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दिल्ली में हुई हिंसा में 15 से ज्यादा बांग्लादेशी भी थे शामिल, शिकंजा कसने की तैयारी में SIT

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) और नेशनल रजिस्टर आफ सिटीजन्स (NRC) के विरोध के नाम पर दिल्ली में हुई हिंसा को लेकर SIT ने बड़ा खुलासा किया है। एसआईटी के अनुसार हिंसा में 15 से ज्यादा बांग्लादेशी शामिल थे। ये गैर कानूनी तरीके से सीमापुरी इलाके में छिपकर रह रहे थे। इन बांग्लादेशी घुसपैठियों की पहचान कर ली गई है। इनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है। SIT ने कहा है कि जल्द ही ये लोग पुलिस हिरासत में होंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, दिल्ली दंगों की जाँच में जुटी एसआईटी टीम ने अपनी पड़ताल के बाद खुलासा करते हुए बताया कि सीमापुरी इलाके में शुक्रवार (20 दिसम्बर 2019) को जुमे की नमाज के बाद भड़के दंगों में उपद्रवियों की भीड़ में करीब 15 से ज्यादा बांग्लादेशी शामिल थे।

इस मामले की जाँच क्राइम ब्रांच की SIT कर रह है। टीम तिहाड़ जेल जाकर दिल्ली दंगों के मामले में गिरफ्तार करीब 55 आरोपितों से भी पूछताछ करेगी।

एसआईटी ने दावा किया है कि दिल्ली दंगों में इस्लामिक कट्टरपंथी संगठन पॉपुलर फ्रंट ऑफ इंडिया (PFI) के करीब 15 कार्यकताओं के भी नाम सामने आए हैं, जिनसे जल्द पूछताछ हो सकती है। फिलहाल, इन लोगों की कॉल डिटेल खंगाली जा रही है ताकि दिल्ली दंगों के वक्त इन लोगों की लोकेशन को ट्रेस किया जा सके। यहाँ बता दें, कहा जा रहा है कि एसआईटी को पूरी जाँच में फंडिग और लॉजिस्टिक स्पोर्ट के भी कुछ सुराग हाथ लगे हैं। जिनका खुलासा जाँच टीम जल्द करेगी।

उल्लेखनीय है कि यूपी के विभिन्न शहरों में हुई हिंसा में भी PFI की संलिप्तता उजागर हुई है। यूपी के डीजपी ओपी सिंह ने शुक्रवार को कहा कि हालिया हिंसा में इस कट्टरपंथी समूह के सदस्यों की सक्रिय भागीदारी थी। इस समूह के 25 सदस्य अब तक गिरफ्तार किए गए है। उन्होंने बताया कि इनके खिलाफ पर्याप्त साक्ष्य हैं। पीएफआई पर प्रतिबंध लगाने की सिफारिश भी केंद्रीय गृह मंत्रालय से की गई है।

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जमात-ए-इस्लामी के प्रोग्राम को शिवसेना का साथ: CAA के विरोध में संजय राउत ‘हिंदू-विरोधी’ कोलसे के साथ होंगे शामिल

देश के अलग-अलग राज्यों में इस्लामिक संगठनों द्वारा सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ़ कई कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इस कड़ी में जमात-ए-इस्लामी ने भी शिवसेना की सहायता से मुंबई में एक कार्यक्रम का आयोजन किया है। जिसमें पार्टी के दिग्गज नेता संजय राउत खुद शिरकत करेंगे।

यहाँ एनसीपी-कॉन्ग्रेस के साथ गठजोड़ कर सरकार बनाने के बाद दिलचस्प चीज़ ये देखने को मिल रही है कि हिंदुत्व की बुनियाद पर पहचान बनाने वाली पार्टी के दिग्गज नेता, इस समारोह में हिंदू विरोधी विचार रखने वाले बॉम्बे हाईकोर्ट के रिटायर्ड न्यायाधीश बीजी कोलसे के साथ दिखाई देंगे। इनके अलावा वरिष्ठ वकील मिहीर देसाई और यूसुफ मुछाला भी अपनी बात रखेंगे।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, जमात-ए-इस्लामी हिंद के मुंबई अध्यक्ष ने खुद बताया कि शिवसेना नेता संजय राउत ने सीएए और एनआरसी के खिलाफ होने वाले कार्यक्रम में शामिल होने के लिए निमंत्रण को स्वीकार कर लिया है और कहा है कि वह इस कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आएँगे।

बता दें, सीएए और एनआरसी के मुद्दे पर जमात-ए-इस्लामी हिंद मुंबई, मराठी पत्रकार संघ और एसोसिएशन ऑफ प्रोटेक्शन ऑफ सिविल राइट्स (एपीसीआर) के संयुक्त कार्यक्रम मुंबई वीटी स्टेशन के नजदीक पत्रकार भवन में शनिवार शाम को रखा गया है। हालाँकि, इस कार्यक्रम में शामिल हो रहे शिवसेना नेता संजय राउत पर सबकी निगाहें होंगी, लेकिन रिटॉयर्ड जज कोलसे के बयान पर भी सुर्खियाँ बनने की पूरी संभावना है।

रिटॉयर्ड जज कोलसे पाटिल के बारे में बता दें कि कोलसे मीटू आंदोलन के दौरान यौन उत्पीड़न के आरोपित हैं। जिनपर आरोप है कि एक महिला उनका साक्षात्कार लेने उनके घर गईं थी। जहाँ उन्होंने इंटरव्यू खत्म होने के बाद महिला से पूछा था कि उसके कुर्ते के ऊपर का बटन क्यों खुला हैं और कहा था कि उसे लगता है वे दोनों दोस्त बन सकते हैं।

इतना ही नहीं, कोलसे को पिछले साल महाराष्ट्र में भीमा-कोरेगाँव दंगों के लिए भी एक आयोजक बताया जाता है। साथ ही उन्हें हिंदू विरोधी और जातिगत भाषण देने के लिए भी पहचाना जाता है। साल 2016 में उन्होंने अपनी एक स्पीच में आरएसएस पर खुलेआम ‘हिंदू आतंकवाद’ फैलाने का आरोप लगाया था। वहीं दूसरी स्पीच में उन्होंने कहा था कि आरएसएस भारत की सबसे बड़ी दुश्मन है। इसलिए सबकों मिलकर इस जहरीली विचारधारा से वैचारिक स्तर पर लड़ना चाहिए।

यहाँ बता दें कि शिवसेना ने नागरिकता संशोधन बिल पर लोकसभा में समर्थन किया था, लेकिन राज्यसभा में मतदान के दौरान वाकआउट कर गई थी। वहीं, मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कहा था कि महाराष्ट्र में एनआरसी को लागू नहीं किया जाएगा और साथ ही सीएए पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद ही निर्णय लेने की बात कही थी। संजय राउत लगातार सीएए और एनआरसी के खिलाफ मोदी सरकार पर हमलावर हैं।

मेरठ में दंगाइयों ने की थी 30 पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश: पुलिस ने जारी किए वीडियो

नागरिकता संशोधन कानून (CAA) को लेकर देशभर में विरोध-प्रदर्शन के नाम पर गुंडई हो रही है। जान लेने पर उतारू उन्मादी भीड़ को देखकर यह किसी भी तरह से नहीं लगता कि यह कोई विरोध-प्रदर्शन है। विरोध में शामिल इन लोगों को दंगाई न कहा जाए तो भला और क्या कहा जाए। इस उग्र भीड़ के इरादे इतने ख़ौफ़नाक हैं कि इसका अंदाज़ा लगाना लगभग असंभव ही है। 

दरअसल, मेरठ पुलिस ने दंगाइयो के सिर पर ख़ून सवार होने से जुड़े दो ऐसे वीडियो जारी किए हैं, जिसमें यह साफ़तौर पर देखा जा सकता है कि वो किस तरह से दंगे के दौरान 30 पुलिसकर्मियों को ज़िंदा जलाने की कोशिश में थे। इन वीडियो को देखकर आप ख़ुद इस बात का अंदाज़ा लगा सकते हैं कि नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन के नाम पर दंगाई किस तरह से अपने ख़ौफ़नाक इरादों को अंजाम देने की फ़िराक में था, लेकिन वक़्त रहते उन्हें अपने इरादों में क़ामयाब होने से रोक लिया गया और सभी पुलिसकर्मियों को सुरक्षित बचा लिया गया।

ख़बर के अनुसार, एसएसपी अजय साहनी ने बताया कि घटना थाना लिसाड़ी की है, जब 20 दिसंबर (शुक्रवार) को जुमे की नमाज के लिए पुलिस और आरएएफ की ड्यूटी लगी हुई थी। उन्होंने बताया कि क़रीब 30 पुलिसकर्मी एक दुकान में बैठे हुए थे, तभी एक षणयंत्र के तहत उपद्रवियों ने उन्हें इस दुकान के अंदर बंद कर दिया और फिर उन्हें ज़िंदा जलाने के मक़सद से दुकान को आग लगा दी।

दरअसल, 20 दिसंबर के दंगे की इस घटना की सूचना जब एसएसपी को लगी थी तो वो बिना देरी किए अपनी फ़ोर्स के साथ घटना-स्थल पर पहुँचे। वहाँ उपद्रवियों ने उन पर गोलीबारी शुरू कर दी, इसी गोलीबारी में आरएएफ के दो जवान उपद्रवियों की गोली का निशाना बन गए। कड़ी मशक्कत के बाद दुकान के अंदर बंद पुलिस की टीम को आग से बचाया जा सका। इस गंभीर मामले पर मुक़दमा दर्ज कर आगे की कार्रवाई जारी है। बता दें कि इस मामले में पुलिस ने 13 मुकदमें दर्ज कर क़रीब 148 उपद्रवियों को नामजद किया और 500 से अधिक लोग अज्ञात हैं। पुलिस ने दंगे में शामिल उपद्रवियों की फोटो और वीडियो के आधार पर उनकी पहचान की है। साथ ही दंगाइयों के पोस्टर्स भी शहर भर में लगाए गए हैं।

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राहुल बाबा कानून नहीं पढ़ा तो इटैलियन में अनुवाद कर भेज दूँ: अमित शाह ने CAA पर दी बहस की चुनौती

केंद्रीय गृह मंत्री और भाजपा अध्यक्ष अमित शाह ने शुक्रवार को राजस्थान के जोधपुर में रैली की। इस दौरान नागरिकता संशोधन कानून (सीएए) का विरोध करने को लेकर कॉन्ग्रेस पर तीखे हमले किए। उन्होंने कॉन्ग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी को इस मसले पर कहीं भी बहस करने की चुनौती दी है। उन्होंने कहा, “राहुल बाबा कानून पढ़ा है तो कहीं पर भी चर्चा करने के लिए आ जाइए। नहीं पढ़ा है तो मैं इटैलियन में इसका अनुवाद करके भेज देता हूँ। उसे पढ़ लीजिए।”

शाह ने कॉन्ग्रेस पर वोट बैंक के लिए सीएए लोगों को गुमराह करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि यही कारण है कि इस कानून के समर्थन में भाजपा को जनजागरण अभियान की शुरुआत करनी पड़ी। शाह ने कहा कि विपक्ष चाहे जितनी अफवाहें फैला लें कोई फर्क नहीं पड़ता। यदि सभी दल भी साथ आ जाएँ तो भी भाजपा सीएए पर एक इंच पीछे नहीं हटेगी। उन्होंने कहा कि विपक्ष के लोग देश को गुमराह कर रहे हैं कि इससे भारत के मुसलमानों की नागरिकता चली जाएगी। मैं सबको आश्वस्त करना चाहता हूॅं ये क़ानून नागरिकता देने का है। किसी की नागरिकता छीनने का नहीं।

शाह ने कहा कि वोट बैंक के लिए कॉन्ग्रेस वीर सावरकर जैसी महान शख्सियत के खिलाफ दुष्प्रचार कर रही है। कॉन्ग्रेसियों को इसके लिए शर्म आनी चाहिए। उन्होंने कहा, “वीर सावरकर जैसे इस देश के महान सपूत और बलिदानी का भी कॉन्ग्रेस पार्टी विरोध कर रही है। कॉन्ग्रेसियों शर्म करो। वोट बैंक के लालच की भी हद होती है।”

कोटा के जेके लोन अस्पताल में नवजातों की मौत को लेकर उन्होंने प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार को घेरा। कहा कि सीएए का विरोध करने की बजाए वह इस मसले पर ध्यान केंद्रित करें। शाह ने कहा, “गहलोत साहब, हमने तो आपके घोषणा पत्र से एक प्वाइंट उठाकर उस पर अमल कर लिया और आप उसका विरोध कर रहे हैं। ये सब बाद में करिएगा। कोटा में जो बच्चे हर रोज मर रहे हैं उसकी चिंता कर लीजिए। माताओं की हाय लग रही है।”

राहुल गाँधी समलैंगिक हैं, कॉन्ग्रेस उनकी वर्जिनिटी की जाँच कराए: स्वामी चक्रपाणि

कॉन्ग्रेस सेवा दल की बुकलेट में वीर सावरकर और नाथूराम गोडसे के बीच समलैंगिक रिश्तों के उल्लेख होने का मामला तूल पकड़ने के बाद अखिल भारतीय हिंदू महासभा के अध्यक्ष स्वामी चक्रपाणी ने शुक्रवार (जनवरी 3, 2020) को पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राहुल गाँधी पर निशाना साधा है।

उन्होंने बुकलेट में लगाए गए आरोपों को ‘बकवास’ कहा है और साथ ही सावरकर पर की गई ओछी टिप्पणी का पलटवार करते हुए कहा कि हमने भी सुना है कि राहुल गाँधी समलैंगिक हैं। बता दें इससे पहले चक्रपाणि ने राहुल के सावरकर के ख़िलाफ़ दिए बयान पर शिकायत दर्ज करवाई थी।

एएनआई की रिपोर्ट के अनुसार, हिंदू महासभा के प्रमुख स्वामी चक्रपाणि ने कॉन्ग्रेस पर पलटवार करते हुए कहा, “ये पूर्व महासभा अध्यक्ष वीर सावरकर के ख़िलाफ़ बेहूदा आरोप हैं। जाहिर तौर पर हमने भी यह सुना है कि खुद राहुल गाँधी समलैंगिक हैं और उनका सिंधिया जैसे अनेक लोगों के साथ समलैंगिक संबंध रहा है।”

वे आगे कहते हैं, “हम कॉन्ग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी से माँग करते हैं कि अगर राहुल गाँधी से जुड़ी इस बात में सच्चाई नहीं है, तो कॉन्ग्रेस पार्टी उनकी (राहुल गाँधी) वर्जिनिटी की जाँच कराएँ, उनके समलैंगिक न होने की जाँच कराएँ। हम भी सावरकरजी पर मूल्यांकन के लिए तैयार हैं।”

स्वामी चक्रपाणि का बयान

गौरतलब है कि स्वामी चक्रपाणि का ये बयान मध्यप्रदेश के भोपाल में कॉन्ग्रेस द्वारा चलाए जा रहे अखिल भारतीय कॉन्ग्रेस सेवा दल के प्रशिक्षण शिविर में बाँटी गई ‘वीर सावरकर कितने ‘वीर’?’ नाम की पुस्तिका में लिखी बातों के ऊपर आई है। जिसमें बीजेपी पर निशाना साधने के लिए सावरकर को टारगेट करते हुए उनके आसपास की कई घटनाओं, सवालों और विवादों का जिक्र है।

विनायक दामोदर सावरकर और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) पर कॉन्ग्रेस द्वारा जारी की गई विवादित पुस्तिका में दावा किया गया है, “महात्मा गाँधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे के साथ हिंदू महासभा के सह-संस्थापक का शारीरिक संबंध था।”

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, डोमिनिक लैपिएरे और लैरी कॉलिन्स की किताब ‘फ्रीडम एट मिडनाइट’ में उल्लेखित एक घटना का उल्लेख करते हुए, कॉन्ग्रेस द्वारा जारी बुकलेट में कहा गया है, ”ब्रह्मचर्य धारण करने से पहले, नाथूराम गोडसे के एक ही शारीरिक संबंध का ब्यौरा मिलता है। यह समलैंगिक संबंध था। उनका पार्टनर था उनका राजनैतिक गुरू वीर सावरकर।”

ABP की पत्रकार का दंगाइयों के लिए छलका दर्द, डिप्टी CM से पूछा- बेचारे गरीब हैं कैसे करेंगे नुकसान की भरपाई

नागरिकता संशोधन क़ानून (CAA) के ख़िलाफ़ देशभर में हिंसक विरोध-प्रदर्शन हुए। इस दौरान जगह-जगह पर उपद्रवियों द्वारा मचाए उत्पात में न सिर्फ़ सावर्जनिक सम्पत्ति की भयंकर हानि हुई बल्कि पुलिसकर्मियों और मीडियाकर्मियों को भी निशाना बनाया। उग्र विरोध-प्रदर्शनों में इन पर हिंसक तरीक़ों से हमले किए गए। इनमें आगजनी, पथराव, पेट्रोल बम और तेज़ाब भरी बोतलों से जानलेवा हमले करना तक शामिल है।

इन सबके मद्देनज़र भला कोई यह कैसे कह सकता है कि उन्मादी भीड़ में कोई बेचारा और मासूम भी था। कोई यह कैसे कह सकता है कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का वो फ़ैसला ग़लत है, जिसमें सार्वजनिक सम्पति को हुई हानि की वसूली उपद्रवियों से ही वसूले जाने की बात कही गई थी। 

ABP की पत्रकार शोभना यादव ने एक कार्यक्रम के दौरान यूपी के डिप्टी सीएम से पूछा, “आपने कहा है कि उपद्रवियों से पैसे की वसूली की जाएगी जो सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुँचा है? अब दिक्कत क्या खड़ी हो गई है जो आपने चिन्हित किए हैं कि वो इतने गरीब लोग हैं? जिसे कहा जाए कि टाट-पट्टी पर सोते हैं। माता-पिता भी गरीब हैं…. लेकिन जिसके पास घर ही नहीं है।” अपने इस बेतुके सवाल से ABP की पत्रकार कितनी चालाकी से जान लेने पर उतारू मुस्लिम भीड़ को पाक-साफ़ करने की कोशिश करती नज़र आईं।

दरअसल, गुरुवार (2 जनवरी) को, ABP शिखर सम्मेलन 2020 में, उत्तर प्रदेश के उप-मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने उत्तर प्रदेश में हुए नागरिकता संशोधन क़ानून के ख़िलाफ़ दंगों पर चर्चा की गई। विरोध-प्रदर्शन के नाम पर दंगाइयों ने पुलिसकर्मियों पर हिंसात्मक हमले किए और सार्वजनिक सम्पत्तियों को नुक़सान पहुँचाया था।

पत्रकार शोभना यादव के जवाब में यूपी के डिप्टी सीएम मौर्य ने कहा कि दंगाइयों ने उत्तर प्रदेश की पुलिस पर जानलेवा हमले किए फिर भी पुलिस ने संयम बरतते हुए कार्रवाई की और स्थिति पर नियंत्रण रखने की कोशिश की। उन्होंने दोहराया कि सरकार किसी भी तरह की हिंसा को स्वीकार नहीं करेगी। उन्होंने कहा कि निर्दोष को सम्मान दिया जाएगा और जो लोग हिंसा में शामिल थे उन्हें किसी भी हाल में उसे बख़्शा नहीं जाएगा।

पत्रकार को जवाबी प्रतिक्रिया में डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि उत्तर प्रदेश अमीर और ग़रीब के बीच भेदभाव नहीं करेगा। उन्होंने इस बात का स्पष्ट संकेत दिया कि दंगाइयों में जो भी दोषी पाया जाएगा उससे क्षतिपूर्ति की जाएगी।

केशव प्रसाद मौर्य ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि दंगाइयों के इतर राज्य के अन्य मुसलमानों (निर्दोष) को किसी बात का डर नहीं सताता क्योंकि उन्हें पीएम नरेंद्र मोदी और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पर पूरा भरोसा है। मौर्य ने यह भी कहा कि भाजपा सरकार द्वारा चलाई जा रही योजनाओं से मुसलमानों को लाभ मिल रहा है और वे बिना किसी भेदभाव के आगे भी लाभ प्राप्त करते रहेंगे।

इसके अलावा, डिप्टी सीएम मौर्य ने राज्य में हिंसक भीड़ के समर्थन के लिए कॉन्ग्रेस और समाजवादी पार्टी के ख़िलाफ़ कड़ा रुख़ अख़्तियार किया था। उन्होंने इस बात का भी ज़िक्र किया था कि दंगों की आड़ में बड़ी संख्या में सिमी और PFI जैसे कट्टरपंथी इस्लामिक संगठनों के उपद्रवी शामिल थे। उन्होंने राज्य में राष्ट्र विरोधी तत्वों को हिंसा भड़काने के लिए उकसाने का काम किया।

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जिस अस्पताल में 6 साल में मरे 6646 बच्चे, वहाँ मंत्री के स्वागत में बिछा ग्रीन कारपेट

कोटा के जेके लोन अस्पताल में दिसंबर से अब तक मरने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 105 हो गई है। शुक्रवार की सुबह यहॉं एक और मासूम ने दम तोड़ दिया। जिस बच्ची की मौत हुई वह केवल 15 दिन की थी। मॉं-बाप ने उसका नाम भी नहीं रखा था। वैसे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा के दौरे से पहले प्रशासन ने अस्पताल को चकाचक कर दिया है। दैनिक भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार उनके स्वागत के लिए अस्पताल में ग्रीन कारपेट बिछाया गया है।

यह राजस्थान के उस खस्ताहाल अस्पताल की हकीकत है जहॉं बीते 6 साल में 6646 बच्चे मरे हैं। ये आँकड़े खुद राजस्थान सरकार के हैं और इसे राज्य के स्वास्थ्य मंत्री रघु शर्मा ने ट्विटर पर साझा किया है। इन्हीं आँकड़ों का हवाला दे राज्य सरकार कह रही कि पहले 1500 बच्चे मरते थे। इस साल सबसे कम बच्चे मरे हैं। आप जब इन आँकड़ों पर गौर करेंगे तो पाएँगे कि बच्चों की मौत के मामले में मामूली कमी सरकारी व्यवस्था में सुधार के कारण नहीं हुआ है। इन आँकड़ों का एक सच यह भी है कि इस अस्पताल में दिसंबर महीने में सबसे ज्यादा मौत पिछले साल ही हुई है।

साभार: Twitter/@RaghusharmaINC

राजस्थान पत्रिका की रिपोर्ट बताती है कि इतनी मौतों के बाद भी प्रदेश की कॉन्ग्रेस सरकार की नींद टूटती नहीं दिख रही। अस्पताल भगवान भरोसे ही चल रहा है। एनआईसीयू वार्ड में एक वार्मर पर दो-दो शिशु भर्ती हैं। डॉक्टर जॉंच के लिए तो लिख देते हैं पर जॉंच के लिए कोई वार्ड में नहीं आता। बच्चे की सॉंस चलती रहे इसके लिए परिजन खुद ऑक्सीजन का सिलेंडर हाथ में थामे चल रहे हैं।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार राजस्थान के एक भी अस्पताल में बच्चों का सुपर स्पेशलिटी डॉक्टर नहीं है। राज्य में हर साल 28 दिन से कम उम्र में ही 34 हजार से ज्यादा बच्चे दम तोड़ देते हैं। एक वर्ष तक की उम्र के 41 हजार से अधिक बच्चों की मौत हो रही। राज्य के मेडिकल कॉलेजों से संबद्ध अस्पतालों में 230 में से 44 वेंटीलेटर खराब हैं। 1430 वार्मर खराब पड़े हैं। नतीजतन हर उम्र के प्रति सप्ताह 490 से अधिक बच्चे दम तोड़ रहे हैं।

राजस्थान पत्रिका के कोटा संस्करण में 3 जनवरी 2020 को प्रकाशित खबर

राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की रिपोर्ट बताती है कि अस्पताल की जर्जर हलात और वहाँ पर साफ-सफाई को लेकर बरती जा रही लापरवाही बच्चों की मौत का एक अहम कारण है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जेके लोन अस्पताल की ख़िड़कियों में शीशे नहीं हैं। दरवाजे टूटे हुए हैं। इसके कारण अस्पताल में भर्ती बच्चों को मौसम की मार झेलनी पड़ती है। अस्पताल के कैंपस में सूअर भी घूमते रहते हैं। अराजकता का आलम यह है कि जेके लोन अस्पताल के वार्ड में लगाने के लिए पिछले सप्ताह 27 हीटर खरीदे गए। लेकिन, ये हीटर कहॉं गए यह अस्पताल के अधीक्षक तक को मालूम नहीं है।

इस संबंध में सवाल पूछे जाने पर शर्मा कहते हैं कि राज्य में सबसे पहले ICU की स्थापना कॉन्ग्रेस की सरकार ने 2003 में की थी। कोटा में भी बच्चों के ICU की स्थापना कॉन्ग्रेस सरकार ने 2011 में की थी। जेके लोन अस्पताल बीमार शिशुओं की मृत्यु पर सरकार संवेदनशील है। इस पर राजनीति नही होनी चाहिए।

लेकिन, इस मसले को राजनीतिक रंग देती तो खुद राज्य सरकार दिख रही है। ऐसा नहीं होता तो शर्मा ट्विटर पर गोरखपुर के एक अस्पताल को लेकर अखबार में प्रकाशित खबर की कटिंग ट्विटर पर शेयर नहीं कर रहे होते। यूपी के सीएम योगी आदित्यनाथ से नहीं पूछ रहे होते कि क्यों उत्तर प्रदेश में शिशु मृत्यु दर राजस्थान से अधिक है? इतना ही नहीं वे यह भी कह चुके हैं कि बच्चों की मौत का मामला पीएमओ के इशारे पर उठाया जा रहा ताकि सीएए के खिलाफ विरोध दबाया जा सके। मौतों को नई बात नहीं मानने वाले राज्य के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी कह चुके हैं कि नागरिकता संशोधन कानून के खिलाफ पूरे देश में जो माहौल बना हुआ है, उससे ध्यान हटाने के लिए इस मुद्दे को उठाया जा रहा है।

‘अगस्त में बच्चे मरते ही हैं’ और ‘बच्चों की मौत कोई नई बात नहीं’ के बीच मीडिया की नंगी सच्चाई

नए साल पर सबसे ज्यादा किलकारियाँ भारत में गूँजी, फिर नरगिस के मरने की परवाह क्यों करें गहलोत

शाहीन बाग़ की आवारा भीड़ पर बावली हुई जा रही मीडिया की नज़र में कोटा के बच्चों की जान सस्ती

पाकिस्तान ने प्रोपगेंडा वॉर छेड़ने के लिए ISPR में भर्ती किए 1000 युवा: जिनका काम होगा भारत के ख़िलाफ़ झूठा प्रचार

पाकिस्तान में मेजर जनरल आसिफ गफूर के नेतृत्व वाली Inter-Services Public Relations (ISPR) ने भारत के खिलाफ सोशल मीडिया पर दुष्प्रचार करने के लिए भारी संख्या में युवाओं की भर्ती की है। बताया जा रहा है ISPR ने इस काम के लिए 1000 युवाओं को 1 साल में ही बतौर इंटर्न भर्ती किया है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, इस काम के लिए पाकिस्तान सेना की मीडिया विंग ISPR हर महीने प्रतियोगिता आयोजित करती है। जिसमें सोशल मीडिया पर भारत के खिलाफ फर्जी माहौल बनाने वाले और अपने ट्वीट पर सबसे ज्यादा रिट्वीट पाने वाले युवाओं को पुरस्कार दिया जाता है। यहाँ पुरस्कार के रूप में इन पाकिस्तानी नेटिजन्स को फौजी फाउंडेशन में जॉब मिलती है।

रिपोर्ट के अनुसार, कहा जा रहा है कि अब तक इस प्रतियोगिता में 1 लाख से ज्यादा लोग भाग ले चुके हैं। जहाँ इन लोगों को भारत में ज्यादा फॉलोविंग वाले सोशल मीडिया अकाउंट्स की लिस्ट दी गई और भारत के नेताओं, सैनिकों और नौकरशाहों के खिलाफ माहौल बनाने को कहा गया।

गौरतलब है कि बुधवार को मेजर जनरल गफूर ने एक ट्रेनर फाइटर प्लेन के मलबे का फोटो पोस्ट किया था, जिसका बालाकोट हमले से कुछ लेना-देना नहीं था। लेकिन फिर भी ट्वीट करते हुए गफूर ने लिखा कि पाकिस्तान ने बालाकोट हमले के दौरान इसे मार गिराया था।

पाकिस्तानी एजेंडे के तहत भारत के खिलाफ प्रोपगेंडे को हर रोज भारी तादाद में सोशल मीडिया पर फैलाने के लिए यूथ मशीनरी को पाक ISPR में भर्ती कर रहा हैं। झूठ फ़ैलाने के लिए युवाओं को बाकायदा ट्रेनिंग का भी प्रावधान किया गया है।

बता दें युवाओं को इस काम के लिए प्रेरित करने के लिए ISPR ने उन्हें कहा है कि वे सैनिकों की तरह भारत के साथ उनका नैरेटिव ध्वस्त करने की लड़ाई लड़ेंगे।

कॉन्ग्रेसी नेता ने भी हथियाई आदिवासियों की जमीन, सोनभद्र में 3 महिलाओं समेत 11 की कर दी गई थी हत्या

सोनभद्र के उम्भा गॉंव में बीते साल जुलाई में आदिवासियों की जमीन पर कब्जे को लेकर 3 महिलाओं समेत 11 लोगों की हत्या कर दी गई थी। यूपी में योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में भाजपा की सरकार है, इसलिए विपक्ष ने खूब शोर-शराबा मचाया था। आरोपों की झड़ी लगा दी। कॉन्ग्रेस महासचिव प्रियंका गॉंधी तो लाशों पर राजनीति करने को इतनी आतुर थीं कि सोनभद्र जाने की इजाजत नहीं मिलने पर सड़क पर ही बैठ गईं थी। उस समय भी यह बात सामने आई थी कि यह विवाद आजादी से भी पुराना है और इसके पीछे भ्रष्ट अधिकारी और कॉन्ग्रेस के नेता रहे हैं। अपर मुख्य सचिव (राजस्व) रेणुका कुमार की अध्यक्षता वाली जॉंच कमेटी ने भी इस तथ्य पर मुहर लगाई है।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार जाँच कमेटी ने अपनी रिपोर्ट मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंप दी है। रिपोर्ट के अनुसार सोनभद्र और मिर्जापुर में 6,602 एकड़ जमीन फर्जी सहकारी समितियॉं बनाकर कब्जा कर ली गई थी। इसमें से एक सहकारी समिति कॉन्ग्रेस के एक बड़े नेता की है। मौजूदा समय में इस जमीन की कीमत करीब 660 करोड़ रुपए आँकी गई है।

अपर मुख्य सचिव रेणुका कुमार द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट में इस बात का भी ख़ुलासा हुआ है कि कॉन्ग्रेसी नेता के अलावा और भी कई लोग हैं जिन्होंने फ़र्ज़ी सहकारी समितियाँ बनाकर ज़मीन हड़पी थी। रेणुका कुमार की अध्यक्षता में गठित 6 सदस्यीय जाँच समिति ने 1100 पन्नों की रिपोर्ट दी है। इसमें बताया गया है कि सोनभद्र की तीन और मिर्ज़ापुर की चार सहकारी समितियों ने अवैध रूप से 6,602 एकड़ सरकारी ज़मीन पर अपना क़ब्ज़ा जमाया। बता दें कि जाँच समिति ने 1952-2019 तक के दस्तावेज़ों के आधार पर अपनी रिपोर्ट तैयार की।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई इस रिपोर्ट में इस बात का भी उल्लेख किया गया है कि अवैध ज़मीन हड़पने वालों में कॉन्ग्रेस के कई अन्य नेता भी शामिल हैं, जिनके पास हज़ारों एकड़ ज़मीन है। उन्होंने दस्तावेज़ों में फेरबदल कर सरकारी ज़मीन हड़प कर उसे अपने नाम कर लिया। 

ग़ौरतलब है कि सोनभद्र में हुए नरसंहार में यूपी के पूर्व राज्यपाल चंद्रशेखर प्रसाद नारायण के चाचा और कॉन्ग्रेस के राज्यसभा सांसद महेश्वर प्रसाद नारायण का नाम सामने आया था। साथ ही घटना का मुख्य अभियुक्त ग्राम प्रधान समाजवादी पार्टी के पूर्व विधायक रमेश चंद्र दुबे का नज़दीकी बताया गया। दरअसल, वनभूमि की लूट में कई बड़े-बड़े नेताओं के नाम सामने आए थे। इनमें, रेनुकूट डिवीजन के गाँव जोगेंद्रा में बसपा सरकार के पूर्व मंत्री शामिल थे जिन्होंने वन विभाग की 250 बीघा जमीन पर क़ब्ज़ा कर रखा था। इसी तरह सोनभद्र ज़िले के गाँव सिलहट में एसपी के पूर्व विधायक ने 56 बीघे ज़मीन का बैनामा अपने भतीजों के नाम पर करवाया हुआ था।

इनके अलावा, ओबरा वन प्रभाग के वर्दिया गाँव में एक कानूनगो के बारे में पता चला था कि उसने पहले अपने पिता के नाम ज़मीन करवाई और फिर बाद में उसे बेच दिया। घोरावल रेंज के धोरिया गाँव में भी ऐसे ही एक रसूखदार ने 18 बीघा ज़मीन 90 हज़ार रुपए में ख़रीदी और फिर इसकी आड़ में बाकी ज़मीन पर भी अपना क़ब्ज़ा जमा लिया।

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मजहबी चोले में राणा अयूब ने फैलाया झूठ, हिंसा करती कट्टरपंथियों की भीड़ को बताया शांतिपूर्ण प्रदर्शन

पत्रकारिता की आड़ में इस्लामिक चोला पहन अपना मजहबी अजेंडा चलाने वाली राणा अयूब गुरुवार को एक बार फिर ऑनस्क्रीन झूठ फैलाती नजर आईं। राणा अयूब ने मीडिया से बात करते हुए सीएए के ख़िलाफ़ विरोध पर उतरे समुदाय विशेष से जुड़े हिंसक प्रदर्शनकारियों को ‘शांतिपूर्ण’ बताया। साथ ही दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मुस्लिमों को दोयम दर्जे का नागरिक मानते हैं, जो डर फैलाकर भारत को हिंदू राष्ट्र बनाना चाहते हैं। इसके अलावा तथाकथित पत्रकार ने मोदी सरकार पर कई और झूठे दावे कर निशाना साधा। कश्मीर, अयोध्या जैसे मुद्दों पर अपनी दबी कुंठा व्यक्त करते हुए राणा अयूब ने कहा कि पिछले 6 साल से समुदाय विशेष अप्रत्यक्ष रूप से मोदी सरकार की मुखालफत कर रहा है। लेकिन आर्टिकल 370 और नागरिकता कानून पर लिए फैसलों ने अब विशेष मजहब को सीधे सड़कों पर आने पर मजबूर कर दिया है।

टॉक शो में बात करते हुए राणा अयूब ने अयोध्या का मुद्दा भी उठाया और मोदी सरकार पर आरोप लगाया कि राम मंदिर के पक्ष में आए फैसले के पीछे भी मोदी सरकार ही जिम्मेदार है। दिलचस्प बात ये रही कि उन्होंने इस टॉक शो के दौरान बातों ही बातों में स्वीकार लिया कि हाल ही में सड़कों पर उतरी भीड़, सीएए के ख़िलाफ़ होते प्रदर्शन सब स्वाभाविक रूप से मजहबी थे। वे कहती हैं कि मुस्लिम आज सड़कों पर हैं, ताकि मोदी सरकार के फैसले के ख़िलाफ़ खुलकर अपनी मजहबी पहचान बता सकें।

अब, चूँकि ऐसी स्थिति में जब सीएए के विरोध के नाम पर प्रदर्शनकारियों को देश ने अपनी आँखों के आगे, मीडिया के जरिए, सोशल मीडिया के हवाले से करोड़ों की सार्वजनिक संपत्ति फूँकते देखा है, तब अगर राणा अयूब कह रही हैं कि मुस्लिमों ने प्रदर्शन ‘शांतिपूर्ण’ किया, तो एक बार बीते दिनों राज्य में हुई घटनाओं पर एक नजर दोबारा डालने की जरूरत है। जिससे पता चल सके कि आखिर इस विरोध में उतरे समुदाय विशेष के लोग कितने शांतिपूर्ण थे…

पश्चिम बंगाल

जुमे की नमाज के बाद और मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का समर्थन पाकर यहाँ मुस्लिम भीड़ ने अपना उत्पात शुक्रवार के दिन शुरू किया। पूरे राज्य में हिंसा भड़काई गई। रेलवे स्टेशन, बस, टोल प्लॉजा जैसी अनेकों सार्वजिनक संपत्तियों को देखते ही देखते नष्ट कर दिया गया।

राणा अयूब द्वारा उल्लेखित इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन करने वाली मुस्लिम भीड़ ने एंबुलेंस पर पत्थर फेंका और बेलडांगा रेलवे स्टेशन पर भी तोड़फोड़ मचाई। साथ ही कई वीडियो में भी भीड़ रेलवे पटरियों को उखाड़ती दिखी।

इसके बाद भीड़ ने पश्चिम बंगाल में हावड़ा जिले में उत्पात मचाया। रेलवे स्टेशनों के रास्ते ब्लॉक कर दिए गए। यहाँ भी ट्रेन पर पत्थरबाजी हुई। ट्रेन का ड्राइवर घायल हो गया। साथ ही पूर्वी रेलवे के पश्चिमी विभाग को इसके कारण परेशानी झेलनी पड़ी।

फिर, इसी राज्य में मुस्लिमों की भीड़ ने मुर्शिदाबाद में आतंक मचाया। टोल प्लाजा को आग लगाया। सुजनीपारा रेलवे स्टेशन पर हमला किया। संकरेल रेलवे स्टेशन के टिकट काउंटर को निशाना बनाया और फिर उसे भी आग लगा के छोड़ दिया। इसी तरह ये सब चलता रहा…

अब बात राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली

बंगाल में हुई हिंसा धीरे-धीरे देश के कई कोनों में भड़क गई। दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया के छात्रों ने प्रदर्शन शुरू किया। यह देखते ही देखते कुछ समय में हिंसक हो गया। उपद्रवियों ने पहले खुद बसें जलाई, फिर बाद में इल्जाम पुलिस पर डाल दिया। हालाँकि, हाल में आई वीडियो से स्पष्ट हो गया कि आगजनी के पीछे कौन था।

बता दें, इस दौरान विश्वविद्यालय परिसर में सांप्रदायिक नारे लगे। जिससे दिल्ली के अन्य इलाकों में भी मुस्लिमों ने प्रदर्शन के नाम पर हिंसा शुरू कर दी। सीलमपुर में इस बीच राणा अयूब के शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों द्वारा स्कूल बस पर पत्थर फेंके गए और पुलिस पर पत्थरबाजी के साथ बम फेंकने तक का प्रयास हुआ। इसके बाद दरियागंज में भी इस तरह का विरोध देखने को मिला।

राजनीति का केंद्र उत्तरप्रदेश

प्रदेश में भाजपा सरकार होने के कारण शांतिदूत यहाँ और भी उग्र नजर आए। पुलिस पर पत्थरबाजी हुई। जुमे की नमाज के बाद कई जगह सार्वजनिक संपत्तियों को नुकसान पहुँचाया गया। अमरोहा से लेकर बहराइच और संभल से लेकर अलीगढ़ तक हर जगह इस भीड़ द्वारा तोड़फोड़, आगजनी तो आम रही। मेरठ में तो दो युवकों ने खुलेआम पुलिस पर गोली चलाई। स्थिति इतनी ज्यादा हाथ से निकल गई कि पुलिस को हिंसा रोकने के लिए आँसू गोले का इस्तेमाल करना पड़ा और लाठी चार्ज करके उपद्रवियों को तितर-बितर करना पड़ा।

गुजरात

19 दिसंबर को गुजरात के अहमदाबाद में भी प्रदर्शन हुआ। जहाँ इसी मुस्लिम भीड़ ने उत्पात मचाया। पत्थरबाजी की, पुलिस पर हमला किया और कई अधिकारियों को पीटा भी।

कर्नाटक

अभी हाल ही में मंगलुरु से एक वीडियो आई। जिसमें दिखा कि उपद्रवी किस तरह पहले सीसीटीवी को नीचे की ओर अडजस्ट कर रहे हैं, ताकि उनकी करतूत वीडियो में न आ सके और फिर बड़ी तैयारी से इलाकों में हिंसा को अंजाम दे रहे हैं।

उम्मीद है ऊपर इन राज्यों में हुई घटनाओं से और प्रदर्शनकारियों के नाम पर काला पट्टी बाँधकर हिंसा कर रहे दंगाइयों की वीडियो राणा अयूब ने भी देखी होगी। लेकिन, उनका एजेंडा इन वीडियो के ईर्द-गिर्द नहीं है। शायद इसलिए वे इसपर बात नहीं करना चाहतीं। मगर, अगर समुदाय विशेष के लोगों के जुर्मों पर सरेआम बोल नहीं सकतीं, तो कम से कम मोदी सरकार को घेरने के लिए इस उपद्रवियों को शांतिदूत को न ही बताएँ। इस समय सोशल मीडिया पर कई सौ या शायद हजारों की तादाद में ऐसे सबूत वायरल हो रहे हैं जो राणा अयूब की फर्जी दावों को झूठा साबित करते हैं और बताते हैं कि सड़कों पर उतरी मुस्लिमों की भीड़ न शांतिपूर्ण हैं और न ही उनके उद्देश्य।

बता दें, ये पहला, दूसरा, या तीसरा मामला नहीं है जब मोदी सरकार को घेरने के लिए राणा अयूब और उनके मीडिया कॉमरेडों का पर्दाफाश हुआ। इससे पहले कई ऐसे मौक़े आए हैं जिनके बाद इन लोगों की प्रतिक्रिया देखकर मालूम हुआ है कि ये मोदी सरकार की छवि को जनता के सामने धूमिल करने के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। चाहे फिर उसके लिए उन्हें खुलेआम झूठ बोलना पड़े। चाहे फिर उसके लिए सोशल मीडिया यूजर उन्हें ट्रोल ही क्यों न कर दें। चाहे फिर उनकी कही बातों पर फैक्ट चेक ही क्यों न हो जाए।

गौरतलब है कि अभी कुछ दिन पहले ही अमेरिका की हिन्दू-विरोधी राजनीतिक विशेषज्ञ क्रिस्टीन फेयर ने ट्विटर पर भारतीय प्रोपेगंडाबज पत्रकार राणा अयूब को जम कर लताड़ा था। लेकिन जैसे ही उन्हें पता चला कि अयूब भी उन्हीं की तरह हिन्दू-विरोधी है, क्रिस्टीन ने अपना ट्वीट डिलीट कर लिया। 

उन्होंने लिखा था, “तुम बलूचिस्तान के नागरिकों, पश्तून और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के नागरिकों के लिए ख़ास दुआ क्यों नहीं कर रही हो? पाकिस्तानियों द्वारा इन सब पर अत्याचार किया जा रहा है। तुम्हारी फौज (पाकिस्तानी) और आईएसआई द्वारा तालिबान के आतंकियों का इस्तेमाल कर अफ़ग़ानों का नरसंहार कराया जा रहा है। “

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