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12 साल पहले असलम की बीवी से शाहरुख को हुआ प्यार, मोहसिन संग मिल कर दी हत्या

मध्यप्रदेश में भोपाल के गाँधीनगर इलाके में 27 जनवरी की रात हुई असलम नामक ऑटो चालक की नृशंस हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली। आरोपितों की पहचान शाहरुख और महोसिन के तौर पर हुई है। असलम की बीवी से शाहरुख एकतरफा प्यार करता था। उसे हासिल करने के लिए ही उसने हत्या की साजिश रची थी।

नई दुनिया में प्रकाशित खबर

नई दुनिया की खबर के अनुसार, पुलिस ने असलम के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल जाँची और संदेह के आधार पर उसके परिचित शाहरुख और मोहसिन उर्फ छोटू को हिरासत में लिया। सीएसपी लोकेश सिन्हा के अनुसार सख्ती से पूछताछ के बाद दोनों ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। शाहरुख ने बताया कि वह करीब 12 साल पहले असलम के पड़ोस में रहता था, तभी से असलम की पत्नी से एकतरफा प्रेम करने लगा था। असलम के रहते वह उसे कभी हासिल नहीं हो सकती थी। इसके लिए उसने असलम को रास्ते से हटाने की योजना बनाई। साजिश में उसने मोहसिन को भी शामिल कर लिया।

साजिश के तहत आरोपितों ने असलम को पहले सामान शिफ्ट करवाने के बहाने करोंद चौराहे पर बुलाया। असलम ऑटो लेकर वहाँ पहुँचा तो शाहरुख़ उसमें बैठ गया। मोहसिन अपनी बाइक से उनके आगे चलने लगा। रास्ते में असलम को भांग वाला पान खिलाया गया और अब्बास नगर चलने को बुलाया। थोड़ी देर बाद असलम जब नशा चढ़ा तो दोनों उसे लेकर महावीर अस्पताल के पास एक सुनसान जगह पर चले गए। वहाँ पहले असलम का गला घोंटा और फिर चाकू घोंप उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसे गड्ढे में डालकर फरार हो गए।

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जलील कुणाल कामरा अर्णब को कर रहा है पर्सनल मैसेज भेजकर परेशान, ट्वीट में बताया खुद को बुद्ध का अनुयाई

रिपब्लिक न्यूज़ चैनल के एडिटर अर्णब गोस्वामी से इंडिगो की फ़्लाइट में बदतमीजी करने के बाद कुणाल कामरा के अर्नब गोस्वामी पर व्यक्तिगत हमले बढ़ते जा रहे हैं। कुणाल कामरा ने अपने ट्विटर अकाउंट से एक स्क्रीनशॉट ट्वीट करते हुए लिखा है- “मुझे अर्णब का नंबर मिला, मैं अभी भी उन्हें डिबेट करने के लिए पूछ रहा हूँ लेकिन वो जवाब नहीं दे रहे हैं।” इसी ट्वीट में रिपब्लिक न्यूज़ चैनल को टैग करते हुए कामरा ने लिखा है क्या उनके एडिटर कायर हैं या राष्ट्रवादी?

कुणाल कामरा द्वारा शेयर किए गए स्क्रीनशॉट में लिखा है- “मिस्टर गोस्वामी, यह मेरा नंबर है और जब भी आपको लगे कि आप मुझसे राष्ट्रवाद और राष्ट्र के विचार पर डिबेट कर सकते हैं तो मुझसे इसी नंबर पर सम्पर्क कर सकते हैं। आपके प्रति मेरी सारी नाराजगी का कारण मेरा भूतकाल है। मैं बुद्ध और महावीर का अनुयाई हूँ और आपसे शांतिपूर्वक बहस करना चाहता हूँ। यही बात मैं शुरू से कहता आया हूँ। मैं कुणाल कामरा हूँ और मुझे कोई खेद नहीं है।”

कामरा के इस ट्वीट के बाद ट्विटर पर कुणाल कामरा के जबरन किसी व्यक्ति का मोबाइल नंबर निकालकर उसे परेशान करने और उसका पीछा किए जाने को लेकर कामरा की निंदा की जा रही है क्योंकि यह आईटी अधिनियमों का उलंघन है। और इसके लिए कुणाल कामरा पर कार्रवाई की जा सकती है।

ज्ञात हो कि NDTV के प्रोपेगैंडा पत्रकार रवीश कुमार भी अक्सर हर जगह शिकायत करते देखे जाते हैं कि उन्हें उनके वॉट्सएप नंबर पर अनजान लोग सन्देश भेजते हैं। हो सकता है कि कुणाल कामरा जैसे ही कुछ अन्य बुद्ध और भगवान् महावीर के अनुयाई रवीश कुमार के साथ भी एक शांतिपूर्ण बहस करना चाहते हों।

गौरतलब है कि कुणाल कामरा ने रिपब्लिक न्यूज़ के संस्थापक अर्णब गोस्वामी के साथ बदसलूकी की थी। इसके बाद इंडिगो सहित अन्य विमान सेवा कंपनियों ने भी फ्लाइट में उड़ान भरने के लिए 6 महीनों के लिए प्रतिबंधित कर दिया है। इसी बौखलाहट में अब कुणाल कामरा व्यक्तिगत हमलों पर उतर आया है।

मोहम्मद मकबूल की ट्रक में सवार हो आए जैश आतंकी: CRPF जवानों पर गोलीबारी, जवाबी कार्रवाई में 3 ढेर

जम्मू-कश्मीर में बड़े हमले को अंजाम देने के मंसूबे से सीमा पार से आए तीन आतंकियों को सेना ने मार गिराया है। इनके पास से 6 हथियार बरामद किए गए हैं। पुलिस ने उस ट्रक के ड्राइवर और कंडक्टर को भी गिरफ्तार कर लिया है जिसमें सवार होकर आतंकी आए थे। एक अन्य आतंकी की तलाश में सर्च ऑपरेशन चलाया जा रहा है।

पुलिस महानिदेशक दिलबाग सिंह ने बताया कि तीन से चार आतंकवादी ट्रक में सवार होकर जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग से होते हुए घाटी की ओर जा रहे थे। शुक्रवार तड़के बान टोल नाका के पास जब ट्रक को रोका गया तो आतंकवादियों ने सीआरपीएएफ के जवानों पर गोलीबारी की। इसमें एक जवान घायल हो गया। जवाबी कार्रवाई में जवानों ने तीन आतंकवादियों को मार गिराया। एक आतंकी अंधेरे का फायदा उठाकर जंगल की ओर भाग निकला। उसकी तलाश में सुरक्षा बल व्यापक तलाशी अभियान चला रहे हैं।

सेना की मुठभेड़ में मारे गए तीनों आतंकी जैश-ए-मोहम्मद के सदस्य बताए जा रहे हैं। पुलिस महानिदेशक ने आशंका जताई है कि आतंकियों ने कठुआ, हीरानगर सीमा से घुसपैठ की होगी। जिस ट्रक में सवार होकर ये आतंकी गुजर रहे थे उसके ड्राइवर मोहम्मद मकबूल और कंडक्टर को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। ट्रक ड्राइवर अनंतनाग का निवासी बताया गया है। पुलिस दोनों से पूछताछ कर रही है।

उधर, एक आतंकी की खोज में जारी तलाशी अभियान को ध्यान में रखते हुए आसपास के सभी स्कूलों और डिग्री कॉलेजों में उधमपुर जिलाधिकारी ने एक दिन का अवकाश घोषित कर दिया है। साथ ही जम्मू-श्रीनगर हाइवे पर पर यातायात भी बंद कर दिया गया है। कटरा में वैष्णो देवी यात्रा मार्ग पर सुरक्षा कड़ी कर दी गई है।

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उर्मिला मातोंडकर का आँकलन गलत, रॉलेट एक्ट जैसा कानून मोदी सरकार नहीं, कॉन्ग्रेस लाई थी

लोकसभा चुनावों के मद्देनजर कॉन्ग्रेस का हाथ थामकर राजनीति के मैदान में उतरने वाली कॉन्ग्रेस की पूर्व नेता उर्मिला मातोंडकर ने गुरुवार को सीएए के ख़िलाफ़ बोलते हुए मोदी सरकार द्वारा लाए गए कानून की तुलना ब्रिटिश समय में लागू हुए रॉलेट कानून से की। मातोंडकर ने महात्मा गाँधी की पुण्यतिथि के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में ये टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि 1919 के रॉलेट एक्ट की तरह 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।

उर्मिला कहा, “1919 में दूसरे विश्व युद्ध के खत्म होने बाद अंग्रेज यह समझ गए थे कि हिंदुस्तान में उनके खिलाफ असंतोष बढ़ रहा है। ऐसे में उन्होंने रॉलेट एक्ट जैसे कानून को भारत में लागू किया। वर्ष 1919 के इस रॉलेट एक्ट और 2019 के नागरिकता संशोधन कानून को अब इतिहास के काले कानून के रूप में जाना जाएगा।”

हालाँकि, ये बात साफ है कि उर्मिला मातोंडकर ने सीएए के साथ रॉलेट एक्ट की तुलना मोदी सरकार की छवि को तार-तार करने के लिए किया। लेकिन शायद इस दौरान वे ये नहीं समझ पाईं कि रॉलेट एक्ट क्या था और सीएए क्या है। और आखिर क्यों भूलकर कर भी इनके बीच तुलना नहीं होनी चाहिए।

दरअसल, रॉलेट कानून ब्रिटिश सरकार द्वारा भारत में उभर रहे राष्ट्रीय आंदोलन को कुचलने के उद्देश्य से निर्मित कानून था। इसके अनुसार ब्रिटिश सरकार को यह अधिकार प्राप्त हो गया था कि वह किसी भी भारतीय पर अदालत में बिना मुकदमा चलाए उसे जेल में बंद कर सके। लेकिन, मोदी सरकार द्वारा लाया गया कानून तो केवल इंसानियत की सतह पर है। जिसके तहत पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बांग्लादेश के सताए लोगों को एक छत मिलेगी। इसलिए इन दोनों कानूनों को एक दूसरे से जोड़ना, वो भी सिर्फ़ इसलिए कि एक बड़ा तबका इसका विरोध कर रहा है, निराधार है।

अगर वाकई आजाद भारत के इतिहास में किसी कानून की तुलना उर्मिला मातोंडकर को रॉलेट एक्ट से करनी है। तो वो उसी पार्टी की देन है। जिसके सहारे वो साल 2019 में राजनीति में आईं।

साल 1971 में इंदिरा काल में आया मीसा कानून था। एक ऐसा विवादस्पद कानून जिसमें कानून व्यवस्था बनाए रखने वाली संस्थाओं को बहुत अधिक अधिकार दे दिए गए और आपातकाल के दौरान (1975-1977) इन्ही में कई संशोधन करके देखते ही देखते राजनीतिक विरोधियों को उनके घरों से, ठिकानों से उठाकर जेल में डाल दिया गया। कहा जाता है कि इस कानून के तहत इंदिरा गाँधी पूरी तानाशाह हो गई थीं। इस कानून के तहत करीब 1 लाख लोगों को जेल में डाला गया था। इसका इस्तेमाल खासकर अपने विपक्षियों, पत्रकरों और सामाजिक कार्यकर्ताओं को जेल में डालने के लिए किया गया था।

पूर्व खुफिया अधिकारी RSN सिंह ने खोली देश विरोधी ताकतों की पोल, बताई CAA विरोध की असली वजह

देश के जाने माने रक्षा विश्लेषक, पूर्व रॉ अधिकारी और रिटायर्ड कर्नल आरएसएन सिंह ने राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर देश विरोधी ताकतों पर जोरदार हमला बोला। उन्होंने ‘Defensive Offence’ नामक यूट्यूब चैनल पर नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और उसको लेकर हो रहे विरोध प्रदर्शन पर बोला। उन्होंने शाहीन बाग में मुस्लिम महिलाओं द्वारा किए जा रहे विरोध प्रदर्शन पर निशाना साधते हुए कहा, “इनका कहना है कि आपने  पाकिस्तान से तो हमें पुरस्कृत कर दिया है और अब हमारे लोग वहाँ से आते रहेंगे तो आपको कॉन्सोलेशन प्राइज देते रहना होगा। तब तक, जब तक कि हिन्दुस्तान इस्लामिक मुल्क नहीं बन जाता है और वही है गजवा-ए-हिंद।”

वीडियो में ये बातें आप शुरुआत से 4:00 मिनट तक सुन सकते हैं

कर्नल आरएसएन सिंह ने कश्मीर की मस्जिद से आने वाली आवाज को लेकर कहा कि अगर आप अभी नहीं सँभले तो वो दिन दूर नहीं जब सभी मस्जिद से ऐसा ही आह्वान होगा। उन्होंने आगे कहा, “ये जो आप देख रहे हैं वो CAA का विरोध नहीं है। इनको दर्द है अनुच्छेद 370 का, इनको दर्द है राम मंदिर का, इनको दर्द है बालाकोट एयरस्ट्राइक का। लेकिन इतना मैं बता दूँ कि 200 रुपए के बिजली बिल के लिए अपने देश को मत नीलाम करो। 200 रुपए के बिजली बिल के लिए पंचर वाले तुम्हारे बहू-बेटी का ऐसी की तैसी कर देगा कि तुम जिंदगी भर याद करोगे कि ये 200 रुपए के साथ हमने क्या पाप किया था।”

उन्होंने कहा कि ये इनकी हिंदुओं के प्रति नफरत है और ये नफरत ऐसी है जैसे कि अगर मुझे एड्स हो गया तो सभी को हो जाए। कुछ लोग बचे हुए क्यों हैं। उन्होंने आगे हिन्दुस्तान को नार्थ ईस्ट से काटने की धमकी देने वाले शरजील इमाम के बारे में बात करते हुए कहा कि वो ये बातें ऐसे ही नहीं बोल रहा है। वो ये सारी बातें एक साजिश के तहत बोल रहा है। इस दौरान उन्होंने सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) को समझाते हुए कहा कि शरजील इमाम ने जो भी कहा है वह एक बहुत बड़े साजिश का हिस्सा है। 

उन्होंने इसके देश के खिलाफ योजना को समझाने के लिए नॉर्थ में कश्मीर, साउथ में केरल और ईस्ट में पश्चिम बंगाल का उदाहरण दिया और बताया कि इसकी योजना काफी समय पहले से बनाई जा रही थी। उन्होंने कहा कि पश्चिम बंगाल की डेमोग्राफी बदलने के लिए कई सालों से सुनियोजित तरीके से काम चल रहा था और उसी के तहत आज शरजील इमाम सिलीगुड़ी कॉरिडोर यानी चिकन नेक के बारे में बात कर रहा है, क्योंकि वहाँ का डेमोग्राफी काफी बदल गया है। उसका संदर्भ यही है।

CAA पर हिंसा: कानपुर से PFI के 5 सदस्य गिरफ्तार, मेरठ के 12 खातों में डाला गया पैसा

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम देश के कई हिस्सों में हिंसा हुई है। उत्तर प्रदेश के कानपुर सहित कई अन्य जिलों में हुई हिंसा के सिलसिले में चरमपंथी इस्लामी संगठन PFI (पॉपुलर फ्रंट ऑफ़ इंडिया) के पाँच सदस्यों को गिरफ्तार किया गया है। PFI पर कानपुर के बाबूपुरवा और यतीमखाना में हिंसा भड़काने का आरोप है। बता दें कि कानपुर में हुई हिंसा में दर्ज एफआईआर में कई आरोपी बनाए गए जिनमें इन पाँचों के नाम भी शामिल थे। पुलिस ने इन पाँचों के नाम मोहम्मद उमर, सैयद अब्दुल, फैज़ान, वासिफ और सरवर बताए हैं।

इससे पहले प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी जाँच के बाद दावा किया था कि CAA के ख़िलाफ़ प्रदर्शनों में हिंसा भड़काने, आगजनी करवाने के लिए इस्लामिक कट्टरपंथी PFI ने ही अपना पैसा लगाया है। कथित तौर पर कपिल सिब्बल और इंदिरा जय सिंह जैसे कॉन्ग्रेसियों एवं सुप्रीम कोर्ट के वकीलों की भी भूमिका बताई गई थी। 73 सिंडिकेट बैंक अकॉउंट की पड़ताल से खुलासा हुआ था कि पूरी हिंसा को भड़काने में इनमें 120 करोड़ रुपए डाले गए। बाद में इन खातों से कुछ पैसे छोड़कर शेष रकम निकाल ली गई।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में प्रकाशित खबर

CAA विरोध के नाम पर 20 दिसंबर को मेरठ में भी हिंसा हुई थी। इसमें SDPI और PFI की अहम भूमिका सामने आई थी। बताया जा रहा है कि मेरठ में भी PFI ने 12 खातों में रकम भेजी थी। यह रकम रिहैबिलिटेशन इंडिया एनजीओ के माध्यम से फंडिंग की गई थी। पुलिस इस एनजीओ की भी पड़ताल कर रही है। एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि अभी तक की जानकारी में ये बात सामने आई है कि PFI ने चार खातों में तीन करोड़ की रकम भेजी थी। इसके साथ ही हिंसा में अहम भूमिका निभाने वाले परवेज, आलम, अमजद, जावेद, अनीस खलीफा और अनस एवं SDPI के सदस्यों के खातों की डिटेल माँगी गई है।

आपको बता दें कि पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया एक उग्र इस्लामी कट्टरपंथी संगठन है जिसे पिछले ही वर्ष झारखंड में प्रतिबंधित किया गया था। ये कदम राज्‍य सरकार ने इस संगठन के राष्ट्र विरोधी गतिविधियों में शामिल होने की शिकायत के बाद उठाया था। झारखंड सरकार ने माना था कि पीएफआई एक ऐसा संगठन है जो आतंकवादी संगठन आईएस से प्रभावित है। केरल में भी इस संगठन को प्रतिबंधित करने को लेकर वर्ष 2018 में काफी बवाल हुआ था। हालाँकि, विरोध के बाद राज्‍य सरकार ने पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने से साफ इनकार कर दिया था।

पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया का गठन वर्ष 2006 में नेशनल डेवलपमेंट फ्रंट के सफल होने के बाद किया गया था। धीरे-धीरे इस संगठन से दूसरे कट्टरवादी सोच रखने वाले संगठन भी जुड़ते चले गए। वर्तमान में पीएफआई का असर 16 राज्यों में है और 15 से ज्यादा मुस्लिम संगठन इससे जुड़े हुए हैं। पीएफआई की एक महिला विंग भी है। यूपी और असम में हिंसक प्रदर्शनों में शामिल रहने से पहले भी यह संगठन कई तरह की गैर कानूनी गतिविधियों में शामिल रहा है।

कानपुर में CAA पर हिंसा: दंगाइयों ने पुलिस पर तेज़ाब और पेट्रोल बम से किया हमला, 50 गिरफ़्तार-12 को लगी गोली

UP पुलिस पर गोलीबारी करने वाला PFI का खलीफा गिरफ़्तार, CAA विरोध में जुमे के दिन हुई थी हिंसा

मेरठ में दंगाइयों ने की थी 30 पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश: पुलिस ने जारी किए वीडियो

50 साल बाद हाई स्कूल में हुई सरस्वती पूजा, मुस्लिम छात्रों के कारण गाँव में पैदा हो जाता था तनाव

झारखंड के गिद्धौर में गुरुवार (जनवरी 30, 2109) को एक हाई स्कूल में लगभग 50 साल बाद धूमधाम से सरस्वती पूजा मनाई गई। इस दौरान भारी संख्या में पुलिस बल मौजूद थी। बता दें कि मंझगांवातरी हाई स्कूल की स्थापना 1972 में प्राथमिक विद्यालय के तौर पर हुई थी। 2006 में इसे मध्य विद्यालय का दर्जा दिया गया। फिर 2010 में उच्च विद्यालय का दर्जा प्राप्त हुआ।

इस विद्यालय में सालों से सरस्वती पूजा को लेकर दो समुदायों के बीच विवाद चल रहा था। स्कूल में पढ़ने वाले अधिकांश छात्र मुस्लिम थे। इस वजह से हिंदू छात्र सालों तक सरस्वती पूजा नहीं मना सके। दैनिक जागरण की खबर के मुताबिक इस साल यहाँ धूमधाम से पूजा की गई।

इस मौके पर प्रखंड विकास पदाधिकारी पूनम कुजूर, मजिस्ट्रेट स्कूटिव अजय भगत, डीएसपी वचन देव कुजूर, थाना प्रभारी सुशील कुमार, पंचायती राज पदाधिकारी मोहम्मद नसीमउद्दीन अंसारी, प्रतिनियुक्त दंडाधिकारी रूपेश महतो समेत जिला पुलिस बल के जवान तैनात थे।

जानकारी के मुताबिक इस विद्यालय में पहले अधिकतर मुस्लिम छात्र ही पढ़ते थे, लेकिन उत्क्रमित मध्य व उच्च विद्यालय बनने के साथ ही इस विद्यालय में हिदू समुदाय के बच्चे भी पढ़ने लगे। जिसके बाद विद्यालय में सरस्वती पूजा करने की माँग उठने लगी। मगर मुस्लिम बच्चों की बच्चों की वजह से कई वर्षों से सरस्वती पूजा को लेकर गाँव में तनाव की स्थिति भी उत्पन्न हो जाती थी और पूजा नहीं हो पाती थी।

इस बार विद्यालय के बच्चों ने सरस्वती पूजा मनाने को लेकर 28 जनवरी 2020 को ब्लॉक ऑफिस और स्थानीय पुलिस स्टेशन में आवेदन दिया। जिसके बाद प्रशासन ने सरस्वती पूजा के एक दिन पहले ही विद्यालय में पुलिस के जवान तैनात कर दिया। फिर गुरुवार के छात्रों ने विद्या की देवी माँ सरस्वती की प्रतिमा स्थापित कर पूजा-अर्चना की और पूजा संपन्न होने के बाद पूरे विधि-विधान के साथ प्रतिमा का विसर्जन किया गया।

ममता के बंगाल में सरस्वती पूजा को लेकर हिन्दू छात्रों को पीटा गया, शिक्षक ने टॉयलेट में छिपकर बचाई जान

अमेरिका की पहली हिन्दू सांसद तुलसी गबार्ड ने मनाई सरस्वती पूजा, कहा गर्व है हिन्दू होने पर

CUSAT के कुलपति को झुकना पड़ा: पहले कहा ‘हम सेक्युलर संस्थान हैं’, फिर सरस्वती पूजा करने की अनुमति प्रदान की

महिला ने पूर्व क्रिकेटर से कहा- इस्लाम कबूल कर लो, इनकार किया तो बोली- पेशाब पीने वाले…

पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटर दानिश कनेरिया एक बार फिर अपने हिंदू धर्म के कारण चर्चा में हैं। पिछले दिनों हिंदू होने की वजह से पाकिस्तानी क्रिकेट टीम में उनके साथ भेदभाव होने की बात सामने आई थी। अब सोशल मीडिया के जरिए एक मुस्लिम महिला ने उनसे इस्लाम कबूल करने की अपील की है। जब कनेरिया ने इससे इनकार कर दिया तो महिला ने कहा कि पेशाब पीने वालों को कौन समझाएँ।

खुद को कनेरिया की गेंदबाजी का प्रशंसक बताने वाली यह महिला है आमना गुल। उसने ट्वीट कर ने कनेरिया से कहा, “आप प्लीज इस्लाम कबूल कर लीजिए। इस्लाम सोना है। इस्लाम के बगैर कुछ भी नहीं है। आप की जिंदगी मौत की तरह है। आप इस्लाम कबूल कर लीजिए।”

कनेरिया ने इस पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा, “आप जैसे कई लोगों ने मेरा धर्म बदलवाने की कोशिश की, लेकिन किसी को कामयाबी नहीं मिली।” लेकिन इस जवाब के बाद महिला भड़क गई और हिंदुओं पर निशाना साधते हुए लिखा, “मैं पेशाब पीने वालों को नहीं समझा सकती। तुम लोग जीते। मैं हारी।”

दानिश और महिला फैन के बीच हुई इस बातचीत के बाद कई पाकिस्तानियों ने दानिश के ट्वीट पर कमेंट किया और कहा कि इस्लाम कबूल करना या नहीं करना आपका फैसला है। लेकिन वो (महिला फैन) सिर्फ़ आपको धर्म बदलने का न्योता दे रही हैं। बाकी और कुछ नहीं। लेकिन आपसे इस तरह के रिप्लाई की हमें उम्मीद नहीं थी।

गौरतलब है कि #ASKDANISH सेशन में एक अन्य यूजर ने भी दानिश से सवाल किया कि पाकिस्तान में उनपर धर्म परिवर्तन का दबाव है तो क्या वे पाकिस्तान में सेफ महसूस नहीं करते? जिस पर कनेरिया ने लिखा- “मैं सेफ हूँ। मैंने पहले भी कहा कि कुछ लोगों ने कोशिश की थी। शब्दों के साथ न खेलें।”

बता दें दानिश ने इस सेशन में कई लोगों के सवालों के जवाब दिए। लेकिन अमाना गुल द्वारा की गई अपील ने दानिश को फिर से सुर्खियों में ला दिया। एक यूजर के सवाल के जवाब में उन्होंने कहा भी उन्हें सबसे ज्यादा धार्मिक भेदभाव से डर लगता है।

‘हिंदू दानिश कनेरिया हमारे साथ क्यों खाता है?’ – Pak क्रिकेट टीम का घिनौना सवाल और अख्तर का जवाब

हिन्दू होने के कारण दानिश के साथ पाक में हुआ भेदभाव: इमरान को पत्र लिखकर कहा- हालत बहुत ख़राब है

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शाहीन बाग के टुकड़े-टुकड़े! देर रात चला ड्रामा… मीडिया से बात करने पर बँटे प्रदर्शनकारी

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में शाहीन बाग में बैठे प्रदर्शनकारियों के बीच मतभेद की ख़बरें आ रही है। गुरुवार की रात इसकी झलक दिखाई पड़ी। जानकारी के अनुसार, देर रात प्रदर्शनस्थल पर मीडिया से बातचीत करने को काफी ड्रामा हुआ। पहले सोशल मीडिया पर खबर आई कि वहाँ प्रदर्शनकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाले हैं और जब सभी मीडियाकर्मी उसे कवर करने पहुँचे तो मालूम चला कि ये अफवाह है। इतना ही नहीं, मौक़े पर पहुँची मीडिया को वहाँ रिकॉर्डिंग भी नहीं करने दिया और फौरन चले जाने को कहा जाने लगा। स्थिति देखकर स्पष्ट हो गया कि कुछ लोग वहाँ मीडिया से बात करना चाहते थे, लेकिन कुछ प्रदर्शनकारियों के कारण ऐसा मुमकिन नहीं हो पाया।

गुरुवार की रात करीब 9:30 बजे तक शाहीन बाग में होने वाली प्रेस कॉन्फ्रेंस की सूचना पूरे सोशल मीडिया पर फैल चुकी थी। साहिल मुर्ली मेंघानी नामक पत्रकार, जो कि शाहीन बाग के प्रदर्शन को लगातातर कवर कर रहे हैं, ने 9:26 पर अपने ट्विटर पर लिखा कि शाहीन बाग में गुरुवार को रात 11 बजे एक अर्जेंट प्रेस कॉन्फ्रेंस होने वाली है। इसके बाद उन्होंने ट्वीट कर बताया कि प्रेस कॉन्फ्रेंस उस सड़क को लेकर होगी जिसे प्रदर्शनकारियो ने ब्लॉक नहीं किया, बल्कि वो पुलिस बैरिकेडिंग के कारण बंद है।

कई मीडिया संस्थानों के अनुसार वे शाहीन बाग में प्रेस कॉन्फ्रेंस के लिए बिलकुल तैयार थे। कयास लग रहे थे कि प्रेस कॉन्फ्रेंस जामिया के नजदीक हुए वाकये पर होगा या राजनेताओं के बयान को लेकर। मगर, उन्हें क्या पता था कि यह शाहीन बाग ड्रामे की शुरुआत है। कुछ ही देर में साहिल का एक और ट्वीट आया और उन्होंने कहा कि शाहीन बाग में कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं होने वाली, क्योंकि प्रदर्शनकारियों का कहना है कि किसी ने फेक न्यूज फैलाई है।

इसके बाद साहिल ने ये भी बताया कि शाहीन बाग पर कुछ प्रदर्शनकारी प्रेस कॉन्फ्रेंस करना चाहते हैं, जबकि कुछ इससे मना कर रहे हैं। इसके बाद पता चला कि शाहीन बाग के कुछ प्रदर्शनकारी सड़क को खुलवाना चाहते हैं, क्योंकि वे उसका इस्तेमाल नहीं कर रहे। जबकि कुछ इसका विरोध कर रहे हैं। उनका मानना है कि अगर उन्होंने वो साइड खोल दी तो जैसे मार्च के दौरान गोली चली वैसे उन पर भी कोई हमला कर सकता है।

इतने ड्रामे के बाद शाहीन बाग में कोई प्रेस कॉन्फ्रेंस नहीं हुई। जो रोड बंद थी, वो बंद रही और प्रदर्शनकारी दो गुटों में बँटे दिखाई दिए। मीडिया को वहाँ से फौरन जाने को कहा गया। साथ ही ये भी कहा गया कि उन्हें वहाँ रिकॉर्डिंग करने की अनुमति नहीं है। इसलिए वो कैमरा बंद कर दें और मोबाइल से भी कोई रिकॉर्डिंग न करें।

उल्लेखनीय है कि कल रात शाहीन बाग में मीडिया से बातचीत को लेकर हुए प्रदर्शनकारियों में मतभेद के बाद वहाँ एक-दूसरे पर स्टेज से चप्पलें फेंकी जाने की भी सूचना है। लेकिन इस वाकये के पुख्ता सबूत न होने के कारण ऑपइंडिया इस खबर की पुष्टि नहीं करता।

सुधीर चौधरी और दीपक चौरसिया से डरे हुए क्यों हैं शाहीन बाग के सफेदपोश?

शाहीन बाग में कहाँ से आ रहा है दाना-पानी: आसिफ तूफानी ने उगल दिए सारे राज

मेरठ से लापता किशोरी शाहीन बाग में मिली, शहजाद पर अगवा करने और धर्म परिवर्तन की कोशिश का आरोप

यूपी के मेरठ से लापता हुई किशोरी को पुलिस ने ढूँढ लिया है। किशोरी दिल्ली के शाहीन बाग से बरामद की गई। यह इलाका आजकल सीएए के खिलाफ विरोध और अपने कट्टरपंथी एजेंडे को लेकर चर्चा में है। पुलिस ने आरोपित शहजाद को भी गिरफ्तार कर लिया है। उस पर किशोरी को बहला-फुसलाकर ले जाने का आरोप है। यह भी कहा जा रहा है कि वह किशोरी का धर्म परिवर्तन कराना चाहता था। लेकिन उससे पहले ही यूपी पुलिस ने उसे दबोच लिया।

किशोरी मेरठ के परतापुर के सोरखा गाँव की रहने वाली है। कुछ दिनों पहले ही उसकी मुलाकात शहजाद से हुई थी और फिर 25 जनवरी को वह गायब हो गई। किशोरी के परिजनों ने आरोपित के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई थी। किशोरी के परिजनों ने शिकायत में आरोप लगाया कि शहजाद उसे अगवा कर जबरन उसका धर्म परिवर्तन करना चाहता है। इसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए अपहृत किशोरी को मंगलवार (जनवरी 28, 2020) को दिल्ली के शाहीन बाग से बरामद किया। किशोरी से पूछताछ के बाद आरोपित शहजाद को गिरफ्तार किया।

दैनिक जागरण के मेरठ संस्करण में 29 जनवरी 2020 प्रकाशित खबर

इस घटना को लेकर हिंदू संगठनों के लोगों ने भी विरोध जताया है। परतारपुर के इंस्पेक्टर आनंद कुमार मिश्रा के हवाले से दैनिक जागरण की रिपोर्ट में बताया गया है कि शहजाद ने शनिवार को फोन कर किशोरी से संपर्क किया और उसे झॉंसे में लेकर दिल्ली चला गया। देर रात किशोरी के घर न लौटने पर परिजनों ने थाने में शिकायत की थी। एसपी सिटी डॉ. एएन सिंह का कहना है कि युवक से पूछताछ की जा रही है जबकि किशोरी के बयान दर्ज किए गए हैं। सीओ ब्रह्मपुरी चक्रपाणि त्रिपाठी का कहना है कि यह मामला अपहरण का है या नहीं, इसकी जाँच की जा रही है।

गौरतलब है कि बीते साल मेरठ की एक हिंदू युवती के इसी तरह झॉंसे में आकर दुबई चली जाने की खबर सामने आई थी। मेरठ के कंकड़खेड़ा के एक व्यापारी की बेटी पाकिस्तानी युवक नदीम ख़ान के चंगुल में फँस कर दुबई भागी थी। हालॉंकि करीब एक महीने बाद दिसंबर में वह घर लौट आई थी। 8 नवंबर को घर से कुछेक हज़ार रुपए लेकर निकली युवती ने बताया था, “मुझे नौकरी का झाँसा देकर पाकिस्तानी युवक नदीम इक़बाल ने बुलाया था, लेकिन वो मुझे दुबई में नहीं मिला। भारतीय दूतावास और केरल की एक फैमिली की मदद से मैं अपने घर लौट सकी हूँ।”

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