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‘हिंदू शब्द से ही देश में कुछ लोगों को एलर्जी, जो बिल्‍कुल सही नहीं, ऐसे लोगों की हम कोई सहायता नहीं कर सकते’

उपराष्ट्रपति एम वेंकैया नायडू ने रविवार (जनवरी 12, 2019) को कहा कि भारत में कुछ लोगों को हिन्दू शब्द से ही एक अलग तरह की एलर्जी है और लोगों के बीच मतभेद खड़ी करने वाली इस दीवार को गिराने की जरूरत है। नायडू रविवार को स्वामी विवेकानंद जयंती के मौके पर आयोजित ‘श्री रामकृष्ण विजयम’ के शताब्दी समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान उन्होंने किसी का नाम लिए बगैर कहा कि देश में कुछ लोगों को हिन्दू शब्द से चिढ़ है।

उन्होंने कहा कि यद्यपि यह ठीक नहीं है, लेकिन हम उनकी कोई सहायता नहीं कर सकते हैं। उनके पास अपने विचार रखने का अधिकार है, लेकिन वे सही नहीं हैं। नायडू ने कहा कि नागरिकता संशोधन कानून (CAA) पाकिस्तान, अफगानिस्तान और बांग्लादेश में धार्मिक रूप से प्रताड़ित अल्पसंख्यकों को भारतीय नागरिकता देने के लिए है। उन्होंने कहा कि धर्मनिरपेक्षता का मतलब दूसरे धर्मों का अपमान या तुष्टीकरण करना नहीं, बल्कि धर्मनिरपेक्ष संस्कृति भारतीय लोकाचार का एक हिस्सा है।

उपराष्ट्रपति ने कहा कि लंबे समय तक भारत ने कई प्रताड़ित लोगों को आश्रय दिया है और कई को शरण दी है। उन्होंने कहा कि हिंदू एकमात्र धर्म है जो कहता है कि सभी धर्म सही हैं। यह इसकी महानता और इसकी खूबसूरती है। नायडू ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने भी यह कहा था कि वह ऐसे राष्ट्र से ताल्लुक रखते हैं जिसने धरती के सभी देशों के प्रताड़ित एवं शरणार्थियों को शरण दी है।

वेंकैया नायडू ने नागरिकता कानून के विरोध का स्पष्ट तौर पर संदर्भ देते हुए कहा कि अब भी हम प्रताड़ित लोगों को स्वीकार करने के लिए तैयार हैं भले ही कुछ लोग इसे विवादित बनाने की कोशिश कर रहे हों। उन्होंने कहा कि यह हमारी संस्कृति, हमारी धरोहर है। हमारे पूर्वजों ने हमें यही बताया है। 

नागरिकता संशोधन कानून को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों की ओर से विरोध किए जाने के परिप्रेक्ष्य में उन्होंने कहा, ‘‘हम उन लोगों को स्वीकारने के लिए तैयार हैं, जो प्रताड़ना के शिकार हैं, लेकिन कुछ लोग इसे विवादास्पद बनाने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हम सर्वधर्म सद्भावना का अनुसरण करते हैं, जो हमारे खून में है और हमारी तहजीब का हिस्सा है। हम सभी को हिंदू धर्म से जुड़ी अवधारणाओं, उपदेशों और परंपराओं को एक सही परिप्रेक्ष्य में समझना चाहिए।’’

120 केले खिला कर 7 अफ़ग़ानी तस्करों को करवाई टट्टी: निकले ₹10 करोड़ के 177 हेरोइन कैप्सूल

दिल्ली एयरपोर्ट पर अफ़ग़ानिस्तान के 7 तस्करों को गिरफ़्तार किया गया है। इन अफ़ग़ान नागरिकों से हेरोइन के 177 कैप्सूल मिले हैं। दरअसल, आइजीआइ एयरपोर्ट पर धर-दबोचे गए ये तस्कर बड़ी चालाकी से हेरोइन की तस्करी करते थे। ये सभी हेरोइन के कैप्सूलों को एक ख़ास तेल और शहद के साथ निगल जाया करते थे। इसके बाद वो दिल्ली में जिस होटल में रुकते थे, वहाँ जाकर मल के साथ इन कैप्सूलों को बाहर निकाल लेते थे। अर्थात, मुँह से निगले गए कैप्सूलों को गुदाद्वार से बाहर निकाल कर उसकी सप्लाई की जाती थी।

दिल्ली पुलिस को इन तस्करों द्वारा निगले गए कैप्सूलों को प्राप्त करने के लिए कड़ी मशक्कत करनी पड़ी। अधिकारियों ने बताया कि हिरासत में लिए गए सातों तस्करों को 120 केले खिलाए गए, तब जाकर पिछले कुछ दिनों में उनके पेट से ये कैप्सूल बाहर निकले। पुलिस ने पहले ही उनके शरीर की एक्सरे जाँच कर ली थी, जिसके बाद पता चला था कि उन्होंने ड्रग्स को अपने पेट में छिपा कर रखा हुआ है। ‘नारकोटिक्स कण्ट्रोल ब्यूरो’ ने सभी ड्रग्स को जब्त कर लिया है।

ये पूरी प्रक्रिया एक दिन में पूरी नहीं हुई, इसमें कई दिन लगे। इन सातों के अलावा दिल्ली में रह रहे दो अन्य अफ़ग़ान नागरिकों को भी गिरफ़्तार किया गया। ये दोनों हेरोइन के कैप्सूलों की खेप को तस्करों से प्राप्त कर के उसे भारतीय बाजार में बेचते थे। ये दोनों ‘रिसीवर’ थे और एयरपोर्ट से गिरफ़्तार किए गए सातों ‘कैरियर’ थे। इस तरह से हेरोइन तस्करी के मामले में कुल 9 अफ़ग़ान नागरिकों को गिरफ़्तार किया गया है।

सातों ‘कैरियर’ तस्कर अफ़ग़ानिस्तान और दिल्ली के बीच अपनी हवाई यात्रा के दौरान फ्लाइट में कुछ भी खाते-पीते नहीं थे। कुछ दिनों पहले पुलिस को गुप्त सूचना मिली, जिसके बाद ये कार्रवाई की गई। गिरफ़्तार तस्करों के नाम यूसुफजई रहमतुल्लाह, फैज़ मुहम्मद नबीज़ादा हबीबुल्ला, अहमदी अब्दुल वदूद, फज़ल अहमद, नूरजई कबीर और तुर्कमान अब्दुल हामिद शामिल हैं। वजन के हिसाब से देखें तो फैज़ ने सबसे ज्यादा 304 ग्राम के 38 कैप्सूल निगल रखे थे जबकि तुर्कमान ने सबसे कम 142 ग्राम के 18 कैप्सूल निगल रखे थे। यूसुफजई ने 215 ग्राम के 28 कैप्सूल, हबीबुल्लाह और अहमदी ने 225 ग्राम के 15, कबीर ने 250 ग्राम के 26 और फज़ल ने 262 ग्राम के 37 कैप्सूल निगल रखे थे।

इन सारे कैप्सूलों को जब्त कर लिया गया है। सबसे बड़ी बात कि किसी भी आरोपित के सामानों की जाँच के दौरान उनमें कुछ भी ऐसा नहीं मिला, जिससे पुलिस या एयरपोर्ट के जाँचकर्ताओं को शक हो सकता था। हालाँकि, उनकी गतिविधियाँ संदिग्ध लग रही थीं। एनसीबी के जोनल डायरेक्टर केपीएस मल्होत्रा ने बताया कि उनके पेट से निकाले गए सभी पदार्थ विदेशी हैं। हायतुल्लाह और मसूद मुहम्मद दोनों रिसीवरों के नाम हैं। सात आरोपितों को पूरे एक सप्ताह हॉस्पिटल में रखा गया था।

एनसीबी नेक्रो-टेरर नेटवर्क के ख़िलाफ़ बड़ा अभियान चला रही है। इसे आतंकवाद के अंतर्गत इसीलिए रखा गया है क्योंकि इसके अधिकतर सरगना विदेशी इस्लामिक मुल्क़ों में बैठे आतंकी हैं। सभी गिरफ़्तार 9 लोग कंधार में बैठे तालिबानी आतंकी सरगना के लिए कार्य कर रहे थे, ऐसी आशंका जताई गई है। जब्त किए गए ड्रग्स की क़ीमत 10 करोड़ रुपए आँकी गई है। इसे अफ़ग़ानिस्तान से भारत लाने के लिए एक ‘कैरियर’ को प्रति ट्रिप 50,000 से 1.5 लाख रुपए तक मिलते हैं।

ये सभी अफ़ग़ान तस्कर नाइजीरियाई तस्करों के साथ मिल कर काम करते हैं। अफ्रीकन ‘रिसीवर’ इन ड्रग्स के बदले जो रुपए देते हैं, उनका इस्तेमाल भारतीय उपमहाद्वीप में आतंकी वारदातों को अंजाम देने के लिए किया जाता है। एनसीबी ने जाँच के लिए तीन सदस्यीय टीम गठित की है।

हिन्दुओं के 18 घरों को बनाया गया निशाना, फूँक दी गई गाड़ियाँ: ‘इज्तेमा’ में शामिल मुस्लिमों पर लगा आरोप

तेलंगाना के भैंसा में हिन्दुओं-मुस्लिमों के बीच तनाव भड़कने की ख़बर आई है। रविवार (जनवरी 12, 2020) की आधी रात को एक समुदाय ने दूसरे समुदाय की गाड़ियों में आग लगा दिया। दरअसल, अभी तक इस मामले का मूल कारण नहीं पता चल सका है। मीडिया में चल रही ख़बरों के अनुसार, भैंसा में कुछ लोग अपने बाइक का साइलेंसर निकाल कर फर्राटे भर रहे थे, जिससे दूसरे समुदाय के कुछ लोगों ने आपत्ति जताई। इसके बाद पहले समुदाय की गाड़ियों को फूँक डाला गया

सोशल मीडिया पर लोगों ने इस घटना के कई वीडियो शेयर किए। एक वकील ने सोशल मीडिया पर इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मुस्लिमों ने हिन्दुओं के 18 घरों को लूट लिया और कई गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया। मीडिया रिपोर्ट्स में दोनों तरफ़ से पत्थरबाजी की बात कही जा रही है लेकिन एक पूर्व-बैंकर ने इस घटना को लेकर बड़ा दावा किया है। उसने बताया कि ‘इज्तेमा’ के कारण कई बाहरी लोग इस इलाक़े में आए हुए थे। बता दें कि इज्तेमा में हज़ारों-लाखों की संख्या में मुस्लिम जुटते हैं और अपने मजहबी रीति-रिवाज वगैरह को पूरा करते हैं।

सोशल मीडिया पर कई दिनों से ‘इज्तेमा’ को लेकर पोस्ट्स शेयर किए जा रहे थे। फेसबुक पर शेयर किए गए पोस्ट्स में लगातार अपील की जा रही थी कि लोग 11 व 12 जनवरी को ‘इज्तेमा’ में भारी संख्या में सम्मिलित हों। बताया गया था कि ‘इज्तेमा’ का कार्यक्रम निर्मल जिले में होगा।

‘द न्यूज़ मिनट’ की ख़बर के अनुसार, बी बोजन्ना नामक स्थानीय निवासी ने बताया कि उन्हें रात को काफ़ी शोरगुल सुनाई दिया और जब वो सुबह उठे तो उनकी बाइक क्षतिग्रस्त थी। उन्होंने कहा कि उनके घर के ऊपर भी जम कर पत्थरबाजी की गई। हिंसा भड़कने की ख़बर के बाद इलाक़े में भारी पुलिस बल की तैनाती कर दी गई है और एसपी ख़ुद क्षेत्र में कैम्प कर रहे हैं। जिले में इंटरनेट सर्विस भी ठप्प कर दी गई है, ताकि अफवाहों के कारण कोई वारदात न हो।

भाजपा ने आरोप लगाया है कि असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी एआईएमआईएम ने लोगों को भड़का कर हिंसा को बढ़ावा दिया। भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव पी मुरलीधर राव ने कहा कि ओवैसी की पार्टी पिछले कई दिनों से इलाक़े में गुटबंदी कर के हिंसा की साज़िश रच रही थी। उन्होंने दावा किया कि राज्य की सत्ताधारी पार्टी टीआरएस ने भी एआईएमआईएम की करतूतों में पूरा सहयोग दिया। इस हिंसा में अब तक 11 लोगों के घायल होने की ख़बर है। भैंसा तेलंगाना के निर्मल जिले में स्थित है।

घायलों में तीन पुलिस के अधिकारी भी शामिल हैं। इलाक़े में कर्फ्यू लगा कर स्थिति को नियंत्रित किया गया। पुलिस क्षेत्र की लगातार पेट्रोलिंग कर रही है। घायलों में से 10 को इलाज के बाद डिस्चार्ज कर दिया गया है। 2008 में इसी इलाक़े में एक मस्जिद के आगे हिंसा भड़क गई थी। दुर्गा पूजा के विसर्जन के दौरान जुलुस जैसे ही मस्जिद के पास पहुँचा, हिंसा भड़क गई।

तेलंगाना स्थित निज़ामाबाद के सांसद अरविन्द धर्मपुरी ने भी आरोप लगाया कि आगजनी व पत्थरबाजी करने वाली हिंसक भीड़ ने हिन्दुओं की संपत्ति व उनके घरों को निशाना बनाया। उन्होंने स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि पुलिस भी एआईएमआईएम के साथ है क्योंकि उसे केसीआर की पार्टी का समर्थन प्राप्त है। उन्होंने गृह मंत्री अमित शाह से इस मामले में कार्रवाई करने की अपील की।

वो ISIS आतंकी जिसने की थी इंदिरा गाँधी से लव मैरिज, जिहाद के लिए दिया तलाक… क्योंकि वो हिंदू थी

दिल्ली पुलिस स्पेशल सेल और सेंट्रल एजेंसियों ने दिल्ली से बीते दिनों जिन तीन ISIS आतंकियों को गिरफ्तार कर बड़ी आतंकी साजिश का खुलासा किया, उनमें एक नाम खाजा मोइनुद्दीन का है। मोइनुद्दीन पेशे से कबाड़ी था। लेकिन आईएस से जुड़ने के बाद वो युवाओं को बरगलाकर अपने साथ शामिल करने लगा था। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मोइनुद्दीन से पड़ताल के दौरान इस तथ्य के अलावा कई चौंकाने वाले खुलासे हुए। बताया जा रहा है कि 10वीं तक पढ़ाई करने वाले खाजा ने शुरुआती दिनों में ‘इंदिरा गाँधी’ नामक हिंदू लड़की से लव मैरिज की थी। लेकिन, देखते ही देखते खाजा का आईएसआईएस की ओर झुकाव होने लगा और वो आतंक के रास्ते पर चलने लगा। मोइनुद्दीन ने ‘जिहाद’ का रास्ता अपनाते ही अपनी पत्नी को तलाक दिया। उसने ऐसा इसलिए किया, क्योंकि वो हिंदू थी।

इसके बाद उसने साल 2014 में तमिलनाडु के कुड्डालूप में दलित समुदाय के लोगों को जबरदस्ती इस्लाम कबूल करवाया। फिर नेल्लीकप्पम इलाके में ट्रेंनिंग कैंप खोला और अपने साथ शामिल लोगों को हथियार चलाने की ट्रेनिंग देने लगा। साल 2014 में उसने हिंदू मुनानी नेता केपी सुरेश कुमार की हत्या कर दी। वो भी इसलिए क्योंकि हिंदू नेता ने इस्लाम के पैगंबर मोहम्मद का मजाक उड़ाते हुए कमेंट किया था। साथ ही इस्लाम पर टिप्पणी की थी। इस बात से खाजा काफी गुस्से में आ गया था। फिर प्लानिंग के तहत उसने तीन लड़कों का पहले ब्रेनवॉश किया, उन्हें आतंकी बनाया, फिर केपी सुरेश की हत्या करवाई।

हालाँकि, हत्या का खुलासा होते ही पुलिस ने खाजा समेत सभी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। लेकिन आतंकी मनसूबे के साथ खाजा ने जेल में भी जिहाद के लिए अपना काम करना शुरू कर दिया। बताया जा रहा है उसने जेल में ही आतंकी मॉडयूल तैयार कर लिया था। जिसके बाद साल 2015 में सलेम (Salem) जेल में जब वह बंद था, तो उसने जेलर पर हमला करवा दिया और जेलर को काफी देर तक बंधक बनाकर रखा।

इतना ही नहीं, कहा जा रहा है अपने शुरुआती दिनों में 10वीं पास करने के बाद खाजा ने कम्यूनिस्ट संगठन ज्वाइन किया था। और बाद में वह साउथ इंडिया के कट्टरपंथी संगठन एमएनपी में शामिल हो गया। एमएनपी के बारे में बता दें कि ये समूह बाद में पीएफआई में शामिल हो गया था। मोइनुद्दीन आईएस प्रभावित नौजवानों को अपने साथ जोड़ने के लिए भड़काऊ भाषण वाले वीडियो तैयार करता था और छोटे-छोटे आयोजन कर उनके संपर्क में रहता था। उसने तमिलनाडु में आईएस की कमान संभाल रखी थी। 

जानकारी के मुताबिक खाजा पर NIA समेत आईबी और सेंट्रल एजेंसियों की लगातार नजर बनी हुई थी। खाजा जेल से छूटने के बाद लगातार नया मॉड्यूल तैयार करने में जुटा था। लेकिन, विदेशी हैंडलरों के साथ। मगर, एजेंसियों ने कोई बड़ी घटना घटने से पहले इसके मनसूबों को ट्रैक कर लिया। इसके बाद खाजा फरार हो गया था और दिल्ली समेत कई राज्यों में आतंकी वारदात को अंजाम देने की तैयारी कर रहा था। बाद में कुछ दिनों पहले इसके साथियों के साथ इसे दिल्ली से और एक को गुजरात से गिरफ्तार किया गया।

बता दें कि फिलहाल खाजा के 2 साथी कन्याकुमारी में इंस्पेक्टर विल्सन की हत्या करने के बाद से फरार हैं। जिनकी लगातार तलाश की जा रही है। खाजा पुलिस के सामने आसानी से जुबान नहीं खोल रहा है। जाँच एजेंसियों का दावा है कि आने वाले दिनों में कई बड़े एनजीओ जो आतंकी फंडिंग करते हैं और खाजा के नेटवर्क से जुड़े हैं, साथ ही कई आतंकी मॉडयूल का खुलासा होगा।

‘The Wire’ की पत्रकार आरफा खानम को लोगों ने समझाया जर्मनी-भारत का फर्क, कहा- हिटलर के विरोध के बाद…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तुलना जर्मन तानाशाह एडॉल्फ हिटलर से करना हमेशा से ही लिबरलों का पसंदीदा टॉपिक रहा है और जो कोई भी ‘सेकुलर लिबरलों’ के इस विचार से असहमत होता है, उसे ‘नाजी एनबलर’ (Nazi enabler) करार दे दिया जाता है। पीएम मोदी ने 2014 के अपने दूसरे कार्यकाल में प्रचंड बहुमत और बड़े जनादेश के साथ वापसी की। इसके बाद से बयानबाजी और भी ज्यादा बढ़ गई है।

द वायर की पत्रकार आरफा खानम शेरवानी ने रविवार को ट्विटर पर लिखा, “1930 के नाजी जर्मनी और वर्तमान समय के भारत के बीच क्या अंतर है?”

एक ट्विटर यूजर ने 1930 के जर्मन और अभी के भारत के बीच का अंतर बताते हुए लिखा, “1930 के जर्मनी में सरकार का विरोध करने के बाद एक दिन भी जिंदा नहीं बचती, जबकि 2020 के भारत में तुम सरकार की छवि को लगातार धूमिल कर रही हो।”

हालाँकि नेटिजन्स ने उनकी जिज्ञासा को शांत करने में भरपूर मदद की। उन्होंने आरफा को न केवल यह बताया कि उनका इस तरह से तुलना करना त्रुटिपूर्ण है, बल्कि उन्होंने वामपंथी पत्रकार को यह भी समझाया कि कैसे भारत नाजी जर्मनी के एकदम विपरीत है।

शशांक नाम के एक अन्य यूजर ने आरफा की जानकारी को सही करते हुए लिखा कि जर्मनी के लोग विरोध नहीं कर सके। जैसे ही उन्होंने इसका प्रयास किया, उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। जबकि भारत में अभी भी लोकतंत्र है। संविधान आपको विरोध करने का अधिकार देता है। भारत और जर्मनी के बीच समानताएँ दर्शाना मूर्खता है।

कुछ लोगों ने उन्हें यह भी बताया कि कैसे भारत में दूसरे समुदाय का डर निराधार है।

वहीं कुछ लोगों ने जर्मनी के यहूदियों की दुर्दशा और सर्वनाश की तुलना भारत के अल्पसंख्यकों से करना अपमानजनक बताया। क्योंकि भारत के अल्पसंख्यक न केवल यहाँ सुरक्षित हैं, बल्कि समान अधिकार का भी लाभ उठा रहे हैं और कभी-कभी तो ये समान अधिकार से भी अधिक लाभ उठा लेते हैं।

एक यूजर ने दोनों के बीच के अंतर बताते हुए लिखा, “1930 के जर्मनी में विपक्ष और अल्पसंख्यक कंसंट्रेशन कैंप में रहते थे, जबकि भारत में आप जैसे अल्पसंख्यक नेशनल टीवी पर नफरत फैलाते हो और पेरिस में छुट्टियाँ मनाते हो, न कि कंसंट्रेशन कैंप में।”

एक अन्य यूजर ने लिखा, “आंटी जर्मन तानाशाह से किस बेस पर भारत के चुने हुए लोकप्रिय प्रधानमंत्री की तुलना कर रही हो? आंटी 1930 पर पहुँच गई 1975 याद नहीं? जब पत्रकारों सामाजिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को जेल में ठूँस दिया, क्या आपने कभी 1975 इमरजेंसी लगाने वाली प्रधानमंत्री की तुलना जर्मनी के तानाशाह से की?”

एक ने लिखा, “जिस दिन फर्क समझ में आ जाएगा उस दिन सही मायने में पत्रकार बन जाओगी जेहादन बी।’ एक अन्य ने लिखा, “मोहतरमा जितनी आलोचना वामी और आप जैसे लोग मौजूदा सरकार की करते हैं और सुरक्षित हैं और मुक्त हैं यह अंतर हैं और मोहतरमा नाजी सरकार तक ना जाएँ इंदिरा गाँधी की आलोचना करने वालों का हश्र याद कर लें।”

ट्विटर यूजर ने यह भी बताया कि शायद भारत में एकमात्र घटना, जिसकी कुछ हद तक यहूदियों के सर्वनाश से तुलना की जा सकती है, वो है इस्लामियों द्वारा कश्मीरी पंडितों का पलायन। इस्लामियों ने 1990 के दशक में घाटी में रेप किया, हत्या किया और कश्मीरी पंडितों को उनके घर से भगा दिया। या फिर 1984 का वो सिख विरोधी दंगा। जहाँ कॉन्ग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने इंदिरा गाँधी की हत्या का बदला लेने के लिए सिखों का नरसंहार कर दिया।

‘Behen Ki Lohri’ हिन्दुओं व सिखों के त्योहार का उड़ाया मजाक, कंगना की बहन को बोला था ‘चांडाल’

ख़ुद को स्टैंड-आप कॉमेडियन बताने वाले अतुल खत्री ने हिन्दुओं और सिखों के महत्वपूर्ण त्योहार लोहड़ी का सोशल मीडिया पर मज़ाक उड़ाया। हालाँकि, कई लोगों को खत्री की बात अश्लील भी लगी और उन्होंने इस पर आपत्ति जताई। ख़ुद को ‘यूट्यूब पर्सनालिटी’ के रूप में प्रचारित करने वाले अतुल खत्री ने लोहिड़ी को लेकर ट्विटर पर लिखा कि वो इस त्यौहार को मनाने के लिए अपनी बहन के यहाँ जा रहे हैं। उन्होंने आगे लिखा कि वो दरअसल ‘बहन की लोहड़ी (Behen Ki Lohri)’ में जा रहे हैं।

कई लोगों को अतुल द्वारा ‘बहन की लोहड़ी’ लिखना अश्लील लगा और उन्होंने कथित स्टैंड-अप कॉमेडियन को लताड़ने में देर नहीं लगाई। ऋषि बागरी ने इस ट्वीट के रिप्लाई में लिखा- “बहन हम शर्मिंदा हैं, ये भाई के वेश में दरिंदा है।” ज्ञात हो कि अतुल की बहन अंजलि छाबरिया जानी-मानी साइक्रेटिस्ट हैं। कई लोगों ने सोशल मीडिया पर अतुल की तरफ़ से अंजलि से माफ़ी माँगी। एक ट्विटर यूजर गीतांजलि ने अतुल को सलाह दी कि वो मज़ाक के नाम पर कुछ भी ‘बकवास उलटी’ न करें।

बता दें कि लोहड़ी का त्योहार प्रतिवर्ष 13 जनवरी को मनाया जाता है। यह त्योहार ख़ासकर पंजाब के हिन्दुओं व सिखों में ख़ासा लोकप्रिय है। ‘मकर संक्रांति’ की तरह ही लोहड़ी को लेकर भी मान्यता है कि इसके बाद से ठण्ड के मौसम का अंत होने लगता है और सूर्य उत्तरायण हो जाते हैं। लोहड़ी मनाने के लिए लोग लकड़ियों में आग लगाते हैं और उसके चारों तरफ पारम्परिक नृत्य भी करते हैं। ये फसलों की कटाई का भी समय होता है, ऐसे में ये त्योहार किसानों के लिए भी महत्वपूर्ण है। दिन में बच्चे लोकगीत गाते हुए घर-घर जाते हैं, जहाँ से उन्हें कई गिफ्ट मिलते हैं, जिसे ‘लोहड़ी’ भी कहा जाता है।

कथित स्टैंडअप कॉमेडियन अतुल खत्री इससे पहले अभिनेत्री कंगना रनौत की बहन रंगोली का भी मजाक उड़ा चुके हैं। उन्होंने एसिड अटैक को लेकर बात करते हुए रंगोली को ही भला-बुरा कहा था जबकि वो रंगोली ख़ुद एसिड अटैक की पीड़िता रह चुकी हैं।

तुम ‘दैनिक भास्कर’ से भी सस्ती बिकती हो: फ़िल्म निर्देशक ने मज़ाक-मज़ाक में स्वरा को जम कर लताड़ा

चू#$या… 4 साल के बच्चे को यही गाली दी थी स्वरा भास्कर ने, अब बोली – ‘मैं तो मज़ाक कर रही थी’

₹10 करोड़ का घर, रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी और ED द्वारा कब्जे की माँग: बीकानेर जमीन घोटाले से जुड़ा है तार

यूपीए अध्यक्ष सोनिया गाँधी के दामाद और कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गाँधी के पति रॉबर्ट वाड्रा पर ईडी का शिकंजा दोबारा कसता नजर आ रहा है। हाल ही में, प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने दिल्ली के सुखदेव विहार में एक मकान के कब्जे की माँग की। जिसका स्वामित्व रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी के पास है। ईडी ने आरोप लगाया कि इस मकान का बीकानेर जमीन घोटाले वाले अपराध को अंजाम देने में सीधा संबंध है। जिसका उल्लेख ईडी ने अपनी रिपोर्ट में पहली बार साल 2019 के फरवरी महीने में किया था।

बता दें कि ताजा जानकारी के अनुसार इस मामले में ईडी ने धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए) न्यायाधिकरण में अर्जी दायर कर अपील की है कि वह रॉबर्ट और उनकी कंपनी (Sky Light Hospitality Pvt) के ख़िलाफ़ चल रही जाँच पर लगाई गई रोक को वापस लें। जिसके संबंध में उन्होंने आदेश पिछले साल अगस्त में दिया था।

इकॉनामिक्स टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ईडी द्वारा दायर एप्लीकेशन उन्होंने खुद देखी। जिसमें एजेंसी ने साफ कहा है कि उन्होंने संपत्ति को इसलिए कुर्क किया, ताकि आरोपित को उस संपत्ति का लाभ उठाने से रोका जा सके। इसके अलावा उस एप्लीकेशन में ये भी साफ है कि एजेंसी वाड्रा की कंपनी के साथ कोई समझौता नहीं करेगी। ऐसा इसलिए, क्योंकि इससे पहले एक शख्स इसके लिए उनसे सम्पर्क करने कोशिश कर चुका है।

ईडी के अनुसार बता दें सुखदेव विहार स्थित इस मकान को 10 करोड़ में खरीदा गया था। जिसमें से 4.43 करोड़ वाड्रा की कंपनी ने दिए थे। इसलिए अगर ट्रिब्यूनल अपने आदेश को वापस ले लेती है, तो ईडी अपनी बची हुई जाँच पूरी कर पाएगा। क्योंकि वाड्रा लगातार बीकानेर लैंड घोटाले में अपनी भूमिका से मना कर रहे हैं।

गौरतलब है कि इस मामले में ईडी का आरोप है कि संपत्ति के ख़िलाफ़ जाँच करने पर रोक लगाना पीएमएलए के प्रावधानों के ख़िलाफ़ है। उनके अनुसार ट्रिब्यूनल PMLA के अंतर्गत बनाया गया कानूनी अंग का हिस्सा है। जो नियम और कानूनों के अंतर्गत काम करने के लिए बाध्य है। लेकिन, ट्रिब्यूनल ने ‘स्कॉई लाइट हॉस्पिटेलिटी’ (रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी) को फायदा पहुँचाने के लिए जाँच पर रोक लगाई।

रॉबर्ट वाड्रा बीमार: विदेश में कराएँगे इलाज, कोर्ट ने 2 हफ्ते के लिए दी इजाजत

प्रियंका की सुरक्षा में ‘सेल्फी वाली’ चूक रॉबर्ट वाड्रा के लिए बलात्कार, यौन अपराध जैसे?

जमीन घोटालों के आरोपित रॉबर्ट वाड्रा अस्पताल में भर्ती: पीठ-पैर में है दर्द, रात भर साथ रहीं प्रियंका

रिपब्लिक के पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की कर चुकी है वामपंथियों को कोचिंग देने वाली ‘इंडिया टुडे’ की तनुश्री

रविवार (जनवरी 12, 2020) को ऑपइंडिया ने ‘इंडिया टुडे’ के पत्रकार के वायरल वीडियो को लेकर एक ख़बर प्रकाशित की थी। उस वीडियो में देखा जा सकता है कि पत्रकार तनुश्री पांडेय जेएनयू के सर्वर रूम में वामपंथी छात्रों को सिखाती हुई दिख रही हैं कि उन्हें कैमरे के सामने क्या बोलना है? अपने फ़र्ज़ी स्टिंग ऑपरेशन को लेकर ‘इंडिया टुडे’ पहले से ही विवादों में है। चैनल वामपंथी छात्रों को पीड़ित व निर्दोष साबित करने के लिए पूरा जोर लगा रहा है। चैनल ने 5 दिसंबर को जेएनयू में हुई हिंसा में एबीवीपी के छात्रों को दोषी साबित करने के लिए दिन-रात एक कर दिया है।

अब सामने आया है कि ‘इंडिया टुडे’ की तनुश्री पांडेय जेएनयू छात्र संगठन की अध्यक्ष आईसी घोष के साथ मिल कर ‘रिपब्लिक टीवी’ के पत्रकार के साथ धक्का-मुक्की की थी। पत्रकार तनुश्री, वामपंथी छात्र नेता आईसी व अन्य वामपंथी छात्रों ने ‘रिपब्लिक टीवी’ के पत्रकार के साथ सिर्फ़ इसीलिए धक्का-मुक्की की थी क्योंकि उसने कुछ सवाल पूछे थे। ये घटना नवंबर 20, 2019 की है, जब जेएनयू में हॉस्टल फी बढ़ाने को लेकर हंगामा चल रहा था।

इस सम्बन्ध में ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ ने एक ख़बर दिखाई थी। इस ख़बर के अनुसार, जेएनयू छात्र न सिर्फ़ मीडिया के सवालों से भड़क गए बल्कि ‘मीडिया बाहर जाओ’ के नारे भी लगाने लगे। तब तनुश्री ने इस ख़बर को नकार दिया था। उन्होंने जेएनयू का बचाव करते हुए लिखा था कि प्रेस कॉन्फ्रेंस में ‘रिपब्लिक टीवी’ के पत्रकार और सुरेश चव्हाणके के गुंडों ने हंगामा किया था। उनका आशय ‘सुदर्शन टीवी’ के पत्रकारों से था। तनुश्री ने ख़ुद स्वीकार किया था कि उन्होंने बाकी पत्रकारों से लड़ाई की थी।

तनुश्री ने पत्रकारों के साथ धक्का-मुक्की को जायज ठहराते हुए कहा था कि वो ‘अपने लोगों द्वारा किए गए अन्याय’ को बर्दाश्त नहीं कर सकतीं। ‘टीवी 9 भारतवर्ष’ के वीडियो में देखा जा सकता है कि आईसी घोष के साथ तनुश्री पांडेय भी हैं। वामपंथी छात्र नेता सन्नी धीमन ने तनुश्री की तारीफ करते हुए कहा था कि वो ‘गोदी मीडिया’ से लोहा लेने के लिए मज़बूरी से खड़ी रहीं। उसने तो यहाँ तक दावा किया था कि तनुश्री ने रिपब्लिक टीवी, ज़ी न्यूज़ और सुदर्शन न्यूज़ के पत्रकारों के साथ ‘लोहा लिया।’

‘काय पो छे’ हो या ‘भक काटे’: पतंग उड़ाने का असली मजा तो गुजरात में है

आज रात लोग पार्टी करते हैं। कैसी पार्टी? पतंगों के कन्ने बाँधने के लिए इकट्ठा होने की पार्टी। नॉर्थ इंडिया वाले सर पकड़ लेंगे। पतंगों के कन्ने बाँधने के लिए भी इकट्ठा होना पड़ता है, पार्टी करनी होती है? हाँ जी, गुजरात में तो होती है।

अलग-अलग रहते कुटुम्बों में कल 14 जनवरी को एक साथ इकट्ठे होकर किसी एक के घर ऊँची छत पर इकट्ठे पतंग उड़ाने की परंपरा है। अकेले-अकेले मज़ा भी कहाँ और कितना आ सकता है। त्यौहार तो मिल-जुलकर ही मनाए जाते हैं। इसलिए, कल पतंगे उड़ेंगी, आज रात कन्ने बँधेंगे। एक जगह बैठकर गपशप की जाएँगी, डब्बा पार्टीज़ होंगी, देर रात वाली चाय बनेगी, भजिया तले जाएँगे और इस सब से वक्त मिला तो कन्ने भी बँधेंगे और ‘अरे जल्दी सो जाते हैं, सुबह छत पर भी तो चढ़ना है’ कहते-कहते देर रात तक जागेंगे।

सुबह खाना बाहर से आएगा या फिर उजाणी (सामूहिक भोज) की व्यवस्था की जाएगी और पूरा गुजरात अपने-अपने घर, मुहल्ले, सोसायटी, ग्रुप, परिवार की एक डिसाइडेड थीम के कपड़े पहनकर घर के बच्चों से लेकर दादा-दादी समेत सब छत पर होंगे। पतंगें एक तरफ सुरक्षित रखी होंगी। पानी से भरे बड़े जग एक तरफ होंगे । खाने-पीने के चिप्स, नाश्ते वगैरह अलग तरफ रखे होंगे। वडीलों की कुर्सियाँ लगी होंगी। पुरूष पतंगे जमाएँगे और महिलाएँ हुचका पकड़ेंगी। सर पर हैट या टोपी और काला चश्मा आज के लिए अत्यावश्यक है।

एक गुजराती दुनिया मे कहीं भी रहे, लेकिन 14 जनवरी को उसका दिल हमेशा छत पर रहता है। मैं बता नहीं सकती, मतलब बता तो रही ही हूँ, पर पूरी तरह समझा नहीं सकती कि मैंने जब ये फेस्टिवल पहली बार देखा था तो मुझे कैसा लगा। हमारे यहाँ एक तो पतंग उड़ाना आवारागर्दी माना जाता था और ऊपर से लड़कियों के पतंग उड़ाने की तो कभी कल्पना ही नहीं की।

गुजरात में पति-पत्नी, प्रेमी-प्रेमिका, भाई-बहन, सब मिलकर पतंग उड़ाते हैं। शादी से पहले सगाई किए हुए कपल्स एक साथ पतंग उड़ाते हैं। नियम यही है कि हुचका लड़कियाँ पकड़ेंगी लेकिन बहुत सारी लड़कियाँ खुद भी पतंग उड़ाने में गजब की माहिर होती हैं।

किसी पतंग के कटते ही पूरा इलाक़ा ‘काय पो छे’ की आवाज़ से गूँज उठता है। म्यूज़िक बजता है, लोग ब्रेक में मौज करते हुए गरबा करने लगते हैं। बच्चे छोटी-छोटी पतंगों से खेलते हैं। दादियाँ दादा जी को अपने समय की पतंगबाजी याद दिलाती हैं और दादा ताव में आकर खड़े हो जाते हैं दादी को ये दिखाने कि मैं अभी बूढ़ा नहीं हुआ हूँ। अब भी ये लड़के मेरी पतंग के आगे नहीं टिक सकते और पतंग कटते ही, “सालो चाइनीज़ माँझो वापरे छे” कहकर वापस आकर बैठ जाते हैं। वाकई में गुजराती होना नशे जैसा है। आप जितना ज़्यादा गुजराती संस्कृति के मूल में उतरेंगे, उतना तर रहेंगे।

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‘मोदी और योगी के खिलाफ नारे लगाने वालों को जिंदा दफन कर दूँगा, संभल जाओ, वरना पटक-पटक कर मारेंगे’

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध में अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में हुए प्रदर्शन पर भाजपा नेता और उत्तर प्रदेश सरकार में राज्यमंत्री रघुराज सिंह ने रविवार (जनवरी 12, 2019) को नुमाइश मैदान में आयोजित सभा में विवादित बयान दिया। 

उन्होंने सभा में धमकी भरे लहजे में कहा, “ये मुट्ठी भर लोग, केवल एक परसेंट लोग, हमारा पैसा, देश का पैसा, टैक्स का पैसा खाकर, बेईमान तुम मुर्दाबाद करोगे। योगी और मोदी को तुम जिंदा दफन करोगे। मैं तुम्हें जिंदा दफन कर दूँगा। मोदी-योगी देश और प्रदेश को चलाएँगे और ऐसे ही चलाएँगे, जैसे चला रहे हैं।” रघुराज सिंह ने आगे कहा, “देश में मोदी और प्रदेश में योगी बैठा है। सोच लो, बचोगे नहीं। पोटा (POTA) में जाओगे, जमानत नहीं होगी। भविष्य के साथ खिलवाड़ मत करो।”

उन्होंने कहा, “यह मोदी है, यह योगी है, न किसी से डरा है, न डरेगा। मुस्लिम यूनिवर्सिटी को मैं बताना चाहता हूँ कि हमारे अलीगढ़ का मुस्लिम बहुत शांतिप्रिय है। तुम (एएमयू के छात्र) सुधर जाओ नहीं तो अलीगढ़ के मुस्लिम तुम्हें सबक सिखाएँगे। हमारा ही खाओगे और हम पर ही गुर्राओगे। हम ऐसा नहीं होने देंगे। संभल जाओ, वरना पटक-पटक कर मारेंगे। कॉन्ग्रेस का वह समय अब चला गया। हमने अपनी फोर्स को खुली छूट दे रखी है। अगर कोई हमारे एक आदमी को मारेगा तो वो 10 को मारेंगे।”

बता दें कि रविवार को नागरिकता संशोधन कानून प्रचार प्रसार के लिए नुमाइश मैदान में सभा हुई। जिसमें प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने शिरकत की। मौर्य से पहले रघुराज सिंह ने मंच को संभाला और विवादित बयान दिया। जिस समय रघुराज सिंह ने ये विवादित बयान दिया, उस समय तक उप मुख्यमंत्री मंच पर नहीं पहुँचे थे।

गौरतलब है कि नागरिकता संशोधन के विरोध के नाम पर बीते दिसंबर में AMU ने अपने नारों से देश को चौंका दिया था। प्रदर्शनकारी छात्रों ने “हिन्दुत्व की क़ब्र खुदेगी AMU की धरती पर”, “मोदी तेरी क़ब्र खुदेगी AMU की धरती पर”, “योगी तेरी क़ब्र खुदेगी AMU की धरती पर” जैसे नारे लगाए थे। पुलिस ने इस घटना पर संज्ञान लेते हुए 50-60 छात्रों के खिलाफ धारा-153 ए के तहत मुकदमा दर्ज किया है।

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