दिल्ली एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) ने आम आदमी पार्टी विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोप में FIR दर्ज की है। यहाँ FIR ‘प्रिवेंशन ऑफ करप्शन’ के तहत दर्ज की गई है। AAP विधायक अमानतुल्लाह खान के खिलाफ वक्फ बोर्ड की रिक्रूटमेंट प्रक्रिया में गड़बड़ी की शिकायत मिली थी। जाँच के बाद इस मामले में FIR दर्ज की गई।
Delhi Anti-Corruption Branch books AAP MLA and Waqf Board chief Amanatullah Khan for alleged misuse of funds: Sources
दरअसल, अमानतुल्लाह पर दिल्ली वक्फ बोर्ड के फंड के दुरुपयोग करने और भर्तियों में अनियमितता के आरोप हैं। ज्ञात हो कि AAP विधायक अमानतुल्लाह दिल्ली वक्फ बोर्ड के चेयरमैन हैं और दिल्ली में होने वाले विधानसभा चुनाव में ओखला विधानसभा क्षेत्र से प्रत्याशी हैं। दिल्ली चुनाव के बीच में FIR दर्ज होने से आम आदमी पार्टी के प्रत्याशी को परेशानी हो सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, जुलाई 2019 में हाफिज इरशाद कुरैशी नाम के व्यक्ति ने दिल्ली एंटी करप्शन डिपार्टमेंट (ACB) में अमानतुल्लाह के खिलाफ 10 पन्नों की शिकायत दी थी। शिकायत में वक्फ बोर्ड में गलत तरीके से भर्ती करवाना और वक्फ बोर्ड के लिए मिलने वाले सरकारी फंड में हेर-फेर करने का आरोप लगाया गया था।
अमानतुल्लाह खान का विवादों से है पुराना रिश्ता
ओखला विधानसभा से आम आदमी पार्टी के विधायक अमानतुल्लाह को AAP ने इस बार फिर उम्मीदवार बनाया है। उनका विवादों से रिश्ता पुराना है। वर्ष 2016 में एक महिला को धमकी देने के आरोपों में उन्हें अरेस्ट किया गया था। हालाँकि, इस मामले में उन्हें बेल मिल गई थी। अमानतुल्ला पर एक महिला ने यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए थे। जिसके बाद उन्होंने पार्टी के सभी पदों से इस्तीफा दे दिया था, लेकिन आम आदमी पार्टी प्रमुख और दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने इसे व्यक्तिगत मामला बताकर उनका इस्तीफा अस्वीकार कर दिया था।
देश से असम को काटकर अलग कर देने की बात करने वाले शर्जील इमाम की गिरफ्तारी के साथ ही सोशल मीडिया पर #ISUPPORTSHARJEEL ट्रेंड कराने की कोशिश शुरू हो चुकी है। एक समुदाय विशेष के लोगों के साथ मीडिया गिरोह के कुछ पत्रकार भी बढ़-चढ़कर शर्जील का समर्थन कर रहे हैं। अपनी एकजुटता प्रदर्शित कर रहे हैं। तर्क-कुतर्क करके ये साबित किया जा रहा है कि शर्जील ने जो कहा वो सही है और मोदी सरकार व उनके समर्थक जानबूझकर उसे देशद्रोही बता रहे हैं।
यहाँ ध्यान देने वाली बात है कि ये सब पहली बार नहीं हो रहा। जिस तरह से देश के ख़िलाफ़ बयानबाजी करने वालों को अभिव्यक्ति की आजादी की आड़ में छिपाया जाता रहा है। उनके प्रति संवेदना दिखाई जाती रही है। एक तय क्रम के साथ उनके विवादों में आने के बाद उन्हें हीरो बनाने की कोशिश हुई। उससे पहले के घटनाक्रमों और इन गिरोहों के एजेंडे को देखते हुए ये स्पष्ट हो चुका है कि शर्जील इमाम के मामले में अब आगे क्या-क्या हो सकता है? पूरी तत्परता के साथ कार्य शुरू हो चुका है जिस पर आप सबकी नजर पड़ी होगी। अब जरा ध्यान से नीचे दी गई टाइमलाइन पर नजर डालिए।
क्या लगता है आपको कि याकूब मेमन, अफ़ज़ल गुरु और बुरहान वानी का समर्थन कर चुके लोग शरजील इमाम को उसके हाल पर छोड़ देंगे? नहीं ऐसा नहीं होगा तो क्या होने की संभावना है इसके लिए पूरी क्रोनोलॉजी समझिए।
आज बड़ी चालाकी से उसे “जेएनयू का छात्र” लिखा जा रहा है, “द वायर का पत्रकार” नहीं।
एक-दो दिन में उसके लिए सहानुभूति पैदा करने का काम शुरू होगा, जिसके लिए यही छात्र शब्द बुनियाद बनेगा।
बताया जाएगा कि वो तो चिकेन नेक पर चक्का जाम की बात कर रहा था।
सेक्युलर मीडिया उसके पक्ष में संपादकीय लिखेगा, संपादक ट्वीट करेंगे।
बताया जाएगा कि जेएनयू के नकाबपोशों को तो पुलिस अब तक नहीं पकड़ पाई।
मानो कैंपस में मारपीट करना और असम को देश से अलग करना एक जैसा अपराध है।
धीरे-धीरे उसे ब्रांड बनाया जाएगा। यूएन का ह्यूमन राइट्स कमीशन उसकी गिरफ़्तारी पर चिंता जताएगा।
प्रियंका वाड्रा शरजील इमाम की माँ से मिलने जाएगी। उनसे लिपटकर फ़ोटो खिचवाएँगी।
दीपिका पादुकोण के बाद रघुराम राजन अब शर्जील का सपोर्ट करेंगे, ताकि पब्लिसिटी मिले।
“विराट हिंदू” नाम के फ़ेसबुक अकाउंट से शरजील को ग़द्दार कहा जाएगा, जिसका स्क्रीनशॉट दिखाकर रवीश जी प्राइम टाइम करेंगे कि क्या भीड़ तय करेगी कि कौन ग़द्दार है।
मेरठ में “हिंदू सेना” शरजील इमाम की गर्दन काटने पर 5 लाख रुपये इनाम घोषित करेगी। 3 दिन तक चैनलों पर ख़बर चलेगी।
PFI कपिल सिब्बल के अकाउंट में 50-60 लाख रुपए भेजेगा, ताकि वो उसका मुकदमा लड़ें।
मुक़दमा ट्रायल कोर्ट में नहीं, सीधे सुप्रीम कोर्ट में चलेगा।
अदालत पर “जनभावनाओं” दबाव बनेगा और उसे ज़मानत पर रिहा कर दिया जाएगा।
इसके बाद वो देशभर के चैनलों में नागरिक अधिकारों के प्रवक्ता के तौर पर बुलाया जाएगा।
लिट्रेचर फ़ेस्टिवल में उसके सेशन में सबसे ज़्यादा भीड़ होगी। जहां बुर्के वालियां उसके साथ सेल्फ़ी खिचवाएँगी।
धीरे-धीरे आम लोगों को भी को लगने लगेगा कि स्टूडेंट ही तो है। ग़लती हो गई। क्या फ़र्क़ पड़ता है?
अगली बार कोई तमिलनाडु, केरल, बंगाल को देश से तोड़ने की बात करेगा। हम चुप रहेंगे छोड़ो जाने दो, हमको क्या फ़र्क़ पड़ता है।
इन सब बातों का अनुमान कर पहले से व्यक्त कर देना इतना भी मुश्किल नहीं है। क्योंकि लिबरल गिरोह कैसे संचालित होता रहा है, अब लोग उनके चालों और छल-कपट-धूर्तता से भली भाँति परिचित होने लगे हैं। हो सकता है कि पैटर्न में थोड़ा बदलाव भी नजर आए लेकिन मूल भावना शाहीन बाग़ के मास्टरमाइंड शरजील को पाक-साफ साबित कर एक नए युवा क्रन्तिकारी नेता के रूप में स्थापित करने की होगी। क्योंकि कन्हैया पर लगाया गया दाव वामपंथी गिरोह को फेल होता नज़र आ रहा है और उसकी मुस्लिम समुदाय में उतनी पैठ भी नहीं है।
नोट- यह क्रोनोलॉजी चंद्र प्रकाश जी के फेसबुक पोस्ट से ली गई है।
50 से ज्यादा धमाकों में शामिल रहा आतंकी जलीस अंसारी मुंबई एटीएस की पूछताछ में नए-नए राज उगल रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार देश की राजधानी दिल्ली भी उसके निशाने पर थी। कनाट प्लेस, करोलबाग सहित साउथ इलाकों के कुछ इलाकों की उसने रेकी भी कर रखी थी। ‘डॉ. बम’ के नाम से कुख्यात अंसारी को 17 जनवरी को यूपी के कानपुर से पकड़ा गया था। वह परोल पर अजमेर की जेल से निकला था। परोल खत्म होने से ठीक पहले वह मुंबई से फरार हो गया था।
मुंबई में सिलसिलेवार धमाकों के दोषी इस आतंकी को जब 19 जनवरी को एसटीएफ अधिकारी लखनऊ के अमौसी एयरपोर्ट से ले जा रहे थे तब उसने देश की कानून-व्यवस्था को कमजोर बताते हुए कहा था कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उसने कहा था कि अब तक उसने 65 से ज्यादा धमाके किए, लेकिन पुलिस केवल 3 मामलों में उस पर आरोप सिद्ध कर पाई।
जलीस को 1995 में दिल्ली से ही पकड़ा गया था। हिन्दुस्तान की रिपोर्ट के अनुसार उसने अपने दम पर दिल्ली को दहलाने का प्लान बनाया था। लेकिन, उसके गुट के लोगों तक सीबीआई पहुॅंच गई और उसके मंसूबे विफल हो गए थे। गिरफ्तारी से बचने के लिए उसने पाकिस्तान, दुबई और नेपाल में अपने आकाओं से संपर्क भी किया था। मुंबई एटीएस को उसने बताया कि उसने कुछ युवाओं को बम बनाने की सामग्री और कुछ को उपकरण इकट्ठा करने का का काम दिया था। 20 लोगों को चिह्नित जगहों की रेकी सौंपी थी। लेकिन, इनमें से कुछ सीबीआई के हत्थे चढ़ गए और जलीस का भेद खुल गया।
एटीएस को जलीस ने बताया कि सूचना लीक करने वाले का पता लगाने की उसने बहुत कोशिश की। जेल से भी अपने कुछ लोगों को इस काम पर लगाया था। लेकिन, उसके बारे में वह अब तक कुछ जान नहीं पाया है।
कानपुर से गिरफ्तारी के बाद जलीस ने अधिकारियों से कहा था, “कोई भी बड़ा आतंकी मेरे बिना कुछ नहीं हैं। जेल में रहकर जो मैं कर सकता हूँ, वह कोई संगठन बाहर रहकर भी नहीं कर सकता।” उसने यह भी दावा किया था कि ‘डेंजरस माइंड’ नामक किताब उसके ऊपर ही है। अगर वे इसे पढ़ेंगे तो उन्हें कई तथ्यों के बारे में जानकारी मिल जाएगी। बता दें कि डेंजरस माइंड किताब को हुसैन जैदी ने लिखा है। हुसैन जैदी मुंबई के रहने वाले और लंबे समय तक उन्होंने अंडरवर्ल्ड समेत आतंकवाद पर बहुत काम किया है।
अंसारी ने बताया था कि मुंबई से भागकर कानपुर वह अपने दो दोस्तों से मिलने आया था। इनमें से एक का इंतकाल हो चुका था और दूसरा अब वहॉं नहीं रहता था। इसके बाद पुलिस को झॉंसा देने के लिए वह एक बच्चे को साथ लेकर मस्जिद से निकल रहा था जब उसे दबोच लिया गया।
अर्णब गोस्वामी के साथ इंडिगो की फ्लाइट में बदसलूकी करने वाले कथित कॉमेडियन कुणाल कामरा लगभग सभी विमान सेवाओं द्वारा निष्कासित किए जाने के बाद अब अपनी व्यक्तिगत विमान सेवा शुरू करने जा रहे हैं। फॉल्ट न्यूज़ द्वारा सत्यापित सूत्रों का कहना है कि चूँकि कुणाल कमरा के निष्कासन की प्रक्रिया इंडिगो से शुरू हुई थी, इसलिए वो अब अपनी सेवा का नाम मोदी-Go या अर्नब-Go कर सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि कुणाल कामरा की इस निजी विमान सेवा में गिरती हुई अर्थव्यवस्था में रोजगार तलाश रहे ध्रुव राठी भी इन्वेस्ट करने पर विचार कर रहे हैं। कुणाल कामरा की इस निजी विमान सेवा में विशेष लाभ युवाओं के उस अल्पसंख्यक वर्ग के लिए रखे जाने की बात सामने आ रही हैं, जो कि कुणाल कामरा के चुटकुलों पर हँसने का जज्बा रखते हों।
टिकट बुकिंग के दौरान उपभोक्ता को कुणाल कमरा के दो सस्ते एवं निहायत ही घटिया (मतलब उनके वीडियो से कोई भी रैंडम) चुटकुले सुनाए जाएँगे, इसके बाद यदि उपभोक्ता टिकट खिड़की पर हँसते हुए पाया जाता है, तो उसके लिए कुणाल कमरा की इस विमान सेवा में 6 महीने की समयावधि के लिए मुफ्त सफर घोषित किया जाएगा। यह खबर सुनते ही ऑटो-रिक्शा से सफर कर के फेसबुक पर IGI एयरपोर्ट पर ‘चेक-इन’ करने वाले ‘HeArT हैकर’ रोनू ने भी कुणाल कमरा जैसे ही अन्य स्वघोषित कॉमेडियंस को पत्रकारों का पीछा करने के बदले स्वरोजगार मॉडल अपनाने की सलाह दी है।
कुणाल कामरा अपनी इस निजी विमान सेवा के लिए प्रधानमंत्री मुद्रा योजना (PMMY) द्वारा लोन लेंगे। उनका कहना है कि ट्विटर पर सस्ते चुटकुले बनाते हुए उन्हें कभी पता ही नहीं चल पाया कि मुद्रा योजना के फायदे स्वरोजगार के लिए भी उठाए जा सकते हैं।
वहीं, ‘व्यंग्य इंडिया कमिटी’ ने फैसला लिया है कि कुणाल कामरा के नाम के आगे कॉमेडियन लिखने वालों को भी आज के बाद से इंडिगो और अन्य राष्ट्रीय विमान सेवाओं से निष्काषित किया जा सकता है। कमेटी ने इस मामले में सख्त एहतियात बरतने के भी निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट लिखे जाने तक यह रिपोर्ट पूरी लिखी जा चुकी थी।
दुनिया की लगभग प्रत्येक एसोसिएशन और एकता मंचों से निष्काषित कुणाल कामरा ने निजी विमान सेवा शुरू करने के अपने फैसले को ऐतिहासिक बताया है। कामरा ने कहा – “गुलामी की जंजीरों से आज़ादी की शान अच्छी, खान्ग्रेसी बिस्कुट से निजी विमान सेवा की दुकान अच्छी”
उन्हें साइकिल, रिक्शा, ठेला, कार, बस, रेलगाड़ी और हवाई जहाज के साथ-साथ इलोन मस्क के SpaceX तक से अनिश्चितकाल तक के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। इसी बीच एक चौंकाने वाली खबर यह भी सामने आई है कि दुनिया की लगभग सभी सेवाओं से बहिष्कृत कुणाल कामरा रात के अँधेरे में, तैर कर गंदे नाले से कहीं आने-जाने का प्रयास कर सकते हैं। NASA द्वारा जारी, न्यूज़लौंडी द्वारा हमें भेजी गई, तस्वीर में यह पाया गया कि कामरा वाक़ई ऐसा कर रहे थे। इसका संज्ञान लेते हुए ‘राष्ट्रीय गंदी नाली यूनियन’ ने फ़ौरन यह चेतावनी जारी कर दी कि कुणाल कामरा को देश की किसी भी गन्दी नाली में पड़े रहने की इजाजत नहीं होगी।
After getting banned from every mode of transport, Kunal Kamra was seen using sewage to travel within city ???? pic.twitter.com/dDfs0aI1dq
दरअसल, कुणाल कामरा अपने मित्र मनुराग कश्यप के साथ फ्राइडे नाइट को जब सस्ता नशा कर के घर लौट रहे थे, उसी वक़्त कुणाल कामरा ने मनुराग कश्यप की किसी फिल्म में प्रयोग हुई एक गाली का प्रयोग मनुराग पर ही कर दिया। यह सुनते ही मनुराग कश्यप ने कुणाल कामरा को अपनी अभिव्यक्ति की आजादी का इस्तेमाल संभल कर करने की राय देते हुए उसकी जमकर फिटनेस बनाई और वहाँ दोनों के बीच जमकर लात-घूँसे चले। इसके बाद अगली सुबह कुछ स्थानीय लोगों को कुणाल कामरा गंदी नाली में पड़े हुए मिले।
इसके साथ ही सूत्रों ने बताया है कि ऑटो रिक्शा एसोसिएशन, अखिल भारतीय कचरा गाड़ी यूनियन और ऑल इंडिया सुलभ शौचालय यूनियन ने भी कुणाल कामरा को अब अपनी संस्थाओं के प्रयोग से बहिष्कृत कर दिया है। फिलहाल कामरा ने मानवाधिकार आयोग का दरवाजा खटखटाया है।
पृथ्वी पर मौजूद तमाम संस्थाओं द्वारा बहिष्कृत होने के बाद अब शायद अंतरिक्ष की किसी अज्ञात आकाशगंगा में ही कोई ऐसी संस्था होगी, जिसके इस्तेमाल से अभी तक कुणाल कामरा को प्रतिबंधित नहीं किया गया है। उस आकाशगंगा की तलाश के लिए मशहूर भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट मनीष सिसोदिया की अध्यक्षता में एक सचल दस्ते का गठन किया गया है।
मशहूर भौतिक विज्ञानी अल्बर्ट मनीष सिसोदिया ने कहा है कि अभी वो मोटर के जरिए आकशगंगा से सम्पर्क साध रहे हैं और वापस किसी आवाज के आने तक उन्हें करीब आधा घंटा इन्तजार करना होगा। उन्होंने यह भी आशंका जताई है कि मोटर द्वारा गलत समय पर सम्पर्क स्थापित करने से आकाशगंगा से ‘नमस्कार, मैं अरविन्द केजरीवाल बोल रहा हूँ, फोन मत काटना’ की आवाज सुनाई देने का खतरा हो सकता है, इसलिए वो जोखिम उठाने के मूड में भी नहीं हैं।
एक नजर ऐसी तस्वीरों पर, जिनमें बढ़ती हुई असहिष्णुता का अनुमान लगाया जा सकता है –
दिल्ली में विधानसभा चुनावों के मद्देनजर इस समय आरोप-प्रत्यारोपों का दौर जारी है। आम आदमी पार्टी प्रदेश में दोबारा से जीत हासिल करने के लिए जमकर प्रचार कर रही है। लेकिन इसी बीच भाजपा और कॉन्ग्रेस भी अपने चुनाव प्रचार के साथ केजरीवाल को सत्ता से हटाने के लिए उनके झूठों का पर्दाफाश कर रही है। इसी क्रम में भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा ने दिल्ली के सीएम केजरीवाल को घेरा। महिला सुरक्षा का मुद्दा उठाते हुए जेपी नड्डा ने केजरीवाल की मंशा पर सवाल उठाए।
‘आप’ कार्यकर्ता रहीं सोनी मिश्रा के साथ आप नेता द्वारा किए यौन उत्पीड़न मामले पर दिल्ली सीएम केजरीवाल ने साक्षात्कार के दौरान पूरी तरह अनभिज्ञ होने की कोशिश की और साक्षात्कार में ये कहा कि वे किसी सोनी सिंह को नहीं जानते। उन्होंने कभी भी किसी से समझौता करने को नहीं कहा। उसी वीडियो को शेयर करते हुए नड्डा ने केजरीवाल को संवेदनहीन बताया।
भाजपा राष्ट्रीय अध्यक्ष ने कहा, “महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान के लिए आप कभी तटस्थ नहीं रहे। आपने यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे अपने नेताओं का बचाव किया। कल आपने ‘आप’ कार्यकर्ता रहीं सोनी मिश्रा पर जो संवेदनहीन बयान दिया, वह घृणा योग्य है।”
केजरीवाल जी, महिलाओं की सुरक्षा व सम्मान के लिए आप कभी तटस्थ नहीं रहे। आपने यौन उत्पीड़न के आरोपों से घिरे अपने नेताओं का बचाव किया। कल आपने ‘आप’ कार्यकर्ता रहीं सोनी मिश्रा पर जो संवेदनहीन बयान दिया, वह घृणा योग्य है।
गौरतलब है कि इसके अलावा जेपी नड्डा ने बुधवार को ये भी कहा कि दिल्ली में ‘पोस्टरबाजी वाली सरकार नहीं, डबल इंजन की भाजपा सरकार’ चाहिए। उन्होंने आम आदमी पार्टी पर जन लोकपाल, स्वराज से मुँह फेरने और सिर्फ़ बातें करने का आरोप लगाया।
नड्डा ने ट्वीट किया, “जन लोकपाल, न स्वराज, केवल अहंकार का राज. केजरीवाल जी, कहाँ है आप का स्वराज विधेयक?’ उन्होंने आरोप लगाया कि केजरीवाल ने स्वराज की केवल बातें की, जिसमें मोहल्ला सभा एवं दिल्ली डायलॉग की बात की। आज तक एक भी सभा नहीं हुई।”
न जन लोकपाल, न स्वराज, केवल अहंकार का राज।
केजरीवाल जी, कहां है AAP का स्वराज विधेयक?
जिसे लेकर स्वराज की बातें की, जिसमें मोहल्ला सभा एवं दिल्ली डायलॉग की बात की। आज तक एक भी सभा नहीं हुई।
जिस ने भी आपकी तानाशाही और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाया, उसे ही पार्टी से निकाल दिया।
जेपी नड्डा ने अरविंद केजरीवाल पर हमला करते हुए आरोप लगाया कि जिसने भी आपकी तानाशाही और भ्रष्टाचार पर सवाल उठाया, उसे ही पार्टी से निकाल दिया। नड्डा ने कहा कि, “दिल्ली में पोस्टरबाजी वाली सरकार नहीं, डबल इंजन की भाजपा सरकार चाहिए।” भाजपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि जो अपने गुरु अन्ना हजारे का नहीं हुआ, वो किसका होगा।
पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद स्थित जांगली क्षेत्र में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) को लेकर चल रहा विरोध प्रदर्शन हिंसक हो गया। हिंसा इतनी ज्यादा भड़क गई कि दो लोगों की मौत हो गई। इस घटना में तीन लोगों के घायल होने की भी ख़बर है। एक मृतक की पहचान अनारुल बिस्वास के रूप में हुई है। उसके शरीर पर गोलियों के निशान मिले हैं। ये घटना बुधवार (जनवरी 29, 2020) के दिन हुई, जब इलाक़े में बंद का आयोजन किया गया था। तभी हिंसा भड़क गई। बंद का आयोजन ‘भारतीय नागरिक मंच’ ने किया था।
आरोप है कि बंद के दौरान ही तृणमूल कॉन्ग्रेस के ब्लॉक प्रमुख ताहिरुद्दीन शेख का काफिला वहाँ पहुँचा और उसमें शामिल लोगों ने प्रदर्शनकारियों पर गोली चला दी। इस गोलीबारी में 2 लोग मारे गए और 3 घायल हुए। गोलीबारी की ख़बर फैलते ही क्षेत्र में हिंसा भड़क गई और लोगों ने बवाल शुरू कर दिया। कई दोपहिया वाहनों में आग लगा दी गई और कई कारों को भी आग के हवाले कर दिया गया। हिंसा की खबरें सामने आने के बाद पुलिस की टीम को मौके पर भेजा गया ताकि स्थितियों पर नियंत्रण किया जा सके।
तृणमूल कॉन्ग्रेस के स्थानीय नेताओं ने तहीरुद्दीन शेख पर लगे आरोपों को ख़ारिज कर दिया है। टीएमसी का कहना है कि इस वारदात के पीछे सीपीएम व कॉन्ग्रेस नेताओं का हाथ है। पार्टी ने आरोप लगाया है कि उसके कार्यकर्ता जब वहाँ से गुजर रहे थे, तब कॉन्ग्रेस और सीपीएम के स्थानीय नेताओं ने उन पर हमला कर दिया। वहीं पुलिस की मानें तो सीएए को लेकर जांगली में दो समूहों के बीच बहस शुरू हो गई जो झड़प में बदल गई। फ़िलहाल घायलों का इलाज मुर्शिदाबाद मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में किया जा रहा है।
#Anti-CAAprotests | Two persons were killed and one injured in a clash between TMC and a local group in West Bengal’s #Murshidabad district on Wednesday, police saidhttps://t.co/7Hpkjf2J1X
उत्तरप्रदेश के अयोध्या के पटरंगा थाना क्षेत्र में खंड पिपरा गाँव में कासिम नाम के मुस्लिम युवक के दूसरे समुदाय की विवाहिता से अवैध संबंधों का खुलासा होने के बाद महिला के ससुर ने अपनी बहू और उसके प्रेमी कासिम की सच में नाक काट दी। मामला तूल पकड़ने के बाद पुलिस ने विवाहिता के ससुर समेत 9 लोगों को गिरफ्तार किया। इनके ख़िलाफ़ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ। आरोपित ससुर का नाम मनीराम है।
न्यूज़ 18 की खबर के अनुसार, मामला 2 संप्रदायों से जुड़ा होने के कारण गाँव में तनाव की स्थिति है। इसे देखते हुए वहाँ पीएसी की तैनाती कर दी गई है। जानकारी के मुताबिक 23 वर्षीय कासिम और 30 वर्षीय महिला के बीच पिछले कई सालों से अवैध संंबंध थे। महिला के पाँच बच्चे होने के बावजूद दोनों एक दूसरे से चोरी-छिपे मिलते थे। महिला का पति रोजगार के कारण पिछले 2 साल से सऊदी अरब में है। इसलिए जब महिला के ससुरवालों को इन सबकी भनक लगी तो उन्होंने खुद ही दोनों को सबक सिखाने की ठानी।
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धीरे-धीरे परिवारवालों ने दोनों की गतिविधियों पर नजर रखनी शुरू की। एक दिन कासिम महिला से मिलने उसके घर पहुँचा तो परिवार वालों ने अचानक धाबा बोलकर घेराबंदी शुरू की और छानबीन करने लगे। मगर, कासिम को इस दौरान महिला ने भूसे में छिपा दिया। जिसकी वजह से वो उस दिन पकड़ में नहीं आया। लेकिन, सोमवार को ये नहीं हो सका।
महिला के घर से निकलकर कासिम जब अपने घर जाने लगा तो पहले से उसकी ताक में बैठे ग्रामीणों ने उसे पकड़ लिया और उसपर जमकर अपना गुस्सा निकाला। जब महिला ने इसका विरोध किया तो गाँव वालों ने दोनों को रस्सी से बाँध दिया और फिर पिटाई की । गाँव वालों ने इस दौरान दोनों की नाक भी काट दी। बाद में सूचना मिलने पर मौके पर पहुँची पुलिस ने उन्हें ग्रामीणों की चंगुल से छुड़ाया।
पटरंगा पुलिस ने दोनों को उपचार के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मवई पहुँचाया। लेकिन हालत गंभीर होने के कारण डॉक्टरों ने दोनों को जिला अस्पताल के लिए रेफर किया और फिर स्थिति देखते हुए उन्हें लखनऊ के ट्रामा सेंटर ले जाया गया।
खबर के अनुसार,दोनों के बीच 5-6 साल से प्रेम प्रसंग और अवैध संबंध था। दोनों ने कोर्ट मैरिज करने की योजना बना रखी थी। विवाहिता का पति विदेश में था, जिसका फायदा उठाकर वे अक्सर कासिम को अपने घर बुला लेती थी और परिवार की नजरों से छिपा कर उसे वहाँ रखती थी। इस दफा भी दो दिन तक उसके घर में छिप कर रहा लेकिन पहले से नजर गड़ाए बैठे परिवार की नजरों को दोनों इस बार धोखा नहीं दे सके।
क्षेत्राधिकारी रुदौली धर्मेंद्र यादव कहना है कि पुलिस ने विवाहिता की तहरीर पर मुकदमा अपराध संख्या 9/ 2020 धारा 147 148, 323, 504, 324, 326, 506 आईपीसी के तहत उसके ससुर मनीराम समेत गाँव के जुलमे, सुखखे, भदरे, नट्टू, लल्लन, प्रदीप कुमार शमशेर और पूरन के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया है। पटरंगा पुलिस ने आरोपित ससुर को गिरफ्तार कर लिया है। यादव ने बताया कि पुलिस इस मामले में विधिक कार्रवाई कर रही है।
आईआईटी बॉम्बे ने हॉस्टल में रह रहे छात्रों के लिए नया सर्कुलर जारी किया है। छात्रों से देश विरोधी और असमाजिक गतिविधियों से दूर रहने को कहा है। डीन आफ स्टूडेंट अफेयर्स की इजाजत के बिना कोई भी पोस्टर या पम्फलेट नहीं बॉंटा जा सकेगा। साथ ही छात्रों से ऐसी बयानबाजी से भी दूर रहने को कहा गया है जिससे अशांति पैदा हो।
उल्लेखनीय है कि शाहीन बाग का मास्टरमाइंड शरजील इमाम भी यहॉं से पढ़ा है। उसे देशद्रोह के आरोप में दिल्ली पुलिस ने मंगलवार को बिहार से गिरफ्तार किया था। शरजील का एक वीडियो सामने आया था जिसमें वह समुदाय विशेष को असम को भारत से काटने के लिए उकसा रहा था।
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार 15 बिंदुओं वाली नियमावली स्टूडेंट्स अफेयर्स के असोसिएट डीन प्रफेसर जॉर्ज मैथ्यू की ओर से भेजी गई है। इसके 10वें प्वाइंट में कहा गया है कि यहॉं रहने वाले लोग किसी भी देश विरोधी, गैर सामाजिक या किसी अवांछनीय गतिविधियों का हिस्सा नहीं बनेंगे। यह सकुर्लर ऐसे वक्त में जारी किया गया है जब पिछले हफ्ते छात्रों के एक समूह ने संस्थान के निदेशक को एक खुला पत्र लिखा था। इसमें परिसर में राजनीतिक गतिविधियों पर रोक को लेकर उनकी आलोचना की गई है।
नए सर्कुलर में कहा गया है कि कैंपस के सुरक्षाकर्मियों को उपद्रवियों पर कार्रवाई करने का पूरी तरह से अधिकार है। इसमें कहा गया है, “भाषण/नाटक/संगीत या अन्य गतिविधियॉं जिससे हॉस्टल का वातावरण खराब हो पूरी तरह से प्रतिबंधित है। फैकल्टी के शिरकत करने पर भी इसकी इजाजत नहीं होगी।”
IIT बॉम्बे द्वारा जारी किया गया सर्कुलर
बताया जा रहा है कि देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों में हुए हिंसक पद्रर्शनों को देखते हुए यह सर्कुलर जारी किया गया है। हालॉंकि नए सर्कुलर पर छात्रों के एक वर्ग ने आपत्ति भी जताई है। खासकर इसमें इस्तेमाल किए गए ‘ऐंटी नेशनल’ शब्द को। कुछ छात्रों ने इसे आंतरिक आपातकाल बताते हुए कहा है कि संस्थान ने यह साफ नहीं किया है कि कौन सी गतिविधियाँ राष्ट्र विरोधी हैं और कौन सी नहीं। इसकी आड़ लेकर संस्थान किसी भी छात्र को फँसा सकता हैं। एक छात्र के मुताबिक दूसरे विश्वविद्यालयों में सीएए के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों को ध्यान में रखते हुए यह सर्कुलर जारी किया गया है ताकि विरोध की आवाज़ को पहले ही शांत किया जा सके।
इससे पहले 9 जनवरी को भी संस्थान ने एक छात्रों और कर्मचारियों के लिए एक सर्कुलर जारी किया था, जिसमें कहा गया था कि कैंपस में ऐसी कोई गतिविध न हो, जिससे हमारे और सरकार के बीच किसी भी प्रकार के संबंध खराब हों। आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले परिसर से तिरंगा यात्रा भी निकाली थी। इस यात्रा में 1000 फीट लंबे तिरंगे के साथ 1,500 से अधिक छात्रों, प्रोफेसरों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों समेत उनके परिवार के सदस्यों ने भाग लिया था। यह यात्रा लगभग साढ़े चार किलोमीटर तक कॉलेज परिसर को जोड़ने वाले रास्ते पर चली। इस मार्च का विषय ‘आईआईटी बॉम्बे फॉर नेशन-बिल्डिंग’ था।
कॉन्ग्रेस नेता अलका लाम्बा दिल्ली विधानसभा चुनाव से पहले कॉन्ग्रेस में लौट आईं। वो 2015 में आम आदमी पार्टी से विधायक बनी थीं लेकिन इस बार वो कॉन्ग्रेस से मैदान में उत्तरी हैं। अलका दिल्ली के चाँदनी चौक से चुनाव लड़ रही हैं। दिल्ली भाजपा के अध्यक्ष मनोज तिवारी भी आजकल इसी क्षेत्र की झुग्गियों में रात्रि प्रवास कर रहे हैं। पुरानी दिल्ली का दिल कहे जाने वाले इस इलाक़े में आम आदमी पार्टी मुफ्त बिजली-पानी योजना का प्रचार करने में लगी है। भाजपा नेता विजय गोयल भी यहाँ पूरा जोर लगा रहे हैं।
चाँदनी चौक का गणित इस बार कुछ ऐसा है कि आप और कॉन्ग्रेस के प्रत्याशी आपस में एक्सचेंज हो गए हैं। 2015 में कॉन्ग्रेस उम्मीदवार रहे प्रह्लाद साहनी इस बार आप से मैदान में हैं। अलका लाम्बा ने ‘दैनिक भास्कर’ को दिए गए इंटरव्यू में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविन्द केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कहा कि दिल्ली के सीएम ने लड़ाई करने और धरना देने में ही 5 साल गुजार दिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली के मुखिया छत्तीसगढ़ और मध्य प्रदेश का दौरा करते रहे लेकिन अपने राज्य पर ध्यान नहीं दिया।
आम आदमी पार्टी के नारे ‘अच्छे बीते 5 साल, लगे रहो केजरीवाल’ को अलका लाम्बा ने मजाक करार दिया। लाम्बा ने कहा कि बीते 5 साल लड़ाई-झगडे और कोर्ट-कचहरी में नज़र आने वाले केजरीवाल को अब बस भी करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि दिल्ली सरकार तो जामा मस्जिद के पास भूमाफियाओं से ज़मीन भी खाली नहीं करा पाई। अलका लाम्बा ने दावा किया कि जहाँ मोहल्ला क्लिनिक बनाए गए, वहाँ कूड़े का ढेर लगा हुआ है।
उन्होंने अपने विधानसभा क्षेत्र की बात करते हुए कहा कि वहाँ के 12 स्कूलों में से 9 बचे हैं। लाम्बा ने प्रदूषण के लिए भी आम आदमी पार्टी की सरकार को घेरा। अलका लम्बा ने पानी की किल्लत और ट्रैफिक जाम के लिए भी केजरीवाल सरकार को जिम्मेदार ठहराया।
उन्होंने कहा कि आप से व्यवस्था-परिवर्तन और स्वराज की बातें गायब हो चुकी हैं। चार बार विधायक रहे प्रह्लाद साहनी के बारे में अलका लाम्बा ने कहा कि जब वो कॉन्ग्रेस में थे, तब केजरीवाल उन्हें भ्रष्ट बताते थे। वहीं जब उन्होंने आम आदमी पार्टी ज्वाइन की, तब केजरीवाल ने उन्हें अपना उम्मीदवार बना लिया। लाम्बा ने कहा कि केजरीवाल एक इनसिक्योर और डरे हुए आदमी हैं। बकौल लाम्बा, केजरीवाल को जिससे भी चुनौती मिलती है उसे दूध में मक्खी की तरह उठा कर फेंक देते हैं।
उदाहरण के तौर पर लाम्बा ने कुमार विश्वास, योगेंद्र यादव, प्रशांत भूषण और आशुतोष का नाम गिनाया। लाम्बा ने चाँदनी चौक से जीत का दावा तो किया लेकिन वयोवृद्ध प्रह्लाद सिंह साहनी और भाजपा उम्मीदवार सुनाम कुमार गुप्ता के सामने उनकी राह आसान नहीं है। गुप्ता पिछले चुनाव में दूसरे नंबर पर रहे थे।
उत्तरप्रदेश के बरेली में एक मुस्लिम महिला को निकाह के 2 साल बाद तक बच्चा नहीं हुआ। पहले ससुराल वालों ने बाँझ बुलाना शुरू किया। मारपीट की। भूखा रखा । एक दिन शौहर ने तीन तलाक दे दिया। महिला के परिजनों ने दबाब डाला तो कहा तो ससुर से हलाला की शर्त रखी। महिला राज़ी नहीं हुई तो ससुराल वालों ने इंजेक्शन दे देकर हलाला कराया। करीब 10 दिन तक महिला का इस तरह रेप किया। फिर मुस्लिम युवक ने दोबारा निकाह किया। लेकिन कुछ साल बाद फिर तीन तलाक दे दिया और इस बार अपने छोटे भाई से हलाला की शर्त रखी।
झारखंड के हजारीबाग में शाहजाद अंसारी ने अपने अब्बा और अम्मी के साथ मिलकर पहले अपनी बीवी शहाना खातून को 12 साल तक प्रताड़ित किया। उसे मारा पीटा। गाली-गलौच की। दूसरा निकाह करने की धमकी दी। एक दिन उसके सामने दूसरी महिला को लाकर घर में रहने लगा। जब शहाना ने इस बारे पूछताछ की तो उसे मारा गया और तीन तलाक दकर घर से निकाल दिया ।
साल 2018 में सऊदी अरब में रह रहे युवक ने यूपी के देवरिया में रह रही अपनी बीवी को तीन तलाक दिया। महिला ने आवाज़ उठाई तो सबके सामने दुबारा कबूल कर लिया। बाद में दबाव बना कर जीजा से उसका हलाला करवाया और फिर रखने से इनकार कर दिया।
बिजनौर की एक मुस्लिम महिला को उसके शौहर ने नशे की हालात में पहले तलाक दिया और फिर उसके साथ सोया। सुबह होते ही उसे मायके छोड़ आया और कहा, ‘तेरा मेरा कोई रिश्ता नहीं, न जिस्मानी, न जुबानी।’ महिला ने अपने ससुराल और मायके में सब कुछ साफ-साफ बता दिया तो बोले ये तलाक नहीं माना जाएगा। क्योंकि दोनों दुबारा सोए थे। लेकिन काज़ी ने इसे तलाक मान लिया। मगर बाद में शौहर बोला कि एक शर्त पर वो उसे साथ रखेगा जब वो हलाला करवा ले। महिला ने अपने बच्चों की खातिर हलाला करवा लिया।
गिनती की घटनाएँ। ऐसी घटनाएँ रोज देश के किसी न किसी कोने से सामने आती ही रहती हैं। जितनी सामने आती हैं उससे कहीं ज्यादा दबा दी जाती हैं। हलाला, बहुविवाह से मुस्लिम महिलाओं को मुक्ति दिलाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका डाली गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि बहुविवाह, हलाला जैसी प्रथाओं को आपराधिक श्रेणी में रखा जाए और ऐसा करने वालों के ख़िलाफ़ सजा तय हो। लेकिन मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड नहीं चाहता की उनकी कौम की महिलाओं को इससे आज़ादी मिले। उसने याचिका का विरोध करते हुए सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि यह शरिया का मसला है।
बहुविवाह प्रथा मुस्लिम व्यक्ति को चार बीवियाँ रखने की इजाजत देता है जबकि ‘निकाह हलाला’ का संबंध पति द्वारा तलाक दिए जाने के बाद यदि मुस्लिम महिला उसी से दुबारा शादी करना चाहती है तो इसके लिए उसे पहले किसी अन्य व्यक्ति से निकाह करना होगा और उसके साथ वैवाहिक रिश्ता कायम करने के बाद उससे तलाक लेना होगा।
एक ओर ये इस्लामिक कट्टरपंथी मुस्लिम महिलाओं को बहुविवाह और हलाला की दीवार के पार तक नहीं देखना देना चाहते। लेकिन, उन्हीं महिलाओं को सीएए विरोध की आड़ में ढाल बनाकर इस्तेमाल कर रहे हैं। लगातार सामने आए वीडियो बताते हैं कि इस विरोध के पीछे जो लोग हैं उनके मंसूबे देश विरोधी हैं। शरजील इमाम के ताजा वीडियो और गिरफ्तारी इसी का एक हिस्सा है। लेकिन, कानून की नजरों से बचे रहने के लिए साजिशन महिलाओं को शाहीन बाग जैसी जगहों पर महीने भर से ज्यादा समय से इन्हीं कट्टपंथियों ने बिठा रखा है।
फिर रामचंद्र गुहा जैसे लोग हैं जो हलाला, बहु विवाह जैसी कुरीतियों से अभिशप्त इन महिलाओं को के इस्तेमाल का बचाव करते हैं। वे कहते हैं कि शाहीन बाग की महिलाएँ सांप्रदायिक कानून, पितृसत्तात्मक राजनीति और हिंसा के खिलाफ लड़ रही हैं। जिस कानून से किसी भारतीय का कोई लेना देना न हो उसका विरोध कर रही महिलाओं का इस तरह समर्थन एक तरह से कट्टरपंथ को प्रोत्साहित ही करना है। जबकि गुहा जैसे लोगों को मुस्लिम महिलाओं को हलाला, बहुविवाह जैसे सांपद्रायिक और पितृसत्तात्मक कानून से मुक्ति पाने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए था।
The women of Shaheen Bagh are opposed to communal laws, patriarchal politics, and violence. No wonder the Home Minister of India does not like them:https://t.co/9nK4jzHtSe
आज मुस्लिम महिलाओं की स्थिति इतनी दयनीय है कि वो जिस मजहब की होने के कारण खुद के अस्तित्व को खतरे में बता रही हैं और पहचान की लड़ाई लड़ने का दावा कर रहीं हैं। उन्हें उसी मजहब के पैरोकारों ने इतना दबाया हुआ है कि उनके लिए इबादत करने की जगह तक सीमित है।
इस दिशा में पत्रकार जिया उस सलाम ने मुस्लिम महिलाओं को मस्जिद में प्रवेश करने और नमाज अदा करने की इजाजत देने की माँग करने वाली याचिका पर हस्तक्षेप आवेदन दाखिल किया है। पिछले साल पुणे स्थित पीरजादे दंपत्ति ने याचिका दाखिल की थी। साथ ही देश भर की मस्जिदों में मुस्लिम महिलाओं के प्रवेश की माँग करते हुए दावा किया था कि इस तरह का प्रतिबंध “असंवैधानिक” और जीवन के मौलिक और समानता के अधिकारों का उल्लंघन है।
ये ध्यान देने वाली बात है कि शाहीन बाग में बैठीं औरतों को ये तक नहीं मालूम होगा कि उन्हें अब तक आखिर बेवजह मस्जिदों में जाने से क्यों रोका गया और क्यों उनके लिए सीमाएँ तय की गई। वास्तविकता में तो उनका खुद का मजहब उन्हें इसकी इजाजत देता है। जिया उस सलाम ने अपनी अर्ज़ी बताया था कि भारत में महिलाओं के लिए मस्जिदों में प्रवेश करने के लिए कोई स्पष्ट प्रतिबंध नहीं है। वहाँ एक मौन प्रतिबंध है, क्योंकि महिलाओं के लिए कोई अलग प्रवेश नहीं है, उनके लिए कोई पृथक क्षेत्र नहीं है। यह प्रथा कुरान और हदीस के सिद्धांतों के खिलाफ है।
कट्टरपंथ की जकड़ से निकलने की असली पहल मुस्लिम महिलाओं को ही करनी होगी। फरहत नकवी, निदा खान जैसी महिलाएँ तीन तलाक से लेकर बहु विवाह जैसी कुरीतियों के खिलाफ लड़ भी रही हैं। इसके लिए इस्लामिक कट्टरपंथी उन्हें निशाना भी बनाते रहे हैं। लेकिन, असल आजादी के लिए हर मुस्लिम महिला को इस मोर्चे पर लड़ना होगा।
फिलहाल तो उन पर कट्टरपंथ का नशा ज्यादा हावी दिखता है। इसलिए, वे हिंदुओं को पटक-पटक कर मारने की बात कर रही हैं।
“Jis din hum Hinduo se zyada ho gaye naah us din hinduo ko raaste me patak patak ke maarenge”. Ganga-Jamuni tehzeeb ? pic.twitter.com/a5LoHBUMhB