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मदुरा विजयम्: मदुरै सल्तनत पर विजयनगर साम्राज्य की शानदार जीत की गौरवशाली गाथा है महिला कवि गंगादेवी का महाकाव्य

मदुरा विजयम् 14 वीं शताब्दी में लिखा गया एक महाकाव्य है। वामपंथी इतिहासकार आपसे कहेंगे कि मध्ययुगीन भारत में, महिलाओं को अध्ययन करने का कोई अधिकार नहीं था और सामान्य तौर पर उनकी स्थिति काफी दयनीय थी।

मगर गौर करने की बात यह है कि इस असाधारण महाकाव्य को स्वयं एक महिला गंगा देवी ने लिखा था। इस महाकाव्य में वह अपने योद्धा पति कुमार कंपाना द्वितीय से जुड़े प्रसंगों का उल्लेख करती हैं, जिसकी वो खुद साक्षी रही हैं। हमने इससे पहले भारतीय इतिहास का एक शानदार अध्याय देखा है कि कैसे महाराणा प्रताप ने मुगलों को हराया था, हालाँकि, यह गौरवशाली विजय गाथा भी इतिहास की पुस्तकों से नदारद रही। इसी तरह मदुरा विजयम् भी एक ऐसी ही गौरवगाथा है।

विजयनगर का उदय

14 वीं शताब्दी का भारत लगातार बदलाव का समय था। 1320 तक, खिलजी साम्राज्य गिर गया था और तुगलक दिल्ली सल्तनत का अधिपति बन गया था। जौना खान, जिसे पागल राजा मुहम्मद बिन तुगलक के रूप में भी जाना जाता है, के अधीन साम्राज्य का काफी विस्तार हुआ और दक्षिण में सबसे दूर के क्षेत्रों तक पहुँच गया।

खिलजी के अधीन काफूर की मुहिमों ने पहले ही दक्षिण के राज्यों को कमजोर कर दिया था। तुगलक के अभियानों ने एक हजार से अधिक वर्षों तक स्थाई रुप से अडिग कई राज्यों को प्रभावी ढंग से समाप्त कर दिया। लेकिन ये जीत अल्पकालिक थी। कुछ ही वर्षों के भीतर, काकतीय साम्राज्य के पतन से विजयनगर साम्राज्य का प्रादुर्भाव हुआ और दक्षिण में मुगल संप्रभुता का नामोनिशान समाप्त हो गया। यह उस कहानी का एक छोटा सा हिस्सा है।

तुगलक साम्राज्य के टूटने के बाद दक्षिण में कई राज्य अस्तित्व में आए। विजयनगर और उसके दक्षिण में मदुरै सल्तनत भी उन्हीं में से थी। विजयनगर की स्थापना जिन दो भाइयों ने की थी उन्हें तुगलक द्वारा कैद कर लिया गया और दिल्ली ले जाया गया। वहाँ उन्हें इस्लाम अपनाने के लिए मजबूर कर दिया गया। लेकिन मौका मिलते ही वे दक्षिण की ओर भाग गए और ऋषि विद्यारण्य (बाद में शृंगेरी के जगद्गुरु शंकराचार्य) की शरण ली। विद्यारण्य ने उन्हें वापस हिंदू धर्म में परिवर्तित कर दिया और उन्हें दक्षिण भारत में हिंदू संप्रभुता को फिर से स्थापित करने का एक लक्ष्य दिया।

हरिहर विजयनगर (अब हम्पी) के पहले राजा थे। उनके बाद बुक्का राय का शासनकाल शुरू हुआ। उनका पुत्र अकम्पना एक महान सेनापति था और उसने पूरे दक्षिण भारत, ओडिशा के कुछ हिस्सों और बहमनी साम्राज्य के कई भागों तक अपना राज्य बढ़ाया। गंगा देवी उनकी पत्नी थीं।

मदुरै सल्तनत

मदुरै सल्तनत की स्थापना 1335 में हुई और मदुरै को राजधानी बनाया गया। जैसा कि मजहबी सल्तनत का रिवाज था, मदुरै मंदिर में प्रार्थना रोक दी गई। उन्होंने मंदिर के कई हिस्सों को नष्ट कर दिया। सुंदरेश्वर शिव की मूर्ति को एक दूसरी मूर्ति से बदलकर और पवित्र गर्भगृह को एक दीवार का निर्माण कर बचाया जा सका।

मदुरा विजयम् में, गंगादेवी ने मंदिर निर्माण की क्षय स्थिति, ब्राह्मणों के विनाश, गौ-मांस और शराब द्वारा पवित्र क्षेत्रों को परिभाषित करने और तुरुष्का (तुर्क) द्वारा उत्पन्न सामान्य अराजकता का वर्णन किया। मोरक्को के प्रसिद्ध यात्री इब्न बतूता द्वारा स्थानीय लोगों के खिलाफ अत्याचार भी दर्ज किए गए थे, जो इधर से होते हुए चीन गए थे। उनकी पुस्तक रिहला निम्नलिखित जानकारी देती है:

“हिन्दू कैदियों को चार वर्गों मे बाँटा गया और प्रत्येक वर्ग को ‘THE great Catcar’ के एक-एक द्वार की तरफ ले जाया गया। और वहाँ उनके शरीर को नुकीले हथियारों से छेद दिया गया। उसके बाद उनकी पत्नियों और बच्चों को मौत के घाट उतार दिया गया। नवजात शिशुओं को उनकी माँओं की गोद में ही मार दिया गया और उनके शवों को वहीं पर छोड़ दिया गया। इसके बाद उन्होंने एक के बाद एक जगलों के पेड़ों को काटना शुरू किया जैसे कि उससे पहले हिन्दू कैदियों को काटा था। ये ऐसा शर्मनाक कृत्य था, जिसे किसी भी अन्य राज्य या सल्तनत द्वारा किए जाने के बारे में मैने पहले कभी देखा, पढ़ा या सुना नहीं है।”

यह हृदय-विदारक घटना सिर्फ उनके द्वारा ही उल्लेखित नहीं हैं | गंगादेवी ने भी ऐसी ही स्थितियों का उल्लेख किया है। कुशासन के कारण, मदुरै भी अकाल और फिर बाद में प्लेग से पीड़ित हुआ था।

मदुरै सल्तनत पर विजयनगर की जीत

राजकुमार ने अपना काम निर्धारित कर लिया था। लेकिन मदुरै को जीतने से पहले, इसके आस-पास के क्षेत्रों का सुरक्षित होना महत्वपूर्ण था। तदनुसार, उन्होंने सबसे पहले कांचीपुरम (चेन्नई के निकट) के आसपास सुरक्षित क्षेत्रों पर कब्जा कर लिया जो कि दिल्ली सल्तनत के एक वफादार हिंदू जागीरदार के अधिकार में था और फिर दक्षिण की ओर मार्च किया। कहानी में एक जिज्ञासु तत्व पांड्यों की शाही तलवार है। यह एक दूत द्वारा कंपाना को भेंट किया गया था। यह पांड्यों के हाथों से विजयनगर तक दक्षिण की संप्रभुता के मार्ग का प्रतिनिधित्व करता है।

कुमार कंपाना, दिल्ली सल्तनत की सीमाओं तक पहुँच गए। मदुरा विजयम् ने युद्ध शुरू किया था और यह लड़ाई भयंकर थी। अनुभवी और शक्तिशाली विजयनगर सेना के सामने, सल्तनत की सेनाएँ हार रही थीं। उनका मनोबल बढ़ाने और लड़ाई खत्म करने के लिए, सुल्तान खुद मैदान में आया।

भारत का इतिहास ऐसे अनेक उदाहरणों से भरा पड़ा है, जहाँ राजा या सेनापति की अक्षमता के कारण सेनाएँ लगभग जीती गई लड़ाइयाँ हार गई हैं। चंदावर की लड़ाई को याद कर सकते हैं, जिसमें कन्नौज के जयचंद दिल्ली सुल्तान के खिलाफ या फिर 16 वीं शताब्दी में पानीपत में हेमचंद्र विक्रमादित्य की हार (1556)। वो जीत रहे थे मगर अंततः हार गए ।

इन दोनों लड़ाइयों में, हिंदू सेनाएँ, जीत की कगार पर आकर हार गई क्योंकि उनका राजा दुर्भाग्य से मारा गया था। एक तीर द्वारा अक्षम किया गया था। नेताविहीन सेनाएँ एक झटके में जीता हुआ युद्ध हार गईं। हालाँकि, यहाँ भाग्य कुमार कंपाना के साथ था।

एक भयंकर युद्ध हुआ, जिसमें बहादुर कुमार कंपाना ने पहली बार सुल्तान को एक लंबे समय तक द्वंद्वयुद्ध में हराया। सुल्तान ने एक तलवार ली और कंपाना पर हमला किया। कंपाना ने उसके वार को चकमा देते हुए एक ही वार में उसका सर धड़ से अलग कर दिया। दक्षिण भारत में इस्लामी अत्याचारी का सिर धूल में लुढ़क रहा था। शरीर थोड़ी देर हवा में स्थिर रहा, फिर लुढ़क गया। इस तरह लक्ष्य पूरा हो चुका था।

यह कॉमन एरा का वर्ष 1378 था। मंदिर को फिर से स्थापित किया गया, टूट-फूट की क्षतिपूर्ति की गई। यह विजयनगर, मदुरै के नायकों और जागीरदारों द्वारा कई शताब्दियों तक शोभायमान रही। श्रीरंगम के मंदिरों और मठों को इसकी पूर्ववत गरिमा के अनुसार पुनर्स्थापित किया गया ।

निष्कर्ष

दक्षिण भारत अगले 200 वर्षों तक हिंदुओं का गढ़ बना रहा। उसके बाद भी, विजयनगर के राजसी राज्य और विजयनगर, मैसूर वोडयार, मदुरै नायक आदि के जागीरदार राज्यों ने हिन्दू धर्म और लोगों को विदेशी उत्पीड़न से बचाया। मुगल कभी वहाँ नहीं पहुँच सकते थे। हैदर अली के उदय के बाद ही एक खतरा ज़रूर सामने आया। हालाँकि, मराठों ने उसका मुकाबला करने में सफलता प्राप्त की और अंग्रेजी की मदद से उसका वंश समाप्त कर दिया।

मदुरा विजयम् बुराई पर अच्छाई की जीत की गौरवशाली गाथा है। दुर्भाग्य से, हमारी पाठ्यपुस्तकों में इतिहास के ऐसे शानदार अध्यायों के लिए कोई जगह नहीं है। देश का आम हिंदू, इस्लामी आक्रमणकारियों के तहत अपनी तथाकथित 800 साल की गुलामी की कहानियों को सुनने-सुनाने में संतुष्ट हैं। लेकिन अब ऐसी गुलाम मानसिकता को दूर करने की जरूरत है। इस तरह के अदम्य वीरता के इतिहास, हिन्दू धर्म के पुनर्जागरण का एक आवश्यक हिस्सा हैं और उन्हें ये कहानियाँ बार-बार सुनाए जाने की आवश्यकता है।

नोट: अंग्रेजी में पवन पांडेय के इस मूल लेख का अनुवाद रचना झा ने किया है।

इस्लाम के विरोध में लिखने वाले गैर-मुस्लिम भारतीयों की लिस्ट बनाकर उसे मुस्लिम देशों में आने पर जेल भेजो: जाकिर नाइक

भगौड़ा इस्लामिक उपदेशक जाकिर नाइक इस्लामी देशों को राय देते हुए कह रहा है कि उन्हें लिस्ट बनाकर गैर-मुस्लिम भारतीयों को अपने देश में कार्रवाई करनी चाहिए।

जाकिर नाइक मनी लॉन्ड्रिंग और भड़काऊ भाषण देने का आरोपित है और वर्तमान में मलेशिया में रह रहा है। जाकिर नाइक का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है, जिसमें उसने गैर-मुस्लिम भारतीयों को सूचीबद्ध करने की बात कही है।

‘खाड़ी देश आने वाले गैर-मुस्लिम भारतीयों को करो अरेस्ट’

इस वीडियो में विवादित इस्लामी उपदेशक ज़ाकिर नाइक को कहते हुए सुना जा सकता है, “मैं ये सुझाव देता हूँ कि सिर्फ मुस्लिम देश ही क्यों, भारत में भी जो गैर-मुस्लिम इस्लाम पर उँगली उठाता है, तो उसका डेटाबेस तैयार किया जाना चाहिए। भारत में इस्लाम पर उँगली उठाने वाले मुख्य रूप से बीजेपी से जुड़े लोग हैं और उनमें से ज्यादातर लोग पैसे वाले हैं।”

इसके आगे जाकिर नाइक कहता है, “मैं बताता हूँ कि ज्यादातर भारतीय नेताओं का पैसा यूएई, खाड़ी देशों में होता है और उनमें से विदेश दौरे पर जाने वाले आधा से ज्यादा लोग मुस्लिम देशों या खाड़ी देशों का दौरा करते हैं।”

“मैं कुवैत के वकील को सलाह देता हूँ कि भारत में उन सभी गैर-मुस्लिमों का डेटाबेस तैयार करके कंप्यूटर में स्टोर कर लें। अगली बार जब भी वो किसी खाड़ी देश में आएँ, उन पर केस कीजिए और उन्हें गिरफ्तार कर सलाखों के पीछे भेज दीजिए।”

जाकिर नाइक का कहना है कि अगर 5 से 10 लोगों के साथ भी ऐसा किया जाए तो ज्यादातर लोग इस्लाम पर उँगली उठाना छोड़ देंगे। कम-से-कम 25% लोग तो डर ही जाएँगे और वो इस्लाम पर टिप्पणी नहीं करेंगे।

जाकिर नाइक के इस वीडियो को ट्विटर पर शेयर करते हुए @MJALSHRIKA ने लिखा है –

“आदरणीय डॉ. ज़ाकिर नाइक, हम आपके सुझावों का स्वागत करते हैं। कृपया जान लें कि हम अरब जगत में फासीवादी हिंदुत्व शासन द्वारा आपके साथ हुए अन्याय को नहीं भूले हैं। हम अपराधियों को न्याय दिलाने के लिए अपनी शक्ति के भीतर सब कुछ करेंगे।”

भगौड़ा इस्लामिक उपदेशक ज़ाकिर नाइक वर्ष 2016 से ही भारत छोड़कर भाग चुका है और जाँच एजेसियाँ उसके खिलाफ राजद्रोह और मनी लॉन्ड्रिंग जैसे गंभीर मामलों की जाँच कर रही हैं।

रमजान के महीने में 1 दिन में 2 बड़े आतंकी हमले: 2 नवजात समेत 40 लोगों की मौत, 60 घायल, ISIS ने ली जिम्मेदारी

रमजान के महीने में अफगानिस्तान मंगलवार को अलग-अलग जगह पर हुए दो आतंकी हमलों से दहल गया। इनमें से एक हमला आतंकियों ने वहाँ की राजधानी काबुल में स्थित एक मैटरनिटी अस्पताल पर किया और दूसरा हमला नंगरहार प्रांत में अंतिम संस्कार कार्यक्रम में किया गया।

काबुल में अस्पताल पर किए गए हमले में दो नवजात समेत उनकी माताओं और कई नर्सों को मिलाकर कुल 16 लोगों की मौत हो गई। वहीं नंगरहार प्रांत में अंतिम संस्कार के दौरान हुए आत्मघाती हमले में कम से कम 24 लोग मारे गए और 60 घायल हो गए।

काबुल वाली घटना में ग्रेनेड और बंदूक से लैस आतंकियों ने पुलिस की वर्दी में घुसकर उस अस्पताल के प्रसूति केंद्र में ये हमला किया, जो मानवीय सहायता के तहत यह केंद्र अंतरराष्ट्रीय संस्था डॉक्टर्स विदाउट बॉर्डर्स द्वारा संचालित किया जाता है। अस्पताल के एक हिस्से में इंटरनेशल मेडिकल चैरिटी और मेडिसिन सेन्स फ्रंटियर का भी ऑफिस है, जिसमें बड़ी संख्या में विदेशी कर्मी काम करते हैं। माना जा रहा है कि हमलावर के निशाने पर यह लोग थे।

वहीं, दूसरे हमले में एक आत्मघाती हमलावर ने देश के नंगरहार प्रांत में एक अंतिम संस्कार के कार्यक्रम को निशाना बनाया, जिसमें कम से कम 24 लोग मारे गए और 60 घायल हो गए। यहाँ आतंकी ने यह हमला तब किया, जब एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी के जनाजे में अनेक लोग शामिल हुए थे।

खबरों के मुताबिक, एक दिन में अफगानिस्तान को दो धमाकों से दहलाने वाले इन हमलों की जिम्मेदारी ISIS ने ली है। हमलों के बाद ISIS ने दावा किया कि इनमें उसका हाथ था।

वहीं, आतंरिक मंत्रालय के प्रवक्ता तारिक आर्यन ने ISIS द्वारा किए गए इन हमलों की निंदा करते हुए पूरी घटना को मानवता और अंतरराष्ट्रीय कानून के विरुद्ध बताया है।

पहली घटना में जहाँ विदेशियों को निशाना बनाने की बात निकलकर सामने आई है। वहीं दूसरी घटना में मोहम्मद उमर के अनुसार, हमले के जरिए पूर्व परिषद सदस्य लाला खान को निशाना बनाने की बात सामने आई है।

उन्होंने बताया कि लाला खान के अमेरिकी खुफिया विभाग से करीबी संबंध थे और माना जाता था कि उन्होंने अल-कायदा और दाएश के खिलाफ अपने सैन्य अभियानों को कॉर्डिनेट किया था। इस घटना में खान समेत उनके दो भाई मारे गए हैं।

ममता बनर्जी का BJP शासित राज्यों की तरह श्रम कानूनों में बदलाव से इनकार, आर्थिक पैकेज को बताया ‘बड़ा जीरो’

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के लिए 20 लाख करोड़ रूपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा के बाद पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की प्रतिक्रिया आई है।

ममता बनर्जी का कहना है कि केंद्र द्वारा घोषित किए गए इस पैकेज में राज्यों के लिए कुछ नहीं है और यह एक ‘बड़ा ज़ीरो’ है। इसके साथ ही ममता ने UP-MP की तर्ज पर अर्थव्यवस्था में सुधार के लिए अपनाई गई नीतियों को लागू करने से भी स्पष्ट मना किया है।

ममता बनर्जी कोरोना वायरस की महामारी के दौरान लगातार केंद्र सरकार की नीतियों का विरोध करती नजर आ रही हैं। यही वजह है कि कई बार केन्द्रीय गृह मंत्रालय बंगाल राज्य को इस बारे में चेतवानी जारी करनी पड़ी हैं।

उल्लेखनीय है कि हाल ही में कोरोना वायरस महामारी के कारण जारी देशव्यापी लॉकडाउन के बीच उतर प्रदेश (UP) और मध्य प्रदेश (MP) की राज्य सरकारों ने अर्थव्यवस्था में आई शिथिलता को दूर करने के लिए श्रम कानून (Labour Law) में सुधार के लिए कई महत्वपूर्ण फैसले लिए हैं।

मध्य प्रदेश सरकार ने कॉटेज इंडस्ट्री यानी कुटीर उद्योग और छोटे कारोबारों को रोजगार, रजिस्ट्रेशन और जाँच से जुड़े विभिन्न जटिल लेबर नियमों से छुटकारा देने की पहल की है। इसके साथ ही मध्य प्रदेश सरकार ने कंपनियों और ऑफिस में काम के घंटे बढ़ाने की छूट जैसे अहम ​फैसले भी लिए हैं।

वहीं, उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य में मौजूद सभी कारखानों और मैन्युफैक्चरिंग प्लांट को वर्तमान में लागू श्रम अधिनियमों में सशर्त अस्थायी छूट प्रदान करने का फैसला किया है। हालाँकि श्रम कानूनों में बच्चों और महिलाओं से संबंधित प्रावधान जारी रहेंगे।

केंद्र सरकार पर पक्षपात का आरोप

ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर पश्चिम बंगाल के साथ पक्षपात करने का भी आरोप लगाया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ तमाम मुख्यमंत्रियों की वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए हुई बैठक के दौरान भी ममता बनर्जी ने कहा था कि बंगाल के लोग संघवाद का सम्मान करते हैं और दृढ़ता के साथ आपके साथ खड़े हैं।

इसके साथ ही ममता ने यह भी कहा- “लेकिन मेरा विनम्र निवेदन है कि आप संघीय ढाँचे को ना तोड़ें। संकट के इस समय में हमें इससे निपटना जरूरी है, हम लगातार ऐसा करते रहेंगे। लेकिन अगर आप फैसला लेने के बाद बैठक करेंगे तो इस तरह की बैठक का क्या फायदा है।”

हिंदू लड़की कविता कुमारी का अपहरण और धर्मांतरण: Pak के मियाँ मिट्ठू ने कबूल करवाया इस्लाम, Video Viral

कोरोना महामारी के बीच पाकिस्तान में अल्पसंख्यकों पर अत्याचार लगातार जारी है। खबर है कि वहाँ एक बार फिर एक हिंदू लड़की का अपहरण करके उसका धर्मांतरण करवाया गया है।

लड़की की पहचान कविता कुमारी के रूप में हुई है और पूरा मामला सिंध प्रांत के घोटकी इलाके के बारझुंडी का है। बताया जा रहा है कि इस घटना के पीछे भी मियाँ मिट्ठू का ही हाथ है।

पाकिस्‍तानी मानवाधिकार कार्यकर्ता राहत ऑस्टिन के मुताबिक, कविता का पहले मुस्लिम कट्टरपंथियों द्वारा अपहरण किया गया और बाद में उसे मियाँ मिट्ठू के पास ले जाया गया। इसके बाद मियाँ मिट्ठू ने जबरन कविता को इस्‍लाम धर्म कबूल कराया।

ऑस्टिन ने इस मामले के संबंध में अपने ट्विटर पर एक वीडियो भी डाली है। वीडियो में कविता को मियाँ मिट्ठू के साथ बैठकर इस्लाम कबूल करते देखा जा सकता है।

गौरतलब है कि पाकिस्तान के सिंध प्रांत में ये पहला मामला नहीं है, जब सिंध प्रांत में किसी हिंदू लड़की को मियाँ मिट्ठू की ‘आर्मी’ ने जबरन धर्म परिवर्तन करवाया हो। इससे पहले पिछले साल महक केसवानी का भी एक मामला आया था। उस समय महक का धर्म परिवर्तन भी इसी मियाँ मिट्ठू ने करवाया था। और उससे भी पहले की बात करें तो, होली के अवसर पर घोटकी से ही 2 नाबालिग हिंदू बहनों रवीना और रीना को अगवा कर उनका धर्म परिवर्तन कराया गया था।

नवभारत टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ऑस्टिन कहते हैं कि मियाँ मिट्ठू के रसूख का अंजादा इस बात से लगाया जा सकता है कि पाकिस्‍तान के प्रधानमंत्री इमरान खान उसे अपना प्रेरणास्रोत बताते हैं। पाकिस्‍तान में सबसे शक्तिशाली कहे जानी वाली सेना के प्रमुख कमर जावेद बाजवा खुद उससे मिलने जाते हैं और उसे पैसे देते हैं। ऑस्टिन के मुताबिक मियाँ मिट्ठू की अपनी प्राइवेट आर्मी है और उसके ‘हरम’ में बड़ी संख्‍या में लड़कियाँ ‘सेक्‍स स्‍लेव’ के रूप में रहती हैं जो उसके अतिथियों को ‘खुश’ करने का काम करती हैं।

ऑस्टिन की मानें तो पाकिस्तान में धर्म परिवर्तन के इस खेल को बेहद सुनियोजित ढंग से चलाया जा रहा है। पाकिस्तान सरकार कट्टरपंथियों को आर्थिक, कानूनी, और प्रशासनिक मदद देती है और सिंध प्रांत में इस खेल को मौलवी मियाँ मिट्ठू के नाम से पहचाने जाने वाले पीर अब्दुल हक द्वारा चलाया जाचा है।

मियाँ मिट्ठू घोटकी के भारचुंडी दरगाह में रहता है और अगर कोई कट्टरपंथी, किसी लड़की का अपहरण करता है या फिर कोई लड़की धर्म परिवर्तन करना चाहती है, तो फिर उसे इसके पास लाया जाता है और ये फिर उसका इस्लाम में परिवर्तन कराता है।

साल 2016 के आँकड़ों के अनुसार, उसके खिलाफ 117 मामले दर्ज हो चुके हैं। पाकिस्तान में हिंदू लोग मियाँ मिट्ठू के खिलाफ कई बार सड़कों पर भी उतरे हैं। लोगों की माँग है कि उसे गिरफ्तार किया जाए। पाकिस्तान में ये इस्लामी कट्टरता खुलेआम चल रही है, जिसमें मियाँ मिट्ठू नाम के लोग बिना डरे अपराध करते हैं।

मियाँ मिट्ठू की तस्वीर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान और पाकिस्तान के सेना प्रमुख जनरल कमर जावेद बाजवा के साथ भी देखी जा सकती है।

पाक के सिंध प्रांत में धर्म परिवर्तन की फैक्ट्री चलाने वाला मियाँ मिट्ठू

MSME को बिना गारंटी ₹3 लाख करोड़ का लोन, ₹15000 से कम वेतन वालों का EPF देगी सरकार

अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिये प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 20 लाख करोड़ रुपए के राहत पैकेज का ऐलान किया है। इसके साथ ही PM मोदी ने ‘आत्मनिर्भर भारत‘ के लिए तैयारियाँ करने की बात कही।

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आज प्रेस कॉन्फ्रेंस के माध्यम से इस आर्थिक पैकेज का ब्यौरा दे रही हैं। निर्मला सीतारमण की प्रेस वार्ता दिल्ली स्थित नेशनल मीडिया सेंटर में जारी है।

वित्त मंत्री इस बात की जानकारी दे रही हैं कि आर्थिक पैकेज में किस सेक्टर के लिए क्या और कितना प्रावधान किया गया है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारण के साथ गृह राज्यमंत्री अनुराग ठाकुर भी प्रेस वार्ता में मौजूद हैं।

प्रेस कॉन्फ्रेंस की शुरुआत करते हुए वित्त मंत्री ने कहा कि आत्मनिर्भर भारत का मतलब यह नहीं है कि भारत को एक अलगाववादी देश होना चाहिए।

20 लाख करोड़ में किसे क्या: मुख्य बातें

  • लोकल ब्रांड को प्रोत्साहन देकर ग्लोबल बनाने पर जोर दिया जाएगा।
  • लैंड, लेबर और लिक्विडिटी के जरिए हमारा लक्ष्य भारत में इन्वेस्टमेंट को बढ़ावा देना है।
  • कोरोना के कारण जैसे ही लॉकडाउन की घोषणा हुई सरकार 1.7 लाख करोड़ रुपए का पैकेज लेकर आई और हमने यह सुनिश्चित किया कि देश का कोई गरीब, किसान और मजदूर भूखा ना रहे।
  • जिस MSME का टर्नओवर 100 करोड़ रुपए है, वे 25 करोड़ रुपए तक लोन ले सकते हैं।
  • एमएसएमई को क्रेडिट फ्री लोन दिया जाएगा।
  • MSME को 3 लाख करोड़ रुपए का लोन गारंटी फ्री मिलेगा।
  • 45 लाख एमएसएमई को इससे फायदा मिलेगा।

अनुराग ठाकुर ने कहा कि COVID-19 देश के सामने संकट खड़े किए हैं और पीएम मोदी ने देश के सामने आत्मनिर्भर बनाने का लक्ष्य रखा है। उन्होंने कहा कि कोरोना में दुनिया के मुकाबले भारत का अच्छा कदम रहा है।

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा – “मध्यम, सूक्ष्म, लघु उद्योग, कुटीर उद्योग और घरेलू उद्योग भारतीय अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं। इन MSME’s को 3 लाख करोड़ रुपए का कोलेट्रल फ्री ऑटोमैटिक लोन दिया जाएगा। इसमें किसी भी तरह की गारंटी और कोई कोलेट्रल देने की जरूरत नहीं है।”

वित्त मंत्री ने कहा –

MSME की परिभाषा क्या है, हम यह बता दें। हम MSME क्षेत्र की परिभाषा बदल रहे हैं। कई बार MSME आगे बढ़ जाते हैं लेकिन फिर भी वह इसका लाभ लेना चाहते हैं।
MSME को पहले सिर्फ निवेश के आधार पर परिभाषित किया जाता था, लेकिन अब यह टर्नओवर के आधार पर होगा।
₹1 करोड़ तक के MSME को भी माइक्रो यूनिट माना जाएगा, जबकि यह पहले ₹25 लाख था।
हम टर्नओवर के हिसाब से भी माइक्रो यूनिट की परिभाषा बदल रहे हैं। ₹1 करोड़ निवेश और ₹5 करोड़ का टर्नओवर माइक्रो यूनिट होगा।
अब सूक्ष्म उद्योग 1 करोड़ का निवेश और 5 करोड़ का टर्नओवर होगा। स्मॉल इंडस्ट्री 10 करोड़ का निवेश और 50 करोड़ का टर्नओवर माना जाएगा।
मीडियम इंडस्ट्री 20 करोड़ का निवेश और 100 करोड़ का टर्नओवर माना जाएगा।

वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा, “₹25 लाख से लेकर ₹1 करोड़ रुपए की इन्वेस्टमेंट कर जो ₹5 करोड़ तक का व्यापार करेगा माइक्रो यूनिट कहलाएगा। स्मॉल के लिए ₹10 करोड़ तक का निवेश और ₹50 करोड़ तक का कारोबार और मीडियम में ₹20 करोड़ तक का निवेश और ₹100 करोड़ तक के टर्नओवर का प्रावधान किया गया है।”

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा कि 15000 रुपए से कम सैलरी वालों को सैलरी का 24% सरकार पीएफ में जमा करेगी। जबकि प्राइवेट कंपनियों के लिए ईपीएफ का हिस्सा अगले तीन महीने के लिए घटाकर 10-10% किया गया।

Income Tax 2019-20 भरने की तारीख को 31 जुलाई 2020 से बढ़ाकर 30 नवंबर किया गया।

निजामुद्दीन मरकज़ से जुड़े 700 विदेशी तबलीगी जमातियों पर कार्रवाई, पासपोर्ट समेत सभी दस्तावेज जब्त

तबलीगी जमात के मरकज मामले की जाँच कर रही दिल्ली पुलिस ने 700 विदेशी जमातियों के डॉक्यूमेंट सीज किए हैं। यह सभी जमाती निजामुद्दीन स्थित मरकज में आए थे। सभी के पासपोर्ट समेत कई दस्तावेज क्राइम ब्रांच ने सीज किया है, ताकि ये देश छोड़कर भाग नहीं सके। इन सभी विदेशी जमातियों से मरकज और मौलाना साद को लेकर पूछताछ होगी।

गौरतलब है कि मरकज में इंडोनेशिया, मलेशिया, थाइलैंड, ईरान, चीन और बांग्लादेश समेत कई देशों से जमाती आए हुए थे। मरकज में शामिल होने के बाद यह लोग देश के अलग-अलग हिस्सों में गए थे। मरकज का कोरोना कनेक्शन सामने आने के बाद सभी विदेशी जमातियों को क्वारनटाइन किया गया था।

इसमें से कई विदेशियों पर वीजा नियमों का उल्लंघन करने के आरोप में केस दर्ज किए गए हैं। अब इन 700 विदेशी जमातियों का पासपोर्ट सीज कर दिया गया है।

तबलीगी जमात से जुड़े हजारों लोगों ने हाल ही में अपना कोरोना क्वारंटाइन पूरा किया है। दिल्ली सरकार ने पिछले हफ्ते जिलाधिकारियों को यह निर्देश दिया था कि वे तबलीगी जमात के 4000 सदस्यों को क्वारंटाइन सेंटरों से छोड़ दें, यानी सबको घर जाने की इजाजत मिल गई थी। इसमें भारत के अलग-अलग राज्यों के जमातियों को घर जाने की छूट थी।

उल्लेखनीय है कि तबलीगी जमात का निजामुद्दीन स्थित मरकज कोरोना संक्रमण का हॉटस्पॉट बनकर उभरा था। यहॉं हुए कार्यक्रम में भारत सहित कई देशों के जमाती शामिल हुए थे। मार्च में कई देशों के हजारों तबलीगी जमात के सदस्यों ने यहाँ आयोजित मजहबी कार्यक्रम में भाग लिया था, जिसमें कोरोना वायरस से जुड़े चेतावनियों और सावधानियों का खुलेआम उल्लंघन किया गया था।

इस मामले में जाँच में जुटी क्राइम ब्रांच ने मौलाना साद के बेटे को अपने कार्यालय में बुलाकर करीब 2 घंटे पूछताछ की। पूछताछ के दौरान उन्होंने साद के बेटे से 20 लोगों की जानकारी माँगी जो दिल्ली के मरकज में न केवल शामिल थे, बल्कि मरकज़ प्रबंधन टीम का हिस्सा थे।

क्राइम ब्रांच को अब तक की पड़ताल में पता चला है कि मरकज के 20 ऐसे कर्मचारी हैं जो यहाँ आने-जाने वाले जमातियों की व्यवस्था से जुड़े थे वे केस दर्ज होने के बाद से गायब हैं। अब चूँकि साद का बीच वाला बेटा मुख्यालय की गतिविधियों में अधिक सक्रिय है और यही प्रबंधन से जुड़े 6 पदाधिकारियों के साथ ज्यादा बैठक भी करता था, इसलिए क्राइम ब्रांच ने उसे बुलाकर पूछताछ की और तबलीगी जमात मुख्यालय की गतिविधियों से जुड़े दस्तावेजों के बारे में भी जानकारी माँगी।

पश्चिम बंगाल: कोरोना संक्रमण के संदेह पर हॉस्पिटल ने बुजुर्ग को भर्ती करने से किया इनकार, हुई मौत

कोरोना संकट के बीच पश्चिम बंगाल के कोलकाता के एक प्राइवेट हॉस्पिटल का एक बेहद ही अमानवीय चेहरा सामने आया है। अस्पताल ने 76 साल के एक बुजुर्ग को एडमिट करने से इनकार कर दिया। इसके बाद उस रोगी की मृत्यु हो गई। मृतक के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि अस्पताल ने इस संदेह पर एडमिट करने से इनकार कर दिया कि वह कोरोना से संक्रमित हैं। बुजुर्ग को बुढापे संबंधी कई बीमारियाँ थीं।

मरीज के दामाद मुख्तार आलम ने PTI को बताया कि दरभंगा के रहने वाले शाहिद अहमद याहिया को उनका इलाज करने वाले डॉक्टर की सिफारिश पर अपोलो ग्लेनिगल्स अस्पताल में भर्ती करने के लिए 9 मई को कोलकाता लाया गया था। याहिया पार्किन्सन रोग से पीड़ित थे, जो कोलकाता के एक डॉक्टर के संपर्क में थे।

कोलकाता के रहने वाले मुख्तार आलम ने बताया कि डॉक्टर ने दरभंगा के एक अस्पताल के आईसीयू में भर्ती याहिया को बेहतर इलाज के लिए यहाँ लाने के लिए कहा।

मुख्तार आगे बताते हैं, ‘‘प्रशासन से आवश्यक पास लेकर हमलोग आईसीयू एम्बुलेंस में दरभंगा से आए और उन्हें सीधे अपोलो ग्लेनिगल्स अस्पताल ले गए। जहाँ डॉक्टरों ने हमें कुछ घंटों तक इंतजार कराया और फिर उनकी कुछ जाँच की गई, जिस दौरान मेरे ससुर अस्पताल के गलियारे में स्ट्रेचर पर लेटे हुए थे।’’

आलम ने बताया कि कुछ देर बाद एक डॉक्टर ने अचानक से आकर कहा कि उनके कोरोना वायरस से संक्रमित होने की आशंका है और उन्हें एमआर बांगुर अस्पताल या किसी अन्य सरकारी अस्पताल में ले जाना चाहिए जो कोरोना वायरस के मामलों का इलाज कर रहा है।

आलम ने कहा, ‘‘मेरे ससुर को संक्रमण का कोई लक्षण नहीं था। मुझे नहीं पता कि अपोलो में डॉक्टरों ने उन्हें भर्ती करने से इनकार क्यों किया। उन्होंने उन्हें कोरोना वायरस का संदिग्ध बताया और उन्हें कोरोना वायरस रोगियों का इलाज करने वाले एक सरकारी अस्पताल में रेफर कर दिया।’’

याहिया के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया कि उनकी हालत बहुत गंभीर थी, लेकिन अपोलो ग्लेनिगल्स अस्पताल के डॉक्टरों ने उस कठिन समय को उनके इलाज के बजाय बहस करने में बर्बाद कर दिया।

हालाँकि, अस्पताल के अधिकारी ने बचाव करते हुए कहा, “अस्पताल में हर मरीज की कोविड-19 जाँच की जा रही है। और अगर कोई व्यक्ति संदिग्ध है, तो प्रवेश से पहले एक पुष्टि परीक्षण किया जाता है। लेकिन कोविड-19 वार्ड में कोई बिस्तर नहीं हैं, तो हम अन्य रोगियों के इस खतरनाक वायरस के संपर्क में आने का जोखिम नहीं ले सकते। इसलिए हम कुछ मरीजों को सरकारी अस्पताल में रेफर करते हैं।”

याहिया को फिर ईएम बाईपास से दूसरे निजी अस्पताल में ले जाया गया। वहाँ भी उन्हें भर्ती नहीं किया गया। इसके बाद उन्हें सरकारी एमआर बांगुर अस्पताल ले जाया गया।

आलम ने कहा, ‘‘उन्हें 9 मई को एमआर बांगुर अस्पताल के आइसोलेशन वार्ड में भर्ती कराया गया था और 11 मई को तड़के करीब 4.15 बजे उनकी मृत्यु हो गई।’’ शाहिद अहमद याहिया को कोविड-19 जाँच में संक्रमित नहीं पाया गया था।

डेथ सर्टिफिकेट में उनकी मौत की वजह कार्डियोरेस्पिरेटरी का फेल होना, स्टेज 3 मधुमेह मेलेटस और क्रोनिक किडनी बीमारी बताया गया था। आलम ने कहा, ‘‘हम न्याय चाहते हैं और डॉक्टरों के खिलाफ कानूनी कदम उठाएँगे जिन्होंने उन्हें भर्ती करने से इनकार कर दिया था।’’

CAPF कैंटीनों में होगी सिर्फ स्वदेशी उत्पादों की बिक्री, आत्मनिर्भर भारत के लिए अमित शाह की घोषणा

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के समर्थन में गृह मंत्री अमित शाह ने ऐलान किया है कि सभी केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों (CAPF) की कैंटीनों पर अब सिर्फ स्वदेशी उत्पादों की ही बिक्री होगी।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने अपने ट्विटर एकाउंट से जानकारी देते हुए बताया कि जून 01, 2020 से देशभर की सभी CAPF कैंटीनों पर यह आदेश लागू होगा। इससे लगभग 10 लाख CAPF कर्मियों के 50 लाख परिजन स्वदेशी उत्पादों का उपयोग करेंगे।

यह घोषणा गृह मंत्री अमित शाह ने पीएम नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत अभियान के समर्थन में की है।

आत्मनिर्भर भारत

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार रात 8 बजे अपने सम्बोधन में देश में कोरोना संकट के दौरान ‘आत्मनिर्भर भारत’ का नारा दिया है। प्रधानमंत्री के इस नारे के पीछे स्वदेशी चीजें अपनाने का मूल मंत्र छिपा है। उन्होंने कहा कि हमें स्थानीय उत्पादन को महत्व देना होगा।

पीएम मोदी ने कहा कि कोरोना संकट ने हमें मुसीबत में डालने के साथ ही एक अवसर भी दिया है और हमें इस अवसर को भुनाने के लिए पूरी तरह तैयार होना होगा।

अर्थव्यवस्था और बाजार में सुधार के लिए ₹20 लाख करोड़ के आर्थिक पैकेज की घोषणा करते हुए उन्होंने कहा कि देश के लोगों को भी भारत को आत्मनिर्भर बनाने की मुहिम में आगे आना होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने आज ही आत्मनिर्भरता और स्थानीय उत्पादन पर जोर देते हुए ‘आत्मनिर्भर भारत’ के लिए ₹20 लाख करोड़ रुपए के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है।

PM मोदी ने अपने भाषण में कहा कि आज कोरोना वायरस की महामारी के समय विश्व हमारी ओर आशा की नजरों से देख रहा है। भारत ने वायरस से लड़ने में मददगार दवाइयाँ उपलब्ध करवाई।

आत्मनिर्भर भारत के लिए पैकेज की घोषणा करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि इन सबके जरिए देश के विभिन्न वर्गों को, आर्थिक व्यवस्था की कड़ियों को, 20 लाख करोड़ रुपए का संबल मिलेगा, सपोर्ट मिलेगा। 20 लाख करोड़ रुपए का ये पैकेज, 2020 में देश की विकास यात्रा को, ‘आत्मनिर्भर भारत अभियान’ को एक नई गति देगा।

महाराष्ट्र के मदरसों से छात्र पहुँचे बिहार, अचानक बढ़े कोरोना संक्रमण से ग्रीन जोन भी हुआ ऑरेंज

महाराष्ट्र के मदरसों की लापरवाहियों ने बिहार की चिंता बढ़ा दी है। कुछ समय पहले तक बिहार सुशासन बाबू के विज्ञापन के लिए प्रसिद्ध था। अब कोरोना के फैलते प्रकोप के कारण सुर्खियों में है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, मंगलवार तक वहाँ पर एक ही दिन में 130 मामले सामने आए, जिसके बाद वहाँ कुल मरीजों की संख्या 879 हो गई है। चिंताजनक बात ये है कि मंगलवार को मिलने वाले 130 केसों में से 124 मरीज प्रवासी हैं यानी वे लोग जो राज्य में बाहर के प्रदेशों से हाल में लौटे।

ऐसे में इस बीच महाराष्ट्र के कुछ मदरसों से भी निकलकर कुछ छात्र विशेष ट्रेन से बिहार पहुँचे, जिनमें से कई छात्र रैंडमली जाँच में कोरोना संक्रमित पाए गए।

इन छात्रों का कहना है कि इन्हें महाराष्ट्र में स्क्रीनिंग करके ट्रेन में बैठाया गया। मगर सवाल उठता है कि जब बिहार लौटने के बाद इनमें संदिग्धता दिखने के कारण इन्हें तुरंत क्वारंटाइन कराया गया। तो, फिर महारष्ट्र से इन्हें यहाँ आने की अनुमति कैसे मिल गई।

गौरतलब है कि विशेष ट्रेनों को संचालित करने से पहले ये निर्देश दिए गए थे कि राज्य सरकारें इस बात का ध्यान दें कि यात्रियों की बाकायदा स्क्रीनिंग हो। तभी उन्हें ट्रेन से आने-जाने इजाजत दी जाए।

मगर, बावजूद इसके ऐसे मामले सामने आए जब बिहार के अधिकांश प्रवासी (छात्र व मजदूर) अपने साथ अपने घर कोरोना लेकर पहुँचे। इनमें महाराष्ट्र से लौटे मदरसों के छात्र भी शामिल हैं, जिनकी वजह से सहरसा जैसा ग्रीन जोन इलाका ऑरेंज जोन में बदल गया।

प्रवासियों के कारण ग्रीन जोन से ऑरेंज जोन में पहुँचा सहरसा

1 मई तक बिहार में ग्रीन जोन में शेखपुरा, अररिया, जमुई, कटिहार, खगरिया, किशनगंज, मुजफ्फरपुर, पश्चिम चंपारण, सहरसा, समस्तीपुर, शिवहर, सीतामढ़ी और सुपौल क्षेत्र आते थे। लेकिन वर्तमान में बस जमुई ही एक ऐसा क्षेत्र है जहाँ कोरोना का 1 मामला पाया गया है। अन्यथा हर इलाके में कोरोना जत्थे में पहुँच चुका है।

सहरसा जैसे इलाको में कोरोना केसों की बढ़ोतरी इसी का एक उदाहरण है। जहाँ 3 दिन में महज 10 कोरोना के केसों को रिकॉर्ड किया गया और अचंभे की बात ये थी कि दसों मामले महाराष्ट्र के नंदूरबार मदरसे से आए थे। जिनमें 5 सहरसा बस्ती के रहने वाले थे, 1 सोनबर्षा के सहमौरा, 1 सिमरी बख्तियारपुर के मदनपुरा का केस था। इसके अलावा अन्य तीन केस भी मदरसे से जुड़े थे।

11 मई को दैनिक भास्कर में प्रकाशित संबंधित खबर

यहाँ बता दें कि महाराष्ट्र के नंदूवार मदरसे से 6 मई को स्पेशल ट्रेन से कुल 994 छात्र बिहार लौटे। इनमें से 180 केवल सहरसा से थे। इन सभी को प्रशासन ने सहरसा में स्क्रीनिंग के बाद होम क्वारंटाइन में उनके अभिभावकों को सौंपा था।

मगर, जिला प्रशासन द्वारा कराए गए रैंडम जाँच में इनमें से 10 केस कोरोना पॉजिटिव निकल आए। जिलाधिकारी के मुताबिक राज्य में 40 रैंडम सैंपलिंग ली गई थी। इनमें से 10 की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जबकि 21 की नेगेटिव और 12 की रिपोर्ट्स का अभी इंतजार है।

अभी फिलहाल बता दें कि सहरसा के शहरी इलाके में पूरे 5 मामले आने के बाद जिला प्रशासन ने इसे सील कर दिया और आसपास के कई इलाकों को कंटेनमेंट जोन घोषित किया गया।

अक्लकुंआ मदरसे से लौटे छात्रों में 7 कोरोना पॉजिटिव

इसी प्रकार महाराष्ट्र के अक्लकुंआ मदरसे से भी बीते दिनों कई छात्र बिहार लौटे। इनमें से 104 मदेहपुर के विभिन्न प्रखंडों के थे। इन्हें 5 मई को महाराष्ट्र से चलने वाली विशेष ट्रेन 6 नई को मदेहपुर लेकर पहुँची थी। जिसके बाद संदिग्ध लक्षणों को देखते हुए कई छात्रों को क्वारंटाइन कराना पड़ा।

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7 मई को जब इनके सैंपल लिए गए, 9 मई को आई रिपोर्ट में 7 छात्र कोरोना पॉजिटिव पाए गए। जिसके बाद इलाके में कोरोना केसों की संख्या 2 से बढ़कर 9 हो गई। इनमें नरदह के 5, कुरसंडी के 1 और घैलाढ़ के 1 छात्र को कोरोना संक्रमित पाया गया।

इसी प्रकार मंगलवार तक पटना में 17, खगडिया, पश्चिम चंपारण एवं जहानाबाद में 16-16, रोहतास में 13, नालंदा में 12, मधुबनी में चार, मुजफ्फरपुर में तीन, गोपालगंज, औरंगाबाद सारण, नवादा, शेखपुरा एवं समस्तीपुर में दो-दो तथा बांका, पूर्णिया, भागलपुर, सिवान, कटिहार, भोजपुर, मुंगेर, जमुई एवं लखीसराय में एक-एक शख्स के संक्रमित होने की पुष्टि हुई ।

बिहार में कोरोना केसों की संख्या

प्रभात खबर की रिपोर्ट के अनुसार, बिहार में जिलेवार तौर पर कोरोना वायरस संक्रमण के मामले अब तक सबसे अधिक मुंगेर में 116 में सामने आए हैं। इसके बाद पटना में 80, रोहतास में 72, नालंदा में 63, बक्सर में 56, बेगूसराय में 40, सिवान में 34, कैमूर में 32, मधुबनी में 30, पश्चिम चंपारण एवं खगडिया में 27—27, भागलपुर में 26, गोपालगंज में 22, जहानाबाद में 21, भोजपुर में 21, दरभंगा में 18, औरंगाबाद एवं नवादा में 15-15, पूर्वी चंपारण में 14, कटिहार, मुजफ्फरपुर एवं अरवल में 12—12, समस्तीपुर में 11, सहरसा, सारण एवं शेखपुरा में 10-10, मधेपुरा एवं किशनगंज में 9-9, गया में 1, सीतामढी एवं बांका में 7-7, लखीसराय एवं सुपौल में 5-5, अररिया, वैशाली एवं पूर्णिया में 4-4, शिवहर में 3 तथा जमुई में 1 मामला प्रकाश में आया है । बिहार में अब तक कोरोना वायरस के संदिग्ध 37430 नमूनों की जाँच की जा चुकी है और 383 मरीज ठीक हुए हैं।

यहाँ बता दें कि बिहार एक ऐसा राज्य है जहाँ से अधिकांश लोग कभी काम के सिलसिले में तो कभी शिक्षा के कारण प्रवसन करते रहते हैं। ऐसे में कोरोना के समय में जब हर जगह लॉकडाउन की गाज गिरी है और सभी काम ठप्प हो गए हैं, तो मजदूर/छात्र वर्ग बड़ी तादाद में वापस घर वापसी कर रहे हैं। इसलिए अन्य राज्यों के मुकाबले वहाँ अभी भी बड़े तादाद में प्रवासी मजदूरों और छात्रों के आने का सिलसिला जारी है।

ऐसे में प्रशासन की चिंता इन सबकी जाँच को लेकर बनी हुई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक अब तक राज्य से निकलकर अन्य राज्यों में काम करने गए 1 लाख 20 हजार से ज्यादा प्रवासी 104 विशेष ट्रेनों से लाए जा चुके हैं। बुधवार को भी वहाँ 24 ट्रेनें करीब 30, 348 लोगों को लेकर राज्य में पहुँचेगें। इनके अलावा राज्य में 160 ट्रेनों को प्रवासियों को राज्य में लाने के लिए शिड्यूल किया गया है। इस प्रकार 284 ट्रेनों से करीब 3,31, 623 लोग बिहार आएँगे।