Home Blog Page 5197

पटना में क्या कर रहा था दाऊद का गुर्गा एजाज लकड़ावाला, बेटी ने खोल दिए राज

अंडरवर्ल्ड डॉन दाऊद इब्राहिम के शूटर मोस्टवांटेड गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला को पटना पुलिस की मदद से मुंबई पुलिस ने पटना एयरपोर्ट के पास जक्कनपुर थानाक्षेत्र से गिरफ़्तार किया। उसके साथ दो अन्य लोग भी गिरफ़्तार किए गए हैं। गिरफ़्तार करने के बाद क्राइम ब्रांच की टीम उसे वापस मुंबई ले गई। फ़िलहाल, 21 जनवरी तक वो पुलिस हिरासत में रहेगा। उसके ख़िलाफ़ मुंबई में कुल 27 मामले दर्ज हैं। बताया जाता है की एजाज नेपाल के रास्ते पटना पहुँचा था और तभी पुलिस ने उसे धर दबोचा।

भगोड़े एजाज की गिरफ़्तारी के बाद मुंबई पुलिस के ज्वाइंट कमिश्नर (क्राइम) संतोष रस्तोगी ने बताया, “उसकी बेटी हमारी हिरासत में थी। उसने हमें बहुत सी जानकारी दी। इसके आधार पर हमने पता लगाया तो हमारे सूत्रों ने हमें उसके पटना आने के बारे में बताया। इस सूचना पर हमारी टीम ने काम किया और उसे बिहार के जक्कनपुर थाना क्षेत्र से गिरफ़्तार कर लिया।”

एजाज लकड़ावाला महाराष्ट्र पुलिस का मोस्ट वॉन्टेड अपराधी है। किसी ज़माने में वह छोटा राजन गैंग का सदस्य था। लकड़ावाला पर हत्या, हत्या के प्रयास और दंगे के 20 से अधिक मामले दर्ज हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, एजाज मई 2003 में कनाडा चला गया था, जब दाऊद के गुर्गे ने उस पर हमला कर उसे गंभीर रूप से घायल कर दिया था। इसके बाद राजन का गिरोह अलग हो गया और एजाज ने अपना ख़ुद का एक गिरोह बना लिया था। मार्च 2019 में, एंटी-एक्सटॉर्शन सेल ने खार स्थित बिल्डर को धमकाने और 50 लाख रुपए लेने के आरोप में एजाज लकड़ावाला (53), एजाज के चचेरे भाई को गिरफ़्तार किया था। एजाज पर इस अपराध के तहत भी मुक़दमा दर्ज किया गया था।

पुलिस से बचने के लिए लकड़ावाला पिछले कई वर्षों से कभी अमेरिका, कभी मलेशिया, कभी ब्रिटेन तो कभी नेपाल में भागता-फिरता रहा। भगोड़े गैंगस्टर की बेटी सोनिया लकड़ावाला उर्फ़ सोनिया शेख को 28 दिसंबर को फ़र्ज़ी पासपोर्ट के साथ गिरफ़्तार किया गया था।

एक अधिकारी ने बताया था कि सोनिया लकड़ावाला देर रात (27 दिसंबर) को नेपाल जाने वाली एक उड़ान में अपनी बेटी के साथ सवार होने वाली थी, तभी पुलिस ने उसे हिरासत में लिया था। बेटी की हिरासत के बाद यह ख़ुलासा हुआ था कि लकड़ावाला पटना में ही रह रहा था। लेकिन, वो पटना में कहाँ रह रहा था इसका ख़ुलासा फिलहाल पुलिस ने नहीं किया। बेटी की गिरफ़्तारी लकड़ावाला की गिरफ़्तारी का कारण बन गई।

इन सबमें ग़ौर करने वाली बात यह है कि भगोड़ा लकडावाला आख़िर पटना में क्या कर रहा था। इससे पहले भी बिहार में कई अपराधियों और आतंकवादियों की गिरफ़्तारियाँ हो चुकी हुई है। वर्ष 2000 के बाद ऐसे कई मामले सामने आए हैं जिनके तार बिहार से जुड़े नज़र आए।

  • वर्ष 2000 में बिहार के सीतामढ़ी ज़िले से आतंकी संगठन हिज़्बुल मुजाहिदीन के दो आतंकी मक़बूल और जहीर को गिरफ़्तार किया गया।
  • वर्ष 2006 में बिहार के मधुबनी ज़िले के बासोपट्टी बाज़ार से मोहम्मद कमाल को मुंबई के लोकल ट्रेन धमाके में उसकी संलिप्तता के आरोप में गिरफ़्तार किया गया था।
  • वर्ष 2008 में उत्तर प्रदेश के रामपुर में CRPF कैंप पर हुए हमले मामले में बिहार के मधुबनी ज़िले के सकरी के गँधवारी गाँव से सबाऊद्दीन को गिरफ़्ताार किया गया था।
  • वर्ष 2009-10 में दिल्ली में हुए ब्लास्ट मामले में मधुबनी के बासोपट्टी के बलकटवा से मदनी को गिरफ़्तार किया गया था।
  • वर्ष 2011 में नवंबर के महीने में 26 तारीख़ को दिल्ली पुलिस ने मधुबनी के सिंघानिया चौक व सकरी के दरबार टोला से अफज़ल व गुल अहमद जमाली को गिरफ़्तार किया था।
  • वर्ष 2011 में ही दरभंगा ज़िले के केवटी अंतर्गत बाढ़ समैला के कतील सिद्दिकी उर्फ़ साजन को 19 नवंबर को दिल्ली में गिरफ़्तार किया था।  
  • वर्ष 2012 में 21 फरवरी को साइकिल मिस्त्री कफील अहमद को गिरफ़्तार किया गया था, जिसके बारे में यह पता चला था कि वो इंडियन मुज़ाहिदीन का मेंटर था।
  • वर्ष 2013 में 21 जनवरी को दरभंगा के चकजोहरा मोहल्ला से मोहम्मद दानिश अंसारी गिरफ़्तार किया गया। उस पर आतंकी साजिश रचने का आरोप था। वह इंडियन मुज़ाहिदीन के सरगना यासीन भटकल के गुर्गे था।
  • 2013 में अगस्त के महीने में इंडियन मुज़ाहिद्दीन के आतंकवादी यासीन भटकल व अब्दुल असगर उर्फ़ हट्टी को बिहार के पूर्वी चंपारण से लगे नेपाल की सीमा से गिरफ़्तार किया गया।
  • वर्ष 2019 में अगस्त के महीने में बिहार के गया से कोलकाता एटीएस ने बांग्लादेश के आतंकी संगठन जमात-उल-मुज़ाहिद्दीन के एक सदस्य को गिरफ़्तार किया गया था। वह पश्चिम बंगाल के वर्दमान विस्फ़ोट का आरोपित था।

इतनी गिरफ़्तारियों से यह सवाल उठने लगा है कि आतंकियों के लिए बिहार सेफ़-ज़ोन तो नहीं बनता जा रहा?

भगोड़े गैंगस्टर एजाज लकड़ावाला की बेटी सोनिया शेख गिरफ़्तार, फर्जी पासपोर्ट पर बच्चे के साथ भाग रही थी विदेश

Chhapaak में करनी होगी एडिटिंग, तब होगी रिलीज: कोर्ट ने डायरेक्टर को दिया आदेश

रिलीज से पहले विवादों में घिरी छपाक फ़िल्म के निर्देशक मेघना गुलजार को दिल्ली के पटियाला कोर्ट ने निर्देश जारी किया है। कोर्ट ने कहा है कि फ़िल्म में एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल के वकील अर्पणा भट्ट को क्रेडिट दिया जाए, क्योंकि अर्पणा महिलाओं के प्रति हो रहे यौन और शारीरिक हिंसा के ख़िलाफ लड़ाई लड़ रही हैं।

फ़िल्म रिलीज होने के ठीक एक दिन पहले पटियाला कोर्ट ने आदेश ज़ारी किया है। आदेश के अनुसार फिल्म की एडिटिंग करनी होगी। ऐसा इसलिए क्योंकि फिल्म में एसिड अटैक पीड़िता लक्ष्मी अग्रवाल की वकील रहीं अर्पणा भट्ट को क्रेडिट देना होगा। दरअसल कोर्ट ने वकील अर्पणा भट्ट की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह आदेश ज़ारी किया है। वकील अर्पणा के पक्ष में आए फैसले में कोर्ट ने कहा कि फ़िल्म रिलीज के समय फ़िल्म निर्माताओं को अर्पणा की पहचान करवानी चाहिए।

इससे पहले लक्ष्मी अग्रवाल की वकील अपर्णा भट्ट ने फेसबुक पर लिखा था कि वह क्यों नाराज़ हैं? उन्होंने कारण बताया था कि फ़िल्म छपाक के मेकर्स ने उन्हें अपनी फ़िल्म में कोई क्रेडिट नहीं दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि वे इस मामले में क़ानून की मदद लेंगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दीपिका पादुकोण और बाकी लोगों के बराबरी की नहीं हैं लेकिन इस मामले में वे चुप नहीं बैठेंगी।

इसके बाद उन्होंने दिल्ली के पटियाला कोर्ट में डाली याचिका में कहा था कि उन्होंने एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल का केस वर्षों तक लड़ा, लेकिन इस फ़िल्म में मुझे क्रेडिट नहीं दिया गया है। उन्होंने कोर्ट से फ़िल्म पर रोक लगाने की भी माँग की थी। उनका कहना था कि उन्होंने फ़िल्म छपाक की स्क्रिप्ट में भी काफी मदद की थी। जिस पर फ़िल्म के निर्माता ने उन्हें भरोसा दिया था कि उन्हें क्रेडिट दिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। छपाक में अपर्णा को क्रेडिट नहीं दिया गया।

लक्ष्मी की वकील अर्पणा भट्ट ने फेसबुक पर अपनी नाराजगी व्यक्त करते हुए लिखा था कि “छपाक देखने के बाद की घटनाओं से मैं काफ़ी परेशान हूं। मुझे अपनी पहचान को बचाने और अपनी ईमानदारी को बचाए रखने के लिए कानूनी कार्रवाई करने को मजबूर किया गया। एक समय मैंने पटियाला हाउस में लक्ष्मी का प्रतिनिधित्व किया था… कल कोई मेरी प्रतिनिधित्व करेगा… जीवन की अज़ीब बिडम्बना है।

अर्पणा भट्ट द्वारा फेसबुर पर लिखा पोस्ट का स्क्रीनशॉट

महिला वकील ने एक पोस्ट में लिखा, “मैं अपने सभी दोस्तों को धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने मेरे योगदान को सराहा और टीम छपाक द्वारा ‘थैंक यू’ न कह पाने को चुनौती दी! मेरी शक्ति बॉलिवुड के इन ताकतवर निर्माताओं के बराबर नहीं है, लेकिन चुप रहने से अन्याय को और बढ़ावा मिलेगा। मैंने इस मामले को अगले स्तर पर ले जाने का फ़ैसला किया है। परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हूँ।”


अर्पणा भट्ट द्वारा फेसबुर पर लिखा पोस्ट का स्क्रीनशॉट

इससे पहले, 11 दिसंबर को अपर्णा भट ने फ़िल्म ‘छपाक’ के निर्माण के लिए ख़ुशी ज़ाहिर की थी। इसके लिए भी उन्होंने फेसबुक का सहारा लिया था। उन्होंने लिखा था कि इस केस के ज़रिए बीते 8 वर्षों के दौरान क़ानून में कई तरह के सकारात्मक बदलाव किए गए। इस दौरान, न्यूनतम मुआवज़ा (एसिड अटैक की पीड़िता के लिए) बढ़ा गया, निजी अस्पतालों में मुफ़्त इलाज सुनिश्चित हो गया और अंतत:, एसिड की बिक्री को भी नियंत्रित कर दिया गया। उन्होंने तब इस बात को लेकर ख़ुशी ज़ाहिर की थी कि बॉलीवुड में इस विषय पर फ़िल्म बनेगी। हालाँकि, फ़िल्म देखने के बाद, उन्होंने अपनी राय बदल दी है।


अर्पणा भट्ट द्वारा फेसबुर पर लिखा पोस्ट का स्क्रीनशॉट

बता दें कि फ़िल्म छपाक के चर्चे हर तरफ़ हो रहे हैं। इसकी वजह है दीपिका पादुकोण का दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) जाकर विरोध प्रदर्शन में भाग लेना। सोशल मीडिया पर जहाँ कुछ लोग दीपिका की तारीफ़ कर रहे हैं तो वहीं कुछ छपाक को बॉयकॉट करने की बात भी कर रहे हैं। फ़िल्म छपाक की बात करें तो ये दिल्ली की एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी से प्रेरित है। फ़िल्म में दीपिका पादुकोण संग विक्रांत मैसी, अंकित बिष्ट संग अन्य एक्टर्स हैं। मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी फ़िल्म छपाक, 10 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ होनी है। दीपिका की यह फ़िल्म एसिड अटैक की शिकार लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन और उनके संघर्ष की कहानी पर आधारित है।

नहीं रिलीज़ होगी Chhapaak? जिस लड़की पर बनी फिल्म, उसी की वकील ने दायर की याचिका

Chhapaak का समर्थन महज़ दिखावा, ‘चंदेल’ को ‘चांडाल’ लिख कंगना की बहन का उड़ाया मज़ाक

बॉलीवुड की रीत पुरानी: ‘उन्हें’ रखो सिर-माथे पर, हिंदुओं की भावना ठेंगे पर

अब छत पर कोई सोनाली नहीं सोती… फिर भी तेजाब की बारिश से आँखें खुलती है

अप्रैल 2003 की एक रात सोनाली मुखर्जी धनबाद में अपने घर की छत पर सोई थी। अँधेरे में तीन लोग आए। सोनाली की आँख खुली तो तेजाब की बारिश हो रही थी। एनसीसी कैडेट और कॉलेज टॉपर रही इस लड़की पर तेजाब उन तीन लोगों ने फेंका था, जिनकी छेड़खानी का उन्होंने विरोध किया था। हमले से सोनाली का चेहरा मांस का ठूंठ भर रह गया। देखने की क्षमता प्रभावित हुई। सदमे से दादा मर गए। माँ अवसाद में चली गई। इलाज कराने में पिता की जमीन बिक गई। एक वक्त ऐसा भी आया कि टूट चुकी सोनाली ने इच्छामृत्यु की इजाजत तक मॉंगी। कुछ समाजिक योगदान, थोड़े-बहुत सरकारी मदद और सबसे बढ़कर जिजीविषा जिसकी वजह से आज सोनाली खुशहाल जिंदगी जी रही है। पति-बच्चे सब कुछ तो हैं अब उसके पास। यह कैसे हुआ? इसे सोनाली के शब्दों में ही जानें, “जब मुझ पर एसिड अटैक हुआ तो सोनाली के चेहरे को तो उन्होंने ख़त्म कर दिया लेकिन मेरे अंदर की सोनाली को मैने ख़त्म नहीं होने दिया।”

फिल्म छपाक की कहानी जिस लक्ष्मी अग्रवाल पर आधारित है उन पर तो दिल्ली में सरेबाजार एसिड अटैक हुआ था। हमलावर 32 साल का नईम खान था। वह इस बात से खुन्नस खाए बैठा था कि 15 साल की लक्ष्मी ने शादी का उसका प्रस्ताव कैसे ठुकरा दिया। हमले से पहले वह 10 महीने तक लक्ष्मी का पीछा करता रहा। जिजीविषा की बदौलत ही लक्ष्मी एक दिन फैशन तक का चेहरा बन गईं।

मुंबई की अनमोल की मॉं पर तो उसके पिता ने ही एसिड फेंक दिया था। बकौल अनमोल वह एक बेटी के पैदा होने से खुश नहीं थे। जिस दोपहर उनके पिता ने एसिड फेंका अनमोल को मॉं दूध पिला रही थी। मॉं ने अनमोल को तो किसी तरह बचा लिया, लेकिन खुद को नहीं बचा पाई। 2017 में यूपी की राजधानी लखनऊ में एक गैंगरेप पीड़िता पर जब एसिड फेंका गया तो उस पर किया गया इस तरह का 5वॉं हमला था।

दास्तानों की फेहरिस्त लंबी है और सिलसिला है कि टूट नहीं रहा। एसिड अटैक को लेकर जो जागरूकता और कानूनी सख्ती दिख भी रही है वह पीड़िताओं की लड़ाई के कारण ही मुमकिन हो पाया है।

साभार: Loksabha

बीते 13 दिसंबर 2019 को लोकसभा में महिलाओं पर तेजाब हमले को लेकर पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए केंद्रीय महिला एवं बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने पटल पर कुछ आँकड़े रखे थे। इसके मुताबिक 2015-17 के बीच महिलाओं पर तेजाब फेंकने की 448 घटनाएँ हुई। राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के अनुसार उससे पहले 2014 में ऐसी 137 घटनाएँ हुई थी। यानी, हर दूसरे या तीसरे दिन देश में कोई न कोई महिला तेजाब से नहलाई जा रही है। उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल और दिल्ली में इस तरह की घटनाएँ सबसे ज्यादा हो रही। एनसीआरबी के आँकड़े बताते हैं देश की राजधानी दिल्ली में 2014.17 के बीच महिलाओं पर 43 एसिड अटैक हुए।


साभार: Loksabha

एक अभिनेत्री के पब्लिसिटी स्टंट पर फिदा हो आप छपाक देखें या उसकी कारस्तानी से आहत हो शो की बुकिंग रद्द करें, यह आपकी मर्जी है। लेकिन, ऐसी घटनाओं रोकना, पीड़िताओं के साथ खड़े होना एक समाज के तौर पर हमारी मर्जी का सवाल नहीं है। हमें ऐसी घटनाओं को रोकना ही होगा। इससे लड़ना ही होगा। ताकि कल को कोई सोनाली फिर से टूटकर इच्छामृत्यु की इजाजत नहीं मॉंगे। ताकि फिर कल को किसी लक्ष्मी अग्रवाल को अपने बच्चों को पालने के लिए संघर्ष न करना पड़े।

‘आपके संघर्ष, आपकी लड़ाई सब बेकार अगर हिन्दुओं से घृणा न करें’ – रंगोली चंदेल ने खोली गिरोह की गाँठें

Chhapaak का समर्थन महज़ दिखावा, ‘चंदेल’ को ‘चांडाल’ लिख कंगना की बहन का उड़ाया मज़ाक

‘छपाक’ की रियल स्टोरी: 15 साल की लक्ष्मी ने शादी से इनकार किया तो 32 साल के नईम ने तेजाब फेंका

‘नीतीश बहुत दिन रहे, अब भाजपा का CM चाह रहे बिहार के लोग… और हम सक्षम हैं’

बिहार विधानसभा चुनाव में अभी वक्त है। मगर, राज्य में सियासी घमासान शुरू हो चुका है। एक ओर राजद-जदयू के बीच पोस्टर वॉर छिड़ा हुआ है। वहीं इसी बीच, भाजपा के विधान परिषद सदस्य संजय पासवान का बड़ा बयान आया है। संजय पासवान ने कहा है कि बिहार की जनता किसी भाजपा नेता को मुख्यमंत्री के रूप में देखना चाहती है। उनका कहना है कि राज्य में बीजेपी किसी भी राज्य से और यहाँ के अन्य दलों में से सबसे मजबूत और सक्रिय पार्टी है।

संजय पासवान ने हालाँकि यह चौंकाने वाला बयान देते समय भाजपा नेता ने स्पष्ट किया कि इस विषय पर आखिरी फैसला प्रधानमंत्री मोदी और उनके नेता सुशील मोदी ही लेंगे। लेकिन उनका मानना है कि अब पार्टी अकेले चुनाव जीतने में सक्षम है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, भाजपा की ओर से संजय पासवान ने सुशील मोदी और नित्यानंद राय के नाम पर अपनी सहमति दिखाई। उन्होंने कहा है कि बिहार में मुख्यमंत्री सामाजिक न्याय की धारा का चाहिए। सवर्ण समाज खुद भी मान रहा है कि उनके समाज से मुख्यमंत्री बनने वाला नहीं है, इसलिए सुशील मोदी जी, नित्यानंद राय जी इसके लिए सक्षम हैं। नीतीश कुमार जी भी सामाजिक न्याय के बैकग्राउंड से आते हैं, इसलिए हमलोग उनको मानते हैं। लेकिन अब वो काफी समय तक रहे हैं, अब बिहार के लोगों का मन है कि बीजेपी से सीएम बनें।

गौरतलब है कि संजय पासवान के इस बयान से खलबली मच गई है। ऐसा इसलिए, क्योंकि बिहार में जेडीयू-बीजेपी-एलजेपी गठबंधन की सरकार है, जिसकी कमान जेडीयू नेता नीतीश कुमार संभाल रहे हैं। आरजेडी प्रमुख लालू यादव के जेल जाने के बाद बिहार की वर्तमान राजनीति के नीतीश कुमार सबसे बड़ा राजनीतिक चेहरा हैं।

इतना ही नहीं, पिछले विधानसभा चुनाव के बाद 278 दिन तक आरजेडी पार्टी के साथ सरकार का कार्यकाल छोड़ दें, तो नीतीश ही 2005 से लगातार बिहार के मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं और बीजेपी के साथ गठबंधन में हमेशा अहम भूमिका में रहे हैं।

इसके अलावा भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं गृहमंत्री अमित शाह एक चैनल को इंटरव्यू देते हुए पहले बता चुके हैं कि बिहार में गठबंधन का चेहरा नीतीश कुमार ही होंगे और उन्हीं के नेतृत्व में चुनाव लड़ेंगे। इसे लेकर कोई संशय नहीं होना चाहिए।

बहुत हुआ नीतीश कुमार, अब किसी BJP नेता को मिलना चाहिए CM बनने का मौका: पूर्व केंद्रीय मंत्री

ठीके तो है नीतीश कुमार: विकल्पहीनता की आड़ में JDU का नया नारा, अब ‘बिहार में बहार’ नहीं

स्वपन दासगुप्ता SFI और TMC के उपद्रवी छात्रों की घेराबंदी से 7 घंटे बाद हुए मुक्त, विजयवर्गीय ने ममता को दी चेतावनी

कोलकाता में विश्व भारती विश्वविद्यालय में बंधक बनाए गए भारतीय जनता पार्टी के राज्यसभा सदस्य और वरिष्ठ पत्रकार स्वपन दासगुप्ता और विश्वविद्यालय के कुलपति क़रीब छ: घंटे बाद वामपंथी छात्रों की घेराबंदी से मुक्त हुए। विश्वविद्यालय के सूत्रों के अनुसार, छात्रों का धरना समाप्त होने के बाद रात क़रीब दस बजे बीजेपी नेता और कुलपति बाहर आ सके। बता दें कि बुधवार (8 जनवरी) नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) पर आधारित एक व्याख्यान के तहत ‘सीएए 2019: समझ और व्याख्या’ विषय पर बोलना था। इस दौरान भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता का घेराव करते हुए कुलपति समेत क़रीब 70 लोगों को विश्वविद्यालय के एक कमरे में बंद कर दिया गया था।

इस पर कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता राशिद अल्वी ने प्रतिक्रिया स्वरूप कहा, “इस देश के अंदर जहालत नहीं है, ऐसा नहीं है कि लोग पढ़ें-लिखे नहीं हैं। सरकार को समझाने और पढ़ाने की ज़रूरत नहीं है। लोग CAA और NRC का मतलब अच्छी तरह से समझते हैं।” इसके आगे उन्होंने कहा कि CAA लागू होने के क्या नतीजे होंने हैं यह बात देश के लोगों को मालूम है। उन्होंने इशारे-इशारे में केंद्र सरकार और स्वपन दासगुप्ता समेत अन्य लोगों को 6 घंटे बंधक बनाए जाने को लेकर कहा, “अगर आप लोगों को गुमराह करने की कोशिश करेंगे, तो आपको लोगों का जवाब सुनना पड़ेगा।”  

दरअसल, गुरुदेव रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित विश्व भारती विश्वविद्यालय में बुधवार (8 जनवरी) को नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) पर एक परिचर्चा सत्र को संबोधित करने स्वपन दासगुप्ता गए थे। इस दौरान छात्रों ने नारे लगाकर उनके व्याख्यान को बाधित कर दिया। आरोप है कि इस दौरान वहाँ वामपंथी और तृणमूल के छात्र संगठन के लोगों ने मिलकर उन्हें अंदर ही घेर लिया और बाहर नहीं निकलने नहीं दिया। वे विश्वविद्यालय के कुलपति के कमरे में क़ैद थे। रात आठ बजे जब यह मामला सुर्ख़ियों में आया तब हंगामा मच गया। भाजपा नेता दासगुप्ता के अलावा, विश्व भारती विश्वविद्यालय के कुलपति विद्युत चक्रवर्ती और कई अन्य लोगों को भी छात्रों ने बंधक बना लिया था।

भाजपा के प्रदेश प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव कैलाश विजयवर्गीय ने वीडियो जारी कर ममता सरकार को गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी थी। उन्होंने कहा था कि दासगुप्ता का घेराव करने वालों में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ़ इंडिया (SFI) और TMC के गुंडे शामिल थे। इसके अलावा, SFI के एक नेता ने कहा था कि नक्सली छात्रसंघ के सदस्य भी शामिल थे। बता दें कि दासगुप्ता के व्याख्यान कार्यक्रम की जगह SFI, भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) छात्रसंघ के विरोध के कारण पहले से ही बदल दी गई थी, बावजूद इसके उन्हें छात्रों ने बंधक बना लिया।

बंधक बनाए जाने के बाद भाजपा नेता स्वपन दासगुप्ता ने ट्वीट कर बताया था, “विश्व भारती, शांतिनिकेतन में एक कमरे के अंदर लगभग 70 लोग बंद हैं, विश्वविद्यालय द्वारा CAA पर आधिकारिक व्याख्यान में भाग लेने आए थे। यहाँ हमारे साथ विश्वविद्यालय के वीसी भी शामिल हैं। टकराव के बाद बाहर से भीड़ के चिल्लाने की आवाज़ आ रही है।”

प्रियंका-कॉन्ग्रेस आग बुझाने का काम करती हैं और ये आग लगाने का, मोदी-शाह दंगों के एक्सपर्ट: राशिद अल्वी

JNU हिंसा में वामपंथी हुए बेनकाब! एक मोबाइल नंबर, एक व्हॉट्सअप ग्रुप और कई स्क्रीनशॉट से पर्दाफाश

‘रजिस्ट्रेशन कराने गईं छात्राओं के प्राइवेट पार्ट पर हमला, बाथरूम ले जाकर दुर्व्यवहार’ – JNU मामले में गंभीर आरोप

कॉन्ग्रेस और लेफ्ट गंदी राजनीति कर रहे, मैं उनके साथ नहीं: CAA-NRC पर ममता बनर्जी ने विपक्ष को मारी ‘लात’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने 13 जनवरी को दिल्ली में होने वाली विपक्षी पार्टियों की बैठक का बहिष्कार कर दिया है। उन्होंने गुरुवार (जनवरी 8, 2020) को आरोप लगाया है कि कॉन्ग्रेस और वामदल पश्चिम बंगाल में गंदी राजनीति कर रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वह अब अकेले नागरिकता संशोधन कानून और एनआरसी के खिलाफ लड़ाई लड़ेंगी।

गौरतलब है कि इससे पहले दक्षिण परगना में हुई एक सभा में ममता बनर्जी ने भारत बंद बुलाए जाने के लिए लेफ्ट पार्टियों पर सीधा हमला बोला था। उन्होंने लेफ्ट पर निशाना साधते हुए कहा था कि वामपंथ की कोई विचारधारा नहीं है। वे केवल बंद बुलाकर और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक लेफ्ट द्वारा राज्य में की गई हिंसा सब ‘दादागिरी’ में आती है न कि आंदोलन में। इससे तो बेहतर है कि उनकी राजनीतिक मौत हो जाए।

बुधवार को कॉन्ग्रेस और वामपंथियों की राजनीति की आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था, “वामपंथी पार्टियों की कोई विचारधारा नहीं हैं। रेलवे पटरियों पर बम बिछाना गुंडागर्दी में आता है। आंदोलन के नाम पर रास्ते में चलने वालों को मारा जा रहा है और उन पर पथराव हो रहा है। ये दादागिरी है, न कि आंदोलन। मैं इस भारतबंद की निंदा करती हूँ।”

इसके अलावा उन्होंने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियों द्वारा बुलाए बंद को खारिज कर दिया गया है। क्योंकि वे बंद का आह्वान करके और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं, इस प्रचार को हासिल करने के बजाय राजनीतिक मौत बेहतर है।

बता दें कि लेफ्ट पर हमलावर होते हुए बंगाल मुख्यमंत्री केरल की माकपा की तारीफ़ कर चुकी हैं। उन्होंने कहा कि केरल में माकपा की सरकार है और वह बंगाल में वामपंथियों से बहुत बेहतर है क्योंकि कम से कम वे अपनी विचारधारा में विश्वास करते हैं। वामियों के पास मानवता का मूल्य मात्र शेष नहीं बचा है। कहीं ट्रेन के नीचे बम रख दिया गया, कहीं पत्थर फेंके जा रहे हैं, कहीं ट्रेनें तो कहीं बसें रोकी जा रही हैं तो कहीं बाइक सवारों के साथ मारपीट की गई है। उन्होंने सवाल उठाया कि यह दादागिरी नहीं तो और क्या है? क्या इसे आंदोलन कहा जा सकता है?

इसके बाद उन्होंने सिंगूर आंदोलन की बात उठाई और कहा, “मैंने 26 दिनों तक आंदोलन किया था, लेकिन एक बस तक में किसी ने हाथ नहीं लगाया। आंदोलन एक दिन का नहीं, बल्कि निरंतर चलता है। आंदोलन करना कठिन होता है क्योंकि इसके लिए रास्ते पर पड़े रहना पड़ता है।”

लेफ्ट की हिंसा ‘दादागिरी’ है न कि आंदोलन, खत्म हो जाऊँगी लेकिन वामपंथियों की तरह नहीं करूँगी: ममता बनर्जी

ममता बनर्जी को झटका: कलकत्ता हाईकोर्ट ने CAA-NRC संबंधी विज्ञापनों को हटाने के दिए निर्देश

‘मुस्लिम टोपी’ पहन भाजपा कार्यकर्ता तोड़फोड़ कर समुदाय विशेष को बदनाम कर रहे: ममता बनर्जी

ठाकुरबाड़ी में जब हाे ‘हर-हर माेदी’ फिर CAA-NRC से क्यूँ न तड़पे ममता दीदी!

‘आपके संघर्ष, आपकी लड़ाई सब बेकार अगर हिन्दुओं से घृणा न करें’ – रंगोली चंदेल ने खोली गिरोह की गाँठें

5 साल में 54 सर्जरी। चेहरे पर एसिड अटैक के बाद रह गया दाग। जलने की पीड़ा। एक आँख खराब। एक स्तन को नुकसान। और भी बहुत कुछ… जाहिर है, रंगोली चंदेल जैसी एसिड अटैक सर्वाइवर बन कर जीना आसान नहीं है। लेकिन, यकीन मानिए उससे भी ज्यादा कठिन है अतुल खत्री हो जाना। अतुल खत्री- एक बुजुर्ग कॉमेडियन। एक संवेदनहीन इंसान। मौक़ापरस्त शख्सियत। मोदी सरकार की नीतियों का कड़ा विरोधी। और अंत में कुत्सित बुद्धि।

आज सोशल मीडिया पर एक तबके के बीच ‘छपाक’ इन दिनों सुर्खियों में है। वो भी दीपिका के जेएनयू जाने को लेकर नहीं, बल्कि लक्ष्मी अग्रवाल की पूरी कहानी को पर्दे पर उतरता देखने के लिए। ताकि एसिड अटैक का शिकार हुए लोगों के दर्द को समाज के बीच गंभीर विषय बनाकर उतारा जा सके। लेकिन जब देश में एसिड अटैक पर बातचीत का माहौल बन रहा है तो उसी समय खुद को लेखक और कॉमेडियन कहने वाले अतुल खत्री ने रंगोली चंदेल यानी एक एसिड पीड़िता को ‘चांडाल’ कहकर मजाक उड़ाया है।

अब रंगोली की गलती क्या थी? सिर्फ़ इतनी कि मौक़े दर मौक़े वो अक्सर देश से जुड़े मुद्दों पर अपनी राय रखती हैं। हिंदुओं के ख़िलाफ़ निराधार नहीं बोलतीं। मोदी सरकार की नीतियों की आलोचना नहीं करतीं। और, वैचारिक रूप से, राजनैतिक तौर पर उन्हें जो गलत लगता है, उस पर बेबाकी से अपनी राय रखती हैं। हालाँकि आपको लगेगा कि ये सब तो लोकतांत्रिक देश के हरेक नागरिक के अधिकार हैं। लेकिन, नहीं! अतुल खत्री के लिए इन सभी गुणों से परिपक्व व्यक्ति उनके घटिया व्यंग्यों के लिए इस्तेमाल की जाने वाली संदर्भ सामग्री है।

जेएनयू में हिंसा हुई। लेफ्ट ने एबीवीपी पर इल्जाम लगाया। एबीवीपी ने लेफ्ट पर। किसने क्या किया? कौन-कहाँ शामिल था? इसकी पुष्टि कहीं नहीं हुई। लेकिन अतुल खत्री जैसे लोगों ने अपनी विचारधारा के अनुरुप घोषित कर दिया कि हमला एबीवीपी ने किया। इसी गैंग ने एबीवीपी का नया नामकरण भी कर दिया- अखिल भारतीय विलेन परिषद! मतलब हद है टुच्चई की।

अब जब धीरे-धीरे बात खुली, पूरे मामले में लेफ्ट के हाथ का खुलासा हो रहा है और दुनिया को मालूम चल रहा है कि वामपंथी बर्बरता का शिकार हुए पीड़ितों में एबीवीपी के कार्यकर्ता शामिल हैं। तो अतुल खत्री ने अपने एक ट्वीट में पहले दीपिका के जेएनयू जाने पर उनका बचाव करते हैं। फिर दूसरे ट्वीट में कहते हैं कि अब एबीवीपी को दीपिका के बजाय रंगोली की सहानुभूनिति मिलेगी। अब चूँकि यहाँ रंगोली हमेशा ऐसे मुद्दों पर खुलकर बोलती हैं, तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है कि वे अपनी सहानुभूति किसके साथ शेयर करेंगी। और यह भी स्पष्ट है कि अतुल इस पर क्या राय रखेंगे। इस गिरोह के लोगों का पैटर्न फिक्स है- स्वरा भास्कर लेफ्ट को सपोर्ट करे तो सही है, समर्थन देना है। लेकिन कंगना या उनकी बहन किसी घटना के दूसरे पहलू को सपोर्ट करें तो उनका मखौल उड़ाना है, मान-मर्दन करना है।

अतुल खत्री नैरेटिव और प्रोपेगेंडा सेट करने के अव्वल खिलाड़ी हैं। उनसे कुछ पूछा जाए तो सटिक जवाब के बजाय वो मुद्दे को घुमाना बखूबी जानते हैं। दीपिका पादुकोण-JNU मामले में भी यही हुआ। दीपिका के JNU प्रकरण पर ट्वीट करते हुए किसी ने उनसे एबीवीपी के छात्रों से न मिलने की बात उठाई। लेकिन इसका जवाब दिया अतुल ने। गिरोह ऐसे ही काम करता है। ट्वीट का जवाब देते हुए अतुल ने रंगोली को चांडाल (सरनेम चंदेल है, लेकिन अतुल ने जानबूझकर चांडाल लिखा) कहा और लिखा कि एबीवीपी को रंगोली चांडाल अपनी सहानुभूति देंगी।

एक एसिड अटैक सर्वाइवर का रील कैरेक्टर निभाने वाली दीपिका के समर्थन में एक रियल लाइफ एसिड सर्वाइवर रंगोली चंदेल के बारे में ऐसी टिप्पणी करना कहाँ तक उचित था और कौन सी घृणित मानसिकता को दर्शाता है खुद सोचिए… अगर वाकई लक्ष्मी का किरदार निभाने वाली दीपिका के लिए आपके मन में सम्मान का भाव है, तो असलियत में उस दर्द से उभरी रंगोली चंदेल के विचारों के प्रति क्यों नहीं? क्योंकि वास्तविकता में आपको एसिड/अटैक/दर्द/महिला आदि से कुछ भी लेना-देना नहीं। आपको तो बस अपनी दुकान चलानी है – हिंदुओं से घृणी की, मोदी-BJP से नफरत की, वामपंथी प्रोपेगेंडे की।

खैर, अतुल खत्री को उनके इस ट्वीट के लिए सोशल मीडिया पर लोगों ने जमकर लताड़ा। उन्हें सलाह दी गई कि उनकी दो बेटियाँ हैं। ऐसे शब्द किसी लड़की के लिए इस्तेमाल मत करिए क्योंकि कर्म पीड़िताओं की तरह दयावान नहीं होता, वो बदला जरूर लेता है।

अतुल खत्री के ट्वीट पर यूजर्स की टिप्पणी

एक यूजर ने रंगोली के विचारों के लिए उन्हें दीपिका से सौ गुणा बेहतर बताया। लोगों ने उन्हें कॉमेडियन के नाम पर कलंक, गंदा दिमाग, भाजपा से नफरत करने वाला तक बताया और साथ ही पूछा कि आखिर उनकी खुद की क्या औकात है, जो एबीवीपी और रंगोली का नाम लेकर औकात की बात कर रहे हैं।

इसी दौरान AN OPEN LETTER नाम के ट्विटर से भी इस घटिया ट्वीट का जवाब आया। जिसमें उन्होंने लिखा- रंगोली चंदेल एक वास्तविक एसिड अटैक सर्वाइवर है। जबकि दीपिका सिर्फ़ एक सर्वाइवर का किरदार निभा रही है और छात्रों के सामने पीआर स्टंट कर रही है। ऐसे में अतुल खतरी जैसे लोग सिर्फ़ एक को बचाने के लिए दूसरे का नाम ही बदलकर उसका अपमान कर रहे हैं।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर अतुल खत्री के ट्वीट को देखकर उन्हें खूब ट्रोल किया गया। लेकिन बेवजह ऐसे अपना नाम किसी संदर्भ के साथ बिगड़ता देख रंगोली भी भावुक हो गईं। उन्होंने AN OPEN LETTER के ट्वीट पर जवाब देते हुए कहा – “यदि हम हिंदुओं से घृणा नहीं करते हैं, अपनी सरकार को या सुरक्षा बलों को खलनायक नहीं बताते, तो हमारे संघर्ष, हमारी राय, और आवाज को खारिज कर दिया जाता है। यहाँ आपको सराहा तभी जाएगा, जब आप देश के भविष्य के बारे में निराशावादी हों, पाकिस्तान से और उसके आतंकियों से प्यार करें… इसलिए क्षमा करें मुझे ऐसे प्यार की जरूरत नहीं।”

अब जाहिर है कि अपने लिए बेवजह टिप्पणी सुनना किसी को नहीं पंसद आएगा। और वो भी तब जब कोई वर्चुअल स्पेस का प्राणी आपके संघर्षों को जानते-समझते हुए उसे खारिज कर दे और किसी की छवि निर्मित करने के लिए किसी को चांडाल तक बुला डाले। वो भी सिर्फ़ लोगों के बीच सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए। सिर्फ़ इसलिए क्योंकि आपका संघर्ष, आपका दर्द, आपका सफर भले ही किसी अन्य की तरह मिलता-जुलता है, लेकिन विचार उनसे अलग हैं, बेबाक हैं और सरकार के पक्ष में हैं।

नहीं रिलीज़ होगी Chhapaak? जिस लड़की पर बनी फिल्म, उसी की वकील ने दायर की याचिका

Chhapaak का समर्थन महज़ दिखावा, ‘चंदेल’ को ‘चांडाल’ लिख कंगना की बहन का उड़ाया मज़ाक

बॉलीवुड की रीत पुरानी: ‘उन्हें’ रखो सिर-माथे पर, हिंदुओं की भावना ठेंगे पर

डियर दीपिका! नकली पलकों पर भाप की बूंदे टिका कर नौटंकी करना बंद करो

JNU में दीपिका पादुकोण का जाना प्रचार की पैंतरेबाजी, पाकिस्तान ने थपथपाई पीठ

नहीं रिलीज़ होगी Chhapaak? जिस लड़की पर बनी फिल्म, उसी की वकील ने दायर की याचिका

दीपिका पादुकोण की फ़िल्म छपाक अपनी रिलीज़ से पहले ही विवादों में घिरती जा रही है। इस फ़िल्म को लेकर सोशल मीडिया पर पहले से ही काफी हंगामा चल रहा है और अब एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की वकील अपर्णा भट्ट भी फ़िल्म निर्माताओं से नाराज़ दिख रही हैं। इसलिए उन्होंने दिल्ली की पटियाला हाउस कोर्ट में फ़िल्म की रिलीज़ पर रोक लगाने की माँग की है।

अपनी इस याचिका में अपर्णा भट्ट ने कहा है कि उन्होंने एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल का केस वर्षों तक लड़ा, लेकिन इस फ़िल्म में मुझे क्रेडिट नहीं दिया गया है। अपर्णा का कहना है कि उन्होंने फ़िल्म छपाक की स्क्रिप्ट में भी काफी मदद की थी। उन्होंने कहा कि फ़िल्म के निर्माता ने उन्हें भरोसा दिया था कि उन्हें क्रेडिट दिया जाएगा लेकिन ऐसा नहीं हुआ। छपाक में अपर्णा को क्रेडिट नहीं दिया गया।

फेसबुक पर लक्ष्मी की वकील अपर्णा भट्ट ने लिखा था कि कैसे वे इस बात से नाराज़ हैं कि फ़िल्म छपाक के मेकर्स ने उन्हें अपनी फ़िल्म में कोई क्रेडिट नहीं दिया है। उन्होंने ये भी कहा कि वे इस मामले में क़ानून की मदद लेंगी। साथ ही उन्होंने स्पष्ट किया कि वे दीपिका पादुकोण और बाकी लोगों के बराबरी की नहीं हैं लेकिन इस मामले में वे चुप नहीं बैठेंगी।

लक्ष्मी अग्रवाल की वकील अपर्णा भट्ट ने फ़ेसबुक पर लिखा, “छपाक देखने के बाद की घटनाओं से काफ़ी परेशान हूँ। मुझे अपनी पहचान को बचाने और अपनी ईमानदारी को बनाए रखने के लिए क़ानूनी कार्रवाई करने को मजबूर किया गया। एक समय मैंने पटियाला हाउस कोर्ट में लक्ष्मी का प्रतिनिधित्व किया था… कल कोई मेरा प्रतिनिधित्व करेगा… जीवन की अजीब विडंबना है।” उन्होंने आगे दीपिका और फ़िल्म के निर्माताओं के ख़िलाफ़ क़ानूनी कार्रवाई करने के बारे में लिखा है।

अपर्णा भट्ट ने फेसबुक पर लिखा

महिला वकील ने एक पोस्ट में लिखा, “मैं अपने सभी दोस्तों को धन्यवाद देती हूँ जिन्होंने मेरे योगदान को सराहा और टीम छपाक द्वारा ‘थैंक यू’ न कह पाने को चुनौती दी! मेरी शक्ति बॉलिवुड के इन ताकतवर निर्माताओं के बराबर नहीं है, लेकिन चुप रहने से अन्याय को और बढ़ावा मिलेगा। मैंने इस मामले को अगले स्तर पर ले जाने का फ़ैसला किया है। परिणाम का सामना करने के लिए तैयार हूँ।”

अपर्णा भट्ट की फेसबुक पोस्ट

इससे पहले, 11 दिसंबर को अपर्णा भट ने फ़िल्म ‘छपाक’ के निर्माण के लिए ख़ुशी ज़ाहिर की थी। इसके लिए भी उन्होंने फेसबुक का सहारा लिया था। उन्होंने लिखा था कि इस केस के ज़रिए बीते 8 वर्षों के दौरान क़ानून में कई तरह के सकारात्मक बदलाव किए गए। इस दौरान, न्यूनतम मुआवज़ा (एसिड अटैक की पीड़िता के लिए) बढ़ा गया, निजी अस्पतालों में मुफ़्त इलाज सुनिश्चित हो गया और अंतत:, एसिड की बिक्री को भी नियंत्रित कर दिया गया। उन्होंने तब इस बात को लेकर ख़ुशी ज़ाहिर की थी कि बॉलीवुड में इस विषय पर फ़िल्म बनेगी। हालाँकि, फ़िल्म देखने के बाद, उन्होंने अपनी राय बदल दी है।

अपर्णा भट्ट का फेसबुक पर लिखा पुराना पोस्ट

बता दें कि फ़िल्म छपाक के चर्चे हर तरफ़ हो रहे हैं। इसकी वजह है दीपिका पादुकोण का दिल्ली की जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी (JNU) जाकर विरोध प्रदर्शन में भाग लेना। सोशल मीडिया पर जहाँ कुछ लोग दीपिका की तारीफ़ कर रहे हैं तो वहीं कुछ छपाक को बॉयकॉट करने की बात भी कर रहे हैं।

फ़िल्म छपाक की बात करें तो ये दिल्ली की एसिड अटैक सर्वाइवर लक्ष्मी अग्रवाल की जिंदगी से प्रेरित है। फ़िल्म में दीपिका पादुकोण संग विक्रांत मैसी, अंकित बिष्ट संग अन्य एक्टर्स हैं। मेघना गुलज़ार के निर्देशन में बनी फ़िल्म छपाक, 10 जनवरी को सिनेमाघरों में रिलीज़ होनी है। दीपिका की यह फ़िल्म एसिड अटैक की शिकार लक्ष्मी अग्रवाल के जीवन और उनके संघर्ष की कहानी पर आधारित है।

JNU में दीपिका पादुकोण का जाना प्रचार की पैंतरेबाजी, पाकिस्तान ने थपथपाई पीठ

डियर दीपिका! नकली पलकों पर भाप की बूंदे टिका कर नौटंकी करना बंद करो

दीपिका पादुकोण को मिला पाकिस्तानी सेना का समर्थन, बताया सच्चाई के लिए खड़ी बहादुर महिला


Chhapaak का समर्थन महज़ दिखावा, ‘चंदेल’ को ‘चांडाल’ लिख कंगना की बहन का उड़ाया मज़ाक

भारतीय कॉमेडी की एक अजीब धारणा यह बन गई है कि अधिकतर कॉमेडियन्स को यह लगता है कि उन्हें इसलिए नापसंद किया जाता है क्योंकि वे पीएम मोदी का मज़ाक उड़ाते हैं। वहीं, जो लोग पीएम मोदी का मज़ाक उड़ाए जाने वाली कॉमेडी से नाख़ुश होते हैं उन्हें ‘भक्त’ करार दिया जाता है। ऐसे में यह सलाह देना ज़रूरी बन जाता है कि कॉमेडियन्स को पीएम मोदी का मखौल उड़ाने की बजाए अपनी कॉमेडी के स्तर को सुधारना चाहिए। लेकिन, वो ऐसा नहीं करते बल्कि कॉमेडी के नाम पर अपनी कुत्सित सोच को उजागर करते रहते हैं।

ऐसा ही कुछ एक बुज़ुर्ग कॉमेडियन अतुल खत्री ने किया। अपनी कॉमेडी के चक्कर में, उन्होंने एक तरफ़ तो एक एसिड अटैक सर्वाइवर का मज़ाक उड़ाया और वहीं दूसरी तरफ़ वो एक और एसिड अटैक सर्वाइवर के जीवन पर आधारित फ़िल्म बनाने का समर्थन करते हैं।

अतुल खत्री का ट्वीट जिसमें रंगोली चंदेल का मज़ाक उड़ाया गया

कॉमेडियन अतुल खत्री ने ट्विटर यूज़र और भाजपा समर्थक अंकित जैन को यह कहकर अपनी कुत्सित सोच का खुला प्रदर्शन किया कि ABVP कार्यकर्ताओं को ‘रंगोली चांडाल’ से सहानुभूति मिलेगी। उनकी इतनी ही औकात है। यह जवाब बुज़ुर्ग कॉमेडियन ने अंकित जैन के उस सवाल पर किया, जहाँ उन्होंने दीपिका पादुकोण को लेकर लिखा था कि अगर वो सच में छात्रों के साथ हुई हिंसा के ख़िलाफ़ थीं, तो उन्हें ABVP के उन छात्रों से भी मुलाक़ात करनी चाहिए थी, जो JNU हिंसा में घायल हुए थे।

एक बात और ग़ौर करने वाली है कि बुज़ुर्ग खत्री बॉलीवुड अभिनेता कंगना रनौत की बहन ‘रंगोली चंदेल’ को ‘रंगोली चांडाल’ के रूप में संदर्भित कर रहे थे। उनकी यह सोच एसिड अटैक की पीड़िताओं के प्रति उनकी झूठी हमदर्दी का खुला प्रदर्शन करती है। ऐसा इसलिए क्योंकि रंगोली ख़ुद भी एसिड अटैक की शिकार हो चुकी हैं। इसके अलावा, चांडाल शब्द लिखकर उन्होंने जातिवाद का ज़हर भी घोलने का काम किया है। एक तरफ़ एसिड अटैक सर्वाइवर का मज़ाक उड़ाया और दूसरी तरफ़ एक जातिगत शब्द का इस्तेमाल किया, जो निंदनीय है।

दरअसल, दीपिका पादुकोण मंगलवार शाम को अपनी आगामी फिल्म छपाक के प्रचार के लिए JNU में थीं। बता दें कि यह फ़िल्म एक एसिड अटैक सर्वाइवर के जीवन पर आधारित है।

दीपिका पादुकोण ने फ़िल्म में एसिड अटैक सर्वाइवर का महज़ किरदार निभाया जबकि रंगोली चंदेल पर हक़ीक़त में तेज़ाब से हमला हुआ था। उन्होंने वास्तव में उस दर्दनाक पीड़ा को सहा है। यह सब उन्हें इसलिए झेलना पड़ा क्योंकि उन्होंने एक ऐसे व्यक्ति के प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया था जो उनसे शादी करना चाहता था। एसिड अटैक के बाद उन्हें 54 सर्जरी करवानी पड़ी। बावजूद इसके, डॉक्टर्स उनके कान का पुनर्निर्माण नहीं कर सके।

इस दौरान रंगोली चंदेल ने अपनी एक आँख भी खो दी थी और उनके एक स्तन को बहुत नुकसान पहुँचा था, जिसकी वजह से उन्हें अपने नवजात बच्चे को स्तनपान कराते समय कई समस्याओं का सामना करना पड़ा। अपनी पीड़ा को बयाँ करते हुए उन्होंने पिछले साल अक्टूबर में ट्वीट किया था, “अब भी मैं अपनी गर्दन को नहीं खींच पा रही हूँ, कभी-कभी त्वचा में खुजली इतनी भयंकर होती है कि ऐसा लगता है जैसे मैं मर गई हूँ… भारत में चौंकाने वाले एसिड अटैक सर्वाइवर्स की संख्या बहुत अधिक है, अपराधी कुछ ही हफ़्तों में ज़मानत पर बाहर आ गए, उन्हें इस तरह आज़ाद घूमते देखना बहुत पीड़ादायक होता है।”

कॉमेडियन अतुल खत्री ने एसिड अटैक सर्वाइवर्स पर आधारित फ़िल्म का समर्थन करते हुए रंगोली चंदेल का मज़ाक उड़ाया, जो बेहद शर्मनाक है।

JNU में वामपंथी छात्रों का समर्थन करने पहुँचीं दीपिका पादुकोण, मुंबई का फ़िल्मी गैंग भी सड़क पर

JNU में दीपिका पादुकोण का जाना प्रचार की पैंतरेबाजी, पाकिस्तान ने थपथपाई पीठ

डियर दीपिका! नकली पलकों पर भाप की बूंदे टिका कर नौटंकी करना बंद करो

दीपिका पादुकोण को मिला पाकिस्तानी सेना का समर्थन, बताया सच्चाई के लिए खड़ी बहादुर महिला

महिला IPS असलम खान ने की पुलवामा के आतंकी ‘जैसी बात’, खुलेआम गौमूत्र पर कसा तंज

हिंदू धर्म में गौ के पूजनीय होने के कारण उसके दूध, गोबर, मूत्र को हर कर्मकांड में बेहद पवित्र माना जाता है। ऐसे में वामपंथी और कट्टरपंथी अक्सर हिंदू धर्म को नीचा दिखाने के लिए इसे घृणा और उपहास की नजरों से देखते हैं। अक्सर गाय के गोबर और गौमूत्र को लेकर इनकी उलटी-सीधी बयानबाजी सामने आती रहती है। इसी क्रम में पुलवामा हमले के आतंंकी को भी गौमूत्र का नाम लेकर हिंदुओं को निशाना बनाते देखा गया था। लेकिन, इस बार गौमूत्र पर तंज वामपंथियों, कट्टरपंथियो और आतंकियों से हटकर एक आईपीएस महिला अधिकारी ने कसा है। अधिकारी का नाम असलम खान है।

दरअसल, जेएनयू में वामपंथियों द्वारा रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया को रोकने के कारण भड़की हिंसा पर दिल्ली भाजपा के प्रवक्ता तजिंदर सिंह बग्गा ने ट्विटर पर लेफ्ट विचारधारा के प्रति अपना गुस्सा निकाला। उन्होंने अपने ट्वीट में वामपंथियो को कैंसर कई बार लिखा। जिसके बाद लोगों ने इस ट्वीट पर अलग-अलग प्रतिक्रिया दी। किसी ने बग्गा को उनके ट्वीट के लिए ट्रोल किया, तो किसी ने उनका समर्थन। लेकिन इसी दौरान महिला IPS अधिकारी असलम खान ने लिखा, “क्या हम उन्हें गौ मूत्र से ठीक नहीं कर सकते?”

हालाँकि, ये बात सच है कि आयुर्वेद में गौ-मूत्र को एक कारगर औषधि के रूप में देखा जाता है और ये भी कहा जाता है कि इससे कैंसर जैसी कई घातक बीमारियों से बचा सकता है। लेकिन बग्गा के ट्वीट पर असलम खान ने ‘गौमूत्र’ हिंदू धर्म की मान्यता को अपमानित करने के लिहाज से किया। जिसके बाद सोशल मीडिया यूजर्स ने उन्हें आड़े हाथों ले लिया।

सोशल मीडिया यूजर्स द्वारा असलम को पुलवामा के उस फिदायीन हमलावर आदिल डार की याद दिलाई गई, जिसने ‘गौमूत्र पीने वाले’ कहकर हिंदुओं को मुख्यत: निशाना बनाया था। जिसने अपने आखिरी वीडियो में कहा था, “गौमूत्र पीने वाले भद्दे लोग उनके आक्रमणों का सामना नहीं कर पाएँगे।”

असलम खान ने जो ट्विट किया, इसके बाद उन्हें उनके पद और सोच के लिए धिक्कारा गया। कई लोगों ने तुरंत उन्हें हिंदू धर्म का अपमान करने के लिए पद से हटाने की माँग की। वहीं किसी ने कहा, “ऐसे लोग जनता को प्रोटेक्ट करेंगे? हमें हैरानी नहीं करनी चाहिए अगर यही अधिकारी कल को जिहादियों को भारत में घुसने का पास दे या फिर खुद ही को फिदायीन हमलावरों की तरह उड़ा ले।”

बता दें कि असलम के कमेंट में गौमूत्र पर टिप्पणी देखकर कुछ ने उनके समर्थन में हिंदुओं और हिंदुत्व को निशाना बनाने के लिए ये भी कहा कि प्रशासन में उनके जैसे अन्य अधिकारी भी होने चाहिए।

वहीं, असलम के एक शुभचिंतक ने उन्हें उनकी टिप्पणी पर राय दी कि उन्हें बतौर अधिकारी सार्वजनिक तौर पर गाय पर या फिर किसी धर्म पर ऐसी टिप्पणी कभी नहीं करनी चाहिए। यूजर के मुताबिक वो और असलम एक साथ इस पर मिलकर हँस सकते हैं, लेकिन सार्वजिनक तौर पर ऐसी टिप्पणियों का विरोध करना चाहिए।

फैक्ट चेक: गौमूत्र पीते हैं, दलित से करते हैं भेदभाव… इसलिए मैंने हिंदू धर्म छोड़ कर अपनाया इस्लाम

दलित और गोमूत्र से घृणा करने वाला द वायर का हिन्दूफोबिक मीडिया ट्रोल इसलिए अपराधी नहीं हो सकता