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8 साल के उच्चतम स्तर पर मैन्युफैक्चरिंग ऐक्टिविटी, अर्थव्यवस्था में जल्द तेजी आने के संकेत

नए साल के पहले महीने में देश की आर्थिक सुस्ती दूर होने के संकेत मिले हैं। जानकारी के मुताबिक भारत की मैन्‍युफैक्‍चरिंग एक्टिविटी जनवरी में लगभग 8 वर्षों में सबसे तेज गति से आगे बढ़ी है। दरअसल नए ऑर्डर्स मिलने और आउटपुट में मजबूत वृद्धि की वजह से यह उछाल आया है। एक प्राइवेट सर्वे में सोमवार (फरवरी 3, 2020) को यह बात सामने आई। सर्वे में बताया गया है कि अर्थव्यवस्था फिर से मजबूत हो रही है। बिक्री में वृद्धि के बाद कारखानों ने बहुत तेजी से नए वर्कर्स को काम पर रखा है। यह पिछले सात साल में वर्कर्स को काम पर रखने की सबसे तेज गति है।

बताया जा रहा है कि अगर मौजूदा स्थिति बरकरार रहती है तो आने वाले कुछ महीनों में अर्थव्यवस्था में धीरे-धीरे सुधार दिखने लगेगा। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स ने पिछले महीने अपने पोल में इस बात की जानकारी दी थी कि अगर लगातार ऐसी स्थिति बनी रही तो आने वाले समय में आर्थिक स्थिति में धीरे-धीरे सुधार देखने को मिल सकता है। बता दें कि जुलाई-सितंबर की तिमाही में वृद्धि छह साल के निचले स्तर पर आ गई थी।  

IHS मार्किट की ओर से कंपाइल्ड निक्केई मैन्युफैक्चरिंग परचेजिंग मैनेजर्स इंडेक्स जनवरी में 55.3 अंक रहा है।  यह 2012 से 2020 की अवधि में इसका सबसे ऊँचा स्तर है। इससे पहले दिसंबर में यह 52.7 अंक था। साल भर पहले जनवरी 2019 में यह आँकड़ा 53.9 अंक था। यह लगातार 30वाँ महीना है जब मैन्युफैक्चरिंग पीएमआई 50 अंक से ऊपर रहा है।

IHS मार्केट की प्रमुख अर्थशास्त्री पॉलियेना डि लीमा ने कहा, “जनवरी में भारत में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर की ग्रोथ में मजबूती लगातार बनी हुई है। पिछले 8 सालों में उत्पादन में अच्छी बढ़ोतरी देखने को मिल रही है।” उन्होंने कहा कि जनवरी में विनिर्माण पीएमआई के उच्च स्तर पर रहने की अहम वजह माँग में सुधार होना है। इसकी वजह से नए ऑर्डर मिलने, उत्पादन, निर्यात और विनिर्माण के लिए खरीदारी और रोजगार में बढ़त देखी गई है।

बँटवारे के समय Pak न जाने वालों ने भारत पर एहसान नहीं किया: BBC के प्रपंच पर CM योगी का तमाचा

दिल्ली में विधानसभा चुनाव को बस 5 दिन बचे हैं और प्रचार अभियान पूरे जोर-शोर से चल रहा है। सभी पार्टियाँ अपना पूरा दम-खम लगा कर मैदान में उतरी हुई हैं। ऐसे में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ भी अपनी पार्टी भाजपा के लिए चुनाव प्रचार कर रहे हैं। इस दौरान उनके बयान ख़ूब सुर्खियाँ बटोर रहे हैं और साथ ही लोग भी उनकी बातों पर ताली पीट रहे हैं। योगी आदित्यनाथ ने इस दौरान बीबीसी को इंटरव्यू दिया। जैसा कि अपेक्षित था, बीबीसी ने उनसे सीएए और एनआरसी को लेकर रटे-रटाए सवाल पूछे और उनके मुँह में जवाब डाल कर निकलवाने की कोशिश की, ताकि दुष्प्रचार किया जा सके।

बीबीसी ने इंटरव्यू में यूपी के सीएम से पूछा कि क्या शाहीन बाग़ में विरोध-प्रदर्शन कर रहे मुस्लिम वो लोग नहीं हैं, जिन्होंने 1947 में मजहब के आधार पर हुए देश के बँटवारे के बाद पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया था और भारत को अपनाया था? बीबीसी का कहना था कि इन मुस्लिमों के पूर्वजों ने पाकिस्तान को ठुकराया था और भारत को अपनाया था। इसके जवाब में भाजपा ने फायरब्रांड नेता योगी ने कहा कि उन लोगों ने पाकिस्तान न जाकर भारत पर कोई एहसान नहीं किया है। उन्होंने कहा:

“इन्होंने कोई उपकार नहीं किया। इन्होंने भारत पर किसी प्रकार का उपकार नहीं किया था। देश के विभाजन का विरोध किया जाना चाहिए था। जो बातें भारत के हित में हैं, आपको उनका समर्थन करना चाहिए। लेकिन जो भारत के विरोध में हैं, उसका जोर-शोर से विरोध किया जाना चाहिए। हमारी राष्ट्रभक्ति की यही पुकार है। यही भारत के हर नागरिक का दायित्व भी है। योगी या मोदी के कहने पर नहीं, अगर भारत के हित में है तो आप समर्थन कीजिए और अगर भारत के विरोध में है तो आप विरोध कीजिए।

बीबीसी ने अपना एजेंडा चलाने के लिए सीएम योगी से पूछे उलूल-जुलूल सवाल

बता दें कि शाहीन बाग़ विरोध-प्रदर्शन के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम ने भी भारत-पाक बँटवारे को लेकर अपनी राय दी थी। उसने कहा था कि मुस्लिमों ने सेक्युरलिज्म या भारत से प्रेम होने की वजह से पाकिस्तान नहीं ठुकराया, बल्कि वो मजबूरीवश वहाँ नहीं गए। शरजील ने कहा था कि संपत्ति व अन्य कारणों से मुस्लिम पाकिस्तान नहीं गए, वरना वो पूरा हैदराबाद उठा कर ले जा सकते थे। देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ करने की बात करने वाला शरजील इमाम फ़िलहाल देशद्रोह के आरोप में गिरफ़्तार किया जा चुका है।

बीबीसी ने योगी आदित्यनाथ से जिस तरह के सवाल पूछे, वो दिखाता है कि वह अपने पुराने पक्षपाती एजेंडे पर ही चल रहा है। बीबीसी 1990 के दशक से ही जम्मू-कश्मीर को लेकर प्रोपेगेंडा चला रहा है और इस मसले पर भारत को बदनाम करने की कोशिश करता रहा है। यहाँ तक कि बीबीसी ने फेक न्यूज़ के बढ़ते प्रसार के लिए भी राष्ट्रवादी विचारधारा को ही जिम्मेदार ठहराया था।

मुख्यमंत्री योगी ने बयान दिया था कि नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद से आतंकवादियों को बिरयानी नहीं, गोली खिलाई जाती है। बीबीसी ने जब इस बयान पर सवाल पूछा तो सीएम योगी ने कहा कि हम न तो बिरयानी खाते हैं और न ही खिलाते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि ये सब काम कॉन्ग्रेस और केजरीवाल किया करते थे, इसलिए इस सरकार में आतंकियों के प्रति रहमी नहीं दिखाई जाती है। उन्होंने अपने उस बयान का भी बचाव किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि प्रदर्शनकारी पुरुष ख़ुद घर में रजाई में सो रहे हैं और उन्होंने अपने घरों की महिलाओं को सड़क-चौराहे पर बिठा रखा है।

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दाऊद इब्राहिम से थे अनिल कपूर के संबंध: सोनम कपूर ने कबूला, कहा- यह ‘क्रिकेट’ का रिश्ता

बॉलीवुड कलाकर अनिल कपूर की बेटी सोनम कपूर ने सोशल मीडिया पर अपने पिता की फजीहत करवा दी। वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव के सवालों का आवेश में आकर जवाब देते हुए उन्होंने स्वीकार कर लिया कि उनके पिता के संबंध गैंगस्टर दाऊद इब्राहिम से थे। दरअसल, अक्सर हिंदुओं से संबंधित मुद्दों पर चुप्पी साधने वाली और मोदी सरकार की नीतियों का विरोध करने वाली सोनम कपूर ने शाहीन बाग में चली गोली पर अफसोस जताते हुए एक ट्वीट किया था।

उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा, “मैंने कभी नहीं सोचा था कि ऐसा भारत में होगा। ये बँटवारे की खतरनाक राजनीति बंद करो। इससे आग भड़क रही है। अगर तुम खुद को हिंदू समझते हो, तो ये भी समझो कि ये धर्म, सिर्फ़ कर्म और धर्म का है और ये सब इन दोनों में से कुछ नहीं है।” इसी ट्वीट पर दूरदर्शन के पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने उनसे एक सवाल कर दिया।

वरिष्ठ पत्रकार अशोक श्रीवास्तव ने सोनम कपूर के ट्वीट का रिप्लाई देते हुए उनसे कहा कि वह बहुत प्रखरता से अपनी आवाज़ उठाती हैं। लेकिन क्या वो कृपा कर देश को बताएँगी कि आतंकी दाऊद के साथ उनके पिता की तस्वीर का संबंध उनके कर्म से है या उनके धर्म से?

इस सवाल के बाद ट्विटर पर सक्रिय रहने वाले किसी भी यूजर को लग सकता था कि सोनम इसके बदले कोई ‘सेकुलर’ जवाब देंगी। लेकिन सोनम कपूर का यहाँ हैरान करने वाला रिप्लाई आया। ट्वीट में उन्होंने माना कि दाऊद और उनके पिता के बीच धर्म या कर्म का नहीं, बल्कि क्रिकेट का रिश्ता था।

सोनम ने जवाब देते हुए लिखा, “वे (अनिल कपूर) राज कपूर और कृष्णा कपूर के साथ मैच देखने गए थे। और एक बॉक्स में थे। मुझे लगता है आपको किसी पर ऊँगली उठाना बंद कर देना चाहिए। क्योंकि ऐसे में अन्य तीन ऊँगलियाँ आप पर होती हैं। भगवान राम आपको दुष्टता और हिंसा फैलाने के लिए माफ करें।”

सोनम के इस जवाब के बाद अशोक श्रीवास्तव ने फिर उन पर तंज कसा और लिखा, “बात सही है कि जब आप दूसरों की तरफ एक ऊँगली उठाते हैं तो 3 ऊँगली आप की तरफ उठती है। आपने ट्विटर पर एक ऊँगली का इस्तेमाल किया इसलिए ही तीन ऊँगलियाँ आपकी तरफ उठ रही हैं। पर ‘दुर्भाग्य’ से मैं इतना काबिल नहीं कि दाऊद और पाकिस्तानी सेना के प्रिय अनिल मसर्रत के साथ तस्वीर खिंचा सकूँ।”

गौरतलब है कि सोनम कपूर अपने पिता अनिल कपूर के साथ जिस दाऊद इब्राहिम की तस्वीर को जस्टिफाई करने की कोशिश कर रही हैं, वह 1993 के मुंबई धमाकों का जिम्मेदार है। इन धमाकों में बड़ी संख्या में आम जनों ने जान गंवाई थी। अनिल कपूर के साथ दाऊद की इस तस्वीर को लेकर बताया जाता है कि यह तब की है जब दोनों पाकिस्तान और भारत के बीच क्रिकेट का मुकाबला देख रहे थे।

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CAA के समर्थन में बड़ी रैली करने वाले थे हिंदूवादी नेता रंजीत बच्चन, इसलिए हुई हत्या: पत्नी कालिंदी

विश्व हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रंजीत बच्चन की हत्या के मामले में नया खुलासा हुआ है। उनकी पत्नी कालिंदी ने आरोप लगाया है कि उनके पति की हत्या सीएए का समर्थन करने के कारण हुई है। हालाँकि, पुलिस को इस मामले में अब तक कोई सुराग नहीं मिल पाया है और न ही अपराधियों का पता चल सका है। इस बीच रंजीत की पत्नी के बयान से नया खुलासा हुआ है कि वो सीएए के समर्थन में भव्य साइकिल यात्रा की तैयारी में लगे थे। बता दें कि कालिंदी ख़ुद लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर साइक्लिस्ट हैं और उन्होंने अपने पति रंजीत के साथ 1.32 लाख किलोमीटर की यात्रा तय की थी।

कालिंदी ने ये बातें ‘नवभारत टाइम्स’ से बातचीत के दौरान कही। एनबीटी की वेबसाइट पर प्रकाशित ख़बर के अनुसार, कालिंदी ने बताया कि रंजीत जल्द ही नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में एक भव्य आयोजन करने वाले थे। वे पूरे उत्तर प्रदेश में साइकिल से घूम कर सीएए के प्रति जागरूकता फैलाने की तैयारी में लगे हुए थे। वो सीएए को लेकर चल रहे अफवाहों और झूठ के भ्रमजाल से परेशान थे। कालिंदी ने आशंका जताई कि उनके पति की हत्या के पीछे सीएए का समर्थन भी हो सकता है।

रंजीत सोशल मीडिया में भी सीएए को लेकर लोगों का भ्रम दूर करने के लिए पोस्ट्स डालते रहते थे। कालिंदी ने इस दौरान मीडिया में चल रही उन बातों से भी इनकार किया, जिनमें कहा जा रहा है कि उनके घर में घरेलू विवाद चल रहा था। उन्होंने उन मीडिया ख़बरों को भी नकार दिया, जिनमें रंजीत की तीन शादियाँ होने की बातें कही जा रही थी। रंजीत की दूसरी पत्नी स्मृति वर्मा लखनऊ के विकासनगर की रहने वाली है। कालिंदी ने बताया कि रंजीत उनके साथ ही रहते थे लकिन कभी-कभी स्मृति से मिलने भी जाते थे।

कालिंदी ने बताया कि शुरुआत में उन्होंने उन चीजों का विरोध किया था और हर औरत ऐसा ही करती। हालाँकि, उन्होंने बताया कि अब ऐसी कोई बात नहीं थी और सभी हँसी-ख़ुशी रह रहे थे। कालिंदी ने बताया कि उन्होंने रंजीत और स्मृति के रिश्ते को स्वीकार कर लिया था। रंजीत की पहली शादी मार्च 2014 में हुई थी और दूसरी शादी अप्रैल 2015 में हुई थी।

हत्या की जाँच कर रही पुलिस ने दो संदिग्धों का सीसीटीवी फुटेज भी जारी किया है। आरोपितों के संबंध में कोई भी जानकारी देने पर 50,000 रुपए का इनाम दिए जाने की घोषणा की गई है। जाँच में पुलिस की 8 टीमें लगी हुई हैं। लापरवाही के आरोप में 4 पुलिसकर्मी सस्पेंड भी किए जा चुके हैं। बच्चन की हत्या रविवार (फरवरी 2, 2020) को तब की गई जब वे मॉर्निंग वाक के लिए निकले थे। लखनऊ के हजरतगंज इलाक़े में बदमाशों ने उनके सिर में गोली मार दी थी।

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हमने बच्चों को ट्विंकल-ट्विंकल नहीं पढ़ाया, कर्बला सुनाया: कुर्बानी की बात करती महिला का Video

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर दिल्ली की शाहीन बाग में जारी धरने के बीच भारतीय जनता पार्टी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने एक और वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो को शेयर करते हुए संबित पात्रा ने लिखा है, “दोस्तों क्या आप बता सकते हैं कि ये कहाँ का वीडियो है, सोशल मीडिया में #TauheenBag के नाम से वायरल हो रहा है। अगर ये वाकई वहीं का वीडियो है तो खतरनाक है। अब समझ में आ रहा है क्यों तौहीनबाग के छोटे बच्चे भी मोदी जी और अमित शाह जी को मारने की बात करते हैं। इससे पहले की देर हो जाए, जाग जाओ।”

संबित पात्रा द्वारा ट्वीट किए गए इस वायरल वीडियो में महिला कहती है, “अपने बच्चों को हमने ट्विंकल-ट्विंकल नहीं पढ़ाया है। हमने अपने बच्चों को बचपन से कर्बला का वाकया सुनाया है। हम औरतों ने शुरू से जैनब का वाकया सुना है। कर्बला में सिर्फ मर्दों ने ही नहीं, औरतों ने भी कुर्बानी दी है। कर्बला के मैदान में छोटे-छोटे बच्चों ने भी सिर कटाया था। पता चला हमें डराओ मत, हमारी शुरुआत सिर कटाने से होती है।”

वीडियो में आगे कहा जा रहा है, “इमाम-ए-हुसैन ने बता दिया था ये नहीं सोचना कि यजीद सिर्फ अभी है। यजीद कयामत तक आएगा। और सुन लो मुस्लिमों, तुम्हें अपने बच्चों को हुसैन बनाकर पेश करना पड़ेगा। आज तपती हुई रेत नहीं है, आज साया लगा है, अच्छे कपड़े हैं, खा पी रहे हैं हम। हिम्मत चाहिए तो कर्बला वालों को याद करके बैठे रहना। कितने दिन? 3 दिन से सैय्यदा जैनब प्यासी थीं। बच्चे का सिर कट गया, सामने आ गया, उफ्फ नहीं हुआ। अल्लाह के दीन के लिए हम आज आवाज नहीं उठाएँगे तो कल हमारी नस्लें खराब हो जाएँगी।”

महिला यहीं पर नहीं रूकती है। वो आगे कहती है, “तुम अगर नागरिकता सबको दे रहे हो तो हिंदुस्तान के मुस्लिमों को भी नागरिकता दो। और क्यों दोगे? हम मोहताज नहीं हैं। हमको सादिक करने की जरूरत नहीं है। आज जितने करोड़ों की कमाई इंडिया में होती है, ये सरकार करोड़ों कमाती है, हमारे आबा-ओ-अजदाद की बनाई हुई इमारत से कमाती है। ताजमहल देख लो जाकर, कुतुब मीनार देख लो। किसी और ने नहीं बनाया। हमारे आबा-ओ-अजदाद ने बनाया है। तो पता चला, हुसैनी अज़्म रखते हैं, हुसैनी शान रखते हैं। मोहम्मद मुस्तफा की जात पर ईमान रखते हैं। नहीं वादे से डरते हम, जमाना जान ले हमको। खुदा का शुक्र है कि सीने में हम कुरान रखते हैं।”

इसके अलावा संबित पात्रा ने एक अन्य वीडियो ट्वीट करते हुए लिखा है, “वो जीना चाहते है और हमारे बच्चे मरने को तैयार है”, खतरनाक है ये बहुत खतरनाक। जाग जाओ इससे पहले कि देर हो जाए। इस वीडियो को दिल्ली के शहर काजी का बताया जा रहा है। वीडियो में शहर काजी कहते हैं, “कुछ लोग हम पर अत्याचार कर रहे हैं। अगर हमने अपने नौजवान बच्चों को एक दफा इशारा कर दिया और उकसा दिया तो हमारे बच्चे उनसे कहीं ज्यादा ताकत रखते हैं। याद रखना हम उस आदमी के औलाद हैं, जिन्होंने यहूदियों को कहा था कि तुम्हारे पास 10 लोग हैं जो जीना चाहते हैं और मेरे पास एक लोग है जो मौत को गले लगाना चाहते हैं। हम मौत को गले लगाने वाली कौम हैं।”

ऑपइंडिया इन दोनों वीडियो की पुष्टि नहीं करता। लेकिन, इसमें जो कुछ कहा जा रहा है वह बेहद भड़काऊ और चिंताजनक है।

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शाहीन बाग में कहाँ से आ रहा है दाना-पानी: आसिफ तूफानी ने उगल दिए सारे राज

जिस दिन हम उनसे ज्यादा हो गए, उस दिन हिन्दुओं को पटक-पटक कर मारेंगे: बुर्कानशीं युवती का वीडियो वायरल

बंगाल में छिपा है JMB का सरगना मोहम्मद सलाउद्दीन: कैफे पर हमले में सुनाई गई थी सजा-ए-मौत

आतंकी संगठन जमात उल मुजाहिद्दीन बांग्लादेश (जेएमबी) का सरगना कुख्यात आतंकी मोहम्मद सलाउद्दीन उर्फ सालेहान पश्चिम बंगाल में छिपा हुआ है। मीडिया रिपोर्टों में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी (NIA) के सूत्रों के हवाले से यह जानकारी दी गई है। सूत्रों के अनुसार पिछले कुछ महीनों से वह बांग्लादेश सीमा से सटे पश्चिम बंगाल के किसी जिले में छिपा हुआ है। NIA की टीम उत्तर 24 परगना, नदिया, मुर्शिदाबाद, मालदह, उत्तर दिनाजपुर, कूचबिहार जिलों में उसकी तलाश कर रही है।

सलाहुद्दीन को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में 2016 में होली आर्टिसन कैफे में हुए धमाके में मौत की सजा सुनाई गई थी। वह बोधगया और खागड़ागढ़ धमाकों में भी वांछित है। तीन मौकों पर वह एजेसियों को झॉंसा दे चुका है।

NIA के एक अधिकारी ने बताया कि सलाउद्दीन ने तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में जाकर जेएमबी का प्रचार-प्रसार किया। उन्होंने बताया कि जाँच के दौरान अगस्त 2018 में खागड़ागढ़ में हुए विस्फोट मामले के मुख्य आरोपित जहीदुल इस्लाम को गिरफ्तार किया गया। उससे पूछताछ में सलाउद्दीन के भारत में छिपे होने की बात पता चली थी। उसने बताया कि सलाउद्दीन भारत के दक्षिणी राज्यों में कहीं छुपा हुआ है।

NIA को जाँच के दौरान पता चला कि सलाउद्दीन कूचबिहार, उत्तरी दिनाजपुर, मालदा, मुर्शिदाबाद और नादिया गाँवों में छिपा हुआ है, जो कि भारत-बांग्लादेश सीमा क्षेत्र में हैं। जाँच एजेंसी ने बताया कि सलाउद्दीन कूचबिहार के गीतालदाहा गाँव में धर्म प्रचारक के रूप में रह रहा था। मगर पुलिस के छापा मारने के एक दिन पहले ही वह वहाँ से फरार हो गया। इसके बाद उसके मुर्शिदाबाद जिले के मुकीमनगर गाँव में रहने की सूचना मिली, लेकिन इस बार भी वो जाँच एजेंसी को चकमा देने में कामयाब रहा। NIA ने पिछले हफ्ते कूचबिहार के चांगरबंधा गाँव में छापा मारा था, लेकिन संदिग्ध वहाँ भी नहीं मिला। हालाँकि इस दौरान जाँच एजेंसी ने उसके एक सहयोगी को गिरफ्तार कर लिया।

जानकारी के मुताबिक बांग्लादेशी व्यापारी, जो कि अब सऊदी अरब में बस गए हैं, वो जेएमबी को फंडिंग देते हैं। ये बांग्लादेशी व्यापारी ही इस आतंकी संगठन को हथियार और गोला-बारूद खरीदने के लिए पैसा देते हैं और उनके साथ संपर्क स्थापित करने के लिए ये लोग ओनियन ब्राउजर का इस्तेमाल करते हैं।

ढाका के कैफे पर एक जुलाई 2016 को हुए हमले में 22 लोगों की मौत हो गई थी। इनमें एक भारतीय सहित 18 विदेशी थे। कैफे पर करीब 10 घंटे तक आतंकवादियों ने कब्जा जमाए रखा था। इस मामले में पिछले साल ढाका की अदालत ने 7 आतंकियों को मौत की सजा सुनाई थी। सलाउद्दीन और उसके साथियों को जब सजा सुनाई जा रही थी तो उनमें से कुछ ने अदालत में ही अल्लाहु अकबर के नारे लगाए थे।

बंगलुरु ही नहीं, मैसूर में भी सक्रिय JMB जिहादी सेल: गृहमंत्री कर्नाटक

कोयंबटूर में NIA की छापेमारी, अगरतला से पकड़ा गया JMB आतंकी नज़ीर शेख

जहीरुल शेख इंदौर से गिरफ्तार: JMB का यह आतंकी बर्दवान धमाके का है मुख्य आरोपित

अल्लाहु अकबर चिल्ला भीड़ पर हमला, गर्लफ्रेंड को माँ-बाप का सिर कलम करने के लिए उकसा रहा था आतंकी

दक्षिण लंदन में रविवार (फरवरी 2, 2020) को एक आतंकी ने ‘अल्लाहु अकबर’ चिल्लाते हुए भीड़ पर चाकू से हमला कर दिया। हमले में तीन लोग गंभीर रूप से घायल हुए। आतंकी की पहचान 20 साल के सुदेश अम्मान के तौर पर की गई। इसके बाद उसे पुलिस ने मार गिराया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक उसे पिछले हफ्ते ही जेल से रिहा किया गया था। हालॉंकि उसकी समय पूर्व रिहाई को लेकर एक थिंक टैंक ने चिंता जताई थी। उस पर तरह-तरह से इस्लामिक कट्टरपंथ फैलाने का आरोप था। वह अपनी गर्लफ्रेंड को अपने माता-पिता एवं परिजनों का सिर कलम करने के लिए भी उकसाता था। जनवरी के अंत में जेल से छोड़े जाने के बाद से पुलिस लगातार उसकी निगरानी कर रही थी। आशंका थी कि वो किसी घटना को अंजाम दे सकता है। स्ट्रेथम हाई रोड पर चाकूबाजी के दौरान भी पुलिस की उस पर नजर थी।

स्कॉटलैंड यार्ड के अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस अब अम्मान के दक्षिण लंदन और हर्टफोर्डशायर स्थित घरों की तलाशी ले रही है। उसे मई 2018 में आतंकी गतिविधियों में शामिल रहने के लिए गिरफ्तार किया गया था। नवंबर 2018 में उसे 13 मामलों में आरोपी बनाया गया था। इनमें आतंकियों की जानकारी रखने से जुड़े 6 केस और आतंकी लेखों के प्रचार से जुड़े 7 केस शामिल थे। अम्मान ने यह सभी आरोप स्वीकार लिए थे। इसके बाद कोर्ट ने उसे 3 साल 4 महीने की सजा सुनाई थी। डेलीमेल की खबर के अनुसार, जब अम्मान को 13 आरोपों में सजा सुनाई गई थी, उस समय वह अपनी हँसी नहीं रोक पा रहा था और बिना किसी शिकन के अपनी माँ और भाई को हाथ हिलाकर अलविदा कह रहा था।

बता दें, इस दौरान जाँच में पुलिस ने अम्मान की एक नोटबुक भी बरामद की थी। जिसमें अम्मान ने बम बनाने के तरीके लिखे हुए थे। साथ ही ये भी लिखा था कि वो शहीदों की तरह मरकर जन्नत जाना चाहता है। खबरों के मुताबिक वो अलकायदा के आतंकी सोच फैलाने के लिए उसकी मैग्जीन अपने घर के व्हॉट्सअप ग्रुप पर भेजता था। इसमें उसके 11 से 15 की उम्र वाले 3 छोटे भाई शामिल थे। इनसे वह खुद को उड़ाने की बातें साझा करता था।

अम्मान अपनी गर्लफ्रेंड को सिर कलम करने की वीडियो भेजता था। उसका मानना था कि इस्लाम के लिए सबसे बेहतर चीज इस्लामिक स्टेट है। वो अपनी गर्लफ्रेंड को सलाह देता था कि अगर वह अपने घरवालों, परिवारवालों, दोस्तों और रिश्तेदारों के कारण बम नहीं बना पाती, तो उसे उन लोगों का सिर कलम कर देना चाहिए। उसने अपनी गर्लफ्रेंड को ये भी बताया था कि वो क्विंसबुरी में आतंकी हमला करने का विचार कर रहा है। अम्मान का मानना था कि यजीदी औरतें तवायफ होती हैं और कुरान में उनका बलात्कार करने की इजाजत है।

अधिकारियों के अनुसार, अम्मान मात्र 17 साल का था जब उसने अपने घर में, अपने भाइयों से, अपने गर्लफ्रेंड से अपने मंसूबों के बारे में बताना शुरू किया। मगर उसकी संदिग्ध गतिविधियों के बारे में पुलिस को साल 2018 में भनक लगी। सुदेश अम्मान को सशस्त्र सुरक्षाबल अधिकारियों ने सबसे पहले मई, 2018 में उत्तरी लंदन में गिरफ़्तार किया था। उस पर एक आतंकी हमले की साज़िश रचने का शक़ था। 2018 में ही वो आतंकरोधी पुलिस की नज़र में आया था जब अधिकारियों को उसके द्वारा टेलीग्राम पर पोस्ट की गई कुछ पोस्ट्स के बारे में पता चला। इनमें से एक पोस्ट में एक इस्लामी झंडे पर दो बंदूकों और एक चाकू की तस्वीर थी और अरबी भाषा में लिखा था- “3 अप्रैल के लिए हथियार के साथ तैयार।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, हमलावर को एक सुपरमार्केट के बाहर गोली मारी गई। स्थानीय लोगों ने बताया कि हमलावर ने अपने शरीर पर नकली आत्मघाती जैकेट बाँध रखी थी। उसके पास एक बड़ा सा चाकू था, जिससे वह आमजनों पर हमला कर रहा था।

उल्लेखनीय है कि प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन ने इस घटना के बाद ट्वीट किया और स्थिति को नियंत्रित करने वालों का शुक्रिया अदा किया। उन्होंने लिखा, “इस हमले में घायल और प्रभावित लोगों के साथ पूरी संवेदना है। आपातकालीन सेवा की फ़ौरन प्रतिक्रिया के लिए उनका शुक्रिया।”

उस्मान खान ने किया लंदन ब्रिज पर हमला, कश्मीर में आतंकी ट्रेनिंग के लिए जुटा रहा था पैसे

स्कूल छोड़ते ही आतंकी बन गया था उस्मान खान, ‘ब्रिटेन के बगदादी’ से था प्रभावित

5 साल का सबसे बड़ा हमला: अरबिंदा में 35 की मौत, जवानों ने 80 आतंकी भी मार गिराए

बंगाल में TMC के गुंडों ने महिला शिक्षक के हाथ-पैर बाँधे, 30 फीट तक घसीटा: देखें Video

पश्चिम बंगाल के दक्षिण दिनाजपुर जिले के गंगरामपुर में एक प्राथमिक स्कूल की शिक्षिका को रस्सी से बाँधकर घसीटा गया और उसकी पिटाई की गई। टीएमसी के स्थानीय नेता अमल सरकार ने अन्य लोगों के साथ मिलकर इस शर्मनाक घटना को अंजाम दिया। शिक्षिका गाँव में सड़क निर्माण के लिए जबरन अपनी जमीन पर कब्जा किए जाने का विरोध कर रही थी।

जमीन पर कब्जे का विरोध करने पर तृणमूल कॉन्ग्रेस समर्थकों के एक समूह ने शिक्षिका के हाथ-पैर बाँध दिए। तीस फीट तक उसे घसीटते हुए ले गए। पिटाई करने के बाद एक घर में बंद कर दिया। इस घटना का वीडियो भी सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। शिक्षिका का नाम स्मृतिखाना दास बताया जा रहा है और वह बीजेपी समर्थक बताई जा रही हैं।

शिक्षिका ने 5 लोगों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस इसकी जाँच कर रही है। बताया जा रहा है कि जिला टीएमसी नेतृत्व ने पार्टी नेता अमल सरकार को निष्कासित कर दिया है, जिसकी अगुवाई में ये सब हुआ था।

दरअसल, पंचायत ने हाल ही में सड़क बनाने के लिए एक परियोजना शुरू की थी, जो महिला शिक्षक के घर की भूमि से होकर गुजरेगी। स्मृतिखाना दास ने बताया कि पंचायत को सड़क के लिए उनकी जमीन का एक हिस्सा चाहिए था। पंचायत प्रशासन ने उनकी मर्जी के बिना काम शुरू किया। फिर भी वो गाँव के हित में मुआवजे के बिना 12 फीट चौड़ी सड़क के लिए आवश्यक भूमि देने के लिए तैयार थी। मगर शुक्रवार को उन्हें पता चला कि वे 24 फीट चौड़ी सड़क बनाने की योजना बना रहे हैं और आगे तक उनकी जमीन पर कब्जा लिया। इसके बाद जब शिक्षका ने मौके पर जाकर विरोध किया, तो अमल सरकार और उनके साथियों ने उन पर हमला कर दिया।

शिक्षिका ने आगे कहा कि अमल सरकार और उनके समर्थकों ने उन्हें लोहे की रॉड से मारा और फिर उसके बाद उन्होंने उनके हाथ-पैर बाँध दिए और लगभग 30 फीट तक जमीन पर घसीटते हुए ले गए। इतना ही नहीं, शिक्षिका ने आरोप लगाया कि अमल सरकार और उसके लोगों ने उनकी माँ और बहन के साथ भी मारपीट की।

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घर में घुस नाबालिग रेप पीड़िता पर फेंका तेजाब, केस वापस लेने का दबाव डाले रहे थे दिलशाद के परिजन

उत्तरप्रदेश के हापुड़ के बाबूगढ़ थाना क्षेत्र के एक गाँव में सामूहिक दुष्कर्म की नाबालिग पीड़िता पर रविवार को एसिड अटैक हुआ। हमले का आरोप रेप आरोपितों में से एक के परिजनों पर है। बताया जा रहा है आरोपित पक्ष की ओर से बहुत दिन से पीड़िता के घरवालों पर समझौते का दबाव बनाया जा रहा था। मगर, जब वे नहीं माने, तो उन लोगों ने घर में घुसकर लड़की पर तेजाब से हमला कर दिया। हमले का विरोध करने पर पीड़िता के माता-पिता व भाई से भी इस दौरान मारपीट हुई। घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने पीड़िता और उसके घायल परिजनों को अस्पताल में भर्ती करवाया, जहाँ अब उनका इलाज जारी है।

जानकारी के अनुसार, दुष्कर्म मामले में 7 फरवरी को न्यायालय में पीड़िता का बयान दर्ज होना है। इसके कारण रेप आरोपितों में से एक के घरवाले समझौता चाहते थे। मगर, जब लड़की के घरवाले नहीं राजी हुए, तब उन्होंने ये कदम उठाया।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित संबंधित खबर

पीड़िता के पिता के मुताबिक  16 जुलाई, 2019 को उनकी नाबालिग बेटी के साथ गाँव के 2 युवकों ने घर में घुसकर दुष्कर्म किया था। दोनों आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था, लेकिन जेल सिर्फ़ एक ही गया। जेल जाने वाले आरोपित का नाम दिलशाद है। इस मामले में उस समय पुलिस दूसरे आरोपित को गिरफ्तार नहीं कर पाई थी। जिसके कारण दूसरे आरोपित के घरवाले लगातार पीड़ित पक्ष पर फैसले का दबाव बना रहे थे। कुछ मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि दिलशाद के परिजन पर भी केस वापस लेने के लिए पीड़ित परिवार पर दबाव डाल रहे थे।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार, रविवार की सुबह आरोपित पक्ष के 8-10 लोग अवैध हथियार लेकर पीड़ित पक्ष के घर में घुस आए और हमला बोल दिया। मारपीट में दुष्कर्म पीड़िता की माँ, भाई और पिता गंभीर रूप से घायल हो गए। इसके बाद आरोपितों ने दुष्कर्म पीड़िता के ऊपर तेजाब फेंक दिया। तेजाब पीड़िता के पैरों पर गिरा, जिससे उसका एक पैर बुरी तरह से झुलस गया। इसी बीच शोर की आवाज सुनकर वहाँ लोग इकट्ठा होने लगे, जिन्हें देखकर सभी आरोपित फरार हो गए।

बाद में पुलिस को इस मामले मे सूचित किया गया। एएसपी सर्वेश कुमार मिश्रा व सीओ सिटी राजेश कुमार भी मौके पर पहुँचे। फॉरेंसिक टीम ने भी घटनास्थल से सभी साक्ष्य जुटाए। अधिकारियों ने अस्पताल पहुँचकर पीड़िता से बातचीत कर उसका हाल जाना और घटना से संबंधित उनका बयान लिया।

पुलिस के अनुसार, घटना से जुड़े सभी पहलुओं को ध्यान में रखकर मामले की जाँच की जा रही है। जाँच में दोषी मिलने पर आरोपितों को गिरफ्तार किया जाएगा। सुरक्षा की दृष्टि से पीड़िता के घर पर पुलिस को तैनात किया गया है। किसी भी हाल में पीड़िता व उसके स्वजन की सुरक्षा को लेकर लापरवाही नहीं बरती जाएगी।

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BSP विधायक शाह आलम ने संबंध बनाने के लिए युवती पर डाला दबाव, भेजे गंदे मैसेज: FIR दर्ज

BSP विधायक शाह आलम उर्फ गुड्डू जमाली के खिलाफ गोमतीनगर थाने में मुकदमा दर्ज हुआ है। उन पर एक युवती के यौन उत्पीड़न और धमकी देने का आरोप है। शाह मुबारकपुर से विधायक हैं। वे बसपा सुप्रीमो मायावती के करीबी बताए जाते हैं। मायावती के भाई आनंद के वे बिजनेस पार्टनर भी हैं। पूर्वांचल प्रोजेक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी के सीएमडी शाह पर आरोप उन्हीं की कंपनी में काम करने वाली एक महिला कर्मचारी ने लगाया है।

पीड़िता का आरोप है कि विधायक कंपनी में ऊँचे ओहदे और मोटी तनख्वाह का लालच देकर उस पर नाजायज संबंध बनाने का दबाव डाल रहे थे और फिर तरक्की देने का झाँसा देकर वीडियो कॉल करने लगे। एक दिन विधायक ने जरूरी काम का बहाना बनाकर उसे अपने घर पर बुलाया। जब वो पहुँची तो वो उसके साथ अश्लील हरकतें करने लगे और फिर उसके साथ दुष्कर्म करने का भी प्रयास किया, मगर पीड़िता ने उसे धक्का दे दिया। इसके बाद पीड़िता ने ऑफिस जाना बंद कर दिया और पुलिस से शिकायत करने की बात कही।

फिर विधायक ने फोन कर कहा कि दोबारा ऐसी हरकत नहीं करेंगे। पीड़िता का कहना है कि जब उन्होंने दोबारा ऑफिस जाना शुरू किया तो और भी लड़कियों का शारीरिक शोषण करने का पता चला। शाह आलम ने एक नाबालिग को भी अपना शिकार बनाया है। साथ ही कि पीड़िता ने इस बात का भी खुलासा किया कि कंपनी में जिन फ्लैटों की कीमत 1.40 करोड़ और डेढ़ करोड़ है, उसकी रजिस्ट्री महज 70 से 80 लाख में कराकर टैक्स की भी चोरी की गई है।

पीड़िता का कहना है कि शाह आलम उसे व्हाट्सएप पर आपत्तिजनक क्लिप्स भेजते थे। जनवरी 2020 में शाह आलम ने एक बार फिर उस पर शारीरिक संबंध बनाने का दबाव बनाना शुरू किया। आरोप है कि उसके मना करने पर शाह आलम ने एचआर मैनेजर को उसके पास भेजकर दबाव बनवाया। इस पर भी वह नहीं मानी तो शाह आलम ने कंपनी से निकालने की धमकी दी। इसके बाद पीड़िता ने 13 जनवरी 2020 को सीओ संतोष कुमार सिंह से लिखित शिकायत की। फिर शाह आलम ने इससे नाराज होकर 14 जनवरी को उसे नौकरी से निकाल दिया। पुलिस ने पीड़िता की शिकायत पर मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है।

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