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स्कूलों के बाद बीजेपी ने दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों पर किया स्टिंग, बदहाली पर घिरे केजरीवाल

दिल्ली में चल रहे विधानसभा चुनावों के बीच राजनीतिक गहमा गहमी जारी है। बीजेपी द्वारा दिल्ली के सरकारी स्कूलों पर सवाल उठाने के बाद अब बीजेपी ने दिल्ली के मोहल्ला क्लीनिकों पर एक वीडियो जारी कर उस पर सवाल उठाए हैं। इस वीडियो के खुद पार्टी आध्यक्ष जेपी नड्डा ने अपने ट्वविटर पर शेयर किया है।

बीजेपी अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा जारी किए गए वीडियो में लोग अपने अनुभव साझा करते हुए सुनाई पड़ रहे हैं। इसमें एक महिला यह कहते हुए सुनाई देती है कि मोहल्ला क्लीनिक में दवाएँ तो दूर न तो सुई है और न ही कोई पट्टी और बीपी चेक कराने के लिए बाहर जाने के लिए बोल दिया जाता है। वहीं दूसरे लोग कहते हुए सुनाई देते हैं कि मोहल्ला क्लीनिक अधिक समय तक बंद ही रहते हैं। इसी कारण लोग यहाँ आस-पास गंदगी फैलाते रहते हैं, जिससे ये अब मोहल्ला क्लीनिक नहीं, पेशाब घर बन चुके हैं।

इस वीडियो को जेपी नड्डा ने शेयर करते हुए केजरीवाल सरकार पर निशाना साधा और कहा, “आपने हर साल 1000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने का वादा किया, क्लीनिक खोलना तो दूर, जो खुले हैं, उनमें न तो दवाएँ हैं और न ही कोई सुविधाएँ। आपकी ओछी राजनीति ने दिल्ली के गरीबों को सालाना 5 लाख रुपए तक मुफ्त इलाज देने वाली मोदी जी की आयुष्मान भारत योजना से भी वंचित रखा।”

इस वीडियो पर गृहमंत्री अमित शाह ने केजरीवाल सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “शिक्षा क्रांति के बाद अब केजरीवाल सरकार की स्वास्थ्य क्रांति की पोल खुली, क्या इममें दिल्ली का ग़रीब अपना ऑपरेशन करवाएगा। अपनी स्वार्थ पूर्ण राजनीति के लिए दिल्ली के ग़रीब को मोदी जी की आयुष्मान योजना से दूर रख उसके जीवन से खेलने का जो पाप आपने किया है उसका जवाब आपको जरूर देना होगा।”

गौरतलब है कि दिल्ली की केजरीवाल सरकार ने सत्ता में आने के बाद हर साल दिल्ली में प्रत्येक एक किलोमीटर पर एक मोहल्ला क्लीनिक बनाने की बात कहते हुए 1000 मोहल्ला क्लीनिक खोलने का वादा किया था, लेकिन इस वादे को केजरीवाल पूरा नहीं कर सके। इस पर बीजेपी ने इसे केजरीवाल की ओछी राजनीति करार दिया।

बता दें कि इससे पहले भी गृहमंत्री अमित शाह ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की बदहाली, गंदे पानी, वाई-फाई, नौकरी आदि को लेकर केजरीवाल सरकार पर अपनी रैलियों में जमकर निशाना साधा था।

14 दिन की हिरासत में भेजा गया जामिया फायरिंग का नाबालिग: एग्जाम के लिए माँगी किताबें, कराई जाएगी काउंसलिंग

जामिया से राजघाट CAA विरोध मार्च में देशी तमंचे से फायरिंग करने वाले नाबालिग रामभक्त गुलशन (बदला हुआ नाम) को कोर्ट में पेश किया गया, जहाँ से नाबालिक को 14 दिन की हिरासत में भेज दिया गया है। इस दौरान छात्र की माँग को पूरा करते हुए जज ने उसे अपनी परीक्षाओं की तैयारी के लिए पुस्तकें उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं।

गुरुवार (30 जनवरी, 2020) को जामिया में सीएए के खिलाफ हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच एक नाबालिग छात्र ने अचानक से गोली चलाकर सभी को चौंका दिया था। मीडिया कर्मियों और पुलिस कर्मियों के बीच देशी तमंचे से निकली गोली वहाँ मौजूद शादाब नाम के जामिया के एक छात्र के हाथ में लगी थी, जिसमें वह मामूली रूप से घायल हो गया था। इस दौरान पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए नाबालिग को पुलिस ने शुक्रवार को जुवेनाइल जस्टिस कोर्ट में पेश किया, जहाँ से नाबालिग को 14 दिन की प्रोटेक्टिव कस्टडी में भेज दिया गया है।

पेशी के दौरान आरोपित नाबालिग ने कहा कि वो ग्यारहवीं का छात्र है इसलिए परीक्षाओं की तैयारियों के लिए उसे पुस्तकें चाहिए। मजिस्ट्रेट ने उसकी माँग को मंजूरी देते हुए उसे किताबें मुहैया करवाने के लिए आदेश दिया। जज ने नाबालिग छात्र से ट्यूशन पढ़ने के लिए भी पूछा था, जिसका नाबालिग छात्र ने कोई जवाब नही दिया। नाबालिग छात्र की सेवा कुटीर में कॉउंसललिंग भी की जाएगी।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अभी तक की पुलिस पूछताछ में पता चला है कि आरोपित नाबालिग ने 3 हजार रुपए में कैराना के एक शख्स से देसी तमंचा खरीदा था। उसने यह भी बताया कि वो जनवरी 2018 में मारे गए चंदन गुप्ता और पिछले वर्ष लखनऊ में हिंदूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या से बहुत ज़्यादा आहत था। साथ ही वो कश्मीरी पंडितों के उत्पीड़न की सोशल मीडिया पोस्ट भी पढ़ता था, उससे भी वो आहत था और इन्हीं सब से परेशान होकर नाबालिक ने शाहीन बाग जैसे धरने को समाप्त करने के लिए कानून को हाथ में लिया।

जामिया हिंसा में शामिल एक अन्य आरोपित मुहम्मद इलियास को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने किया गिरफ्तार

गत दिसंबर माह में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी में हुई हिंसा में शामिल दंगाइयों की तलाश में पुलिस ने एक आरोपित को गिरफ्तार कर लिया है। शुक्रवार (जनवरी, 31 2020) को दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने जामिया हिंसा मामले में आरोपित इलियास को गिरफ्तार कर लिया है।

ज्ञात हो कि यह गिरफ्तारी दिसंबर 13, 2019 में जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के पास के क्षेत्र में हुई हिंसा के मामले में हुई है।

कुछ दिन पहले ही दिल्ली पुलिस ने 69 ऐसे लोगों की तस्वीरें जारी की थी, जो गत दिसंबर राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जामिया नगर में CAA-विरोध को लेकर हुई हिंसा में शामिल हो सकते थे। पुलिस का कहना है कि यह तस्वीरें CCTV फुटेज और हिंसा के दौरान बनाए गए वीडियो से ली गई हैं, जिसमें ये लोग हिंसा करते दिखाई दे रहे थे।

ज्ञात हो कि गत दिसंबर 15, 2019 को जामिया नगर और नई फ्रेंड्स कॉलोनी में हुई हिंसा में कम से कम पाँच बसें और सौ से ज्यादा निजी वाहनों को नुकसान पहुँचाया गया था। करीब सौ से ज्यादा लोग इस हिंसा और विरोध प्रदर्शन में शामिल बताए जा रहे हैं।

SIT द्वारा करीब सौ लोगों को अब तक इस सम्बन्ध में पकड़ा जा चुका है। जिनमें से कुछ पर तोड़फोड़ को लेकर केस भी दायर किए गए हैं। पूर्व कॉन्ग्रेस नेता आसिफ मुहम्मद, जामिया मिलिया यूनिवर्सिटी के छात्र चंदन कुमार और स्थानीय नेता आशु खान से इस हिंसा के बारे में गत शुक्रवार को सात घंटों तक पूछताछ की गई थी।

घंटाघर लखनऊ में CAA-NRC के खिलाफ प्रदर्शन कर रही महिलाओं को पुलिस ने भेजा नोटिस, खाली करने को कहा

सीएए के खिलाफ जगह-जगह हो रहे विरोध प्रदर्शन के बीच लखनऊ के घंटाघर पर प्रदर्शन कर रही महिलाओं को विरोध प्रदर्शन भारी पड़ गया। लखनऊ पुलिस ने धरने पर बैठी महिलाओं को नोटिस जारी करते हुए धरना समाप्त करने की चेतावनी दी है। वहीं इससे पहले बाल कल्याण समिति भी नोटिस जारी कर चुका है।

लखनऊ के घंटाघर पर सीएए के खिलाफ धरना दे रही करीब 80 से 100 महिलाओं को लखनऊ पुलिस ने नोटिस जारी किया है। प्रदर्शनकारी महिलाओं के खिलाफ धारा-144 का उल्लंघन, यातायात बाधित और शांति व्यवस्था में खलल डालने के आरोप में नोटिस जारी किया गया है। साथ ही प्रदर्शनकारी महिलाओं से जल्द से जल्द घंटाघर परिसर खाली करने को कहा गया है, अगर वे ऐसा नहीं करती हैं तो उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई की जाएगी।

इससे पहले भी यूपी की न्यायालय बाल कल्याण समिति ने घंटाघर पर सीएए के खिलाफ बैठे प्रदर्शनकारियों को कहा था कि वे धरने में मौजूद बच्चों को वहाँ से तुरंत हटाएँ। इसके लिए अभिभावकों को नोटिस भी जारी किया था। समिति ने नोटिस में अभिवावकों से कहा था कि 18 साल की आयु से कम वाले बच्चों को धरना स्थल से तुरंत हटाया जाए, क्योंकि बच्चों की दिनचर्या में उनके बचपन, शिक्षा और स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। ऐसा नहीं करने पर अभिवावकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी थी।

सीएए के खिलाफ लखनऊ में धरने पर बैठी महिलाओं को समिति द्वारा जारी नोटिस (साभार- आज तक)

बता दें कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहले ही कह चुके हैं कि उत्तर प्रदेश में देश-विरोधी गतिविधियों के लिए कोई जगह नहीं है। उन्होंने कहा था कि पुरुष घर में रहे रजाई ओढ़ कर सो रहे हैं और उन्होंने जानबूझ कर महिलाओं व बच्चों को सड़क पर बैठने के लिए छोड़ दिया है।

केजरीवाल के ट्वीट पर कुमार विश्वास ने किया तंज, कहा- जब ‘कायर-मनोरोगी’ कह रह थे, तब यह सोच कहाँ थी

पाकिस्तान के मंत्री फव्वाद चौधरी तो अक्सर अपने उल-जुलूल बयानों को लेकर चर्चा में रहते ही हैं। लेकिन, इस बार उनके ट्वीट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को ‘अपना पीएम’ कहकर अरविंद केजरीवाल भी सुर्खियों में आ गए। दरअसल, अक्सर प्रधानमंत्री पर हमलावर रहने वाले केजरीवाल का बयान देखकर उनकी पार्टी के पूर्व नेता कुमार विश्वास चुप नहीं रहे और दिल्ली सीएम के प्रति भड़ास निकालते हुए उनपर तंज कस दिया। जिसके बाद जहाँ अरविंद केजरीवाल के ट्वीट को केवल 3 हजार के करीब लोगों ने रीट्वीट किया, तो वहीं कुमार विश्वास के ट्वीट पर थोड़े ही देर में 5.6 हजार रीट्वीट आ चुके हैं। धीरे-धीरे ये संख्या बढ़ रही है।

कुमार विश्वास ने दिल्ली सीएम केजरीवाल के ट्वीट पर जवाब देते हुए लिखा, “चुनाव क्या न कराए, जब इसी PM को ‘कायर-मनोरोगी’ कह रह थे तब यह भेड़िया-धर्मी विनम्रता स्वराज में डाल रखी थी? जब सेना के शौर्य के सबूत माँग कर इसी पाकिस्तान में अपनी जयजयकार करवा रहे थे, सेना के शौर्य को मेरे प्रणाम वाले वीडियो पर अमानती-गुंडा छोड़ रहे थे,तब PM क्या 2G गुप्ता थे?”

गौरतलब है कि पाकिस्तानी मंत्री ने आज ट्वीट करके पीएम मोदी पर निशाना साधा था। फव्वाद चौधरी ने सीएए पर प्रदर्शन, गिरती अर्थव्यवस्था और कश्मीर का जिक्र करते हुए पीएम मोदी पर सवाल उठाए थे। जिसपर केजरीवाल ने जवाब देते हुए कहा था कि- “नरेंद्र मोदी जी भारत के प्रधानमंत्री है। मेरे भी प्रधानमंत्री है। दिल्ली का चुनाव भारत का आंतरिक मसला है और हमें आतंकवाद के सबसे बड़े प्रायोजकों का हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं। पाकिस्तान जितनी कोशिश कर ले, इस देश की एकता पर प्रहार नहीं कर सकता।”

अरविंद केजरीवाल के इस ट्वीट के बाद यूजर्स अलग-अलग मौक़ो पर उनके दिए बयानों का उल्लेख करते हुए कहने लगे कि अब चुनाव नजदीक होने के कारण ढोंग न करें। क्योंकि केजरीवाल ही वो शख्स है जो कल तक नरेंद्र मोदी को देशद्रोही, आतंकवादी कह रहे थे। जो पाकिस्तान पर की कार्रवाई पर सबूत माँग रहे थे। उनपर तरह-तरह के सवाल उठा रहे थे।

देश के 25 करोड़ मुस्लिमों के लिए एक और पाकिस्तान और हिन्दुस्तान को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दीजिए: कॉन्ग्रेस नेता

कॉन्ग्रेस नेता अजय वर्मा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें वो भारत के समुदाय विशेष के लिए अलग से एक पाकिस्तान जैसा देश बना देने की बात कहते हुए नजर आ रहे हैं। दरअसल अजय वर्मा जी न्यूज पर टेलीकास्ट होने वाले शो ‘ताल ठोक के’ में हिस्सा ले रहे थे। इस दौरान उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पर बहस करते हुए कहा कि भारत को ‘हिन्दू राष्ट्र’ घोषित करने से पहले भारतीय जनता पार्टी को देश में रहने वाले सभी कथित अल्पसंख्यकों के लिए पाकिस्तान जैसा देश बना देना चाहिए।

चैनल के लाइव डिबेट के दौरान उनको कहते हुए सुना जा सकता है, “सीना दिखाइए, एक और बांग्लादेश की तरह जो देश में 20/25 करोड़ मुस्लिम आबादी हैं उनके लिए एक और पाकिस्तान बना दीजिए और हिन्दुस्तान को हिन्दू राष्ट्र घोषित कर दीजिए।” 

कॉन्ग्रेस नेता अजय वर्मा की भारत तोड़ने की इस टिप्पणी पर न्यूज एंकर और भाजपा प्रवक्ता सुधांशु त्रिवेदी ने तीखी प्रतिक्रियाएँ दी। उन्होंने कॉन्ग्रेस नेता कि इस भड़काऊ और विभाजनकारी टिप्पणियों के लिए काफी आलोचना की। इसके बाद ट्विटर यूजर ने भी आश्चर्य व्यक्त करते हुए कहा कि क्या कॉन्ग्रेस सच में ‘जिन्ना वाली आजादी’ चाहती है।

उल्लेखनीय है कि शाहीन बाग में चल रहे CAA विरोधी प्रदर्शन का हवाला देते हुए केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावडे़कर ने शुक्रवार (24 जनवरी, 2020) को कहा था कि दिल्ली के लोगों को यह तय करने की जरूरत है कि वे जिन्ना वाली आजादी चाहते हैं या भारत माता की जय। जावडे़कर ने आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस पर अल्पसंख्यकों के दिमाग में जहर घोलने का भी आरोप लगाया था।

बता दें कि दिल्ली के शाहीन बाग में ‘जिन्ना वली आज़ादी ’के नारे लगाए गए थे। ये नारे शाहीन बाग के विरोधियों की मंशा की तरफ इशारा किया था, जो कि देश तोड़ना चाहते हैं। शाहीन बाग पर केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने भी कहा कि शाहीन बाग में आम आदमी पार्टी और कॉन्ग्रेस, जो 2019 लोकसभा का चुनाव नही जीत पाईं, वो देश को तोड़ने की बातों का समर्थन कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि आम आदमी पार्टी के नेता मनीष सिसोदिया ने शाहीनबाग के प्रदर्शनकारियों को समर्थन दिया है। वहाँ देश विरोधी व संविधान विरोधी नारे लग रहे हैं। देश को बाँटने की बात की जा रही है। ये राजनीतिक दल 2019 के चुनाव में मिली हार को पचा नहीं पा रहे हैं। बता दें कि शाहीन बाग में कई हिंदू विरोधी पोस्टर भी लगाए गए।

MP: अजीज कुरैशी के अध्यक्ष बनते ही उर्दू अकादमी से हटाई गई राष्ट्रपति और पीएम की तस्वीर

मध्यप्रदेश के भोपाल में उर्दू अकादमी का अध्यक्ष बदलते ही कार्यालय की दीवार से प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति राम नाथ कोविंद की तस्वीरें हटा दी गई है। हाल ही में पूर्व राज्यपाल अजीज कुरैशी अकादमी के अध्यक्ष बनाए गए हैं। मामला प्रकाश में आने के बाद भाजपा नेताओं ने इसका विरोध किया। उनका कहना है मुस्लिम अध्यक्ष होने के कारण प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति कोविंद की तस्वीर हटाई गई है।

इसके विरोध में शुक्रवार को भाजपा नेताओं ने अकादमी का घेराव भी किया। भाजपा नेता राजेंद्र गुप्ता ने आरोप लगाया कि धार्मिक आधार पर संस्थानों में विकृत मानसिकता का परिचय दिया जा रहा है। विवाद बढ़ने के बाद प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति तस्वीरें दोबारा से लगा दी गई है।

पत्रिका में प्रकाशित खबर

ताजा जानकारी के अनुसार तस्वीर हटाने के आरोप में पुलिस ने मोहम्मद राहिल नामक युवक को गिरफ्तार किया है। राहिल पर भोपाल के टीटी नगर स्थित उर्दू अकेडमी के दफ्तर से बगैर किसी की अनुमति के राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो हटाने का आरोप है। घटना के लिए भाजपा नेताओं द्वारा जिम्मेदार ठहराए जा रहे अकादमी अध्यक्ष अजीज कुरैशी ने खुद उसके ख़िलाफ़ शिकायत की। आरोपित युवक पर 153B (1C) के तहत मामला दर्ज हुआ है। बताया जा रहा है कि मोहम्मद राहिल सीएए से नाराज था।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन कानून के आने के बाद से कई राज्यों में मोदी सरकार को घेरा जा रहा है। लेकिन जहाँ गैर भाजपा सरकार है वहाँ इसका विरोध ज्यादा देखने को मिल रहा है। मध्य प्रदेश की ही यदि बात करें तो वहाँ कमलनाथ सरकार ने पिछले महीने संविधान बचाओ शांति मार्च निकाला था। इस दौरान मुख्यमंत्री कमलनाथ ने कहा था, “आज सवाल यह नहीं है कि प्रधानमंत्री और गृह मंत्री क्या कह रहे हैं। वे अलग-अलग बातें कह रहे हैं। सवाल यह नहीं है कि कानून में क्या शामिल है, सवाल उस पर है जो इसमें शामिल नहीं है। सवाल इसके उपयोग का नहीं बल्कि इसके दुरुपयोग के बारे में है।”

कमलनाथ के मंत्री ने कॉन्ग्रेस के ही किसान नेता को बेइज्जत कर दफ्तर से बाहर निकलवाया, वीडियो वायरल

कमलनाथ राज में CAA समर्थकों के साथ मारपीट करने वाली दोनों महिला अधिकारियों पर नहीं होगी FIR

मध्य प्रदेश में 1 साल में 7 लाख नए बेरोजगार, बेरोजगारी भत्ते वाले वादे से मुकरी कमलनाथ सरकार

गोडसे से रामभक्त गो** तक: बौद्धिक आतंकियों की हिंदुत्व को बदनाम करने की साजिश हमेशा धराशाई हुई है

तेरे वादे पर जिए हम तो ये जान झूठ जाना, कि ख़ुशी से मर न जाते गर ऐतबार होता।

फैज़-परस्त उदारवादियों पर ग़ालिब का यह शेर एकदम सही बैठता नजर आता है। रामभक्त गुलशन (बदला हुआ नाम) के जामिया में बन्दूक लहराने और सोशल मीडिया पर ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्दों को ट्रेंड होने में बस कुछ ही पलों का फासला रहा होगा। लेकिन वैचारिक जिहादियों की छटपटाहट ने बंदूकधारी गुलशन के सारे तमाशे को बर्बाद कर दिया।

गुलशन के फायर करने और शादाब के जख्मी होने के इस नाटकीय क्रम के बस आधे घंटे में ही रामभक्त बताए गए इस अल्पवयस्क युवक की सोशल मीडिया से वायरल हुई तस्वीरों और सभी सोशल मीडिया अकाउंट के अचानक गायब हो जाने के खेल ने तस्वीर लगभग स्पष्ट कर दी।

जामिया में कल हुए इस पूरे नाटक के दौरान सबसे ज्यादा आश्चर्य एक अल्पवयस्क के बंदूक उठाकर फायर कर देने में नहीं था, बल्कि इसके बाद सदियों से ‘हिन्दू आतंकवाद’ और ‘हिन्दू कट्टरपंथी’ शब्द गढ़ने के लिए लालायित बौद्धिक दैन्य लिबरल गिरोह की प्रतिक्रिया थी। सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कालजयी मुस्कान लेकर जरा देर से अपने प्राइम टाइम में आए लेकिन इससे पहले ही उनकी घातक टुकड़ियों के सिपहसालार ध्रुव राठी से लेकर शेहला रशीद और स्वरा भास्कर ट्विटर पर गोडसे और गो** में तालमेल बैठाते नजर आए।

यह स्क्रीनशॉट ‘रामभक्त गुलशन’ के जामिया में चर्चा बनने के कुछ देर बाद ही ट्विटर से लिया गया था:

एक घंटे के भीतर ही ट्विटर पर ‘हिन्दू आतंकवाद’ जैसे शब्द ट्रेंड करने लगे। एक लम्बे समय तक देश में विचारधारा के इकलौते मसीहा बने हुए वामपंथ और नव-उदारवादियों ने हमेशा से ही हिन्दुओं को भी एक आतंकवाद का मुखौटा पहनाने का भरसक प्रयास किए हैं।

बुरहान वानी और अफजल गुरु के लिए टेसू बहाने वाले इस विचारक वर्ग ने इस क्रम में कभी गोडसे को कट्टर हिन्दू साबित करने की कोशिशें की तो कभी किसी रामभक्त गुलशन को। लेकिन इस छटपटाहट और इस जल्दबाजी में ये लोग कभी भूल से भी असम को भारत से अलग काट देने की योजना बनाने वाले शाहीन बाग़ के मास्टर माइंड शरजील इमाम को अपनी जुबान से राजद्रोही तक कहते नहीं सुने गए हैं।

दिलचस्प बात यह है कि इसी भीड़ में से आज एक मुहम्मद इलियास नाम के युवक को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। दिसंबर 13, 2019 को जामिया मिल्लिया इस्लामिया यूनिवर्सिटी के पास के क्षेत्र में हुई हिंसा मामले में इलियास की गिरफ्तारी हुई है। कायदे से तो बौद्धिक आतंकवादियों को आज ‘इस्लामी आतंकवाद’ जैसे शब्दों को ट्रेंड करवाना चाहिए, क्योंकि वह तो स्वयं को सेकुलर उदारवादी ही महसूस करते आए हैं, तो फिर इलियास के नाम पर यह चुप्पी क्या साबित करती है? या फिर हो सकता है कि अपनी जान का खतरा उन्हें एक सुरक्षित ‘अल्पसंख्यक विचारधारा’ की तरफ होने के लिए मजबूर करता हो, वरना विचारकों की तो कोई सीमा ही नहीं होनी चाहिए।

इन बौद्धिक आतंकवादियों ने मौका मिलते ही हिन्दुओं के प्रतीक चिन्हों को अपमानित किया है। कश्मीर में सेना पर पत्थरबाजी कर रहे ‘युवा’ इनकी नजरों में मासूम और भटके हुए हुआ करते हैं। जितनी जल्दबाजी और तत्परता रामभक्त गुलशन को हिन्दू आतंकवादी कहने में दिखाई गई है, उसी तत्परता से सेना पर बन्दूक तानने वाले और पत्थरबाजी करने वाले इन समुदाय विशेष के युवाओं को कभी इस्लामिक आतंकी नहीं कहा गया।

शाहीन बाग़ इसका सबसे ताजा उदाहरण बनकर सामने आया है। शाहीन बाग़ में खुलेआम पत्रकारों की ‘लिंचिंग’ की जा रही हैं, जनता, सत्ता और सेना के खिलाफ खुले में भड़काऊ भाषणबाजी करते हुए बुर्के और लाल दाढ़ी वाले लोग देखे जा रहे हैं। शरजील इमाम तो खुद स्वीकार कर चुका है कि वह कट्टर इस्लामी है और देश को इस्लामी मुल्क बना देना चाहता है। लेकिन वैचारिक जिहादियों को यह सब अनदेखा करना होता है। इन वैचारिक उदारवादी आतंकियों को इंतजार सिर्फ किसी रामभक्त गुलशन के बन्दूक लहराते हुए खुदको हिंदूवादी विचारधारा से जुड़ते हुए देखने का था।

अगर ऐसा न होता तो सत्यान्वेषी पत्रकार रवीश कुमार इस घटना की शाम हुए प्राइम टाइम में उस विजयी मुस्कान के साथ न देखे जाते। यह बौड़म और पाखंडी बौद्धिक उदारवादी आतंकी एक अल्पवयस्क को बन्दूक फायर करते हुए देखकर सिर्फ इसलिए ‘हें हें हें’ की हंसी हँसता है क्योंकि उसे अपना नायक मिल चुका है।

एक नजर रामभक्त गुलशन पर प्राइम टाइम पढ़ते हुए सत्यान्वेषी पत्रकार की ऐतिहासिक विजयी मुस्कान पर जरूर डालें-

यह लिबरल पत्रकार और वामपंथी विचारधारा का ‘कैसेनोवा’ जिस जहर को रामभक्त गुलशन के बन्दूक उठाने के लिए जिम्मेदार बताता नजर आया है, वह जहर तो सत्यान्वेषी पत्रकार रोजाना 9 से 10 अपने प्राइम टाइम में अनुलोम-विलोम में छोड़ते और ग्रहण करते हैं। यही वजह है कि उम्र के साथ झुर्रियों की जगह दर्रे देखने को मिल रहे हैं।

देश के इस पाखंडी उदारवादी गिरोह की हिन्दू आतंकवाद जैसे शब्दों को गढ़ने से पहले वर्षों तक अभी आत्म चिंतन की आवश्यकता है। उसे यह तय करना होगा कि उसका पहला लक्ष्य आज़ादी है या फिर शाहीन बाग की नाकामयाबी को छुपाना। क्योंकि शाहीन बाग़ को जिस अरमानों से सजाया गया था उसकी इमारते जर्जर होकर बिखरने लगी हैं। इस शाहीन बाग़ के इस्लामी एजेंडे का मकसद कभी शरजील तो कभी कुदरती खाने की दुहाई देता हुआ CAA-विरोधी प्रदर्शनकारी साबित करते जा रहा है।

‘हिन्दू आतंकवाद’ को साबित करने से पहले बस एक बार स्वयं से यह जरूर पूछिए कि शाहीन बाग़ में जो कुछ भी चल रहा है वो संविधान की किताब के मुताबिक़ है या फिर किसी आसमानी किताब के अनुसार उसकी रूपरेखा तय हुई है? यदि इसका जवाब मिलने पर आपका विवेक, जो कि यूँ तो कब का मर चुका है, लेकिन फिर भी अगर गवाही दे कि वह सब सेक्युलर है तो हिन्दू आतंकवाद की ओर जरूर आगे बढ़ें।

₹2 किलो आटा, कॉलेज जाने वाली लड़कियों को स्कूटी: भाजपा के संकल्प-पत्र में हर तबके का ख्याल

दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए शुक्रवार (जनवरी 31, 2020) को भारतीय जनता पार्टी ने अपना घोषणा पत्र जारी कर दिया है। बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में कई बड़े वादे किए हैं। गरीबों को 2 रुपए प्रति किलो आटा, कॉलेज जाने वाली छात्रों को मुफ्त इलेक्ट्रिक स्कूटी, 9वीं जाने वाले छात्रों को निशुल्क साइकिल देने की बात कही गई है।

केंद्रीय परिवहन मंत्री और बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन गडकरी ने प्रदेश कार्यालय में दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए संकल्प पत्र जारी करते हुए कहा कि दिल्ली देश का हृदय है। ये एक ऐसा शहर है जो सभी हिन्दुस्तानियों के लिए अभिमान का विषय है। पुराने इतिहास से लेकर पूरे देश का इतिहास दिल्ली से जुड़ा हुआ है और भाजपा का इतिहास भी दिल्ली से ही जुड़ा हुआ है।

नितिन गडकरी ने कहा कि अप्रैल में 16 लेन के दिल्ली-मेरठ रोड का उद्घाटन किया जाएगा। गडकरी ने बताया कि इस 90 किमी रोड के निर्माण में 8 हजार करोड़ रुपए की लागत आई है। इसके बन जाने के बाद 40 से 45 मिनट में दिल्ली से मेरठ का सफर पूरा हो सकेगा।

संकल्प-पत्र में कहा गया है कि पाँच साल में कम से कम 10 लाख बेरोजगारों को रोजगार दिया जाएगा। युवाओं को सफल उद्यमी बनाने के लिए 1,000 करोड़ रुपए के विशेष ‘स्टार्टअप एंड इनोवेशन फंड’ सहित एक दूरदर्शी स्टार्टअप नीति बनाई जाएगी। इसके साथ ही युवाओं के लिए विशवकर्मा कौशल विकास विश्वविद्यालय की स्थापना की जाएगी, जिससे विद्यार्थियों के लिए 100% रोजगार सुनिश्चित होगा।

केंद्रीय मंत्री ने केजरीवाल की मुफ्त योजनाओं की आलोचना करते हुए कहा कि दिल्ली की तस्वीर को, दिल्ली की तकदीर को कोई चंद चीजें फ्री में बाँटकर नहीं बदल सकता। दिल्ली का कंक्रीट भविष्य बनाने के लिए दूरगामी प्लानिंग लगेगी और वो सोच और विजन भाजपा ने बताई है।

संकल्प-पत्र में 10 नए कॉलेज और 200 नए स्कूल खोलने का भी ऐलान किया गया है। इसके साथ ही कहा गया है कि घरों, कॉलोनियों, कार्यालयों और कारखानों में सौर पैनल के उपयोग को प्रोत्साहित किया जाएगा और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की पहली 2 लड़कियों को उनके 21 साल के होने पर 2 लाख रुपए का लाभ मिलेगा। इसमें ग्रामीण और कृषि विकास पर भी ध्यान देने की बात कही गई है।

बीजेपी ने 1984 के दंगा पीड़ितों को न्याय दिलाने का वादा किया है। दंगों के दौरान जान गॅंवाने वाले कमाऊ सदस्यों के परिवार से एक बच्चे को नौकरी दी जाएगी। विधवा हुई महिलाओं की मासिक पेंशन बढ़ाकर 3500 रुपए की जाएगी। दिल्ली को पूरी तरह से टैंकर मुक्त बनाकर साल 2024 तक हर घर-हर नल योजना के तहत स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की बात कही गई है। 2022 तक सबको आवास देने की भी बात कही गई है।

इसमें कहा गया है कि अनधिकृत कॉलोनियों में रहने वाले 40 लाख निवासियों को मालिकाना हक़ देने के बाद इन कॉलोनियों के समुचित विकास के लिए ‘कॉलोनीज डेवलपमेंट बोर्ड’ का गठन किया जाएगा।

खुली केजरीवाल के ‘शिक्षा क्रांति’ के दावों की पोल, अमित शाह ने बदला दिल्ली चुनाव का रुख

जिससे थी उम्मीदें, वो बेवफा निकला: ‘सरजी’ के गले का फाँस बना शाहीन बाग़, बिगड़ा चुनावी गणित

दिल्ली में ‘मुफ्त बिजली’ का सच: चुनाव बाद लगेंगे पैसे… खुद देखिए केजरीवाल सरकार का ऑर्डर

फिल्ममेकर हंसल मेहता ने दी विवेक अग्रिहोत्री को इस्लाम समझने के लिए मुस्लिम बनने की सलाह

उत्तरप्रदेश के मेरठ से गायब हुई लड़की के शाहीन बाग में मिलने के बाद इस खबर की चर्चा चारो ओर है। लड़की का अपहरण करने वाले शहजाद के मनसूबों और शाहीन बाग प्रदर्शन के पीछे छिपे मकसद पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी क्रम में फिल्म मेकर विवेक अग्रिहोत्री ने भी इस वाकये पर अपनी प्रतिक्रिया दी। जो सीएए के विरोध में खड़े फिल्ममेकर हंसल मेहता से ये बर्दाश्त नहीं हुई और उन्होंने विवेक अग्रिहोत्री को मुस्लिम बनने की सलाह दे डाली।

दरअसल, मेरठ की घटना को शेयर करते हुए फिल्ममेकर विवेक अग्निहोत्री ने अपने ट्विटर पर कहा, “शाहीन बाग अब इस्लाम में परिवर्तन करवाने का केंद्र बन चुका है। जहाँ हर जेबकतरे, मोबाइल चोर जैसे लोगों को छिपाया जाता है और हर तरह की अवैध गतिविधि को बढ़ावा दिया जा रहा है।” वे इस खबर के लिंक को शेयर करते हुए लिखते हैं, “मुझे हैरानी है कि दिल्ली के लोग इसे क्यों बर्दाश्त कर रहे हैं।”

अब हालाँकि, विवेक अग्निहोत्री की ये प्रतिक्रिया स्वभाविक है, क्योंकि अभी बीते दिनों शाहीन बाग में जिन्ना वाली आजादी के नारे सुनाई दिए और अभी इसी प्रदर्शन से निकले शरजील इमाम जैसे शख्स की गिरफ्तारी हुई है। जिसने अतिउत्साह में देश से असम काटने की बात ही कह डाली। लेकिन, तथाकथित सेकुलर फिल्ममेकर हंसल मेहता से ये रिएक्शन बर्दाश नहीं हुआ।

हंसल मेहता ने विवेक के पोस्ट पर रिप्लाई देते हुए उन्हें नफरत फैलाने वाला कहा। साथ ही कहा कि उन्हें शाहीन बाग के प्रदर्शन को समझने के लिए इस्लाम में अपना धर्मपरिवर्तन करना चाहिए।

हंसल लिखते हैं, “बदकिस्तमकी से ट्विटर तुम जैसे घृणा फैलाने वालों की जगह बन गया है। मैं सच में उम्मीद करता हूँ कि तुम इस्लाम में परिवर्तित हो जाओ, ताकि तुम्हें समझ आए कि इस मजहब के लोग किसकी लड़ाई लड़ रहे है।” इसके बाद हंसल लिखते हैं, “वास्तव में तो मैं चाहता हूँ कि आप हिंदुत्व को समझें ताकि आप उसे कलंकित न करें।”

गौरतलब है कि एक ओर जहाँ शाहीन बाग का नाम लेने के कारण हंसल मेहता अपनी धर्म निरपेक्ष छवि को स्थापित करने के लिए, विवेक अग्निहोत्री को हिंदू धर्म को कलंकित करने वाला करार देते हैं और कह रहे हैं कि उन्हें प्रदर्शन को समझने के लिए इस्लाम कबूलना चाहिए। वहीं, ट्विटर यूजर्स उनके इस कमेंट के लिए उन्हें आड़े हाथों ले रहे हैं।

यूजर्स का कहना है कि इस्लाम समझने के लिए परिवर्तित होने की क्या जरूरत? अल बगदादी, हाफिज सईद, मसूद अजहर, ISIS, अलकायदा, बोको हरम जैसे संगठनों को देखकर समझा जा सकता है कि ये किसलिए खड़े हैं।

कुछ लोग शरजील, याकूब मेमन, दाऊद इब्राहिब जैसे कट्टरपंथियों का उदाहरण देकर हंसल से सवाल कर रहे हैं कि क्या ऐसा बनने के लिए उन्हें धर्म परिवर्तन करवाना चाहिए।