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कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन ने कहा- हाँ, मैं पाकिस्तानी हूँ, आप जो करना चाहते हैं कर सकते हैं

नागरिकता संशोधन कानून के ख़िलाफ़ भाजपा पर निशाना साधने के लिए कॉन्ग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने एक बार फिर से विवादित बयान दे दिया है। उन्होंने मोदी सरकार पर निशाना साधते हुए आरोप लगाया कि भाजपा नेता उनका परिचय पाकिस्तानी के तौर पर करते हैं। इसलिए वे सबको बताना चाहते हैं कि वो पाकिस्तानी ही हैं।

पश्चिम बंगाल के बशीरहाट में एक जनसभा को संबोधित करते हुए अधीर रंजन चौधरी ने कहा, “मुझे पाकिस्तानी कहकर बुलाया जाता है, आज मैं कहना चाहता हूँ कि हाँ, मैं पाकिस्तानी हूँ। आप जो करना चाहते हैं, वो कर सकते हैं। आज हमारे देश में कोई सही बात नहीं कह सकता है, क्योंकि अगर आप सच कहते हो तो आपको देशद्रोही कह दिया जाता है।”

उन्होंने आगे नरेंद्र मोदी और अमित शाह पर निशाना साधते हुए कहा, “…आज हम कहाँ रह रहे हैं? हमें वही करने को कहा जाता है जो नरेंद्र मोदी और अमित शाह कहते हैं। हमें ये स्वीकार नहीं है। ये देश नरेंद्र मोदी, अमित शाह के बाप का नहीं है। हिंदुस्तान किसी के बाप की संपत्ति नहीं है, उन दोनों को ये बात समझना चाहिए। वो आज हैं लेकिन कल नहीं होंगे।”

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर अधीर रंजन चौधरी का बयान वायरल होने के बाद लोग उनसे तरह-तरह के सवाल कर रहे हैं। लोगों का पूछना है कि अगर कॉन्ग्रेस पार्टी के अधीर रंजन चौधरी विपक्ष की भूमिका को नहीं संभाल पा रहे और खुद को पाकिस्तानी बता रहे हैं। तो ये लोग सत्ता में आने के बाद क्या करेंगे। क्या ये सभी भारतीयों को खुद को पाकिस्तानी बुलाने की छूट दे देंगे?

बता दें, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और भाजपा सरकार के प्रति खुलकर अपनी नफरत का बयान करने वाले विपक्ष के कई नेता भारत विरोधी बाते करते देखे गए हैं। पिछले दिनों कॉन्ग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने खुलेआम देश के पीएम नरेंद्र मोदी को ‘कातिल’ बोला था और दिग्विजय सिंह ने पाकिस्तान के कुख्यात आतंकी हाफिज सईद को ‘हाफिज जी’।

शौहर नूरजादे ने दिया तीन तलाक: देवर फैसल ने एसिड दिखा कर दी धमकी, कहा- बना दूँगा ‘छपाक-2’

उत्तर प्रदेश के कानपुर के सुजातगंज की एक महिला का निकाह जुलाई 2019 में बाबूपुरवा निवासी नूरजादे से हुई थी। महिला का आरोप है कि निकाह के कुछ दिन बाद ही शौहर और उसके घरवाले पाँच लाख रुपए माँगने लगे। माँग पूरी न होने पर महिला को प्रताड़ित किया जाने लगा। इतना ही नहीं महिला को तीन तलाक देकर उसका पति सऊदी अरब भाग गया, महिला ने तीन तलाक कानून के तहत केस कर दिया जिसके बाद से उसका देवर अपने दोस्तों संग लगातार महिला का पीछा कर रहा है। महिला ने आरोप लगाया है कि देवर ने उसके मायके में आकर धमकी दी है कि मुकदमा वापस नहीं लिया, तो ‘छपाक’ फिल्म वाली कहानी दोहरा दी जाएगी।

तीन तलाक पर कानून बनने के बाद भी उससे जुड़े अपराध रूकने का नाम नहीं ले रहे हैं। इसके पीछे कई वजहें हो सकती हैं। फिलहाल, अभी जो मामला सामने आया है उसमें देखिए कैसे-कैसे मुस्लिम महिलाएँ प्रताड़ित होती हैं।

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पूरा मामला यूँ है कि पाँच लाख की डिमांड पूरी न होने पर महिला को तीन तलाक दे दिया। महिला ने एक महीने पहले ही बाबूपुरवा थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद नूरजादे सउदी अरब भाग गया। जिसके बाद देवर फैसल ने मायके में आकर धमकी देना शुरू कर दिया। 

रिपोर्ट के अनुसार, महिला ने बताया कि दो दिन पहले फैसल अपने 3-4 दोस्तों के साथ उसके मायके आया और मुकदमा वापस लेने के लिए दबाव बनाने लगा। इनकार करने पर एसिड की बोतल दिखाई और इशारा करके बोला कि छपाक पार्ट-2 बना दूँगा। बाबूपुरवा इंस्पेक्टर राजीव सिंह का मीडिया को बयान है कि महिला के देवर फैसल को पकड़ने के लिए टीम लगाई गई है। और जल्द ही उसे हिरासत में ले लिया जाएगा।

काग़ज़ नहीं दिखाने वाले वरूण भइया चले अमरीका, सब कुछ ‘खोलकर’ दिखाएंगे ट्रंप सरकार को एयरपोर्ट पे

हाल ही में ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ नामक कथित कविता से चर्चा में आने वाले वरुण ग्रोवर अब अमेरिका में एक शो करने जा रहे हैं। कथित कॉमेडियन वरुण ग्रोवर ने नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) का विरोध करने के लिए एनआरसी (NRC) का मुद्दा उठाया और वाह-वाही लूटने का प्रयास किया था।

CAA के विरोध के लिए वरुण ग्रोवर ने ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ नामक एक कथित कविता भी लिखी, जिसे सोशल मीडिया पर वामपंथियों के गिरोह का खुला समर्थन भी मिला। मोदी विरोधी गैंग ने इस कविता को सोशल मीडिया में वायरल करने में जान लगा दी।

आज ट्विटर पर वरुण ग्रोवर ने एक ट्वीट करते हुए जानकारी दी कि वो मई-जून 2020 में स्टैंडअप कॉमेडी के लिए मशहूर ‘ऐसी-तैसी डेमोक्रेसी’ के साथ मिलकर अमेरिका में एक टूर करने जा रहे हैं। वरुण ने ट्वीट में लिखा है कि टिकट बुकिंग की जानकारी वो बाद में देंगे लेकिन अभी यह पोस्टर शेयर किया जाना ज्यादा जरुरी था।

वरुण ग्रोवर के इस ट्वीट के बाद सोशल मीडिया पर लोगों ने उनसे सवाल किया है कि क्या वो अमेरिका में कागज दिखाएँगे या नहीं? ज्ञात हो कि अक्सर बॉलीवुड एक्टर और एक्ट्रेस विदेशों में एयरपोर्ट पर होने वाली चेकिंग का रोना रोते हैं और यह दलीलें भी देते नजर आते हैं कि उनसे उनके ‘कागज़’ माँगे गए।

वरुण ग्रोवर के सोशल मीडिया पर निशाने पर आने की यह एक बड़ी वजह मानी जा सकती है क्योंकि अपने देश में सरकार, कानून एवं कानून निर्माताओं का खुला विरोध करने वाले वरुण ग्रोवर अब अमेरिका में चुपचाप बुत की तरह खड़े होकर अपने कागज़ दिखाने जा रहे हैं।

CAA और NRC के विरोध में ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ नामक कथित कविता के बाद ही वरुण ग्रोवर ने अपने एक शो की जानकारी ट्वीट करते हुए टिकट और पहचान के साथ ही शो में आने की भी फ़रियाद की थी। इसके लिए भी सोशल मीडिया पर वरुण ग्रोवर की खूब खिंचाई की गई थी।

वरुण ग्रोवर की इस अमेरिका ट्रिप पर एक सज्जन की कविता ट्विटर पर पढ़ने को मिल रही है-

“अमेरिका अब हम जाएँगे
पैसे बहुत कमाएँगे
कौंसुलेट में लाइन लगाएँगे
पर कागज़ नहीं दिखाएँगे
मोदी तुझे कागज नहीं दिखाएँगे

वीएफएस में फोटो खिंचवाएँगे
डीएस 160 भी भर जाएँगे
पर कागज़ नहीं दिखाएँगे
मोदी तुझे कागज नहीं दिखाएँगे

सोशल मीडिया हैंडल भी बताएँगे
अमेरिका से कुछ न छिपाएँगे
फ़ोन ईमेल पता दे जाएँगे
पर कागज़ नहीं दिखाएँगे
मोदी तुझे कागज नहीं दिखाएँगे”

वरुण ग्रोवर की ‘कागज नहीं दिखाएँगे’ को तगड़ा तमाचा, तहजीब के शहर लखनऊ से

‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ वाले वरुण के शो में बिना कागज़ दिखाए एंट्री नहीं, चाहिए वैध आईडी प्रूफ

पकड़े जाने पर ‘The Quint’ ने डिलीट किया ‘बिना कागज़ के बेबस मुस्लिम ड्राइवर’ का फर्जी वीडियो

‘इज्तेमा’ में शामिल मुस्लिम भीड़, आधी रात में बिना साइलेंसर वाली बाइक… ऐसे शुरू हुई हिंसा, फैला तनाव

तेलंगाना के भैंसा में 12 जनवरी की रात दो समुदायों के बीच भड़के तनाव को अब शांत करवा लिया गया है, जिससे इलाके में स्थिति नियंत्रण में हैं। पुलिस ने इस मामले के संबंध में अब तक 61 लोगों को हिरासत में लिया है। जबकि पूरी हिंसा में 19 लोगों के घायल होने की खबर है। घायलों में 9 पुलिस अधिकारी भी है। एक अधिकारी के मुताबिक इस हिंसा में अभी तक 13 मामले दर्ज हुए हैं। मामले में जाँच के दौरान और गिरफ्तारी हो सकती है। बता दें कि कुछ मुस्लिम युवकों द्वारा बिना साइलेंसर मोटरसाइकल दौड़ाने की हरकत पर हिंदू समुदाय के लोगों की आपत्ति के बाद शुरू इस विवाद में 14 हिंदुओं के घरों में तोड़-फोड़ हुई। इसके अतिरिक्त 24 दुपहिया वाहनों को, 1 तीनपहिया वाहन को और एक कार को पूरी तरह जला दिया गया।

तेलंगाना स्थित भैंसा में भड़की हिंसा के बाद तबाही का मंजर

कहाँ से शुरू हुआ मामला और क्या-क्या हुआ?

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, रविवार की शाम भैंसा और निर्मल (दोनों जगह हैं) के बीच मुस्लिम समुदाय के लोगों का जमावड़ा लगा हुआ था। यहाँ, मुस्लिम समुदाय के कई युवक दूर-दूर से ‘इज्तेमा’ में शिरकत करने आए थे।  लेकिन, उसी रात अचानक कुछ मुस्लिम युवक कोरबा गल्ली में बिन साइलेंसर मोटरसाइकल चलाकर हल्ला करने लगे। रात का समय होने के कारण इलाके में रह रहे हिंदुओं को इससे परेशानी होने लगी और उनके आपत्ति जताने के कारण दोनों पक्षों में विवाद बढ़ गया। देखते ही देखते मुस्लिम समुदाय के लोग हिंदुओं के घरों पर हमलावर हो गए और उनके घर के बाहर खड़े वाहनों में आग लगा दी।

हालाँकि, कहा जा रहा है कि इस घटना के बाद दोनों पक्ष की भीड़ आमने-सामने आई और करीब 150 लोग वहाँ देखते ही देखते इकट्ठा हुए। लेकिन भीड़ में बहुसंख्यक आबादी किसकी थी? इसका अंदाजा इस बात ये लगाया जा सकता है कि जहाँ ये मामला शुरू हुआ, वहाँ से थोड़ी दूर पर ही ‘इज्तेमा’ के लिए मुस्लिम समुदाय के लोग इकट्ठा थे।

खैर, आपसी विवाद का ये मामला धीरे-धीरे पत्थरबाजी पर पहुँच गया, दोनों ओर से एक-दूसरे पर पत्थर मारे जाने लगे। दो समुदायों के बीच भड़की हिंसा में ये भी आरोप है कि घरों के बाहर खड़ी गाड़ियों को जलाने के लिए पेट्रोल से भरी प्लॉस्टिक बोतलों का इस्तेमाल किया गया।

इसके बाद धीरे-धीरे मामला पड़ोस के इलाकों में पहुँचा। जिसके कारण मुल्ला गली, पंजेशाह मस्जिद, कॉलेज रोड पर भी दो समुदायों के बीच हिंसा भड़क गई। इलाके के एसपी सी शशिधर के अनुसार, पहले वाकये की घटना की सूचना मिलने के बाद ही पुलिस इलाके में पहुँच गई थी। इसलिए पुलिस वाले भी इसमें घायल हुए।

इलाके में शांति बनाने के लिए उस रात भारी तादाद में पुलिसबल की तैनाती की गई। जिससे सोमवार की सुबह करीब 4 बजे जाकर मामला शांत थोड़ा हुआ। लेकिन इलाके में धारा 144 लागू होने के बाद भी सोमवार सुबह हिंसा फिर भड़क गई। दोनों समुदाय के लोग फिर आमने-सामने आए और एक दूसरे पर सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक पत्थरबाजी की। बड़ी मशक्कत के बाद सुरक्षाकर्मियों ने स्थिति पर नियंत्रण पाया।

द न्यूज़ मिनट की ग्राउंड रिपोर्ट के अनुसार, एक मंदिर के 65 वर्षीय बाबूराज महाराज नामक पुजारी ने उन्हें बताया कि मामला बड़ी टुच्ची सी बात पर शुरू हुआ, लेकिन बाद में विवाद बढ़ गया। पूरे मामले को एक ओर से हुई हिंसा नहीं कहा जा सकता।

इसके बाद कोरबा गली में मस्जिद कमेटी के उपाध्यक्ष नजीमुद्दीन ने दावा किया कि इस हिंसा में उपद्रवियों ने मस्जिद पर पत्थरबाजी की और उसे नुकसान पहुँचाया। एक महिला ने उपद्रवियों पर चोरी का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि घर में तोड़-फोड़ और आगजनी करते हुए उपद्रवियों ने उसका एक तोले से ऊपर सोना और 20,000 रुपए चुरा लिया। बता दें कि इस उपद्रव में हिंदू समुदाय के 2 परिवारों के घर को पूरी तरह जला दिया गया है। कुछ अन्य स्थानीयों के अनुसार ऐसी घटनाएँ उन्होंने इससे पहले अपने इलाके में कभी नहीं देखीं थी, ये पहली बार था जब दो समुदाय आमने-सामने आए।

उल्लेखनीय है कि इस हिंसा के बाद घरों में फेंके गए पत्थर, बोतलें सब वहीं पड़े हुए हैं। घरों में की गई तोड़-फोड़, इस बात का सबूत है कि उपद्रवी कितने हिंसक थे और जान-माल की परवाह किए बिना सिर्फ़ दंगा करना चाहते थे। रिपोर्ट के अनुसार, एक स्थानीय का ये भी कहना है कि रविवार को हुई हिंसा अचानक थी। लेकिन सोमवार को भड़की हिंसा पहले से नियोजित थी।

रिपोर्ट के मुताबिक कुछ लोगों ने टीएनएन को बताया कि उन्होंने भड़की हिंसा के दौरान कई बार 100 नंबर मिलाया, लेकिन हर बार उन्हें पुलिस से बहुत देर में जवाब मिला। हिंसा का शिकार हुए कुछ लोगों के अनुसार राजस्व अधिकारियों और पुलिस में से कोई भी पंचनामा के लिए उनके घर नहीं आए। वहीं, एक दूसरे शख्स ने इस मामले में पुलिस की लापरवाही को पूरी तरह नकारा है। उसके मुताबिक पुलिस बिन समय गवाए घटनास्थल पर पहुँची थी।

यहाँ बता दे कि अब हिंसा के बाद माहौल भले ही शांत हो गया है। लेकिन जिन लोगों की संपत्तियों का नुकसान हुआ है, जिनके घरों में आगजनी की गई है, जिनके गहने और पैसे लूटे गए हैं, वो सभी न्याय प्रशासन से गुहार लगा रहे हैं। राजस्व अधिकारी के अनुसार, जिनके घर पूरी तरह जल गए हैं, वो लोग कुछ समय के लिए अपने रिश्तेदारों के घर चले गए हैं। मामले में आगे की जाँच जारी है, लोगों से पूछताछ चालू है। सीसीटीवी फुटेज देखकर लोगों को हिरासत में लिया जा रहा है और इलाके में फिलहाल इंटरनेट बंद है।

जानकारी के अनुसार, इस पूरे मामले में हिंदुओं के घरों पर विशेष समुदाय के लोगों ने जमकर हमला किया था। जिसके बाद भाजपा नेता पी मुरलीधर राव ने एआईएमआईएम और टीआरएस के गठजोड़ को इसके लिए जिम्मेदार ठहराया था। वहीं निज़ामाबाद के सांसद अरविन्द धर्मपुरी ने भी आरोप लगाया था कि ओवैसी की पार्टी ने मुस्लिमों को भड़का कर हिंसा की वारदात को अंजाम दिया।

लेकिन जब, तेलंगाना में एकमात्र भाजपा विधायक राजा सिंह पीड़ित हिंदुओं से मिलने पहुँचे तो उन्हें पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। जिसके बाद उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री के चंद्रशेखर राव के इशारे पर उन्हें हिन्दू वाहिनी के पीड़ित लोगों से मिलने नहीं दिया गया।

हिन्दुओं के 18 घरों को बनाया गया निशाना, फूँक दी गई गाड़ियाँ: ‘इज्तेमा’ में शामिल मुस्लिमों पर लगा आरोप

हिन्दुओं के घरों व गाड़ियों को जलाया, मुस्लिमों पर आरोप: पीड़ितों से मिलने पहुँचे ‘टाइगर’ गिरफ़्तार

बर्फ़ के नीचे दब गया था इक़बाल, कुछ भी दिख नहीं रहा था… जवानों ने हाथ से खोद कर निकाला, मिली नई जिंदगी

हाल ही में ऐसी कई ख़बरें हमारे सामने आईं हैं, जिनमें सेना के जवानों ने अपनी जान की परवाह किए बिना लोगों की जान ऐसे समय में बचाई, जिसकी उम्मीद तो ख़ुद पीड़ित भी छोड़ देते हैं। ऐसे में उन्हें यह नई ज़िंदगी देने वाले जवान किसी फ़रिश्ते से कम नहीं लगते। हमारे देश के नागरिक भारतीय सेना के जज़्बे और हौसले से वाक़िफ़ हैं, लेकिन जब भी ऐसी कोई ख़बर सामने आती है, जिसमें सेना के जवान किसी ऐसे शख़्स की जान बचा लेते हैं जो लगभग काल का ग्रास बनने ही वाला हो, तो वो ख़बरें दिल को छू ही जाती हैं।

ऐसी ही एक ख़बर कश्मीर से सामने आई है, जहाँ सेना के जवानों ने एक ऐसे शख़्स को जीवन दान दिया जो चलते-चलते बर्फ़ की परतों में दब गया था। तारिक इक़बाल नाम के इस शख़्स को, जो लाचीपुरा में चलते-चलते बर्फ़ के नीचे दब गया था उसे जवानों की काफ़ी मेहनत के बाद बर्फ़ से बाहर निकाला जा सका। इस घटना का एक वीडियो बड़ी तेज़ी के साथ लोगों तक अपनी पहुँच बना रहा है।

इस वीडियो में आप देख सकते हैं कि सेना के जवानों की रेस्क्यू टीम पहले तो फावड़े से उस बर्फ़ को एक तरफ़ करते हैं, जिसके नीचे तारिक दबा हुआ था। रेस्क्यू टीम द्वारा तारिक को बाहर निकालने के बाद जवान उसके सिर पर जल्दी-जल्दी हाथ फेरते हैं जिससे उसे थोड़ी गर्माहट मिल सके और वो होश में आ सके।

तारिक को बर्फ़ से बाहर निकालने के बाद उसे तुरंत अस्पताल ले जाया गया। वहाँ प्राथमिक इलाज मिलने के बाद उसे डिस्चार्ज कर दिया गया। पुलिस और रक्षा सूत्रों के हवाले से मीडिया रिपोर्ट में लिखा गया कि मंगलवार को एक अन्य घटना में जम्मू-कश्मीर में बर्फ़ की चपेट में आने से 6 सैनिक और कई नागरिक मारे गए थे। उन्होंने बताया कि बचाव अभियान चलाने के बाद भी किसी सैनिक को नहीं बचाया जा सका।

इससे पहले एक मामला सामने आया था, जब जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा ज़िले की एक गर्भवती महिला तस्लीमा को सेना के जवानों ने न सिर्फ़ नई ज़िंदगी दी थी बल्कि उनके नवजात बच्चे को जीवनदान देने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। तस्लीमा के भाई फैज ने सेना के जवानों की तुलना ज़िंदगी देने वाले फ़रिश्ते से करते हुए कहा था कि अगर उस रात सेना के जवान वहाँ न पहुँचते, जहाँ वो उनकी गर्भवती बहन तस्लीमा फँसे हुए थे, तो उनके घर में भाँजा होने की ख़ुशी में जश्न मनाने की बजाए मातम मनाया जा रहा होता। 

इसके अलावा, एक सवाल के जवाब में फैज ने कहा था कि एक समय था जब उनका इलाक़ा जिहादियों का पनाहगाह था, लेकिन अब वहाँ जिहादी नहीं हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि अब वहाँ सेना के जवानों की मौजूदगी रहती है। उन्होंने कहा था, “जिहादियों ने हमारे स्कूल और अस्पताल जला दिए, लेकिन भारतीय सेना ने हमारे लिए स्कूल और अस्पताल बनवाए हैं। वो हमारे बच्चों को स्कूल पहुँचा रहे हैं, मैं ज़्यादा क्या कहूँ, सबूत तो यह नवजात भी है।”

गर्भवती शमीमा को ले भारी बर्फबारी में 4 घंटे चलते रहे 100 जवान, PM मोदी भी हुए मुरीद

‘…उस रात सेना के जवान न आते तो घर में जश्न नहीं मातम होता’ – गर्भवती तस्लीमा और भाई फैज ने बताया फरिश्ता

…जब आसिफा अपने बच्चों के साथ फँस गईं तो CRPF ने बर्फ में 12 Km पैदल चल पहुँचाया खाना: मिसाल नहीं, परंपरा है यह

‘गैंगस्टर करीम लाला खान अब्दुल गफ्फार खान जैसे’ – कॉन्ग्रेस की खातिर संजय राउत ने मारी पलटी

शिवसेना सांसद संजय राउत ने इंदिरा गाँधी और अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला को लेकर दिए अपने कल के बयान से पीछे हटते हुए कहा कि उन्होंने हमेशा गाँधी परिवार का सम्मान किया है। अगला पैंतरा चलते हुए उन्होंने अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला की तुलना अब्दुल गफ्फार खान से कर दी।

अपने बयान पर सफ़ाई पेश करते हुए राउत ने कहा,

“राजीव गाँधी, गाँधी परिवार के बारे में जितना रिस्पेक्ट मैंने अपोजिशन में होते हुए भी दिखाया है, उतना और किसी ने नहीं दिखाया। आपने मेरे वक्तव्य पहले भी सुने होंगे, जब-जब इंदिरा गाँधी पर लोगों ने हमला किया, जब-तब मैंने इंदिरा गाँधी का बचाव किया।”

अपनी बात आगे बढ़ाते हुए संजय राउत ने कहा कि करीम लाला से बहुत लोग मिलने आते थे। करीम लाला अफ़ग़ानिस्तान से आए पठानों के नेता थे, उन्होंने ‘पख्तून-ए-हिंद’ नामक एक संगठन का नेतृत्व भी किया था। उनसे बहुत से लोग मिलने के लिए जाया करते थे। इसमें कई राजनेता भी शामिल थे। उन्होंने कहा कि जो भी नेता उनसे मिलने आते थे, उनसे पठान नेता के रूप में मुलाकात करते थे। वह लोगों की समस्या जानने के लिए मिलते थे। इसके बाद संजय राउत ने वही घिसा-पिटा राजनीतिक डायलॉग भी चिपका दिया – “जो लोग मुंबई का इतिहास नहीं जानते हैं, वो मेरे बयान को तोड़ मरोड़ कर पेश कर रहे हैं।”

राउत ने अंडरवर्ल्ड डॉन के रुतबे का बखान करते हुए कहा कि उस वक्त का माहौल अलग था। उन्होंने अपने बयान का बचाव करते हुए कहा कि इंदिरा गाँधी के अलावा देश के और भी कई पूर्व प्रधानमंत्री रहे हैं, जो करीम लाला से मिलते थे।  

संजय राउत ने मुंबई में अंडरवर्ल्ड के दिनों को याद करते हुए कहा कि दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और शरद शेट्टी जैसे गैंगस्टर महानगर और आस-पास के क्षेत्रों पर नियंत्रण रखते थे। शिवसेना सांसद और राज्यसभा सदस्य राउत ने कहा कि वो अंडरवर्ल्ड के दिन थे। बाद में, हर कोई (डॉन) देश छोड़कर भाग गया। लेकिन, अब ऐसा कुछ नहीं है। 

ग़ौरतलब है कि शिवसेना सांसद संजय राउत ने बुधवार (15  जनवरी) को एक कार्यक्रम के दौरान कहा था कि करीम लाला, मस्तान मिर्जा उर्फ़ हाजी मस्तान और वरदराजन मुदलियार मुंबई के टॉप माफ़िया सरगनाओं में से एक थे, जो 1960 से लेकर अस्सी के दशक तक सक्रिय रहे। इस दौरान उन्होंने कहा था कि वही तय करते थे कि मुंबई का पुलिस आयुक्त कौन बनेगा, मंत्रालय (सचिवालय) में कौन बैठेगा। राउत ने दावा किया कि हाजी मस्तान के मंत्रालय में आने पर पूरा मंत्रालय उसे देखने के लिए नीचे आ जाता था। पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को लेकर एक बड़ा बयान देते हुए राउत ने कहा था कि इंदिरा गाँधी अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला से मिलने पाइधोनी (दक्षिण मुंबई) आती थीं।

इंदिरा गाँधी जिस अंडरवर्ल्ड डॉन से मिलने जाती थीं, वो एक अफगानी तस्कर था: शिवसेना नेता के बयान पर हंगामा

कॉन्ग्रेस क्या तो बचाए… अपनी खोई हुई राजनीतिक जमीन, RaGa को या फिर इंदिरा गाँधी की नाक?

‘Free Kashmir’ मतलब फ्री इंटरनेट, फ्री मोबाइल सर्विस: ‘पेंडुलम हिंदुत्व’ वाले शिवसेना नेता संजय राउत की सफाई

मंदिर की दीवार पर ख़ून से लिख दिया नाम, इलाके में तनाव: ‘कसाई’ की दुकान पर काम करने वाला गिरफ़्तार

केरल के त्रिशूर में एक ऐसी हैरान कर देने वाली ख़बर सामने आई है, जिससे लोगों के बीच काफ़ी हड़कंप मच गया। दरअसल, वडक्केकड पुलिस स्टेशन के पास मंदिर की दीवार पर ख़ून से लिखे नाम देखने के बाद से वहाँ के स्थानीय लोगों में भय की स्थिति बन गई। मंदिर की दीवार पर ख़ून से लिखे नाम की ख़बर इलाक़े में जैसे-जैसे फैलती गई, वैसे-वैसे लोग तनाव में की स्थिति में आते गए।

ख़बर के अनुसार, इस मामले में कुछ लोगों ने यह दावा किया कि मंदिर में होने वाले अनुष्ठानों में बाधा उत्पन्न करने या उन्हें नष्ट करने के लिए ख़ून के निशान का उपयोग किया गया था। इलाक़े में कहीं कोई साम्प्रदायिक तनाव न हो जाए, इस बात को ध्यान में रखकर पुलिस ने इस मामले की जाँच तुरंत शुरू कर दी। पुलिस को जाँच में पता चला कि ख़ून से लिखा गया नाम इलाक़े के एक किशोर लड़के और लड़की का था।

मंदिर की दीवार पर जिस लड़के का नाम लिखा था उस लड़के से पुलिस ने जब पूछताछ की तो उसने स्वीकार किया कि उसने ख़ुद ही मंदिर की दीवार पर दोनों नाम लिखे थे। उस लड़के ने इस बात को स्वीकार किया कि उसने लड़की (जिसका नाम मंदिर की दीवार पर लिखा था) के समक्ष प्रेम का प्रस्ताव रखा था। यह बात जब लड़की के घरवालों को तक पहुँची तो उन्होंने लड़के को ऐसा दोबारा करने के लिए मना किया कि आगे से लड़की को परेशान न करने की चेतावनी भी दी। इसी बात से नाराज़ लड़के ने मंदिर की दीवार पर अपना और और उस लड़की का नाम लिख दिया।

पुलिस को पूछताछ के दौरान यह पता चला कि लड़के ने मंदिर की दीवार पर नाम लिखने के लिए चिकन (मुर्गे) के ख़ून का इस्तेमाल किया था। इस बारे में पुलिस को पास की मांस की दुकान से पूछताछ के बाद पता चला। पुलिस को इस बात का भी पता चला कि वो लड़का उसी मांस की दुकान में काम भी करता था और उसने अपने काम के घंटों के दौरान चिकन का ख़ून इकट्ठा किया और फिर मंदिर की दीवार पर नाम लिखा। आरोपित लड़के को दंगा भड़काने और निजी सम्पत्ति को नुक़सान पहुँचाने समेत विभिन्न आरोपों के तहत गिरफ़्तार कर लिया गया है।

मंदिर में तोड़फोड़, हिंदुओं के घरों को जलाया: मुस्लिमों की भीड़ का कहर, देखती रही पुलिस

शिव मंदिर में फेंके प्रतिबंधित मांस के टुकड़े, बीफ के कारण पहले भी इस इलाके में हुआ था बवाल

मुस्लिम मॉब ने मंदिर में की तोड़-फोड़ और आगजनी: पटना में स्थानीय लोग और पुलिस इनके सामने असहाय

इंदिरा गाँधी जिस अंडरवर्ल्ड डॉन से मिलने जाती थीं, वो एक अफगानी तस्कर था: शिवसेना नेता के बयान पर हंगामा

महाराष्ट्र में कॉन्ग्रेस और एनसीपी के साथ मिलकर प्रदेश में गठबंधन की सरकार बनाने के लिए अपना महत्तवपूर्ण योगदान देने वाले शिवसेना नेता संजय राउत ने बुधवार (जनवरी 15, 2020) को पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी को लेकर एक बड़ा बयान दिया। उन्होंने मीडिया समूह को दिए एक साक्षात्कार में दावा किया कि पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गाँधी गैंगस्टर करीम लाला से मिलने पाइधोनी (दक्षिण मुंबई) आती थीं।

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उन्होंने मुंबई अंडरवर्ल्ड की बात करते हुए ये भी कहा कि एक दौर था जब दाऊद इब्राहिम, छोटा शकील और शरद शेट्टी मुंबई के पुलिस कमिश्नर तय किया करते थे। साथ ही ये निर्धारित करते थे कि सचिवालय में कौन बैठेगा। उनके मुताबिक गैंगस्टर हाजी मस्तान तो जब भी मंत्रालय में आता था, तब पूरा मंत्रालय उसे देखने नीचे आ जाता था। जबकि इंदिरा गाँधी खुद करीम लाला से मिलने आती थीं।

मीडिया समूह को साक्षात्कार देते हुए संजय राउत ने दावा किया कि उन्होंने दाऊद इब्राहिम सहित कई गैंगस्टरों की तस्वीरें खींची है। शिवसेना नेता ने यह भी दावा किया कि उन्होंने एक बार दाऊद इब्राहिम को फटकार लगाई थी। उन्होंने कहा, “मैंने उसे देखा है, मैं उससे मिला हूँ, मैंने उससे बात की है और मैंने उसे फटकार भी लगाई।”

कौन था करीम लाला?

करीम लाला मूल रूप से अफगानिस्तान के कुनार प्रांत का निवासी था। उसका असली नाम अब्दुल करीम शेर खान था और उसका जन्म सन 1911 में हुआ था। बताया जाता है करीम पश्तून समुदाय का आखिरी राजा था। उसका परिवार काफी संपन्न था। वह कारोबारी खानदार से ताल्लुक रखता था। जिंदगी में ज्यादा कामयाबी हासिल करने की चाह में वो हिंदुस्तान आया और 1960 से 1980 के बीच में मुंबई अंडरवर्ल्ड का एक बड़ा नाम बन गया। वह मुंबई में कच्ची शराब की भट्ठियाँ और जुए के अड्डे चलवाता था। तस्करी में उसकी हाजी मस्तान से होड़ रहती थी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार आज भले ही हाजी मस्तान मिर्जा को मुंबई अंडरवर्ल्ड का पहला डॉन कहा जाता है। लेकिन, कई रिपोर्ट्स के अनुसार अंडरवर्ल्ड के जानकार बताते हैं कि सबसे पहला माफिया डॉन करीम लाला था। जिसे खुद हाजी मस्तान भी असली डॉन कहा करता था। करीम लाला का आतंक मुंबई में सिर चढ़कर बोलता था। मुंबई में तस्करी समते कई गैर कानूनी धंधों में उसके नाम की तूती बोलती थी। लोग ये भी कहते हैं कि वह जरूरतमंदों और गरीबों की मदद भी करता था।

21 साल की उम्र में अफगानिस्तान से भारत आने का फैसला करने वाला अब्दुल करीम शेर खान पाकिस्तान के पेशावर शहर के रास्ते मुंबई पहुँचा था। उसने यहाँ पहले दिखावे के लिए कारोबार शुरू किया लेकिन असल में वे डॉक से हीरे जवाहरात की तस्करी करने लगा था। सन् 1940 तक उसने इस काम में इतनी पकड़ बना ली थी कि तस्करी के धंधे से उन्हें बहुत मुनाफा होने लगा। देखते ही देखते उसने कई जगहों पर दारू और जुए के अड्डे खोल दिए। समय के बढ़ने के साथ मुंबई में उसका खौफ और उसका नाम दोनों बढ़ते गए।

करीम लाला ने बतौर गैंगस्टर कई मामलों में मध्यस्थता कर उन्हें सुलझवाया। धीरे-धीरे वो इतना लोकप्रिय हुआ कि हर समाज और संप्रदाय के लोग उसके पास मदद मांगने आने लगे। उसके यहाँ अमीर और गरीब में कोई फर्क नहीं होता था। वह जरूरतमंदों और गरीबों की मदद करता था। और, तलाक चाहने वाले लोगों को अक्सर समझाता था कि तलाक समस्या का हल नहीं होता।

इन सबके अतिरिक्त करीम लाला फिल्म उद्योग के करीब था। उसने एक बार हेलन की मदद की थी। लेकिन दाऊद का दौर शुरू होते ही वो परेशान रहने लगा था। दोनों के बीच धंधे को लेकर विवाद बढ़ गए थे। मारपीट शुरू हो गई थी। कहा जाता है एक बार दाऊद इब्राहिम को करीम लाला ने जमकर पीटा था। जिसके बाद दाऊद को गंभीर चोट आई थी। इसके बाद दोनों के बीच दुश्मनी और नफरत इस कदर बढ़ गई कि 1981 में करीम लाला के पठान गैंग ने दाऊद इब्राहिम के भाई शब्बीर की दिन दहाड़े हत्या कर दी थी। शब्बीर के कत्ल से दाऊद इब्राहिम तिलमिला उठा और उससे बदला लेने की ठान बैठा। 1981 से 1985 तक दोनों की गैंग के बीच में गैंगवार होती रही। जिसके कारण कई दर्जन लोग मारे गए। धीरे-धीरे दाऊद की कंपनी ने मुंबई से करीम लाला का सफाया कर दिया और साल 2002 में 90 साल की उम्र में करीम लाला की मौत हो गई।

आज संजय राउत द्वारा करीम लाला और पूर्व पीएम इंदिरा गाँधी का नाम एक साथ लेने के कारण ये नाम फिर सुर्खियों में आ गया। वरना अब मुंबई में अंडरवर्ल्ड का ऐसा कोई प्रकोप नहीं है।

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कॉन्ग्रेस नेता का बेहूदा रवैया: मेट्रो में सुरक्षकर्मियों को धमकी, महिला पत्रकार से बदसलूकी – वायरल हुआ Video

महाराष्ट्र में जनता की इच्छा के विरुद्ध जाकर शिवसेना द्वारा एनसीपी और कॉन्ग्रेस के साथ सरकार बनाने का असर अब प्रदेश में दिखने लगा है। बिन बहुमत मिले सरकार का हिस्सा हो जाने से दोनों पार्टी के नेता और उनके रिश्तेदार अपना आपा खो चुके हैं और जनता को अपनी असलियत दिखाने से नहीं चूक रहे। कल सोशल मीडिया पर एनसीपी नेता के भाई की एक वीडियो वायरल हुई थी, जिसमें वे एक मजदूर को मार रहा था। आज कॉन्ग्रेस नेता की पोलपट्टी खुली है। जिसमें वे अपने पद की धौंस दो सुरक्षाकर्मियों को दिखा रहे हैं। मेट्रो स्टेशन पर हुए इस वाकये को खुद इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकार तबस्सुम ने अपने ट्विटर पर साझा किया है।

तबस्सुम ने लिखा कि कल मेट्रो स्टेशन में घुसते ही उन्होंने किसी को कहते सुना, “तुम जानते हो मैं पार्षद हूँ”। जब उन्होंने पास जाकर देखा तो वो कॉन्ग्रेस नेता विक्रांत चव्हाण थे। जो मेट्रो स्टाफ और सुरक्षाकर्मियों पर तेज आवाज में चिल्ला रहे थे और सुरक्षाकर्मी उन्हें शांत करने की कोशिश में जुटे थे।

बतौर पत्रकार, किसी शख्स को इस तरह बर्ताव करता देख तबस्सुम पूरा मामला जानने के लिए बेचैन हो गईं। उन्होंने साजिद नाम के सुरक्षाकर्मी से पूछा कि आखिर हुआ क्या है? साजिद ने बताया,”ये पार्षद हैं, यही कारण है कि ये चिल्ला रहे हैं और किसी की सुन ही नहीं रहे।”

तबस्सुम के मुताबिक उन्होंने खुद सुना कि सुरक्षाकर्मी उनसे निवेदन कर रहे थे कि वे साइलेंट जोन में न चिल्लाएँ। लेकिन शायद विक्रांत चव्हाण पर पद का इतना घमंड था कि वो किसी की सुनने को राजी नहीं हुए। और चुप होने की बजाए ज्यादा तेज चिल्लाने लगे।

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कॉन्ग्रेस नेता का ऐसा रवैया देख, तबस्सुम ने हस्तेक्षेप किया। उन्होंने बड़े आराम से चव्हाण को शांत हो जाने को कहा, लेकिन उनकी आवाज और तेज हो गई। वो पत्रकार को कहने लगे, “तू जा यहाँ से, मैं विक्रांत चव्हाण हूँ। पार्षद।” बस फिर क्या, तबस्सुम मे पूरे मामले की वीडियो बनानी शुरू कर दी। जिसे देखकर चव्हाण नाराज हो गए और तबस्सुम के हाथ पर मारकर वीडियो रोकने की कोशिश की।

तबस्सुम के अनुसार, इस घटना के तुरंत बाद वहाँ अधिक सिक्योरिटी आ गई। जिन्हें देखकर वे स्टेशन से बाहर चले गए। तबस्सुम लिखती हैं कि एनसीपी नेता के भाई की वीडियो वायरल होने के बाद अब ये कॉन्ग्रेस नेता हैं, जो अपनी ताकत का बेजा इस्तेमाल कर रहे हैं।

गौरतलब है कि अपने ट्वीट में तबस्सुम ने कॉन्ग्रेस नेता के बैकग्राउंड के बारे में भी पूरी पोल पट्टी खोली है। उन्होंने बताया कि चव्हाण के ऊपर इससे पहले कई मामले चल चुके हैं। साल 2015 में ठाणे के एक बिल्डर सूरज परमार द्वारा आत्महत्या करने के बाद चव्हाण को पूरे मामले में आरोपित करार दिया गया था। चव्हाण पर आरोप था कि उन्होंने परमार को मानसिक रूप से पेमेंट के लिए प्रताड़ित किया। जिसके कारण कॉन्ग्रेस नेता ने कुछ समय जेल में भी बिताया।

इसके अलावा चव्हाण और तीन अन्य पार्षदों, नेताओं और बिल्डरों का नेक्सस बनाने के भी आरोपित हैं। साथ ही अघोषित संपत्ति रखने के कारण इनके घर पर रेड भी पड़ चुकी है। लेकिन, इतने सबके बावजूद हैरानी की बात है कि कॉन्ग्रेस ने इस साल भी चव्हाण को मजिवाडा क्षेत्र से टिकट दिया। शायद सिर्फ़ इसलिए ताकि वो आम जनता पर चिल्ला सकें और उन पर अपने पद का रौब झाड़ सकें।

बता दें कि इससे पहले उद्धव ठाकरे कैबिनेट में अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री नवाब मलिक के भाई कप्तान मलिक ने मजूदरों की पिटाई की थी। जिसकी वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गई थी, जिसके बाद लोगों ने मंत्री के भाई की इस करतूत की आलोचना की थी। लेकिन नवाब मलिक का इसपर कोई बयान नहीं आया।

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हाल ही में रिलीज़ हुई फ़िल्म ‘तानाजी: द अनसंग वॉरियर’ में बॉलीवुड अभिनेता सैफ अली खान के निभाए उदयभान के किरदार को दर्शकों ने काफ़ी सराहा। वहीं, अब मुंबई में उनकी आने वाली अगली फिल्म ‘जवानी जानेमन’ का भी ट्रेलर रिलीज़ हो चुका है। इस दौरान सैफ ने ख़ुद को यंग दिखने और लाइफ जीने के तरीके को लेकर खुलकर बात की। साथ ही उन्होंने इस बात का भी ख़ुलासा किया कि उन्हें जीवन जीने के लिए हिन्दू आइडिया पसंद है।

दरअसल, फ़िल्म ‘जवानी जानेमन’ के गाने ‘दिल लुट्या’ गाने के लॉन्च पर सैफ से सवाल किया गया था कि क्या उन्हें कभी अपनी जवानी ढलने का डर लगता है? इसके जवाब में उन्होंने कहा था, “नहीं, कभी भी नहीं, मुझे जवानी के ढलने का डर कभी भी नहीं लगा और न ही लगता है, जवानी तो मेरी कब की ढल गई थी। मुझे इस तरह के कोई भी इश्यू नहीं हुए, सच कहूँ तो मैंने कभी सोचा भी नहीं, मुझे लगता है आप अगर अपने दिल से खुद को यंग महसूस करते हैं, आप अच्छा महसूस करते हैं, लेकिन मैं कभी भी बहुत यंग होना या रहना भी नहीं चाहता हूँ।”

अपनी बात को जारी रखते हुए सैफ ने कहा,

“आपको पता होना चाहिए कि आपको किस तरह अपना जीवन बिताना है। मुझे जीवन बसर करने का यह हिन्दू आइडिया पसंद है, जिसमें एक समय होता है, जब आपको पैसा कमाना है, एक टाइम होता है जब आपको रिलैक्स करना है। जीवन में हर चीज को करने का एक समय होता है। जब जिस चीज का टाइम आएगा, हम उस समय के हिसाब से दूसरा काम करेंगे, मुझे उसी चीज में ख़ुशी मिलेगी। मुझे बूढ़ा होने में कोई इश्यू नहीं है, मैं तैयार हूँ उसके लिए।”

ख़बर के अनुसार, ट्रेलर रिलीज़ के दौरान सैफ अली खान ने कहा, “मुझे बूढ़ा तो नहीं होना है, लेकिन मैं खुश हूँ। मैं अपने दिमाग से क्लियर हूँ। मुझे ज्‍यादा यंग लगने को कोई प्रेशर है ही नहीं। जब तक काम मिलता है, मिलता रहेगा, जब रिटायर करेंगे तो रिटायर हो जायेंगे, चिल‍ करेंगे।”

आपकी जानकारी के लिए बता दें कि फ़िल्म जवानी जानेमन में सैफ अली खान, तब्बू, अलाय फर्नीचरवाला के अलावा फरीदा जलाल, कुमुद मिश्रा, कीकू शारदी और कुब्रा सेठ अहम भूमिका में हैं। यह फ़िल्म जनवरी महीने की आख़िरी तारीख़ यानी 31 जनवरी को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज़ होगी। जानकारी के अनुसार, सैफ की बेटी सारा को फ़िल्म का ट्रेलर बेहद पसंद आया। फ़िलहाल, अभिनेता अजय देवगन की होम प्रोडक्शन फ़िल्म ‘तानाजी: द अनसंग वॉरियर’ में उनके किरदार की ख़ूब तारीफ़ तो हो रही ही है साथ ही यह फ़िल्म बॉक्स ऑफ़िस पर कमाई के लहज़े से भी तहलका मचा रही है।

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