Home Blog Page 5174

‘तेरा बाप भी देगा आज़ादी’: बच्चों से लगवाए जा रहे देश विरोधी नारे, मौलवियों की धमकियाँ देती हैं खतरे का संदेश

जामिया, JNU से चले आजादी के नारे शाहीनबाग़ तक आते-आते इस्लामिक नारों, हिन्दू विरोधी नारों और गृह युद्ध की धमकियों में तब्दील हो गए और तुरंत इस पूरे अभियान की पोल खुल गई। यही वजह है कि NRC और CAA के विरोध में बताए जा रहे इस पूरे विरोध और हंगामे को अब किसी ने भी गंभीरता से लेना छोड़ दिया है। लेकिन इस विरोध प्रदर्शन का तरीका और इसकी रणनीतियाँ बिलकुल भी नजरअंदाज कर देने लायक नहीं लगती हैं।

लिबरल होने का अभिनय करते आ रही यह भीड़ अब बच्चों के जरिए अपने वामपंथ के जहर और अपने प्रोपेगेंडा को हवा दे रहा है। सोशल मीडिया पर कुछ वीडियो शेयर किए जा रहे हैं जो शाहीन बाग़ में चल रहे कथित CAA-NRC विरोध प्रदर्शन के दौरान बनाए गए हैं। कथित इसलिए क्योंकि CAA-NRC का विरोध तो बस बहाना है।

इन वीडियो में ‘लिबरल्स’ की भीड़ बच्चों को कन्धों पर बिठाकर और उनके पास माइक देकर जो नारे लगवा रही है, वो स्पष्ट करता है कि इस सारे हंगामे का कारण कोई कानून नहीं बल्कि कुछ ऐसे लोगों का सत्ता में होना है जिनके हाथ में देश की कमान देखकर बुर्जुआ कॉमरेड को आपत्ति है। वीडियो में बच्चा नारे लगाते हुए कहता है- ‘हम ले के रहेंगे आज़ादी, तेरा बाप भी देगा आज़ादी, तेरी माँ भी देगी आज़ादी।’ जो विचारधारा इस देश में कॉन्ग्रेस का नमक खाकर तंदुरुस्त हुई है वो उसकी भक्तिधारा में चंद नारे तो लगा ही सकती है।

वहीं, एक दूसरे वीडियो में हरे लिबास में एक मौलवी किसी सार्वजानिक सभा को भाषण देते हुए गृह मंत्री अमित शाह को आटे का थैला बताते हुए धमकी दे रहा है। इस वीडियो में मौलवी ने नरेंद्र मोदी और अमित शाह के साथ ही उनके समर्थकों को डंडे से पीटने की बात कही है जिस पर एक उन्मादी भीड़ भी खूब तालियाँ बजा रही है और वाह-वाही दे रही है।

मौलवी का कहना है कि अगर मुस्लिम को भगाने की बात कही तो तिरंगे के डंडे से वो यहाँ मौजूद लोगों को पीटेंगे। वीडियो में हरे लिबास पहने मौलवी ने यह भी स्पष्ट किया है कि हिन्दुओं से वो मुस्लिम भी नहीं डरता है जिसका कि अभी तक ख़तना भी नहीं हुआ है।

CAA-NRC के विरोध के नाम पर हिन्दुओं की महिलाओं को बुर्का पहनाए जाने से लेकर स्वस्तिक के चिन्हों को कुचलने और फ़क़ हिंदुत्व जैसे सन्देश सार्वजानिक रूप से दिए जा रहे हैं। मोदी सरकार के 2014 में सत्ता में आने के बाद से ही अक्सर मीडिया और कुछ उदारवादी विचारकों ने स्टूडियो में बैठकर ‘डर का माहौल’ जैसे नारे दिए। इन्हीं का एक बड़ा समर्थक वर्ग है जो इस नारे पर यकीन करता हुआ इसे आगे बढ़ाता रहा।

क्या उस वर्ग को ये वीडियो और सार्वजानिक सभाएँ शांति का संदेश नजर आती होंगी? या सिर्फ वो इसलिए इस पर चुप रह जाते हैं क्योंकि वो जानते हैं कि वास्तव में डर किन लोगों से होना चाहिए?

अपने विरोध प्रदर्शन में बच्चों का इस्तेमाल मजहबी और अश्लील नारे लगाने तक के लिए यह शाहीन बाग़ की भीड़ तैयार हो चुकी है। नैतिकता के मामले में तो वामपंथ से कभी कोई उम्मीद थी भी नहीं लेकिन अब वो अपने ही उस आवरण से बाहर आ चुके हैं जिस ‘उदारवादी’ नक़ाब के पीछे वो खुद को वर्षों तक छुपाते आए थे। इस विरोध प्रदर्शन के पूरे किस्से ने बता दिया है कि वामपंथ और कट्टरपंथियों की इस मिलीभगत का वास्तविक मर्म जनता नहीं बल्कि इस विचारधारा की लाश कंधे पर ढो रहे कुछ चुनिंदा लोग ही हैं।

दुष्यंत कुमार ने तो कहा था कि सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं, लेकिन अब हम देख सकते हैं कि कि एक भीड़ ऐसी भी है, जिसका मकसद सिर्फ और सिर्फ हंगामा खड़ा करना ही हो सकता है। क्योंकि यही तो उनके अस्तित्व का कारण भी है।

आप भी NRC और CAA के विरोध के नाम पर चल रहे इन युद्व घोषों को वीडियो में जरूर सुनिए-

दिल्ली विधानसभा चुनाव-2020: BJP ने जारी की 57 उम्मीदवारों की पहली लिस्ट, 11 अनुसूचित, 4 महिलाएँ शामिल

दिल्ली विधानसभा चुनाव को लेकर बीजेपी ने 70 विधानसभा सीटों में से 57 सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है। बीजेपी दिल्ली चुनाव प्रभारी प्रकाश जावड़ेकर और दिल्ली प्रदेश अध्यक्ष मनोज तिवारी ने प्रेस कॉन्फ्रेंस करके बताया कि 57 उम्मीदवारों में 11 उम्मीदवार अनुसूचित जाति और चार महिलाएँ शामिल हैं। बता दें कि गुरुवार को भाजपा मुख्यालय में क़रीब ढाई घंटे तक बीजेपी के केंद्रीय चुनाव समिति की बैठक हुई थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के अलावा गृह मंत्री अमित शाह, जेपी नड्डा के अलावा अन्य वरिष्ठ नेता मौजूद रहे।

दिल्ली विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और दिल्ली इकाई के पूर्व अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता को भाजपा ने रोहिणी सीट से उतारा है, वो इसी सीट से विधायक हैं। बीजेपी ने आम आदमी पार्टी के पूर्व विधायक कपिल मिश्रा को मॉडल टाउन सीट से उम्मीदवार बनाया है। इस सूची में पूर्व मेयरों रविंद्र गुप्ता और योगेंद्र चंदोलिया के भी नाम हैं।

वहीं, आम आदमी पार्टी ने भी विधानसभा चुनाव के लिए सभी 70 सीटों पर उम्मीदवारों के नामों की घोषणा कर दी है। आप पार्टी ने मौजूदा 46 विधायकों को टिकट दिया है, तो वहीं दूसरी तरफ 15 विधायकों के टिकट काटे हैं और आठ महिलाओं को उम्मीदवार बनाया है। मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल नई दिल्ली सीट और उप मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया पटपटगंज से चुनाव लड़ेंगे।

ग़ौरतलब है कि मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने  दिल्ली में विधानसभा चुनाव का ऐलान करते हुए कहा था कि चुनाव सिंगल फेज में होगा और नॉमिनेशन की अंतिम तिथि 21 जनवरी होगी। वहीं, नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 24 जनवरी रखी गई है।

वर्तमान दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी को खत्म होगा। पिछले विधानसभा में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने 70 सीटों में से 67 सीटें अपने हिस्से में दर्ज की थीं। इस बार दिल्ली में 13,750 पोलिंग बूथ पर करीब 1.46 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

साल 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटें मिली थीं। भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं, वहीं कॉन्ग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। 2015 में चुनाव आयोग ने 12 जनवरी को दिल्ली चुनाव की घोषणा की थी और 7 फरवरी को मतदान हुआ था जिसका 10 फरवरी को नतीजा आया था।

दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 का ऐलान: 8 को मतदान, 11 फरवरी को घोषित होंगे नतीजे

दिल्ली में शिक्षा क्रांति के दावे ऊँचे, हकीकत फीकी: 500 स्कूल नहीं खुले, कमरे गिनवा रही केजरीवाल सरकार

AAP के 200 पर कॉन्ग्रेस देगी 600: दिल्ली की राजनीति अब विकास पर नहीं, ‘कौन कितना देगा FREE’ पर टिकी

ओवैसी की दाढ़ी में बाँस? हुई कट्टरपंथी बच्चों की बात, आई 15 मिनट वाले भाई की याद?

क्या आपने कभी सोचा है कि देश में आतंकवाद शब्द के इस्तेमाल पर भी सबसे पहले प्रतिक्रिया देने वालों में एआईएमआईएम नेता असदुद्दीन ओवैसी ही क्यों होते हैं? मुद्दा चाहे इस्लामिक चरमपंथ का हो, मजहबी नारे लगाते हुए भीड़ द्वारा किसी मंदिर को अपवित्र करने का हो या फिर बच्चों को कट्टर बनाने वालों का हो, सबसे पहले बौखलाने वाला नाम असदुद्दीन ओवैसी का ही होता है।

ओवैसी के दुःख का नया कारण सीडीएस जनरल बिपिन रावत का कट्टरता और चरमपंथ को रोकने वाला बयान है। या ये कहें कि एक बार फिर ओवैसी ने उड़ता हुआ तीर ले लिया है। रायसीना डायलॉग के दौरान CDS जनरल बिपिन रावत ने कहा कि कश्मीर में 10 साल से कम उम्र के लड़के-लड़कियों को कट्टरपंथी बनाया जा रहा है। जनरल रावत ने कहा कि ऐसे बच्चों को शांतिवार्ता से कट्टरपंथी बनाए जाने की ऐसी मुहिम से अलग कर सकते हैं।

इसके बाद ओवैसी को खबरों में आने की एक और वजह मिल गई और उन्होंने सवाल किया है कि जनरल बिपिन किस-किस को डिरेडिकलाइज़ करेंगे? साथ ही सीडीएस जनरल रावत को सलाह दी है कि उन्हें नीतियाँ नहीं बनानी चाहिए। यहाँ तक कि ओवैसी ने सीडीएस बिपिन रावत के बयान की तुलना कनाडा में अंग्रेज हुकुमत के द्वारा किए गए जुल्म से कर डाली है।

हालाँकि, इस्लामिक पत्थरबाजों और हर दूसरे दिन 72 हूरों की ख्वाहिश लिए ISIS से जुड़ने वाले युवाओं की तुलना ओवैसी आज तक किसी से नहीं कर पाए हैं। हो सकता है कि वो जानते हों कि किसी और से इस जिहादी विचारधारा की तुलना करना कितना हास्यास्पद और अतार्किक है।

जनरल बिपिन रावत बेवजह ही नीति और योजना बनाने की परेशानी मोल लेते हैं। जबकि, ओवैसी जानते हैं कि नीतियाँ तो सिर्फ वही हैं जो आसमानी किताब में दी गई हैं और उसके अलावा दूसरी कोई नीति होती ही नहीं है ना ही किसी को बनाने पर विचार करना चाहिए।

‘रावत किस-किस का डिरेडिकलाइज़ करेंगे?’ वाला ओवैसी का सवाल भी एकदम सही है। जिस ओवैसी के खुद अपने ही घर में हिन्दुओं को 15 मिनट में सबक सिखाने जैसे भाषण देने वाला भाई हो, उसकी जुबान से ऐसा सवाल पूछना वाजिब लगता है। देखा जाए तो सबसे पहला जवाब तो ओवैसी बंधुओं के अपने घर में मौजूद अकबरुद्दीन ओवैसी है, जिसे शायद अभी भी ठीक से डि-रेडिकलाइज़ किया जाना बाकी है। हालाँकि, इसमें तथ्यात्मक त्रुटि इतनी जरूर हो सकती है कि अकबरुद्दीन की वास्तविक उम्र 10 साल से ज्यादा ही है। लेकिन उनकी मानसिक उम्र नीचे जा सकता है कि वो फिर भी इस पैरामीटर में एकदम फिट बैठते हैं।

एक ओर पूरे देश के मुस्लिमों में असदुद्दीन ओवैसी नागरिकता रजिस्टर (NRC) पर लोगों को डिटेंशन कैम्प भेज दिए जाने जैसी भ्रामक बातों से डराकर उन्हें सरकार के खिलाफ उकसाते हैं, और दूसरी तरफ वही ओवैसी, आतंकवाद से निपटने की सरकार और तंत्र की रणनीतियों में अपनी कट्टरपंथी विचारधारा का नैरेटिव जोड़ देते हैं।

कश्मीर से लेकर हैदराबाद और केरल तक अक्सर छोटे बच्चों को कट्टरपंथियों द्वारा अपने मिशन का हिस्सा बनाया जाता रहा है। खबरें पढ़ने को मिलती हैं कि फलाँ जगह पर ISIS युवाओं से सम्पर्क कर अपनी कार्यशाला चला रहा था। महीने में कम से कम 2 ख़बरें तो ऐसी होती हैं जिनमें स्पष्ट रूप से किसी बच्चे को इस्लामिक कट्टरपंथियों द्वारा ब्रेनवाश किए जाने की घटना शामिल होती है।

अक्सर यह भी देखा गया है कि इस्लाम में दीनी शिक्षा के पहले चरण यानी, मदरसे में ही आतंकवाद और ट्रेनिंग का केंद्र बनाया गया है। वर्ष 2018 में शिया सेंट्रल वक़्फ़ बोर्ड ने भी पीएम नरेंद्र मोदी से अनुरोध किया था कि देश में मदरसों को बंद कर दिया जाए। बोर्ड ने आरोप लगाया था कि ऐसे इस्लामी स्कूलों में दी जा रही शिक्षा छात्रों को आतंकवाद से जुड़ने के लिए प्रेरित करती है।

CAA-NRC के विरोध में बच्चों का इस्तेमाल

हाल ही में सेव चाइल्ड इंडिया NGO ने नेशनल कमीशन फॉर प्रोटेक्शन ऑफ़ चाइल्ड राइट्स (NCPCR) में इस बात को लेकर अपनी शिक़ायत भी दर्ज करवाई है कि नागरिकता कानून के खिलाफ हो रहे विरोध-प्रदर्शनों में बच्चों का इस्तेमाल किया जा रहा है। NGO का कहना है कि यह बच्चों के अधिकारों का घोर उल्लंघन है और यह बाल शोषण की श्रेणी में आता है। इन बच्चों का इस्तेमाल दिल्ली के शाहीनबाग में CAA और NRC के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध-प्रदर्शन में भड़काऊ नारे लगाने के लिए किया जा रहा है।

आज ही एक SIT जाँच में खुलासा हुआ है कि मुजफ्फरनगर में एंटी-सीएए विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई झड़प में बच्चों को पुलिसकर्मियों पर पत्थर फेंकने के लिए उकसाया था। जाँच एजेंसी ने आरोपितों पर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट 2015 की धाराएँ लगाईं हैं।

जिस सरकार और तंत्र की दुहाई ओवैसी जनरल बिपिन रावत के बयान के विरोध में कह रहे हैं उन्हें यह भी याद रहना चाहिए कि अगस्त 2016 में, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी के आह्वान को याद करते हुए इस बात पर खेद प्रकट किया था कि कश्मीरी युवकों के हाथ में पत्थर नहीं, लैपटॉप होने चाहिए।

एक रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई 2019 में भी एक घटना सामने आई थी जिसमें गृह मंत्रालय ने लोक सभा में एक सवाल के लिखित जवाब में कहा था कि बांग्लादेशी आतंकी संगठन जमात-उल-मुजाहिदीन-बांग्लादेश द्वारा कट्टरता फैलाने और युवाओं की भर्ती गतिविधियों के लिए बंगाल के बर्धवान और मुर्शिदाबाद स्थित कुछ मदरसों का इस्तेमाल कर रहा है।

अब स्वयं ओवैसी बताएँ कि उन्होंने अपने स्तर पर कितने हिन्दू-मुस्लिम युवाओं को नई शिक्षा पद्दति से जोड़ने के प्रयास किए? मैंने कभी भी ओवैसी को मदरसे में चली आ रही परम्परागत गैर-वैज्ञानिक शिक्षा के खिलाफ बोलते हुए नहीं सुना। ना ही वो कभी इस बात की वकालत करते हैं कि मुस्लिम बच्चों को भी मुख्यधारा की शिक्षा पद्दति से जुड़ने की जरूरत है ताकि वो भी सीबीएससी और एनसीईआरटी के पाठ्यक्रम से जुड़ सकें।

युवाओं को कट्टरपंथी बनाने की ऐसी ही तमाम घटनाओं को यदि असदुद्दीन ओवैसी जैसों के लिए नजरअंदाज भी कर दिया जाए तो कश्मीर घाटी के पत्थरबाज, जो अब अक्सर दिल्ली जैसे मेट्रो शहर और देहरादून जैसे कस्बाई परम्परा वाले छोटे शहरों में भी देखे गए हैं उन्हें किस तरह से भुलाया जा सकता है? क्या ये युवा एक ही दिन में सरकार और सेना के खिलाफ पत्थर उठाने के लिए तैयार हो गए? जवाब है- नहीं।

ये लोग बचपन से ही संस्थागत तरीके से तैयार किए जाने वाले लोग होते हैं जिन्हें ओवैसी जैसे लोग ही अपनी मानसिकता के जहर के लिए इस्तेमाल करते हैं क्योंकि ओवैसी जानते हैं कि अगर इस तरह के कट्टरपंथी समर्थक ही नहीं रहेंगे तो उनकी दकियानूसी विचारधारा पर वाहवाही कौन करेगा?

24 घंटे की थी मोहलत, दिल्ली छोड़ने से पहले जामा मस्जिद पहुँचा भीम आर्मी का ‘रावण’

जामा मस्जिद पर प्रदर्शन के दौरान एकत्रित भीड़ को उकसाने और आदेशों का उल्लंघन करने के आरोप में 20 दिसंबर को गिरफ्तार हुए भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद उर्फ़ रावण को गुरुवार को सशर्त जमानत पर तिहाड़ जेल से निकला था। दिल्ली छोड़ने से पहले शुक्रवार को वह फिर जामा मस्जिद पहुँचा। चूँकि शर्तें उसके जेल से रिहा होने के 24 घंटे बाद प्रभावी होने थे तो उसने उसका बखूबी इस्तेमाल किया।

जामा मस्जिद पहुँच रावण ने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और NRC के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन में हिस्सा लिया। उसने हाथ में संविधान की कॉपी ले राखी थी और संविधान की प्रस्तावना पढ़ी।

भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर ने कहा, “मैं अपने साथियों से निवेदन करता हूँ कि वो इस मुल्क के संविधान की ताकत को समझें। आज मुझे जो रिहाई मिली है और हमारे भाइयों को जो रिहाई मिल रही है वो इस मुल्क के संविधान की ताकत के वजह से मिली है।”

प्रदर्शन जारी रखने का आह्वन करते हुए कहा, “हमारा संघर्ष जारी रहेगा क्योंकि हमारा विरोध प्रदर्शन शांतिपूर्ण है। आप इस प्रदर्शन से मुल्क को बताए कि अब हमारे मुल्क को कोई खतरा नहीं और न ही हमारी एकता को कोई खतरा है।”

इस दौरान रावण ने अन्य समुदाय के लोगों को लुभाते हुए अपने प्रदर्शन में शामिल होने के लिए कहा। 24 घंटे में दिल्ली छोड़ने से पहले उसने जामा मस्जिद पर कहा, “मुस्लिम भाइयों से ज्यादा हमारे सिख भाई और ओबीसी भाई और वो लोग जो समाज के संविधान के साथ खड़े हैं वे सब मिलकर इस प्रदर्शन को और मज़बूत करें। झूठ फैलाया जा रहा है कि मुस्लिम प्रदर्शन कर रहे हैं। ये झूठ भी बेनकाब होगा।”

गौरतलब है कि दिल्ली की एक अदालत ने बुधवार को भीम आर्मी के प्रमुख चंद्रशेखर आजाद को जमानत दी थी। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश कामिनी लाउ ने उन्हें कुछ शर्तों के साथ राहत दी थी। आजाद को जमानत देते हुए अदालत ने कहा था कि वह चार हफ्तों तक दिल्ली नहीं आ सकेंगे और चुनावों तक कोई धरना भी आयोजित नहीं करेंगे। इस दौरान अदालत ने ये भी कहा था कि सहारनपुर जाने से पहले आजाद जामा मस्जिद समेत दिल्ली में कहीं भी जाना चाहती है, तो पुलिस उन्हें एस्कॉर्ट करेगी। बता दें, इस दौरान अदालत ने उन्हें दिल्ली छोड़ने के लिए 24 घंटे का समय दिया था।

निर्भया गैंगरेप: नया डेथ वारंट जारी, अब 1 फरवरी को फाँसी पर लटकाए जाएँगे चारों दोषी

दिल्ली के पटियाला हाउस कोर्ट ने निर्भया गैंगरेप केस के चारों दोषियों के खिलाफ नया डेथ वारंट जारी किया है। अब उन्हें 1 फरवरी सुबह 6 बजे फाँसी के फंदे पर लटकाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि उन्हें पहले 22 जनवरी को फाँसी दी जानी थी, लेकिन एक दोषी ने दया याचिका दायर की थी। उसकी दया याचिका खारिज होने के बाद प्रक्रिया के तहत नया डेथ वारंट जारी करना पड़ा और फाँसी की तारीख बढ़ानी पड़ी।

केंद्रीय गृह मंत्रालय ने गुरुवार (जनवरी 16, 2019) देर रात दया याचिका राष्ट्रपति के पास भेजी जिसके बाद राष्ट्रपति ने इसे खारिज कर दिया। इससे पहले तिहाड़ जेल के अधिकारियों ने शुक्रवार (जनवरी 17, 2019) को कोर्ट में दोषियों के खिलाफ मौत की सजा पर फिर से डेथ वारंट जारी करने की अपील की थी। न्यायाधीश ने पाया कि इस मामले में दोषी अपनी दया याचिका बारी-बारी से दायर कर रहे हैं। चारों को दया याचिका दायर करने का मौका दिया गया था, लेकिन इसमें से केवल एक दोषी ने दायर किया। उनका कहना था कि यह सजा में देर करने की चाल हो सकती है। उन्होंने पूछा कि आखिर यह कब तक चलेगा?

वहीं दया याचिका खारिज होने के बाद निर्भया के पिता का कहना है कि दिल्ली सरकार तब तक सोई रही, जब तक हम लोग आगे नहीं बढ़े। उन्होंने कहा कि आखिर दिल्ली सरकार ने जेल अथॉरिटी से पहले क्यों नहीं कहा था कि आप फाँसी के लिए नोटिस जारी करो। 

साथ ही निर्भया की माँ आशा देवी ने दोषियों की फाँसी में हो रही देरी और डेथ वारंट जारी होने पर बीजेपी और आम आदमी पार्टी पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि जो लोग 2012 में हाथ में तिरंगा लेकर इंसाफ के लिए सड़क पर उतरे थे, आज वही लोग राजनीति के लिए निर्भया के दोषियों की फाँसी टाल रहे हैं। कोई कह रहा है कि दिल्ली सरकार फाँसी में देरी कर रही है तो दिल्ली सरकार कह रही है कि दिल्ली पुलिस हमें दे दो।

बता दें कि इससे पहले निर्भया की माँ ने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में एक याचिका दायर कर दोषियों के डेथ वारंट की माँग की थी, जिस पर कोर्ट ने 7 जनवरी को निर्भया की माँ के हक में फैसला सुनाया था। कोर्ट ने 2012 के निर्भया गैंगरेप दोषी मुकेश, पवन गुप्ता, विनय कुमार शर्मा और अक्षय कुमार सिंह के खिलाफ डेथ वारंट जारी करते हुए कहा था कि दोषियों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे तिहाड़ जेल में फाँसी दी जाएगी।

जागरुकता कार्यक्रम के पोस्टर में निर्भया गैंगरेप के दोषी की फोटो, मंत्री ने दिए जाँच के आदेश

एक साथ 4 फंदे टाँगूँगा, एक-एक कर… जल्लाद ने बताया निर्भया के दोषियों को एक साथ कैसे देगा मौत

दिल्ली की हवा-पानी में वैसे भी मर ही जाएँगे, जल्दी क्या है: निर्भया का गुनहगार माँगे रहम

‘अफ़ज़ल गुरु के समर्थक केरल के डॉक्टर्स को बना रहे निशाना, सेना को देते हैं खुलेआम गालियाँ’

केरल में तिरुवनंतपुरम के डॉक्टर रंजीत विजयाहरि ने इंडियन मेडिकल एसोसिएशन और केरल पुलिस के साइबर सेल में एक शिक़ायत दर्ज कराई है। अपनी शिक़ायत में उन्होंने नागरिकता संशोधन कानून (CAA) का समर्थन करने के लिए ‘जिहादी तत्वों’ द्वारा निशाना बनाए जाने की बात कही है।

अपना दर्द बयाँ करने के साथ-साथ डॉ. विजयाहरि ने अपने अन्य साथी डॉक्टर्स को परेशान किए जाने का ज़िक्र भी किया है। उन्होंने कहा, “कई डॉक्टर्स ने अराजक तत्वों के इस गिरोह के हमले का सामना किया है। मुझे लगता है कि ये लोग ‘जिहादी’ हैं। इन्होंने कई राष्ट्रीय मुद्दों पर आतंकवादियों के समर्थन का रवैया अपनाया। उन्हें अफ़ज़ल गुरु, इशरत जहाँ का समर्थन करते और भारतीय सेना को गाली देते देखा-सुना जा सकता है।”

इससे पहले भी डॉ. विजयाहरि ने दावा किया था कि CAA का समर्थन करने के चलते इस्लामी कट्टरपंथी उन्हें निशाना बना रहे हैं। सोशल मीडिया पर उन्होंने बताया था कि वे गेस्ट्रो सर्जन हैं और अपनी पत्नी के साथ हॉस्पिटल चलाते हैं। उन्होंने कुछ स्कीनशॉट भी शेयर किए थे, जिनमें दावा किया गया था कि चिकित्सा से जुड़े उनके दोस्तों को भी ‘प्रतिकूल राजनीतिक विचारों’ के लिए अनैतिक प्रथाओं और ‘क्रूर उपचार’ के आरोपों के साथ निशाना बनाया गया।

बता दें कि डॉ. विजयाहरि सेवा भारती के कार्यकर्ता रहे हैं और RSS से जुड़े हुए हैं। उन्होंने कट्टरपंथियों का एक स्क्रीनशॉट शेयर किया। इसमें उनके और उनकी प्रैक्टिस को बदनाम करते हुए दावा किया गया कि “साम्प्रदायिक” होने के कारण वे सहानुभूति की उम्मीद नहीं रख सकते।

ग़ौरतलब है कि राज्य की वामपंथी सरकार नागरिकता संशोधन क़ानून के पारित होने बाद से ही इसके विरोध में खड़ी हुई है। यहाँ तक ​​कि इस क़ानून को रद्द करने की माँग करते हुए केरल विधानसभा में एक प्रस्ताव भी पारित किया था, जिसे कॉन्ग्रेस ने भी समर्थन दिया था। केरल सरकार ने अब सर्वोच्च न्यायालय में CAA के ख़िलाफ़ मुकदमा भी दायर किया है।

CAA का समर्थन करने पर जिहादी बना रहे निशाना: केरल के एक डॉक्टर ने बयाँ किया दर्द

केरल विधानसभा में पास हुआ ‘CAA विरोध प्रस्ताव’ गैरकानूनी और असंवैधानिक: आरिफ मोहम्मद खान

निर्भया की माँ ने केजरीवाल को लताड़ा: कहा- जो काम दिल्ली सरकार को करना था, वो हमने किया

निर्भया केस में दो राजनीतिक पार्टियों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया है। निर्भया के गुनहगार मुकेश के वकील द्वारा जेल प्रशासन को दायर की गई दया याचिका को राष्ट्रपति ने गृह मंत्रालय की रिपोर्ट के बाद ख़ारिज कर दिया है। इसी के साथ फ़िर से फाइल दिल्ली के उपराज्यपाल के पास पहुँच गई है। इस बीच केजरीवाल को निर्भया की माँ ने फटकार लगाते हुए कहा कि, जो काम सरकार को करना था, वह हमने किया है।

निर्भया के दोषियों को फाँसी देने में देरी होने पर बीजेपी ने इसके लिए दिल्ली के आप सरकार को जिम्मेदार ठहराया था। जिसके जवाब में के केजरीवाल द्वारा ज़ारी किए गए बयान पर निर्भया की माँ आशा देवी ने आपत्ती जताई उन्होंने मोदी सरकार पर भरोसा जताते और केजरीवाल को लताड़ लगाते हुए कहा कि “ये बिल्कुल ग़लत है कि उन्होंने समय पर अपना काम किया, 7 साल हो गए घटना हुए, ढाई साल हो गए सुप्रीम कोर्ट से आए फैसले को, 18 महीने हो गए रिव्यू पेटिशन ख़ारिज हुए, जो काम जेल प्रशासन को और दिल्ली सरकार को करना चाहिए था, वो हमने किया।”

निर्भया के चारों दोषियों के डेथ वारंट ज़ारी हो चुके थे, जिसके बाद चारों गुनहगारों को 22 जनवरी को सुबह 7 बजे फाँसी दी जानी थी, लेकिन चारों दोषियों में से एक मुकेश सिंह ने आख़िरी समय में दया याचिका दायर कर दी। इसके बाद 22 जनवरी को लगने वाली फाँसी की तारीख़ टल गयी और इसी के साथ केन्द्र में बैठी बीजेपी की सरकार और दिल्ली की आम आदमी पार्टी की सरकार के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर शुरू हो गया। केन्द्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने कहा कि इसके लिए दिल्ली की आप सरकार ज़िम्मेदार है। उन्होंने आरोप लगाया कि आप सरकार महिलाओं से जुड़े अपराधों में असंवेदनशील हो गई है।

इस पर केजरीवाल ने अपना बयान ज़ारी करते हुए कहा था कि “दिल्ली सरकार के अधीन सभी कार्य हमारे द्वारा घंटों के भीतर पूरे किए गए। हमने इससे सम्बन्धित किसी भी कार्य के में देरी नहीं की। हम चाहते हैं कि दोषियों को ज़ल्द से ज़ल्द फाँसी दी जाए।” वहीं मनीष सिसोदिया ने कहा था कि इतने गंभीर मुद्दे पर बीजेपी का झूठ बोलना ठीक नहीं है।

आपको बता दें कि आख़िरी समय में दायर की गई दया याचिका और उसके ख़ारिज हो जाने के बाद अब दोषी मुकेश सिंह के पास फाँसी से बचने का और कोई रास्ता नहीं बचा है। हालाँकि, दिल्ली सरकार ने कोर्ट को बताया है कि अब चारों दोषियों की 22 जनवरी को फाँसी नहीं दी जा सकती।

निर्भया केस के दोषी मुकेश सिंह का फ़ाईल फ़ोटो

उम्माह का खलीफा बनने चला था मलेशिया, मोदी सरकार के एक दाँव से निकली हेकड़ी

धर्म के नाम पर बने और धर्म के नाम पर आतंकी पैदा करने वाले पाकिस्तान का इस्लाम से भरोसा बीते साल ही डोल गया था। पाकिस्तानी सीनेट के पूर्व चेयरमैन मियॉं राजा रब्बानी ने तो यहॉं तक कह दिया था कि ‘इस्लामिक उम्माह का बुलबुला फट गया है’ और पाकिस्तान को उम्माह के साथ रिश्तों पर फिर से विचार करना चाहिए। पाकिस्तान की यह स्थिति कश्मीर के मसले पर मोदी सरकार की कूटनीति की वजह से अंतरराष्ट्रीय मंचों पर अलग-थलग पड़ने से हुई थी।

ऐसे वक्त में पाकिस्तान के सुर में सुर मिलाते हुए मलेशिया ने कई बयान दिए। मोस्टवांटेड जाकिर नाइक को पनाह देने वाले मलेशिया ने जम्मू-कश्मीर, नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) और NRC जैसे मुद्दों को वैश्विक मंचों पर उठाने की कोशिश की। मलेशियाई प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने जम्मू-कश्मीर का विशेष दर्जा ख़त्म करने और एनआरसी-सीएए पर भारत की खुलकर आलोचना की। उसने जाकिर नाइक के प्रत्यर्पण से भी इनकार कर दिया। जबकि कुछ समय पहले तक वह खुद को भारत का अच्छा दोस्त बताता था। महातिर ने यह सब कुछ समुदाय विशेष के नाम पर किया।

उन्होंने किसी भी सूरत में भारत के सामने झुकने से इनकार किया। लेकिन अब मलेशिया की हेकड़ी निकलती दिख रही है। उसने कहा है कि पाम ऑयल को लेकर वह भारत से बातचीत कर रहा है। मलेश‍िया की प्राइम इंडस्ट्रीज मिनिस्टर टेरेसा कॉक ने कहा कि वह इस बारे में भारत के संपर्क में हैं। असल में मलेशिया के बदलते रूख को देखते हुए भारत ने पाम ऑयल के आयात पर पूरी तरह से रोक न लगाते हुए आयात घटाना शुरू कर दिया है। इससे उसकी बैचेनी बढ़ गई है।

ख़बर के अनुसार, टेरेसा कॉक ने कहा, “इस साल हमें अपने प्रमुख बाजारों से चुनौती मिलती दिख रही है।” उन्होंने कहा कि वह इस मसले पर मलेश‍िया में भारतीय उच्चायुक्त के सम्पर्क में हैं। उन्होंने कहा, “हमारे लिए यह ज़रूरी है कि राजनयिक चैनल से और सभी पक्षों से संवाद करें। हम सम्पर्क बनाए रखेंगे।”

इसके बाद मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने पाकिस्तान से पाम ऑयल के आयात को बढ़ाने की गुहार लगाई है। लेकिन, पाकिस्तान की दिवालिया हालत से तो सारी दुनिया वाक़िफ़ है। ऐसे में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि जो पाकिस्तान आर्थिक मदद के लिए बाक़ी देशों के आगे ख़ुद झोली फैलाए हुए है, वो मलेशिया की मदद कैसे करेगा।

बता दें कि पाम ऑयल के सन्दर्भ में भारत के साथ बिगड़ते रिश्तों का असर मलेशिया पर बड़े पैमाने पर पड़ेगा। ऐसा इसलिए क्योंकि मलेशिया से दो-तिहाई तेल भारत आता था। उस समय भारत में इस तेल के आयात पर सरकार की तरफ़ से कोई पाबंदी नहीं थी। लेकिन, भारत सरकार ने अब इसे “रिस्ट्रेक्टेड” श्रेणी में डाल दिया है। इस श्रेणी में डालने का मतलब है कि अब अगर किस व्यवसायी को मलेशिया से पाम ऑयल का आयात करना हो तो उसे सरकार से लाइसेंस लेना पड़ेगा।

भारत के इस क़दम से निश्चित तौर पर मलेशिया को एक बड़ा झटका लगा है। 2019 में भारत ने मलेशिया से 40 लाख टन पाम ऑयल आयात किया था, जो अब महज़ 0.9 लाख टन रह गया है। मलेशिया ने CAA और NRC को भारत सरकार का ग़लत और भेदभाव वाला क़दम बताया था। मलेशिया के प्रधानमंत्री महातिर मोहम्मद ने पिछले साल, अक्टूबर में जम्मू-कश्मीर और CAA की आलोचना करते हुए कहा था कि भारत ने कश्मीर में क़ब्ज़ा कर लिया है। CAA को लेकर कहा था कि भारत सरकार अशांति को बढ़ावा दे रही है।

वहीं, अगर मलेशिया के क़ानून और प्रशासन की बात करें तो वहाँ रहने वाले ग़ैर-मुस्लिमों के साथ दोयम दर्जे का व्यवहार किया जाता है। नौकरियों से लेकर अन्य छोटे-मोटे कामों में हर क़दम पर भेदभावपूर्ण नीति अपनाई जाती है।

भारतीय खाद्य तेल कंपनियों ने किया बहिष्कार तो गिड़गिड़ाया मलेशिया: Pak का किया था कश्मीर पर समर्थन

ज़ाकिर नाइक जहाँ जाएगा उपद्रव करेगा, कोई भी देश उसे रखना नहीं चाहता, कहाँ भेजूँ: मलेशियाई PM

भगोड़े जाकिर नाइक को शरण देने वाले मलेशिया ने कश्मीर पर उगला जहर, उइगरों को मरने छोड़ा

दीपिका जानती हैं कि वो क्या कर रही हैं, लेकिन मैं टुकड़े-टुकड़े गैंग से साथ खड़ी नहीं होती: कंगना

बॉलीवुड में कंगना रनौत को उनकी बेहतरीन अदाकारी के साथ हर मुद्दे पर उनके बेबाकी से राय रखने के लिए जाना जाता है। कंगना न केवल सामाजिक मुद्दों पर खुल पर बात करती है, बल्कि राजनीति पर भी उनकी राय हमेशा स्पष्ट दिखती है। हाल ही में कंगना ने अपनी इसी छवि को कायम रखते हुए दीपिका पादुकोण के जेएनयू पहुँचने पर बात की।

स्पॉटब्वॉय को दिए अपने एक साक्षात्कार में दीपिका पादुकोण को लेकर कंगना रनौत ने कहा कि दीपिका जानती हैं कि वो क्या कर रही हैं और वो किन लोगों के साथ खड़ी हैं। इसलिए वे उनके बारे में कुछ नहीं कह सकती, लेकिन यहाँ कंगना ने ये भी साफ किया कि वे कभी भी टुकड़े-टुकड़े गैंग के पीछे नहीं खड़ी होती।

इस साक्षात्कार में कंगना ने दीपिका के बारे बात करते हुए स्पष्ट कहा, “उन्हें (दीपिका को) अपने लोकतांत्रिक अधिकार को एक्सप्रेस करने का पूरा अधिकार है। वो जानती हैं, कि वो क्या कर रही हैं। मुझे उनके बारे में कुछ भी बोलने का अधिकार नहीं है, कि उन्हें क्या करना चाहिए और क्या नहीं करना चाहिए। मैं सिर्फ ये कह सकती हूँ कि मुझे क्या करना चाहिए।”

कंगना ने इस इंटरव्यू में टुकड़े-टुकड़े गैंग पर अपना पक्ष साफ करते हुए कहा, “मैं कभी भी टुकड़े गैंग के साथ खड़ी नहीं होती। मैं ऐसे किसी भी शख्स का सपोर्ट नहीं कर सकती, जो देश को तोड़ने की बातें करता हो। मैं सिर्फ अपनी बात कर सकती हूँ, किसी और के बारे में बोलने का मुझे अधिकार नहीं है।”

गौरतलब है कि इस दौरान कंगना ने दीपिका की फिल्म छपाक का सोशल मीडिया पर बहिष्कार करने को लेकर भी बयान दिया। उन्होंने कहा कि इन सबसे फिल्म पर असर नहीं पड़ता, अगर फिल्म अच्छी होती है तो जरूर चलती है।

बता दें कंगना रनौत इससे पहले भी जेएनयू को लेकर अपनी प्रतिक्रिया दी थी और जेएनयू के खिलाफ आवाज उठाई थी। जबकि दीपिका पादुकोण जेएनयू में हुई हिंसा के बाद विरोध कर रहे छात्रों का समर्थन करने गई थीं।

अमेरिका से न्यूक्लियर और मिसाइल तकनीक स्मगलिंग करते फिर पकड़ा गया पाकिस्तान

पाकिस्तान के ऊपर न्यूक्लियर स्मग्लिंग और अवैध तरीके से मिसाइल टेक्नॉलोजी को हासिल करने का आरोप कोई नया नहीं है। बिना किसी विज्ञान और तकनीक के आधार पर अपने वैज्ञानिक एक क्यू खान की मदद से चोरी और धोखाधड़ी करके पाकिस्तान पहले परमाणु शक्ति संपन्न देश बना, फिर बैलिस्टिक मिसाइल पावर हासिल की। और अब एक बार फिर उसे तकनीक की चोरी करते पकड़ा गया है।

दरअसल, बुधवार को रावलपिंडी स्थित कंपनी ‘बिजनस वर्ल्ड’ से जुड़े पाँच पाकिस्तानियों पर अमेरिका में आरोप लगा है कि उन्होंने पाकिस्तान के न्यूक्लियर और मिसाइल प्रोग्राम के लिए अमेरिकी तकनीक की स्मगलिंग की है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के जस्टिस डिपार्टमेंट ने पाकिस्तान की चोरी पकड़ते हुए उसका खुलासा किया। उन्होंने कहा, ये पाँच पाकिस्तानी, हॉन्गकॉन्ग और यूके में रहते हैं। इनकी पहचान पाकिस्तान के मोहम्मद कामरान वली (41), कनाडा के मोहम्मद एहसान वली (48) और हाजी वली मोहम्मद शेख (82), हांगकांग के अशरफ खान मोहम्मद और इंग्लैंड के अहमद वहीद (52) के रूप में की गई है। जानकारी के अनुसार
इन सब पर इंटरनेशनल एनर्जी इकोनॉमिक पावर्स ऐक्ट और एक्सपोर्ट कंट्रोल रिफॉर्म ऐक्ट के उल्लंघन की साजिश रचने का आरोप लगा है।

विभाग का कहना है, “ये लोग बिजनस वर्ल्ड के लिए दुनियाभर से खरीद करने का नेटवर्क चलाते थे। बिजनस वर्ल्ड अडवांस्ड इंजिनियरिंग रिसर्च ऑर्गनाइजेशन (एईआरओ) और पाकिस्तान एटॉमिक एनर्जी कमिशन (पीएईसी) के लिए अमेरिका में बने उत्पाद खरीदती है। यह कंपनी अमेरिका से सामानों का निर्यात बिना एक्सपोर्ट लाइसेंस के ही करवाती है जो अमेरिकी कानून का खुला उल्लंघन है।”

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए अमेरिकी असिस्टेंट अटॉर्नी जनरल जॉन सी डेमर्स ने कहा, “प्रतिवादियों (पाकिस्तानियों) ने अमेरिका में निर्मित उत्पाद उन संस्थानों को निर्यात किए जिन्हें अमेरिका की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरे के रूप में चिह्नित किया गया है क्योंकि इन संस्थानों के संबंध पाकिस्तान के हथियार कार्यक्रमों से है।” उन्होंने कहा, “यह एक ऐसा मुद्दा है जो अमेरिका के लिए एक उदाहरण बन सकता है कि उसे निर्यात के नियमों को लागू करने में कड़ाई बरते।”

इसके अलावा, होमलैंड सिक्यॉरिटी इन्वेस्टिगेशंस के ऐक्टिंग स्पेशल एजेंट इन चार्ज जैसन मोलिना ने कहा, “इन पाँच लोगों का कथित व्यवहार अमेरिकी निर्यात कानूनों के उल्लंघन से कहीं ज्यादा बड़ा मसला है। इसने अमेरिकी सुरक्षा हितों के साथ-साथ क्षेत्र के विभिन्न देशों के बीच नाजुक शक्ति संतुलन के लिए भी खतरा पैदा कर दिया है।”

बता दें जस्टिस डिपार्टमेंट की प्रेस रिलीज के मुताबिक, एईआरओ और पीएईसी, दोनों अमेरिकी कॉमर्स डिपार्टमेंट की एंटिटि लिस्ट शामिल हैं। कॉमर्स डिपार्मटमेंट ही उन संस्थानों के लिए एक्सपोर्ट लाइसेंस अनिवार्य करता है जिनकी गतिविधियाँ अमेरिका के राष्ट्रीय सुरक्षा या विदेश नीति के हितों के विरुद्ध पाई जाती हैं। पीएईसी को यूएस कॉमर्स डिपार्टमेंट की एंटिटि लिस्ट में 1998 में जबकि एईआरओ को 2014 में शामिल किया गया था।