख्यधारा मीडिया जो पिछले समय से फर्जी की खबरें फैला रहा है, वे केवल राजनीति के एक धड़े को फायदा फहुँचाने के लिए है। जाहिर है वो धड़ा भाजपा का नहीं है। इस काम में पिछले कुछ समय में शेखर गुप्ता का द प्रिंट सबसे आगे रहा है और अब तो इसके पीछे की वजह भी साफ हो गई है।

द प्रिंट तमाम झूठ फैलाने के बाद अपनी नैतिक श्रेष्ठता पर इतना आश्वस्त है कि लेख से ऐसी बातें बताने की कोशिश कर रहा है कि विपक्ष के पास राजनैतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए फेक न्यूज फैलाने की आज़ादी है और वे इसका इस्तेमाल कर सकते हैं।

याद दिला दें, द प्रिंट के लिए इस लेख को लिखने वाले शिवम विज वही पत्रकार हैं, जिन्होंने एक समय में कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को व्हॉइटवॉश करने की कोशिश की थी। अब इस लेख को पढ़कर भी यही लगता है कि मीडिया गिरोह में शिवम से लेकर शेखर गुप्ता तक के लिए फर्जी न्यूज फैलाना तब तक उचित है, जब तक इसका उपयोग नरेंद्र मोदी और हिंदुत्व को हराने के लिए किया जाए।