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AAP की जीत, विकास के एजेंडे की जीत होगी: कॉन्ग्रेस ने केजरीवाल की तारीफों के बाँधे पुल

दिल्ली में विधानसभा चुनाव को लेकर कॉन्ग्रेस पहले ही हार मान गई है। कॉन्ग्रेस के बड़े नेता अब आम आदमी पार्टी के मुखिया अरविन्द केजरीवाल की तारीफों के पुल बाँधने लगे हैं। कॉन्ग्रेस दिल्ली में हुए चुनावी मुकाबले में कहीं भी नहीं दिख रही है, इसीलिए पार्टी ने अब भाजपा विरोध के नाम पर उसी AAP का समर्थन शुरू कर दिया है, जिसके ख़िलाफ़ उसने चुनाव लड़ा था। ऐसा बयान कोई और नहीं बल्कि लोकसभा में कॉन्ग्रेस के नेता अधीर रंजन चौधरी ही दे रहे हैं। अधीर रंजन के इस बयान से चर्चा शुरू हो गई है कि क्या जानबूझ कर कॉन्ग्रेस ने पूरी ताक़त लगा कर चुनाव नहीं लड़ा?

अधीर रंजन चौधरी ने कहा है कि इस चुनाव में जहाँ भाजपा ने सांप्रदायिक अजेंडे को आगे बढ़ाया, वहीं अरविन्द केजरीवाल विकास के मुद्दे को लेकर जनता के बीच गए। उन्होंने कहा कि अरविन्द केजरीवाल की जीत का अर्थ होगा विकास के मुद्दे की जीत होना। तो क्या कॉन्ग्रेस पार्टी ने मान लिया है कि दिल्ली में उसका अस्तित्व खत्म है और राहुल गाँधी व प्रियंका गाँधी भी पार्टी को बचाने में कामयाब नहीं हुए? जो पार्टी 2013 तक लगातार 15 वर्षों में सत्ता में रही थी, अब वो अस्तित्व बचाने के लिए भी जूझ रही है।

अधिकतर एग्जिट पोल्स में आम आदमी पार्टी की बड़ी जीत की भविष्यवाणी की जा रही है। हालाँकि, भाजपा नेता प्रकाश जावड़ेकर और मनोज तिवारी ने दावा किया है कि सभी एग्जिट पोल्स के आँकड़े इस बार फेल हो जाएँगे। मुस्लिमों ने आम आदमी पार्टी को एकमुश्त वोट दिया है, ऐसा सामने आ रहा है। कॉन्ग्रेस के कई मुस्लिम वोटरों ने भी अब केजरीवाल की पार्टी का रुख कर लिया है क्योंकि भाजपा को हराने के लिए कई इमामों ने भी चुनावी प्रचार किया था।

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नमाज और कुरान ख्वानी के बाद अलीगढ़ में मुस्लिम महिलाओं ने CAA विरोध में लगाए ‘आजादी’ के नारे

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में एएमयू कैंपस में जारी धरना प्रदर्शन अब ढलान की ओर है। ऐसे में इस कानून के विरोधियों का पूरा फोकस अब शाहजमाल के धरने को हिट कराने में लग गया है। एएमयू के कई छात्र छात्राएँ यहाँ के धरने को भीड़ की आड़ में लीड कर रहे हैं।

बता दें कि शाहजमाल ईदगाह के बाहर ये मुस्लिम महिलाएँ 29 जनवरी 2020 से धरने पर बैठी हैं। हिंदुस्तान के मुताबिक शनिवार (फरवरी 8, 2020) को भी तकरीबन 300 महिलाएँ यहाँ पर डटी रही और सरकार विरोधी नारे लगाए। धरनास्थल पर दोपहर में नमाज और कुरान ख्वानी के बाद दुआ कराई गई। इसके बाद दिल्ली में केंद्र सरकार को आईना दिखाने और सीएए वापस होने तक डटे रहने के साथ आजादी के नारे लगाए गए।

इन महिलाओं का कहना है कि वो केंद्र सरकार को यह एहसास दिलाना चाहती है कि CAA को लागू करके उन्होंने बहुत बड़ी गलती की है। उन्होंने कहा कि दिल्ली चुनाव के माध्यम से वो केंद्र सरकार को बड़ा मैसेज देने वाली हैं। बता दें कि रुक-रुककर नारेबाजी का ये सिलसिला आधी रात तक चलता रहा। यहाँ कुछ एएमयू की छात्राओं ने भी तकरीर के जरिए महिलाओं को सीएए वापस होने तक डटे रहने और आमजन से धरने को सहयोग करने की अपील की। 

प्रदर्शनकारियों के धरने को देखते हुए सुरक्षा के लिहाज से देहली गेट समेत कई थानों की पुलिस के अलावा PAC और RAF को तैनात किया गया है। इस बाबत उत्तर प्रदेश के एक वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी का कहना है कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि यहाँ विरोध करने वाले लोग उसी सरकार विरोधी लॉबी के प्रोडक्ट हैं, जो दिल्ली में शाहीन बाग विरोध का नेतृत्व कर रही है। साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि पुलिस इन प्रदर्शनकारियों पर देशद्रोही तत्वों के साथ उनके संबंधों का पता लगाने के लिए कड़ी निगरानी रख रही है।

गौरतलब है कि इससे पहले शुक्रवार (जनवरी 31, 2020) को धरनास्थल पर अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) छात्र संघ के पूर्व उपाध्यक्ष सज्जाद सुभान पहुँचा था। उसने बुर्का पहन कर महिलाओं के प्रदर्शन में शिरकत की थी। पुलिस ने जब सज्जाद को रोका तो वो महिलाओं के बीच पहुँच कर बुर्के में प्रदर्शन करने लगा। प्रदर्शन के दौरान ही सज्जाद अपनी फेसबुक पेज पर लाइव हो गया और उसने वहाँ उपस्थित प्रदर्शनकारी महिलाओं को उकसाना शुरू कर दिया। वो वहाँ उपस्थित लोगों को भड़का रहा था। स्थिति बिगड़ती देख जब पुलिस उसे गिरफ़्तार करने पहुँची तो वो साथियों सहित वहाँ से भाग खड़ा हुआ था।

सोने का गर्भगृह, 2022 तक निर्माण पूरा: भव्य राम मंदिर के लिए महावीर मंदिर देगा ₹10 करोड़

उत्तर प्रदेश के अयोध्या में रामलला के भव्य मंदिर को लेकर तैयारियाँ शुरू हो गई हैं। ट्रस्ट का गठन हो गया है और आगामी बैठकों में काफ़ी कुछ स्पष्ट हो जाएगा। इस बीच ‘श्रीराम जन्मभूमि तीथ क्षेत्र’ के ट्रस्टी कमलेश्वर चौपाल ने राम मंदिर निर्माण पूरी होने की समयसीमा बताई है। चौपाल ने बड़ा बयान देते हुए कहा कि 2022 तक अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण पूरा हो जाएगा। ट्रस्ट की पहली बैठक 19 फरवरी को प्रयागराज में होनी थी लेकिन अब इसके नई दिल्ली में होने की बात कही गई है। इसके 1 दिन पहले ट्रस्ट के सभी सदस्य दिल्ली पहुँचेंगे।

इस बैठक में इस बात पर विचार किया जाएगा कि अयोध्या में बनने वाले भव्य राम मंदिर का स्वरूप कैसा हो और उसे कैसे तैयार किया जाए। इसी बैठक में राम मंदिर के निर्माण की समयसीमा भी तय कर ली जाएगी। चौपाल ने ‘ज़ी न्यूज़’ से बातचीत करते हुए बताया कि सबसे पहले 67 एकड़ की भूमि का माप लिया जाएगा और ज़मीन को सीमांकित किया जाएगा। इसके बाद मंदिर के शिलान्यास का कार्यक्रम होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से निवेदन किया जाएगा कि वो मंदिर का शिलान्यास करें। हालाँकि, चौपाल ने ये भी कहा कि भव्य राम मंदिर के निर्माण के लिए 67 एकड़ की भूमि से भी ज्यादा चाहिए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 5 फरवरी को राम मंदिर के लिए ट्रस्ट की घोषणा की थी। वहीं ‘दैनिक भास्कर’ में प्रकाशित एक अन्य ख़बर के अनुसार, 2 अप्रैल को चैत्र रामनवमी के दिन राम मंदिर निर्माण कार्य प्रारम्भ किया जा सकता है। आर्किटेक्ट सुधीर श्रीवास्तव ने कहा कि भव्य राम मंदिर के निर्माण में 2 वर्ष से अधिक का समय नहीं लगेगा। उन्होंने उदाहरण के तौर पर बताया कि मायावती ने 2007 से 2012 के बीच मुख्यमंत्री रहते बड़े पत्थरों से आंबेडकर और कांशीराम के कई स्मारक बनवाए थे। पत्थरों को तराशने के लिए तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है।

उधर पटना ‘महावीर मंदिर ट्रस्ट’ ने राम मंदिर निर्माण के लिए 10 करोड़ रुपए दान करने का फ़ैसला लिया है। ट्रस्ट के अध्यक्ष किशोर कुणाल ने फिलहाल 2 करोड़ रुपए का चेक भेजा है। कुणाल ने कहा कि अगर अनुमति मिलती है तो ‘महावीर मंदिर न्यास’ बिना किसी से चन्दा लिए राम मंदिर के गर्भगृह का अंदरूनी हिस्सा सोने का बनवा देगा। उन्होंने बताया कि 2016 में ही मंदिर के निर्माण के लिए रकम निकाल ली गई थी। अगर विहिप के मॉडल पर मंदिर बनता है तो कम समय लगेगा। अगर नया मॉडल बनता है तो समय और धन ज्यादा लगेगा। ऐसे में ”महावीर मंदिर न्यास’ हर वर्ष रुपए देगा।

उत्तर प्रदेश सरकार 67 एकड़ जमीन और उससे जुड़ी भूमि को मिलाकर नया राजस्व ग्राम ‘श्रीरामलला विराजमान’ बनाने की तैयारी कर रही है। आसपास की कुछ और जमीनों के अधिग्रहण के बाद परिसर के पूरे क्षेत्र के करीब 100 एकड़ तक होने की संभावना जताई गई है।

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UP में मामून शेख, मिलन शेख, मुकुल शेख और असलम शेख समेत 7 बांग्लादेशी गिरफ्तार, पूछताछ जारी

उत्तर प्रदेश झाँसी के बबीना इलाके में शनिवार (फरवरी 8, 2020) को पुलिस ने 7 बांग्लादेशी लोगों को पकड़ा है। पुलिस पूछताछ में उन्होंने बताया कि वे मछली का तेल बेचने के लिए झाँसी आए थे और बस स्टैंड के पास स्थित कर्मा होटल में सभी रुके थे। इनके पास न तो पासपोर्ट थे और न ही कोई भी वैध दस्तावेज, जो कि ये साबित कर सके कि वो भारत के नागरिक हैं। पुलिस ने इन बांग्लादेशियों के खिलाफ विदेशी अधिनियम के तहत कार्रवाई की है। 

पुलिस को इनके यहाँ पर अवैध रूप से रहने की सूचना मिली थी। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए इन्हें गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने बताया कि गिरफ्तार बांग्लादेशियों की पहचान ढाका के नादौर सिंगरा निवासी मामून शेख, मिलन शेख, मुकुल शेख, मोनू वैध, सीजर शेख, असलम शेख, पालन शेख के रूप में हुई है। इसके साथ ही इनके परिवार से संपर्क करने की कोशिश की जा रही है। फिलहाल सातों बांगलादेशी को जेल भेज दिया गया है।

बबीना पुलिस स्टेशन के एसओ ईश्वर सिंह ने इस बाबत जानकारी देते हुए बताया कि प्रारंभिक जाँच में यह पाया गया कि ये लोग यहाँ पर अवैध रूप से मछली का तेल बेच रहे थे। उन्होंने कहा कि ये लोग पिछले 7-8 दिन से यहाँ पर रह रहे थे। नगर में अभी और बांग्लादेशियों के मौजूद होने की आशंका जताई जा रही हैं और पुलिस उनकी छानबीन भी कर रही है। पुलिस ने बताया कि जाँच जारी है और अन्य पहलुओं का भी ध्यान रखा जा रहा है। उस होटल संचालक से भी पूछताछ कर रही है जहाँ ये लोग रुके हुए थे।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले 25 जनवरी को यूपी के मथुरा से साधु के वेश में रह रहे दो बांग्लादेशी को गिरफ्तार कर जेल भेजा था। ये दोनों पिछले कई सालों से वृंदावन में साधु बनकर भजन-कीर्तन किया करते थे। दोनों ने दिल्ली में फर्जी कागजात पर आधार कार्ड, वोटर कार्ड और पासपोर्ट बनवा लिया था।

राजस्थान को CAA लागू करना ही पड़ेगा: अपने ही विधानसभा अध्यक्ष ने CM गहलोत को दिया तगड़ा झटका

राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत लगातार कहते रहे हैं कि वो अपने राज्य में सीएए को लागू नहीं होने देंगे। अब उन्हें अपने ही राज्य के विधानसभाध्यक्ष से तगड़ा झटका मिला है। स्पीकर सीपी जोशी ने कहा है कि राजस्थान को सीएए लागू करना ही पड़ेगा। जोशी ने कहा कि भारत सरकार ने नागरिकता संशोधन क़ानून को पास किया है और राज्य सरकार को इसे लागू करना ही पड़ेगा। उन्होंने संविधान का हवाला देते हुए कहा कि नागरिकता केंद्र सरकार के आधीन विषय है, न कि राज्य सरकार के। अब सीपी जोशी के बयान से कॉन्ग्रेस की चिंता बढ़ सकती है।

सीपी जोशी ने कहा कि राज्य सरकार को सीएए में बदलाव करने का कोई अधिकार नहीं है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि मोटर व्हीकल्स एक्ट् भी केंद्र सरकार द्वारा पारित किया गया लेकिन इसमें राज्यों को अधिकार था कि वो इसे लागू करें या नहीं। नागरिकता के बारे में बोलते हुए जोशी ने बताया कि ये भारतीय संविधान के भीतर एक ऐसा विषय है, जिससे राज्य सरकारें छेड़छाड़ नहीं कर सकतीं।

सीपी जोशी लम्बे समय तक कॉन्ग्रेस से जुड़े रहे हैं। अशोक गहलोत की सरकार आने के बाद उन्हें राजस्थान विधानसभा में स्पीकर बनाया गया। सीपी जोशी 2009 में पहली बार जीत कर सांसद बने थे। इसके बाद उन्हें मनमोहन सिंह की सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाया गया था। उनका बयान अशोक गहलोत के बयान के उलट है। अशोक गहलोत ने सीएए को लेकर कहा था:

“मैं पहले ही घोषणा कर चुका हूँ। राजस्थान में न तो सीएए लागू होगा और न ही हमारी सरकार एनआरसी लागू करेगी। आप बहुमत से कानून तो बना सकते हैं, लेकिन लोगों का दिल नहीं जीत सकते। अकेले उत्तर प्रदेश में 15 लोग मारे गए। गोली वहीं चल रही है, जहाँ भाजपा की सरकारें हैं। असम में एनआरसी कामयाब नहीं हो पाई। वहाँ एनआरसी में 16 लाख हिंदू बाहर हो गए। अब नागरिकता संशोधन क़ानून लाया गया है। यह अव्यवहारिक है।

अशोक गहलोत ने ये बातें जयपुर में ‘संविधान बचाओ शांति मार्च’ के बाद गाँधी सर्किल पर आयोजित सभा में कही थी। सीपी जोशी के बयान से साफ़ हो गया है कि कॉन्ग्रेस में तो सीएए को लेकर मतभेद है ही, राजस्थान में सरकार और स्पीकर के बीच भी तालमेल की कमी है। राज्य में मुख्यमंत्री गहलोत और उप-मुख्यमंत्री सचिन पायलट के बीच की कलह भी रह-रह कर सामने आती रहती है।

एग्जिट पोल में बढ़त के बाद भी AAP और कॉन्ग्रेस का EVM राग चालू: संजय सिंह, गोपाल राय ने जताई चिंता

दिल्ली विधानसभा चुनाव में वोटिंग हो चुकी है। एग्जिट पोल भी आ चुके हैं, जिसमें आम आदमी पार्टी के सत्ता में आने का अनुमान जताया जा रहा है। इसके बावजूद आम आदमी पार्टी का ईवीएम को लेकर रोना शुरू हो गया है। AAP को शक है कि बीजेपी ईवीएम में गड़बड़ी करके चुनाव परिणाम में बदलाव कर सकती है। वोटिंग के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुई पार्टी नेताओं की बैठक में तय हुआ है कि AAP के कार्यकर्ता मतगणना तक हर बूथ के ईवीएम पर नजरें बनाए रखेंगे। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और प्रशांत किशोर समेत कई बड़े नेता उपस्थित थे।

इस बैठक के बाद संजय सिंह ने आरोप लगाया कि बाबरपुर में वोटिंग संपन्न होने के काफी समय बाद तक ईवीएम को जमा नहीं कराया गया, वह अधिकारियों के पास ही थे। इसी तरह की घटना विश्वास नगर में भी देखने को मिली।

इससे पहले संजय सिंह ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक वीडियो ट्वीट करते हुए आरोप लगाया था कि स्ट्रांग रूम नहीं होने के बावजूद एक जगह बस से ईवीएम उतारे जाते हुए देखे गए। उन्होंने लिखा, “चुनाव आयोग इस घटना का संज्ञान ले ये किस जगह EVM उतारी जा रही है। आस पास तो कोई सेंटर है नहीं।”

AAP नेता गोपाल राय ने भी आरोप लगाया है कि बाबरपुर के सरस्वती विद्या मंदिर स्कूल में एक कर्मचारी EVM के साथ पकड़ा गया है। उन्होंने वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा, “हमारी विधानसभा बाबरपुर में वोटिंग खत्म होने पर सभी EVM मशीन स्ट्रांग रूम भेज दी गई उसके बाद सरस्वती विद्या निकेतन पोलिंग स्टेशन पर एक अधिकारी EVM के साथ पकड़ा गया है। मैं इलेक्शन कमिशन से अपील करता हूँ कि इस पर तुरंत करवाई किया जाए।” संजय सिंह और गोपाल राय ने बताया कि AAP के कार्यकर्ता अब 11 फरवरी तक स्ट्रांग रूम के बाहर बैठ कर निगरानी भी करेंगे।

वहीं स्वराज इंडिया पार्टी के नेता और सुप्रीम कोर्ट में वकील प्रशांत भूषण ने भी ईवीएम को लेकर सवाल खड़े किए। उन्होंने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा कि उनका सल्तनत समाप्त होने वाला है। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि वो 11 तारीख यानी मतगणना के दिन का इंतजार करें। उसके बाद उनके टुकड़े पर पलने वाले मीडिया को बड़ा झटका लगेगा।

AAP के विधायक सौरभ भारद्वाज ने ट्वीट करते हुए कहा, “इस एग्जिट पोल के दो मायने हैं। एक, यह दिल्ली चुनाव 2020 का एग्जिट पोल है और दूसरा यह मनोज तिवारी का भी एग्जिट पोल है। उन्हें जल्द ही दिल्ली बीजेपी चीफ के पद से एग्जिट किया जाएगा और वह इस बात को अच्छी तरह से जानते हैं।”

गौरतलब है कि आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस ईवीएम मशीनों की छेड़खानी को लेकर पहले भी कई बार सवाल उठाती रही है। इस बार भी AAP के साथ ही कॉन्ग्रेस ने भी ईवीएम का राग अलापना शुरू कर दिया है। कॉन्ग्रेस नेता उदित राज ने वोटिंग प्रक्रिया चालू रहने के दौरान ही ट्वीट करते हुए कहा था, “भाजपा को बस ईवीएम ही बचा सकती है।” 

वहीं दिल्ली कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सुभाष चोपड़ा ने कहा, “ये सभी एग्जिट पोल फेल होने जा रहे हैं। बीजेपी को 20 सीटें भी नहीं मिलेंगी और केजरीवाल दिल्ली में सरकार नहीं बना पाएँगे। मुझे उम्मीद है कि एग्जिट पोल में जो दिखाया जा रहा हैं, कॉन्ग्रेस उससे बहुत बेहतर करने जा रही है। रिजल्ट आने तक प्रतीक्षा करें।”

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‘आत्मा’ से बात कर के ‘The Wire’ के संस्थापक ने कहा- केजरीवाल को 3% अतिरिक्त वोट मिले

प्रोपेगंडा पोर्टल ‘द वायर’ के संस्थापक संपादक एमके वेणु ने एक ऐसे नेता से बात करने का दावा किया, जो ज़िंदा ही नहीं है। यानी, उन्होंने ‘कॉन्ग्रेस नेता की आत्मा’ से बातचीत कर के दिल्ली विधानसभा चुनाव परिणाम का अनुमान लगा दिया और मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल की तारीफ में कसीदे पढ़ दिए। इसके बाद एक बार फिर से आम आदमी पार्टी के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के ‘मीडिया मैनेजमेंट’ की बातें शुरू हो गई है। ख़बरों में तो यहाँ तक कहा गया कि प्रशांत किशोर ने कई मीडिया संस्थानों के साथ हुए बैठक में उन्हें बताया था कि किस ख़बर को कैसे पेश कर के केजरीवाल के पक्ष में माहौल बनाना है।

अब आते हैं एमके वेणु पर। दरअसल, वेणु ने ट्वीट किया कि उन्होंने एक वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता से बात की है, जो दिल्ली के मुख्यमंत्री भी रहे हैं। उस नेता ने वेणु को बताया कि हालिया दिल्ली विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 3% अतिरिक्त वोट मिले हैं। कारण? बकौल एमके वेणु, ‘वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता व दिल्ली के पूर्व सीएम’ ने बताया कि भाजपा ने AAP के मुखिया अरविन्द केजरीवाल पर ‘दुष्टतापूर्वक’ व्यक्तिगत हमला करते हुए उन्हें आतंकवादी बताया, जिससे आम मतदाता गुस्सा हो गया और उसने आम आदमी पार्टी को वोट दिया।

जिस नेता के हवाले से वेणु ने ये बातें कही, वो कॉन्ग्रेस का है, वरिष्ठ है और दिल्ली का मुख्यमंत्री रह चुका है। अगर इन तीनों को मिला दें तो ऐसा कोई नेता है ही नहीं। शीला दीक्षित 15 वर्षों तक दिल्ली की मुख्यमंत्री रही थीं, लेकिन जुलाई 2019 में उनका देहांत हो गया। उससे पहले भाजपा की सुषमा स्वराज, साहिब सिंह वर्मा और मदनलाल खुराना दिल्ली के सीएम रहे, लेकिन इनमें से कोई भी अभी जिन्दा नहीं हैं। कॉन्ग्रेस तो छोड़ दीजिए, फ़िलहाल ऐसा कोई नेता है ही नहीं जो दिल्ली का पूर्व सीएम रहा हो।

लोगों ने एमके वेणु से पूछा कि क्या उन्होंने किसी पूर्व सीएम की आत्मा से बात कर के अरविन्द केजरीवाल की तारीफ कर दी? हालाँकि, ‘द वायर’ इन्हीं कारणों से जाना जाता है। भाजपा के विरोध में हवा बनाने के लिए वो कुछ भी कर सकता है। बाद में एमके वेणु ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा कि उन्होंने दिल्ली कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष से बातचीत की है, पूर्व मुख्यमंत्री से नहीं। वेणु ने कहा कि उन्होंने अजय माकन से बातचीत की। अगर ऐसा था तो उन्होंने पहली ट्वीट में माकन का नाम क्यों नहीं लिया?

इंडिया टीवी के एंकर सुशांत सिन्हा ने वेणु पर तंज कसते हुए कहा कि जब अरविन्द केजरीवाल साक्षात बजरंग बली से बात कर सकते हैं तो एमके वेणु क्या किसी कॉन्ग्रेस नेता की आत्मा से बातचीत नहीं कर सकते? अब आप सोच सकते हैं कि भाजपा के विरोध में लिखने के लिए ये प्रोपेगंडा पोर्टल्स कैसे-कैसे हथकंडे आजमाते हैं।

मुस्लिम बाहुल्य या रिजर्व सीटों पर पड़े सबसे ज्यादा वोट, AAP के लिए हुई एकतरफ़ा वोटिंग!

दिल्ली विधानसभा में 61.71 फीसदी वोटिंग हुई। अधिक वोटिंग वाली टॉप 5 सीट में मुस्लिम बहुल या फिर रिजर्व सीटें शामिल रही। सबसे अधिक मतदान दिल्ली के सीलमपुर में हुआ जहाँ CAA विरोध में खूब बबाल हुआ था। आज तक और न्यूज 18 की खबर के मुताबिक दिल्ली में सबसे अधिक वोटिंग मुस्लिम बहुल इलाके में हुई और उनके वोट आम आदमी पार्टी के खाते में गए। इनके अनुसार दिल्ली में एक बार फिर से अरविंद केजरीवाल की सरकार बनने जा रही है।

आज तक की खबर के मुताबिक दिल्ली के 69 फीसदी मुस्लिमों ने आम आदमी पार्टी को वोट दिया, वहीं 15 फीसदी मुस्लिमों ने कॉन्ग्रेस को, 9 फीसदी ने बीजेपी को और 7 फीसदी ने अन्य उम्मीदवारों को वोट दिया। वहीं न्यूज 18 ने बताया कि सबसे अधिक वोटिंग प्रतिशत अल्पसंख्यक बहुल सीलमपुर में 71.4% रही। जहाँ CAA के विरोध में खूब बबाल हुआ था। और यहाँ की दूसरी सीट मुस्तफाबाद है जहां 70.55% फीसदी वोटर निकले। वहीं तीसरे नंबर पर बाबरपुर रहा, जहाँ 65.4% मुस्लिमों ने वोट डाला। 

अल्पसंख्यकों और रिजर्व सीटों पर अधिक वोटिंग को सीधे तौर पर चुनाव विश्लेषक आम आदमी पार्टी के लिए फायदे का सौदा बता रहे हैं। उनका कहना है कि मुस्लिम सीटों का वोटर एकतरफ वोट करता है। अभी तक का आँकलन यही बता रहा है कि मुस्लिम वोटर्स AAP की तरफ गया है। इसी तरह से रिजर्व सीट की बात करें तो वहाँ भी AAP प्रत्याशी की बढ़त है। मंत्री राजेंद्र पाल गौतम की सीट सीमा पुरी जो मुस्लिम बहुल होने के साथ रिजर्व भी है, यहाँ 68.08 फीसदी मतदान हुआ है। पुरानी दिल्ली के मटियामहल इलाके में 68.36 फीसदी मतदान हुआ तो वहीं शाहदरा में 65.78% वोट डले। चाँदनी चौक में 60.91%, रिठाला में 59.62% और ओखला में 58.83% लोगों ने मताधिकार का प्रयोग किया।

सेफोलॉजिस्ट यशवंत देशमुख ने भी CNN News18 से कहा कि दिल्ली में दलित, गृहणियों और अधिकतर मुस्लिम वोट बैंक के केजरीवाल के पक्ष में जाने से एक मजबूत वोटबैंक तैयार हो गया। उनका कहना है कि आम आदमी पार्टी के लिए फ्री बिजली, फ्री पानी और मोहल्ला क्लीनिक जैसी योजनाओं ने काफी सकारात्मक माहौल तैयार किया। उन्होंने कहा कि एग्जिट पोल के नतीजों से साफ है कि लोग केंद्र में मोदी और दिल्ली में केजरीवाल को देखना चाहते हैं।

32.25% वोटरों की राय को किया गया नज़र-अंदाज़: दिल्ली Exit Polls में बड़ी गड़बड़ी?

लगभग सारे एग्जिट पोल्स में आम आदमी पार्टी को पूर्ण बहुमत मिलता दिखाया जा रहा है। हालाँकि, उसकी सीटें पिछली बार से कम ज़रूर होंगी लेकिन एग्जिट पोल्स की मानें तो मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल एक बार फिर से प्रचंड बहुमत के साथ वापसी कर रहे हैं। हालाँकि, मनोज तिवारी और प्रकाश जावड़ेकर सरीखे भाजपा नेताओं ने दावा किया है कि एग्जिट पोल्स और अंतिम नतीजों के बीच बड़ा अंतर होगा। आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं ने ईवीएम गड़बड़ी का राग अलापना शुरू कर दिया है, जिससे पता चलता है कि सत्ताधारी पार्टी भी अपनी जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है।

एग्जिट पोल्स के डेटा में सबसे बड़ी गड़बड़ी ये हुई कि दोपहर 3 बजे के बाद वोटिंग प्रतिशत काफ़ी तेज़ी से बढ़ा। जहाँ दोपहर तक ये लग रहा था कि दिल्ली में मतदाता सुस्त होकर बैठे हुए हैं और वो घरों से नहीं निकल रहे हैं, रात तक के आँकड़े उतने ख़राब भी नहीं हुए जितनी आशंका जताई जा रही है। दोपहर 3 बजे तक मात्र 30% वोटर टर्नआउट था। चुनाव आयोग ने 2:50 में जो आँकड़े ट्वीट किए, उसके हिसाब से उस समय तक महज 29.5% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया था।

जैसा कि आज के दौर में हम देखते हैं, टीवी न्यूज़ चैनलों के बीच किसी भी ख़बर को पहले दिखाने के लिए बड़ी प्रतिस्पर्द्धा चलती है और इसके लिए वो हर तरह के हथकंडे अपनाते हैं। लाजिमी है, पहले एग्जिट पोल्स के डेटा दिखाने के लिए भी उनमें होड़ मची होगी। न्यूज़ चैनलों और सर्वे एजेंसियों ने 3-4 बजे तक डेटा कलेक्शन का काम पूरा कर लिया होगा, जिसके बाद उस आधार पर टीवी प्रोग्राम्स की रूपरेखा तय की गई होगी। पूरी प्रक्रिया में समय लगना लाजिमी है क्योंकि आजकल न्यूज़ चैनलों में कुछेक बहस के अलावा बाकि कुछ भी पूर्णरूपेण लाइव नहीं होता।

स्क्रिप्टेड शो के जमाने में टीवी न्यूज़ चैनलों में लगी होड़ के बीच उन्होंने गड़बड़ी कहाँ की, आइए देखते हैं। चुनाव आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध फाइनल आँकड़ों के अनुसार, दिल्ली विधानसभा चुनाव में 61.75% वोटिंग हुई है। अगर हम मानते हैं कि लगभग 3 बजे तक के डेटा को न्यूज़ चैनलों ने ध्यान में रखा होगा तो इसका अर्थ ये है कि 32.25% मतदाताओं के एक बड़े समूह में से किसी की राय जाने बिना ही एग्जिट पोल्स जारी कर दिए गए।यानी, लगभग एक तिहाई मतदाताओं को एग्जिट पोल्स में नज़रअंदाज़ कर दिया गया।

3 बजे के बाद वोटिंग प्रतिशत में तेज़ी से इजाफा हुआ और अगले 1 घंटों में ही आँकड़ा 40.51% पहुँच गया। यानी, 1 घंटे में लगभग 12% मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। जब आँकड़े इतनी तेज़ी से बढ़ रहे थे, तब न्यूज़ चैनलों ने एग्जिट पोल्स की तैयारी शुरू कर दी थी।

अगर मीडिया ने 4 बजे तक का डेटा लिया होगा, फिर भी 21.24% मतदाताओं में से किसी की राय नहीं जानी गई। यानी, लगभग एक चौथाई मतदाता फिर से एग्जिट पोल्स के दायरे में नहीं आए। कहते हैं, साइलेंट वोटर्स दोपहर के बाद ही निकलते हैं। ये वोटर अगर भाजपा के हुए तो? क्या एग्जिट पोल्स के परिणाम एकदम से नहीं पलट जाएँगे?

कागज बचाकर रखना, NPR में दिखाने पड़ेंगे: मुस्लिम महिला वोटरों पर BJP की चुटकी

दिल्ली विधानसभा चुनाव के खत्म होते ही एग्जिट पोल आने शुरू हो गए हैं। फिलहाल सभी एग्जिट पोल में आम आदमी पार्टी की सरकार बनती दिख रही है। इसी बीच कर्नाटक भाजपा ने अपने सोशल मीडिया माध्यमों पर दिल्ली चुनाव से जुड़ी एक तस्वीर को साझा करते हुए मुस्लिम वोटरों पर तंज कसा है।

दरअसल, शाहीन बाग सहित पूरी दिल्ली में लोगों ने पहचान पत्र दिखाते हुए अपने मताधिकार का प्रयोग किया। सोशल मीडिया पर बड़ी संख्या में यूजर्स ने चुटकी ली कि जो लोग कागज दिखाने से इनकार करते हैं आज वह पहचान पत्र लेकर लाइन में लगे हैं।

कर्नाटक बीजेपी ने भी इसी पर चुटकी ली है। कर्नाटक बीजेपी ने एक विडियो ट्वीट किया है, जिसमें कई मुस्लिम महिला मतदाता हाथ में पहचान पत्र लेकर लाइन में लगी हैं। वीडियो के साथ भाजपा ने लिखा, “कागज नहीं दिखाएँगे हम”!!! भाजपा ने आगे लिखा कि इन कागजों को संभालकर रखें, आपको नेशनल पॉपुलेशन रजिस्टर (NPR) की प्रक्रिया के दौरान इन्हें दोबारा दिखाने की जरूरत पड़ेगी।

बता दें कि इन दिनों संशोधित नागरिकता कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर ऑफ सिटिजन्स (NRC) के विरोध में ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ का नारा लगता रहा है। यही वजह है कि मौका मिलते ही भाजपा और अन्य यूजर्स ने भी फोटो को साझा कर इस पर चुटकी ली है। सीएए, एनआरसी और एनपीआर के खिलाफ शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन में शामिल अधिकतर लोगों का कहना है कि उनके पास कागजात नहीं हैं और केंद्र सरकार सीएए और एनआरसी के जरिए उनकी नागरिकता छीनने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने सरकार के कदम का विरोध करते हुए ‘कागज नहीं दिखाएँगे हम’ का नारा दिया था। अधिकतर पोस्टर, बैनर पर भी यह लिखा होता है। हालाँकि, ये लोग जब शनिवार (फरवरी 8, 2020) को वोटर कार्ड लेकर वोटिंग के लिए पहुँचे तो लोगों ने पूछना शुरू कर दिया कि अब इनके पास कागज कहाँ से आ गए और क्यों दिखा रहे हैं?

वहीं राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ पदाधिकारी रामलाल ने शनिवार को कहा कि ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ का नारा लगाने वाले दिल्ली विधानसभा चुनाव में पराजित होंगे। रामलाल ने कहा, ‘‘मतदाताओं को मेरा संदेश है कि आज अपना कागज जरूर लेकर जाएँ। कागज जरूर दिखाएँ।’’ भाजपा के पूर्व संगठन महामंत्री ने कहा, ‘‘कागज नहीं दिखाने वाली मानसिकता की हार होगी और कागज दिखाने के लिए तैयार रहने वालों की जीत होगी।’’ 

भाजपा के वरिष्ठ नेता श्याम जाजू ने दावा किया कि मतदाता उन लोगों को सबक सिखाएँगे जिन्होंने दिल्ली के शाहीन बाग में विरोध प्रदर्शन को धन मुहैया कराया और इसका समर्थन किया। उन्होंने कहा, ‘‘आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह खान ने शाहीन बाग प्रदर्शन को धन मुहैया कराया और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने इसका समर्थन किया। उन्होंने रास्ता खुलवाने के लिए कुछ नहीं किया।’’