Home Blog Page 5198

नमाज के लिए जेल में जगह चाहिए हत्यारे पूर्व सांसद शहाबुद्दीन को, कॉन्ग्रेसी नेता वकील की SC में याचिका

राष्ट्रीय जनता दल (RJD) के पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा है कि उसे एकांतवास में क्यों रखा गया है और उसे क्या हमेशा एकांतवास में ही रखा जाएगा? इस याचिका में मूलभूत सुविधाओं का भी हवाला दिया गया, जिसमें यह आरोप लगाया गया कि उसे जेल में नमाज़ पढ़ने के स्थान आदि जैसी बुनियादी सुविधाएँ मुहैया नहीं कराई गई हैं। इस मामले की सुनवाई के दौरान चीफ जस्टिस एसए बोबडे, न्यायमूर्ति बीआर गवई और न्यायमूर्ति सूर्यकांत की बेंच ने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता को कहा कि शहाबुद्दीन की याचिका पर ग़ौर करें। साथ ही बेंच ने यह मामला दो सप्ताह बाद के लिए सूचीबद्ध कर दिया।

इससे पहले, शहाबुद्दीन की तरफ से सीनियर वकील सलमान खुर्शीद ने बेंच से कहा था कि उनके मुवक्किल को जेल के अंदर टहलने की अनुमति दी जानी चाहिए। वहीं, कोर्ट ने यह भी साफ़ तौर पर कहा कि उससे (शहाबुद्दीन) किसी को ख़तरा है या उस पर ख़तरा है, ये तय करना कोर्ट का काम नहीं है।

दरअसल, शहाबुद्दीन ने एक ऐसी ही याचिका पिछले साल 30 अगस्त को दिल्ली हाईकोर्ट में भी दायर की थी। इसमें RJD के पूर्व सांसद ने कहा था कि तिहाड़ जेल में उसके साथ किए जा रहे बर्ताव से वो ख़ुश नहीं है। उसने याचिका में इस बात का भी उल्लेख किया था कि उसे अकेले काल-कोठरी में बंद कर दिया गया है, जहाँ उससे कोई बात तक नहीं करता। साथ ही उसने अपनी सुरक्षा को लेकर भी सवाल खड़े किए थे।

RJD प्रमुख लालू यादव के क़रीबी माने जाने वाले शहाबुद्दीन को 2017 में एसिड अटैक केस में उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई थी। शहाबुद्दीन अभी पत्रकार राजदेव रंजन की हत्या के मामले में भी आरोपित है। सीवान के दिवंगत पत्रकार राजदेव रंजन की पत्नी आशा रंजन और चंद्रशेखर प्रसाद की याचिका पर बिहार में तीन दर्जन से अधिक आपराधिक मुकदमों का सामना कर रहे शहाबुद्दीन को सुप्रीम कोर्ट ने 15 फरवरी, 2018 को सीवान जेल से दिल्ली की तिहाड़ जेल में ट्रांसफर करने का आदेश दिया था। फ़िलहाल, शहाबुद्दीन पर 45 आपराधिक मामले चल रहे हैं।

ख़बर के अनुसार, बिहार के खौफ़नाक तेजाबकांड की याद लोगों के ज़ेहन में आज भी वैसी ही है, जैसी वर्ष 2004 में थी। यही वो खौफ़नाक वारदात थी, जिसने एक हँसते-खेलते परिवार को ख़त्म कर दिया था। इसी खौफ़नाक हत्या की वारदात को अंजाम देने से जुड़ा है शहाबुद्दीन का नाम, जो उस समय सुर्ख़ियों में बना रहता था। इसी तेज़ाबकांड के चलते शहाबुद्दीन को जेल जाना पड़ा और और सुप्रीम कोर्ट ने उसकी उम्र क़ैद की सज़ा को बरक़रार रखा।

बिहार के सीवान ज़िले में चंद्रशेखर प्रसाद उर्फ़ चंदा बाबू अपनी पत्नी, बेटी और चार बेटों के साथ गुज़र-बसर कर रहे थे। उनकी दो दुकानें मेन बाज़ार में थी, इनमें से एक दुकान पर उनका बेटा सतीश और दूसरी दुकान पर उनका दूसरा बेटा गिरीश बैठता था। 16 अगस्त को कुछ लोग चंदा बाबू से रंगदारी माँग रहे थे, जो उन्होंने देने से मना कर दिया।

रंगदारी को लेकर हुए विवाद में चंदा बाबू की दुकानें लूट ली गईं। उनके तीनों बेटों को एक जगह लाया गया। उनके एक बेटे राजीव को रस्सी से बाँध दिया गया और सतीश और गिरीश के ऊपर तेज़ाब से भरी बाल्टी उड़ेल दी गई। बड़े भाई राजीव की आँखों के सामने उसके दोनों भाई तेज़ाब से जलकर मर गए। उसके बाद दोनों की लाश टुकड़े-टुकड़े कर बोरे में भरकर फेंक दिए गए। इसके बाद घटना के चश्मदीद गवाह राजीव की छह जून 2004 को गोली मार कर हत्या कर दी गयी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 30 अक्टूबर को शहाबुद्दीन और तीन अन्य को 2004 के दोहरे हत्याकांड में दोषी ठहराने और उनकी सज़ा के फ़ैसले को बरक़रार रखा था। इस हत्याकांड में शहाबुद्दीन के ख़िलाफ़ IPC की धारा-302 के तहत मामला दर्ज कर लिया गया था लेकिन, गिरफ़्तारी नहीं हुई थी। मगर वर्ष 2005 में बिहार की राजनीति में सत्ता बदली और शहाबुद्दीन पर शिकंजा कस गया। उसी साल शहाबुद्दीन को दिल्ली से गिरफ़्तार किया गया था। तभी से शहाबुद्दीन को कड़ी निगरानी के बीच जेल में रखा गया। वीडियों कॉफ्रेंसिंग के माध्यम से ही अदालत में उसकी सुनवाई होती थी।

कॉल डिटेल और मोबाइल लोकेशन से धरे गए 3 नकाबपोश! JNU हिंसा में क्राइम ब्रांच कर सकती है खुलासा

दिल्ली पुलिस जल्द ही जेएनयू हिंसा के बाद उपद्रवियों की वायरल तस्वीर में सामने आए तीन आरोपितों की पहचान का खुलासा कर सकती है। क्राइम ब्रांच को तीनों नकाबपोशों से जुड़ी जानकारी मिली है। इन 3 आरोपितों में एक महिला और दो पुरुष हैं। तस्वीर में इनके मुँह पर कपड़ा और हाथ में लाठी साफ देखी जा सकती है। हिंसा वाले दिन इलाके में चालू फोन नंबर और कॉल डिटेल रिकॉर्ड्स के आधार पर इनकी पहचान की गई है। बताया जा रहा है कि सूचना मिलने के बाद अपनी जाँच में पुलिस ने इन तीनों छात्रों के नंबरों की लोकेशन हिंसा वाले दिन इलाके में चालू 800 नंबरों में शामिल पाई है।

बता दें कि पुलिस जेएनयू मामले में अपनी जाँच में उन अंदरूनी लोगों (मतलब ऐसे लोग, जिन्होंने कैंपस के अंदर की जानकारी बाहरी असामाजिक तत्वों तक पहुँचाई) के बारे में भी पता लगाने की कोशिश कर रही है, जिन्होंने उपद्रवियों को हॉस्टल में दिशा-निर्देश दिए। ऐसा इसलिए क्योंकि पुलिस की पड़ताल में कई छात्रों और हॉस्टल स्टॉफ ने खुलासा किया है कि हमलावरों को पहले से पता था कि उन्हें किस पर हमला बोलना है। वे बिना दरवाजा खटखटाए कमरों में घुस रहे थे और बेरहमी से मारपीट कर रहे थे।

उपद्रवियों की फुटेज और मास्क के बावजूद नजर आ रहे आधे चेहरे को देखकर अंदाजा लगाया गया है कि सभी उत्पाती 30 की उम्र से नीचे के और कॉलेज छात्र थे। अब पुलिस इन छात्रों की पहचान पता करने के लिए कुछ अन्य सीसीटीवी फुटेज, तस्वीरें और मोबाइल फुटेज एकत्रित करने में जुटी है, ताकि मालूम पड़ सके कि इससे पहले यूनिवर्सिटी के बाहर वैसे कपड़े किन छात्रों को पहने देखा गया।

घटना वाले दिन सामने आई वीडियोज की प्रमाणिकता जाँच के लिए उन्हें फॉरेंसिक लैब भी भेजा जा रहा है। साथ ही लोगों से अपील की जा रही है कि यदि उनके पास हिंसा की कोई अन्य वी़डियो है तो वह उसे पुलिस के साथ साझा करें। यहाँ बता दें कि रविवार की शाम जेएनयू के पेरियार और साबरमती हॉस्टल्स में 100-150 लोगों ने तोड़फोड़ मचाई थी। जिन सुरक्षाकर्मियों ने इन लोगों को हॉस्टल में घुसते देखा था उनसे इस संबंध में पड़ताल जारी हैं। पुलिस का कहना है कि हिंसा के दौरान वहाँ मौजूद सुरक्षाकर्मियों से घटनाक्रम के बारे में पूछा जाएगा और साथ ही ये भी पता लगाया जाएगा कि हमलावर कहाँ से आए। इसके अतिरिक्त हिंसा के दौरान परिसर में घुसने वाले वाहनों पर भी पुलिस की जाँच जारी है।

जानकारी के मुताबिक, उपद्रवियों को हमला करने से रोकने वाले सुरक्षाकर्मियों के बयानों को पुलिस ने बतौर चश्मदीद रिकॉर्ड किया है। जिन्होंने बताया है कि पेरियार हॉस्टर और साबरमती टी प्वॉइंट में हमला करने से पहले कंट्रोल पैनेल से ही लाइटें बंद कर दी गईं थीं।

बता दें कि अपनी जाँच के लिए क्राइम ब्रांच ने पेरियार और साबरमती हॉस्टल्स के करीब छात्रों, वार्डन, समेत हॉस्टल स्टाफ के 150 लोगों से बात की है। साथ ही उपद्रवियों की तस्वीरें उन्हें दिखाकर उनसे उनकी शिनाख्त करने के लिए कहा गया है। इसके अलावा रविवार की शाम पीसीआर को फोन करने वाले छात्रों को भी चश्मदीदों की सूची में रखा गया है।

JNU में वामपंथी छात्रों का समर्थन करने पहुँचीं दीपिका पादुकोण, मुंबई का फ़िल्मी गैंग भी सड़क पर

JNU प्रेसिडेंट आइशी घोष सहित 19 के खिलाफ FIR: मारपीट और संपत्ति को नुकसान पहुँचाने का आरोप

JNU हिंसा के दो चेहरे: जानिए कौन हैं नकाबपोशों का नेतृत्व करने वाली आइशी घोष और गीता कुमारी

सिंह चला गया लेकिन ‘माँ’ को सिंहगढ़ दे गया: बेटे की शादी छोड़ छत्रपति के लिए युद्ध करने वाले तानाजी

उमराठे के सूबेदार अपने बेटे की शादी की तैयारी में लगे हुए थे। आसपास के लोग और सूबे की जनता उत्साहित थी। पूरा परिवार उत्साहित था और माहौल ख़ुशनुमा था। तभी एक संदेशवाहक वहाँ पहुँचा। सन्देश था कि महाराज ने 12,000 लोगों के साथ आपको बुलाया है। आपको राजगढ़ पहुँचना है, जितनी जल्दी हो सके। बेटे की शादी को टाल दिया गया। सूबेदार ने तुरंत 12,000 लोगों को जुटाया और युद्ध के लिए निकल पड़े। हँसिया और लाठियों से लैस सेना लेकर चल पड़े राजगढ़। भारत के इतिहास में देश और मातृभूमि के प्रति ऐसा समर्पण दिखाने वाले काफ़ी कम लोग रहे हैं। यही सूबेदार थे- तानाजी। वही तानाजी, जिन्होंने छत्रपति शिवाजी के आदेश के अनुसरण के लिए अपने बेटे की शादी को टाल दिया।

दरअसल, शिवाजी जब सोच रहे थे कि सिंहगढ़ के किले को कैसे जीता जाए, तब उन्हें अपने पुराने विश्वस्त तानाजी का ख़्याल आया। तानाजी के नाम मन में आते ही उन्होंने तुरंत बुलावा दे भेजा। और तानाजी, देश के लिए बिना कुछ सोचे-समझे निकल पड़े, छत्रपति का जो आदेश था। जब वो अपनी सेना लेकर राजगढ़ जा रहे थे, तब रास्ते में ताम्बट पक्षी भी उनके ऊपर से उड़ रहा था। लोगों ने इसे एक अपशकुन माना। उनके चाचा शेलार ने उन्हें आगाह किया कि इस पक्षी का दिखना सही नहीं है और ये एक अपशकुन की निशानी है। हालाँकि, तानाजी ने हँसते हुए उनकी बात को टाल दिया।

जब हज़ारों सैनिकों का जत्था राजगढ़ पहुँचा तो वहाँ के लोगों को लगा कि मुग़ल फ़ौज़ आ गई। ख़ुद महारानी जीजाबाई को भी ऐसा ही लगा और उन्होंने शिवाजी से कहा कि युद्ध की तैयारी करनी चाहिए। हालाँकि, शिवाजी ने जैसे ही अपना ध्वज देखा, उन्होंने भाँप लिया कि तानाजी पहुँच गए हैं। तानाजी ने आते ही शिवाजी से शिकायत करने के अंदाज़ में कहा कि उन्हें अपने बेटे की शादी टाल कर यहाँ आना पड़ा, ऐसी भी क्या बात हो गई अचानक से। छत्रपति ने जीजाबाई की तरफ़ इशारा करते हुए कहा कि ये मेरा बुलावा नहीं था, महारानी का था। तानाजी उनके पुराने दोस्त थे, कभी-कभी छत्रपति को कठोर बातें भी कह दिया करते थे।

महारानी जीजाबाई ने तो सबसे पहले भवानी का आशीर्वाद लिया। उन्होंने माता को धन्यवाद दिया, जिनकी कृपा से तानाजी वहाँ पर पहुँचे। जीजाबाई ने प्यार से तानाजी को आशीर्वाद दिया और उन्हें अपने बच्चे की तरह पुचकारा। तानाजी हतप्रभ रह गए। उन्होंने तुरंत अपनी पगड़ी निकाल कर जीजाबाई के क़दमों में रख दिया और कहा कि माँ, आपको जो भी चाहिए वो बोलो क्योंकि आपका ये बेटा उसे लाकर देगा। जीजाबाई ने कहा कि उन्हें बस सिंहगढ़ पर विजय चाहिए। जीजाबाई ने तानाजी को अपना दूसरा बेटा और शिवाजी का छोटा भाई तक बता दिया। तानाजी भावुक हो उठे।

अजय देवगन अभिनीत फ़िल्म ‘तानाजी’ का ट्रेलर

महारानी जीजाबाई एक माँ थीं और उन्हें लगता था कि कहीं सिंहगढ़ में युद्ध के चक्कर में उनके बच्चे, तानाजी और उनकी सेना, कहीं भूखे न रह जाएँ। उन्होंने रास्ते के लिए भोजन दिया, जिसमें से वो सभी खाते। कहते हैं, जब वो खाते थे तो ख़ुद माँ भवानी उन्हें परोसने हेतु आती थीं। जीजाबाई ने हथियार और कपड़े देकर तानाजी और पूरी सेना को सिंहगढ़ के लिए विदा किया। तानाजी भी पक्के रणनीतिकार थे। उन्होंने गाँव के किसी धनवान व्यक्ति जैसी वेशभूषा बनाई और घने जंगलों से होते हुए दुश्मन के इलाक़े में पहुँचे। वहाँ कोली समुदाय के कुछ लोगों ने उन्हें बँधक बना लिया।

तानाजी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि वो जंगल में एक शेर के आक्रमण से बच कर वहाँ शरण लेने आए हैं। कुछ ही देर बाद उन्होंने अपने साथ लाई सुपारी की खेप व अन्य वस्तुओं से उन लोगों का दिल जीत लिया। उन्होंने कोलियों को बताया कि वो छत्रपति शिवाजी की सेना के योद्धा हैं और उनसे किले के बारे में जानकारियाँ माँगीं। कोलियों का दिल जीतने के लिए उन्होंने उनमें आभूषण भी बाँटे। कोलियों ने उन्हें सब कुछ बताया। सिंहगढ़ वहाँ से 6 मील की दूरी पर था। सिंहगढ़ को जीतना इतना आसान नहीं था।

सिंहगढ़ की रखवाली करता था- उदयभान। वो ख़ुद एक बड़ा लड़ाका था। उसके अलावा 1800 पठान लगातार निगरानी में लगे रहते थे। अरबों की एक सेना भी वहाँ मौजूद रहती थी। ऐसे में, सिंहगढ़ को जीतना कोई आसान कार्य नहीं था। एचएस सरदेसाई अपनी पुस्तक ‘Shivaji, the Great Maratha‘ में लिखते हैं कि उदयभान भोजन में गाय और भेंड़ का माँस खाता था। उसकी 18 बीवियाँ थीं। उसके हाथी का नाम चन्द्रावली था, जो युद्ध के दौरान दुश्मन को रौंदने में हिंचकता भी नहीं था। उदयभान का सेनापति था सीदी हिल्लाल, जो उदयभान की तरह ही गायों और भेंड़ों का माँस खाया करता था। उसकी 9 बीवियाँ थीं। उदयभान के 12 बेटे भी थे, जो अपने पिता से ज़्यादा ताक़तवर थे।

कोलियों ने तानाजी को कुछ रणनीति भी बताई, जिसके बाद तानाजी ने उन्हें वापस लौटने पर इनाम देने का वादा किया। उसी रात तानाजी और उनकी सेना ‘कल्याण गेट’ पर पहुँची, जहाँ से उन्होंने अपने कुछ विश्वस्त सिपाहियों को अंदर जाने को कहा। कुछ ही देर बाद तानाजी के भाई सूर्या हज़ारों सैनिकों के साथ अंदर घुस गए। युद्ध हुआ और तानाजी की विजय हुई। तुरंत ही किले पर से आक्रांताओं का झंडा उखाड़ फेंका गया और वहाँ शिवाजी का भगवा ध्वज लहराने लगा। मराठा साम्राज्य के अधिपति छत्रपति शिवाजी का भगवा महाध्वज। पाँच तोपों की सालामी में साथ घोषित किया गया कि शिवाजी ने सिंहगढ़ के किले को जीत लिया है।

लेकिन मराठा साम्राज्य ने इस युद्ध की क़ीमत चुकाई थी। वो क़ीमत थी- तानाजी की जान। तानाजी अद्भुत वीरता का प्रदर्शन करने के बाद ज़िंदा नहीं बचे। उन्होंने वीरगति प्राप्त की। लेकिन हाँ, एक माँ को किया हुआ वादा उन्होंने निभाया। शिवाजी ने अपने पुराने दोस्त और एक विश्वस्त योद्धा की मृत्यु का समाचार सुनते ही कहा- “सिंहगढ़ तो आ गया लेकिन सिंह चला गया।” तानाजी के भाई सूर्याजी को उस किले का स्वामी बनाया गया। सूर्याजी ने बाद में अपनी वीरता का प्रदर्शन कर के पुरंदर के किले को भी जीत लिया।

तानाजी, जिन्होंने अपनी माँ की इच्छा पूरी करने के लिए अपनी जान दे दी। लेकिन हाँ, मरते-मरते वो अपनी माँ से किया वादा निभा गए। माँ और मातृभूमि के लिए ऐसे समर्पण को प्रदर्शित कर वो वीरगति को प्राप्त हुए। ये कहानी हर भारतवासी के हृदय में होनी चाहिए।

Uber ड्राइवर आफ़ताब ने शिवाजी को दी माँ की गाली, यात्री के मना करने पर बौखलाया

इतिहास से छेड़छाड़, पुनः लिखने की जरुरत: शिवाजी, ज्ञानेश्वर, लक्ष्मीबाई, शंकराचार्य… के बारे में ज़्यादा कुछ नहीं

भारत एक हिन्दू राष्ट्र और इससे कोई समझौता नहीं, हनुमान और शिवाजी RSS के आदर्श: भागवत

गीता और आइशी के बाद अब देखिए कॉमरेड चुनचुन का वीडियो, डंडा लेकर कर रहा था पत्थरबाजी

कॉमरेड चुनचुन- ये वो नाम है, जो वामपंथी छात्र संगठन आइसा से जुड़ा हुआ है। एक हाथ में डंडा और दूसरे हाथ में पत्थर- यही इसका रूप है। हाथ में डंडा लिए पत्थरबाजी करते वामपंथी छात्र नेता चुनचुन कुमार को पेरियार हॉस्टल के बाहर देखा गया। उसके साथ अन्य वामपंथी गुंडे भी थे। वो सभी मिल कर लगातार हिंसा कर रहे थे। कॉमरेड चुनचुन की ये हरकत कैमरे में क़ैद हो गई और जेएनयू में हिंसा कौन फैला रहा था, इसकी तस्वीर भी साफ़ हो गई। इससे पहले और भी कई वामपंथी छात्रों के ऐसे कई वीडियो वायरल हो चुके हैं।

हमनें गीता कुमारी के एक वीडियो के बारे में बताया था। गीता जेएनयू छात्र संगठन की अध्यक्ष रही हैं। अभी भी वो वामपंथी छात्र नेता हैं। वो नकाबपोश गुंडों के साथ हमले की साज़िश रचते देखी गईं। वीडियो में एक शख्स उन्हें समझाता दिखाई दे रहा है लेकिन वो गुंडों के साथ व्यस्त हैं। इसी तरह छात्र संघ की वर्तमान अध्यक्ष आइशी घोष का भी वीडियो वायरल हुआ। इस वीडियो में स्पष्ट देखा जा सकता है कि आइशी नकाबपोश गुंडों को हॉस्टल में घुसा रही है। इन्हीं वामपंथी गुंडों ने आतंक मचाया। फिलहाल आप कॉमरेड चुनचुन के वीडियो को देखिए:

जेएनयू हिंसा को लेकर एक अजीब बात ये है कि जिन वामपंथी गुंडों ने एबीवीपी के छात्रों को चुन-चुन कर पीटा, वही वामपंथी बाद में ख़ुद को पीड़ित भी दिखाने लगे। लगातार पोल खुलने के बावजूद बॉलीवुड सेलेब्रिटीज और विपक्षी नेताओं के समर्थन से ये वामपंथी ख़ुद को निर्दोष बता कर उलटा एबीवीपी पर ही आरोप लगाते रहे। यहाँ तक कि अभिनेत्री दीपिका पादुकोण भी उनके समर्थन में JNU पहुँचीं। अनुराग कश्यप और जावेद अख़्तर सरीखों ने हिंसक वामपंथियों को बचाने के लिए सोशल मीडिया में अभियान चलाया।

एक के बाद एक लगातार सामने आ रहे वीडियो में वामपंथियों की पोल खुल रही है। इन्होने दंगे किए, पत्थरबाजी की, छात्रों की पिटाई की और जेएनयू की संपत्ति को नुकसान पहुँचाया। बावजूद इसके इन्हें बॉलीवुड के लोगों का समर्थन लगातार मिल रहा है। सरकार और पुलिस को ही उलटा निशाना बनाया जा रहा है। एबीवीपी के कई पीड़ित छात्र हॉस्पिटलों में भर्ती हैं लेकिन सेलेब्रिटीज में से किसी ने भी उनकी परवाह नहीं की। एक कॉमरेड चुनचुन का वीडियो आने के बाद नए सिरे से उनकी पोल खुलती दिख रही है।

CAA-NRC विरोध: पीएम मोदी और अमित शाह को जान से मारने की धमकी देने वाले अनवर, नियाज गिरफ्तार

सीएए और एनआरसी को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को जान से मारने की धमकी दी गई थी। जिसके आरोप में अनवर और नियाज को बीते मंगलवार को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस में दर्ज शिकायत के मुताबिक अनवर ने मैसेज के माध्यम से पीएम मोदी और अमित शाह को मारने की धमकी देते हुए कहा था कि सीएए और एनआरसी से मुस्लिम लोग प्रभावित हुए हैं।

मीडिया रिपोर्ट के मुत़ाबिक एक आरोपित की पहचान अनवर के रूप में हुई है जो कि दक्षिणी कर्नाटक के पेरुवई का रहने वाला है। पुलिस ने बताया कि आरोपित अनवर ने क़तर में काम किया है। जिसने सीएए और एनआरसी के ख़िलाफ लोगों को भड़काने वाले संदेश ऑनलाईन माध्यमों से भेजे थे।

इतना ही नहीं अनवर ने व्हाट्सएप ग्रुपों में जाकर लोगों को सांप्रदायिक दंगों में ढकेलने के लिए ऑडियो मैसेज भी वायरल किए थे। वहीं दूसरे आरोपित की पहचान नियाज़ के रूप में हुई है। जो कि पुरवई क्षेत्र का ही निवासी है।
दस दिन पहले दोनों आरोपितों ने कथित तौर पर इस तरह के भड़काऊ संदेश भेजे थे और यहाँ तक ​​कि इन्होंने वामनजूर स्थित एक आरएसएस कार्यकर्ताओं से भी संपर्क किया था। साथ ही विदेश में काम करने वाले वामनजूर के युवाओं ने व्हाट्सएप पर संदेश भेजकर सीएए और एनआरसी का विरोध करने के लिए कहा था।

इस संबंध में यतीश नाम के व्यक्ति ने विट्टल थाने में एक शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया था कि सीएए और एनआरसी से मुस्लिमों के प्रभावित होने पर अनवर ने तथाकथित मोदी और अमित शाह को जान से मारने की धमकी दी थी। इसी बीच पुलिस को जानकारी मिली थी कि 6 जनवरी को अनवर अपने गृहनगर क्षेत्र में आया हुआ था जिसे पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया। वहीं नियाज के खिलाफ भी इस संबंध में पहले ही में मुकदमा दर्ज किया जा चुका है।

JNU के साथ एकजुटता दिखाने के लिए NCP के गुंडों ने ABVP के पुणे कार्यालय पर किया हमला

दिल्ली का जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय(JNU) पिछले कुछ दिनों से ग़लत कारणों से चर्चा में है। विश्वविद्यालय में हुई हिंसा ने बहुत से लोगों को चौंका दिया था। वामपंथियों ने इस हिंसा का प्रयोग युवाओं को जुटाने और देश के विभिन्न हिस्सों में हिंसा फैलाने के लिए किया था। वामपंथियों ने JNU में हुई हिंसा के पीछे साफ़ तौर पर अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) का हाथ बताया था। लेकिन, खबरों के मुताबिक वामी गुंडों ने इस हिंसा को शुरू किया था। जिसके बाद वामपंथी, कॉन्ग्रेस और दूसरी विपक्षी पार्टियाँ JNU के बहाने ABVP पर हमलावर हो रही हैं।

मंगलवार (7 जनवरी, 2020) को पुणे स्थित ABVP के कार्यालय पर हमला किया गया। हमलावरों ने ABVP ऑफ़िस के बाहर लगे बोर्ड को काली स्याही से रंग दिया। बाद में खुलासा हुआ कि हमलावर राष्ट्रवादी छात्र कॉन्ग्रेस के नेता और शरद पवार की राकांपा के छात्रसंघ अध्यक्ष थे।

एक फेसबुक पोस्ट में विशाल मोर नाम के व्यक्ति ने ख़ुद को NCP का शहर अध्यक्ष और NCP पुणे का अध्यक्ष बताते हुए उसने ख़ुद इस हमले की जिम्मेदारी ली। साथ ही ABVP ऑफिस पर हमले में शामिल अपने फ़ोटो को फेसबुक पर शेयर भी किया।

NCP वर्तमान में शिवसेना और कॉन्ग्रेस के साथ महाराष्ट्र की गठबंधन सरकार में है। शक्ति प्रदर्शन में एक राजनीतिक दल के नेताओं द्वारा इस तरह का हमला और तोड़फ़ोड़ बेहद निंदनीय है और हमें कोई उम्मीद भी नहीं कि महाराष्ट्र सरकार इन गुंडों के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगी क्योंकि वे तो अपने हैं। लेकिन हम आशा करते हैं कि राष्ट्र, ABVP के समर्थन में और इन गुंडों के खिलाफ भी खड़ा है जो कि सत्ता की सह पाकर इस तरह की हिंसा करते हैं।

तिरंगा यात्रा पर कुरैशी मोहल्ले में हुई पत्थरबाजी, CAA के समर्थन में निकले थे 40 संगठनों के लोग

मध्य प्रदेश के शाजापुर में तिरंगा यात्रा के दौरान कुरैशी मोहल्ला के लोगों ने पथराव किया। तिरंगा यात्रा में शामिल लोगों का कहना है कि ये यात्रा जैसे ही कुरैशी मोहल्ले में पहुँची, वहाँ मौजूद लोगों ने पत्थरबाजी शुरू कर दी। इसके बाद वहाँ हिंसा भड़क गई। ये रैली नागरिकता संशोधन क़ानून के समर्थन में निकाली जा रही है। जहाँ ये हमला हुआ, उसे मुस्लिमों के प्रभाव वाला इलाक़ा बताया जा रहा है।

मालवा क्षेत्र में स्थित शाजापुर में ये घटना बुधवार (जनवरी 8, 2020) को हुई। पत्थरबाजी होते देख कर आसपास के दूकानदार भी सहम गए और वो अपनी-अपनी दुकानें बंद कर के वहाँ से भाग खड़े हुए। रैली पर हमले होते ही वहाँ भगदड़ मच गई। पुलिस ने बताया कि वो सीसीटीवी फुटेज के जरिए आरोपितों की तलाश में जुटी है। इस रैली का आयोजन शहर के 40 संगठनों ने मिल कर किया था। रैली में लोगों ने हाथों में तिरंगा झंडा लिया हुआ था। वो ‘भारत माता की जय’ के नारे भी लगा रहे थे। इसी दौरान उनपर हमला हुआ।

शाजापुर में आईआईटी परिसर से निकली रैली वापस यहीं पर आकर खत्म होने वाली थी, लेकिन उससे पहले ही पथराव कर दिया गया। हालाँकि, पुलिस ने कुछ दूसरी ही कहानी बताई है। पुलिस ने कहा है कि रैली के दौरान बीच में एक गाय आ गई थी, जिसके बाद पत्थरबाजी की अफवाह फ़ैल गई। पत्थरबाजी की अफवाह फैलते ही भीड़ पीछे की ओर भागी, ऐसा पुलिस के हवाले से मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है।

भूतेश्वर क्षेत्र में पुलिस तैनात थी। पुलिस को जैसे ही मामले का पता चला, वो स्थिति नियंत्रित करने निकले। बाद में पुलिस के हस्तक्षेप के बाद रैली आगे बढ़ पाई। पुलिस ने अभी तक कुछ स्पष्ट नहीं कहा है कि पत्थरबाजी किस ओर से पहली बार हुई। पुलिस सीसीटीवी फुटेज खँगाल कर दोषियों को चिह्नित करने की बात कह रही है। फ़िलहाल हालात नियंत्रण में है और संवेदनशील स्थानों पर पुलिस की तैनाती कर दी गई है।

एक और बात जानने लायक है कि जिस कुरैशी मोहल्ले में पत्थरबाजी और हमला हुआ है, उसी जगह पर एक वर्ष पूर्व भी ऐसी घटना हुई थी। उस दौरान राजपूत समाज के एक समारोह पर हमला किया गया था। उस दौरान उपद्रवियों ने कई वाहनों को आग के हवाले कर दिया गया था।

दीपिका पादुकोण को मिला पाकिस्तानी सेना का समर्थन, बताया सच्चाई के लिए खड़ी बहादुर महिला

पाकिस्तान की सेना ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया है। बता दें कि दीपिका पादुकोण मंगलवार (जनवरी 7, 2019) को जेएनयू कैम्पस में पहुँची थीं, जहाँ वामपंथी नेता कन्हैया कुमार और जेएनयू छात्र संघ की अध्यक्ष आइशी घोष मौजूद थी। यह अजीब बात है कि हिंसा के ख़िलाफ़ प्रदर्शन का दावा करने वाले वामपंथियों के नेतृत्व वही आइशी कर रही थीं, जो ख़ुद नकाबपोश गुंडों का नेतृत्व करती देखी गई थीं। दीपिका पादुकोण का वामपंथियों का साथ देना विवाद का विषय बना। शुक्रवार को उनकी फ़िल्म ‘छपाक’ रिलीज हो रही है, ऐसे में लोगों ने इसे पब्लिसिटी स्टंट बताया।

पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने दीपिका पादुकोण का समर्थन किया। आसिफ गफूर ने दावा किया कि दीपिका पादुकोण युवाओं के लिए खड़ी हुई हैं, वो सच्चाई के लिए खड़ी हुई हैं। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने दीपिका की तारीफ़ की। उन्होंने दीपिका को एक बहादुर महिला बताया। आसिफ गफूर ने दावा किया कि दीपिका पादुकोण विपरीत परिस्थितियों में भी बहादुर की तरह खड़ी हुईं, जो उन्हें सम्मान के काबिल बनाता है। सीमा पर पाक सेना द्वारा सीजफायर के लगातार उल्लंघन को जायज ठहराने वाले आसिफ गफूर ने कहा कि मानवता को बाकी सभी चीजों से ऊपर रखना चाहिए।

पाक सेना के प्रवक्ता ने दीपिका की तारीफ की, बाद में ट्वीट डिलीट किया

इधर पाकिस्तान खुल कर जेएनयू के वामपंथियों के समर्थन में भी आगे आ रहा है। पाकिस्तान में रैली का आयोजन किया जा रहा है। बुधवार (जनवरी 8, 2020) को लाहौर के छात्रों और शिक्षकों ने जेएनयू के समर्थन में रैली निकाली। इसके अलावा पाकिस्तान के मंत्री ने भी इनके समर्थन में सोशल मीडिया में अभियान चलाया। लाहौर में आयोजित रैली की थीम शायर फैज अहमद फैज की नज्म ‘लाजिम है कि हम भी देखेंगे’ रखा गया।

दीपिका पादुकोण की फ़िल्म ‘छपाक’ शुक्रवार को रिलीज हो रही है। इसी दिन अजय देवगन की ‘तानाजी’ और रजनीकांत की ‘दरबार’ भी आ रही है। ऐसे में, कई लोग उनके जेएनयू दौरे को एक पब्लिसिटी स्टंट भी बता रहे हैं। ताज़ा सूचना के अनुसार, पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने दीपिका पादुकोण को लेकर किए गए ट्वीट को डिलीट कर दिया है।

जबरन इस्लाम कबूल करवाने के लिए महिला का अपहरण, कुछ ही दिन पहले हुई थी शादी

बांग्लादेश में हिन्दुओं का लगातार उत्पीड़न हो रहा है। ‘हिन्दू कॉलेज’ की शादीशुदा युवती अनीका रॉय का क्रिसमस 2019 के दिन अपहरण कर लिया गया। बुधवार (दिसंबर 25, 2019) को हुई इस घटना को लेकर वहाँ के हिन्दू समाज में भय का माहौल है। महिला का अपहरण जबरन इस्लामी धर्मान्तरण कराने के मकसद से किया गया। ये घटना तब हुई, जब वह अपने पिता के घर गई थी। उसका अपहरण करने वाले तीनों आरोपित मुस्लिम हैं। बांग्लादेश की इस घटना पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर वहाँ के कुछ अल्पसंख्यकों ने बताया कि वहाँ ऐसी घटनाएँ रोज़ हो रही हैं।

तीनों आरोपितों के नाम हैं- मोहम्मद नाहिद हसन, मोहम्मद नसीर हैदर और मोहम्मद सबुज। ये सभी ढाका के देमुरा स्थित तम्बूराबाद गाँव के रहने वाले हैं। पीड़िता के पिता अखिल चंद्र रॉय ने इस मामले की शिकायत देमुरा पुलिस स्टेशन में लिखाई है। इसमें ‘बांग्लादेश माइनॉरिटी वाच (BDMW)’ के अध्यक्ष रवींद्र घोष ने उनकी मदद की। बीडीएमडब्ल्यू से इस केस की जाँच कर रहे पुलिस अधिकारी इस केस की शिकायत दर्ज कर ली गई है और पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

बीडीएमडब्ल्यू ने बयान जारी कर कहा कि संगठन बांग्लादेश में लगातार होती ऐसी घटनाओं से ख़ासा चिंतित है, जिसमें अल्पसंख्यक लड़कियों का अपहरण कर के उनका जबरन धर्मान्तरण कराया जाता है। उनसे जबरन इस्लाम कबूलने को कहा जाता है।

पीड़िता के पिता अखिल चंद्र रॉय स्थानीय व्यवसायी हैं और इसी से अपने परिवार का गुजर-बसर करते हैं। उनकी बेटी अनिका का अपहरण कर लिया गया। अनिका की शादी सुमन चंद्र भौमिक से हुई थी। वो ढाका स्थित काबी नजरुल गवर्नमेंट कॉलेज की छात्रा हैं। अनिका और सुमन की शादी पूरे हिन्दू रीति-रिवाज के साथ हुई थी। घटना के दिन अनिका अपने पति के साथ अपने पिता के यहाँ आई हुई थीं।

रात को 11 बजे जब वो एक फोन कॉल पर बात करते हुए बाहर निकलीं, तभी नाहिद, नसीर और सुबाज ने उसका अपहरण कर लिया। अभी तक ये नहीं पता चल पाया है कि आरोपित पीड़िता का अपहरण करके उसे कहाँ ले गए हैं।

(बांग्ला भाषा में लिखी हुई बांग्लादेश पुलिस की FIR कॉपी का अनुवाद करने के लिए दीपाश्री का सहयोग लिया गया है)

लेफ्ट की हिंसा ‘दादागिरी’ है न कि आंदोलन, खत्म हो जाऊँगी लेकिन वामपंथियों की तरह नहीं करूँगी: ममता बनर्जी

पश्चिम बंगाल में मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बुधवार (दिसंबर 8, 2019) को भारत बंद बुलाए जाने के लिए लेफ्ट पार्टियों पर सीधा हमला बोला है। उन्होंने लेफ्ट पर निशाना साधते हुए कहा है कि वामपंथ की कोई विचारधारा नहीं है। वे केवल बंद बुलाकर और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं। मुख्यमंत्री के मुताबिक लेफ्ट द्वारा राज्य में की गई हिंसा सब ‘दादागिरी’ में आती है न कि आंदोलन में। इससे तो बेहतर है राजनैतिक मौत हो जाए।

एएनआई के मुताबिक, ममता बनर्जी ने कहा, “वामपंथी पार्टियों की कोई विचारधारा नहीं हैं। रेलवे पटरियों पर बॉम्ब बिछाना गुंडागर्दी में आता है। आंदोलन के नाम पर रास्ते में चलने वालों को मारा जा रहा है और उनपर पथराव हो रहा है। ये दादागिरी है, न कि आंदोलन। मैं इस भारतबंद की निंदा करती हूँ।”

https://platform.twitter.com/widgets.js

पश्चिम बंगाल की सीएम ने दावा किया कि लेफ्ट पार्टियों द्वारा बुलाए बंद को खारिज कर दिया गया है। वे बंद का आह्वान करके और बसों में बम फेंककर सस्ता प्रचार करना चाहते हैं, इस प्रचार को हासिल करने के बजाय राजनीतिक मौत बेहतर है।

इसके अलावा कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में ये भी बताया गया कि ममता बनर्जी ने कहा है कि वे बंगाल में किसी तरह के बंद की इजाजत नहीं देंगी। उनके अनुसार वे सीएए या एनआरसी के खिलाफ किसी बड़े आंदोलन से नहीं जुड़े हैं, न बंगाल में और न ही देश में कहीं और।

गौरतलब है कि केंद्र सरकार की कथित ‘राष्ट्र विरोधी’ और ‘जन विरोधी’ आर्थिक नीतियों के खिलाफ बुधवार को वाम दल समर्थक 10 ट्रेड यूनियनों ने ‘भारत बंद’ का आह्वान किया था। राहुल गाँधी ने ट्वीट कर भारत बंद को अपना समर्थन दिया है। उन्होंने लिखा, “मोदी-शाह सरकार की जनविरोधी, श्रमिक विरोधी नीतियों ने भयावह बेरोजगारी पैदा की है और सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों को कमजोर किया जा रहा है, ताकि इन्हें मोदी के पूँजीपति मित्रों को बेचने को सही ठहराया जा सके। आज 25 करोड़ कामगारों ने इसके विरोध में भारत बंद बुलाया है। मैं उन्हें सलाम करता हूँ।” राज्य में सीएए के विरोध के नाम पर भी जमकर हिंसा हुई थी।