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पाकिस्तानी महिला ने सरेआम छेड़ा एक मर्द को, किसी ने वीडियो बना करवाया गिरफ़्तार: Video Viral

सऊदी अधिकारियों ने मंगलवार (19 नवंबर) को जेद्दा के कॉर्निश में एक पुरुष को “मौखिक रूप से परेशान करने वाली” पाकिस्तानी मूल की महिला को गिरफ़्तार किया है।

दरअसल, महिला एक कार की पिछली सीट पर बैठी हुई थी और शायद इलेक्ट्रॉनिक सिगरेट पी रही थी। तभी किसी ने कार की खिड़की से पुरुषों को हूटिंग करने का वीडियो बनाकर उसे सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया। घटना का यह वीडियो ट्विटर पर तेज़ी से वायरल हो रहा है।

सऊदी अरब की Okaz न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक़, प्रतिवादी और उसके साथ जो लोग सऊदी भाषा में संवाद करते दिखाई दिए। वहीं, पुलिस का कहना है कि महिला पाकिस्तानी मूल की है और ब्यूटीशियन के रूप में काम करती है।

वायरल हुए वीडियो में, महिला को अरबी भाषा में बोलते हुए सुना और देखा जा सकता है। इसमें वो यह कहती हुई नज़र आती है, “अगर उसका अबाया सुंदर होता, तो मैं उसके साथ छेड़खानी करती।”

Okaz न्यूज़ एजेंसी से बात करने वाले सूत्रो ने कहा कि वीडियो वायरल होने की वजह से महिला और उसके साथी मदीना भाग गए। लेकिन, उन्हें वहाँ पर गिरफ़्तार कर जेद्दाह में क़ानूनी अधिकारियों को रेफ़र कर दिया गया। जानकारी के अनुसार, गिरफ़्तारी से पहले ट्विटर पर एक और वीडियो वायरल हो गया। इसमें महिला ने रोते हुए माफ़ी माँगी और कहा कि उसका इरादा किसी को आहत करने का नहीं था।

सऊदी में इस वीडियो पर लोगों ने तमाम नाराज़गी भरी प्रतिक्रिया दी। लोगों ने इस बात को लेकर संतोष जताया कि महिला के ख़िलाफ़ कार्रवाई की गई क्योंकि उसने सऊदी शासन के नियमों का उल्लंघन किया था।

शंकराचार्य की चिट्ठी के बाद फिरोज काण्ड पर हरकत में आया PMO: छात्रों ने किया VC का पुतला दहन

बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में छात्रों ने वाईस चांसलर का पुतला दहन किया। जेएनयू के प्रोफेसर रहे राकेश भटनागर फ़िलहाल बीएचयू के वीसी हैं। बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी के ‘धर्म विज्ञान संकाय (SVDV)’ में फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को लेकर छात्र नाराज़ हैं और लगातार विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। इसी क्रम में कई छात्रों ने वीसी का पुतला-दहन किया। इन छात्रों में मृत्युंजय तिवारी आजाद, अभिषेक सिंह, अभिषेक त्रिपाठी, अवनींद्र राय, दिलीप मोरिया, आलोक सिंह, प्रवीण सिंह और अंशुमान द्विवेदी सहित सैकड़ों छात्र सम्मिलित हुए।

मामला अब सिर्फ़ फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को ग़लत बताने का नहीं है बल्कि इसकी आँच अब अन्य विभागों में हुई नियुक्तियों में भी पहुँच गई है। वीसी का पुतला-दहन करने वाले छात्रों ने आरोप लगाया कि कई अन्य विभायों में भी इसी तरह अयोग्य नियुक्तियाँ की गई हैं, जिनकी जाँच होनी चाहिए। उनका आरोप था कि फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति की आड़ में वीसी अन्य अयोग्य नियुक्तियों को दबाने का प्रयास कर रहे हैं। पुतला-दहन यूनिवर्सिटी के सिंहद्वार पर किया गया।

अब इस मामले की गूँज प्रधानमंत्री तक पहुँच गई है क्योंकि प्रधानमंत्री कार्यालय ने इस सम्बन्ध में रिपोर्ट तलब की है। पीएमओ ने इस पूरे बवाल को लेकर प्रशासन से रिपोर्ट माँगी। आनन-फानन में मंडलाधिकारी दीपक अग्रवाल ने विदेश दौरे पर होने के बावजूद पीएमओ को रिपोर्ट भेजी। अब प्रशासन एक विस्तृत रिपोर्ट तैयार कर रहा है, जिसे प्रधानमंत्री कार्यालय को भेजा जाएगा। छात्रों ने आरोप लगाया है कि कई विभागों में अयोग्य नियुक्तियों के जरिए विश्वविद्यालय को बदनाम करने की कोशिश की जा रही है।

उधर गुरुवार (नवंबर 21, 2019) को स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने छात्रों को अपना समर्थन दिया। VC राकेश भटनागर के आवास के बाहर जारी धरने के दौरान वहाँ पहुँच कर उन्होंने छात्रों को सम्बोधित भी किया। उन्होंने कहा कि मालवीय जी ने जिस विभाग की स्थापना हिन्दुओं के लिए की थी, उसमे ग़ैर-हिन्दुओं की नियुक्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि शब्दों को पढ़ लेना और उसे अनुभव करना, ये दो अलग-अलग चीजें हैं। शंकराचार्य ने भी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख कर फ़िरोज़ ख़ान की नियुक्ति को धर्म के मान-बिंदुओं के विपरीत करार दिया।

शंकराचार्य ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिख छात्रों का समर्थन किया

छात्रों ने कल प्रशासन को अपना माँग पत्र सौंपते हुए कई सवालों का विश्वविद्यालय प्रशासन से जवाब माँगा है। जिसे लेकर देर रात SVDV के संकाय प्रमुख, अन्य विभागाध्यक्षों और VC के बीच मीटिंग चली लेकिन किसी भी नतीजे पर नहीं पहुँचा गया। इस बीच खबर ये भी है SVDV के छात्रों पर दबाव बनाने के लिए विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे शशिकांत मिश्रा, शुभम और कृष्णा को प्रशासन ने धरनास्थल से हटाने का प्रयास किया। इसके बावजूद छात्रों का प्रदर्शन जारी है।

नाबालिग लड़की के साथ ज़ीशान ने रेप भी किया, केरोसिन डाल जलाया भी: बचाने के लिए लाया गया दिल्ली

उत्तर प्रदेश के संभल से दिल दहला देने वाली ख़बर आई है। एक नाबालिग लड़की के साथ उसके पड़ोसी ने ही बलात्कार किया। इसके बाद उसने पीड़िता को जला कर मार डालने की कोशिश की। गुरुवार (नवंबर 21, 2019) को रात में हुई इस घटना के बाद पीड़िता का शरीर बुरी तरह झुलस गया है। उसे दिल्ली स्थित सफदरगंज अस्पताल रेफर कर दिया गया है। नखासा पुलिस थानांतर्गत आने वाले क्षेत्र में ये घटना तब हुई, जब नाबालिग लड़की अपने घर में अकेले थी।

एएसपी आलोक जायसवाल ने बताया कि लड़की को घर में अकेला पाकर ज़ीशान उसके घर में घुस गया और उसके साथ बलात्कार किया। इसके बाद उसने केरोसिन तेल डाल कर लड़की को जला कर मार डालने की कोशिश की। इसके बाद लड़की को आनन-फानन में जिला अस्पताल ले जाया गया, जहाँ से उसे दिल्ली रेफर कर दिया गया। पुलिस ने आरोपित ज़ीशान को गिरफ़्तार कर लिया है।

पीड़िता के परिवार वालों ने आरोपित के ख़िलाफ़ मामला दर्ज कराया। इसके बाद पुलिस ने ज़ीशान को गिरफ़्तार कर लिया। पुलिस मामले की जाँच कर रही है। डॉक्टरों ने बताया कि पीड़िता के शरीर का 70% हिस्सा जल गया है। आरोपित के ख़िलाफ़ रासुका के तहत कार्रवाई की जाएगी।

छात्रों का अधिकार और दोमुँहापन: FTII और JNU के वाम मजहब के छात्र Vs BHU के विद्यार्थी

“अगर किसी व्यक्ति की तनख्वाह बात को ना समझने पर निर्भर हो तो उसे वही बात समझा पाना कठिन होगा!” ऐसा मैं नहीं कहता, ये किसी सिनक्लैर साहब ने कहा था। अब सोचिए कि जिस न्यूज़ एंकर (पत्रकार या संवाददाता नहीं) की पूरी टीआरपी अगर किसी समुदाय पर धौंस जमाने, किसी “ब्राह्मणवाद” को कोसने, और किसी ख़ास आयातित विचारधारा को प्रचारित करने पर टिकी हो, तो समझना छोड़िए, वो भला सुने भी क्यों? बता दें कि यहाँ पर सवाल संस्कृत की शिक्षा का है ही नहीं, बल्कि सवाल धर्म विज्ञान पढ़ाने का है, मगर इससे उसे क्या लेना देना? उसे तो बस अपना खुद का एक कथानक गढ़ना है, जिसमें वैसे भी प्रथम दृष्टया ही कई छेद नजर आ जाते हैं।

बात अगर सिर्फ छात्रों के विरोध पर किसी शिक्षण संस्थान से जुड़े व्यक्ति को हटाने या ना हटाने की हो, तो हाल में ही जेएनयू की दीवारों और दफ्तरों के दरवाजे इत्यादि पर लिखा “वीसी गो बैक” (कई असंसदीय शब्दों के साथ) याद आ जाता है। कुछ वर्षों से टीवी पर विवादों को देखा-सुना हो तो संभवतः हाल का ही एफटीआईआई विवाद भी याद आ जाएगा। जून 2015 में जब गजेन्द्र चौहान की वहाँ चेयरमैन के तौर पर नियुक्ति हुई, तो वाम मजहब के युवा मोर्चे एआईएसए के (तथाकथित) छात्रों ने लंबा विरोध किया। कई फ़िल्मी अभिनेता और नेता भी उस वक्त समर्थन और विरोध में उतरे थे। आखिर गजेन्द्र चौहान को बदला गया था। क्या ये पूछा जाए कि अगर गजेन्द्र चौहान के मामले में ये तय किया जा सकता है, तो आखिर बीएचयू में छात्रों को ये अधिकार क्यों नहीं होना चाहिए?

अगर मामला सिर्फ विचारधारा के आधार पर किसी के समर्थन और किसी के विरोध का है, और जेएनयू एवं एफटीआईआई जैसे संस्थानों के वाम मजहब के छात्र “शिक्षा का भगवाकरण” कहकर किसी नियुक्ति का विरोध कर सकते हैं, तो वही अधिकार आखिर बीएचयू के छात्रों को क्यों नहीं मिलना चाहिए? समस्या की जड़ में यही दोमुँहापन है। ये मान लिया जाता है कि एक ख़ास आयातित विचारधारा का विरोध तो अधिकार है, मगर कोई और विरोध करे तो उसे “गुंडागर्दी” कहकर सिरे से ख़ारिज किया जा सकता है। ये वो जहरीली विचारधारा है जिसने दशकों की मेहनत से विश्वविद्यालयों और पत्रकारिता के संस्थानों पर कब्जा जमाया है।

ये रणनीति कभी दशकों पहले पूर्णचंद जोशी (पीसी जोशी) ने बनाई थी। किसी दौर में वो कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया थे। बाद के दौर में स्थितियाँ बदली। जब दूसरा विश्वयुद्ध शुरू हुआ तो युद्ध का विरोध करने के कारण भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी पर प्रतिबन्ध लगा दिया गया था। बाद में जब स्टालिन और हिटलर दोस्त नहीं रहे, यानी जर्मनी ने सोवियत रूस पर हमला कर दिया तो भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी को आदेश आया कि ये युद्ध तो फासीवाद के खिलाफ है! फिर क्या था भारतीय कम्युनिस्ट भी “हम लड़ेंगे साथी” कहते हुए कूद पड़े! इस दौर में भी पीसी जोशी ही भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी के मुखिया थे और उस समय भी ये कॉन्ग्रेस के समर्थक और नेहरु के करीबी थे।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी ने 1942 के भारतीय स्वतंत्रता के प्रयासों से तो दूरी बनाई, मगर अब तक पीसी जोशी को समझ में आने लगा था कि आगे के लिए अपने पास समर्थक बनाए रखने और नए समर्थक जुटाने के लिए प्रचार तंत्र यानी अख़बारों, और नई फसल यानी विश्वविद्यालयों पर कब्जा ज़माना जरूरी है। कम्युनिस्ट पार्टी के 1938 में “नेशनल फ्रंट” शुरू करने पर वो इसके एडिटर भी थे और आजादी के बाद उन्हें पार्टी के साप्ताहिक “न्यू ऐज” का संपादक भी बनाया गया था। खुद पत्रिकाओं और अख़बारों से जुड़े होने के अलावा कम्युनिस्टों के नाजियों से शुरुआती रिश्तों की वजह से भी उन्हें प्रचार के तरीकों पर कब्जा जमाने के फायदों की अच्छी समझ थी।

बाद में जब मोस्को के आदेशों की वजह से भारतीय कम्युनिस्टों ने हथियार उठाकर भारत के खिलाफ बगावत का फैसला किया तो पीसी जोशी से मुखिया का पद छिन गया। पार्टी प्रमुख के पद से 1948 में हटाए जाने के बाद उन्हें जनवरी 1949 में पार्टी से भी निष्कासित कर दिया गया। कम्युनिस्टों के लिए ये उनके बड़े नारों में से एक “ये आजादी झूठी है” का दौर रहा। बाद में पीसी जोशी को वापस पार्टी में लिया तो गया मगर वो फिर नेतृत्व के पदों पर कभी नहीं आए। उन्हें “न्यू ऐज” के संपादक का काम दिया गया था। अपने दौर में ही पीसी जोशी प्रोग्रेसिव राइटर्स एसोसिएशन और ऑल इंडिया स्टूडेंट्स एसोसिएशन (एआईएसए) जैसे संगठन बना चुके थे।

उनका दौर बीतने पर भी कभी इनका काम रुका नहीं। ये एक स्थापित तथ्य है कि ग्राम्सकी की हेगेमोनी के सिद्धांतों का पीसी जोशी ने बखूबी इस्तेमाल किया था। उनके शुरू किए काम को आयातित विचारधारा को मानने वालों ने सात दशकों से जारी रखा है। इसका नतीजा ये है जो हम आज अपने सामने देखते हैं। सीधे तौर पर बौद्धिक कहे जा सकने वाले (लेखन आदि) या उससे जुड़े व्यवसायों में ये पैठ ऊँचे स्तर पर काफी ज्यादा है। ऊँचे पद ऐसे लोगों के हाथ में होने के कारण निचले पदों पर काम करने वाला अगर जानता भी हो कि उसे जो करने कहा जा रहा वो नैतिक रूप से गलत है, तब भी कई बार उसे चुप्पी साधनी पड़ती है।

इसे ऐसे भी समझ सकते हैं कि संपादक के आदेश पर पत्रकार को लेख बदलना पड़ता है। ये हमें वापस अपने शुरुआती वाक्य “अगर किसी व्यक्ति की तनख्वाह बात को ना समझने पर निर्भर हो तो उसे वही बात समझा पाना कठिन होगा!” पर ले आता है। युद्ध में किसी सेना का एक जगह से किसी दूसरी जगह जाना देखें तो भी संवाद और संचार का महत्व समझ में आ जाएगा। सबसे पहले कम्युनिकेशन यानी संचार का विभाग जाकर काम करना शुरू करता है, बाकी की सेना, तोपों से लेकर रसद और दूसरे विभाग, धीरे-धीरे आते रहते हैं।

बाकी हमारे संचार के माध्यमों पर नाजियों के पोलैंड पर हमले वाले, पुराने (1930 के दशक वाले) दौर के दोस्तों यानी कॉमरेडों के अवैध कब्जे का नुकसान कैसे हुआ है, इस पर भी सोचिएगा। फ़िलहाल सोचने पर जीएसटी नहीं लगता!

कश्मीर में हिज्बुल-लश्कर के धमकी भरे पोस्टर्स से लोगों में डर का माहौल: नहीं खोल रहे दुकानें

जम्मू-कश्मीर में आर्टिकल 370 के निरस्त हो जाने और सामान्य जिंदगी बहाल होने के बाद आतंकी बौखला गए हैं। लोगों द्वारा अपने हुक्म का पालन न होने से बौखलाए आतंकियों ने एक बार फिर से धमकी भरे पोस्टर चिपकाकर लोगों को डराने की कोशिश की। आतंकियों ने बुधवार (नवंबर 20, 2019) देर रात श्रीनगर सहित कई जगहों पर धमकी भरे पोस्टर लगा दिए। इन पोस्टरों में आतंकियों ने बंद का फरमान न मानने वालों को कौम व इस्लाम का दुश्मन करार देते हुए उन्हें गंभीर परिणाम भुगतने की धमकी दी।

जिसके बाद घाटी में भय का माहौल है। गुरुवार (नवंबर 21, 2019) को पूरे दिन दुकानें बंद रहीं, यातायात भी ठप रहा। राज्य परिवहन की बसें भी सड़कों पर नहीं दिखाई दीं। बताया जा रहा है कि आतंकी संगठन हिजबुल मुजाहिद्दीन और लश्कर-ए-तैयबा द्वारा जारी पोस्टर श्रीनगर के डाउन-टाउन, जकूरा और गांदरबल व अनंतनाग जिले में कई जगह दीवारों-खंभों पर चिपका दिए हैं। इससे इन इलाकों में बुधवार को दुकानें और व्यापारिक प्रतिष्ठान दिन भर बंद रहे और वाहनों की आवाजाही भी नाममात्र रही। इसके साथ ही बुधवार रात को असामाजिक तत्वों ने चार दुकानों, एक गाड़ी के अलावा कई ठेलों में आग भी लगा दी थी।

अधिकारियों ने बताया कि पिछले कुछ हफ्ते से दुकानदार सुबह के वक्त अपनी दुकानें खोल रहे थे, लेकिन चेतावनी के बाद उन्होंने सुबह दुकानें नहीं खोलीं। अधिकारियों का कहना है कि मध्य कश्मीर में श्रीनगर और गंदेरबल जिलों, दक्षिण कश्मीर में अनंतनाग, कुलगाम, पुलवामा और शोपियां जिलों और उत्तर में कुछ जिलों में बंद बुलाया गया है, जिसकी वजह से सड़कों पर सन्नाटा पसरा रहा।

पुलिस ने बताया है कि हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ केस दर्ज किया गया है और जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा। श्रीनगर जिला मजिस्ट्रेट शाहिद इकबाल चौधरी ने असामाजिक तत्वों को गुरुवार को कड़ी चेतावनी जारी की और लोगों से अपील की कि वे इस तरह की कोई भी घटना होने पर फौरन पुलिस को सूचित करें। 

श्रीनगर स्थित पुलिस नियंत्रण कक्ष में मौजूद एक अधिकारी ने बताया कि बुधवार को डाउन-टाउन और गांदरबल के अलावा अनंतनाग में कुछ हद तक बंद का असर रहा। उन्होंने बताया कि शरारती तत्वों द्वारा गड़बड़ी किए जाने की आशंका को देखते हुए पूरी वादी में सुरक्षा का कड़ा बंदोबस्त किया था। देर शाम तक किसी भी जगह पर अप्रिय घटना की सूचना नहीं है।

हाजीपुर जंक्शन, सोनपुर मेले को बम से उड़ाने की धमकी: लिखा- जिहाद, पाक जिंदाबाद, शब्बीर को रिहा करो

बिहार के वैशाली के कलेक्ट्रेट परिसर के दीवार पर पर्चा चस्पा कर सोनपुर मेला और हाजीपुर रेलवे स्टेशन उड़ाने की धमकी दिए जाने के बाद प्रशासनिक हलके में सनसनी फैल गई। इसके बाद नगर थाना पुलिस, हाजीपुर जीआरपी और आरपीएफ ने संयुक्त जाँच अभियान शुरू कर दिया।

बता दें कि समाहरणालय की दीवार पर चस्पा किए गए पर्ची पर लिखा था, “जिहाद, जिहाद, जिहाद, पाकिस्तान जिंदाबाद, मो शब्बीर को रिहा करो, नहीं तो हाजीपुर स्टेशन और सोनपुर मेला को तीन दिनों के अंदर बम से उड़ा दूँगा।” इस पोस्टर पर मोहम्मद शब्बीर का फोटो भी लगा हुआ है और साथ ही पोस्टर के निचले हिस्से में दो मोबाइल नंबर भी दिया गया है।

वायरल हुआ धमकी भरा पर्चा

जानकारी के मुताबिक समाहरणालय पर लगे इस पोस्टर को एक छात्र ने देखा और इससे सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया। पोस्टर के वायरल होते ही प्रशासन में हड़कंप मंच गया। सदर एसडीपीओ राघव दयाल का कहना है कि समाहरणालय गेट या फिर हाजीपुर स्टेशन पर जाँच के दौरान कोई पर्चा चिपका हुआ नहीं मिला है। हालाँकि मामले को गंभीरता से लेते हुए जीआरपी को इसकी सूचना दे दी गई है। उन्होंने बताया कि हाजीपुर स्टेशन पर सघन चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है।

बता दें कि मोहम्मद शब्‍बीर अहमद बिहार में आतंकवाद का स्‍लीपर सेल चलाने वाला एक मदरसा संचालक है। उस पर मोहम्मद खालिद नाम के एक बच्चे को अगवा कर आतंकी बनाने का आरोप है। शब्‍बीर 9 सितंबर को खालिद को लेकर लापता हो गया था। हालाँकि बाद में पुलिस ने उसे मुंबई में गिरफ्तार किया था।

इसी शब्बीर की रिहाई को लेकर सोनपुर मेला और हाजीपुर रेलवे स्टेशन उड़ाने की धमकी दी जा रही है। सदर एसडीपीओ राघव दयाल के निर्देश पर नगर थाने के एसआई रामशंकर सिंह, आरपीएफ थानाध्यक्ष राणा सिंह, जीआरपी थानाध्यक्ष सिहेंश सिंह के साथ बड़ी संख्या में महिला और पुरुष पुलिस जवानों ने हाजीपुर जंक्शन पर विशेष जाँच अभियान शुरू कर दिया है। पोस्टर पर दिए गए नंबर के आधार पर भी पुलिस मामले की जाँच कर रही है।

हाजीपुर स्टेशन की सभी प्लेटफार्म, रेल ट्रैक, सर्कुलेटिंग एरिया, वेटिंग हॉल, शौचालय, पूछताछ काउंटर, रिजर्वेशन काउंटर आदि के अलावा यात्रियों के सामानों की मेटल डिटेक्टर से जाँच की जा रही है, स्टेशन पर आने-जाने वाले लोगों की भी सघन तलाशी ली जा रही है।

हाजीपुर जंक्शन पर सघन जाँच अभियान के दौरान आरपीएफ व जीआरपी के पदाधिकारी रेल यात्रियों से किसी भी संदिग्ध गतिविधि या लावारिस वस्तु पर नजर पड़ने पर इसकी सूचना तुरंत प्रशासन को देने की अपील भी कर रहे हैं। इसके साथ ही उन्होंने यात्रियों से लावारिस वस्तुओं से दूर रहने तथा किसी भी तरह की अफवाह पर ध्यान ना देते हुए, इसकी सूचना तुरंत आरपीएफ और जीआरपी को देने की भी अपील की है। लोगों से सतर्क रहने की अपील करते हुए पुलिस ये पता करने में जुटी है कि ये किसी की शरारत है या फिर वाकई कोई आतंकी धमकी।

‘आदित्य नहीं, उद्धव ठाकरे बनेंगे महाराष्ट्र के CM’: कॉन्ग्रेस ने कहा- हमारा समर्थन शिवसेना को

मीडिया में आ रही ख़बरों के अनुसार एनसीपी और कॉन्ग्रेस नहीं चाहते हैं कि आदित्य ठाकरे मुख्यमंत्री बने। शिवसेना प्रमुख के निवास स्थान मातोश्री के आगे भी पहले आदित्य ठाकरे को मुख्यमंत्री बनाए जाने सम्बन्धी पोस्टर लगे हुए थे, जिसे बाद में हटा लिया गया था। शुक्रवार (नवंबर 22, 2019) को उद्धव ठाकरे और आदित्य ठाकरे के साथ एनसीपी के मुखिया शरद पवार की बैठक हुई। मीडिया रिपोर्ट्स में सूत्रों के हवाले से कहा जा रहा है कि शरद पवार ने इस दौरान उद्धव को सीएम बनने को कहा। पवार ने कहा कि उद्धव अनुभवी हैं और गठबंधन सरकार में उनके मुख्यमंत्री बनने से आपसी सहमति का भाव बना रहेगा

चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद जब मीडिया द्वारा उद्धव से आदित्य को मुख्यमंत्री बनाने की बात कही गई, तब उन्होंने जवाब दिया- ‘आपके मुँह में घी-शक्कर।‘ इससे अंदाज़ा लगाया जा रहा था कि शिवसेना आदित्य को ही मुख्यमंत्री बनाना चाहती है और इसीलिए उन्हें वर्ली से विधानसभा चुनाव भी लड़ाया गया। वह ठाकरे परिवार से चुनाव लड़ने वाले पहले व्यक्ति हैं। लेकिन, एनसीपी और कॉन्ग्रेस की राय के बाद अब शिवसेना को आदित्य को सीएम बनाने के प्रयासों को धक्का लगा है और यह तय माना जा रहा है कि सेहरा उद्धव के सिर ही सजेगा।

उधर शिवसेना सांसद संजय राउत ने भी इस बात की लगभग पुष्टि कर दी है। उनसे जब पूछा गया कि क्या शरद पवार उद्धव को मुख्यमंत्री बनाना चाहते हैं, तो उन्होंने कहा कि ये सूचना ग़लत है। साथ ही राउत ने कहा कि महाराष्ट्र की जनता उद्धव ठाकरे को मुख्यमंत्री बनते देखना चाहती है। पूर्व मुख्यमंत्री और कॉन्ग्रेस के वरिष्ठ नेता पृथ्वीराज चौहान ने कहा कि देवेंद्र फडणवीस के ख़राब शासन का अंत करने के लिए शिवसेना का समर्थन करना ज़रूरी था। उन्होंने बताया कि उनकी पार्टी ने शिवसेना को समर्थन देने का निर्णय लिया है।

संजय राउत ने बताया कि शनिवार को तीनों पार्टी के विधायकों के हस्ताक्षर वाला समर्थन-पत्र राज्यपाल को सौंप दिया जाएगा। राउत ने कहा कि मुख्यमंत्री तो क्या, अगर अब देवराज इंद्र का पद भी ऑफर किया जाता है तो उनकी पार्टी भाजपा के साथ नहीं जाएगी। उद्धव ठाकरे को 2003 में शिवसेना का कार्यकारी अध्यक्ष बनाया गया था और अगर वो मुख्यमंत्री बनते हैं कि संगठनात्मक पदों के अलावा राजनीति में पहला ऐसा पद होगा, जिस पर वो काबिज होंगे।

‘सेक्युलरिज़्म’ शब्द पर अटकी महाराष्ट्र की राजनीति! NCP-कॉन्ग्रेस ने डाला CMP में, अब शिवसेना की बारी

पवार क्या कहते हैं यह समझने के लिए 100 जन्म लेने पड़ेंगे: शिवसेना

हम सब के PM हैं नरेंद्र मोदी, उनसे मिलने का मतलब ये थोड़े है कि खिचड़ी पक रही: शिवसेना सांसद संजय राउत

14 और 17 साल की बहनों का गन्ने के खेत में गैंगरेप: वसीम, सावेज अखलाक, आरिफ, आमिर ने किया Video Viral

उत्तर प्रदेश के बरेली जिले के एक गाँव में दो नाबालिग बहनों के साथ सामूहिक दुष्कर्म कर वीडियो वायरल करने का एक घिनौना मामला सामने आया है। जानकारी के मुताबिक लड़कियों की उम्र 14 और 17 साल है। दोनों बहनें 17 नवंबर को अपने घर से दवा लेने के लिए निकली थीं। लेकिन जब घर आने लगीं तो एक लड़के ने उन्हें तमंचा दिखाकर रास्ते में रोक लिया और फिर गन्ने के खेत में मौजूद अपने साथियों के पास उन्हें खींचकर ले गया। जहाँ 5 लोगों ने मिलकर उन दोनों बहनों का बारी-बारी से बलात्कार किया। दोनों बहनें गिड़गिड़ाती रहीं, लेकिन उनमें से किसी ने एक नहीं सुनी। इतना ही नहीं लड़कियों के विरोध करने पर उनसे मारपीट भी की गई और इस दौरान इनका वीडियो भी बनाया गया।

हालाँकि, ये वीडियो पहले दोनों बहनों को ब्लैकमेल करने के लिए बनाया गया था और उनसे कहा गया था कि वे पाँचों जब भी उन्हें बुलाएँ तो उन्हें आना होगा। लेकिन, जब लड़कियों ने घटना के दो दिन उनकी ये बात नहीं मानी तो गुरुवार को उनका वीडियो वायरल कर दिया गया। धीरे-धीरे पूरे इलाके में इस वीडियो को देख हड़कंप मच गया और लड़कियों के घरवालों के पास भी ये वीडियो पहुँच गया। वीडियों में लड़कियों को देखकर घरवाले सन्न रह गए। उन्होंने बच्चियों से सारा मामला पता किया। घटना की जानकारी मिलते ही घरवालों ने ये मामला पुलिस में दर्ज करवाया और पुलिस ने आरोपितों की तलाश की।

दैनिक जागरण की रिपोर्ट के अनुसार इन आरोपितों की पहचान वसीम पुत्र यासीन, सावेज पुत्र हामिद रजा खां, अखलाक पुत्र इकरार खां, आरिफ पुत्र भदय्या खां, आमिर पुत्र घसीटे खां के रूप में हुई है। जिसके बाद पुलिस ने इन पर सामूहिक दुष्कर्म (376डी), आपराधिक घटना के लिए धमकी देना (506), पॉक्सो एक्ट (3/4), 67ए आइटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है।

इलाके के एसएसपी शैलेश पांडेय ने इस मामले में जानकारी देते हुए बताया है कि सामूहिक दुष्कर्म (376डी), आपराधिक घटना के लिए धमकी देना (506), पॉक्सो एक्ट (3/4), 67ए आइटी एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है।

5 साल की बच्ची का बेहोश होने तक रेप किया, जब मर गई तो फेंक दिया: मोहम्मद रफी गिरफ्तार

मो. सोनू ने किया नाबालिग का रेप, लोगों ने घेरा तो हथियारों से लैस अब्बू व गैंग भगा कर ले गया

कराची: कब्र खोद कर निकाल ली महिला की लाश और किया गैंगरेप, आरोपित फरार

मैं बनूँगा ये मंत्री, वो बनेगा वो मंत्री… सरकार गठन से पहले ही कॉन्ग्रेसी नेताओं ने शुरू कर दी लॉबिंग

महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद वहाँ की राजनीति में चल रही उठा-पटक अब थमने के कगार पर है। खबर है कि कल देर रात एनसीपी प्रमुख शरद पवार के घर पर शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे और उनके विधायक बेटे आदित्य ठाकरे के साथ बैठक के बाद समीकरण की सारी तस्वीर साफ हो गई। कॉन्ग्रेस और एनसीपी ने 2 दिनों तक मंथन के बाद साफ कर दिया कि वे शिवसेना के साथ आपसी सहमति पर सरकार बनाने के लिए राजी हैं।

अब कहा जा रहा है कि आज यानी शुक्रवार को इन तीनों दलों की इस मामले पर अंतिम बैठक के बाद 48 घंटे के भीतर प्रदेश में सरकार का गठन का ऐलान हो सकता है। क्योंकि इससे पहले कॉन्ग्रेस वर्किंग कमिटी ने एनसीपी और शिवसेना के साथ मिलकर प्रदेश में सरकार गठन को लेकर अपनी हरी झंडी दे दी है।

वहीं, प्राप्त जानकारी के अनुसार कॉन्ग्रेस की तरफ से आज होने वाली बैठक में पार्टी के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल, मल्लिकार्जुन खड़गे और केसी वेणुगोपाल का मुंबई जाना तय हुआ है। जहाँ ये तीनों नेता शिवसेना नेतृत्व और एनसीपी नेताओं के साथ मीटिंग करेंगे। और फिर सरकार गठन का औपचारिक ऐलान हो सकता है।

गौरतलब है कि कॉन्ग्रेस-एनसीपी के खिलाफ़ भाजपा के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरने वाली शिवसेना अब जब अपने प्रतिद्वंदियों के साथ ही गठबंधन कर सरकार बनाने को तैयार है, और लंबे समय तक सोच विचार करने के बाद सोनिया गाँधी भी इसके लिए मान गई हैं। लेकिन इस बीच कॉन्ग्रेस के छोटे नेता (राज्य स्तरीय नेता) प्रदेश में अपनी पार्टी की सरकार बनते देख कर खुद को मंत्री बनाने के लिए लॉबिंग में जुट गए हैं। विधायक से मंत्री बनने तक की चाहत में इन नेताओं की तरह-तरह बयानबाजी इन दिनों सामने आ रही है।

मीडिया रिपोर्ट्स (सूत्रों के अनुसार ही सही) की बात करें तो में बताया जा रहा है कि इस गठबंधन में मुख्यमंत्री शिवसेना का बनेगा। जबकि एनसीपी और कॉन्ग्रेस के खाते में उपमुख्यमंत्री पद आएगा, जिसके लिए अजीत पवार और बालासाहेब थोराट का नाम फिलहाल सबसे आगे चल रहा है। जानकारी के अनुसार विधानसभा स्पीकर पद कॉन्ग्रेस को मिलने के आसार हैं, जबकि मंत्रालयों का बँटवारा पार्टी की संख्या के आधार पर होगा।

जनसत्ता की रिपोर्ट के अनुसार एक वरिष्ठ नेता ने दलों के बँटवारे के बारे में बात करते हुए बताया कि शिवसेना और एनसीपी को लगभग बराबर की हिस्सेदारी सत्ता में मिलेगी, लेकिन कॉन्ग्रेस को कुछ कम में संतोष करना पड़ेगा। वहीं, ये भी कहा जा रहा है कि एनसीपी अभी भी रोटेशन के आधार पर मुख्यमंत्री पद की माँग कर रही हैं। जबकि दूसरे नेता ने कहा है कि ये मामला अब पूरी तरह साफ है।

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‘राम-कृष्ण पूर्वज हैं तो इतिहास में क्यों नहीं पढ़ाया जाता’ – AAP नेता की विवादित टिप्पणी

आम आदमी पार्टी के नेता राजेंद्र पाल गौतम ने भगवान राम और कृष्ण को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। उन्होंने ट्वीट करते हुए कहा कि राम और कृष्ण अगर पूर्वज हैं तो इतिहास में पढ़ाया क्यों नहीं जाता। पूर्वजों का कोई इतिहास होता है, जबकि इनका कोई प्रमाणिक इतिहास नहीं है। केजरीवाल सरकार में मंत्री राजेंद्र पाल इतने पर ही नहीं रुके। इसके आगे उन्होंने कहा कि यह पौराणिक कथाएँ हैं, ऐतिहासिक नहीं। जबकि पेरियार का दृष्टिकोण प्रमाणिकता और तार्किकता के आधार पर था। बता दें कि उन्होंने यह सवाल योगगुरु बाबा रामदेव के एक ट्वीट के जवाब में पूछा।

हालाँकि, आम आदमी पार्टी नेता राजेंद्र पाल गौतम ने अपना यह ट्वीट डिलीट कर दिया है, और एक अन्य ट्वीट करते हुए बताया कि किसी ने उनके ट्विटर हैंडल का दुरुपयोग या हैक किया और चुनाव के समय पार्टी (आप) को नुक़सान पहुँचाने के लिए धार्मिक प्रतीकों पर कुछ ट्वीट किया है। उन्होंने कहा कि हमारे लिए सभी धर्म बराबर हैं, हम सभी धर्मों का सम्मान करते हैं।

इससे पहले एक ट्वीट में, योग गुरु रामदेव बाबा ने कहा था कि जो कोई भी अपने पूर्वजों भगवान राम और भगवान कृष्ण का सम्मान करेगा, वे उनका बचाव करेंगे। डॉ भीमराव अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले और अन्य नेताओं का हवाला देते हुए उन्होंने कहा था कि वह उनका बहुत सम्मान करते हैं। लेकिन, प्रसिद्ध समाजवादी और ‘फादर ऑफ़ द द्रविड़ियन आंदोलन’ पेरियार की विचारधारा पौराणिक कथाओं के ख़िलाफ़ थी, जिससे कोई सहमत नहीं हो सकता।

जानकारी के अनुसार, पेरियार पर रामदेव बाबा के बयानों पर डीएमके प्रमुख एम के स्टालिन ने तीखा हमला किया। उन्होंने कहा कि वह ऐसी ताक़तों के ख़िलाफ़ द्रविड़ विचारधारा का बचाव करेंगे। तब रामदेव बाबा ने यह स्पष्ट किया कि उन्होंने प्रमुख दलित नेता बी आर अंबेडकर का अपमान नहीं किया बल्कि वो उनका सम्मान करते हैं।

वहीं, आप नेता राजेन्द्र पाल के बारे में बता दें कि वो केजरीवाल सरकार में समाज कल्याण, एससी/ एसटी, सहकारी गुरुद्वारा चुनाव मंत्रालय की ज़िम्मेदारी उठा चुके हैं। फ़िलहाल, वो दिल्ली की सीमापुरी विधानसभा से विधायक हैं। उनकी इस तरह की टिप्पणियाँ मुख्यमंत्री केजरीवाल के लिए एक नहीं बल्कि कई मुसीबतें खड़ी कर सकती हैं। 

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