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जामिया के पास दिल्ली पुलिस को नहीं मिले खोखे, आधी रात फायरिंग का किया जा रहा था दावा

दिल्‍ली के जामिया मिल्लिया यूनिवर्सिटी के गेट नंबर पॉंच के पास रविवार करीब 12 बजे फायरिंग हुई है। चश्मदीदों का दावा है कि स्कूटी पर सवार दो लोग आए और फायरिंग कर चलते बने। न्यूज एजेंसी एएनआई ने दिल्ली पुलिस के हवाले से बताया है कि मौके से खोखे नहीं मिले हैं। घटना की जॉंच की जा रही है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार घटना रविवार देर रात करीब 11: 30 बजे, जामिया के गेट नंबर 5 के पास घटी। जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी ने खुद फायरिंग की तस्दीक की। कमेटी ने बताया कि वहाँ दो स्कूटी सवार अज्ञात लोगों ने गोली चलाई। गोलीबारी में किसी के हताहत होने की खबर नहीं है।

एडिशनल डीसीपी कुमार ज्ञानेश ने बताया, “एसएचओ जामिया नगर ने अपनी टीम के साथ जाकर इलाके की तलाशी ली। वहॉं उन्‍हें गोली के खाली राउंड नहीं मिले। इसके अलावा, कथित हमलावर किस गाड़ी से आए थे इस पर लोगों के अलग-अलग बयान हैं। कुछ का कहना कि वे एक स्कूटर पर आए थे कुछ उसे फोर व्हीलर बता रहे थे। हम जॉंच करेंगे और तदनुसार कानून के अनुसार कार्रवाई करेंगे।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और एनआरसी के विरोध में जामिया के गेट नंबर 7 पर धरने पर बैठे आंदोलनकारियों में उस वक्त अफरा-तफरी मच गई, जब गेट नंबर 5 पर गोली चलने की आवाज सुनाई दी। हालाँकि पुलिस ने इस घटना की पुष्टि नहीं की। लेकिन जामिया कॉर्डिनेशन कमेटी के मीडिया समूह ने गोली चलने का दावा किया। कमेटी के मुताबिक, स्कूटी सवार दो युवकों ने फायरिंग की, जिनमें से एक ने लाल रंग की जैकेट पहनी थी। दूसरा युवक लाल रंग की स्कूटी चला रहा था।

एएनआई के अनुसार, एसीपी जगदीश यादव ने बताया कि इस मामले में छात्रों की शिकायत के आधार पर आईपीसी की धारा 307 और आर्म्स एक्ट की धारा 27 के तहत एफआईआर दर्ज कर ली गई है। अब मौक़े पर पहुँच कर पुलिस की जाँच जारी है। इस मामले के संबंध में गेट नंबर 5 और 7 की सीसीटीवी फुटेज खँगाल रही है।

बता दें, इस घटना में किसी को कोई चोट नहीं आई है। लेकिन, इसी बीच सोशल मीडिया में जामिया के सामने अफरा-तफरी का एक वीडियो वायरल हो रहा है। अब ये वीडियो कहाँ का और कब का है ये स्पष्ट नहीं हो पाया है। लेकिन कई लोग इसे कल की घटना की वीडियो बताकर शेयर कर रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले भी पैदल मार्च के दौरान एक नाबालिग ने पुलिस के सामने गोली चला दी थी, जिसमें शादाब नाम का युवक घायल हुआ था। इसके बाद एक शाहीन बाग में एक अन्य युवक ने भी गोली चलाई थी। पिछले एक हफ्ते में दिल्ली में इस तरह की यह तीसरी घटना है।

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‘कॉमरेड कन्हैया मुर्दाबाद’ के नारों से हुआ स्वागत, बिहार के लोगों को समझाने गए थे CAA और NRC

सीएए और एनआरसी के खिलाफ बिहार में चल रहे प्रोपेगेंडा के तहत गाँव-गाँव घूम रहे सीपीआई के नेताओं को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा। इस दौरान लोगों ने सीपीआई नेताओं को काले झंडे तो दिखाए ही साथ ही काफ़िले में मौजूद कन्हैया कुमार के ख़िलाफ़ जमकर मुर्दाबाद के नारे भी लगाए। इस बीच कॉमरेड कन्हैया को गाँव से बाहर निकलना भारी पड़ गया।

इन दिनों बिहार में चल रही जन-गण-मन यात्रा के तहत भारतीय कम्यूनिस्ट पार्टी (CPI) नेता और जेएनयू के ‘काम’रेड कन्हैया कुमार गाँव में आयोजित सभाओं में जाकर लोगों को सीएए के खिलाफ भड़का रहे, भ्रमित कर रहे हैं। इसी यात्रा के दौरान रविवार को कन्हैया कुमार की एक सभा बिहार के शिवहर जिले में थी। यहाँ पहुँचे कन्हैया ने लोगों को बताया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह सीएए को लागू कर देश को बाँटने की कोशिश कर रहे हैं, जिसमें वह कभी सफल नहीं होंगे। इसके बाद कन्हैया की एक सभा सीतामढ़ी के पास होनी थी।

सीएए का विरोध करने पर लोगों ने कन्हैया कुमार को दिखाए काले झंडे (साभार- दैनिक जागरण)

अपने अगले कार्यक्रम के लिए कन्हैया जैसे ही शिवहर से निकलकर सीतामढ़ी की ओर जा रहे थे, तो रास्ते में खड़े लोगों ने उनकी गाड़ी को जबरन रोकने की कोशिश की। इस बीच ग्रामीणों ने पहले तो कन्हैया को काले झंडे दिखाए और फिर जमकर कॉमरेड कन्हैया मुर्दाबाद के नारे लगाए। लेकिन पुलिस ने कन्हैया को सुरक्षा घेरे में लेकर सभा स्थल तक सुरक्षित पहुँचाया। इससे पहले कन्हैया के काफिले को शहर के अंदर पुनौरा में भी रोकने की कोशिश की गई। वहाँ भी युवाओं ने काले झंडे दिखाकर कन्हैया मुर्दाबाद के नारे लगाए।

बीते शनिवार को भी सीएए के ख़िलाफ़ चल रही प्रोपेगेंडा यात्रा के दौरान कन्हैया कुमार के काफ़िले पर छपरा में पथराव करने की कोशिश की गई थी। इस हमले में कन्हैया की गाड़ी के शीशे टूट गए थे जबकि कन्हैया बाल-बाल बच गए थे।

आपको बता दें कि देशद्रोह के आरोप में मुकदमा झेल रहे कन्हैया कुमार ने सीपीआई के टिकट पर मंत्री गिरिराज सिंह के सामने बेगूसराय से लोकसभा का चुनाव लड़ा था, जिसमें उन्हें बुरी हार का सामना करना पड़ा था। इसके बाद से वह अपनी जमीन तलाश करने में जुटे हुए हैं।

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विश्व हिंदू महासभा अध्यक्ष रंजीत के हत्यारे शॉल ओढ़े CCTV में कैद! पुलिस ने रखा है ₹50000 का इनाम

विश्व हिंदू महासभा के अध्यक्ष रंजीत सिंह की हत्या में यूपी पुलिस को एक अहम सुराग हाथ लगा है। यूपी पुलिस को एक CCTV कैमरे से दो संदिग्धों की तस्वीरें मिली हैं। इन तस्वीरों को एक पुख्ता सुराग के रूप में पुलिस देख रही है। वहीं इन तस्वीरों को जारी करते हुए यूपी पुलिस ने हत्यारों की पहचान कर सूचना देने वालों के लिए 50 हज़ार रुपए का इनाम रखा है।

रविवार को लखनऊ में दिन दहाड़े हुई विश्व हिंदू महासभा के अध्यक्ष की हत्या ने यूपी पुलिस को हिला कर रख दिया है। इसके बाद से पुलिस हत्यारों की तलाश में जुट गई है। यूपी पुलिस ने तेजी दिखाते हुए रविवार को ही एक CCTV कैमरे की रिकॉर्डिंग निकलवाई, जिसमें दो संदिग्ध लोग दिखाई दे रहे हैं। इनमें से एक युवक ने शॉल भी ओढ़ रखा है। पुलिस ने 50 हजार का इनाम रखते हुए कहा है कि हत्यारों की पहचान करके बताने वाले या इस हत्याकांड में सुराग देने वालों को यह राशि दी जाएगी। पुलिस ने साफ़ किया है कि पुलिस को सूचना देने वाले की पहचान छिपाकर रखी जाएगी।

उधर यूपी पुलिस ने जल्द घटना को उजागर करने और हत्यारों को पकड़ने के लिए 9 टीमों को लगा दिया है। वहीं घटना स्थल के आस-पास के कई CCTV कैमरों को पुलिस खँगालने में लगी हुई है। उम्मीद जताई जा रही है कि CCTC कैमरों की मदद से जल्द ही हत्या के आरोपितों की पहचान उजागर की जा सकती है।

आपको बता दें कि लखनऊ में एक बार फिर से हिंदूवादी नेता को निशाना बनाया गया है। रविवार सुबह 6 बजे रोड़ पर टहलने के दौरान अचानक से आए बदमाशों ने विश्व हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रंजीत बच्चन की गोली मार कर हत्या कर दी। बताया जा रहा है कि रणजीत सिंह हत्या के दौरान एक हत्यारे ने शॉल ओढ़ रखा था, जिसने हथियार दिखाकर मोबाइल छीनने का प्रयास किया था। गौरतलब है कि बीते साल लखनऊ में ही हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई थी।

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भारतीय भैंस ने बांग्लादेश में मचाई तबाही: एक महिला की मौत, 7 घायल – भैंस के खिलाफ FIR दर्ज

भारत से बांग्लादेश की सीमा में अचानक से एक भैंस चली गई। उसने सीमा के निकटवर्ती गाँव में ग्रामीणों पर हमला बोल दिया। इस हमले में 7 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। इसी बीच अस्पताल में भर्ती कराने से पहले ही एक बांग्लादेशी महिला ने दम तोड़ दिया। इस के बाद बांग्लादेश पुलिस ने भारतीय भैंस को हिरासत में लेकर उसके ख़िलाफ़ मुकदमा दर्ज किया है।

द डेली स्टार न्यूज़ की ख़बर के मुताबिक ओसीए ने ग्रामीणों के हवाले से बताया कि भारत से एक भैंस पुटिया सीमा क्षेत्र के निकट से प्रवेश कर गई। पुटिया गाँव को पार करने के बाद भैंस ने नजदीकी गाँव गौरंगोला में घुसकर ग्रामीणों पर हमला कर दिया। इस दौरान भैंस ने गाँव में काफी देर तक तांडव मचाया, जिसमें गाँव के करीब आठ लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

वहीं सूचना मिलने पर पहुँची पुलिस ने सभी घायलों को कमिला के विभिन्न अस्पतालों में इलाज के लिए भर्ती कराया। हालाँकि अभी तक सभी घायलों के नामों की जानकारी नहीं हो सकी है। वहीं संबंधित थाना इंचार्ज ने जानकारी देते हुए बताया कि इसी बीच गाँव गौरंगोला की 65 वर्षीय महिला सफ़िया बेगम पत्नी मुख्तार हुसैन ने अस्पताल में इलाज के दौरान दम तोड़ दिया।

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शाहीन बाग में गोली चलाने वाले युवक का मायावती ‘कनेक्शन-2017’, दिल्ली पुलिस पूछताछ में जुटी

शाहीन बाग में दिनदहाड़े गोली चलाने वाले कपिल ने यूपी विधानसभा चुनावों में मायावती की पार्टी के लिए चुनाव प्रचार किया था। इस बात का खुलासा सुरक्षा ऐंजेसियों ने युवक की फेसबुक प्रोफाइल से स्क्रीन शॉट्स लेकर किया है।

आरोपित युवक की फेसबुक प्रोफाइल से पता चला कि युवक ने यूपी के 2017 में हुए विधानसभा चुनावों में बहुजन समाज पार्टी के लिए जमकर प्रचार किया था। उसने प्रचार के साथ-साथ फेसबुक पर मायावती की तारीफ में फोटो के साथ कई सारे पोस्ट भी किए थे। एक फेसबुक पोस्ट में युवक ने ‘जय भीम’ का नारा देते हुए बसपा अध्यक्ष मायावती का फोटो भी पोस्ट किया था, जिसमें सीपी सिंह नाम के व्यक्ति को टैग किया गया था। वहीं दूसरी पोस्ट में मायावती की एक रैली के फोटो पोस्ट किया गया था तो एक तीसरी फेसबुक पोस्ट में मायावती को सबसे अधिक सीटें दिखाने वाले एग्जिट पोल की तस्वीर को पोस्ट किया गया था।

फेसबुक पोस्ट को देखकर साफ़ प्रतीत होता है कि कपिल मायावती का बड़ा प्रशंसक है, जिसने मायावती के समर्थन में यूपी के विधानसभा चुनावों में जमकर प्रचार किया था। हालाँकि पेंच यह भी है कि जून 2017 से ही आरोपित युवक कपिल का फेसबुक अकाउंट बंद है। अब इसे लेकर पुलिस लगातार उससे पूछताछ कर रही है और पुलिस को उम्मीद है कि युवक से कुछ और अहम जानकारियाँ मिल सकती हैं।

कपिल बैंसला द्वारा मायावती के समर्थन में फेसबुक पर की गई पोस्ट (साभार- अमर उजाला)

दरअसल पिछले 51 दिनों से दिल्ली के शाहीन बाग में सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शन की आड़ में उपद्रव के बीच बीते शुक्रवार को एक युवक ने अचानक से पहुँचकर दो राउँड गोली चला दी थी, जिसके बाद वहाँ सुरक्षा में तैनात पुलिसकर्मियों ने तत्काल गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के दौरान युवक ने ‘जय श्री राम’ के भी नार लगाए थे। इस दौरान युवक ने कहा था कि महीनों से लोग बिना इजाजत के रोड को जाम कर धरने पर बैठे हैं, जिससे आम राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

दरअसल नोएडा क्षेत्र के दल्लूपुरा का रहने वाला युवक कपिल ने देशी पिस्तौल से दो राउँड फायर किए थे, जिसे पुलिस ने तत्काल गिरफ्तार कर लिया था। पुलिस ने मौके से दो कारतूस के खाली खोके भी बरामद किए थे। वहीं इस घटना को लेकर खुफिया एजेंसियाँ भी सतर्क हो गई हैं। इसके बाद से दिल्ली पुलिस लगातार आरोपित युवक से पूछताछ कर रही है। आपको बता दें कि देश में CAA के नाम पर विरोध-प्रदर्शन की आड़ में हो रहे उपद्रव और उसके बीच हो रही बयानबाजी से आहत होकर बीते दिनों एक नाबालिग युवक ने भी जामिया इलाके में गोली चला दी थी।

वहीं 51 दिनों से धरने के चलते बंद रोड से परेशान लोगों ने रविवार को सड़क खुलवाने के लिए विरोध प्रदर्शन किया। इस दौरान दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग करके लोगों की भीड़ को शाहीन बाग धरने की ओर जाने से रोक दिया। इस दौरान बड़ी संख्या में पुलिस फोर्स तैनात रहा।

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जब से नरेंद्र मोदी सत्ता में आए हैं, तब से बहुत सारे पत्रकारों ने अपना असली रंग दिखाना शुरू कर दिया है। वहीं अधिकतर जानकारों का मानना है कि अब निष्पक्ष पत्रकार जैसी कोई बात नहीं है। इन जानकारों में से अधिकांश की अपनी विचारधारा है और कई ऐसे हैं, जो सक्रिय रूप से एक खास राजनीतिक एजेंडा को फैलाने के लिए काम करते हैं।

वैसे जब बात ‘कार्यकर्ताओं’ या ‘कलाकारों’ की आती है तो ये बात उतनी सटीक नहीं बैठती है। ये कलाकार दिखावा करते हैं कि वो सत्य की खोज में जुटे हैं। कार्टूनिस्ट भी खुद को कलाकार मानते हैं और उन्हें पत्रकार के लगभग बराबर ही माना जाता है। और वो भी पक्षपातपूर्ण रवैये से भरे होते हैं। कई सारे ट्विटर यूजर्स भी इस तरफ इशारा करते हैं।

इन्हीं ट्विटर यूजर्स में से एक है- टीपूडा। इनका यूजरनेम है- @PR1CELES5। टीपूडा ने कई सारे कार्टून्स को सही (राजनीतिक रूप से) किया है, खासकर सतीश आचार्य द्वारा बनाए गए कार्टून्स का। उन्होंने इन कार्टून्स को सही करते हुए बताया है कि कैसे ये ओरिजिनल कार्टून्स पक्षपाती हैं और सिर्फ एक ही पक्ष को दिखाते हैं।

टीपूडा का असली नाम अमोल है। वो प्रोफेशनल कार्टूनिस्ट नहीं है, लेकिन कार्टून के माध्यम से चीजों का खंडन करने के लिए वो काफी पॉपुलर है। अमोल ने ऑपइंडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने ये सब कार्टून मजे के लिए बनाए थे, लेकिन साथ ही वो एक मैसेज भी देना चाहते थे। उन्होंने कहा कि समय मिलने पर वो और भी कार्टून बनाएँगे।

यहाँ पर हम ओरिजिनल कार्टून और अमोल द्वारा ‘सही’ किए कार्टून दोनों को ही दिखाएँगे। पढ़कर आप खुद ही समझ जाएँगे कि कैसे किसी भ्रमित विचारधारा के बोझ तले दब कर कोई कार्टूनिस्ट सही चीज के बजाय प्रोपेगेंडा फैला रहा होता है।

कॉन्ग्रेस नेता शशि थरूर ‘मंसूर’ नाम के कार्टूनिस्ट का एक काटून शेयर करते हैं, जिसमें नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) दोनों को मिक्स कर दिया गया है। जिसके बाद अमोल ने इसे सही करते हुए एक कार्टून बनाया। इसमें अमित शाह एक शख्स से पूछ रहे हैं कि सब कुछ विस्तार से समझाने के बावजूद तुम विरोध क्यों कर रहे हो तो वो कहता है – मुझे खुद नहीं पता। और इसमें पीछे से शशि थरूर को बोलते हुए दिखाया गया है कि वो पता भी नहीं चलने देंगे। यानी कि वो विरोध इसलिए कर रहा है क्योंकि शशि थरूर उसे करने के लिए कह रहे हैं।

अमोल ने इसके बाद सतीश आचार्य के द्वारा बनाए गए किसी कार्टून को सही किया। सतीश आचार्य ने कार्टून में दिखाया कि भीड़ ‘गोली मारो सालो को’ चिल्ला रही है और पुलिस देख रही है।

अमोल ने इसे सही करते हुए दिखाया कि कैसे सतीश आचार्य उस समय चुप रहते हैं जब CAA के विरोध प्रदर्शन के दौरान हिंसक भीड़ गुजरात पुलिस को मार रही होती है। वो उस समय अपनी आर्ट का परिचय नहीं देते हैं।

आचार्य ने एक अन्य ट्वीट में बॉलीवुड फिल्म तान्हाजी और छपाक के बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन को दिखाया। इसमें दिखाया गया कि तान्हाजी की कमाई हुई तो छपाक ने लोगों का दिल जीता। अमोल ने इसे सही करते हुए दिखाया कि तान्हाजी ने बॉक्स ऑफिस पर कमाल दिखाने के साथ ही लोगों का दिल भी जीता।

अगला कार्टून आचार्य ने जम्मू कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह की फोटो सामने आने के बाद बनाया, जिसमें उन्होंने दिखाने की कोशिश की थी कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आने के बाद लोकतंत्र खतरे में है।

महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अगले दिन सतीश आचार्य ने महात्मा गाँधी और नाथूराम गोडसे की तस्वीर बनाई। इसमें गाँधी जी को यह कहते हुए दिखाया गया है कि वो (हत्यारे) मुझे नहीं मार सकते और गोडसे कहता है, वो मुझे फाँसी नहीं दे सकते। अमोल ने कार्टून को सही करते हुए सरदार पटेल और जवाहर लाल नेहरू को दिखाया है। इसमें उन्होंने शाहीन बाग में जिन्ना वाली आजादी के नारे की तरफ इशारा किया, जिसका मास्टरमाइंड असम को भारत से काटने की धमकी देने वाला शरजील इमाम है।

अगले कार्टून में आचार्य ने ये दिखाने की कोशिश की कि दिल्ली का चुनाव बीजेपी केजरीवाल Vs पाकिस्तान के दम पर लड़ना चाहती है। हालाँकि अमोल ने अपने कार्टून में इस बात की तरफ इशारा किया कि पाकिस्तान में हुए सर्जिकल स्ट्राइक के बाद केजरीवाल समेत अन्य राजनीतिक पार्टियों ने उस पर सवाल उठाए और सबूत भी माँगे थे।

सतीश आचार्य ने अपने एक अन्य कार्टून का आधार बनाया – दिल्ली के जवाहर लाल नेहरु विश्वविद्यालय (JNU) में हुई हिंसा। इसमें उन्होंने दिखाया कि हमलावर पीएम मोदी के समर्थक थे, जबकि सच्चाई यह है कि हमलावर वामपंथी थे।

एक अन्य कार्टून में आचार्य ने दिखाया कि पीएम मोदी पाकिस्तान पर हमला करने की बात कह रहे हैं, जबकि अर्थव्यवस्था, मंदी, बेरोजगारी सब पीछे से उन पर हमला कर रही है। अमोल ने अपने कार्टून में दिखाया कि पीएम मोदी इन सबसे निपटारे के लिए नए स्कीम लेकर आए हैं, लेकिन आचार्य ये नहीं दिखाएँगे।

सतीश आचार्य ने अगले एक कार्टून में दिखाया कि पीएम मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह पुलिस की ड्रेस में हैं और गुलशन (बदला हुआ नाम) ने नोटबंदी और जीएसटी के नाम पर गोली चलाई। बता दें कि गुलशन ने जामिया के पास फायरिंग की थी। वहीं अमोल ने कार्टून में दिखाया कि पीएम मोदी और अमित शाह देश तोड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई कर रहे हैं।

कार्टूनिस्ट आचार्य ने ‘कॉमेडियन’ कुणाल कामरा के इंडिगो फ्लाइट द्वारा बैन लगाए जाने के बाद एक कार्टून बनाया। जिसमें दिखाया कि सरकार एयर इंडिया का मजाक बना रही है, जबकि अमोल ने अपने कार्टून में इसे सही करते हुए दिखाया कि एयर इंडिया ने वामपंथी कामरा का मजाक बनाया है।

पादरी ने कहा ‘पवित्र तेल’ जमीन पर है, लोग झुककर उसे छूने लगे… भगदड़ में 20 की मौत

तंजानिया की एक चर्च में आयोजित धार्मिक कार्यक्रम के दौरान अचानक से भगदड़ मच गई। इस भगदड़ में 20 लोगों की मौत हो गई और कई लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय रिपोर्ट के अनुसार मरने वालों की संख्या और भी बढ़ सकती है। सभी घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जिनमें से कुछ की हालत नाजुक है।

एएफपी की रिपोर्ट ने मोशी शहर के ज़िला आयुक्त किप्पी वारओबिया के हवाले से बताया कि तंजानिया के उत्तरी इलाके की एक चर्च के खुले मैदान में शनिवार को एक धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा था, जहाँ बड़ी संख्या में लोग उपदेशक बोनीफस मवामपोसा के नेतृत्व में प्रार्थना कर रहे थे, जोकि जो अरिज और शाइन मंत्रालय तंजानिया के प्रमुख रहे हैं। प्रार्थना समाप्त होने के बाद खुद को ईश्वर कहने वाले मवामपोसा ने कहा कि जमीन पर ‘पवित्र तेल’ पड़ा हुआ है। इसकी जानकारी मिलने के बाद चर्च में मौजूद लोग अपने रोग ठीक होने की आस में तेल को छूने लगे।

तेल को छूने की होड़ में देखते ही देखते भगदड़ मच गई और लोग एक दूसरे को कुचलते हुए भागने लगे। मोशी के जिला कमिश्नर किपी वारीओबा के मुताबिक इस भगदड़ में 20 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि अन्य 16 लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। मरने वालों में 5 बच्चे भी शामिल हैं। सभी घायलों को इलाज के लिए तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया। कुछ लोगों की गंभीर स्थिति को देखते हुए आशंका जताई जा रही है कि मरने वालों की संख्या में अभी इजाफा हो सकता है।

वहीं अलजजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक घटना के चश्मदीद पीटर किलेवो ने कहा कि वह दृश्य बहुत भयानक था। पीटर ने बताया कि देर रात की घटना होने के कारण लोग एक दूसरे को कोहनी से, हाथ-पैर से मारते हुए रौंदते हुए चले जा रहे थे। खबर के मुताबिक पिछले कुछ वर्षों में तंजानिया की चर्चों में पादरियों की संख्या तेजी से बढ़ रही है, जोकि लोगों की गरीबी मिटाने और उनका चमत्कारी इलाज करने का दावा करते हैं।

‘प्लेसमेंट’ के बाद रैली में बुलाया और पैसे भी नहीं दिए: बेरोजगार युवक ने CM केजरीवाल की खोली पोल

अरविंद केजरीवाल दिल्ली के चुनाव प्रचार में कोई कसर नहीं छोड़ रहे हैं। ऐसे आरोप लगते रहे हैं कि उनका प्रचार फिक्स होता है और उसमें लाए गए लोग भाड़े पर होते हैं। पिछले दिनों कई वीडियो भी इस तरह के सामने आए थे। मसलन, एनडीटीवी के टाउनहॉल और अन्य कार्यक्रमों में एक ही व्यक्ति उनकी बार-बार तारीफ कर रहा था और सवाल पूछ रहा था। इसके बाद लोगों ने सवाल उठाया था कि क्या दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कुछ ऐसे लोगों को रखा हुआ है, जो टीवी कार्यक्रमों के दौरान उनकी तारीफ करने का काम करते हैं। आम आदमी पार्टी के कुछ नेताओं को भी इस दौरान कार्यक्रम में बिठाया जाता है और वो केजरीवाल की तारीफ करते दिखते हैं। उन्हें ‘ दिल्ली का आम आदमी’ बता कर पेश किया जाता है।

अब सवाल उठा है कि क्या केजरीवाल ने अपनी रैलियों के दौरान सीटें भरने के लिए किसी स्टाफिंग कम्पनी का यूज करते हैं। स्टफिंग कम्पनी वो होती है, जो किसी काम के लिए मानव संसाधन मुहैया कराती है और इस काम के लिए उसे रुपए दिए जाते हैं। एक वीडियो वायरल हुआ है, जिसमें एक शख्स कहता दिख रहा है कि उसने ‘टीम लीज’ कम्पनी की प्लेसमेंट सर्विस में नाम लिखाया था, जहाँ से उसे आम आदमी पार्टी के चुनाव प्रचार में 6 दिनों के लिए भेज दिया गया।

उक्त व्यक्ति बेरोजगार है और उसने सैलरी की उम्मीद से ऐसा किया। उसने बताया कि ‘टीम लीज’ ने कनॉट प्लेस में उसकी ड्यूटी लगाई और उसे वहाँ दोपहर के 12 बजे पहुँचने का कहा। उसने बताया कि वहाँ आने के बाद उसका वीडियो बनाया गया। उसने बताया कि उसकी अनुपस्थिति लगा दी गई, क्योंकि वो 2 घंटे लेट आया था। नीचे संलग्न किए गए वीडियो में उक्त व्यक्ति को आप अपना दुख व्यक्त करते हुए देख सकते हैं:

‘पॉलिटिकल कीड़ा’ द्वारा ट्वीट किए गए वीडियो में पीड़ित ने बताया कि उसे अब तक काम के रुपए भी नहीं दिए गए हैं। उसने बताया कि उसे अनमोल और रजत नामक लोगों ने बुलाया था। सोशल मीडिया पर लोगों ने अरविंद केजरीवाल से अपील की है कि वे जहाँ कहीं भी हों, पीड़ित के रुपए दे दें क्योंकि वो बेरोजगार है और उसने जॉब की उम्मीद में ये काम करना स्वीकार किया था।

जहाँ तक ‘टीम लीज’ की बात है, उसकी वेबसाइट पर स्पष्ट लिखा हुआ है कि वो एक ‘फॉर्च्यून 500’ कंपनी है, जिसके पास मानव संसाधन प्रचुर मात्रा में है। वहाँ 17 लाख लोग काम कर रहे हैं और रोजाना 2 लाख लोगों के लिए वैकेंसी रखी जाती है। इस कम्पनी के देश भर में 6600 जगहों पर 2 लाख एसोसिएट ट्रेनी हैं। कंपनी अभी लाखों लोगों को हायर करने वाली है, ऐसा दावा किया गया है। तो क्या अरविंद केजरीवाल ने अपनी पार्टी के चुनाव प्रचार अभियान के लिए ‘टीम लीज’ की सर्विस ली है?

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जहाँ जाना है जाओ, लेकिन सड़क खाली करो: शाहीन बाग में CAA-विरोधियों के खिलाफ प्रदर्शन

दिल्ली के शाहीन बाग में CAA के विरोध में कई हफ्तों से धरना-प्रदर्शन चल रहा है। प्रदर्शनकारियों के बीच सड़क पर बैठने से यह रास्‍ता कई दिनों से बंद है। अब इस धरने के खिलाफ स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए हैं। प्रदर्शनकारियों की माँग है कि शाहीन बाग का रास्ता खोला जाए। शाहीन बाग के विरोध में प्रदर्शन को देखते हुए पुलिस ने बैरिकेडिंग कर दी है। मौके पर डीसीपी चिन्मय बिस्वास खुद मौजूद हैं।

बैरिकेड्स के एक तरफ CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करने वाले जमा हैं तो दूसरी तरफ शाहीन बाग धरना का विरोध करने वाले आकर डट गए हैं। इन लोगों का कहना है कि हमें प्रदर्शन से कोई दिक्कत नहीं है, लेकिन सड़क खाली होनी चाहिए। चाहे तो ये लोग रामलीला मैदान, जंतर-मंतर या कहीं और प्रदर्शन करें। इन लोगों की माँग है कि धरना जल्दी से जल्दी खत्म कर सड़क खुलवाई जाए। हालाँकि लोगों की भारी भीड़ से आम लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

डीसीपी चिन्मय बिस्वाल ने कहा कि इन्हें प्रदर्शन स्थल पर जाने से मना कर दिया था। इसके बावजूद भी कुछ लोग घटना स्थल पर पहुँच गए। फिलहाल हालात न बिगड़े, इसके लिए मौके पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया है। 

उल्लेखनीय है कि शाहीन बाग में महिलाएँ और बच्चे पिछले 50 दिन से ज्यादा समय से धरने पर बैठे हैं। वो शिफ्ट बदल-बदल कर 24*7 यहाँ धरने पर बैठे रहते हैं। उनकी माँग है कि केंद्र सरकार CAA को वापस ले। वहीं दूसरी तरफ दिल्ली पुलिस लगातार प्रदर्शनकारियों से आम जनता की परेशानियों को समझते हुए धरना खत्म कर लेने की माँग कर रही है।

हाल ही में शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने कई इश्तेहार जारी किया है, जिसमें 2 फरवरी को प्रदर्शन के 50 दिन पूरे होने के मौके पर बड़ी संख्या में लोगों से जमा होने को कहा गया है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि पिछले 50 दिनों में उनके ‘लोकतान्त्रिक और शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन के दौरान उन्हें डराने-धमकाने और ख़तरे में डालने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उन लोगों के ख़िलाफ़ गलतबयानी करते हुए घृणा फैलाई जा रही है। इन सबके लिए शाहीन बाग के उपद्रवियों ने भाजपा और हिन्दू सेना को जिम्मेदार ठहराया है।

वहीं एक सभा के दौरान कॉन्ग्रेस नेता मुकेश शर्मा ने खुद कबूला था कि शाहीन बाग के ‘प्रदर्शनकारियों’ को उनका समर्थन हासिल है। शर्मा ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा था, “मैं गाँव का रहने वाला हूँ। मैं जब मदद करता हूँ तो मर्दानगी से करता हूँ। मैंने तो शाहीन बाग वालों की भी मदद कर रखी है। शाहीन बाग बाले मुझे रोज फोन करते हैं।” इससे पहले AAP प्रमुख अरविंद केजरीवाल और आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया पर प्रदर्शनकारियों के समर्थन की बात सामने आई थी।

पथराव में 2 दलितों का सिर फूटा: झारखंड में विसर्जन जुलूस के दौरान हिंसा की 4 घटनाएँ

झारखंड में सरस्वती प्रतिमा विसर्जन के दौरान अलग-अलग जगहों पर कई हिंसक घटनाएँ हुईं। इनमें से 4 घटनाएँ गौर करने लायक हैं, जिसे मीडिया ने तवज्जो नहीं दी। ख़बर आ रही है कि राज्य के विभिन्न इलाक़ों में मजहबी भीड़ ने सरस्वती पूजा के समारोहों में व्यवधान पैदा किया। जामताड़ा के विद्यासागर प्रखंड क्षेत्र में दो अलग-अलग स्थानों पर समुदाय विशेष ने श्रद्धालुओं के साथ झड़प की। पारटोल व कठबरारी क्षेत्रों में विसर्जन के दौरान स्थिति इतनी तनावपूर्ण हो गई कि पुलिस को ख़ुद विसर्जन करना पड़ा।

पारटोल गाँव में मूर्ति विसर्जन के दौरान जब जुलूस आगे बढ़ा तो समुदाय विशेष के लोगों ने गाना बजाने पर आपत्ति जताई। पुलिस ने श्रद्धालुओं को ही उलटा ‘शांतिपूर्ण’ तरीके से विसर्जन करने की सलाह दी। पुलिस ने सहयोग नहीं किया तो श्रद्धालु वहीं पर मूर्ति छोड़ कर निकल गए। मजहबी भीड़ के रोक-टोक और जबरदस्ती के बाद उपजे तनाव के बीच पुलिस ने पक्षपाती रवैया अपनाया। बाद में पुलिस ने ही मूर्ति का विसर्जन कर दिया। इधर कठबरारी गाँव में समुदाय विशेष ने अबीर-गुलाल खेलने पर आपत्ति जताई, जिसके बाद तनाव बढ़ गया।

वहाँ स्थित विद्यालय से प्रतिमा को विसर्जन हेतु शांतिपूर्वक ढंग से नीचे लाया जा रहा था लेकिन दूसरे समुदाय ने तनाव पैदा कर दिया। उन्होंने कहा कि वो मस्जिद के पास अबीर-गुलाल नहीं उड़ने देंगे। श्रद्धालुओं का आरोप है कि पुलिस ने जुलूस के आगे अपनी गाड़ी खड़ी कर के हॉर्न बजाना शुरू कर दिया। वहाँ भी लोग प्रतिमा को छोड़ कर चले गए। इसके बाद पुलिस ने विसर्जन किया।

इसी तरह हजारीबाग के लाखे से चानो नदी हेतु निकली माँ सरस्वती के विर्सजन जुलूस में शुक्रवार रात लाखे सूंडी बस्ती में विवाद के बाद पथराव हुआ। पथराव के बाद तनाव पसर गया। इसके दूसरे दिन पुलिस ने दोनों समुदायों के प्रबुद्ध जनों की बैठक बुलाई और शांति बनाए रखने की अपील की। दोनों समुदायों के लोगों ने घटना की ‘निंदा’ की और इसके बाद इतिश्री कर ली गई। पथराव मामले में देर रात तक प्राथमिकी भी दर्ज नहीं की गई थी। इससे पता चलता है कि प्रशासन ने सुरक्षा-व्यवस्था के मामले में कितना लचर रवैया अपनाया।

इसी तरह गोड्डा के बेलडीहा गाँव में दूसरे समुदाय के लोगों ने सरस्वती पूजा विसर्जन जुलूस पर पथराव किया, जिसके बाद दो युवकों का सिर फट गया और वो गंभीर रूप से घायल हो गए। इस घटना में क़रीब आधे दर्जन अन्य लोग भी घायल हुए। गंभीर रूप से घायल दोनों युवक उत्तम पासवान और सुप्रभात पासवान दलित हैं। समुदाय विशेष ने उनके ऊपर ईंट और पत्थर चलाए। दर्जनों आक्रोशित ग्रामीणों ने इस मामले में दोषियों को गिरफ़्तार करने की माँग की।

‘नारा-ए-तकबीर’ और ‘अल्लाहु अकबर’ के साथ विसर्जन जुलूस पर पत्थरबाजी, मंदिर को भी नहीं छोड़ा

पटना में सरस्वती प्रतिमा विसर्जन के दौरान पथराव, फायरिंग और बमबाजी, गुमला में भी तनाव