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12-03-93 के 12 धमाके: पवार ने मस्जिद बंदर में धमाके की कहानी गढ़ी, समुदाय विशेष को पीड़ित बताया

उत्तर-पूर्वी दिल्ली हाल ही में हिंदू विरोधी दंगों की आग में जला है। इन दंगों पर राजनीतिक रोटी सेंकने और समुदाय विशेष को पीड़ित बताने के प्रपंच में शामिल नेताओं में एनसीपी के मुखिया शरद पवार का नाम भी शामिल है। उनका कहना है कि पीएम ‘कपड़ों से दंगाइयों को पहचाने जाने’ की बात कर मजहब विशेष पर हमला कर रहे हैं। वे मोदी-शाह पर समाज के विभाजन का आरोप मढ़ते हैं। दंगों के लिए भी वे बीजेपी नेता अनुराग ठाकुर और कपिल मिश्रा जैसों को जिम्मेदार बताते हैं।

मुस्लिमो को पीड़ित दिखाने के लिए झूठ का सहारा लेना पवार की पुरानी आदत है। ऐसा उन्होंने 1993 के मुंबई धमाकों के वक्त भी किया था। 12 मार्च 1993 को मुंबई को दहलाने वाले 12 सीरियल बम धमाके हुए। लेकिन पवार ने 13वें धमाके की कहानी गढ़ी। बताया कि एक धमाका मस्जिद बंदर में भी हुआ था। चूँकि इन धमाकों में हिन्दू बहुल इलाकों को निशाना बनाया गया था, तो पवार ने कट्टरपंथियों को पीड़ित की तरह पेश करने के लिए मस्जिद में विस्फोट की कहानी गढ़ी। उन्होंने कट्टरपंथी आतंकियों को बचाने के लिए बम को ‘साउथ इंडियन आतंकियों’ वाला भी बताया।

इस हमले को अंजाम देने वाले याकूब मेमन, टाइगर मेमन, दाऊद इब्राहिम और छोटा शकील जैसे लोग कौन थे, ये किसी से छिपा नहीं है। आज पवार आरोप लगाते हैं कि भाजपा साम्प्रदायिकता को हवा देकर देश की राजधानी को जला रही है। साथ ही वो दंगाइयों और पुलिस के बाच गठजोड़ की बात करते हैं। वही पुलिस, जिसके हेड कांस्टेबल रतन लाल दंगाइयों द्वारा मार डाले गए। डीसीपी अमित शर्मा किसी तरह लिंच होने से बचे।

शरद पवार का कहना है कि उन्होंने सांप्रदायिक सौहार्द्र को बरकरार रखने के लिए झूठ बोला था। उस समय महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री रहे पवार ने मुस्लिमों को भी पीड़ित दिखाने के लिए बम ब्लास्ट्स की संख्या बढ़ा दी थी। दूसरे शब्दों में कहें तो उन्होंने एक अतिरिक्त बम ब्लास्ट की ‘खोज’ कर ली थी, जो असल में हुआ ही नहीं था। भले ही आपको यह अविश्वसनीय लगे लेकिन यही सच है।

ये ऐसा पहला आतंकी हमला था, जब भारत में आरडीएक्स का इस्तेमाल किया गया था। 26/11 तरह ये हमले भी पूर्व नियोजित थे और इन्हें काफी प्लानिंग के बाद अंजाम दिया गया था। उन ब्लास्ट्स में 300 के क़रीब लोग काल के गाल में समा गए थे, वहीं 1400 के क़रीब लोग घायल हुए थे। यह भारत की ज़मीन पर आतंकी हमलों में हुई अब तक की सबसे बड़ी क्षति है।

इंडिया टुडे की एक रिपोर्ट के अनुसार, महाराष्ट्र के तत्कालीन मुख्यमंत्री शरद पवार ने हमलों के तुरंत बाद दूरदर्शन स्टूडियो में जाकर बोला था और घोषणा की थी कि कुल 13 धमाके हुए हैं। उन्होंने न जाने कहाँ से एक अतिरिक्त विस्फोट की ‘खोज’ कर ली थी।

पवार ने दावा किया था कि उनके इस झूठ के लिए उनकी प्रशंसा की गई थी। एनसीपी सुप्रीमो ने इस हमले में समुदाय विशेष को बराबर पीड़ित दिखाने व सच्चाई को दबाने के लिए झूठ का सहारा लिया था। ऐसा स्वयं पवार ने स्वीकार किया था। उन्होंने इसे ‘संतुलन’ के लिए किया गया प्रयास बताया था। हमले के 22 वर्षों बाद पवार ने पुणे में आयोजित 89वीं मराठी साहित्यिक बैठक को सम्बोधित करते हुए स्वीकार किया था कि उन्होंने जान-बूझकर एक अतिरिक्त बम ब्लास्ट की कहानी गढ़ी ताकि एक विशेष मजहब को पीड़ित दिखा कर सांप्रदायिक तनाव से बचा जाए क्योंकि ‘पाकिस्तान ऐसा ही चाहता था’। उन्होंने कहा कि उन्हें भी यह पता था कि ये सभी धमाके हिन्दू बहुल क्षेत्रों में हुए थे।

पवार ने कहा कि उन्होंने दूरदर्शन स्टूडियो जाकर ऐसा कहा क्योंकि यह सांप्रदायिक तनाव की स्थिति को बचाने के लिए सही था। वे लोगों को इस बात का एहसास दिलाना चाहते थे कि मजहब के लोग भी इस विस्फोट के शिकार हुए हैं। उन्होंने दावा किया कि न्यायमूर्ति श्रीकृष्ण आयोग द्वारा उनके इस क़दम की सराहना की गई थी। यहाँ तक की पवार ने उस हमले का दोष लिट्टे पर भी मढ़ा था। उन्होंने हिन्दू-मुस्लिम दंगे रोकने के लिए ऐसा करने का दावा किया। 78 वर्षीय पवार भारत सरकार में केंद्रीय रक्षा व कृषि मंत्री रह चुके हैं।

12 मार्च 1993 में इन स्थानों पर धमाके हुए थे- मुंबई स्टॉक एक्सचेंज, नरसी नाथ स्ट्रीट, शिव सेना भवन, एयर इंडिया बिल्डिंग, सेंचुरी बाज़ार, माहिम, झावेरी बाज़ार, सी रॉक होटल, प्लाजा सिनेमा, जुहू सेंटॉर होटल, सहार हवाई अड्डा और एयरपोर्ट सेंटॉर होटल। इस धमाके का साज़िशकर्ता दाऊद इब्राहिम और टाइगर मेमन था। इसकी पूरी साज़िश पाकिस्तान में रची गई थी। उस दिन को आज भी ब्लैक फ्राइडे के नाम से जाना जाता है।

PFI का सरगना परवेज और सचिव इलियास दबोचा गया: दिल्ली दंगों की साज़िश रची, ISIS से भी लिंक

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में दंगा भड़काने के आरोप में दिल्ली पुलिस की स्पेशल सेल ने कट्टरपंथी इस्लामी संगठन संगठन पीएफआई के सरगना परवेज और संगठन के सचिव इलियास को गिरफ़्तार कर लिया है। दिल्ली पुलिस ने गुरुवार (मार्च 12, 2020) को ये कार्रवाई की। शाहीन बाग़ प्रदर्शन और दिल्ली दंगों में इनकी भूमिका बताई जाती है। दोनों पर नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगा भड़काने की साज़िश रचने का आरोप है। दोनों के आईएसआईएस के आतंकी दम्पति से संपर्कों की भी जाँच की जा रही है। इस दम्पति को हाल ही में दबोचा गया था।

इससे पहले दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने PFI के दानिश को गिरफ्तार किया था। जानकारी के मुताबिक अभी तक दिल्ली पुलिस को दानिश से की गई पूछताछ में कई खुलासे सामने आए हैं। दिल्ली पुलिस की पूछताछ में दानिश ने बताया है कि शाहीन बाग के लिए PFI ने लोगों से धन एकत्र किया था इसके बाद दिल्ली में हुई हिंसा के लिए पहले को धन जुटाया और फिर दंगाइयों को PFI ने हथियार भी उपलब्ध कराए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के दंगों में PFI की भूमिका की जाँच शुरू कर दी है।

जानकारी के मुताबिक, दानिश की शिनाख्त के आधार पर शाहीन बाग़ प्रदर्शन की फंडिंग और हिंसा भड़काने में शामिल रहे अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। साथ ही इन दंगों में शामिल दंगाइयों के खिलाफ सबूत जुटाने का काम भी दिल्ली पुलिस द्वारा किया जा रहा है।

इससे पहले दिल्ली के जामिया नगर से दिल्ली पुलिस ने एक आतंकी दम्पति को गिरफ्तार किया था। कश्मीर के रहने वाले इस दम्पति पर आईएस के खुरासान मॉड्यूल से संबंध रखने का आरोप है। रविवार (8 मार्च, 2020) की सुबह इनकी गिरफ्तारी के बाद इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया था कि दम्पति आईएस-खुरासान प्रोविंस (आईएसकेपी) के आला आतंकियों से सम्पर्क में था और वर्तमान में नए नागरिकता कानून के खिलाफ चल रहे प्रदर्शनों का फायदा उठा, मुस्लिम युवाओं को भड़का कर आतंकी कार्यवाही करने के लिए उकसा रहा था।

वो शिवा जिसने शिवाजी की जान बचाने के लिए ख़ुद का बलिदान दिया: जब 300 मराठों ने 1 लाख की फ़ौज को हराया

1660 में अली आदिलशाह ने अपने जनरल सिद्धि जौहर को छत्रपति शिवाजी के साथ लड़ने के लिए भेजा था। 1660 के मध्य में सिद्धि जौहर ने पन्हाला किले को घेर लिया। छत्रपति शिवाजी उस वक्त किले में ही थे। आधी रात उन्होंने पन्हाला से हटने का फैसला किया। वीर मराठा सरदार बाजीप्रभु देशपांडे, शंभू सिंह जाधव, फुलजी, बंदल ने 300 सैनिकों के साथ छत्रपति शिवाजी को कवर दिया ताकि वे शेष सेना के साथ सुरक्षित निकल सके।

अफजल खान और प्रतापगढ़ में बीजापुरी सेना की पराजय के बाद से शिवाजी ने बीजापुरी क्षेत्र में मजबूत पकड़ बना रखी थी। कुछ दिनों के भीतर मराठों ने पन्हाला किले (कोल्हापुर शहर के पास) पर कब्जा कर लिया। इस बीच, नेताजी पालकर के नेतृत्व में एक और मराठा बल बीजापुर की ओर सीधे बढ़ा। बीजापुरी सेना हमले को दोहराया। शिवाजी, उनके कुछ कमांडरों और सैनिकों को पन्हाला किले से पीछे हटने के लिए मजबूर किया।

1660 में आदिल शाह ने बीजापुर सेना भेजी जिसका नेतृत्व अबीसिनियन जनरल सिद्धि जौहर ने किया था। शिवाजी के स्थान की खोज करते हुए, जौहर ने पन्हाला की घेराबंदी की। नेताजी पालकर ने बीजापुरी घेराबंदी को तोड़ने का बार-बार प्रयास किया, लेकिन वे विफल रहे।

अंत में, एक बहुत दुस्साहसी और उच्च जोखिम वाली योजना बनाई गई और कार्रवाई की गई। शिवाजी, बाजी प्रभु देशपांडे ने सैनिकों की एक चुनिंदा बैंड के साथ रात में घेराबंदी को तोड़ने और विशालगढ़ को बचाने का प्रयास किया। बीजापुरी सेना को धोखा देने के लिए शिवा काशिद ने स्वेच्छा से राजा की तरह कपड़े पहने और खुद को पकड़वा लिया।

तूफानी पूर्णिमा की रात (गुरु पूर्णिमा की रात, आषाढ़ पूर्णिमा) को 600 चुनिंदा पुरुषों का एक बैंड, जो बाजी प्रभु और शिवाजी के नेतृत्व में था, घेराबंदी से निकल गया। बीजापुरी बल द्वारा उनका पीछा किया गया। जैसा कि योजना बनाई गई थी, शिवा काशिद पकड़े गए और उन्हें बीजापुरी कैंप में ले जाया गया। वे चाहते ही थे कि शिवाजी की जान बचाने के लिए उन्हें पकड़ लिया जाए। इस बलिदान ने पीछे हटते मराठा बल को कुछ साँस लेने का मौका दिया। शिवा काशिद एक नाई थे। उनकी शक्ल शिवाजी से मिलती थी। उनके बलिदान से मराठा साम्राज्य व पूरा भारत कृतज्ञ हुआ और छत्रपति वहाँ से सुरक्षित निकलने में कामयाब रहे।

जैसे ही बीजापुरी बल को अपनी गलती का एहसास हुआ उन्होंने फिर से पीछा करना शुरू कर दिया। उनका नेतृत्व सिद्धि जौहर का दामाद सिद्धि मसूद कर रहा था। घोड़खिंड (घोड़े का दर्रा) के पास मराठों ने एक अंतिम रुख अपनाया। शिवाजी और मराठा सेना के आधे लोगों को विशालगढ़ के लिए भेज दिया, जबकि बाजी प्रभु, उनके भाई फूलजी और लगभग 300 आदमियों ने मार्ग को अवरुद्ध कर दिया। 18 घंटे से अधिक समय तक घोषदंड दर्रे में 10,000 बीजापुरी सैनिकों के खिलाफ लड़ाई लड़ी।

कई गाथाएँ इस रियर-गार्ड कार्रवाई के दौरान मराठों द्वारा प्रदर्शित वीरता के करतबों का वर्णन करती हैं। बाजी प्रभु को “दंड पट्ट” नामक एक हथियार का उपयोग करने की कला में महारत हासिल थी। गंभीर रूप से घायल होने के वाले बाजी प्रभु ने लड़ाई जारी रखी। अपने लोगों को तब तक लड़ते रहने के लिए प्रेरित किया जब तक कि शिवाजी ने विशालागढ़ सुरक्षित रूप से पहुॅंचने का संकेत तीन तोपों से गोलाबारी कर नहीं दिया। यहॉं यह जानना जरूरी है कि जब शिवाजी ने 300 लोगों के साथ विशालगढ़ का रुख किया था तो किला पहले से ही सूर्यपुरा सुर्वे और जसवंतराव दलवी नाम के बीजापुरी सरदारों के घेरे में था। शिवाजी को अपने 300 आदमियों के साथ किले तक पहुँचने के लिए सुर्वे को हराना पड़ा।

शिवाजी ने कुछ मवाले सैनिकों के साथ उबरखिंद की लड़ाई में शाहिस्ता खान के एक सरदार कलतल्फ खान को हराया। औरंगजेब ने अपने मामा शाहिस्ता खान को बादीबागम साहिबा, आदिशाही सल्तनत के अनुरोध पर 1,50,000 से अधिक शक्तिशाली सेना के साथ भेजा। अप्रैल 1663 में छत्रपति शिवाजी ने व्यक्तिगत रूप से लाल महल पुणे में शाहिस्ता खान पर आश्चर्यजनक हमला किया। ख़ान के बेटे मारे गए और मुग़ल भाग खड़े हुए।

छत्रपति शिवाजी ने आधी रात को 300 सैनिकों के साथ हमला किया, जबकि लालमहल में शाहिस्ता खान के लिए 1,00,000 सैनिकों की कड़ी सुरक्षा थी। इस घटना में छत्रपति शिवाजी ने शाहिस्ता खान के खिलाफ दुनिया के उल्लेखनीय कमांडो ऑपरेशन करने के लिए महान प्रबंधन तकनीक दिखाई। छत्रपति शिवाजी ने 1664 में मुगल साम्राज्य के धनी शहर सूरत में दबिश दी। सूरत मुगलों की वित्तीय राजधानी थी। ब्रिटिश ने शाहजहाँ बादशाह की अनुमति से सूरत में ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना की थी।

शिवाजी द्वारा सूरत की घटना के कारण औरंगजेब नाराज हो गया। उन्होंने शिवाजी को हराने के लिए मिर्जा जय सिंह और दलेर खान को भेजा। मुगल की सेना ने पुरंधर किले पर कब्जा कर लिया। छत्रपति शिवाजी 23 किले और 4,00,000 रुपए देने के लिए सहमत हुए।

औरंगजेब ने अपनी 50 वीं जयंती के अवसर पर छत्रपति शिवाजी को आगरा आमंत्रित किया। हालांकि, 1666 में अदालत में औरंगजेब ने उन्हें अपने दरबार के सैन्य कमांडरों के पीछे खड़ा कर दिया। शिवाजी क्रोधित हो गए और उन्होंने उस उपहार को अस्वीकार कर दिया जो औरंगजेब द्वारा पेश किया गया था और दरबार से बाहर निकल गए। उन्हें औरंगजेब द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया। छत्रपति शिवाजी ने शानदार योजना बनाई और आगरा से निकलने में में सफल रहे। उन्होंने औरंगज़ेब के घर की कस्टडी से निकलने के लिए मिठाई के डब्बों का इस्तेमाल किया। यह घटना छत्रपति शिवाजी की प्रबंधन कूटनीति को दर्शाती है।

15 अप्रैल तक भारत में एंट्री बैन: कोरोना भगाने के लिए शराब पीने से 44 मरे, 1.30 लाख मामले सामने आए

पूरी दुनिया में कोरोना वायरस का प्रकोप बढ़ता जा रहा है। वायरस का प्रसार रोकने के लिए भारत ने खुद को अलग-थलग करने का फैसला किया है। मंत्रियों के एक समूह ने इस संबंध में कुछ अहम निर्णय लिए हैं। इस कड़ी में दुनिया के किसी भी देश से आने वाले यात्रियों का वीजा 15 अप्रैल तक सस्पेंड कर दिया गया है। केवल संयुक्त राष्ट्र के कर्मचारियों, कूटनीतिक मामलों और सरकारी परियोजनाओं से जुड़े महत्वपूर्ण लोगों को इस प्रतिबंध से छूट दी गई है। इनके अलावा कोई देश में प्रवेश नहीं कर पाएगा।

यानी पर्यटन या सामान्य कामकाज के लिए भारत आना फिलहाल मुमकिन नहीं हो पाएगा। आपातकालीन परिस्थितियों में भारतीय मिशन से विशेष अनुमति लेनी होगी। भारतीय प्रवासियों को दिए गए ओसीआई कार्ड (वीजा फ्री ट्रेवल फैसिलिटी) को भी 15 अप्रैल तक रोक कर रखा जाएगा। विदेश मंत्रालय ने अपने बयान में कहा है कि अगर कोई विदेशी व्यक्ति भारत की यात्रा करना चाहता है तो उसे नजदीकी इंडियन मिशन में संपर्क करना होगा। 15 फरवरी के बाद भारत पहुँचने वाले चीन, इटली, स्पेन, ईरान, कोरिया, फ्रांस और जर्मनी के आगुन्तकों को 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगा। यानी, इतने दिनों तक उनकी गतिविधियाँ सीमित रहेंगी ताकि ये वायरस न फैले।

भारतीय नागरिकों को सलाह दी गई है कि वो बिना किसी ज़रूरी कारण के भारत से बाहर जाने से परहेज करें। अगर वो विदेश जाकर वापस लौटते हैं तो उन्हें भी 14 दिनों के लिए क्वारंटाइन में रखा जाएगा। सीमा पार से आने वाले लोगों को भी कड़ी स्क्रीनिंग प्रक्रिया से गुजरना होगा। उनके बारे में गृह मंत्रालय को सूचना दी जाएगी। कोरोना वायरस पर इस निर्णय के कारण भारतीय पर्यटन उद्योग को ख़ासा नुकसान होगा लेकिन उम्मीद है कि इससे वायरस के प्रसार को रोका जा सकेगा। इसके कारण कुछ ही दिनों में शुरू होने वाले आईपीएल पर भी संशय के बादल मँडराने लगे हैं।

अमेरिका ने भी यूरोप से आवाजाही पर 1 महीने के लिए रोक लगा दी है। वहाँ कोरोना वायरस से अब तक 37 मौतें हो चुकी हैं। ऑस्ट्रेलिया ने इस वायरस के कारण डूबती अर्थव्यवस्था को रफ़्तार देने के लिए नई योजनाएँ तैयार की हैं। इटली में सारी दुकानों पर ही ताले जड़ दिए गए हैं। ‘वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाईजेशन’ ने इसे महामारी घोषित कर दिया है। कुल मिला कर अब तक दुनिया भर में लगभग 1.3 लाख मामले सामने आ चुके हैं।

ट्विटर सहित कई दिग्गज आईटी कंपनियों ने अपने दुनिया भर के कर्मचारियों को घर से काम करने को कहा है। वरिष्ठ हॉलीवुड अभिनेता टॉम हैंक्स भी कोरोना वायरस के शिकार हो गए हैं। इजरायल ने कहा है कि वो इस मामले में दूसरे देशों से आने वाले ‘सप्लाई’ पर निर्भर है और इस सम्बन्ध में वहाँ के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से बात की है। चीन में अब तक कोरोना वायरस के 37,400 मामले आ चुके हैं।

इधर ईरान में अफवाह फ़ैल गई कि शराब पीने से करना वायरस नहीं फैलता है और ‘इंडस्ट्रियल लेवल’ की शराब पीने से 44 लोगों की मौत हो गई। ईरान में कुछ नॉन-मुस्लिमों को छोड़ कर बाकियों के लिए शराब पीना या ख़रीदना-बेचना मना है। लोग मेथनॉल से बने अल्कोहल पी रहे थे, जो ख़ासा ख़तरनाक होता है।

गिरफ्तार दानिश ने किया बड़ा खुलासा: दिल्ली दंगों के लिए PFI ने जुटाया था धन, दंगाइयों को बाँटे हथियार

दिल्ली हिंदू विरोधी हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस की पूछताछ में एक आरोपित से बड़ा खुलासा हुआ है। PFI के सदस्य दानिश ने दिल्ली पुलिस की पूछताछ में खुलासा करते हुए कहा है कि PFI ने शाहीन बाग और दिल्ली हिंसा के लिए धन जुटाया था और साथ ही PFI ने दंगाइयों को हथियार भी सौंपे थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस हिंसा में PFI की संदिग्ध भूमिका की जाँच में जुट गई है।

दरअसल, दिल्ली हिंसा को लेकर दिल्ली पुलिस ने PFI के दानिश नाम के एक शख्स को गिरफ्तार किया था। जानकारी के मुताबिक अभी तक दिल्ली पुलिस को दानिश से की गई पूछताछ में कई खुलासे सामने आए हैं, दिल्ली पुलिस की पूछताछ में दानिश ने बताया है कि शाहीन बाग के लिए PFI ने लोगों से धन एकत्र किया था इसके बाद दिल्ली में हुई हिंसा के लिए पहले को धन जुटाया और फिर दंगाइयों को PFI ने हथियार भी उपलब्ध कराए थे। इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली के दंगों में PFI की भूमिका की जाँच शुरू कर दी है। जानकारी के मुताबिक दानिश की शिनाख्त के आधार पर इस आंदोलन की फंडिंग और हिंसा भड़काने में शामिल रहे अन्य लोगों की धरपकड़ के लिए पुलिस लगातार दबिश दे रही है। साथ ही इन दंगों में शामिल दंगाइयों के खिलाफ सबूत जुटाने का काम भी दिल्ली पुलिस द्वारा किया जा रहा है।

गौरतलब है कि पिछले वर्ष यूपी में कई स्थानों पर CAA विरोध के नाम पर की गई हिंसा के पीछे PFI का हाथ मिला था। इसके बाद सरकार ने इस संगठन के संचालन को प्रतिबंधित कर दिया। इसके बाद 100 से अधिक PFI के सदस्यों को गिरफ्तार किया गया था। साथ ही सरकार ने कहा था कि यह संगठन देश को तोड़ने का काम कर रहा है, जिसे देश हिंत में बंद किया जाना बेहद जरूरी है।

वहीं लोकसभा में अमित शाह द्वारा दी गई जानकारी के मुताबिक अब तक दिल्ली हिंसा मामले में दिल्ली पुलिस द्वारा 700 से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और 2,647 लोगों को हिरासत में लिया गया है या गिरफ्तार किया गया है। पुलिस की ओर से जारी बयान के मुताबिक आर्म्स एक्ट के तहत 48 मामले दर्ज किए गए हैं। आपको बता दें कि दिल्ली में 23 से 25 फरवरी तक सीएए विरोध के नाम पर की गई हिंदू विरोधी हिंसा में अब तक 53 लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही इस हिंसा में 300 से अधिक लोग घायल हुए हैं।

बीजेपी ने ज्योतिरादित्य सिंधिया को बनाया मध्य प्रदेश से राज्यसभा का उम्मीदवार, कमलनाथ सरकार का गिरना तय

ज्योतिरादित्य सिंधिया को लेकर पिछले काफी समय से चली आ रहीं सभी अटकलों पर आज विराम लग गया। पहले तो बुधवार दोपहर को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने सिंधिया को बीजेपी की सदस्यता दिलाकर उन्हें गुलदस्ता भेंट कर पार्टी में स्वागत किया। इसके बाद बीजेपी ने मध्य प्रदेश से राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में सिंधिया के नाम का ऐलान कर दिया। इसी के साथ उस अटकलों पर भी विराम लग गया, जिसमें कहा जा रहा था कि क्या बीजेपी सिंधिया को राज्यसभा का उम्मीदवार बनाएगी?

बीजेपी ने अध्यक्ष जेपी नड्डा के हवाले से अपने हेंडल एक पर ट्वीट कर सभी राज्यसभा के उम्मीदवारों की सूची को साझा कर दिया, जिसमें सबसे पहले असम से भुवनेश्वर कालीता, बिहार से विवेक ठाकुर, गुजरात से रबीलाबेन बारा, गुजरात से दूसरे अभय भारद्वाज, झारखंड से दीपक प्रकाश, मणिपुर से लिएसेंबा महाराज, मध्य प्रदेश से ज्योतिरादित्य सिंधिया, महाराष्ट्र से उदयना राजे भौंसले, राजस्थान से राजेन्द्र गहलोत का नाम राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में घोषित किए गए हैं।

साथ ही सहयोगी दलों में महाराष्ट्र से रामदास अठाबले और असम से बुस्वजीत डायमरी का नाम राज्यसभा उम्मीदवार के रूप में सूची में शामिल है। ट्विटर पर साझा जानकारी में यह भी कहा गया है कि इन नामों को भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति ने आगामी राज्य सभा चुनावों के लिए अपनी स्वीकृति प्रदान की है। दरअसल, भारतीय जनता पार्टी की केन्द्रीय चुनाव समिति की बैठक 10 मार्च को बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इस बैठक में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृहमंत्री अमित शाह, राजनाथ सिंह और नितिन गड़करी सहित अन्य प्रमुख नेता शामिल हुए थे।

आपको बता दें कि ज्योतिरादित्य सिंधिया के बीजेपी में शामिल होने के बाद मध्य प्रदेश में कमलनाथ वाली सरकार के गिरने के आसार अब बढ़ गए हैं क्योंकि बेंगलुरू में ठहरे सिंधिया समर्थित 22 विधायकों में से 19 विधायकों ने अपने वीडियो बयान जारी कर सिंधिया के साथ जाने की बात कही है। वहीं दूसरी ओर बीजेपी ने भी अपने पत्ते खोलने शुरू कर दिए हैं।

CAA समर्थकों के कारण नहीं हुए दिल्ली दंगे, इसके पीछे थी गहरी साजिश, अमित शाह ने वारिस पठान को भी लताड़ा

विपक्षी पार्टियों द्वारा लंबे समय से सदन में दिल्ली हिंसा पर चर्चा की माँग पर बुधवार शाम को गृहमंत्री अमित शाह ने विपक्षी पार्टियों के सवालों के जवाब दिए। साथ ही चर्चा के दौरान एक लंबी रिपोर्ट लोकसभा सदस्यों के सामने में पेश की है। इस दौरान अमित शाह ने दिल्ली पुलिस की पीठ थपथपाते हुए कहा कि दिल्ली पुलिस ने 36 घंटे के अंदर हिंसा को काबू में किया। साथ ही शाह ने आशंका जताई कि दिल्ली हिंसा के पीछे एक गहरी साजिश रची गई थी।

सदन में बोलते हुए सबसे पहले अमित शाह ने दंगों में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि अर्पित की और कहा कि मैं उनके परिवारों के प्रति भी संवेदनाएं व्यक्त करता हूँ। वहीं शाह ने सदन में आँकड़े पेश करते हुए कहा कि दिल्ली की जनसंख्या 1.7 करोड़ है, जबकि हिंसा की चपेट में आए इलाके की आबादी 20 लाख है। दिल्ली पुलिस ने हिंसा को नियंत्रित किया और 36 घंटे के अंदर उस पर काबू पाया। उन्होंने गौर फरमाते हुए कहा कि हिंसा में यह सुनिश्चित किया कि दंगे 4% भौगोलिक क्षेत्र और दिल्ली के 13% क्षेत्र तक ही बने रहें। उन्होंने यह भी दावा किया कि 25 फरवरी में रात 11 बजे के बाद के बाद अभी तक हिंसा ग्रस्त क्षेत्र में एक भी घटना नहीं हुई।

लगातार अपने ऊपर विपक्षी दलों द्वारा उठाए जा रहे सवालों पर बोलते हुए अमित शाह ने कहा कि आप मुझ पर सवाल उठा सकते हैं और आपको ये अधिकार भी है, लेकिन तथ्यों के साथ तोड़-फोड़ करने का किसी को अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मैं श्रीमान ट्रम्प के कार्यक्रम में बैठा था, उनका कार्यक्रम पहले से तय था और मेरे संसदीय क्षेत्र में था। इसके बाद मैंने ही अजीत डोभाल जी से हिंसा वाले इलाके में जाने का अनुरोध किया और पुलिस का मनोबल बढ़ाने की बात कही।

शाह ने हेट स्पीच पर बोलते हुए कहा कि 14 दिसंबर को रामलीला मैदान में 1 पार्टी ने एंटी CAA रैली की, उसमें पार्टी की अध्यक्ष महोदया भाषण में कहती हैं कि घर से बाहर निकालों, आर-पार की लड़ाई करों, अस्तित्व का सवाल है। उसके बाद उनके एक वरिष्ठ नेता कहते हैं कि अभी नहीं निकलोगे तो कायर कहलाओगे। ये हेट स्पीच नहीं है तो क्या है? शाह ने वारिश पठान पर भी निशाना साधा और कहा कि जो यह कहता हो 15 करोड़ 100 करोड़ पर भारी हैं तो ये क्या है? उन्होंने यह भी कहा कि शाहीन बाग का धरना कपिल मिश्रा के बयान के बाद से नहीं बल्कि उससे बहुत पहले यानि की 15 दिसंबर से जारी है।

शाह ने दिंल्ली हिंसा में उपयोग किए गए सोशल मीडिया का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि एक तरफ तो सोशल मीडिया पर घटना की सच्चाई दिखाई तो दूसरी ओर कुछ लोगों ने देश में ट्रंप के आने से पहले लोगों को हिंसा के लिए भड़काया। उन्होंने यह भी साफ किया कि हिंसा में शामिल लोगों को किसी भी कीमत पर एक इंच भी बख्शा नहीं जाएगा। दोषी को इसकी सजा भुगतनी ही होगी।

अमित शाह ने दिए जवाब में आगे बताया कि दिल्ली पुलिस ने 27 फरवरी से आज तक 700 से ज्यादा FIR दर्ज की हैं और 2,647 लोगों को हिरासत में लिया है। इस दौरान शाह ने ओवैसी पर निशाना साधते हुए कहा कि CCTV फुटेज में व्यक्ति का चेहरा दिखाई देता है यह न तो कोई धर्म देखता है और न ही किसी के कपड़े, क्योंकि ओवैसी ने आरोप लगाया था कि एक ही धर्म के लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है। दिल्ली हिंसा पर दे रहे जवाबों के बीच शाह ने एक बार फिर CAA पर अपनी बात दोहराई और कहा कि CAA को मतदान करके पास किया था। फिर भी इसे लेकर देशभर में लोगों को गुमराह किया गया कि इससे अल्पसंख्यकों की नागरिकता चली जाएगी। मुझे बताइए कि आखिर इससे किसी की नागरिकता कैसे जा सकती है।

दिल्ली पुलिस मैदान में जूझ रही हो और उसे जाँच करके आगे भी इसके तथ्यों को कोर्ट के सामने रखना है तो ऐसे समय में हमें वास्तविकता को समझना चाहिए और पुलिस की जाँच में सहयोग करना चाहिए। इसके लिए हमने आम लोगों से मीडिया से भी अनुरोध किया है कि किसी के पास भी कोई ऐसा वीडियो फुटेज हो जिससे पुलिस को जाँच में सहायता मिल सके। उसे उपलब्ध कराएँ। इसके बाद हजारों वीडियो लोगों ने हमें दिए हैं। उम्मीद है कि इन वीडियो में से ही अंकित शर्मा के खून का भेद इसी से खुलेगा।

योगी सरकार ने ‘दंगाइयों के होर्डिंग्स’ हटाने के हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में लगाई याचिका, सुनवाई कल

उत्तर प्रदेश के लखनऊ में लगे CAA विरोध के नाम पर दंगा भड़काने और हिंसा करने वालों के होर्डिंग्स लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुँच गया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के आदेश को उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। बुधवार (मार्च 11, 2020) को योगी सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में हाईकोर्ट के होर्डिंग्स हटाने के फैसले के खिलाफ याचिका दाखिल की। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इस याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने स्वीकार कर लिया है। अब गुरुवार (मार्च 12, 2020) को सुबह 10:30 बजे उत्तर प्रदेश सरकार की इस याचिका पर सुप्रीम कोर्ट सुनवाई करेगा।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ 19 दिसंबर 2020 को लखनऊ के कई इलाकों में जबरदस्त हिंसा हुई थी। इस दौरान हुई तोड़फोड़ और आगजनी से सरकारी संपत्ति का काफी नुकसान हुआ था। जिसके बाद योगी सरकार ने आरोपित दंगाइयों से नुकसान की भरपाई करने का आदेश दिया था। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, इन दंगों में आरोपित 57 लोगों के नाम उनके पते साथ होर्डिंग्स बनवाकर शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर लगाए गए थे। यह सभी आरोपित लखनऊ के हसनगंज, हजरतगंज, कैसरबाग और ठाकुरगंज थाना क्षेत्र के हैं। बता दें कि पहले ही प्रशासन ने 1.55 करोड़ रुपए की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने के लिए इनको वसूली के नोटिस जारी किए गए थे।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, राजधानी में करीब 100 जगहों पर लगे आरोपितों के होर्डिंग के मामले में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने स्वत: संज्ञान लिया था। कोर्ट ने लखनऊ के डीएम और कमिश्नर को तलब किया था। इस मामले में सुनवाई करते हुए रविवार को इलाहबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को लखनऊ हिंसा के 57 आरोपितों का पोस्टर हटाने का आदेश दिया था। साथ ही कोर्ट ने 16 मार्च तक रजिस्ट्रार जनरल को एक अनुपालन रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा था। मगर हाईकोर्ट के इस फैसले से योगी सरकार असंतुष्ट थी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार कहा जा रहा है कि उत्तर प्रदेश सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले का अध्ययन किया और पीछे नहीं हटने का फैसला लिया। इसके बाद आज योगी सरकार ने हाईकोर्ट के फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। अब देखने वाली बात यह है कि कल देश के सर्वोच्च न्यायाृलय इस मुद्दे पर क्या फैसला सुनाती है।

हमने सोच समझकर निर्णय लिया, हम सिंधिया जी के साथ हैं, किसी के दवाब में नहीं हैं: सभी विधायकों ने जारी किया वीडियो

जिस दिन से ज्योतिरादित्य सिंधिया ने कॉन्ग्रेस से इस्तीफा दिया उसी दिन से मध्य प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरी देश की राजनीति में भूचाल सा आ गया है। एक तरफ तो सिंधिया ने बीजेपी की सदस्यता ग्रहण कर ली, तो वहीं दूसरी ओर प्रदेश में कमलनाथ सरकार का गिरना तय माना जा रहा है। इसके डर से कमलनाथ अपनी सरकार को बचाने में लगे हुए हैं तो बीजेपी कमलनाथ की सरकार को गिराने में जुट गई है। इसी बीच इस्तीफा देने वाले कॉन्ग्रेस के 22 विधायक बेंगलुरु में मौजूद हैं, जहाँ से सभी विधायकों ने अपने बयान का वीडियो जारी कर ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ जाने की बात कही है।

बेंगलुरू में मौजूद कमलनाथ सरकार में मंत्री रहीं इमरती देवी ने कहा, “हम सब 22 विधायक बेंगलुरू में हैं और सभी अपनी मर्जी से हैं। महाराज (ज्योतिरादित्य सिंधिया) के आशीर्वाद से हैं। महाराज जी ने अच्छा निर्णय लिया है। महाराज जी हमसे जहाँ भी जाने के लिए कहेंगे हम वहाँ जाने के लिए तैयार हैं। इमरती देवी ने आगे कॉन्ग्रेस पर आरोप लगाते हुए कहा कॉन्ग्रेस ने महाराज जी की उपेक्षा की है। हम 10 साल तक लोगों से सरकार में आने पर वायदा पूरे करने की बात करते रहे, लेकिन जैसे ही राज्य में कमलनाथ की सरकार बनीं ऐसे ही जनता का कोई काम नहीं हुआ। इतना ही नहीं कमनलाथ ने हमारी एक नहीं सुनीं।

विधायक 2- “मैं आज भी सिंधिया जी के साथ हूँ और आगे भी सिंधिया जी के साथ रहूँगा। हम सभी 22 विधायकों ने अपनी मर्जी से इस्तीफा दिया है।

विधायक 3- “कोई अगर कहे कि हम किसी के दवाब में यहाँ हैं तो ये बात गलत है हम अपनी मर्जी से यहाँ है और महाराज जी के साथ पहले से थे हैं और हमेशा रहेंगे। सरकार गिरना तय है, क्योंकि जब भी हम कमलनाथ जी से मिलने गए वह देखते ही बोलते थे चलो-चलो-चलो। तो इसलिए चलो-चलो वाली सरकार नहीं चलती।”

विधायक 4- “प्रदेश की जनता ने सिंधिया जी के नाम पर हमें वोट किया और सरकार बनी। हमें उम्मीद थी के प्रदेश में सिंधिया जी के नेतृत्व में सरकार चलेगी, लेकिन दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हुआ। महाराज जी ने पहले ही कहा था कि सरकार अपने वचन पत्र को लागू नहीं करती है तो हम जनता के हितों के लिए सड़कों पर उतरेंगे। इसके बाद भी कमलनाथ ने कहा कि जिसको सड़कों पर उतरना है उतरे। इससे ज़्यादा दुर्भाग्यपूर्ण रवैया अपनी ही सरकार में हमारे लिए क्या हो सकता है। इसलिए हमने यह कदम उठाया।

विधायक 5- हमने सोच समझकर निर्णय लिया है हम सिंधिया जी के साथ हैं और रहेंगे हम किसी के दवाब में नहीं हैं।

विधायक 6- हमारे बारे में लगातार भ्रम फैलाया जा रहा है हम सभी 22 विधायक अपनी मर्जी से यहाँ आए है। हम सभी महाराज जी के निर्णय से खुश हैं उन्होंने राष्ट्र हित में निर्णय लिया है। इतना ही नहीं हमारे संपर्क में 23 और अन्य कॉन्ग्रेस के विधायक हैं।

विधायक 7- हमने न तो किसी पद के लिए और न ही किसी स्वार्थ के लिए यह सब किया है बल्कि जिम्मेदारी के साथ देश हित में यह फैसला लिया है। हम सिंधिया जी के निर्णय से खुश हैं और उनके साथ हैं।

विधायक 8- मीडिया में जो भ्रामक खबरें आ रही है। मैं मीडिया के माध्यम से बता देना चाहता हूँ कि हम सभी 22 विधायक साथ हैं। जहाँ हमारे नेता का अपमान होता हो वहाँ हम हरगिज नहीं रह सकते।

विधायक 9- पिछले एक साल पहले प्रदेश में युवाओं के चेहरे पर जनता ने वोट किया और कॉन्ग्रेस की सरकार बनी, लेकिन सरकार में लगातार सिंधिया जी की उपेक्षा की गई। जिसे हम बर्दाश्त नहीं कर सकते। इसलिए हम अपनी मर्जी से यहाँ है और आगे भी सिंधिया जी के साथ रहेंगे।

विधायक 10- सवा साल पहले जो प्रदेश में सरकार बनी उसमें सिंधिया जी का बहुत बड़ा योगदान रहा, ग्वालियर क्षेत्र में 34 में से 27 सीटें सिंधिया जी की बदौलत मिली, लेकिन इसके बाद भी उनकी उपेक्षा की गई।

विधायक 11- प्रदेश में सरकार बनी तो सभी की इच्छा थी कि सिंधिया जी सीएम बनेंगे, लोकिन जनता को निराशा हाथ लगी इसके बाद फिर प्रदेश का अध्यक्ष भी उनको नहीं बनाया गया और फिर अब राज्यसभा सांसद के लिए भी उनका नाम नहीं रखा गया। इसलिए लोकतंत्र में इतना अपमान बर्दाश्त नहीं किया जा सकता है।

विधायक 12- मीडिया में भ्रामक खबरें फैलाई जा रही हैं कि हम कॉन्ग्रेस के संपर्क में हैं। ऐसा बिल्कुल नहीं है यह गलत है, जिस चेहरे की बदौलत प्रदेश में सरकार बनी हो उसी का वहाँ अपमान किया गया इसे बर्दाश्त नहीं किया जा सकता। हम सभी उनके साथ हैं।

विधायक 13- कॉन्ग्रेस ने सिंधिया जी के कद को कम करने की कोशिश की और उन्हीं की मेहनत से प्रदेश में सरकार बनी। अब कमलनाथ की सरकार का गिरना तय है।

विधायक 14- जहाँ महाराज जाएँगे मैं वहीं जाउँगी। वह हमारे नेता हैं। हम उनके साथ हैं और रहेंगे। मैं स्वेच्छा से यहाँ आई हूँ किसी के दवाब में नहीं।

विधायक 15- प्रदेश में इन दिनों काला दिन चल रहा है। सिंधिया जी के कारण प्रदेश में सरकार बनी लेकिन उनकी और उनके साथ उनके समर्थक विधायकों की कमलनाथ सरकार में उपेक्षा की गई। कमलनाथ ने ठान लिया था कि सिंधिया जी के समर्थित विधायकों को न तो कोई काम देना है न ही उनकी सुननी है।

विधायक 16- मैंने 5 बार चुनाव लड़ा है, चुनाव की शुरुआत मैंने अपने पिता जी के हुए अपमान का बदला लेने के लिए की थी। तब मेरी माँ ने कहा था अपमान सहने वाले अपमान करने वाले से ज्यादा दोषी होता है। इसलिए हम अपने महाराज जी का अपमान नहीं सह सकते।

विधायक 17- हम महाराज जी के साथ हैं मैं आज जो भी हूँ उन्ही की बदौलत हूं। विधायक पद से इस्तीफा देना उनके लिए एक बहुत छोटी सी बात है और यह मेरे लिए सौभाग्य की भी बात है।

विधायक 18- महाराज जी की बदौलत और प्रदेश की जनता की बदौलत प्रदेश में सरकार बनी, कॉन्ग्रेस ने लोगों की भावनाओं को खत्म किया और तब ये स्थित पैदा हुई। हम सभी सिंधिया जी के साथ हैं।

विधायक 19- आप सभी को जानकारी है जो भी प्रदेश में स्थिति है वह ठीक नहीं। लगातार सरकार में महाराज जी और उनके समर्थित विधायकों के साथ गलत व्यवहार किया जा रहा था। महाराज जी का जो भी निर्णय होगा वो हमारे लिए सर्वोपरि है।

अफगानिस्तान: दिल्ली दंगों का बदला लेने के लिए काबुल में ‘मुस्लिम भीड़’ ने बनाया सिख की दुकान को निशाना, देखें VIDEO

दिल्ली में हुए हिंदू विरोधी दंगों का असर अब दूर दराज इस्लामिक देशों में भी दिखने लगा है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, दिल्ली दंगों का बदला लेने के लिए काबुल में एक सिख दुकानदार की दुकान पर साम्प्रदायिक भीड़ द्वारा हमला किया गया। हमले का विडियो पूर्व विधायक एवं अकाली दल के नेता मनजिंदर सिंह सिरसा ने अपने ट्विटर पर शेयर की।

उन्होंने इस हमले की सूचना देते हुए अपने ट्विटर पर लिखा, “मुझे ये साझा करते हुए बहुत निराशा हो रही है कि दिल्ली दंगों का बदला लेने के लिए काबुल में साम्प्रदायिक भीड़ द्वारा सिख दुकानदार की दुकान पर हमला हुआ। मैं इन गुंडों को बताना चाहता हूँ कि सिख तो दिल्ली दंगों में पीड़ितों के मददगार रहे हैं। सिखों ने ही इन दंगों में पीड़ित लोगों को लंगर और दवाई उपलब्ध कराई है।”

मनजिंदर सिंह सिरसा ने काबुल में हुए इस हमले की एक अन्य वीडियो को भी ट्विपर पर शेयर किया है और इस तरह की घटनाओं को शर्मनाक बताया है। उन्होंने इस घटना पर फौरन कार्रवाई के लिए विदेश मंत्री डॉ एस जयशंकर से और काबुल में स्थित भारत की एंबैसी से गुहार लगाई है कि वे इस मामले को अफगानिस्तान सरकार के सामने उठाएँ और वहाँ पर सिखों और हिंदुओं की सुरक्षा सुनिश्चित करें।

पूर्व विधायक द्वारा जारी की गई वीडियो में हम देख सकते हैं कि जिस दुकानदार पर हमलावरों ने हमला किया, वे विडियो में हाथ जोड़े स्तब्ध खड़े हैं। जबकि उनकी दुकान का सारा सामान उथला-पुथला जा चुका है।