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शेजी खान के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में थीं ममता मिश्रा! वृंदावन के होटल से मिली लाश

उत्तर प्रदेश के वृंदावन स्थित एक होटल में एक पति-पत्नी (ऐसा उन दोनों ने होटल स्टाफ को बताया था) ठहरे। अगले दिन वो दोनों अपने कमरे में बेहोशी की हालत में मिले। दोनों को पुलिस ने अस्पताल पहुँचाया। जहाँ महिला को मृत घोषित कर दिया गया। वहीं पुरुष को बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल में रेफर किया गया। सोमवार (27 जनवरी) को वृंदावन कोतवाली क्षेत्र स्थित होटल जगदीश धाम में यह घटना घटी। फिलहाल पुलिस घटना की जाँच पड़ताल में जुट गई है। पुलिस ने दोनों के परिजनों को सूचना दे दी है।

प्रभात खबर के मुताबिक कोतवाली प्रभारी संजीव कुमार दुबे ने सोमवार को बताया कि उनके सामान की तलाशी के दौरान मिले कागजातों (आधार कार्ड) के अनुसार पुरुष का नाम शेजी खान और महिला का नाम ममता मिश्रा है। ममता बिहार की रहने वाली थीं। वहीं शेजी खान के पिता का नाम शौकत खान है। आशंका जताई जा रही है कि ममता मिश्रा, शेजी खान के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में उसके दिल्ली के पश्चिमपुरी स्थित क्वार्टर में रह रही थी।

पुलिस ने इस बारे में बयान देते हुए कहा कि प्राथमिक जाँच में यह आत्महत्या का मामला लग रहा है, मगर इसकी जाँच की जा रही है। संजीव कुमार दुबे ने बताया कि शेजी खान और ममता मिश्रा एक दिन पहले ही उस होटल में आकर रूके थे। जब सुबह बड़ी देर तक उनके कमरे का दरवाजा नहीं खुला तब ताला तोड़कर देखा गया तो दोनों बेहोश मिले।

वहीं डीआईजी शलभ माथुर ने बताया कि होटल के कमरे में जहरीला पदार्थ खाने के सिमटम पाए गए है। माथुर का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के बाद मौत की असली वजह सामने आ पाएगी। उन्होंने बताया कि शेजी खान से थोड़ी पूछताछ की गई, वहीं पूरी तरह होश में आने के बाद घटना की वजह साफ हो पाएगी।

पुलिस उनके वृंदावन आने के कारण की भी खोज कर रही है। फिलहाल यह भी स्पष्ट नहीं हो पाया है कि महिला को दबाव बनाकर लाया गया था या फिर वह अपनी मर्जी से आई थी। पुलिस की जाँच पूरी होने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। अभी पुलिस पूछताछ के लिए शेजी खान की मेडिकल फिटनेस का इंतजार कर रही है। साथ ही पुलिस दोनों के परिजनों और उनसे जुड़ी अन्य जानकारियों का भी पता लगाने की कोशिश कर रही है।

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राहुल गाँधी की युवा आक्रोश रैली: ‘नहीं होगी पढ़ाई, सभी छात्र-छात्राओं को वहाँ जाना है’ – कॉलेजों में नोटिस

राजस्थान के जयपुर के अलबर्ट हॉल में आज ( जनवरी 28, 2020) राहुल गाँधी की युवा आक्रोश रैली के लिए पूरा इंतजाम हो चुका है। खबर है कि रैली में भीड़ जुटाने के लिए गहलोत सरकार ने पूरी तैयारी कर ली है। राजस्थान के कॉलेजों में नोटिस जारी करके छात्रों को इस रैली में शामिल होने का फरमान सुनाया गया है। इस नोटिस में कहा गया कि रैली के दौरान कक्षाएँ नहीं होंगी।

गौरतलब है कि अभी तक जहाँ राजनेताओं की रैलियों में इकट्ठा होने वाली भीड़ पर तरह-तरह के सवाल उठते रहे हैं, वहीं गहलोत सरकार के इस नए कारनामे का पर्दाफाश होने के बाद विपक्ष में बैठी भाजपा को नया हथियार मिल गया है। सिर्फ भाजपा ही नहीं बल्कि आम जनता भी अपने बच्चों पर इस तरह के राजनीतिक हथकंडे थोपने को लेकर राज्य सरकार के प्रति गुस्से में है।

टाइम्स नाऊ की खबर के अनुसार जयपुर के ज्ञानदीप महाविद्यालय के प्रिंसिपल द्वारा जारी किए गए नोटिस में साफ-साफ लिखा है कि महाविद्यालय के छात्र 9 बजे वहाँ इकट्ठा होंगे और उसके बाद गाड़ी उन्हें अल्बर्ट हॉल तक लेकर जाएगी।

खबर के अनुसार इस तरह के नोटिस राजस्थान के लगभग हर कॉलेज में जारी किए गए हैं। साथ ही कॉलेजों को टारगेट दिया गया है कि हर क्लास से कम से कम 10 बच्चे आने ही चाहिए। ताकि रैली में भारी तादाद में युवाओं की संख्या दिखे।

बता दें राहुल गाँधी को इस प्रकार तीसरी बार लॉन्च किया जा रहा है। यही कारण है कि गहलोत सरकार अपनी तरफ से किसी प्रकार की कोई कमी नहीं छोड़ना चाहती। राज्य सरकार की पूरी मशीनरी ने राहुल गाँधी को बतौर युवा नेता पेश करने के लिए अपना दम-खम लगा दिया गया है। उनकी छवि निर्माण के लिए आज़ राजस्थान मुख्यमंत्री गहलोत एक सभा भी करने वाले हैं।

खबरों के अनुसार राहुल गाँधी आज अल्बर्ट हॉल में युवाओं को संबोधित करते हुए बेरोजगारी, महंगाई और आर्थिक मंदी को लेकर केंद्र सरकार को घेरने वाले हैं। रैली में उनका फोकस युवाओं पर ही रहेगा। यूथ कॉन्ग्रेस के कार्यकर्ता एनआरयू (नेशनल रजिस्टर ऑफ अनइंप्लॉयमेंट) राहुल के सामने लॉन्च करेंगे। इसके अलावा राहुल सीएए, एनआरसी और एनपीआर के मुद्दे पर भी अपनी बात रख सकते हैं।

नहीं रहे नीरज प्रजापति! CAA समर्थक जुलूस पर ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ चीखते भीड़ के हमले में हुए थे घायल

झारखंड के लोहरदगा में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के समर्थन में निकाले गए जुलसू पर हुई हिंसा में घायल नीरज राम प्रजापति की सोमवार (जनवरी 27, 2019) को राँची के रिम्स में मौत हो गई। रिम्स के ट्रॉमा सेंटर में उनका इलाज चल रहा था। लोहरदगा में हुई हिंसा में घायल होने के बाद उन्हें राँची के ऑर्किड अस्पताल में भर्ती किया गया था। यहाँ से 2 दिन के इलाज के बाद ब्रेन हेमरेज व स्थिति गंभीर बताकर उसे रिम्स रेफर कर दिया गया था। CAA के समर्थन में निकाले गए तिरंगा यात्रा के दौरान पत्थरबाजी में नीरज घायल हो गए थे।

उल्लेखनीय है कि लोहरदगा में 23 जनवरी को CAA के समर्थन में हुई रैली में 15 से 20 हज़ार लोग शामिल थे, फिर भी मुस्लिम मोहल्ले में जुलूस के पहुँचते ही इतनी तेज़ पत्थरबाजी हुई कि लोगों में भगदड़ मच गई। CAA के समर्थन में निकली रैली पर इस्लामी कट्टरपंथियों ने ईंट-पत्थर से हमला किया। पेट्रोल बम फेंके। हिंदुओ के घरों और वाहनों के साथ महिलाओं तक को निशाना बनाया गया।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार सीएए के समर्थन में जुलूस निकाल रहे लोगों पर अमलाटोली चौक के पास पथराव किया गया। उपद्रवियों ने दो दर्जन से अधिक गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। कई दुकानों में आगजनी और तोड़फोड़ भी की। स्थिति जल्द ही बेकाबू हो गई। इसके बाद पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए हवा में कई राउंड गोलियाँ चलाईं। स्थिति तनावपूर्ण होने की खबर पाकर जिले की उपायुक्त आकांक्षा रंजन और पुलिस कप्तान प्रियदर्शी आलोक पूरे दलबल के साथ मौके पर पहुॅंचे और स्थिति को नियंत्रित करने का प्रयास किया।

इसके बाद शहर में कर्फ्यू लगा दिया गया। बता दें कि कर्फ्यू लगने के बाद भी शुक्रवार (जनवरी 4, 2020) को कई जगहों पर हिंसक झड़पें हुई। तनावग्रस्त क्षेत्र में जगह-जगह सुरक्षा बल के जवानों को तैनात किया गया है। इसके साथ ही लोगों को अफ़वाहों से दूर रहने की अपील सोशल मीडिया के ज़रिए की जा रही है। वहीं, शहर में प्रवेश करने वाले तमाम रास्तों पर भी कड़ी निगरानी रखी जा रही है और संदिग्ध दिखने वाले शख़्स से कड़ाई के पूछताछ करने का दौर भी जारी है।

जानकारी के मुताबिक सोमवार को कर्फ्यू में 2 घंटे की छूट दी गई थी। इस दौरान लोगों की भीड़ आवश्यक सामानों की खरीददारी के लिए दुकान की दौड़ पड़ी। रोजमर्रा के सामान की खरीदारी के लिए उमड़ी भीड़ ने यह बता दिया कि कर्फ्यू से लोग काफी परेशान हैं। वहीं बच्चों के लिए दूध, वृद्धों के लिए आवश्यक दवा, रोजमर्रा के लिए सब्जी, चावल व दाल खरीदने के लिए सैकड़ों लोग विभिन्न दुकानों में जमा हो गए। सबसे अधिक भीड़ दवा दुकान में देखी गई। दो घंटे की ढील के बाद फिर से कर्फ्यू लगा दिया गया है।

मस्जिद व कॉन्ग्रेस दफ्तर से चले पत्थर: मुस्लिमों ने की गोलीबारी, ‘पाकिस्तान ज़िंदाबाद’ चीखते हुए टूट पड़ी भीड़

CAA समर्थक जुलूस पर पथराव: धू-धू कर जला लोहरदगा, पथराव-आगजनी के बाद कर्फ्यू

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जिससे थी उम्मीदें, वो बेवफा निकला: ‘सरजी’ के गले का फाँस बना शाहीन बाग़, बिगड़ा चुनावी गणित

शाहीन बाग़ का आंदोलन शुरू तो हुआ था सीएए विरोध के नाम पर लेकिन जिन भी नेताओं ने इसको प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से समर्थन दिया था, उनके लिए अब ये गले की फाँस बनता दिख रहा है। योजना तो थी कि यहाँ तिरंगा लहरा कर और संविधान का पाठ करके देशभक्ति का जी भर दिखावा किया जाए। लेकिन हुआ क्या? इस कथित आंदोलन के मुख्य साज़िशकर्ता शरजील इमाम ने ही कह दिया कि संविधान से मुस्लिमों को कोई उम्मीद नहीं है और इनका बस इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

आम आदमी पार्टी की स्थिति इस मामले में साँप-छुछुंदर वाली हो गई है। जहाँ एक तरफ उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने कह दिया कि वो शाहीन बाग़ के प्रदर्शनकारियों के साथ खड़े हैं, कॉन्ग्रेस ने इस उपद्रव का सीधा समर्थन न करते हुए मणिशंकर अय्यर और दिग्विजय सिंह जैसे नाकारा नेताओं को भेज कर हवा का रुख समझने की कोशिश की। सिसोदिया ने तब इसका समर्थन किया, जब वहाँ के स्थानीय लोग काफ़ी परेशान दिख रहे हैं। उन्होंने एक दिन सड़क पर निकल कर आंदोलनकारियों के बारे में बताया कि वो पिकनिक मना रहे हैं, बिरयानी खा रहे हैं।

क्रोनोलॉजी समझिए। नंबर एक: कॉन्ग्रेस नकारा नेताओं को शाहीन बाग़ भेज कर हवा का रुख समझने का प्रयास करती है। नंबर दो: सिसोदिया शाहीन बाग़ के उपद्रवियों का समर्थन करते हैं। नंबर तीन: केजरीवाल कहते हैं कि भाजपा नेताओं को वहाँ जाकर लोगों को मनाना चाहिए क्योंकि लोगों को दफ्तर जाने-आने और बच्चों को स्कूल जाने-आने में परेशानी हो रही है। नंबर चार: अमित शाह केजरीवाल को घेरते हुए शाहीन बाग़ पर उनसे सवाल पूछते हैं। नंबर पाँच: अरविन्द केजरीवाल सरकार से कहते हैं कि वो शरजील इमाम को गिरफ़्तार करे। ये थी इस कथित आंदोलन पर पक्ष-विपक्ष की पूरी क्रोनोलॉजी।

अरविन्द केजरीवाल शरजील को गिरफ़्तार करने की बात करते हैं लेकिन कन्हैया कुमार मामले में कार्यवाही में देरी करते हैं। दिल्ली सरकार फाइलों को दबा देती है। केजरीवाल इतने बुरे फँसे हैं कि एक दिन पहले जिनके डिप्टी ने शरजील के आंदोलन का समर्थन किया था, वो उसी शरजील को गिरफ़्तार करने की बात कर रहे हैं। कारण क्या हो सकता है? घटनाओं की क्रोनोलॉजी के बाद अब जरा इसका कारण जानने का प्रयास करते हैं। देखिए:

  • जनता समझ चुकी हैं कि शाहीन बाग़ में आंदोलन के नाम पर बिरयानी खा कर लोग पिकनिक मना रहे हैं
  • शरजील इमाम, अरफ़ा खानम और इमरान प्रतापगढ़ी जैसों के बयानों ने असली मंसूबों को जगजाहिर कर दिया है।
  • वहाँ लोगों को परेशानी हो रही है। आश्रम क्षेत्र में 70,000 अतिरिक्त गाड़ियों के बढ़ जाने के कारण लम्बा ट्रैफिक जाम लग रहा है।
  • कॉन्ग्रेस शाहीन बाग़ का खुल कर समर्थन नहीं कर रही, इससे आम आदमी पार्टी आशंकित है। आंदोलन संदिग्ध हो चुका है।
  • सीएए के बहाने भाजपा ने अनुच्छेद 370 को फिर से ज़िंदा किया है और राम मंदिर मामले की भी पार्टी बात कर रही है।

उपर्युक्त कारणों से अरविन्द केजरीवाल को लग गया है कि शाहीन बाग़ आंदोलन से उन्हें जो उम्मीदें थी, उसने नकारात्मकता का रूप लेकर उनके ख़िलाफ़ ही माहौल बनाना शुरू कर दिया है। विदेशी फंडिंग और इस्लामी कट्टरपंथियों के लगातार आ रहे भड़काऊ बयानों से ‘सरजी’ डर गए हैं और जिस शाहीन बाग़ को उन्होंने फूलों की माला समझ कर अपने गले में लगाया था, वो अब उनके गले की फाँस बन चुका है। जिस दिल्ली में उन्होंने ख़ुद की एकतरफा जीत का माहौल बनाया था, वहाँ भाजपा ने जबरदस्त वापसी की है। आंतरिक सर्वे में पार्टी को 40 सीटें आती दिख रही हैं।

कुछ दिनों से अरविन्द केजरीवाल ने सेना के ख़िलाफ़ न बोलने की रणनीति अपनाई हुई थी। वो भी ख़ुद को लिबरल राष्ट्रवादी दिखाना चाह रहे थे। लेकिन, सीएए के ख़िलाफ़ जगह-जगह हुए प्रदर्शनों से दिल्ली के मुखिया ने समझ लिया कि ये जनांदोलन है और इसे जनता का रुख समझ कर आम आदमी पार्टी ने बड़ी ग़लती कर दी। अब जामिया उपद्रव की पोल खुल गई। वहाँ आयशा-लदीदा की ब्रांडिंग की कोशिश फेल हो गई। एक के बाद एक इस्लामी कट्टरवादी जब बिल से बाहर निकले, उन्होंने अप्रत्यक्ष रूप से आप सुप्रीमो को ही डसना शुरू कर दिया।

जनता को पता चल चुका है कि हाथों में संविधान लेने वाले संविधान को गाली देते हैं। पब्लिक जान चुकी है कि नेहरू-आंबेडकर की बात करने वाले गाँधी जी को गाली देते हैं। लोग समझ चुके हैं कि संवैधानिक संस्थानों की शुचिता की बात करने वालों ने न्यायालय को मुस्लिमों का दुश्मन बताया है। आम आदमी को मालूम हो गया है कि अंतरराष्ट्रीय मीडिया का अटेंशन पाने के लिए वहाँ 90 साल की महिलाओं और 20 दिन की बच्ची को प्रदर्शन का चेहरा बनाया जा रहा है। जनसमूह को ज्ञात हो गया है कि शरीयत लागू करने वालों और खलीफा राज की बात करने वालों ने सीएए प्रदर्शन का चोला ओढ़ लिया है।

असल में ‘सरजी’ का क्या दोष? वो तो राजनीतिक फसल काटने पहुँचे थे लेकिन उन्हें भी इसका भान नहीं था कि उनके पार्टी के ही अमानतुल्लाह ख़ान से भी ज्यादा कट्टरवादी इस आंदोलन को हाईजैक कर लेंगे। एक वीडियो सामने आया था। इसमें शरजील इमाम के समर्थक अमानतुल्लाह ख़ान से कह रहे हैं कि वो शरजील को बोलने दें। अमानतुल्लाह भी इस आंदोलन का चेहरा नहीं बन पाया। इस्लामी कट्टरपंथी होते हुए भी अमनतुल्लाह तक को जिस भीड़ ने स्वीकार नहीं किया, उसके नेतृत्वकर्ता केजरीवाल को क्या भाव देंगे? अमानतुल्लाह फेल, केजरीवाल फेल।

अब देखना ये है कि जिस शाहीन बाग़ को दिल्ली में माहौल बनाने के लिए लगातार शह दिया गया, उससे पल्ला छुड़ाने के लिए और क्या-क्या गलतियाँ करते हैं आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविन्द केजरीवाल। शाहीन बाग़ में जिस तरह से दीपक चौरसिया जैसे पत्रकार के साथ बदसलूकी हुई और सुधीर चौधरी के ख़िलाफ़ नारेबाजी हुई, ये स्पष्ट हो चुका है कि ये साधारण आंदोलन नहीं है। इसके पीछे काफ़ी ऐसे लोग हैं, जो अपना उल्लू सीधा करना चाहते हैं। पत्रकारों से जो लोग डर रहे हैं, वहाँ दाल में जरूर कुछ काला है।

एक और बात याद रखिए, गिरोह विशेष के पत्रकारों के साथ वहाँ अच्छा व्यवहार हुआ है। रवीश कुमार सरीखों ने आंदोलन को अच्छी कवरेज दी। वो वहाँ गए तो उन्हें पलकों पर बिठाया गया। जनता सब देख रही है। अरविन्द केजरीवाल को लग गया है कि दिल्ली का चुनाव अब एकतरफा नहीं रहा। पलड़ा काफ़ी तेज़ी से कहीं और झुक रहा है।

कश्मीर तो झाँकी है, POK अभी बाकी है: अमेरिका व स्कॉटलैंड में CAA के समर्थन में उतरे लोग, मीडिया ने छिपाया

भारत में कई जगहों पर नागरिकता संशोधन क़ानून का विरोध करते हुए रैली निकाली जा रही है और इसके समर्थन में भी लाखों लोग सड़क पर उतरे हैं। अंतर इतना है कि जहाँ भी सीएए के समर्थन में लोग सरकार की प्रशंसा करते हुए सड़कों पर उतर रहे हैं, उन्हें विरोधी गुट द्वारा परेशान किया जा रहा है। विदेश में भी कई इस्लामी व वामपंथी गुटों ने सीएए के विरोध में रैली निकाली, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय मीडिया का अच्छा-ख़ासा कवरेज मिला। लेकिन, मीडिया ने बड़ी चालाकी से कई ऐसी विशाल रैलियों को कवर नहीं किया, जो सीएए के समर्थन में हुए थे।

इसी तरह की एक रैली अमेरिका के ह्यूस्टन शहर में निकली। गणतंत्र दिवस के दिन रविवार (जनवरी 26, 2020) को हज़ारों लोगों ने मोदी सरकार द्वारा लाए गए इस क़ानून के समर्थन में रैली निकाली। ये रैली भारतीय काउंसलेट के सामने हुई। दुनिया भर में कई बड़े शहरों में सीएए के समर्थन में रैलियाँ हो रही हैं। एबीपी न्यूज़ के अनुसार, ह्यूस्टन में हुई रैली में ‘कश्मीर तो झाँकी है, पीओके अभी बाकी है’ नारे से पूरा वातावरण गूँज उठा। इस रैली में प्रवासी भारतीय समुदाय के लोग शामिल थे, जो संशोधित नागरिकता क़ानून से ख़ुश थे।

इन लोगों ने हाथों में तख्तियाँ और तिरंगा झंडा लिया हुआ था। इन तख्तियों में लिखा था कि भारत के संविधान और ‘वन्दे मातरम’ का सम्मान करो। इसी रैली में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त किए जाने वाले फ़ैसले की भी तारीफ की गई। इन तख्तियों में पाकिस्तान के लिए भी सन्देश था। रैली में शामिल लोगों ने कहा कि पाकिस्तान को हिन्दुओं व वहाँ के अन्य धार्मिक अल्पसंख्यकों का सामूहिक हत्याकांड बंद किया जाना चाहिए। पाकिस्तान में ग़ैर-मुस्लिमों पर लगातार हो रहे अत्याचार से लोग नाराज़ दिखे।

लोगों ने विश्व समुदाय से माँग करते हुए कहा कि सीएए को लेकर दुनिया भर में जो भ्रम और अफवाह का माहौल फैलाया गया है, उस पर लगाम लगाया जाना चाहिए। प्रदर्शन के नेतृत्व कर रहे नेताओं में से एक दिनेश राजपुरोहित ने इस दौरान कहा:

“नागरिकता संशोधन कानून भारतीय संसद से पूर्ण बहुमत से पास हुआ है और इसके लिए पूर्णतः वैधानिक और संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया गया है। ऐसे में सभी भारतीयों को बिना किसी भ्रम या अफवाह में आए नागरिकता संशोधन कानून का पालन करना चाहिए।”

यूरोपियन यूनियन में कुछ पाकिस्तान से सहानुभूति रखने वाले सांसदों ने सीएए के विरोध में प्रस्ताव लाया था। लोगों ने इसके ख़िलाफ़ नाराज़गी जताई। स्कॉटलैंड के एडिनबर्ग में एक ऐसा ही प्रदर्शन हुस जिसमें सीएए की तारीफ की गई। इस विरोध प्रदर्शन में लोगों ने पाकिस्तानियों और खालिस्तानियों को भी निशाना बनाया। सबसे मेनस्ट्रीम मीडिया ने इन रैलियों को जानबूझ कर नज़रअंदाज़ कर दिया।

चेन्नई के मरीना मॉल में अज़ान: आवाज़ उठाने वाले पत्रकार को वामपंथी-इस्लामिस्ट्स ने किया ट्रोल

FirstPost (फ़र्स्टपोस्ट) के पत्रकार संजय पांडे, ने रविवार को एक वीडियो शेयर किया जिसके बैकग्राउंड में अजान की आवाज़ सुनाई दे रही थी। यह वीडियो रविवार (26 जनवरी) को पोस्ट किया। इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने कहा कि यह चेन्नई का मरीना मॉल (Marina Mall) है। यहाँ अजान की आवाज़ सुनाई दे रही है जोकि बड़ी विचित्र बात है।

इसके आगे उन्होंने कहा,

“यह पागलपन और हास्यास्पद है। मैंने आज तक कभी ऐसा कुछ नहीं सुना; कम से कम भारत में तो बिल्कुल नहीं। मुझे नहीं पता कि यह किस तरह की मानसिकता है। अगली बार जब आप यहाँ आएँगे तो हो सकता है कि आपको बैकग्राउंड में चर्च की प्रेयर या भगवत गीता सुनाई दे।”

अपने ट्विटर हैंडल से इस वीडियो को शेयर करते हुए उन्होंने कैप्शन लिखा, “सेक्युलर भारत में आपका स्वागत है। मरीना मॉल के अंदर म्यूजिक सिस्टम के ज़रिए अज़ान बज रही है। मेरी उत्सुकता यह जानने की है कि क्या इसके लिए क़ानूनी रूप से अनुमति ली गई है?” इसके बाद जल्द ही कुछ ने उन्हें भद्दी गालियाँ देते हुए ‘Get the F**k out’ भी कहा।

ऑपइंडिया ने इस बात की स्पष्ट जानकारी जुटाने के लिए पत्रकार पांडे से सम्पर्क किया। उन्होंने हमें बताया कि वह एक फिल्म देखने के लिए मरीना मॉल गए थे और शो ख़त्म होने के बाद बाहर आने के बाद यह घटना घटी। उन्होंने बताया, “मैं एक पत्रकार हूँ और मैंने देश के हर गली-नुक्कड़ पर यात्रा की है। मैंने चारों महानगरों में काम किया है। मुझे ऐसा अनुभव कभी नहीं हुआ। यह कुछ नया है। और यह एक संकेत है कि हम शायद ऐसी स्थिति की ओर बढ़ रहे हैं जहाँ ऐसी चीजें अब बार-बार होंगी। वे मूल रूप से इसे सामान्य करने की कोशिश कर रहे हैं।”

उन्होंने कहा, “उन्होंने (मुस्लिमों) मस्जिदों से पाँच बार अज़ान को सामान्य कर दिया है, अब कोई भी इस पर आपत्ति दर्ज नहीं करता। और अगर कोई आपत्ति जताता भी है तो फिर उसे सोनू निगम की तरह सिर मुँडवाना होगा। साथ ही लोगों से धमकियाँ भी मिलती हैं। मैंने दुबई के अपने दोस्तों से बात की है, ऐसा तो वहाँ भी नहीं होता है।”

ख़बर के अनुसार, इसके आगे उन्होंने बताया कि वो सोशल मीडिया पर बहुत ज़्यादा एक्टिव नहीं रहते हैं और उन्होंने एक साल से अधिक समय के बाद यह पहला ट्वीट किया था, जिससे लोग इसके बारे में जान सकें। उन्होंने बताया, “एक मॉल कोई धार्मिक मामला नहीं है, यह एक व्यापारिक जगह है। आज के समाज में, एक मॉल शायद सबसे अधिक सेकुलर जगह है।”

ऑपइंडिया को उन्होंने बताया कि इस घटना को उन्होंने तीस सेकंड तक रिकॉर्ड किया। इसके बाद इस बारे में उन्होंने वहाँ के लोगों से पूछताछ की कि क्या ऐसा हमेशा और रोज़ाना होता है? यह सवाल वो मॉल के प्रबंधक से भी करना चाहते थे लेकिन वो (संजय पांडे) उनसे बात नहीं कर पाए। इसके बाद उन्होंने कुछ सुरक्षा गार्डों से बात की लेकिन उन्होंने कहा कि वे इस मामले पर कोई बात नहीं कर सकते। संजय पांडे ने बताया कि गार्ड्स ने पहले तो इस बात को स्वीकार कर लिया था कि वो अज़ान की धुन थी, लेकिन बाद में बाद में वो अपनी बात से पीछे हट गए।

पत्रकार संजय पांडे द्वारा सोशल मीडिया पर इस वीडियो को अपलोड करने के बाद से ही कुछ यूज़र्स उनके पीछे पड़ गए और उन्हें बुरा-भला कहने लगे। इस बात से वो पूरी तरह से वाक़िफ़ थे कि इस वीडियो को पोस्ट करने के बाद उन्हें बुरा-भला कहा जाएगा। उन्होंने कहा, “जिस तरह से वामपंथी और क्रिश्चियनस्लैमिस्ट लॉबी व्यवहार करते हैं, यह उनका तरीका है… लेकिन मेरा मानना ​​है कि अगर कुछ ग़लत है, तो उसके लिए मुझे आगे आना होगा। और अगर गालियाँ मेरे रास्ते में आती हैं, तो मैं इसे अपनी प्रगति समझ लूँगा।” उन्होंने कहा कि इससे मुझे ऐसे लोगों की मानसिकता के बारे में पता चलता रहेगा। साथ ही यह भी पता चलता रहेगा कि यह लोग देश के बारे में क्या सोचते हैं।

पत्रकार पांडे ने इस बात पर ज़ोर देकर कहा कि वो संघी नहीं हैं, बावजूद इसके वामपंथी उन पर संघी होने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ भद्दी टिप्पणियाँ कर रहे हैं। वो इस बात को मानते हैं कि खाड़ी देशों से धन की आमद से देश की समावेशी संस्कृति नष्ट हो रही है। उन्होंने कहा, “हमारे देश की समावेशी संस्कृति को कट्टरपंथी इस्लामियों ने बर्बाद कर दिया है। लोगों में बहुत ज़हर है।”

उनका कहना है, “मैं आमतौर पर ट्वीट नहीं करता, लेकिन यह कुछ ऐसा था जिसने मुझे आश्चर्यचकित कर दिया और मैं इसे शेयर करने से ख़ुद को रोक नहीं पाया और दुनिया को इसके बारे में बता दिया। पता नहीं आगे क्या होगा?”

मस्जिदों में अजान के लिए लाउडस्पीकर लगाने की इजाजत देने से इलाहाबाद हाईकोर्ट का इनकार

‘सबरीमाला तो ठीक… लेकिन अजान पर भी तो आया था कोर्ट का फैसला, उसका क्या?’

दुर्गा पूजा पंडाल में आरती के दौरान बजाई गई अजान: शिकायत दर्ज लेकिन चुप है कोलकाता पुलिस

‘हिटलर और मुसोलिनी से जुड़े हुए थे पिता, फिर सोनिया गाँधी को क्यों मिली भारतीय नागरिकता?’

अदनान सामी को केंद्र सरकार द्वारा पद्म श्री अवॉर्ड दिए जाने के बाद विपक्षी पार्टियों ने भाजपा को निशाना बनाया है। कॉन्ग्रेस पार्टी ने आरोप लगाया कि अदनान सामी के पिता पाकिस्तानी वायुसेना में थे और उन्होंने भारत के ख़िलाफ़ युद्ध में हिस्सा लिया था, इसीलिए अदनान सामी को पद्मश्री अवॉर्ड से सम्मानित करना सही नहीं है। कॉन्ग्रेस ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान का साथ देने की बात कह के दूसरों को घेरने वाली भाजपा ख़ुद पाकिस्तानियों को सम्मानित कर ही है। वहीं भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता संबित पात्रा ने कॉन्ग्रेस के इन आरोपों का जवाब देते हुए एक प्रेस कॉन्फ्रेंस किया।

भाजपा की तरफ़ से प्रेस कॉन्फ़्रेस करते हुए संबित पात्रा ने कहा कि सोनिया गाँधी के पिता तो मुसोलिनी और हिटलर जैसे तानाशाहों से जुड़े हुए थे, फिर उन्हें भारत की नागरिकता क्यों दी गई? संबित पात्रा के इन आरोपों का अब तक कॉन्ग्रेस ने कोई जवाब नहीं दिया है। कॉन्ग्रेस व उसकी सहयोगी पार्टियों को घेरते हुए कहा कि इन विपक्षी दलों को वही मुस्लिम पसंद आते हैं जो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, भारत और भारतीय संस्थाओं के विरोधी होते हैं। पात्रा ने कहा:

ये वही सोनिया गाँधी जी की पार्टी है, जिसने जाकिर नाइक से डोनेशन लिया था। ये पूरा दिखाया गया था और बाद में उन्होंने कहा था कि हमने वापस कर दिया। आज हम कॉन्ग्रेस पार्टी से पूछना चाहते हैं, सोनिया गाँधी से पूछना चाहते हैं कि कपिल सिब्बल ने क्या 77 लाख रुपए लिया था? इंदिरा जयसिंह से पूछना चाहते हैं कि आपने कितना लिया था? इससे एक बात साबित होती है कि ये जो लिबरल्स, आम आदमी पार्टी, कॉन्ग्रेस वाले और तौहीन बाग़ वाले हैं, इन्हें केवल एक ही प्रकार के मुस्लिम पसंद हैं, जो मुस्लिम मोदी जी को, सर्वोच्च न्यायालय को, भारत की सेना और सरकार को गाली दें।”

इस दौरान संबित पात्रा ने अदनान सामी के लोकप्रिय गाने ‘लिफ्ट करा दे’ की तर्ज कर कॉन्ग्रेस पर कुछ यूँ निशाना साधा:

तेरी ऊँची शान है भगवन
मेरी अर्जी मान ले भगवन
तू है सब कुछ जानने वाला
मैं हूँ तेरा मानने वाला
कैसे-कैसों को दिया है
ऐसे वैसों को दिया है
कॉन्ग्रेस की सोच थोड़ी सी लिफ्ट करा दे
सद्बुद्धि उनको जरा गिफ्ट करा दे

भाजपा के राष्ट्रीय प्रवक्ता ने विपक्षी दलों के हर सवाल का जवाब देते हुए कहा कि देशद्रोहियों के लिए इकरार और अच्छे मुस्लिमों के लिए इनकार अब कॉन्ग्रेस का फलसफा बन चुका है। बकौल पात्रा, जो देशद्रोह का काम करे, यासीन मलिक, याकूब मेमन, अफजल गुरु, बुरहान वानी इन सब के लिए इकरार। इसके उलट जो अच्छे काम करके आगे बढ़े उनके लिए इनकार। संबित ने पूछा कि ये कैसी बात है?

सोनिया की शर्तों पर उद्धव से लिया था लिखित आश्वासन, तब बनी सरकार: पूर्व CM चव्हाण का खुलासा

कॉन्ग्रेस पार्टी की कार्यकारी अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने यूँ ही उद्धव ठाकरे की पार्टी के साथ गठबंधन नहीं किया, इसके लिए शिवसेना सुप्रीमो से लिखित में आश्वासन लिया गया था। महाराष्ट्र के पूर्व मुख्यमंत्री अशोक चव्हाण ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने बताया कि सोनिया ने अपने शर्तों पर शिवसेना के साथ गठबंधन किया, इसके लिए उनकी तरफ़ से कोई शर्त नहीं आई। वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता अशोक चव्हाण उद्धव कैबिनेट में मंत्री भी हैं। बताया जाता है कि कॉन्ग्रेस के कई विधायक भी राज्य में सत्ता के लिए लालायित थे और उन्होंने सोनिया को गठबंधन के लिए मनाया।

महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस के संगठन से लेकर सरकार तक विभिन्न पदों पर काबिज रहे अशोक चव्हाण ने बताया कि सोनिया गाँधी ने उद्धव ठाकरे से कहा था कि वो संविधान की प्रस्तावना के अनुरूप कार्य करेंगे और मुख्यमंत्री रहते वो ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे, जिससे संविधान का उल्लंघन होता हो। सोनिया गाँधी ने गठबंधन के लिए दिशा-निर्देश तय किए था उन पर उद्धव का लिखित आश्वासन लिया गया था।

महाराष्ट्र के पीडब्ल्यूडी मंत्री चव्हाण ने ये बातें महाराष्ट्र के नांदेड़ में कही। उन्होंने बताया कि सोनिया गाँधी ने महाराष्ट्र कॉन्ग्रेस को आदेश दिया था कि वो सबसे पहले उद्धव से लिखित आश्वासन लें। इसके बाद ही गठबंधन के लिए पार्टी आलाकमान ने हामी भरी। सोनिया ने पार्टी नेताओं को स्पष्ट कह दिया था कि जब भी ऐसा लगे कि सरकार कॉन्ग्रेस के बनाए दिशानिर्देशों के अनुरूप काम नहीं कर रही है, पार्टी शिवसेना से अपना समर्थन वापस ले लेगी।

इसके बाद कॉन्ग्रेस नेताओं ने ठाकरे तक सोनिया का सन्देश पहुँचाया। उनके राजी होने के बाद सरकार गठन की प्रक्रिया शुरू हुई। वहीं महाराष्ट्र में नेता प्रतिपक्ष देवेंद्र फडणवीस ने कहा है कि राज्य में ‘महा विकास अघाड़ी’ की सरकार बनने के लिए शिवसेना और कॉन्ग्रेस में क्या डील हुई थी, इसका खुलासा होना चाहिए। उन्होंने पूछा कि जब गठबंधन के सहयोगियों को शिवसेना पर विश्वास ही नहीं है, फिर ठाकरे की पार्टी सरकार में बनी ही क्यों हुई है?

बीजेपी नेता की दरांती से काटकर सरेआम हत्या: जाँच शुरू, खंगाली जा रही है CCTV फुटेज

तमिलनाडु के त्रिची में 40 वर्षीय भाजपा नेता विजयाराकू की सोमवार (27 जनवरी) को तड़के पर हत्या कर दी गई। हत्या की इस वारदात को आज सुबह क़रीब 5:30 बजे अंजाम दिया गया।

ख़बर के अनुसार, विजयाराकू एक चाय की दुकान पर गए थे, जहाँ तीन हमलावरों ने उन पर दरांती से हमला कर दिया। हमले के बाद वहाँ मौजूद लोगों के बीच अफ़रा-तफ़री का माहौल बन गया।

बीजेपी तमिलनाडु ने हत्या के सन्दर्भ में अपने ट्विटर हैंडल से बताया कि भाजपा मंडल सचिव विजयराकू को इस्लामिक आतंकवादियों ने मार डाला। साथ ही यह भी लिखा गया कि अलगाववादी राजनीति को रोका जाना चाहिए और सभी लोगों को एकजुट होना चाहिए।

फ़िलहाल, पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है और सीसीटीवी फुटेज की जाँच की जा रही है। बीजेपी नेता रघु तमिलनाडु के पलकराई में पार्टी के जोनल सेक्रेटरी थे। भाजपा के कार्यकर्ताओं ने त्रिची के सरकारी अस्पताल के बाहर हत्या के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन करते हुए आरोपितों के ख़िलाफ़ कड़ी कार्रवाई करने की माँग की। हालाँकि, पुलिस के आश्वासन पर आंदोलनकारियों ने विरोध-प्रदर्शन वापस ले लिया।

ANI की ख़बर के अनुसार, गाँधी नगर पुलिस ने हत्या का मुकदमा दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है। ग़ौरतलब है कि हत्या से पहले विजयाराकू ने गाँधी नगर पुलिस में एक मुकदमा दर्ज करवाया था, जिसमें उन्होंने मोबाइल चोरी होने की बात कही थी, हालाँकि, बाद में उन्होंने यह मुकदमा वापस ले लिया था।

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केरल, राजस्थान और पंजाब की कतार में आया पश्चिम बंगाल, CAA के खिलाफ प्रस्ताव पास

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ सोमवार (जनवरी 27, 2020) को पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी प्रस्ताव पास हो गया। इसके साथ ही पश्चिम बंगाल अब चौथा राज्‍य बन गया है, जहाँ CAA के खिलाफ प्रस्ताव पास हो चुका है। इससे पहले केरल, पंजाब और राजस्‍थान विधानसभा में सीएए विरोधी प्रस्‍ताव पास किया जा चुका है। संसदीय मामलों के मंत्री पार्थ चटर्जी ने यह प्रस्ताव पश्चिम बंगाल विधानसभा में रखा।

इस मौके पर सीएम ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा। विधानसभा में ममता बनर्जी ने कहा, “यह विरोध केवल अल्पसंख्यकों का ही नहीं है। मैं अपने हिंदू भाइयों को इस विरोध को आगे बढ़ाने के लिए धन्यवाद देती हूँ। बंगाल में हम CAA, NPR और NRC की अनुमति नहीं देंगे। हम शांतिपूर्वक लड़ाई जारी रखेंगे।”

पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से पास किए गए इस प्रस्ताव का कॉन्ग्रेस और लेफ्ट दोनों ही दल समर्थन कर रहे हैं। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने विधानसभा में कहा कि संशोधित नागरिकता कानून लोगों के विरुद्ध है और यह कानून तुरंत निरस्त किया जाए। ममता बनर्जी ने केन्द्र सरकार को चुनौती भी दी कि वह उनकी सरकार को बर्खास्त करके दिखाएँ। पश्चिम बंगाल की सीएम ने प्रस्ताव के दौरान विधानसभा में कहा कि दिल्ली में हुई NPR की बैठक में शामिल नहीं होने की भी ताकत बंगाल में है। अब समय आ गया है कि हम अपने मतभेद भुलाकर साथ आएँ और देश को बचाने के लिए लड़ें। यही नहीं इस मामले पर ममता सरकार ने सुप्रीम कोर्ट जाने का भी बन बनाया है।

गौरतलब है कि 22 जनवरी को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता व सिलीगुड़ी के हिल्स इलाके में महाजुलूस निकाल कर केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोला था। इसी क्रम में दार्जिलिंग शहर में मुख्यमंत्री के नेतृत्व में महाजुलूस भी निकाला गया था। यह जुलूस रार्बट्सन रोड से गाँधी रोड, डीबी गिरि रोड, एनएच 55 होते हुए दार्जिलिंग मोटर स्टैंड तक गया था और बाद में सभा में तब्दील हो गया था।