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CAA-NRC विरोध: पीएम मोदी और अमित शाह को जान से मारने की धमकी देने वाले अनवर, नियाज गिरफ्तार

सीएए और एनआरसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जान से मारने की धमकी दी गई थी। जिसके आरोप में अनवर और नियाज को बीते मंगलवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक अनवर ने मैसेज के माध्यम से पीएम मोदी और अमित शाह को मारने की धमकी देते हुए कहा था कि सीएए और एनआरसी से मुस्लिम लोग प्रभावित हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुत़ाबिक एक आरोपित की पहचान अनवर के रूप में हुई है जो कि दक्षिणी कर्नाटक के पेरुवई का रहने वाला है। पुलिस ने बताया कि आरोपित अनवर ने क़तर में काम किया है। जिसने सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ लोगों को भड़काने वाले संदेश ऑनलाईन माध्यमों से भेजे थे।

इतना ही नहीं अनवर ने व्हाट्सएप ग्रुपों में जाकर लोगों को सांप्रदायिक दंगों में ढकेलने के लिए ऑडियो मैसेज भी वायरल किए थे। वहीं दूसरे आरोपित की पहचान नियाज़ के रूप में हुई है। जो कि पुरवई क्षेत्र का ही निवासी है।
दस दिन पहले दोनों आरोपितों ने कथित तौर पर इस तरह के भड़काऊ संदेश भेजे थे और यहाँ तक ​​कि इन्होंने वामनजूर स्थित एक आरएसएस कार्यकर्ताओं से भी संपर्क किया था। साथ ही विदेश में काम करने वाले वामनजूर के युवाओं ने व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर सीएए और एनआरसी का विरोध करने के लिए कहा था।

इस संबंध में यतीश नाम के व्यक्ति ने विट्टल थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि सीएए और एनआरसी से मुस्लिमों के प्रभावित होने पर अनवर ने तथाकथित मोदी और अमित शाह को जान से मारने की धमकी दी थी। इसी बीच पुलिस को जानकारी मिली थी कि 6 जनवरी को अनवर अपने गृहनगर क्षेत्र में आया हुआ था जिसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया। वहीं नियाज के खिलाफ भी इस संबंध में पहले ही में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

JNU के साथ एकजुटता दिखाने के लिए NCP के गुंडों ने ABVP के पुणे कार्यालय पर किया हमला

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(JNU) पिछले कुछ दिनों से ग़लत कारणों से चर्चा में है। विश्वविद्यालय में हुई हिंसा ने बहुत से लोगों को चौंका दिया था। वामपंथियों ने इस हिंसा का प्रयोग युवाओं को जुटाने और देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा फैलाने के लिए किया था। वामपंथियों ने JNU में हुई हिंसा के पीछे साफ़ तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का हाथ बताया था। लेकिन, खबरों के मुताबिक वामी गुंडों ने इस हिंसा को शुरू किया था। जिसके बाद वामपंथी, कॉन्ग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियाँ JNU के बहाने ABVP पर हमलावर हो रही हैं।

मंगलवार (7 जनवरी, 2020) को पुणे स्थित ABVP के कार्यालय पर हमला किया गया। हमलावरों ने ABVP ऑफ़िस के बाहर लगे बोर्ड को काली स्याही से रंग दिया। बाद में खुलासा हुआ कि हमलावर राष्ट्रवादी छात्र कॉन्ग्रेस के नेता और शरद पवार की राकांपा के छात्रसंघ अध्यक्ष थे।

एक फेसबुक पोस्ट में विशाल मोर नाम के व्यक्ति ने ख़ुद को NCP का शहर अध्यक्ष और NCP पुणे का अध्यक्ष बताते हुए उसने ख़ुद इस हमले की जिम्मेदारी ली। साथ ही ABVP ऑफिस पर हमले में शामिल अपने फ़ोटो को फेसबुक पर शेयर भी किया।

NCP वर्तमान में शिवसेना और कॉन्ग्रेस के साथ महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में है। शक्ति प्रदर्शन में एक राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा इस तरह का हमला और तोड़फ़ोड़ बेहद निंदनीय है और हमें कोई उम्मीद भी नहीं कि महाराष्ट्र सरकार इन गुंडों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी क्योंकि वे तो अपने हैं। लेकिन हम आशा करते हैं कि राष्ट्र, ABVP के समर्थन में और इन गुंडों के खिलाफ भी खड़ा है जो कि सत्ता की सह पाकर इस तरह की हिंसा करते हैं।

तिरंगा यात्रा पर कुरैशी मोहल्ले में हुई पत्थरबाजी, CAA के समर्थन में निकले थे 40 संगठनों के लोग

मध्य प्रदेश के शाजापुर में तिरंगा यात्रा के दौरान कुरैशी मोहल्ला के लोगों ने पथराव किया। तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि ये यात्रा जैसे ही कुरैशी मोहल्ले में पहुँची, वहाँ मौजूद लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वहाँ हिंसा भड़क गई। ये रैली नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में निकाली जा रही है। जहाँ ये हमला हुआ, उसे मुस्लिमों के प्रभाव वाला इलाक़ा बताया जा रहा है।

मालवा क्षेत्र में स्थित शाजापुर में ये घटना बुधवार (जनवरी 8, 2020) को हुई। पत्थरबाजी होते देख कर आसपास के दूकानदार भी सहम गए और वो अपनी-अपनी दुकानें बंद कर के वहाँ से भाग खड़े हुए। रैली पर हमले होते ही वहाँ भगदड़ मच गई। पुलिस ने बताया कि वो सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपितों की तलाश में जुटी है। इस रैली का आयोजन शहर के 40 संगठनों ने मिल कर किया था। रैली में लोगों ने हाथों में तिरंगा झंडा लिया हुआ था। वो ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगा रहे थे। इसी दौरान उनपर हमला हुआ।

शाजापुर में आईआईटी परिसर से निकली रैली वापस यहीं पर आकर खत्म होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही पथराव कर दिया गया। हालाँकि, पुलिस ने कुछ दूसरी ही कहानी बताई है। पुलिस ने कहा है कि रैली के दौरान बीच में एक गाय आ गई थी, जिसके बाद पत्थरबाजी की अफवाह फ़ैल गई। पत्थरबाजी की अफवाह फैलते ही भीड़ पीछे की ओर भागी, ऐसा पुलिस के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है।

भूतेश्वर क्षेत्र में पुलिस तैनात थी। पुलिस को जैसे ही मामले का पता चला, वो स्थिति नियंत्रित करने निकले। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद रैली आगे बढ़ पाई। पुलिस ने अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं कहा है कि पत्थरबाजी किस ओर से पहली बार हुई। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खँगाल कर दोषियों को चिह्नित करने की बात कह रही है। फ़िलहाल हालात नियंत्रण में है और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की तैनाती कर दी गई है।

एक और बात जानने लायक है कि जिस कुरैशी मोहल्ले में पत्थरबाजी और हमला हुआ है, उसी जगह पर एक वर्ष पूर्व भी ऐसी घटना हुई थी। उस दौरान राजपूत समाज के एक समारोह पर हमला किया गया था। उस दौरान उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था।

दीपिका पादुकोण को मिला पाकिस्तानी सेना का समर्थन, बताया सच्चाई के लिए खड़ी बहादुर महिला

पाकिस्तान की सेना ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया है। बता दें कि दीपिका पादुकोण मंगलवार (जनवरी 7, 2019) को जेएनयू कैम्पस में पहुँची थीं, जहाँ वामपंथी नेता कन्हैया कुमार और जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष मौजूद थी। यह अजीब बात है कि हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन का दावा करने वाले वामपंथियों के नेतृत्व वही आइशी कर रही थीं, जो ख़ुद नकाबपोश गुंडों का नेतृत्व करती देखी गई थीं। दीपिका पादुकोण का वामपंथियों का साथ देना विवाद का विषय बना। शुक्रवार को उनकी फ़िल्म ‘छपाक’ रिलीज हो रही है, ऐसे में लोगों ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया। आसिफ गफूर ने दावा किया कि दीपिका पादुकोण युवाओं के लिए खड़ी हुई हैं, वो सच्चाई के लिए खड़ी हुई हैं। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने दीपिका की तारीफ़ की। उन्होंने दीपिका को एक बहादुर महिला बताया। आसिफ गफूर ने दावा किया कि दीपिका पादुकोण विपरीत परिस्थितियों में भी बहादुर की तरह खड़ी हुईं, जो उन्हें सम्मान के काबिल बनाता है। सीमा पर पाक सेना द्वारा सीजफायर के लगातार उल्लंघन को जायज ठहराने वाले आसिफ गफूर ने कहा कि मानवता को बाकी सभी चीजों से ऊपर रखना चाहिए।

पाक सेना के प्रवक्ता ने दीपिका की तारीफ की, बाद में ट्वीट डिलीट किया

इधर पाकिस्तान खुल कर जेएनयू के वामपंथियों के समर्थन में भी आगे आ रहा है। पाकिस्तान में रैली का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार (जनवरी 8, 2020) को लाहौर के छात्रों और शिक्षकों ने जेएनयू के समर्थन में रैली निकाली। इसके अलावा पाकिस्तान के मंत्री ने भी इनके समर्थन में सोशल मीडिया में अभियान चलाया। लाहौर में आयोजित रैली की थीम शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘लाजिम है कि हम भी देखेंगे’ रखा गया।

दीपिका पादुकोण की फ़िल्म ‘छपाक’ शुक्रवार को रिलीज हो रही है। इसी दिन अजय देवगन की ‘तानाजी’ और रजनीकांत की ‘दरबार’ भी आ रही है। ऐसे में, कई लोग उनके जेएनयू दौरे को एक पब्लिसिटी स्टंट भी बता रहे हैं। ताज़ा सूचना के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने दीपिका पादुकोण को लेकर किए गए ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

जबरन इस्लाम कबूल करवाने के लिए महिला का अपहरण, कुछ ही दिन पहले हुई थी शादी

बांग्लादेश में हिन्दुओं का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। ‘हिन्दू कॉलेज’ की शादीशुदा युवती अनीका रॉय का क्रिसमस 2019 के दिन अपहरण कर लिया गया। बुधवार (दिसंबर 25, 2019) को हुई इस घटना को लेकर वहाँ के हिन्दू समाज में भय का माहौल है। महिला का अपहरण जबरन इस्लामी धर्मान्तरण कराने के मकसद से किया गया। ये घटना तब हुई, जब वह अपने पिता के घर गई थी। उसका अपहरण करने वाले तीनों आरोपित मुस्लिम हैं। बांग्लादेश की इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर वहाँ के कुछ अल्पसंख्यकों ने बताया कि वहाँ ऐसी घटनाएँ रोज़ हो रही हैं।

तीनों आरोपितों के नाम हैं- मोहम्मद नाहिद हसन, मोहम्मद नसीर हैदर और मोहम्मद सबुज। ये सभी ढाका के देमुरा स्थित तम्बूराबाद गाँव के रहने वाले हैं। पीड़िता के पिता अखिल चंद्र रॉय ने इस मामले की शिकायत देमुरा पुलिस स्टेशन में लिखाई है। इसमें ‘बांग्लादेश माइनॉरिटी वाच (BDMW)’ के अध्यक्ष रवींद्र घोष ने उनकी मदद की। बीडीएमडब्ल्यू से इस केस की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी इस केस की शिकायत दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

बीडीएमडब्ल्यू ने बयान जारी कर कहा कि संगठन बांग्लादेश में लगातार होती ऐसी घटनाओं से ख़ासा चिंतित है, जिसमें अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण कर के उनका जबरन धर्मान्तरण कराया जाता है। उनसे जबरन इस्लाम कबूलने को कहा जाता है।

पीड़िता के पिता अखिल चंद्र रॉय स्थानीय व्यवसायी हैं और इसी से अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं। उनकी बेटी अनिका का अपहरण कर लिया गया। अनिका की शादी सुमन चंद्र भौमिक से हुई थी। वो ढाका स्थित काबी नजरुल गवर्नमेंट कॉलेज की छात्रा हैं। अनिका और सुमन की शादी पूरे हिन्दू रीति-रिवाज के साथ हुई थी। घटना के दिन अनिका अपने पति के साथ अपने पिता के यहाँ आई हुई थीं।

रात को 11 बजे जब वो एक फोन कॉल पर बात करते हुए बाहर निकलीं, तभी नाहिद, नसीर और सुबाज ने उसका अपहरण कर लिया। अभी तक ये नहीं पता चल पाया है कि आरोपित पीड़िता का अपहरण करके उसे कहाँ ले गए हैं।

(बांग्ला भाषा में लिखी हुई बांग्लादेश पुलिस की FIR कॉपी का अनुवाद करने के लिए दीपाश्री का सहयोग लिया गया है)

लेफ्ट की हिंसा ‘दादागिरी’ है न कि आंदोलन, खत्म हो जाऊँगी लेकिन वामपंथियों की तरह नहीं करूँगी: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (दिसंबर 8, 2019) को भारत बंद बुलाए जाने के लिए लेफ्ट पार्टियों पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने लेफ्ट पर निशाना साधते हुए कहा है कि वामपंथ की कोई विचारधारा नहीं है। वे केवल बंद बुलाकर और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक लेफ्ट द्वारा राज्य में की गई हिंसा सब ‘दादागिरी’ में आती है न कि आंदोलन में। इससे तो बेहतर है राजनैतिक मौत हो जाए।

एएनआई के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कहा, “वामपंथी पार्टियों की कोई विचारधारा नहीं हैं। रेलवे पटरियों पर बॉम्ब बिछाना गुंडागर्दी में आता है। आंदोलन के नाम पर रास्ते में चलने वालों को मारा जा रहा है और उनपर पथराव हो रहा है। ये दादागिरी है, न कि आंदोलन। मैं इस भारतबंद की निंदा करती हूँ।”

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पश्चिम बंगाल की सीएम ने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियों द्वारा बुलाए बंद को खारिज कर दिया गया है। वे बंद का आह्वान करके और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं, इस प्रचार को हासिल करने के बजाय राजनीतिक मौत बेहतर है।

इसके अलावा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया कि ममता बनर्जी ने कहा है कि वे बंगाल में किसी तरह के बंद की इजाजत नहीं देंगी। उनके अनुसार वे सीएए या एनआरसी के खिलाफ किसी बड़े आंदोलन से नहीं जुड़े हैं, न बंगाल में और न ही देश में कहीं और।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की कथित ‘राष्ट्र विरोधी’ और ‘जन विरोधी’ आर्थिक नीतियों के खिलाफ बुधवार को वाम दल समर्थक 10 ट्रेड यूनियनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया था। राहुल गाँधी ने ट्वीट कर भारत बंद को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने लिखा, “मोदी-शाह सरकार की जनविरोधी, श्रमिक विरोधी नीतियों ने भयावह बेरोजगारी पैदा की है और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कमजोर किया जा रहा है, ताकि इन्हें मोदी के पूँजीपति मित्रों को बेचने को सही ठहराया जा सके। आज 25 करोड़ कामगारों ने इसके विरोध में भारत बंद बुलाया है। मैं उन्हें सलाम करता हूँ।” राज्य में सीएए के विरोध के नाम पर भी जमकर हिंसा हुई थी।

बॉलीवुड की रीत पुरानी: ‘उन्हें’ रखो सिर-माथे पर, हिंदुओं की भावना ठेंगे पर

ख़बरों का क्या है! कुछ पुष्ट सूत्रों से आती हैं तो कुछ अपुष्ट सूत्रों से। फ़िल्मों का सही है। हर शुक्रवार कोई न कोई आ ही जाती है। अब आने वाले शुक्रवार (जनवरी 10, 2020) को ही ले लीजिए। दक्षिण के 70 वर्षीय महानायक रजनीकांत उस दिन ‘दरबार’ लेकर आ रहे हैं। इसमें वे सुनील शेट्टी से फाइट करते दिखेंगे। उसी दिन हिंदी सिनेमा के सुपरस्टार अजय देवगन मराठा योद्धा पर बनी फ़िल्म ‘ताण्हाजी’ लेकर आ रहे हैं। जहाँ रजनीकांत अपनी फ़िल्मों का प्रचार करने के लिए किसी शो वगैरह में जाते नहीं, अजय देवगन ने हर बड़े टीवी शो में जाकर अपनी फ़िल्म का प्रचार किया है। अजय देवगन आक्रामक प्रचार के लिए जाने भी जाते हैं।

हालाँकि, यहाँ बात हम इन दो फ़िल्मों की नहीं करेंगे, क्योंकि इन दो बड़ी फ़िल्मों के साथ एक तीसरी फ़िल्म भी आ रही है। उसका नाम है- छपाक। फ़िल्म की कहानी वास्तविक बताई गई है। एसिड अटैक का सामना करने वाली हमारे देश की बेटी लक्ष्मी अग्रवाल की कहानी इस फ़िल्म में दिखाई गई है। लक्ष्मी को क्या कुछ झेलना पड़ा, वो जान कर कोई भी रो पड़ेगा। उनका पूरा चेहरा जल गया। फिर भी वो लड़ीं, एक योद्धा की तरह। तमाम मुश्किलों का सामना कर वो महिला सशक्तिकरण की आवाज़ बन कर उभरीं।

बायोपिक बॉलीवुड का फैशन रहा है और मात्र 1 रुपए में अपनी कहानी देने वाले मिल्खा सिंह पर बनी फिल्मों ने भी 100 करोड़ की कमाई की है। मेरीकॉम पर बनी फ़िल्म ने भी अच्छी-ख़ासी कमाई की। लेकिन, ठीक उसी तरह वास्तविकता पर फ़िल्में बनाने का दावा कर सच्चाई से छेड़छाड़ करना भी बॉलीवुड का फैशन रहा है। जब फ़िल्म के बारे में चर्चा नहीं हो रही हो तो जबरदस्ती उसे विवादों में घसीटने का भी एक ट्रेंड रहा है। जब टॉपिक कंट्रोवर्सियल होता है तो उस पर चर्चा होती है, वो लोगों तक पहुँचता है। ‘छपाक’ का सामना भी दो बड़ी फ़िल्मों से है।

सबसे पहले ये जानते हैं कि लक्ष्मी अग्रवाल के साथ हुआ क्या था? किशोरावस्था में लक्ष्मी भी आम लड़की की तरह थी। घंटों ख़ुद को आईने में देखती थीं, क्योंकि उनका सपना था कि वो टीवी पर आए। 32 वर्ष के नईम ख़ान ने 15 साल की लक्ष्मी पर सिर्फ़ इसीलिए तेज़ाब फेंक दिया क्योंकि उसने शादी से इनकार कर दिया था। नईम उर्फ़ गुड्डू लगातार एसएमएस कर लक्ष्मी को परेशान करता था। लक्ष्मी की माँ तक को यकीन नहीं हुआ कि नईम ने ऐसा किया है, क्योंकि नईम जान-पहचान वाला था। वो लक्ष्मी की दोस्त का भाई था। लक्ष्मी ने कविताएँ लिखीं, फैशन को लेकर दुनिया के नजरिए को बदला, टीवी पर आईं और एसिड अटैक पीड़ितों के लिए उन्होंने अभियान चलाया।

जब फ़िल्म ‘छपाक’ के वास्तविकता से प्रेरित होने और सच्ची घटना पर आधारित होने की बात कही जाती है, तब ये तो पूछा जाएगा कि इस घटना के दोषियों को इसमें किस रूप में दिखाया गया है। सिनेमा वाले ऐसे किसी भी विवाद में नहीं पड़ना चाहते, जिससे उन्हें इस बात का ख़तरा हो कि उनके ख़िलाफ़ एक भी, एक भी मुस्लिम सड़क पर निकल कर विरोध-प्रदर्शन कर सकता है। अभी हमने देखा कि फराह ख़ान, रवीना टंडन और भारती सिंह को रोमन कैथोलोक बिशप से मिल कर माफ़ी माँगनी पड़ी, क्योंकि ईसाई समुदाय उनके ख़िलाफ़ प्रदर्शन कर रहा था। सोशल मीडिया पर सार्वजनिक रूप से माफ़ी माँगने से भी काम नहीं चला तो उन्होंने लिखित में अलग-अलग माफ़ीनामा सौंपा। क्यों सौंपा? क्योंकि वो विवादों से दूर भागना चाहते थे। वो ऐसा क्यों चाहते थे?

क्योंकि विवाद ईसाई समुदाय से जुड़ा था। लेकिन जैन मुनि तरुण सागर पर विवादित टिप्पणी करने वाला संगीतकार तब उनकी चौखट पर पहुॅंचा जब उसे पुलिसिया कार्रवाई का डर सताने लगा। लेकिन, जब मामला ईसाई या मुस्लिम धर्म से जुड़ा रहता है तो इन्हें माफी मॉंगने में सेकेंड भर देरी नहीं लगती। विवाद मुस्लिम अथवा ईसाई समुदाय से जुड़ा हो अथवा उनके विरोध का डर हो तो एक भी बॉलीवुड सितारा रिस्क नहीं लेना चाहता। वहीं जब बात बहुसंख्यक समुदाय की हो, तब लाख प्रदर्शनों के बावजूद वो माफ़ी नहीं माँगते और दिखाते हैं कि ‘देखो, हम उपद्रवियों के सामने नहीं झुक रहे।’ वो ऐसा क्यों करते हैं?

जब विश्वरूपम में कमल हासन दिखाते हैं कि आतंकी इस्लामी टोपी पहने गोलियाँ चला रहे हैं तो उन्हें इतना परेशान किया जाता है कि वो देश छोड़ कर जाने की बातें करने लगते हैं। ‘चक दे इंडिया’ में मीर रंजन नेगी को कबीर ख़ान बना दिया जाता है। पूरा लब्बोलुआब ये है कि जब किसी ने अच्छा कार्य किया हो तो उसे हिन्दू से मुस्लिम बनाने में बॉलीवुड वालों को कोई समस्या नहीं होती। लेकिन, जब किसी ने कोई बुरा कार्य किया हो तो उसके किरदार को मुस्लिम से हिन्दू बना दिया जाता है। क्यों? क्योंकि मामला ‘उनका’ हो तो रिस्क नहीं लेना है।

अगर आप सोच रहे हैं कि ये सब नया है तो शायद आप ग़लतफहमी में हैं। दरअसल, ये तो बॉलीवुड का ट्रेंड रहा है। सलीम ख़ान और जावेद अख्तर की कहानियों में ढोंगी, लालची, चाटुकार, लुटेरा और ठग जैसे किरदारों को पंडित दिखाया जाता था। ठीक इसके उलट, देश के लिए क़ुरबानी की बात करने वाले, वफ़ादार दोस्त, दूसरों का भला करने वाला और कुछ ज्यादा ही ईमानदार किरदारों को मुस्लिम दिखाया जाता था। ये ट्रेंड शुरू से चला आ रहा है। ‘पद्मावत’ में एक पंडित को चाटुकार और गद्दार दिखाया गया। ‘शोले’ में एक ‘बेचारा’ मौलवी, जो अपने बेटे को ‘कुर्बान कर देने’ की बात करता है। ‘वास्तव’ में परेश रावल का किरदार, एक ईमानदार दोस्त जो रघु के लिए जान दे देता है। लम्बा इतिहास रहा है ऐसा।

जेएनयू में दीपिका पादुकोण ने जाकर उस कंट्रोवर्सी को जन्म दे दिया, जिससे फ़िल्म की चर्चा हो और जिस पर लाख विवादों के बावजूद माफ़ी न माँग कर ख़ुद की छवि और ‘मजबूत’ दिखाई जा सके।

पीआर एजेंसियों के इशारों पर नाचने वाली बॉलीवुड सेलेब्रिटी होते ही ऐसे हैं। जब फलाँ मुद्दा ख़ूब चल रहा है तो उस पर उनसे बयान दिलवाया जाता है। विवाद में पड़े बिना जब पब्लिसिटी की जरूरत होती है तो यही अभिनेता या अभिनेत्री सोशल मीडिया में’संविधान की प्रस्तावना’ को शेयर कर देते हैं। वैसे ही दीपिका ने सीएए, हैदराबाद एनकाउंटर, निर्भया फ़ैसला और मुस्लिमों के आतंक पर कुछ नहीं बोला। लेकिन चूँकि उनकी फ़िल्म का रिलीज डेट नजदीक है, जेएनयू में उनकी उपस्थिति ने वो काम कर दिया, जो उनके बयान देने से भी नहीं होता। यही बॉलीवुड की रीत है।

JNU में दीपिका पादुकोण का जाना प्रचार की पैंतरेबाजी, पाकिस्तान ने थपथपाई पीठ

JNU में वामपंथी छात्रों का समर्थन करने पहुँचीं दीपिका पादुकोण, मुंबई का फ़िल्मी गैंग भी सड़क पर

136 रेप सहित 159 यौन अपराधों को अंजाम देने वाले सबसे खतरनाक बलात्कारी को मिली 60 साल की सजा

ब्रिटेन में 190 लोगों को निशाना बनाकर 159 यौन अपराधों को अंजाम देने वाले अपराधी की पहचान इंडोनेशिया निवासी रिनहार्ड सनागा के रूप में हुई है। रिनहार्ड को ब्रिटेन की अदालत ने चार अलग-अलग मुक़दमों में 136 बलात्कार, 8 बलात्कारों की कोशिश और 14 अन्य यौन अपराधों का दोषी पाया है।

इसके अलावा पुलिस ने दावा किया कि रिनहार्ड ने 190 लोगों को अपना निशाना बनाया। बता दें इस मामले में एक चौंकाने वाला खुलासा ये भी है कि सनागा आमतौर पर अपनी हवस मिटाने के लिए पुरुषों को निशाना बनाता था। वो भी ऐसे पुरुषों को, जो समलैंगिक नहीं थे।

साभार: डेली मेल

गौरतलब है कि रिनहार्ड के कुकर्मों का पर्दाफाश होने के बाद ब्रिटेन की पुलिस ने उसे उनके न्यायिक इतिहास में रिनहार्ड सनागा का सबसे खतरनाक बलात्कारी बताया है। साथ ही आशंका जताई कि वो पूरी दुनिया में भी ‘सबसे खतरनाक बलात्कारी’ हो सकता है।

बता दें, 36 वर्षीय रिनहार्ड 2 मामलों के आरोप में उम्रकैद की सजा काट रहा था। उसे 60 साल के लिए जेल में डाला गया है और ये भी निर्देश दिए गए हैं कि उसकी पैरोल के लिए विचार करने से पहले भी कम से कम उसे 30 साल की हिरासत में रहना होगा।

साल 2017 में रिनहार्ड की गिरफ्तारी से पहले वो यूनिवर्सिटी ऑफ़ लीड्स से पीएचडी कर रहा था और पुरुषों का बलात्कार करने से पहले उन्हें बेहोशी की दवा देता था। जिससे पीड़ितों को जागने पर पता ही नहीं होता था कि आखिर उनके साथ हुआ क्या..।

जानकारी के मुताबिक सनागा नाइट क्लबों और बार से बाहर निकलने वाले मर्दों का इंतज़ार करता था और फिर उन्हें अपने फ़्लैट में ले जाता था। वो अपने शिकार को शराब या उनके लिए टैक्सी मंगवाने की पेशकश करता था और फिर बहला-फुसलाकर अपने फ्लैट पर लेजाकर उनका बलात्कार करता था।

कैसे हुई गिरफ्तारी

साल 2017 सनागा को जून 2017 में गिरफ़्तार किया गया था जब उसका एक शिकार बनने वाला युवक बलात्कार की कोशिश के दौरान ही होश में आ गया और उसने फौरन पुलिस को बुला लिया।

जब पुलिस ने शिकायत के आधार पर सनागा का मोबाइल फ़ोन अपने क़ब्ज़े में लिया तो उन्हें सैकड़ों घंटों की फुटेज मिली। जिन्हें सनागा ने बलात्कार के दौरान बनाया था। पुलिस ने बताया है कि सनागा पीड़ितों को बेहोश करने के लिए कुछ बेहद ख़तरनाक और प्रतिबंधित ड्रग्स का इस्तेमाल करता था।

जज ने फैसला सुनाते हुए रिन्हार्ड को कहा शैतान जैसा यौन शिकारी

सोमवार को अदालत में सुनवाई के दौरान जस्टिस सुजैन गोडार्ड ने कहा, ”रिनहार्ड सनागा एक शैतान जैसा यौन शिकारी है जिसे कभी भी रिहा करना खतरनाक होगा।” अदालत ने इस मामले की रिपोर्टिंग पर लगी पाबंदी भी हटा ली जिसके बाद सनागा की पहचान सार्वजनिक कर दी गई।

बता दें, सनागा के शिकार कई पीड़ित पुरुषों की मैनचेस्टर स्थित ‘सेंट मैरी सेक्शुअल असॉल्ट रेफ़रल सेंटर’ में काउंसलिंग की जा रही है। सेंटर में काम करने वाली लिज़ा वॉटर्स ने बताया कि कई पुरुषों के लिए अब भी इस सदमे से निकलना बेहद मुश्किल हो रहा है। कई पीड़ित मानसिक तकलीफ़ और ‘ख़ुदकुशी के ख़याल’ से जूझ रहे हैं।

डेलीमेल की रिपोर्ट के अनुसार, कई पीड़ितों का कहना है कि सनागा ने उनकी जिंदगी तबाह कर दीं। वो कभी नहीं चाहते कि वो जेल से बाहर आए। पीड़ितों का कहना है कि वो चाहते हैं कि सनागा हमेशा नरक में सड़े। उसके कुकर्म के कारण एक पीड़ित ने बताया कि अभी भी कई बार ऐसा होता है जब वे उठता है, लेकिन अपना सामना नहीं कर पाता। वहीं कुछ पीड़ित ऐसे भी मिले, जिन्हें अब तक नहीं पता था कि उनके साथ ऐसा कुछ हुआ। इस मामले की जाँच में जुटे अधिकारियों ने सनागा के शिकार हुए 70 अन्य पीड़ितों की पहचान करने में असफलता के बाद पीड़ितों से निडर होकर सामने आने की अपील की है।

क्या 1 करोड़ लोगों को एयरलिफ्ट करने का आ गया वक्त: मिसाइल हमलों, प्लेन क्रैश से बढ़ी आशंका

ईरान के सर्वोच्च कमांडर क़ासिम सुलेमानी को बग़दाद के एयरपोर्ट पर अमेरिका ने मार गिराया। इसके बाद ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ गया। बदला लेने की बात करते हुए ईरान ने अमेरिका की पूरी सेना को ही ‘आतंकवादी समूह’ घोषित कर दिया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर ईरान ने एक भी मिसाइल दागी तो अमेरिका उसकी ऐतिहासिक इमारतों को निशाना बनाएगा। अब पता चला है कि बगदाद के पश्चिमी क्षेत्र में ईरान ने अमेरिकी एयर बेस पर दर्जन भर मिसाइलें दागी है। दुनिया भर में तेल के दाम बढ़ गए हैं और भारत पर भी इसका असर पड़ रहा है।

सबसे पहले ताजा घटना के बारे में जानते हैं। ईरान ने अमेरिकी एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल फायर किया। हालाँकि, इसमें किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया कि सब ठीक है और यूएस इस बात के आकलन में लगा है कि नुकसान कितना हुआ है? ईरान के सबसे बड़े नेता आयतुल्लाह खामनेई ने कहा कि ये हमले अमेरिका को तमाचा है। मिसाइल हमले के ठीक बाद तेहरान से यूक्रेन जा रहा यात्री विमान उड़ान भरने के बाद दुर्घटनाग्रस्‍त हो गया। इसमें 176 लोगों की मौत हो गई।

ईरान ने 1979 में तेहरान स्थित अमेरिकी दूतावास को सीज़ कर लिया था। इसके बाद से यह पहला मौक़ा है, जब ईरान ने हमला किया हो। ईरान के ‘रिवोल्यूशनरी गार्ड्स’ ने स्पष्ट कर दिया है कि ये हमले सुलेमानी की मौत के बदले के लिए किया गया है। ईरान ने उन सभी देशों को भी चेतावनी दी है, जिन्होंने अमेरिकी सेना को अपना एयरबेस इस्तेमाल करने की अनुमति दी हुई है। ईरान के सेनाध्यक्ष मोहम्मद बाकेरी ने कहा कि ये हमले ईरान की क्षमता का एक नमूना भर है। वहीं ईरान के विदेश मंत्री जावेद जारिफ ने दावा किया कि हमले बदले की भावना से नहीं, बल्कि आत्मरक्षा में किए गए। इससे पता चलता है कि ईरान बदला तो ले रहा है, लेकिन वो दुनिया की नज़र में दोषी नहीं दिखना चाहता।

जहाँ तक ईरान-अमेरिका के रिश्तों की बात है तो 1979 तक सब ठीक था। ईरान में शाह का राज था, जिन्हें अमेरिका का समर्थन प्राप्त था। तख्तापलट के बाद ईरान एक इस्लामी गणतंत्र बना और दर्जनों अमेरिकी नागरिकों को बंधक बनाया गया। तब से रिश्ते तनावपूर्ण हैं। 2015 में लगा था कि सब ठीक हो रहा है, क्योंकि ईरान ने अपनी परमाणु गतिविधियों पर लगाम लगाने का वादा किया था। उस पर से कई आर्थिक प्रतिबन्ध हटा लिए गए थे, जिसके बाद उसने वादा निभाया भी। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इस करार को ग़लत ठहराया और तनाव बढ़ने फिर शुरू हो गए।

2018 में ईरान पर फिर से आर्थिक प्रतिबन्ध लगा दिए गए, जिसके बाद उसकी अर्थव्यवस्था की स्थिति ख़राब हो गई। 2019 के दिसंबर में इराक़ में एक अमेरिकी कांट्रेक्टर की मौत का इल्जाम ईरान पर लगा। अमेरिका ने बदले की कार्रवाई की, जिसमें 25 ईरानी लड़ाका मारे गए। इसके बाद इराक़ की राजधानी बग़दाद में यूएस एम्बेसी पर हमला किया गया। इस हमले में सुलेमानी का हाथ सामने आने के बाद अमेरिका ने बड़ी कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया। सुलेमानी मिडिल ईस्ट का एक ताक़तवर चेहरा था, जो ईरान के लिए लड़ाकू युद्धों का नेटवर्क बना रहा था और उसका प्रबंधन करता था।

अब सवाल ये उठता है कि इसका भारत पर क्या पड़ेगा? भारत में ईरानी दूतावास ने कहा था कि अमेरिका-ईरान के संबंधों में आए तनाव में अगर भारत मध्यस्थता करता है तो ईरान उसका स्वागत करेगा। तेल के दाम बढ़ने पर भारत में इसका असर पड़ना लाजिमी है। भारत, ईरान के सबसे बड़े ग्राहकों में से एक रहा है। विदेश मंत्री एस जयशंकर हाल ही में तेहरान गए थे। खाड़ी देशों में भारत के 1 करोड़ के क़रीब कामगार मौजूद हैं, जिन पर इसका असर पड़ सकता है। भारत ने वहाँ की यात्रा करने वालों के लिए एडवाइजरी भी जारी की है।

1990-1991 में खाड़ी संकट के वक्त हजारों की संख्या में फँसे नागरिकों को को कुवैत और दूसरी जगहों से निकालने में भारत के पसीने छूट गए थे। अगर फिर से ऐसी स्थिति बनती है तो ये और भी परेशानी की बात हो सकती है। भारत ने ईरान के चाबहार पोर्ट में अरबों रुपए का निवेश किया है और अफ़ग़ानिस्तान तक सड़क निर्माण भी करवाया है। भारत को ये भी देखना है कि अमेरिका से उसके रिश्ते ख़राब न हों।

गौरतलब है कि 1990 में जब इराक़ ने कुवैत पर हमला किया था, तब वहाँ से 1 लाख 70 हज़ारो भारतीयों को निकाला गया था। भारत सरकार और कुवैत में भारतीय उद्योगपति जॉन मैथ्यू ने एयरलिफ्ट को अंजाम देने में बड़ी भूमिका निभाई थी। सोचिए, आज तो खाड़ी देशों में हमारे 1 करोड़ लोग हैं। लगभग ढाई महीने चली उस प्रक्रिया में एयर इंडिया की 488 फ्लाइट्स ने उड़ान भरी थी। सोचिए, अभी अगर ऐसी हालत आती है तो कितना समय लगेगा और कितनी उड़ानों की व्यवस्था करनी पड़ेगी।

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JNU के सम्मान में, पाकिस्तान मैदान में: लाहौर में निकली रैली, Pak विदेश मंत्री ने भी किया समर्थन

जेएनयू में हिंसा करने वाले वामपंथियों को सिर्फ़ दीपिका पादुकोण और स्वरा भास्कर जैसी अभिनेत्रियों से ही समर्थन नहीं मिल रहा है। पाकिस्तानी भी खुल कर इनके समर्थन में आगे आ रहे हैं। पाकिस्तान में रैली का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार (जनवरी 8, 2020) को लाहौर के छात्रों और शिक्षकों ने जेएनयू के समर्थन में रैली निकाली। इसके अलावा पाकिस्तान के मंत्री ने भी इनके समर्थन में सोशल मीडिया में अभियान चलाया। लाहौर में आयोजित रैली की थीम शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘लाजिम है कि हम भी देखेंगे’ रखा गया।

फैज़ को लेकर विवाद तब शुरू हुआ जब आईआईटी कानपुर ने एक जॉंच कमेटी बनाई। कमिटी इस बात की जाँच कर रही है कि जिस दिन फैज का नज्म IIT कैंपस में गाया गया, उस दौरान विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन किया गया या नहीं। छात्रों द्वारा विरोध-प्रदर्शन में उनका नज़्म गए जाने के बाद इस पर विवाद शुरू हो गया था कि क्या ये हिन्दुओं के प्रति घृणा फैलाता है? इसके बाद वामपंथी गैंग फैज़ को भारत भक्त साबित करने में जुट गया था और ‘कला का कोई मजहब नहीं होता’ वाला पुराना और घिसा-पिटा तर्क देने लगा था। अब पाकिस्तान में भी फैज़ और जेएनयू के समर्थन में रैली निकल रही है।

इसी क्रम में पाकिस्तान के विदेश मंत्री मीडिया को सम्बोधित तो कर रहे थे ईरान और अमेरिका के मुद्दे पर, लेकिन उनके दिलोंदिमाग में भारत का विरोध ही छाया रहा। तभी तो ईरान पर बोलते-बोलते उन्होंने भारत सरकार पर ‘जेएनयू में हिंसा करने’ का आरोप लगा दिया। उन्होंने कहा कि छात्रों और प्रोफेसरों की पिटाई की जा रही है। उन्होंने कहा कि जेएनयू में छात्रों पर हुए हमले से पता चलता है कि भारत में असहिष्णुता तेज़ी से बढ़ रही है। पाक मंत्री ने आरोप लगाया कि पुलिस ने आरएसएस के साथ मिल कर छात्रों को पीटा।

लाहौर में जेएनयू के समर्थन में आयोजित रैली का पोस्टर

पाकिस्तान के विदेश मंत्री शाह महमूद कुरैशी ने कहा कि भारत के सभी विश्वविद्यालय में आरएसएस के लोग ऐसा ही कर रहे हैं। जेएनयू को पाकिस्तान की सत्ता और वहाँ के लोगों से भी भरपूर प्यार मिल रहा है। भारत का वामपंथी गैंग तो पहले से ही उनके समर्थन में खड़ा है।

जेएनयू में हुई हिंसा में वामपंथी गुंडों का हाथ सामने आ रहा है और कई वीडियो भी इस बात की पुष्टि करते हैं। फिर भी मामला भटकाने के लिए वामपंथी ही ख़ुद को पीड़ित बता कर एबीवीपी, सरकार और पुलिस पर इल्जाम लगाने में जुटे हैं।

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