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FATF द्वारा ब्लैकलिस्ट होने से बचने के Pak ने लिए हाफिज सईद पर की कार्रवाई: भारत ने जताई आशंका

पाकिस्तानी कोर्ट द्वारा आतंकी हाफ़िज सईद को सजा सुनाए जाने के फैसले पर भारत ने अपनी सधी हुई प्रतिक्रिया दी है। भारत ने कहा है कि आगामी दिनों में FATF बैठक होनी है, ऐसे समय में पाकिस्तान कोर्ट द्वारा हाफ़िज पर कार्रवाई करना एक दिखावा भी हो सकता है।

भारत की तरफ से कहा गया है कि पाकिस्तान की एक अदालत ने आतंकी वित्तपोषण मामले में संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी के रूप में नामित और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अभियुक्त आतंकवादी हाफिज सईद को सजा सुनाई है। यह पाकिस्तान के लंबे समय से लंबित अंतरराष्ट्रीय दायित्व का हिस्सा है, ताकि आतंकवाद का समर्थन किए जाने पर लगाम लग सके, लेकिन इस फैसले को FATF बैठक से ठीक पहले लेना गौर करने वाली बात है।

भारत ने कहा है कि, यह भी देखा जाना चाहिए कि क्या पाकिस्तान अपने नियंत्रण में आने वाले सभी आतंकवादी संगठनों और क्षेत्रों से काम करने वाले लोगों के खिलाफ कार्रवाई करेगा और मुंबई और पठानकोट सहित सीमा पार आतंकवादी हमलों के अपराधियों को पाकिस्तान क्या त्वरित न्याय दिलाएगा। सरकार की तरफ से कहा गया है कि यह फैसला FATF की बैठक से पहले लिया गया है, जिसे नोट किया जाना चाहिए।

दरअसल माना जा रहा है कि पाकिस्तान ने यह कदम अंतरराष्ट्रीय संस्था एफएटीएफ (FATF) की कार्रवाई से बचने के लिए मजबूरन उठाया है, क्योंकि फिलहाल पाकिस्तान को ग्रे की सूची में डाला गया है। वहीं संयुक्त राष्ट्र द्वारा आतंकी गतिविधियों से निपटने के लिए पाकिस्तान पर लगातार दवाब बनाया जा रहा था।

आपको बता दें कि मुंबई हमले के मास्टर माइंड और जमात उल दावा प्रमुख हाफिज सईद को पाकिस्तान की एक अदालत ने टेरर फंडिग के एक मामले में 5 साल, वहीं दूसरे मामले में 5 साल 5 महीने की सज़ा सुनाई है। पाकिस्तान की लाहौर कोर्ट ने सजा सुनाने के साथ ही हाफिज सईद पर दोनों मामलों में 15-15 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है।

गौरतलब है कि 26 नवंबर 2008 को भारत की आर्थिक राजधानी मुंबई में लश्कर के 10 आतंकियों ने हमला किया था, जिसमें 166 से अधिक लोगों की मौत हो गई थी और 300 से अधिक लोग घायल हो गए थे। मरने वालों में विदेशी नागरिक भी शामिल थे। इस घटना के बाद अमेरिका ने हाफिज को ब्लैक लिस्ट तो किया ही साथ ही उस पर इनाम भी घोषित किया था।

शाहीन बाग के मास्टरमाइंड शरजील इमाम का होगा वॉयस टेस्ट, देशविरोधी भाषणों से किया जाएगा मिलान

पिछले दिनों अपने भाषणों में देश विरोधी भाषण देकर चर्चा में आए शरजील इमाम का अब आवाज का नमूना भी लिया जाएगा। इसके लिए कोर्ट ने दिल्ली पुलिस को अनुमति दे दी है। वहीं बुधवार को कोर्ट में पेश हुए शरजील को 14 दिनों की न्यायायिक हिरासत में भेज दिया गया है।

दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को पुलिस को देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार जेएनयू छात्र शरजील इमाम की आवाज का सैंपल लेने की अनुमति दे दी है। पुलिस इस सैंपल का मिलान उस वीडियो क्लिप से करेगी जिस पर भड़काउ बयान देने का आरोप लगा था। मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट पुरुषोत्तम पाठक ने दिल्ली पुलिस के एक आवेदन पर आदेश दिया और निर्देश दिया कि आरोपी जो फिलहाल न्यायिक हिरासत में है, उसे 13 फरवरी को सीएफएसएल में पेश किया जाए।

जेएनयू से पीएचडी कर रहे शाहीन बाग के मास्टरमाइंड शरजील इमाम ने पिछले महीने सीएए के विरोध में शाहीन बाग और एएमयू में आयोजित धरने में देशविरोधी भाषण दिए थे। इसके बाद सोशल मीडिया पर वायरल हुए शरजील के वीडियो को देख पुलिस ने शिकायत के आधार पर दोशद्रोह का मुकदमा दर्ज किया था। दरअसल शरजील वीडियो में भारत से पूर्वोत्तर के राज्यों को काटने की बात कर रहा था। इसके बाद शरजील को दिल्ली पुलिस ने बिहार के जहानाबाद से 28 जनवरी को गिरफ्तार किया था।

शरजील इमाम के बैंक खातों से मिले विदेशी फंडिंग के संकेत, क्राइम ब्रांच ने शुरू की जाँच

शरजील के फोन से चौंकाने वाले खुलासे, जामिया और एएमयू के छात्रों सहित 15 पर कसा शिकंजा

भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता है शरजील इमाम, पूछताछ में माना- वीडियो से नहीं हुई छेड़छाड़

गार्गी कॉलेज यौन उत्पीड़न केस: पुलिस ने 10 छात्रों को किया गिरफ्तार, जाँच के लिए बनाई 11 टीमें

गार्गी कॉलेज में पिछले दिनों हुए छेड़खानी की घटना के विरोध में छात्राओं का चल रहा धरना प्रदर्शन अब तेज हो गया है। वहीं पुलिस ने मामले में कार्रवाई करते हुए 10 आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। साथ ही मामले का खुलासा करने के लिए दिल्ली पुलिस ने 11 टीमों को दिन-रात जाँच में लगा दिया है।

पुलिस उपायुक्त अतुल कुमार ठाकुर ने बताया कि इस मामले में पुलिस की 11 टीमें जाँच कर रही हैं। साथ ही अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त गीतांजलि खंडेलवाल की टीम ने सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और मोबाइल सर्विलांस की मदद से 10 लोगों को गिरफ्तार कर लिया है। उन्होंने यह भी बताया कि, गिरफ्तार आरोपित वारदात वाली रात सीसीटीवी में जबरन कॉलेज में प्रवेश करते हुए दिखाई दे रहे हैं। इसके साथ ही आरोपितों की पहचान छात्राओं से करवाने के बाद ही उनसे मामले की पूछताछ भी की जा रही है।

इस बीच पुलिस टीम ने 57 छात्राओं से बयान लिए है। इन बयानों के आधार पर पुलिस टीम ने यह जानकारी जुटाई कि पार्टी में कितने लोग कैसे-कैसे शामिल हुए थे। इसके अलावा कॉलेज के सुरक्षाकर्मियों से पूछताछ के बाद पुलिस को कई अहम सुराग भी मिले है। सुरक्षाकर्मियों ने ही वीडियो फुटेज की मदद से आरोपितों की पहचान करवाने में पुलिस की मदद की है।

उधर बुधवार को पूरे दिन कॉलेज की छात्राओं का कॉलेज प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन और नारेबाजी जारी रही। साथ ही प्रदर्शन कर रही छात्राएं लगातार घटना के विरोध में कॉलेज प्रिंसिपल के इस्तीफे की माँग कर रही हैं। वहीं कॉलेज प्रिंसिपल प्रमिला कुमार का कहना है कि हम प्रदर्शनकारी छात्राओं से लगातार बातचीत कर रहे हैं और परिसर में सब कुछ सामान्य है। पूरे मामले से दिल्ली पुलिस को अवगत करा दिया गया है।

वहीं दिल्ली विश्वविद्यालय (DU) ने मामले को गंभीरता से लेते हुए सभी प्राचार्यों को परामर्श जारी कर छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने को कहा है। विश्वविद्यालय ने 10 फरवरी को जारी परामर्श में कॉलेजों को दो सप्ताह के भीतर छात्राओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी देने के लिए भी कहा है। डीयू ने गार्गी कॉलेज में हुई घटना की निंदा करते हुए पुलिस से इस घटना में शामिल लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की है। परामर्श में कहा गया है कि डीयू ने कॉलेज की प्राचार्य से इस मामले में की गई कार्रवाई पर रिपोर्ट भी माँगी है।

आपको बता दें कि गार्गी कॉलेज में आयोजित तीन दिवसीय वार्षिक फेस्ट का छह फरवरी को अंतिम दिन था। कुछ छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन से छेड़छाड़ की शिकायत दी थी। उन्होंने बताया था कि कॉलेज परिसर में दोपहर को जबरन घुसे बाहरी लोगों ने छात्राओं के सामने अश्लील हरकत कर छेड़छाड़ की। इस घटना पर गुस्सा जाहिर करते हुए उन्होंने इसे सुरक्षा में भारी चूक करार दिया था। वहीं इसके बाद घटना को लेकर कॉलेज प्रशासन हरकत में आया और मामले में पुलिस से शिकायत की गई। वहीं कॉलेज की प्रिंसिपल ने पूरे मामले की जाँच के लिए एक हाई लेवल फैक्ट फाइंडिग कमेटी भी बनाई है।

गार्गी कॉलेज में छेड़-छाड़ जरूर हुई, लेकिन धार्मिक नारों की बात सिर्फ वामपंथी मीडिया की करामात है

थरूर के बाद अब राहुल गाँधी ने शेयर किया भारत का ग़लत नक्शा, J&K को दिखाया पाकिस्तान का अंग

कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी ने कोरोना वायरस को लेकर मोदी सरकार पर हमला तो बोला लेकिन इस दौरान वो बड़ी ग़लती कर गए। राहुल ने इस दौरान जो भारत का नक्शा शेयर किया, उसमें जम्मू कश्मीर के एक बड़े हिस्से को पाकिस्तान का भाग दिखाया गया है। इसके बाद भाजपा नेताओं व अन्य लोगों ने राहुल को निशाने पर लिया। राहुल गाँधी ने हार्वर्ड के एक रिसर्च रिपोर्ट के हवाले से मोदी सरकार पर निशाना साधा था। इस रिपोर्ट में विश्व के नक़्शे में उन देशों को चिह्नित किया गया था, जिनके कोरोना वायरस की लपेट में आने के ज्यादा चांस हैं। इनमें से एक भारत भी है।

राहुल गाँधी ने अपनी ट्वीट में कहा कि कोरोना वायरस से भारत के लोगों और यहाँ की अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा ख़तरा है। उन्होंने दावा किया कि उनकी समझ कहती है कि मोदी सरकार इससे निपटने के लिए कुछ ख़ास नहीं कर रही है। उन्होंने सरकार को सलाह दी कि स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए समय पर कार्रवाई की जाए। लेकिन, इतना सारा ज्ञान देने के चक्कर में उन्होंने भारत का ऐसा नक्शा शेयर कर दिया, जिसमें खिलवाड़ किया गया था।

लोगों ने राहुल गाँधी से पूछा कि क्या वो जम्मू कश्मीर को भारत का अंग नहीं मानते? क्या वो नहीं मानते कि पीओके भारत का ही हिस्सा है, जिसपर पाकिस्तान ने जबरन कब्जा कर रखा है? वैसे ये पहला मौका नहीं है जब कॉन्ग्रेस के कसी नेता ने भारत का ऐसा नक्शा शेयर किया हो। इससे पहले दिसंबर 2019 में तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर ने भारत का ऐसा ही नक्शा शेयर किया था, जिसमें जम्मू कश्मीर को पाकिस्तान का भाग दिखाया गया था। उन्होंने सीएए के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन करते हुए ऐसा किया था।

राहुल गाँधी ने विरोध के बाद अपना ट्वीट डिलीट कर लिया है

हाल ही में फ़िल्म निर्देशक व अभिनेता फरहान अख्तर ने भी सीएए को लेकर सरकार पर हमला बोलने के क्रम में भारत का छेड़छाड़ किया हुआ नक्शा शेयर कर दिया था। विरोध होने के बाद राहुल गाँधी ने अपना ट्वीट डिलीट कर दिया। उन्होंने फिर से दोबारा बिना नक़्शे वाला ट्वीट किया और कोरोना वायरस को लेकर मोदी सरकार पर निशाना साधा। हालाँकि, राहुल गाँधी ने अभी तक इस पर माफी नहीं माँगी है।

AAP की जीत पर स्टूडियो में नाचता है राजदीप, मोदी की जीत पर लड्डू खिलाने वाले की छिनती है नौकरी

क्या मीडिया में राइट विंग समर्थक पत्रकारों को ठिकाने लगाया जा रहा है? पिछले कुछ दिनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जो इसी बात की तरफ़ इशारा करते हैं। कुछ प्रमुख मीडिया समूहों में दक्षिणपंथी पत्रकारों को नौकरी से निकालने या साइडलाइन किए जाने की रिपोर्ट्स मिल रही हैं। ऑपइंडिया ने ऐसे कुछ लोगों से बात की और जो जानकारी सामने आई है वो चौंकाने वाली है।

ख़ुद को सबसे तेज़ बताने वाला मीडिया ग्रुप इस अभियान में सबसे आगे है। बताया जा रहा है कि यहाँ पर लोकसभा चुनावों के पहले ही दक्षिणपंथी पत्रकारों की लिस्ट तैयार कर ली गई थी और माना जा रहा था कि चुनाव में नरेंद्र मोदी के हारते ही इन लोगों की नौकरी जानी तय है। चुनाव में बीजेपी की जीत से इस प्लान को झटका लगा, लेकिन पिछले कुछ महीनों में अलग-अलग बहानों से या आरोप लगाकर उन्हें निकाला जा रहा है। मैनेजमेंट का संदेश है कि जो लोग भी उनके आदेश के मुताबिक़ एकतरफ़ा ख़बर लिखने या दिखाने को तैयार नहीं होंगे उन्हें जाना होगा। इसी तरह एक केंद्रीय मंत्री की बहन के न्यूज़ चैनल से भी एक पत्रकार को नौकरी छोड़ने को मजबूर कर दिया गया, क्योंकि वो नागरिकता क़ानून और ऐसे दूसरे मुद्दों पर मैनेजमेंट की लाइन से सहमत नहीं थे। कई दूसरे मीडिया समूहों में भी कमोबेश यही हालात बताए जा रहे हैं।

चुन-चुनकर बनाया जा रहा है निशाना

हमें बताया गया कि ‘सबसे तेज़’ समूह ने यह अभियान लोकसभा चुनाव से पहले ही शुरू कर दिया था। मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में बीजेपी की हार से समूह के मैनेजमेंट के हौसले बुलंद थे और उन्हें पूरा भरोसा था कि लोकसभा चुनाव में बीजेपी किसी भी तरह बहुमत से पीछे छूट जाएगी। लेकिन जब नतीजे आए मैनेजमेंट और संपादकीय टीम को निराशा हाथ लगी। नतीजों वाले दिन एक पत्रकार ने न्यूज़रूम में मिठाई बाँटी। उन पत्रकार को पिछले दिनों बुलाकर कह दिया गया कि आपका कॉन्ट्रैक्ट रीन्यू नहीं होगा। इस कार्रवाई का कारण कुछ नहीं बताया गया, लेकिन हर कोई जानता है कि कारण क्या है। ये वही पत्रकार हैं जिसने कन्हैया का भाषण कई घंटे लाइव दिखाने पर चैनल के संपादक से औपचारिक विरोध दर्ज कराया था। वो अक्सर दिखाई जाने वाली फ़र्ज़ी और एकतरफ़ा ख़बरों पर विरोध किया करते थे, जिसकी क़ीमत उन्हें नौकरी गंवाकर चुकानी पड़ी।

दूसरा मामला, दक्षिणपंथी माने जाने वाले एक अन्य पत्रकार का है जिन पर कुछ मनगढ़ंत आरोप लगाकर इस्तीफ़ा ले लिया गया। माना जाता है कि असली कारण यह था कि वो मीडिया के पक्षपात के ख़िलाफ़ फ़ेसबुक पर बहुत खुलकर लिखा करते थे। नागरिकता क़ानून और जेएनयू के मुद्दे पर भी उन्होंने कुछ ऐसा लिखा था जो मैनेजमेंट को नागवार गुजरा। इसी तरह के कुछ और मामलों की जानकारी भी हमें मिली है। कुछ ऐसे लोग भी हैं जो विचारधारा के आधार पर साइडलाइन कर दिए गए और नौकरी छोड़ने को मजबूर कर दिए गए। इन घटनाओं का नतीजा यह कि संपादकीय टीम में एक डर का माहौल है। जो लोग भी बीजेपी के समर्थक समझे जाते हैं उनमें से ज़्यादातर ने सोशल मीडिया पर कुछ भी लिखना बंद कर दिया है। जबकि वामपंथी, कॉन्ग्रेसी और आम आदमी पार्टी समर्थक माने जाने वालों पर ऐसी कोई पाबंदी लागू नहीं है।

न्यूज़रूम में संदेश देने की है कोशिश

हमने जब इस इस स्थिति का कारण जानना चाहा तो सभी लोगों का मानना था कि ‘सबसे तेज़’ समूह का मैनेजमेंट पूरे न्यूज़रूम को एक मैसेज देना चाहता था। जिन लोगों को निकाला गया है वो सभी मिड से सीनियर रैंक के हैं। जिससे जूनियर और सीनियर दोनों ही स्टाफ़ में साफ-साफ संदेश चला गया है। ‘सबसे तेज़’ समूह के एक पत्रकार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया, “नागरिकता कानून के ख़िलाफ़ लखनऊ में आगज़नी कर रही भीड़ के लिए मैंने दंगाई शब्द टॉप बैंड में लिख दिया था। जिस पर मुझे चेतावनी दी गई। जब मैंने पूछा कि जाट, गुर्जर और कर्णी सेना के आंदोलनों में भी हिंसा पर हमने ऐसी ही भाषा लिखी थी तो यहाँ पर ये फ़र्क़ क्यों? तो कोई जवाब नहीं मिला। अगले दिन मुझे शिफ़्ट की ज़िम्मेदारी से हटा दिया गया।” इसी तरह एक पत्रकार ने “नागरिकता क़ानून के नाम पर हिंसा” लिखा तो संपादक ने आकर उसे “संघी” करार दिया और कहा कि लिखो “नागरिकता क़ानून के ख़िलाफ़ भड़का गुस्सा”। जब इतने से भी ज़्यादा असर नहीं पड़ा तो लोगों को विचारधारा के आधार पर नौकरी से निकालने का काम शुरू किया गया।

दूसरी तरफ़, इसी ग्रुप में वो महिला रिपोर्टर भी हैं जो आनंद भवन के बाहर बीजेपी के ख़िलाफ़ नारे लगवाते देखी गई थीं और वो लल्लनछाप एडिटर भी है, जो ट्वीट करता है कि बीजेपी नेताओं को कॉन्डोम इस्तेमाल करना चाहिए ताकि उनके जैसे बच्चे देश में पैदा न हों। ऐसी ढेरों कहानियाँ भरी पड़ी हैं, लेकिन ऐसे किसी भी तथाकथित पत्रकार के ख़िलाफ़ कभी कोई एक्शन नहीं लिया गया। उल्टा उन्हें ऐसा करने पर तरक़्क़ी और अवॉर्ड मिल जाते हैं। ज़्यादातर तथाकथित निष्पक्ष चैनलों के न्यूज़रूम में एक ख़ास विचारधारा के ही लोग भरे पड़े हैं, जो अपनी ख़बरों में न सिर्फ खुलकर अपनी राजनीतिक पसंद दिखाते हैं, बल्कि बीजेपी और इससे जुड़े संगठनों के लिए अपनी नफ़रत को भी झलकाते हैं।

निष्पक्ष पत्रकारिता का आलम देखिए कि मोदी की जीत पर लड्डू खिलाने वाला नौकरी से हाथ धो देता है और आप की जीत पर डांस करने वाला निष्पक्ष कहलाता है। जश्न थम ही नहीं रहा है। कल जलेबी समोसा पार्टी हुई। मालिक ने राजदीप से फिर नाचने को बोला। लेकिन वो शरमा गए और नहीं नाचे।

सबसे तेज़ ग्रुप की खूबी है कि यहाँ संपादकीय पदों पर ज़्यादातर वामपंथी या कॉन्ग्रेसी मानसिकता वाले ही बिठाए जाते हैं। कुछ दक्षिणपंथी लोग दिखावे के लिए वरिष्ठ पदों पर ज़रूर हैं ताकि भ्रम बना रहे। लेकिन उन पर भी कई तरह की बंदिशें थोपी गई हैं। उदाहरण के लिए राष्ट्रवादी छवि वाले एक चैनल से आए एक तेज़तर्रार एंकर को लगभग चुप करा दिया गया है। उनके वो तेवर ग़ायब हैं जो पिछले चैनल में हुआ करते थे।

मीडिया के अंदर की यह तस्वीर उस नैरेटिव से बिल्कुल अलग है जो “गोदी मीडिया” के नाम पर बनाई गई है। कॉन्ग्रेसी इकोसिस्टम के तमाम मीडिया समूहों के अंदर काम करने वाले कई पत्रकारों से बातचीत के आधार पर आने वाले दिनों में हम और भी जानकारियाँ सामने लाएँगे। यह भी बताएँगे कि कॉन्ग्रेस और उसकी सहयोगी पार्टियों के इशारे पर चलने वाले ये चैनल किस तरह से बीजेपी और बीजेपी के समर्थकों की आँखों में धूल झोंकते हैं।

लंगोट पहन पेड़ से उलटा लटक पत्तियाँ क्यों नहीं चबा रहे PM मोदी? मीडिया गिरोह के ‘मन की बात’

मीडिया गिरोह केजरीवाल के बाद अब ‘लाल सलाम’ के साथ खेलना चाहता है ‘पुण्डा-पुण्डी’

‘फैक्ट-चेकर’ ने छिपाया फैक्ट, मीडिया गिरोह ने फैलाया झूठ: मोदी इंटरव्यू पर प्रतीक सिन्हा की ‘नंगई’

कमलनाथ के गृह क्षेत्र में जेसीबी से ढहा दी गई छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा, शिवसेना ने साधी चुप्पी

मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा में छत्रपति शिवाजी महाराज की प्रतिमा गिराए जाने को लेकर चहुँओर विरोध प्रदर्शन शुरू हो गया है। खासकर महाराष्ट्र में प्रदर्शन जोरों ओर है। लोग शिवसेना से सवाल पूछ रहे हैं, जो कॉन्ग्रेस के साथ मिल कर सरकार चला रही है। मध्य प्रदेश में भी कॉन्ग्रेस की ही सरकार है। कमलनाथ राज्य में संगठन और सरकार, दोनों के ही मुखिया है। सबसे बड़ी बात ये है कि छिदंवाड़ा कलमलनाथ का संसदीय क्षेत्र रहा है। वो लम्बे समय से यहाँ से सांसद रहे हैं। फ़िलहाल उनके बेटे यहाँ से सांसद हैं। कमलनाथ मुख्यमंत्री बनने के बाद छिंदवाड़ा से ही विधायक भी बने।

शिवाजी की प्रतिमा को जेसीबी से हटाने की घटना सौंसर में मोहगाँव तिराहे की है। पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना को लेकर कॉन्ग्रेस सरकार पर निशाना साधा है। उन्होंने पूछा कि क्या छत्रपति शिवाजी महाराज को अपना आदर्श मानने वाली शिवसेना ये अपमान सह पाएगी? कॉन्ग्रेस नेता नरेंद्र सलूजा ने कहा है कि भाजपा झूठ परोस कर प्रदेश की जनता को भ्रमित और गुमराह कर रही है। जनवरी में ही उक्त स्थान पर छत्रपति शिवाजी की प्रतिमा की स्थापना को लेकर स्थानीय जनता ने प्रशासन को ज्ञापन दिया था।

प्रशासन ने दावा किया है कि हिन्दू संगठनों ने बिना अनुमति शिवाजी की प्रतिमा की स्थापना कर दी थी। इसके बाद प्रशासन की टीम जेसीबी के साथ पहुँची और शिवाजी की प्रतिमा को हटा दिया गया। मंगलवार (फरवरी 11, 2020) को बड़ी संख्या में लोग पहुँचे और उन्होंने प्रशासन व सरकार के ख़िलाफ़ जम कर नारेबाजी की। दुकानें खुली नहीं। एक तरह से पूरा शहर बंद रहा। युवाओं ने रैली निकाल कर प्रतिमा को फिर से स्थापित किए जाने की माँग की।

महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने भी इस घटना को लेकर दुःख जताया है। वहीं विधायक विजय चौरे ने प्रशासन के साथ बैठक के बाद आश्वासन दिया कि 19 फरवरी शिवाजी महाराज की जयंती धूमधाम से मनाई जाएगी और मोहगाँव तिराहे पर प्रतिमा को स्थापित किया जाएगा।

J&K में तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बनाएगा श्री वेंकटेश मंदिर, प्रशासन ने की 100 एकड़ भूमि आवंटित

जम्मू-कश्मीर प्रशासन ने तिरुमला तिरुपति देवस्थानम (TTD) ने श्री वेंकटेश मंदिर निर्माण के लिए जम्मू-कटरा राजमार्ग के साथ 100 एकड़ भूमि आवंटित करने के लिए सैद्धांतिक रूप से सहमति दे दी है। तिरुमला तिरुपति देवस्थानम बोर्ड के प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने वाले सांसद वी विजया साई रेड्डी ने सोमवार (फरवरी 10, 2020) को कहा कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम, वैदिक स्कूल और अस्पताल के साथ मंदिर का निर्माण दो साल में पूरा करने की उम्मीद करता है। समाचार पत्र ‘द हिंदू’ से बातचीत में वी विजया साई रेड्डी ने कहा कि दो स्थलों की पहचान मंदिर निर्माण के लिए उपयुक्त बताई गई हैं।

जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल जीसी मुर्मू, जो मंदिर निर्माण के लिए मुफ्त में जमीन आवंटित करने के लिए सहमत हुए, ने कहा कि तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के लिए जमीन हस्तांतरित करने की प्रक्रिया 15 दिनों में पूरी होने की उम्मीद है।

जम्मू के जिलों में ढूमी और माजिन में दो साइटों को सूचीबद्ध किया है। कई उत्तर भारतीय राज्यों से तीरुमला जाने वाले तीर्थयात्रियों की लंबे समय से माँग है कि जम्मू में मंदिर की प्रतिकृति का निर्माण किया जाए।

आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री वाईएस जगनमोहन रेड्डी ने कहा कि मंदिर, वैदिक स्कूल, मैरिज हॉल और अस्पताल के निर्माण के लिए धनराशि श्रद्धालुओं से जुटाई जाएगी और तिरुमला तिरुपति देवस्थानम भी यथासंभव सीमा तक अपना योगदान देगा। नवगठित केंद्र शासित प्रदेश में सुरक्षा चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर राज्यसभा सदस्य ने कहा कि जम्मू शांतिपूर्ण है और वहाँ कोई खतरा नहीं है।

उन्होंने कहा- “जम्मू एक शांतिपूर्ण जगह है। जीवन बिल्कुल सामान्य है और क्षेत्र में कोई अप्रिय घटना नहीं दर्ज की गई है। हमने दो साइटों को अंतिम रूप देने से पहले सुरक्षा, साइट तक पहुँच, पानी और परिवहन सुविधाओं की उपलब्धता सहित सभी पहलुओं पर विचार किया है। इससे भी महत्वपूर्ण बात यह है कि, यह स्थल वैष्णो देवी मंदिर की ओर जाने वाले राजमार्ग पर स्थित हैं।”

तीसरी शादी कर रहा था रफीक, पहली पत्नी ने बनाया पीटकर ‘नवाब’, दूल्हे ने कहा- चौथी शादी करना अधिकार है

पाकिस्तान में एक व्यक्ति की तीसरी शादी में उस समय ख़लल पड़ गया जब शादी के वक़्त उसकी पहली पत्नी पहुँच। पहली पत्नी ने वहाँ पहुँचकर ना सिर्फ भूतपूर्व पति (वर्तमान दूल्हा) की जमकर पिटाई की, बल्कि उसके वहाँ सारे मेहमानों के सामने कपड़े भी फाड़ दिए। मारपीट के बाद वहाँ बवाल इतना ज्यादा बढ़ गया कि शादी कर रहे सज्जन को बचाने के लिए पुलिस बुलानी पड़ी।

‘दि एक्सप्रेस ट्रिब्यून’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, सोमवार (फरवरी 10, 2020) की रात मदीहा (पहली पत्नी) और उसके रिश्तेदार कराची में आसिफ रफीक की शादी के मौके पर पहुँच गए। मदीहा ने कहा कि उन दोनों की शादी साल 2014 में हुई थी। रिपोर्ट के अनुसार, मदीहा ने दावा किया कि रफीक ने जिन्ना विश्वविद्यालय की एक कर्मचारी से उसकी सहमति के बिना दूसरी शादी भी कर ली थी। मदीहा द्वारा दूसरी शादी पर आपत्ति जताने के बाद रफीक ने माफी भी माँगी थी और केवल पहली पत्नी (मदीहा) के साथ ही रहने का वादा किया।

रिपोर्ट में बताया गया है कि पहली पत्नी मदीहा और उसके परिवार ने दूल्हे रफीक की बेरहमी से कुटाई की और पीट पीटकर उसके कपड़े फाड़ दिए। यहाँ तक कि पुलिस ने भी तीसरी शादी कर रहे दूल्हे रफीक को हिरासत में लेने के बाद उसके साथ मारपीट की। रफीक ने पुलिस स्टेशन से भागने की कोशिश की और इसके बाद वह एक खड़ी बस के नीचे छिप गया।

पिटाई से बचने के लिए रफीक भागता रहा लेकिन मदीहा के परिवार ने पीछा करके उसे पकड़ लिया और एक बार फिर उसे जमकर कूट दिया। रफीक ने बताया कि उसने पहली बीवी मदीहा को तलाक दे दिया था और इसलिए उसे पुनर्विवाह के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है। इसके साथ ही उसने कहा कि एक ही समय चार खातूनों से निकाह करना उसका अधिकार है।

दिल्ली में चुने गए MLA में से 43 पर दर्ज हैं हत्या की साजिश, रेप जैसे गंभीर आपराधिक मामले: ADR रिपोर्ट

दिल्ली विधानसभा चुनाव में जीतने वाले 61% विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। इसका खुलासा एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) की रिपोर्ट में हुआ है। ADR के अनुसार दिल्ली विधान सभा चुनावों से जीतकर आए 70 में से 43 विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं और 37 विधायक, यानि लगभग 53% विधायक ऐसे हैं, जिनके खिलाफ खतरनाक आपराधिक मामले दर्ज हैं।

इन मामलों में बलात्कार, हत्या की कोशिश और महिलाओं के खिलाफ अपराध जैसे मामले शामिल हैं। 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनाव में चुनकर आए 34 प्रतिशत विधायकों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज थे।

नामांकन पत्र दाखिल करते समय प्रत्याशियों के चुनाव आयोग के समक्ष पेश किये गए हलफनामे के आधार पर दिल्ली इलेक्शन वाच और एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफार्म्स (ADR) ने विश्लेषण करके यह जानकारी दी है।
ADR की रिपोर्ट के अनुसार 9 विधायक ऐसे हैं, जिनके अपराध कोर्ट में साबित भी हो चुके हैं। इनमें 1 विधायक के ऊपर हत्या के षडयंत्र का अपराध साबित भी हो चुका है। आम आदमी पार्टी (AAP) के जीते हुए 62 में से 38 विधायकों (61%) के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के 8 में से 5 विधायकों के खिलाफ मामले दर्ज हैं।

74% MLA हैं करोड़पति

दिल्ली में नवनिर्वाचित 70 में से 52 विधायक करोड़पति हैं, जबकि वर्ष 2015 में इनकी संख्या 70 में से मात्र 44 थी। AAP के 62 में से 45 और भाजपा के आठ में से सात विधायक करोड़पति हैं, यानि इनकी घोषित संपत्ति एक करोड़ रुपए से अधिक है। इस प्रकार आम आदमी पार्टी के 62 विधायकों की औसतन संपत्ति 14.96 करोड़ रुपए है।

आम आदमी पार्टी के हैं सबसे अधिक संपत्ति वाले तीनों विधायक

इनमें सबसे अधिक संपत्ति वाले तीनों विधायक आम आदमी पार्टी के ही हैं। इनमें धर्मपाल लाकड़ा, विधायक- मुंडका, की कुल संपत्ति 292 करोड़ रुपए है। जबकि प्रमिला टोकस, विधायक- आर के पुरम की कुल संपत्ति 80 करोड़ रुपए और राजकुमार विधायक- पटेल नगर की कुल संपत्ति 78 करोड़ रुपए है।

2 विधायक मात्र 8वीं पास

यदि शिक्षा की बात करें तो चुने गए 70 MLA में से 2 विधायक मात्र 8वीं पास हैं, 7 विधायक 10वीं पास, 14 विधायक 12वीं पास, 15 विधायक ग्रेजुएट, 9 ग्रेजुएट प्रोफेशनल, 18 पोस्ट ग्रेजुएट और 5 अन्य शिक्षा प्राप्त हैं।

गार्गी कॉलेज में छेड़-छाड़ जरूर हुई, लेकिन धार्मिक नारों की बात सिर्फ वामपंथी मीडिया की करामात है

दिल्ली विधानसभा चुनावों के सम्पन्न होने के ठीक एक दिन बाद दिल्ली विश्वविद्यालय के गार्गी कॉलेज में लड़कियों से छेड़छाड़ का मामला सामने आया था। बताया जा रहा है कि इस घटना के विरोध में कॉलेज की छात्राएँ प्रदर्शन कर रही थीं, जिसके बाद दिल्ली महिला आयोग की एक टीम भी कैंपस पहुँची और छात्राओं से पूरे घटने की जानकारी ली।

गार्गी कॉलेज, दिल्ली विश्वविद्यालय का एक छात्राओं का कॉलेज है। बताया गया कि इस कॉलेज में एक प्रोग्राम का आयोजन किया गया था, जब कुछ गुंडे कॉलेज में घुस गए और उन्होंने छात्रों के साथ बदसलूकी की। कुछ विशेष मीडिया गिरोहों द्वारा इस पूरे प्रकरण में छात्रों के साथ हुई हिंसा को छोड़कर सबसे ज्यादा अपने चुनिंदा विषयों को उछाला गया और आरोप लगाए गए कि इस हरकत को करने वाले लोग ‘जय श्री राम’ के नारे लगा रहे थे।

लेकिन गार्गी कॉलेज के सम्बन्ध में जब कॉलेज की छात्राओं से ऑपइंडिया ने बात की तो उन्होंने बताया कि उत्पीड़न वाली बात से मना नहीं किया जा सकता है लेकिन धार्मिक नारे लगाने जैसी बातें एकदम बेबुनियाद है और मीडिया द्वारा इस मुद्दे को दूसरी ही दिशा दी जा रही है।

यह वास्तव में कॉलेज प्रशासन की नाकामयाबी का नतीजा मात्र है। लेकिन NDTV के रवीश कुमार जैसे लोग इस घटना को अपना वामपंथी रंग देते नजर आए। यह खुद गार्गी कॉलेज की छात्राओं ने स्वीकार किया है कि छात्राओं के साथ उत्पीड़न और बदसलूकी जरूर की गई लेकिन यह कहना एकदम बकवास है कि ऐसा करने से पहले धार्मिक नारे लगाए गए।

छात्राओं के कॉलेज में होने वाले किसी प्रोग्राम में सिर्फ पहचान पत्र के आधार पर हर किसी को भी प्रवेश दे देना बेवकूफी भरा निर्णय था। कॉलेज में मौजूद छात्राओं ने स्पष्ट कहा कि अपराधी मानसिकता को जरूर दोष दिया जाना चाहिए, लेकिन इस मामले को राजनीतिक और अपनी विचारधारा को भुनाने के लिए इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए।

कुछ वर्ष पहले की ही बात है, जब हिन्दुओं के त्यौहार होली के दौरान यह आरोप लगाए गए थे कि छात्राओं पर वीर्य से भरे गुब्बारे फेंके गए थे। लेकिन कई महीनों बाद हुई जाँच के में पता चला कि यह आरोप एकदम बेबुनियाद थे। कॉलेज की छात्राओं ने स्पष्ट लिखा है कि उनके साथ कॉलेज में घुसे गुंडों ने बहुत गंदी बदसलूकी की लेकिन यह नहीं कह सकते हैं कि वो CAA के प्रदर्शन से आ रहे थे।

मामला सामने आने के बाद दिल्ली पुलिस के आला अफसर सोमवार सुबह कैंपस पहुँचे थे और सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे थे। उस दौरान पुलिस ने कहा था कि उन्हें अभी तक कोई शिकायत नहीं मिली है। इसके बाद दोपहर में कॉलेज प्रशासन ने पुलिस को शिकायत दी थी और पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।

गार्गी कॉलेज की इस घटना पर आप विस्तृत चर्चा इस वीडियो में देख सकते हैं –