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इस बार हम डरने के इरादे से मैदान में नहीं हैं: इमरान प्रतापगढ़ी

नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध प्रदर्शन के नाम पर जगह-जगह हो रहे उपद्रवों में कुछ चेहरे हैं जो घूम-घूम कर लोगों को भड़काने में लगे हैं। इनमें से एक चेहरा शायर इमरान प्रतापगढ़ी का भी है। इमरान गणतंत्र दिवस के दिन रविवार (जनवरी 26, 2020) को लखनऊ के घंटाघर के पास जमा हुए प्रदर्शनकारियों को सम्बोधित करने पहुँचे। वहाँ कई महिलाएँ धरने पर बैठी हुई हैं। इमरान लगातार घूम-घूम कर लोगों को बता रहे हैं कि उन पर जुल्म हो रहा है और सरकार छात्रों एवं महिलाओं पर अत्याचार कर रही है। इमरान कहते हैं कि वो कुवैत में मुशायरे का ऑफर छोड़ कर सीएए के ख़िलाफ़ चल रहे प्रदर्शन में घूम रहे हैं।

इमरान की एक शेर की एक पंक्ति देखिए- “मोदी जी आपकी हुकूमत पर, एक शाहीन बाग़ भारी है।” इस पंक्ति से सीधा पता चलता है कि कुछ मजहबी नाम वाले शायर हैं, वो देश भर में अराजकता फैलाने में लगे हैं। इमरान बार-बार ‘काग़ज़ नहीं दिखाएँगे‘ भी दोहराते हैं, जो सीएए विरोधियों का फेवरिट तकिया कलाम बन गया है। शायरों के इस गैंग का नेतृत्व मुनव्वर राणा और राहत इंदौरी कर रहे हैं और इमरान जैसे लोग घूम-घूम कर उसे फैला रहे हैं। इमरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और देश के गृह मंत्री अमित शाह के बारे में कहते हैं कि वो गुंडों की भाषा में बात करते हैं।

मोदी सरकार को इमरान ने भारत के संविधान का ‘कातिल’ करार दिया। जबकि, जिस शाहीन बाग़ की ब्रांडिंग में वो लगे हैं, उसी विरोध प्रदर्शन का मुख्य साज़िशकर्ता संविधान के बारे में कहता है कि इस पर से समुदाय का भरोसा उठ चुका है। शरजील इमाम ने कहा कि न्यायपालिका पर से समुदाय का भरोसा उठ चुका है। संसद ने उसी संविधान की प्रक्रिया का पालन करते हुए एक क़ानून पारित किया और शरजील उसे ‘काला क़ानून’ बताता हैं, संविधान को गाली देते हैं और बाद में उसी संविधान का कातिल सरकार को बताते हैं। इमरान कहते हैं:

“आधार कार्ड माँगेंगे। पैन कार्ड माँगेंगे? मैं तो उनकी छाती पर खड़े होकर दिल्ली में ऐलान करता हूँ कि आगरा में जाकर देखिए ताजमहल। वही है हमारा आधार कार्ड। आप जहाँ रहते हैं, वहाँ से मात्र ढाई किलोमीटर की दूरी पर खड़ा है कुतुबमीनार। वही है हमारा पैन कार्ड। जाकर देखिए। अगर आपको हमारा जन्म प्रमाण पत्र चाहिए तो जाइए लाल किले को देखिए। वही है हमारा बर्थ सर्टिफिकेट। हमसे हमारा बर्थ प्लेस पूछा जाता है। मोदी जी और अमित शाह जी, जामा मस्जिद की जो सीढियाँ हैं, वही है हमारा जन्मस्थान। जाइए, देख लीजिए। इस बार हम डरने के इरादे से मैदान में नहीं हैं।”

इमरान की मजहबी कट्टरवादी भाषा पर गौर कीजिए। भारत को सेक्युलर बताने वाले इन लोगों के कथित रहनुमाओं को लगता है कि लाल किला, ताज महल, जामा मस्जिद और क़ुतुब मीनार ‘इनका’ है, और इनके पूर्वजों ने बनाया है। ये नहीं मानते हैं कि ये सब राष्ट्र की संपत्ति है। ये इन चीजों को कौमी नज़र से देखते हैं। मजहबी एक्टिविस्ट्स को शायद पता नहीं है कि बाबरी मस्जिद जैसी अनगिनत ऐसी इस्लामी इमारते हैं, जिनके नीचे कई मंदिर दफ़न हैं। हिन्दुओं के ढाँचों को तोड़ कर, वहाँ रह रहे हिन्दू श्रद्धालुओं को मार कर, कइयों को जबरन इस्लाम कबूल करवा कर और ख़ून बहा कर- ऐसे खड़ी हुई है अधिकतर इस्लामी इमारतें।

जामा मस्जिद। वही जामा मस्जिद, जिसकी सीढ़ियों के नीचे कई हिन्दू देवी-देवताओं की मूर्तियों के दफ़न होने की बात कही जाती है। औरंगजेब के आदेश के बाद उन्हीं सीढ़ियों के नीचे उज्जैन से लूट कर लाइ गई हिन्दू प्रतिमाओं को दफ़न कर दिया गया था, ऐसा औरंगजेब की जीवनी ‘मसीर-ई-आलमगीरी’ में लिखा हुआ है, जिसे साकी मुस्ताक ने लिखा था। इमरान को हमारी सलाह है कि वो इतिहास खँगालें और देखें कि रविवार (मई 24-25, 1689) को जामा मस्जिद में क्या हुआ था। बहादुर ख़ान ने ऐसा क्या किया था, जिससे मुग़ल बादशाह ख़ुश हुआ था और उसे इनाम दिया गया था?

लाल किला, ताज महल, क़ुतुब मीनार और जामा मस्जिद के निर्माण के लिए अरब से रुपए नहीं आए थे। इसी देश की संपत्ति से बनाया गया है इन्हें। विक्टर इस्लामी इमारतों को क्रूर आक्रांताओं ने हिन्दुओं से लूटे हुए धन से ही बनवाया है। क्या बाबर अपने साथ उज्बेकिस्तान से धन लेकर आया था? मुगलों ने इसी धरती को लूट कर यहाँ वो इमारतें खड़ी की, जिन्हें अपने कौम की निशानी बता कर इमरान अपना सीना गर्व से चौड़ा कर रहे हैं। इन्हें गम है इस बात का कि ये इमारतें राष्ट्र की संपत्ति क्यों है। इनका दिवास्वप्न है कि जामा मस्जिद से खलीफा हरा रंग का झंडा फहराए और ये ‘जय हिन्द’ की जगह ‘नारा-ए-तकबीर’ लगाएँ।

शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने लखनऊ में मुस्लिमों को जम कर भड़काया

हमने देखा था कि कैसे कमलेश तिवारी की हत्या के बाद हत्यारों ने अपनी बीवी व परिजनों से बात की थी तो सभी इस घृणित कृत्य का समर्थन कर रहे थे। एक लीक हुए फोन कॉल से पता चला कि हत्यारों की बीवियों ने भी इस करतूत का समर्थन किया था। हाल ही में सड़कों पर उतरीं महिलाओं को देखें तो हमें इस मानसिकता के बारे में और भी बहुत कुछ पता चलता है। इमरान की ख़ुद की जुबानी सुनाई गई एक कहानी में इसके बारे में और कुछ पता चलता है। बकौल इमरान, जब वो दिल्ली में जामिया के कथित घायल छात्रों को देखने एम्स जा रहे थे तब उनकी अम्मी ने उन्हें कॉल किया।

इमरान की अम्मी ने फोन पर अपने बेटे से कहा कि अगर उसका ख़ून ठंडा नहीं हुआ है तो उसे जामिया वालों के साथ मजबूती से खड़ा होना चाहिए। ग्रामीण परिवेश से आने वाली इमरान की अम्मी ने इस तरह की भड़काऊ भाषा का इस्तेमाल किया, ऐसा ख़ुद इमरान की कहानी से पता चलता है। ऐसे में कमलेश तिवारी के हत्यारों के परिजनों द्वारा हत्या का समर्थन करना और शाहीन बाग़ में रुपए लेकर अराजकता फैलाना भी इसी मानसिकता का एक हिस्सा है। इमरान कहते हैं कि एक भी मुकदमा हो तो उसे इनाम के रूप में लेना चाहिए। क्या इस भड़काऊ बयान को समुदाय के युवाओं के करियर बर्बाद करने वाला नहीं माना जाना चाहिए?

क्या मजहबी युवा अपने ऊपर जानबूझ कर मुकदमों का पहाड़ लाद ले, जिससे उसे प्राइवेट व सरकारी नौकरियों के लिए दर-दर भटकना पड़े? बाद में फिर यही इमरान जॉब न मिलने का बहाना लेकर आएँगे। इमरान अपने पूर्वजों की बात करते हुए कहते हैं कि उन्होंने अपने घोड़ों की टापों से दुनिया नापी है। जहाँ एक तरफ भारत अपनी इस संस्कृति पर गर्व करता है कि हमारे देश ने किसी भी विदेशी राज्य पर हमला तक नहीं किया, इमरान विदेशी आक्रांताओं को अपना पूर्वज बता कर लोगों को भड़का रहे हैं। कौन हैं उनके पूर्वज? जिन्होंने कभी दूसरे राज्यों पर पहले हाथ नहीं उठाया वो, या फिर जिन्होंने दुनिया भर में ख़ून-ख़राबा मचाया वो?

इमरान प्रतापगढ़ी पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी को ‘शेरनी’ बताते हैं और उन्हें ‘दुर्गा’ कहते हैं। झारखण्ड में भाजपा की हार पर इमरान ख़ुश होते हैं। वो दिल्ली में भाजपा की हार की भविष्यवाणी करते हैं। साथ ही वो ये भी कहते हैं कि एक दिन केंद्र से भी भाजपा चली जाएगी। इसके बाद वो फैज़ अहमद फैज़ की नज्म ‘हम देखेंगे’ गाते हैं। उसी फैज की कविता, जो मानता ही नहीं था कि भारत, पाकिस्तान और बांग्लादेश प्राचीन काल में एक ही संस्कृति का हिस्सा थे। वही फैज़, जो पाकिस्तान की ‘हज़ारों वर्ष पुरानी’ संस्कृति की बातें करता था।

इमरान प्रतापगढ़ी हिटलर के बारे में बात करते हुए लखनऊ में कहते हैं कि एक दिन वो अपने कमरे में मरा हुआ पाया गया था, उसने आत्महत्या कर ली थी। इमरान का कहना है कि सभी तानाशाहों का अंत ऐसा ही होता है। वो आज के दौर में किसे तानाशाह कह रहे हैं और किसकी मौत की दुआ कर रहे हैं, ये आप सोचिए। वैसे इमरान ने फैज़ की इन पंक्तियों के साथ अपने सम्बोधन का अंत किया, जिनका अर्थ आप भलीभाँति समझते हैं:

जब अर्ज़-ए-ख़ुदा के काबे से सब बुत उठवाए जाएँगे
हम अहल-ए-सफ़ा मरदूद-ए-हरम मसनद पे बिठाए जाएँगे
सब ताज उछाले जाएँगे
सब तख़्त गिराए जाएँगे
बस नाम रहेगा अल्लाह का

NOTA को मिला 5 वोट, कॉन्ग्रेस कैंडिडेट को 0 वोट: निर्दलीय उम्मीदवार की जीत, पूरे राज्य में उड़ा कॉन्ग्रेस का मजाक

तेलंगाना में हाल ही में हुए निकाय चुनावों में एक अजीबोगरीब वाकया देखने को मिला। जहाँ एक तरफ राज्य में कॉन्ग्रेस पार्टी पहले से ही अस्तित्व की लड़ाई का सामना कर रही है, उसके एक उम्मीदवार को शून्य वोट मिलना चर्चा का विषय बन गया। जी हाँ, वेमुलावाड़ा नगरपालिका वॉर्ड नंबर 17 से कॉन्ग्रेस के कैंडिडेट का खाता तक नहीं खुल पाया। हालाँकि, कॉन्ग्रेस उम्मीदवार का कहना है कि उन्होंने और उनके परिजनों ने उन्हें वोट नहीं डाला क्योंकि वो लोग वार्ड 12 के निवासी हैं। पूरे राज्य में इस ख़बर के कारण कांग्रेस का मजाक बना।

कॉन्ग्रेस पार्टी के तेलंगाना यूनिट ने कहा है कि वो इस मामले की जाँच कराएगी। अपने उम्मीदवार नागरानी ईसरावेल्ली को शून्य वोट मिलने के पीछे पार्टी ने किसी साज़िश की ओर इशारा किया है। उस क्षेत्र से निर्दलीय उम्मीदवार 671 वोटों के साथ दिव्या चिंतापणि ने वॉर्ड से जीत दर्ज की। बता दें कि चिंतापणि सत्तारूढ़ दल तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) की बागी नेता हैं। वहीं दूसरे नंबर पर टीआरएस नेता ने 443 वोट हासिल किए। कॉन्ग्रेस उम्मीदवार को एक भी वोट नहीं मिला।

यहाँ तक कि उक्त वार्ड से नोटा को भी 5 लोगों का वोट मिला। 14 लोगों के मतों को अमान्य करार दिया गया। यानी कॉन्ग्रेस से ज्यादा वोट नोटा को मिले और उससे भी ज्यादा वोट अमान्य करार दिए गए। एक अन्य उम्मीदवार गुंती भवानी को सिर्फ 1 वोट मिला। इसमें सिर्फ उनका वोट शामिल था। यानी, उन्हें ख़ुद के अलावा किसी और ने वोट दिया ही नहीं।

तेलंगाना कॉन्ग्रेस के कार्यकारी अध्यक्ष पूनम प्रभाकर ने कहा कि वो इस मतगणना के परिणामों से हैरान हैं। नाराज अध्यक्ष ने पूरी चुनावी प्रक्रिया पर ही संदेह जाहिर किया। उन्होंने कहा कि मामले की आंतरिक जाँच करवाई जाएगी और जिला निर्वाचन अधिकारी से भी चुनाव प्रक्रिया की जाँच किए जाने की माँग की जाएगी। अगर पूरे चुनाव की बात करें तो तेलंगाना नगर निकाय में टीआएरस ने बड़ी जीत दर्ज की है। टीआरएस ने 120 नगरपालिकाओं में से 100 और नौ नगर निगम में से 7 पर जीत की पताका लहराई।

NPR की प्रक्रिया पर रोक लगाने से SC का इनकार, जनहित याचिकाओं की सुनवाई पर केंद्र को नोटिस

सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार (27 जनवरी, 2020) को नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (NPR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली नई याचिकाओं पर केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। हालाँकि, सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इन प्रक्रियाओं पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है। इसके साथ ही सभी नई याचिकाओं को नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) की अन्य याचिकाओं के साथ सूचीबद्ध कर दिया। इन पर पाँच सदस्यीय संविधान पीठ क़रीब तीन सप्ताह बाद सुनवाई करेगी।

दरअसल, याचिका में डेटा की सुरक्षा को लेकर सवाल उठाया गया था। एक याचिकाकर्ता ने कहा था कि नागरिकता (नागरिकों का पंजीकरण और राष्ट्रीय पहचान पत्र जारी करना) नियम, 2003 के तहत एकत्र की जा रही जानकारी के तहत दुरुपयोग से किसी भी सुरक्षा की गारंटी नहीं है।

इसके आगे याचिका में आगे कहा गया कि यह आधार या जनगणना के लिए इकट्ठा की गई जानकारी से काफी अलग है, जिसमें एकत्र की गई सूचना/ डेटा को क़ानून के अनुसार सुरक्षा और सुरक्षा की गारंटी दी जाती है। याचिका में इस बात पर भी चिंता जताई गई कि इकट्टा किए डेटा के कारण नागरिकों की निगरानी हो सकती है। हालाँकि, कोर्ट ने याचिकाकर्ता की सुनवाई पर NPR प्रक्रिया में तुरंत रोक लगाने से इनकार कर दिया।

ख़बर के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट ने इससे पहले 22 जनवरी को स्पष्ट किया था कि वो केंद्र सरकार का पक्ष जाने बगैर कोई निर्णय नहीं लेगा। तब कोर्ट ने इस क़ानून के ख़िलाफ़ दायर याचिकाओं पर जवाब देने के लिए केंद्र सरकार को चार सप्ताह का समय दिया, जिसकी सुनवाई पाँच सदस्यीय संविधान पीठ करेगी।

मुख्य न्यायाधीश एसए बोबडे, न्यायाधीश एस अब्दुल नज़ीर और न्यायाधीश संजीव खन्ना की पीठ ने इस कानून को चुनौती देने वाली दर्जनों याचिकाओं पर केंद्र को नोटिस जारी किया। हालाँकि, पीठ ने साफ़ किया त्रिपुरा और असम से संबंधित याचिकाओं पर अलग से विचार किया जाएगा क्योंकि इन राज्यों की नए नागरिकता क़ानून को लेकर परेशानी देश के अन्य हिस्सों से अलग है।

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शाहीन बाग पर कुमार विश्वास का केजरीवाल पर हमला, ‘खुद भेजते हो अमानती गुंडे, दूसरे को बोलते हो हटाओ’

शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ विरोध प्रदर्शन के लिए बीजेपी पर आरोप लगाने वाले दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल पर उनके पूर्व सहयोगी कुमार विश्वास ने बड़ा हमला बोला है। विश्वास ने एक ट्वीट कर आम आदमी पार्टी (AAP) पर वहाँ अपने गुंडों को बैठाने का आरोप लगाया है।

बता दें कि केजरीवाल ने एक ट्वीट कर कहा था बीजेपी शाहीन बाग पर गंदी राजनीति कर रही है। केजरीवाल ने शाहीन बाग में प्रदर्शन के लिए बीजेपी को ही जिम्मेदार ठहराया था। अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करते हुए लिखा था, “शाहीन बाग में बंद रास्ते की वजह से लोगों को परेशानी हो रही है। भाजपा नहीं चाहती कि रास्ते खुलें। भाजपा गंदी राजनीति कर रही है। भाजपा के नेताओं को तुरंत शाहीन बाग जाकर बात करनी चाहिए और रास्ता खुलवाना चाहिए।”

इसी पर कुमार विश्वास ने ट्वीट से केजरीवाल और AAP पर हमला बोला। विश्वास ने केजरीवाल पर छल करने का भी आरोप मढ़ा। उन्होंने ट्वीट कर लिखा, “अपने अमानती-गुंडे को भेजकर बिठाओ तुम और उठाएँ दूसरे? तुम्हारा निर्वीर्य नायब शाहीन बाग के साथ खड़ा हूँ, तुम कह रहे हो हटाओ। अपनी हर गैर-मुनासिब सी जहालत के लिए, बारहा तू जो ये बातों के सिफर तानता है, छल-फरेबों में ढके सच के मसीहा मेरे, हमसे बेहतर तो तुझे, तू भी नहीं जानता है।”

बता दें कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ दिल्‍ली के शाहीन बाग इलाके में महीने भर से भी ज्‍यादा समय से चल रहे विरोध-प्रदर्शन की वजह से इस मार्ग का इस्‍तेमाल करने वाले लोगों को दिक्‍कतों का सामना करना पड़ रहा है। कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी शाहीन बाग में नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे प्रदर्शन पर सवाल उठाया। उन्होंने सोमवार (जनवरी 27, 2020) को कहा कि शाहीन बाग में लोग सिर्फ मोदी का विरोध कर रहे हैं। वहाँ प्रदर्शनकारी एंबुलेंस को निकलने नहीं देते। बच्चों को स्कूल नहीं जाने दिया जा रहा। लोगों को दफ्तर जाने से रोका जा रहा है। वहाँ कुछ हजार लोग भारत को तोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

उन्होंने कहा, “केजरीवाल, सिसोदिया शाहीन बाग वालों के साथ खड़े हैं। लेकिन उन लाखों लोगों की शांत आवाज उनको क्यों नहीं सुनाई देती? जिनके बच्चे स्कूल नहीं जा पा रहें, लोग दफ्तर नहीं जा पा रहें? दुकानें बंद हैं, एंबुलेंस नहीं निकल सकती।”


‘वायर’ की वामपंथन रोहिणी सिंह को पत्रकार दीपक चौरसिया का ‘तीन बेडरूम’ वाला जवाब

दिल्ली के शाहीन बाग इलाक़े में नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ हो रहे विरोध-प्रदर्शन के दौरान कुछ गुंडों ने शुक्रवार (24 जनवरी) को न्यूज़ नेशन के कंसल्टिंग एडिटर दीपक चौरसिया पर हमला कर दिया था। इस हमले के बारे में उन्होंने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया था। इसमें उन्होंने बताया था, “हम सुन रहे हैं कि संविधान ख़तरे में है, हम सुन रहे हैं कि लड़ाई लोकतंत्र को बचाने के लिए है! जब मैं शाहीन बाग की उसी आवाज़ को देश को दिखाने के लिए पहुँचा, तो वहाँ मॉब लिंचिंग से कम कुछ नहीं मिला!”

इस घटना का जो वीडियो सामने आया वह काफ़ी चौंका देने वाला था। विरोध-प्रदर्शन की आड़ में कुछ गुंडों ने पत्रकार दीपक चौरसिया पर हमला कर दिया था। इस दौरान उनके अलावा उनके साथ गए कैमरा पर्सन पर भी हमला किया गया और उपद्रवियों ने उनके कैमरे को भी तोड़ डाला। पत्रकार के अनुसार, उनकी सुरक्षा के लिए वहाँ कोई पुलिसकर्मी मौजूद नहीं था।

इस हमले की जहाँ एक तरफ़ तो कड़ी निंदा की जा रही है, वहीं दूसरी तरफ वामपंथी पत्रकारों ने इस हमले को सही ठहराते हुए इस्लामवादी मोर्चे के कृत्य पर पर्दा डालने की कोशिश की।

NDTV के श्रीनिवासन जैन ने चौरसिया के बारे में बोलते हुए कहा कि वह एक समय में एक अच्छे पत्रकार हुआ करते थे, लेकिन अब नहीं हैं। यह प्रतिक्रिया उन्होंने रोहिणी सिंह के ट्वीट पर दी। रोहिणी सिंह वही हैं, जिन्होंने दीपक चौरसिया पर हुए हमले को सही ठहराया था और उन्हें एक पत्रकार मानने तक से इनकार कर दिया था।

रोहिणी सिंह के इसी ट्वीट का जवाब देते हुए पत्रकार दीपक चौरसिया ने लिखा, “मैंने एक ग़रीब पृष्ठभूमि से आकर अपने दम पर पत्रकारिता की। मेरा कसूर सिर्फ़ इतना है कि मैं आप की तरह डिजाइनर पत्रकार नहीं हूँ! मेरा वित्त मंत्रालय में परिचय नीरा राडिया ने नहीं कराया! ना ही मैंने आज तक किसी सरकार से 3BHK फ़्लैट लेकर खबरें लिखी है!”

2010 में, कॉन्ग्रेस के शासनकाल के दौरान, एक घोटाला सामने आया था जिसमें पत्रकार बरखा दत्त और एमके वेणु (जो द वायर के संस्थापक संपादक हैं, जहाँ अब रोहिणी सिंह काम करती हैं) कॉर्पोरेट लॉबिइंग नीरा राडिया के साथ सम्पर्क थे। एमके वेणु को कॉरपोरेट लॉबिस्ट नीरा राडिया से अनुरोध करते हुए सुना गया था कि वो रोहिणी सिंह को अपने (लॉबीस्ट के) सर्कल (राजनेताओं, व्यापारियों, लॉबिस्टों आदि) में इंट्रोड्यूज़ करें। राडिया के बारे में पता चला था कि वो यूपीए सरकार से अपने कॉर्पोरेट ग्राहकों के लिए अनुकूल सौदे करने के लिए दलालों के रूप में पत्रकारों का इस्तेमाल कर रही थीं। रोहिणी सिंह वर्तमान में द वायर के साथ ही काम कर रही हैं। दीपक चौरसिया ने अपने ट्वीट में उसी 2010 प्रकरण को याद दिलाते हुए लिखा कि उनका परिचय वित्त मंत्रालय द्वारा नहीं कराया गया है।

इसके अलावा, चौरसिया ने यह दावा भी किया उन्हें किसी सरकार के प्रति अनुकूल ख़बरें लिखने के लिए 3BHK अपार्टमेंट नहीं दिया गया। ऐसा उन्होंने इसलिए लिखा क्योंकि उत्तर प्रदेश चुनावों से पहले, यह अफ़वाह थी कि रोहिणी सिंह को समाजवादी पार्टी द्वारा 2BHK अपार्टमेंट प्राप्त हुआ था। इस तरह की अफ़वाह इसलिए उड़ी थी क्योंकि रोहिणी सिंह ने अपने लेख में ऐसा ज़िक्र किया था कि आने वाले समय में प्रदेश में समाजवादी पार्टी सत्ता में आएगी। इसके बाद, चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद, वह अचानक ग़ायब हो गई थीं और महीनों तक सोशल मीडिया से दूरी बनाए रखी थीं। हालाँकि, ये आरोप केवल आरोप ही बने रहे और इन आरोपों को पुष्टि करने का कोई सबूत अभी तक सामने नहीं आया है।

दिलचस्प बात यह है कि दीपक चौरसिया ने यह बात कही है कि रोहिणी सिंह को जो अपार्टमेंट दिया गया था वो 2BHK नहीं बल्कि 3BHK अपार्टमेंट था। लेकिन, हम यह स्पष्ट कर देना चाहते हैं कि दीपक चौरसिया के इस दावे की पुष्टि ऑपइंडिया बिल्कुल नहीं करता।

वो 6 ‘बड़े’ पत्रकार जो दीपक चौरसिया पर शाहीन बाग में हुए हमले से हैं खुश!

9 महीने में 12 पत्रकारों पर जानलेवा हमला, मारपीट, गाली-गलौज: सब के सब सेक्युलर और ‘शांतिपूर्ण’ जगहों पर!

अल्लाह हू अकबर के नारे लगाते हुए शाहीन बाग के गुंडों ने की पत्रकार दीपक चौरसिया से मारपीट, कैमरा भी तोड़ा

IIT Bombay ने निकाली तिरंगा यात्रा, वामपंथी शरजील के समर्थन में पोस्टर बनाने में रहे व्यस्त

महाराष्ट्र में आईआईटी बॉम्बे के छात्रों ने गणतंत्र दिवस से एक दिन पहले अपने कॉलेज परिसर से तिरंगा यात्रा निकाली। इस यात्रा में 1000 फीट लंबे तिरंगे के साथ 1,500 से अधिक छात्रों, प्रोफेसरों, गैर-शिक्षण कर्मचारियों  समेत उनके परिवार के सदस्यों ने भाग लिया। यह यात्रा लगभग साढ़े चार किलोमीटर तक कॉलेज परिसर को जोड़ने वाले रास्ते पर चली। इस मार्च का विषय ‘आईआईटी बॉम्बे फॉर नेशन-बिल्डिंग’ था। 

इस तिरंगा यात्रा के माध्यम से जहाँ छात्र और फैकल्टी मेंबर्स कैंपस के अंदर लेफ्ट द्वारा की जा रही राजनीतिकरण की निंदा की, वहीं अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल के नेतृत्व वाले वामपंथी छात्र शाहीन बाग विरोध प्रदर्शन के मास्टरमाइंड शरजील इमाम के समर्थन में पोस्टर बनाने में व्यस्त थे। वही शरजील इमाम, जिसने नार्थ इस्ट को हिन्दुस्तान से परमानेंटली काट देने की बात कही थी।

‘IIT Bombay for Justice’ नामक फेसबुक पेज पर छात्रों की तस्वीर अपलोड की गई, जिसमें वो ‘Reclaim the Republic’ नामक इवेंट में जाने के लिए तैयार थे। हमें जानकारी मिली कि यह फेसबुक पेज अम्बेडकर पेरियार स्टडी सर्किल से जुड़े लेफ्ट छात्रों द्वारा चलाया जाता है और इस इवेंट का आयोजन भी उन्होंने ही किया है। इस इवेंट में कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने भी हिस्सा लिया, जिन्होंने CAA और NRC के विरोध में ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ नामक एक कविता भी लिखी, जिसे वामपंथियों का खुला समर्थन मिला। मोदीविरोधी गैंग ने इस कविता को सोशल मीडिया में वायरल करने में जान लगा दी। 


Poster for Left students’ ‘Reclaim the Republic’ event at IIT B

ऑपइंडिया ने पाया कि ‘IITB4Justice’ नामक ग्रुप APSCC द्वारा चलाया जाता है और जब लेफ्ट छात्रों द्वारा रैली की तैयारी की जा रही थी तो इस फेसबुक पेज ने इनकी पोस्टर बनाते हुए तस्वीरें पोस्ट की।

लेफ्ट स्टूडेंट्स द्वारा बनाए जा रहे पोस्टर्स

इन पोस्टर पर साफ तौर से ‘Support Sharjeel Imam’ लिखा हुआ देखा जा सकता है। शरजील इमाम शाहीन बाग में हो रहे विरोध प्रदर्शन का मास्टरमाइंड है और उसने अलीगढ़ में एक सभा के दौरान भारत को तोड़ने वाला देशद्रोही बयान दिया था। जिसके बाद असम, मणिपुर, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और अरुणाचल प्रदेश पुलिस द्वारा उसके खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया गया है।

उल्लेखनीय है कि शरजील इमाम शुरू से ही CAA के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और समुदाय विशेष को उकसाने में सक्रिय रहा है। 17 दिसंबर 2019 को एक वीडियो वायरल हुआ था, जिसमें शरजील इमाम समुदाय विशेष को सड़कों पर आने और दिल्ली में चक्का जाम करने के लिए उकसाता हुआ दिखाई दे रहा है। वीडियो में वह कहता है, “क्या मुस्लिमों की इतनी हैसियत भी नहीं कि उत्तर भारत के शहरों को बंद किया जा सके। यूपी में शहरी मुस्लिमों की आबादी 30 फीसदी से ऊपर है। क्या आपको शर्म नहीं आती? अरे भाई शर्म करो, आप यूपी में चक्काजाम क्यों नहीं कर सकते? कैसे चल रहा है वह शहर? बिहार का वह इलाका जहाँ से मैं आता हूँ, वहाँ ग्रामीण मुस्लिम आबादी 6% है, जबकि शहरी मुस्लिम आबादी 24% है। हिन्दुस्तान का मुस्लिम शहरी है। वो शहर में रहता है। शहर बंद कीजिए और जो रास्ते में आता है, उसे मना कीजिए, उसे भगाइए।”

शनिवार (जनवरी 25, 2019) को वायरल हुए एक अन्य वीडियो में शरजील असम को भारत से परमानेंटली काटने की बात कहते हुए नजर आता है।

लेफ्ट द्वारा निकाली गई रैली

दिलचस्प बात यह है कि आईआईटी बी के छात्रों और फैकल्टी मेंबर्स द्वारा 1000 फीट लंबे तिरंगा मार्च में बड़े पैमाने में लोग नजर आए जबकि वामपंथी छात्रों द्वारा किए गए आयोजन में शायद ही कोई व्यस्तता देखी गई।


लेफ्ट द्वारा निकाली गई रैली

लेफ्ट द्वारा किए गए आयोजन में से एक और पोस्टर निकल कर सामने आई। जिसमें ‘ताहा एलन’ को रिलीज करने की माँग की गई है।


लेफ्ट द्वारा निकाली गई रैली

बता दें कि एलन सुहेब और ताहा फजल दोनों कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य हैं, जिन्हें माओवादियों के साथ लिंक की वजह से UAPA के तहत हिरासत में रखा गया है।

इस तरह से शरजील इमाम के समर्थन में पोस्टर बनाना और और उसके समर्थन में खड़े  होना केवल यह दर्शाता है कि आईआईटी जैसे प्रतिष्ठित संस्थानों में भी वामपंथी संगठन अपनी तुच्छ राजनीति से बाज नहीं आते हैं और राजनीतिक लाभ के लिए वो इस तरह की हरकतें करते हैं। 

यहाँ तक कि फैकल्टी मेंबर्स ने भी तिरंगा मार्च के दौरान इस राजनीतिकरण की निंदा की। प्रोफेसर आशुतोष कुमार ने कहा, “आईआईटी बॉम्बे एक ऐसी संस्था है जो राजनीति में नहीं बल्कि शोध में उत्कृष्टता के लिए जानी जाती है। यह हमारे शोध में बाधा है। हम इसकी निंदा करते हैं। आज जो ज्यादा महत्वपूर्ण है, वह है गणतंत्र दिवस मनाना और हम उसके लिए यहाँ पर हैं।”

आईआईटी बॉम्बे फैकल्टी के प्रोफेसर वरदराज बापट सोम ने शैक्षिक परिसरों के राजनीतिकरण की निंदा की और कहा कि यह (IIT- बॉम्बे) परिसर राजनीति के लिए या फिर किसी के राजनीतिक प्रोपेगेंडा को फैलाने के लिए नहीं है।

CAA के ख़िलाफ़ नारेबाजी कर CPIM नेता ने केरोसिन डालकर लगाई आग, हुई मौत

CAA के विरोध में 24 जनवरी को खुद पर केरोसीन उड़ेलकर आग लगाने वाले सीपीआईएम नेता रमेश प्रजापति ने रविवार (जनवरी 26, 2020) की रात दम तोड़ दिया। इंदौर के एमवाई अस्पताल के बर्न यूनिट में इलाज के दौरान उनकी मौत हुई।

वयोवृद्ध मार्क्सवादी नेता रमेश प्रजापति CAA से नाराज़ थे। जब उन्होंने खुद को आग लगाई तब उनके पास CAA और NRC (राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर) को लेकर कुछ कागजात थे। उनके परिवार ने इस मामले में शंका जताते हुए पुलिस से जाँच की माँग की है।

परिजनों को शक है कि जब रमेश प्रतिदिन धरना-प्रदर्शन में शामिल होने जाते थे, कम्युनिस्ट पार्टी से सालों से जुड़े थे, और इससे पहले भी बड़े-बड़े मुद्दों पर पार्टी के साथ जुड़कर प्रदर्शन कर चुके थे, तो फिर उस दिन ऐसा क्या हुआ कि उन्होंने खुद को आग लगा ली।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, तुकोगंज टीआई निर्मल श्रीवास ने बताया कि रमेश प्रजापति शुक्रवार शाम 7 बजे गीता भवन चौराहा स्थित एक ऑटोमोबाइल्स शोरूम के पास पहुँचे थे। यहाँ बाेतल में भरा केरोसिन खुद पर उड़ेलकर उन्होंने खुद में आग लगाई।

जानकारी के मुताबिक आसपास के लोगों ने जब उन्हें आग की लपटों में घिरा देखा। तो तुरंत घटनास्थल पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना दी गई। तुकोगंज थाने के जवान वहाँ पहुँचे और लोगों की मदद से आग बुझाकर प्रजापति को एमवाय अस्पताल पहुँचाया। जहाँ डॉक्टरों ने बताया कि वो इस घटना में 90 फीसदी जल गए। बता दें पुलिस ने अभी निर्णायक तौर पर नहीं बताया है कि उन्होंने ये कदम किस वजह से उठाया। पुलिस के मुताबिक जाँच जारी है, वे जल्दी ही पता कर लेंगे कि प्रजापति द्वारा ऐसा करने के पीछे असली कारण क्या था।

कम्यूनिस्ट पार्टी के जिला सचिव छोटेलाल सरावद और कैलाश लिंबोदिया ने बताया कि प्रजापति रिटायर्ड सरकारी कर्मचारी थे। वे कई दिनों से सीएए और एनआसी के विरोध में माणिबाग और बड़वाली चौकी में पार्टी की ओर से प्रदर्शन कर रहे थे। जबकि यूथ कॉन्ग्रेस अध्यक्ष रमीज खान के अनुसार प्रजापति ने खुद को आग लगाने से पहले भी सीएए के ख़िलाफ़ नारे लगाए थे।

‘टुकड़े-टुकड़े गैंग द्वारा प्रायोजित है शाहीन बाग, तिरंगे का इस्तेमाल भारत बाँटने वाले कर रहे’

केंद्रीय मंत्री रविशंकर प्रसाद ने सोमवार (जनवरी 27, 2020) को प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शाहीन बाग में चल रहे प्रदर्शन पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि दिल्ली के शाहीन बाग में चल रहा प्रदर्शन देश को बाँटने वाले लोगों के लिए कवर बन गया है।

प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए रविशंकर प्रसाद ने कहा- “शाहीन बाग कोई इलाका नहीं रहा बल्कि यह एक आइडिया है, जहाँ पर भारतीय झंडे को कवर के तौर पर इस्तेमाल वे लोग कर रहे हैं जो भारत को बाँटना चाहते हैं। इसका टुकड़े-टुकड़ें गैंग की तरफ से समर्थन किया जा रहा है।”

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में भाजपा नेता और कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने प्रदर्शन कर रहे लोगों को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि क्या बोलने का अधिकार कुछ ही लोगों को है जो प्रदर्शन कर रहे हैं। उन लोगों को नहीं जो खामोश हैं लेकिन परेशान हैं? उन्होंने कहा कि शाहीन बाग का सच सामने आना चाहिए।

इसके अतिरिक्त राहुल गाँधी और अरविंद केजरीवाल पर निशाना साधते हुए कानून मंत्री ने ये भी कहा कि राहुल गाँधी, केजरीवाल खामोश हैं, लेकिन उनके लोग खूब बोल रहे हैं। मनीष सिसोदिया बोलते हैं हम शाहीन बाग के साथ हैं। कॉन्ग्रेस के दिग्विजय सिंह और मणिशंकर अय्यर वहाँ जाकर क्या-क्या बोले हैं वो आप जानते हैं।

केन्द्रीय मंत्री ने स्पष्ट शब्दों में कॉन्ग्रेस को चेताया- “मैं कॉन्ग्रेस के लोगों को एक बात साफ-साफ कहना चाहता हूँ कि अब इस देश बँटवारा होने नहीं दिया जाएगा। अगर कोई ऐसा करेगा तो उसके खिलाफ शख्त कार्रवाई की जाएगी।”

कानून मंत्री ने पूछा – “ये कैसा हिंदुस्तान हम बनाना चाहते हैं? ये कैसी दिल्ली हम बनाना चाहते हैं? दिल्ली में कुछ लोग होंगे टुकड़े-टुकड़े के नाम पर अपनी आवाज बुलंद करेंगे। क्या दिल्ली में ऐसे लोगों को जगह मिलनी चाहिए जो असम को भारत से काटने की बात करेंगे?”

बता दें रविशंकर प्रसाद ने इस कॉन्फ्रेंस में पूरे विरोध को सीएए का न करार देते हुए नरेन्द्र मोदी के ख़िलाफ़ हो रहा विरोध बताया। उन्होंने कहा, “हमने बार-बार बताया कि नागरिकता संशोधन विधेयक किसी कि नागरिकता नहीं छिनता। इस देश का हर मुस्लिम नागरिक इज्जत के साथ इस देश में रहता है और रहेगा।”

उल्लेखनीय है कि कानून मंत्री के बयान के बाद दिल्ली मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने शाहीन बाग को लेकर भाजपा नेताओं पर निशान साधा है। केजरीवाल का कहना है कि भाजपा गंदी राजनीति कर रही हैं। शाहीन बाग के रास्ते बीजेपी क्यों नहीं खोलना चाहती है। शाहीन बाग में रास्ता बंद है, बहुत से लोगों को तकलीफ हो रही है। स्कूल बस, एम्बुलेन्स जाने में दिक्कत आ रही है। विरोध की वजह से आम जनता को परेशानी नही होनी चाहिए।

बहुविवाह, निकाह-हलाला को AIMPLB का समर्थन, कहा- इस्लामिक कानून पर गैरों को सवाल उठाने का अधिकार नहीं

बहुविवाह और निकाह-हलाला के ख़िलाफ़ भाजपा नेता एवं वकील अश्विनी उपाध्याय द्वारा सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने अपना विरोध दर्ज कराया है। बोर्ड ने 1997 के एक फैसले का हवाला देते हुए कहा कि ये साफ हो चुका है कि पर्सनल लॉ को मूल अधिकारों की कसौटी पर नहीं आँका जा सकता। बोर्ड ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि वह निकाह हलाला, बहु विवाह का समर्थन करता है।

AIMPLB ने सुप्रीम कोर्ट में जनहित याचिका का विरोध करते हुए कहा है कि इस्लामिक कानून पर किसी भी गैर-इस्लामिक शख्स को सवाल उठाने का कोई अधिकार नहीं हैं। AIMPLB ने कोर्ट में दाखिल अपनी याचिका में कहा कि बहुविवाह और अन्य प्रथाओं पर पहले ही फैसला सुनाया जा चुका है।

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से दाखिल अपनी याचिका में यह भी कहा गया कि धार्मिक प्रथा को चुनौती देने वाली जनहित याचिका उस व्यक्ति द्वारा दायर नहीं की जा सकती, जो उस धार्मिक संप्रदाय का हिस्सा नहीं है। मुस्लिम हितों की रक्षा के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड समेत कई मुस्लिम संगठन मौजूद हैं।

गौरतलब है कि इस मामले पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को नोटिस भेजा है। इसके साथ ही इस मामले को संविधान पीठ को भेजने का फैसला किया है। लेकिन, फिलहाल अभी तक संविधान पीठ का गठन नहीं हुआ है।

बता दें अश्विनी उपाध्याय द्वारा दायर की गई याचिका में हलाला और बहुविवाह को रेप जैसा अपराध घोषित करने की माँग की गई है। जबकि बहुविवाह को संगीन अपराध घोषित करने की माँग की गई है।

याचिका में कहा गया है कि यह प्रथाएं संविधान के अनुच्छेद 14, 15 और 21 का उल्लंघन करते हैं। उपाध्याय के मुताबिक अनुच्छेद 14 कानून के समक्ष समानता का अधिकार देता है। वहीं अनुच्छेद 15 धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेदभाव को रोकता है। 

हिंदू लड़का, दूसरे धर्म की लड़की प्यार में भागे घर से: लड़की के परिवार वालों ने करवाया गिरफ्तार, आसनसोल में तनाव

पश्चिम बंगाल के आसनसोल के एक प्रेमी जोड़े को झारखंड के झरिया से गिरफ्तार किया गया है। गिरफ्तारी के बाद नाबालिग लड़की को छोड़ दिया, जबकि 19 वर्षीय गौरव को जेल भेज दिया गया। गौरव और उसकी प्रेमिका को झरिया में उसके मामा के घर से पकड़ा गया। गौरव पर नाबालिग प्रेमिका को अगवा करने का आरोप लगाया गया है। हालाँकि गौरव की माँ ज्योति देवी का कहना है कि यह मामला अपहरण का नहीं बल्कि प्रेम प्रसंग का है। उन्होंने कहा कि लड़की के दूसरे समुदाय के होने के कारण दबाव में पुलिस उनके पूरे परिवार और रिश्तेदारों को परेशान कर रही है।

दरअसल गौरव को दूसरे समुदाय की लड़की से प्यार हो गया। वो उसके साथ शादी करना चाहता था। मगर इसकी भनक लड़की के घरवालों को लग गई तो बखेड़ा खड़ा हो गया। इसके बाद गौरव और उसकी प्रेमिका ने भागने का फैसला किया। दोनों के घर से भागने के बाद आसनसोल की स्थिति और भी ज्यादा तनावपूर्ण हो गई। इलाके में सांप्रदायिक तनाव उत्पन्न हो गया। पुलिस को इसकी शिकायत दी गई। जिसके बाद पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दोनों को झरिया से पकड़ा। पुलिस का कहना है कि वे दोनों गौरव के मामा के घर में छुपे हुए थे।

आसनसोल साउथ थाना के पुलिस अधिकारी स्वरूप मुखर्जी ने बताया कि 21 जनवरी को एक व्यक्ति ने अपनी नाबालिग बेटी के अपहरण की शिकायत दर्ज कराई थी। अपनी शिकायत में उसने बीगू ठाकुर के 19 वर्षीय पुत्र गौरव ठाकुर, नीरज ठाकुर और कौशल तिवारी के खिलाफ उसकी बेटी के अपहरण की बात कही थी। उसका कहना था कि उसकी बेटी 17 साल की है और कक्षा 9 में पढ़ती है।

थाने में शिकायत दर्ज होने के बाद पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। जाँच के दौरान पुलिस को दोनों के झरिया में छुपे होने की बात पता चली। इसके बाद पुलिस ने वहाँ पर छापेमारी की और दोनों को गिरफ्त में लिया। फिर पुलिस ने कानूनी कार्रवाई करते हुए गौरव को अपहरण के आरोप में जेल भेज दिया। बता दें कि गाैरव के पिता आसनसोल नगर निगम के पार्षद हैं।