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2 बीवियों वाले महमूद ने ऑफिस के अंदर पीछे से पकड़ महिला साथी का करना चाहा रेप, CCTV के कारण गया जेल

बिहार के बांका जिले के बौंसी प्रखंड मुख्यालय में कार्यरत प्रधान लिपिक महमूद आलम को डाटा ऑपरेटर का कार्य कर रही महिला कर्मचारी के साथ दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। घटना शनिवार (फरवरी 8, 2020) की है। महिला कंप्यूटर ऑपरेटर ने बताया कि शुक्रवार (फरवरी 7, 2020) शाम को जब वह ऑफिस का काम खत्म करने के बाद निकलने वाली थी, तभी शराब के नशे में धुत्त प्रखंड के प्रधान लिपिक महमूद आलम ने उसे गलत नीयत से पीछे से पकड़ लिया और उसके साथ दुष्कर्म करने का प्रयास किया।

पीड़िता ने बताया कि वह किसी तरह से वहाँ से भागकर थाना पहुँची और इसकी जानकारी दी। पुलिस अधीक्षक अरविंद गुप्ता ने मामले की पुष्टि करते हुए बताया कि इस सिलसिले में पीड़िता ने बौंसी थाने में प्रखंड कार्यालय के प्रधान लिपिक मोहम्मद आलम के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। सत्यापन में मामला सही पाए जाने के बाद पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आलम को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है।

जानकारी के मुताबिक जब ट्रेनी आईएएस और थानाध्यक्ष राजेश कुमार यादव ने इस बाबत महमूद आलम से पूछा तो उसने सिरे से इनकार कर दिया और कहा कि वह पीड़िता के कमरे में ही नहीं गया था। हालाँकि उसका यह झूठ सीसीटीवी खँगालने के साथ ही उजागर हो गया। सीसीटीवी फुटेज में पाया गया कि घटना वाले दिन वह लगातार चार बार उसके कमरे में गया था। शाम में जब पीड़िता घटना के बाद उसे धक्का देकर तेजी से निकल रही थी, उस वक्त भी वह उसके पीछे ही था।

बता दें कि आरोपित महमूद आलम ने दो-दो निकाह किया है। उसकी पहली बीवी गाँव में रहती है, जबकि दूसरी बीवी नसीमा खातून उसके साथ रहती है। नसीमा खातून ने अपने पहले शौहर की मौत के बाद महमूद के साथ निकाह किया था। 3 साल पूर्व एक बेटा भी हुआ था, लेकिन 24 घंटे के बाद ही उसकी मौत हो गई थी। जबकि, पहली बीवी से उसका 13 साल का एक बेटा है, जिसका नाम मोहम्मद फैजान है।

दुष्कर्म के आरोप के अलावा महमूद आलम पर भ्रष्टाचार का भी आरोप है। महमूद की साल 2012 में उर्दू टाइपिस्ट के रूप में जॉइनिंग हुई थी। इसके एक साल बाद ही उसका प्रमोशन हो गया था। साल 2013 में इसे प्रधान लिपिक बना दिया गया था। इन 8 सालों यानी कि 2012 से लेकर 2020 के बीच महमूद पर कई बार भ्रष्टाचार के आरोप लगे हैं और महिला कर्मचारी के साथ दुष्कर्म के प्रयास का मामला सामने आया है। दबे स्वर में ब्लॉक के कर्मचारी के साथ ही स्थानीय लोगों का कहना है कि महमूद आलम ने प्रधानमंत्री आवास योजना की आड़ में भी कई लोगों से मोटी रकम वसूला है। मगर सबूत के अभाव में वह हर बार बच गया। हालाँकि इस बार दुष्कर्म के प्रयास के आरोप से नहीं बच सका।

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हिन्दुओं! उपकार मानो कि शाहीन बाग़ ने एक शव यात्रा के लिए रास्ता दिया है, वो चाहते तो…

दिल्ली में विधानसभा चुनाव भी लगभग समाप्त हो चुके हैं, अब सिर्फ इसके नतीजे आने बाकी हैं। इस बीच, करीब दो महीने बाद भी शाहीन बाग़ उसी जज्बे के साथ खड़ा नजर आ रहा है। कम से कम सोशल मीडिया पर तो यही चर्चा है। आज ही शाहीन बाग़ की एक वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही है। इस वीडियो में कुछ हिन्दुओं द्वारा शाहीन बाग़ से एक शव यात्रा ले जाया जा रहा है और कुछ लोग वहाँ पर सड़क बंद करने के लिए लगाई हुई बैरिकेडिंग को खोलकर शवयात्रा को जाने के लिए कहते हुए देखे जा रहे हैं।

सोशल मीडिया पर यह वीडियो फ़ौरन एक विशेष समूह द्वारा दिखाया जाने लगा। दिलचस्प बात यह है कि इस वीडियो को शेयर करने वाले वही लोग हैं, जिन्हें शायद ही अभी तक यह पता हो कि कुछ CAA विरोधियों ने झारखंड में कुछ ही दिन पहले नीरज प्रजापति की सिर्फ इस कारण से हत्या कर दी थी, क्योंकि वो CAA का समर्थन करते थे।

शव यात्रा के लिए रास्ता देने वाला यह वीडियो शेयर करते हुए बताया जा रहा है कि शाहीन बाग़ में CAA विरोध प्रदर्शनकारियों ने हिन्दुओं की शव यात्रा के लिए बैरकेडिंग खोली। उनका कहना है कि यह वीडियो उन देश द्रोहियों को दिखाया जाना चाहिए, जो ‘शाहीन बागियों’ को देश द्रोही बताते हैं।

शव यात्रा को रास्ता देने का यह संदेश वही लोग दे रहे हैं, जो यदा-कदा आज भी नेहरुवादी सभ्यता से चली आ रही ‘गंगा-जमुनी’ तहजीब और किसी कथित ‘सेक्युलर राष्ट्र’ की भावनाओं को जीवित होने के प्रमाण देते रहते हैं। यहाँ पर यह बात याद रखने लायक है कि यही ‘यदा-कदा’ तब आता है, जब एक हजार में से कोई एक ऐसी घटना में देश के ‘सेक्यूलरों’ का योगदान दिखाने वाली कोई घटना सामने आती है। वरना जो सिर्फ कट्टरपंथी सोच और किसी ‘किताब’ के प्रभाव में आज भी हलाला और तीन तलाक जैसे बुनियादी विषयों से बाहर नहीं निकलना चाहते, उनका सेक्युलर राष्ट्र के प्रति क्या नजरिया होगा, यह सिर्फ आत्म चिंतन की ही बात है।

लेकिन मुझे शव यात्रा के लिए बैरकेडिंग खोलकर इंसानियत का संदेश देने वाली बात में गंगा-जमुनी जैसी दोमुही बात भी नजर नहीं आती। यह तो स्पष्ट तौर पर एक स्वामी अपने गुलामों को संदेश देते हुए कह रहा है- ‘देखो, वह इंसानियत का मसीहा हिन्दुओं की शव यात्रा के लिए आज बैरिकेडिंग खोल रहा है, और इसके लिए हिन्दुओं को शाहीन बाग़ की इस उदार भीड़ का कृतज्ञ होना चाहिए।’

उपनिवेशवाद के समय में इस तरह की ही इंसानियत ब्रिटिशर्स भारतीयों पर ‘यदा-कदा’ कर दिया करते थे। उत्तरखंड के इतिहास में नजर दौडाएँ तो अंग्रेज ‘कुली-बेगार’ जैसी प्रथाओं को कुछ इसी तरह से सृजन कर लेते थे। लोगों को समझाया जाता था कि उन्हें ‘लॉर्ड फलाना’ की बग्गी को अपने कन्धों पर ढोने का स्वर्णिम अवसर मिल रहा है। इसलिए उसे इस उपकार के बदले लगान देना चाहिए। ग्रामीण लोगों को इसके लिए लालच दिया जाता था कि इसी बहाने उन्हें उस सड़क पर चलने का सौभाग्य भी प्राप्त होगा, जहाँ लार्ड फलाना शाम को टहला करते हैं।

बेशक, शव यात्रा को रास्ता देने वाली यह भीड़ एक उदार भीड़ की तरह नजर आ रही है, जबकि वास्तव में यह उदार है नहीं। क्योंकि यह भीड़ तो एक दक्षिणपंथी एक्टिविस्ट गुंजा कपूर को सिर्फ इसलिए इस्लाम अपनाने की सलाह देते देखी गई क्योंकि वह शाहीन बाग़ नाम के एक स्वतंत्र पृथक राष्ट्र में उन्हीं के जैसे लिबास पहनकर चली गई थी।

यही शाहीन बाग़ की भीड़ हिन्दुओं की आस्था के प्रतीक चिन्हों को गाली देती देखी गई। क्या हिन्दुओं की आस्था को ठेस लगाने के लिए गाय पर चुटकुले बनाने से लेकर हिन्दुओं की कब्र खोदने की धमकी देने वाला यह शाहीन बाग़, एक शव यात्रा के लिए बैरिकेड खोलकर इंसानियत का उदाहरण बन सकता है?

सवाल यह है कि बैरिकेडिंग खोलकर हिन्दुओं को एक शव यात्रा के लिए रास्ता देने का एहसान करने वाले ये लोग अगर ऐसा कर के इंसानियत की मिसाल पेश कर रहे हैं तो फिर झारखंड में इसी नागरिकता संशोधन कानून के समर्थन में रैली कर रहे नीरज प्रजापति को लोहे की रॉड से मार देने वाली मुस्लिम भीड़ किस बात का सन्देश देती है? आज तक किसी सेक्युलर विचारक को यह कहते नहीं सुना गया है कि हिन्दुओं के मंदिरों को तोड़ने वाले और उन्हें अपवित्र करने वाले मुस्लिमों की भीड़ ने इस्लामिक जिहाद और मजहबी कट्टरता का संदेश दिया है।

जब हिन्दुओं के काफिलों पर पत्थरबाजी की जाती है, जब काँवड़ों पर हमले किए जाते हैं, जब किसी इंसान को सिर्फ इस कारण नौकरी से निकलवा दिया जाता है, क्योंकि वो उस नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थक था, जिसका कि यही शाहीन बाग़ विरोधी!

लेकिन नीरज प्रजापति की मृत आत्मा आज भी यह समझ पाने में अक्षम ही होगी कि इस्लामी नारे लगाते हुए उन्हें जान से मार देने वाले लोगों की इंसानियत और एक शव यात्रा के लिए रास्ता देने वालों के बीच शाहीन बाग़ की इस इंसानियत को किस तरह से पृथक करे।

शाहीन बाग़ की नाकामयाबी का यह कितना बड़ा सन्देश है कि करीब दो महीने से, हर आम नागरिक की रोजाना दिनचर्या में खलबली मचाकर, देश की राजधानी के एक बड़े भू-भाग पर कब्जा जमाकर, देश को एक इस्लामिक राज्य बनाने का स्वप्न देख रहे ये उपद्रवी लोग, रोजाना हिन्दुओं से आजादी, जिन्ना वाली आजादी, फ़क़ हिन्दू और इस्लामिक नारे लगाने के बाद आज यह कहते देखे जा रहे हैं कि शव यात्रा को रास्ता देने से देशवासियों को कुछ सीखना चाहिए।

यदि हिन्दुओं की शव यात्रा के लिए रास्ता देने से हिन्दुओं को शाहीन बाग का उपकार मानना चाहिए तो फिर ऐसे संदेशों से हमें शायद शुक्र मनाना चाहिए कि CAA विरोधियों ने अभी तक यह नहीं कहा कि विरोध प्रदर्शन के लिए एक बड़े एरिया का स्वामित्व लेकर चंद आजादी के चितेरों ने कट्टर हिन्दुओं को अपनी कट्टर धार्मिक प्रणाली की खातिर, हिंसा भड़काने के उद्देश्य से शाहीन बाग़ के ही रास्ते को चुना, फिर भी आज़ादी के नारे गुनगुनाते हुए इन शांतिप्रिय लोगों ने बैरिकेड नहीं, बल्कि देश के हर CAA-विरोधी के दिल का दरवाजा खोलकर यह दिखा दिया है कि इस शाहीन बाग़ का दिल आखिर कितना बड़ा है।

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मत प्रतिशत का खुलासा न होने पर सदमे में केजरीवाल एंड पार्टी, जताई दाल में काला होने की आशंका

अरविंद केजरीवाल थोड़े से निराश चल रहे हैं। एग्जिट पोल में दिख रही बढ़त के बावजूद उनकी यह निराशा ट्वविटर पर दिख रही है। रविवार (9 फरवरी) को केजरीवाल ने कहा कि वोटिंग के एक दिन बाद भी चुनाव आयोग का मत प्रतिशत से जुड़े अंतिम आँकड़ों को जारी न करना, अचम्भित करने वाला है।

रिपोर्ट्स के अनुसार चुनाव आयोग द्वारा अंतिम बार शनिवार रात को मत-प्रतिशत संबंधी आँकड़े जारी किए गए थे, जिसमें वोटिंग प्रतिशत 61.46% बताया गया था। आपको बता दें कि दिल्ली में मतदान शाम 6 बजे समाप्त हो गया था।

मीडिया से बातचीत में केजरीवाल की पार्टी के बड़े नेता संजय सिंह ने कहा कि देश में यह पहली बार हो रहा है कि चुनाव आयोग मतदान संबंधी अंतिम आँकड़े जारी करने को तैयार नहीं है। आँकड़े जारी होने पर हुई देरी के कारण घबराए-बौखलाए संजय सिंह ने कहा कि सभी इस बात का इन्तजार कर रहे हैं कि कितना मत प्रतिशत हुआ, यह कहीं कुछ पकने की आशंका को बल दे रहा है। वर्ना छोटी सी दिल्ली के 70 विधानसभाओं के मत प्रतिशत की आधिकारिक घोषणा वोटिंग खत्म होने के 24 घंटे बाद भी क्यों नहीं की जा रही?

ध्यातव्य है कि केजरीवाल के आज के ट्वीट और संजय सिंह की हुई प्रेस कॉन्फ्रेंस से पहले भी आदमी पार्टी ने ईवीएम को लेकर रोना शुरू कर दिया था। सारे एग्जिट पोल्स में अपनी सरकार बनने की भविष्यवाणियों के बाद भी केजरीवाल एंड पार्टी शायद जमीनी हकीकत से वाकिफ है और इसीलिए प्रतिकूल चुनाव परिणामों के लिए ईवीएम को दोषी ठहराने की कोशिशों में जुट गई है। केजरीवाल की पार्टी ने शक जताया था कि भाजपा ईवीएम में गड़बड़ी करके चुनाव परिणाम में बदलाव कर सकती है।

वोटिंग के बाद मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल के आवास पर हुई पार्टी नेताओं की बैठक में तय हुआ है कि AAP के कार्यकर्ता मतगणना तक हर बूथ के ईवीएम पर नजरें बनाए रखेंगे। इस बैठक में उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, संजय सिंह, गोपाल राय और प्रशांत किशोर समेत कई बड़े नेता उपस्थित थे।

इस बैठक के बाद भी संजय सिंह ने आरोप लगाया था कि बाबरपुर में वोटिंग संपन्न होने के काफी समय बाद तक ईवीएम को जमा नहीं कराया गया, वह अधिकारियों के पास ही थे। उन्होंने इसी तरह की घटना विश्वास नगर में भी होने की बात कही थी।

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‘इनसे सतर्क रहें, सत्ता से बाहर होने पर ये करते हैं किस्म-किस्म की नाटकबाजी’

संत रविदास की जयंती पर कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी वाड्रा ने रविवार (फरवरी 9, 2020) को वाराणसी पहुँचकर उनके जन्मस्थान का दौरा किया। यहाँ उन्होंने गुरु संत रविदास जन्मस्थान मंदिर में पूजा-अर्चना की। वहीं बहुजन समाज पार्टी (BSP) सुप्रीमो मायावती ने प्रियंका पर निशाना साधते हुए इसे नाटक करार दिया और अपने समर्थकों को सतर्क रहने के लिए कहा।

इससे पहले वाराणसी के बाबतपुर एयरपोर्ट में प्रियंका गाँधी का जोर-शोर से स्वागत हुआ। इसके बाद वह सीधे सीरगोवर्धन में संत रविदास की जयंती पर आयोजित समारोह में शामिल होने रवाना हो गईं। प्रियंका गाँधी ने सुबह ही सोशल मीडिया पर संत रविदास को नमन करने के साथ ही वाराणसी आगमन की जानकारी दी थी।

वहीं बसपा सुप्रीमो मायावती ने प्रियंका गाँधी पर संत रविदास के मंदिरों में जाकर निजी स्वार्थ के लिए नाटकबाजी करने का आरोप लगाया। मायावती ने रविवार को किए गए सिलसिलेवार ट्वीट में कहा, “कॉन्ग्रेस, बीजेपी व अन्य पार्टियाँ यहाँ उत्तर प्रदेश में अपनी सरकार होने पर संत गुरु रविदास जी को कभी मान-सम्मान नहीं देती है, लेकिन सत्ता से बाहर होने पर फिर ये अपने स्वार्थ में इनके मन्दिरों/स्थलों आदि में जाकर किस्म-किस्म की नाटकबाजी जरूर करती है। इनसे सतर्क रहें।”

उन्होंने एक अन्य ट्वीट में लिखा, “जबकि यहाँ बसपा ही एक मात्र ऐसी पार्टी है, जिसने अपनी सरकार के समय में इनको विभिन्न स्तरों पर पूरा-पूरा मान-सम्मान दिया है। जिसे भी अब विरोधी पार्टियाँ एक-एक करके खत्म करने में लगी है। जो अति निन्दनीय है।”

इधर वाराणसी पहुँची प्रियंका ने कहा कि संत शिरोमणि गुरु रविदास ने सामाजिक एकता, बंधुत्व, भाईचारे और श्रम की महत्ता का संदेश दिया था। आज हम सभी के लिए गुरु रविदास की वाणी और विचार अनुकरणीय हैं। ताकि हम एक बेहतर समतामूलक समाज बना सकें। वहीं कॉन्ग्रेस प्रदेश अध्यक्ष अजय कुमार लल्लू ने बताया कि प्रियंका की बहुत दिनों से इच्छा थी कि वे संत शिरोमणि गुरु रविदास के जन्मस्थली मंदिर की चौखट पर मत्था टेकें।

हालाँकि पार्टी की तरफ से प्रियंका के इस दौरे को गैर-राजनीतिक बताया जा रहा है, लेकिन राजनीति के जानकार का मानना है कि वह जनाधार की मजबूत जड़ों को सींचने की कोशिश कर रही हैं। इस दौरान सीर में उन्होंने संत निरंजन दास का आशीर्वाद लेने के साथ ही लंगर और प्रसाद भी ग्रहण किया।

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थाने को फूँका, कम्प्यूटर फोड़ डाले, पुलिस को खदेड़ा: मो. मोहसिन की गिरफ़्तारी के बाद भीड़ का आतंक

बिहार के कटिहार में महज एक अफवाह के आधार पर पुलिस थाने को फूँक डाला गया, पुलिस के साथ झड़प की गई और लोगों को मारा-पीटा गया। आबादपुर थाने में उपद्रवियों ने ऐसा आतंक मचाया कि पुलिस जीप सहित कई अन्य वाहनों को भी आग के हवाले कर दिया गया। दरअसल, लोगों के बीच अफवाह फ़ैल गई थी कि वार्ड सदस्य मोहम्मद मोहसिन की पुलिस कस्टडी में मौत हो गई है, जिसके बाद ये घटना हुई। घटना की जानकारी मिलते ही बारसोई के एसडीपीओ सहित कई थानाें की पुलिस घटनास्थल पर पहुँची। इसके बाद भीड़ वहाँ से भाग खड़ी हुई

आबादपुर पुलिस ने उपद्रवियों को तितर-बितर करने के लिए हवाई फायरिंग की और लाठीचार्ज का सहारा लिया। हालाँकि, वरिष्ठ अधिकारियों के पहुँचने से पहले आक्रोशित दंगाइयों ने उलटा पुलिस को ही खदेड़ दिया था। मोहम्मद मोहसिन धुमतोला का निवासी था, जिसे पुलिस शनिवार (फरवरी 8, 2020) की शाम गिरफ़्तार कर के थाने ले गई थी। उसके ख़िलाफ़ वॉरंट जारी किया गया था। पूछताछ के दौरान जब पुलिस ने थोड़ी सी सख्ती दिखाई तो मोहसिन बेहोशी का नाटक करने लगा। इसके बाद उसके मौत की अफवाह फ़ैल गई।

गिरफ़्तार 45 वर्षीय मोहम्मद मोहसिन का पुराना आपराधिक रिकॉर्ड है। उसके ख़िलाफ़ कई मामले दर्ज हैं। आर्म्स एक्ट के मामले में उसके विरुद्ध वॉरंट जारी किया गया था। उसने आरोप लगाया है कि पुलिस ने पूछताछ के दौरान उसकी पिटाई की। पुलिस ने बताया कि वो घायल कैसे हुआ, इसकी जाँच की जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि अगर कोई पुलिसकर्मी दोषी पाया जाता है तो उस पर कार्रवाई की जाएगी। साथ ही यह भी कहा गया है कि उपद्रवियों को चिह्नित किया जाएगा और उन्हें बख्शा नहीं जाएगा।

दंगाई भीड़ ने पूरे थाने को आगे के हवाले कर डाला। थाने के रिकॉर्ड रूम और और मालखाना को भी फूँक दिया। भीड़ में कम से कम 1000 लोग शामिल थे। क़रीब 3 घंटे तक आक्रोशित उपद्रवियों ने तांडव मचाया। दरअसल, अफवाह तब फैली थी जब पुलिस मोहसिन को लेकर अस्पताल जा रही थी। आतंक का आलम ये था कि थाने के बगल में स्थित झोपड़ी को भी जला डाला गया। सरकारी कागज़ात फाड़ डाले गए और कम्प्यूटरों व फर्नीचरों को तोड़ डाला गया। मोहम्मद मोहसिन अभी पूरी तरह सुरक्षित है।

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नौकरी या प्रमोशन में आरक्षण कोई मौलिक अधिकार नहीं: SC ने पलटा 2012 में दिया हाई कोर्ट का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिए अपने एक महत्वपूर्ण निर्णय में सरकारी नौकरियों के प्रमोशन में आरक्षण और कोटा को मूलभूत अधिकार मानने से इनकार कर दिया। उच्चतम न्यायालय ने कहा कि वह राज्यों को कोटा देने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है। साथ ही कोर्ट ने यह भी कहा कि वो राज्यों को लोक सेवाओं में कुछ समुदायों के असमान प्रतिनिधित्व संबंधी डेटा की अनुपस्थिति में ऐसे किसी प्रावधान को अपनाने के लिए मजबूर भी नहीं कर सकता।

उत्तराखंड के पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (पीडब्ल्यूडी) में असिस्टेंट इंजीनियर (सिविल) के पदों पर प्रमोशन के लिए SC/ST समुदाय के लोगों द्वारा दायर अपील पर फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने कहा कि कोई भी “मूलभूत अधिकार” ऐसे किसी दावे का समर्थन नहीं करता।

रिपोर्ट्स के अनुसार 7 फरवरी को जस्टिस एल नागेश्वर राव तथा हेमंत गुप्ता की पीठ ने अपील पर निर्णय देते हुए कहा, “निःसंदेह राज्य सरकार आरक्षण देने के लिए बाध्य नहीं है। कोई भी मूलभूत अधिकार ऐसा नहीं है, जो प्रमोशन में आरक्षण के किसी व्यक्तिगत दावे को मान्यता प्रदान करता हो। कोर्ट राज्य सरकारों को प्रमोशन में आरक्षण देने के लिए आदेश जारी नहीं कर सकता।”

सुप्रीमकोर्ट ने अपने इस निर्णय के द्वारा 2012 में उत्तराखंड हाईकोर्ट के उस निर्णय को पलट दिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने राज्य को कुछ विशेष समुदायों के लिए कोटा मुहैया कराने का आदेश दिया था।

उस वक्त कपिल सिब्बल और दूसरे वकीलों ने हाईकोर्ट के सामने अपनी दलील में कहा था कि राज्य का कर्तव्य बनता है कि वह अनुच्छेद 16(4) और 16(4-अ) के अंतर्गत SC/ST समुदाय की सहायता करे।

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को दिए अपने निर्णय में कहा कि हालाँकि ये अनुच्छेद राज्य को आरक्षण देने की शक्ति प्रदान करते हैं लेकिन यह सिर्फ तभी हो सकता है, जब राज्य की नजर में इन समुदायों का सरकारी नौकरियों में प्रतिनिधित्व युक्तिसंगत नहीं ठहरता हो।

कोर्ट ने आगे कहा, “यह स्थापित कानून है कि राज्य को सरकारी नौकरियों में आरक्षण देने के लिए आदेश नहीं दिया जा सकता। इसी प्रकार राज्य को SC/ST के लिए पदों में प्रमोशन के लिए भी बाध्य नहीं किया जा सकता।”

सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में कहा कि राज्य को इस संदर्भ में लिए गए अपने निर्णयों तक पहुँचने के लिए समुचित आँकड़ों की सहायता लेनी चाहिए, जिसे न्याय संगत ठहराया जा सके।

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श्रीलंका के PM ने काशी विश्वनाथ मंदिर में की पूजा-अर्चना, CAA को बताया भारत का आंतरिक मुद्दा

श्रीलंका के प्रधानमंत्री महिंदा राजपक्षे रविवार (फरवरी 9, 2020) को वाराणसी पहुँचे। वहाँ उन्होंने काशी विश्वनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की। गर्भ गृह में बैठ कर अनुष्ठान में भाग लेने के साथ ही उन्होंने षोडशोपचार विधि-विधान से बाबा विश्वनाथ की आराधना की। इससे पहले लाल बहादुर शास्त्री इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर स्थानीय प्रशासन ने उनकी आगवानी की। प्रधानमंत्री राजपक्षे को मंदिर में प्रसाद भी भेंट किया गया। मंदिर के अर्चक डॉ. श्रीकांत और पाँच वैदिक ब्राह्मणों ने महिंदा राजपक्षे को विशेष दर्शन पूजन कराया। उन्होंने काल भैरव मंदिर में आरती भी की।

श्रीलंका के प्रधानमंत्री ने अपने भारत दौरे पर दिल्ली पहुँचे थे, जहाँ हैदराबाद हाउस में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से उनकी मुलाक़ात हुई थी। वो राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद से भी मिले। नागरिकता संशोधन क़ानून पर अपनी राय रखते हुए उन्होंने कहा कि ये भारत का आंतरिक मुद्दा है और श्रीलंकाई लोग कभी भी अपने देश वापस आ सकते हैं। ‘इंडिया टुडे’ को दिए गए इंटरव्यू में राजपक्षे ने कहा कि श्रीलंकाई लोगों का घर श्रीलंका है, इसीलिए वो जब चाहें तब वापस आ सकते हैं। उनका स्वागत है।

महिंदा राजपक्षे ने कहा कि भारत में रह रहे श्रीलंकाई अगर वापस अपने देश आते हैं तो इससे वहाँ की सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। उन्होंने जानकारी दी कि पिछले दिनों में 4000 श्रीलंकाई वापस लौटे हैं। उन्होंने कहा कि ये उन पर निर्भर है कि वो कब वापस आना चाहते हैं। कई मीडिया रिपोर्ट्स में कहा जा रहा है कि राजपक्षे भाइयों के सत्ता में लौटने के बाद श्रीलंका के मुस्लिम डरे हुए हैं लेकिन महिंदा ने आश्वस्त किया कि उनकी सरकार सभी को लेकर आगे बढ़ रही है। भारत ने श्रीलंका में तमिलों के लिए 60,000 घर बनवाए हैं, जिसका महिंदा राजपक्षे ने स्वागत किया।

महिंदा राजपक्षे ने चीन के बढ़ते प्रभाव को लेकर भारत को आश्वस्त करते हुए कहा कि वो श्रीलंका पर एक अच्छे दोस्त और पड़ोसी की तरह भरोसा कर सकता है। पिछले साल हुए ईस्टर हमले को लेकर पीएम राजपक्षे ने कहा कि उस वारदात के बाद भारत ने भी श्रीलंका की मदद की। उन्होंने कहा कि भारतीय ख़ुफ़िया एजेंसियों ने हमले को लेकर पहले ही आगाह कर दिया था लेकिन ‘इंटेलिजेंस फेलियर’ के कारण श्रीलंका की तत्कालीन सरकार इसे रोकने में असमर्थ साबित हुई।

भारत ने आरोपितों के नाम, पता, कांटेक्ट और हमले का समय और जगह को लेकर भी पक्की जानकारियाँ दी थीं। राजपक्षे ने कहा कि इन पर अमल नहीं किया गया। उन्होंने माना कि ये श्रीलंका की ग़लती थी। हालाँकि, उन्होंने आश्वस्त किया कि द्वीपीय राष्ट्र आज इन मामलों में पहले से ज्यादा सक्रिय है।

5 दिनों की यात्रा पर भारत आए महिंदा राजपक्षे भगवान बुद्ध की अस्थियों का दर्शन करने सारनाथ भी जाएँगे। उनका काफिला जहाँ से भी गुजरेगा, वहाँ तमिल व सिंहला भाषा में बड़े-बड़े पोस्टर्स लगवाए गए हैं। इन पोस्टरों में भारत-श्रीलंका के प्रगाढ़ रिश्ते की बात की गई है और श्रीलंकाई पीएम का स्वागत भी किया गया है। राजपक्षे ने वरिष्ठ भाजपा नेता सुब्रह्मण्यन स्वामी के साथ भी मुलाक़ात की। दोनों पुराने मित्र हैं। उनकी बैठक एक घंटे से भी ज्यादा चली।

चुनाव से पहले अवैध शराब ले जाने पर AAP नेता के भाई पर FIR, बरामद पव्वों पर लगी थी ‘PK’ की मोहर

दिल्ली में विधानसभा चुनाव के निपटने के ठीक एक दिन बाद आम आदमी पार्टी नेता के भाई पर FIR हो गई है। बताया जा रहा है कि 6 फरवरी को एक रेड के दौरान दिल्ली क्राइम ब्रांच ने अवैध शराब की जो खेप बरामद की थी, उसमें आम आदमी पार्टी के परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत के भाई हरीश गहलोत का नाम सामने आया है। हरीश गहलोत ने यह शराब चुनाव के दौरान वोटरों को लुभाने के उद्देश्य से मँगाई थी।

ऐसे समय में, जब यह दावा किया जा रहा है कि आम आदमी पार्टी ‘विकास’ के पर ही लोगों से वोट माँग रही थी, उनकी पार्टी के नेता और विधायक प्रत्याशी के भाई का शराब बाँटने जैसी घटना में नाम सामने आना दुर्भाग्यपूर्ण है।

पकड़ी गई इस शराब को आम आदमी पार्टी के विधायक और नजफगढ़ से AAP उम्मीदवार कैलाश गहलोत के भाई हरीश गहलोत के कहने पर बाँटा जाना था। क्राइम ब्राँच ने दर्ज की गई FIR में इस बात का जिक्र किया है। इस मामले अब तक वीरेन्द्र और रविन्द्र नाम के दो लोगों को गिरफ्तार किया गया है।

चुनाव के दौरान वोटरों को लुभाने के लिए अवैध रूप से शराब बाँटने के आरोप में पुलिस ने बताया है कि AAP नेता के भाई हरीश गहलोत को नोटिस जारी किया जाएगा, जिसके बाद उनकी गिरफ्तारी भी संभव है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस मामले में केजरीवाल सरकार में परिवहन मंत्री कैलाश गहलोत से भी पूछताछ हो सकती है।

FIR में बताया गया है कि ये ये शराब 8 तारीख को होने वाले दिल्ली चुनाव से पहले बाँटी जानी थी। बोलेरो गाड़ी में 15 पेटियाँ अंग्रेजी शराब की भरी हुई थीं। इन पेटियों में 48 पव्वे (क्वार्टर) थे, जो ‘PK’ की मोहर के साथ सीलबंद पाए गए। इन 15 पेटियों के अलावा भी बड़ी मात्रा में शराब दाल मिल कंपाउंड में रखी गई थी, वह भी वोटरों के बीच बाँटी जाने वाली थी लेकिन पुलिस की रेड में AAP नेता के भाई हरीश गहलोत के शराब बाँटने के सपने चकनाचूर हो गए।

FIR की कॉपी आप यहाँ देख सकते हैं –

दिल्ली विधानसभा की 70 सीटों के लिए मतदान हो चुका है। देशभर की नजरें अब चुनावी नतीजों पर टिकी हैं। आने वाली 11 फरवरी को इस चुनाव के परिणाम भी सामने आ जाएँगे।

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पाकिस्तान में हिंदुओं को 70 साल बाद सौंपा गया 200 साल पुराना मंदिर, उपायुक्त ने माँगी माफी

पाकिस्तान के बलूचिस्तान प्रांत के जिले झोब में 200 साल पुराने एक मंदिर को हिंदू समुदाय को सौंप दिया गया है। पाकिस्तानी मीडिया जिओ टीवी में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, 70 साल के बाद यह मंदिर हिंदू समुदाय को मिला है। बीते तीस साल से इसमें सरकारी स्कूल चल रहा था जिसे अब यहाँ से दूसरे जगह पर शिफ्ट कर दिया गया है।

चार कमरों वाले इस मंदिर की चाबी एक समारोह के दौरान हिंदू समुदाय के नेताओं को सौंपी गई। समारोह मंदिर के सामने हुआ जिसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। इनमें अन्य धार्मिक अल्पसंख्यक समुदाय के सदस्य, सामाजिक व राजनैतिक संगठनों के सदस्य भी शामिल हुए थे। समारोह के मुख्य अतिथि झोब की केंद्रीय मस्जिद के इमाम एवं जमीयत उलेमा-ए-इस्लाम के नेता मौलाना अल्लाह दाद काकर थे।

मौलाना काकर ने स्थानीय हिंदू पंचायत के अध्यक्ष सलीम जान को मंदिर की चाबी सौंपी। इस मौके पर इलाके के उपायुक्त ताहा सलीम ने कहा, “यह बलूचिस्तान, विशेषकर झोब के लिए खास और ऐतिहासिक दिन है। मौलाना काकर ने न केवल मंदिर को हिंदू समुदाय को वापस देने के सरकार के फैसले का समर्थन किया बल्कि इस आयोजन का मुख्य अतिथि बनना भी स्वीकार किया। यह सांप्रदायिक सौहार्द की एक शानदार मिसाल है।”

उपायुक्त ने हिंदू समुदाय से इस बात के लिए माफी भी माँगी कि बीते 70 साल में उन्हें यह मंदिर नहीं सौंपा गया। उन्होंने कहा कि मंदिर को इसके वास्तविक रूप में बहाल किया जाएगा। मरम्मत और साज-सज्जा के बाद हिंदू मंदिर में पूजा अर्चना कर सकेंगे। स्थानीय हिंदू पंचायत अध्यक्ष सलीम जान ने कहा कि मंदिर 200 साल पुराना है। पाकिस्तान बनने के बाद अधिकांश हिंदू भारत चले गए, लेकिन अभी भी शहर में हिंदुओं की अच्छी आबादी है। उन्होंने कहा कि अभी इलाके के हिंदू एक मिट्टी के घर में पूजा अर्चना करते हैं जो किसी भी समय गिर सकता है।

उन्होंने कहा, “हाल ही में बलूचिस्तान हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जमाल खान मंडोखेल झोब आए थे। तब हिंदू समुदाय ने उनसे इस मंदिर को वापस दिलाने की अपील की थी। न्यायाधीश ने हमें आश्वस्त किया था कि मंदिर हिंदू समुदाय को वापस मिलेगा और आज हम जिला प्रशासन और हमारी माँग को पूरा करने के लिए उनके शुक्रगुजार हैं।”

हिंदू पंचायत अध्यक्ष सलीम जान ने आगे बताया कि स्थानीय सिख समुदाय भी लंबे समय से अपने गुरुद्वारे से वंचित है और उनके पास अपनी धार्मिक रस्मों को करने के लिए कोई जगह नहीं है। गुरुद्वारे में भी एक स्कूल चल रहा है।

चले जाओ, ये हिंदुस्तान है, पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं: अवैध घुसपैठियों को भगाने के लिए MNS का शक्ति प्रदर्शन

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना के कार्यकर्ताओं ने अवैध बांग्लादेशी और पाकिस्तानी आप्रवासियों को हटाने की माँग को लेकर आजाद मैदान में एक रैली निकाली। यह जुलूस महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के अध्यक्ष राज ठाकरे के नेतृत्व में निकाला गया। MNS ने एक बार फिर अपने हिंदुत्ववादी रुख को तेज करते हुए सीएए और एनआरसी की कड़ी में नई मुहीम जोड़ दी है। 

एक तरफ जहाँ देश में सीएए और एनआरसी का विरोध हो रहा है तो वहीं महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने रविवार (फरवरी 9, 2020) को अवैध पाकिस्तानियों और बांग्लादेशी घुसपैठियों को भारत से बाहर निकालने के लिए रैली निकाली है। पार्टी ने स्पष्ट कर दिया है कि यह जुलूस देश में अवैध रूप से रह रहे पाकिस्तानी-बांग्लादेशी घुसपैठियों के खिलाफ है।

बता दें कि हाल ही में ही MNS ने घुसपैठियों के खिलाफ अभियान की शुरुआत की थी। इन लोगों को देश का घुसपैठिया करार देते हुए MNS ने उन्हें देश से बाहर किए जाने की माँग की थी। ठाकरे इस रैली के जरिए पार्टी का दायरा मराठा अस्मिता से आगे हिंदुत्व की तरफ ले जा रहे हैं। रैली से ठाकरे बांग्लादेशी घुसपैठियों का विरोध कर रहे हैं। इस रैली के लिए पूरे महाराष्ट्र से लोग आ रहे हैं। रैली में लोगों के लिए भगवा रंग की टी-शर्ट, टोपी, हाथ पर बाँधने वाली पट्टी वगैरह बनवाए गए हैं, जिस पर शिवाजी महाराज की राजमुद्रा का चिन्ह छपा है।

महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना ने अवैध प्रवासियों को नसीहत देते हुए कहा है कि चले जाओ, ये हिंदुस्तान है, पाकिस्तान या बांग्लादेश नहीं। बता दें कि अपने पार्टी के झंडे का रंग भगवा करने के बाद राज ठाकरे की यह पहली रैली है। जिसका मुद्दा देश में रह रहे अवैध रूप से बांग्लादेशियों और पाकिस्तानियों का विरोध है।

इस महारैली को लेकर MNS कार्यकर्ताओं में नया जोश देखने को मिल रहा है। इस रैली के माध्यम से राज ठाकरे अपनी पार्टी में नई जान फूँकने की तैयारी कर रहे हैं। मुंबई और महाराष्ट्र के विभिन्न इलाकों से आने वाले कार्यकर्ताओं के लिए अलग रूट भी निर्धारित किया गया हैं साथ ही उनकी गाड़ियों के लिए अलग जगह पार्किंग की व्यवस्था भी की गई है। रैली के समापन के बाद राज ठाकरे अपने कार्यकर्ताओं को संबोधित करेंगे। राजनीति के जानकारों का कहना है कि भगवा रंग में रंगने के बाद ये महामोर्चा राज ठाकरे की राजनीति के नए रास्ते की दशा और दिशा तय करने वाला है।