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‘प्रीति’ रेड्डी केस: खेत में घसीट कर बारी-बारी से किया रेप, ट्रक में लाश डाल खरीदा था पेट्रोल-डीजल

डॉ. प्रीति (बदला हुआ नाम) रेड्डी हत्याकांड से जुड़े तथ्य पुलिस द्वारा कड़ाई से अभियुक्तों से पूछताछ में निकल कर सामने आ रहे हैं। हालिया जानकारी के मुताबिक अभियुक्तों ने प्रीति रेड्डी के मुँह पर कपड़ा बाँध दिया था ताकि उनकी चीखें लोग सुन न लें। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक यह ‘तरकीब’ भी मुख्य अभियुक्त मो. आरिफ (मीडिया रिपोर्टों में पहले प्रकाशित नाम मो. पाशा था, जिसे अब मोहम्मद आरिफ़ कर दिया गया है) का ही था।

अपराधियों ने बार-बार सामूहिक बलात्कार करने के बाद अंत में मुँह और नाक दबाकर प्रीति रेड्डी की हत्या कर दी। इसके पहले, मीडिया खबरों के मुताबिक, पशु चिकित्सक डॉ. प्रीति ने अपनी जान बख्श देने की भी भीख माँगी थी। उनकी हत्या के बाद मो. आरिफ़, मरवीन, केशवा और रिवा (सभी नाम बदले हुए, क्योंकि इनमें से कोई एक नाबालिग होने की संभावना है) उनकी लाश एक ट्रक में डालकर हाइवे पर लेकर आए। यही नहीं, उन्होंने लाश को जलाने के लिए एक पेट्रोल पम्प से पेट्रोल और डीजल दोनों ही खरीदे– वह भी ट्रक में लाश रखकर।

बाद में एक सुनसान अंडरपास मिलने पर उन्होंने डॉ. रेड्डी की मृत देह को वहीं फेंका और पेट्रोल छिड़क कर आग के हवाले कर दिया। इन चारों को पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर हिरासत में लिया था।

इनसे हुई पूछताछ में पता चला है कि सवा नौ बजे रात के आसपास जिस समय डॉ. प्रीति ने अपनी बहन को फ़ोन किया था कि उन्हें डर लग रहा है, उसी समय मोहम्मद आरिफ़ ने उनके पास आकर उनका स्कूटी सही कराने में सहायता की पेशकश की थी। इसके पहले वह उन्हें स्कूटी को टोल प्लाजा पर खड़ा कर कैब करता देख कर अपने साथियों के साथ उनके बलात्कार और हत्या का प्लान बना चुका था और इसके लिए उसने उनके स्कूटी का एक टायर भी मौका लगाकर पंचर कर दिया था। उसका साथी रिवा कथित तौर पर स्कूटी को सही कराने के लिए लेकर निकला और बाकियों ने डॉ. प्रीति पर हमला कर दिया।

वे उन्हें घसीट कर ट्रकों के पीछे एक खाली पड़े खेत में ले गए जहाँ उन्होंने उनके साथ बलात्कार किया। इसके बाद शिवा, जो स्कूटी लेकर सही कराने के बहाने निकला था, ने भी लौटकर बलात्कार किया। पुलिस के अनुसार डॉ. प्रीति की हत्या रात के 10 बजे के थोड़ी देर बाद हुई और उनकी लाश को आग 2-3 बजे के बीच में लगाई गई।

साइबराबाद के कमिश्नर वीसी सज्जनर के हवाले से मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज में पीड़िता को देखने के बाद रात के 3 बजे परिवार की तहरीर पर एफआईआर लिखी और 5 बजे तक इलाके की सभी पंचर की दुकानों को देख डाला, लेकिन न ही डॉ. प्रीति रेड्डी और न ही उनकी स्कूटी का कोई सुराग मिला। उनकी अधजली लाश सुबह 7 बजे मिली।

मो. पाशा ने पहले से ही प्लानिंग करके किया डॉ. प्रियंका का रेप और मर्डर, जलाई लाश: पुलिस का दावा

‘डॉ प्रियंका रेड्डी पढ़ी-लिखी थी, उसने अपनी बहन को क्यों किया फोन, पुलिस को क्यों नहीं’ – मंत्री महमूद अली

अरबाज ने प्रेमजाल में फॅंसाया, फिर 3 दोस्तों के साथ किया गैंगरेप: कैमूर में लोगों ने जला डाला आरोपित का घर

कॉन्ग्रेसियों को जिंदा जलाने का पुराना अनुभव… मैं आ रही हूॅं: साध्वी की चुनौती से बदले कॉन्ग्रेस MLA के सुर

गाँधी की हत्या करने वाले नाथूराम गोडसे को लोकसभा में कथित तौर पर ‘देशभक्त’ कहने वाली साध्वी प्रज्ञा सिंह ठाकुर की चुनौती के बाद कॉन्ग्रेस विधायक गोवर्धन दांगी के स्वर बदल गए हैं। भोपाल की सांसद साध्वी प्रज्ञा को राजगढ़ आने पर ज़िंदा जला देने की धमकी देने वाले कॉन्ग्रेस विधायक अब कह रहे हैं कि अगर साध्वी राजगढ़ आतीं हैं तो वे स्वागत करेंगे। साथ ही सफाई देते हुए कहा है कि गाँधी जी को कोई अपशब्द कहता है तो कॉन्ग्रेसियों के दिल पर चोट लगती है

पूरा मामला यह है कि कॉन्ग्रेस के शीर्ष नेताओं राहुल गाँधी और सोनिया गाँधी की सुरक्षा से एसपीजी कवर हटाने को लेकर लोकसभा में हो रही बहस में कम्युनिस्ट नेता डी राजा ने नाथूराम गोडसे और (साध्वी के दावे के अनुसार) उधम सिंह का ज़िक्र किया यह दावा करने के लिए कि हत्या करने का इरादा रखने वाले कई बार दशकों तक इंतज़ार करते हैं। गौरतलब है कि 1919 में हुए जलियाँवाला बाग़ हत्याकांड को सही ठहराने और इसके हत्यारे जनरल डायर को बचाने के लिए उधम सिंह ने पंजाब के तत्कालीन गवर्नर माइकल ओ’ड्वायर की हत्या 1940 में की थी। अदालत में दिए इकबालिया बयान में नाथूराम गोडसे ने भी ज़िक्र किया था कि गाँधी की हत्या के पीछे उसका भी गाँधी की हिन्दू-विरोधी नीतियों के ख़िलाफ़ 32 साल का क्षोभ था।

डी राजा को टोकते हुए साध्वी ने कहा था कि वे एक देशभक्त का ऐसे मामले में उदाहरण नहीं दे सकते। इसके आगे साध्वी और मीडिया के अलग-अलग दावे हैं। एक तरफ़ साध्वी ने दावा किया है कि उन्होंने देशभक्त का इस्तेमाल उधम सिंह के संदर्भ में किया है, वहीं मीडिया के लोग इसे नाथूराम गोडसे के संदर्भ की बात कह रहे हैं। बाद में साध्वी ने अपने बयान के लिए माफ़ी माँग ली थी।

उन्होंने माफ़ी माँगते हुए कहा, “सदन में मेरे द्वारा की गई किसी भी टिप्पणी से यदि किसी भी प्रकार से किसी को कोई ठेस पहुँची हो तो उसके लिए मैं ख़ेद प्रकट कर क्षमा चाहती हूँ। परंतु मैं यह भी कहना चाहती हूँ कि संसद में मेरे बयानों को तोड़मरोड़ कर ग़लत ढंग से पेश किया गया है, मेरे बयान का सन्दर्भ कुछ और था, जिसे ग़लत ढंग से इस रूप में प्रस्तुत कर दिया गया। जिस प्रकार से मेरे बयानों को तोड़ा-मरोड़ा गया है वो निंदनीय है।” लेकिन उनके बयान से नाराज़ दांगी ने कहा था कि यदि वह मध्य प्रदेश में कदम रखेंगी तो वे उन्हें जिन्दा जला देंगे। उन्होंने कहा था, “प्रज्ञा ठाकुर कभी आई तो उसका पुतला नहीं बल्कि उसे पूरा का पूरा जिंदा जला देंगे।”

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए साध्वी ने उन्हें चुनौती देते हुए कहा है कि वे 8 दिसंबर को केवल मध्य प्रदेश में ही नहीं, दांगी के आवास पर भी पहुँच रही हैं। साथ ही 1984 के सिख दंगे और तंदूर कांड का हवाला देते हुए कहा है कि कॉन्ग्रेसियों को जिंदा जलाने का पुराना अनुभव है।

अपना बयान वायरल हो जाने पर माफ़ी माँगते हुए दांगी ने कॉन्ग्रेस को ‘शांतिप्रिय’ लोगों की पार्टी बताया है। उन्होंने कहा कि कॉन्ग्रेसी साध्वी के बयान की ‘शांतिपूर्ण’ निंदा करते हैं।

‘प्रज्ञा ठाकुर कभी MP आई तो उसका पुतला नहीं बल्कि उसे पूरा का पूरा जिंदा जला देंगे’

साध्वी प्रज्ञा ने माँगी माफ़ी, लेकिन बोला- जिसने मुझे कहा आतंकवादी, वो कब माँगेंगे माफ़ी

अरविंद केजरीवाल हाजिर हों! मानहानि मामले में अदालत ने दिया पेश होने का आदेश

दिल्ली की एक अदालत ने मानहानि के एक मामले में मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को पेश होने का निर्देश दिया है। अदालत ने कहा है कि इस मामले में जमानत लेने के लिए केजरीवाल को 13 दिसंबर से पहले व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में हाजिर होना होगा।

अतिरिक्त मुख्य मेट्रोपॉलिटन मजिस्ट्रेट विशाल पाहूजा ने कहा, “यह गौर करने वाली बात है कि आरोपी ने आज तक जमानत नहीं ली है। इस प्रकार मामले को अग्रिम जमानत बॉन्ड भरने के साथ-साथ अनुच्छेद 251 सीआरपीसी के अंतर्गत औपचारिक नोटिस के लिए स्थगित किया गया है। आरोपी को अगली सुनवाई पर व्यक्तिगत रूप से पेश होने का निर्देश दिया जाता है।”

अदालत ने विकास सांकृत्यायन द्वारा दायर मानहानि शिक़ायत पर सुनवाई करते हुए ये निर्देश दिया। विकास ने दावा किया था कि 6 मई, 2018 को ‘बीजेपी आईटी सेल पार्ट 2’ नामक एक YouTube वीडियो जर्मनी में रहने वाले ध्रुव राठी ने पोस्ट किया था, उसमें “कई झूठे और मानहानि के आरोप लगाए गए थे।”

सांकृत्यायन ने कहा कि दिल्ली के मुख्यमंत्री ने सत्यता की जाँचे बिना अपने ट्विटर अकाउंट से वीडियो को रीट्वीट किया। शिक़ायत के अनुसार, “शिक़ायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वीडियो में उसके ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप झूठे, दुर्भावनापूर्ण और मानहानिकारक हैं और इस वजह से सही सोच वाले सदस्यों की नज़र में शिक़ायतकर्ता की प्रतिष्ठा को समाज में कम हो गई। अभी तक लगाए गए आरोपों का कोई सबूत नहीं दिया गया है।”

शिक़ायत में इस बात का भी ज़िक्र है कि चूँकि केजरीवाल को करोड़ों लोग फॉलो करते हैं, “इसके कारण यह वीडियो न केवल भारत में बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बड़ी संख्या में लोगों तक पहुँच गया है।”

हम भी रेले गए थे, तुम भी रेले जाओगे: उद्धव ठाकरे को मिली कुमारस्वामी की चिट्ठी

प्रिय उद्धव बाला साहब ठाकरे,

ख़बरों में देखा कि आपने कॉन्ग्रेस के समर्थन से मुख्यमंत्री पद की शपथ ली है। मैंने भी ली थी। आपने बहुमत भी साबित कर दिया। मैंने भी कर दिया था। आपने भी मोटाभाई का इगो हर्ट किया। मैंने भी किया था। आपने 3 दिन के भाजपाई सीएम से इस्तीफा दिलवा कर अपना राज़ क़ायम किया। मैंने भी ऐसा ही किया था। आपके शपथग्रहण समारोह में विपक्ष के कई नेता मौजूद रहे और इसे ख़ूब सुर्खियाँ मिलीं। मैंने भी बटोरी थी। मेरे शपथग्रहण समारोह में तो विपक्षी नेताओं का जमावड़ा लग गया था। मायावती और सोनिया गाँधी ने एक-दूसरे से प्यार जताया था। ममता बनर्जी और अरविन्द केजरीवाल ने गलबहियाँ डाल कर विपक्षी एकता की मिसाल क़ायम की थी।

लेकिन प्रिय उद्धव, अंत में क्या हुआ? हम भी रेले गए, आप भी रेले जाएँगे। याद रखिए, मुख्यमंत्री तो मैं था लेकिन पावर सेंटर सिद्दारमैया था। ख़ुद के हालात देखिए। भले मुख्यमंत्री मातोश्री का हो लेकिन सत्ता तो ‘सिल्वर ओक’ से ही चलेगी न। मेरे पिता की कुछ महत्वाकांक्षाएँ थीं तो आपके बेटे की है। मेरा कार्यकाल रोते-रोते बीता और मैं 5 साल तो क्या, डेढ़ वर्ष भी पूरे नहीं कर पाया। फिर आपकी तीन पहिए वाली सरकार का संतुलन कब तक बना रहेगा, ये सोचने वाली बात है। हमनें डीके शिवकुमार पर भरोसा किया था, आपने संजय राउत पर किया है।

प्रिय उद्धव, हम दोनों ही खानदानी हैं। मुझे भी अपने बेटे का करियर बनाना था, वो भी चौपट होता दिख रहा है। आपने देखा न, हाल ही मैं कैसे मांड्या में रोया? ये वही लोकसभा क्षेत्र है, जहाँ से मेरे बेटे को लड़ाया गया था। वो हार गया। मुझे बहुत रोना आया और मैं रैली में ही रो पड़ा। मैं नहीं चाहता कि आपके मुख्यमंत्री बनने के कारण आदित्य का भी करियर बर्बाद हो। समय रहते संभल जाएँ। मेरी तरह आपका परिवार भी बड़ा है। मुझे पता है कि आपको भी अपनों का राजनीतिक भविष्य बनाना है। ये सही है कि आप मुंबई पर राज़ करने का दावा करते हैं, लेकिन मैसूर में अपने ठाठ भी किसी से कम हैं क्या?

ऐसा नहीं है कि मैं कमज़ोर हूँ। ठाकरे खानदान के जो तेवर हैं, उससे कम नहीं है मेरा परिवार। अब देखिए न, मेरा बेटा ही मेरे पूर्व-प्रधानमंत्री पिता पर चिल्लाया। एक अखबार ने इस ख़बर को छापा। मेरे तेवर तो देखो। मैंने उस अख़बार के संपादक और इस ख़बर को लिखने वाले तक पर केस दर्ज कराया। मेरी पुलिस थी, उन्हें जम कर हड़काया। मीडिया भी अजीब है न! हम विपक्षी दल अपने राज्यों में पत्रकारों को पटक कर मारें, तब भी लोकतंत्र ख़तरे में नहीं आता। भाजपा शासित राज्यों में किसी पत्रकार के घर की खिड़की के शीशे पर कौवा बीट कर दे तो इसे भी ‘लोकतंत्र की हत्या’ की श्रेणी में रखा जाता है। बड़ा मज़ा आया ये खेल देख कर। लेकिन अब देखो उद्धव जी। अब मेरे पर ही राजद्रोह का मुक़दमा दर्ज हुआ है। सिद्दरामैया भी लपेटे में आया है। मुझे भले ही जो सज़ा हो, मैं चाहता हूँ सिद्दा को भी सज़ा मिले।

मैं सोनिया गाँधी के आशीर्वाद से मुख्यमंत्री बना। आप सोनिया गाँधी की क़सम खा कर मुख्यमंत्री बने। मेरे पापा ने राजनीति में न जाने कितने सिद्दारमैया पैदा कर छोड़ दिए। आपके पापा ने भी जिसके सिर पर हाथ रख दिया, वही बेताज बादशाह बन गया। आपके पिताजी तो धरती छोड़ चले गए। मेरे ज़िंदा हैं। रोने के लिए। हम दोनों बाप-बेटे जब तक दिन में तीन बार रो न लें, तब तक हमारे मन में एक कुलबुलाहट सी मची रहती है। बस एक बार मुख्यमंत्री पद हथिया लेने की इतनी बड़ी सज़ा। अभी भी मौक़ा है उद्धव दादा। मेरे अनुभवों से सीखिए।

आपको क्या लगता है? अजित पवार ने कुछ नया किया। राजनीति में जो भी होता है, हमारा परिवार वर्षों पहले कर चुका होता है। मैं दो-दो बार एक्सीडेंटल सीएम बना। मेरे पिता एक्सीडेंटल प्रधानमंत्री बने। उन्होंने ख़ुद कहा था कि मनमोहन नहीं, बल्कि असली एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर तो वे हैं। अजित ने अपने चाचा से बगावत की और 3 दिन के लिए डिप्टी सीएम बने। मैंने तो अपने पिता से ही बगावत कर 1 साल 8 महीने सरकार चलाई थी। मेरे पास शासकीय अनुभव था, तब भी मेरा ये हाल हुआ। आपने तो पहली बार कोई पद संभाला है।

आपने आरे जंगलों की कटाई रोक दी है। मुझ पर तो 300 नेताओं की फोन टैपिंग का मामला चल रहा है। क्या आप इससे ज्यादा तानाशाही दिखा पाओगे? मैं व्यथित हूँ। राजनीति से संन्यास की बातें करता हूँ। जब सीएम था, तब जो मेरा विरोध करते थे, उन्हें मैं लाठीचार्ज की खुली धमकी देता था। जब लोग किसी माँग को लेकर प्रदर्शन करते थे तो मैं सीधा कहता था कि मोदी को वोट देने वाले लोग मोदी के पास जा कर दुखड़ा रोएँ। उद्धव, कहीं ऐसा न हो कि आपका दुखड़ा सुनने वाला ही कोई न रहे। मेरा तो दिल यही कहता है- हम भी रेले गए थे, आप भी रेले जाओगे। मेरी पार्टी विधानसभा में तीसरे नंबर की पार्टी है। आपकी दूसरे नंबर की है। ध्यान रखिएगा।

आपके बेटे को मीडिया भाव नहीं देता है। किसी ने तो पप्पू भी बुला दिया था। मेरे भी बेटे को भी मीडिया भाव नहीं देता है। मैंने तो इसके लिए मीडिया का खुला बहिष्कार भी कर डाला था। मैं वंशवादी राजनीति को देश के विकास का कारण मानता हूँ। मुझे पता है, आपकी भी आस्था वंशवादी राजनीति में ज़रूर होगी। ऐसा मत समझना कि कॉन्ग्रेस मेरे साथ मज़बूरी से खड़ी नहीं थी। मेरे बेटे की उम्मीदवारी का विरोध करने पर कॉन्ग्रेस ने अपने 7 नेताओं को पार्टी से निकाल बाहर किया था। अहा! क्या प्रेम दिखाती थी कॉन्ग्रेस! आपके साथ भी ऐसा ही हो रहा है न? मुझे डेजा-वू वाली फीलिंग आ रही है। उद्धव, याद रखना। हम भी रेले गए थे, आप भी रेले जाओगे।

मैं ईमानदार हूँ। जो सच है, उसे बोल देता हूँ। महाराष्ट्र में जो भी हुआ, वो मौक़ापरस्ती का एक उदाहरण है। ऐसी अवसरवादी राजनीति सभी करते हैं। मैंने भी की है। मैं कौन सा दूध का धुला हूँ? हाँ, दूध से याद आया। एक राज़ की बात सुनो। मोदीजी इसीलिए सफ़ेद दिखते हैं क्योंकि वो रोज़ वैक्स लगाते हैं। हम तो वैसे ही मुँह धो कर आ जाते हैं।

अंत में यही कहना चाहूँगा कि आपको जब इस्तीफा देना पड़े तो बंगलौर चले आना। साथ मिल कर रोएँगे। और हाँ, अब ये मत कहना कि आपसे मिलने लोग मातोश्री आते हैं, आप किसी से मिलने नहीं जाते। वो ज़माना बीत गया अब। मैंने देखा कि कैसे आप सरकार गठन से पहले होटलों के बैकडोर से शरद पवार व कॉन्ग्रेस नेताओं से मिलने जाया करते थे। मेरे पिताजी योग एक्सपर्ट हैं। वो हम दोनों को योग सिखाएँगे। शाह को कैसे भूलें, इसका उपाय बताएँगे। बाकी विशेष क्या कहूँ? बस हर छोटे-बड़े निर्णय लेने से पहले ‘सिल्वर ओक’ और ’10 जनपथ’ फोन घूमा कर अनुमति ज़रूर ले लेना।

तुम्हारा शुभचिंतक
हरदनहल्ली देवेगौड़ा कुमारस्वामी
जेपी नगर, बंगलौर

वो दूसरी जली हुई लाश शायद आत्महत्या की है, मानसिक रूप से बीमार भी थी: तेलंगाना पुलिस

तेलंगाना में पशु चिकित्सक डॉ. प्रीति (बदला हुआ नाम) रेड्डी के सामूहिक बलात्कार और हत्या के बाद उसी शमशाबाद इलाके में मिली दूसरी महिला की जली हुई लाश को लेकर पुलिस आत्महत्या के एंगल की भी जाँच कर रही है। इंडिया टुडे में प्रकाशित रिपोर्ट में पुलिस के सूत्रों के हवाले से यह दावा किया गया है। यह लाश कल (शुक्रवार, 30 नवंबर, 2019 को) जली मिली थी।

पुलिस के सूत्रों के अनुसार लगभग 35-वर्षीया महिला की लाश की प्रारम्भिक जाँच में पुलिस को संदेह है कि उसने खुद को आग लगाकर आत्महत्या कर ली थी। उसकी लाश सिद्दुलागट्टा रोड पर एक सुनसान जगह पर पड़ी मिली थी। पुलिस ने बताया कि महिला की मानसिक स्थिति भी ठीक नहीं थी।

गौरतलब है कि कल पहले से ही डॉ. प्रीति (बदला हुआ नाम) रेड्डी के सामूहिक बलात्कार और हत्या का मामला प्रकाश में आने के बाद से ही लोग भड़के हुए थे। ऐसे में इस महिला के वैसे ही जले हुए शव के उसी इलाके में मिलने की खबर से लोगों का गुस्सा उबल पड़ा था और उससे जुड़ा हैशटैग सोशल मीडिया पर ट्रेंड करने लगा।
पुलिस ने कल कहा था कि अभी जाँच की जा रही है। हालाँकि दोनों ही लाशों का स्थिति में समानता पाए जाने पर लोग शक ज़ाहिर करने लगे कि यह काम किसी एक ही व्यक्ति या गैंग का हो सकता है। फिर भी इस पर पुलिस ने कल रात तक उस  गुंजाइश पर कुछ नहीं कहा है। सुबह तक इस पर और भी बातें निकल कर सामने आ सकती हैं।

सोशल मीडिया पर लाश की तस्वीर और उसके पाए जाने का एक विडियो भी घूम रहा है लेकिन वह इतना नृशंस है कि हम उसे दिखा नहीं सकते। लेकिन उसी समय से पुलिस यह भी कह रही थी कि लड़की ने आग से जल कर आत्महत्या की कोशिश की हो, इस एंगल से भी इनकार नहीं किया जा सकता।  

आपको बता दें कि हैदराबाद के बाहरी इलाके शमसाबाद में 26 वर्षीय महिला डॉक्टर प्रीति (बदला हुआ नाम) रेड्डी की जली हुई लाश मिली। पुलिस ने जाँच की और अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। प्रीति के पोस्टमॉर्टम में पता चला है कि उनके साथ बलात्कार ही नहीं हुआ बल्कि उन्हें गला दबाकर हत्या करने के पहले बुरी तरह टॉर्चर भी किया गया था। और इसके बाद उनकी लाश को जला दिया गया था। इस जघन्य अपराध के मुख्य आरोपित का नाम मो. पाशा है जबकि बाकि तीन हैं – मरवीन, केशवा और रिवा (सभी नाम बदले हुए, क्योंकि इनमें से कोई एक नाबालिग होने की संभावना है)।

पाकिस्तानी चैनल पर सिखों का उड़ाया मजाक, दिखाया जोकर: सोशल मीडिया पर गुस्सा और थू-थू

करतारपुर साहिब कॉरिडोर को औपचारिक रूप से भारत और पाकिस्तान द्वारा खोले जाने के बाद, एक पाकिस्तानी चैनल ने सिखों का अपमान करके विवाद पैदा कर दिया है। जियो न्यूज उर्दू के एक व्यंग्यात्मक कार्यक्रम (स्किट) में करतारपुर कॉरिडोर के उद्घाटन का जश्न मनाते दिखाया गया। लेकिन, उन्हें इस तरह से दिखाया गया जैसे वो सिख समुदाय के लोगों और सिख धर्म का अपमान कर रहे हों।

चैनल पर कार्यक्रम की शुरुआत में सिख समुदाय की वेशभूषा में लोग अभिनय करते दिखे। इसमें कई पुरुष और महिलाएँ भी शामिल थीं। बता दें कि इसमें अभिनय करने वाले एक शख़्स को नवजोत सिंह सिद्धू की नकल करते भी देखा गया। चैनल ने इस कार्यक्रम को इस तरह से दिखाया कि जैसे उसमें सिख लोग किसी जोकर के सेट पर हों और भांगड़ा कर रहे हों। लाल पगड़ी पहनने वाले नकली सिखों में से एक को सनकी व्यक्ति के रूप में प्रस्तुत किया गया, जो महिला एंकर के साथ छेड़खानी करने का प्रयास करता है और उसे गले लगाने की भी कोशिश करता है। कार्यक्रम सिखों का एक कैरिकेचर प्रस्तुत करता है, जो समुदाय के लिए अपमानजनक है।

इस कार्यक्रम की निंदा करते हुए राजिंदर पुरी नाम के एक व्यक्ति ने लिखा, “सिख समुदाय को जोकर के रूप में पेश करने की कोशिश मत करो। विदेशों में रहने वाले सभी सिख इस वीडियो को पसंद नहीं कर रहे।” इसके अलावा, तरणजीत वालिया ने कहा, “हम गुरुद्वारों में या उसके आसपास भांगड़ा नहीं करते।”

दिल्ली से अकाली दल के विधायक मनजिंदर एस सिरसा ने इस वीडियो पर आपत्ति जताते हुए कहा कि पाकिस्तान में सिख विरोधी प्रचार जारी है। उन्होंने कहा कि यह स्किट सिखों को कार्टून के रूप में दिखाता है, जो सिखों की भावनाओं को बहुत आहत करता है। उन्होंने पाकिस्तान के पीएम इमरान ख़ान से इस तरह की स्किट को न दिखाने का आदेश दिया और ऐसे एजेंडा-सेटरों के ख़िलाफ़ कार्रवाई करने का आग्रह किया।

करतारपुर कॉरिडोर का उद्घाटन करते इमरान ने पूछा- हमारा सिद्धू किधर है, मनमोहन आ गया?

मेरे दोस्त इमरान ने करतारपुर कॉरिडोर में ‘अल्लाह का काम’ किया है: सिद्धू

‘1971 में यहाँ भारत ने गिराया था बम’ – करतारपुर में बोर्ड लगाकर पाकिस्तान भड़का रहा सिख भावना

9 भारतीय, 1 नाव, 10 दिन में 3000 किमी का समुद्री सफर : घर लौटे यमन में बंधक बने भारतीय मछुआरे

यमन में बंधक बने नौ भारतीय मछुआरे आखिरकार सुरक्षित देश लौटने में कामयाब रहे। कोच्चि तट पहुॅंचते ही उन्होंने घुटनों के बल बैठकर जमीन को चूमा। देश की सीमा में दाखिल होते वक्त उनकी नाव में 500 लीटर ईंधन और आधी बोरी प्याज़ बचा था। इनमें से दो मछुआरे केरल से और सात तमिलनाडु से हैं।

ये मछुआरे बीते साल भर से यमन में बंधक बने थे। इनसे ज़रूरत से ज़्यादा काम कराया जाता था और मारा-पीटा जाता था। इन मछुआरों ने किसी तरह अपने मालिक की नाव चुरा ली और 10 दिनों में 3000 किलोमीटर लंबा समुद्री सफर तय कर भारत पहुँचने में कामयाब रहे। कोच्चि तट से लगभग 75 नॉटिकल मील (138.9 किमी) की दूरी पर भारतीय कोस्ट गार्ड के जवान अल थिराया बोट में सवार हुए थे। यह बोट शुक्रवार दोपहर 1:15 बजे कोच्चि तट पर पहुॅंची। इस बोट के बारे में कोस्ट गार्ड के डॉर्नियर एयरक्राफ्ट को जानकारी मिली थी।

ख़बर के अनुसार, 13 दिसंबर, 2018 को इन मछुआरों ने तिरुवनंतपुरम का तट छोड़ा था। उन्हें एक यमन एंप्लॉयर ने नौकरी का झाँसा देकर क़ैद कर लिया। 10 महीने तक क़ैद में वो उन्हें नाव में ही रखता था और काम करवाता था। इसके बदले में उन्हें खाने के अलावा कुछ नहीं मिलता था।

मछुआरों में से एक, तिरुनेलवेली ज़िले के सहाय रविकुमार ने अधिकारियों को बताया,  “हमें गल्फ में ले जाया गया और एक स्पॉन्सर द्वारा हमें ओमान में नौकरी देने का वादा किया गया, जिसे हम मछली पकड़ने की नौकरियों दिलाने वाले शख़्स के तौर पर पहले से जानते थे। लेकिन हमें यमन में ही रखा गया। हम में से पाँच 13 दिसंबर, 2018 को तिरुवनंतपुरम से रवाना हुए और हमें शारजाह ले जाया गया। ओमान जाने के बहाने यमन ले जाने से पहले हम एक महीने तक अजमान में एक नाव पर रुके रहे। अन्य लोग सलाला पहुँचने के बाद सड़क के माध्यम से यमन आए।”

पुलिस ने बताया कि इन मछुआरों को इमिग्रेशन की औपचारिकताएँ पूरी करने के बाद ही परिजनों को सौंपा जाएगा। एक तटीय पुलिस अधिकारी ने बताया, “उन्होंने फोन पर अपने परिवारों से बात की और रात का भोजन किया।”

सभी नौ मछुआरों ने सावधानीपूर्वक भागने की योजना बनाई थी, उन्होंने ईंधन और भोजन का स्टॉक पहले से ही कर लिया था। इनमें जो तमिलनाडु के मछुआरे हैं, उनमें जे विंस्टन (47), एस अल्बर्ट न्यूटन (35), ए एस्सलिन (29), पी अमल विवेक (33), जे शजन (24) और एस सह्या जगन (28) कन्याकुमारी ज़िले के हैं और  पी सहाय रवि कुमार तिरुनेलवेली ज़िले के हैं। केरल के दो मछुआरे नौशाद (41) और निज़ार (44) हैं, जो कोल्लम से हैं।

मछुआरों के अनुसार, उनका एकमात्र उद्देश्य अपने परिवारों के लिए कुछ धन इकट्ठा करना था, लेकिन वो जाल में फँस गए और उनका यह उद्देश्य एक दुःस्वप्न में बदल गया। उनका बचना किसी भी तरह से सुगम नहीं था, वो लोग अक्सर तड़के समुद्र और ख़राब मौसम का सामना करते थे। विवेक नाम के मछुआरे ने कहा, “सोमालिया के पास समुद्र में कोच्चि की हमारी यात्रा इतनी उबड़-खाबड़ थी कि हमने नावों के ज़रिए बहुत अधिक ईंधन का इस्तेमाल किया। जो हमें ज़मीन की ओर खींच रही थी। इसके लिए हमने ईंधन बचाने के लिए एक सीमित गति बनाए रखी।”

लक्षदीप के पास अल थरिया में सवार एक तटरक्षक अधिकारी ने टाइम्स ऑफ़ इंडिया को बताया कि सभी मछुआरों के पास पासपोर्ट थे। उन्होंने योजनाबद्ध तरीक़े से वापस लौटने पर काम किया। उनके पास भारत पहुँचने के लिए लगभग 7,000 लीटर ईंधन था, लेकिन जब वो लक्षद्वीप के पास पहुँचे तो उनके पास मुश्किल से 500 लीटर ईंधन बचा था।

संभल की नाबालिग ‘प्रीति’ ने तोड़ा दम, रेप के बाद ज़ीशान ने केरोसिन डाल लगा दी थी आग

अभी हैदराबाद में प्रीति रेड्डी (बदला हुआ नाम) के बलात्कार और नृशंस हत्या की ख़बर पर लोगों का आक्रोश कम नहीं हुआ था कि उत्तर प्रदेश से एक और दर्दनाक घटना की सूचना मिली। संभल में नाबालिग लड़की का रेप करने के बाद उसे ज़िंदा जला दिया गया था। शनिवार (नवंबर 30, 2019) की सुबह अस्पताल में इलाज के दौरान पीड़िता की मौत हो गई। पीड़िता 9 दिन तक ज़िंदगी और मौत के बीच जूझती रही। उसे 22 नवंबर को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों ने बताया कि उसके शरीर का 85% से भी अधिक हिस्सा जल चुका था। पीड़िता कई दिनों से वेंटिलेटर पर थी।

ये घटना नखासा थाना क्षेत्र के सिरसी इलाक़े की है। नाबालिग लड़की जब अपने घर में अकेली थी, तब पड़ोस के ही एक युवक ने उसका बलात्कार किया। उसे जबरन घर से खींच कर उसका रेप किया गया था। जब ये घटना हुई, तब किशोरी की माँ दवा लेने बाहर गई हुई थीं। पीड़िता ने इसकी जानकारी अपनी माँ को दी। मामला पुलिस तक पहुँचा तो उस युवक ने माँ-बेटी को धमकाया। इसके बाद उसने पीड़िता पर केरोसिन तेल डाल कर उसके शरीर में आग लगा दी। आनन-फानन में पीड़िता को दिल्ली के सफदरगंज अस्पताल लाया गया, जहाँ 9 दिनों तक ज़िंदगी और मौत से जूझने के बाद पीड़िता की मृत्यु हो गई।

आरोपित जीशान को पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया था। उसे कोर्ट में पेश करने के बाद जेल भेजा जा चुका है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस घटना का संज्ञान लिया था। उनके कार्यालय ने इस मामले में तत्काल प्रभाव से कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। आईजी ने घटनास्थल पर पहुँच कर पीड़ित परिजनों और आसपास के लोगों से मिल कर इस घटना के बारे में जानकारी ली। जीशान के ख़िलाफ़ एनएसए एक्ट के तहत मामला दर्ज किया गया था। आईजी ने संभल सर्किट हाउस में पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक कर कार्रवाई की समीक्षा की थी।

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लोग पीड़िता की मौत के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर आक्रोशित हो गए। बलात्कार की लगातार बढ़ती घटनाओं के कारण बॉलीवुड के कई सेलेब्रिटीज ने भी आक्रोश जताया है। लोग बलात्कारियों को बीच चौराहे पर फाँसी देने की माँग कर रहे हैं।

‘प्रीति’ रेड्डी केस: बार काउंसिल ने कहा- विशेष अदालत का गठन करे सरकार, आरोपितों की पैरवी न करें वकील

तेलंगाना में पशु चिकित्सक डॉ. प्रीति (बदला हुआ नाम) रेड्डी के सामूहिक बलात्कार और हत्या के आरोपितों को अदालत में अपनी तरफ़ से खड़ा होने के लिए वकील तलाशने में भी मुश्किलें खड़ी हो सकती है। हैदराबाद के जिस जिले में यह घटना हुई है, वहाँ की बार काउंसिल ने नोटिस जारी कर यह अपील की है कि उसका कोई भी सदस्य आरोपितों की पैरवी अदालत में नहीं करे।

आज (शनिवार, 30 नवंबर, 2019 को) जारी नोटिस में कहा गया, “रंगा रेड्डी जिला अदालत की बार काउंसिल की कार्यकारी समिति (एग्जीक्यूटिव कमेटी) 27 नवंबर, 2019 को तोंडापल्ली टोल प्लाज़ा पर की गई नृशंस हत्या की निंदा करती है। कमेटी अपने सदस्यों से गुज़ारिश करती है कि वे इस मामले के आरोपितों की पैरवी में हाज़िर न हों।” नोटिस में आगे यह भी कहा गया है कि एग्जीक्यूटिव कमेटी त्वरित न्याय के लिए केस की तेजी से सुनवाई हेतु एक अलग विशेष अदालत का गठन करने की तेलंगाना राज्य सरकार से माँग करती है। नोटिस में समिति ने यह भी कहा है कि बार काउंसिल परसों (सोमवार, 2 दिसंबर, 2019 को) इस ‘अमानवीय हमले’ के खिलाफ विरोध प्रदर्शन का आयोजन करेगी। इसका आयोजन अदालत के मुख्य भवन के प्रवेश पर 2 दिसंबर, 2019 को दोपहर 1.30 बजे किया जाएगा।

रंगा रेड्डी जिला बार काउंसिल इकलौती अदालती संस्था नहीं है, जिसने इस हत्याकांड से क्षुब्ध होकर इसके आरोपितों की सहायता से इनकार किया है। इसके पहले महबूबनगर बार काउंसिल ने भी आरोपितों को न्यायिक सेवाएँ देने से इनकार कर दिया था। उस समय राज्य सरकार ने महबूबनगर के फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में मामले की सुनवाई कराने का निर्णय लिया था। यही नहीं, स्थानीय अदालत की शादनगर बार एसोसिएशन ने भी चारों आरोपितों को किसी तरह की कानूनी सहायता देने से इनकार कर दिया था।

गौरतलब है कि हैदराबाद के बाहरी इलाके शमसाबाद में 26 वर्षीय महिला डॉक्टर की जली हुई लाश मिलने से पूरे इलाके में सनसनी फैल गई थी। जानकारी के अनुसार, पशु चिकित्सक डॉ. प्रीति (बदला हुआ नाम) रेड्डी कोल्लुरु स्थित पशु चिकित्सालय में काम करती थीं। बुधवार (नवंबर 27, 2019) को उन्होंने अपनी स्कूटी को शादनगर के टोल प्लाजा शमसाबाद के पास पार्क किया था। लेकिन रात में जब वह वहाँ वापस लौटीं तो उनकी स्कूटी पंक्चर थी। उन्होंने इसकी सूचना अपनी बहन को दी और कहा कि उन्हें डर लग रहा है, क्योंकि उनके आसपास सिर्फ लोडिंग ट्रक और अनजान लोग हैं।

प्रियंका को डरा हुआ देखकर उनकी बहन ने उन्हें स्कूटी पार्क करके कैब से आने की सलाह दी। लेकिन प्रियंका ने उन्हें बताया कि कुछ लोगों ने उन्हें मदद की पेशकश की है, इसलिए वो थोड़ी देर में कॉल बैक करेंगी।

इस वाकये के बाद प्रियंका का कोई फोन नहीं आया, जब परिजनों ने उनसे कुछ मिनट बाद संपर्क करने का प्रयास किया तो उनका फोन स्विच ऑफ हो गया। परेशान परिवार वाले खुद प्रियंका को ढूँढने के लिए टोल प्लाजा की ओर निकले। जब वह नहीं मिलीं तो उन्होंने थक हारकर पुलिस में शिकायत दर्ज करवाई।

शिकायत मिलने के बाद गुरुवार (नवंबर 28, 2019) की सुबह पुलिस को हैदराबाद-बेंगलुरु हाईवे के पास एक महिला का अधजला शव दिखाई पड़ने की जानकारी मिली। जब घटनास्थल पर पहुँची पुलिस ने रिपोर्ट के आधार पर प्रियंका के घरवालों को संपर्क किया तो उन्होंने उसके कपड़े और गले का लॉकेट देखकर पुष्टि कर दी कि वो जली हुई लाश प्रियंका की ही है। बाद में पोस्टमॉर्टम में उनसे बलात्कार की भी पुष्टि हो गई

एक और प्रियंका! आधी जली स्थिति में उसी इलाके में मिली एक और लाश, जाँच जारी

मो. पाशा ने पहले से ही प्लानिंग करके किया डॉ. प्रियंका का रेप और मर्डर, जलाई लाश: पुलिस का दावा

‘डॉ प्रियंका रेड्डी पढ़ी-लिखी थी, उसने अपनी बहन को क्यों किया फोन, पुलिस को क्यों नहीं’ – मंत्री महमूद अली

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कॉन्ग्रेस की पंखुड़ी पाठक से ब्याह रचाने को मुझसे लिया जबरन तलाक: SP नेता अनिल यादव की पत्नी रही ज्योति

कॉन्ग्रेस की मीडिया पैनलिस्ट पंखुड़ी पाठक समाजवादी पार्टी के पूर्व प्रवक्ता अनिल यादव से शादी रचाने जा रही हैं। दोनों की शादी एक दिसंबर को होने वाली है। पंखुड़ी भी पहले सपा में ही थीं।

इस बीच, अनिल यादव पर उनकी पूर्व पत्नी ज्योति यादव ने गंभीर आरोप लगाए हैं। ज्योति का कहना है कि उनसे अनिल यादव ने जबरन तलाक लिया। उनके बेटे को जान से मारने की धमकी देकर उनसे कागजों पर हस्ताक्षर कराए। ज्योति के मुताबिक अनिल के छोटे भाई ने उनके बेटे की हत्या की धमकी देने उनसे कई बार शारीरिक संबंध भी बनाए।

साथ ही ज्योति यादव ने देवर कपिल यादव और ससुर सुरेश यादव पर एक साल तक कमरे में बंद रखने का भी आरोप लगाया है। ज्योति यादव ने कहा कि 2018 में जबरन कड़कड़डूमा कोर्ट में आपसी समझौते से तलाक के कागजात पर साइन कराए गए और तलाक होने की पूरी प्रक्रिया के दौरान उन्हें बंधक बनाकर रखा गया। इसके बाद मायके भेज दिया गया।

अनिल यादव की पूर्व पत्नी ने आरोप लगाया है कि पंखुड़ी पाठक शादी के लिए अनिल यादव की ब्लैकमेल कर रही थीं। ज्योति ने कहा कि अनिल यादव ने उन्हें बताया था कि वह पंखुड़ी पाठक के साथ विदेश घूमने गए थे। इस यात्रा के दौरान पंखुड़ी पाठक ने उनके साथ एक वीडियो बना ली है। इसकी वजह से वे फँस गए हैं और अब उन्हें उनसे (ज्योति यादव) छुटकारा चाहिए ताकि वे पंखुरी से शादी कर सके।

सपा नेता अनिल यादव ने पत्नी के आरोपों काे बुनियाद बताते हुए कहा कि यह सिर्फ प्रॉपर्टी हथियाने के लिए किया जा रहा है। उनका कहना है कि आपसी सहमति से दोनों का तलाक हुआ था। तीन वर्ष से वह पत्नी से अलग रह रहे हैं। अनिल यादव का कहना है कि उन्हें बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। इसके लिए वो कानूनी कार्रवाई करेंगे। उनका आरोप है कि उनकी पूर्व पत्नी उनके राजनीतिक विरोधियों के बहकावे में आकर उनकी छवि धूमिल करने की उद्देश्य से उनके खिलाफ दुष्प्रचार कर रही हैं।