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जब JCB को पकड़ महिला सरपंच ने किया ‘स्टंट’, देखने वाले हुए हैरान, Video वायरल

राजस्थान के जालोर जिले के मांडवला गाँव से महिला सरपंच रेखा देवी की एक वीडियो वायरल हुई है। वीडियो में देखा जा सकता है कि महिला सरपंच जेसीबी को पकड़कर उसपर लटक रही हैं और आसपास मौजूद लोग उन्हें उतारने का प्रयास कर रहे हैं।

हालाँकि, सोशल मीडिया पर जहाँ इस वीडियो को देखने के बाद लोग रेखा देवी का तरह-तरह से मजाक उड़ा रहे हैं। तो वहीं, मीडिया रिपोर्ट्स में इसे रेखा देवी पर हुआ हमला बताया जा रहा है।

जानकारी के अनुसार ये पूरा मामला सरकारी जमीन पर हुए अतिक्रमण से संबंधित था और रेखा देवी इसी समस्या के समाधान के लिए मौक़े पर जेसीबी लेकर पहुँची थीं। लेकिन इसी बीच अतिक्रमी के पक्ष की ओर से एक अन्य जेसीबी वहाँ आई और सरपंच की गाड़ी को तोड़ने का प्रयास किया। जब रेखा देवी बीच में आईं तो उसने उनपर भी हमला बोल दिया।

कहा जा रहा है कि जिस समय दूसरे पक्ष की जेसीबी ने महिला सरपंच की गाड़ी पर हमला किया, उस समय 2 वार्ड पंच उसमें बैठीं हुईं थी। जेसीबी लगातार 2-3 बार उनकी गाड़ी में टक्कर मार चुकी थी। जिस कारण उनकी गाड़ी बार-बार पलटने से बची थी।

इसी बात से नाराज सरपंच दौड़कर अपनी गाड़ी के आगे आकर खड़ी हुईं और दूसरे पक्ष का विरोध किया। जिसके बाद जेसीबी ने उनपर भी हमला कर दिया और वे भी उसपर लटक गईं। जेसीबी चालक ने 2-3 बार उन्हें पटकने का प्रयास किया लेकिन वह जेसीबी के पंजे को कसके पकड़ी रहीं। थोड़ी देर बाद गाँव वालों ने सहारा देकर उन्हें जेसीबी से नीचे उतारा। तभी आरोपित अपनी जेसीबी लेकर फरार हो गया।

बता दें इस मामले में एक दूसरा पक्ष ये भी दिखाया जा रहा है कि सरपंच खुद ही अतिक्रमण हटाने आए दस्ते से झगड़ने लगीं थी। इसलिए ये सब हुआ। लेकिन न्यूज 18 की रिपोर्ट के अनुसार सरपंच ने इस पक्ष का खंडन किया है और जालोर डीएसपी जयदेव सियाग ने कहा है कि उन्हें महिला सरपंच की ओर से शिकायत मिली है। जिसके बाद उन्होंने फरार आरोपित की तलाश शुरु कर दी है।

कमलेश तिवारी की पत्नी को जान से मारने की धमकी, बंद लिफाफे में भेजा उर्दू में लिखा पत्र

हिंदू समाज पार्टी के अध्यक्ष कमलेश तिवारी की नृशंस हत्या के बाद उनकी पत्नी किरण तिवारी को मारने की साजिश रची जा रही है। उनका आरोप है कि बीते सप्ताह उन्हें पत्र भेजकर जान से मारने की धमकी दी गई।

किरण तिवारी ने नाका थाने में महाराष्ट्र के लातूर निवासी गणेश नागो राव आप्टे के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि 16 नवंबर की  शाम 4 बजे खुर्शेदबाग स्थित घर के पते पर एक बंद लिफाफा भेजा गया था। इसे खोलने पर उसके भीतर से नौ पन्ने का एक पत्र निकला। दो पन्ने में उर्दू भाषा में कुछ लिखा हुआ था। किरण का कहना है कि उन्होंने उर्दू के पन्नों में लिखी बातों का हिंदी में अनुवाद कराया तो धमकी की बात सामने आई। किरण तिवारी ने 18 नवंबर को एफआईआर दर्ज कराया। इसके साथ ही उन्होंने अपनी सुरक्षा के लिए सरकार से जेड प्लस कवर की भी माँग की है।

पत्र महाराष्ट्र के लातूर के मुडखेड ताल्लुका स्थित शिवाजी चौक अंबेडकरनगर निवासी गनेश नागो राव आप्टे के नाम से भेजा गया था। इंस्पेक्टर ने बताया कि महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क कर पत्र भेजने वाले के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। अब मामले में लखनऊ पुलिस महाराष्ट्र पुलिस से संपर्क कर रही है। 

गौरतलब है कि 18 अक्टूबर को हिन्दूवादी नेता कमलेश तिवारी की हत्या कर दी गई थी। दिल्ली के खुर्शेदबाग इलाक़े में स्थित कमलेश तिवारी के घर में 2 लोग भगवा वस्त्रों में आए और उन्होंने उनकी हत्या कर दी। हत्यारे मिठाई के डब्बे में हथियार ले गए थे। दोनों हत्यारों की पहचान अशफ़ाक़ और मोईनुद्दीन के रूप में हुई।

पुलिस ने कमलेश तिवारी की हत्या मामले में सभी आरोपितों को गिरफ्तार कर लिया है। बता दें कि अशफ़ाक़ ने फ़र्ज़ी फेसबुक अकाउंट बना कर ख़ुद को हिंदूवादी दिखाया था और राम मंदिर के लिए भीड़ जुटाने का लालच देकर कमलेश तिवारी से मिलने का समय माँगा था।

महज़ डेढ़ मिनट के अंदर हत्या की इस वारदात को अंजाम देने वाले आरोपितों ने अपना ज़ुर्म क़बूलते हुए कहा कि वो लोग कमलेश तिवारी का सिर धड़ से अलग करना चाहते थे। इसके बाद सिर को हाथ में लेकर वीडियो बनाकर दहशत फैलाना चाहते थे। ऐसा करके वो लोगों को चेताना चाहते थे कि अब कोई धार्मिक विवादित टिप्पणी न करे।कमलेश तिवारी की हत्या के बाद उनकी पत्नी किरण तिवारी को हिन्दू समाज पार्टी का अध्यक्ष बनाया गया।

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जया प्रदा पर ‘खाकी अंडरवियर’ टिप्पणी के मामले में सपा के भू-माफिया आजम खान के खिलाफ वारंट

जया प्रदा के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने और आपत्तिजनक भाषण देने के मामले में कोर्ट ने समाजवादी पार्टी के सांसद आजम खान के खिलाफ जमानती वारंट जारी किया है। इस मामले में आजम खान को गुरुवार (नवंबर 21, 2019) को कोर्ट में पेश होना था लेकिन वह उपस्थित नहीं हुए। जिसके बाद एडीजी-6 की कोर्ट ने वारंट जारी किया। इस पर अगली सुनवाई 2 दिसंबर को होगी।

उल्लेखनीय है कि लोकसभा चुनाव के प्रचार के दौरान शाहबाद में आयोजित जनसभा में आजम खान ने भाजपा की प्रत्याशी और पूर्व सांसद जया प्रदा के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। आजम ने जया प्रदा की तरफ इशारा करते हुए कहा था, “उसकी असलियत समझने में आपको 17 साल लग गए। मैं तो 17 दिन में ही पहचान गया कि इनके नीचे का जो अंडरवियर है, वो भी खाकी रंग का है।“ यह टिप्पणी करते हुए आजम खान ये दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि जया प्रदा के संबंध आरएसएस से थे और जया ने जो उनके खिलाफ आरोप लगाए थे, वो भी आरएसएस की साज़िश थी।

आजम ने जब यह शर्मनाक टिप्पणी की थी, उस समय सपा प्रमुख अखिलेश यादव भी मंच पर मौजूद थे। अखिलेश यादव ने आज़म के इस महिला-विरोधी बयान पर उनका बचाव करते हुए कहा था, “आजम खान के बयान को गलत परिपेक्ष्य में पेश किया गया। उन्होंने ऐसा किसी और के लिए कहा था। संघ के कपड़ों को लेकर दिया गया उनका बयान किसी और के लिए था। मीडिया इस मामले में गलती कर रही है, कुछ और ही दिखाया जा रहा है।”

आजम खान की इस अभद्र टिप्पणी के साथ साथ उन पर आचार संहिता उल्लंघन का मुकदमा भी शाहबाद कोतवाली दर्ज किया गया था। पुलिस ने विवेचना के बाद इस मामले में चार्जशीट लगा थी। इस मामले की सुनवाई एडीजे-6 की कोर्ट में चल रही है। अदालत में 13 नवम्बर को इस मामले की सुनवाई होनी थी। लेकिन आजम नहीं पहुॅंचे। जिसके बाद रामपुर की जिला अदालत ने आजम खान के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया है। इस मामले की सुनवाई की अगली तारीख 26 नवम्बर तय की गई है।

इसके अलावा सेना पर विवादित बयान देने के मामले में पुलिस की चार्जशीट पर आजम खान के वकील ने आपत्ति जताई है। इस मामले में अगली सुनवाई 3 दिसंबर को होनी है। आजम के बयान पर एक साल पहले बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। 

इससे पहले आजम खान के बेटे अब्दुल्ला आजम के जन्म प्रमाण पत्र मामले में आजम, उनकी पत्नी और बेटे के खिलाफ रामपुर कोर्ट से गैर जमानती वारंट जारी हुआ था। यह मुकदमा भी बीजेपी नेता आकाश सक्सेना ने आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के तहत आजम खान और उनके परिवार के खिलाफ दर्ज करवाया था।

इमरान ख़ान को लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड, सिख चरमपंथ और खालिस्तानी समर्थकों का आयोजन

गुरु नानक देव की 550वीं जयंती के दौरान दो प्रमुख अलगाववादी ब्रिटिश सिख संगठनों ने लंदन के सिटी हॉल में करतारपुर गलियारे के लिए पाकिस्तानी प्रधानमंत्री इमरान ख़ान को ‘लाइफटाइम अचीवमेंट’ पुरस्कार से सम्मानित किया। द पीएम फॉर यूके एंड यूरोप में पाकिस्तान के पीएम फॉर ट्रेड एंड इन्वेस्टमेंट के प्रवक्ता साहिबज़ादा जहाँगीर ने गुरुवार (21 नवंबर) को इमरान ख़ान की ओर से यह पुरस्कार प्राप्त किया।

सिटी हॉल में कार्यक्रम का आयोजन सिख नेटवर्क, सिख फेडरेशन (यूके) और लंदन के मेयर सादिक ख़ान के सहयोग से लंदन विधानसभा के सदस्य डॉ ओंकार सहोता ने किया था। सिख फेडरेशन (यूके) को खालिस्तान का समर्थक कहा जाता है। इस कार्यक्रम में लेबर पार्टी की नेता प्रीत कौर गिल, डिप्टी मेयर डेबी वीकस-बर्नार्ड, सतपाल सिंह, जस सिंह, कैनन मार्क पॉल्सन और सिख समुदाय के लोग शामिल हुए।

साहिबज़ादा जहाँगीर ने पुरस्कार के लिए सिख समुदाय के प्रति आभार व्यक्त किया और कहा कि करतारपुर गलियारा पाकिस्तान से शांति का संदेश है। इसके अलावा उन्होंने कहा, “करतारपुर कॉरिडोर ने सिखों के विचारों को संस्कृतियों और देशों के बीच एक पुल के रूप में सुदृढ़ किया।”

उन्होंने कहा कि यह इमरान ख़ान की सरकार के लिए गर्व की बात है कि करतारपुर कॉरिडोर का “अद्भुत कार्य” आठ महीनों की सबसे कम संभव अवधि में पूरा हुआ और यह सब इमरान ख़ान के प्यार, शांति और मानवता के लिए जुनून के कारण संभव हो सका।

ग़ौर करने वाली बात यह है कि सिख फेडरेशन यूके की जड़ें सिख चरमपंथ और खालिस्तान आंदोलन से जुड़ी हुई हैं। इसके अधिकांश वरिष्ठ सदस्य अंतरराष्ट्रीय सिख यूथ फेडरेशन (ISYF) के पूर्व सदस्य हैं, जिन्हें आतंकवाद विरोधी क़ानूनों के तहत ब्रिटेन में प्रतिबंधित कर दिया गया था। ISYF की स्थापना भिंडरवाले के भतीजे जसबीर सिंह रोडे ने की थी।

सिख नेटवर्क, दबिंदरजीत सिंह सिद्धू द्वारा स्थापित एक अन्य ब्रिटिश सिख समूह है, जो ब्रिटेन से मान्यता और समर्थन प्राप्त करने और क्षेत्रीय अखंडता के लिए भारत के अधिकार को हटाने के लिए सूचीबद्ध है। इसका प्रमुख एजेंडा भारत-विरोधी राजनीति को समर्थन देना है।

जबरन धर्मांतरण पर 7 साल तक की सज़ा, घर-वापसी अपराध नहीं: एक्शन में योगी सरकार

जबरन धर्मांतरण के ख़िलाफ़ योगी सरकार सख्त हो उठी है। उत्तर प्रदेश सरकार इसके ख़िलाफ़ कड़ा क़ानून लाने की योजना तैयार कर रही है, जिसके अंतर्गत 7 साल तक की सज़ा का प्रावधान किया गया है। यहाँ तक कि शादी के बाद किसी का धर्मान्तरण कराए जाने के बाद भी कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इस सम्बन्ध में विधि आयोग ने 208 पन्ने की रिपोर्ट सौंपी है, जिसे कई पड़ोसी देशों के क़ानून का अध्ययन करने के बाद तैयार किया गया है। हालाँकि, वापस पुराने धर्म में लौट आना, यानी ‘घर वापसी’ अपराध नहीं होगा। विधि आयोग की इस सिफारिश का अध्ययन कर सरकार क़ानून बनाएगी।

विधि आयोग ने अपनी सिफ़ारिश में कहा है कि अगर शादी के मामले में किसी भी पक्ष पर जबरन धर्मांतरण के दबाव बनाया जाता है तो उस शादी को रद्द कर दिया जाएगा। आयोग की सेक्रटरी सपना त्रिपाठी ने कहा कि अब सरकार के ऊपर है कि वो इस ड्राफ्ट के किन हिस्सों को क़ानून का रूप देगी। राज्य विधि आयोग के अध्यक्ष जस्टिस आदित्यनाथ मित्तल ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई रिपोर्ट में लिखा:

“कतिपय संगठन हिन्दुओं, विशेषकर अनुसूचित जनजाति के लोगों को प्रलोभन देकर अपने निहित स्वार्थ के लिए धर्मान्तरण कराते हैं। वो भारत की सदियों पुरानी सभ्यता धारा को भुलाने की सीख देते हैं। ये संगठन लोगों को धार्मिक परम्पराओं व पूजा पद्धतियों का अपमान करने की सीख दे रहे हैं। वो अपने मजहब को सर्वोच्च दिखा कर दर्शाने का कुत्सित प्रयास कर रहे हैं।”

सपना त्रिपाठी ने बताया कि भारत के 10 राज्यों में धर्मान्तरण विरोधी क़ानून हैं और 2014 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने स्वयं इस मुद्दे को उठाया था। उन्होंने बताया कि अभी धर्मान्तरण को लेकर सटीक आँकड़े उपलब्ध नहीं हैं लेकिन मुख्यमंत्री को विधि आयोग ने अपनी बात को सही साबित करने के लिए पिछले 6 महीने की काफ़ी सारी न्यूज़ क्लिप्स सौंपी है। इन क्लिप्स में धर्मान्तरण से जुड़ी ख़बरें हैं। इस ड्राफ्ट में एक से पाँच साल तक की सज़ा का प्रावधान है। अगर पीड़ित एससी-एसटी है या नाबालिग है तो सज़ा की अवधि को दो वर्ष और बढ़ाया जा सकता है।

ड्राफ्ट में प्रस्तावित किया गया है कि धर्मान्तरण से पहले अब स्थानीय मजिस्ट्रेट की अनुमति लेनी होगी। इसके लिए डीएम या फिर एसडीएम से लिखित में अनुमति माँगनी होगी। अनुमति के लिए 1 महीने पहले आवेदन करना पड़ेगा। प्रशासन पूरी जाँच करने के बाद ही धर्मान्तरण की अनुमति देगा। लिखित आवेदन में यह बताना होगा कि धर्मान्तरण का कारण क्या है और क्यों किया जा रहा है?

पूर्व कॉन्ग्रेसी मुख्यमंत्री के आवास पर CBI की छापेमारी, ₹332 करोड़ के घोटाले का आरोप

केंद्रीय जाँच ब्यूरो (CBI) ने शुक्रवार (22 नवंबर) की सुबह राज्य के इंफाल और थौबल में मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के आधिकारिक और निजी आवासों पर एक साथ छापे मारे।

CBI ने मणिपुर सरकार के अनुरोध पर पूर्व मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह और मणिपुर डेवलपमेंट सोसाइटी (MDS) के तत्कालीन अध्यक्ष वाई निंग्थम सिंह, रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं MDS के पूर्व परियोजना निदेशक डी एस पूनिया, रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं MDS के तत्कालीन अध्यक्ष पीसी लॉमुकंगा, रिटायर्ड IAS अधिकारी एवं MDS के तत्कालीन अध्यक्ष ओ. नबाकिशोर सिंह, MDS के प्रशासनिक अधिकारी एवं तत्कालीन अध्यक्ष एस रंजीत सिंह और अन्य के ख़िलाफ़ मामला दर्ज किया है।

ख़बर के अनुसार, इन सभी पर यह आरोप लगाया गया कि 30 जून 2009 से 06 जुलाई 2017 तक मणिपुर डेवलपमेंट सोसाइटी के अध्यक्ष के रूप में काम करते हुए अभियुक्तों ने अन्य लोगों के साथ षड्यंत्र रचते हुए सरकारी धन क़रीब 518 करोड़ रुपए की कुल राशि में से लगभग 332 करोड़ रुपए का गबन किया है। यह रकम इन्हें विकास कार्य पूरे कराने के लिए दी गई थी।

बता दें कि बाबूपारा में कॉन्ग्रेस विधायक के आधिकारिक आवास और थौबल अथोकपम माचा लईकाई में CBI के ठिकानों पर छापेमारी सुबह करीब 7.30 बजे शुरू हुई थी। पिछले विधानसभा चुनावों से पहले, भाजपा, जो अब राज्य के सत्तारूढ़ गठबंधन का नेतृत्व करती है, उसने घोटाले की जाँच कराने का वादा किया था।

CBI की इस छापेमारी पर कॉन्ग्रेस ने तीखी प्रतिक्रिया दर्ज की। पार्टी के मणिपुर के प्रवक्ता निंगोबम बूपेंडा मेइती ने बताया कि CBI ने मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री श्री ओकराम इबोबी सिंह के इंफाल और मणिपुर के थाउबल के आधिकारिक और निजी आवासों पर छापा मारा, क्योंकि इससे पहले हमने नागरिकता (संशोधन) विधेयक, 2016 और नागा समझौते पर दिल्ली के जंतर-मंतर में मोदी सरकार के ख़िलाफ़ विरोध-प्रदर्शन किया था। इबोबी सिंह और कॉन्ग्रेस के विरोध को डराने के लिए यह छापेमारी स्पष्ट तौर पर एक राजनीतिक प्रतिशोध है।

उन्होंने कहा,

“हमारी लोकतांत्रिक आवाज़ को दबाने की कोई भी कार्रवाई सफल नहीं रहेगी क्योंकि हम मणिपुर के लोगों के साथ मणिपुर की रक्षा और सुरक्षा के लिए संघर्ष करते हैं।”

नवंबर 2006 में, मणिपुर के मुख्यमंत्री ओकराम इबोबी सिंह के निवास स्थान पर पीपुल्स रिवोल्यूशनरी पार्टी ऑफ़ कंगलिपक (PREPAK) द्वारा हमला किया गया था।

2 सितंबर 2008 को मणिपुर राज्य में विद्रोहियों ने सोते समय इंफाल के बाबूपारा में श्री इबोबी के आधिकारिक निवास पर हमला किया। हमले में एक सुरक्षाकर्मी घायल हो गया था, लेकिन सिंह स्वस्थ थे। PREPAK के एक सदस्य ने फोन के माध्यम से हमले की ज़िम्मेदारी ली थी, और संकेत दिया कि यह हमला सिंह को मणिपुर में उग्रवाद को विफल करने के लिए नीतियों को रोकने की चेतावनी के रूप में था।

सितंबर 2006 में, विकीलीक्स द्वारा जारी गोपनीय केबल में, हेनरी वी जार्डिन, प्रधान अधिकारी, अमेरिकी वाणिज्य दूतावास जनरल, कोलकाता ने मुख्यमंत्री को “मिस्टर टेन पर्सेंट” के रूप में संदर्भित किया गया जो सरकारी परियोजनाओं और कॉन्ट्रैक्ट का पैसा लेता है।

गो तस्करी के आरोप में बबलू मिलन और प्रकाश दास की लिंचिंग, पश्चिम बंगाल पुलिस कर रही जाँच

पश्चिम बंगाल के कूचबिहार में गो तस्करी करने के शक में भीड़ ने दो युवकों की हत्या कर दी। मृतकों की पहचान बबलू मिलन और प्रकाश दास के रूप में हुई। घटना पुतिमारी फुलेसवरी गाँव में घटी।

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार दोनों स्थानीय निवासियों को गाँव के लोगों ने गाड़ी में पशु भरकर ले जाते देखा। जिसके बाद उन्होंने उन्हें रोका और उनसे सवाल-जवाब किए। मगर जब, दोनों युवक ग्रामीणों को अपनी बात पर विश्वास नहीं दिलवा पाए तो वहाँ मौजूद लोगों ने उन्हें मारना शुरू कर दिया और उनकी गाड़ी में आग भी लगा दी। दोनों युवकों को इस दौरान इतना मारा गया कि अस्पताल में उनकी मौत हो गई।

हालाँकि, घटना की सूचना मिलने के बाद कोतवाली पुलिस थाने की पुलिस मौक़े पर पहुँची। उन्होंने गंभीर हालत में बबलू और प्रकाश को अस्पताल में भर्ती कराया, लेकिन चोटें इतनी गहरी थीं कि उन्हें बचाया नहीं जा सका। अब पुलिस इस मामले में आगे की जाँच कर रही है।

गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से देश में गो तस्करी की समस्या बहुत बढ़ी है और इन पर लगाम लगा पाना भी असंभव होता जा रहा है। अधिकतर भीड़ हत्या के केस इसी संबंध में आते हैं, लेकिन कुछ मीडिया गिरोह के लोग इसे मजहबी एंगल देकर पेश करने लगते हैं। पहलू खान की हत्या का मामला इसका सबसे बड़ा उदाहरण है।

राजस्थान के अलवर और भरतपुर के पास सीमावर्ती जिले सभी गो तस्करी के मामलों में एक तिहाई जिम्मेदार माने जाते हैं। जहाँ कुछ भ्रष्टाचारी अधिकारी और तस्करों की मदद से राज्य में लगातार इस अपराध को अंजाम दिया जाता हैं। इसी की तरह पश्चिम बंगाल में भी कई तादाद में पशुओं को बांग्लादेश की सीमा में भेजा जाता रहा है। लेकिन धीरे-धीरे अब सीमा पर तैनात बीएसएफ जवानों की सख्ती से इन आँकड़ों में कमी आई है। जिसका खुलासा खुद बांग्लादेशी मंत्री अशरफ अली ने एक बैठक में पिछले महीने किया। जहाँ उन्होंने बताया कि 4096 किमी के भारत-बांग्लादेशी बॉर्डर पर पशु तस्करी के आँकड़ों में 96% की कमी आई है।

केजरीवाल ने दी नई सौगात- पानी,सीवर कनेक्शन के लिए अब नहीं लगेंगे ₹1,14,000, देने होंगे सिर्फ ₹2310

दिल्ली में पानी की स्वच्छता को लेकर इन दिनों अरविंद केजरीवाल सवालों को घेरे में हैं। जिसके कारण उन्होंने केंद्रीय मंत्री रामविलास पासवान के ट्वीट के बाद पानी पर राजनीति न करने की बात दोहराई हैं। साथ ही, कबूल किया है कि राजधानी में अभी भी 125 जगहों पर गंदे पानी की समस्या है। उन्होंने इसके अलावा दिल्ली वालों को पानी और सीवर कनेक्शन पर बड़ी राहत देने का ऐलान किया है।

दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस करते हुए शुक्रवार को अरविंद केजरीवाल ने कहा, “आज दिल्ली जल बोर्ड ने बहुत महत्तवपूर्ण फैसले लिए हैं। जिससे पानी के सेक्टर में और सीवर के सेक्टर में बहुत बड़ी क्रांति आएगी।”

उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार बनी थी तब पानी और सीवर का कनेक्शन लेने के लिए 500 रुपए/मीटर के हिसाब से डेवलपमेंट चार्ज लिए जाते थे। लेकिन उन्होंने सत्ता संभालने के बाद इसे 100 रुपए किया। जिसके बाद भी सारा चार्ज बहुत ज्यादा बन रहा था। इसलिए उन्होंने तय किया है कि अब लोगों से डेवलपमेंट और इन्फ्रास्ट्रक्चर चार्ज नहीं लिए जाएँगे। इसके अलावा नए पानी और सीवर के कनेक्शन के लिए अब सिर्फ 2310 रुपए ही लगेंगे। पहले इसके लिए 1,14,000 रुपए तक खर्च करना पड़ता था। दिल्ली सीएम के अनुसार उनके इस कदम से लोग बड़े स्तर पर पानी और सीवर का कनेक्शन लेंगे, जिससे सब लोग नेटवर्क में आएँगे, नॉन रेवेन्यू वॉटर बहुत बड़े स्तर पर कम होगा और पूरा सिस्टम सुधरेगा।

इस प्रेस कॉन्फ्रेंस में पत्रकारों के सवालों का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि जब उनकी सरकार बनी थी तब दिल्ली में पानी की 58% लाइन थी, लेकिन अब 93% है। इसके बाद उन्होंने पानी पर राजनीति न करने की बात करते हुए कहा कि किसी को दिल्ली के पानी से सरोकार नहीं है, केवल दिल्ली के पानी को लेकर राजनीति हो रही है। उनका उद्देश्य केवल दिल्ली के लोगों को साफ पानी पहुँचाने का है। उनके अनुसार उनके सरकार संभालने से पहले 2300 से अधिक इलाकों में पीने के लिए गंदा पानी आता था। अब वह संख्या कम होकर 125 हो गई है। उन्होंने कहा है कि अगर दिल्ली में कहीं पर भी गंदा पानी दिखता है तो उन्हें बताया जाए, वे वहाँ उस समस्या का समाधान करेंगे।

मुख्यमंत्री केजरीवाल ने आगे सवालों का जवाब देते हुए कहा कि उनकी सरकार के कार्यकाल में कई इलाकों की पाइपलाइन बदली गई हैं। उन्होंने कहा, ‘संत नगर में 2018 में पानी की पाइपलाइन बदली। 2019 में बुराड़ी में पाइपलाइन बदली, महावीर विहार में सीवर के साथ पानी आता था, वहाँ भी पाइपलाइन बदली। 2018 में करावल नगर में पाइपलाइन बदली। ऐसे कई कॉलोनिया हैं जहाँ हमने पाइपलाइन बदली और अब स्वच्छ पानी आता है। जहाँ भी पानी की पाइपलाइन खराब है आप हमें सूचना दें दिल्ली सरकार पाइपलाइन बदल देगी।”

इसके बाद पानी पर राजनीति न करने की बात कहने वाले सीएम केजरीवाल ने खुद ही बिना किसी पूर्ववर्ती सरकार का नाम लिए उनपर निशाना साधा और कई इलाकों के नाम बताए जहाँ इस मामले में कार्य प्रगति पर है। उन्होंने कहा कि इस पर राजनीति बंद कर देते हैं। इसका डेटा वे दे देंगे कि उन्होंने कितनी पाइपलाइन बदली है।

JNU के छात्रों पर है ₹3 करोड़ का बकाया, फ़ीस बढ़ाने को लेकर चलाया जा रहा है झूठा अभियान

जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी शिक्षक संघ (JNUTA) ने गुरुवार (21 नवंबर) को मानव संसाधन विकास मंत्रालय द्वारा नियुक्त पैनल से मुलाक़ात की और विश्वविद्यालय के कुलपति को हटाने के अलावा बढ़ाए गए हॉस्टल शुल्क को वापस लेने माँग की। प्रदर्शनकारियों द्वारा अपने सहयोगियों पर कथित हमले के प्रति उनकी “उदासीनता” के कारण कुछ शिक्षकों ने इस समूह से ख़ुद को अलग कर लिया।

विश्वविद्यालय ने हॉस्टल शुल्क वृद्धि के पीछे तर्क देते हुए एक बयान जारी किया और कहा कि विश्वविद्यालय 45 करोड़ रुपए से अधिक घाटे में है, इसलिए शुल्क बढ़ाने के अलावा कोई दूसरा विकल्प नहीं है। साथ ही इस मामले पर आंदोलन कर रहे छात्रों पर झूठ फैलाने का आरोप भी लगाया।

जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय प्रशासन ने हॉस्टल में रह रहे छात्रों से लंबित मेस फ़ीस की एक सूची भी जारी की है, जो जुलाई से अक्टूबर तक 2.79 करोड़ रुपए से अधिक है। इसे JNUSU के उपाध्यक्ष साकेत मून ने “छात्रों को धमकी देने का प्रयास” करार दिया। 

विवाद को सुलझाने के लिए जारी बातचीत के बीच राष्ट्रीय स्वयं संघ (RSS) से संबद्ध अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने समिति को भंग करने की माँग को लेकर गुरुवार को शास्त्री भवन तक मार्च करने की कोशिश की, जहाँ पर मानव संसाधन विकास मंत्रालय है। ABVP से संबद्ध छात्रों को हालाँकि संसद मार्ग पर ही पुलिस ने रोक दिया और 160 लोगों को हिरासत में ले लिया। बाद में इन छात्रों को रिहा कर दिया गया।

वहीं, विश्वविद्यालय ने अपने बयान में कहा कि वो बिजली, पानी के बिल और निविदा कर्मियों के वेतन की वजह से घाटे में है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) ने छात्रावास में कार्यरत निविदा कर्मियों का वेतन बजट से देने की अनुमति नहीं देता। ऐसे कर्मियों की संख्या क़रीब 450 है। JNU ने कहा, “यूजीसी ने विश्वविद्यालय को साफ़ निर्देश दिया है कि ग़ैर वेतन खर्चे की व्यवस्था आंतरिक स्रोतों से की जाए। ऐसे में छात्रों से सुविधा शुल्क वसूलने के अलावा कोई विकल्प नहीं है।”

बयान में इस बात का भी उल्लेख किया गया कि संशोधित छात्रावास शुल्क के मुताबिक़ सामान्य वर्ग के छात्रों को क़रीब 4,500 रुपए महीने का भुगतान करना होगा। इसमें से 2,300 रुपए खाने का है। शेष 2,200 रुपए का 50 फ़ीसदी भुगतान गरीबी रेखा से नीचे के छात्रों को करना होगा। इस प्रकार गरीबी रेखा से नीचे के छात्रों को प्रति माह करीब 3,400 रुपए देना होगा। इस प्रकार छात्रावास शुल्क में कथित बेतहाशा वृद्धि को लेकर झूठा प्रचार किया जा रहा है।

विश्वविद्यालय ने इस बात को स्पष्ट किया कि वास्तविकता है कि सेवा शुल्क लगाया गया है जो अब तक शून्य था। विश्वविद्यालय बजट बरक़रार रहे इसलिए छात्रावास में सेवा शुल्क लगाया गया है। फ़िलहाल, विश्वविद्यालय भारी घाटे में है। बयान में इस बात पर ग़ौर करने के लिए कहा गया कि छात्रावास में रहने वाले करीब 6,000 छात्रों में से 5,371 को फैलोशिप या छात्रवृत्ति के रूप में आर्थिक मदद मिलती है। विश्वविद्यालय ने उस रिपोर्ट को भी ख़ारिज कर दिया कि इस वृद्धि से JNU में देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालयों के मुक़ाबले सबसे अधिक छात्रावास शुल्क है।

इस बीच, इंटर हॉल प्रशासन के सहायक रजिस्ट्रार ने बुधवार को छात्रावास में रहने वाले छात्रों पर मेस बकाए की सूची जारी की। इसके मुताबिक़ जुलाई से अक्टूबर के बीच 17 छात्रावासों में रह रहे छात्रों पर 2,79,33,874 रुपए का बकाया है। इस परिपत्र के बारे में पूछने पर डीन ऑफ स्टुडेंट्स उमेश कदम ने कहा कि छात्रावास मेस न हानि न लाभ के सिद्धांत पर चलते हैं। लेकिन जब तीन करोड़ रुपए बकाया हो तो इनका संचालन कैसे और कब तक होगा?

ग़ौरतलब है कि जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के सामान्य कामकाज को बहाल करने और हॉस्टल शुल्क वृद्धि पर तीन सप्ताह से अधिक समय से विरोध कर रहे छात्रों और प्रशासन के बीच मध्यस्थता बनाने के लिए सोमवार (18 नवंबर) को तीन सदस्यीय उच्चस्तरीय पैनल का गठन किया गया था।

दो घंटे से अधिक चली लंबी बैठक में, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय शिक्षक संघ (JNUTA) की कार्यकारी समिति ने पैनल को बताया कि जिस तरह से JNU को संचालित किया जा रहा है, उससे आने वाली समस्याओं का पता लगाना असंभव है, जबकि वर्तमान कुलपति अभी भी कार्यरत हैं।

यह पैनल, छात्रों के साथ दूसरी बैठक करने के लिए शुक्रवार को JNU परिसर का दौरा करेगा। HRD मंत्रालय में बुधवार को JNU छात्र संघ (JNUSU) के पदाधिकारियों, छात्र परामर्शदाताओं और छात्रावास अध्यक्षों के साथ पहली बैठक हुई थी।

हालाँकि, विश्वविद्यालय के शिक्षकों के एक वर्ग ने पैनल के गठन पर ख़ुशी नहीं जताई और कहा कि इससे मौजूदा स्थिति जटिल हो सकती है। JNUTA से अलग हुए शिक्षकों ने आरोप लगाया कि JNU शिक्षक संघ प्रदर्शनकारियों के साथ मिला हुआ है। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारी छात्रों ने फ़ीस वृद्धि के विरोध के दौरान 24 घंटे से अधिक समय तक प्रोफ़ेसर को बंधक बना रखा था।

इस बीच, छात्रों के आंदोलन को पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मीडिया सलाहकार संजय बारू का समर्थन मिला है। JNU छात्र संघ के पूर्व अध्यक्ष एन साई बालाजी ने एक वीडियो शेयर किया, जिसमें JNU के पूर्व छात्र बारू ने कहा, “ऐसे समय में जब लगभग हर साल हम विदेशों में पढ़ रहे भारतीयों पर लगभग छह बिलियन डॉलर खर्च कर रहे हैं, सार्वजनिक विश्वविद्यालयों को बचाना बेहद ज़रूरी है।”

उन्होंने कहा,

“जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय मानव संसाधन विकास मंत्रालय की रैंकिंग के अनुसार सर्वश्रेष्ठ सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में से एक है और यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि अच्छे छात्र सस्ती लागत पर अध्ययन कर सकें।”

बता दें कि हॉस्टल शुल्क में वृद्धि 11 नवंबर को की गई थी, जिसके विरोध में जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के हज़ारों छात्र पुलिस के साथ भिड़ गए। इससे मानव संसाधन विकास मंत्री रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में छह घंटे से अधिक समय तक फँसे रहे।

शिवसेना MLA अब्दुल सत्तार ने दी धमकी: कहा- विधायक फोड़ने वालों का सिर फोड़ देंगे

महाराष्ट्र में सरकार गठन पर पेंच अभी तक बरकरार है। मुख्यमंत्री पद को लेकर एनसीपी और शिवसेना में बात अटकी हुई है। एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार ने सरकार पर ‘अभी कुछ भी बताने लायक नहीं’ कह कर सस्पेंस और बढ़ा दिया है। हालाँकि, कॉन्ग्रेस ने शिवसेना के साथ सरकार गठन के लिए आगे बढ़ने को लेकर सहमति प्रदान कर दी है। लेकिन मुख्यमंत्री पद को लेकर अभी तक शिवसेना और एनसीपी में बात नहीं बन पाई है।

इस बीच शिवसेना के एकमात्र मुस्लिम विधायक अब्दुल सत्तार ने धमकी और चेतावनी देते हुए कहा, “कोई भी अगर शिवसेना के विधायक को फोड़ने की कोशिश करेगा तो हम उनका सिर फोड़ देंगे। इसके साथ-साथ उसका हाथ-पाँव भी तोड़ देंगे। लेकिन दवाखाने के लिए भी शिवसेना इंतजाम करेगी और उनके लिए एंबुलेंस भी तैयार रहेगी।” 

वहीं एक इंटरव्यू के दौरान जब उनसे पूछा गया कि ये चेतावनी है या फिर धमकी, तो उन्होंने कहा कि ये चेतावनी भी है और धमकी भी, क्योंकि शिवसेना के विधायकों को अगर कोई फोड़ना चाहता हो तो उसको चेतावनी देना शिवसेना का स्टाइल है। और शिवसेना सिर्फ चेतावनी नहीं देती है, वक्त आने पर शिवसेना ये सारी चीजे करने में कहीं पर कम नहीं पड़ती है।

इससे पहले आज कॉन्ग्रेस कार्यकारिणी की बैठक हुई, जिसमें शिवसेना के साथ महाराष्ट्र में गठबंधन के मुद्दे पर चर्चा की गई। बताया जा रहा है कि सीडब्ल्यूसी ने शिवसेना संग गठबंधन को हरी झंडी दे दी है। कार्यकारिणी की बैठक के बाद कॉन्ग्रेस महासचिव के सी वेणुगोपाल ने कहा कि उन्होंने सीडब्ल्यूसी को महाराष्ट्र की हालिया राजनीतिक स्थिति से अवगत कराया है। उन्होंने कहा कि एनसीपी से फिलहाल बात चल रही है।

उल्लेखनीय है कि इससे पहले शिवसेना के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय राउत ने भी बीजेपी पर हमला बोला था। राउत ने ट्वीट करते हुए कहा था, “हम बुरे ही ठीक हैं, जब अच्छे थे तब कौन सा मेडल मिल गया था।”

इसके अलावा एक अन्य ट्वीट में संजय राउत ने लिखा, “कभी-कभी कुछ रिश्तों से बाहर आ जाना ही अच्छा होता है। अहंकार के लिए नहीं… स्वाभिमान के लिए।”