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बाकी सब बाद में करूँगा, एक बार मार्क्स ले आऊँ… सिर्फ परीक्षा के अंक जिंदगी नहीं: PM मोदी

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तनाव-रहित परीक्षा को लेकर छात्रों, अभिभावकों और शिक्षकों से ‘परीक्षा पे चर्चा’ की। उन्होंने कार्यक्रम की शुरुआत नववर्ष की शुभकामनाएँ देते हुए कीं। परीक्षा पे चर्चा का यह तीसरा संस्करण तालकटोरा स्टेडियम में आयोजित किया गया, जिसमें देश-विदेश के छात्रों ने हिस्सा लिया।

इस कार्यक्रम के माध्यम से छात्रों ने परीक्षा को लेकर अपने सवाल सीधे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछा। पीएम मोदी भी स्कूली बच्चों का बोर्ड परीक्षा के लिए छात्रों को हौसला बढ़ाया और परीक्षा को लेकर जो भी डर छात्रों के मन में था, उसे दूर करने की कोशिश की।

पीएम ने इस कार्यक्रम को सबसे अधिक दिल छू लेने वाला बताया। उन्होंने कहा, “अगर कोई मुझे कहे कि इतने कार्यक्रमों के बीच वो कौन सा कार्यक्रम है जो आपके दिल के सबसे करीब है, तो मैं कहूँगा वो कार्यक्रम है परीक्षा पे चर्चा। युवा मन क्या सोचता है, क्या करना चाहता है, ये सब मैं भली-भाँति समझ पाता हूँ।”

उन्होंने बच्चों को संबोधित करते हुए कहा, “जैसे आपके माता-पिता के मन में 10वीं, 12वीं को लेकर टेंशन रहती है, तो मुझे लगा आपके माता-पिता का भी बोझ मुझे हल्का करना चाहिए। मैं भी आपके परिवार का सदस्य हूँ, तो मैंने समझा कि मैं भी सामूहिक रूप से ये जिम्मेदारी निभाऊँ।”

पीएम ने पिछले साल भी छात्रों संग यह चर्चा की थी। दिल्ली के तालकटोरा इनडोर स्टेडियम में हो रही इस चर्चा में छात्रों और शिक्षकों से परीक्षा के तनाव को दूर करने पर संवाद किया। इस कार्यक्रम में कुल 2,000 स्टूडेंट्स और टीचर्स ने हिस्सा लिया, जिनमें से 1,050 छात्रों का चयन निबंध प्रतियोगिता के जरिए किया गया था। मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने कार्यक्रम के लिए कक्षा 9 से 12 के छात्रों के लिए पाँच अलग-अलग विषयों पर एक ‘शॉर्ट निबंध’ प्रतियोगिता शुरू की थी। इसी के माध्यम से इन छात्रों का चयन किया गया।

पीएम मोदी जब स्टेडियम पहुँचे तो छात्रों ने कई तरह की पेंटिंग दिखाई। छात्रों ने पर्यावरण, शिक्षा और परीक्षा के तनाव के बारे में पेंटिंग दिखाई। छात्रों ने देश के महापुरुषों के स्टैच्यू भी दिखाए। इस बीच एक छात्र ने पीएम मोदी को समुद्र तट पर उनके द्वारा की गई सफाई की पेंटिंग भी दिखाई। उन्होंने छात्रों द्वारा बनाई गई पेंटिग्स की काफी सराहना की। पीएम मोदी के इस कार्यक्रम का मकसद है कि छात्र तनावमुक्त होकर परीक्षाएँ दें, जिससे दीर्घकाल में बेहतर परिणाम सुनिश्चित हो सके।

कार्यक्रम के दौरान जब एक छात्रा ने उनसे परीक्षा के नाम पर मूड ऑफ होने की बात कही तो पीएम ने उसे समझाते हुए कहा, “क्या कभी हमने सोचा है कि मूड ऑफ क्यों होता है? अपने कारण से या बाहर के किसी कारण से। अधिकतर आपने देखा होगा कि जब मूड ऑफ होता है, तो उसका कारण ज्यादातर बाह्य होते हैं।”

एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि पिछले साल करीब 1.4 लाख छात्रों की प्रविष्टियाँ देश भर से मिली थीं। इस बार यह संख्या बढ़कर लगभग 2.6 लाख हो गई है। पीएम मोदी ने 2018 में आयोजित ऐसे सत्र में छात्रों के 10 प्रश्नों के उत्तर दिए थे और पिछले साल 16 सवाल लिए थे। पहले इस साल यह सत्र 16 जनवरी को होना था लेकिन देशभर में विभिन्न पर्वों की वजह से इसे टाल दिया गया था।

CAA-NRC का विरोध करने वाले कलाकार ममता के कुत्ते: TMC-कॉन्ग्रेस से जुड़े रहे सांसद खान का विवादित बयान

पश्चिम बंगाल में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर भाजपा और टीएमसी के बीच राजनैतिक टकरार चालू है। इसी कड़ी में हाल ही में टीएमसी छोड़कर भाजपा में शामिल होने वाले बीजेपी सांसद सौमित्र खान ने अपना गुस्सा निकालते हुए एक विवादित बयान दिया। उन्होंने सीएए का विरोध करने वाले प्रदेश के मशहूर कलाकारों को ‘ममता बनर्जी का कुत्ता’ करार दिया।

बिष्णुपुर लोकसभा सीट से सांसद सौमित्र खान ने कहा कि वे (विरोध करने वाले कलाकार) लोग प्रस्तावित एनआरसी और सीएए से जुड़े तथ्यों के बारे में जानते हैं, लेकिन फिर भी विरोध कर रहे हैं। खान ने आगे कहा कि जो लोग ऐसा कर रहे हैं, वे ममता बनर्जी के ‘कुत्ते’ हैं। उन्होंने एक्ट का विरोध कर रहे कलाकारों पर निशाना साधते हुए कहा कि यही लोग कामदूनी और पार्क स्ट्रीट में हुए सामूहिक बलात्कार पर चुप रहे और बम विस्फोट की घटनाओं पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।

बता दें कि बीते दिनों सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ हो रहे आंदोलनों में पश्चिम बंगाल के अभिनेताओं, निर्देशकों और संगीतकारों ने हिस्सा लिया था। साथ ही ये लोग एक्ट के ख़िलाफ एक वीडियो में भी दिखे थे। जिसमें इन्होंने कहा था कि केंद्र सरकार नागरिकता पर फिर से सबूत माँगती है तो वो कोई दस्तावेज नहीं दिखाएँगे। जिसके बाद विपक्ष के कई नेताओं की इस पर प्रतिक्रिया आई।

उल्लेखनीय है कि सौमित्र खान से पहले पश्चिम बंगाल भाजपा अध्यक्ष दिलीप घोष ने प्रदेश के कई बुद्धिजीवियों को आड़े हाथों लिया था। उन्होंने एक्ट का विरोध करने वालों पर निशाना साधते हुए शनिवार को कहा था कि इन दिनों पश्चिम बंगाल में कई बुद्धिजीवी हैं जो लोगों को दिन भर ज्ञान देते हैं और हंगामा करते हैं। माकपा ने इन लोगों को सड़कों पर लाकर बुद्धिजीवी बनाया और अब दीदीमोनी (मुख्यमंत्री ममता बनर्जी) ने उन्हें पैदा करने की फैक्टरी लगा ली है।

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OpIndia impact: धोखाधड़ी मामले में वरिष्ठ कॉन्ग्रेस नेता किशोर उपाध्याय का भाई देहरादून से गिरफ्तार

उत्तराखंड कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता किशोर उपाध्याय के भाई सचिन उपाध्याय को रविवार (जनवरी 19, 2019) को धोखाधड़ी के एक मामले में देहरादून में गिरफ्तार कर लिया गया। सचिन उपाध्याय को उनके खिलाफ धोखाधड़ी के आरोपों की जाँच कर रहे एक विशेष जाँच दल (SIT) की रिपोर्ट के आधार उनके घर के बाहर से गिरफ्तार किया गया। कॉन्ग्रेस नेता के भाई के खिलाफ आरोप सामने आने के बाद पिछले साल जून में एसआईटी का गठन किया गया था।

SIT ने अपनी जाँच में पाया कि सचिन उपाध्याय ने अपने पूर्व कारोबारी साझेदार मुकेश जोशी के 50 प्रतिशत शेयर अवैध रूप से हस्तांतरित कर दिए थे। सचिन उपाध्याय ने संयुक्त स्वामित्व वाली कंपनी एसएम हॉस्पिटेलिटी प्राइवेट लिमिटेड में उनके हिस्से के 50 फीसदी शेयर उनके फर्जी दस्तखत करके अपनी पत्नी के नाम स्थानांतरित करा लिए थे।

धोखाधड़ी के इस मामले की सबसे पहली रिपोर्टिंग ऑपइंडिया ने अक्टूबर 2018 में की थी। जिसमें उपाध्याय द्वारा की गई धोखाधड़ी का विवरण प्रकाशित किया गया था। मुकेश जोशी ने कंपनी लॉ बोर्ड के समक्ष आरोप लगाया था कि उन्होंने कंपनी को जमीन खरीदने के लिए 1.7 करोड़ रुपए का ऋण दिया था, लेकिन सचिन उपाध्याय ने उनके हिस्से का शेयर नहीं दिया। वहीं जब सचिन उपाध्याय के इस धोखाधड़ी और वित्तीय घाटे को लेकर मुकेश को हार्ट अटैक आया और वो हॉस्पिटल में भर्ती थे, तो सचिन उपाध्याय ने ऋण को इक्विटी शेयर में बदल दिया और उसे अपनी पत्नी को आवंटित कर दिया, जिसे उसने खुद कंपनी का निदेशक बनाया था। उपाध्याय ने अपनी पत्नी को कंपनी का निदेशक बनाने के साथ ही मुकेश को कंपनी के निदेशक के पद से हटा दिया था।

सचिन उपाध्याय के खिलाफ साल 2017 में भारतीय दंड संहिता 1860 की धारा 420, धारा 467, धारा 468, धारा 471, धारा 504 और धारा 120b के तहत देहरादून के राजपुर पुलिस स्टेशन में मामला दर्ज किया गया था।

…वो सैनिक जो अपनी ही शादी में नहीं पहुँच सका घर, आर्मी ने कहा – ‘देश सबसे पहले, जिंदगी इंतजार करेगी’

सेना के जवान अपनी जिंदगी में देश के लिए कैसी-कैसी कुर्बानियाँ देते हैं, इसकी मिसाल कश्मीर की बर्फबारी में फँसे उस जवान ने पेश की, जो अपनी ही शादी के दिन घर नहीं पहुँच सका। देश की रक्षा में जुटा जवान हिमाचल के मंडी का रहने वाला है और भारी बर्फबारी की वजह से कश्मीर से निकल नहीं सका। मंडी निवासी जवान सुनील के इस जज्बे को पूरा देश सलाम कर रहा है।

पाकिस्तान से लगे रजौरी बॉर्डर पर तैनात 26 साल के सुनील का विवाह 15 जनवरी 2020 को दलेड़ में तय हुआ था। 16 जनवरी को बारात दलेड़ आने वाली थी परंतु भारी बर्फबारी के कारण सुनील घर नहीं पहुँच पाया। श्रीनगर के पास पाकिस्तानी सीमा पर तैनात सैनिक सुनील की छुट्टी एक जनवरी से शुरू होने वाली थी और वह घर आने के लिए बांदीपुरा क्षेत्र के ट्रांजिट कैंप पर पहुँच चुके थे, लेकिन बर्फबारी के कारण सड़कें बंद हो गईं। दोनों परिवारों में विवाह की तैयारियाँ पूर्ण हो चुकी थीं परंतु जवान के तय समय पर ना पहुँचने के बाद दोनों पक्षों के परिजनों ने निर्णय लिया है कि शादी अब आगे शुभ मुहूर्त देखकर होगी।

रविवार (जनवरी 19, 2019) को सुनील के भाई विक्की ने बताया कि सुनील मंगलवार (जनवरी 21, 2019) को घर आ रहा है। यह खुशी की बात है। दोनों पक्ष दोबारा बैठकर शादी की नई तारीख तय करेंगे और उसके बाद धूमधाम से शादी होगी। भारतीय सेना के चिनार कॉर्प्स ने रविवार को सेना के बहादुरी को सलाम करते हुए ट्वीट करके कहा, “जिंदगी इंतजार करेगी यह वादा है। भारतीय सेना का एक जवान कश्मीर घाटी में भारी बर्फबारी की वजह से अपनी शादी में नहीं पहुँच सका। चिंता मत करिए जिंदगी इंतजार करेगी। देश हमेशा सबसे पहले है। दुल्हन के परिवार वाले नई तारीख के लिए राजी हैं। एक सैनिक की जिंदगी का बस एक और दिन।”

सुनील के तय समय पर घर न पहुँचने की जानकारी मिलने पर दुल्हन के चाचा संजय कुमार ने कहा था कि शादी की सभी तैयारियाँ दोनों परिवारों ने की थी। उन्होंने आगे कहा था, “हमारे सभी रिश्तेदार भी पहुँच गए थे। सभी सुनील का इंतजार कर रहे थे, सबको उसकी फिक्र थी। वह सीमा पर देश की सेवा में जुटा है, इस बात की वजह से हम उस पर गर्व करते हैं। अब तो एकमात्र विकल्प यही है कि शादी की तारीख को बढ़ा दिया जाए।”

उल्लेखनीय है कि कश्मीर में तैनात सैनिकों की जिम्मेदारी और चुनौती सर्दियों में काफी बढ़ जाती है। भारी बर्फबारी के बावजूद सैनिक सीमा पर चौकन्ने रहते हैं। इसके साथ ही आम नागरिकों की मदद के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। दिसंबर-जनवरी में भारी बर्फबारी की वजह से आम जनजीवन अस्त-व्यस्त होता है।

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…जब आसिफा अपने बच्चों के साथ फँस गईं तो CRPF ने बर्फ में 12 Km पैदल चल पहुँचाया खाना: मिसाल नहीं, परंपरा है यह

बर्फ़ के नीचे दब गया था इक़बाल, कुछ भी दिख नहीं रहा था… जवानों ने हाथ से खोद कर निकाला, मिली नई जिंदगी

‘मैंने 65 धमाके किए, पुलिस वालों को भी मारा… लेकिन कोई मेरा कुछ भी नहीं बिगाड़ पाया’

‘डॉ बम’ के नाम से कुख्यात आतंकी और मुंबई में सिलसिलेवार धमाकों का दोषी डॉ जलीस अंसारी रविवार (जनवरी 19, 2020) की सुबह अमौसी एयरपोर्ट से मुंबई रवाना होने से पहले एसटीएफ अधिकारियों को चुनौती दे गया। उसने देश की कानून व्यवस्था को कमजोर बताते हुए कहा कि उसका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उसने कहा कि अब तक उसने 65 से ज्यादा धमाके किए, लेकिन पुलिस केवल 3 मामलों में उस पर आरोप सिद्ध कर पाई। इससे अंदाजा लगा लें कि स्थिति क्या है?

हिंदुस्तान की रिपोर्ट्स के अनुसार, शनिवार (जनवरी 18, 2020) की दोपहर लगभग 3 बजे जलीस अंसारी को एसटीएफ और मुंबई एटीएस कानपुर लेकर पहुँची थी। यहाँ पर पूछताछ करने के बाद सुबह चार बजे उसे अमौसी ले जाया गया। कानपुर से लखनऊ के रास्ते में भी एसटीएफ अफसर उससे पूछताछ करते रहे। जहाँ उसने साफ शब्दों में अधिकारियों को चुनौती दी कि देश की कानून व्यवस्था ढीली है और कोई भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।

जलीस ने अफसरों से कहा, “मैं 65 से ज्यादा धमाके कर चुका हूँ और अब तक मुझ पर सिर्फ़ तीन आरोप ही साबित हुए हैं। मैंने पुलिस वालों को धमाके में मारा और अब तक वह खुद पर हुए हमले के साक्ष्य नहीं जुटा पाई, इसी से अंदाजा लगा लो क्या स्थितियाँ हैं।”

अधिकारियों के सवालों का जवाब देते हुए आतंंकी ने कहा, “कोई भी बड़ा आतंकी मेरे बिना कुछ नहीं हैं। जेल में रहकर जो मैं कर सकता हूँ, वह कोई संगठन बाहर रहकर भी नहीं कर सकता।” उसने देश के मौजूदा हालातों पर भी अधिकारियों को जानकारी दी। उसने कहा कि सीएए और एनआरसी को लेकर पूरे देश में विद्रोह की एक बहुत बड़ी भूमिका तैयार हो चुकी है। अगर सरकार इसे नहीं समझ पाएगी तो इसका अंजाम भुगतना होगा।

गौरतलब है कि जलीस ने अधिकारियों के सामने ‘डेंजरस माइंड’ नामक किताब का जिक्र किया और सुरक्षा एजेंसियों को बताया कि यह किताब उसके ऊपर है। अगर वे इसे पढ़ेंगे तो उन्हें कई तथ्यों के बारे में जानकारी मिल जाएगी। बता दें कि डेंजरस माइंड किताब को हुसैन जैदी ने लिखा है। हुसैन जैदी मुंबई के रहने वाले और लंबे समय तक उन्होंने अंडरवर्ल्ड समेत आतंकवाद पर बहुत काम किया है।

जानकारी के अनुसार, कई बार पुलिस को चकमा देकर बच निकलने में कामयाब रहे डॉ जलीस अंसारी ने पूछताछ में अपने नेटवर्क से जुड़े कई साथियों के राज उगले। इसके अलावा उसकी पॉकेट डॉयरी से कई अहम जानकारियाँ सामने आई। पता चला है किवह सेंट्रल जेल में रहकर सस्ते सामान के प्रयोग से बम बनाने का फार्मूला तैयार कर रहा था।

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‘देश में सेक्युलरिज्म का नामो निशान मिट जाएगा’ – कपूर खानदान के दामाद का Tanhaji पर निशाना

तानाजी फिल्म में उदय भान सिंह का नेगेटिव किरदार निभाकर दर्शकों की वाहवाही लूटने वाले सैफ अली खान ने रविवार (जनवरी 19, 2019) को दिए एक इंटरव्यू में कई मुद्दों पर बात की। उन्होंने अधिकांश दर्शकों की प्रतिक्रिया से उलट जाकर इस साक्षात्कार में अपनी ही फिल्म को लेकर कहा कि जो फिल्म में दर्शाया गया, वो इतिहास नहीं है। उन्होंने कहा, “इतिहास क्या है, मैं इसे जानता हूँ लेकिन अगर कोई कहे कि फिल्म में जो दिखाया गया है वह इतिहास है तो मैं इसे नहीं मानता।”

बता दें कि अपने इस इंटरव्यू में सैफ ने यह भी कहा कि अंग्रेजों के आने से पहले इंडिया का कोई कॉन्सेप्ट नहीं था। जिसके बाद सोशल मीडिया पर उनकी काफी आलोचना हो रही है। लोग फिल्म की रिलीज से पहले हुए उनके साक्षात्कार की वीडियो शेयर कर रहे हैं और दोनों बयानों में फर्क़ दिखाकर उनकी मंशा पर सवाल उठा रहे हैं।

उल्लेखनीय है कि इस साक्षात्कार में सैफ ने देश के मौजूदा हालातों पर भी अपने विचार स्पष्ट किए और कहा कि फिलहाल देश में जो माहौल है, उसे देखकर उन्हें दुख होता है। उन्होंने कहा, “देश के लोग जो रवैया अपना रहे हैं वह गलत है। ये रवैया हमें भाईचारे के रास्ते से दूर कर रहा है।”

अनुपमा चोपड़ा को दिए इंटरव्यू में सैफ ने सीएए/एनआरसी पर हो रहे विरोध पर कहा कि जिस तरह से देश आगे बढ़ रहा है उससे ये तो साफ है कि देश में सेक्युलरिज्म का नामो निशान मिट जाएगा। उनके अनुसार, “देश के मौजूदा हालात देखकर लगता है कि हम सेक्युलरिज्म से दूर जा रहे हैं और मुझे कोई भी इसके लिए लड़ता दिखाई नहीं दे रहा है।”

उन्होंने कहा कि बतौर एक्टर उनके लिए कोई भी स्टैंड लेना सही नहीं है क्योंकि इससे उनकी फिल्में बैन हो सकती है और बिजनेस पर असर पड़ता है। उन्होंने कहा कि इसलिए फिल्म इंडस्ट्री के लोग अपने बिजनेस और अपने परिवार को खतरे में नहीं डालना चाहते और कोई भी पॉलिटिकल कॉमेंट करने से बचते हैं।

गौरतलब है कि अभी तक जहाँ सोशल मीडिया पर इस फिल्म को बिना किसी छेड़छाड़ के पेश किए जाने के लिए सराहा जा रहा था, वहीं अनुपमा चोपड़ा से हुई बातचीत में सैफ के बयान ने उन्हें आलोचनाओं का केंद्र बना दिया है।

फिल्म इंडस्ट्री तान्हाजी जैसी फिल्में क्यों बना रही है, इसके बारे में बात करते हुए सैफ ने इस इंटरव्यू में कहा, “यही चलता है और इसलिए यह आइडिया चल पड़ा है। मैं वास्तव में ऐसी फिल्म इंडस्ट्री का हिस्सा होना पसंद करूँगा जो एक स्टैंड ले, जो लोगों को बताए कि इतिहास क्या है, ना कि निश्चित प्रकार की सोच के साथ इससे छेड़छाड़ करे। लेकिन लोग कहते हैं कि यह चलता है। यह एक आइडिया है जो चल निकला है, लेकिन यह वास्तव में खतरनाक है।”

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’50 लाख से ज्यादा मुस्लिम घुसपैठियों को देश से बाहर निकालेंगे, दंगा करेंगे तो गोली भी मारेंगे’

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में पश्चिम बंगाल की सीएम ममता बनर्जी चीख चीख कर कहती हैं कि उनके जीते जी कोई इसे बंगाल में लागू नहीं कर सकता है। उनके इस बयान के विरोध में बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप घोष खुली चुनौती देते हैं। वो कहते हैं दुनिया जानती है कि वो किस तरह से राज्य में सत्ता में आईं। लेकिन अब उनके दिन पूरे हो चुके हैं। उनके तुष्टीकरण की राजनीति का समय अब समाप्त हो चुका है। 

रविवार (जनवरी 19, 2019) को नॉर्थ 24 परगना की एक सभा में दिलीप घोष ने कहा, “50 लाख से ज्यादा मुस्लिम घुसपैठियों की पहचान की जाएगी, और अगर जरूरत हुई तो उन्हें देश से बाहर कर दिया जाएगा। सबसे पहले उनका नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाएगा, उसके बाद दीदी (ममता बनर्जी) किसी का तुष्टीकरण नहीं कर पाएँगी।” आगे अपनी बातों के समर्थन में वो फिर कहते हैं, “अगर ऐसा हुआ तो दीदी (ममता बनर्जी) के वोटों की संख्या में कमी आ जाएगी और आने वाले चुनाव में जहाँ हम 200 सीटों पर जीत दर्ज करेंगे वहीं उन्हें 50 सीटें भी नहीं मिलेंगी।”

दिलीप घोष यहीं नहीं रूके, उन्होंने रविवार को एक बार फिर से सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाने वालों को गोली मारने की बात दोहराते हुए कहा, “ममता बनर्जी की सरकार में भले ही कोई व्यक्ति 500 करोड़ रुपए की सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाकर आसानी से निकल जाता है, लेकिन जब हम सत्ता में आएँगे तो ऐसे हर व्यक्ति की पहचान की जाएगी और उसे गोली मार दी जाएगी। किसी को बख्शा नहीं जाएगा।”

गौरतलब है कि बंगाल भाजपा अध्यक्ष ने रविवार (जनवरी 12, 2019) को नदिया जिले में एक जनसभा को ममता बनर्जी पर हमला करते हुए कहा था, “दीदी (ममता बनर्जी) की पुलिस ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाने वाले लोगों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की क्योंकि वह उनके वोटर्स हैं। यूपी, असम और कर्नाटक की हमारी सरकारों ने ऐसे लोगों को कुत्तों की तरह गोलियाँ मारी है।” वहीं घुसपैठियों को लेकर उन्होंने कहा था, “तुम यहाँ आते हो, हमारा खाना खाते हो, यहाँ रहते हो और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुँचाते हो। क्या यह तुम्हारी जमींदारी है? हम तुम्हें लाठियों से मारेंगे, गोली मारेंगे और तुम्हें जेल में डाल देंगे।”

उल्लेखनीय है कि CAA के विरोध के दौरान सार्वजनिक संपत्तियों को हुए नुकसान के लिए सीधे तौर पर सीएम ममता बनर्जी को जिम्मेदार माना जाता है। बीजेपी नेता का कहना है कि ममता बनर्जी को यूपी, हिमाचल, उत्तराखंड में नुकसान नजर आता है। लेकिन वो भूल जाती हैं कि बीजेपी शासित सरकारों ने साफ कर दिया कि दंगाइयों के साथ किसी तरह हमदर्दी नहीं रखी जाएगी।

‘जिन्हें नहीं मालूम कि उनके माता-पिता कौन हैं, वो कर रहे CAA का विरोध, दूसरे की जेब पर निर्भर रहते हैं ये चाटूकार’

‘बाप की संपत्ति नहीं है कि आग लगा दोगे, हम तुम्हें लाठियों से मारेंगे, गोली मारेंगे और जेल में डाल देंगे’

शक्ति का केंद्र संविधान है संघ नहीं, मुस्लिम RSS की शाखाओं में आएँ: मोहन भागवत

राष्ट्रीय स्वंयसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार (जनवरी 19, 2020) को कहा कि जैसा कि लोग आरोप लगाते हैं, आरएसएस संविधान से इतर शक्ति का केंद्र नहीं बनना चाहता। उन्होंने कहा कि आरएसएस का कोई एजेंडा नहीं है। महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय में  रविवार को ‘भारत का भविष्य’ विषयक संगोष्ठी में बतौर मुख्य अतिथि संघ प्रमुख मोहन भागवत ने कहा कि डॉ. भीमराव आंबेडकर ने जो संविधान लिखा था, हमें उसी पर चलना है।

रिपोर्ट्स के अनुसार, RSS प्रमुख मोहन भागवत ने कहा, “भारत में शक्ति का केंद्र सिर्फ संविधान है और कोई दूसरा शक्ति केंद्र हो, ऐसी हमारी कोई इच्छा नहीं है। यदि ऐसा हुआ तो हम विरोध करेंगे। संविधान में देश के भविष्य की तस्वीर एकदम साफ है। वही प्रारंभ बताता है और गंतव्य भी।”

मोहन भागवत ने मुस्लिमों को न्योता देते हुए कहा कि RSS के बारे में जानने के लिए उन्हें हमारी शाखाओं और कार्यक्रमों में आना चाहिए और उसके बाद ही उनका आरएसएस के बारे में राय बनाना बेहतर होगा। उन्होंने यह भी कहा कि विरोध और निंदा सुनने को भी हम तैयार हैं। 

‘संघ को लेकर फैलायी जा रहीं भ्राँतियाँ’

मोहन भागवत ने कहा कि जब आरएसएस के कार्यकर्ता कहते हैं कि यह देश हिंदुओं का है और 130 करोड़ लोग हिंदू हैं, तो इसका मतलब यह नहीं है कि हम किसी का धर्म, भाषा या जाति बदलना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि हमें अपनी विविधता के बावजूद एकसाथ रहना होगा, इसे ही हम हिन्दुत्व कहते हैं।

‘जब-जब हिंदुत्व कमजोर हुआ, तब-तब भारत की भौगोलिक स्थिति बदली है’

मोहन भागवत ने कहा, “हमारे पूर्वज एक हैं, विविधताओं के बावजूद सब यहीं रहते हैं, यही हिंदुत्व है। जहां हिंदू नहीं रहे या हिंदू भावना खत्म हो गई, देश का वह हिस्सा आज अलग है। जब-जब हिंदुत्व कमजोर हुआ, तब-तब भारत की भौगोलिक स्थिति बदली है।”

भागवत ने कहा कि संविधान कहता है कि हमें भावनात्मक एकीकरण लाने की कोशिश करनी चाहिए। भावना यह है कि यह देश हमारा है। देश के लोगों को इसे आगे ले जाने के बारे में सोचना है।

‘हमें किसी की पूजा पद्धति को लेकर आपत्ति नहीं है’

मोहन भागवत ने ‘भविष्य का भारत’ विषय पर कहा कि संघ को किसी भी धर्म की पूजा पद्धति से कोई आपत्ति नहीं है ना ही संघ जाति या संप्रदाय को लेकर भेदभाव रखता है। उन्होंने कहा कि हिंदू शब्द संस्कृति का प्रतीक है। इस आधार पर भारत में रहने वाले सभी 130 करोड़ लोग हिंदू हैं।

अब आंदोलन नहीं करेगा RSS, चरित्र निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेगा: अयोध्या फैसले पर मोहन भागवत

NRC के चलते एक भी हिन्दू को नहीं छोड़ना होगा देश: मोहन भागवत

सिर्फ अंग्रेजी से ही अच्छा पैसा कमाया जा सकता है, इस धारणा को बदलने की जरूरत: मोहन भागवत

अनुसूचित जातियों और गरीब बच्चों के साथ खिलवाड़: दिल्ली की ‘शिक्षा क्रांति’ का काला सच

दिल्ली के उप मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने एक किताब लिखी है- शिक्षा। इस किताब में सिसोदिया लिखते हैं कि अलग-अलग राज्यों में शिक्षा पर बहुत से काम हुए हैं। लेकिन इनमें एक बड़ी कमी यह रह जाती है कि इन प्रयासों से अच्छी शिक्षा देने का काम 5-10 प्रतिशत बच्चों तक ही हो पाया। बाकी के 90-95 प्रतिशत बच्चों को अगर शिक्षा देने का काम हुआ भी तो वह बेहद कामचलाउ तरीके से और खानापूर्ति के लिए ही।

सुनने में ऐसी बातें बहुत अच्छी लगती हैं। इस तरह की बातें सिसोदिया ही नहीं, मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और उनके अन्य साथी भी करते नज़र आते हैं। लेकिन खुद को गरीबों का हितैषी बता किए जाने वाले लंबे-चौड़े दावों की असलियत कुछ और ही है।

क्या सच में दिल्ली में 5 साल चली आम आदमी पार्टी की सरकार सभी बच्चों की एक समान चिंता करती रही? क्या सरकार की प्राथमिकता में 95 प्रतिशत स्कूल थे?

चुनावी बिगुल बजने से पहले दिल्ली सरकार ने करोड़ों खर्च कर दिल्ली के कोने-कोने में 3 स्कूलों के विज्ञापन टँगवाए। ये स्कूल हैं- वेस्ट विनोद नगर, खिचड़ीपुर और राउज एवेन्यू। वेस्ट विनोद नगर और खिचड़ीपुर, दोनों सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज का हिस्सा है। वहीं, राउज एवेन्यू दिल्ली के बीचो-बीच। सिसोदिया ने अपने क्षेत्र के मयूर विहार के साथ-साथ वेस्ट विनोद नगर में भी अत्याधुनिक स्विमिंग पूल बनवाए और प्रचार तंत्र के जरिए ऐसी हवा बनाई कि मानों दिल्ली के सभी स्कूलों में स्विमिंग पूल हैं। जिम की तस्वीर राउज एवेन्यू से ही आती है। यही नहीं सोशल मीडिया पर सबसे अधिक फोटो राउज एवेन्यू के ही दिखाई देते हैं जो कि सेंट्रल दिल्ली में है और सभी बड़े मीडिया घरानों के ऑफिस के नजदीक भी।

केजरीवाल की स्कूली उपलब्धि सिर्फ 3 स्कूलों तक!

प्रचार तंत्र की रणनीति ही जबरदस्त थी। अपना चेहरा चमकाने के लिए सिसोदिया आधिकारिक विज्ञापन के 3 में से दो स्कूल अपने विधानसभा क्षेत्र का शामिल करवाते हैं। ओवरऑल गिने-चुने स्कूलों की फोटो दिखाकर यह नैरेटिव बनाने की कोशिश करते रहे हैं कि दिल्ली के स्कूल 5 साल में ही बदतर से विश्वस्तरीय हो गए हैं। इस कोशिश में लाखों बच्चों को बेरहमी से स्कूलों से निकाले जाने, बेहद ख़राब परीक्षा परिणाम, लगातार घटते बच्चे, दो तिहाई स्कूलों में साइंस की पढ़ाई न होना, लगभग आधे शिक्षकों के खाली पद और अतिथि शिक्षकों की गुणवत्ता का सवाल कहीं पीछे छूट जाता है। जबकि यही सवाल बच्चों के लिए मायने रखते हैं।

1000 में से केवल 54 की चिंता

आम आदमी पार्टी जब सत्ता में आई तो लगभग एक हजार स्कूल दिल्ली सरकार के अधीन थी। आप की सरकार ने सभी स्कूलों के एक समान विकास की चिंता करने की बजाय 6 महीने बाद मॉडल स्कूल के नाम पर अच्छा प्रदर्शन कर रहे गिने-चुने 54 स्कूलों को छाँट लिया। इन स्कूलों पर 250 करोड़ रुपए खर्च किए। शेष को उनके हाल पर छोड़ दिया।

जिन स्कूलों को बेहतर करने का जिम्मा लिया भी गया, उनकी हालत बाहर से चमकाने की कोशिश तो हुई, लेकिन असलियत जल्द सामने आ गई कि अधिकतर जगहों पर किया गया काम दोयम दर्जे का था। इंडियन एक्सप्रेस में 27 अगस्त 2018 को छपी रिपोर्ट की मानें तो 3 वर्ष बाद भी कई स्कूलों में बुनियादी सुविधाएँ नहीं थी। कई स्कूलों में करवाए गए काम की गुणवत्ता इतनी ख़राब निकली कि दरारें आने लगीं। 13 जिलों के डिस्ट्रिक्ट डिप्टी डायरेक्टर एजुकेशन ने ये शिकायत की थी कि दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (DTTDC) में काफी खामियाँ है और कई जगह बड़े दरार काम खत्म होने के तुरंत बाद ही दिखने शुरू हो गए।

आज तक कोई यह नही बता पाया कि इन स्कूलों की हालत कैसी है। आज इन्हीं में से 8 स्कूलों की तस्वीर सोशल मीडिया पर शिक्षा क्रांति के दावे के साथ शेयर की जाती है। इनके अलावे बाकी स्कूल अपने हाल पर ही हैं। नए कमरे और छोटे-मोटे बदलाव को छोड़कर कहीं विशेष ध्यान नहीं दिया गया। फरवरी 2019 में आई दिल्ली के इकॉनोमिक सर्वे के रिपोर्ट की मानें तो 54 में से केवल 24 में ही काम अब तक पूरा हो सका है।

जो 5 नए स्कूल, स्कूल ऑफ एक्सीलेंस खुले, उनमें विद्यार्थी-शक्षक का अनुपात दिल्ली सरकार की वेबसाइट के मुताबिक इस प्रकार है:

स्कूल का नाम ————— विद्यार्थियों की संख्या —————–शिक्षकों की संख्या

रोहिणी सेक्टर 17 —————— 841 ——————————— 48
कालकाजी ———————— 362 ———————————- 40
मदनपुर खादर ——————— 811 ——————————— 38
खिचड़ीपुर ————————- 852 ——————————– 57
द्वारका सेक्टर 22 —————— 846 ——————————– 56

खिचड़ीपुर मनीष सिसोदिया के विधानसभा क्षेत्र पटपड़गंज में आता है। इस स्कूल में 15 बच्चों पर एक शिक्षक है। कालकाजी, जहाँ से सिसोदिया के शिक्षा सलाहकार आतिशी उम्मीदवार हैं, वहाँ 9 बच्चों पर एक शिक्षक हैं। दिलचस्प बात ये है कि ये 5 स्कूल किसी भी अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित विधानसभा में नहीं बनाए गए हैं। खिचड़ीपुर सिसोदिया का इलाका है, कालकाजी आतिशी, मदनपुर खादर अमानतुल्लाह खान और द्वारका आदर्श शास्त्री का विधानसभा क्षेत्र है।

लेकिन जैसे ही दिल्ली के बाकी के सामान्य स्कूलों की हालत देखेंगे तो पता चलेगा कि गरीबों की बस्ती में चलने वाले स्कूल में बच्चों की भीड़ तो है, लेकिन शिक्षकों की भारी कमी है। जो शिक्षक हैं भी, उनमें बड़ी संख्या अतिथि शिक्षकों की है। SC वर्ग के लिए आरक्षित कोंडली की बात हो या फिर बुराड़ी, संगम विहार, त्रिलोकपुरी, जहाँगीरपुरी, सुल्तानपुरी, खजूरी ख़ास जैसे इलाकों के स्कूल में शिक्षक-विद्यार्थी का अनुपात वैसा नहीं है, जैसा केजरीवाल के चहेते स्कूलों में।

एक नज़र कुछ प्रमुख स्कूलों पर:

स्कूल का नाम ————————– विद्यार्थियों की संख्या ————— शिक्षकों की संख्या

राजकीय कन्या विद्यालय बुरारी ——————– 2325 ———————————— 36
सर्वोदय कन्या विद्यालय निठारी ——————– 4412 ———————————— 57
सर्वोदय कन्या विद्यालय सुल्तानपुरी —————– 4240 ———————————— 67
सर्वोदय बाल विद्यालय खजूरी खास —————– 4549 ———————————— 74
सर्वोदय कन्या विद्यालय(जीनत महल), जाफराबाद —- 4641 ———————————— 64

60-65 बच्चों पर एक शिक्षक, ये हाल दिल्ली की घनी आबादी में बसे तमाम स्कूलों की है।

अपने चहेते स्कूलों में अच्छे अच्छे शिक्षकों को बहाल कर, उनमें सारी सुविधाएँ दिखाकर केजरीवाल और सिसोदिया पूरी दिल्ली के स्कूलों को वर्ल्ड क्लास बताते हैं लेकिन सच्चाई बिल्कुल उलट है। जो सरकार 1030 स्कूलों में भी भेदभाव करती हो, कुछ ख़ास बच्चों पर पूरा ध्यान, बाकियों को अपने हाल पर छोड़ देती हो, आप उसके कामकाज के तरीके समझ सकते हैं।

बजट में चहेते स्कूलों पर पूरा ध्यान

दिल्ली सरकार के बजट का अध्ययन करेंगे तो चहेते और बाकी स्कूलों के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार आपको स्पष्ट दिखेगा।

जब बात लाइब्रेरी बनाने की आई तो बाकी के स्कूलों को 5000 से लेकर 15000 तक की राशि दी, लेकिन अपने चहेते नए स्कूलों को एक-एक लाख रुपये दिए गए. इन पैसे का क्या हुआ, कुछ अता-पता नही.

बच्चों के बैठने के लिए डेस्क-बेंच की बात आई तो फिर चहेते स्कूल ही हावी रहे। नए बने अपने सभी 5 चहेते स्कूलों में पब्लिक वर्क्स डिपार्टमेंट (PWD) को और कथित 54 मॉडल स्कूलों में दिल्ली टूरिज्म एंड ट्रांसपोर्ट डेवलपमेंट कारपोरेशन (DTTDC) के जरिये प्राथमिकता में आधुनिक बेंच-डेस्क लगवाए गए। इन्हीं की तस्वीरें दिखाई जाती है।

चीफ मिनिस्टर सुपर टैलेंटेड चिल्ड्रेन स्कालरशिप योजना के तहत भी केवल राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय और अपने चहेते 54 स्कूलों के चिन्हित बच्चों को ही लाभ पहुँचाने का काम हुआ, जिसके तहत IIT जैसे प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए दिल्ली के नामी गिरामी कोचिंग संस्थानों की मदद ली गई। दिल्ली के 5 प्रतिशत स्कूलों के लिए विशेष व्यवस्था करने के नाम पर बाकि के गरीब बच्चों को उन्हीं के हाल पर छोड़ दिया गया। गौरतलब है कि इन स्कूलों में विशेष कोचिंग के जरिए IIT की प्रवेश परीक्षा में पास हुए बच्चों की सफलता को आप सरकार अपनी सफलता बताती है। यही नहीं, यह झूठ फैलाने की भी कोशिश करती है कि यह पहली बार हुआ जब दिल्ली के सरकारी स्कूल के बच्चें IIT में गए। दिल्ली में पहले भी हजारों विद्यार्थी सरकारी स्कूल से ही पढ़कर IIT में गए हैं, जिनमें इन पंक्तियों के लेखक का भाई भी शामिल है, जो 2005 में IIT में पढ़ने गया और अभी कनाडा में एक बड़ी कंपनी में नौकरी करता है।

बात जब डिजिटल लर्निंग योजना के तहत बच्चों को टैबलेट देने की आई तो इसके लिए भी अपने चहेते 5 स्कूल ऑफ एक्सिलेंस को ही चुना गया। राजकीय प्रतिभा विकास विद्यालय को छोड़ दे तो किसी और स्कूल के कुछ गिने-चुने बच्चें ही इससे लाभान्वित होंगे। इस योजना के तहत 11वीं और 12वीं के सभी बच्चों को टैबलेट दिए गए है।

ऐसे कई अन्य बातें हैं, जो यह बात साफ़-साफ़ जाहिर करते हैं कि आम आदमी पार्टी की सरकार ने केवल चुनिंदा स्कूलों पर ध्यान दिया। 25 फीसदी बजट से लंबी लंबी बातें करने वाले लोग आज हजार स्कूल भी चलाने में असमर्थ हैं।

आज दिल्ली के 1030 स्कूलों में 1472401 बच्चें पढ़ते हैं लेकिन इनमें से इस सरकार का ध्यान 5 स्कूलों के लगभग 4000 बच्चों पर ही है। ये भी दिल्ली के ही बच्चें है लेकिन बाकी के बच्चें भी उसी तरह की सुविधाओं और सहयोग की अपेक्षा रखते हैं जैसे बाकी। लेकिन ये अपेक्षा NGO चलाने वाले नए बने राजनेताओं से नहीं की जा सकती, जिन्होंने आजीवन 2-4 उदाहरणों के जरिए ही लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसे कमाए हैं।

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शाहीन बाग पहुँचे कश्मीरी पंडितों से CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने की हाथापाई

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के खिलाफ दक्षिणी दिल्ली के शाहीन बाग में प्रदर्शन जारी है। रविवार (जनवरी 19, 2020) को इस प्रदर्शन में कुछ कश्मीरी पंडित भी शाहीन बाग पहुँचे और कश्मीरी पंडितों को न्याय दिलाने के नारे लगाने लगे।

कश्मीरी पंडित इस दौरान ‘कश्मीरी पंडितों को न्याय दो’ के नारे लगाने शुरू कर दिए थे। कश्मीरी पंडितों की इस नारेबाजी से नाराज होकर CAA-विरोधी प्रदर्शनकारियों ने उनके साथ झड़प कर दी जो कि कुछ ही देर में हाथा-पाई में बदल गई।

रिपोर्ट्स के अनुसार, शाहीन बाग में नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विरोध प्रदर्शन कर रहे प्रदर्शनकारियों से कश्मीरी पंडित अपने लिए समर्थन माँग रहे हैं। कश्मीरी पंडितों ने दावा किया कि आज इस जगह पर ‘जश्न-ए-शाहीन’ कार्यक्रम मनाने की तैयारी चल रही है। दरअसल, आज ही के दिन 30 साल पहले कश्मीर से पंडितों को घाटी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया था।

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