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दिल्ली विधानसभा चुनाव 2020 का ऐलान: 8 को मतदान, 11 फरवरी को घोषित होंगे नतीजे

दिल्ली में विधानसभा चुनाव 2020 का बिगुल आज (जनवरी 6, 2020) बज गया। भारतीय निर्वाचन आयोग ने दिल्ली विधानसभा चुनावों की तारीखों का ऐलान करते हुए राष्ट्रीय राजधानी में आचार संहिता लागू की। चुनाव आयोग के ऐलान के अनुसार, आगामी 8 फरवरी को मतदान होगा और 11 फरवरी को नतीजे घोषित होंगे।

मुख्य चुनाव आयुक्त सुनील अरोड़ा ने बताया कि चुनाव सिंगल फेज में होगा और इसके लिए 14 जनवरी को नोटिफिकेशन जारी होगा। नॉमिनेशन की अंतिम तिथि 21 जनवरी होगी और नामांकन वापस लेने की अंतिम तिथि 24 जनवरी रखी गई है।

गौरतलब है कि वर्तमान दिल्ली विधानसभा का कार्यकाल 22 फरवरी को खत्म होगा। पिछले विधानसभा में अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी ने 70 सीटों में से 67 सीटें अपने हिस्से में दर्ज की थीं। इस बार दिल्ली में 13,750 पोलिंग बूथ पर करीब 1.46 करोड़ मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग करेंगे।

चुनाव आयोग की ओर से सुनील अरोड़ा ने बताया कि स्थिति पर निगरानी रखने के लिए मीडिया मॉनिटरिंग सेंटर बनाए गए हैं। इस बार 2,689 जगहों पर कुल 13,750 मतदान केंद्र होंगे। इसके अतिरिक्त बुजुर्गों के लिए भी आयोग ने खास इंतजाम किए हैं, जिससे उनको वोट डालने में आसानी हो।

पूरी चुनाव की प्रक्रिया संपन्न कराने के लिए 90 हजार कर्मचारियों की तैनाती की जाएगी। साथ ही
दिल्ली विधानसभा चुनाव में पोलिंग स्टेशन पर मोबाइल फोन के लिए लॉकर की सुविधा प्रदान की जाएगी और सी-विजिल ऐप के जरिए आचार संहिता के उल्लंघन संबंधी शिकायतों को दर्ज कराया जा सकेगा।

बता दें कि साल 2015 में हुए विधानसभा चुनाव में आम आदमी पार्टी को 70 में से 67 सीटें मिली थीं। भाजपा ने 3 सीटें जीती थीं, वहीं कॉन्ग्रेस अपना खाता भी नहीं खोल पाई थी। 2015 में चुनाव आयोग ने 12 जनवरी को दिल्ली चुनाव की घोषणा की थी और 7 फरवरी को मतदान हुआ था जिसका 10 फरवरी को नतीजा आया था।

JNU की जिस प्रेसिडेंट का रात में फूटा माथा, दिन में वो खुद नक़ाबपोश हमलावरों के साथ थीं – Video Viral

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) अभी चर्चा में है। वहाँ कैंपस में नकाबपोशों के द्वारा हिंसा की गई है। आरोप-प्रत्यारोप वामपंथी और दक्षिणपंथी दोनों एक-दूसरे पर लगा रहे हैं। हिंसा छोटी-मोटी नहीं बल्कि भयानक स्तर की – यह आप वहाँ से आए वीडियो और फोटो देखकर समझ सकते हैं। इसी हिंसा का शिकार JNUSU (जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी स्टूडेंट यूनियन) की अध्यक्ष आइशी घोष भी हुईं। उनका सर फटा, खून से लथपथ उनका चेहरा वायरल हुआ। चूँकि आइशी घोष वामपंथ से हैं, तो जाहिर सी बात है कि आरोप दक्षिणपंथी ABVP पर लगाया गया। खबरें भी बनीं, वायरल भी हुई।

यह पूरा प्रकरण कल यानी 5 जनवरी को देर रात हुआ। लेकिन सुबह होते-होते यानी 6 जनवरी को JNU में हिंसा किसने की, हिंसा को कौन प्रभावित कर रहा था – इसका दूसरा पहलू भी सामने आ गया। जो आरोप ABVP पर लगा कर उसे गुंडा तत्व बताया जा रहा था, दो वीडियो ने इस आरोप की हवा निकाल दी। लेकिन वीडियो में दिख रहे उजाले और मास्क पहने लड़के-लड़कियों को समझने के लिए आपको 5 जनवरी को हुई हिंसा से दो दिन पहले हुए घटनाक्रम को समझना होगा।

JNU में हिंसा की शुरुआत होती है 3 जनवरी से। लेकिन यह मेनस्ट्रीम मीडिया में खबर बनकर आती नहीं है। आती भी है तो छिटपुट घटना के तौर पर। दरअसल उस दिन छात्रों के एक नक़ाबपोश ग्रुप ने दोपहर के क़रीब 1 बजे सूचना प्रणाली केंद्र में जबरन घुसकर लाइट बंद कर दी थी, पूरे टेक्निकल स्टाफ़ को बाहर खदेड़ दिया था और सर्वर बंद कर दिया। ये सब इसलिए किया गया था ताकि जो छात्र (पढ़ने वाले, आंदोलन से जिनका दूर-दूर तक कोई वास्ता नहीं) अपने सेमेस्टर एग्जाम के लिए रजिस्ट्रेशन करवा रहे थे, उनको रोका जाए, उन्हें जबरन अपने आंदोलन से जोड़ा जाए। विश्वविद्यालय प्रशासन को यह दिखाया जाए कि सभी छात्र आंदोलन में एकसाथ हैं। वामपंथी छात्रसंघ का यह हंगामा सफल भी हुआ और छात्रों का रजिस्ट्रेशन प्रोसेस उस दिन बुरी तरह से प्रभावित हो गया, उसे बंद करना पड़ा।

इस खबर को आप डिटल में यहाँ पढ़ सकते हैं : JNU में नक़ाबपोश छात्रों ने लाइट बंद कर किया हंगामा: टेक्निकल स्टाफ को किया बाहर, रजिस्ट्रेशन में डाला व्यवधान

4 जनवरी को माहौल गर्म था लेकिन कुछ हुआ नहीं। फिर 5 जनवरी को क्यों भड़क गई बात? इसके पीछे वजह टेक्निकल है। 5 जनवरी यानी रविवार को रजिस्ट्रेशन का आखिरी दिन था। एबीवीपी से जुड़े छात्रों के अलावा भी जो पढ़ाई-लिखाई का प्रक्रिया से जुड़े रहना चाहते थे, वो रजिस्ट्रेशन के लिए गए थे। मगर लेफ्ट विंग के छात्रों ने सर्वर रूम को लॉक कर दिया और वाई-फाई काट दिया। जिसकी वजह से उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया। बात इतने पर भी खत्म नहीं हुई। ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन में आ रही समस्या को देखते हुए कुछ छात्र-छात्राएँ मैनुअल रजिस्ट्रेशन करवा रहे थे। अब वामपंथियों को लगने लगा कि आंदोलन उनके हाथ से फिसलता जा रहा है। अगर छात्र ही उनके साथ नहीं होंगे तो फिर काहे की छात्र राजनीति! बस उन्होंने मैनुअल रजिस्ट्रेशन करवा रहे छात्र-छात्राओं के साथ मारपीट शुरू कर दी। और यह सब हुआ दिन के उजाले में। जबकि नेशनल मीडिया में JNU बवाल की खबर आती है शाम से। वीडियो, फोटो शेयर किए जाते हैं रात वाले।

आइशी घोष (बाएँ लाल घेरे में, दाएँ घायल)

रात में जितना भी बवाल होता है, जितनों को चोट लगती है – सबका आरोप ABVP के ऊपर मढ़ दिया जाता है। PM मोदी से लेकर अमित शाह तक को आतंकवादी बता दिया जाता है। और खुद JNUSU प्रेसिडेंट के सर फटी तस्वीर से नैरेटिव फिट भी बैठ रहा था वामपंथियों का… लेकिन ट्विस्ट आता है सोशल मीडिया के जरिए 6 जनवरी को – 2 वीडियो के जरिए। दोनों दिन के उजाले वाले वीडियो। एक में भीड़ द्वारा छात्र-छात्राओं को पीटा जाना, दूसरे में मास्क पहने या मुँह ढँकी भीड़ के साथ खुद JNUSU प्रेसिडेंट का होना। JNU प्रशासन ने भी जो बयान जारी किया, उसमें भी कहा गया कि विरोध-प्रदर्शन कर रहे छात्रों द्वारा नए सेमेस्टर के लिए पंजीकरण कराने गए छात्रों को रोकने की कोशिश की गई, उनके साथ मारपीट की गई।

लेकिन, सोशल मीडिया के युग में सच्चाई अधिक दिनों तक छिप नहीं पाती। ऐसा ही कुछ इस मामले में भी हुआ। दरअसल, ट्विटर पर अभिजीत अय्यर मित्रा ने एक वीडियो क्लिप शेयर की, जो सूर्यास्त के पहले शाम 5:37 बजे की है। इस क्लिप में आइशी को ख़ुद उन्हीं नक़ाबपोश छात्रों के समूह के साथ देखा गया। इस वीडियो में देखा जा सकता है कि वो न सिर्फ़ उन नक़ाबपोशों के साथ थीं बल्कि वो उन छात्रों को डायरेक्शन भी दे रही थीं।

वामपंथियों की करतूत का पर्दाफ़ाश करते इस इसी वीडियो को फ़िल्म निर्देशक विवेक अग्निहोत्री ने भी शेयर किया और लिखा कि ख़ुद वामपंथी गिरोह रजिस्ट्रेशन करने देना नहीं चाहते थे, इसलिए उन्होंने छात्रों के साथ मारपीट की, वाई-फाई कनेक्शन काट दिया और फिर वापस अपने हॉस्टल में आ गए।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि JNUSU की प्रेसिडेंट एक तरफ़ तो पूरे प्रकरण के लिए ABVP को दोषी ठहराने में जुटी रहीं, वहीं दूसरी तरफ़ उनकी पोल इस बात पर खुल जाती है कि अगर ऐसा है तो फिर वो ख़ुद मास्क लगाए गुंडों के साथ क्या कर रही थीं?

सच तो यह है कि JNU में यह सब एक ऐसी साज़िश के तहत किया गया जिसका मक़सद ABVP को बदनाम कर उसे हिंसात्मक दिखाना है और लोगों के बीच भाजपा के छात्र संगठन के लिए ज़हर घोलना है। छात्रों को रजिस्ट्रेशन न करने देने की धमकी और विश्वविद्यालय में उत्पात मचाने के पीछे एक सोची-समझी चाल थी, जिसके पासे ख़ुद वामपंथियों ने ही फेंके थे।

JNU हिंसा में वामपंथी हुए बेनकाब! एक मोबाइल नंबर, एक व्हॉट्सअप ग्रुप और कई स्क्रीनशॉट से पर्दाफाश

‘रजिस्ट्रेशन कराने गईं छात्राओं के प्राइवेट पार्ट पर हमला, बाथरूम ले जाकर दुर्व्यवहार’ – JNU मामले में गंभीर आरोप

‘जामिया में पुलिस क्यों घुसी’ से लेकर ‘JNU में पुलिस क्यों नहीं गई’ तक: गिरोह विशेष का दोहरा रवैया

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JNU में नक़ाबपोश छात्रों ने लाइट बंद कर किया हंगामा: टेक्निकल स्टाफ को किया बाहर, रजिस्ट्रेशन में डाला व्यवधान

प्रशासन ने बताई JNU में हमलावरों की ‘पहचान’: विपक्ष जबरदस्ती ठहरा रहा सरकार को जिम्मेदार

जेएनयू में सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन को लेकर हुए विवाद ने रविवार (जनवरी 5, 2019) को एक भयंकर रूप ले लिया। यहाँ छात्रों/युवाओं के एक समूह ने कल शाम हॉस्टल परिसर में घुसकर काफी तोड़फोड़ और मारपीट की। हालाँकि, पूरे प्रकरण के लिए विश्वविद्यालय ने अपनी ओर से जारी बयान में उन लोगों को स्पष्ट तौर पर जिम्मेदार बताया, जो कुछ समय पहले तक फीस बढ़ोतरी का विरोध कर रहे थे और अब सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन रोकने के लिए 3 जनवरी से ही हिंसक हो गए थे। लेकिन, फिर भी सोशल मीडिया पर लगातार वामपंथी गिरोह द्वारा एबीवीपी को जिम्मेदार ठहराया गया । और, मौक़ा देखकर अपनी-अपनी राजनीति साधने के लिए विपक्ष भी सरकार को सवालों को घेरे में लेता रहा।

विश्वविद्यालय का बयान

पूरे प्रकरण पर विश्वविद्यालय द्वारा जारी बयान में स्पष्ट बताया गया कि पंजीकरण की प्रक्रिया 1 जनवरी तक बड़े आराम से चल रही थी। लेकिन 3 जनवरी को छात्रों का एक समूह नकाब पहनकर CIS के परिसर में घुसा और टेक्निकल स्टॉफ को रूम से निकालकर, वहाँ तोड़फोड़ की। जिससे इंटरनेट सेवा बाधित हो गईं। इस संबंध में स्टाफ ने छात्रों की पहचान कर उनके ख़िलाफ़ पुलिस शिकायत करवाई।

प्रेस नोट का पहला पन्ना

इसके बाद 4 जनवरी को सर्वर ठीक करके प्रक्रिया दोबारा चालू हुई। जिसके बाद हजारों बच्चों ने बढ़ी फीस के साथ सुबह-सुबह ही अपना रजिस्ट्रेशन करवा दिया। लेकिन 3 तारीख की तरह 4 जनवरी को भी दोपहर 1 बजे कुछ छात्र दोबारा परिसर में सर्वर बंद करने के लिए घुसे। जहाँ उन्होंने पहले पॉवर सप्लॉई बंद की, तारों को तोड़ा और रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया बाधित करने के लिए फिर से सर्वर बंद कर गए। इस घटना के बाद दोबारा पुलिस में शिकायत दर्ज हुई।

प्रेस नोट का दूसरा पन्ना

बयान के मुताबिक, इस दौरान इन प्रदर्शनकारियों ने कुछ छात्रों और शिक्षकों को परिसर में प्रवेश करने से भी रोका। साथ ही गैर प्रदर्शनकारी छात्रों के स्कूल बिल्डिंग में घुसते हुए उनसे मारपीट भी की।

यही छात्र 5 जनवरी को करीब 4:30 बजे प्रशासनिक विभाग से होते हुए उन छात्रों के कमरों की ओर चल पड़े, जो फीस बढ़ौतरी के पक्ष में थे, और अगले सेमेस्टर के लिए बढ़ी हुई फीस के साथ अपना रजिस्ट्रेशन कर रहे थे। विश्वविद्यालय द्वारा जारी बयान के अनुसार पेरियार हॉस्टल में इन छात्रों ने डंडों और रॉड से मारपीट की।

हालाँकि इस बीच पुलिस को पूरे मामले पर जानकारी दी गई। लेकिन पुलिस के घटनास्थल पर पहुँचने से पहले ही ये छात्रों का समूह अपना उत्पात मचा चुका था। कई शांत छात्रों को उनके कमरों में घुसकर मारा गया था और कई शिक्षकों पर भी हमले हुए थे। सुरक्षाकर्मियों के भी इस हमले में घायल होने की खबर है।

बता दें, अभी कुछ ही हफ्ते पहले जेएनयू में उत्पाती छात्रों ने वीसी पर भी जानलेवा हमला किया था। लेकिन उस समय पुलिस की मदद से कुलपति अपनी जान बचाकर भागने में सफल हुए थे।

3 जनवरी से सेमेस्टर रजिस्ट्रेशन करने वाले आखिर कौन?

गौरतलब है कि जेएनयू में पहले से ही फीस हाइक के मामले ने तूल पकड़ा हुआ था। ऐसे में सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ जामिया में हुई हिंसा के बाद जेएनयू का माहौल और गर्माया गया।

लेफ्ट हर तरह से इन मुद्दों पर अपना विरोध दर्ज करवाते हुए अपने पक्ष में भीड़ इकट्ठा करने की जुगत में था। कहा जा रहा है इसी कड़ी में लेफ्ट चाहता था कि विश्वविद्यालय के अन्य छात्र भी सेमेस्टर एग्जाम न दें और न ही अपनी रजिस्ट्रेशन फीस जमा करवाएँ। लेकिन जब अन्य छात्रों ने इनके बहकावे में आने से मना कर दिया, तो इन्होंने हिंसक रास्ता अपनाया। एबीवीपी के मुताबिक लेफ्ट के कारण ही ये पूरा मामला शुरू हुआ। जिन्होंने नए सेमेस्टर में छात्रों का रजिस्ट्रेशन बाधित करने के लिए सर्वर रूम जाकर बंद किया। ताकि इंटरनेट बंद हो जाए और छात्र रजिस्ट्रेशन न कर पाएँ।

विपक्ष के सवाल

रविवार की शाम जेएनयू में हुई शर्मनाक घटना पर कई नेताओं ने अपनी प्रतिक्रिया दी। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण तक ने पहले के जेएनयू पर अपने अनुभव साझा किए। लेकिन इसी बीच कॉन्ग्रेस नेता राहुल गाँधी ने जेएनयू में हुई हिंसा पर निराशा जाहिर की और कहा कि यह उस डर को दिखाती है जो ‘हमारे देश को नियंत्रित कर रही फासीवादी ताकतों को ‘छात्रों से लगता है।

कॉन्ग्रेस नेता प्रियंका गाँधी भी हमले की खबर सुन फौरन जेएनयू परिसर में हुई हिंसा में घायल छात्रों से मुलाकात करने के लिए दिल्ली के एम्स पहुँचीं। उन्होंने ट्वीट किया, अब मोदी-शाह के गुंडे हमारे विश्वविद्यालयों में उपद्रव कर रहे हैं, हमारे बच्चों में भय फैला रहे हैं, जिन्हें बेहतर भविष्य की तैयारियों में लगे होना चाहिए… इस जख्मों को बढ़ाते हुए भाजपा नेता मीडिया में ऐसा दिखा रहे हैं कि जेएनयू में हिंसा करने वाले उनके गुंडे नहीं थे।

वहीं, स्वराज अभियान के प्रमुख योगेंद्र यादव पर जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय (जेएनयू) परिसर के बाहर रविवार को कथित तौर पर हमला किया गया। यादव ने कहा कि वहाँ गुंडागर्दी को रोकने के लिए कोई नहीं था और उन्हें मीडिया से बात नहीं करने दिया गया।

अरविंद केजरीवाल ने घटना पर स्तब्धता जताते हुए कहा कि अगर विश्वविद्यालयों के अंदर ही छात्र सुरक्षित नहीं रहेंगे तो देश प्रगति कैसे करेगा।  मुख्यमंत्री के ट्वीट के कुछ ही समय बाद बैजल ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा कि उन्होंने पुलिस को कानून व्यवस्था बनाये रखने के लिए सभी जरूरी कदम उठाने का निर्देश दिया है।

माकपा महासचिव सीताराम येचुरी ने हिंसा के लिए एबीवीपी को जिम्मेदार ठहराया। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने जेएनयू में छात्रों और शिक्षकों पर हमले की निंदा की और इसे लोकतंत्र के लिए शर्मनाक बताया। 

‘जामिया में पुलिस क्यों घुसी’ से लेकर ‘JNU में पुलिस क्यों नहीं गई’ तक: गिरोह विशेष का दोहरा रवैया

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में वामपंथी गुंडों के हमले में कई छात्र घायल हुए। कई प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया है कि क़रीब 500 की संख्या में नकाबपोश उपद्रवियों ने एबीवीपी के छात्रों को निशाना बनाया। हॉस्टल के कमरे को तोड़ कर छात्रों को निकाल कर पीटा गया। हालाँकि, कई सेलेब्रिटीज व वामपंथी गिरोह के सदस्यों ने उलटा एबीवीपी पर ही हिंसा का आरोप लगाया लेकिन उनकी पोल खोली गई। जेएनयू छात्र संगठन की अध्यक्ष आइशा घोष हिंसक भीड़ का नेतृत्व करती हुई देखी गईं। जेएनयूएसयू की पूर्व अध्यक्ष गीता कुमारी को नकाबपोशों के साथ हमले की साज़िश रचते हुए देखा गया।

सारे वीडियो, फोटो व वामपंथी गैंग के व्हाट्सप्प चैट सामने आने के बाद लगातार उनकी पोल खुलती चली गई। हाल ही में तिहाड़ से लौटे कॉन्ग्रेस नेता पी चिदंबरम ने बयान दिया है कि जेएनयू में हिंसा के समय पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। उन्होंने पूछा कि जब हिंसा हो रही थी, तब पुलिस कहाँ थी? महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा कि उन्हें नकाबपोशों को देख कर 26/11 मुंबई हमले की याद आ गई। स्वरा भास्कर ने वीडियो बना कर लोगों को जेएनयू गेट पर पहुँचने को कहा कर पुलिस पर उदासीनता बरतने का आरोप लगाया।

याद कीजिए, ये वही लोग हैं जो कुछ दिनों पहले कह रहे थे कि जामिया में पुलिस क्यों घुसी? ये वही लोग हैं, जिन्होंने ये स्वीकार किया था कि जामिया हिंसा में ‘बाहरी लोग’ शामिल थे लेकिन जब उन्हीं ‘बाहरी लोगों’ से निपटने के लिए पुलिस कैम्पस में घुसी तो इन्हीं लोगों ने पुलिस का आत्मवश्वास गिराने के लिए उसकी निंदा की। ये वही लोग हैं, जिन्होंने जामिया कैम्पस में 700 फ़र्ज़ी आईडी कार्ड मिलने की बात पर चुप्पी साध ली थी। ये वही गैंग है, जो चीख-चीख कर कह रहा था कि उपद्रवी जो भी करें, पुलिस को संयम बरतना चाहिए। आज वो पुलिस को क्यों खोज रहे हैं?

क्या पुलिस इन वामपंथियों के बयान का इंतज़ार करेगी, तब कार्रवाई करेगी? कहाँ जाना है और कहाँ नहीं जाना है, ये वरिष्ठ अधिकारियों की जगह आराम से बैठे स्वरा भास्कर, अनुराग कश्यप और पी चिदंबरम तय करेंगे क्या? कॉन्ग्रेस ने अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर के पूछा कि दिल्ली पुलिस क्या कर रही थी? या वही लोग हैं, जो जामिया हिंसा के वक़्त पुलिस की उलटी-सीधी फेक तस्वीरें वायरल करके दावा कर रहे थे कि पुलिस ही आगजनी और दंगे कर रही है। क्या इनलोगों के पास पुलिस से सवाल पूछने का हक़ बचा है?

जब जामिया में पुलिस घुसती है तो ये पुलिस की निंदा करते हैं। जब जेएनयू में पुलिस नहीं जाती है, तो भी ये पुलिस की निंदा करते हैं। ऐसा दिल्ली पुलिस के साथ इसीलिए किया जाता है, क्योंकि वो गृह मंत्रालय के अंदर आती है। अमित शाह गृहमंत्री हैं और केंद्र में भाजपा की सरकार है, इसीलिए दिल्ली पुलिस को बार-बार निशाना बनाया जाता है। हिंसा की ख़बरें सामने आने के बाद जब दिल्ली पुलिस जेएनयू कैम्पस में गई, तब उसके साथ दुर्व्यवहार किया गया। दिल्ली पुलिस के ख़िलाफ़ वामपंथी छात्रों ने नारेबाजी की। क्या इसीलिए वो पुलिस को बुलाना चाहते थे?

पुलिस को घेर कर नारेबाजी करने वाले वामपंथी छात्रों के आका पूछ रहे हैं कि पुलिस क्या कर रही थी? जब यही पुलिस जामिया में सीसीटीवी फुटेज लेने जाती है ताकि निष्पक्ष जाँच हो सके, तो यही छात्र फुटेज नहीं लेने देते। जामिया प्रशासन भी सीसीटीवी फुटेज नहीं देता। पुलिस अपना काम सुचारु रूप से करें, उसके लिए उसका सहयोग करना पड़ता है। पुलिस की दिन-रात निंदा करने वालों को कोई हक़ नहीं है ये कहने का कि पुलिस जेएनयू में क्यों नहीं घुसी। और जब घुस कर पुलिस ने फ्लैग मार्च किया, तो उन्हीं छात्रों ने पुलिस के साथ बदतमीजी की।

कल को दिल्ली पुलिस जाँच करेगी, कार्रवाई करेगी और वामपंथी गुंडों के नाम सामने आते ही मीडिया उनके घर भागेगा। मीडिया ये दिखाने में व्यस्त हो जाएगा कि फलाँ आरोपित के तो माँ-बाप ही ग़रीब हैं, वो भला शॉल में पत्थर छिपा कर छात्रों पर हमला कैसे कर सकता है? आरोपितों के टूटे-फूटे घरों को दिखाया जाएगा, लड़कियों पर हमला करने वाला पढ़ाई में कितना तेज़ था, ये दिखाया जाएगा। तब भी पुलिस की निंदा होगी। वही लोग करेंगे, जो आज पूछ रहे हैं कि पुलिस कहाँ है?

पुलिस तो जेएनयू में लगे देशद्रोही नारों की जाँच भी कर रही है। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने कहा है कि दिल्ली सरकार उन छात्रों को बचाने में लगी हुई है, जिन्होंने देश के टुकड़े करने के नारे लगाए। जिन्होंने आतंकी अफजल गुरु के पक्ष में नारे लगाए। शाह ने पूछा कि केजरीवाल सरकार उन्हें क्यों बचा रही है? क्या दिल्ली सरकार दिल्ली पुलिस के काम में बाधा नहीं पहुँचा रही? यही अरविन्द केजरीवाल का ये बयान आता है कि पुलिस को कार्रवाई करनी चाहिए। पुलिस कैसे कार्रवाई करेगी जब सरकार उसके काम में टाँग अड़ाएगी? अंत में हर हाल में पुलिस की फिर से निंदा की जाएगी।

दिल्ली पुलिस के सामने पत्रकारों के साथ बदतमीजी की गई। ‘आजतक’ के कैमरामैन के साथ धक्का-मुक्की की गई। ‘रिपब्लिक’ के पत्रकार के साथ मारपीट की गई। जब ये सब हुआ, तब पुलिस भी वहीं पर मौजूद थी। छात्रों को आगे कर के वामपंथी अपने एजेंडा चला रहे हैं, ऐसे में दिल्ली पुलिस क्या करेगी? पुलिस के साथ सहयोग नहीं किया जा रहा। बाहर वामपंथी नेता व सेलेब्रिटी पुलिस की निंदा कर रहे हैं, कैम्पस के अंदर वामपंथी छात्र पुलिस के साथ बदतमीजी कर रहे हैं। ऐसे में ठाकरे, केजरीवाल, स्वरा, चिदंबरम और कश्यप के बयान महज प्रोपेगंडा भर हैं।

जिस तरह से एक एबीवीपी की छात्रा की वेशभूषा में वामपंथियों ने हमले किए, जिससे ये प्रतीत हो कि एबीवीपी ही हिंसा कर रहे हैं- इससे पता चलता है कि साज़िश गहरी थी। हो सकता है कि फिर से पुलिस को सीसीटीवी फुटेज की जाँच करने में बाधा पहुँचाई जाए। ऐसा फिर से हो सकता है कि वामपंथी आरोपितों के गिरफ़्तार होते ही उनके घर-परिवार जाकर मीडिया दिखाए कि वो निर्दोष हैं। इसीलिए, दिल्ली पुलिस को बेवजह इन सबमें फँसाया जा रहा है। ये ‘अमित शाह की पुलिस’ है, इसीलिए इसे बलि का बकरा बनाया जा रहा है।

आमिर हमजा खान जामिया मेट्रो स्टेशन पर पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस के साथ पकड़ा गया

विभिन्न प्रदर्शनों और घटनाओं को लेकर पूरी दिल्ली इस वक्त हाई अलर्ट पर है। इस बीच जामिया के पास एक शख्स पिस्टल के साथ गिरफ्तार हुआ है। शख्स को जामिया मेट्रो स्टेशन से गिरफ्तार किया गया है। दिल्ली पुलिस ने जामिया मिलिया इस्लामिया मेट्रो स्टेशन से 34 वर्षीय आमिर हमजा खान नाम के शख्स को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने बताया कि आमिर दिल्ली के जाकिर नगर का रहने वाला है। उसे सीआईएसएफ द्वारा जामिया मिलिया इस्लामिया मेट्रो स्टेशन के फ्रिस्किंग पॉइंट पर एक पिस्टल और 5 जिंदा कारतूस के साथ गिरफ्तार किया गया है। आगे की तफ्तीश जारी है।

बता दें कि रविवार (जनवरी 5, 2019) को दिल्ली के जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय (JNU) में हुई हिंसा में जामिया मिलिया इस्लामिया से भी लोगों के आने की बात सामने आ रही है। बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने भी कहा कि वो जेएनयू के कुछ छात्रों से मिली थी। जिसमें से कई छात्रों ने उन्हें बताया कि कुछ लोग जामिया से भी जेएनयू आए थे। जेएनयू हिंसा में जामिया कनेक्शन की बात सामने आने के बाद जामिया मिलिया इस्लामिया मेट्रो स्टेशन पर हथियारों से लैस युवक का इस तरह से गिरफ्तार होना बहुत कुछ संकेत देता है। हालाँकि फिलहाल इस पर कुछ भी स्पष्ट तौर पर नहीं कहा जा सकता है। पुलिस की जाँच के बाद ही चीजें स्पष्ट होकर आएँगी। 

बता दें कि रविवार को मास्क पहने गुंडों ने हॉस्टल में जम कर पत्थरबाजी भी की। उन्होंने छात्रों के साथ-साथ गार्डों को भी निशाना बनाया। मीनाक्षी लेखी ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि उन्होंने कुछ लड़कियों से बात की है। छात्राओं ने उन्हें बताया कि वो लोग मैनुअली रजिस्ट्रेशन करवाने जा रहे थीं तो उनके हिप और प्राइवेट पार्ट्स पर लाठी-डंडों से हमला किया गया। इतना ही नहीं, कई छात्राओं को बाथरूम में ले जाकर उनके साथ दुर्व्यवहार भी किया गया। इसके साथ ही जेएनयू कैम्पस में दिल्ली पुलिस के फ्लैग मार्च करने के दौरान ‘दिल्ली पुलिस, गो बैक’ के नारे भी लगे।

JNU हिंसा का इंटरनेशनल कनेक्शन, घायल छात्रा ने खोली पोल: शॉल में पत्थर छिपाए दंगाइयों ने मचाया आतंक

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय में वामपंथियों ने जो 8 घंटे का आतंक मचाया, उसके बारे में काफ़ी बातें निकल कर सामने आ रही हैं। अब इस पूरी साज़िश का इंटरनेशनल कनेक्शन निकल कर सामने आ रहा है। जहाँ मीडिया का एक बड़ा वर्ग वामपंथी दंगाइयों की इस करतूत को छिपाने में लगा हुआ है, ऑपइंडिया ने कुछ प्रत्यक्षदर्शियों से बातें की, जिन्होंने आँखों-देखी सुनाई। इस पूरे घटनाक्रम के पीड़ित लोगों से बात करने के बाद ये स्पष्ट हो जाता है कि जेएनयू में अध्ययन, अकादमिक कैलेण्डर और पठन-पाठन के कार्यों को रोकने के लिए ऐसा किया गया। पीड़ितों में एक नाम वेलेंटिना ब्रह्मा का भी है।

वेलेंटिना जेएनयू की छात्रा हैं, जो वामपंथियों के आतंक का शिकार बनीं। उन्हें काफ़ी चोटें आई हैं और उनके साथ बदतमीजी भी की गई। कई घटों तक चले उस भयावह दौर से गुजरीं वेलेंटिना ने ऑपइंडिया से बातें करते हुए अपना दर्द साझा किया। उन्होंने बताया कि इस वारदात की शुरुआत रविवार (जनवरी 5, 2020) को ही हो गई थी, जब वामपंथी छात्रों ने रजिस्ट्रेशन के लिए गए छात्रों पर हमला किया। दरअसल, वामपंथी छात्र नहीं चाहते थे कि कोई भी रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में हिस्सा ले। इसीलिए, उन्होंने वहाँ मौजूद बाकी छात्रों पर हमला बोल दिया। उस दौरान उनके हाथों में डंडे थे।

वेलेंटिना ने बताया कि जब वो दोपहर को रजिस्ट्रेशन कराने पहुँचीं तो वहाँ दोनों गुट के लोग खड़े थे। एबीवीपी के छात्र व अन्य छात्र रजिस्ट्रेशन की प्रक्रिया में हिस्सा लेने गए थे, वहीं वामपंथी उन्हें रोक रहे थे। वेलेंटिना ने बताया कि जब वो वहाँ खड़ी थीं, तभी वामपंथी छात्रों का एक बड़ा दल आया और उन्होंने रजिस्ट्रेशन के लिए आए छात्रों पर हमला बोल दिया। उस भीड़ में शामिल एक छात्रा ने वेलेंटिना पर हमला बोल दिया। उसके हाथ में डंडा था। उसने वेलेंटिना को थप्पड़ मारा और उनके साथ बदतमीजी की। उसने वेलेंटिना के साथ धक्का-मुक्की भी की। जब वेलेंटिना ने उसे ऐसा करने से मना किया तो उसने उन्हें पीटना शुरू कर दिया।

इसके बाद कुछ अन्य छात्र आए, जिन्होंने किसी तरह वेलेंटिना को दंगाई छात्रा के चंगुल से निकाला और उन्हें पेरियार हॉस्टल लेकर गए। वामपंथी गुंडों से बचने के लिए वेलेंटिना और उनके साथ के अन्य छात्र-छात्राओं ने बचने के लिए एक कमरे में पनाह ली। तभी अचानक से 30 वामपंथी छात्रों ने उस कमरे के दरवाजे को तोड़ना शुरू कर दिया। उन सभी ने मास्क पहन रखी थी। उनके हाथों में डंडे थे। वेलेंटिना ने बताया कि दरवाजा न खोलने पर उपद्रवियों ने दरवाजे को तोड़ डाला। हॉस्टल रूम के दरवाजे को तोड़ कर छात्रों पर हमला बोल दिया गया।

उनमें से कुछ उपद्रवियों ने शॉल ओढ़ रखी थी, जिसके अंदर उन्होंने पत्थर छिपा रखे थे। डंडों और पत्थरों से छात्रों पर हमला बोल दिया गया। एबीवीपी के छात्र नेता मनीष को उपद्रवियों ने पीटना शुरू कर दिया। वेलेंटिना ने एक अन्य साथी छात्रा के साथ वहाँ से निकलने का प्रयास किया। एक छात्र को उपद्रवियों ने डंडे से इतना मारा कि वो बिस्तर से नीचे गिर गया। वेलेंटिना एक साथी छात्रा और 2 अन्य छात्रों के साथ पिछले दरवाजे से भागने की कोशिश की। वहाँ भी उपद्रवियों ने पीड़ित छात्रों पर डंडे से हमला किया। वेलेंटिना ने बताया कि वहाँ हॉस्टल प्रशासन के लोग और कुछ पुलिसकर्मी भी थे लेकिन किसी ने भी बचाने का प्रयास नहीं किया। वारदात के बारे में वेलेंटिना ने आगे बताया:

“हॉस्टल प्रशासन के लोगों ने हमसे छिपने को कहा। उपद्रवी शॉल में से पत्थर निकाल कर छात्रों की पिटाई कर रहे थे। कुल 30 लोग हमारे कमरे में घुसे थे। क़रीब 50 लोग बाहर मौजूद थे। मेस में भी छात्रों की पिटाई की गई। उपद्रवियों की कुल संख्या 200 के क़रीब थी। मेरे हाथ पर वार किया गया। मेरी पीठ पर चोटें आई हैं। कई अन्य जगहों पर भी एबीवीपी उपद्रवी छात्रों की पिटाई कर रहे थे। कई छात्र-छात्राओं के परिजन भी तनाव में हैं। हमारी साथी शाम्भावी के परिजन भी आकर उन्हें ले गए। शाम्भवी को भी काफ़ी चोटें आई हैं। एबीवीपी के छात्रों के कमरे में घुस कर उन्हें बेरहमी से पीटा गया।”

इस दौरान वेलेंटिना ने कुछ ऐसी जानकारियाँ भी दी, जो इस साज़िश के गहरे होने का प्रमाण है। उन्होंने बताया कि एबीवीपी से सहानुभूति रखने वाले कुछ लोगों ने ‘Unity Against Left’ नामक एक व्हाट्सप्प ग्रुप बनाया था। उस ग्रुप के ‘इनवाइट लिंक’ का इस्तेमाल कर के कुछ वामपंथी छात्र उसमें घुस गए और उन्होंने उस लिंक को चारों तरफ़ फैला दिया। उस लिंक का इस्तेमाल कर के अंतरराष्ट्रीय फोन नंबर से लोग उस ग्रुप में जुड़ने लगे। कैंपस में मार-पिटाई के दौरान एबीवीपी के कई छात्रों का फोन गिर गया था। अधिकतर के पास इंटरनेट ही नहीं था। वाईफाई नहीं चल रहा था। सभी छिपे हुए थे।

वेलेंटिना ने बताया कि इन सबके कारण उन्हें पता ही नहीं चला कि उस व्हाट्सप्प ग्रुप में क्या चल रहा है। उस ग्रुप में इंटरनेशनल नंबर से घुसे लोगों ने ऐसी बातचीत की, जिससे पता चले कि ये सारी लड़ाई एबीवीपी ने शुरू की थी और उन्होंने ही हिंसा की। अब सवाल ये उठता है कि अंतरराष्ट्रीय नंबर से ग्रुप में घुसने वाले कौन लोग थे? एबीपीबी के छात्रों का नंबर चारों तरफ फैला दिया गया। वेलेंटिना ने बताया उन्हें व उनके साथियों को विभिन्न फोन नंबरों से कॉल कर के धमकाया जा रहा है। उन्हें गालियाँ दी जा रही हैं। वामपंथियों ने ऐसा दिखाया कि ये एबीवीपी का ग्रुप है और वही लोग हिंसा कर रहे हैं।

वेलेंटिना ने जो भी बताया, उससे कई सवाल पैदा होते हैं। पहला सवाल, जब रजिस्ट्रेशन के समय ही वामपंथी दंगाइयों ने हिंसा शुरू कर दी थी, तब जेएनयू प्रशासन ने पुलिस को ख़बर क्यों नहीं कि ये स्थिति को नियंत्रित क्यों नहीं किया? जब हॉस्टल में घुस कर एबीवीपी के छात्रों को पीटा जा रहा था, तब हॉस्टल प्रशासन व गार्ड्स ने उन्हें बचाया क्यों नहीं? घटों तक चले इस आतंक के तांडव के दौरान जेएनयू ने पुलिस को सूचना क्यों नहीं दी? इंटरनेशनल नंबर से एबीवीपी से जुड़े ग्रुप में कौन लोग घुस गए? वो कौन लोग हैं, जो छात्र-छात्राओं को धमकियाँ और गालियाँ दे रहे हैं?

बगदाद में US दूतावास पर फिर बरसे रॉकेट, तनाव के बीच भारत ने की अमेरिका और ईरान से बात

ईरान और अमेरिका के बीच तनावपूर्ण स्थिति बनी हुई है, इस तनातनी के बीच इराक की राजधानी बगदाद में रविवार को अमेरिकी दूतावास के बाहर हमले की ख़बर सामने आई है। इस हमले में किसी के हताहत होने की ख़बर नहीं है। बता दें कि यह हमला बगदाद में एयरपोर्ट पर अमेरिकी रॉकेट हमले में ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी की मौत के बाद हुआ है। बगदाद स्थित ग्रीन ज़ोन में लगातार यह दूसरा हुआ हमला है। इससे पहले, शनिवार (4 जनवरी) की रात को भी रॉकेट से अमेरिकी दूतावास और एयरबेस पर रॉकेट से हमला किया गया था। हालाँकि, हमले में किसी के हताहत होने की जानकारी नहीं मिली थी।

ख़बर के अनुसार, ईरान और अमेरिका के बीच तनाव को ख़त्म करने के लिए यूरोपियन यूनियन और भारत समेत कई अंतरराष्ट्रीय संगठनों ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है। ग़ौर करने वाली बात यह है कि दोनों ही देश भारत के अहम रणनीतिक और व्यापारिक साझेदार हैं। लेकिन, दोनो देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति बरक़रार है। वहीं, अमेरिकी विदेश मंत्री माइक पोम्पियो के शब्द बेहद तल्ख़ अंदाज़ लिए हुए हैं।

भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ अपनी मुलाक़ात के बाद पोम्पियो ने ट्वीट किया। इसमें उन्होंने लिखा, “डॉ एस जयशंकर और मैंने अभी-अभी बात की है, हमने ईरान द्वारा लगातार दी जा रही धमकियों और उसके उकसावे वाली कार्रवाई पर चर्चा की है। ट्रम्प प्रशासन अमेरिकी लोगों, हमारे दोस्तों और सहयोगियों की रक्षा के लिए ज़रा भी नहीं हिचकेगा।”  

प्रतिक्रिया स्वरूप, विदेश मंत्री एस जयशंकर का कहना है कि भारत ने अमेरिका के सामने अपने हितों और गंभीर विषयों को रखा है। इस सन्दर्भ में उन्होंने ट्वीट किया, “अमेरिका के विदेश मंत्री माइक पोम्पियो से खाड़ी क्षेत्र में पैदा हुए हालात के बारे में चर्चा की। हमनें भारत की चिंताओं और भारत के हित के बारे में उन्हें बताया।”

विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री जावेद जाफरी से वर्तमान स्थिति को लेकर फोन पर चर्चा की। दोनों देशों (अमेरिकी और ईरान) से भारत ने एक-दूसरे के हालात के बारे मेें बात की। भारत ने अपना रुख़ स्पष्ट करते हुए ईरान को बताया कि भारत तनाव के स्तर को लेकर बेहद चिंतित है। इसके बाद, दोनों देश लगातार एक-दूसरे के सम्पर्क में बने रहने को लेकर भी सहमत हुए।

ग़ौरतलब है कि शुक्रवार (3 जनवरी) को बगदाद में एक एयर स्ट्राइक में ईरान के कमांडर कासिम सुलेमानी को मार गिराया था। इसके बाद शनिवार की रात बगदाद में अमेरिकी दूतावास के बाहर रॉकेट से हमला किया गया। माना जा रहा है कि ये हमला ईरान की ओर से किया गया। ये हमला अमेरिकी दूतावास के नज़दीक और अमेरिकी एयरबेस पर हुआ। दो रॉकेट दूतावास के नज़दीक गिरे थे।

इस हमले के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रम्प ने फिर ईरान को अत्याधुनिक और ब्रैंड न्यू हथियारों से हमला करने के लिए चेताया था। ट्रम्प ने ईरान को सलाह देते हुए ट्वीट किया, “उन्होंने हमला किया और हमने उसका जवाब दिया। अगर वो फिर से हमला करेंगे, जो कि मैं उन्हें सलाह देता हूँ कि वो ना करें तो हम उन पर और ज़ोरदार हमला करेंगे जैसा अब तक कभी नहीं हुआ।”

इसके अलावा, राष्ट्रपति ट्रम्प ने अपने एक अन्य ट्वीट के ज़रिए ईरान को चेतावनी दी थी कि यदि वो अमेरिकी जवानों या सम्पत्ति पर हमला करेगा, तो अमेरिका 52 ईरानी स्थलों को निशाना बनाएगा और उन पर बहुत तेज़ी से और ज़ोरदार हमला करेगा। उन्होंने कहा था कि ईरान के 52 ठिकाने हमारे निशाने पर हैं, जो ईरान और ईरानी संस्कृति के लिए काफ़ी अहमियत रखते हैं। हम किसी भी तरह के हमले का मुँहतोड़ जवाब देने को तैयार हैं।

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‘चल निकल दलाल… तेरी माँ की…’- रिपब्लिक भारत का रिपोर्टर देखते ही प्रदर्शनकारी ने दिखाई अपनी हकीकत

जेएनयू में रविवार को पेरियार हॉस्टल के भीतर घुसकर छात्रों के साथ हुई हिंसा के बाद विश्वविद्यालय के बाहर काफी बवाल हुआ। सोशल मीडिया पर लोगों से फौरन अपना विरोध दर्ज कराने के लिए घटनास्थल पर पहुँचने की अपीलें की गईं और देखते ही देखते बड़ी तादाद में लोग यहाँ इकट्ठा हो गए। इस घटना के बाद कई सौ की तादाद में लोगों ने जेएनयू के बाहर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। इस बीच कई मीडियाकर्मी भी वहाँ रिपोर्ट करने पहुँचे। लेकिन, इसी दौरान रिपब्लिक भारत के रिपोर्टर पीयूष मिश्रा को देखकर जेएनयू का एक प्रदर्शनकारी भड़क गया और उनसे गाली गलौच पर उतर आया।

सोशल मीडिया पर अपनी रिपोर्टिंग की वीडियो जारी करते हुए पीयूष ने अपने साथ हुए वाकये पर सबका ध्यान आकर्षित करवाया। उन्होंने अपने ट्वीट पर लिखा,”जेएनयू के बाहर, भारी तादाद में मौजूद पुलिस फोर्स के बीच, रिपोर्टिंग करते हुए इस प्रकार एक जेएनयू प्रदर्शनकारी ने मुझसे दुर्व्यवहार किया, गाली-गलौच की। इस दौरान किसी पुलिस कर्मी ने इन गुंडों को नहीं रोका।”

पीषूष ने अपने साथ हुई बदसलूकी पर एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया को टैग किया और लिखा कि उन्हें एडिटर्स गिल्ड ऑफ इंडिया से अनेपक्षित निंदा की अपेक्षा है।

गौरतलब है कि सोशल मीडिया पर कल की घटना के बाद जेएनयू के प्रदर्शनकारियों को लेकर एक अलग ही माहौल बना हुआ है। पीयूष मिश्रा से बदसलूकी पर लोगों का पूछना है कि क्या ड्यूटी कर रहे मीडियाकर्मी से गुंडागर्दी जायज है? वहीं, कुछ का कहना है कि क्या जिसने पीयूष के साथ इस तरह सलूक किया उसे तुरंत गिरफ्तार किया जाना चाहिए, ऐसे लोग विरोध के नाम पर विद्रोह करते हैं।

यहाँ बता दें कि सोशल मीडिया पर वामपंथी गिरोह के लोगों द्वारा रिपब्लिक टीवी को केंद्र सरकार का गुणगान करने वाले चैनल के रूप में प्रदर्शित किया जाता है। ऐसे में इस चैनल के रिपोर्टर को देखकर जेएनयू प्रदर्शनकारी के शब्द, उसकी बदसलूकी साफ दर्शाती है कि ये गाली वो सिर्फ़ पीयूष मिश्रा को नहीं दे रहा बल्कि केंद्र सरकार और उसके समर्थन में बोलने वाले लोगों को दे रहा है। जिनकी उपस्थिति से भी जेएनयू वालों को गुरेज है और जिन्हें देखकर उन्हें डर है कि उनके द्वारा किए जा रहे प्रदर्शन का कोई दूसरा एंगल दर्शक तक न पहुँच जाए।

‘रजिस्ट्रेशन कराने गईं छात्राओं के प्राइवेट पार्ट पर हमला, बाथरूम ले जाकर दुर्व्यवहार’ – JNU मामले में गंभीर आरोप

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JNU हिंसा में वामपंथी हुए बेनकाब! एक मोबाइल नंबर, एक व्हॉट्सअप ग्रुप और कई स्क्रीनशॉट से पर्दाफाश

JNU में हमला कर रही नकाबपोश गुंडी ABVP कार्यकर्ता नहीं है, फैलाया जा रहा झूठ: Fact Check

रविवार (जनवरी 5, 2019) को जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) में लाठी-डंडों से लैस वामपंथियों ने जम कर उत्पात मचाया। जेएनयू कैंपस के अंदर हुई इस हिंसा को लेकर कई सारी भ्रामक सूचनाएँ फैलाई गई। हालाँकि जल्द ही इनके झूठ का पर्दाफाश हुआ और कैंपस के अंदर हुआ हिंसा में कॉन्ग्रेस की कड़ी उभरकर सामने आई और साथ ही हिंसा के पीछे वामपंथियों की भूमिका भी सामने आई। हिंदुत्व की राजनीति से लेकर प्रधानमंत्री और गृहमंत्री तक सब पर आरोप लगाने वाले नैरेटिव को खूब फैलाया गया।

हमले के बाद कई वीडियो सामने आए, जिसमें एक के बाद एक खतरनाक रूप से गढ़े गए प्रोपेगेंडा को देखा जा सकता है। कैंपस में हिंसा का एक वीडियो सामने आया है, जिसमें नकाबपोश लोग डंडे और लोहे की रॉड लेकर मारपीट करते नजर आ रहे हैं। इसी दौरान प्रदर्शनकारी यह कहते सुने जा सकते हैं, ‘कौन हो तुम लोग? किसे डराना चाह रहे हो?… एबीवीपी वापस जाओ।’

वीडियो सामने आने के बाद जब वामपंथियों के प्रोपेगेंडा ने रफ्तार पकड़ ली तो एक ट्विटर यूजर ने आरोप लगाया कि वीडियो में नकाबपोश गुंडों में से एक लड़की एबीवीपी कार्यकर्ता थी।

दरअसल यह दावा उनके कपड़ों को आधार बनाकर किया गया था, जो दोनों ने पहने हुए थे। बता दें कि वीडियो में जिस एबीवीपी के कार्यकर्ता पर आरोप लगाया गया, उनका नाम शाम्भवी है, जो कि खुद हमले का शिकार हुई हैं। उन्हें काफी चोटें आई हैं और वो रविवार को एम्स ट्रॉमा सेंटर में भर्ती थीं।

बाएँ- नकाबपोश गुंडी, दाएँ- एबीवीपी कार्यकर्ता शाम्भवी

यह पता लगाने के लिए कि क्या नकाबपोश गुंडी और शाम्भवी, दोनों एक ही व्यक्ति हैं, हमें दोनों तस्वीरों को बारीकी से देखना चाहिए।

अगर हम दोनों तस्वीरों को देखें तो जाहिर तौर पर दिखता है कि दोनों की शारीरिक बनावट एक दूसरे से बिल्कुल अलग है। दोनों तस्वीरों को एक साथ देखते हैं तो यह भी स्पष्ट होता है कि नकाबपोश गुंडी दाईं ओर की लड़की (एबीवीपी कार्यकर्ता शाम्भवी) की तुलना में शारीरिक रूप से अधिक वजनदार है।

अगला, सबसे स्पष्ट चीज जो दिखाई देती है, वो है उनके शर्ट के चेक-पैटर्न में अंतर।

बाएँ- नकाबपोश गुंडी का शर्ट
दाएँ- एबीवीपी कार्यकर्ता शाम्भवी का शर्ट

जैसा कि बहुत स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि शाम्भवी की शर्ट के चेकों की तुलना में नकाबपोश गुंडी की शर्ट पर बहुत छोटे चेक बने हुए हैं। साथ ही चेक का पैटर्न भी पूरी तरह से अलग दिखाई देता है।

कलावा और जूतों में अंतर

इसके अलावा दोनों में कुछ अन्य अंतर भी हैं। दोनों लड़कियों के जूते अलग-अलग हैं। अब यहाँ पर यह उल्लेख किया जाना आवश्यक है कि आरोप ये है कि ये दोनों चित्र लगभग उसी समय के हैं। यदि इन आरोपों को सच माना जाता है, तो इसका मतलब है कि शाम्भवी ने पहले अपने चेहरे को ढँककर हमला किया और फिर अस्पताल गईं।

अगर ऐसा है, तो ऊपर की तस्वीरों से यह बात सामने आती है कि शाम्भवी ने निम्नलिखित काम किया है।

1. उसने सभी पर हमला करने के बाद और अस्पताल जाने से पहले अपने जूते बदल दिए क्योंकि नकाबपोश गुंडी स्निकर्स पहने दिख रही है और अस्पताल में शाम्भवी चप्पल पहने हुए हैं।

2. रहस्यमय तरीके से शाम्भवी ने खुद के चेहरे पर नकाब लगाने और जेएनयू में हमला करने के बाद जाहिर तौर पर एक कलावा पहना, इससे पहले कि वह अस्पताल पहुँचती, घायल हो गईं।

हालाँकि इन दोनों संभावनाओं का कोई मतलब नहीं बनता है।

निश्चित तौर पर इन तस्वीरों में दो लड़कियों का एक ही होना असंभव है। इसलिए यह आरोप कि नकाबपोश गुंडी एबीवीपी कार्यकर्ता शाम्भवी ही है, यह एक प्रोपेगेंडा था, किसी के द्वारा प्रेरित था।

उल्लेखनीय है कि ये भिड़ंत JNU के वामपंथी छात्रसंघ के द्वारा सर्वर डाउन करने को लेकर हुआ था। बता दें कि रविवार को रजिस्ट्रेशन का आखिरी दिन था। एबीवीपी के छात्र रजिस्ट्रेशन के लिए गए थे। मगर लेफ्ट विंग के छात्रों ने सर्वर रूम को लॉक कर दिया और वाई-फाई काट दिया। जिसकी वजह से उनका रजिस्ट्रेशन नहीं हो पाया। इसके बाद संगठन के छात्र विवेकानंद मूर्ति के पास रजिस्ट्रेशन की माँग कर रहे थे। 

इस बीच लेफ्ट के लोगों ने आकर एबीवीपी समर्थित छात्रों पर हमला कर दिया। जेएनयू एबीवीपी प्रेसिडेंट दुर्गेश कुमार ने इसकी जानकारी दी। इसके साथ ही बीजेपी सांसद मीनाक्षी लेखी ने छात्राओं के प्राइवेट पार्ट्स पर लाठी-डंडों से मारपीट और बाथरूम में ले जाकर दुर्व्यवहार करने का दावा किया है।

500 नक्सली JNU में घुस आए थे, जान बचा कर जंगलों से भागा: BPSC अफसर की आपबीती

नोट: जिनकी आपबीती आप पढ़ने वाले हैं, उनकी समस्या यह है कि वो अब सरकारी अधिकारी बनने वाले हैं। ऐसे किसी राजनीतिक पोस्ट के प्रतिकूल असर को देखते हुए उन्होंने अपना नाम और पद गोपनीय रखने की शर्त रखी है।

BPSC में चयन के बाद से मैंने सोचा था कि अब राजनैतिक विषयों पर पोस्ट नहीं लिखूँगा, लेकिन कल JNU में जो कुछ हुआ उससे अभी तक उबर नही पाया हूँ, इसलिए लोगों के बीच कल के घटना की सच्चाई बताना अपना कर्तव्य समझता हूँ। कल रात 8 बजे मैं किसी तरह जंगलों के रास्ते कैम्पस से बाहर निकला। अभी किसी मित्र के घर शरण लिया हूँ क्योंकि कैम्पस में यदि रात को रुकता तो पता नहीं हमारे साथ क्या होता, मेरे बेहद करीबी मित्र “ब” का माथा फोड़ दिया गया। वह कावेरी छात्रावास से पेरियार छात्रावास यह देखने आ रहा था कि मैं सुरक्षित हूँ या नहीं और इसी दरम्यान उसे नक्सल गुंडों ने पीट-पीट कर अधमरा कर दिया।

मैं तीन रात से ठीक से सो नहीं पाया था क्योंकि बैंग्लोर में कई सारे मित्रों से मिलना हुआ था। कल दिन में 12 बजे के आसपास मैं बंगलोर से वापस पेरियार हॉस्टल पहुँचा। विंटर सेमेस्टर के रजिस्ट्रेशन का कल आखिरी दिन था, लेकिन नक्सलियों ने 2 दिन पहले ही पूरे कैम्पस का WiFi बंद कर दिया था, नकाबपोश गुंडों ने WiFi के सारे केबल काट दिए थे ताकि किसी भी सेंटर में रेजिस्ट्रेशन ना हो सके। तकरीबन 3 महीने से इन नक्सलियों ने JNU के सारे केंद्रों को जबरदस्ती बंद कर रखा था। जो छात्र रेजिस्ट्रेशन करवा रहे थे नक्सली उनकी लिस्ट तैयार कर रहे थे ताकि उन पर नक्सल कारवाई की जा सके। कल की घटना इसी नक्सल हमला के संदर्भ में हुई।

मित्र “क” और “ख” चार बजे दिन तक मेरे कमरे पर बैठ कर बातें कर रहे थे। जब मैंने बोला कि बहुत नींद आ रही है, मैं कुछ देर सोता हूँ, तो वे लोग चले गए। उनके गए हुए आधा घंटा भी नहीं हुआ था कि अचानक पेरियार हॉस्टल के नीचे काफी शोर होने लगा, मैं इतना थका हुआ था कि उठ कर देखने का साहस नहीं हो रहा था कि क्या हुआ है, लेकिन 5 मिनट के अंदर ही ऐसा लगा कि हॉस्टल के शीशे टूट रहे हैं, मैं फटाफट उठ कर लॉबी में गया, देखा लगभग 200 नकाबपोश लोग हाथों में लोहे का रॉड तथा डंडे लिए पेरियार हॉस्टल के हरेक कमरे में घुसते चले जा रहे हैं, और डंडों से बेतरतीब प्रहार करके दरवाजे और खिड़कियों को तोड़ रहे हैं।

जैसे ही इन नकाबपोश नक्सलियों की नजर मेरे पर पड़ी उन्होंने मुझे गालियाँ दीं और मेरे कमरे की ओर झपटे। किसी तरह मैं कमरे में घुसकर, दरवाजा के पीछे लकड़ी का अलमीरा, टेबल तथा कुर्सियाँ लगाकर दरवाजा को ब्लॉक किया। वे दरवाजा पर आकर इतनी तेज लाठियाँ बरसा रहे थे जैसे मॉब लिंचिंग करने आए हों। 3-4 मिनट ऐसा करने के बाद वो दूसरी तरफ गए और हॉस्टल से चीखने चिल्लाने की आवाज़ आती रही।

उनके जाने के बाद मैं अपने कमरे के बालकनी में गया, मेरा बालकनी हॉस्टल के मुख्य गेट की तरफ खुलता है। मैंने वहाँ देखा करीब 500 लोग नकाब पहने हाथों में डंडे लिए गोदावरी छात्रावास में छात्रों को पीट रहे हैं, नकाबपोश लड़कियाँ पत्थरबाजी कर रही थीं। यह बहुत ही सिहरा देने वाला दृश्य था, मैं यकीन नहीं कर पा रहा था कि यह क्या हो रहा है मेरे JNU में। लगभग आधे घंटे में सारे नक्सली पेरियार से यह कहते हुए निकल गए कि चलो अब माही मांडवी हॉस्टल चलकर पीटते हैं। मुझे लगा अब शांत हो गया।

उसके 20-25 मिनट के अंदर एक बार फिर से पेरियार हॉस्टल में 500 की संख्या में नकाबपोश नक्सली दौड़ते हुए आए, इस बार पेरियार हॉस्टल के गेट पर ही उन्होंने पेरियार के छात्रों को बेतहाशा पीटा, मैं बालकनी से सब देख रहा था। मुझे वे नीचे से इशारा कर रहे थे कि रुको छोड़ूँगा नहीं। इसी बीच 50 लोगों की एक टुकड़ी फिर से हॉस्टल के अंदर दौड़े, फिर से दरवाजे खिड़कियों को तोड़ने का क्रम शुरू, इस बार मैं काफी डर गया था, मैंने पुलिस को फोन किया कि हम बेहद खराब स्थिति में फँसे हुए हैं, कृपया हमें बचाया जाए। मैंने अपनी आँखों से JNUSU अध्यक्ष आईशी घोष को पेरियार हॉस्टल के हमारे विंग में भाग कर आते देखा। उस समय तक वो दुरुस्त थीं, मुझे नहीं पता फिर उसे चोट कब आई। करीब एक घंटे तक पेरियार के गेट पर पत्थरबाजी चलती रही।

लगभग एक घंटे के बाद मेरे मोबाइल पर एक शिक्षक “द” का बहुत सारा कॉल आया कि मेरा मित्र “ब” फोर्टिस अस्पताल के ट्रॉमा सेंटर में है, मुझे हॉस्टल छोड़ कर निकल जाना चाहिए। हॉस्टल का कार्यकारी अध्यक्ष मेरे कमरे पर आया। उसने बताया कि हॉस्टल मेस में भी तोड़-फोड़ की गई है। उसने बताया कि आज खाना नहीं मिलेगा और रात को और भी गहरा नक्सली अटैक होने की संभावना है, यदि निकल सकते हैं तो निकल जाइए। मैंने सपनों में भी नहीं सोचा था कि ऐसे किसी दिन JNU छोड़कर जाना होगा, जिस JNU पर हम सबसे सुरक्षित होने का अभिमान करते थे। मेरे लॉबी में अब तक सारे कमरों में ताला लग चुका था।

जैकेट में मुँँह ढककर मैं जंगलों के रास्ते 8:30 के करीब कैम्पस से बाहर निकल गया। बाहर आते ही मुझे मित्रों से पता चला कि मीडिया में लोग बता रहे हैं कि ABVP वालों ने पिटाई की है, मेरे पास सफ़ाई में बोलने के लिए कुछ नहीं है। मैं कुशल हूँ, आप सबके कॉल और मेसेज आ रहे हैं, चिंता की कोई बात नहीं है। दुख की बात बस इतनी सी है कि JNU के अपने अंतिम दिनों में मैंने वामपंथ का चरमपंथी आतंकी स्वरूप अपने आँखों से देखा।

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