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कटनी में खुदाई के दौरान निकलीं 11वीं सदी की बेसकीमती मूर्तियाँ, देखने के लिए जुटी भारी भीड़

मध्य प्रदेश के कटनी जिले में खुदाई के दौरान पुरातनकाल की कई मूर्तियाँ पाई गई हैं, जिनकी कीमत करोड़ों रुपयों में आँकी जा रही है। वहीं माना जा रहा है कि यह मूर्तियाँ 11वीं सदी की हैं। इस बात की जानकारी जैसे ही क्षेत्र के लोगों को हुई। इसके बाद मूतियाँ देखने वाले लोगों की मौके पर भीड़ जमा हो गई। लोगों ने इसे अपने जिले की विरासत बताकर मूर्तियों को सजोने की माँग की है।

कटनी ज़िले के पुष्पावती नगरी बिलहरी में सोमवार की शाम को एक पुलिया निर्माण के लिए खुदाई का कार्य कराया जा रहा था। इसी बीच खुदाई के दौरान वहाँ काम करने वाले कर्मचारियों को मिट्टी में दबी हुई अनूठी मूर्तियाँ नज़र आईं। नदी में खुदाई के दौरान एक पंचमुखी शिव, विष्णू भगवान सहित कुल 10 छोटी बड़ी मूर्तियाँ पाई गई हैं। सभी मूर्तियों को मिट्टी से बाहर निकालने के बाद इसकी सूचना तत्काल पुलिस प्रशासन को दी गई। सूचना पर पहुँचे अधिकारियों ने मूर्तियों की सफाई कराई और फ़िर इन सभी मूर्तियों को बिलहरी पुलिस चौकी में सुरक्षित रखवा दिया गया। वहीं मूर्तियाँ निकलने की सूचना जैसे ही आस-पास के लोगों को हुई, तो देखने वालों की मौके पर भीड़ जमा हो गई।

सूचना मिलने पर पहुँचे पुरातत्व विभाग के मल्टी टॉस्क सर्विस बिलहरी प्रदीप जैन के मुताबिक यह सभी मूर्तियाँ 11वीं सदी की दिखाई देती हैं, जिनमें अद्वुत नक्कासी की गई। नीले रंग के पत्थर से बनी इन मूर्तियों की नक्कासी देखकर अंदाजा लगाया जा सकता है कि इनकी बाजार कीमत करोड़ों में है। वहीं ज़िले में लगातार निकल रहीं प्रतिमाओं को देखते हुए लोगों ने ज़िले में पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना कराए जाने की माँग की है, जिससे कि ऐसी कीमती मूर्तियों को संरक्षित किया जा सके।

कटनी जिले में खुदाई के दौरान निकली मूर्तियाँ (साभार- सोशल मीडिया)

पत्रिका में प्रकाशित खबर के मुताबिक जिलाधिकारी शशिभूषण सिंह ने बताया कि बिलहरी में 11वीं सदी की मूर्तियाँ मिली हैं, जिनको संरक्षित करने के लिए पुरातत्व विभाग के अधिकारियों से संपर्क किया जाएगा। वहीं पुरातत्व विभाग जबलपुर के डिप्टी डायरेक्टर पीसी श्रीवास्तव का कहना है कि सदाशिव, भगवान विष्णू के 10 अवतारों, भगवान सूर्य सहित अन्य देवी-वेवताओं की ये कलचुरी काल की प्रतिमाएँ हैं। ये सभी मूर्तियाँ 10वीं और 11वीं सदी के आस-पास की हैं। इनकी कीमत की गणना कराई जाएगी। अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में ऐसी प्रतिमाओं की कीमत करोड़ों रुपए होती है।

कटनी ज़िले में खुदाई के दौरान निकलीं मूर्तियाँ (साभार- सोशल मीडिया)

आपको बता दें कि कटनी जिले में पुरातत्व संग्रहालय की स्थापना की आवश्यकता जिला प्रशासन खुद स्वीकार कर चुका है और इसके लिए पिछले वर्ष 27 अगस्त को कलेक्ट्रेट में एक बैठक भी हो चुकी है। दुर्भाग्य की इस दिशा में जनप्रतिनिधियों एवम प्रबुद्ध वर्ग द्वारा कोई पहल नहीं की जाती है। फलस्वरूप अति महत्वपूर्ण सामग्री बड़े-बड़े संग्रहालय में चली जाती हैं और जो सामग्री पुरातत्व विभाग की देखरेख में बिलहरी, तिगवां, बड़ागाँव या कारीतलाई जैसे ग्राम्य अंचलों में रखी है, वह किसी गोदाम में रखे माल जैसे अनुपयोगी पड़ी हुई हैं। इसलिए प्राप्त प्रतिमाओं को कटनी में ही रखे जाने के लिए यहाँ शीघ्र ही जिला पुरातत्व संग्रहालय स्थापित करने के लिए प्रयास किया जाना चाहिए ।

जामिया फायरिंग: वामपंथी पत्रकारों की गुप्त बातचीत | Leftist journos talk on Shaheen bag and Jamia

जामिया फायरिंग पर वामपंथी पत्रकारों की गुप्त बातचीत। अनुभवी वामपंथी और उभरते हुए वामपंथी पत्रकारों की शाहीन बाग, जामिया की फायरिंग एवं नए कामरेडों पर बातचीत।

पूरा वीडियो यहाँ क्लिक करके देखें

‘भिखारी नहीं हैं कश्मीरी पंडित, हमने किसी के सामने हाथ नहीं फैलाए, अपने पैरों पर खड़े रहे’

जनवरी 1990 में कश्मीरी पंडितों के साथ हुई रूह कॅंपा देने वाली बर्बरता से हम सब वाकिफ हैं। इस पर ‘शिकारा’ नाम से एक फिल्म लेकर आ रहे हैं विधु विनोद चोपड़ा। यह फिल्म 7 फरवरी को रिलीज होनी है। उससे पहले चोपड़ा ने कहा है कि कश्मीरी पंडितों के पलायन पर आधारित उनकी इस फिल्म का मकसद समुदाय के लिए दुख का अहसास कराना नहीं है। यह दिखाना है कि किस तरह उन्होंने त्रासदी का डट कर सामना किया।

यह बात उन्होंने फिल्म की 30 मिनट की विशेष स्क्रीनिंग के दौरान कही। चोपड़ा ने बताया कि फिल्म में दिखाया गया है कि उस मुश्किल वक्त के बाद किस तरह कश्मीरी पंडित अपनी जिंदगी को वापस पटरी पर लेकर आए।

चोपड़ा ने पत्रकारों से कहा, “हमारे घर छीन लिए गए थे। यह ऐसी चीज हैं जिसको लेकर हमारा रुख अडिग है। इस कहानी को बयॉं करने के लिए हिम्मत चाहिए और वह भी ऐसे अंदाज में बयॉं करने के लिए कि लोग इसे देखने आएँ। हम ऐसी फिल्म नहीं बनाना चाहते थे जिसे दो लोग देखें और कहें ‘ओह, देखो इनके साथ कितना बुरा हुआ’।”

उन्होंने कहा, “हम ऐसी फिल्म बनाना चाहते थे जहॉं आप देखें कि हमारे साथ क्या हुआ और उसके बावजूद हम अपने जीवन में उम्मीद के सहारे खड़े रहे। हम भिखारी नहीं हैं। हमने सरकार के सामने अपने हाथ नहीं फैलाए बल्कि हम अपने पैरों पर खड़े रहे। यह छोटी नहीं, बल्कि बड़ी बात है।”

चोपड़ा ने कहा कि ‘शिकारा’ एक मनोरंजक फिल्म है लेकिन लोगों को सिनेमा घर तक लाने के लिए कहानी की रूह के साथ खिलवाड़ नहीं किया गया। फिल्मकार ने कहा कि फिल्म उनकी मॉं को समर्पित हैं, जिनका 2007 में निधन हो गया था।

हमें हिंदू औरतें चाहिए… कश्मीर की हर मस्जिद से 19/1/1990 की रात आ रही थी यही आवाज

सूरज ढलते ही गाँव में घुसे 50 आतंकी, लोगों को घरों से निकाला और लगा दी लाशों की ढेर

Video: जामिया-राजघाट मार्च के दौरान एक युवक ने लहराई पिस्तौल, फायरिंग में एक घायल

नागरिकता संशोधन कानून और राष्ट्रीय नागरिकता रजिस्टर के विरोध में गुरुवार (जनवरी 30,2020) को जामिया से लेकर राजघाट तक हुए मार्च के दौरान एक युवक ने बीच सड़क पर गोली चला दी। इस घटना में पत्रकारिता का एक छात्र घायल हो गया। घायल छात्र का नाम शादाब है। मौक़े पर मौजूद पुलिस ने गोली चलाने वाले युवक को तुरंत गिरफ्तार कर लिया। आरोपित की पहचान गुलशन (बदला हुआ नाम) के रूप में हुई।

गौरतलब है कि सीएए एनआरसी के विरोध में जामिया मिलिया इस्लामिया के सामने से राजघाट तक मार्च शुरू होने के बाद ये घटना घटी। जिसमें बड़ी संख्या में जामिया नगर, शाहीन बाग, ओखला, नूर नगर आदि इलाकों के लोग शामिल थे।

पहले की घटनाओं को देखते हुए पुलिस को आशंका थी कि इस मार्च के दौरान भी कुछ हो सकता है। इसलिए पहले से ही उन्होंने जगह-जगह भारी संख्या में पुलिस बल को तैनात किया हुआ था।

बीच सड़क पर बंदूक चलाने वाले इस युवक को लेकर सोशल मीडिया पर दो तरह के मत आ रहे हैं। कुछ लोग युवक द्वारा लगाए गए नारों से उसकी पहचान कर रहे हैं। उसे संघी आतंकी बता रहे हैं और लगातार इस घटना को लेकर भाजपा को घेरा जा रहा है।

लेकिन, वहीं कुछ लोगों का कहना है कि ये सब पहले से सुनियोजित था क्योंकि जहाँ ये सब हुआ वहाँ पहले से सब कैमरे तैयार थे, जैसे उनका फोकस उसपर ही हो। किसी में कोई हड़बड़ाहट नहीं है, जैसे उन्हें मालूम हो, सामने बंदूक लेकर खड़ा युवक उन्हें गोली नहीं मारेगा।

अपडेट: नई सूचनाओं के आने से हमें पता चला है कि जामिया में गोली चलाने का आरोपित नाबालिग है, अतः सम्बद्ध कानूनों के अनुसार उसका नाम बदल दिया गया है।

उइगरों पर किया अत्याचार, इसलिए चीन का कोरोना वायरस से हुआ ये हाल: इलियास शराफुद्दीन

चीन में फैला कोरोना वायरस इस समय वैश्विक स्तर पर चिंता का विषय है। करीब 132 लोग इसके कारण अपनी जान गवा चुके हैं, जबकि करीब 6000 लोग इसकी चपेट में हैं। ऐसे में इस संवेदनशील मुद्दे पर विवादास्पद मुस्लिम धर्मगुरु इलियास शराफुद्दीन ने कोरोना वायरस को लेकर बेतुका बयान दिया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इस्लामी धर्मगुरु ने कहा है कि उइगरों से क्रूरता करने के कारण अल्लाह ने चीन पर इस वायरस का कहर भरपाया है और उन्हें दंडित किया है। एक ऑडियो में धर्मगुरु को चीन से कहते सुना जा सकता है कि याद करो कैसे उन्होंने मुस्लिमों को धमकी दी थी और दो करोड़ मुस्लिमों की जिंदगी बर्बाद करने की कोशिश की। उइगरों को शराब पीने के लिए मजबूर किया गया, उनकी मस्जिदों को तोड़ दिया गया और उनकी पवित्र पुस्तकों को जला दिया गया। इलियास ने कहा कि चीन ने सोचा कि कोई भी उन्हें चुनौती नहीं दे सकता, लेकिन अल्लाह सबसे शक्तिशाली है, अल्लाह ने चीन को सजा दी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार धर्मगुरु इलियास ने कहा कि रोम, फारस और रूस को याद करें, जो अहंकारी थे और इस्लाम के खिलाफ खड़े थे। मगर, अल्लाह ने सभी को नष्ट कर दिया।

शराफुद्दीन ने भारत के दक्षिणपंथी संगठनों को “गोडसे के बच्चे” और हिंदुत्व आतंकी करार देते हुए चेतावनी दी कि इससे पहले देर हो जाए, वे अल्लाह से डरें। केवल उनकी इबादत करें। लोगों को मस्जिद जाने से न रोकें। मुस्लिमों को इस्लाम का अनुसरण करने से न रोकें। वरना वे भी चीन की तरह बर्बाद हो जाएँगे।

गौरतलब है कि ये बात बिलकुल सच है कि चीन ने शिनजियांग क्षेत्र के उइगरों पर क्रूरता की हर हदें पार हो रही हैं। वहाँ एक लाख से अधिक उइगरों को नजरबंदी शिविरों में बंद कर दिया गया है। उनको प्रताड़ित किया जा रहा है। उनका यौन शोषण हो रहा है। जिसे किसी भी कीमत पर जस्टिफाई करना सही नहीं है। लेकिन ये भी ध्यान रखने वाली बात की ये सब वहाँ का प्रशासन और सरकार की देख रेख में हो रहा है और कोरोना वायरस एक गंभीर बीमारी है। जिसकी चपेट में वहाँ की जनता आ रही है। मानवता के स्तर पर जिस तरह उइगरों के साथ चीन का बर्ताव गलत है। वैसे ही इलियास का बयान भी निंदनीय है।

शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों ने लेखक और वकील से की बदसलूकी, राहुल कँवल ने कैमरा घुमा लिया

इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कँवल ने 29 जनवरी को अपना प्राइम टाइम शाहीन बाग से किया। राहुल ने पहले घूम-घूम कर प्रदर्शनकारियों से बात की और फिर शो के लिए बुलाए गए अतिथियों की साउंडबाइट ली। प्राइम टाइम में बतौर गेस्ट कथित पत्रकार सबा नकवी, वरिष्ठ पत्रकार जावेद मंसारी, पॉलिटिकल एनॉलिस्ट मनीषा परियम, वकील राघव अवस्थी और लेखक शांतनु गुप्ता शामिल थे।

चूँकि, राहुल कँवल लगातार प्रदर्शनकारियों का समर्थन कर रहे थे, तो वहाँ हर कोई उनसे बड़ी तहजीब से बात कर रहा था। लेकिन जब वकील राघव अवस्थी और लेखक शांतनु गुप्ता ने बोलना शुरू किया तो कुछ प्रदर्शनकारी उन पर चढ़ गए और उन्हें बोलने से रोकने लगे।

प्रदर्शनकारियों के बर्ताव से भी ज्यादा शर्मनाक बात यह थी कि राहुल कँवल ने इस दौरान अपने गेस्ट के बात सुनने से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की ओर माइक कर दिया। शांतनु गुप्ता और राघव अवस्थी को बोलने का मौका भी नहीं दिया।

29 जनवरी को हुए इस प्राइम टाइम में 15.45 सेकेंड के लेकर 18 मिनट तक के स्लॉट के बीच राहुल कँवल की इस हरकत को स्पष्ट देखा जा सकता है। हम देख सकते हैं कि किस तरह जब मनीषा परियम, सबा नकवी का पक्ष जानने के बाद राघव के बोलने का चांस आया, तो उन्होंने वहाँ प्रदर्शन पर बैठी सभी महिलाओं की सराहना की और कहा कि प्रदर्शनकारियों को शरजील जैसे लोगों को इस प्लोटफॉर्म का गलत इस्तेमाल नहीं करने देना चाहिए। यहाँ उन्होंने ये भी बताने की कोशिश की सीएए का भारतीय नागरिकों से लेना-देना नहीं है।

हालाँकि, राघव ने कैमरे पर कोई आपत्तिजनक बात नहीं कही थी। लेकिन, वीडियो को गौर से देखें तो पता चलेगा कि जैसे ही उन्होंने शरजील का नाम लिया भीड़ बदसलूकी पर उतर आई। उन्हें पीछे धकेल दिया गया और कई लोग जोर-जोर से नारे लगाने लगे। इसके बाद शांतनु गुप्ता ने वहाँ आकर उनकी बात को समझाने की कोशिश की। लेकिन राहुल कँवल तो प्रदर्शनकारियों की ओर माइक घुमा चुके थे।

राघव के अनुसार इस घटना के बाद वहाँ मौजूद लोग एक-दूसरे को उनकी पहचान करवाने लगे कि ये लंबे बाल वाला वही शख्स है जिसने शरजील का नाम लिया। उनके मुताबिक शांतनु के बीच में आने के कारण उन्हें भी वहाँ मौजूद लोग कहने लगे कि ये आदमी भी उस लंबे बाल वालों के साथ था।

राघव के मुताबिक, वहाँ कई प्रदर्शनकारियों ने उनकी ओर इशारा करते हुए कहा कि उन्होंने शरजील का नाम लिया, इसलिए उन्हें पकड़ लेना चाहिए। इसके बाद राघव और शांतनु दोनों को धक्का देकर वहाँ से चले जाने को कहा गया। लेकिन राघव ने जाने से मना कर दिया। उन्हें और शांतनु दोनों को डर था कि अगर वो अकेले गए, तो पता नहीं उनके साथ क्या होगा। उन्हें आशंका थी कि प्रदर्शनकारी नुकसान पहुँचा सकते हैं।

राघव बताते हैं कि इस घटना के दौरान, वरिष्ठ पत्रकार जावेद मंसारी ने भी प्रदर्शनकारियों को समझाने की कोशिश की थी कि आखिर वो क्या कहना चाह रहे हैं। लेकिन उनकी बात भी शायद किसी ने नहीं सुनी। बाद में दोनों पैनलिस्टों को स्टेज के पीछे से उतारा गया। इस दौरान पुलिस ने उनकी सुरक्षा के लिए बैरिकेड्स लगाए हुए थे।

अब, सोचिए एक लेखक और वकील के लिए वह स्थिति कितनी भयावह हो गई। वो भी तब जब वो एक मीडिया समूह के साथ थे। लेकिन, राहुल कँवल को देखकर लगता है कि उनका इन सबसे क्या लेना-देना। वो तो अपना एजेंडा साधने गए थे। अब प्रदर्शनकारी उनके पैनलिस्टों के साथ कुछ भी करें।

शर्म की बात है कि इतना सब होने के बावजूद उन्होंने अपने ट्विटर पर इस घटना का जिक्र तक नहीं किया। उन्होंने सिर्फ़ शाहीन बाग की महिलाओं से बातचीत के बारे में अपने फॉलोवर्स को बताया। इसे देख राघव अवस्थी आहत हो गए और उन्हें जवाब दिया कि अगर वे उक्त घटना के बारे में भी ट्वीट करते तो कितना अच्छा होता।

राहुल कँवल के ट्वीट पर रिप्लाई करते हुए राघव ने राहुल से कहा कि को अपने शो में आए अतिथियों की सुरक्षा का इंतजाम करना चाहिए था और कैमरा घुमाकर उन्हें नजरअंदाज नहीं करना चाहिए था।

राघव के अलावा शांतनु ने भी इस घटना का जिक्र करते हुए ट्वीट किया और सबा नकवी समेत जावेद मंसारी को डिबेट के बीच में आकर उनकी मदद करने के लिए धन्यवाद दिया।

लेकिन, इतने के बावजूद भी इंडिया टुडे के पत्रकार राहुल कँवल ने दोनों पैनलिस्टों की शिकायत पर सफाई देने की बजाए या उनकी स्थिति के लिए माफी माँगने की जगह, उनकी प्रतिक्रिया को terrible कह दिया। बाद में कई लोगों ने इंडिया टुडे की वीडियो से क्लिप काटकर उसे शेयर किया।

बाद में शांतनु ने उनके ट्वीट का जवाब देते हुए कहा कि ये उनके और राघव का सिर्फ़ पक्ष सुनने की बात नहीं थी। बल्कि वहाँ उनके साथ हुए बर्ताव की बात थी। शांतनु ने शिकायत की कि जब लोग उन्हें पहचानकर पकड़ने की बात कर रहे थे, गुस्से से आगे बढ़ रहे थे, तब आखिर क्यों इंडिया टुडे का कोई शख्स भीड़ को सँभालने नहीं आया।

ऑपइंडिया से बात करते हुए राघव ने इंडिया टुडे को सलाह दी कि उन्हें कुछ पेशेवर रवैया दिखाना चाहिए और अपने पैनलिस्टों की इस तरह शाहीन बाग के प्रदर्शनकारियों द्वारा लिंच होने के लिए नहीं छोड़ना चाहिए।

राघव ने बताया कि वे जब जर्मनी में थे तब उन्हें White Supremacist rally में शामिल होने की बहुत इच्छा थी। लेकिन जब वहाँ की रैली ने चिल्लाना शुरू किया कि ये हमारी जमीन है, तब बतौर brown man उन्हें असहज महसूस हुआ था, बिलकुल वैसे ही जैसे शाहीन बाग में हुआ।

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शरजील ‘एक प्रेम कथा’: आतंकी जाकिर मूसा की तरह शरजील इमाम को भी जानेमन ने ही करवाया गिरफ्तार

गत मई को जब कश्मीर के वांटेड आतंकी जाकिर मूसा भारतीय सेना ने मार गिराया था, तब मूसा की ही एक तत्कालीन प्रेमिका ने उसे पकड़वाने में सेना की मदद की थी। इससे पहले आतंकवादी बुरहानी वानी भी अपनी प्रेमिका की वजह से ही मारा गया था। इस बार मामला राजद्रोह के आरोप में फँसे हुए शाहीन बाग़ के मास्टर माइंड शरजील इमाम का है। शरजील इमाम की गिरफ्तारी के बाद उसके पकड़े जाने की कहानी के पीछे भी उसकी प्रेमिका का हाथ बताया जा रहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, क्राइम ब्रांच दिल्ली पुलिस शरजील को लेकर बुधवार (जनवरी 29, 2019) दोपहर नई दिल्ली पहुँची। राजद्रोह के केस होने के बाद दो दिन से बिहार में छापेमारी करने पहुँचे पाँच सदस्यों के पुलिस दल को यह बात पता चली की शरजील अपनी प्रेमिका के संपर्क में है। जिसके बाद पुलिस ने शरजील की प्रेमिका से संपर्क किया और उसकी मदद से शरजील इमाम गिरफ्तार हो पाया।

दिल्ली क्राइम ब्रांच और बिहार पुलिस ने सोमवार (जनवरी 27, 2019) को शरजील के जहानाबाद स्थित पैतृक घर पर छापा मारकर उसके छोटे भाई को हिरासत में ले लिया था। भाई से पूछताछ के दौरान पुलिस को शरजील के किसी दोस्त इमरान का पता चला था। जब इमरान को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो शरजील की प्रेमिका के बारे में जानकारी मिली।

इसके बाद पुलिस ने शरजील की प्रेमिका पर दबाव डालकर उससे शरजील को मलिक टोला स्थित इमामबाड़े में मिलने के लिये बुलाया। जैसे ही शरजील इमामबाड़े में अपनी प्रेमिका से मिलने पहुँचा, वैसे ही पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

पुलिस द्वारा पूछताछ के बाद शरजील इमाम अपने भाषण को लेकर पछतावा ना होने की बात स्वीकार की है। साथ ही, उसने कहा कि वह अपना विरोध जारी रखेगा। दिल्ली पुलिस ने खुलासा किया है कि शरजील इमाम घोर कट्टरपंथी है और उसका मानना है कि भारत को एक इस्लामी राज्य होना चाहिए। पूछताछ में उसने यह भी माना है कि उसके अलग-अलग भाषणों के वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

ज्ञात हो कि देश के विभिन्न हिस्सों में राजद्रोह का मुकदमा दर्ज होने के तुरंत बाद से ही शरजील इमाम फरार हो गया था। शरजील ने अपने भाषणों में देश को बाँटने, असम को भारत से काट देने जैसी बातें कही थी। उसने दिल्ली, अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय समेत पटना में भी भाषण दिए। ऐसे में पुलिस अब शरजील को जामिया और अलीगढ़ ले जाने की तैयारी कर रही है जिससे वीडियो में दिखाई दे रही जगहों को चिह्नित किया जा सके। 

मोतिहारी से ​हिरासत में लिए गए कन्हैया कुमार

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार को ​हिरासत में ​लिया गया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार उसे बिहार के बेतिया जिले के भितिहरवा आश्रम से हिरासत में लिया गया। वह यहॉं
‘जन-गण-मन यात्रा’ यात्रा की शुरुआत करने वाला था। यह यात्रा पश्चिमी चंपारण के बापूधाम से शुरू होकर 29 फरवरी को पटना के गॉंधी मैदान में खत्म होनी थी।

यात्रा की शुरुआत में सीपीआई नेता कन्हैया कुमार एक सभा को संबोधित करने वाला था। अमर उजाला की रिपोर्ट के अनुसार उसे इसकी इजाजत नहीं दी गई थी। प्रभात खबर के अनुसार एसडीओ ने कन्हैया कुमार को भाषण देने की इजाजत नहीं दी तो उसके समर्थकों ने हंगामा किया। इसके बाद कन्हैया अपने वाहन पर ही खड़े होकर लोगों को संबोधित करने लगा। फिर पुलिस ने उसे हिरासत में ले लिया। कन्हैया ने ट्वीट कर हिरासत में लिए जाने की पुष्टि की है।

इससे पहले कन्हैया ने शरजील इमाम की गिरफ्तारी को लेकर केंद्र की मोदी सरकार की आलोचना की थी। उसने भारत के टुकड़े करने की बात कहने वाले इमाम पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज किए जाने को लेकर सवाल उठाए थे।

जेएनयू में 2016 में हुई देश विरोधी नारेबाजी में कन्हैया के खिलाफ दिल्ली की आम आदमी पार्टी सरकार देशद्रोह का मुकदमा जलाने की इजाजत नहीं दे रही है। दिल्ली पुलिस ने बीते दिसंबर में अदालत को यह जानकारी दी थी। इस मामले की अब 19 फरवरी को सुनवाई होनी है।

गौरतलब है कि 14 जनवरी 2019 को दिल्ली पुलिस ने करीब 1200 पन्ने का आरोपपत्र अदालत में दाखिल किया था। इसमें जेएनयू छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया कुमार और डेमोक्रेटिक स्टूडेंट यूनियन के सदस्य उमर खालिद को मुख्य आरोपित बनाया था। वहीं, सात अन्य आरोपितों में आकिब हुसैन, मुजीब हुसैन, मुनीब हुसैन, उतर गुल, रईस रसूल, बसरत अली व खालिद बशीर भट का नाम शामिल है। इसके अलावा रामा नागा, आशुतोष, शहला राशीद, डी राजा की बेटी अपराजिता राजा, रुबैना सैफी, समर खान समेत 36 छात्रों को भी आरोपित बताया गया है।

लिंगलहरी कन्हैया को फ़ोर्ब्स ने 20 प्रभावशाली व्यक्तियों में किया शामिल, गिराई अपनी साख

कन्हैया पर देशद्रोह वाली फाइल केजरीवाल सरकार के पास, सरकारी वकील ने कोर्ट को सब बताया

AAP सरकार का दावा: ‘भारत तेरे टुकड़े होंगे’ तो एक दूसरे को चिढ़ाने के लिए बोला गया था, कन्हैया का क्या दोष

भारत को इस्लामी मुल्क बनाना चाहता है शरजील इमाम, पूछताछ में माना- वीडियो से नहीं हुई छेड़छाड़

शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील इमाम भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता है। दिल्ली पुलिस के सूत्रों के हवाले से न्यूज एजेंसी एएनआई ने यह खबर दी है। इसके मुताबिक वह कट्टरपंथ से बहुत ज्यादा प्रभावित है। उसने माना है कि उसके ​अलग-अलग भाषणों के वीडियो के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है।

सूत्रों ने बताया कि पुलिस इस्लामिक यूथ फेडरेशन और पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया के साथ उसके संपर्कों की पड़ताल कर रही है। उसने कहा है कि उसे अपनी गिरफ्तारी का कोई पछतावा नहीं है। उसके सारे वीडियो जॉंच के लिए फोरेंसिक लैब में भेजे गए हैं और उसके सोशल मीडिया अकाउंट की पड़ताल हो रही है।

शरजील इमाम को 28 जनवरी को बिहार के जहानाबाद के काको से गिरफ्तार किया गया था। उससे पहले लगातार चार दिनों तक उसकी तलाश में देश के कई हिस्सों में छापेमारी की गई थी। देशद्रोह के आरोपित इमाम को गिरफ्तारी के बाद दिल्ली पुलिस ने बुधवार को कोर्ट में पेश किया। कोर्ट ने उसे 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया। सुरक्षा कारणों के चलते पुलिस ने शरजील इमाम की पेशी पटियाला हाउस कोर्ट में न करके जज के साकेत काम्प्लेक्स स्थित आवास पर की गई थी।

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी में भड़काऊ भाषण देते हुए उसने देश को तोड़ने की बात कही थी। वायरल हुए वीडियो में शरजील ने कहा था, “अब वक्त आ गया है कि हम गैर मुस्लिमों से बोलें कि अगर हमारे हमदर्द हो तो हमारी शर्तों पर आकर खड़े हो। अगर वो हमारी शर्तों पर खड़े नहीं होते तो वो हमारे हमदर्द नहीं हैं। एक चीज तो यह है और दूसरी चीज जो मैंने बिहार में देखा। मैं यहाँ पर बिहार का उदाहरण दूँगा। वहाँ पर बहुत सारी रैलियाँ हो चुकी हैं। हर रोज एक-दो बड़ी रैलियाँ होती हैं। कन्हैया वाली रैली देखी थी। 5 लाख लोग थे उस रैली में। अब मसला यहाँ पर यह है कि अगर 5 लाख लोग हमारे पास ऑर्गेनाइज्ड हों तो हम नार्थ ईस्ट और हिंदुस्तान को परमानेंटली काट कर सकते हैं। परमानेंटली नहीं तो कम से कम एक-आध महीने के लिए असम को हिंदुस्तान से काट ही सकते हैं। मतलब इतना मवाद डालो पटरियों पर, रोड पर कि उनको हटाने में एक महीना लगे। जाना हो तो जाएँ एयरफोर्स से।”

उसने कहा था, “असम को काटना हमारी जिम्मेदारी है। असम और इंडिया कटकर अलग हो जाए, तभी ये हमारी बात सुनेंगे। असम में मुस्लिमों का क्या हाल है, आपको पता है क्या? CAA-NRC लागू हो चुका है वहाँ। डिटेंशन कैंप में लोग डाले जा रहे हैं और वहाँ तो खैर कत्ले-आम चल रहा है। 6-8 महीनों में पता चलेगा कि सारे बंगालियों को मार दिया गया वहाँ, हिंदु हो या मुस्लिम। अगर हमें असम की मदद करनी है तो हमें असम का रास्ता बंद करना होगा फौज के लिए और जो भी जितना भी सप्लाई जा रहा है बंद करो उसे। बंद कर सकते हैं हम उसे, क्योंकि चिकन नेक जो इलाका है, वह मुस्लिम बहुल इलाका है।”

वीडियो में शरजील ने चिकन नेक को बंद करने की बात कही थी। बता दें कि सिलीगुड़ी कॉरिडोर को चिकन नेक कहा जाता है। इस चिकन नेक के माध्यम से ही नॉर्थ इंडिया हिंदुस्तान की मुख्य भूमि से जुड़ा हुआ है। इस गलियारे की लंबाई 21 से 24 किमी है। इससे भूटान, म्यामार, बांग्लादेश और चीन जैसे देशों की सीमा जुड़ती है। यहीं से भारत में घुसपैठ सबसे अधिक होती है।

मस्जिद में छिपा था शाहीन बाग़ का सरगना शरजील इमाम, चाचा ने कहा- दिल्ली चुनाव के कारण फँसाया गया
बिहार के जहानाबाद से पकड़ा गया शाहीन बाग़ का सरगना शरजील इमाम, चलेगा देशद्रोह का मुक़दमा
हज़ारों मुस्लिम युवा सड़क पर उतरेंगे: शरजील इमाम के समर्थन में कूदे इस्लामी कट्टरवादी

शाहीन बाग में कहाँ से आ रहा है दाना-पानी: आसिफ तूफानी ने उगल दिए सारे राज

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के ख़िलाफ़ दिल्ली के शाहीन बाग में करीब डेढ़ महीने से प्रदर्शन चल रहा है। इस प्रदर्शन ने कई सवाल पैदा किए हैं। इनके जवाब जानने में हरेक को दिलचस्पी है। मसलन, प्रदर्शन के लिए फंडिंग कौन कर रहा है? प्रदर्शनकारियों के खाने-पीने का इंतजाम कहाँ से हो रहा है? उनका खर्च कौन उठा रहा है? जिस तरह के वीडियो सामने आए हैं उससे यह भी सवाल पैदा हुआ है कि यह किसकी साजिश है? प्रदर्शनकारी किनके हाथों की कठपुतली हैं? मीडिया रिपोर्टों के अनुसार इस बात की जॉंच की जा रही है।

इन्हीं सवालों का जवाब तलाशने के क्रम में एबीपी न्यूज ने शाहीन बाग के कुछ प्रदर्शनकारियों से बात की। इस दौरान एक प्रदर्शनकारी ने जो खुलासे किए वह हैरान करने वाला था। असलम तूफानी नामक इस प्रदर्शनकारी के जवाब का वीडियो वायरल भी हो रहा है।

आसिफ तूफानी से जब एबीपी के रिपोर्टर ने पूछा कि आखिर इस प्रदर्शन के लिए पैसा कहाँ से आ रहा है? आसिफ ने जवाब दिया कि उसे ये सब मालूम नहीं है। लेकिन, उनके लिए ये सब अल्लाह कर रहे हैं और उन्हें मिलने वाली सब सुविधा कुदरती मदद है। वे अल्लाह के बंदे हैं और उन्हें इंसान ने पैदा नहीं किया। सब ऊपर वाले ने किया।

एबीपी की वायरल वीडियो में देखा जा सकता है कि रिपोर्टर आसिफ तूफानी की बात सुनकर उन्हें समझा रहे हैं कि लोग उनकी इस बात पर यकीन नहीं करेंगे कि प्रदर्शन के लिए अल्लाह पैसे भेजते हैं। लेकिन आसिफ फिर भी अपनी वही बात दोहराता है कि उसे कुछ नहीं मालूम, बस उनके लिए सब अल्लाह कर रहे हैं।

वीडियो में आसिफ को स्पष्ट तौर पर कहते सुना जा सकता है कि उन्हें कुदरती रूप से सारा सामान सुबह एक जगह पर रखा मिलता है और वो सिर्फ़ उसे उठाकर बाँटने का काम करते हैं। जिसे सुनकर पत्रकार कहते हैं कि वो उम्मीद करते हैं कि ऐसा चमत्कारी खाना उन सब लोगों को मिले। जिन्हें खाने की जरूरत हैं।

गौरतलब है कि एबीपी द्वारा शाहीन बाग प्रदर्शन की इस रिपोर्टिंग की 1.40 मिनट की यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर शेयर हो रही है। लोग ये कहकर मजाक उड़ा रहे हैं कि शाहीन बाग पर अब चमत्कार भी होने लगे। यूजर्स का कहना है कि अब बस देखना ये है कि अल्लाह आखिर कब तक इनका खर्चा अफॉर्ड करते हैं। कुछ गृह मंत्रालय और गृह मंत्री को टैग करके बता रहे हैं कि वे लोग भी देखें कि ये कुदरती सहायता कैसे आ रही है।

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