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जामिया में CAA विरोध के बीच JNU छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष ने कहा- पीछे नहीं छोड़ सकते कश्मीर

सीएए के विरोध में पिछले लंबे समय से JNU में चली आ रही लड़ाई अब कश्मीर तक जा पहुँची है। जामिया में चल रहे धरने पर पहुँची JNU छात्रसंघ अध्यक्ष आईशी घोष ने कहा है कि “इस लड़ाई में हम कश्मीर को पीछे नहीं छोड़ सकते और न ही कश्मीर के बिना हम इस लड़ाई को जीत सकते, क्योंकि संविधान से छेड़छाड़ की शुरूआत कश्मीर से ही की गई थी।”

दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया में पिछले करीब 20 दिनों से सीएए के ख़िलाफ चल रहे धरना प्रदर्शन को अपना समर्थन देने के लिए बुधवार को जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष पहुँची, जहाँ आईशी ने मौजूद लोगों को संबोधित करते हुए कहा कि “इस लड़ाई में हम कश्मीर को पीछे नहीं छोड़ सकते, ये कश्मीर के ही हक़ की लड़ाई है और इससे पीछे नहीं हटा जा सकता। वहाँ के लोगों के साथ जो हो रहा है वह बहुत ही ग़लत हो रहा है और हर मंच से हम उनके हक़ की लड़ाई लड़ेंगे। कश्मीर से ही इस सरकार ने शुरू किया था कि हमारे संविधान को हमसे छीना जाए। “

उन्होंने आगे यह भी कहा कि “अगर हम इतिहास पढ़ेंगे तो राम प्रसाद बिस्मिल को याद करेंगे। गोडसे, सावरकर ने माफी माँगी वैसा इतिहास हम नहीं पढ़ेंगे।”

आईशी घोष के इस बयान को कश्मीर से हटाए गए अनुच्छेद 370 और 35ए से जोड़कर देखा जा रहा है। दरअसल केंद्र सरकार ने अनुच्छेद 370 को कश्मीर से 5 अगस्त 2019 को हटा दिया था। इसके साथ ही सरकार ने जम्मू-कश्मीर को अलग और लद्दाख को अलग केंद्र शासित प्रदेश बना दिया था। अनुच्छेद 370 को हटाने से पहले से लेकर इसे हटाने के बाद से केंद्र सरकार कश्मीर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ा दिया था। इतना ही नहीं वहाँ के हालातों पर काबू पाने के लिए सरकार ने जम्मू और कश्मीर में इंटरनेट, मोबाइल फोन, लैंडलाइन सेवाओं पर पाबंदी लगा दी थी। हालांकि अब हालात सामान्य होने की वजह से इन सेवाओं को धीरे-धीरे बहाल किया जा रहा है।

आपको बता दें कि हाल ही में मुंबई में हुए एक विरोध प्रदर्शन में एक लड़की द्वारा “फ्री कश्मीर” का पोस्टर लहराने पर उसके ख़िलाफ में केस दर्ज किया गया था। हालाँकि, बाद में जेएनयू छात्रों ने सफाई देते हुए कहा कि वो कश्मीर में फ्री इंटरनेट को लेकर लिखा गया था, लेकिन अब आइशी घोष खुद इसे लेकर खुलकर सामने आ गई हैं। गौरतलब है कि जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष 5 जनवरी को JNU कैंपस में हुई हिंसा के दौरान नकाबपोशों के हमले की चपेट में आने के बाद से ही चर्चा में हैं। इस हमले में आइशी घोष सहित कई छात्र घायल हो गए थे।

1984 दंगाः सिख यात्रियों को ट्रेनों से घसीटकर मारा गया, पुलिस तमाशबीन बनी रही, SIT रिपोर्ट

1984 के सिख विरोधी दंगा मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा नियुक्त विशेष जाँच दल (SIT) ने अपनी रिपोर्ट में उस वक्त की पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उच्चतम न्यायालय द्वारा नियुक्त SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान सिख यात्रियों को दिल्ली में रेलवे स्टेशनों पर ट्रेनों से बाहर निकालकर मारा गया लेकिन पुलिस ने किसी को भी मौके से यह कहते हुए नहीं बचाया कि उनकी संख्या बेहद कम थी।

केंद्र सरकार ने कहा कि दिल्ली पुलिस की भूमिका पर कमिटी की रिपोर्ट को हम स्वीकार करते हैं और इसके अनुसार कार्रवाई भी करेंगे। दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश एसएन ढींगरा की अध्यक्षता वाली SIT की रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रेन में सफर कर रहे सिख यात्रियों की ट्रेन और रेलवे स्टेशनों पर हमला करने वाले लोगों द्वारा हत्या किए जाने के पाँच मामले थे।

SIT ने कुल 186 मामलों की जाँच की थी। रिपोर्ट में कहा गया कि यह घटनाएँ 1 और 2 नवंबर 1984 को दिल्ली के पाँच रेलवे स्टेशनों- नाँगलोई, किशनगंज, दयाबस्ती, शाहदरा और तुगलकाबाद में हुई।

SIT रिपोर्ट में कहा गया है, “इन सभी पाँच मामलों में पुलिस को दंगाइयों द्वारा ट्रेन को रोके जाने तथा सिख यात्रियों को निशाना बनाए जाने के बारे में सूचना दी गई। सिख यात्रियों को ट्रेन से बाहर निकालकर पीटा गया और जला दिया गया। शव प्लेटफॉर्म और रेलवे लाइन पर बिखरे पड़े थे।

इस रिपोर्ट में कहा गया है, “पुलिस ने किसी भी दंगाई को मौके से गिरफ्तार नहीं किया। किसी को गिरफ्तार नहीं करने के पीछे जो कारण दर्शाया गया वह यह था कि पुलिसकर्मियों की संख्या बेहद कम थी और दंगाई पुलिस को देखकर भाग खड़े हुए।”

इसके साथ ही रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि पुलिस ने घटनावार या अपराधवार FIR दर्ज नहीं की और इसके बजाए कई शिकायतों को एक ही FIR में मिला दिया गया। इसमें कहा गया कि ऐसी ही एक प्राथमिकी में 498 घटनाओं को शामिल किया गया था और इनकी जाँच के लिये सिर्फ एक अधिकारी को नियुक्त किया गया था।

तत्कालीन प्रधानमंत्री इन्दिरा गाँधी की अक्टूबर 31, 1984 को उनके दो सुरक्षा कर्मियों द्वारा गोली मार कर हत्या किए जाने के बाद दिल्ली सहित देश के अनेक हिस्सों में बड़े पैमाने पर सिख विरोधी दंगे हुए थे। इन दंगों में अकेले दिल्ली में 2,733 व्यक्तियों की जान चली गई थी।

पकड़े जाने पर ‘The Quint’ ने डिलीट किया ‘बिना कागज़ के बेबस मुस्लिम ड्राइवर’ का फर्जी वीडियो

प्रोपेगैंडा वेबसाइट दी क्विंट लगातार भ्रामक और गुमराह करने वाली खबरें चलाकर देश में CAA (नागरिकता संशोधन कानून) के विरोध में माहौल बनाने की कोशिशें करते हुए स्पष्ट रूप से पकड़ा जा चुका है। ‘द क्विंट’ ने 13 जनवरी को एक वीडियो जारी करते हुए दावा किया था कि इसमें दिखने वाला शख्स एक ड्राइवर है जो उबर (UBER) के लिए काम करता है। इसमें वो काफ़ी नाटकीय ढंग से रोते हुए कहता दिख रहा था कि वो मुस्लिम है और एनआरसी के बारे में सोचते ही उसकी रूह काँप उठती है।

इस स्क्रिप्टेड वीडियो की पोल खुलने के बाद दी क्विंट ने यह वीडियो अपनी वेबसाइट से डिलीट कर दिया है और साथ में कुछ फर्जी स्पष्टीकरण ट्वीट करते हुए बताया है कि उस मुस्लिम कैब चालाक को ऑनलाइन ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा जिस वजह से यह वीडियो डिलीट करना पड़ रहा है। हालाँकि, प्रोपेगैंडा वेबसाइट द क्विंट अभी भी अपनी इस वीडियो को स्क्रिप्टेड बताने से साफ़ इंकार कर रहा है।

The Quint Deleted This Video

द क्विंट द्वारा ढूँढकर लाए गए इरशाद अहमद नाम के व्यक्ति के इस वीडियो में एक कैब चालाक बताता है कि न उसके पास ज़मीन-जायदाद है और न ही कोई कागज़, तो उसे चिंता हो रही है कि वो अपनी नागरिकता कैसे साबित करेगा? इसका नाम इरशाद अहमद बताया गया है। ‘द क्विंट’ से बातचीत में उक्त इरशाद ने बताया कि नागरिकता साबित न करने पर उसके साथ क्या होगा, ये सोच कर उसे डर लग रहा है।

दी क्विंट के इस वीडियो में गड़बड़ी की आशंका को देखते हुए फ़िल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने ‘द क्विंट’ के इस वीडियो की पोल खोल कर रख दी। उन्होंने तुरंत जानकारी देते हुए बताया कि ये व्यक्ति इरशाद अहमद बॉलीवुड में बतौर जूनियर एक्टर काम करता है। ‘द ताशकंद फाइल्स’ और ‘बुद्धा इन अ ट्रैफिक जाम’ जैसी फ़िल्मों का निर्देशन कर चुके अग्निहोत्री ने बताया कि ‘द क्विंट’ ने इस पूरे ड्रामे की साज़िश पहले ही रच ली थी। अर्थात, एक स्क्रिप्ट तैयार कर के उस ड्राइवर को पीड़ित दिखा कर उससे अभिनय करवाया गया और दर्शकों को इसे सच बता कर परोस दिया गया। जबकि सब कुछ एक ड्रामा है।

फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने दी क्विंट के इस प्रोपेगैंडा को ध्वस्त करते हुए वेबसाइट को चैलेंज भी किया था कि वह साबित करें कि यह एक फेक और सोची समझी घृणा फैलाने के मकसद से जारी किया गया स्क्रिप्टेड वीडियो नहीं है या फिर इसे डिलीट कर दे। इसके कुछ घंटों बाद ही दी क्विंट ने कुछ स्पष्टीकरण देते हुए ड्राइवर का वह वीडियो डिलीट कर दिया।

अपनी सफाई में दी क्विंट ने स्पष्टीकरण देते हुए कहा है –

  1. ड्राइवर को बहुत ज्यादा सोशल मीडिया ट्रोलिंग का शिकार होना पड़ा है, जैसा कि फिल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने ड्राइवर पर बॉलीवुड से जुड़े होने के आरोप लगाए।
  2. द क्विंट स्पष्ट करता है कि यह ड्राइवर कभी भी बॉलीवुड में कलाकार नहीं रहा।
  3. ओरिजिनल वीडियो म्युज़िशियन सुमित रॉय द्वारा बनाया गया था, जिसने स्पष्ट किया है कि यह वीडियो स्क्रिप्टेड नहीं था।
  4. सुमित रॉय ने ड्राइवर की अनुमति से वीडियो इंस्टाग्राम पर अपलोड किया, जहाँ हमारी (दी क्विंट) इस वीडियो पर नजर पड़ी।
  5. दी क्विंट ने ड्राइवर को रुपए नहीं दिए।
  6. ड्राइवर ने दी क्विंट को यह वीडियो सार्वजानिक करने की इजाजत दी थी लेकिन सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने के भय, अपने और परिवार की सुरक्षा के भय से हमने वीडियो डिलीट कर के ड्राइवर की पहचान छुपा दी है।

दी क्विंट के इस स्पष्टीकरण पर निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने दी क्विंट को एकबार फिर लताड़ लगाते हुए ट्वीट किया- “झूठे और तीसरे दर्जे के दी क्विंट ने मुझे टैग नहीं किया क्योंकि मैंने उन्हें चैलेंज किया था कि क्विंट को यह वीडियो डिलीट करना पड़ेगा अगर यह दुर्भावना से बनाया गया वीडियो फेक साबित हो जाए। यह वीडियो क्विंट ने अपने घृणा का एजेंडा चलाने के लिए बनाया था।”


JNU हिंसा में नाम घसीटे जाने पर कोमल शर्मा ने की न्यूज़ चैनल के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग में शिकायत

दिल्ली विश्वविद्यालय की छात्रा कोमल शर्मा ने एक न्यूज़ चैनल के खिलाफ राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) में शिकायत दर्ज करवाई है। जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में गत 5 जनवरी को हुई हिंसा में DU की छात्रा कोमल शर्मा का नाम घसीटे जाने पर आज उन्होंने राष्ट्रीय महिला आयोग से संपर्क किया है।

कोमल शर्मा का आरोप है कि JNU में हुए हमले को लेकर चैनल ने उन्हें कथित तौर पर एक आरोपित के रूप में पेश करके बदनाम किया है। इसके साथ ही कोमल ने मीडिया संस्थानों और दिल्ली पुलिस को भी पत्र लिखकर इस मामले में ध्यान रखने को कहा है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, राष्ट्रीय महिला आयोग की एक अधिकारी ने बताया कि कोमल शर्मा ने राष्ट्रीय महिला आयोग को शिकायत की है कि जेएनयू में 5 जनवरी की हिंसा के मामले में उनका नाम गलत तरीके से शामिल किया गया है और संबंधित न्यूज़ चैनल ने इस पर प्रतिक्रिया या स्पष्टीकरण के लिए उनसे संपर्क भी नहीं किया।

जेएनयू हिंसा में चेक शर्ट में दिखी लड़की को कहा जा रहा था कि वह DU में पढ़ने वाली कोमल शर्मा हैं। यही वजह है कि कोमल को राष्ट्रीय महिला आयोग के पास जाना पड़ा। हालाँकि, कोमल शर्मा का नाम मीडिया में आने के बाद दिल्ली पुलिस द्वारा भी लिया गया था। कहा गया था कि दिल्ली पुलिस ने भी मीडिया खबरों के आधार पर कोमल शर्मा को तलाश रही है।

AMU के हिंसा करने वाले उपद्रवियों ने आम छात्रों को धमकाया, #BoycottExam के लिए बना रहे दबाव

अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में पढ़ने वाले छात्र इन दिनों एक नई मुसीबत में हैं, ऐसा इसलिए कि AMU में सुचारू रुप से कक्षाएं चलाने के लिए विश्वविद्यालय के वीसी को पत्र लिखने और मेल के माध्यम से अवगत कराने वाले छात्रों को अब धमकियाँ मिल रही हैं, इतना ही नहीं उन पर कक्षाओं का बहिष्कार करने का भी दवाब बनाया जा रहा है। अब ऐसे पीड़ित छात्रों ने वीसी से सुरक्षा की माँग की है।

CAA और NRC के विरोध में 15 दिसंबर को AMU में हुई हिंसा के बाद 13 जनवरी को विश्वविद्यालय पूर्ण रूप से खुल गया, लेकिन विश्वविद्यालय के खुलते ही छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार करना शुरू कर दिया। यहाँ तक कि AMU से जुड़े स्कूलों को भी बंद कराने की कोशिश की गई। जिससे परेशान पढ़ाई करने वाले विश्वविद्यालय के करीब 200 छात्र-छात्राओं ने AMU के वीसी को पत्र लिख कर और ई-मेल के माध्यम से अवगत कराया कि वह विश्वविद्यालय में कक्षाओं को सुचारू रूप से संचालन और समय से अपनी परीक्षाएं देना चाहते हैं।

ज़ाकिर हुसैन में पढ़ने वाले B.Ed के छात्र अंकित वार्ष्णेय ने वीसी को ई-मेल के माध्यम से बताया कि उसकी 17 जनवरी से परीक्षाएं शुरू होनी हैं, लेकिन हम बहुत सी समस्याओं का सामना कर रहे हैं, जो कि इस प्रकार हैं, मैं हमारे कॉलेज द्वारा बताई गई तारीख पर परीक्षा देने के लिए तैयार हूँ, लेकिन परीक्षाओं को लेकर सोशल मीडिया पर कुछ भ्रामक पोस्ट फैल रही हैं। अग़र ऐसे में कुछ होगा तो मुझे सुरक्षा की जरूरत है। वहीं मुझे गर्मियों की छुट्टियों में एक इंटर्नशिप मिली है और कुछ प्रतियोगी परीक्षाएं भी हैं। इसलिए परीक्षा का बहिष्कार करने से हमारी शैक्षणिक गतिविधियाँ प्रभावित होंगी। आख़िर में आपसे आग्रह करता हूँ कि कम से कम उन छात्रों के ख़िलाफ़़ कड़ी कार्रवाई की जाए जो इस तरह छात्रों को परीक्षाओं का बहिष्कार करने के लिए तरह-तरह की धमकी दे रहे हैं।

अंकित वार्ष्णेय द्वारा वीसी को किए गए ई-मेल का स्क्रीनशॉट

कुछ ऐसे ही B.tech करने वाले छात्र मनुज गुप्ता ले वीसी को ई-मेल कर परीक्षा देने की इच्छा जताई और वीसी से असामाजित तत्वों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने की भी माँग की। साथ ही इन छात्रों ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय प्रशासन को आगाह किया कि कुछ असामाजिक तत्व फ़िर से JNU की तरह AMU में हिंसा करने की कोशिश में हैं।

मनुज गु्प्ता द्वारा वीसी को की गई ई-मेल का स्क्रीनशॉट

छात्रों द्वारा वीसी को की गई ई-मेल की जानकारी जैसे ही विश्वविद्यालय में मौजूद असामाजिकतत्वों को हुई , तो उन्होंने उन छात्रों को धमकाना शुरू कर दिया, जिन्होंने वीसी को मेल किया था। इतना ही नहीं उन्होंने छात्र-छात्राओं पर दवाब बनाया कि वह कक्षाओं का बहिष्कार करते हुए सोशल मीडिया पर #boycottexam चलाएँ और प्रोटेस्ट में शामिल हों।

#BoycottExam चलाने और प्रोटेस्च में शामिल होने के लिए ग्रुप में किए गए मैसेज का स्क्रीनशॉट

इससे वह छात्र एक नई मुसीबत में फँस गए हैं, जो विश्वविद्यालय में सुचारू रूप से कक्षाएँ चलते देखना चाहते हैं।

एएमयू में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर 15 दिसंबर को हुए बवाल के बाद 13 जनवरी को यूनिवर्सिटी पहली बार खुली। दरअसल जामिया मिलिया में 15 दिसंबर को हुए बवाल के बाद फैली एक छात्र की मौत की अफवाह से AMU में छात्र भड़क गए थे, जिससे गुस्साए छात्रों ने बाबे सैयद का गेट तोड़कर पुलिस पर पथराव कर दिया था। इसके बाद पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई में कई छात्र घायल हो गए थे। इस बवाल के बाद ही इंतजामिया ने यूनिवर्सिटी को पाँच जनवरी तक बंद कर दिया था, लेकिन छात्रों के प्रदर्शन को देखते हुए इंतजामिया ने तय समय पर यूनिवर्सिटी नहीं खोलते हुए छह जनवरी से यूनिवर्सिटी को छह चरणों में खोलने का निर्णय लिया था।

दैनिक जागरण में प्रकाशित ख़बर की कटिंग

31 दिनों से ज़ारी धरने को JNU के छात्रों ने दिया समर्थन

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में पिछले करीब 31 दिनों से छात्रों का एएमयू अलीगढ़ के बाबे सैयद गेट पर विरोध-प्रदर्शन चल रहा है। इसे बीते दिनों JNU से पहुँचे चार छात्रों ने अपना समर्थन देते हुए धरने पर मौजूद छात्र-छात्राओं को संबोधित किया, जिसमें JNU छात्रा स्नेहाशीष ने छात्रों में जोश भरते हुए कहा कि
जब तक CAA को खत्म नहीं किया जाएगा, तब तक हमारी लड़ाई जारी रहेगी। वहीं छात्र सहादत हुसैन ने पुलिस की कार्रवाई को निंदनीय बताया और सवाल किया कि ‘क्या पुलिस, जो कानून और व्यवस्था की रक्षा करने का दावा करती है, खुद कानून और व्यवस्था का पालन करती है?’ इस दौरान छात्रों ने धरने पर AMU माँगे आजादी, JNU माँगे आजादी, संघवाद से आजादी जैसे नारे लगाए।

पिस्तौल के साथ बना रहा था TikTok वीडियो, सर में गोली लगने से गई 18 साल के युवक की जान

बरेली में TikTok वीडियो के लिए बन्दूक इस्तेमाल करना एक 18 साल के युवक के लिए महँगा पड़ गया। पुलिस के अनुसार, केशव नाम के इस युवक की मौत वीडियो बनाते समय बन्दूक चल जाने से हो गई। यह घटना
हाफिज़गंज, बरेली के मुड़िया भीकमपुर गाँव की है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, हाफिज़गंज थाना क्षेत्र के गाँव मुड़िया भीकमपुर निवासी फौजी वीरेंद्र कुमार के 18 वर्षीय पुत्र केशव ने अपनी माँ सावित्री से टिकटॉक वीडियो बनाने के लिए जिद कर के रिवॉल्वर माँगी। केशव की माँ ने जब मना किया तो उसने जिद पकड़ ली। आखिर में मजबूरन उसकी माँ ने अलमारी में रखी रिवॉल्वर उसे दे दी। 

कुछ देर बाद जब गोली चलने की आवाज़ आई तो केशव की माँ सावित्री और परिवार के लोग दौड़कर कमरे में पहुँचे। वहाँ का नज़ारा देखकर सभी दंग रह गए। केशव खून से लथपथ ज़मीन पर पड़ा था। उसके सर में गोली लगी थी। ये देखकर घरवाले केशव को अस्पताल ले गए जहाँ उसे मृत घोषित कर दिया गया।

केशव एक सैन्यकर्मी का बेटा था। उसके पिता वीरेंद्र अभी रूड़की में कार्यरत हैं। वर्तमान में वह इंटरमीडियट की पढ़ाई कर रहा था। केशव की माँ सावित्री ने बताया कि उनके बेटे ने ज़िद करके टिकटॉक वीडियो बनाने के लिए रिवॉल्वर अलमारी से निकलवाई थी, लेकिन उनको यह नहीं पता था कि वो लोडेड है। केशव की माँ ने बताया कि उसके अंदर टिकटॉक वीडियो के लिए पागलपन था और वो रोज अलग-अलग वीडियो बनाकर उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट किया करता था।

विदेश में झुमका चुराने वाली बंगाली अभिनेत्री बनीं CAA विरोध का नया चेहरा, कहा- कागज़ नहीं दिखाएँगे

देशभर में नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान में एक नया नाम जुड़ गया है। इस मुहिम में अब बंगाली कलाकार भी शामिल हो रहे हैं। इनमें से ही एक नाम है बंगाल की एक मशहूर अभिनेत्री स्वस्तिका मुखर्जी का। स्वस्तिका मुखर्जी ने भी ‘कागज़ नहीं दिखाएँगे’ वाली लाइन से खुद को जोड़ लिया है।

बंगाल के इन कलाकारों ने सरकार से कागज नहीं दिखाने की बात कही है। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है जिसमें सारे बंगाली कलाकार अपनी भाषा सरकार को निशाने पर लेते हुए किसी भी तरह के कागजात नहीं दिखाने की बात की है।

अब इस कानून के खिलाफ बंगाली कलाकार भी एकजुट हो चुके हैं। इन कलाकारों ने सरकार से कागज नहीं दिखाने की बात कही है। सोशल मीडिया पर इसका एक वीडियो खूब वायरल हो रहा है जिसमें सारे बंगाली कलाकार अपनी भाषा में केंद्र सरकार को निशाने पर लेते हुए किसी भी तरह के कागजात नहीं दिखाने की बात की है।

इन बंगाली कलाकारों में कोंकणा सेन शर्मा से लेकर धृतिमान चटर्जी, नंदना सेन और स्वस्तिका मुखर्जी, गायक रूपम इस्लाम सहित कुल 12 शख्सियतें CAA का विरोध करते हुए देखी जा रही हैं। कभी आम आदमी पार्टी का चेहरा रहे और अब स्वराज्य पार्टी के निर्माता योगेंद्र यादव ने भी इस वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल से शेयर किया है।

ज्ञात हो कि बंगाली एक्ट्रेस स्वस्तिका मुखर्जी वर्ष 2014 में सिंगापुर में दुकान से झुमका चुराते हुए पकड़ी गई थी। उस समय यह बंगाली अभिनेत्री एक बंगाली फिल्म महोत्सव के सिलसिले में सिंगापुर में थीं। अभिनेत्री को वहाँ के एक पॉश मॉल के जूलरी शोरूम में 12,139 रुपए की सोने के झुमके चुपके से अपने हैंडबैग में रखते हुए पकड़ा गया था।

CCTV कैमरा की नजर में आने के बाद अभिनेत्री पर शोरूम मालिक ने कम्प्लेन दर्ज कराई थी। इस पर अभिनेत्री ने सफाई देते हुए कहा था कि उन्हें पता ही नहीं चला कि ये झुमके उसके बैग में कैसे आ गए।

एक भी छात्र न हुआ तब भी दूँगा लेक्चर: आइशी घोष की क्लास बंद करने की धमकी पर JNU प्रोफेसर का बयान

JNU में लेफ्ट विंग दल जवाहर लाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट्स यूनियन (JNUSU) का कहना है कि वो JNU में तब तक कोई क्लास नहीं चलने देंगे जब तक वाइस चांसलर जगदीश कुमार इस्तीफ़ा नहीं दे देते हैं। या उनको हटाया नहीं जाता है। इसके जवाब में JNU के प्रोफेसर वैज्ञानिक आनंद रंगनाथन ने ट्वीट करते हुए कहा है कि अगर क्लास में एक भी विद्यार्थी न हुआ तब भी अपना लेक्चर देंगे।

अपनी प्रतिक्रिया में प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने लिखा है कि किसी विद्यालय में सीखने के लिए जितना अवसर किसी छात्र के लिए होता है उतना ही एक शिक्षक के लिए होता है और कोई भी इस परंपरा को नहीं तोड़ सकता है। छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष 5 जनवरी को JNU में हुई हिंसा का आरोप JNU वाइस चांसलर पर लगाया है।

वैज्ञानिक प्रोफेसर आनंद रंगनाथन ने TOI की न्यूज़ रीट्वीट करते हुए लिखा है- “मैंने अभी एक क्लास ली है और यदि पूरा ऑडिटोरियम खाली भी रहा तब भी क्लास लेता ही रहूँगा। एक कक्षा में जितना अवसर एक छात्र के लिए कुछ नया सीखने का होता है, उतना ही एक शिक्षक के लिए भी होता यही। और इस परम्परा को कोई भी नहीं तोड़ सकता है, ना ही प्रधानमंत्री रोक सकते हैं और ना ही राष्ट्रपति तो फिर तुम कौन हो?”

दरअसल, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) छात्रसंघ ने माँग की थी कि कुलपति एम जगदीश कुमार को हटाया जाए और वह जल्द से जल्द इस्तीफा दें। छात्रसंघ अध्यक्ष आइशी घोष ने कहा था, “जेएनयू के कुलपति के इस्तीफे की हमारी माँग कायम है। हम सलाहकारों और पदाधिकारियों की एक बैठक बुलाएँगे और फैसला करेंगे कि प्रदर्शन वापस लेना है या नहीं। हमनें अपनी बात रख दी है और अंतिम फैसले के लिये मंत्रालय के फैसले का इंतजार कर रहे हैं।”

पहले भी प्रोफेसर रंगनाथन व उनके साथियों को JNU में लैब में घुसने से रोक दिया गया था। तब ए रंगनाथन लाख मिन्नतें करते रहे कि विज्ञान विभाग किसी अन्य विभाग की तरह थ्योरेटिकल नहीं है बल्कि यहाँ प्रैक्टिकल होते हैं, लेकिन छात्र नहीं माने। प्रोफेसर ने कहा कि कई अहम एक्सपेरिमेंट करने होते हैं, इसके लिए महँगे उपकरण मँगाए जाते हैं और इन सभी चीजों के लिए आम नागरिक के टैक्स से मिले रुपयों का इस्तेमाल होता है। सोशल मीडिया पर अपनी आपबीती सुनाते हुए रंगनाथन ने लिखा था कि इन हरकतों की वजह से किसी एक व्यक्ति की नहीं बल्कि सबकी हानि होगी।

ममता बनर्जी के रास्ते का घेराव करना वामपंथी छात्रों को पड़ा भारी, 150 अज्ञात लोगों पर मामला दर्ज

पश्चिम बंगाल में सीएए के ख़िलाफ़ 11 जनवरी को आयोजित ममता बनर्जी की रैली का रास्ता रोकना वामपंथी छात्रों को महंगा पड़ गया। इस मामले के संबंध में मात्र 4 दिन के भीतर 150 अज्ञात लोगों के ख़िलाफ़ एफआईआर दर्ज कर ली गई। अब आगे इन अज्ञातों की पहचान कर कार्रवाई होगी। फिलहाल इस मामले में कोई गिरफ्तारी नहीं हुई है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अज्ञात लोगों के खिलाफ़ दर्ज किए गए केस में नुकसान पहुँचाने, आपराधिक धमकी देने के साथ-साथ गैर-जमानती धाराएँ भी शामिल हैं। इसके अतिरिक्त इस केस में एक जनसेवक को उसकी ड्यूटी करने से रोकने का मामला भी शामिल है।

जानकारी के अनुसार, हेयर स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के एक सूत्र ने खुद यह सूचना दी है। ये वही स्टेशन है जहाँ पूरा मामला दर्ज किया गया ।

गौरतलब है कि 11 जनवरी को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की मुलाकात के बाद संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी के ख़िलाफ धर्मतल्ला में विरोध प्रदर्शन कर रहे वामपंथी छात्र भड़क उठे थे।

खबरों के मुताबिक, उस रात करीब 8 बजे उग्र छात्रों के एक दल ने ममता बनर्जी की रैली के सामने जोरदार हंगामा किया था। इस दौरान जब पुलिस ने इन छात्रों को रोकना चाहा तो इन्होंने धक्का-मुक्की शुरु कर दी। स्थिति को सामान्य करने के लिए ममता बनर्जी को स्वयं ही इस मामले में हस्तक्षेप करना पड़ा था। लेकिन बावजूद इसके हिंसक हुई छात्रों की भीड़ ने एक न सुनी। छात्रों ने इस दौरान पुलिस की घेराबंदी तोड़ी और आजादी के नारे लगाए।

माकपा से संबद्ध छात्र संगठन एसएफआई ने इस दौरान ममता बनर्जी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ बैठक कर सीएए के खिलाफ लड़ाई कमजोर कर दी है। हालाँकि, बाद में ममता बनर्जी ने उन्हें अपनी ओर से स्पष्ट करते हुए बताया कि उन्होंने पीएम मोदी के साथ बैठक केवल राज्य के फायदे के लिए आर्थिक माँगों को लेकर की थी।

बता दें, न्यू मीडिया इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, एक पुलिस अधिकारी ने छात्रों पर दर्ज हुई एफआईआर पर कहा है कि उन्होंने ये एक्शन सुरक्षा लिहाज से लिया है। उनका कहना है, “अगर, कोई कोर्ट में हमारे ख़िलाफ़ याचिका दायर कर हम पर उन प्रदर्शनकारियों के ख़िलाफ़ कोई एक्शन न लेने का आरोप लगाता है, जिन्होंने उस दिन बैरीकेड तोड़े और मुख्यमंत्री के पास पहुँच गए, तो ये एफआईआर उन आरोपों में खारिज करने में मददगार होगी।”

बढ़ रहा लव जिहाद, धर्मांतरण करवा ईसाई लड़कियों का हो रहा निकाह: केरल का चर्च

केरल में लव जिहाद की बढ़ती घटनाओं ने ईसाइयों की चिंता बढ़ा दी है। केरल के सबसे बड़े चर्च साइरो मालाबार ने इस पर गहरी चिंता जताई है। साइरो मालाबार मीडिया कमीशन की रिपोर्ट में कहा गया है कि लव जिहाद के नाम पर ईसाई लड़कियों को निशाना बनाया जा रहा है। उनकी हत्या हो रही है।

रिपोर्ट में कहा गया है, “केरल मे ईसाई लड़कियों को लव जिहाद के नाम पर निशाना बनाकर उनकी हत्या हो रही है। इसलिए राज्य में लव-जिहाद की बढ़ती घटनाएँ बेहद चिंता की बात हैं। इससे केरल में धर्मनिरपेक्ष सद्भाव और सामाजिक शांति को खतरा है।”

इस मामले पर मंगलवार को चर्च ने पुलिस की कार्रवाई करने के तरीके पर अपनी चिंता व्यक्त की थी। पादरियों की बैठक में पुलिस पर अपना काम सही ढंग से न किए जाने का आरोप लगाया गया था। बैठक में इस बिंदु पर चर्चा हुई कि ईसाई महिलाओं को प्रेम के नाम पर निशाना बनाया जा रहा है। साथ ही उनका धर्मान्तरण करवाकर, उनसे निकाह किया जा रहा है। जानकारी के अनुसार, चर्च का कहना था कि इसे धार्मिक मुद्दा न मानकर कानून एवं व्यवस्था की तरह देखा जाए और इस पर एक्शन लिया जाए।

यह पहला मौका नहीं है, जब ईसाई लड़कियों को लेकर इस तरह की बात सामने आई है। इससे पहले पिछले वर्ष राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन भी ईसाई लड़कियों के प्रति चिंता व्यक्त करते हुए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिख चुके हैं। अपने पत्र में उन्होंने गृहमंत्री का ध्यान ईसाई लड़कियों के साथ हो रही लव जिहाद की घटनाओं पर दिलाया था। कुरियन ने पत्र में लिखा था कि ऐसा लगता है कि ईसाई समुदाय की लड़कियाँ इस्लामी कट्टरपंथियों का सॉफ्ट टारगेट हैं। उन्हें लव जिहाद का शिकार बनाकर आतंकी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल किया जाता है। उन्होंने इसकी एनआईए से जाँच कराने की माँग की थी।

अमित शाह को लिखे पत्र में कुरियन ने आगाह करते हुए बताया था कि ये बहुत महत्वपूर्ण मुद्दा है, इसलिए गृह मंत्रालय इस खतरनाक प्रवृति पर ध्यान दे और इस मामले के संबंध में राष्ट्रीय जाँच एजेंसी को जाँच के आदेश दे। साथ ही कट्टरपंथी तत्वों की ऐसी धोखाधड़ी वाली गतिविधियों पर अंकुश लगाने के लिए एक प्रभावी कानून लाए।

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