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ताहिर हुसैन की जमानत याचिका पर सुनवाई: कोर्ट में गूँजे ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ के नारे

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में आम आदमी पार्टी के निगम पार्षद (अब निलंबित) हाजी ताहिर हुसैन का बड़ा हाथ सामने आया। उसकी छत पर न सिर्फ़ पत्थर, बम व हथियारों के साथ सैकड़ों लोग जमा थे, जिन्होंने कई हिन्दुओं की हत्या की। आईबी में कार्यरत अंकित शर्मा को बेरहमी से मार डाला गया। उनके शरीर पर 400 बार चाकुओं से वार किया गया। ताहिर हुसैन की ओर से दाखिल जमानत याचिका पर बुधवार (मार्च 3, 2020) को अदालत में सुनवाई हुई

इस मामले की सुनवाई के दौरान अदालत कक्ष के बाहर ‘जय श्री राम’ और ‘हर हर महादेव’ के नारे लगे। वकीलों द्वारा लगाए गए इन दोनों नारों से पूरा अदालत परिसर गूँज उठा। बता दें कि ताहिर हुसैन फ़िलहाल फरार चल रहा है और उसने मंगलवार को ही जमानत याचिका दाखिल कर दी थी। उसके ख़िलाफ़ दयालपुर और खजुरी ख़ास थानों में मामला दर्ज किया गया है। ऐसे में गिरफ़्तारी से बचने के लिए वो तरह-तरह के क़ानूनी दाँव-पेंच आजमा रहा है।

जिला एवं सत्र न्यायाधीश सुधीर कुमार जैन ने ताहिर हुसैन की याचिका पर सुनवाई की। उन्होंने सम्बंधित एसआईटी अधिकारी को निर्देश दिया कि वो केस फाइल के साथ अदालत में उपस्थिति दर्ज कराएँ। फ़िलहाल गुरुवार दोपहर 12:30 बजे तक इस मामले की सुनवाई को स्थगित कर दिया गया है। जज ने जैसे ही आदेश की घोषणा की, वकीलों के एक समूह के पवित्र नारों से आसमान गूँजा दिया

दिल्ली के हिन्दू-विरोधी दंगों में ताहिर हुसैन की चार मंजिला ऊँची इमारत का इस्तेमाल किया गया, जहाँ से चारों तरफ बसे हिन्दुओं के ऊपर पत्थरबाजी और बमबारी की गई। पुलिस ने ताहिर के घर और फैक्ट्री को सील कर दिया है। पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा ने आरोप लगाया है कि ताहिर ने पूरे वारदात के समय आप नेता संजय सिंह और ख़ुद मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल से बातचीत की, जिसकी जाँच होनी चाहिए। ऑपइंडिया से इंटरव्यू के दौरान कपिल मिश्रा ने जनता को सलाह दी कि वो अपने बीच रह रहे ताहिर हुसैनों को पहचानें ताकि आगे से ऐसा कोई दंगा न भड़के।

गिड़गिड़ाते रहे पुजारी, दुर्गा मंदिर में तोड़फोड़ मचाते रहे दंगाई: खजुरी खास से ग्राउंड रिपोर्ट

पिछले दिनों दिल्ली हिन्दू-विरोधी दंगों से दहशत में रही। आज भी दंगों के निशान जहाँ-तहाँ बिखरे पड़े हैं। ऐसे में ऑपइंडिया की टीम चाँदबाग, करावल नगर रोड, खजुरी खास स्थित दुर्गा फकीरी मंदिर के पुजारी रवि शास्त्री से मिलने गई। उन्होंने बताया जिस दिन दंगाइयों ने भजनपुरा-चाँदबाग मोड़ का पेट्रोल पम्प फूँका, उसी दिन उनके निशाने पर इस इलाके में संख्या में कम होने के बावजूद भी हिन्दू समुदाय और मंदिर निशाने पर रहे।

श्री दुर्गा फकीरी मंदिर, जहाँ अब बोर्ड ठीक करा दिया गया है।

चाँदबाग चौराहे के पास करावल नगर रोड पर ही दुर्गा फकीरी मंदिर है। पेट्रोल पंप फूँकने के बाद दंगाई तेजी से चारो तरफ आग लगा रहे थे। शाम का समय था। दहशत और शोर बढ़ता जा रहा था। जैसे ही भारी संख्या में दंगाइयों की नजर मंदिर की तरफ पड़ी तो सबसे पहले मंदिर बचाने के लिए मंदिर के पुजारी प्रार्थना करने लगे। दंगाइयों ने मंदिर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी थी। दंगाइयों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए, मंदिर का चैनल गेट बंद कर दिया गया। बाद में शटर भी बंद करना पड़ा।

तब तक पास के पेट्रोल पम्प बचाने के लिए फ़ोर्स की धमक बढ़ जाने से दंगाई मंदिर को कोई बड़ा नुकसान नहीं पहुँचा सके। उस पेट्रोल पम्प के बारे में भी कहा जा रहा है कि अगर दंगाई इंडियन ऑइल के उस पम्प को पूरी तरह नष्ट करने में सफल हो गए होते तो इलाके का आधा किलोमीटर का क्षेत्र साफ़ हो गया होता। कपिल मिश्रा ने भी ऑपइंडिया से इंटरव्यू के दौरान इस बात की पुष्टि की थी।

लेकिन, फिर भी दंगाइयों ने मंदिर का बोर्ड तोड़ दिया और साथ ही बाहर के दो कैमरे तोड़ दिए। प्रशासन की मुस्तैदी के कारण मंदिर को कोई खास नुकसान नहीं पहुँचा।

हालाँकि, इसी दुर्गा फकीरी मंदिर को लेकर बीबीसी सहित कई वामपंथी मीडिया गिरोह ने न्यूज़ चलाया कि इस मंदिर को मुस्लिम ने सौहार्द में बचाया। यहाँ सवाल ये हैं कि मुस्लिम किससे बचा रहे थे मंदिर, दूसरे मुस्लिमों से? अब यहाँ यह कह कर चित भी अपनी और पट भी अपनी साबित करने की कोशिश की गई कि जो दुर्गा मंदिर तोड़ने आए थे वो दंगाई थे उन्हें मुस्लिम कहकर सभी मुस्लिमों को बदनाम मत कीजिए, और जो नीचे मंदिर न तोड़ने या मंदिर के आस-पास से हट जाने की अपील कर रहे थे वे अच्छे वाले मुस्लिम हैं। ये तो वही बात हो गई अगर मंदिर तोड़ने वाले भी उसी मजहब के हैं तो बाहर से बचाने का नाटक क्यों?

बता दें कि ये मंदिर चाँदबाग इलाके में ही उस शिवमंदिर से थोड़ा पहले है जिसके छत पर भारी पथराव करके वहाँ से पुजारी को भागने पर मजबूर कर दिया था। शिव मंदिर ताहिर हुसैन के घर के ठीक सामने हिन्दुओं की गली नंबर-5 में दो मकान छोड़कर था। जिसे मुस्तफाबाद से आने वाले दंगाइयों ने नष्ट करने की कोशिश की थी।

कहा जाता है कि मंदिरों पर पथराव के बाद ही चाँदबाग में हिन्दू और मुस्लिमों के बीच दोनों तरफ से नारेबाजी तेज हो गई थी। जिसके बाद अंकित शर्मा माहौल शांत कराने गए तो प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार ताहिर हुसैन के घर से निकली मुस्लिम दंगाइयों की भीड़ उन्हें और उनके साथ दो लोगों को खींच कर अंदर ले गई थी जिनकी वीभत्स हत्या के बाद बाद में नाले से लाश बरामद हुई।

प्रत्यक्षदर्शियों ने ऑपइंडिया को बताया था कि किस तरह से मुस्तफाबाद और खजुरी से आने वाली भीड़ तारिक हुसैन के घर को बेस बनाकर आस-पास के हिन्दू घरों और दुकानों को भारी नुकसान पहुँचाती है। किस तरह से अधिकांश छोटे बड़े दूकान पहले लूट लिए जाते हैं और बाद में तोड़-फोड़ कर पेट्रोल बम आदि के जरिए आग के हवाले कर दिया गया।

आज चाँदबाग इलाके में फैले दंगों को कई दिन बीत गए हैं लेकिन लोगों खासतौर से उस इलाके में रहने वाले हिन्दुओं के अंदर डर अभी भी बना हुआ है। इस बात की पुष्टि मंदिर के पुजारी ने भी की। कहा- लोग अभी भी मंदिर आने से डर रहे हैं कि कहीं उनकी पहचान न जाहिर हो जाए। कोई उन्हें हिंदूहोने की वजह से, मंदिर आने के कारण फिर से निशाना बनाने की कोशिश न कर ले।

हालाँकि, अब इलाके में सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद है। इसलिए इलाके में बाहर तो शांति दिख रही है लेकिन लोग, खासतौर से हिन्दू समुदाय के लोग अभी भी डरे हुए हैं कि कहीं ऐसा न हो कि सुरक्षाबलों के जाते ही फिर से दंगाई उन्हें निशाना बना लें।

‘हिंदू इलाके में शांति मार्च… फिर मस्जिद में मीटिंग और 400 लीटर पेट्रोल से हमला’ – बुरे फँसे AAP विधायक हाजी युनूस

बहू-बेटियों की इज्जत बचाने के लिए हिन्दू खा रहे थे गोली और पत्थर: शिव विहार ग्राउंड रिपोर्ट

ग्राउंड रिपोर्ट: मुस्लिम भीड़ ने शिव मंदिर पर किया था कब्जा, छत से हिन्दुओं पर हो रही थी पत्थरबाजी

‘सोनिया-राहुल, इन माँ-बेटों ने ही आग लगाई है’: राहुल गाँधी के दौरे पर फूटा पीड़ित महिला का गुस्सा

दिल्ली में बीते दिनों नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर हुई हिंसा के बाद आखिरकार कॉन्ग्रेस नेता एक-एक कर सामने आने लगे हैं। कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी समेत कुछ अन्य पार्टी नेता बुधवार को हिन्दू-विरोधी दंगों से प्रभावित इलाकों में पहुँचे।

राहुल गाँधी ने पार्टी नेताओं के साथ नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली के बृजपुरी इलाके का दौरा किया। इस दौरान राहुल गाँधी नफरत और हिंसा को बेमानी बताते हुए दंगे पर राजनीति करते हुए नजर आए। उन्होंने मौके को भुनाते हुए पीएम नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा।

‘हिन्दुस्तान की भारत माता’

वायनाड से सांसद राहुल गाँधी ने बृजपुरी के मॉडर्न स्कूल का दौरा करते हुए कहा कि स्कूल हिन्दुस्तान का भविष्य है, जिसे हिंसा और नफरत ने जलाया है। उन्होंने कहा नफरत और हिंसा से किसी को फायदा नहीं पहुँचेगा। इस दौरान भी जुबान फिसलने की आदत पर राहुल गाँधी काबू नहीं रख पाए। उन्होंने कहा कि इसमें ‘हिन्दुस्तान की भारत माता’ को कोई फायदा नहीं है। बता दें कि इस स्‍कूल को दंगाइयों ने जला कर पूरी तरह तबाह कर दिया था। इस इलाके में हुई हिंसा के दौरान दंगाइयों ने स्‍कूल में घुस कर किताब-कॉपी से लेकर बेंच और डेस्‍क को जला दिया था। 

राहुल गाँधी जब इलाके का दौरा कर रहे थे तो एक स्थानीय महिला ने राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी को इन दंगों का जिम्मेदार बताया।

महिला ने कहा, “हमने बहुत मुश्किल से अपनी जान बचाई है पचास-सौ लोगों के पत्थरों से भाग-भाग के।” इसके बाद जब पत्रकारों ने महिला से पूछा कि उनका राहुल गाँधी के बारे में क्या कहना है तो महिला ने गुस्से में जवाब दिया- “इन्होंने ही आग लगाई है मिल-जुल कर। क्या कहा था सोनिया गाँधी ने? ‘आर या पार’।”

दिल्ली के दंगा प्रभावित बृजपुरी, चाँदबाग के दौरे के दौरान पार्टी के कई वरिष्‍ठ नेता राहुल के साथ थे। इनमें अधीर रंजन, केसी वेणुगोपाल शामिल हैं। पुलिस हिंसाग्रस्‍त इलाकों में लगातार निगरानी रख रखी है। वहीं कई इलाकों में पुलिस और सुरक्षा बल फ्लैग मार्च कर रहे हैं।

13 साल की वंशिका ने बहन का बाल विवाह रोका, अब योगी सरकार करेगी सम्मानित

8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस से पहले उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री बाल विवाह को रोकने वाली 13 साल की एक लड़की को सम्मानित करने जा रहे हैं। यह लड़की है वंशिका गौतम, जिसने पिछले साल अपनी 16 वर्षीय चचेरी बहन का विवाह रोका था।

यूपी की मेरठ की रहने वाली वंशिका 8वीं की छात्रा हैं। वह कस्तूरबा गाँधी आवासीय विद्यालय में पढ़ती है। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 5 मार्च को वनिष्का सहित 20 लड़कियों को सम्मानित करने वाले हैं।

भारत में बाल विवाह पूर्ण रूप से से प्रतिबंध होने के साथ-साथ एक दंडनीय अपराध है। बावजूद इसके आज भी देश के कई हिस्‍सों में बाल विवाह को अंजाम दिया जाता है। इस प्रकार के मामले खासकर उत्तर प्रदेश, राजस्‍थान, बिहार, झारखंड और पश्चिम बंगाल में सामने आते हैं।

‘मीना मंच’ की सदस्य है वंशिका

वंशिका के अनुसार, “एक साल पहले मेरे चाचा-चाची मेरी चचेरी बहन की शादी करने की तैयारी कर रहे थे। मैंने अपने पूरे परिवार को समझाया कि वह 18 साल से पहले शादी नहीं कर सकते हैं। इसके बाद परिवार बहन की पढ़ाई जारी रखने पर सहमत हुआ।” मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, 13 वर्षीय वंशिका गौतम महिला कार्यकर्ताओं की समूह ‘मीना मंच’ की सदस्य है। यह लड़कियों के क्रियाकलाप से जुड़ा समूह है, जिसका उद्देश्य स्कूल नामांकन में सुधार करना और विभिन्न मुद्दों पर जागरूकता फैलाना है।

कस्तूरबा गाँधी आवासीय विद्यालय की वार्डन कुमारी प्रियंका ने बताया कि वंशिका को 5 मार्च को लखनऊ बुलाया गया है। उन्होंने कहा कि यह उनके स्कूल के लिए गर्व की बात है कि राज्य स्तर पर सम्मान मिलेगा। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा यह पुरस्कार शिक्षा के क्षेत्र में और सामाजिक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाली लड़कियों को दिया जाता है।

गौरतलब है कि बाल विवाह को लेकर उत्तर प्रदेश और बिहार में काफी सुधार हुआ है। भारत में बाल विवाह की औसत दर करीब 12% है। भारत के शहरों में बाल विवाह का औसत 6.9% और गाँवों में 14.1% है। सबसे ज्यादा बाल विवाह के मामले हरियाणा से सामने आते हैं।

माँ गंगा के ठन्डे जल में डुबकी लगाने से मिलता है मोक्ष: ऋषिकेश पहुँच कर अभिभूत हुए जॉन्टी रोड्स

दक्षिण अफ्रीका के पूर्व क्रिकेटर और क्रिकेट की दुनिया में अब तक के सर्वश्रेष्ठ फील्डर माने जाने वाले खिलाड़ी जॉन्टी रोड्स आजकल भारत दौरे पर हैं। हर बार की तरह उनका ये आम दौरा नहीं है और न ही वो यहाँ किसी क्रिकेट टीम को कोचिंग देने पहुँचे हैं। वो क्रिकेट से इतर अपना समय बीता रहे हैं और भारतीय संस्कृति में गोते लगा रहे हैं। जोंटी रोड्स भारत से इतने प्रभावित हैं कि उन्होंने अपनी बेटी का नाम भी ‘इंडिया’ रखा है। वो कई वर्षों तक दिग्गज आईपीएल टीम मुंबई इंडियंस के फील्डिंग कोच भी रहे हैं।

जॉन्टी रोड्स ने इस दौरान ऋषिकेश में गंगा में डुबकी लगाई। रोड्स ने ट्विटर पर इस पल को साझा किया और लिखा कि पवित्र माँ गंगा के ठन्डे पानी में डुबकी लगाने से न सिर्फ़ भौतिक बल्कि दैविक रूप से भी मोक्ष की प्राप्ति होती है। रोड्स ने इस दौरान ऋषिकेश की तारीफ़ भी की। उन्होंने ऋषिकेश शहर का दौरा किया और मंदिरों में मत्था टेका।

इस दौरान पूर्व दक्षिण अफ़्रीकी क्रिकेटर ने ऋषिकेश में युवाओं को फिटनेस के टिप्स भी दिए। उन्होंने ‘अंतरराष्ट्रीय योग महोत्सव’ में पहुँच कर युवाओं को जीवन में अनुशासन का पाठ पढ़ाया। मुनिकीरेती योगा घाट पर बने पंडाल में सैकड़ों युवाओं और योग साधकों को सम्बोधित करते हुए रोड्स ने कहा कि खेल जगत में फिटनेस का सबसे ज्यादा महत्व है और इसके लिए योगाभ्यास की ज़रूरत पड़ती है। रोड्स ने कहा:

“भारतीय योग का महत्व और उपयोगिता की चर्चा आज पूरे विश्व में हो रही है। सभी इससे प्रभावित हैं। मेरा भारत से गहरा जुड़ाव है। मेरे दोनों बेटे भारत में पैदा हुए हैं। मेरी बेटी का नाम ‘इंडिया’ है। मेरे पिता एक अध्यापक थे, जिन्होंने मुझे अनुशासन का महत्व सिखाया। यही मैं आज आपलोगों को बताने आया हूँ।”

इस दौरान रोड्स ने युवाओं को धूम्रपान से एकदम दूर रहने की सलाह दी। उन्होंने युवाओं को बताया कि क्रिकेट जगत में नाम बनाने के लिए आपकी बाजुओं में असीमित ताक़त की आवश्यकता है। जहाँ बल्लेबाज को गेंद के साथ सही टाइमिंग की ज़रूरत होती है, वहीं गेंदबाज को बॉल फेंकने के लिए बाजुओं पर जोर लगाना पड़ता है। जॉन्टी रोड्स ने ऋषिकेश और उत्तराखंड के लोगों की भी तारीफ की।

दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों की 10 कहानियाँ: ताकि याद रहे उस ‘डरी हुई’ मजहबी भीड़ का अताताई चेहरा

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हिंदू विरोधी दंगों के दौरान विशेष समुदाय की भीड़ ने सुनियोजित तरीके से बहुसंख्यक आबादी और उनकी संपत्तियों को निशाना बनाया। कहीं हिंदुओं के घरों को आग के हवाले किया गया, तो कहीं उनके शैक्षणिक संस्थानों को। अल्पसंख्यक कहे जाने वाले समुदाय की भीड़ ने न हिंदुओं की दुकानों को चुन-चुनकर निशाना बनाया। धार्मिक स्थलों को भी नहीं छोड़ा। लेकिन बावजूद इसके हिंदू अपने बच्चों के लिए, अपनी महिलाओं के लिए इस भीड़ के सामने खड़े रहे और इनके उपद्रव को रोकने के लिए, इनका जवाब देने के लिए उनसे लड़ते रहे। इसमें कई हिंदुओं को जान गॅंवानी पड़ी। कुछ ने अपनी आँखों के सामने जीवन भर की कमाई को स्वाहा होते देखा। मरने वालों की सूची में 15 साल के लड़के से लेकर आईबी और दिल्ली पुलिस के जवान तक हैं।

हेड कॉन्स्टेबल रतन लाल को गोली मारी

24 फरवरी को उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में किसी दंगाई के तमंचे से निकली गोली ने रतनलाल की जान ले ली। उनकी मौत गोकुलपुरी में हुई। साल 1998 में दिल्ली पुलिस में शामिल होने के बाद रतनलाल आखिरी समय में गोकुलपुरी में एसीपी ऑफिस में तैनात थे। उनके परिवार के अनुसार सोमवार को बुखार होने के बावजूद वो अपनी ड्यूटी करने गए थे। ड्यूटी पहुँचकर उन्होंने ही अपने परिवार को दिल्ली दंगों के बारे में बताया था। मगर उन्हें क्या पता था कि ये दंगे जिनके बारे में वो अपने परिवार को आगाह कर रहे हैं, वहीं उनकी जान ले लेंगे। वो न अपने घर लौटेंगे और न ही होली पर अपनी माँ के पास।

आईबी कॉन्सटेबल अंकित शर्मा को गोदा

25 फरवरी को हुए दंगों में आईबी के अंकित शर्मा की क्रूरता से हत्या की गई। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक AAP के निलंबित पार्षद ताहिर हुसैन के गुंडे उन्हें घसीट कर उसकी बिल्डिंग में ले गए थे। बाद में उनका शव नाले से मिला। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के मुताबिक करीब 6 लोगों ने मिलकर 2 से 4 घंटे तक 400 बार उन्हें चाकुओं से गोदा होगा। अंकित की गलती सिर्फ़ इतनी थी कि उन्हें लगा जो लोग उनके घर के बाहर लड़ रहे हैं, वे उन्हें जानते हैं, और अगर वे मना करेंगे तो सब शांत हो जाएँगे। लेकिन अंकित को नहीं पता था, वो भीड़ तो बर्बता की पराकाष्ठा लिखने चली थी।

आलोक तिवारी फिर घर नहीं लौटे

26 फरवरी को खाना खाने के बाद घर से बाहर निकले आलोक तिवारी अपने घर दोबारा न लौट सके। उन्हें दंगाइयों ने पत्थर मारकर घायल किया और जीटीबी अस्पताल में उन्होंने अपनी आखिरी सांस ली। आलोक की पत्नी के मुताबिक, जिस समय उनके पति घर से निकले, वो निश्चिंत थी, क्योंकि उन्हें बाहर के माहौल के बारे में नहीं पता था। लेकिन जब उनके फोन पर आलोक के फोन से किसी और का फोन आया, तो वो घबरा गईं। फोन करने वाले ने उन्हें आलोक के घायल होने की बात बताई, जिसके बाद वो भागकर अपने पति के पास गईं। मगर, अफसोस जब तक आलोक की पत्नी या आसपास के लोग उनके लिए कुछ कर पाते तब तक उनका बहुत खून बह चुका था। उनकी हालत इतनी बिगड़ गई थी कि अस्पताल पहुँचने के बाद भी उन्हें कोई बचा न सका।

अप्रैल में होने वाली थी रोहित सोलंकी की शादी

इस हिंसा में बाबूनगर मुस्तफाबाद के रहने वाले हरि सिंह सोलंकी ने अपना बेटा रोहित सोलंकी खो दिया। रोहित की शादी अप्रैल में होने वाली थी। वह एक निजी कंपनी में काम करता था। लेकिन दंगाइयों की गोली ने उसे भी नहीं छोड़ा।

हाथ-पैर काट दिलबर नेगी को आग में फेंका

दिलबर नेगी के साथ हुई निर्ममता तो रूह कँपा देने वाली है। 24 फरवरी को जिस समय दिल्ली में हिंसा भड़की थी, उसी शाम इन दंगों की क्रूर वास्तविकता का शिकार 20 साल के दिलबर सिंह नेगी को होना पड़ा था। दिलबर सिंह नेगी को दंगाइयों की भीड़ ने तलवार से काटने के बाद जलते हुए घर में आग के हवाले कर दिया था। बाद में जलकर राख हुए दिलबर नेगी की विडियो भी वायरल हुई थी।

‘अल्लाहु अकबर’ के नारों के बीच हत्या

24 तारीख को हिंसा भड़कने के बाद उत्तर-पूर्वी दिल्ली के इलाकों से दिल दहला देने वाली खबर आती रही। इसी दौरान विनोद नाम के हिंदू व्यक्ति की मौत की भी खबर आई। विनोद अल्लाह हु अकबर और नारा ए तकबीर का एलान करती भीड़ के शिकार हुए। भीड़ ने विनोद को मारने के बाद न केवल उनके बाइक में आग लगाई, बल्कि वहाँ रहने वाले सभी हिंदुओं को धमकी दी कि उन्हें रात भर इसी तरह लाशें मिलती रहेंगी।

न चाउमिन खा सका, न खिला सका

गोकुलपुरी में 26 फरवरी को 15 साल का एक मासूम अपने घर से चाउमिन लेने निकला था। नितिन की गलती सिर्फ़ इतनी थी कि अपने घर के आसपास के माहौल को शांत देख उसने घर से बाहर पैर तो रखा, लेकिन दंगाइयों से अपनी जान बचा पाने में असफल रहा। उसे गोली लगी या पत्थर… किसी को कुछ नहीं पता। लेकिन जब उसे अस्पताल ले जाया गया तब वो जिंदा था, मगर सिर में चोट इतनी गहरी थी कि वो 3-4 घंटे में ही जिंदगी की जंग हार गया।

विवेक के सिर में घुसाई ड्रिल मशीन

उत्तर-पूर्वी दिल्ली में भड़की हिंसा में दंगाइयों ने 19 साल के विवेक पर हमला किया और उसके सिर में ड्रिल मशीन से छेद कर दी। जिस समय इस दर्दनाक घटना को अंजाम दिया गया उस समय विवेक अपनी दुकान के भीतर था। हालाँकि डॉक्टरों ने उसे सर्जरी के बाद ठीक होने की बात कही, लेकिन उसके सिर में घुसी ड्रिल को देखकर वे भी हैरान थे।

दलित दिनेश की जिहादियों ने ली जान

दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में जान गँवाने वालों में एक दिनेश कुमार खटीक का नाम भी शामिल है। वे हिंसा वाले दिन अपने बच्चों के लिए दूध लेने निकले थे। लेकिन उनकी गलती ये थी कि वो दुकान बंद होने के कारण दूर निकल गए और दूध खोजते-खोजते फैसल फ़ारूक़ के राजधानी स्कूल के बगल से जा गुजरे। बस फिर क्या? यही पर उन्हें गोली लगी और वो खत्म हो गए। बता दें दिनेश के भाई ने हमसे बात करते हुए स्पष्ट तौर पर बताया कि उनके भाई की जान जिहाद ने ली है- इस्लामी कट्टरपंथियों के जिहाद ने। उन्होंने कहा कि पूरे मुस्तफाबाद ने उनके भाई को मार डाला।

अनूप के गर्दन में लगी ताहिर के गुंडो की गोली

24 फरवरी को चांदबाग में मरते-मरते बचने वालों में एक नाम अनूप सिंह का है। अनूप को ताहिर के गुंडों ने गोली मारी थी। वैसे तो जिस तरह गोली अनूप को लगी थी, उसे देखकर कोई उनके जिंदा रहने की कल्पना नहीं कर सकता। लेकिन ये चमत्कार ही था कि वो जिंदा बचे। अनूप बताते हैं कि जिस समय उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा था उस समय भी हिंसक भीड़ उनपर लगातार पत्थर फेंक रही थी और उनकी जान लेने की कोशिश में जुटी थी।

40-50 लोग घुसे और दुकान को आग के हवाले किया

दिल्ली हिंसा में करोड़ों का नुकसान हुआ। कई लोगों ने अपनी दुकानें अपनी आखों के आगे आग में जलते हुए देखीं। दिलीप भी उन्ही लोगों में से एक नाम हैं। दिलीप के अनुसार, करीब 2 बजे से उस दिन पथराव शुरू हुआ था। लेकिन, वह अपनी दुकान को 1 बजे बंद कर चुके थे। वह उस समय दुकान में ताला मारकर अंदर बैठे थे, जब दंगाइयों ने उनपर अचानक हमला किया। उनके मुताबिक 2 से ढाई बजे के बीच 40-50 ऐसे लोग उनकी दुकान का ताला तोड़कर अंदर घुस आए और दुकान को आग के हवाले कर दिया।

तुम फेक न्यूज़ की फैक्ट्री हो, घृणा फैलाते हो: इंटरव्यू माँग रहे ‘द प्रिंट’ को कपिल मिश्रा ने लताड़ा

नॉर्थ-ईस्ट दिल्ली में हुए हिन्दू-विरोधी दंगों में मीडिया ने जम कर फेक न्यूज़ फैलाया और मुस्लिम दंगाइयों को बचाने के लिए हिन्दुओं को बदनाम किया। इनमें एनडीटीवी, ‘द वायर’ और ‘स्क्रॉल’ जैसे मीडिया संस्थान शामिल हैं। इनमें ‘एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया’ के अध्यक्ष शेखर गुप्ता का पोर्टल ‘द प्रिंट’ भी शामिल है, जिसने दिल्ली दंगों में हिन्दुओं का पक्ष छिपाया और मुस्लिम दंगाई भीड़ को बचाने के लिए हर कोशिश की। दिल्ली के पूर्व मंत्री कपिल मिश्रा को बदनाम करने वाले न्यूज़ पोर्टलों में एक ‘द प्रिंट’ भी शामिल था। वही ‘द प्रिंट’ अब कपिल मिश्रा का इंटरव्यू लेना चाहता है।

भाजपा नेता कपिल मिश्रा से ‘द प्रिंट’ ने संपर्क साधा और एक इंटरव्यू देने की गुहार लगाई। उसके एक पत्रकार ने कपिल मिश्रा को व्हाट्सप्प पर मैसेज कर कहा कि वो उन्हें कॉल करने का प्रयास कर रहा है, क्योंकि उसे उनसे मुलाक़ात करनी है। पत्रकार ने इंटरव्यू के लिए समय देने की गुहार लगाई। साथ ही उसने ये भी दावा किया कि कपिल मिश्रा को हर जगह से ख़ासा समर्थन मिल रहा है। उसने कहा कि वो ‘द प्रिंट’ में कपिल मिश्रा पर एक लेख अथवा प्रोफाइल तैयार करना चाहता है।

इसके बाद मिश्रा ने उस पत्रकार को जो रिप्लाई किया, वो आप भी देखिए। यहाँ हम उनके ही शब्दों में उनके जवाब को हूबहू पेश कर रहे हैं। कपिल मिश्रा ने कहा कि उनके इसी बयान को ‘द प्रिंट’ को दिया आधिकारिक बयान समझा जाए:

“तुम्हारा न्यूज़ पोर्टल ‘द प्रिंट’ एक पक्षपाती फेक न्यूज़ फैक्ट्री है। बावजूद इसके कि तुमलोग मेरे ख़िलाफ़ लगातार एक घृणास्पद अभियान चला रहे हो, मुझे चारों ओर से भारी समर्थन मिल रहा है। ज़मीन पर तुम जहाँ भी लोगों से बात करोगे वहाँ से मेरे लिए समर्थन आएगा लेकिन ‘द प्रिंट’ जैसी फेक न्यूज़ फैक्ट्री को ये पसंद नहीं। मुझे ज़रूरत ही नहीं है कि अपना समर्थन साबित करने के लिए तुम्हारे पोर्टल में लेख प्रकाशित करवाऊँ। दिल्ली की जनता ने तुम्हारे प्रोपेगेंडा को नकार दिया है। तुम जाकर इस पर लेख लिखो कि मोहम्मद शाहरुख़ बचपन में कितना क्यूट था। तुम लिखो कि कैसे ‘बुरे हिन्दुओं’ ने ताहिर हुसैन को एक आतंकवादी बनने के लिए मजबूर कर दिया।”

कपिल मिश्रा ने अपने इस बयान और व्हाट्सप्प स्क्रीनशॉट को ट्विटर पर भी शेयर किया। ‘द प्रिंट’ को आइना दिखाने के लिए लोग उनकी वाहवाही भी कर रहे हैं। ‘द प्रिंट’ ने अपने एक लेख में पूछा था कि क्या रोड जाम कर देना इतना बड़ा गुनाह है कि कोई क़ानून अपने हाथ में ले ले? पहली बात तो ये कि 2 महीने से रोड जाम करने से लाखों लोगों को प्रतिदिन परेशानी हुई। दूसरी बात, क़ानून हाथ में किसने लिया? इस्लामी टोपी पहने वो 40 लोग कौन थे, जिन्होंने ब्रह्मपुरी में विनोद कुमार को मार डाला? साथ ही ‘द प्रिंट’ रोड जाम करने को सही ठहराता है और कहता है कि तभी तो अटेंशन मिलेगा।

जब घर में आग लगेगी तो 200 लिटर फ्री पानी काम नहीं आएगा: कपिल मिश्रा की ऑपइंडिया से बातचीत

जुटाए ₹72 लाख: दिल्ली दंगे में मारे गए हिन्दुओं के परिवारों के लिए आगे आए कपिल मिश्रा और तजिंदर बग्गा

दिल्ली के जमनापार में थी बड़े कत्लेआम की तैयारी, क्या कपिल मिश्रा ने राजधानी को बड़ी हिंसा से बचा लिया?

दिल्ली दंगा: ताहिर हुसैन पर 2 और FIR, जाकिर नगर में मिली लास्ट लोकेशन

उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हिंदू विरोधी दंगों के सरगना ताहिर हुसैन पर दो और एफआईआर दर्ज की गई है। एक एफआईआर दयालपुर पुलिस स्टेशन में और दूसरी खजूरी खास थाने में दर्ज की गई है। आईबी के अंकित शर्मा की निर्मम हत्या को लेकर उसके खिलाफ पहले ही एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। पुलिस उसकी तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार दयालपुर थाने में अजय गोस्वामी ने उसके खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। उन्होंने कहा है कि ताहिर हुसैन के मकान से गोलियॉं चल रही थी। पत्थरबाजी और पेट्रोल बम भी फेंके जा रहे थे। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी के निलंबित पार्षद ताहिर के घर करीब 3000 दंगाइयों के जमा होने की बात स्थानीय लोगों ने ऑपइंडिया को बताई थी। अंकित शर्मा सहित कई लोगों को दंगाई उसके घर ले गए और उनकी हत्या कर दी। उसके घर से पेट्रोल बम और पत्थरों का जखीरा बरामद किया गया था। एफआईआर दर्ज होने के बाद से वह फरार है।

एक रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि 1 मार्च की सुबह ताहिर हुसैन दिल्ली के जाकिर नगर इलाके में मौजूद था। उस दिन उसके मोबाइल फोन की लोकेशन जाकिर नगर में मिली थी। उसकी लास्ट लोकेशन इसी इलाके की गली नंबर 20 की है। खबरों के अनुसार वह दो फोन इस्तेमाल कर रहा था, जो एक मार्च के बाद से बन्द हैं।

बुधवार को दिल्ली की एक कोर्ट में ताहिर की अग्रिम जमानत याचिका पर भी सुनवाई हुई। सुनवाई करते हुए कड़कड़डूमा कोर्ट ने विशेष जाँच दल को नोटिस जारी किया है। याचिका पर अब सुनवाई गुरुवार को होगी।

इससे पहले पुलिस ने उन मीडिया रिपोर्टों को खारिज किया था जिनमें दावा किया गया था कि ताहिर के घर पर दंगाइयों ने कब्जा कर लिया था। उसे खुद पुलिस ने बचाया था। दिल्ली पुलिस प्रवक्ता एमएस रंधावा के अनुसार 24 फरवरी की रात एक पार्षद के फॅंसे होने की सूचना मिली थी। पुलिस मौके पर पहुॅंची तो वह अपने घर पर मिला। 26 फरवरी को अंकित शर्मा का शव मिला और ताहिर पर आरोप लगे। इसके बाद उसके घर की तलाशी ली गई और सबूत जुटाए गए। रंधावा ने बताया कि उसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस छापेमारी कर रही है और वह जल्द गिरफ्त में होगा।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार पुलिस के हाथ सीसीटीवी फुटेज लगी है जिसमें 24 फरवरी को ताहिर 15 से ज्यादा लोगों के साथ अपने घर में घुसते दिख रहा है। इन सबके हाथ में पिस्टल है। उसके पीछे सैकड़ों दंगाइयों के चलने का फुटेज भी सामने आया है। इन दंगाइयों के हाथ लाठी-डंडे और तबाही के अन्य सामान हैं। रिपोर्ट में पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि पिस्टल के साथ दिखने वाले युवकों की पहचान कर ली गई है। ये युवक भी अपने परिवारों के साथ फरार बताए जा रहे हैं और 26 फरवरी से इनका मोबाइल भी बंद है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार मंगलवार को पुलिस ने चॉंदबाग और उसके आसपास के इलाकों में ताहिर की तलाश में छह संभावित ठिकानों पर दबिश दी। लेकिन सफलता नहीं मिली। हालॉंकि ताहिर भले पुलिस से आँखमिचौली खेल रहा हो लेकिन जो तथ्य सामने आ रहे हैं उससे उस पर शिकंजा और कसता ही जा रहा है। पुलिस उसके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी करने की भी तैयारी कर रही है।

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दहेज़ में नहीं मिली बुलेट तो शौहर तजाद्दीन ने 4 दोस्तों संग बीवी का किया रेप: 3.5 साल बाद दर्ज हुआ मामला

बिहार के पश्चिम चम्पारण में एक व्यक्ति ने पार्टी के बहाने बुला कर चार दोस्तों के साथ अपनी ही बीवी का बलात्कार किया। इतना ही नहीं, उसने पूरे वारदात का विडियो भी शूट कर लिया और बीवी को धमकाने लगा कि उसने अगर कहीं भी शिकायत की तो विडियो वायरल कर दिया जाएगा। वो कई महीनों तक अपनी बीवी को ब्लैकमेल करता रहा। लगातार मिल रही धमकियों के बीच बीवी ने पुलिस का दरवाजा भी खटखटाया, लेकिन उसे वहाँ भी निराशा हाथ लगी

हालाँकि, दुष्कर्म की ये घटना नवंबर 16, 2016 की है, यानी आज से लगभग साढ़े तीन साल पहले की। वो पिछले कई महीनों से न्याय के लिए दर-दर भटक रही है लेकिन मामला सोमवार (मार्च 2, 2020) को दर्ज किया गया। बिहार के पुलिस महानिदेशक के संज्ञान में आने के बाद पुलिस हरकत में आई है। आरोपित का नाम मोहम्मद तजाद्दीन ख़ान है। वह पश्चिम चम्पारण के बैरिया का निवासी है। पीड़िता के साथ उसका निकाह 2014 में हुआ था। उसके बाद से ही उसने दहेज़ के लिए प्रताड़ित करना शुरू कर दिया था।

निकाह के बाद एक-दो महीने तक सब ठीक-ठाक था, लेकिन उसके बाद से तजाद्दीन दहेज़ में बुलेट मोटरसाइकिल की माँग पर अड़ गया। उसने पीड़िता के सारे आभूषण छीन लिए और उन्हें बेच डाला। इसके बाद आरोपित बाहर कमाने निकल गया। 2016 में वह तीन महीने बाहर से कमा कर घर लौटा और पार्टी के बहाने अपने एक दोस्त के घर अपनी बीवी को मिलने बुलाया। जब उसकी बीवी वहाँ पहुँची तो उसने देखा कि वहाँ उसके 4 दोस्त पहले से ही मौजूद थे।

‘दैनिक जागरण’ के स्थानीय संस्करण में छपी ख़बर

जब उसकी बीवी वहाँ पहुँची तो उसे पता चला कि कोई पार्टी नहीं हो रही है। इसके बाद उसके शौहर ने जबरदस्ती उसका हाथ पकड़ा और उसे उठा कर एक कमरे में ले गया। वहाँ शौहर तजाद्दीन ने अपने 4 दोस्तों संग मिल कर पीड़िता का गैंगरेप किया। वहाँ से घर लौटने के बाद उसके पति ने चेतावनी दी कि अगर पीड़िता ने कहीं भी इस बारे में मुँह खोला तो वो विडियो वायरल कर देगा।

इसी बीच पीड़िता ने एक बच्ची को भी जन्म दिया। इसके कुछ ही दिन बाद जब वो मायके गई, तब उसने अपने परिजनों को अपने शौहर के करतूत की सारी जानकारी दी। पीड़िता के अब्बा दिल्ली में ऑटो ड्राइवर हैं। उन्होंने अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए कड़ा संघर्ष किया। बेतिया एसपी का दरवाजा खटखटाने से लेकर राष्ट्रीय महिला आयोग तक में शिकायत की गई। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को भी ज्ञापन सौंपा गया, जिसके बाद डीजीपी ने इस मामले में संज्ञान लेते हुए स्थानीय थाने को कार्रवाई करने का निर्देश दिया। पुलिस आरोपितों की धर-पकड़ के लिए छापेमारी कर रही है।

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कोई नहीं जानता दिल्ली दंगों में कितने मरे, ध्यान भटकाने के लिए कोरोना का हल्ला: ममता बनर्जी

चीन के वुहान शहर से शुरू हुआ कोरोना वायरस का संक्रमण अब तक दुनिया के ज़्यादातर देशों तक पहुँच चुका है। भारत भी कोरोना से प्रभावित देशों में से एक है। भारत में यह संक्रमण पहली बार केरल में सामने आया था। एक ओर इसे लेकर जहाँ लोगों में खौफ बढ़ रहा है वहीं दूसरी ओर राजनीतिक दल वायरस पर भी मौक़ा चूकने से पीछे नहीं हट रहे हैं। इन्हीं में से एक नाम है पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का। ममता बनर्जी का कहना है कि कोरोना वायस को लेकर देश में जानबूझकर डर का माहौल बनाया जा रहा है, ताकि दिल्ली में हुई हिंसा से ध्‍यान भटकाया जा सके।

दरअसल, आज ही कोरोना वायरस की गंभारीता को देखते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह और बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा ने होली मिलन समारोह में नहीं शामिल होने का फैसला किया है। ममता बनर्जी ने कोलकाता में कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए यह बात कही। सीएम ममता बनर्जी ने कहा, “कोई नहीं जानता है कि दिल्ली दंगा में कितने लोगों की मौत हुई। लोगों का ध्यान भटकाने के लिए वे (केंद्र सरकार) टीवी चैनल की मदद से कोरोना वायरस का हौवा खड़ा कर रहे हैं। उनका मकसद है कि लोग यह नहीं पूछें कि वास्तव में कितने लोगों की मौत हुई है।”

‘BJP वाले बंगाल में चूहा काटने पर भी करवाते हैं CBI जाँच’

केंद्र सरकार पर आरोप लगाते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “बंगाल में चूहा भी काट ले तो ये लोग (BJP वाले) सीबीआई जाँच की माँग करते हैं। वहीं, दिल्ली में इतने लोगों की हत्या हुई, इसको लेकर कोई न्यायिक जाँच नहीं हुई। मैं सुप्रीम कोर्ट के जजों के द्वारा न्यायिक जाँच की माँग करती हूँ।”

इस क्रम में ममता बनर्जी ने कुछ ऐसे न्यूज़ चैनल्स, जिन पर कोरोना वायरस की खबरों को प्रमुखता से दिखाया जा रहा है, पर भी बरसते हुए उन्हें भी आड़े हाथों लिया,। उन्‍होंने कहा, “आज कुछ लोग कोरोना-कोरोना चिल्‍ला रहे हैं। हाँ, यह खतरनाक बीमारी है, लेकिन इसे लेकर डरने की कोई जरूरत है। कुछ चैनल इस पर बढ़ा-चढ़ाकर रिपोर्ट कर रहे हैं और इसकी आड़ में दिल्‍ली हिंसा की घटना पर पर्दा डालने की कोशिश की जा रही है।”

उन्होंने कहा कि दिल्ली हिंसा के बाद अभी भी 700 से अधिक लोग लापता हैं। दिल्ली में स्थिति ठीक नहीं है। कई लोग बेघर हो गए। नालों से लाश निकल रहे हैं। उन्होंने दिल्ली दंगा को नरसंहार बताते हुए कार्यकर्ताओं से कहा कि इसे हिंसा नहीं, नरसंहार के रूप में प्रचारित करें।

कोरोना वायरस को वैश्विक चिंता करार देते हुए ममता बनर्जी ने कहा, “दिल्‍ली हिंसा में जिन लोगों की मौत हुई है, वे कोरोना वारयरस से नहीं मरे हैं। उन्‍हें बीजेपी ने मारा है। अगर ये लोग कोरोना वायरस से मरे होते तो हम समझ सकते थे कि वे एक ऐसी बीमारी से मरे हैं, जिनका इलाज अभी उपलब्‍ध नहीं है। लेकिन अच्‍छे-खासे लोगों को निर्ममतापूर्वक मार दिया गया। जिंदगियाँ छीन ली गईं। बीजेपी ने कई परिवारों को तबाह कर दिया। लेकिन उनका अहंकार देखिए। उन्‍होंने इसके लिए माफी तक नहीं माँगी।”