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चीन दफनाने की जगह क्यों जलाएगा Corona Virus से मरने वालों को?

चीन में सैकड़ों लोगों की जान लेने वाले वायरस से चिंतित वहाँ के राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने एक नोटिस जारी किया है। इस नोटिस में आयोग ने कहा है कि Coronavirus की चपेट में आने वाले लोगों का (जो इस बीमारी के कारण मारे गए हैं) पास में ही अंतिम संस्कार किया जाना चाहिए। इसे लेकर आयोग ने कई तरह के दिशा-निर्देश जारी किए।

चाइना डेली न्यूज़ के मुताबिक राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने शनिवार को यह बयान जारी किया। इसमें स्पष्ट निर्देश है कि इस जानलेवा वायरस के कारण मारे गए लोगों को दफनाने की जगह उन्हें जलाया जाना चाहिए। साथ ही यह भी कहा गया कि मृत लोगों को बहुत दूर ले जाने से संक्रमण के बढ़ने और फैलने की आशंका है, इसलिए जहाँ जिनकी मृत्यु हुई है, उनका नजदीक ही अंतिम संस्कार (जला देना) किया जाना चाहिए।

अपनी वेबसाइट पर जारी किए गए नोटिस में आयोग ने कहा है कि वायरस से मृत लोगों के शवों को दफनाया नहीं जाना जाहिए और न ही इनके शवों को किसी भी प्रकार से सुरक्षित रखा जाना चाहिए।

आयोग ने चेताया है कि मृत लोगों के अंतिम संस्कार के समय किसी भी प्रकार के आयोजन की आवश्यकता नहीं है। इन सभी सावधानियों को बरतने के साथ वायरस की चपेट में आने वाले मृत लोगों के शवों को चिकित्सा टीम की देखरेख के लिए रखा जाना चाहिए।

आयोग द्वारा यह नोटिस ऐसे समय में जारी किया गया है कि जब कोरोना वायरस चीन से निकल कर विश्व के दूसरे देशों में भी अपने पैर फैला रहा है। चीन की राष्ट्रीय स्वास्थ्य आयोग ने जब यह नोटिस जारी किया और ट्विटर पर लोगों को इसके बारे में पता चला तो सनातन धर्म में शवों को जलाने और इसके पीछे के वैज्ञानिक कारणों के बारे में लोग लिखने लगे।

‘शर्म करो पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो’ – Pak छात्रों ने खुलेआम इमरान सरकार को क्यों कोसा?

AAP ने उतारे सबसे ज्यादा दागी, 70 में से 36 पर गंभीर आपराधिक मामले: करोड़पतियों में कॉन्ग्रेस आगे

साफ-सुथरी राजनीति का वादा कर दिल्ली की सत्ता में आई आम आदमी पार्टी (AAP) ने इस बार सबसे ज्यादा दागी उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं। एसोसिएशन ऑफ डेमोक्रेटिक रिफॉर्म (ADR) के अनुसार दिल्ली विधानसभा चुनाव में किस्मत आजमा रहे 672 प्रत्याशियों में से 133 के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हैं। उम्मीदवारों के हलफनामे का विश्लेषण कर एडीआर ने यह जानकारी दी है। 70 सदस्यीय दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए 8 फरवरी को वोट डाले जाएँगे। नतीजे 11 फरवरी को आएँगे।

आप के 70 उम्मीदवारों में से 42 यानी 60% के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। 51 फीसदी यानी 36 आप उम्मीदवारों पर गंभीर आपराधिक मामले दर्ज हैं। एडीआर ने अपनी रिपोर्ट में कहा है, “विश्लेषण किए गए 672 उम्मीदवारों में से 133 (20 प्रतिशत) उम्मीदवारों ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले घोषित किए हैं। 2015 के दिल्ली विधानसभा चुनावों में 673 उम्मीदवारों के विश्लेषण में 114 (17 प्रतिशत) ने अपने खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होने की जानकारी दी थी।” रिपोर्ट के अनुसार 32 उम्मीदवारों ने शपथपत्र में महिलाओं के खिलाफ आपराधिक मामले का उल्लेख किया है। इनमें से एक पर बलात्कार का और चार पर हत्या के प्रयास से संबंधित मामले दर्ज हैं।

बीजेपी ने 67 उम्मीदवार उतारे हैं। इनमें 26 (39%) के खिलाफ आपराधिक मामले चल रहे हैं। इनमें से 17 (25%) पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं। कॉन्ग्रेस के 66 में से 18 (27%) पर आपराधिक मामले हैं। इनमें से 13 (20%) के खिलाफ गंभीर आपराधिक मामले चल रहे हैं। बसपा के 66 में से 21 (18%) उम्मीदवार दागी हैं। इनमें से 10 (15%) पर गंभीर आपराधिक आरोप हैं। रिपोर्ट के अनुसार 2015 के चुनाव में 71 पार्टियॉं मैदान में थी जो इस बार बढ़कर 95 हो गई है।

संस्था ने उम्मीदवारों की संपत्ति का विश्लेषण भी दिया है। हलफनामे में दिए गए ब्यौरों के मुताबिक सबसे ज्यादा 55 (83%) उम्मीदवार कॉन्ग्रेस के करोड़पति हैं। इसके बाद आप का नंबर आता है। उसके 51 (73%) और बीजेपी के 47 (70%) उम्मीदवार करोड़पति हैं। बसपा के 66 में से केवल 13 (20%) उम्मीदवार ही करोड़पति हैं।

टॉप तीन अमीर उम्मीदवारों की बात करें तो तीनों आप पार्टी से हैं। पहले नंबर पर आप के धर्मपाल लकड़ा हैं। वह मुंडका से चुनाव लड़ रहे हैं। उनके पास 292 करोड़ रुपए की संपत्ति है। दूसरे नबंर पर आरके पुरम से आप की उम्मीदवार प्रमिला टोकस हैं। उनके पास 80.8 करोड़ रुपए की संपत्ति हैं। तीसरे नंबर पर राम सिंह नेताजी हैं। वह बदरपुर से उम्मीदवार हैं। उनकी संपत्ति 80 करोड़ रुपए की है।

रिपोर्ट के अनुसार विधानसभा चुनाव लड़ने वाले उम्मीदवारों की औसत संपत्ति 4.34 करोड़ रुपए की है। रिपब्लिकन पार्टी ऑफ इंडिया (अठावले) की टिकट पर चुनाव लड़ रहे राजेश कुमार की कुल संपत्ति मात्र 3600 रुपए है। शालीमार बाग सीट से निर्दलीय चुनाव लड़ रही पूनम कौशिक छह हजार रुपए की मालिकन हैं। चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों में से 148 निर्दलीय हैं। 224 उम्मीदवार गैर मान्यताप्राप्त दलों से हैं। क्षेत्रीय पार्टियों के 90 और राष्ट्रीय पार्टियों से 210 उम्मीदवार मैदान में हैं।

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‘शर्म करो पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो’ – Pak छात्रों ने खुलेआम इमरान सरकार को क्यों कोसा?

चीन में फैले घातक कोरोना वायरस के कारण मरने वालों की संख्या बढ़कर 304 हो गई है और इससे 14,380 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है। ऐसे में भारत की सरकार अपने लोगों को चीन से बाहर निकाल रही है। लेकिन, पाकिस्तान ने चीन में रहने वाले अपने छात्रों से मुँह मोड़ रखा है। कोरोना वायरस के कारण चीन के वुहान में कई पाकिस्तानी छात्र फँसे हुए हैं, लेकिन पाक की इमरान सरकार ने उन्हें वापस नहीं लाने का फैसला किया है।

पाकिस्तान सरकार की अनदेखी से ये छात्र किस कदर बेबस हैं, इसका अंदाजा सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे एक विडियो से समझा जा सकता है। इस विडियो में भारतीय छात्र अपनी घर-वापसी के लिए बस में बैठते दिख रहे हैं जिसे अपने फोन में रिकॉर्ड कर रहा होता है एक पाकिस्तानी छात्र और साथ ही अपनी सरकार को कोसता भी रहता है।

पाकिस्तानी पत्रकार नायला इनायत ने यह विडियो शेयर किया है, जिसमें एक छात्र अपनी सरकार को शर्म करने के लिए कहते हुए सुनाई पड़ रहा है। वीडियो में एक छात्र खुद को पाकिस्तानी छात्र बताते हुए कहता है, “ये भारतीय छात्र हैं और ये बस इन्हें लेने आई है, जो इनके दूतावास ने भेजी है। वुहान की यूनिवर्सिटी से इस बस से इन छात्रों को एयरपोर्ट ले जाया जाएगा और वहाँ से फिर इन्हें इनके घर पहुँचाया जाएगा। बांग्लादेश वाले भी आज रात यहाँ से ले जाए जाएँगे। एक हम पाकिस्तानी हैं, जो यहाँ पर फँसे हैं। जिनकी सरकार कहती है कि आप मरो या जियो, हम आपको नहीं निकालेंगे। शेम ऑन यू पाकिस्तान, सीखो भारत से कुछ सीखो।”

इसके अलावा एक अन्य वीडियो में तीन पाकिस्तानी छात्र बैठे हैं, जिन्हें पाकिस्तानी सरकार से अब कोई उम्मीद नहीं बची है और वह अब अपनी आर्मी से मदद की गुहार लगा रहे हैं। वीडियो में एक छात्र ने कहा, “कभी तो लगता है कि हम लावारिस है, हमारे पीछे कोई मुल्क ही नहीं है। चार दिनों से सरकार से अपील कर रहे हैं, लेकिन इन्होंने मना कर दिया। आर्मी से हमें उम्मीद है, हम पाकिस्तानी आर्मी से अपील करते हैं प्लीज हमें जल्द से जल्द यहाँ से निकाला जाए।”

बता दें कि कोरोना वायरस के कहर से जूझ रहे चीन के वुहान में फँसे भारतीय लोगों को एयर इंडिया की दो फ्लाइट वहाँ से एयरलिफ्ट किया गया है, वहीं पाकिस्तान सरकार ने वायरस के खतरे के डर से उन्हें चीन से निकालने से मना कर दिया है। द एक्‍सप्रेस ट्रिब्‍यून ने नेशनल हेल्‍थ सर्विस पर पाकिस्‍तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के विशेष सहायक जफर मिर्जा के हवाले से बताया है कि सरकार अपने नागरिकों को चीन के वुहान शहर से नहीं निकालेगी। तीन छात्रों वाले इस वीडियो में भी छात्रों जफर मिर्जा के बयान का हवाला दिया है।

पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान खान के अलावा वहाँ के राष्ट्रपति आरिफ अल्वी भी सरकार के निर्णय पर कुरान और पैगंबर मोहम्मद का उदाहरण देते हुए उसे सही ठहराते हैं।

चीन दफनाने की जगह क्यों जलाएगा Corona Virus से मरने वालों को?

ससुर से करो हलाला, तभी करूँगा दोबारा निकाह: बीबी को तलाक देकर बोला शौहर आदिल खान

मध्‍य प्रदेश के ग्वालियर में तीन तलाक का मामला सामने आया है। 26 वर्षीय महिला ने थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि शौहर ने तीन तलाक देकर ससुर के साथ हलाला करने का दबाव बनाया। पुलिस ने महिला के शौहर आदिल खान, ससुर आजाद खान व देवर आबिद खान के खिलाफ दहेज प्रताड़ना व छेड़छाड़ का केस दर्ज कर लिया है।

जानकारी के मुताबिक, पीड़िता का निकाह सीपरी बाजार झाँसी निवासी युवक से चार वर्ष पूर्व हुआ था। महिला का आरोप है कि उसका शौहर शराब के नशे का आदी है। इसका फायदा उठाकर उसके ससुर व देवर उसके साथ शारीरिक संबंध बनाने के लिए दबाव डालते थे। पुलिस को पीड़ित महिला ने बताया कि उसके शौहर और ससुर ने पहले तो निकाह के बाद से ही कार माँगना शुरू कर दिया और जब माँग पूरी नहीं हुई तो उसे और उसके ढाई साल के बच्चे से मारपीट कर झाँसी स्थित ससुराल से निकाल दिया। उसके बाद से पीड़िता मायके में रहती थी।

26 जनवरी को उसका शौहर उसके पास आया और जान से मारने की धमकी देकर शिकायत वापस लेने के लिए कहा। पीड़िता ने शिकायत वापस लेने से इनकार कर दिया तो 28 जनवरी को दोबारा आदिल और उसके ससुर मायके आए। इस दौरान आदिल ने पीड़िता के साथ मारपीट की और फिर तीन बार तलाक बोलकर रिश्ता खत्म कर दिया। साथ ही यह भी कहा कि अगर उससे दोबारा निकाह करना है तो पहले हलाला करवाना होगा। आदिल ने कहा कि वो अपने पिता से उसका निकाह कराएगा, फिर पिता से तलाक दिलाकर खुद उससे निकाह करेगा। मगर पीड़िता ने पति द्वारा तीन तलाक देने और फिर हलाला के नाम पर ससुर के साथ हमबिस्तर होने की शर्त को नहीं कबूला।

शौहर आदिल के खिलाफ मुस्लिम महिला विवाह अधिकार संरक्षण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है तो वहीं ससुर आजाद खान और देवर आबिद खान के खिलाफ छेड़छाड़ और दहेज एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया है। फिलहाल पुलिस मामले की जाँच कर रही है और साथ ही आरोपितों को पकड़ने की भी कोशिश की जा रही है।

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CAA के समर्थन में हिंदूवादी नेता रंजीत बच्चन ने की थी रैली, 1 दिन पहले ही मनाया था जन्मदिन

लखनऊ के हजरतगंज में मूल रूप से गोरखपुर के रहने वाले विश्व हिन्दू महासभा के अध्यक्ष रंजीत बच्चन की दिनदहाड़े सिर में गोली मार कर तब हत्या कर दी गई, जब वो मॉर्निंग वॉक पर निकले हुए थे। इस हत्या की ख़बर के सामने आते ही लोगों के जेहन में पिछले साल के कमलेश तिवारी हत्याकांड की यादें ताज़ा हो गईं। कमलेश तिवारी का गला रेत डाला गया था और उन्हें गोली भी मारी गई थी। ताज़ा वारदात की बात करें तो यूपी पुलिस की 6 टीमें जाँच में लगी हुई है, लेकिन अपराधियों का कोई सुराग अभी नहीं लगा है।

उनकी हत्या के बाद पुलिस उनके सोशल मीडिया अकाउंट्स खँगालने में भी जुटी हुई है। कमलेश तिवारी हत्याकांड के 3 आरोपित हाल ही में जमानत पर बाहर निकले हैं। जिस तरह कमलेश को सोशल मीडिया के जरिए फँसाया गया, रंजीत वाले मामले में भी पुलिस इस कोण से जाँच कर रही है। उनके परिजनों व मिलने-जुलने वालों से जानकारी जुटाई जा रही है। पता चला है कि हमलावर ने अपने मुँह को शॉल से ढक रखा था। वो अपने साथ रंजीत के दो मोबाइल फोन भी ले गया है।

लखनऊ में पुलिस कमिश्नर सिस्टम लागू होने के बाद ये पहली बड़ी वारदात है, जो प्रदेश की क़ानून-व्यवस्था को चुनौती देते हुए नज़र आ रही है। अखिल भारतीय हिन्दू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणि ने कहा है कि ये वारदात मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को अपराधियों की सीधी चुनौती है।

हजरतगंज सर्कल के कमिश्नर अभय मिश्रा ने बताया कि हत्यारों ने रंजीत से एक कॉल करने के बहाने उनका मोबाइल फोन माँगा। इसके बाद उन्हें नजदीक से सिर में गोली मारी गई। सीसीटीवी फुटेज की भी जाँच की जा रही है। वहीं, उनके मौसेरे भाई आदित्य भी इस गोलीकांड में घायल हो गए, जिनका इलाज ट्रामा सेंटर में चल रहा है। 1 दिन पहले शनिवार (फरवरी 1, 2020) को ही उन्होंने अपना जन्मदिन मनाया था। उनके साले मनोज कुमार शर्मा ने कहा कि रंजीत ने सीएए और एनआरसी के समर्थन में रैली भी आयोजित की थी।

रंजीत बच्चन बॉलीवुड के महानायक अमिताभ बच्चन के बहुत बड़े फैन थे। वो हिन्दू संगठन में सक्रिय होने से पहले समाजवादी पार्टी में काफ़ी दिनों तक रहे थे। साइकिलिंग के लिए विख्यात अपनी पत्नी कालिंदी निर्मल शर्मा से साथ रंजीत बच्चन ने शांति सद्भावना साइकिल यात्रा भी पूरी की थी। कालिंदी का साइकिलिंग के लिए नाम लिम्का बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज है। रंजीत भी साइकिल चलाने के शौक़ीन थे। उन्होंने साइकिल से ‘सद्भावना यात्रा’ पूरी करते हुए 1.32 लाख किलोमीटर की दूरी तय की थी। वो मूल रूप से गोरखपुर जिले के गोला के अहरौली पंचगाँवा के रहने वाले थे।

उन्होंने फरवरी 4, 2002 को कालिंदी निर्मल शर्मा के साथ ये यात्रा शुरू की थी। उन्होंने भारत, भूटान, बांग्लादेश, नेपाल और बर्मा के बॉर्डर एरिया को साइकिल से छान मारा था। उन्होंने कुल मिला कर एक लाख बत्तीस हजार दो सौ पचास किमी की यात्रा तय कर भारत के 28 राज्‍यों और केन्द्र शासित प्रदेशों की यात्रा पूरा की थी। उनकी ये यात्रा 7 साल 10 महीने 13 दिन तक चली थी। दिसंबर 18, 2009 को एमपी इंटर कॉलेज उनकी इस यात्रा का अंतिम पड़ाव बना था।

वहीं कालिंदी निर्मल शर्मा की बात करें तो वो कुशीनगर के नेबुआ नैरंगिया के बैरवा पाट्टी की रहने वाली हैं। रंजीत गोरखपुर प्रेस क्लब में भी सक्रिय रहे हैं और वो साल 2004 के दौरान अक्सर वहाँ देखे जाते थे। उस समय वह गोरखपुर में कई सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करते थे और उनमें बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते थे। किन्हीं कारणों से पत्नी के साथ उनके संबंधों में दरार आ गई रही। उस मामले में एक केस भी चल रहा था।

वहीं रंजीत पहले समाजवादी पार्टी से भी जुड़े रहे हैं। ततकालीन सपा सरकार ने ही उन्हें राजधानी की ओसीआर बिल्डिंग में फ्लैट आवंटित किया था। सपा मुखिया अखिलेश यादव ने इस हत्याकांड के बाद योगी सरकार को घेरा है। सपा ने आरोप लगाया कि लोगों का पुलिस पर विश्वास ख़त्म हो गया है और लखनऊ में दहशत का माहौल है, इसलिए योगी आदित्यनाथ को इस्तीफा दे देना चाहिए। सपा ने योगी सरकार को ‘निकम्मी’ करार दिया।

कहा जा रहा है कि आज रंजीत और उनकी पत्नी अलग-अलग मॉर्निंग वाक के लिए निकले थे। उनकी हत्या के बाद घर पर समर्थकों का हुजूम उमड़ पड़ा। वहीं कॉन्ग्रेस पार्टी ने इस हत्याकांड पर मुख्यमंत्री को घेरते हुए कहा कि योगी आदित्यनाथ अब सिर्फ़ भाषण मंत्री बन कर रह गए हैं।

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MP: स्कूल में CAA-NRC पर चर्चा से भड़का NSUI, कॉन्ग्रेस छात्र संगठन के कार्यकर्ताओं ने की तोड़फोड़

मध्य प्रदेश में मंडला के एक प्राइवेट स्कूल भारत ज्योति में NSUI (National Students Union of India) के कार्यकर्ताओं द्वारा तोड़फोड़ करने का मामला सामने आया है। स्कूल के नौवीं कक्षा में शिक्षक द्वारा नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) पर चर्चा करने पर कॉन्ग्रेस छात्र संगठन के कार्यकताओं ने तोड़फोड़ और हंगामा किया।

घटना 31 जनवरी की बताई जा रही है, लेकिन दो दिन बीत जाने के बाद भी पुलिस ने इनके खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की है। स्कूल के प्रबंधन ने पुलिस को दी अपनी शिकायत में कहा है कि एनएसयूआई के कार्यकर्ता परिसर में पहुँचे और कक्षा 9 के शिक्षक से मिलने के लिए प्रवेश करने की अनुमति माँगी।

शिकायत में आगे कहा गया कि जब प्रबंधन ने उन्हें प्रवेश देने से मना कर दिया, तो कार्यकर्ताओं ने गालियाँ दीं और तोड़फोड़ की। इसका वीडियो भी सामने आया है। इसमें NSUI कार्यकर्ता टिफिन बॉक्स को भी लात मारते हुए नजर आए। NSUI नेता अक्कू ठाकुर ने शिक्षक पर ‘मुस्लिम विरोधी मानसिकता’ होने का आरोप लगाते हुए कहा, “शिक्षक ने पूछा कि क्या कक्षा में कोई मुस्लिम छात्र हैं। एक लड़की थी लेकिन वो चुप रही। शिक्षक ने तब छात्रों को बताया कि मुस्लिमों को अच्छे के लिए देश से बाहर निकाला जा रहा है। लड़की ने बाद में अपने अभिभावकों को इसके बारे में बताया और वे हमारे संपर्क में आए।”

NSUI कार्यकर्ता ने आगे कहा, “यहाँ तक ​कि बुजुर्ग भी CAA या NRC के बारे में ज्यादा नहीं जानते हैं। अगर आप इस तरह से छात्रों को पढ़ाते हैं तो वो विभाजनकारी मानसिकता के साथ बड़े होंगे।” NSUI कार्यकर्ता से जब स्कूल में तोड़फोड़ के बारे में सवाल पूछा गया तो उन्होंने शिक्षक के खिलाफ कार्रवाई नहीं करने के लिए स्कूल प्रबंधन की आलोचना करते हुए कहा, “आमतौर पर हम ऐसे काम नहीं करते हैं लेकिन जब नहीं सुनी जाती तो हम क्या करेंगे।”

हालाँकि स्कूल प्रशासन ने पुलिस से इसकी शिकायत करते हुए सुरक्षा की माँग की है और साथ ही कहा कि शिक्षक बच्चों के साथ CAA और NRC पर सामान्य चर्चा कर रहीं थीं। इस घटना को लेकर ABVP ने जिला अधिकारियों को एक ज्ञापन सौंपा है, जिसमें NSUI के खिलाफ कार्रवाई करने की माँग की गई। जिला एबीवीपी के संयोजक मंगलेश चक्रवर्ती ने कहा, “एक छात्र ने उत्सुकतावश एक प्रश्न पूछा था। यह कानून संसद द्वारा पारित किया गया है, इसके बारे में बात करने में क्या गलत है। यह किसी विशेष समुदाय के खिलाफ नहीं है। अगर प्रशासन NSUI कार्यकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई नहीं करता है, तो हम सड़कों पर उतरेंगे।”

वहीं मध्य प्रदेश बीजेपी प्रवक्ता रजनीश अग्रवाल ने कॉन्ग्रेस को आड़े हाथों लेते हुए ट्वीट किया है। इसमें उन्होंने सवाल किया है, “कमलनाथ जी क्या मध्यप्रदेश में कानून का राज बिल्कुल समाप्त करने का ठाना है कॉन्ग्रेस ने? CAA के विरोध के नाम पर ये कैसा उपद्रव? इन गुंडों पर सख्त कार्रवाई होगी या नहीं?”

प्रोफेसर को राहुल गाँधी पर फेसबुक पोस्ट पड़ा भारी, NSUI के विरोध के कारण MU ने उन्हें अनिवार्य ‘छुट्टी’ पर भेजा

कॉन्ग्रेस NSUI की राष्ट्रीय महासचिव ने सावरकर को बताया गद्दार, कहा- ‘कालिख पोत कर ठीक किया’

छात्रा से छेड़-छाड़ के आरोप में NSUI जिलाध्यक्ष इरफ़ान गिरफ़्तार

‘देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को’ पर झूठ फैला रहा था साकेत गोखले, दिल्ली पुलिस ने खोली पोल

‘सामाजिक कार्यकर्ता’ साकेत गोखले ने दावा किया था कि दिल्ली पुलिस ने उसे ‘देश के गद्दारों को, गोली मारो सालों को’ नारे के साथ प्रदर्शन की अनुमति दी थी। दिल्ली पुलिस ने साकेत के दावों को खारिज कर दिया है।

नई दिल्ली के डीसीपी ने ट्विटर पर साकेत के दावों को झूठा और निराधार बताते हुए कहा, “यह स्पष्ट किया जाता है कि साकेत गोखले को 2 फरवरी 2020 की रैली की इजाजत नहीं दी गई है। सोशल मीडिया में एक कॉपी को सर्कुलेट किया जा रहा है जिसमें रैली को इजाजत देने की बात लिखी गई है, जबकि ऐसा कुछ भी नहीं है।”

साकेत गोखले का ट्वीट

बता दें कि साकेत गोखले ने इसको लेकर ट्वीट किया था। इसमें 28 जनवरी को पुलिस को लिखे एक पत्र को पोस्ट करते हुए उसने लिखा, “दिल्ली पुलिस ने मुझे  ‘देश के गद्दारों को गोली मारो सालों को’ नारे के साथ रैली करने की अनुमति दी है। यह अनुमति आज मुझे तब दी गई जब मैं पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन गया। लगता है इस नारे को राज्य की अनुमति प्राप्त है।”

इसके बाद उसने दूसरे ट्वीट में एक और झूठ फैलाते हुए लिखा कि पुलिस ने उसे जानकारी दी है कि चुनावी आचार संहिता लगे होने के कारण इस नारे के साथ प्रदर्शन में ‘दिक्कत’ हो सकती है। गोखले ने लिखा है कि उससे अब आग्रह किया गया है कि वह अपना प्रदर्शन आठ फरवरी के बाद कर लें।

साकेत गोखले का दूसरा ट्वीट

साकेत के ट्वीट में आप देख सकते हैं कि उसने जो आवेदन पोस्ट किया है, वो दिल्ली पुलिस से परमिशन लेने के लिए लिखा गया था। उसने ऐसा कोई पत्र शेयर नहीं किया है, जिसमें लिखा गया हो कि दिल्ली पुलिस ने उन्हें इस प्रदर्शन के लिए अनुमति दे दी है। उसके पत्र में पुलिस की एक मुहर लगी है, जिसका मतलब होता है कि पुलिस को वो आवेदन प्राप्त हुआ। ये एक सामान्य प्रक्रिया है। इसमें कहीं भी यह नहीं लिखा गया है कि पुलिस ने मंजूरी दी है। इस मुहर का ये मतलब कतई नहीं होता कि रैली की परमिशन दे दी गई है।

साकेत गोखले के इस झूठे दावे के बाद कई मीडिया हाउस ने रिपोर्ट की कि दिल्ली पुलिस ने देश के गद्दारों को गोली मारो सालों के नारे के साथ रैली करने की परमिशन दे दी है। इसमें वामपंथी प्रोपेगेंडा साइट द वायर से लेकर कॉन्ग्रेस मुखपत्र नेशनल हेराल्ड और फाइनेंशियल पोर्टल मनीकंट्रोल तक शामिल है। यह जानने के बाद भी कि साकेत के दावे का कोई सबूत नहीं है, द वायर ने खबर चलाई कि दिल्ली पुलिस ने अनुमति दी थी, लेकिन फिर बाद में पीछे हट गई।

शरजील तेरे सपनों को मंजिल तक पहुँचाएँगे: मुंबई में CAA विरोध के नाम पर कश्मीर की ‘आज़ादी’ के पोस्टर

“शरजील तेरे सपनों को मंजिल तक पहुँचाएँगे।”

मुंबई में शनिवार (फरवरी 1, 2020) को आयोजित क्वीर प्राइड परेड में यह नारा काफ़ी देर तक गूँजता रहा। सीएए विरोधी प्रदर्शनकारियों ने देश के ‘टुकड़े-टुकड़े’ वाली मानसिकता का परिचय दिया। मुंबई के आज़ाद मैदान में आयोजित इस रैली में सीएए विरोधियों ने ‘लेस्बियन, गे, बाइसेक्सुअल, ट्रांसजेंडर’ हितों की बात करने का दावा करते हुए सीएए के ख़िलाफ़ अपना प्रोपेगेंडा चलाया और भ्रम फैलाया। एनआरसी और एनपीआर को लेकर भी अफवाहें फैलाई गईं।

क्वीर आज़ादी मुंबई प्राइड मार्च के लिए अगस्त क्रांति मैदान में रैली करने की अनुमति नहीं दी गई थी। इसके बाद सीएए विरोधियों ने मुंबई पुलिस से ‘सॉलिडेरिटी मार्च’ के लिए अनुमति ली। इसके लिए शनिवार को दोपहर 3 बजे से शाम 6 बजे तक का समय निर्धारित किया गया। इस रैली में न सिर्फ़ शरजील इमाम के समर्थन में नारे लगाए गए बल्कि कई बैनर-पोस्टरों के जरिए सीएए और एनआरसी का भी विरोध किया गया। विरोध तो सीएए, एनआरसी और एनपीआर का हो रहा था लेकिन नारे ‘आज़ादी’ के लग रहे थे।

एक बैनर में तो ‘कश्मीरी की आज़ादी’ की ही माँग कर डाली गई। इससे पहले मुंबई पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को ‘आज़ादी मार्च’ निकालने की अनुमति नहीं दी थी और कहा था कि इससे क़ानून-व्यवस्था को बिगाड़ने की कोशिश की जा सकती है। इसके बाद मीडिया ने उद्धव सरकार की आलोचना भी की थी। अब जब रैली हुई तो इसमें ‘राजीव तेरे सपनों को, रावण तेरे सपनों को, पायल तेरे सपनों को- हम मंज़िल तक पहुँचाएँगे’ जैसे भड़काऊ नारे लगाए गए।

बता दें कि शरजील इमाम फ़िलहाल दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच के शिकंजे में है और उसे यूपी पुलिस द्वारा ले जाए जाने की संभावना है। शरजील से पूछताछ के दौरान कई खुलासे हुए हैं और उसकी जिहादी मानसिकता का पता लगा है। वो मस्जिदों में सीएए के ख़िलाफ़ भड़काऊ पंफलेट बाँटा करता था। उसके मोबाइल फोन, कम्प्यूटर और लैपटॉप की भी जाँच की जा रही है।

पूछताछ में शरजील ने अपने वायरल हो रहे बयानों को भी सच बताया। उसके गिरफ़्तार होने के बाद अब शाहीन बाग़ का प्रदर्शन भी कमजोर पड़ता दिख रहा है और उपद्रवी वहाँ से निकलने के लिए तरह-तरह से बहाने बनाने में जुटे हैं।

जिन्ना बनना चाहता था शरजील इमाम: मस्जिदों में बँटवाए थे भड़काऊ पर्चे, फोन व लैपटॉप जब्त

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भारत को इस्लामिक मुल्क बनाना चाहता है शरजील इमाम, पूछताछ में माना- वीडियो से नहीं हुई छेड़छाड़

शाहीन बाग़ के 50 दिन: मंसूबे फेल हुए तो भीड़ जुटाने के लिए उपद्रवियों ने दिया इश्तेहार

आम आदमी पार्टी (AAP) ने चुनाव आयोग को एक पत्र लिखा है। मुख्य चुनाव आयुक्त को लिखे पत्र में पार्टी ने दावा किया है कि असामाजिक तत्व कुछ राजनीतिक दलों के संरक्षण में बड़ी हिंसा की तैयारी कर रहे हैं। आम आदमी पार्टी ने कहा कि उसे सूत्रों से पता चला है कि रविवार (फ़रवरी 2, 2020) को बड़ी हिंसा की साज़िश रची जा रही है, जिसे क़ानून-व्यवस्था को अस्त-व्यस्त किया जा सके और दिल्ली में होने वाले चुनाव की तारीख को आगे बढ़ाया जा सके।

आप ने चुनाव आयोग से दरख्वास्त की है कि वो दिल्ली पुलिस व अन्य एजेंसियों को निर्देश देकर तुरंत इस मामले की जाँच कराए, जिससे किसी भी प्रकार की आपराधिक साज़िश को रोका जा सके।

दरअसल, शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों ने हाल ही में कई इश्तेहार जारी किया है, जिसमें 2 फ़रवरी को प्रदर्शन के 50 दिन पूरे होने के मौके पर बड़ी संख्या में लोगों से जमा होने को कहा गया है। प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि पिछले 50 दिनों में उनके ‘लोकतान्त्रिक और शांतिपूर्ण’ प्रदर्शन के दौरान उन्हें डराने-धमकाने और ख़तरे में डालने की कोशिश की गई। प्रदर्शनकारियों ने कहा कि उनलोगों के ख़िलाफ़ गलतबयानी करते हुए घृणा फैलाई जा रही है। इन सबके लिए शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने भाजपा और हिन्दू सेना को जिम्मेदार ठहराया है।

शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों की विज्ञप्ति: बहानों की पोटली

प्रदर्शनकारियों ने दावा किया है कि शनिवार को एक व्यक्ति ने पिस्तौल लहराते हुए धरनास्थल पर फायरिंग की, जिससे बुजुर्ग महिलाओं व बच्चों को ख़तरा उत्पन्न हो गया है। प्रदर्शनकारियों की विज्ञप्ति में दावा किया गया है कि हिन्दू सेना ने उन्हें जिहादी बताते हुए 2 फ़रवरी को उन्हें हटाने की योजना बनाई है। इस विज्ञप्ति में जामिया नगर में फायरिंग करने वाले नाबालिग का भी जिक्र किया गया है और दावा किया गया है कि हिन्दू महासभा उसे सम्मानित करेगी। दिल्ली चुनाव की बात करते हुए प्रदर्शनकारियों ने अपील की है कि 2 फ़रवरी को लोग ज्यादा से ज्यादा संख्या में जुटें और उनके प्रति मज़बूती से खड़े होने का सन्देश दें।

शाहीन बाग़ के उपद्रवियों ने अपने विरोध-प्रदर्शन को अहिंसक करार दिया। हिन्दू महासभा की धमकी, जामिया नगर फायरिंग और शाहीन बाग़ फायरिंग के नाम पर लोगों से भीड़ जुटाने की अपील की जा रही है। ये शाहीन बाग़ के उपद्रवियों की हताशा का भी परिणाम है, जिन्हें खुल कर किसी भी राजनीतिक पार्टी का समर्थन नहीं मिल रहा है और उसका सरगना शरजील इमाम देशद्रोह के आरोप में पुलिस के शिकंजे में है। ऐसे में, कहा जा रहा है कि शाहीन बाग के उपद्रवी विरोध-प्रदर्शन बंद करने का कोई न कोई बहाना ढूँढ रहे हैं।

इश्तेहारों के जरिए शाहीन बाग़ में भीड़ जुटाने का प्रयास

जामिया नगर और शाहीन बाग़ में हुई फायरिंग की घटनाओं में कोई क्षति नहीं पहुँची है। दोनों ही घटनाओं में आरोपित अकेला था और पुलिस द्वारा पकड़े जाने के बाद उसने अपना नाम-पता सब कुछ बताया। ऐसे कई संगठन हैं जो बिना बात भी धमकियाँ देते रहते हैं, लेकिन ग्राउंड पर उनका कोई असर नहीं होता। ऐसे में इन चीजों को बहाना बना कर इश्तेहारों के जरिए भीड़ जुटाने का प्रयास बताता है कि शाहीन बाग़ के उपद्रवियों के मंसूबे फेल हो चुके हैं।

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नाबालिग को घर से उठाया, गैंगरेप के बाद मर्डर: 7 दिन बाद मिली लाश, पोस्टमार्टम के लिए MP पुलिस ने माँगी रिश्वत

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री कमलनाथ के गृह जिले छिंदवाड़ा में नाबालिग आदिवासी लड़की की बलात्कार के बाद हत्या का मामला सामने आया है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार शव जंगल से बरामद किया गया। मृतका के परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम के लिए पुलिस ने उनसे रिश्वत की मॉंग की।

परिजनों के मुताबिक 18 जनवरी को बदमाशों ने लड़की को उसके घर से अगवा कर लिया। 25 जनवरी को उसका सड़ा गला शव जंगल में मिला। मृतका पांढुर्णा क्षेत्र के पाटई गाँव की रहने वाली थी। परिजनों के अनुसार पोस्टमार्टम करवाने के लिए पुलिस ने ₹5000 की रिश्वत मॉंगी। परिजनों ने पैसे नहीं दिए तो उन्हें शव ले जाने को कहा। पुलिस ने शव ले जाने के लिए वाहन देने के बदले में भी 1 हजार की रिश्वत माँग की।

जानकारी के मुताबिक नाबालिग के माता-पिता 18 जनवरी को खाना खाने के बाद खेत में सिंचाई करने के लिए चले गए थे। नाबालिग घर में अकेली थी और उसकी दादी दूसरे कमरे में सो रही थी। तभी रात के 11 बजे आरोपित लड़की को उठाकर जंगल में ले गए और उसकी हत्या कर दी। शव को छोड़कर आरोपित वहाँ से फरार हो गए। परिजनों ने इसकी शिकायत पुलिस से की, लेकिन स्थानीय पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की। इसके बाद वो शनिवार (फरवरी 1, 2020) को शिकायत लेकर छिंदवाड़ा के एसपी के पास पहुँचे और घटना की जानकारी देते हुए आरोपितों के लिए फाँसी की सजा की माँग की।

बीजेपी नेता और प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इस घटना पर आक्रोश व्यक्त करते हुए एक के बाद एक लगातार तीन ट्वीट किए। उन्होंने अपने पहले ट्वीट में लिखा, “नरपिशाचों के हौसले इतने बुलंद हैं कि मुख्यमंत्री कमलनाथ जी के क्षेत्र पांढुर्णा के पाटई गाँव से 17 साल की बेटी को उठा ले गए। बलात्कार के बाद नृशंस हत्याकर जंगल में फेंक दिया। बेटी की आत्मा को तब तक शांति नहीं मिलेगी, जब तक अपराधियों को फाँसी के फँदे पर नहीं लटका दिया जाता है।”

दूसरे ट्वीट में उन्होंने लिखा, “पांढुर्णा के पाटई गाँव की बेटी की आत्मा की शांति और परिजनों को यह गहन पीड़ा सहन करने की शक्ति देने की प्रार्थना करता हूँ। बेटी के सम्मान और जीवन से खेलने वाले नराधामों को उनके किये की सज़ा दिलाए बिना चैन से नहीं बैठूँगा।”

उन्होंने अपने तीसरे ट्वीट में इस घटना को निर्भया गैंगरेप से बड़ी घटना बताते हुए लिखा, “यह निर्भया कांड से ज़्यादा बड़ी घटना है। यह निकृष्टता की पराकाष्ठा है, क्रूरता की परिसीमा है। अभी भोपाल के मनुआभान टेकरी की दिवंगत पीड़िता को न्याय नहीं मिला, एक के बाद एक प्रदेश में ऐसी घटनाएँ हो रही हैं और सरकार चैन की नींद सो रही है। सरकार कब तक अपनी अकर्मण्यता का परिचय देगी?”

वहीं लावाघोंघरी थाना प्रभारी कौशल सूर्या का कहना है कि मृतका के परिजनों ने लड़की के लापता होने के बाद शिकायत नहीं कराई थी। उन्हें इसकी जानकारी 25 जनवरी को हुई। उन्होंने कहा कि अब तक दुष्कर्म की पुष्टि नहीं हुई है। दो युवकों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। जल्द ही पूरे मामले का खुलासा किया जाएगा।

नई दुनिया के छिंदवाड़ा संस्करण में 2 फरवरी 2020 को प्रकाशित खबर

नई दुनिया के मुताबिक कौशल सूर्या ने बताया कि नाबालिग के विजय और महेंद्र नाम के युवकों से प्रेम संबंध थे। विजय और महेंद्र 18 जनवरी को पीड़िता को उठाकर जंगल ले गए और फिर वहाँ पर हुई कहासुनी के बाद दोनों आरोपितों ने नाबालिग की गला घोंटकर हत्या कर दी और फरार हो गए। बताया जा रहा है कि दोनों आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया गया है और फिर न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। पुलिस आगे की जाँच कर रही है।

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