Home Blog Page 5169

पाकिस्तान में रोटी के भी पड़े लाले, अब आटे के चढ़ते भाव ने बढ़ाई इमरान की टेंशन

पाकिस्तान इन दिनों लगातार बढ़ती महॅंगाई से जूझ रहा है। पड़ोसी मुल्क में रोटी का संकट गहरा गया है। गेंहूँ की किल्लत से आटे के दाम आसमान छू रहे हैं। इससे आर्थिक मोर्चों पर पहले से ही जूझ रही इमरान खान सरकार की टेंशन और बढ़ गई है।

गेहूॅं की भयंकर किल्लत से सरकार को कोई उपाय नहीं सुझ रहा। आटे की कीमतों पर काबू पाने की बजाए सरकार और अन्य पक्ष एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं। खैबर पख्तूनख्वा में ढाबे और रेस्तरां के मालिकों ने सोमवार से हड़ताल पर जाने की चेतावनी दी है। साथ ही कहा है कि सरकार पुराने रेट पर आटा मुहैया कराए या फिर उन्हें नान और रोटी की कीमतों को बढ़ाने की इज़ाजत दे। इतना ही नहीं होटल मालिकों ने इमरान सरकार को आटे की कीमतें कम करने के लिए 5 दिनों का अल्टीमेटम भी दिया है।

डॉन के अनुसार आटे का संकट सभी चारों प्रांतों और राजधानी इस्लामाबाद में एक जैसी है। इस संकट पर शनिवार को सियासत तब तेज हो गई जब पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ की अगुवाई वाली संघीय और पंजाब तथा खैबर पख्तूनवा की प्रांतीय सरकारों ने इसका दोष पाकिस्तान पीपल्स पार्टी(पीपीपी) की अगुवाई वाली सिंध सरकार के मत्थे मढ़ दिया।

एक रिपोर्ट के मुताबिक पहले 40 से 45 रुपए किलो में बिकने वाला आटा इन दिनों 60 से 70 रुपए किलो बिक रहा है। राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा (एनएफएस) सचिव हाशिम पोपलजाई का कहना है कि आटे की कम आपूर्ति के लिए हाल में हुई ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल मुख्य कारण है, जिसकी वजह से मिलों को समय से गेहूॅं की आपूर्ति नहीं हो सकी। उन्होंने आटे की किल्लत को ‘अस्थायी’ बताते हुए कहा यह संकट कुछ दिन में दूर हो जाएगा और सिंध में 20 मार्च तथा पंजाब में 15 अप्रैल तक गेहूॅं की नई फसल की आमद बढ़ जाने से स्थिति में और सुधार होगा।

पोपलजाई के अनुसार ने सिंध सरकार से एक करोड़ 40 लाख टन गेहूॅं खरीदने के लिए कहा गया था। लेकिन प्रांतीय सरकार ने इस पर ध्यान नहीं दिया। उन्होंने बताया कि देश में गेहूॅं की कुल मासिक खपत 22 लाख टन है। सरकार के पास भंडार में पहले ही 42 लाख टन का गेहूॅं का स्टॉक है।

नेशनल एसेम्बली में विपक्ष के नेता और पाकिस्तान मुस्लिम लीग नवाज के अध्यक्ष शाहबाज शरीफ ने देश में लागातार बढ़ती महॅंगाई को लेकर इमरान सरकार को घेरा है। उन्होंने ट्वीट कर कहा है, “सरकार के उदासीन रवैए ने आम लोगों की जीवन मुश्किल कर दिया है।” वहीं, पीपीपी अध्यक्ष बिलवाल भुट्टो जरदारी ने कहा कि इमरान खान सरकार के कार्यकाल में पाकिस्तान गेहूॅं निर्यातक की बजाय इसका आयातक बन गया। उन्होंने आरोप लगाया कि संघीय सरकार ने 40 हजार टन गेहूॅं अफगानिस्तान भेज दिया।

भारत से व्यापार बंद होने पर टूटी कमर, खाने के पड़े लाले: पाकिस्तानी मंत्री का कबूलनामा

13 महीने में ही उतावले हो गए पाकिस्तानी, इतने कम समय में Pak को मदीना कैसे बनाऊँ: इमरान खान

FATF में अलग-थलग पाकिस्तान: ‘डार्क ग्रे’ लिस्ट में जाने के आसार, चीन, तुर्की और मलेशिया ने भी काटी कन्नी

इस्लामी घाटी का हिंदुत्वकरण करना चाहती है सरकार: कश्मीरी पंडितों की घर वापसी पर सबा नकवी

रायसीना डायलॉग में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल बिपिन रावत की कही बातें इस्लामिक कट्टरपंथियों को गहरे टीस रही है। पहले हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी और अब स्वघोषित पत्रकार सबा नक़वी ने इस मामले में अपनी भड़ास निकाली है। इसके बहाने सबा नकवी ने कश्मीरी पंडितों के खिलाफ भी जहर उगला है। साथ ही घाटी में उनकी वापसी की योजनाओं का सरकार का हिंदुत्वकरण एजेंडा बताया है।

कश्मीरी पंडितों को अपनी जमीन छोड़े तीन दशक बीत चुके हैं। 1990 में जब कश्‍मीर में आतंकवाद ने अपने पाँव पसारने शुरू किए, तब से ही हर दिन इन लोगों के लिए दहशत का पर्याय बन गया। 19 जनवरी को उन्होंने विस्थापन का वह दर्द झेला जिसकी दुनिया के इतिहास में कहीं और मिसाल नहीं मिलती।

सबा नक़वी के इंडिया टुडे न्यूज़ चैनल में एक डिबेट के दौरान कश्मीरी पंडितों की घरवापसी के मुद्दे को सरकार के हिंदुत्वकरण का एजेंडा बताया है। शुक्रवार को प्रसारित हुए इस शो में उन्होंने जम्मू-कश्मीर पर भारत के अधिकार को लेकर भी सवाल उठाए।

CDS जनरल रावत ने रायसीना डायलॉग के दौरान बच्चों को कट्टरपंथी बनने से बचाने के लिए डिरेडिकलाइजेशन कैम्प स्थापित करने की बात कही थी। नक़वी ने कहा कि जनरल रावत जम्मू-कश्मीर के मुद्दे पर गुमराह हैं। इसके साथ ही उन्होंने जनरल रावत के पद को लेकर भी विवादित टिप्पणी की।

नकवी ने बेतुका बयान देते हुए कहा कि भारत ने कश्मीर को ‘ले लिया’ है, जिसका सीधा सा अर्थ है कि उनके अनुसार जम्मू-कश्मीर पर भारत ने कब्जा कर रखा है। नकवी ने अपनी मानसिक वेदना को स्पष्ट करते हुए कहा, “आपने कश्मीर ले लिया है, आप धीरे से भारत को हिंदू राष्ट्र बना रहे हैं और फिर आप कहते हैं कि हम कश्मीर को एकीकृत कर रहे हैं और अब आप कहते हैं कि उन्हें उठाना चाहते हैं और एक शिविर में डालना चाहते हैं।”

इंडिया टुडे के इस शो में सबा नक़वी ने जनरल बिपिन रावत को सेना के सबसे ऊँचे पद पर होने के पीछे सरकार की कृपा बताया है। अक्सर सोशल मीडिया पर झूठ और अफवाह फैलाने वाली सबा नक़वी CAA के खिलाफ माहौल बनाने वालों में से एक प्रमुख नाम है। इनका हिन्दुविरोधी एजेंडा कई बार सोशल मीडिया पर स्पष्ट तौर पर पकड़ा जा चुका है।

चौंकाने वाली बात यह है कि सबा नकवी को कश्मीर में इस्लामिक कट्टरपंथियों और आतंकवादियों द्वारा सताए जाने के तीन दशक बाद अपने घर लौटने वाले कश्मीरी पंडितों से भी समस्या है। सबा नकवी ने कहा, “आप चाहते हैं कि हिंदू पंडित घाटी लौटें, क्या आपको लगता है कि हम मूर्ख हैं?”

कश्मीरी पंडितों की वापसी पर सबा नकवी ने जवाब दिया कि कश्मीरी पंडितों की वापसी का मतलब ‘इस्लामी कश्मीर’ का ‘हिंदुत्वकरण’ करना है। नक़वी का यह बयान बिल्कुल वही मानसिकता है, जिसके कारण कश्मीर में हिंदुओं का नरसंहार किया गया था।

अक्सर सबा नक़वी जैसे जिहादियों की मदद करने वाले पत्रकारों ने कश्मीरी पंडितों के नरसंहार को इस तरह से पेश किया है जैसे यह करना मुस्लिमों के मूल अधिकारों के लिए जरूरी था। हम याद कर सकते हैं किस तरह से बरखा दत्त जैसी पत्रकार कश्मीरी पंडितों का इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा नरसंहार को यह साबित करते हुए देखी गई थी कि कश्मीरी मुस्लिम असंतुष्ट थे और उन्होंने कश्मीरी पंडितों का नरसंहार इसलिए किया क्योंकि घाटी में सभी अधिकार, सुविधा और नौकरियाँ हिन्दू पंडितों को दी जा रही थी।

दरअसल, AIMIM नेता असदुद्दीन ओवैसी और सबा नक़वी, इन दोनों की बौखलाहट का कारण जनरल विपिन रावत द्वारा कट्टरपंथियों के हाथों छोटे बच्चों को आतंकवादी बनने से रोकने के लिए उन्हें डिरेडिकलाइज करने वाला बयान है। रायसीना डायलॉग के दौरान CDS जनरल बिपिन रावत ने कहा कि कश्मीर में 10 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। जनरल रावत ने कहा कि ऐसे बच्चों को शांतिवार्ता से कट्टरपंथी बनाए जाने की ऐसी मुहिम से अलग कर सकते हैं।

इसके बाद ओवैसी को खबरों में आने की एक और वजह मिल गई और उन्होंने सवाल किया है कि जनरल बिपिन रावत किस-किस को डिरेडिकलाइज़ करेंगे? साथ ही सीडीएस जनरल रावत को सलाह दी कि उन्हें नीतियाँ नहीं बनानी चाहिए। यहाँ तक कि ओवैसी ने सीडीएस बिपिन रावत के बयान की तुलना कनाडा में अंग्रेज हुकुमत के द्वारा किए गए जुल्म से भी कर डाली।

सबा नकवी और ट्रिब्यून वालो, जब से तुम पैदा हुए हिन्दुओं का इतिहास तभी से शुरू नहीं होता

लिल्लाह! फेक न्यूज़ मैंने शेयर की, लेकिन घृणा तो मुआ ऑपइंडिया फैला रहा है: सबा नक़वी

CJI ने कहा- हिंसा रुकने पर करेंगे सुनवाई, फट पड़ी हिन्दूफोबिया से ग्रसित सबा नक़वी

J&K को नए साल की सौगात, 25 स्मार्ट स्कूल श्रीनगर में बनकर तैयार

जम्मू-कश्मीर में श्रीनगर के ज़िला मजिस्ट्रेट शाहिद चौधरी ने यहाँ के लोगों को नए साल की सौगात दी है। अपने ट्विटर अकाउंट के ज़रिए जानकारी देते हुए उन्होंने बताया कि महीनों की कड़ी मेहनत के बाद हमारे 25 स्मार्ट स्कूल तैयार हो चुके हैं। यह नए साल पर श्रीनगर के छात्रों और अभिभावकों को देर से दिया जा रहा उपहार है। साथ ही उन्होंने इसे और बेहतर बनाने की अपील भी की।

ख़बर के अनुसार, 19 सितंबर 2019 को, श्रीनगर प्रशासन ने घोषणा की थी कि ज़िले में सरकारी स्कूलों को सबसे आधुनिक सुविधाओं से लैस और उन्हें प्रतिस्पर्धी संस्थानों में बदलने की महत्वाकांक्षी परियोजना शुरू की जा रही है।

अत्याधुनिक 25 स्मार्ट स्कूलों के विकास के साथ इस प्रक्रिया की शुरूआत हुई। इसका उद्देश्य न सिर्फ़ स्कूल भवनों का फिर से नवीनीकरण कर उन्हें आधुनिक बुनियादी ढाँचे से लैस करना था बल्कि शैक्षिक परिणामों में भी सुधार लाना था।

एक कार्यक्रम के दौरान 25 स्मार्ट स्कूलों के सन्दर्भ में जानकारी देते हुए ज़िला मजिस्ट्रेट शाहिद चौधरी ने बताया कि इस महत्वाकांक्षी परियोजना के सफल क्रियान्वयन को सुनिश्चित करने के लिए राज्य के बाहर के सार्वजनिक विद्यालयों में विद्यमान वास्तविक मॉडलों पर आधारित एक व्यापक आधुनिकीकरण योजना पर काम किया गया है।

ग़ौरतलब है कि जम्मू-कश्मीर में अनुच्छेद 370 को निरस्त किए जाने के बाद से वहाँ विकासकार्यों पर विशेषतौर पर ध्यान दिया जा रहा है। इसी कड़ी में, केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने आज रियासी के मुरी गाँव में एक फुटब्रिज और एक पानी की टंकी का शिलान्यास किया। इस दौरान उन्होंने कहा, “आज, मुझे कई विकास परियोजनाओं के लिए आवेदन प्राप्त हुए हैं। इन आवेदनों के संबंध में उपायुक्त द्वारा आदेश जारी किए गए थे।”

जम्मू-कश्मीर में इस ‘साहसिक’ कदम के लिए अमेरिकी कॉन्ग्रेस के सांसद ने की मोदी की सराहना

जम्मू-कश्मीर में वर्षों से बंद 50 हजार मंदिर खोलने की तैयारी में सरकार, जल्द होगा सर्वे: गृह राज्यमंत्री

श्रीनगर सचिवालय से हटा राज्य का झंडा, पहली बार लहराया सिर्फ़ तिरंगा

मध्य प्रदेश: केरोसिन उड़ेल दलित युवक को लगाई आग, पठान, कल्लू और इरफान गिरफ्तार

मध्य प्रदेश के सागर जिले में एक दलित युवक को जिंदा जलाए जाने की घटना सामने आई है। युवक की हालत नाजुक बताई जा रही है। मीडिया रिपोर्ट में पुलिस के हवाले से बताया गया है कि 14 जनवरी की रात 24 वर्षीय धनिराम अहिरवार पर कुछ लोगों ने केरोसिन उड़ेलकर उसे जिंदा जलाने की कोशिश की। करीब 60 फीसद तक झुलस चुके धनिराम की हालत गंभीर है।

पुलिस ने आरोपितों छुट्टू, अज्जू पठान, कल्लू और इरफान ने को गिरफ्तार कर लिया है। आपसी विवाद के बाद इनलोगों ने इस घटना को अंजाम दिया। बताया जा रहा है कि इस घटना से दो दिन पहले भी इनलोगों का धनिराम से विवाद हुआ था। पीड़ित के भाई धर्मेंद्र अहिरवार ने बताया कि आरोपितों से बच्चों को लेकर विवाद हुआ था। इसके बाद आरोपितों ने राजीनामा करने का भी दबाव बनाया। 14 जनवरी की रात आरोपितों ने पीड़ित के परिजनों से मारपीट करते हुए धनिराम को घेर लिया और उसे आग लगा दी।

सोशल मीडिया में शेयर किए जा रहे वीडियो से पता चलता है कि आरोपित कई दिनों से पीड़ित परिवार के लोगों को परेशान कर रहे थे। मोती नगर पुलिस ने आरोपित छुट्टू, अज्जू, कल्लू, इरफान के खिलाफ धारा 294, 323, 452, 307, 34 व एससीएसटी एक्ट के तहत मामला दर्ज किया है। दैनिक भास्कर की खबर में पीड़ित का नाम धनप्रसाद बताया गया है। आरोपित और पीड़ित एक ही मुहल्ले के रहने वाले हैं।

इस घटना को लेकर अनुसूचित जाति-जनजाति, अधिकारी एवं कर्मचारी संघ (अजाक्स) ने कलेक्टर व एसपी को ज्ञापन दिया है। अजाक्स अध्यक्ष हीरालाल चौधरी ने बताया कि पीड़ित युवक को आरोपित काफी दिनों से परेशान कर रहे थे। अगर समय रहते पुलिस ने कार्रवाई की होती तो यह घटना नहीं होती।

मीडिया ने की घटना को छुपाने की कोशिश

आरोपितों के समुदाय विशेष से जुड़े होने के कारण इस मामले को मेनस्ट्रीम मीडिया ने छिपाने की भरपूर कोशिश की। लेकिन, सोशल मीडिया में पीड़ित का वीडियो वायरल होने के बाद कुछ मीडिया संस्थान इस खबर को प्रकाशित करने के लिए मजबूर हो गए।

बीते साल जब उत्तराखंड में इसी तरह की घटना हुई थी तो मुख्यधारा की मीडिया ने बगैर पड़ताल किए ही इसे दलित और सवर्णों की लड़ाई के तौर पर पेश किया था। लेकिन आरोपितों के मुस्लिम होने और प्रदेश में कॉन्ग्रेस की सरकार को देखते हुए सागर की घटना पर चुप्पी साध ली गई। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश में कमलनाथ के नेतृत्व में कॉन्ग्रेस की सरकार है।

अहिरवार को जिंदा जलाने की घटना को लेकर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष राकेश सिंह ने राज्य सरकार पर तुष्टिकरण की राजनीति करने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अपराधियों के खिलाफ कार्रवाई के नाम पर सिर्फ 2-3 लोगों को ही पकड़ा जाता है। इस तरह की दुखद और अमानवीय घटना में कार्रवाई के नाम पर औपचारिकता की जा रही है। उन्होंने कहा कि पीड़ित सागर ने आरोपितों की शिकायत कर पुलिस से बचाने की गुहार भी लगाई थी। पुलिस ने अगर उसकी शिकायत पर कार्रवाई की होती तो आज उसकी यह हालत नहीं होती।

दलित महिला की गैंगरेप के बाद हत्या: बाबू, शहाबुद्दीन और मकदूम ने कबूला जुर्म

कॉन्ग्रेस राज में दलित की पिटाई, पेशाब पीने को किया मजबूर: दोनों पैर काटने पड़े फिर भी नहीं बची जान

ट्रक में कार घुसाने वाले शबाना आज़मी के ड्राइवर पर FIR, मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर हुआ था हादसा

महाराष्ट्र के रायगढ़ में मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर शनिवार को सड़क दुर्घटना में अभिनेत्री शबाना आजमी घायल हो गईं थी। पु​लिस ने उनके ड्राइवर के खिलाफ मामला दर्ज किया है। ट्रक ड्राइवर की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया है। शिक़ायत में शबाना के ड्राइवर पर तेज़ रफ़्तार से कार चलाने का आरोप लगाया है।

रायगढ़ पुलिस ने ट्रक ड्राइवर राजेश पांडुरंग द्वारा दी गई तहरीर के आधार पर अभिनेत्री शबाना आज़मी के कार ड्राइवर अमलेश कामत के ख़िलाफ़ कई धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। राजेश के मुताबिक़, गाड़ी की रफ़्तार अधिक होने के कारण ही कार मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर ट्रक में जा घुसी और दुर्घटनाग्रस्त हो गई।

एएनआई ने ट्वीट किया है, “शबाना आजमी के ड्राइवर अमलेश कामत के खिलाफ ट्रक ड्राइवर ने खालापुर में एफआईआर दर्ज करवाई है। इस एफआईआर में लिखा है कि ड्राइवर स्पीड में गाड़ी चला रहा था और उसकी गाड़ी ने चलते हुए ट्रक को मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे पर टक्कर मार दी।” बता दें कि शनिवार (18 जनवरी) को अभिनेत्री शबाना आजमी की कार मुम्बई से पुणे जाते समय दुर्घटनाग्रस्त हो गई थी। इस दौरान शबाना आज़मी और उनके ड्राइवर को चोटें आई थी। साथ ही कार का अगला हिस्सा और ट्रक का पिछला हिस्सा बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गया था। शबाना को मुंबई के एक प्राइवेट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया। उनकी हालत स्थिर बनी हुई है।

जिस ट्रक से शबाना आज़मी की कार को लगी टक्कर

ख़बर के अनुसार, शबाना आज़मी टाटा सफारी कार में थीं और उनके पति जावेद अख्तर उनके पीछे चल रही ऑडी कार में सवार थे। शनिवार देर रात कोकिलाबेन अंबानी हॉस्पिटल के डायरेक्टर और सीईओ डॉक्टर संतोष शेट्टी ने बताया कि शबाना आजमी खतरे से बाहर हैं और उनकी हालत स्थिर बनी हुई है। डॉक्टर लगातार शबाना की तबीयत पर नजर रखे हुए हैं।

शबाना आज़मी कीक्षतिग्रस्त कार

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक रायगढ़ पुलिस ने शबाना आज़मी के ड्राइवर के खिलाफ धारा 279 (सार्वजनिक रास्ते पर तेज गाड़ी चलाना) और 337 (आईपीसी और मोटर वाहन अधिनियम की धाराओं के तहत दूसरों की जान को खतरा/ दूसरों की व्यक्तिगत सुरक्षा को नुकसान पहुंचाने के कारण) के तहत के तहत एफआईआर दर्ज की है।

शबाना आज़मी का एक्सिडेंट, साथ में बैठे थे जावेद अख्तर: गंभीर हालत में ले जाया गया अस्पताल

आजम खान के बोल अभद्र और असभ्य, ऐसा सबक सिखाएँ कि याद रहे: जावेद अख्तर

जावेद अख़्तर : स्क्रिप्ट-राइटर और गीतकार से लेकर ट्रोल तक का सफ़र

वादों पर खरी नहीं उतरी केजरीवाल सरकार, RTI के सिलसिलेवार जवाबों से ख़ुलासा

दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने अपने शासनकाल के दौरान जनता को ठगने का काम किया है। ऐसा हम नहीं बल्कि सूचना के अधिकार (RTI) के तहत पूछे गए सवालों के वो जवाब कह रहे हैं, जिनके सामने आने पर उनके वादों की पोल खुल गई है।

इंडिया टीवी ने अपनी एक्सक्लूसिव ख़बर के माध्यम से उन सभी सवालों के जवाब को सिलसिलेवार तरीके से जनता के सामने रखा है। इन सवालों के जवाब देखने के बाद आपको पता चल जाएगा कि आम आदमी पार्टी (AAP), झुग्गी झोपड़ी (जेजे) क्लस्टर के निवासियों की शिक्षा, परिवहन, स्वास्थ्य सेवा और पुनर्वास के मोर्चों पर किए गए वादों को पूरा करने में विफल रही है।

RTI के जवाबों में, जेजे कॉलोनी में रहने वाले निवासियों के साथ बड़े पैमाने पर धोखाधड़ी होने का ख़ुलासा हुआ है। जेजे कॉलानी में विकास को लेकर किए गए सर्वेक्षण के लिए नोडल प्राधिकरण, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) ने केजरीवाल सरकार को एक प्रमाण-पत्र से सम्मानित किया था। जबकि इसकी सच्चाई यह है कि ऐसा कोई सर्वेक्षण हुआ ही नहीं था, जिसके लिए केजरीवाल सरकार को सम्मानित किया गया। दरअसल, अपने चुनावी घोषणा-पत्र में, AAP ने वादा किया था कि वो शहर के सर्वेक्षण में शामिल होने के बाद उसी स्थान पर जेजे निवासियों को घरों के निर्माण की मंज़ूरी देगी, जहाँ वो रह रहे थे।

नई दिल्ली स्थित RTI कार्यकर्ता तेजपाल सिंह ने 2019 में RTI के तहत कुछ सवाल पूछे थे। उन्हें आधिकारिक तौर पर जो जवाब दिए गए उनकी इमेज नीचे लगाई गई है।

फेक सर्वेक्षण प्रमाण-पत्र से सम्मानित दिल्ली सरकार का सच

सूचना के अधिकार के माध्यम से यह पता चला कि सरकार ने 1 फरवरी, 2015 से 30 सितंबर, 2019 के बीच 3,00,000 जेजे क्लस्टर के निवासियों के पुनर्वास के लिए कोई निर्माण शुरू नहीं किया। जबकि दिल्ली सरकार को इसके लिए सर्वेक्षण पूरा करने संबंधी प्रमाण-पत्र दिया गया। RTI से पता चला है कि उक्त तारीखों के दौरान ऐसा कोई सर्वेक्षण हुआ ही नहीं था। सर्वेक्षण पूरा करने वाले प्रमाण-पत्रों में से एक इमेज जेजे निवासी द्वारा शेयर की गई।

India Tv - The RTI reply
RTI का जवाब (साभार: इंडिया टीवी)

इसके अलावा, दिल्ली शहरी आश्रय सुधार बोर्ड (डीयूएसआईबी) की ओर से 21 नवंबर, 2019 को दिए गए RTI जवाब में बताया गया था, “1 फरवरी, 2015 से 30 सितंबर, 2019 के बीच किसी भी जेजे क्लस्टर में कोई सर्वेक्षण नहीं किया गया था।”

पकड़ा गया हेल्थकेयर का झूठ

RTI के जवाबों से पता चला है कि सरकार 900 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र बनाने और दिल्ली सरकार द्वारा संचालित अस्पतालों में 30,000 बेड जोड़ने के अपने अभियान में पिछड़ गई।

India Tv - The RTI reply
RTI का जवाब (साभार: इंडिया टीवी)

इसके अलावा, एक अन्य RTI जवाब से पता चलता है कि 1 अप्रैल, 2015 और 31 मार्च, 2019 के बीच न कोई नया अस्पताल शुरू हुआ और न ही निर्माण हुआ।

India Tv - The RTI reply
RTI का जवाब (साभार: इंडिया टीवी)

दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य सेवा निदेशालय से 3 जुलाई, 2019 को एक RTI जवाब में बताया, “अप्रैल 2015 और 31 मार्च, 2019 के बीच कोई नया अस्पताल नहीं बनाया गया।”

2015 की तुलना में दिल्ली की सड़कों पर चलने वाली डीटीसी बसें कम हुईं

जहाँ तक ​​डीटीसी बसों की बात है, उनकी संख्या 2015 से 2019 के बीच कम हो गई है। एक RTI के जवाब के मुताबिक़, 1 अप्रैल, 2015 में दिल्ली की सड़कों पर 4,705 बसें चल रही थीं। वहीं, 31 अगस्त 2019 को यह संख्या घटकर 3,796 हो गई थी। इसका जवाब, दिल्ली परिवहन निगम (डीटीसी) के एक अधिकारी ने 3 दिसंबर, 2019 को दिया था।

India Tv - The RTI reply
RTI का जवाब (साभार: इंडिया टीवी)

अपने घोषणा पत्र में, आम आदमी पार्टी ने वादा किया था कि वो 5,000 नई बसें खरीदेंगे।

सरकारी शिक्षकों के पद आज भी रिक्त

आम आदमी पार्टी ने 500 नए स्कूलों के निर्माण का वादा किया था, जबकि सच्चाई यह है कि 1 अप्रैल, 2015 से 31 अगस्त, 2019 के बीच केवल एक ही स्कूल के निर्माण को मँजूरी दी गई।

India Tv - The RTI reply
RTI का जवाब (साभार: इंडिया टीवी)

RTI के एक अन्य जवाब में बताया गया कि 1 फरवरी 2015 को 9,598 शिक्षक पद रिक्त थे, 30 सितंबर 2019 तक यह संख्या बढ़कर 15,702 पहुँच गई।

India Tv - The RTI reply
RTI का जवाब (साभार: इंडिया टीवी)

RTI कार्यकर्ता तेजपाल सिंह का कहना है कि दिल्ली में विधानसभा चुनाव पर मतदान होने से पहले केजरीवाल की यह सच्चाई जनता के सामने आना बेहद ज़रूरी है। ताकि जनता को यह पता चल सके कि केजरीवाल ने दिल्ली के निवासियों से एक नहीं कई झूठ बोले हैं, जिन पर उनकी जवाबदेही बनती है।

अरविंद केजरीवाल ने विधान सभा चुनाव के लिए प्रशांत किशोर की कम्पनी से किया गठजोड़

Free ही Free… अरविंद केजरीवाल, वो नेता जो ‘मुफ्त’ की राजनीति और झूठे वादे का चैंपियन है

हैलो… मैं अरविंद केजरीवाल बोल रहा हूँ और मेरा काम है अफ़वाह फैलाना

कश्मीरी हिन्दुओं का नरसंहार: नदीमर्ग में 70 साल की महिला से लेकर 2 साल के मासूम तक को मारी गोली

एक इंग्लिश मैगज़ीन को 2018 में रामकिशन धर बताते हैं, “बगल वाली मस्जिद से पंडितों और भारत के खिलाफ ऊँची आवाज में नारें लगने शुरू होते ही हम समझ जाते थे कि हमारा यहाँ से जाने का समय आ गया है।” ऐसा 1989 से लगातार होता रहा और आज कश्मीर घाटी हिन्दुओं से लगभग खाली हो गई है। जम्मू-कश्मीर जिसे धरती का स्वर्ग कहा गया वह हिन्दुओं के लिए नरक बन गया। खुले तौर पर वहाँ एक नहीं, बल्कि कई नरसंहारों को अंजाम दिया गया। इन मामलों पर कभी कोई कार्यवाही नहीं की गई। ऐसा ही एक दास्ताँ नदीमर्ग नरसंहार की है।

शोपियाँ जिले में नदीमर्ग (अब पुलवामा में) एक हिन्दू बहुल गाँव था, जिसकी कुल आबादी मात्र 54 थी। तत्कालीन मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद के पैतृक गाँव से 7 किलोमीटर दूर स्थित इस गाँव में 23 मार्च, 2003 की रात सब तबाह हो गया। जब पूरा देश भगत सिंह, राजगुरु और सुखदेव की याद में शहीद दिवस मना रहा था, तब नदीमर्ग में हिन्दुओं का नरसंहार हो रहा था। उस दिन 7 आतंकवादी गाँव में घुसे और सभी हिन्दुओं को चिनार के पेड़ के नीचे इकठ्ठा करने लगे। रात के 10 बजकर 30 मिनट पर इन आतंकियों ने 24 हिन्दुओं की गोली मार कर हत्या कर दी। गौर करने वाली बात थी कि 23 मार्च को पाकिस्तान का राष्ट्रीय दिवस मनाया जाता है।

मरने वालों में 70 साल की बुजुर्ग महिला के साथ 2 साल का मासूम बच्चा भी शामिल था। क्रूरता की हद पार करते हुए एक दिव्यांग सहित 11 महिलाओं, 11 पुरुषों और 2 बच्चों पर बेहद नजदीक से गोलियाँ चलाई गई। कुछ रिपोर्ट्स का दावा है कि पॉइंट ब्लेंक रेंज से हिन्दुओं के सिर में गोलियाँ मारी गई थी। आतंकी यही नहीं रुके उन्होंने घरों को लूटा और महिलाओं के गहने उतरवा लिए। न्यूयॉर्क टाइम्स अखबार ने इस घटना का जिम्मेदार ‘मुस्लिम आतंकवादियों’ बताया। अमेरिका के स्टेट्स डिपार्टमेंट ने भी इसे धर्म आधारित नरसंहार माना था।

आतंकियों को मदद पड़ोस के मुस्लिम बहुलता वाले गाँवों से मिली थी। उस दौरान जम्मू-कश्मीर पुलिस के इंटेलिजेंस विंग को संभाल रहे कुलदीप खोड़ा भी मानते हैं कि बिना स्थानीय सहायता के नदीमर्ग नरसंहार को अंजाम ही नहीं दिया जा सकता था। नरसंहार के चश्मदीद बताते है कि आतंकियों ने हिन्दूओं को उनके नाम से पुकारकर घरों से बाहर निकाला था। यानी वे पहले से ही इस योजना पर काम कर रहे थे। आतंकियों ने गाँव का दौरा किया हो, इस बात से भी इनकार नहीं किया जा सकता। इस प्रकरण में राज्य सरकार की भूमिका भी संदेह वाली बनी रही। उस इलाके की सुरक्षा में लगी पुलिस को हटा लिया गया था। घटना से पहले वहाँ 30 सुरक्षाकर्मी तैनात थे, जिनकी संख्या उस रात घटाकर 5 कर दी गई।

अगले ही महीने इस नरसंहार में शामिल एक आतंकी जिया मुस्तफा को गिरफ्तार कर लिया गया। पाकिस्तान के रावलकोट का रहने वाला यह आतंकी लश्कर-ए-तय्यबा का एरिया कमांडर था। उसने जाँच के दौरान बताया कि लश्कर के अबू उमैर ने उसे ऐसा करने के लिए कहा था। मुस्तफा के मुताबिक वह उन बैठकों का हिस्सा रहा, जहाँ देश भर के हिन्दू मंदिरों पर आतंकी हमले की योजना बनाई गई थी। उसने एजेंसियों को बताया कि वे सभी पाकिस्तान के संपर्क में थे। वहाँ से उन्हें कहा गया था कि जेहाद के लिए 6 आतंकियों को दिल्ली और गुजरात में मुस्लिम युवाओं के बीच भेजना है। सितम्बर 2001 में सीमा पार से मुस्तफा कश्मीर घाटी में घुसा था। वह दूसरे 6 आतंकियों के साथ पुलवामा के आसपास आतंकी गतिविधियों को अंजाम देता था।

मुस्तफा स्थानीय लोगों से संपर्क से लश्कर में भर्ती होने के लिए युवाओं को उकसा रहा था। हथियारों और वायरलेस के अलावा उसके पास से कुछ दस्तावेज भी बरामद किए गए। उनसे पता चला कि उसे पैसा पाकिस्तान से मिलता था। इस गिरफ्तारी ने पाकिस्तान के उन दावों की पोल खोल दी जिसमें वह भारत में आतंकी गतिविधियों में अपना हाथ होने से इनकार करता रहा है। अमेरिका में असिस्टेंट सेक्रेटरी ऑफ़ स्टेट्स (दक्षिण एशिया), क्रिस्टीना रोक्चा ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान को उसकी जमीन से संचालित आतंकवाद को रोकने के हरसंभव प्रयास करने चाहिए। नदीमर्ग नरसंहार के सभी आतंकी पाकिस्तान से ही आए थे। इसकी पुष्टि बॉर्डर सिक्यूरिटी फ़ोर्स को 18 अप्रैल, 2003 को मिली एक सफलता से हो गई। मुस्तफा के खुलासे के बाद बीएसएफ ने कुलगाम में तीन आतंकियों को मार गिराया। उनमें से एक आतंकी मंजूर ज़ाहिर था जो कि नरसंहार के साथ अक्षरधाम मंदिर हमले में भी शामिल था। लाहौर का रहने वाला मंजूर लश्कर के लिए काम करता था।

नदीमर्ग नरसंहार के बाद जम्मू-कश्मीर के हिन्दुओं के मन में बैठ गया कि वे राज्य में सुरक्षित नहीं हैं। बीते दशकों में उनके पुनर्वास की कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई। भारत के उच्चतम न्यायालय से भी उन्हें कोई राहत नहीं मिली। चूँकि यह मामला ‘कई साल पुराना है इसलिए न्यायालय इस पर सुनवाई नहीं कर सकता’। यह कहकर 2017 में दो न्यायाधीशों की पीठ ने हिन्दुओं के घाटी में वापसी पर दायर पीआईएल को खारिज कर दिया। एक तरफ हिन्दुओं का नरसंहार हुआ तो दूसरी ओर उन्हें मानसिक तौर पर प्रताड़ित भी किया गया। उनके घर सस्ते दामों में स्थानीय मुस्लिमों को बेच दिए गए। मसलन, जिस हिन्दू के घर को 2.5 लाख में बेचा गया अगर उसकी जगह वह किसी मुस्लिम का होता तो उसकी कीमत 8 लाख होती।

सूरज ढलते ही गाँव में घुसे 50 आतंकी, लोगों को घरों से निकाला और लगा दी लाशों की ढेर

हमें हिंदू औरतें चाहिए… कश्मीर की हर मस्जिद से 19/1/1990 की रात आ रही थी यही आवाज

जब मस्जिदों से लगे नारे- ज़लज़ला आ गया है कुफ़्र के मैदान में, लो मुजाहिद आ गए हैं मैदान में

AMU के वीसी को छात्रों ने भेजा मेल-मैसेज, कहा- उनका धरना सही, पर हमारी परीक्षा तो कराएँ

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) में शैक्षणिक व्यवस्था बाधित होने से आम छात्रों की चिंता बढ़ने लगी है। उन्होंने वाइस चांसलर से परीक्षाएँ करवाने की गुहार लगाई है। छात्रों के एक समूह ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध के नाम पर यूनिवर्सिटी की गतिविधियॉं ठप कर रखी है। ये छात्र कक्षाओं का बहिष्कार कर धरना दे रहे हैं। दूसरी तरफ इनके दबाब में एएमयू इंतजािमयाँ द्वारा परीक्षाएँ निरस्त किए जाने से आम छात्र मायूस हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार परेशान छात्रों ने इंतजामियाँ पर गंभीर सवाल खड़े करते हुए कहा है कि आंदोलनकारी छात्र कह रहे हैं कि सीएए के ख़िलाफ लड़ाई अपेक्षित परिणाम मिलने तक जारी रहनी चाहिए। लेकिन कब तक? परिणाम कब मिलेगा किसी को नहीं मालूम। कब तक इस आंदोलन के चलते यूनिवर्सिटी को बंद रहेगा। परीक्षाओं के साथ भी तो वे आंदोलन जारी रख सकते हैं। 250 से अधिक छात्र-छात्राओं ने कुलपति को मेल व मैसेज के जरिए अपनी परेशानी बताई है।

एएमयू के आम छात्र विश्वविद्यालय के बाबे सैयद गेट पर पिछले करीब 33 दिनों से सीएए के ख़िलाफ जारी धरने से परेशान हैं। 15 दिसंबर को विश्वविद्यालय में हुई हिंसा के बाद इसे 5 जनवरी तक के लिए बंद कर दिया गया था। इसके बाद 13 जनवरी को विश्वविद्यालय को पूर्ण रूप से खोल दिया गया। लेकिन विश्वविद्यालय के खुलते ही आंदोलनकारी छात्रों ने कक्षाओं का बहिष्कार कर दिया। इसके बाद एएमयू इंतजामियाँ ने आंदोलनकारी छात्रों के दवाब में आकर सभी कॉलेजों में होने वाली परीक्षाओं को स्थगित कर दिया।

अब आलम यह है कि जो छात्र आगे होने वाली परीक्षाओं की चिंता लिए कक्षा करने जा रहे हैं, उन छात्रों को आंदोलनकारी छात्रों द्वारा जबरदस्ती बाहर निकाला जा रहा है। साथ ही आम छात्रों पर प्रोटेस्ट में शामिल होने का दवाब भी बनाया जा रहा है। इतना ही नहीं शिक्षक भी आंदोलनकारी छात्रों का समर्थन करते हुए कक्षाएँ नहीं ले रहे हैं। इससे परेशान आम छात्रों का कहना है कि भविष्य में उनको कई प्रतियोगी परीक्षाएँ देनी है। वे ऐसे किसी आंदोलन का हिस्सा नहीं बनना चाहते, जिससे उनके भविष्य पर किसी भी तरह का असर हो।

आंदोलनकारी छात्रों ने शनिवार को CAA के विरोध में बैलून मार्च निकाला। हाथों में पुतला लिए छात्र बाबे सैयद गेट पर चल रहे धरने पर पहुँच गए और देखते ही देखते छात्रों ने वीसी और रजिस्ट्रार के पुतले को आग के हवाले कर दिया। बताया जा रहा है कि एएमयू के इतिहास में पहली बार कुलपति के पुतले का दहन छात्रों द्वारा किया गया है। एएमयू प्रवक्ता प्रोफेसर शाफे किदवई ने कहा, “35 साल से अधिक समय से मैं एएमयू से जुड़ा हुआ हूँ। विरोध-प्रदर्शन तो बहुत हुए, लेकिन कुलपति का पुतला छात्रों ने कभी नहीं फूँका। इसे उचित नहीं ठहराया जा सकता।”

दैनिक जागरण के अलीगढ़ संस्करण में 19 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर

दरअसल एएमयू छात्र CAA विरोध के दौरान अलीगढ़ पुलिस द्वारा की गई कार्रवाई से नाराज हैं। वीसी से छात्रों की नाराजगी इस बात से है कि पुलिस को कैंपस में प्रवेश करने की अनुमति उन्होंने ही दी थी।

AMU के छात्र नेताओं ने जूता दिखाकर प्रोफ़ेसर को कहा- ‘दल्ला’, VC ने कहा- सरकार हमें 1100 करोड़ देती है…

AMU में छात्रों के ‘उपद्रव’ के बाद CAA विरोध के नाम पर शिक्षकों ने लगाए ‘आज़ादी के नारे’

प्रदर्शनकारी छात्रों के दवाब में आया AMU इन्तजामियाँ: सभी परीक्षाएँ स्थगित, आम छात्र मायूस

लखनऊ में 6 साल की बच्ची से रेप, गले में चाकू घोंप हत्या: मामू अराफात को फाँसी

लखनऊ में पॉक्सो कोर्ट के विशेष न्यायाधीश अरविंद कुमार मिश्रा नें 6 साल की मासूम का बलात्कार और हत्या के दोषी अराफात उर्फ बबलू  को फाँसी की सज़ा सुनाई है। साथ ही 40 हज़ार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। जब फैसला सुनाया गया मृतक बच्ची की माँ और बुआ अदालत में ही थे। जज अरविंद मिश्रा ने जैसे ही आरोपित को दोषी करार देते हुए फाँसी की सज़ा सुनाई तो माँ और बुआ की आँखों से आँसू छलक गए।

दिल दहला देने वाली इस घटना में पुलिस ने भी बेहद सक्रियता दिखाई थी। मात्र 24 घंटे के अंदर आरोपित को गिरफ़्तार कर लिया था। 6 दिन के अंदर जाँच पूरी कर न्यायालय में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। 

फ़ैसला सुनाते हुए न्यायाधीश ने कहा कि महज़ 6 साल की मासूम बच्ची के साथ जिस तरह की बर्बरता की गई, उसका समाज पर बड़े स्तर पर ग़लत प्रभाव पड़ा। ऐसी जघन्य घटना की वजह से समाज में लोग अपने छोटे-छोटे बच्चों को स्वतंत्रतापूर्वक खेलने की छूट नहीं दे पाते। ऐसा इसलिए क्योंकि लोगों के मन मे हमेशा ये डर बना रहता है कि कहीं उनके बच्चों के साथ कोई लैंगिक या यौन अपराध न कर दे। इस वजह से देश की नई पीढ़ी यानी छोटे बच्चों का सर्वांगीण विकास नहीं हो पा रहा है।

उन्होंने अराफात को फाँसी की सज़ा सुनाते हुए इस मामले को रेयरेस्ट ऑफ़ रेयर मानते हुए कहा कि मृतका घटना के समय महज़ 6 साल की थी। वो किसी तरह का प्रतिरोध करने में सक्षम नहीं थी। घटना के समय उस बच्ची ने ढंग से दुनिया भी नहीं देखी थी। उसके साथ ऐसा अपराध किया गया जिसकी सभ्य समाज में कल्पना भी नहीं की जा सकती।

बच्ची की माँ का कहना था कि उन्हें इतने कम समय में दोषी को सज़ा सुनाए जाने की उम्मीद नहीं थी। उन्होंने कहा कि सरकार के निर्देश पर पुलिस ने जो काम किया है उसे वो पूरी ज़िंदगी कभी नहीं भूलेंगी। उन्होंने बताया कि उनके पति दिहाड़ी मज़दूर हैं। पिछले दो दिनों से ख़राब मौसम के चलते बच्ची के पिता काम पर नहीं जा सके थे। 200 रुपए उधार लेकर उन्होंने बच्ची की माँ और बुआ को दिए थे, तब वह कोर्ट पहुँच पाईं।

फाँसी की सज़ा पाए अराफात ने बच्ची के साथ जो बर्बरता की थी, वो बहुत भयावह थी। हैवानियत की हद पार करते हुए पहले बच्ची का बलात्कार किया और फिर उसके गले में चाकू घोंपकर उसकी हत्या कर दी। इसके बाद उसने बच्ची को अपने घर के तख़्त के नीचे छिपा दिया। बच्ची अराफात को मामू कहती थी।

मासूम बच्ची के परिजन वो दिन कभी नहीं भूल पाएँगे जब उसके साथ ऐसी घिनौनी हरक़त को अंजाम दिया गया था। 15 सितंबर 2019 को अराफात बच्ची को टॉफ़ी दिलाने के बहाने अपने घर ले गया था। वहाँ ले जाकर उसने बच्ची का बलात्कार किया और फिर उसके गले में चाकू घोंपा। इतने पर भी उसकी दरिंदगी ख़त्म नहीं हुई, उसने बच्ची का गला दबाया, जिससे वो निश्चिंत हो सके कि वो सच में मर गई है।

अरफात इतना शातिर था कि मासूम की हत्या करने बाद वो उसके पिता के साथ उसे ढूँढ भी रहा था, जिससे उस पर किसी को कोई शक़ न हो। अराफात के जघन्य अपराध का ख़ुलासा होने के बाद जब पता चला कि बच्ची उसी के घर में हैं, तो पुलिस और परिजन बच्ची को ट्रामा सेंटर ले गए, जहाँ डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया।

रेप केस में जमानत पर आए महबूब, जमील, फिरोज सहित 6 ने पीड़िता की माँ को सबके सामने मार डाला, Video Viral

6 साल की मासूम से रेप और हत्या मामले में नाजिल को फाँसी की सज़ा, तेज़ाब डालकर जला दिया था शव

6 साल की बच्ची से रेप, गला दबाकर हत्या: महिला जज ने सुनाई फाँसी की सज़ा, हत्यारे को पछतावा नहीं

अम्मी का मर्डर कर पूरी रात लाश के साथ सोया सोहेल, सुबह गहने बेच गर्लफ्रेंड के लिए खरीदी चूड़ियाँ

बीते महीने मुंबई पुलिस को एक महिला की लाश मिली थी। इस महिला की पहचान 53 वर्षीय बदरुन्निशा मुहम्मद शफी शेख के तौर पर की गई है। उसकी हत्या की गुत्थी पुलिस ने सुलझा ली है। बदरुन्निशा की हत्या उसके 33 साल के बेटे सोहेल शेख ने ही की थी।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार अम्मी की हत्या करने के बाद सोहेल पूरी रात लाश के साथ सोया रहा। सुबह दरगाह जाकर माफी मॉंगी। फिर अम्मी के जेवर बेचकर जो पैसे मिले उससे गिरवी रखी अपनी स्कूटी छु​ड़ाई और बचे हुए पैसों से गर्लफ्रेंड के लिए चूड़ियॉं खरीदी।

सोहेल ने पुलिस को बताया कि 28 दिसंबर की रात बहस होने के बाद उसने अपनी अम्मी का कत्ल कर दिया था। शराब के नशे में सोहेल गला दबाकर अम्मी की हत्या की फिर शव के टुकड़े कर फेंक दिए। उसने बताया कि वह बेरोजगार था और उसे शराब पीने की लत थी। कुछ महीने पहले पत्नी उसे छोड़कर चली गई थी। इस बात को लेकर अम्मी से अक्सर उसकी बहस हो जाती थी।

उसने बताया कि हत्या के बाद रात भर अम्मी की लाश के साथ सोता रहा। पछतावा होने के बाद दरगाह जाकर माफी मॉंगी। अगले दिन 40 हजार रुपए में मॉं के जेवर बेचे। पैसों से पहले स्कूटी ली। फिर 25 हजार रुपए लेकर चेंबूर गया और गर्लफ्रेंड के लिए चूड़ियॉं खरीदी।

सीसीटीवी फुटेज की पड़ताल कर पुलिस सोहेल के घर पहुॅंची। पुलिस ने उसे हिरासत में लेकर पूछताछ की तो वह टूट गया और अपना जुर्म कबूल कर लिया। उसने बताया कि हत्या के बाद शव ठिकाने लगाने का उसे कोई रास्ता नहीं दिख रहा था। फिर क्राइम आधारित टीवी शो से उसे शव को टुकड़े-टुकड़े कर फेंकने का विचार आया। अम्मी की लाश के उसने टुकड़े किए और उन्हें अलग-अलग स्थानों पर फेंक दिया।

पीड़िता का धड़ 30 दिसंबर को विद्याविहार में किरोड रोड से बरामद हुआ था। अगले दिन घाटकोपर में कूड़े के डिब्बे से रेक्जिन शीट में लिपटे पैर बरामद हुए। 4 जनवरी को पुलिस को सांताक्रुज-चेंबूर लिंक रोड पर एक पुल के नीचे से सिर मिला। उन्होंने बताया कि तीनों स्थलों पर लगे सीसीटीवी फुटेज से शेख की पहचान हुई। बाद में उसके पड़ोसियों ने बताया कि उसकी मॉं कई दिनों से लापता है। शेख ने अपनी बहन को बताया कि मॉं दिल्ली गई है।

पुलिस ने बताया कि आरोपी शेख 2018 तक कुवैत में नौकरी करता था। वहॉं से लौटने के बाद से वह बेरोजगार था। नौकरी न मिलने पर मॉं से बहस करता रहता था। वह शराब भी पीने लगा था। उसकी अम्मी ब्यूटीशियन का काम करती थी। साथ ही पड़ोस में टिफिन सर्विस भी देती थी।

फिल्म, गाँजा और समलैंगिक सेक्स: तनवीर कुरैशी की तीसरी डिमांड पूरी नहीं करने पर शुभांकर की हत्या

17 साल की गोद ली गई बेटी, बाप पर यौन शोषण का आरोप और प्राइवेट पार्ट कटी हुई लाश: मुंबई केस सॉल्व